Category: Economy

  • मोटर इंश्योरेंस खरीदने वालों को मिल सकते हैं ज्यादा विकल्प, IRDAI के प्रस्ताव से डीलर कमीशन व्यवस्था में बदलाव संभव

    मोटर इंश्योरेंस खरीदने वालों को मिल सकते हैं ज्यादा विकल्प, IRDAI के प्रस्ताव से डीलर कमीशन व्यवस्था में बदलाव संभव

    नई दिल्ली । नई कार या बाइक खरीदते समय ज्यादातर ग्राहक इंश्योरेंस भी उसी डीलर से करा लेते हैं, जहां से वाहन खरीदा जाता है। ऐसे में अलग-अलग बीमा कंपनियों की पॉलिसी, कीमत और उपलब्ध विकल्पों की तुलना करना हमेशा आसान नहीं होता। अब मोटर इंश्योरेंस की बिक्री व्यवस्था में बदलाव के प्रस्ताव से ग्राहकों को डीलर के अलावा दूसरे माध्यमों से बीमा खरीदने का विकल्प मिल सकता है।

    भारतीय बीमा विनियामक और विकास प्राधिकरण ने मोटर इंश्योरेंस की बिक्री और कमीशन व्यवस्था को लेकर एक पब्लिक कंसल्टेशन पेपर जारी किया है। इसमें मोटर इंश्योरेंस से जुड़े कमीशन और वितरण व्यवस्था की समीक्षा की गई है। नियामक के अनुसार अलग-अलग मामलों में मोटर इंश्योरेंस पर कमीशन 13 प्रतिशत से 50 प्रतिशत तक हो सकता है, जबकि औसत करीब 24 प्रतिशत बताया गया है।

    नए और पुराने वाहनों की बिक्री से जुड़े ब्रोकर्स और मोटर इंश्योरेंस सर्विस प्रोवाइडर्स के माध्यम से वित्त वर्ष 2025 में करीब 29,000 करोड़ रुपये का प्रीमियम जुटाया गया। इसमें करीब 7,050 करोड़ रुपये कमीशन के तौर पर गया। प्रस्ताव में इस बात पर विचार किया गया है कि अपेक्षाकृत सरल मोटर इंश्योरेंस उत्पादों पर इतनी ऊंची कमीशन लागत कितनी उचित है।

    प्रस्तावित व्यवस्था में ग्राहकों को डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए नए और पुराने वाहनों के इंश्योरेंस उत्पादों तक पहुंच देने की बात कही गई है। इससे ग्राहक अलग-अलग विकल्पों की जानकारी ले सकेंगे और डीलर से अलग माध्यम के जरिए पॉलिसी खरीदने का विकल्प चुन सकते हैं। ऐसे गैर-लाभकारी डिजिटल प्लेटफॉर्म पर लागत वसूलने के लिए प्रीमियम का अधिकतम पांच प्रतिशत शुल्क रखने का प्रस्ताव भी दिया गया है।

    अगर प्रस्ताव लागू होते हैं तो वाहन डीलरों को ग्राहकों के सामने डिजिटल प्लेटफॉर्म का विकल्प और क्यूआर कोड स्पष्ट रूप से प्रदर्शित करना पड़ सकता है। इसका उद्देश्य ग्राहक को यह जानकारी देना है कि इंश्योरेंस खरीदने के लिए केवल डीलर पर निर्भर रहना जरूरी नहीं है।

    वाहन लोन के साथ इंश्योरेंस की बिक्री को लेकर भी प्रस्ताव में ध्यान दिया गया है। लोन और बीमा की बंडलिंग से जुड़े मामलों में करीब 16 प्रतिशत कमीशन देखे जाने का उल्लेख किया गया है। प्रस्तावित बदलावों में ग्राहक को लोन लेते समय इंश्योरेंस की कीमत और उसे खरीदने के माध्यम की स्पष्ट जानकारी देने पर जोर है।

    पुराने वाहनों के बीमा में भी कमीशन व्यवस्था की समीक्षा की गई है। प्रस्ताव के मुताबिक कई डीलरों के पास सर्विस और रिपेयर की सुविधाएं होने के बावजूद पुराने वाहनों के इंश्योरेंस पर मोटर इंश्योरेंस सर्विस प्रोवाइडर्स को औसतन करीब 12 प्रतिशत कमीशन मिलता है।

    कैशलेस रिपेयर को लेकर भी महत्वपूर्ण प्रस्ताव है। यदि ग्राहक ने किसी दूसरे बीमाकर्ता से पॉलिसी खरीदी है और उसमें कैशलेस रिपेयर की सुविधा उपलब्ध है, तो केवल इस आधार पर डीलर सुविधा से इनकार नहीं कर सकेगा कि बीमा उसी डीलर से नहीं लिया गया।

    इसके अलावा पॉलिसी बिक्री के आधार पर अतिरिक्त इंसेंटिव देने वाली कुछ व्यवस्थाओं पर रोक का प्रस्ताव है। अनिवार्य थर्ड-पार्टी बीमा और सरल मोटर इंश्योरेंस उत्पादों पर कम कमीशन रखने की भी बात कही गई है।

    हालांकि, ये बदलाव अभी लागू नहीं हुए हैं। संबंधित प्रस्ताव पर सुझाव और आपत्तियां 25 अक्टूबर 2026 तक मांगी गई हैं। इसके बाद प्राप्त प्रतिक्रियाओं पर विचार करके आगे की प्रक्रिया तय होगी। इसलिए फिलहाल मोटर इंश्योरेंस की मौजूदा व्यवस्था में तत्काल बदलाव नहीं माना जा सकता।

  • राजनाथ सिंह बोले- चिप से जहाज और स्क्रू से हथियार तक, रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता जरूरी

    राजनाथ सिंह बोले- चिप से जहाज और स्क्रू से हथियार तक, रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता जरूरी

    नई दिल्ली। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा है कि बदलते वैश्विक सुरक्षा माहौल में भारत को अपनी रक्षा विनिर्माण क्षमता मजबूत करने के साथ-साथ महत्वपूर्ण तकनीकों पर अधिक नियंत्रण हासिल करना होगा। उन्होंने रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता को रणनीतिक स्वायत्तता से जोड़ते हुए कहा कि देश में जिस चीज का निर्माण संभव है, उसे घरेलू स्तर पर तैयार करने की दिशा में आगे बढ़ना जरूरी है।

    राजधानी में आयोजित रक्षा सम्मेलन को संबोधित करते हुए राजनाथ सिंह ने कहा कि भारत की सोच स्पष्ट है कि जो वस्तु देश में बनाई जा सकती है, उसके लिए आयात पर निर्भरता कम की जाए। उन्होंने कहा कि चिप से लेकर जहाजों तक और छोटे स्क्रू से लेकर पूरी हथियार प्रणालियों तक घरेलू उत्पादन की क्षमता विकसित करना भारत को रणनीतिक रूप से अधिक सक्षम बनाएगा।

    रक्षा मंत्री ने स्वदेशी डिजाइन, नवाचार और देश की जरूरतों के अनुरूप तकनीक विकसित करने को भविष्य की रक्षा तैयारियों के लिए महत्वपूर्ण बताया। उनके अनुसार, रक्षा आपूर्ति श्रृंखला के अहम हिस्सों का निर्माण देश में करने और उन पर नियंत्रण रखने से राष्ट्रीय सुरक्षा मजबूत होगी तथा विदेशी आपूर्तिकर्ताओं पर निर्भरता घटेगी।

    सिंह ने कहा कि रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता केवल मौजूदा जरूरतों को पूरा करने तक सीमित नहीं होनी चाहिए। लंबी अवधि की तैयारियों के लिए महत्वपूर्ण तकनीकों में विशेषज्ञता हासिल करना और पूरे विनिर्माण तंत्र को मजबूत बनाना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि हाल के वर्षों में सरकार ने घरेलू रक्षा उद्योग को गति देने के लिए कई संरचनात्मक और परिवर्तनकारी सुधार किए हैं।

    रक्षा मंत्री ने युद्ध के बदलते स्वरूप का उल्लेख करते हुए कहा कि जिस तरह दूरसंचार तकनीक 2जी से 5जी तक पहुंची, उसी तरह युद्ध भी तकनीक के नए चरण में प्रवेश कर चुका है। आधुनिक संघर्षों में तकनीकी क्षमता सैन्य अभियानों और उनके परिणामों को तेजी से प्रभावित कर रही है।

    उन्होंने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, क्वांटम तकनीक, रोबोटिक्स, स्वायत्त प्रणालियां और साइबर सुरक्षा अब आधुनिक युद्ध का अभिन्न हिस्सा बन रही हैं। भारत इन क्षेत्रों में स्वदेशी क्षमताओं को बढ़ावा देने के साथ-साथ रक्षा नवाचार के लिए जरूरी नीतिगत ढांचे को भी मजबूत कर रहा है।

    सिंह के अनुसार, भारत संपर्क आधारित और गैर-संपर्क युद्ध के साथ-साथ काइनेटिक और नॉन-काइनेटिक सैन्य अभियानों से निपटने की क्षमता बढ़ा रहा है। राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण ऊर्जा संसाधनों में विविधता लाने पर भी जोर दिया जा रहा है, ताकि रणनीतिक जरूरतों के समय निर्भरता कम रहे।

    उन्होंने कहा कि भविष्य के युद्धक्षेत्र कई क्षेत्रों में फैले होंगे और उनमें तकनीक की भूमिका लगातार बढ़ेगी। अत्याधुनिक तकनीकों में बढ़त हासिल करने वाले देशों के पास बदलती सुरक्षा चुनौतियों का सामना करने के लिए अधिक सक्षम साधन होंगे।

    रक्षा मंत्री ने देश के युवाओं की भूमिका को भी महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि युवा भारतीय आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, ड्रोन, रोबोटिक्स, क्वांटम कंप्यूटिंग, साइबर सुरक्षा और स्वायत्त प्रणालियों जैसी तकनीकों पर काम कर रहे हैं। उनके मुताबिक युवा केवल भविष्य की नौकरियों के लिए तैयारी नहीं कर रहे, बल्कि देश की भविष्य की रक्षा जरूरतों के लिए तकनीक विकसित करने में भी योगदान दे रहे हैं।

  • भारत समुद्री बीमा पूल ने कारोबारियों को दिया युद्ध-जोखिम कवरेज, अब तक 3000 से अधिक पॉलिसी जारी

    भारत समुद्री बीमा पूल ने कारोबारियों को दिया युद्ध-जोखिम कवरेज, अब तक 3000 से अधिक पॉलिसी जारी

    नई दिल्ली। वैश्विक अस्थिरता और युद्ध जैसी परिस्थितियों के कारण समुद्री कारोबार से जुड़े जोखिम बढ़ने के बीच भारत समुद्री बीमा पूल ने भारतीय समुद्री क्षेत्र के लिए युद्ध-जोखिम बीमा की निर्बाध उपलब्धता सुनिश्चित की है। इसके तहत अब तक 3000 से अधिक माल युद्ध-जोखिम बीमा पॉलिसी जारी की जा चुकी हैं। पश्चिम एशिया में टकराव के बाद युद्ध-जोखिम बीमा प्रीमियम में करीब 35 से 40 प्रतिशत की गिरावट आने की जानकारी भी सामने आई है।

    उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, 7 सितंबर 2026 तक भारत समुद्री बीमा पूल ने 3000 माल युद्ध-जोखिम पॉलिसी जारी की थीं। इसके अलावा 92 जलपोत ढांचा युद्ध-जोखिम पॉलिसी और तीन संरक्षण एवं क्षतिपूर्ति यानी पीएंडआई बीमा पॉलिसी भी जारी की गई हैं। इन प्रावधानों का उद्देश्य समुद्री व्यापार से जुड़े भारतीय पक्षकारों को बदलती वैश्विक परिस्थितियों के बीच बीमा सुरक्षा उपलब्ध कराना है।

    भारत समुद्री बीमा पूल भारतीय ध्वज वाले जहाजों के साथ-साथ उन जहाजों से जुड़े जोखिमों के लिए समुद्री बीमा उपलब्ध कराता है, जिनका स्वामित्व, प्रबंधन या नियंत्रण भारतीय संस्थाओं के पास है। इसके दायरे में भारत से आने या भारत से शुरू होने वाले माल को ले जाने वाले पोत भी शामिल हैं।

    इस पूल की शुरुआत मई 2026 में 13,906.50 करोड़ रुपये यानी 1.5 अरब अमेरिकी डॉलर तक के कवरेज के साथ की गई थी। इसके जरिए जहाज के ढांचे, माल, संरक्षण एवं क्षतिपूर्ति और युद्ध से जुड़े जोखिमों के लिए घरेलू स्तर पर बीमा कवरेज उपलब्ध कराया जाता है। इसका एक उद्देश्य विदेशी बीमाकर्ताओं पर निर्भरता कम करना और वैश्विक व्यवधानों के दौरान भारतीय समुद्री कारोबार को निरंतर बीमा सुरक्षा देना है।

    इस व्यवस्था के तहत बीमा पॉलिसियां घरेलू बीमा कंपनियों द्वारा जारी की जाती हैं। जोखिमों का पुनर्बीमाकरण सदस्यों की प्रतिबद्धताओं के आधार पर सामूहिक रूप से किया जाता है। 100 मिलियन अमेरिकी डॉलर तक के दावों का निपटान आरक्षित निधियों के माध्यम से किया जाता है, जबकि इससे बड़े दावों के लिए संप्रभु गारंटी का प्रावधान रखा गया है।

    भारत समुद्री बीमा पूल के माध्यम से तटीय जहाजों के लिए युद्ध-जोखिम और पीएंडआई पॉलिसियां भी जारी की गई हैं। इसका उद्देश्य समुद्री कारोबार से जुड़े जोखिमों को कम करने के साथ बीमा लागत को नियंत्रित रखना और देश की समुद्री वित्तीय क्षमता को मजबूत करना है।

    बीमा कवरेज के तहत जहाज के मुख्य ढांचे, उसे चलाने वाली मशीनरी और उसमें लगे उपकरणों को होने वाले नुकसान से सुरक्षा मिलती है। इससे भारतीय व्यापारिक जहाजों में लगी पूंजी को बीमा सुरक्षा मिलती है और इस तरह के जोखिमों के लिए घरेलू बीमा व्यवस्था मजबूत होती है।

    इसके अलावा अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्गों से भेजे जाने वाले माल को नुकसान या खराब होने के जोखिम से भी सुरक्षा मिलती है। विशेष रूप से ऐसे समुद्री रास्तों पर यह कवरेज महत्वपूर्ण है, जहां जोखिम सामान्य परिस्थितियों की तुलना में अधिक रहता है। इससे भारतीय निर्यातकों और आयातकों को अपने माल की सुरक्षा के लिहाज से सहायता मिलती है।

    युद्ध-जोखिम बीमा में सशस्त्र संघर्ष, समुद्री डकैती, आतंकवाद और दुश्मन के जहाज द्वारा कब्जे जैसी परिस्थितियों से होने वाले नुकसान को भी शामिल किया गया है। लाल सागर, होर्मुज जलडमरूमध्य और अन्य संवेदनशील समुद्री क्षेत्रों से गुजरने वाले भारतीय व्यापारिक मार्गों के लिए इस तरह की सुरक्षा महत्वपूर्ण मानी जाती है।

    भारत समुद्री बीमा पूल को देश की समुद्री वित्तीय स्वतंत्रता की दिशा में एक महत्वपूर्ण व्यवस्था के तौर पर देखा जा रहा है। इसका उद्देश्य समुद्री कारोबार से जुड़े पक्षकारों को भरोसेमंद संचालन, प्रतिस्पर्धी बीमा दरों और दावों के निपटान की विश्वसनीय व्यवस्था उपलब्ध कराना है।

  • अगले हफ्ते कच्चा तेल, अमेरिका-ईरान तनाव और आर्थिक आंकड़े तय करेंगे शेयर बाजार की दिशा

    अगले हफ्ते कच्चा तेल, अमेरिका-ईरान तनाव और आर्थिक आंकड़े तय करेंगे शेयर बाजार की दिशा

    नई दिल्ली। भारतीय शेयर बाजार के लिए आने वाला कारोबारी सप्ताह कई महत्वपूर्ण घटनाक्रमों और आर्थिक आंकड़ों के लिहाज से अहम रहने वाला है। बाजार की दिशा पर कच्चे तेल की कीमतों, अमेरिका-ईरान के बीच जारी तनाव और देश के प्रमुख आर्थिक आंकड़ों का असर देखने को मिल सकता है। इसके अलावा ऑटो बिक्री, जीएसटी संग्रह, पीएमआई, औद्योगिक उत्पादन, राजकोषीय घाटे और विदेशी मुद्रा भंडार से जुड़े आंकड़े भी निवेशकों के लिए महत्वपूर्ण रहेंगे।

    मध्य पूर्व में जारी तनाव के बीच कच्चे तेल की कीमतों पर बाजार की नजर बनी हुई है। कच्चा तेल 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर बना हुआ है। ऐसे में अमेरिका-ईरान तनाव से जुड़ा कोई नया घटनाक्रम बाजार की धारणा को प्रभावित कर सकता है। यदि क्षेत्र में तनाव कम होने के संकेत मिलते हैं तो कच्चे तेल की कीमतों में बदलाव के साथ भारतीय शेयर बाजार पर भी उसका असर दिखाई दे सकता है।

    घरेलू मोर्चे पर अगले सप्ताह कई महत्वपूर्ण आंकड़े जारी होने हैं। इनमें ऑटो बिक्री के आंकड़े, जीएसटी से जुड़े आंकड़े, औद्योगिक और विनिर्माण उत्पादन, पीएमआई, राजकोषीय घाटा तथा विदेशी मुद्रा भंडार शामिल हैं। इन आंकड़ों से अर्थव्यवस्था की मौजूदा स्थिति और कारोबारी गतिविधियों को लेकर संकेत मिल सकते हैं।

    अगले कारोबारी सप्ताह में गांधी जयंती के कारण बाजार में केवल चार सत्रों में कारोबार होगा। छुट्टी के चलते सप्ताह सामान्य कारोबारी सप्ताह की तुलना में छोटा रहेगा। ऐसे में उपलब्ध कारोबारी सत्रों के दौरान वैश्विक घटनाक्रम और घरेलू आंकड़ों पर निवेशकों की प्रतिक्रिया महत्वपूर्ण हो सकती है।

    पिछले कारोबारी सप्ताह में भारतीय शेयर बाजार दबाव में रहा। सेंसेक्स 399.22 अंक यानी 0.54 प्रतिशत की गिरावट के साथ 73,895.74 अंक पर बंद हुआ। वहीं निफ्टी 205.90 अंक यानी 0.88 प्रतिशत कमजोर होकर 23,140.50 अंक पर रहा।

    21 से 25 सितंबर के दौरान बड़े शेयरों के साथ मिडकैप और स्मॉलकैप सूचकांकों में भी गिरावट दर्ज की गई। निफ्टी मिडकैप 100 इंडेक्स 1,285.25 अंक यानी 2.07 प्रतिशत गिरकर 60,906 अंक पर बंद हुआ। निफ्टी स्मॉलकैप 100 इंडेक्स में 160.45 अंक यानी 0.81 प्रतिशत की कमजोरी रही और यह 19,715.25 अंक पर बंद हुआ।

    क्षेत्रीय प्रदर्शन की बात करें तो पिछले सप्ताह कुछ सेक्टरों में बढ़त रही। निफ्टी रियल्टी में 2.98 प्रतिशत, कंज्यूमर ड्यूरेबल्स में 1.14 प्रतिशत, फार्मा में 1.10 प्रतिशत, एफएमसीजी में 1.04 प्रतिशत, इंडिया डिफेंस में 0.53 प्रतिशत और हेल्थकेयर में 0.39 प्रतिशत की तेजी दर्ज की गई।

    दूसरी ओर आईटी क्षेत्र में 2.40 प्रतिशत की गिरावट रही। निफ्टी फाइनेंशियल सर्विसेज 1.63 प्रतिशत, सर्विसेज 1.53 प्रतिशत, प्राइवेट बैंक 1.49 प्रतिशत, इंफ्रा 1.26 प्रतिशत और एनर्जी 0.88 प्रतिशत कमजोर रहे।

    अब अगले सप्ताह बाजार की नजर वैश्विक तनाव, कच्चे तेल और घरेलू आर्थिक आंकड़ों पर रहेगी। इन घटनाक्रमों के साथ चार कारोबारी सत्रों में होने वाली गतिविधियां शेयर बाजार की दिशा के लिए महत्वपूर्ण रहेंगी।

  • 8 अक्टूबर से Amazon Great Indian Festival की शुरुआत, इलेक्ट्रॉनिक्स से फैशन तक मिल सकती है बड़ी बचत

    8 अक्टूबर से Amazon Great Indian Festival की शुरुआत, इलेक्ट्रॉनिक्स से फैशन तक मिल सकती है बड़ी बचत


    नई दिल्ली। Amazon Great Indian Festival 2026 का इंतजार कर रहे ग्राहकों के लिए बड़ी खबर है। कंपनी की फेस्टिव सेल 8 अक्टूबर से शुरू होने जा रही है। मुख्य सेल शुरू होने से पहले ही अर्ली डील्स का सिलसिला शुरू हो चुका है जिससे ग्राहक कई प्रोडक्ट्स पर पहले से उपलब्ध ऑफर्स का फायदा उठा सकते हैं। इस सेल में स्मार्टफोन इलेक्ट्रॉनिक्स टीवी और होम अप्लायंसेज से लेकर फैशन ब्यूटी किचन और रोजमर्रा के इस्तेमाल वाले सामान तक कई कैटेगरी को शामिल किया जाएगा। फेस्टिव सीजन में खरीदारी बढ़ने के साथ Amazon की इस सेल पर ग्राहकों की नजर बनी हुई है।

    Great Indian Festival के दौरान अलग अलग श्रेणियों में प्रोडक्ट्स पर डिस्काउंट के साथ बैंक ऑफर्स और अन्य प्रमोशनल फायदे भी मिल सकते हैं। हालांकि किसी प्रोडक्ट की वास्तविक कीमत और उपलब्ध छूट उसके ब्रांड मॉडल विक्रेता और ऑफर की शर्तों के आधार पर अलग हो सकती है। इसलिए खरीदारी करने से पहले ग्राहक को प्रोडक्ट की कीमत के साथ बैंक ऑफर एक्सचेंज ऑफर और अन्य शर्तों को ध्यान से देखना जरूरी होगा। सेल के दौरान कुछ डील सीमित समय या सीमित स्टॉक के आधार पर भी उपलब्ध हो सकती हैं।

    अर्ली डील्स की खासियत यह है कि ग्राहकों को मुख्य सेल का इंतजार किए बिना चुनिंदा प्रोडक्ट्स पर ऑफर देखने का मौका मिल जाता है। खास तौर पर इलेक्ट्रॉनिक्स और घरेलू उपकरण खरीदने की योजना बना रहे ग्राहकों के लिए सेल के दौरान कीमतों की तुलना करना उपयोगी हो सकता है। किसी प्रोडक्ट की सेल कीमत को उसकी सामान्य कीमत से मिलाने के साथ दूसरी वेबसाइटों पर उपलब्ध कीमतों पर भी नजर रखी जा सकती है। इससे वास्तविक बचत का अंदाजा लगाने में आसानी होगी।

    स्मार्टफोन कैटेगरी में नए और लोकप्रिय मॉडल पर ऑफर्स देखने को मिल सकते हैं। इसके अलावा लैपटॉप हेडफोन स्मार्टवॉच टीवी फ्रिज वॉशिंग मशीन एयर कंडीशनर और दूसरे इलेक्ट्रॉनिक प्रोडक्ट्स भी सेल का हिस्सा हो सकते हैं। घर के लिए जरूरी सामान खरीदने वाले ग्राहकों को किचन अप्लायंसेज फर्नीचर होम डेकोर और दूसरे घरेलू उत्पादों पर भी डील्स देखने को मिल सकती हैं। फैशन और ब्यूटी कैटेगरी में कपड़े जूते एक्सेसरीज और पर्सनल केयर प्रोडक्ट्स पर भी छूट मिल सकती है।

    बैंक ऑफर्स इस तरह की फेस्टिव सेल में अतिरिक्त बचत का एक अहम जरिया होते हैं। ग्राहकों को अलग अलग कार्ड या भुगतान माध्यमों पर इंस्टेंट डिस्काउंट या अन्य लाभ मिल सकते हैं लेकिन इन ऑफर्स की पात्रता और अधिकतम छूट बैंक तथा प्रोडक्ट के हिसाब से बदल सकती है। इसलिए पेमेंट करने से पहले ऑफर की पूरी जानकारी पढ़ना बेहतर रहेगा।

    8 अक्टूबर से शुरू होने वाले Amazon Great Indian Festival 2026 में ग्राहकों को कई श्रेणियों में खरीदारी के विकल्प मिलेंगे। अर्ली डील्स के जरिए कुछ ऑफर्स पहले ही सामने आ रहे हैं जबकि मुख्य सेल शुरू होने के बाद डील्स का दायरा और बढ़ सकता है। फेस्टिव सीजन में खरीदारी करने वालों के लिए यह सेल कीमतों की तुलना कर अपनी जरूरत के सामान पर उपलब्ध ऑफर्स तलाशने का मौका देगी।

  • अमेजन ग्रेट इंडियन फेस्टिवल की अर्ली डील्स लाइव, कई श्रेणियों में साल की सबसे कम कीमतों का दावा

    अमेजन ग्रेट इंडियन फेस्टिवल की अर्ली डील्स लाइव, कई श्रेणियों में साल की सबसे कम कीमतों का दावा


    बेंगलुरु। अमेजन ग्रेट इंडियन फेस्टिवल 2026 की अर्ली डील्स Amazon.in पर शुरू हो गई हैं। कंपनी के अनुसार, ग्राहकों को विभिन्न श्रेणियों के लाखों उत्पादों पर साल की सबसे कम कीमतों में खरीदारी का मौका मिलेगा। स्मार्टफोन, इलेक्ट्रॉनिक्स, फैशन, ब्यूटी, होम एवं किचन और रोजमर्रा की जरूरतों से जुड़े उत्पादों के साथ तेज डिलीवरी के विकल्प भी उपलब्ध कराए जा रहे हैं।

    कंपनी के मुताबिक, एसबीआई क्रेडिट और डेबिट कार्ड से भुगतान करने वाले ग्राहकों को ईएमआई लेनदेन सहित 10 प्रतिशत इंस्टेंट डिस्काउंट मिलेगा। वहीं, ग्रेट इंडियन फेस्टिवल 2026 के दौरान खरीदारी करने वाले प्राइम सदस्यों को 10 प्रतिशत तक अतिरिक्त लाभ मिलने की बात कही गई है।

    अमेजन पे से खरीदारी पर अतिरिक्त फायदे

    त्योहारी खरीदारी के दौरान अमेजन पे के जरिए भी ग्राहकों को कई ऑफर मिलेंगे। अमेजन पे आईसीआईसीआई बैंक क्रेडिट कार्ड का इस्तेमाल करने वाले प्राइम सदस्यों को अनलिमिटेड पांच प्रतिशत कैशबैक और नॉन-प्राइम सदस्यों को तीन प्रतिशत कैशबैक मिलेगा। इसके अलावा ग्राहकों को 2,500 रुपये तक के वेलकम रिवॉर्ड दिए जाएंगे। कार्ड पर जॉइनिंग और वार्षिक शुल्क से पूरी तरह छूट भी उपलब्ध होगी।

    अमेजन पे लैटर के जरिए चुनिंदा खरीदारी पर 10 प्रतिशत तक कैशबैक का लाभ लिया जा सकता है। 1,500 रुपये या इससे अधिक के कार्ट मूल्य पर तीन ब्याज-मुक्त ईएमआई में भुगतान की सुविधा भी मिलेगी। कंपनी के अनुसार, इस सुविधा पर कोई प्रोसेसिंग शुल्क नहीं लिया जाएगा।

    फैशन, ब्यूटी, होम और किचन श्रेणियों में 300 रुपये या इससे अधिक के अमेजन पे बैलेंस ऑर्डर पर 20 रुपये का फ्लैट कैशबैक मिलेगा। पहली बार बिल भुगतान करने वाले ग्राहकों को 500 रुपये तक के रिवॉर्ड और रिचार्ज व बिल भुगतान पर 50 रुपये तक का कैशबैक दिया जाएगा।

    त्योहारी छुट्टियों की तैयारी कर रहे प्राइम सदस्य अमेजन पे आईसीआईसीआई बैंक क्रेडिट कार्ड के जरिए फ्लाइट और होटल बुकिंग पर 15 प्रतिशत तक की छूट के साथ पांच प्रतिशत कैशबैक का लाभ ले सकेंगे।

    अमेजन नाउ पर भी अर्ली डील्स

    अमेजन नाउ पर भी हजारों उत्पादों की अर्ली डील्स उपलब्ध हैं। कंपनी के अनुसार, इन उत्पादों की डिलीवरी कुछ ही मिनटों में की जा सकती है। अमेजन नाउ ने 10 सप्ताह से कम समय में अपनी पहुंच चार गुना बढ़ाकर 65 से अधिक भारतीय शहरों और कस्बों तक कर ली है।

    इसके अलावा कंपनी 10 लाख से अधिक उत्पादों की उसी दिन डिलीवरी, 40 लाख से अधिक उत्पादों की अगले दिन डिलीवरी और लाखों अन्य उत्पादों पर प्राइम सदस्यों के लिए अनलिमिटेड मुफ्त डिलीवरी की सुविधा दे रही है।

    खरीदारी में एआई टूल्स की मदद

    अमेजन इंडिया खरीदारी के अनुभव को आसान बनाने के लिए एआई आधारित टूल्स का भी इस्तेमाल कर रहा है। कंपनी के अनुसार, इनका उद्देश्य ग्राहकों को उत्पाद खोजने और खरीदारी का फैसला लेने में मदद करना है।

    रुफस की सहायता से ग्राहक सामान्य भाषा में अपनी जरूरत बताकर व्यक्तिगत सुझाव प्राप्त कर सकते हैं। उदाहरण के तौर पर ग्राहक 40 हजार रुपये से कम कीमत में स्मार्टफोन की डील या दिवाली के लिए शुरुआती ऑफर पूछ सकते हैं।

    लेन्स एआई के जरिए ग्राहक किसी प्रोडक्ट की तस्वीर खींचकर उसे ऑनलाइन खोज सकते हैं। रुफस 30 से 90 दिनों का प्राइस हिस्ट्री ट्रैकर भी उपलब्ध कराता है। ग्राहक अपनी पसंदीदा कीमत तय कर सकते हैं और प्रोडक्ट उस कीमत तक पहुंचने पर खरीदारी पूरी करने के लिए अलर्ट प्राप्त कर सकते हैं।

    एआई रिव्यू हाइलाइट्स, क्विक लर्न और बाइंग गाइड्स जैसे फीचर उत्पादों को समझने और उनकी तुलना करने में मदद करते हैं। कंपनी के अनुसार, अधिक व्यक्तिगत होमपेज भी ग्राहकों की पसंद के अनुरूप प्रासंगिक उत्पाद खोजने में सहायता करता है।

    8 अक्टूबर से शुरू होगा मुख्य फेस्टिवल

    अर्ली डील्स के जरिए ग्राहक 8 अक्टूबर 2026 से शुरू होने वाले अमेजन ग्रेट इंडियन फेस्टिवल से पहले ही त्योहारी खरीदारी शुरू कर सकते हैं। Amazon.in पर इलेक्ट्रॉनिक्स और एक्सेसरीज सहित कई श्रेणियों में चुनिंदा डील्स लाइव हो चुकी हैं। इलेक्ट्रॉनिक्स और एक्सेसरीज पर 80 प्रतिशत तक की छूट का दावा किया गया है।

    वनप्लस एन6एक्स पर भी ऑफर

    अर्ली डील्स में वनप्लस एन6एक्स को भी शामिल किया गया है। कंपनी के अनुसार, फोन में 7,000 एमएएच की बैटरी दी गई है, जो 2.5 दिनों तक इस्तेमाल की सुविधा देती है। इसमें छह साल तक की बैटरी हेल्थ का सपोर्ट मिलने की बात कही गई है। बैंक ऑफर्स सहित फोन को 18,499 रुपये में खरीदा जा सकता है।

    वहीं, वनप्लस वॉच 2 आर पर भी ऑफर उपलब्ध है। इसमें 1.43 इंच का एमोलेड डिस्प्ले, स्नैपड्रैगन डब्ल्यू5 चिपसेट और 100 घंटे तक की बैटरी लाइफ दी गई है। स्मार्टवॉच में डुअल-फ्रीक्वेंसी जीपीएस, 100 से अधिक स्पोर्ट्स मोड, ब्लूटूथ कॉलिंग और हेल्थ ट्रैकिंग जैसे फीचर भी हैं।

  • आत्मनिर्भर बैटरी इकोसिस्टम के लिए सेकंड-लाइफ तकनीक जरूरी, पुन: उपयोग और रीसाइक्लिंग पर विशेषज्ञों ने दिया जोर

    आत्मनिर्भर बैटरी इकोसिस्टम के लिए सेकंड-लाइफ तकनीक जरूरी, पुन: उपयोग और रीसाइक्लिंग पर विशेषज्ञों ने दिया जोर

    नई दिल्ली । भारत में मजबूत, आत्मनिर्भर और सर्कुलर बैटरी इकोसिस्टम विकसित करने के लिए केवल बैटरी निर्माण क्षमता बढ़ाना पर्याप्त नहीं होगा। विशेषज्ञों और नीति निर्माताओं ने बैटरियों के निर्माण से लेकर उनके उपयोग, सेकंड-लाइफ एप्लिकेशन और जीवनचक्र समाप्त होने के बाद प्रबंधन तक पूरी व्यवस्था को एक साथ विकसित करने की जरूरत बताई है।

    राष्ट्रीय राजधानी में आयोजित एक राष्ट्रीय सम्मेलन में बैटरी क्षेत्र से जुड़े अवसरों और चुनौतियों पर चर्चा हुई। इसमें नीति निर्माताओं, उद्योग प्रतिनिधियों, शोधकर्ताओं और अन्य हितधारकों ने भारत में तेजी से विकसित हो रहे बैटरी इकोसिस्टम को लेकर विचार साझा किए।

    द एनर्जी एंड रिसोर्सेज इंस्टीट्यूट की महानिदेशक डॉ. विभा धवन ने कहा कि बैटरी क्षेत्र पर चर्चा केवल इलेक्ट्रिक मोबिलिटी तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। इलेक्ट्रिक वाहनों में इस्तेमाल के बाद भी जिन बैटरियों में पर्याप्त क्षमता बची रहती है, उनके सेकंड-लाइफ एप्लिकेशन की संभावनाओं पर ध्यान देना जरूरी है। इससे बैटरियों के उपयोगी जीवन को बढ़ाया जा सकता है और उनकी आर्थिक उपयोगिता का बेहतर इस्तेमाल संभव होगा।

    भारी उद्योग मंत्रालय के संयुक्त सचिव विजय मित्तल ने घरेलू विनिर्माण और सप्लाई चेन को मजबूत करने के साथ सेकंड-लाइफ बैटरियों, ट्रेसबिलिटी, मानकों और रीसाइक्लिंग से जुड़े ढांचे के विकास की जरूरत बताई। उनके अनुसार ऐसे प्रयास भारत में प्रतिस्पर्धी और सर्कुलर बैटरी अर्थव्यवस्था विकसित करने में मदद कर सकते हैं।

    नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय के वैज्ञानिक कुलदीप राणा ने कहा कि सेकंड-लाइफ बैटरियों का इस्तेमाल केवल इलेक्ट्रिक वाहनों से जुड़े क्षेत्रों तक सीमित नहीं है। इनका उपयोग घरेलू उपकरणों, रूफटॉप सोलर पीवी सिस्टम और यूपीएस सिस्टम जैसे क्षेत्रों में भी किया जा सकता है।

    सम्मेलन के दौरान बैटरी वैल्यू चेन के कई महत्वपूर्ण पहलुओं पर चर्चा हुई। इनमें घरेलू एडवांस्ड केमिस्ट्री सेल निर्माण क्षमता का विस्तार, इलेक्ट्रिक मोबिलिटी का विकास और इस्तेमाल की जा चुकी बैटरियों के पुन: उपयोग, पुनर्प्रयोजन तथा रीसाइक्लिंग की बढ़ती जरूरत शामिल रही।

    वरिष्ठ निदेशक ए.के. सक्सेना ने कहा कि बैटरी क्षेत्र में केवल उत्पादन की मात्रा बढ़ाने के बजाय मूल्य सृजन को स्थानीय स्तर पर बढ़ावा देने पर ध्यान दिया जाना चाहिए। उन्होंने बैटरियों को शुरुआती डिजाइन चरण से ही सर्कुलर दृष्टिकोण को ध्यान में रखकर तैयार करने की आवश्यकता बताई।

    उन्होंने यह भी कहा कि सेकंड-लाइफ बैटरियों की बची हुई क्षमता और प्रदर्शन का सही आकलन जरूरी है। इससे इन बैटरियों के इस्तेमाल को लेकर उपभोक्ताओं का भरोसा बढ़ाने में मदद मिल सकती है।

    इंडिया एनर्जी स्टोरेज एलायंस के प्रबंध निदेशक विनायक वालिम्बे ने भारत में मजबूत और प्रतिस्पर्धी बैटरी उद्योग के निर्माण के लिए घरेलू मूल्य संवर्धन बढ़ाने पर जोर दिया।

    वहीं, बीएसईएस राजधानी पावर लिमिटेड की वरिष्ठ प्रबंधक सुगंधिता वाधेरा ने भविष्य में बढ़ने वाली बिजली मांग के प्रभावी प्रबंधन पर बात रखी। उन्होंने राज्यों के लिए क्षमता नियोजन, मजबूत भुगतान सुरक्षा व्यवस्था और वितरण क्षेत्र में अधिक लचीले ऊर्जा संसाधनों की जरूरत बताई। उनके अनुसार इससे ऊर्जा तंत्र को अधिक मजबूत बनाने और बदलती जरूरतों के अनुसार तेजी से प्रतिक्रिया देने में मदद मिल सकती है।

  • आरबीआई ने एनबीएफसी की टिकाऊ वृद्धि के लिए सुशासन, लिक्विडिटी, जोखिम प्रबंधन, ग्राहक भरोसे और साइबर सुरक्षा पर जोर दिया

    आरबीआई ने एनबीएफसी की टिकाऊ वृद्धि के लिए सुशासन, लिक्विडिटी, जोखिम प्रबंधन, ग्राहक भरोसे और साइबर सुरक्षा पर जोर दिया

    नई दिल्ली: भारतीय रिजर्व बैंक के डिप्टी गवर्नर शिरीष चंद्र मुर्मू ने कहा है कि गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियां अब केवल वैकल्पिक ऋणदाता तक सीमित नहीं हैं, बल्कि विशेषीकृत वित्तीय साझेदार के रूप में अपनी भूमिका मजबूत कर रही हैं। ऐसे में एनबीएफसी क्षेत्र की दीर्घकालिक और टिकाऊ वृद्धि के लिए संस्थानों को पांच प्रमुख क्षेत्रों पर विशेष ध्यान देने की जरूरत है।

    सितंबर बुलेटिन में दिए गए उनके विचारों के अनुसार, देश में एनबीएफसी क्षेत्र लगातार विस्तार कर रहा है। वर्तमान में एनबीएफसी ऋण सकल नॉमिनल जीडीपी के 16.7 प्रतिशत तक पहुंच गया है, जबकि एक साल पहले यह 15.9 प्रतिशत था। इसी तरह अनुसूचित वाणिज्यिक बैंकों के कुल ऋण में एनबीएफसी क्षेत्र की हिस्सेदारी बढ़कर 27 प्रतिशत हो गई है, जो पहले 26 प्रतिशत थी।

    मुर्मू ने सबसे पहले सुशासन को मजबूत संस्थान की बुनियाद बताया। उनके अनुसार, निदेशक मंडल और शीर्ष प्रबंधन को संगठन के स्तर पर अनुपालन और नैतिक मूल्यों की मजबूत संस्कृति विकसित करनी चाहिए। एनबीएफसी का आकार बढ़ने के साथ उसके प्रशासनिक और संस्थागत ढांचे को भी उसी अनुरूप मजबूत करने की जरूरत है।

    दूसरे महत्वपूर्ण क्षेत्र के तौर पर उन्होंने लिक्विडिटी प्रबंधन को रेखांकित किया। उनके अनुसार, बाजार की धारणा में बदलाव और सीमित फंडिंग स्रोतों के कारण एनबीएफसी तथा हाउसिंग फाइनेंस कंपनियों पर दबाव बन सकता है। इसलिए कंपनियों को अपने फंडिंग स्रोतों में विविधता लाने की जरूरत है। उन्होंने गहरे और तरल कॉरपोरेट बॉन्ड बाजार को इस दिशा में मददगार बताया।

    मुर्मू ने सिक्योरिटाइजेशन को भी केवल लिक्विडिटी जुटाने के साधन के तौर पर नहीं देखने की बात कही। इसे जोखिम हस्तांतरण और पूंजी मुक्त करने के प्रभावी माध्यम के रूप में विकसित करने पर जोर दिया गया। इसके लिए पारदर्शिता और उचित नियामकीय मानकों का पालन जरूरी बताया गया।

    तीसरे क्षेत्र में संपत्ति गुणवत्ता और जोखिम प्रबंधन शामिल हैं। ऋण वृद्धि की रफ्तार बढ़ने के साथ खराब ऋण और परिसंपत्ति गुणवत्ता से जुड़े जोखिम भी बढ़ सकते हैं। ऐसे में नियमित स्ट्रेस टेस्टिंग, शुरुआती चेतावनी प्रणाली और बदलती परिस्थितियों के अनुरूप प्रावधान व्यवस्था विकसित करने की जरूरत बताई गई।

    इस दिशा में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और मशीन लर्निंग जैसी तकनीकों के इस्तेमाल को भी बढ़ाने पर जोर दिया गया। इन तकनीकों की मदद से उधारकर्ताओं में वित्तीय तनाव के शुरुआती संकेतों की पहचान की जा सकती है। साथ ही ऋण मंजूरी के मानकों से समझौता नहीं करने की बात कही गई।

    चौथे क्षेत्र के रूप में ग्राहक विश्वास को महत्वपूर्ण संपत्ति बताया गया। वित्तीय नवाचार की गति उपभोक्ता संरक्षण से आगे नहीं निकलनी चाहिए, विशेषकर कमजोर और संवेदनशील ग्राहकों के मामले में। आचरण-आधारित विनियमन, प्रभावी शिकायत निवारण और जिम्मेदार ऋण वितरण को प्राथमिकता देने की बात कही गई।

    पांचवें क्षेत्र में डिजिटल परिवर्तन और साइबर सुरक्षा को रखा गया। सप्लाई चेन फाइनेंस में ब्लॉकचेन और धोखाधड़ी की पहचान में एआई के इस्तेमाल को बढ़ाने की जरूरत बताई गई। हालांकि तकनीकी विस्तार के साथ साइबर जोखिम भी बढ़ते हैं। इसलिए ग्राहक डेटा की सुरक्षा और संस्थानों पर भरोसा बनाए रखने के लिए साइबर सुरक्षा में निवेश को सर्वोच्च प्राथमिकता देने पर जोर दिया गया। तकनीकी नवाचार का उद्देश्य केवल दक्षता बढ़ाना नहीं, बल्कि निष्पक्षता और सुरक्षा सुनिश्चित करना भी होना चाहिए।

  • भारत का मजबूत बॉन्ड बाजार बना भरोसे का आधार, आर्थिक मजबूती से शेयरों में लौट सकती है तेजी

    भारत का मजबूत बॉन्ड बाजार बना भरोसे का आधार, आर्थिक मजबूती से शेयरों में लौट सकती है तेजी


    नई दिल्ली ।
    भारतीय बॉन्ड बाजार ने हाल के वर्षों में घरेलू परिस्थितियों के साथ-साथ वैश्विक वित्तीय दबावों के बीच भी मजबूत प्रदर्शन किया है। भारतीय रिजर्व बैंक की डिप्टी गवर्नर पूनम गुप्ता के अनुसार, देश के बॉन्ड बाजार की मजबूती केवल पिछले प्रदर्शन की तुलना में ही बेहतर नहीं रही है, बल्कि दुनिया के कई प्रमुख बाजारों की तुलना में भी इसका प्रदर्शन मजबूत रहा है। उन्होंने कहा कि भारतीय अर्थव्यवस्था की बुनियादी मजबूती का असर आगे चलकर शेयर बाजार में भी दिखाई दे सकता है।

    उन्होंने बताया कि अमेरिका में बॉन्ड यील्ड लंबे समय के ऊंचे स्तर पर पहुंचने के बावजूद भारतीय बॉन्ड बाजार ने अपेक्षाकृत मजबूती बनाए रखी। इसके पीछे केंद्र सरकार की राजकोषीय अनुशासन के प्रति प्रतिबद्धता और आने वाले वर्षों में आर्थिक विकास की बेहतर संभावनाओं को महत्वपूर्ण आधार माना गया है। वित्तीय स्थिति में सुधार और भविष्य में राजकोषीय परिणामों के बेहतर रहने की उम्मीद ने निवेशकों का भरोसा मजबूत किया है।

    मौद्रिक नीति की विश्वसनीयता और महंगाई से जुड़े संरचनात्मक दबावों में कमी को भी बॉन्ड बाजार के लिए सकारात्मक माना गया है। इन परिस्थितियों ने भारतीय ऋण बाजार में स्थिरता बनाए रखने में मदद की है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी भारत के बॉन्ड बाजार की मजबूती और सार्वजनिक वित्त को संतुलित रखने की नीति को महत्वपूर्ण माना गया है।

    हालांकि, शेयर बाजार में बॉन्ड बाजार जैसी मजबूती अभी पूरी तरह दिखाई नहीं दी है। इसके पीछे वैश्विक स्तर पर निवेशकों की बदलती प्राथमिकताओं को एक वजह माना जा रहा है। खासतौर पर कुछ विकसित अर्थव्यवस्थाओं में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित कंपनियों और तकनीकी क्षेत्र से जुड़ी विकास संभावनाएं निवेशकों के लिए आकर्षण का केंद्र बनी हुई हैं।

    पूनम गुप्ता के मुताबिक, भारतीय शेयर बाजार ने जून 2022 से सितंबर 2024 के बीच उल्लेखनीय प्रदर्शन किया था। इसके बाद कुछ दूसरे देशों के बाजारों में तेजी का दौर देखने को मिला। इसके बावजूद भारतीय अर्थव्यवस्था की वास्तविक मजबूती लंबे समय में शेयर बाजार के प्रदर्शन को प्रभावित कर सकती है और भारतीय इक्विटी दोबारा निवेशकों के लिए अधिक आकर्षक बन सकती है।

    उन्होंने भारत के भुगतान संतुलन और रुपये की स्थिति पर भी चर्चा की। उनके अनुसार, भारत लंबे समय से सीमित चालू खाता घाटे और अपेक्षाकृत मजबूत पूंजी प्रवाह की स्थिति में रहा है। समय के साथ सकल घरेलू उत्पाद के मुकाबले चालू खाता घाटे में कमी आई है, जिससे देश के बाहरी क्षेत्र की मजबूती बढ़ी है।

    उन्होंने कहा कि भारत का चालू खाता घाटा उन स्तरों से काफी नीचे है, जिन्हें आमतौर पर उभरती अर्थव्यवस्थाओं के लिए सुरक्षित माना जाता है। देश के लिए शुद्ध सेवा निर्यात और विदेशों में रहने वाले भारतीयों से मिलने वाला रेमिटेंस महत्वपूर्ण संरचनात्मक ताकत बने हुए हैं।

    सेवा क्षेत्र से होने वाली आय और रेमिटेंस लगातार मजबूत रहने के कारण वस्तुओं के व्यापार में होने वाले घाटे की भरपाई करने में मदद मिलती है। इसी वजह से भारत का चालू खाता घाटा सकल घरेलू उत्पाद के 1 प्रतिशत से नीचे नियंत्रित रहने में सफल रहा है। यह स्थिति देश की बाहरी आर्थिक स्थिरता और भविष्य की विकास संभावनाओं के लिए महत्वपूर्ण आधार मानी जा रही है।

  • वैश्विक दबाव के बीच लगातार सातवें सप्ताह शेयर बाजार में गिरावट, सेंसेक्स और निफ्टी पर रहा बिकवाली का असर

    वैश्विक दबाव के बीच लगातार सातवें सप्ताह शेयर बाजार में गिरावट, सेंसेक्स और निफ्टी पर रहा बिकवाली का असर

    नई दिल्ली । वैश्विक स्तर पर जारी आर्थिक और भू-राजनीतिक चिंताओं के बीच भारतीय शेयर बाजार लगातार सातवें सप्ताह गिरावट के साथ बंद हुआ। सप्ताह के दौरान कच्चे तेल की ऊंची कीमतों, अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी और विदेशी संस्थागत निवेशकों की लगातार बिकवाली ने बाजार पर दबाव बनाए रखा। हालांकि, सप्ताह के अंतिम कारोबारी दिन प्रमुख सूचकांकों में कुछ सुधार देखने को मिला।

    साप्ताहिक आधार पर निफ्टी में 0.88 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। शुक्रवार को निफ्टी 0.34 प्रतिशत की बढ़त के साथ 23,140 के स्तर पर बंद हुआ। इसी तरह सेंसेक्स में शुक्रवार को 315 अंक यानी 0.43 प्रतिशत की तेजी आई और यह 73,895 के स्तर पर बंद हुआ। इसके बावजूद पूरे सप्ताह के आधार पर सेंसेक्स में 0.54 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई।

    सप्ताह के दौरान बाजार में काफी उतार-चढ़ाव देखने को मिला। गुरुवार को दोनों प्रमुख सूचकांकों में 1.6 प्रतिशत से अधिक की गिरावट आई थी। इसके बाद शुक्रवार को कुछ चुनिंदा शेयरों में निचले स्तर पर खरीदारी बढ़ने से बाजार में सीमित सुधार आया। हालांकि, सप्ताहभर के दबाव को पूरी तरह दूर करने में यह तेजी सफल नहीं रही।

    कच्चे तेल की कीमतों ने भी निवेशकों की चिंता बढ़ाई। सप्ताह के दौरान ब्रेंट क्रूड 105 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर बना रहा, जबकि डब्ल्यूटीआई क्रूड 90 डॉलर प्रति बैरल से अधिक के स्तर पर कारोबार करता रहा। पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक तनाव और वैश्विक आपूर्ति को लेकर बनी चिंताओं ने तेल कीमतों को ऊंचे स्तर पर बनाए रखा। सप्ताह के अंत में तेल की कीमतों में कुछ नरमी आई, जिससे आयात बिल, महंगाई, रुपये और कंपनियों की लागत पर संभावित दबाव को लेकर चिंता कुछ कम हुई।

    अमेरिकी बॉन्ड बाजार में बढ़ी यील्ड भी भारतीय शेयर बाजार के लिए चुनौती बनी रही। अमेरिकी 10-वर्षीय ट्रेजरी यील्ड सप्ताह के दौरान 5.10 प्रतिशत से ऊपर पहुंच गई। ऊंची बॉन्ड यील्ड से वैश्विक वित्तीय परिस्थितियां सख्त होती हैं और उभरते बाजारों की परिसंपत्तियों के प्रति निवेशकों का आकर्षण प्रभावित हो सकता है।

    विदेशी संस्थागत निवेशकों की बिकवाली ने भी बाजार पर दबाव बनाए रखा। सप्ताह के दौरान विदेशी निवेशकों ने 11,490 करोड़ रुपये के शेयरों की शुद्ध बिक्री की। यह लगातार छठा सप्ताह रहा, जब विदेशी निवेशक भारतीय बाजार में शुद्ध विक्रेता रहे। इसके विपरीत घरेलू संस्थागत निवेशकों ने खरीदारी जारी रखी और सप्ताह के दौरान 16,398 करोड़ रुपये का शुद्ध निवेश किया। घरेलू निवेश से बाजार में गिरावट को कुछ हद तक सीमित करने में मदद मिली।

    सितंबर में अब तक विदेशी निवेशक 18,531 करोड़ रुपये की शुद्ध बिकवाली कर चुके हैं, जबकि घरेलू संस्थागत निवेशकों ने 52,617 करोड़ रुपये की शुद्ध खरीदारी की है। इसके बावजूद निफ्टी अगस्त के अंत के स्तर से करीब 3.9 प्रतिशत नीचे बना हुआ है।

    आने वाले सप्ताह में बाजार की दिशा कई वैश्विक संकेतों से प्रभावित हो सकती है। पश्चिम एशिया के घटनाक्रम, कच्चे तेल की कीमतें, विदेशी निवेशकों का रुख और अमेरिका के दूसरी तिमाही के जीडीपी आंकड़े निवेशकों के लिए महत्वपूर्ण रहेंगे। तकनीकी स्तर पर 23,000 को निफ्टी के लिए अहम सपोर्ट क्षेत्र और 23,200 को निकटतम रेजिस्टेंस स्तर माना जा रहा है। ऐसे में वैश्विक घटनाक्रम और निवेश प्रवाह बाजार में आगे भी उतार-चढ़ाव की स्थिति बनाए रख सकते हैं।