विकसित भारत 2047 के सपने को साकार करने में अदाणी ग्रुप की बड़ी भूमिका, डॉ. प्रीति अदाणी ने इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स को बताया अहम


नई दिल्ली । भारत को वर्ष 2047 तक विकसित राष्ट्र बनाने के लक्ष्य को हासिल करने में बुनियादी ढांचे और ऊर्जा क्षेत्र की महत्वपूर्ण भूमिका होगी। अदाणी फाउंडेशन की चेयरपर्सन डॉ. प्रीति अदाणी ने सोमवार को वाराणसी में आयोजित विश्व संगोष्ठी में यह बात कही। उन्होंने कहा कि भारत के सामने गरीबी कुपोषण अशिक्षा और देश के अंतिम छोर तक बिजली जैसी बुनियादी सुविधाएं पहुंचाने की चुनौतियां अब भी मौजूद हैं। इन समस्याओं के समाधान के लिए सरकार के साथ उद्योग जगत को भी आगे आकर काम करना होगा। उनके मुताबिक अदाणी समूह बड़े पैमाने पर इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं के जरिए देश की विकास यात्रा में योगदान देने की दिशा में काम कर रहा है।

डॉ. प्रीति अदाणी वाराणसी में आयोजित आधुनिक चुनौतियों के लिए प्राचीन ज्ञान विषय पर विश्व संगोष्ठी को संबोधित कर रही थीं। इस दौरान उन्होंने भारतीय ज्ञान परंपरा और आधुनिक विकास के बीच संबंध पर भी विचार रखे। उन्होंने कहा कि भारत की प्राचीन परंपराओं में समाज के कल्याण और प्रकृति के साथ संतुलन बनाकर जीवन जीने पर जोर दिया गया है। आज के दौर में भी कारोबार और उद्योगों को इसी सोच के साथ आगे बढ़ने की जरूरत है। उनके अनुसार व्यवसायों को केवल मुनाफे तक सीमित नहीं रहना चाहिए बल्कि समाज और पर्यावरण के प्रति अपनी जिम्मेदारी भी निभानी चाहिए।

उन्होंने कहा कि व्यवसायों के संचालन में स्थिरता को केंद्र में रखना जरूरी है। स्वार्थ से पहले कर्तव्य को महत्व देने की भारतीय परंपरा आज भी प्रासंगिक है। डॉ. अदाणी ने योग का उदाहरण देते हुए कहा कि यह भारतीय ज्ञान परंपरा की वैश्विक स्वीकार्यता का बड़ा प्रतीक बन चुका है। योग शरीर और मन के बीच संतुलन स्थापित करने का संदेश देता है। इसी तरह मोटा अनाज यानी मिलेट्स भी भारतीय खानपान की पुरानी परंपरा का हिस्सा रहा है। आज दुनिया में इसे पोषण जलवायु अनुकूलता और खाद्य सुरक्षा के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

डॉ. प्रीति अदाणी ने सतत विकास के लिए अदाणी समूह की निवेश प्रतिबद्धता का भी उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि समूह ने ऊर्जा परिवर्तन से जुड़ी बुनियादी ढांचा परियोजनाओं में 100 अरब डॉलर से अधिक निवेश करने की प्रतिबद्धता जताई है। इसका उद्देश्य स्वच्छ ऊर्जा के उत्पादन और भविष्य की जरूरतों के अनुरूप ऊर्जा व्यवस्था को मजबूत करना है। उन्होंने गुजरात के खावड़ा में विकसित किए जा रहे नवीकरणीय ऊर्जा प्रोजेक्ट का विशेष रूप से जिक्र किया। यह परियोजना दुनिया का सबसे बड़ा रिन्यूएबल एनर्जी पार्क बनने की दिशा में आगे बढ़ रही है। इसकी प्रस्तावित क्षमता सौर और पवन ऊर्जा के माध्यम से 30 गीगावाट बिजली उत्पादन की है।

उन्होंने कहा कि पर्यावरण संरक्षण और स्थिरता को केवल कंपनियों की वार्षिक रिपोर्ट तक सीमित नहीं रखा जाना चाहिए। इसे वास्तविक कामकाज और परियोजनाओं के क्रियान्वयन में शामिल करना होगा। उनके मुताबिक किसी भी विकास परियोजना की सफलता केवल उसकी आर्थिक लागत या उत्पादन क्षमता से तय नहीं होती बल्कि यह भी देखना जरूरी है कि उससे समाज और पर्यावरण को कितना लाभ मिलता है।

डॉ. अदाणी ने उद्योग जगत से दीर्घकालिक सोच अपनाने की अपील करते हुए कहा कि भारत के विकास के साथ सामाजिक उत्थान और पर्यावरणीय संतुलन भी जरूरी है। वर्ष 2047 तक विकसित भारत का लक्ष्य तभी सार्थक होगा जब आर्थिक प्रगति का लाभ समाज के सभी वर्गों तक पहुंचे। उन्होंने कहा कि उद्योगों को ऐसी परियोजनाओं पर ध्यान देना होगा जो वर्तमान जरूरतों को पूरा करने के साथ आने वाली पीढ़ियों के लिए भी स्थायी लाभ सुनिश्चित करें।