Author: bharati

  • मिलावटी हल्दी से बचें: ये आसान ट्रिक बताएगी शुद्धता का सच

    मिलावटी हल्दी से बचें: ये आसान ट्रिक बताएगी शुद्धता का सच


    नई दिल्ली । भारतीय रसोई में हल्दी सिर्फ एक मसाला नहीं, बल्कि सेहत और औषधीय गुणों का अहम हिस्सा मानी जाती है। लेकिन आजकल बाजार में मिलावट वाली हल्दी की समस्या बढ़ती जा रही है, जो लंबे समय में शरीर के लिए नुकसानदायक साबित हो सकती है। ऐसे में हल्दी की शुद्धता जांचना बेहद जरूरी हो जाता है।

    विशेषज्ञों के मुताबिक कई बार हल्दी में चमकदार पीला रंग देने के लिए मेटानिल येलो, लेड क्रोमेट जैसे केमिकल्स मिलाए जाते हैं। इसके अलावा चॉक पाउडर या घटिया क्वालिटी के कच्चे पदार्थों की मिलावट भी की जाती है, जिससे इसकी शुद्धता पर असर पड़ता है।

    पानी से करें आसान टेस्ट
    घर पर हल्दी की शुद्धता जांचने का सबसे आसान तरीका है वॉटर टेस्ट। इसके लिए एक गिलास गुनगुने पानी में एक चम्मच हल्दी डालकर कुछ देर छोड़ दें। अगर हल्दी नीचे बैठ जाए और पानी हल्का पीला रहे, तो हल्दी को शुद्ध माना जाता है। लेकिन अगर पानी ज्यादा गहरा पीला हो जाए या हल्दी पूरी तरह घुलने लगे, तो यह मिलावट का संकेत हो सकता है।

    हथेली से भी पता चलेगा सच
    एक और आसान तरीका है हथेली टेस्ट। एक चुटकी हल्दी हथेली पर रखकर उसे अंगूठे से 10–20 सेकंड तक रगड़ें। असली हल्दी हल्का पीला दाग छोड़ती है, जबकि मिलावटी हल्दी का रंग अक्सर अलग या फीका होता है।

    मिलावटी हल्दी के नुकसान
    विशेषज्ञों के अनुसार मिलावटी हल्दी के सेवन से पेट दर्द, अपच, मतली और फूड पॉइजनिंग जैसी समस्याएं हो सकती हैं। कुछ मामलों में लंबे समय तक इसका सेवन लिवर और पाचन तंत्र पर भी असर डाल सकता है।

    खरीदते समय रखें ये सावधानी
    हल्दी खरीदते समय हमेशा भरोसेमंद ब्रांड चुनें और ज्यादा चमकदार पीले रंग पर भरोसा न करें। समय-समय पर घर में इसकी जांच करना भी सुरक्षित माना जाता है।

    विशेषज्ञों का कहना है कि रोजाना इस्तेमाल होने वाले मसालों की शुद्धता पर ध्यान देना जरूरी है, क्योंकि छोटी-सी मिलावट भी लंबे समय में बड़ी स्वास्थ्य समस्या का कारण बन सकती है।

  • बढ़ती परेशानियों के बीच खाने पर असर, हर निवाले से पहले सोचने को मजबूर लोग

    बढ़ती परेशानियों के बीच खाने पर असर, हर निवाले से पहले सोचने को मजबूर लोग


    नई दिल्ली । आजकल कई लोग ऐसी परेशानी से जूझ रहे हैं, जिसमें खाना खाते ही तुरंत वॉशरूम जाने की जरूरत महसूस होने लगती है। बाहर खाना हो, ऑफिस में लंच करना हो या किसी फंक्शन में बैठना—हर बार मन में यही डर बना रहता है कि कहीं अचानक टॉयलेट न जाना पड़ जाए। डॉक्टरों के मुताबिक यह समस्या मामूली लग सकती है, लेकिन लंबे समय तक बनी रहे तो बड़ी बीमारी का संकेत भी हो सकती है।

    विशेषज्ञ बताते हैं कि इस स्थिति को मेडिकल भाषा में गैस्ट्रोकोलिक रिफ्लेक्स (Gastrocolic Reflex) कहा जाता है। यह शरीर की एक प्राकृतिक प्रक्रिया है, जिसमें खाना पेट में पहुंचते ही आंतें सक्रिय हो जाती हैं। हालांकि अगर यह प्रतिक्रिया जरूरत से ज्यादा होने लगे और हर बार दस्त, पेट दर्द या गैस की समस्या पैदा करे, तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।

    डॉक्टरों के अनुसार, कई बार पेट ठीक से साफ न होने, खराब खानपान, ज्यादा मसालेदार भोजन, तनाव या कमजोर पाचन तंत्र के कारण यह समस्या बढ़ जाती है। खाना खाते ही पेट में मरोड़, गैस और टॉयलेट जाने की तीव्र इच्छा होने लगती है। लंबे समय तक ऐसा होना आंतों में संक्रमण या पाचन संबंधी बीमारी की तरफ इशारा कर सकता है।

    विशेषज्ञ यह भी मानते हैं कि अगर यह समस्या लगातार बनी रहे, तो लिवर और आंतों की जांच करवाना जरूरी हो जाता है। समय रहते इलाज न कराने पर शरीर में पोषक तत्वों की कमी, कमजोरी और गंभीर पाचन समस्याएं हो सकती हैं।

    इस परेशानी से जुड़ी कुछ प्रमुख बीमारियां भी सामने आती हैं। इनमें इरिटेबल बॉवेल सिंड्रोम (IBS) प्रमुख है, जिसमें खाना खाते ही पेट दर्द और गैस बनने लगती है। वहीं कुछ लोगों को दूध या डेयरी उत्पादों से एलर्जी होती है, जिसे लैक्टोज इंटॉलरेंस कहा जाता है। ऐसे लोगों को दूध पीते ही दस्त या पेट खराब होने लगता है। इसके अलावा सीलिएक डिजीज में गेहूं या ग्लूटेन से बनी चीजें खाने पर आंतें प्रभावित होती हैं और बार-बार दस्त की समस्या हो सकती है।

    डॉक्टरों की सलाह है कि अगर खाना खाते ही बार-बार टॉयलेट जाना पड़ रहा है, पेट में लगातार दर्द रहता है, वजन कम हो रहा है या कमजोरी महसूस हो रही है, तो तुरंत विशेषज्ञ से जांच करवानी चाहिए। खानपान में सुधार, पर्याप्त पानी, फाइबर युक्त भोजन और तनाव कम करके इस समस्या को काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है।

  • प्रेग्नेंसी डायबिटीज को हल्के में न लें, बाद में बढ़ सकता है गंभीर बीमारियों का रिस्क

    प्रेग्नेंसी डायबिटीज को हल्के में न लें, बाद में बढ़ सकता है गंभीर बीमारियों का रिस्क


    नई दिल्ली । गर्भावस्था के दौरान होने वाली जेस्टेशनल डायबिटीज को अक्सर महिलाएं अस्थायी समस्या मानकर भूल जाती हैं, लेकिन विशेषज्ञों के मुताबिक इसका असर डिलीवरी के बाद भी लंबे समय तक शरीर पर बना रह सकता है। डॉक्टरों का कहना है कि प्रेग्नेंसी के बाद ब्लड शुगर भले ही सामान्य हो जाए, लेकिन शरीर में हुए हार्मोनल और मेटाबॉलिक बदलाव भविष्य में थायरॉयड, हार्ट डिजीज और टाइप-2 डायबिटीज जैसी गंभीर बीमारियों का खतरा बढ़ा सकते हैं।

    विशेषज्ञों के अनुसार, मां बनने के बाद ज्यादातर महिलाओं का पूरा ध्यान बच्चे की देखभाल में चला जाता है। ऐसे में लगातार थकान, वजन बढ़ना, बाल झड़ना, कमजोरी, मूड स्विंग्स, डिप्रेशन या ठंड ज्यादा लगने जैसे लक्षणों को सामान्य मानकर नजरअंदाज कर दिया जाता है। जबकि यही संकेत थायरॉयड डिसफंक्शन की ओर इशारा कर सकते हैं।

    डॉक्टरों का कहना है कि जेस्टेशनल डायबिटीज के दौरान शरीर में इंसुलिन रेजिस्टेंस बढ़ जाता है, जिसका असर थायरॉयड ग्लैंड पर भी पड़ सकता है। थायरॉयड शरीर के मेटाबॉलिज्म, हार्ट रेट, बॉडी टेम्परेचर और एनर्जी लेवल को नियंत्रित करता है। ऐसे में इसमें गड़बड़ी होने पर शरीर धीरे-धीरे कई समस्याओं की चपेट में आने लगता है।

    विशेषज्ञ बताते हैं कि थायरॉयड की परेशानी अचानक नहीं दिखती, बल्कि इसके लक्षण धीरे-धीरे सामने आते हैं। बिना वजह वजन बढ़ना, ड्राई स्किन, ध्यान लगाने में परेशानी, एंग्जायटी, पीरियड्स अनियमित होना और लगातार कमजोरी इसके शुरुआती संकेत हो सकते हैं। कई महिलाएं इन्हें पोस्ट-प्रेग्नेंसी बदलाव समझकर अनदेखा कर देती हैं, जिससे समस्या गंभीर हो सकती है।

    स्वास्थ्य विशेषज्ञों की सलाह है कि जिन महिलाओं को प्रेग्नेंसी के दौरान डायबिटीज हुई हो, उन्हें डिलीवरी के बाद भी नियमित हेल्थ चेकअप करवाते रहना चाहिए। खासतौर पर अगर परिवार में डायबिटीज या थायरॉयड की हिस्ट्री हो तो अतिरिक्त सावधानी जरूरी है।

    डॉक्टरों का मानना है कि संतुलित खानपान, नियमित व्यायाम, पर्याप्त नींद और समय-समय पर ब्लड शुगर व थायरॉयड टेस्ट करवाकर भविष्य में होने वाली गंभीर बीमारियों के खतरे को काफी हद तक कम किया जा सकता है। क्योंकि मां की सेहत सिर्फ गर्भावस्था तक सीमित नहीं होती, बल्कि उसका असर लंबे समय तक पूरे शरीर पर दिखाई देता है।

  • Aaj Ka Rashifal 17 मई 2026: सभी राशियों के लिए कैसा रहेगा दिन?

    Aaj Ka Rashifal 17 मई 2026: सभी राशियों के लिए कैसा रहेगा दिन?


    नई दिल्ली। वैदिक ज्योतिष के अनुसार 17 मई 2026 का दिन ग्रह-नक्षत्रों की स्थिति के आधार पर कई राशियों के लिए महत्वपूर्ण रहने वाला है। इस दिन कुछ लोगों को करियर और आर्थिक मामलों में लाभ मिलेगा, जबकि कुछ को धैर्य और सावधानी से आगे बढ़ने की सलाह दी गई है।

    मेष राशि

    मेष राशि के जातकों के लिए दिन सामान्य रूप से सकारात्मक रहेगा। पुराने रुके हुए कार्य पूरे हो सकते हैं और कार्यस्थल पर मेहनत का अच्छा परिणाम मिलेगा। घर का माहौल शांत और सहयोगी रहेगा। आर्थिक स्थिति में धीरे-धीरे सुधार देखने को मिलेगा।

    वृषभ राशि

    वृषभ राशि वालों के खर्चों में वृद्धि हो सकती है। घरेलू जरूरतों पर अधिक धन खर्च होने की संभावना है। हालांकि नौकरी और व्यापार में अधिकारियों का सहयोग मिलेगा और लाभ के योग भी बन रहे हैं।

    मिथुन राशि

    मिथुन राशि के लिए दिन राहत देने वाला रहेगा। पुराने अटके हुए कार्य पूरे हो सकते हैं। परिवार का सहयोग मिलेगा और नौकरी-व्यापार में प्रगति के संकेत हैं। थोड़ी थकान महसूस हो सकती है।

    कर्क राशि

    कर्क राशि के जातकों के लिए दिन अनुकूल रहेगा। कार्यस्थल पर नई जिम्मेदारियां मिल सकती हैं। पारिवारिक जीवन में खुशहाली रहेगी और मानसिक तनाव कम होगा।

    सिंह राशि

    सिंह राशि वालों को जल्दबाजी से बचना होगा। कार्यभार अधिक रह सकता है और आर्थिक मामलों में सतर्क रहने की जरूरत है। पारिवारिक रिश्तों में संयम रखना जरूरी होगा।

    कन्या राशि

    कन्या राशि के लिए दिन शुभ संकेत दे रहा है। मेहनत का पूरा फल मिलेगा और आर्थिक स्थिति मजबूत होगी। नौकरी और व्यापार में नए अवसर मिल सकते हैं।

    तुला राशि

    तुला राशि वालों के लिए दिन प्रगति लेकर आएगा। रुके हुए कार्य पूरे हो सकते हैं। करियर में आगे बढ़ने के अवसर मिलेंगे और पारिवारिक सहयोग बना रहेगा।

    वृश्चिक राशि

    वृश्चिक राशि के जातकों को धैर्य रखने की सलाह दी गई है। कार्यों में देरी हो सकती है और आर्थिक मामलों में सोच-समझकर निर्णय लेना होगा।

    धनु राशि

    धनु राशि वालों के लिए दिन अच्छा रहेगा। रुका हुआ धन वापस मिल सकता है और नौकरी-व्यापार में लाभ के संकेत हैं। मानसिक तनाव कम होगा।

    मकर राशि

    मकर राशि के लिए दिन सामान्य रहेगा। कार्यों में व्यस्तता रहेगी लेकिन धीरे-धीरे परिणाम मिलेंगे। खर्चों पर नियंत्रण जरूरी होगा।

    कुंभ राशि

    कुंभ राशि के लिए समय बेहतर हो रहा है। मेहनत का फल मिलेगा और आर्थिक स्थिति मजबूत होगी। परिवार में खुशी का माहौल रहेगा।

    मीन राशि

    मीन राशि वालों को धैर्य रखने की जरूरत है। कार्यों में देरी हो सकती है और नौकरी में दबाव महसूस हो सकता है। खर्चों और रिश्तों में सावधानी बरतें।

  • पाकिस्तान 100 अरब बढ़ा रहा रक्षा बजट, क्या किसी बड़ी सैन्य तैयारी की ओर इशारा?

    पाकिस्तान 100 अरब बढ़ा रहा रक्षा बजट, क्या किसी बड़ी सैन्य तैयारी की ओर इशारा?



    नई दिल्ली। पाकिस्तान सरकार अगले वित्त वर्ष में अपने रक्षा बजट में करीब 100 अरब पाकिस्तानी रुपये की बढ़ोतरी करने की तैयारी में है। यह बढ़ोतरी अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) के समर्थन वाले आर्थिक सुधार कार्यक्रम के तहत तैयार किए जा रहे नए बजट का हिस्सा है, जिसमें देश की कुल आय और खर्च दोनों में बढ़ोतरी का अनुमान लगाया गया है।

    मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, 2026-27 में पाकिस्तान का रक्षा खर्च लगभग 2.66 लाख करोड़ पाकिस्तानी रुपये तक पहुंच सकता है, जो मौजूदा वित्त वर्ष के 2.56 लाख करोड़ रुपये से अधिक है। वहीं IMF ने अनुमान लगाया है कि इसी अवधि में पाकिस्तान की कुल संघीय आय 17.14 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच सकती है, जो पिछले वर्ष की तुलना में करीब 13.5 प्रतिशत अधिक है।

    रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि पाकिस्तान सरकार अपने वित्तीय ढांचे में सुधार के लिए बड़े कदम उठा रही है। इसमें केंद्र और प्रांतीय खर्च को GDP के 0.2 प्रतिशत तक बढ़ाना, सभी सरकारी भुगतान को डिजिटल करना और भ्रष्टाचार प्रभावित संस्थानों की जांच शामिल है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि रक्षा बजट में यह बढ़ोतरी पाकिस्तान की सैन्य क्षमताओं को मजबूत करने और हथियारों की खरीद बढ़ाने की रणनीति का हिस्सा हो सकती है। हालांकि आर्थिक स्थिति अभी भी कमजोर है और IMF के अनुसार देश की लगभग 40 प्रतिशत आबादी आर्थिक रूप से कमजोर बनी हुई है।

    इसी बीच IMF मिशन पाकिस्तान में नए बजट को अंतिम रूप देने की प्रक्रिया में जुटा है, जिसे जल्द ही संसद में पेश किया जाएगा।

  • मां को दोष देना बंद करो, साइंस समझो: बच्चे की हालत बिगड़ने पर मां को ताने, डॉक्टर का फूटा गुस्सा

    मां को दोष देना बंद करो, साइंस समझो: बच्चे की हालत बिगड़ने पर मां को ताने, डॉक्टर का फूटा गुस्सा



    नई दिल्ली। बच्चों की तबीयत बिगड़ने पर अक्सर परिवारों में सबसे पहले मां को जिम्मेदार ठहरा दिया जाता है। ऐसा ही एक मामला पीडियाट्रिशियन डॉ. माधवी भारद्वाज के सामने आया, जहां 20 महीने के बच्चे को दौरे पड़ने पर परिवार ने मां की देखभाल पर सवाल उठाए।

    डॉक्टर ने बताया कि बच्चा अचानक बुखार और दौरे की स्थिति में अस्पताल लाया गया था, जहां समय पर इलाज देकर उसकी हालत को स्थिर कर दिया गया। इसके बावजूद घरवालों ने मां से कहा कि अगर उसने ठीक से ध्यान रखा होता, तो यह स्थिति नहीं आती।

    इस पर डॉ. माधवी ने नाराजगी जताते हुए कहा कि लोगों को पहले मेडिकल साइंस समझनी चाहिए। उन्होंने बताया कि 6 महीने से 5 साल तक के बच्चों में तेज बुखार के दौरान फेब्राइल सीजर्स (दौरे) आम होते हैं और यह हमेशा लापरवाही का नतीजा नहीं होता।

    डॉक्टर ने यह भी कहा कि समाज में अक्सर मांओं को हर स्थिति के लिए दोषी ठहरा दिया जाता है, जबकि कई बार यह पूरी तरह मेडिकल कंडीशन होती है। उन्होंने अपील की कि लोगों को दोष देने के बजाय समाधान और सही इलाज पर ध्यान देना चाहिए।

  • झांसी सड़क हादसा: सगाई से 3 दिन पहले दुल्हन और भाई की दर्दनाक मौत, ट्रक से टकराई बाइक

    झांसी सड़क हादसा: सगाई से 3 दिन पहले दुल्हन और भाई की दर्दनाक मौत, ट्रक से टकराई बाइक



    नई दिल्ली। झांसी में एक दिल दहला देने वाला सड़क हादसा सामने आया है, जिसमें सगाई से सिर्फ 3 दिन पहले होने वाली दुल्हन और उसके सगे भाई की दर्दनाक मौत हो गई। दोनों बाइक से अपनी बड़ी बहन के घर जा रहे थे, तभी पूंछ थाना क्षेत्र के झांसी–कानपुर हाईवे पर मबूसा ओवरब्रिज के पास सड़क किनारे खड़े एक ट्रक से उनकी बाइक टकरा गई।

    टक्कर इतनी तेज थी कि बाइक सवार दोनों भाई-बहन करीब 10 मीटर दूर जा गिरे और गंभीर रूप से घायल हो गए। मौके पर मौजूद लोगों ने तुरंत पुलिस को सूचना दी, जिसके बाद दोनों को मोंठ सीएचसी ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। बताया जा रहा है कि बाइक की स्पीड लगभग 80 किमी प्रति घंटा थी और ट्रक सड़क पर बिना किसी चेतावनी के खड़ा था, जिससे यह हादसा हुआ।

    मृतका शिवानी (22) जालौन के कैलाशी देवी महाविद्यालय से बीए की छात्रा थी और उसकी शादी तय हो चुकी थी। 20 मई को उसकी सगाई होनी थी और घर में तैयारियां चल रही थीं। वहीं उसका भाई ईशू (19) 12वीं का छात्र था। दोनों अपने साथ कुछ कैश और गहने लेकर बहन के घर जा रहे थे, ताकि आगे शादी की तैयारियों में शामिल हो सकें।

    हादसे के बाद ट्रक चालक वाहन छोड़कर मौके से फरार हो गया। पुलिस ने ट्रक की तलाश शुरू कर दी है और परिजनों की शिकायत पर मामला दर्ज किया जा रहा है। इस दर्दनाक हादसे ने पूरे परिवार की खुशियों को पलभर में मातम में बदल दिया।

  • चीन में ट्रंप के काफिले में दिखी रहस्यमयी ऊंची SUV, सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल

    चीन में ट्रंप के काफिले में दिखी रहस्यमयी ऊंची SUV, सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल



    नई दिल्ली। चीन में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के काफिले के दौरान दो अजीबोगरीब ऊंची छत वाली SUV गाड़ियां नजर आईं, जिनकी अनोखी बनावट ने सुरक्षा व्यवस्था और उनके काम को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। यह घटना 13 मई को बीजिंग में ट्रंप की यात्रा के दौरान सामने आई, जब पूरा काफिला शहर से गुजर रहा था और ये रहस्यमयी गाड़ियां उसके साथ चल रही थीं।

    रिपोर्ट्स के मुताबिक, इन SUV में से कुछ चीन की Hongqi कंपनी के मॉडल पर आधारित थीं, जबकि काफिले में शेवरले सबअर्बन, लिंकन नेविगेटर और फोर्ड ई-सीरीज जैसी मॉडिफाइड गाड़ियां भी शामिल थीं। खास बात यह रही कि इन गाड़ियों की छतों को सामान्य डिजाइन से हटकर काफी ऊंचा और कस्टमाइज किया गया था, जिससे अंदर अतिरिक्त उपकरण या सुरक्षा सिस्टम लगाए जाने की संभावना जताई जा रही है।

    अमेरिकी सीक्रेट सर्विस ने इन गाड़ियों को लेकर कोई आधिकारिक जानकारी नहीं दी है और यह भी साफ नहीं किया गया कि ये वाहन अमेरिकी दूतावास के थे या चीनी सुरक्षा एजेंसियों के। हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसी मॉडिफाइड SUV में एडवांस सर्विलांस सिस्टम, कम्युनिकेशन उपकरण या ड्रोन डिफेंस टेक्नोलॉजी जैसे सिस्टम हो सकते हैं, जो हाई-प्रोफाइल दौरों में सुरक्षा के लिए इस्तेमाल किए जाते हैं।

    इन वाहनों की सबसे बड़ी खासियत उनकी ऊंची छत बताई जा रही है, जिससे यह अनुमान लगाया जा रहा है कि इनमें खड़े होकर निगरानी करने या विशेष उपकरण लगाने की सुविधा हो सकती है। कुछ रिपोर्ट्स में यह भी दावा किया गया है कि इनमें इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर से जुड़े सिस्टम भी हो सकते हैं, हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।

    पूरा मामला अभी रहस्य बना हुआ है, लेकिन ट्रंप के काफिले में इन अनोखी SUV की मौजूदगी ने अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा और डिप्लोमैटिक प्रोटोकॉल पर नई बहस जरूर छेड़ दी है।

  • कर्नाटक में CM पद पर सस्पेंस बरकरार: सिद्धारमैया बनाम डीके शिवकुमार की खींचतान तेज, कांग्रेस हाईकमान पर बढ़ा दबाव

    कर्नाटक में CM पद पर सस्पेंस बरकरार: सिद्धारमैया बनाम डीके शिवकुमार की खींचतान तेज, कांग्रेस हाईकमान पर बढ़ा दबाव



    नई दिल्ली। कर्नाटक में मुख्यमंत्री पद को लेकर कांग्रेस के भीतर अंदरूनी टकराव एक बार फिर खुलकर सामने आता दिख रहा है। एक तरफ मौजूदा मुख्यमंत्री सिद्धारमैया अपनी सरकार को मजबूत करने और कैबिनेट विस्तार पर जोर दे रहे हैं, वहीं दूसरी ओर उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार भी नेतृत्व परिवर्तन की अपनी दावेदारी को लेकर सक्रिय हैं। इस पूरे मामले ने कांग्रेस हाईकमान के सामने एक नई राजनीतिक दुविधा खड़ी कर दी है।

    पार्टी के अंदर चल रही चर्चाओं के मुताबिक, सिद्धारमैया खेमे का फोकस कैबिनेट फेरबदल और खाली मंत्रिपदों को भरने पर है, जिससे सरकार और संगठन दोनों पर उनकी पकड़ मजबूत हो सके। उनका मानना है कि प्रशासनिक स्थिरता बनाए रखना अभी प्राथमिकता होनी चाहिए और किसी भी तरह के नेतृत्व बदलाव को फिलहाल टाल देना चाहिए।

    दूसरी ओर, डीके शिवकुमार खेमे का दावा है कि संगठन को मजबूत करने और विधानसभा चुनाव में जीत दिलाने में उनकी भूमिका अहम रही है, इसलिए उन्हें भी मुख्यमंत्री पद पर अवसर मिलना चाहिए। उनके समर्थक लगातार “अगले मुख्यमंत्री” जैसे पोस्टर और सार्वजनिक कार्यक्रमों के जरिए दबाव बना रहे हैं।

    कांग्रेस आलाकमान के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह है कि किसी एक पक्ष के समर्थन से दूसरे खेमे में असंतोष पैदा हो सकता है, जिससे राज्य में राजनीतिक अस्थिरता बढ़ने का खतरा है। यही वजह है कि पार्टी फिलहाल “इंतजार करो और देखो” की रणनीति पर काम कर रही है।

    हालांकि, हालात ऐसे बनते जा रहे हैं कि इस मुद्दे पर लंबे समय तक टालमटोल करना मुश्किल हो सकता है। आने वाले दिनों में कांग्रेस हाईकमान को यह तय करना होगा कि सिद्धारमैया के नेतृत्व को जारी रखा जाए या फिर डीके शिवकुमार को कमान सौंपकर सत्ता संतुलन बदला जाए।

  • Iran-US War : लेबनान में तनाव बढ़ा, इजरायल ने 9 इलाकों को खाली करने का दिया आदेश; होर्मुज को लेकर भी बढ़ी चिंता

    Iran-US War : लेबनान में तनाव बढ़ा, इजरायल ने 9 इलाकों को खाली करने का दिया आदेश; होर्मुज को लेकर भी बढ़ी चिंता



    नई दिल्ली। मिडिल ईस्ट में ईरान, अमेरिका और इजरायल के बीच तनाव लगातार बढ़ता जा रहा है। सीजफायर के दावों के बीच हालात फिर से बिगड़ते दिख रहे हैं, जहां एक तरफ अमेरिका संभावित सैन्य कार्रवाई की तैयारी कर रहा है, वहीं दूसरी ओर इजरायल ने लेबनान के कई इलाकों को खाली करने का आदेश जारी कर दिया है।

    दक्षिणी लेबनान में इजरायल ने 9 से अधिक कस्बों को खाली करने की चेतावनी दी है, जिससे पहले से विस्थापित लाखों लोगों की मुश्किलें और बढ़ गई हैं। कई लोग सीजफायर के बाद लौटे थे, लेकिन नए हालात के चलते एक बार फिर पलायन का खतरा पैदा हो गया है।

    इस बीच अमेरिका और ईरान के बीच तनाव भी कम नहीं हुआ है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, यदि बातचीत विफल होती है तो अमेरिका और इजरायल मिलकर ईरान पर दोबारा बड़े पैमाने पर सैन्य कार्रवाई कर सकते हैं। न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट में दावा किया गया है कि अगले हफ्तों में हमलों की संभावना से इनकार नहीं किया जा रहा है।

    होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर भी स्थिति गंभीर बनी हुई है। ईरान ने संकेत दिए हैं कि वह इसे “दोस्त देशों के लिए खुला और दुश्मनों के लिए सीमित” कर सकता है, जिससे वैश्विक तेल आपूर्ति पर बड़ा असर पड़ सकता है। वहीं अमेरिका इसे खोलने के लिए दबाव बना रहा है।

    संयुक्त राष्ट्र में भी इस मुद्दे पर टकराव देखने को मिला है, जहां ईरान ने चेतावनी दी है कि किसी भी अमेरिकी समर्थित प्रस्ताव का समर्थन करने वाले देशों को भविष्य के तनाव के लिए जिम्मेदार माना जाएगा।