सबसे पहले बात करें बिजली की तो 2026-27 के लिए नया टैरिफ लागू किया जा रहा है। बिजली दरों में औसतन 4.80 प्रतिशत की बढ़ोतरी की गई है। हालांकि 100 यूनिट तक बिजली खर्च करने वाले उपभोक्ताओं को राहत जारी रहेगी लेकिन जैसे-जैसे खपत बढ़ेगी बिल भी तेजी से बढ़ेगा। उदाहरण के तौर पर 400 यूनिट तक बिजली इस्तेमाल करने वालों को हर महीने औसतन 150 रुपए तक अधिक चुकाने पड़ सकते हैं।
प्रॉपर्टी खरीदने वालों के लिए भी यह समय भारी पड़ने वाला है। राज्य में कलेक्टर गाइडलाइन दरों में औसतन 16 प्रतिशत की बढ़ोतरी की गई है। करीब 65 हजार स्थानों पर नई दरें लागू होंगी जिससे जमीन और मकान की रजिस्ट्री महंगी हो जाएगी। इसके साथ ही निर्माण सामग्री की बढ़ती लागत के कारण पक्के मकानों का निर्माण भी पहले से ज्यादा खर्चीला हो जाएगा।
हाईवे पर सफर करने वाले लोगों को भी अब ज्यादा भुगतान करना होगा। नेशनल हाईवे पर टोल टैक्स में 5 से 10 प्रतिशत तक की वृद्धि की गई है। फास्टैग के सालाना पास की कीमत में भी करीब 75 रुपए तक की बढ़ोतरी हुई है जिससे रोजाना सफर करने वालों पर अतिरिक्त बोझ पड़ेगा।
बैंकिंग सेवाओं में भी बदलाव किए गए हैं। एटीएम से पैसे निकालना अब पहले से महंगा हो जाएगा। पहले की तरह महीने में पांच मुफ्त ट्रांजैक्शन की सुविधा जारी रहेगी लेकिन इसके बाद हर अतिरिक्त ट्रांजैक्शन पर करीब 23 रुपए तक शुल्क देना होगा। इस पर टैक्स भी अलग से लगेगा जिससे बार-बार पैसे निकालना महंगा सौदा साबित होगा।
नगर निगम और स्थानीय निकायों ने कचरा प्रबंधन को लेकर सख्ती बढ़ा दी है। सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट रूल्स 2026 के तहत अब कचरे को चार हिस्सों में अलग करना अनिवार्य होगा जिसमें गीला सूखा सैनिटरी और खतरनाक कचरा शामिल है। नियमों का पालन नहीं करने पर जुर्माना लगाया जाएगा जिससे लोगों को नई व्यवस्था के अनुसार खुद को ढालना पड़ेगा।
रेलवे यात्रियों के लिए भी नियमों में बदलाव किया गया है। अब ट्रेन के निर्धारित समय से 8 घंटे के भीतर टिकट रद्द करने पर कोई रिफंड नहीं मिलेगा जबकि पहले यह सीमा 4 घंटे थी। 8 से 24 घंटे पहले टिकट कैंसिल करने पर करीब 50 प्रतिशत राशि वापस मिलेगी वहीं 24 से 72 घंटे पहले रद्द करने पर 75 प्रतिशत तक रिफंड मिलेगा। इसके अलावा यात्रियों को ट्रेन रवाना होने से आधे घंटे पहले तक क्लास अपग्रेड कराने की सुविधा भी दी जाएगी।
कुल मिलाकर 1 अप्रैल से लागू होने वाले ये बदलाव आम आदमी के बजट को प्रभावित करेंगे। ऐसे में लोगों को अपनी आर्थिक योजना को नए सिरे से तैयार करना होगा ताकि बढ़ते खर्चों के बीच संतुलन बनाए रखा जा सके।









