अमेरिका की नई योजना: 50 देशों के साथ चीन के खनिज प्रभुत्व को देगा चुनौती, भारत की भूमिका अहम


नई दिल्ली। अमेरिका चीन के वर्चस्व वाले क्रिटिकल मिनरल्स की वैश्विक सप्लाई चेन को सुरक्षित करने के लिए एक बड़ा रणनीतिक कदम उठा रहा है। 4 फरवरी 2026 को वॉशिंगटन में आयोजित ‘क्रिटिकल मिनरल्स मिनिस्टीरियल’ बैठक में अमेरिका ने करीब 50 देशों का एक ट्रेडिंग ब्लॉक बनाने का प्रस्ताव रखा। इसका उद्देश्य क्रिटिकल मिनरल्स जैसे लिथियम, कोबाल्ट, निकेल और रेयर अर्थ एलिमेंट्स के उत्पादन, प्रोसेसिंग और कीमतों को स्थिर करना और चीन के प्रभुत्व को तोड़ना है।

अमेरिका की रणनीति
उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने बैठक में कहा कि सदस्य देशों के उत्पादकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए न्यूनतम कीमत और टैरिफ जैसी व्यवस्थाएं की जाएंगी। उनका कहना था कि अमेरिका अपनी क्रिटिकल मिनरल्स इंडस्ट्री को पुनर्जीवित करना चाहता है और चीन जैसी बाजार-सक्रियता से बचाव जरूरी है। वेंस ने इसे “साथी और सहयोगी के बीच सुरक्षित जोन” बताया, जिसमें अमेरिकी उद्योग को आवश्यक खनिजों की निर्बाध आपूर्ति और मित्र देशों में संयुक्त उत्पादन बढ़ाने पर जोर होगा।

ब्लॉक का उद्देश्य
चीन वर्तमान में दुनिया के लगभग 70% रेयर अर्थ माइनिंग और 90% प्रोसेसिंग पर नियंत्रण रखता है। स्मार्टफोन, इलेक्ट्रिक वाहन, जेट इंजन, सेमीकंडक्टर और मिसाइल गाइडेंस सिस्टम के लिए ये खनिज जरूरी हैं। अमेरिका का यह ब्लॉक चीन के एकाधिकार को तोड़ने और सप्लाई चेन को ‘डी-रिस्क’ De-risk करने की वैश्विक रणनीति है।

भारत की भागीदारी और अवसर
भारत ने इस बैठक में सक्रिय भूमिका निभाई। विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने आपूर्ति शृंखला में अंतरराष्ट्रीय सहयोग की आवश्यकता पर जोर दिया। भारत के पास लिथियम और कॉपर के बड़े भंडार हैं, और इस ब्लॉक के माध्यम से उसे माइनिंग और प्रोसेसिंग में अमेरिकी तकनीक और फंड का लाभ मिल सकता है। इससे भारत अपनी चिप-मैन्युफैक्चरिंग और EV योजनाओं के लिए चीन पर निर्भर नहीं रहेगा।

जयशंकर ने सोशल मीडिया पर कहा अत्यधिक संकेंद्रण से जुड़ी चुनौतियों और अंतरराष्ट्रीय सहयोग के माध्यम से आपूर्ति शृंखलाओं के जोखिम को कम करने के महत्व को रेखांकित किया। उन्होंने कनाडा, सिंगापुर, नीदरलैंड्स, इटली, मलेशिया, बहरीन, मंगोलिया, पोलैंड, रोमानिया, इजराइल और उज्बेकिस्तान के मंत्रियों के साथ भी बैठक की।