Category: Economy

  • भारतीय शेयर बाजार में लगातार दूसरे दिन तेजी, सेंसेक्स 685 अंक चढ़ा, निफ्टी 0.98 प्रतिशत बढ़कर 22,776 पर बंद

    भारतीय शेयर बाजार में लगातार दूसरे दिन तेजी, सेंसेक्स 685 अंक चढ़ा, निफ्टी 0.98 प्रतिशत बढ़कर 22,776 पर बंद

    नई दिल्ली । पिछले सप्ताह लगातार चार कारोबारी सत्रों में गिरावट के बाद भारतीय शेयर बाजार में अब लगातार दूसरे दिन तेजी देखने को मिली है। मंगलवार को घरेलू बाजार के प्रमुख सूचकांक सेंसेक्स और निफ्टी में करीब 1 प्रतिशत की बढ़त दर्ज की गई। आरबीआई की मौद्रिक नीति समिति यानी एमपीसी की बैठक के नतीजों से पहले बाजार में खरीदारी का रुख मजबूत रहा। कारोबार के अंत में बीएसई सेंसेक्स 685.34 अंक यानी 0.95 प्रतिशत की बढ़त के साथ 73,067.81 पर बंद हुआ।

    एनएसई निफ्टी 50 भी मंगलवार को 220.35 अंक यानी 0.98 प्रतिशत चढ़कर 22,776.10 के स्तर पर पहुंच गया। निफ्टी 50 में ट्रेंट, बीएसई, कोटक महिंद्रा बैंक, नेस्ले इंडिया और एचयूएल के शेयरों में सबसे अधिक तेजी रही। दूसरी ओर कोल इंडिया, टेक महिंद्रा, मैक्स हेल्थ, टीएमपीवी, अल्ट्राटेक सीमेंट, अपोलो हॉस्पिटल और आईटीसी के शेयरों में गिरावट दर्ज की गई। इस तरह बाजार के प्रमुख सूचकांकों में लगातार दूसरे कारोबारी सत्र में मजबूती बनी रही।

    व्यापक बाजार की बात करें तो मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में भी अच्छी खरीदारी देखने को मिली। निफ्टी मिडकैप सूचकांक में 1.08 प्रतिशत की बढ़त दर्ज की गई, जबकि निफ्टी स्मॉलकैप 1.56 प्रतिशत चढ़ा। सेक्टरवार कारोबार में निफ्टी केमिकल, निफ्टी फार्मा, निफ्टी ऑयल एंड गैस, निफ्टी एफएमसीजी, निफ्टी प्राइवेट बैंक और निफ्टी हेल्थकेयर में 1 प्रतिशत से अधिक की तेजी रही। इसके विपरीत निफ्टी आईटी, निफ्टी रियल्टी और निफ्टी पीएसयू बैंक में सबसे ज्यादा कमजोरी देखने को मिली।

    इस सप्ताह अब तक बाजार में तेजी का असर भी दिखाई दे रहा है। सेंसेक्स इस सप्ताह 1,000 से अधिक अंक चढ़ चुका है, जबकि निफ्टी 50 ने पिछले दो कारोबारी सत्रों में 300 से अधिक अंक जोड़े हैं। आरबीआई एमपीसी की तीन दिवसीय बैठक सोमवार से शुरू हुई है और इसके नतीजे 7 अक्टूबर को आने वाले हैं। बाजार की नजर अब मौद्रिक नीति समिति के फैसले पर बनी हुई है। बैठक के परिणाम से पहले बाजार में लगातार दो सत्रों की तेजी देखने को मिली है।

    शेयर बाजार में इस तेजी के पीछे कच्चे तेल की कीमतों में नरमी को भी एक वजह माना जा रहा है। हालिया तेजी के बाद ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमत 100 डॉलर प्रति बैरल से नीचे आ गई है। कुछ मध्य पूर्वी देशों की ओर से कच्चे तेल की नई आपूर्ति शुरू होने के बाद कीमतों में यह नरमी देखने को मिली है। कच्चे तेल की कीमतों में बदलाव का असर बाजार की धारणा पर भी पड़ रहा है।

    वैश्विक संकेतों से भी घरेलू बाजार को समर्थन मिला। बाजार से जुड़े एक विशेषज्ञ के अनुसार, ग्लोबल संकेतों के सहारे लगातार दूसरे कारोबारी सत्र में बढ़त बनी रही। अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में भी सुधार दर्ज किया गया। मंगलवार को अमेरिकी 10-वर्षीय बॉन्ड यील्ड में 0.50 प्रतिशत से अधिक की गिरावट आई। घरेलू बाजार में आरबीआई एमपीसी के नतीजों से पहले खरीदारी और वैश्विक संकेतों के बीच प्रमुख सूचकांकों ने दिन का कारोबार बढ़त के साथ समाप्त किया।

  • विश्व बैंक ने भारत की जीडीपी वृद्धि का अनुमान बढ़ाकर 7.1 प्रतिशत किया, घरेलू मांग और सेवाओं से मजबूत रहेगी अर्थव्यवस्था

    विश्व बैंक ने भारत की जीडीपी वृद्धि का अनुमान बढ़ाकर 7.1 प्रतिशत किया, घरेलू मांग और सेवाओं से मजबूत रहेगी अर्थव्यवस्था

    नई दिल्ली: विश्व बैंक ने भारत की आर्थिक विकास दर को लेकर अपना अनुमान बढ़ा दिया है। ताजा साउथ एशिया इकोनॉमिक अपडेट रिपोर्ट में विश्व बैंक ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए भारत की जीडीपी वृद्धि दर का अनुमान 6.6 प्रतिशत से बढ़ाकर 7.1 प्रतिशत कर दिया है। रिपोर्ट में भारत की अर्थव्यवस्था की मजबूती के पीछे मजबूत घरेलू मांग, औद्योगिक गतिविधियों में विस्तार और सेवा क्षेत्र की निरंतर मजबूती को प्रमुख आधार बताया गया है। वैश्विक स्तर पर मौजूद अनिश्चितताओं के बावजूद भारत की विकास गति मजबूत बनी रहने की बात कही गई है।

    विश्व बैंक के अनुसार, भारत की दीर्घकालिक विकास संभावनाओं को पिछले वर्षों में लागू किए गए कई महत्वपूर्ण संरचनात्मक सुधारों से मजबूती मिली है। इनमें श्रम संहिताओं का एकीकरण, वस्तु एवं सेवा कर यानी जीएसटी सुधार, टैरिफ युक्तिकरण और दिवाला एवं शोधन अक्षमता संहिता शामिल हैं। इसके अलावा भौतिक और डिजिटल अवसंरचना में बड़े निवेश को भी अर्थव्यवस्था की विकास क्षमता को मजबूत करने वाला महत्वपूर्ण कदम बताया गया है। इन सुधारों के बीच घरेलू मांग को आर्थिक गतिविधियों का प्रमुख आधार माना गया है।

    रिपोर्ट में कहा गया है कि कृषि क्षेत्र में कुछ चुनौतियां बनी हुई हैं, लेकिन व्यापक अर्थव्यवस्था में मौजूद मजबूती भारत को मौजूदा वित्त वर्ष में मजबूत विकास दर बनाए रखने में मदद कर सकती है। घरेलू मांग लगातार आर्थिक गतिविधियों को सहारा दे रही है और इसे भारत की अर्थव्यवस्था की प्रमुख ताकतों में शामिल किया गया है। औद्योगिक गतिविधियों में विस्तार और सेवा क्षेत्र की मजबूती भी आर्थिक वृद्धि को समर्थन दे रही है। हालांकि, आने वाले महीनों में कुछ बाहरी और मौसम संबंधी जोखिम विकास तथा महंगाई प्रबंधन के लिए चुनौती पैदा कर सकते हैं।

    विश्व बैंक ने ऊंची ऊर्जा कीमतों और अल नीनो से जुड़े प्रतिकूल मौसमीय प्रभावों को प्रमुख जोखिमों में शामिल किया है। भारत कच्चे तेल के आयात पर निर्भर है, इसलिए ऊर्जा कीमतों में बढ़ोतरी का असर महंगाई और आर्थिक गतिविधियों पर पड़ सकता है। वहीं, अल नीनो से जुड़े प्रतिकूल मौसम का असर कृषि क्षेत्र पर पड़ने की आशंका है। कृषि क्षेत्र पर दबाव का प्रभाव उन लोगों की आजीविका पर भी पड़ सकता है, जिनके लिए खेती आय का प्रमुख स्रोत है।

    दक्षिण एशिया के व्यापक आर्थिक परिदृश्य में भी विश्व बैंक ने वर्ष 2026 के लिए क्षेत्र की विकास दर का अनुमान बढ़ाया है। पहले 6.3 प्रतिशत के अनुमान के मुकाबले अब क्षेत्र की विकास दर 6.9 प्रतिशत रहने का अनुमान है। रिपोर्ट के अनुसार, इस बदलाव में भारत के अपेक्षा से बेहतर आर्थिक प्रदर्शन की प्रमुख भूमिका है। हालांकि, भारत को छोड़कर दक्षिण एशिया के बाकी देशों की विकास दर का अनुमान 4.1 प्रतिशत से घटाकर 3.6 प्रतिशत कर दिया गया है। इस कटौती का मुख्य कारण बांग्लादेश की विकास दर के अनुमान में की गई बड़ी कमी बताई गई है।

  • जीएसटी परिषद की 57वीं बैठक की तारीख बदली, अब 8 अक्टूबर को होगी बैठक; अनुपालन और टैक्स सुधारों पर चर्चा की उम्मीद

    जीएसटी परिषद की 57वीं बैठक की तारीख बदली, अब 8 अक्टूबर को होगी बैठक; अनुपालन और टैक्स सुधारों पर चर्चा की उम्मीद

    नई दिल्ली ।जीएसटी परिषद की प्रस्तावित 57वीं बैठक की तारीख में बदलाव किया गया है। पहले यह बैठक 7 अक्टूबर को होने वाली थी, लेकिन अब इसे एक दिन आगे बढ़ाकर 8 अक्टूबर को आयोजित किया जाएगा। जीएसटी परिषद सचिवालय ने एक कार्यालय ज्ञापन जारी कर बैठक की तारीख बदले जाने की जानकारी दी है। ज्ञापन के अनुसार, अपरिहार्य परिस्थितियों के कारण बैठक को पुनर्निर्धारित किया गया है। बैठक की अध्यक्षता वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण करेंगी और इसमें केंद्र तथा राज्यों के प्रतिनिधि शामिल होंगे।

    बैठक में कारोबारियों और करदाताओं के लिए जीएसटी अनुपालन को आसान बनाने के उद्देश्य से कई प्रक्रिया संबंधी सुधारों पर चर्चा होने की उम्मीद है। परिषद पंजीकरण, रिटर्न और रिफंड की मौजूदा प्रक्रियाओं में बदलाव से जुड़े प्रस्तावों पर विचार कर सकती है। इसके साथ ही जीएसटी विवादों के समाधान को सरल बनाने और इनपुट टैक्स क्रेडिट के प्रवाह को बेहतर करने से संबंधित सुधारों पर भी चर्चा हो सकती है। इन प्रस्तावों का उद्देश्य कर अनुपालन में लगने वाले समय और लागत को कम करना है।

    इन सुधारों को जीएसटी परिषद की कानून समिति की व्यापक सिफारिशों से भी जोड़ा गया है। समिति ने जीएसटी कानूनों को सरल बनाने के विभिन्न उपायों की समीक्षा की है। इसके अलावा जानबूझकर कर चोरी करने और अनजाने में कर का भुगतान नहीं कर पाने वाले मामलों के बीच अंतर करने के तरीकों पर भी विचार किया गया है। परिषद की बैठक में इन सिफारिशों से जुड़े प्रस्तावों पर चर्चा होने की संभावना है।

    मौजूदा जीएसटी व्यवस्था के तहत केंद्रीय जीएसटी अधिनियम की धारा 69 में गिरफ्तारी से संबंधित प्रावधान हैं। इसके तहत आयुक्त किसी व्यक्ति की गिरफ्तारी का आदेश दे सकते हैं, यदि उन्हें यह विश्वास करने का कारण हो कि संबंधित व्यक्ति ने धारा 132 में निर्दिष्ट अपराध किए हैं। इन अपराधों में कर चोरी और फर्जी इनपुट टैक्स क्रेडिट से जुड़े कुछ मामले भी शामिल हैं। जीएसटी व्यवस्था में प्रक्रिया संबंधी बदलावों के साथ इन प्रावधानों से जुड़े पहलुओं पर भी चर्चा हो सकती है।

    परिषद कारोबारियों के लिए अनुपालन को आसान बनाने के उपायों पर भी विचार कर सकती है। इसमें ई-कॉमर्स के माध्यम से आपूर्ति करने वाले कारोबारी भी शामिल हैं। पंजीकरण, रिटर्न दाखिल करने, रिफंड प्राप्त करने और इनपुट टैक्स क्रेडिट से जुड़ी प्रक्रियाओं को सरल बनाने का उद्देश्य कारोबारियों के लिए कर संबंधी औपचारिकताओं को आसान करना है।

    इससे पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार को कहा था कि जीएसटी सुधारों का अगला चरण अनुपालन को आसान बनाने और रिफंड प्रक्रिया में सुधार करने पर केंद्रित होगा। उनके अनुसार, इन सुधारों से कारोबारियों का निवेश करने और अपने कारोबार का विस्तार करने का भरोसा बढ़ेगा। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने भी कहा है कि जीएसटी सुधारों के अगले चरण में पंजीकरण, रिटर्न, रिफंड, विवाद समाधान और इनपुट टैक्स क्रेडिट की प्रक्रियाओं को सरल बनाने पर ध्यान दिया जाएगा।

    जीएसटी परिषद की 57वीं बैठक मूल रूप से 12 सितंबर को आयोजित होनी थी। हालांकि, 12 और 13 सितंबर को नई दिल्ली में भारत की मेजबानी में आयोजित ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के कारण बैठक को 7 अक्टूबर तक टाल दिया गया था। अब तारीख में दूसरी बार बदलाव किया गया है और बैठक 8 अक्टूबर को होगी। बैठक में प्रस्तावित कर सुधारों और अनुपालन से जुड़े उपायों पर आगे की दिशा तय किए जाने की उम्मीद है।

  • भारत के सर्विसेज सेक्टर की गतिविधियां सितंबर में तीन महीने के उच्चतम स्तर पर पहुंचीं, पीएमआई बढ़कर 55.2 रहा

    भारत के सर्विसेज सेक्टर की गतिविधियां सितंबर में तीन महीने के उच्चतम स्तर पर पहुंचीं, पीएमआई बढ़कर 55.2 रहा

    नई दिल्ली ।भारत के सर्विसेज सेक्टर में सितंबर के दौरान गतिविधियों में तेजी देखने को मिली और पीएमआई तीन महीनों के उच्चतम स्तर पर पहुंच गया। सितंबर में सर्विसेज पीएमआई बढ़कर 55.2 रहा, जबकि अगस्त में यह 54.1 पर था। यह जून के बाद पीएमआई का सबसे ऊंचा स्तर है। आंकड़ों के मुताबिक, सेवा क्षेत्र में गतिविधियों को मजबूत घरेलू मांग और नए ऑर्डर्स में तेज बढ़ोतरी से समर्थन मिला।

    सितंबर में नए बिजनेस में पिछले तीन महीनों की तुलना में सबसे तेज वृद्धि दर्ज की गई। कंपनियों को डिजिटल समाधान, खाने-पीने की चीजों, इंश्योरेंस, लोन, सॉफ्टवेयर, ट्रांसपोर्टेशन और टूर-एंड-ट्रैवल जैसी सेवाओं के लिए ज्यादा मांग मिली। फाइनेंस, इंश्योरेंस और कंज्यूमर सर्विस सेक्टर में बिक्री में सबसे अधिक बढ़ोतरी दर्ज की गई। इससे सेवा क्षेत्र की कारोबारी गतिविधियों को सितंबर में बेहतर गति मिली।

    सितंबर के दौरान भारतीय सेवाओं की अंतरराष्ट्रीय मांग में भी सुधार दर्ज किया गया। कंपनियों ने जर्मनी, संयुक्त अरब अमीरात, यूके और अमेरिका से बेहतर कारोबार मिलने की जानकारी दी। हालांकि नए निर्यात बिजनेस में बढ़ोतरी की रफ्तार अगस्त की तुलना में धीमी रही। इसके बावजूद बेहतर ऑर्डर बुक और पाइपलाइन में मौजूद प्रोजेक्ट्स ने कंपनियों को कारोबार बढ़ाने और अतिरिक्त कर्मचारियों की भर्ती करने के लिए प्रोत्साहित किया।

    रोजगार के मोर्चे पर भी सेवा क्षेत्र में बढ़ोतरी दर्ज की गई। सितंबर में नौकरियों में वृद्धि की रफ्तार ठीक-ठाक रही, हालांकि रोजगार पैदा होने की दर अगस्त के मुकाबले थोड़ी कम रही। कंपनियों के पास मौजूद ऑर्डर्स और आगे आने वाले प्रोजेक्ट्स के कारण कर्मचारियों की जरूरत बनी रही। इस तरह नए कारोबार में बढ़ोतरी के साथ रोजगार में भी वृद्धि का सिलसिला जारी रहा।

    इनपुट लागत के मोर्चे पर सेवा कंपनियों को कुछ राहत मिली। सितंबर में इनपुट कीमतों में महंगाई नवंबर 2025 के बाद अपने सबसे निचले स्तर पर आ गई। लागत दबाव कम होने से सर्विस प्रोवाइडर्स पर अपनी बिक्री कीमतें बढ़ाने की जरूरत भी कम हुई। घरेलू मांग में मजबूती के बीच लागत दबाव में कमी ने सेवा कंपनियों के लिए कारोबारी परिस्थितियों को कुछ बेहतर बनाया।

    भारत में सेवा क्षेत्र की मजबूती को लेकर अर्थशास्त्री प्रांजुल भंडारी ने कहा कि पीएमआई सर्वेक्षण से घरेलू मांग बढ़ने के कारण सर्विस सेक्टर में लगातार सुधार का संकेत मिलता है। उनके मुताबिक, निर्यात कारोबार में भी वृद्धि जारी रही, हालांकि उसकी रफ्तार धीमी हुई। उन्होंने यह भी कहा कि सितंबर में इनपुट लागत का दबाव कम रहने से सेवा प्रदाताओं को बिक्री कीमतों में बढ़ोतरी की जरूरत कम पड़ी।

    हालांकि मासिक स्तर पर सितंबर का प्रदर्शन बेहतर रहा, लेकिन जुलाई-सितंबर तिमाही में सर्विसेज पीएमआई का औसत पिछली तिमाही की तुलना में कम रहा। इस तिमाही ने मार्च 2022 को समाप्त हुई तिमाही के बाद से अपना सबसे कमजोर तिमाही प्रदर्शन दर्ज किया। दूसरी ओर, मैन्युफैक्चरिंग और सर्विसेज दोनों को शामिल करने वाला एचएसबीसी इंडिया कंपोजिट पीएमआई आउटपुट इंडेक्स अगस्त के 54.3 से बढ़कर सितंबर में 55.9 हो गया। इससे सितंबर में निजी क्षेत्र की कुल कारोबारी गतिविधियों में बढ़ोतरी का संकेत मिला।

  • टाटा ट्रस्ट्स में नोएल परिवार का दबदबा…. क्या चंद्रशेखरन को मिलेगा तीसरा कार्यकाल?

    टाटा ट्रस्ट्स में नोएल परिवार का दबदबा…. क्या चंद्रशेखरन को मिलेगा तीसरा कार्यकाल?


    नई दिल्ली।
    टाटा समूह (Tata Group) की होल्डिंग कंपनी टाटा संस (Tata Sons Holding company) की संभावित वार्षिक आम बैठक से पहले शेयरधारक ट्रस्टों (Shareholder trusts) के भीतर वोटिंग का अंकगणित चर्चा में है। इस बैठक में टाटा संस के चेयरमैन एन चंद्रशेखरन (Chairman N. Chandrasekaran) को एक और कार्यकाल दिए जाने पर फैसला होना है।

    चंद्रशेखरन का कार्यकाल सामान्य रूप से 20 फरवरी, 2027 को समाप्त होगा। हालांकि, कंपनी बोर्ड ने 17 सितंबर की एक हंगामेदार बैठक में उन्हें तीसरा कार्यकाल देने का प्रस्ताव पारित कर दिया था, लेकिन अब इसका अंतिम फैसला शेयरधारक ट्रस्टों के हाथ में है। सूत्रों के अनुसार, टाटा ट्रस्ट्स के अधीन आने वाले 7 ट्रस्टों की संरचना बताती है कि नोएल टाटा और उनके परिवार का प्रभाव बेहद मजबूत हो चुका है। इन ट्रस्टों में कुल 36 ट्रस्टी पद हैं। इनमें से 17 पदों पर अकेले नोएल टाटा और उनके परिवार (बेटे नेविल, बेटियां लीया और माया) का कब्जा है। रतन टाटा के निधन से कुछ महीने पहले मई 2024 में लीया और माया को तीन-तीन ट्रस्टों में शामिल किया गया था।

    किस ट्रस्ट में क्या है नोएल परिवार की ताकत
    सर दोराबजी टाटा ट्रस्ट (एसडीटीटी) : टाटा संस में 27.98% हिस्सेदारी वाले इस सबसे बड़े ट्रस्ट में कुल 6 में से 2 ट्रस्टी (33%) नोएल और उनके बेटे नेविल हैं।
    सर रतन टाटा ट्रस्ट (एसआरटीटी) : टाटा संस में 23.56% हिस्सेदारी। यह ट्रस्ट फिलहाल महाराष्ट्र चैरिटी कमिश्नर द्वारा कथित उल्लंघनों के कारण फ्रीज है।
    जेआरडी टाटा ट्रस्ट : टाटा संस में 4.01% हिस्सेदारी। नोएल और नेविल 50% हिस्सेदारी रखते हैं।
    टाटा एजुकेशन ट्रस्ट : टाटा संस में 3.73% हिस्सेदारी। नोएल, लीया और माया मिलकर कुल 60% ताकत रखते हैं।
    टाटा सोशल वेलफेयर ट्रस्ट : टाटा संस में 3.73% हिस्सेदारी। नोएल, लीया और नेविल का 60% दबदबा है।
    आरडी टाटा ट्रस्ट : नोएल, माया और नेविल की 50% हिस्सेदारी। अन्य ट्रस्टी विजय सिंह, श्रीनिवासन, तुषाद बी दुबाश हैं।
    सार्वजनिक सेवा ट्रस्ट : टाटा संस में 0.1% हिस्सेदारी। नोएल, लीया और माया 60% के मालिक हैं। अन्य ट्रस्टी जिमी टाटा और जेएन मिस्त्री हैं।

    शापूरजी पालोनजी ग्रुप और अन्य कंपनियों के 30% वोट भी अहम…
    एजीएम में केवल ट्रस्टों के वोट ही नहीं, बल्कि 18% से अधिक हिस्सेदारी रखने वाले शापूरजी पालोनजी (एसपी) ग्रुप का रुख भी देखा जाएगा। नोएल टाटा का विवाह एसपी ग्रुप के परिवार में हुआ है। इसके अलावा टाटा स्टील, टाटा मोटर्स, टाटा केमिकल्स और टाटा पावर के पास टाटा संस की करीब 12% हिस्सेदारी है।

  • Share Market 6 October, बाजार ने बदला रुख लेकिन चुनौतियां बरकरार, निवेशकों की नजर अब इन बड़े संकेतों पर

    Share Market 6 October, बाजार ने बदला रुख लेकिन चुनौतियां बरकरार, निवेशकों की नजर अब इन बड़े संकेतों पर


    नई दिल्ली। 6 अक्टूबर को भारतीय शेयर बाजार की चाल पर निवेशकों की नजर बनी हुई है। पिछले कारोबारी सत्र में बाजार ने लगातार चार दिनों की गिरावट का सिलसिला तोड़ते हुए राहत की सांस ली। 5 अक्टूबर को सेंसेक्स 472.77 अंक यानी 0.66 प्रतिशत की बढ़त के साथ 72 382.47 के स्तर पर बंद हुआ। वहीं निफ्टी 133.80 अंक यानी 0.60 प्रतिशत चढ़कर 22 555.75 पर पहुंच गया। बाजार में इस सुधार को कई अहम संकेतों से जोड़कर देखा जा रहा है।

    इससे पहले भारतीय शेयर बाजार लगातार आठ सप्ताह की गिरावट झेल चुका था। विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली ऊंची बॉन्ड यील्ड महंगा कच्चा तेल और कमजोर रुपये जैसे कारणों ने बाजार के सेंटीमेंट पर दबाव बनाया था। पिछले सप्ताह निफ्टी में करीब 3.10 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई थी और यह लगातार आठवीं साप्ताहिक गिरावट थी। यह सिलसिला करीब 25 वर्षों में सबसे लंबा साप्ताहिक गिरावट का दौर बताया गया है।

    5 अक्टूबर की तेजी में कच्चे तेल की कीमतों में नरमी और अलग अलग सेक्टर में खरीदारी ने अहम भूमिका निभाई। बाजार खुलते समय वैश्विक संकेतों का भी असर देखने को मिला। निफ्टी शुरुआती कारोबार में 22 621.80 के स्तर तक पहुंचा लेकिन बाद में मुनाफावसूली के कारण इसमें दबाव आया। इसके बावजूद दूसरे कारोबारी सत्र में बाजार ने रिकवरी की और निफ्टी 22 500 के ऊपर बंद होने में सफल रहा।

    निवेशकों के लिए 6 अक्टूबर को सबसे महत्वपूर्ण बात यह होगी कि बाजार पिछले सत्र की तेजी को आगे बढ़ा पाता है या नहीं। विदेशी निवेशकों की गतिविधियां भी बाजार की दिशा के लिए महत्वपूर्ण रहेंगी। सितंबर के अंतिम कारोबारी दिन विदेशी संस्थागत निवेशकों ने भारतीय शेयर बाजार में 10 148.41 करोड़ रुपये की बिकवाली की थी। इसके मुकाबले घरेलू संस्थागत निवेशकों ने 11 271.73 करोड़ रुपये की खरीदारी की थी।

    इसके अलावा कच्चे तेल की कीमतें और वैश्विक बॉन्ड यील्ड भी बाजार की चाल को प्रभावित कर सकते हैं। अमेरिका के साथ व्यापार वार्ता को लेकर सामने आए संकेत भी निवेशकों के लिए अहम हैं। 5 अक्टूबर को शुरुआती तेजी के बाद बाजार में उस समय दबाव बढ़ा जब वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने भारत अमेरिका व्यापार समझौते की बातचीत के फिलहाल एक ठहराव पर पहुंचने की बात कही। इसके बाद सेंसेक्स और निफ्टी ने अपनी शुरुआती बढ़त का एक हिस्सा गंवा दिया था।

    5 अक्टूबर के कारोबार में Tata Motors Passenger Vehicles ITC Bajaj Finance Shriram Finance और NTPC जैसे शेयर निफ्टी के प्रमुख बढ़ने वाले शेयरों में रहे। वहीं HCL Technologies Max Healthcare HDFC Bank Asian Paints और Apollo Hospitals जैसे शेयरों में दबाव देखा गया। व्यापक बाजार में भी मिडकैप और स्मॉलकैप सूचकांकों में करीब 0.5 प्रतिशत की बढ़त रही।

    ऐसे माहौल में 6 अक्टूबर को निवेशकों के लिए बाजार में तेजी देखकर जल्दबाजी में फैसला लेने के बजाय कंपनियों के नतीजे कारोबार की स्थिति वैश्विक संकेत और शेयर की वैल्यूएशन पर ध्यान देना जरूरी होगा। बाजार में उतार चढ़ाव अभी बना हुआ है इसलिए किसी भी निवेश निर्णय से पहले अपने वित्तीय लक्ष्य और जोखिम क्षमता को ध्यान में रखना बेहतर रहेगा। यह लेख निवेश सलाह नहीं है।

  • सीमित सैलरी में घर चलाना है आसान तो अपनाएं ये बजट टिप्स, खर्च संभालने के साथ हर महीने बढ़ेगी आपकी बचत

    सीमित सैलरी में घर चलाना है आसान तो अपनाएं ये बजट टिप्स, खर्च संभालने के साथ हर महीने बढ़ेगी आपकी बचत


    नई दिल्ली । बढ़ती महंगाई के दौर में सीमित सैलरी में घर का खर्च चलाने के साथ बचत करना कई लोगों के लिए चुनौती बन गया है। कई बार महीने के अंत तक पैसे खत्म हो जाते हैं और यह समझना मुश्किल हो जाता है कि रकम कहां खर्च हुई। ऐसी स्थिति में बेहतर वित्तीय योजना और खर्च का सही प्रबंधन जरूरी हो जाता है। सैलरी कितनी भी हो, यदि आय और खर्च का पहले से हिसाब रखा जाए तो घरेलू जरूरतों को पूरा करने के साथ भविष्य के लिए भी रकम बचाई जा सकती है। इसके लिए बजट बनाने और खर्च को प्राथमिकता देने की आदत अपनाना जरूरी है।

    सैलरी को व्यवस्थित करने के लिए 50-30-20 का नियम अपनाया जा सकता है। इसके तहत आय का 50 प्रतिशत हिस्सा जरूरी खर्चों के लिए रखा जाता है। इसमें घर का किराया, राशन, बिजली-पानी के बिल, बच्चों की स्कूल फीस और ईएमआई जैसे खर्च शामिल किए जा सकते हैं। आय का 30 प्रतिशत हिस्सा इच्छाओं और जीवनशैली से जुड़े खर्चों के लिए रखा जा सकता है, जिसमें बाहर खाना, खरीदारी, घूमना-फिरना और मनोरंजन शामिल हैं। बाकी 20 प्रतिशत रकम भविष्य के लिए बचत या निवेश में लगाई जा सकती है। इस राशि को सेविंग्स अकाउंट, एफडी, म्यूचुअल फंड या अन्य निर्धारित विकल्पों में रखा जा सकता है।

    महीने की शुरुआत में ही पूरा बजट तैयार करना भी जरूरी है। सैलरी मिलते ही किराना, दूध, सब्जियों और दूसरी जरूरी चीजों पर होने वाले अनुमानित खर्च को तय कर लें। इससे पूरे महीने के दौरान पैसों के इस्तेमाल पर नजर बनी रहती है और गैर-जरूरी खर्च को नियंत्रित करना आसान होता है। साथ ही ‘पहले बचत, फिर खर्च’ का सिद्धांत अपनाना उपयोगी हो सकता है। आमतौर पर लोग महीने भर खर्च करने के बाद बची रकम को बचाने की सोचते हैं, लेकिन ऐसा हमेशा संभव नहीं हो पाता। इसलिए सैलरी आते ही बचत और निवेश के लिए निर्धारित राशि अलग कर लेना बेहतर तरीका माना जाता है।

    घरेलू खर्च में छोटी-छोटी बचत भी महीने के बजट पर असर डाल सकती है। बाजार या सुपरमार्केट जाने से पहले जरूरी सामान की सूची तैयार करने से अनावश्यक खरीदारी से बचा जा सकता है। बिजली और पानी की खपत को नियंत्रित करने से भी नियमित खर्च कम किया जा सकता है। इसके अलावा बाहर खाने और ऑनलाइन खाना मंगाने की संख्या सीमित करना भी बजट को संभालने में मदद कर सकता है। घर में बने भोजन को प्राथमिकता देने से खर्च को नियंत्रित रखने में मदद मिलती है। इस तरह रोजमर्रा की आदतों में थोड़े बदलाव करके महीने के कुल खर्च को व्यवस्थित किया जा सकता है।

    अचानक आने वाले खर्चों के लिए इमरजेंसी फंड बनाना भी जरूरी है। मेडिकल खर्च या दूसरी आकस्मिक जरूरत के समय यह रकम आर्थिक दबाव कम कर सकती है। इसके लिए धीरे-धीरे बचत करके कम से कम तीन से छह महीने के घरेलू खर्च के बराबर आपातकालीन कोष तैयार करने की सलाह दी जाती है। इससे अचानक जरूरत पड़ने पर उधार लेने की स्थिति से बचने में मदद मिल सकती है। सही बजट, नियमित बचत, नियंत्रित खर्च और आपातकालीन फंड के जरिए सीमित सैलरी में भी घर का वित्तीय प्रबंधन बेहतर तरीके से किया जा सकता है।

  • Jio Platforms का 3.8 अरब डॉलर का IPO 21 अक्टूबर को खुल सकता है, भारत के सबसे बड़े IPO का बन सकता है रिकॉर्ड

    Jio Platforms का 3.8 अरब डॉलर का IPO 21 अक्टूबर को खुल सकता है, भारत के सबसे बड़े IPO का बन सकता है रिकॉर्ड

    नई दिल्ली । मुकेश अंबानी की Jio Platforms करीब 3.8 अरब डॉलर का IPO लॉन्च करने की तैयारी में है। प्रस्तावित IPO 21 अक्टूबर को खुल सकता है और इसके बाद कंपनी के शेयर 28 अक्टूबर को शेयर बाजार में सूचीबद्ध होने की उम्मीद है। यदि IPO इसी आकार के साथ आता है तो यह भारत का अब तक का सबसे बड़ा IPO बन सकता है। इससे पहले यह रिकॉर्ड Hyundai Motor India के पास है, जिसने 2024 में करीब 2.9 अरब डॉलर का IPO पेश किया था। Jio Platforms के प्रस्तावित IPO से जुटाई जाने वाली रकम का बड़ा हिस्सा कंपनी के टेलीकॉम कारोबार से जुड़े कर्ज को चुकाने में इस्तेमाल किए जाने की योजना है।

    प्रस्तावित IPO के जरिए कंपनी करीब 3.8 अरब डॉलर की रकम जुटाने की योजना बना रही है। हालांकि, इस संबंध में कंपनी की ओर से अभी कोई आधिकारिक टिप्पणी नहीं की गई है। IPO के बाद 28 अक्टूबर को Jio Platforms के शेयरों की शेयर बाजार में लिस्टिंग होने की उम्मीद जताई जा रही है। IPO का अंतिम आकार और अन्य महत्वपूर्ण जानकारी कंपनी की आधिकारिक घोषणा के बाद ही स्पष्ट होगी। फिलहाल प्रस्तावित तारीख और रकम के आधार पर यह भारतीय शेयर बाजार में एक बड़ा सार्वजनिक निर्गम माना जा रहा है।

    यदि Jio Platforms का IPO करीब 3.8 अरब डॉलर के आकार में आता है तो यह देश के अब तक के सबसे बड़े IPO का रिकॉर्ड अपने नाम कर सकता है। वर्तमान में Hyundai Motor India का करीब 2.9 अरब डॉलर का IPO इस मामले में सबसे आगे है। इसके बाद NSE का करीब 2.3 अरब डॉलर का IPO रहा है। NSE ने पिछले महीने शेयर बाजार में अपनी शुरुआत की थी। प्रस्तावित आकार के साथ Jio Platforms का IPO इन दोनों बड़े IPO से आगे निकल सकता है और भारतीय IPO बाजार में नया रिकॉर्ड बना सकता है।

    IPO से मिलने वाली रकम का बड़ा हिस्सा कंपनी के टेलीकॉम डिविजन का कर्ज चुकाने में इस्तेमाल किया जाएगा। Jio Platforms का कारोबार केवल टेलीकॉम तक सीमित नहीं है। कंपनी AI क्लाउड और एंटरप्राइज नेटवर्क जैसे क्षेत्रों में भी काम करती है। इन क्षेत्रों में विस्तार के साथ कंपनी का कारोबार टेलीकॉम से आगे बढ़ा है। IPO के जरिए जुटाई जाने वाली रकम से कर्ज का बोझ कम करने में मदद मिल सकती है। कंपनी में Meta और Google जैसे बड़े विदेशी निवेशकों की भी हिस्सेदारी है, जो इसके प्रमुख विदेशी निवेशकों में शामिल हैं।

    भारतीय IPO बाजार में आने वाले समय में कई बड़े निर्गम देखने को मिल सकते हैं। इनमें डेनमार्क की बीयर कंपनी Carlsberg का भारत कारोबार और होटल एग्रीगेटर Oyo की पैरेंट कंपनी Prism भी शामिल हैं। आंकड़ों के मुताबिक करीब 250 कंपनियां कुल 4.65 लाख करोड़ रुपये जुटाने की योजना बना रही हैं। ऐसे में Jio Platforms का प्रस्तावित IPO भारतीय IPO बाजार के लिए महत्वपूर्ण हो सकता है। हालांकि, 21 अक्टूबर को IPO खुलने, 28 अक्टूबर को लिस्टिंग और करीब 3.8 अरब डॉलर जुटाने से जुड़ी अंतिम जानकारी कंपनी की आधिकारिक घोषणा के बाद ही स्पष्ट होगी।

  • शेयर बाजार में चार दिन बाद लौटी तेजी, सेंसेक्स 473 अंक चढ़ा; निफ्टी 0.60 प्रतिशत की बढ़त के साथ बंद

    शेयर बाजार में चार दिन बाद लौटी तेजी, सेंसेक्स 473 अंक चढ़ा; निफ्टी 0.60 प्रतिशत की बढ़त के साथ बंद


    नई दिल्ली: भारतीय शेयर बाजार ने लगातार चार दिनों की गिरावट का सिलसिला तोड़ते हुए सोमवार को बढ़त के साथ कारोबार समाप्त किया। अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों में तेजी से बढ़ोतरी की आशंकाएं कम होने और वैश्विक शेयर बाजारों में तेजी का असर घरेलू बाजार पर भी दिखाई दिया। प्रमुख बेंचमार्क सूचकांकों में 0.66 प्रतिशत तक की बढ़त दर्ज की गई। बीएसई सेंसेक्स 472.77 अंक यानी 0.66 प्रतिशत की तेजी के साथ 72,382.47 पर बंद हुआ। वहीं, निफ्टी 50 में 133.80 अंक यानी 0.60 प्रतिशत की बढ़त रही और यह 22,555.75 के स्तर पर बंद हुआ।

    निफ्टी 50 में आईटीसी के शेयरों में सबसे ज्यादा तेजी रही और इसमें 5 प्रतिशत से अधिक की बढ़त दर्ज की गई। इसके बाद बीएसई, टाटा मोटर्स पैसेंजर व्हीकल्स, श्रीराम फाइनेंस, बजाज फाइनेंस, भारती एयरटेल, इटरनल, एनटीपीसी और अदाणी पोर्ट्स के शेयरों में भी अच्छी तेजी देखने को मिली। दूसरी ओर, एचसीएल टेक, मैक्स हेल्थ, एचडीएफसी बैंक, अपोलो हॉस्पिटल, एशियन पेंट्स, इंफोसिस और सन फार्मा के शेयरों में सबसे ज्यादा गिरावट दर्ज की गई। व्यापक बाजारों में भी खरीदारी का रुझान रहा। निफ्टी मिडकैप में 0.67 प्रतिशत और निफ्टी स्मॉलकैप में 0.47 प्रतिशत की बढ़त दर्ज की गई।

    सेक्टरवार प्रदर्शन की बात करें तो निफ्टी कंज्यूमर ड्यूरेबल्स और निफ्टी एफएमसीजी ने बेहतर प्रदर्शन किया, जबकि निफ्टी हेल्थकेयर और निफ्टी फार्मा कमजोर रहे। एक मार्केट एक्सपर्ट के मुताबिक, भारतीय शेयर बाजार में सोमवार को लगातार आठ हफ्तों की गिरावट के बाद कुछ राहत भरी रिकवरी देखने को मिली। इस बढ़त को कच्चे तेल की कीमतों में नरमी और अमेरिका के कमजोर जॉब्स डेटा के बाद ब्याज दरों में तेज बढ़ोतरी की उम्मीद कम होने से समर्थन मिला। इन परिस्थितियों ने वैश्विक बाजारों में धारणा को बेहतर किया, जिसका असर भारतीय शेयर बाजार पर भी पड़ा।

    हालांकि, दिन के उच्चतम स्तर से बाजार में आई गिरावट से संकेत मिलता है कि निवेशक अभी भी पूरी तरह आश्वस्त नहीं हैं। ऊंची वैश्विक बॉन्ड यील्ड, विदेशी निवेश की लगातार निकासी और भू-राजनीतिक जोखिमों को लेकर बाजार में सतर्कता बनी हुई है। एक्सपर्ट ने कहा कि फाइनेंशियल, आईटी और कंज्यूमर सेक्टर के शेयर बाजार को सहारा दे रहे हैं, जबकि कुछ चुनिंदा आईटी और हेल्थकेयर शेयरों में कमजोरी व्यापक स्तर पर भरोसे की कमी को दर्शाती है। ऐसे में निवेशकों को आगे कमाई की संभावनाओं पर ध्यान देने और बाजार की रिकवरी के पीछे भागने के बजाय गिरावट के दौरान चुनिंदा शेयरों में खरीदारी करने पर विचार करना चाहिए।

  • GST के अगले चरण से कारोबार और आसान होगा, रिफंड प्रक्रिया सरल बनेगी; PM मोदी ने निवेश बढ़ने की उम्मीद जताई

    GST के अगले चरण से कारोबार और आसान होगा, रिफंड प्रक्रिया सरल बनेगी; PM मोदी ने निवेश बढ़ने की उम्मीद जताई

    नई दिल्ली ।प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा है कि वस्तु एवं सेवा कर यानी जीएसटी सुधारों का अगला चरण कारोबारियों के लिए अनुपालन प्रक्रिया को और आसान बनाएगा। इसके साथ ही रिफंड प्रक्रिया को सरल और तेज करने पर जोर दिया जाएगा। प्रधानमंत्री के अनुसार, इन सुधारों से उद्योग जगत का विश्वास बढ़ने, निवेश को प्रोत्साहन मिलने और विकसित भारत के लक्ष्य को मजबूत आधार मिलने की उम्मीद है। उन्होंने यह बात वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के उस लेख का उल्लेख करते हुए कही, जिसमें जीएसटी सुधारों के अगले चरण की रूपरेखा बताई गई है। जीएसटी में प्रक्रिया सुधारों का उद्देश्य कारोबारियों के लिए अनुपालन को आसान बनाना और लागत कम करना है।

    वित्त मंत्री ने बताया कि नई पीढ़ी के जीएसटी सुधारों में करदाताओं को राहत देने और अर्थव्यवस्था को गति देने पर ध्यान दिया जा रहा है। आगामी प्रक्रिया सुधारों में रजिस्ट्रेशन, रिटर्न फाइलिंग, रिफंड, विवाद निपटान और इनपुट टैक्स क्रेडिट यानी आईटीसी से जुड़ी प्रक्रियाओं को सरल बनाने पर मुख्य जोर रहेगा। जीएसटी परिषद की सात अक्टूबर को होने वाली बैठक से पहले रखी गई रूपरेखा में अनुपालन में लगने वाले समय और लागत को कम करने की बात कही गई है। इसका उद्देश्य कारोबारियों के लिए कागजी कार्रवाई घटाकर प्रक्रिया को अधिक सुविधाजनक बनाना है।

    सुधारों के संदर्भ में सितंबर 2025 में लागू हुई दर युक्तिकरण प्रक्रिया के बाद जीएसटी संग्रह और कर योग्य आपूर्ति के प्रदर्शन का भी उल्लेख किया गया है। सरकार का मानना है कि जीएसटी ने राजस्व संग्रह को मजबूत करने के साथ आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा देने में भूमिका निभाई है। आगामी बदलाव प्रक्रिया को सरल बनाने की दिशा में आगे बढ़ेंगे। जीएसटी परिषद की लॉ कमेटी जीएसटी कानून और नियमों से जुड़े कानूनी मामलों की समीक्षा करती है तथा जरूरी संशोधनों और स्पष्टीकरणों की सिफारिश परिषद के समक्ष रखती है।

    आगामी जीएसटी परिषद की बैठक में कानून से जुड़े एक महत्वपूर्ण मुद्दे पर भी विचार होने की संभावना है। प्रस्तावित चर्चा में जीएसटी कानून के उस प्रावधान की समीक्षा शामिल हो सकती है, जिसके तहत जांच के दौरान कुछ गंभीर मामलों में कर अधिकारियों को गिरफ्तारी का अधिकार मिलता है। यह विषय जीएसटी कानूनों के अपराधमुक्तिकरण से जुड़े व्यापक प्रस्तावों का हिस्सा बताया गया है। जीएसटी परिषद के दस्तावेजों में पहले भी कुछ अपराधों को अपराधमुक्त करने, अभियोजन की सीमा में बदलाव और कंपाउंडिंग प्रक्रिया को आसान बनाने जैसे प्रस्तावों पर चर्चा दर्ज है।

    वर्तमान व्यवस्था में सीजीएसटी अधिनियम की धारा 69 के तहत आयुक्त को कुछ परिस्थितियों में गिरफ्तारी की अनुमति देने का अधिकार है, जब उन्हें यह विश्वास हो कि किसी व्यक्ति ने धारा 132 के तहत गंभीर अपराध किया है। प्रस्तावित सोच के तहत फर्जी चालान, फर्जी इनपुट टैक्स क्रेडिट और फर्जी रिफंड दावों जैसे गंभीर मामलों में कार्रवाई सामान्य आपराधिक कानूनों के तहत किए जाने की व्यवस्था पर भी विचार हो सकता है। इसका उद्देश्य गंभीर धोखाधड़ी के मामलों में कार्रवाई जारी रखते हुए अन्य करदाताओं के लिए अनुपालन व्यवस्था को अधिक सहज बनाना है। हालांकि, इन प्रस्तावों पर अंतिम निर्णय संबंधित प्रक्रिया और जीएसटी परिषद के विचार-विमर्श के बाद ही होगा।