Author: bharati

  • मणिकर्णिका घाट विवाद: मल्लिकार्जुन खरगे ने PM मोदी पर लगाया विरासत नष्ट करने का आरोप, तस्वीरें कीं साझा

    मणिकर्णिका घाट विवाद: मल्लिकार्जुन खरगे ने PM मोदी पर लगाया विरासत नष्ट करने का आरोप, तस्वीरें कीं साझा

    नई दिल्ली वाराणसी के ऐतिहासिक मणिकर्णिका घाट के पुनर्विकास को लेकर अब राजनीतिक घमासान तेज हो गया है। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि सौंदर्यीकरण और व्यवसायीकरण के नाम पर सदियों पुरानी धार्मिक और सांस्कृतिक विरासत को बुलडोजर से ध्वस्त किया जा रहा है। उन्होंने दावा किया कि इस तरह के कदम काशी की आत्मा और उसकी परंपराओं को नुकसान पहुंचा रहे हैं।

    PM मोदी पर खरगे का तीखा हमला

    गुरुवार को कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक पोस्ट साझा कर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर सीधा हमला बोला। उन्होंने लिखा कि पहले काशी विश्वनाथ कॉरिडोर के निर्माण के दौरान छोटे-बड़े मंदिरों और देवालयों को तोड़ा गया और अब प्राचीन घाटों की बारी आ गई है। खरगे का आरोप है कि सरकार इतिहास की धरोहरों को मिटाकर केवल अपनी नेम-प्लेट चिपकाने में जुटी है।

    तस्वीरें और वीडियो किए साझा

    खरगे ने अपने पोस्ट में कुछ तस्वीरें और वीडियो भी साझा किए हैं, जिनमें बुलडोजर, टूटती मूर्तियां और निर्माण कार्य दिखाई दे रहा है। उन्होंने सवाल उठाया कि सदियों पुरानी मूर्तियों और मंदिरों को सुरक्षित कर संग्रहालयों में क्यों नहीं रखा गया। कांग्रेस अध्यक्ष ने लिखा, “लाखों लोग मोक्ष की कामना लेकर काशी आते हैं। क्या सरकार का इरादा भक्तों के साथ धोखा करने का है?”

    मणिकर्णिका घाट का धार्मिक महत्व

    मणिकर्णिका घाट हिंदू धर्म के सबसे पवित्र अंतिम संस्कार स्थलों में से एक माना जाता है। मान्यता है कि यहां अंतिम संस्कार करने से आत्मा को मोक्ष की प्राप्ति होती है। यह घाट वाराणसी के सबसे पुराने घाटों में शामिल है और इसका ऐतिहासिक संबंध माता सती के कर्णफूल से जुड़ा हुआ बताया जाता है।

    पुनर्विकास परियोजना के उद्देश्य

    मणिकर्णिका घाट के पुनर्विकास की नींव प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 7 जुलाई 2023 को रखी थी। यह परियोजना काशी विश्वनाथ कॉरिडोर का हिस्सा है। इसके तहत घाट को चौड़ा करना, यात्रियों के लिए रैंप और बैठने की व्यवस्था, VIP सुविधाएं, लकड़ी बिक्री के लिए वुड प्लाजा, बेहतर साफ-सफाई और बाढ़ सुरक्षा जैसे प्रावधान शामिल हैं। इसके अलावा स्किंदिया घाट से कनेक्टिविटी को भी मजबूत किया जाएगा।

    रिपोर्ट्स के मुताबिक इस परियोजना की अनुमानित लागत 17.56 करोड़ रुपये है और इसे वर्ष 2026 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। परियोजना में इको-फ्रेंडली तकनीक का उपयोग कर लकड़ी की खपत और प्रदूषण को कम करने का दावा किया गया है।

    क्यों हो रहा है विवाद?

    इस परियोजना को लेकर स्थानीय लोगों और विपक्ष की ओर से आरोप लगाए जा रहे हैं कि निर्माण कार्य के दौरान कई प्राचीन मूर्तियां और छोटे-बड़े मंदिर क्षतिग्रस्त हुए हैं। हालांकि जिला प्रशासन ने इन आरोपों को खारिज किया है। प्रशासन का कहना है कि किसी भी मंदिर या सांस्कृतिक संरचना को नुकसान नहीं पहुंचाया जा रहा है और सभी धार्मिक प्रतीकों को सुरक्षित रखते हुए बाद में पुनः स्थापित किया जाएगा।

    वाराणसी जिला प्रशासन ने सोशल मीडिया पर भ्रामक जानकारी फैलाने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की चेतावनी भी दी है।

  • राष्ट्रीय खाद्य तेल मिशन-तिलहन के तहत राज्य तिलहन मिशन का गठन: मुख्य सचिव करेंगे अध्यक्षता

    राष्ट्रीय खाद्य तेल मिशन-तिलहन के तहत राज्य तिलहन मिशन का गठन: मुख्य सचिव करेंगे अध्यक्षता


    नई दिल्ली । राष्ट्रीय खाद्य तेल मिशन-तिलहन NMEO-OS के अंतर्गत राज्य शासन द्वारा मुख्य सचिव की अध्यक्षता में राज्य तिलहन मिशन का गठन किया गया है।समिति में कृषि उत्पादन आयुक्त सहकारिता, उद्यानिकी एवं खाद्य प्रसंस्करण/ फूड प्रोसेंसिंग इंडस्ट्रीज, पंचायत एवं ग्रामीण विकास, वित्त, खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण, कुलपति, जवाहरलाल नेहरू कृषि विश्वविद्यालय, जबलपुर/ राजमाता विजयाराजे सिंधिया कृषि विश्वविद्यालय, ग्वालियर, आयुक्त/ संचालक किसान कल्याण तथा कृषि विकास, निदेशक भारतीय सोयाबीन अनुसंधान संस्थान, इन्दौर म.प्र, प्रभारी अधिकारी नाबार्ड, समन्वयक स्टेट लेवल बैंकर समिति, तिलहन क्षेत्र में कार्यरत एफपीओ/ को-ऑपरेटिक्स के दो प्रतिनिधि प्रत्येक से एक , बीज एवं खाद्य तेल उत्पादक उद्योग से संबंधित दो प्रतिनिधिप्रत्येक से एक-एक , भारत सरकार, कृषि मंत्रालय द्वारा नामित अधिकारी संयुक्त सचिव स्तर सदस्य होंगे। किसान कल्याण तथा कृषि विकास राज्य मिशन संचालक NMEO-OS को सदस्य-सचिव नामित किया गया हैं।

    राज्य तिलहन मिशन की बैठक का आयोजन कृषि उत्पादन आयुक्त, म.प्र. शासन की अध्यक्षता में किया जा सकेगा। मिशन के दायित्व अंर्तगत मिशन के उद्देश्यों को प्राप्त करने के लिए, मिशन में निहित समग्र नीति दिशा-निर्देशों के भीतर राज्य में मिशन कार्यान्वयन की समग्र निगरानी की जायेगी। राज्य को सौंपे गए क्षेत्र, उत्पादन, और उत्पादकता लक्ष्यों और इसकी निगरानी के आधार पर तिलहन की खेती और उत्पादन के लिए राज्य तिलहन कार्य योजना को अंतिम रूप देना , कृषि एवं किसान कल्याण विभाग, भारत सरकार को प्रस्तुत करने से पहले मिशन के लक्ष्यों और उद्देश्यों के अनुरूप संभावित और वार्षिक राज्य कार्य-योजना को अंतिम रूप देना, कृषि एवं किसान कल्याण विभाग को प्रस्तुत नियमित रिपोर्टों के साथ प्रमुख प्रदर्शन संकेतकों पर नजर रखकर राज्य स्तर पर मिशन की प्रगति की निगरानी की जायेगी।

    समिति द्वारा आवश्यक बुनियादी ढांचे इंफास्ट्रक्चर और कटाई के बाद प्रसंस्करण सुविधाओं आदि को विकसित करने के लिए राज्य स्तरीय वित्तीय संसाधन आवंटन की देखरेख करना, जिला मिशनों, मूल्य श्रृंखला भागीदारों और तकनीकी सहायता एजेंसियों के कामकाज और प्रगति की निगरानी करना और उनकी दक्षता बढ़ाने के लिए निर्देश जारी करना और एस.ओ.पी निर्धारित करना, प्रमुख मिशन के कार्यान्वयन को सुव्यवस्थित करने तथा इसे राज्य कृषि नीतियों और विकास योजनाओं के साथ जोडने के लिए संबंधित विभागों कृषि, सिंचाई वित्त. ग्रामीण विकास आदि के साथ समन्वय करके अन्य केन्द्रीय और राज्य योजनाओं के साथ अभिसरण सुनिश्चित करने के कार्य किए जा

  • अपनी सांस्कृतिक अनुभूतियों और प्रशिक्षण के निर्देशों का देश हित में करें उपयोग : राज्यपाल श्री पटेल

    अपनी सांस्कृतिक अनुभूतियों और प्रशिक्षण के निर्देशों का देश हित में करें उपयोग : राज्यपाल श्री पटेल

    भोपाल राज्यपाल श्री मंगुभाई पटेल ने कहा है कि प्रशिक्षणअधिकारियों को सशस्त्र सीमा बल के लिये केवल अधिकारी नहींबल्कि एक जिम्मेदार संवेदनशील और सजग राष्ट्र-प्रहरी के रूप में तैयार करने का समन्वित प्रयास है। प्रशिक्षण व्यक्तित्व निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। यह सभी प्रशिक्षणार्थियों को एक-दूसरे के राज्य की संस्कृति विशेषताओं और विविधताओं को समझने का अवसर प्रदान करता है। विविधता में एकता की भावना को मजबूत करता है। उन्होंने कहा कि प्रशिक्षु अपने राज्य की विशिष्टताओं की अनुभूतियों और प्रशिक्षण के निर्देशों का देश हित में उपयोग कर “एक भारत-श्रेष्ठ भारत” के निर्माण में योगदान दे। राज्यपाल श्री पटेल गुरूवार को सशस्त्र सीमा बल अकादमी भोपाल के प्रशिक्षु सहायक कमांडेंट्स को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने सभी प्रशिक्षणार्थियों को राष्ट्र के प्रतिष्ठित बल में चयन की बधाई और शुभकामनाएं दी। लोकभवन में आयोजित सौजन्य भेंट कार्यक्रम में राज्यपाल के प्रमुख सचिव डॉ. नवनीत मोहन कोठारी भी मौजूद थे।

    राज्यपाल श्री पटेल ने प्रशिक्षणार्थियों से कहा कि आप सभी उन सौभाग्यशाली लोगों में शामिल हैं जिन्हें सशस्त्र सीमा बल अकादमी भोपाल का हिस्सा बनकर माँ भारती की सेवा का अवसर मिला है। आपकी वर्दी केवल पहचान नहीं बल्कि समाज और राष्ट्र के सम्मान का प्रतीक है। इसी वर्दी के साये में देशवासी स्वयं को सुरक्षित महसूस करते हैं। आप जब अपने परिवार से दूर सीमाओं पर तैनात होकर देश की रक्षा करते हैं तभी हर देशवासी चैन और शांति की नींद सो पाता है। उन्होंने कहा कि ईमानदारी निष्पक्षता और संवेदनशीलता के साथ कर्तव्यों का पालन करने वाले अधिकारी ही समाज में विश्वास और सम्मान अर्जित करते हैं। आप सभी निष्ठा समर्पण और साहस के साथ राष्ट्र की सेवा करें। सशस्त्र सीमा बल अकादमी भोपाल की गौरवशाली परंपरा को नई ऊँचाइयों तक पहुंचाएं।

    राज्यपाल श्री पटेल ने कहा कि वर्तमान समय में देश के समक्ष आंतरिक सुरक्षा सीमा प्रबंधन नक्सलवाद तस्करी साइबर अपराध और असामाजिक गतिविधियाँ जैसी अनेक महत्वपूर्ण चुनौतियां है। राष्ट्र प्रहरी के रूप में आपके निर्णय और कार्य अत्यंत महत्वपूर्ण है। अपनी प्रतिभा से सीमा सुरक्षा प्रबंधन में आधुनिक तकनीक व्यावसायिक ज्ञान शारीरिक और मानसिक सक्रियता के नए मानक स्थापित करे। यह सुनिश्चित होना चाहिए कि असामाजिक और राष्ट्र-विरोधी तत्वों पर कठोरता से नियंत्रण करें। राज्यपाल श्री पटेल ने कहा कि वरिष्ठ अधिकारियों का निरंतर मार्गदर्शन प्राप्त करें। उनके अनुभवों से सीखें और अपने ज्ञान को सहकर्मियों के साथ साझा भी करें।

    राज्यपाल श्री पटेल का एस.एस.बी. अकादमी भोपाल के निदेशक श्री बी.एस. जायसवाल ने पौधा भेंट कर स्वागत और स्मृति चिन्ह भेंट कर अभिनंदन किया। एस.एस.बी. अकादमी भोपाल निदेशक श्री जायसवाल ने प्रशिक्षण कार्यक्रम की विस्तार से जानकारी दी। प्रशिक्षु अधिकारी सुश्री अनुष्का मनियारा और श्री अनुराग भार्गव ने प्रशिक्षण में अनुभवों को साझा किया। कमांडेंट प्रशिक्षण श्रीमती सुवर्णा सजवाल ने आभार व्यक्त किया। कोर्स डायरेक्टर डिप्टी कमांडेंट प्रशिक्षण श्री रोहित शर्मा ने कार्यक्रम का संचालन किया। सौजन्य भेंट कार्यक्रम में राज्यपाल के अपर सचिव श्री उमाशंकर भार्गव लोकभवन और एस.एस.बी. के अधिकारी-कर्मचारी एवं प्रशिक्षु अधिकारी उपस्थित थे।

  • अचानक आने वाली उदासी से कैसे पाएं छुटकारा ऋतिक रोशन ने बताया 90 सेकंड का साइंस

    अचानक आने वाली उदासी से कैसे पाएं छुटकारा ऋतिक रोशन ने बताया 90 सेकंड का साइंस


    नई दिल्ली /मुंबई-बॉलीवुड अभिनेता ऋतिक रोशन न सिर्फ अपनी फिटनेस और फिल्मों के लिए जाने जाते हैं-बल्कि मानसिक स्वास्थ्य और आत्मचिंतन जैसे विषयों पर भी खुलकर बात करते रहे हैं। इसी कड़ी में ऋतिक ने सोशल मीडिया पर एक गहरा और विचारोत्तेजक पोस्ट साझा किया है-जिसमें उन्होंने अचानक बिना किसी कारण आने वाली उदासी से निपटने का एक आसान लेकिन वैज्ञानिक तरीका बताया है। इसे उन्होंने 90 सेकंड का नियम कहा है।ऋतिक ने अपने इंस्टाग्राम पोस्ट की शुरुआत हल्के-फुल्के अंदाज में करते हुए लिखा- कानूनी चेतावनी: बेमतलब की सुबह की बकवास। इसके बाद उन्होंने उस मानसिक स्थिति का जिक्र किया-जिससे लगभग हर इंसान कभी न कभी गुजरता है। उन्होंने लिखा कि कई बार जब सबकुछ ठीक चल रहा होता है-तभी अचानक दुनिया की नकारात्मकता सामने आने लगती है। अच्छी चीजें भी अपना दूसरा-नकारात्मक पहलू दिखाने लगती हैं और मन एक अजीब सी उदासी से घिर जाता है।

    ऋतिक ने बताया कि ऐसी स्थिति में हम अपने दिमाग से उस उदासी के कारण ढूंढने लगते हैं। हम तर्क गढ़ते हैं-थ्योरी बनाते हैं-समाधान सोचते हैं-लेकिन फिर भी उस बेवजह की उदासी से बाहर नहीं निकल पाते। यह भावना बिना किसी चेतावनी के हमें अपनी गिरफ्त में ले लेती है और पूरा दिन भारी लगने लगता है।अपने पोस्ट में अभिनेता ने ईमानदारी से स्वीकार किया कि वह भी उसी वक्त अपनी भावनाओं को शब्दों में ढाल रहे थे। उन्होंने लिखा कि कैसे हम बड़े-बड़े शब्दों के जरिए अपनी उदासी को खूबसूरत या तार्किक बनाने की कोशिश करते हैं। ऋतिक ने इस प्रवृत्ति पर भी सवाल उठाया कि आज की दुनिया में कैसे बेमतलब चीजों को भी इस तरह पेश किया जाता है कि वे जरूरी और समझदारी भरी लगने लगती हैं।

    इसके बाद ऋतिक ने विज्ञान का हवाला देते हुए एक अहम बात साझा की। उन्होंने न्यूरोसाइंटिस्ट डॉ. जिल बोल्टे टेलर का जिक्र करते हुए लिखा कि कोई भी भावना अपने शुद्ध रूप में सिर्फ 90 सेकंड तक ही रहती है। अगर हम उस भावना को बार-बार सोचकर जिंदा न रखें-तो वह या तो बदल जाती है या किसी दूसरी भावना में मिल जाती है। यानी-अगर हम खुद को 90 सेकंड तक संभाल लें-तो उदासी अपने आप कमजोर पड़ने लगती है।

    ऋतिक ने मजाकिया अंदाज में लिखा-इस पोस्ट को लिखने में मुझे 45 सेकंड लगे हैं-45 सेकंड अभी बाकी हैं। पोस्ट के अंत में उन्होंने उन लोगों को टैग किया जो शायद इस पोस्ट को समझ न पाएं या इसे पढ़कर नाराज हो जाएं। उन्होंने लिखा कि ऐसे लोग असल में जिंदगी को सही मायनों में जी रहे हैं।ऋतिक रोशन की यह पोस्ट सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रही है और फैंस इसे मानसिक स्वास्थ्य को लेकर एक ईमानदार और जरूरी संदेश बता रहे हैं।
     

  • अयोध्या के संतों ने हनी सिंह के विवादित बयान पर जताई कड़ी आपत्ति, कहा-समाज के लिए कलंक

    अयोध्या के संतों ने हनी सिंह के विवादित बयान पर जताई कड़ी आपत्ति, कहा-समाज के लिए कलंक

    नई दिल्ली मशहूर सिंगर यो यो हनी सिंह एक बार फिर विवादों में फंस गए हैं। हाल ही में दिल्ली में आयोजित एक शो के दौरान दिए गए उनके कुछ बयान सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गए, जिनमें उन्होंने राजधानी की ठंड को लेकर आपत्तिजनक टिप्पणी की। वीडियो सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर हनी सिंह को जमकर ट्रोल किया जा रहा है। वहीं, इस मामले में अब अयोध्या के साधु-संतों की भी तीखी प्रतिक्रिया सामने आई है।

    अयोध्या के संतों ने हनी सिंह के बयान को अशोभनीय और समाज की मर्यादा के खिलाफ बताते हुए कड़ी आपत्ति जताई है। संतों का कहना है कि इस तरह की भाषा न केवल दिल्ली के लोगों की भावनाओं को ठेस पहुंचाती है, बल्कि समाज में गलत संदेश भी देती है।

    साधु-संतों ने की सार्वजनिक माफी की मांग

    मीडिया से बातचीत में अयोध्या के संत सीताराम दास महंत ने कहा कि दिल्ली की ठंड को लेकर दिया गया हनी सिंह का बयान पूरी तरह निंदनीय है। उन्होंने आरोप लगाया कि सिंगर ने मंच से अभद्र भाषा का इस्तेमाल कर दिल्लीवासियों की भावनाओं का अपमान किया है। महंत ने कहा कि एक कलाकार का काम समाज को सकारात्मक संदेश देना होता है, लेकिन हनी सिंह ने मर्यादा की सभी सीमाएं लांघ दी हैं।

    उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि हनी सिंह को तुरंत सार्वजनिक रूप से माफी मांगनी चाहिए। संतों का मानना है कि सस्ती लोकप्रियता और पैसे के लिए इस तरह की अश्लीलता फैलाना समाज के लिए घातक है।

    “हनी सिंह समाज के लिए कलंक”

    साधु-संतों ने अपने बयान में कहा, “हनी सिंह समाज के लिए कलंक हैं। वे मशहूर जरूर हैं, लेकिन ज्ञान और संस्कार के मामले में नहीं। मंच से दिए गए उनके शब्द माताओं और बहनों का अपमान हैं, जो किसी भी कीमत पर स्वीकार्य नहीं हैं।” संतों का कहना है कि ऐसे बयानों पर सख्त प्रतिक्रिया और कार्रवाई जरूरी है, ताकि भविष्य में कोई भी कलाकार इस तरह की भाषा का इस्तेमाल न करे।

    अश्लीलता समाज के लिए खतरा: महामंडलेश्वर

    महामंडलेश्वर विष्णु दास ने भी हनी सिंह के बयानों की कड़ी निंदा की। उन्होंने कहा कि हनी सिंह एक गायक हैं, लेकिन जिस तरह की भाषा का प्रयोग वे कर रहे हैं, वह समाज में गंदगी फैलाने का काम कर रही है। महामंडलेश्वर ने कहा कि मौसम कुदरत की देन है और उसे लेकर इस तरह की अभद्र टिप्पणियां करना बिल्कुल अनुचित है।

    उन्होंने कहा कि जब कोई कलाकार मंच पर आता है, तो उसकी जिम्मेदारी और बढ़ जाती है। लेकिन हनी सिंह ने अपनी जिम्मेदारी को नजरअंदाज करते हुए अश्लीलता फैलाई है। महामंडलेश्वर ने दो टूक कहा कि हनी सिंह को दिल्ली की जनता से सार्वजनिक रूप से माफी मांगनी चाहिए और ऐसे मामलों में सख्त कार्रवाई भी होनी चाहिए।

  • करेला: कड़वा जरूर, लेकिन सेहत का खजाना; जानें किन बीमारियों में है रामबाण

    करेला: कड़वा जरूर, लेकिन सेहत का खजाना; जानें किन बीमारियों में है रामबाण


    नई दिल्ली: करेला का नाम सुनते ही अधिकतर लोग मुंह बना लेते हैं, लेकिन यही कड़वा करेला सेहत के लिहाज से किसी वरदान से कम नहीं है। आयुर्वेद में करेला को औषधि के रूप में माना गया है और इसे कई गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं में लाभकारी बताया गया है। सिर्फ खाने से ही नहीं, बल्कि बाहरी रूप से लगाने पर भी करेला शरीर को कई तरह से फायदा पहुंचाता है।

    आयुर्वेद में करेले को करवेल्लक कहा जाता है। इसे ऐसा पौधा माना गया है जो दूषित रक्त को शुद्ध करने, बढ़ी हुई शर्करा को नियंत्रित करने और शरीर में मौजूद कीटाणुओं को नष्ट करने की क्षमता रखता है। करेला विटामिन A, B और C का अच्छा स्रोत है, जो इम्युनिटी को मजबूत करने के साथ-साथ त्वचा और आंखों की सेहत के लिए भी जरूरी माने जाते हैं।करेला अग्नि और अग्न्याशय तक प्रभाव डालता है, जिससे पाचन तंत्र बेहतर होता है। यह आंतों की गहराई से सफाई कर वहां मौजूद कीड़े, हानिकारक बैक्टीरिया और विषैले तत्वों को बाहर निकालने में मदद करता है। जिन लोगों को बार-बार पेट साफ न होने, गैस, अपच या भूख न लगने की समस्या रहती है उनके लिए करेले का जूस या सलाद बेहद फायदेमंद हो सकता है।

    अगर शरीर में लंबे समय से कब्ज की समस्या बनी रहे, तो इससे आंतों में कीड़े पनप सकते हैं और पोषक तत्व शरीर में ठीक से अवशोषित नहीं हो पाते। ऐसे में करेला शरीर का प्राकृतिक डिटॉक्स करता है और पाचन तंत्र को फिर से सक्रिय बनाता है। इसके कड़वे स्वाद को कम करने के लिए इसे काटकर नमक लगाकर कुछ घंटों के लिए छोड़ दिया जाए, तो इसका कड़वापन काफी हद तक कम हो जाता है।त्वचा संबंधी समस्याओं में भी करेला बेहद उपयोगी माना जाता है। चेहरे पर मुंहासे, एक्ने, खुजली या रूखापन अक्सर रक्त की अशुद्धि का संकेत होते हैं। रोजाना सीमित मात्रा में करेले के जूस का सेवन रक्त को शुद्ध करता है, जिससे त्वचा में निखार आता है और एक्ने की समस्या कम होती है। साथ ही यह शरीर की खुद को ठीक करने की क्षमता को भी बढ़ाता है।

    करेला स्तनपान कराने वाली महिलाओं के लिए भी लाभकारी बताया गया है, क्योंकि यह दूध बनाने वाले हार्मोन के उत्पादन को बढ़ाने में मदद करता है। हालांकि, इस दौरान इसका सेवन डॉक्टर की सलाह से ही करना चाहिए। वहीं, अगर शरीर पर कोई घाव, फोड़ा या सूजन हो जाए, तो करेले का लेप लगाने से घाव जल्दी भरता है और संक्रमण का खतरा कम होता है।कुल मिलाकर करेला भले ही स्वाद में कड़वा हो, लेकिन इसके फायदे इतने ज्यादा हैं कि इसे अपनी डाइट में शामिल करना सेहत के लिए बेहद फायदेमंद साबित हो सकता है।

  • बांग्लादेश क्रिकेट में बगावत, खिलाड़ियों के विरोध पर BCB ने डायरेक्टर को भेजा नोटिस

    बांग्लादेश क्रिकेट में बगावत, खिलाड़ियों के विरोध पर BCB ने डायरेक्टर को भेजा नोटिस

    नई दिल्ली बांग्लादेश क्रिकेट इस समय गंभीर संकट के दौर से गुजर रहा है। खिलाड़ियों और बांग्लादेश क्रिकेट बोर्ड (BCB) के बीच चल रहा विवाद अब खुले टकराव में बदल गया है। खिलाड़ियों के हितों के लिए काम करने वाली बांग्लादेश क्रिकेट्स वेलफेयर एसोसिएशन (BCWBA) ने बोर्ड के डायरेक्टर नजमुल इस्लाम के इस्तीफे की मांग की है। खिलाड़ियों का साफ कहना है कि जब तक नजमुल इस्लाम पद से इस्तीफा नहीं देते, वे मैदान में उतरने को तैयार नहीं हैं।

    इस विवाद का सीधा असर बांग्लादेश प्रीमियर लीग (BPL) पर भी देखने को मिला। हालात ऐसे बन गए कि टूर्नामेंट का पहला मुकाबला तक शुरू नहीं हो सका। बढ़ते दबाव और खिलाड़ियों के विरोध के बीच BCB ने अब डायरेक्टर नजमुल इस्लाम और अंतरिम खेल मंत्री के खिलाफ नोटिस जारी कर जांच शुरू कर दी है।

    तमीम इकबाल बयान से भड़का विवाद

    विवाद उस समय और गहरा गया, जब कुछ दिन पहले नजमुल इस्लाम ने बांग्लादेश के सीनियर क्रिकेटर तमीम इकबाल को सार्वजनिक तौर पर ‘भारतीय एजेंट’ कह दिया। इस बयान से खिलाड़ी भड़क गए और बोर्ड के खिलाफ नाराजगी खुलकर सामने आने लगी। खिलाड़ियों का मानना है कि इस तरह के गैर-जिम्मेदाराना बयान न सिर्फ खिलाड़ियों की छवि खराब करते हैं, बल्कि देश के क्रिकेट माहौल को भी नुकसान पहुंचाते हैं।

    मुस्ताफिजुर रहमान नहीं चाहते थे विवाद

    गुरुवार को BCWBA ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में स्पष्ट किया कि तेज गेंदबाज मुस्ताफिजुर रहमान इस विवाद को आगे बढ़ाना नहीं चाहते थे। एसोसिएशन के मुताबिक, मुस्ताफिजुर ने कहा था कि वे बोर्ड के सामने विवादित घटनाओं को सार्वजनिक रूप से उजागर करने के पक्ष में नहीं हैं। उनका मानना था कि खिलाड़ियों की शिकायतें प्लेयर्स वेलफेयर एसोसिएशन के माध्यम से ही रखी जानी चाहिए। इसके बावजूद मामला तूल पकड़ता चला गया।

    क्या है पूरे विवाद की जड़?

    इस पूरे विवाद की शुरुआत उस वक्त हुई, जब बीसीसीआई के निर्देश पर आईपीएल फ्रेंचाइजी कोलकाता नाइट राइडर्स ने मुस्ताफिजुर रहमान को रिलीज कर दिया। इसके बाद बांग्लादेश क्रिकेट में तनाव की स्थिति पैदा हो गई। हालात इतने बिगड़ गए कि बांग्लादेश क्रिकेट बोर्ड ने अपनी टीम को टी20 वर्ल्ड कप के लिए भारत भेजने से इनकार कर दिया।

    BCB ने ICC से मांग की कि भारत में होने वाले उनके मैच श्रीलंका में आयोजित किए जाएं। इतना ही नहीं, बोर्ड ने आईपीएल के प्रसारण पर भी रोक लगाने का फैसला किया, जिससे मामला अंतरराष्ट्रीय स्तर तक चर्चा में आ गया।

    तमीम की सलाह, लेकिन बयान ने बढ़ाया तनाव

    इस दौरान तमीम इकबाल ने बोर्ड को सलाह दी थी कि किसी भी फैसले या बयान में जल्दबाजी न की जाए, ताकि भविष्य में टीम को परेशानी का सामना न करना पड़े। उन्होंने यह भी कहा कि अगर ICC शेड्यूल में बदलाव नहीं करता है, तो बांग्लादेश को भारत जाना ही पड़ेगा या फिर टूर्नामेंट से हटना होगा।

    हालांकि, तमीम की इस सलाह के बाद नजमुल इस्लाम ने उन्हें ‘इंडियन एजेंट’ कहकर सार्वजनिक रूप से निशाना बनाया। इसी बयान ने आग में घी डालने का काम किया और खिलाड़ियों व बोर्ड के बीच तनातनी और ज्यादा बढ़ गई।

    आगे क्या?

    फिलहाल BCB ने मामले की जांच शुरू कर दी है, लेकिन खिलाड़ियों का रुख अब भी सख्त बना हुआ है। अगर जल्द समाधान नहीं निकला, तो इसका असर बांग्लादेश क्रिकेट के घरेलू टूर्नामेंट्स और अंतरराष्ट्रीय छवि दोनों पर पड़ सकता है।

  • आई-पैक मामले में सुप्रीम कोर्ट सख्त ममता सरकार को नोटिस;सीसीटीवी फुटेज सुरक्षित रखने का निर्देश

    आई-पैक मामले में सुप्रीम कोर्ट सख्त ममता सरकार को नोटिस;सीसीटीवी फुटेज सुरक्षित रखने का निर्देश


    नई दिल्ली: पॉलिटिकल कंसल्टेंसी फर्म आई-पैक I-PAC से जुड़े छापेमारी मामले में सुप्रीम कोर्ट ने पश्चिम बंगाल सरकार को कड़ा संदेश दिया है। शीर्ष अदालत ने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और राज्य के पुलिस महानिदेशक डीजीपी राजीव कुमार को नोटिस जारी करते हुए उनसे दो हफ्तों के भीतर जवाब मांगा है। साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश दिया है कि छापेमारी से संबंधित सभी सीसीटीवी फुटेज और अन्य डिजिटल स्टोरेज को अगली सुनवाई तक सुरक्षित रखा जाए।

    यह मामला प्रवर्तन निदेशालय ईडी द्वारा आई-पैक के कार्यालय और सह-संस्थापक प्रतीक जैन के आवास पर की गई छापेमारी से जुड़ा है। ईडी का आरोप है कि इस दौरान राज्य प्रशासन और पुलिस ने केंद्रीय एजेंसी के काम में बाधा डाली। ईडी की ओर से पेश अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल एस.वी. राजू ने अदालत में गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि इस प्रकरण में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी स्वयं आरोपी हैं। उन्होंने दावा किया कि डीजीपी राजीव कुमार की मौजूदगी में मुख्यमंत्री ने व्यक्तिगत रूप से हस्तक्षेप किया और पुलिस की भूमिका सहयोगी की रही।मामले की सुनवाई जस्टिस प्रशांत कुमार मिश्रा और जस्टिस विपुल पंचोली की पीठ ने की। दलीलें सुनने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने पश्चिम बंगाल पुलिस द्वारा ईडी अधिकारियों के खिलाफ दर्ज एफआईआर पर फिलहाल रोक लगा दी। कोर्ट ने कहा कि ईडी की याचिकाओं में गंभीर संवैधानिक और कानूनी सवाल उठाए गए हैं जिन्हें नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।

    पीठ ने टिप्पणी की कि यदि ऐसे मामलों को अनसुलझा छोड़ दिया गया तो इससे एक या एक से अधिक राज्यों में अराजकता की स्थिति पैदा हो सकती है। इसी को ध्यान में रखते हुए अदालत ने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी डीजीपी राजीव कुमार कोलकाता पुलिस कमिश्नर और अन्य संबंधित अधिकारियों को नोटिस जारी किया। सभी प्रतिवादियों को दो सप्ताह के भीतर अपना जवाबी हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया गया है। मामले की अगली सुनवाई 3 फरवरी को तय की गई है।अपने अंतरिम आदेश में सुप्रीम कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि तलाशी वाले परिसरों के अंदर और आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की रिकॉर्डिंग डीवीआर और अन्य स्टोरेज डिवाइस को किसी भी हाल में नष्ट या छेड़छाड़ नहीं की जानी चाहिए। यह निर्देश अगली सुनवाई तक प्रभावी रहेगा।

    वहीं पश्चिम बंगाल सरकार की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल और अभिषेक मनु सिंघवी ने ईडी की याचिकाओं की वैधता पर सवाल उठाए। उन्होंने तर्क दिया कि इस तरह की कार्रवाइयां अक्सर चुनावों से पहले देखने को मिलती हैं और जब मामला पहले से हाईकोर्ट में लंबित है तब सुप्रीम कोर्ट को इस पर विचार नहीं करना चाहिए।इसी बीच ईडी ने एक नई अर्जी दाखिल कर डीजीपी राजीव कुमार समेत पश्चिम बंगाल पुलिस के शीर्ष अधिकारियों को निलंबित किए जाने की मांग भी की है। इस पर भी सुप्रीम कोर्ट ने ममता सरकार से जवाब तलब किया है। यह मामला अब राजनीतिक और संवैधानिक दोनों दृष्टियों से बेहद अहम बन गया है।

  • Winter Skin Tips: सर्दियों में ड्राई स्किन से हैं परेशान? रात को सोने से पहले अपनाएं ये 4 घरेलू उपाय

    Winter Skin Tips: सर्दियों में ड्राई स्किन से हैं परेशान? रात को सोने से पहले अपनाएं ये 4 घरेलू उपाय

    नई दिल्ली सर्दियों का मौसम जहां एक तरफ ठंड और आराम लेकर आता है, वहीं दूसरी ओर यह त्वचा के लिए कई परेशानियां भी खड़ी कर देता है। ठंडी हवाएं, कम नमी और गर्म पानी का ज्यादा इस्तेमाल त्वचा की नेचुरल मॉइस्चर छीन लेता है। नतीजा यह होता है कि स्किन ड्राई, रूखी, बेजान और खिंची हुई महसूस होने लगती है। खासतौर पर चेहरे की त्वचा सबसे ज्यादा प्रभावित होती है।

    ड्राई स्किन की समस्या से छुटकारा पाने के लिए कई लोग महंगे क्रीम, लोशन और ब्यूटी प्रोडक्ट्स का सहारा लेते हैं, लेकिन कई बार इनसे मनचाहा रिजल्ट नहीं मिलता। ऐसे में अगर आप चाहते हैं कि सर्दियों में भी आपकी त्वचा हेल्दी, सॉफ्ट और ग्लोइंग बनी रहे, तो कुछ आसान घरेलू उपाय बेहद कारगर साबित हो सकते हैं। खास बात यह है कि ये उपाय रात को सोने से पहले अपनाए जाएं, ताकि त्वचा को पूरी रात पोषण मिल सके।

    रात को सोने से पहले चेहरे की ऐसे करें देखभाल

    1. कच्चा दूध
    कच्चा दूध त्वचा के लिए एक बेहतरीन नेचुरल क्लींजर और मॉइस्चराइज़र माना जाता है। सर्दियों में रात को सोने से पहले रुई की मदद से चेहरे पर कच्चा दूध लगाएं और हल्के हाथों से मसाज करें। यह त्वचा की गहराई से सफाई करता है और स्किन को अंदर से पोषण देता है। नियमित इस्तेमाल से त्वचा मुलायम बनी रहती है और चेहरे पर नेचुरल ग्लो नजर आने लगता है।

    2. एलोवेरा जेल
    एलोवेरा को स्किन के लिए वरदान कहा जाता है। इसमें मौजूद गुण त्वचा की नमी को बनाए रखने में मदद करते हैं। ड्राई स्किन से परेशान लोग रात को सोने से पहले चेहरे पर ताजा एलोवेरा जेल लगा सकते हैं। यह त्वचा को ठंडक पहुंचाता है, सूखापन कम करता है और स्किन को सॉफ्ट बनाता है। एलोवेरा नियमित लगाने से त्वचा हेल्दी और फ्रेश नजर आती है।

    3. नारियल तेल
    नारियल तेल सर्दियों के लिए एक बेहतरीन स्किन केयर उपाय है। अगर आप रोज रात को सोने से पहले चेहरे पर 2-3 बूंद नारियल तेल लगाकर हल्की मसाज करते हैं, तो इससे त्वचा को गहराई से नमी मिलती है। नारियल तेल ड्राई स्किन के साथ-साथ काले धब्बे, झाइयां और हल्की सूजन जैसी समस्याओं में भी मददगार माना जाता है। यह स्किन को रिपेयर करने का काम करता है।

    4. शहद
    शहद एक नेचुरल मॉइस्चराइज़र है, जो त्वचा में नमी को लॉक करने में मदद करता है। सर्दियों में रात को सोने से पहले चेहरे पर शहद की हल्की मसाज करने से त्वचा सॉफ्ट और ग्लोइंग बनी रहती है। शहद ड्राई और बेजान त्वचा को पोषण देता है और स्किन को अंदर से हेल्दी बनाता है।

    क्यों जरूरी है नाइट स्किन केयर?

    रात के समय हमारी त्वचा खुद को रिपेयर करती है। इस दौरान अगर स्किन को सही पोषण और नमी मिल जाए, तो उसका असर सुबह साफ नजर आता है। यही वजह है कि रात को सोने से पहले स्किन केयर करना बेहद जरूरी माना जाता है।

  • साजिद खान व्हीलचेयर में नजर आए, बोले- ‘अच्छा नहीं था पर अब ठीक हो रहा हूँ’

    साजिद खान व्हीलचेयर में नजर आए, बोले- ‘अच्छा नहीं था पर अब ठीक हो रहा हूँ’

    नई दिल्ली  साजिद खान को व्हील ऑफ फॉर्च्यूनेट के सेट पर देखा गया। जब फोटोग्राफर्स ने उनसे हालचाल पूछा, तो उन्होंने मज़ाकिया अंदाज़ में जवाब दिया,दिख रहा है तेरेको कैसा हूँ। ये कोई पूछने की बात है?
    साजिद ने खुलासा किया कि उन्हें हाल ही में एक दुर्घटना का सामना करना पड़ा, जिसमें एक पैर में फ्रैक्चर हुआ और दूसरे पैर पर सर्जरी करनी पड़ी। उन्होंने कहा,एक्सीडेंट हो गया था, इस पैर में सर्जरी हुई है, और इस पैर में फ्रैक्चर हो गया।फोटोग्राफर्स के ‘जल्दी ठीक हो जाओ’ कहने पर साजिद ने हिम्मत दिखाई और कहा,वो ही कोशिश कर रहा हूँ। इसलिए व्हीलचेयर में ही किस्मत का पहिया के सेट पर आया।

    सर्जरी और रिकवरी
    पिछले महीने, खबर आई थी कि साजिद खान मुंबई में शूट के दौरान घायल हो गए थे। उनकी फ्रैक्चर हुई पैरों की सर्जरी सफलतापूर्वक की गई। उनकी बहन और फिल्ममेकर फ़राह खान ने पुष्टि की थी कि अब वे पूरी तरह ठीक हैं। साजिद को आख़िरी बार ज़ोया अख़्तर के क्रिसमस पार्टी में देखा गया था।

    व्हील ऑफ फॉर्च्यूनेट में धमाकेदार वापसी
    साजिद इस समय अक्षय कुमार के होस्टेड शो व्हील ऑफ फॉर्च्यूनेट के सेट पर लौट चुके हैं। शो 27 जनवरी से सोनी टीवी और सोनी LIV पर रोज़ रात 9 बजे प्रसारित होगा। साजिद की रिकवरी के बावजूद उनका उत्साह बरकरार है और वे फैंस के सामने जल्दी ही एक्टिव दिखेंगे।

    पॉपुलैरिटी का नया दौर
    हाल ही में, साजिद खान ने बिग बॉस 16 में हिस्सा लेकर ध्यान खींचा था। उनके दोस्तों की मंडली, जिसमें शिव ठाकरे, एमसी स्टेन, निम्रित कौर अहलुवालिया, सुम्बुल तौकीर खान और अब्दु रोजिक शामिल हैं, सोशल मीडिया पर काफी चर्चा में रही।साजिद के फैंस के लिए ये खुशखबरी है कि उनका पसंदीदा फिल्ममेकर जल्द ही स्क्रीन पर वापसी करने को तैयार है, और अब व्हीलचेयर भी उनके उत्साह को रोक नहीं सकती।