सीरीज जीत के बाद भी बढ़ी टेंशन, आखिरी ODI में 6-7 कैच छूटने पर गिल का फूटा गुस्सा, वर्ल्ड कप से पहले दी कड़ी चेतावनी


नई दिल्ली। भारत और वेस्टइंडीज के बीच तीन मैचों की वनडे सीरीज भले ही टीम इंडिया ने 2-1 से अपने नाम कर ली हो लेकिन मुल्लांपुर में खेले गए आखिरी मुकाबले ने भारतीय टीम की तैयारियों पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। शनिवार को हुए इस मुकाबले में भारत ने पहले बल्लेबाजी करते हुए 351 रन का मजबूत स्कोर खड़ा किया था और वेस्टइंडीज के सामने 352 रन का लक्ष्य रखा था। इसके बावजूद भारतीय गेंदबाज इस स्कोर का बचाव नहीं कर सके। वेस्टइंडीज ने पांच विकेट से मुकाबला अपने नाम कर लिया और इस जीत में कप्तान शाई होप की शानदार पारी सबसे बड़ी वजह रही।

शाई होप ने भारतीय गेंदबाजों का डटकर सामना करते हुए नाबाद 162 रन बनाए। ग्रोइन इंजरी के बावजूद उन्होंने जिस तरह बल्लेबाजी की उसने भारतीय टीम की मुश्किलें बढ़ा दीं। वेस्टइंडीज ने 352 रन का लक्ष्य 48.2 ओवर में हासिल कर लिया। यह वनडे क्रिकेट में वेस्टइंडीज का सबसे बड़ा सफल रन चेज भी रहा। होप के लिए यह लगातार दूसरा शतक था। इससे पहले गुवाहाटी वनडे में भी उन्होंने शतकीय पारी खेली थी।

मुकाबला खत्म होने के बाद भारतीय कप्तान शुभमन गिल ने टीम की कमियों पर खुलकर बात की। गिल की सबसे बड़ी नाराजगी भारतीय टीम की फील्डिंग को लेकर थी। मुकाबले के दौरान भारतीय खिलाड़ियों ने करीब 6-7 कैच छोड़े। इतने मौके गंवाने का सीधा फायदा वेस्टइंडीज के बल्लेबाजों को मिला और शाई होप ने भी मिले मौकों का पूरा फायदा उठाते हुए मैच भारत से दूर कर दिया। गिल ने माना कि वर्ल्ड कप से पहले इस तरह की फील्डिंग चिंता बढ़ाने वाली है और टीम को इस क्षेत्र में तत्काल सुधार करना होगा।

कप्तान की दूसरी बड़ी चिंता डेथ ओवर्स की गेंदबाजी रही। गिल के मुताबिक आखिरी ओवरों में भारतीय टीम को अपनी रणनीति को लेकर स्पष्टता की जरूरत है। टीम को यह तय करना होगा कि किस स्थिति में बल्लेबाजों पर दबाव बनाने के लिए आक्रामक गेंदबाजी करनी है और कब रन रोकने के लिए रक्षात्मक फील्ड लगानी है। गिल ने यह भी संकेत दिया कि कई बार टीम डेथ ओवर्स की रणनीति जरूरत से पहले शुरू कर देती है जबकि उस समय मिडिल ओवर्स की तरह गेंदबाजी करने की जरूरत होती है।

इस हार के बावजूद सीरीज जीतना भारत के लिए राहत की बात है लेकिन वर्ल्ड कप से पहले फील्डिंग और डेथ बॉलिंग जैसी कमजोरियां टीम मैनेजमेंट के लिए गंभीर विषय बन गई हैं। बड़े टूर्नामेंट में छोटी सी गलती भी मुकाबले का रुख बदल सकती है। ऐसे में भारतीय टीम को अगले मुकाबलों में इन कमियों को दूर करने पर खास ध्यान देना होगा।

दूसरी ओर वेस्टइंडीज के कप्तान शाई होप ने अपनी शानदार पारी के पीछे पूर्व भारतीय कप्तान महेंद्र सिंह धोनी की सलाह का भी जिक्र किया। होप ने बताया कि धोनी ने उन्हें समझाया था कि बल्लेबाज के पास अक्सर उसकी सोच से ज्यादा समय होता है। इसी सोच के साथ होप अब नतीजे के बजाय अपनी प्रक्रिया पर ध्यान देते हैं। मुल्लांपुर में उनकी पारी ने इसी सोच का शानदार उदाहरण पेश किया और वेस्टइंडीज को ऐतिहासिक जीत दिला दी।