Author: bharati

  • गुजरात विधानसभा में UCC बिल पारित…. शादी-तलाक जैसे मामलों में सभी के लिए समान कानून

    गुजरात विधानसभा में UCC बिल पारित…. शादी-तलाक जैसे मामलों में सभी के लिए समान कानून


    अहमदाबाद।
    गुजरात सरकार (Gujarat Government.) ने विधानसभा (Assembly) से समान नागरिक संहिता (Uniform Civil Code.- UCC) बिल 2026 पास हो गया है। इस विधेयक का मकसद शादी, तलाक और विरासत जैसे विषयों के लिए सभी धर्मों के नागरिकों के लिए एक समान कानून की व्यवस्था करना है। उत्तराखंड के बाद गुजरात ऐसा करने वाला दूसरा राज्य बनेगा। यह कानून राज्य के निवासियों और बाहर रह रहे गुजरातियों पर लागू होगा लेकिन अनुसूचित जनजातियों को इससे बाहर रखा गया है। बिल की मुख्य बातों में बहुविवाह पर रोक और लिव-इन संबंधों का अनिवार्य रजिस्ट्रेशन शामिल है।


    यूसीसी वाला दूसरा राज्य होगा गुजरात

    मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने मंगलवार को गुजरात समान नागरिक संहिता (यूसीसी) विधेयक, 2026 विधानसभा में पेश किया। इस विधेयक विधानसभा से पारित होने के साथ ही गुजरात, उत्तराखंड के बाद समान नागरिक संहिता विधेयक पारित करने वाला देश का दूसरा राज्य बन गया है। उत्तराखंड ने फरवरी 2024 में यूसीसी विधेयक पारित किया था।


    एक हफ्ते पहले सौंपी थी रिपोर्ट

    गुजरात सरकार की ओर से नियुक्त एक विशेषज्ञ समिति ने यूसीसी के क्रियान्वयन पर एक हफ्ते पहले अपनी रिपोर्ट सौंपी थी। ‘गुजरात समान नागरिक संहिता, 2026’ नामक यह प्रस्तावित कानून पूरे राज्य में लागू होगा। यही नहीं गुजरात की सीमा से बाहर रहने वाले राज्य के निवासियों पर भी यह कानून प्रभावी होगा।


    समान कानूनी ढांचा तैयार करना है मकसद

    यह प्रस्तावित कानून अनुसूचित जनजातियों और कुछ ऐसे समूहों पर लागू नहीं होगा जिनके पारंपरिक अधिकार संविधान के तहत संरक्षित हैं। विधेयक का मकसद राज्य में समान कानूनी ढांचा तैयार करना है।


    एक से अधिक शादियां करने पर भी रोक

    इस विधेयक में लिव-इन के रजिस्ट्रेशन और औपचारिक घोषणा के माध्यम से उनके समापन का प्रावधान किया गया है। यह बिल एक से अधिक शादियां करने पर भी रोक लगाता है। इस विधेयक के मुताबिक, इस कोड के तहत शादी तभी मान्य मानी जाएगी जब शादी के समय दोनों में से किसी भी पक्ष का कोई जीवित जीवनसाथी ना हो।


    अहमदाबाद में विरोध प्रदर्शन

    इस विधेयक का सड़कों पर विरोध भी शुरू हो गया है। यूनिफॉर्म सिविल कोड (UCC) बिल के विरोध में अहमदाबाद के लाल दरवाजे पर सोशल डेमोक्रेटिक पार्टी ऑफ इंडिया (SDPI) के कार्यकर्ताओं ने प्रदर्शन किया। इस दौरान कई प्रदर्शनकारियों को हिरासत में भी लिया गया। इस कानून के विरोध में AIMIM भी है। AIMIM के कार्यकर्ता भी इस विधेयक का विरोध कर रहे हैं।

  • PM मोदी ने पश्चिम एशिया संकट पर श्रीलंका के राष्ट्रपति से की फोन पर बात, जानें किन मुद्दों पर हुई चर्चा?

    PM मोदी ने पश्चिम एशिया संकट पर श्रीलंका के राष्ट्रपति से की फोन पर बात, जानें किन मुद्दों पर हुई चर्चा?


    नई दिल्ली।
    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Prime Minister Narendra Modi) ने श्रीलंका के राष्ट्रपति अनुरा कुमारा दिसानायके (Sri Lankan President Anura Kumara Dissanayake) से मंगलवार को फोन पर बातचीत की। इस चर्चा में पश्चिम एशिया (West Asia.) की बदलती स्थिति पर विस्तार से विचार विमर्श हुआ। खासतौर पर वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा पर पड़ रहे असर को लेकर गहरी चिंता जताई गई। दोनों नेताओं ने क्षेत्रीय स्थिरता बनाए रखने के महत्व पर जोर दिया। बातचीत के दौरान भारत और श्रीलंका के बीच ऊर्जा सहयोग से जुड़ी प्रमुख पहलों की प्रगति की समीक्षा की गई।

    दोनों देशों ने ऊर्जा क्षेत्र में साझेदारी को और मजबूत करने के लिए ठोस कदम उठाने का फैसला किया। क्षेत्रीय सुरक्षा बढ़ाने के लिए भी कई अहम मुद्दों पर सहमति बनी। यह सहयोग दोनों देशों के हितों को ध्यान में रखते हुए आगे बढ़ाया जाएगा। भारत और श्रीलंका को निकट और विश्वसनीय साझेदार बताया गया। दोनों नेताओं ने साझा चुनौतियों का सामना करने के लिए मिलकर काम करने की प्रतिबद्धता दोहराई।


    एनर्जी सप्लाई पर हुई चर्चा

    वैश्विक स्तर पर ऊर्जा आपूर्ति में हो रही बाधाओं से निपटने के लिए रणनीतिक सहयोग को बढ़ावा देने पर जोर दिया गया। यह साझेदारी दोनों देशों की सुरक्षा और विकास के लिए अहम है। इस चर्चा से भारत-श्रीलंका संबंधों में नई ऊर्जा मिली है। दोनों पक्षों ने भविष्य में भी नियमित संपर्क बनाए रखने और व्यावहारिक सहयोग बढ़ाने का संकल्प लिया। क्षेत्रीय शांति और प्रगति के लिए यह साझा प्रयास महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

    भारत और श्रीलंका के संबंध बेहद पुराने हैं, जो सांस्कृतिक, धार्मिक और ऐतिहासिक विरासत पर आधारित हैं। श्रीलंकाई गृहयुद्ध और भारतीय शांति सेना (IPKF) के हस्तक्षेप से तनाव बढ़ा, लेकिन मुक्त व्यापार समझौते (FTA) ने आर्थिक सहयोग को मजबूत किया। बीते वर्षों में, श्रीलंकाई आर्थिक संकट में भारत ने लगभग 4 अरब डॉलर की सहायता (क्रेडिट लाइन, करेंसी स्वैप, ईंधन और खाद्य सामग्री) देकर पड़ोस प्रथम नीति का सबूत दिया। कोविड महामारी में ऑक्सीजन और वैक्सीन सहायता भी प्रदान की गई। हाल के वर्षों में उच्चस्तरीय यात्राओं, रक्षा समझौते, ऊर्जा कनेक्टिविटी, डिजिटल भुगतान और व्यापार से संबंध नई ऊंचाई पर पहुंचे हैं।

  • CG: वरिष्ठ नक्सली कमांडर पापा राव ने 17 साथियों के साथ डाले हथियार, किया आत्मसमर्पण

    CG: वरिष्ठ नक्सली कमांडर पापा राव ने 17 साथियों के साथ डाले हथियार, किया आत्मसमर्पण


    छत्तीसगढ़।
    छत्तीसगढ़ (Chhattisgarh) में नक्सलियों (Naxalites) की दंडकारण्य विशेष क्षेत्रीय समिति के सदस्य व वरिष्ठ नक्सली कमांडर पापाराव (Senior Naxalite Commander Paparao) ने अपने 17 अन्य साथी माओवादियों के साथ मंगलवार को बीजापुर जिले में आत्मसमर्पण कर दिया। हथियार डालने वाले नक्सलियों में 11 पुरुष और 7 महिला नक्सली शामिल हैं। यह सरेंडर सुरक्षाबलों व राज्य सरकार के लिए एक अहम रणनीतिक सफलता है और 31 मार्च तक देश से माओवादी उग्रवाद के खात्मे की डेडलाइन के संबंध में सबसे अहम पड़ाव भी है।

    एक रिपोर्ट के अनुसार पापा राव ने अपने 17 साथियों के साथ कुटरू थाने में आत्मसमर्पण किया। इसके बाद उन्हें वहां से बस के जरिए जगदलपुर ले जाया गया। अब इस बारे में राज्य सरकार बुधवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस करते हुए जानकारी दे सकती है।


    पापा राव पर घोषित था 25 लाख रुपए का इनाम

    दो दशकों से ज्यादा समय तक घने इंद्रावती-अबूझमाड़ जंगल इलाके में सक्रिय रहा पापा राव भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) से जुड़े आखिरी बड़े कमांडरों में से एक है। आधिकारिक जानकारी के अनुसार पापा राव लगभग 25 वर्षों से जंगलों में सक्रिय था और इस दौरान कई बार सुरक्षा बलों के साथ उसकी मुठभेड़ भी हुई, लेकिन हर बार वह बच निकलता था। राज्य सरकार ने उस पर 25 लाख रुपए का इनाम भी घोषित कर रखा था।

    पापा राव ने दक्षिण बस्तर में सुरक्षा बलों पर कई जानलेवा हमलों की साज़िश रची थी, जिनमें 2010 का ताड़मेटला हमला (तब के दंतेवाड़ा जिले में था, लेकिन अब सुकमा में है) भी शामिल है। इस हमले में 76 जवान मारे गए थे।


    सबसे अहम कमेटी का मुख्य सदस्य था पापा राव

    बस्तर संभाग और आसपास के राज्यों के कुछ हिस्सों में माओवादी गतिविधियों को अंजाम देने वाले दंडकारण्य स्पेशल जोनल कमेटी (DKSZC) को इस प्रतिबंधित संगठन की सबसे मजबूत इकाई माना जाता था। पिछले दो दशकों में सुरक्षा बलों पर कई जानलेवा हमले करने में इसकी अहम भूमिका रही है।

    अधिकारियों के मुताबिक पापा राव का समर्पण छत्तीसगढ़ में वामपंथी उग्रवाद के खिलाफ लड़ाई में एक अहम पड़ाव है। उन्होंने बताया कि यह समर्पण देश के सबसे लंबे समय से चल रहे उग्रवादों में से एक के कमजोर होने का स्पष्ट संकेत है।

    बस्तर रेंज के पुलिस महानिरीक्षक सुंदरराज पी ने कहा, ‘नक्सली संगठन में दंडकारण्य स्पेशल जोनल कमेटी सदस्य तथा साउथ सब जोनल ब्यूरो के इंचार्ज पापा राव का 17 अन्य साथियों के साथ पुनर्वास, क्षेत्र में वामपंथी उग्रवाद को समाप्त करने के हमारे सतत प्रयासों में एक निर्णायक सफलता का प्रतीक है।’


    नक्सलियों ने AK-47 समेत अन्य हथियार भी सौंपे

    सुंदरराज ने बताया कि पापा राव, डिविजनल कमेटी सदस्य प्रकाश मड़वी, अनिल ताती सहित कुल 18 माओवादियों के इस समूह ने हिंसा का मार्ग छोड़कर मुख्यधारा में शामिल होने की इच्छा के साथ आत्मसमर्पण किया है। इनमें सात महिला नक्सली भी शामिल हैं। उन्होंने बताया कि नक्सलियों ने आत्मसपर्मण के दौरान एके-47 राइफलें तथा अन्य हथियार भी सौंपे।

    वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने कहा कि दंडकारण्य क्षेत्र में माओवादी आंदोलन के इतिहास में पहली बार नक्सल संगठन प्रभावी रूप से नेतृत्वविहीन हो गया है। सुंदरराज ने कहा कि सरकार की परिकल्पना और क्षेत्र के लोगों की लंबे समय से रही आकांक्षा के अनुरूप, बस्तर अब एक नई ऊर्जा, नए उत्साह और सकारात्मक पहचान के साथ और अधिक सशक्त होकर उभरने की दिशा में अग्रसर है।


    दो दशकों में हुए कई हमलों में शामिल रहा था DKSZC

    उन्होंने बताया कि DKSZC बस्तर संभाग और पड़ोसी राज्यों के कुछ हिस्सों में माओवादी गतिविधियों के लिए जिम्मेदार है और इसे प्रतिबंधित माओवादी संगठन की सबसे मजबूत इकाई माना जाता था। पिछले दो दशकों में सुरक्षा बलों पर कई जानलेवा हमले करने में इसकी अहम भूमिका रही थी।

    सुंदरराज ने कहा, ‘हमें आशा है कि शेष बचे माओवादी, जो वर्तमान में छोटे-छोटे समूहों में भटक रहे हैं, भी आने वाले दिनों में हिंसा छोड़ मुख्यधारा में लौटने का निर्णय लेंगे।’ उन्होंने बताया कि साउथ सब जोनल ब्यूरो इलाके से जुड़े समर्पण करने वाले सभी 18 माओवादियों को औपचारिक रूप से मुख्यधारा में शामिल करने की प्रक्रिया बाद में पूरी की जाएगी।


    पापा राव को मंगू के नाम से भी जाना जाता है

    इससे पहले दिन में, उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा, जिनके पास गृह मंत्रालय का प्रभार भी है, ने कहा कि राव, जिन्हें मंगू के नाम से भी जाना जाता है, बस्तर इलाके में अपने दल के एक दर्जन से अधिक सदस्यों के साथ समर्पण करेंगे। शर्मा ने कहा, ‘इस समर्पण के साथ ही, राज्य में उस वरिष्ठ स्तर का कोई भी नक्सली नेता सक्रिय नहीं रहेगा। इसके साथ ही छत्तीसगढ़ 31 मार्च, 2026 की तय समयसीमा तक सशस्त्र नक्सलवाद से पूरी तरह मुक्त हो जाएगा।’


    ‘कभी पशुपति से तिरुपति तक फैला हुआ था रेड कॉरिडोर’

    अधिकारियों ने बताया कि यह समर्पण भाकपा (माओवादी) से जुड़े माओवादी नेटवर्क के बड़े पैमाने पर कमजोर पड़ने का संकेत है, जिसने सालों तक मध्य भारत के बड़े हिस्सों में अपनी समानांतर सत्ता कायम रखी थी। उन्होंने कहा कि ‘रेड कॉरिडोर’ कभी बिहार, छत्तीसगढ़, झारखंड, ओडिशा, महाराष्ट्र और आंध्र प्रदेश के कुछ हिस्सों से होते हुए ‘पशुपति से तिरुपति’ तक फैला हुआ था और नक्सलियों के प्रभाव वाले इस गलियारे को देश के लिए ‘सबसे गंभीर आंतरिक सुरक्षा चुनौती’ माना जाता था। अधिकारियों ने बताया कि इस इलाके में शासन-प्रशासन कमज़ोर पड़ गया था, और माओवादियों ने हाशिए पर पड़े समुदायों के बीच जोर-जबरदस्ती और सहमति, दोनों के जरिए अपना प्रभाव जमा रखा था।

  • पश्चिम एशिया तनाव में भी चीन में पेट्रोल-LPG की हो रही भरपूर सप्लाई…. जिनपिंग ने ढूंढा नया रास्ता!

    पश्चिम एशिया तनाव में भी चीन में पेट्रोल-LPG की हो रही भरपूर सप्लाई…. जिनपिंग ने ढूंढा नया रास्ता!


    बीजिंग।
    मिडल ईस्ट (Middle East) में छिड़ी भीषण जंग और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (Strait of Hormuz) की तालाबंदी ने दुनिया के कई देशों में हाहाकार मचा दिया है. तेल संकट से जूझ रहे देशों में चीन (China) भी शामिल होता लेकिन मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया जा रहा है कि शी जिनपिंग (Xi Jinping) ने एक रास्ता ढूंढ़ लिया है. ऊर्जा सुरक्षा पर खतरा देखते हुए बीजिंग (Beijing) ने पुराने ट्रे़ड रास्तों का विकल्प ढूंढना शुरू कर दिया है. ऐसे में म्यांमार चीन के लिए सिर्फ एक पड़ोसी नहीं, बल्कि हिंद महासागर में उतरने का सबसे सुरक्षित ‘बैकडोर’ बन गया है. चीन-म्यांमार आर्थिक गलियारा (CMEC) अब केवल व्यापार का जरिया नहीं, बल्कि एक रणनीतिक ढाल बन चुका है।

    बड़ी-बड़ी पाइपलाइनें: चीन ने म्यांमार के क्यायुकफ्यू बंदरगाह से लेकर चीन के कुनमिंग शहर तक दो बड़ी-बड़ी पाइपलाइनें बिछाई हैं. इनका सबसे बड़ा मकसद ‘मलक्का डिलेमा’ से बचना है.

    कच्चा तेल: यह पाइपलाइन सालाना 2.2 करोड़ टन यानी लगभग 2,40,000 बैरल प्रतिदिन कच्चा तेल ले जाने की क्षमता रखती है. खाड़ी देशों और अफ्रीका से आने वाले बड़े टैंकर म्यांमार के तट पर तेल उतारते हैं, जो पाइपलाइन के जरिए सीधे चीन पहुंचता है.

    नैचुरल गैस: इसके साथ ही एक गैस पाइपलाइन भी है जो सालाना 12 अरब क्यूबिक मीटर गैस सप्लाई करती है. इसमें म्यांमार के अपने अपतटीय क्षेत्रों की गैस भी शामिल है.


    हिंद महासागर में चीन की बिसात

    चीन अपनी मौजूदगी दर्ज कराने के लिए ‘मोतियों की माला’ (String of Pearls) की नीति को और मजबूत कर रहा है. मालदीव में चीन ने इंफ्रास्ट्रक्चर और ‘फ्रेंडशिप ब्रिज’ जैसे प्रोजेक्ट्स में भारी निवेश किया है ताकि भारत के प्रभाव को कम किया जा सके।

    भारत ने ग्रेट निकोबार द्वीप पर नया एयरपोर्ट और मिलिट्री बेस बनाकर चीन की घेराबंदी तेज कर दी है. यह बेस बंगाल की खाड़ी और मलक्का जलडमरूमध्य के बीच एक ‘नेचुरल बैरियर’ की तरह काम करेगा.

    म्यांमार: चीन का ‘ट्रम्प कार्ड’
    सारे रास्तों के बंद होने पर म्यांमार ही वो एकमात्र रास्ता है जो चीन को सीधे बंगाल की खाड़ी से जोड़ता है. चीन ने इसके लिए कई तरह की चालें चली हैं, जिसमें से एक म्यांमार के आंतरिक संघर्षों में एक ‘मध्यस्थ’ की भूमिका भी है, ताकि CMEC के प्रोजेक्ट्स सुरक्षित रहें. चीन के बढ़ते प्रभाव को देखते हुए वाशिंगटन में भी अब चर्चा शुरू हो गई है कि क्या म्यांमार पर लगाए गए प्रतिबंध उसे पूरी तरह चीन की गोद में धकेल रहे हैं?

  • 63 गेंदों में 120 रन ठोक धोनी से छीनी जीत फिर अचानक गायब हो गया IPL का ये हीरो

    63 गेंदों में 120 रन ठोक धोनी से छीनी जीत फिर अचानक गायब हो गया IPL का ये हीरो


    नई दिल्ली:  इंडियन प्रीमियर लीग को अक्सर किस्मत बदलने वाली लीग कहा जाता है जहां एक शानदार प्रदर्शन खिलाड़ी को रातोंरात स्टार बना देता है। लेकिन हर कहानी का अंत खुशहाल नहीं होता। कुछ खिलाड़ी ऐसे भी होते हैं जो एक समय चमकते हैं और फिर अचानक गुमनामी में खो जाते हैं। ऐसी ही कहानी है Paul Valthaty की
    साल 2011 का आईपीएल सीजन इस खिलाड़ी के नाम रहा। 13 अप्रैल 2011 को Kings XI Punjab और Chennai Super Kings के बीच मोहाली में मुकाबला खेला गया। चेन्नई की टीम उस समय MS Dhoni की कप्तानी में थी और उन्होंने पहले बल्लेबाजी करते हुए 188 रनों का बड़ा स्कोर खड़ा किया था। उस दौर में यह स्कोर जीत के लिए काफी माना जाता था

    लेकिन इसके बाद जो हुआ उसने सबको हैरान कर दिया। पंजाब की ओर से ओपनिंग करने उतरे पॉल वल्थाटी ने अकेले दम पर मैच पलट दिया। उन्होंने 63 गेंदों में नाबाद 120 रन ठोक दिए जिसमें 19 चौके और 2 छक्के शामिल थे। उनकी इस विस्फोटक पारी की बदौलत पंजाब ने 19.1 ओवर में ही लक्ष्य हासिल कर लिया। यह पारी आज भी आईपीएल इतिहास की सबसे यादगार पारियों में गिनी जाती है

    वल्थाटी सिर्फ एक मैच के हीरो नहीं थे। पूरे 2011 सीजन में उन्होंने 14 मैचों में 463 रन बनाए और 7 विकेट भी लिए। उस समय वह ऑरेंज कैप की दौड़ में भी शामिल थे और बड़े खिलाड़ियों को टक्कर दे रहे थे। ऐसा लग रहा था कि भारतीय क्रिकेट को एक नया सितारा मिल गया है

    लेकिन किस्मत ने अचानक करवट बदल ली। शानदार सीजन के बाद वल्थाटी को कलाई में गंभीर चोट लग गई। उन्होंने वापसी की कोशिश जरूर की लेकिन पुरानी लय हासिल नहीं कर सके। 2012 में उनका प्रदर्शन बेहद खराब रहा और 2013 में भी वह कुछ खास नहीं कर पाए। इसके बाद उन्हें टीम से बाहर कर दिया गया और फिर किसी फ्रेंचाइजी ने उन्हें मौका नहीं दिया धीरे धीरे वह आईपीएल और क्रिकेट की मुख्यधारा से गायब हो गए। एक समय जो खिलाड़ी सुर्खियों में था वह अब फैंस की यादों में भी धुंधला पड़ गया

    हालांकि क्रिकेट से उनका रिश्ता पूरी तरह खत्म नहीं हुआ। अब वह अमेरिका में कोचिंग के जरिए अपनी नई पारी खेल रहे हैं और युवा खिलाड़ियों को ट्रेनिंग दे रहे हैं। उन्होंने खेल से संन्यास के बाद नौकरी भी की और क्रिकेट प्रशासन से भी जुड़े

    पॉल वल्थाटी की कहानी क्रिकेट की उस सच्चाई को दिखाती है जहां सफलता और असफलता के बीच की दूरी बहुत कम होती है। एक पारी आपको आसमान पर पहुंचा सकती है और एक चोट आपको जमीन पर ला सकती है यह कहानी सिर्फ एक खिलाड़ी की नहीं बल्कि उस अनिश्चितता की है जो क्रिकेट जैसे खेल को इतना रोमांचक और भावनात्मक बनाती है

  • कन्‍या पूजन में लांगूर क्यों बुलाया जाता है? जानिए इसका पौराणिक महत्व

    कन्‍या पूजन में लांगूर क्यों बुलाया जाता है? जानिए इसका पौराणिक महत्व


    नई दिल्ली। हिन्दू धर्म में नवरात्रि का पर्व बहुत महत्वपूर्ण माना जाता है। 19 मार्च 2026 से चैत्र नवरात्रि शुरू हुई और 27 मार्च 2026 को इसका समापन होगा। 26 मार्च को अष्टमी और 27 मार्च को नवमी मनाई जाएगी। नवमी के दिन हवन और कन्‍या पूजन का आयोजन होता है। यह व्रत और पूजा कन्‍या पूजन के बिना अधूरी मानी जाती है।

    कन्‍या पूजन का तरीका
    कन्‍या पूजन में 2 से 9 साल तक की छोटी लड़कियों को बुलाया जाता है। उन्हें देवी दुर्गा का रूप मानकर पूजा जाता है। पूजा के दौरान इन कन्‍याओं को सम्मानपूर्वक खीर-पूड़ी और हलवे का भोजन कराया जाता है इसके बाद उन्हें भेंट दी जाती है।

    लांगूर कौन होता है?
    कन्‍या पूजन में कन्‍याओं के साथ एक छोटे लड़के को भी बुलाना जरूरी होता है जिसे लांगूर कहा जाता है। जिस तरह कन्‍याएं देवी दुर्गा का रूप मानी जाती हैं वैसे ही यह लड़का भैरवनाथ का रूप माना जाता है। उसे लंगूर लंगूरिया या बटुक भी कहा जाता है। बिना लांगूर के बुलाए कन्‍या पूजन पूरी नहीं माना जाता।

    लांगूर के पूजन का पौराणिक कारण
    कथा के अनुसार जब भगवान शिव ने माता दुर्गा की रक्षा के लिए भैरव का रूप धारण किया था तब माता दुर्गा ने वरदान दिया कि जो भी भक्त मेरी पूजा करेगा उसे भैरव की भी पूजा करनी होगी। इसलिए कन्‍या पूजन में लड़के को भैरव का रूप मानकर पूजा किया जाता है ताकि पूजा पूर्ण हो सके।

    भैरव देवता का महत्व

    कई प्रसिद्ध देवीधामों में भैरव का मंदिर होता है जैसे वैष्णो देवी मंदिर में। यहाँ तक कि मंदिर दर्शन तब तक अधूरे माने जाते हैं जब तक भैरव बाबा के दर्शन नहीं किए जाते।

    सुख-समृद्धि और सुरक्षा का संदेश

    बाबा काल भैरव को शत्रुओं और नकारात्मक ऊर्जा का नाश करने वाला देवता माना जाता है। मान्यता है कि कन्‍या पूजन में बटुक या लांगूर को बुलाकर पूजन और भोजन कराने से घर में सुख समृद्धि आती है और सुरक्षा बनी रहती है।

    Disclaimer: यह खबर केवल जागरूकता के लिए लिखी गई है। इसको लिखने में सामान्य जानकारियों की मदद ली गई है। हम इसकी पुष्टि नहीं करते हैं।

  • हरियाणा में एक और बैंक घोटाला…. कोटक महिंद्रा पर 160 करोड़ रुपये गायब करने का आरोप

    हरियाणा में एक और बैंक घोटाला…. कोटक महिंद्रा पर 160 करोड़ रुपये गायब करने का आरोप


    पंचकूला।
    हरियाणा (Haryana) में आईडीएफसी फर्स्ट बैंक (IDFC First Bank) में 590 करोड़ रुपये (590 Crore Rupees) के घोटाले के बाद अब एक और बैंक में स्कैम किया गया है. पंचकूला (Panchkula) के सेक्टर-11 स्थित कोटक महिंद्रा बैंक (Kotak Mahindra Bank) की शाखा में हरियाणा सरकार (Haryana Government) के करीब 160 करोड़ रुपये गायब मिले हैं. इसमें पंचकूला नगर निगम की पांच फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) का रिकॉर्ड नहीं मिलने से हड़कंप मच गया है. फिलहाल, जांच के आदेश दिए गए हैं. उधर, विजिलेंस ने इस संंबंध में केस दर्ज कर लिया है. बैंक कर्मचारियों और अन्य के खिलाफ केस दर्ज किया गया है।

    जानकारी के अनुसार, नगर निगम ने इस बैंक शाखा में कुल 16 एफडी करवाई थीं, जिन्हें पहले स्टेट बैंक ऑफ इंडिया से ट्रांसफर किया गया था. हाल ही में जब निगम ने एफडी मैच्योर होने पर राशि वापसी के लिए पत्र लिखा, तो बैंक ने जवाब दिया कि संबंधित एफडी का कोई रिकॉर्ड उनके पास मौजूद नहीं है।

    इस खुलासे के बाद नगर निगम ने तत्काल आंतरिक जांच शुरू की. अकाउंट अधिकारियों, कमिश्नर और ज्वाइंट कमिश्नर की टीम ने दस्तावेजों की जांच कर रिपोर्ट सरकार और बैंक को भेजी. शुरुआती जांच में सामने आया कि फर्जी तरीके से समान दस्तावेजों पर अतिरिक्त खाते खोलकर रकम को अन्य खातों में ट्रांसफर की गई. मामले में एक महिला खाते में बड़ी राशि ट्रांसफर होने की भी आशंका जताई जा रही है. अहम बात है कि पैसा शैल कंपनियों के खाते में जमा किया गया था।

    घोटाले को छिपाने के लिए कथित तौर पर एफडी के रिन्यूअल दस्तावेज नियमित रूप से निगम को भेजे जाते रहे, जिससे अधिकारियों को संदेह नहीं हुआ. हालांकि, जब हालिया घोटालों के बाद राशि वापस मांगी गई, तब पूरा मामला उजागर हुआ. मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस के आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (इकोनॉमिक्स विंग) को जांच सौंपी गई है. साथ ही बैंक प्रबंधन ने भी शिकायत दर्ज कराई है. यह मामला करीब 590 करोड़ रुपये के बड़े घोटाले से जुड़ा माना जा रहा है, जिसमें पहले ही अन्य बैंकों के नाम सामने आ चुके हैं. अब जांच के बाद ही स्पष्ट हो पाएगा कि इस घोटाले में किन-किन लोगों की भूमिका रही।


    महिला के खाते में ट्रांसफर हुआ पैसा

    अब तक मिली जानकारी के अनुसार, एफडी के नाम पर बैंक में जमा कराई गई राशि को बैंक ने विभिन्न फर्जी खातों में ट्रांसफर किया है. मामले का खुलासा तब हुआ जब निगम ने 58 करोड़ रुपये और 102 करोड़ की एफडी की मैच्योरिटी राशि अपने खाते में ट्रांसफर करने के लिए कहा और फिर बैंक ने स्टेटमेंट में राशि ट्रांसफर दिखाई और बताया कि वास्तविक खाते में पैसा नहीं पहुंचा. जांच में पता चला कि स्टेटमेंट भी फर्जी थी और रकम गायब है. सूत्रों के अनुसार एक महिला के खाते में बड़ी रकम ट्रांसफर हुई है. बताया जा रहा है कि उसके परिवार में कुछ IAS -IPS अधिकारी हैं।


    पहले हुआ था 590 करोड़ रुपये का स्कैम

    गौर रहे कि इसके पहले आईडीएफसी फर्स्ट बैंक और एयू बैंक में भी पंचकूला नगर निगम के करोड़ों रुपये का गबन किया गया था. आईडीएफसी फर्स्ट बैंक में कुल 590 करोड़ रुपये की राशि का फ्रॉड हुआ था, हरियाणा सरकार का यह पैसा हालांकि, बैंक ने बाद में लौटा दिया था, लेकिन इस मामले में अब तक 11 आरोपी गिरफ्तार हो चुके हैं।

  • IPL 2026 में तेज गेंदबाज क्यों हो रहे चोटिल? Royal Challengers Bengaluru अधिकारी ने खोला राज

    IPL 2026 में तेज गेंदबाज क्यों हो रहे चोटिल? Royal Challengers Bengaluru अधिकारी ने खोला राज


    नई दिल्ली। आईपीएल 2026 से पहले तेज गेंदबाज की चोट ने सभी टीमों की चिंता बढ़ा दी है। इंडियन प्रीमियर लीग के इस सीजन में कई बड़े नाम चोटिल होने के कारण या तो आउट हो गए हैं या शुरुआती मैचों में नहीं खेल पाएंगे। इसमें जसप्रित बुमरा, जोश हेज़लवुड, पैट कमिंस और मिचेल स्टार्क जैसे स्टार खिलाड़ी शामिल हैं। रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु के क्रिकेट डायरेक्टर मो बोबट ने इस समस्या का बड़ा कारण बताया है।

    बेस्ट क्रिकेट कैलेंडर बना सबसे बड़ी वजह

    मो बोबट के मुताबिक, तेज गेंदबाज के कॉन्सटेंट होने की सबसे बड़ी दुनिया अंतरराष्ट्रीय और घरेलू क्रिकेट की सबसे बड़ी साजिश है। प्लेयर्स को साल भर अलग-अलग अलग-अलग गेम और सीरीज़ वाले गेम्स मिलते हैं, जिससे उनके शरीर पर लगातार दबाव बना रहता है। प्रमाणित पर प्रमाणित नामांकन के लिए और यह भी निजीकरण होता है, क्योंकि उनके अध्ययन में शारीरिक मेहनत और फिटनेस की सबसे ज्यादा जरूरत होती है। लगातार मैच मैच से उन्हें पर्याप्त आराम नहीं मिलता, जिससे चोट का खतरा बढ़ जाता है।

    विचारधारा की रणनीति पर असर पड़ रहा है

    इन दस्तावेजों का सुसंगत सुसंगतता की रणनीति और संतुलन पर ध्यान दिया जा रहा है। आरसीबी को भी अपने स्टार सहयोगी जोश हेजलवुड के शुरुआती शुरुआती मैचों में नहीं जाना चाहिए। वहीं, नैथन ऐलिस पूरे टूर्नामेंट में आउट हो चुके खिलाड़ी हैं। ऐसे में टीमों को अपने फार्मूले में बदलाव करना पड़ रहा है, जिससे प्रदर्शन प्रभावित हो सकता है। बोबट ने कहा कि यह स्थिति सिर्फ एक टीम की नहीं है, बल्कि लगभग सभी टीमों के लिए चुनौती बन गई है।

    समाधान आसान नहीं, बेहतर क्षमता ही रास्ता

    मो बोबट ने सोचा कि इस समस्या का कोई आसान समाधान नहीं है। हालाँकि, उन्होंने कहा कि फ़्रैंचाइज़ी और अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट बोर्ड के बीच बेहतर तालमेल और संवाद ज़रूरी है। इसमें मेडिकल परीक्षाओं की भूमिका भी अहम है, जो खिलाड़ियों की फिटनेस पर लगातार नजर रखते हैं। उन्होंने हवाला देते हुए कहा कि क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया के शानदार प्रदर्शन की वजह से ही हेजलवुड की वापसी बेहतर तरीके से की जा सकी।

    तेजस्वी चुनौती के लिए

    विशेषज्ञ का मानना ​​है कि अगर क्रिकेट कैलेंडर इसी तरह से जुड़ा रहा, तो भविष्य में सूची की सूची जारी की जा सकती है और बढ़ोतरी हो सकती है। ऐसे में खिलाड़ियों के वर्कलोड और फिटनेस पर खास ध्यान देना होगा, ताकि वे लंबे समय तक खेल में बने रहें।

  • बेंच पर बैठा खिलाड़ी बना अरबों की टीम का मालिक आर्यमान बिड़ला की चौंकाने वाली कहानी

    बेंच पर बैठा खिलाड़ी बना अरबों की टीम का मालिक आर्यमान बिड़ला की चौंकाने वाली कहानी


    नई दिल्ली: इंडियन प्रीमियर लीग 2026 के आगाज से ठीक पहले Royal Challengers Bengaluru ने ऐसा कदम उठाया है जिसने क्रिकेट और बिजनेस दोनों दुनिया को चौंका दिया है। टीम की मालिकाना हक में बदलाव हुआ है और अब इसकी कमान एक ऐसे शख्स के हाथ में है जो कभी खुद मैदान पर मौका पाने के लिए तरसा था।

    साल 2018 की आईपीएल नीलामी में Rajasthan Royals ने आर्यमान बिड़ला को 30 लाख रुपये में खरीदा था। उस समय उनकी उम्र सिर्फ 20 साल थी और उम्मीद थी कि उन्हें जल्द ही मौका मिलेगा। लेकिन पूरा सीजन गुजर गया और वह एक भी मैच नहीं खेल पाए। मैदान पर उतरने का सपना अधूरा ही रह गया।

    इस निराशा के बाद उन्होंने 2019 में क्रिकेट को अलविदा कहने का फैसला किया। यह फैसला आसान नहीं था लेकिन उन्होंने अपने परिवार के बिजनेस को आगे बढ़ाने का रास्ता चुना। उनके पिता Kumar Mangalam Birla के नेतृत्व में Aditya Birla Group पहले से ही देश की बड़ी कंपनियों में शामिल था और आर्यमान ने इसी दुनिया में अपनी नई पहचान बनानी शुरू की।

    समय बदला और किस्मत ने ऐसा मोड़ लिया जिसकी किसी ने कल्पना भी नहीं की थी। आदित्य बिड़ला ग्रुप ने अन्य निवेशकों के साथ मिलकर RCB को लगभग 16660 करोड़ रुपये में खरीद लिया। यह सौदा आईपीएल इतिहास के सबसे बड़े सौदों में शामिल हो गया। इस ऐतिहासिक डील के बाद आर्यमान बिड़ला को टीम का चेयरमैन बनाया गया।

    क्रिकेट से उनका रिश्ता पूरी तरह खत्म नहीं हुआ था। उन्होंने मध्य प्रदेश के लिए घरेलू क्रिकेट खेला और रणजी ट्रॉफी में भी नजर आए। खास बात यह है कि वह मौजूदा RCB कप्तान Rajat Patidar के साथ ओपनिंग भी कर चुके हैं। उनके फर्स्ट क्लास करियर में 9 मैचों में 414 रन शामिल हैं जिसमें एक शतक और एक अर्धशतक भी है।

    अब उनकी नई भूमिका मैदान के अंदर नहीं बल्कि बोर्डरूम में है जहां वह टीम की रणनीति और भविष्य को दिशा देंगे। यह सफर सिर्फ एक खिलाड़ी का नहीं बल्कि उस सोच का उदाहरण है जहां असफलता अंत नहीं बल्कि नई शुरुआत बन जाती है।

    आर्यमान बिड़ला की कहानी यह बताती है कि अगर एक रास्ता बंद हो जाए तो दूसरा रास्ता और भी बड़ा अवसर लेकर आ सकता है। कभी डेब्यू के लिए इंतजार करने वाला यह खिलाड़ी आज पूरी टीम का मालिकाना संभाल रहा है और आईपीएल के सबसे बड़े मंच पर अपनी नई पारी शुरू कर चुका है।

  • ‘हैवान’ के लिए अक्षय कुमार की दिलचस्प कोशिश, लेकिन प्रियदर्शन ने नहीं दिया मौका

    ‘हैवान’ के लिए अक्षय कुमार की दिलचस्प कोशिश, लेकिन प्रियदर्शन ने नहीं दिया मौका

    नई दिल्ली। अक्षय कुमार और डायरेक्टर प्रियदर्शन की जोड़ी ने कई हिट फिल्में दी हैं। दोनों के नाम गरम मसाला, हेरा फेरी जैसी फिल्में हैं। और अब आने वाले दिनों में भूत बंगला और हैवान में दोनों का काम नजर आने वाला है। अब हाल में डायरेक्टर ने बताया कि उन्होंने कभी अक्षय को कोई स्क्रिप्ट नहीं सुनाई। दोनों के बीच बस बातचीत होती है और वो फिल्म का हिस्सा बन जाते हैं। प्रियदर्शन ने कहा कि हैवान के लिए खुद अक्षय ने उनसे रोल मांगा था। दोनों के बीच बातचीत हुई और अक्षय को फिल्म मिल गई।

    अक्षय ने खुद मांगा रोल
    बातचीत में प्रियदर्शन ने बताया कि भूत बंगला की शूटिंग के दौरान अक्षय कुमार ने उनसे पूछा था कि वो अगली कौनसी फिल्म बना रहे हैं। डायरेक्टर ने उनसे कह दिया कि वो फिल्म बना रहे हैं लेकिन उन्हें विलेन नहीं मिल रहा है। अक्षय जो जब फिल्म के बारे अक्षय को पता चला तो वो इसका हिस्सा बन गए। प्रियदर्शन ने कहा कि वो बहुत हैरान थे। फिल्म के बारे में कोई डिटेल में डिस्कशन नहीं हुआ। मैंने अक्षय को कभी फिल्म नरेट नहीं की। मैं उन्हें बस कहानी और किरदार बता देता हूं। वो हमेशा मुझसे पूछते हैं कि मैं कितना एक्साइटेड हूं। अगर मैं उन्हें कहता हूं कि मैं एक्साइटेड हूं तो वो खुश नहीं होंगे। अगर मैंने कह दिया कि मैं बहुत एक्साइटेड हूं तो वो कहेगा चलिए फिल्म बनाते हैं सर।

    अब कॉमेडी फिल्म नहीं बनाना चाहते प्रियदर्शन
    डायरेक्टर प्रियदर्शन ने कहा कि वो अब पूरी तरह से कॉमेडी फिल्म नहीं बनाना चाहते। हैवान में भी कुछ सीन कॉमेडी के हैं। लेकिन वो एक थ्रिलर फिल्म है। डायरेक्टर ने कहा कि उन्हें काम करते हुए 45 साल हो गए हैं। अब वो थोड़ा स्लो होना चाहते हैं।

    ओप्पम का हिंदी रीमेक
    बता दें, अक्षय कुमार की हैवान एक मलयालम फिल्म ओप्पम की हिंदी रीमेक है। इस फिल्म की कहानी एक ऐसे कैदी पर आधारित है जो सजा सुनाने वाले जज और उनकी बेटी को मार देना चाहता है। लेकिन इसमें बिल्डिंग का लिफ्टमैन भी है जो जज की बेटी को बचाने की कोशिश करता है। खास बात ये है कि ये किरदार अंधा है। इस किरदार को सैफ अली खान निभाने वाले हैं। फिल्म हैवान इस साल अगस्त में दस्तक देने वाली है।