दिल्ली में पीने के पानी की गुणवत्ता पर बड़ा संकट: CAG रिपोर्ट में भारी चूक, 55% सैंपल फेल


नई दिल्ली । दिल्ली में पीने के पानी की सुरक्षा पर गंभीर सवाल उठे हैं। भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) की ताजा ऑडिट रिपोर्ट में दिल्ली जल बोर्ड (DJB) की पानी की सप्लाई, निगरानी और ट्रीटमेंट प्रणाली में बड़े स्तर की कमी उजागर हुई है। यह रिपोर्ट 7 जनवरी 2026 को विधानसभा में पेश की गई थी। इसके बाद जन स्वास्थ्य अभियान इंडिया (JSAI) ने तत्काल सुधार और कार्रवाई की मांग की है।

ऑडिट रिपोर्ट में क्या मिला?
CAG की जांच में यह खुलासा हुआ कि 16,234 भूजल सैंपलों में से लगभग 55% पानी पीने योग्य नहीं था।

अलग-अलग वर्षों में यह अनुपात 49% से 63% के बीच रहा है। रिपोर्ट ने चेतावनी दी कि जिन इलाकों में सैंपल फेल हुए हैं, वहां की पानी की सप्लाई सीधे जनता के स्वास्थ्य के लिए खतरा बन सकती है।

दिल्ली में पानी की कमी और कमजोर जांच व्यवस्था
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि दिल्ली को रोजाना लगभग 1,680 मिलियन यूनिट पानी की जरूरत है, लेकिन सप्लाई में करीब 25% की कमी है।
जिन इलाकों में पानी पहुंच रहा है, उसकी गुणवत्ता की सही निगरानी नहीं हो पा रही है। जांच और मॉनिटरिंग सिस्टम इतने कमजोर हैं कि यह सुनिश्चित करना मुश्किल हो गया है कि पानी स्वास्थ्य के लिहाज से सुरक्षित है या नहीं।

BIS मानकों के अनुसार जांच नहीं
CAG रिपोर्ट में यह भी खुलासा हुआ कि दिल्ली जल बोर्ड की प्रयोगशालाओं में BIS (भारतीय मानक ब्यूरो) के नियमों के अनुसार पानी की जांच नहीं हुई।

BIS मानकों के अनुसार 43 तरह की जांच आवश्यक है, लेकिन DJB केवल 12 मानकों पर ही पानी की जांच कर रहा था। इसमें आर्सेनिक, लेड और बैक्टीरिया की जांच भी शामिल नहीं थी।

बिना ट्रीटमेंट पानी की सप्लाई
रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि पिछले पांच वर्षों में 80-90 मिलियन गैलन पानी रोजाना बिना ट्रीटमेंट के सीधे बोरवेल और रैनी वेल से लोगों तक सप्लाई किया गया।विशेषज्ञों का कहना है कि बिना शुद्धिकरण का पानी देने से डायरिया, पीलिया, टायफाइड जैसी बीमारियों का जोखिम बढ़ जाता है।

पानी की सप्लाई का सही आंकड़ा नहीं
CAG ने यह भी कहा कि दिल्ली के वाटर ट्रीटमेंट प्लांट, जलाशयों और बोरवेल्स पर फ्लो मीटर नहीं लगाए गए।

इस कारण यह पता नहीं चल पाता कि कितना पानी ट्रीट हो रहा है और कितना बिना जांच के सीधे नागरिकों तक पहुंच रहा है।

स्वास्थ्य पर गंभीर खतरे
विशेषज्ञों ने चेतावनी दी कि दूषित पानी पीने से डायरिया, पीलिया, टायफाइड, कैंसर, किडनी-लीवर की समस्याएं हो सकती हैं।आर्सेनिक और लेड जैसे जहरीले तत्व लंबे समय में गंभीर बीमारियां पैदा कर सकते हैं।

JSAI ने सरकार से मांगा कड़ा एक्शन
जन स्वास्थ्य अभियान इंडिया ने कहा कि साफ और सुरक्षित पेयजल हर नागरिक का मौलिक अधिकार है।
JSAI ने सरकार से मांग की है कि पानी की गुणवत्ता में लापरवाही करने वालों के खिलाफ तुरंत कार्रवाई हो और हर घर तक सुरक्षित पानी पहुंचाने के लिए ठोस कदम उठाए जाएं। साथ ही प्रयोगशालाओं को आधुनिक उपकरणों से लैस किया जाए।

राजनीतिक मुद्दा बन सकता है पानी का संकट
यह रिपोर्ट सामने आने के बाद दिल्ली विधानसभा चुनाव में राजनीतिक सरगर्मी बढ़ने की संभावना जताई जा रही है। विपक्ष ने पिछली सरकार पर लापरवाही का आरोप लगाया है, जबकि AAP ने इसे केंद्र सरकार की राजनीति बताया है।

विशेषज्ञों का समाधान
विशेषज्ञों का कहना है कि:सभी प्रयोगशालाओं को BIS मानकों के अनुसार आधुनिक बनाना होगा। पर्याप्त स्टाफ और उपकरण उपलब्ध कराए जाएं।हर ट्रीटमेंट प्लांट में फ्लो मीटर लगें, पानी की नियमित और व्यापक गुणवत्ता जांच हो,बिनाट्रीटमेंट पानी की सप्लाई तुरंत बंद हो।