Category: Economy

  • महीने की पहली तारीख पर बदलेंगे गैस सिलेंडर के रेट जानिए कम होंगे दाम या फिर बढ़ेगा महंगाई का बोझ

    महीने की पहली तारीख पर बदलेंगे गैस सिलेंडर के रेट जानिए कम होंगे दाम या फिर बढ़ेगा महंगाई का बोझ


    नई दिल्ली। हर महीने की पहली तारीख देशभर के एलपीजी उपभोक्ताओं के लिए बेहद महत्वपूर्ण होती है क्योंकि इसी दिन ऑयल मार्केटिंग कंपनियां गैस सिलेंडर की नई कीमतें जारी करती हैं। एक अगस्त से भी घरेलू और कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर के दाम में बदलाव होने की संभावना है। ऐसे में करोड़ों परिवारों की नजर इस बात पर टिकी है कि इस बार रसोई गैस सस्ती होगी या फिर महंगाई का बोझ और बढ़ेगा। हालांकि अंतिम फैसला तेल कंपनियां अंतरराष्ट्रीय बाजार की स्थिति और अन्य आर्थिक कारकों को ध्यान में रखते हुए लेंगी।

    एलपीजी सिलेंडर की कीमतें हर महीने अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमतों विदेशी मुद्रा विनिमय दर और आयात लागत के आधार पर तय की जाती हैं। यदि वैश्विक बाजार में कच्चे तेल और एलपीजी की कीमतों में गिरावट आती है तो घरेलू बाजार में राहत मिलने की संभावना बढ़ जाती है। वहीं यदि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतें बढ़ती हैं या डॉलर के मुकाबले रुपये में कमजोरी आती है तो गैस सिलेंडर महंगा भी हो सकता है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि हाल के दिनों में वैश्विक ऊर्जा बाजार में उतार चढ़ाव बना हुआ है। इसी कारण तेल कंपनियां बाजार की स्थिति का लगातार आकलन कर रही हैं। ऐसे में यह कहना अभी जल्दबाजी होगी कि घरेलू गैस सिलेंडर के दाम घटेंगे या बढ़ेंगे। हालांकि कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर की कीमतों में बदलाव की संभावना अधिक मानी जा रही है क्योंकि इस श्रेणी में कीमतों में अक्सर तेजी से संशोधन किया जाता है।

    देश में घरेलू उपयोग के लिए 14 दशमलव 2 किलोग्राम का एलपीजी सिलेंडर और व्यावसायिक उपयोग के लिए 19 किलोग्राम का कमर्शियल सिलेंडर इस्तेमाल किया जाता है। होटल रेस्टोरेंट ढाबे और छोटे कारोबारी कमर्शियल सिलेंडर पर अधिक निर्भर रहते हैं। इसलिए इस श्रेणी में कीमतों में बदलाव का सीधा असर खाद्य पदार्थों और अन्य सेवाओं की लागत पर भी पड़ सकता है।

    यदि घरेलू गैस सिलेंडर की कीमतों में कमी होती है तो इसका सबसे बड़ा फायदा आम परिवारों को मिलेगा। वहीं यदि कीमतें बढ़ती हैं तो मासिक घरेलू बजट पर अतिरिक्त बोझ पड़ सकता है। खासतौर पर मध्यम वर्ग और निम्न आय वर्ग के परिवारों के लिए रसोई गैस की कीमतें घरेलू खर्च का महत्वपूर्ण हिस्सा होती हैं।

    उपभोक्ताओं को सलाह दी जाती है कि वे नई कीमतों की आधिकारिक घोषणा के बाद ही किसी भी जानकारी पर भरोसा करें। सोशल मीडिया पर वायरल होने वाले दावों या अफवाहों से बचना चाहिए क्योंकि वास्तविक कीमतें केवल तेल विपणन कंपनियों की ओर से जारी सूची के अनुसार ही लागू होती हैं। नई दरें देश के अलग अलग शहरों में टैक्स और परिवहन लागत के कारण थोड़ी अलग हो सकती हैं।

    हर महीने की तरह इस बार भी एक अगस्त को इंडियन ऑयल भारत पेट्रोलियम और हिंदुस्तान पेट्रोलियम नई एलपीजी दरें जारी करेंगी। यदि वैश्विक बाजार से सकारात्मक संकेत मिलते हैं तो उपभोक्ताओं को राहत मिल सकती है। वहीं विपरीत परिस्थितियों में कीमतों में बढ़ोतरी से इनकार भी नहीं किया जा सकता। इसलिए सभी की नजर अब पहली अगस्त को जारी होने वाली नई एलपीजी मूल्य सूची पर टिकी हुई है।

  • अमेरिका-ईरान तनाव नरम पड़ते ही फिसले कच्चे तेल के दाम, एक हफ्ते की सबसे बड़ी गिरावट दर्ज

    अमेरिका-ईरान तनाव नरम पड़ते ही फिसले कच्चे तेल के दाम, एक हफ्ते की सबसे बड़ी गिरावट दर्ज


    वाशिंगटन। अमेरिका और ईरान के बीच तनाव कम होने के संकेत मिलने के बाद अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार में बड़ी गिरावट दर्ज की गई। ब्रेंट क्रूड और वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) दोनों की कीमतें करीब एक सप्ताह के सबसे निचले स्तर पर पहुंच गईं। अमेरिकी प्रशासन द्वारा ईरान के खिलाफ प्रस्तावित हवाई कार्रवाई फिलहाल टालने से कूटनीतिक समाधान की उम्मीद बढ़ी है, जिससे तेल आपूर्ति को लेकर बाजार की चिंताएं कुछ कम हुई हैं।

    सोमवार को ब्रेंट क्रूड 8.42 डॉलर यानी 8.7 फीसदी टूटकर 88.36 डॉलर प्रति बैरल पर बंद हुआ, जो 17 जुलाई के बाद का सबसे निचला स्तर है। वहीं WTI क्रूड 6.70 डॉलर यानी 7.5 फीसदी गिरकर 82.61 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया, जो 16 जुलाई के बाद का न्यूनतम स्तर माना जा रहा है।

    विशेषज्ञों का कहना है कि अमेरिका द्वारा ईरान पर सैन्य कार्रवाई फिलहाल रोकने के फैसले से बाजार में राहत का माहौल बना है। इसके साथ ही होर्मुज जलडमरूमध्य से तेल आपूर्ति सामान्य होने की उम्मीद भी मजबूत हुई है, जिसका सीधा असर कीमतों पर देखने को मिला।

    ट्रंप ने कूटनीति को दी प्राथमिकता

    संयुक्त राष्ट्र में अमेरिका के राजदूत माइक वाल्ट्ज के अनुसार, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के साथ बातचीत को और समय देने के उद्देश्य से सैन्य कार्रवाई स्थगित करने का फैसला किया है। ट्रंप ने भी कहा कि दोनों देशों के बीच वार्ता सकारात्मक दिशा में बढ़ रही है और समझौते की संभावना बनी हुई है। हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि यदि कूटनीतिक प्रयास विफल रहे तो अमेरिका कड़ी सैन्य कार्रवाई से पीछे नहीं हटेगा।

    सऊदी और रूस से जुड़ी घटनाओं पर भी नजर

    इस बीच सऊदी अरब की वायु रक्षा प्रणाली ने इराक की ओर से भेजे गए ड्रोन को मार गिराया। वहीं यमन के हूती विद्रोहियों ने सऊदी अरब के यनबू तेल निर्यात केंद्र से जुड़ी आपूर्ति लाइनों को निशाना बनाने का दावा किया है। दूसरी ओर, रूस के ब्लैक सी स्थित प्रमुख तेल निर्यात टर्मिनल पर ड्रोन हमलों से कजाकिस्तान के तेल उत्पादन पर भी असर पड़ा, हालांकि बाद में कैस्पियन पाइपलाइन कंसोर्टियम ने टर्मिनल से तेल लोडिंग फिर शुरू होने की पुष्टि की।

    बाजार में बनी रह सकती है अस्थिरता

    बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि भले ही फिलहाल तनाव कम होता दिखाई दे रहा हो, लेकिन जब तक कोई औपचारिक समझौता नहीं हो जाता, तब तक अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है। भू-राजनीतिक घटनाक्रम और तेल आपूर्ति की स्थिति आने वाले दिनों में बाजार की दिशा तय करेंगे।

  • सऊदी अरब की अबकैक तेल रिफाइनरी पर ड्रोन हमला, भीषण आग से वैश्विक ऊर्जा बाजार में बढ़ी चिंता

    सऊदी अरब की अबकैक तेल रिफाइनरी पर ड्रोन हमला, भीषण आग से वैश्विक ऊर्जा बाजार में बढ़ी चिंता


    रियाद।
    सऊदी अरब की सरकारी तेल कंपनी सऊदी अरामको की अबकैक (Abqaiq) तेल रिफाइनरी और ईस्ट-वेस्ट पंपिंग स्टेशन पर हुए ड्रोन हमले के बाद भीषण आग लग गई। हमले के बाद संयंत्र के कई हिस्सों से आग की ऊंची लपटें उठती दिखाई दीं। उपग्रह तस्वीरों में भी रिफाइनरी परिसर में व्यापक नुकसान के संकेत मिले हैं।

    प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, हमले में दुनिया की सबसे महत्वपूर्ण तेल प्रसंस्करण सुविधाओं में शामिल अबकैक संयंत्र को नुकसान पहुंचा है। सऊदी अधिकारियों ने इस हमले के पीछे इराक में सक्रिय एक सशस्त्र संगठन का हाथ होने का दावा किया है, जिस पर ईरान समर्थित होने के आरोप लगाए गए हैं। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है।

    दुनिया की सबसे अहम तेल प्रसंस्करण इकाइयों में शामिल

    अबकैक रिफाइनरी को दुनिया का सबसे बड़ा क्रूड ऑयल स्टेबलाइजेशन प्लांट माना जाता है। यहां बड़ी मात्रा में कच्चे तेल का प्रसंस्करण किया जाता है और वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति श्रृंखला में इसकी महत्वपूर्ण भूमिका है। इस संयंत्र में किसी भी प्रकार की बाधा का असर अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार पर पड़ सकता है।

    आग पर काबू पाने के प्रयास तेज

    हमले के बाद सऊदी अरामको और संबंधित एजेंसियों ने प्रभावित क्षेत्रों में आपातकालीन कार्रवाई शुरू कर दी। आग को नियंत्रित करने और अतिरिक्त नुकसान रोकने के लिए कई उत्पादन केंद्रों पर इमरजेंसी फ्लेयरिंग की गई। सुरक्षा एजेंसियां हमले के कारणों और क्षति का आकलन कर रही हैं।

    सैटेलाइट तस्वीरों में दिखा नुकसान

    उपग्रह से प्राप्त तस्वीरों में रिफाइनरी के कई हिस्सों में आग और धुएं के बड़े गुबार दिखाई दिए हैं। शुरुआती आकलन के मुताबिक, संयंत्र के कुछ परिचालन हिस्से प्रभावित हुए हैं, हालांकि उत्पादन क्षमता पर वास्तविक असर का आधिकारिक विवरण अभी जारी नहीं किया गया है।

    वैश्विक तेल बाजार पर पड़ सकता है प्रभाव

    ऊर्जा विशेषज्ञों का मानना है कि यदि अबकैक रिफाइनरी का संचालन लंबे समय तक प्रभावित रहता है, तो अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की आपूर्ति पर दबाव बढ़ सकता है। इससे वैश्विक तेल कीमतों में उतार-चढ़ाव और ऊर्जा बाजार में अस्थिरता की संभावना भी बढ़ सकती है।

    सऊदी सरकार ने कहा है कि वह हमले की जांच कर रही है और राष्ट्रीय सुरक्षा तथा ऊर्जा अवसंरचना की सुरक्षा के लिए आवश्यक सभी कदम उठाए जाएंगे।

  • संसद में सरकार का खुलासा, 100 करोड़ रुपये से ज्यादा आय बताने वाले करदाताओं की संख्या 142 से बढ़कर 576 हुई

    संसद में सरकार का खुलासा, 100 करोड़ रुपये से ज्यादा आय बताने वाले करदाताओं की संख्या 142 से बढ़कर 576 हुई

    नई दिल्ली ।देश में 100 करोड़ रुपये से अधिक वार्षिक आय घोषित करने वाले आयकरदाताओं की संख्या में पिछले पांच वर्षों के दौरान उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। केंद्र सरकार ने संसद में जानकारी देते हुए बताया कि आकलन वर्ष 2025-26 में ऐसे करदाताओं की संख्या बढ़कर 576 हो गई, जबकि आकलन वर्ष 2021-22 में यह आंकड़ा केवल 142 था। इस प्रकार पांच वर्षों में इस श्रेणी के करदाताओं की संख्या में लगभग 300 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है, जो देश में उच्च आय वर्ग के करदाताओं की बढ़ती संख्या को दर्शाती है।
    लोकसभा में एक लिखित उत्तर में वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने बताया कि विभिन्न आकलन वर्षों के दौरान इस श्रेणी के करदाताओं की संख्या में उतार-चढ़ाव के बावजूद समग्र रूप से वृद्धि का रुझान स्पष्ट दिखाई देता है। उनके अनुसार आकलन वर्ष 2022-23 में 301 करदाताओं ने 100 करोड़ रुपये से अधिक वार्षिक आय घोषित की थी। इसके बाद आकलन वर्ष 2023-24 में यह संख्या घटकर 284 रह गई, लेकिन अगले वर्षों में फिर तेजी से बढ़ोतरी हुई। आकलन वर्ष 2024-25 में यह आंकड़ा 415 तक पहुंचा और 2025-26 में बढ़कर 576 हो गया।
    सरकार ने यह भी स्पष्ट किया कि आयकर अधिनियम, 2025 के अंतर्गत ‘अरबपति’ शब्द की कोई कानूनी या वैधानिक परिभाषा निर्धारित नहीं की गई है। इसलिए संसद में उपलब्ध कराए गए आंकड़े केवल उन आयकर रिटर्न पर आधारित हैं, जिनमें संबंधित व्यक्तियों ने अपनी वार्षिक आय 100 करोड़ रुपये से अधिक घोषित की है। सरकार ने यह भी स्पष्ट किया कि यह आंकड़े घोषित आय के आधार पर तैयार किए गए हैं।
    आय असमानता से जुड़े प्रश्न के उत्तर में सरकार ने कहा कि हाल के वर्षों में आय वितरण की स्थिति में सुधार के संकेत मिले हैं। सरकार के अनुसार घरेलू उपभोग व्यय सर्वेक्षण 2023-24 के आंकड़े बताते हैं कि ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में आय असमानता में कमी दर्ज की गई है। ग्रामीण क्षेत्रों का जिनी गुणांक 2022-23 के 0.266 से घटकर 2023-24 में 0.237 हो गया, जबकि शहरी क्षेत्रों में यह 0.314 से घटकर 0.284 पर आ गया। सरकार का मानना है कि यह बदलाव आय वितरण में अपेक्षाकृत संतुलन आने की दिशा में सकारात्मक संकेत देता है।
    सरकार ने रोजगार के मोर्चे पर भी सुधार का दावा किया। पीरियॉडिक लेबर फोर्स सर्वे के अनुसार, 15 वर्ष और उससे अधिक आयु वर्ग के लोगों की बेरोजगारी दर वर्ष 2023-24 में घटकर 3.1 प्रतिशत रह गई। सरकार का कहना है कि रोजगार सृजन, कौशल विकास और आर्थिक गतिविधियों के विस्तार से श्रम बाजार की स्थिति में सुधार हुआ है।
    सरकार ने संसद में यह भी कहा कि आय असमानता कम करने के लिए प्रगतिशील कर व्यवस्था को मजबूत किया जा रहा है। इसके साथ ही रोजगार सृजन कार्यक्रमों, स्वास्थ्य, शिक्षा, आवास, ग्रामीण विकास और बुनियादी ढांचा परियोजनाओं पर सार्वजनिक निवेश बढ़ाने की दिशा में लगातार काम किया जा रहा है। सरकार का कहना है कि लक्षित कर प्रोत्साहनों और विकास आधारित निवेश के माध्यम से रोजगार के अवसरों का विस्तार करने तथा समावेशी आर्थिक विकास को गति देने के प्रयास जारी रहें

  • मोबाइल फोन से शुरू की ब्रांडिंग, हेयर स्टार्टअप को बनाया करोड़ों का बिजनेस; पारुल गुलाटी की प्रेरक सफलता की कहानी

    मोबाइल फोन से शुरू की ब्रांडिंग, हेयर स्टार्टअप को बनाया करोड़ों का बिजनेस; पारुल गुलाटी की प्रेरक सफलता की कहानी

    नई दिल्ली ।अभिनेत्री और उद्यमी पारुल गुलाटी ने यह साबित किया है कि सफल कारोबार की नींव केवल बड़ी पूंजी पर नहीं, बल्कि सही विचार, लगातार मेहनत और ग्राहकों की जरूरत को समझने पर टिकती है। महज ₹5,000 के शुरुआती निवेश से शुरू हुआ उनका हेयर एक्सटेंशन स्टार्टअप आज करीब 50 करोड़ रुपये के कारोबार तक पहुंच चुका है। सीमित संसाधनों के बावजूद उन्होंने अपने व्यवसाय को जिस तरह आगे बढ़ाया, वह नए उद्यमियों के लिए प्रेरणादायक उदाहरण बन गया है।

    पारुल गुलाटी ने अभिनय के साथ-साथ उद्यमिता की राह तब चुनी, जब उन्होंने महसूस किया कि कई लोग बाल झड़ने और बाल पतले होने जैसी समस्याओं का सामना तो करते हैं, लेकिन इस विषय पर खुलकर बात नहीं करते। उस समय हेयर एक्सटेंशन को लेकर भी लोगों के मन में कई तरह की झिझक और गलत धारणाएं थीं। उन्होंने इसी समस्या को अवसर में बदलने का निर्णय लिया और वर्ष 2017 में अपने स्टार्टअप की शुरुआत की।

    शुरुआती दौर में उनके पास न तो बड़ा निवेश था और न ही महंगी मार्केटिंग का बजट। ऐसे में उन्होंने सोशल मीडिया को अपनी सबसे बड़ी ताकत बनाया। उन्होंने अपने मोबाइल फोन से ही वीडियो बनाकर लोगों को हेयर एक्सटेंशन के उपयोग, गुणवत्ता और फायदे समझाने शुरू किए। वह स्वयं अपने ब्रांड का चेहरा बनीं और नियमित रूप से डिजिटल प्लेटफॉर्म पर सामग्री साझा करती रहीं। इससे धीरे-धीरे लोगों का भरोसा बढ़ा और उनके उत्पाद की पहचान बनने लगी।

    व्यवसाय के शुरुआती दिनों में पारुल खुद अपने हाथों से हेयर एक्सटेंशन तैयार करती थीं। ग्राहक जुटाना सबसे बड़ी चुनौती थी, लेकिन उन्होंने अलग तरीका अपनाया। विभिन्न कार्यक्रमों, ऑडिशन और सार्वजनिक आयोजनों में वह अपने उत्पाद का उपयोग करतीं, जिससे लोगों की जिज्ञासा बढ़ती। इसके बाद संभावित ग्राहक उनके उत्पाद के बारे में जानकारी लेने लगे और धीरे-धीरे ऑर्डर मिलने शुरू हो गए।

    ऑनलाइन लोकप्रियता मिलने से पहले पारुल अलग-अलग शहरों में आयोजित फ्ली मार्केट और प्रदर्शनियों में स्टॉल लगाकर सीधे ग्राहकों से संवाद करती थीं। वह लोगों को उत्पाद का अनुभव करातीं और उन्हें तस्वीरें लेने के लिए प्रेरित करतीं। कई ग्राहक तत्काल खरीदारी नहीं करते थे, लेकिन बाद में सोशल मीडिया या तस्वीरों के माध्यम से दोबारा संपर्क कर उत्पाद खरीदते थे। इस रणनीति ने उनके व्यवसाय को शुरुआती गति देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

    बाद में पारुल गुलाटी ने लोकप्रिय बिजनेस रियलिटी शो शार्क टैंक इंडिया में भी हिस्सा लिया। इस अनुभव को उन्होंने अपने उद्यमी जीवन का महत्वपूर्ण पड़ाव बताया। उनके अनुसार, इस मंच ने उन्हें यह समझने का अवसर दिया कि किसी भी स्टार्टअप की सफलता के लिए केवल अच्छा उत्पाद ही पर्याप्त नहीं होता, बल्कि वित्तीय योजना, व्यावसायिक रणनीति और निवेशकों की सोच को समझना भी उतना ही आवश्यक है।

    आज उनका स्टार्टअप देशभर में अपनी अलग पहचान बना चुका है और हेयर एक्सटेंशन श्रेणी में प्रमुख ब्रांडों में गिना जाता है। पारुल की यात्रा यह संदेश देती है कि सीमित संसाधनों के बावजूद यदि किसी समस्या का व्यावहारिक समाधान तैयार किया जाए और उसे सही तरीके से ग्राहकों तक पहुंचाया जाए, तो छोटा निवेश भी बड़े व्यवसाय में बदल सकता है। उनकी सफलता नए उद्यमियों को नवाचार, धैर्य और डिजिटल माध्यमों के प्रभावी उपयोग की दिशा में प्रेरित करती है।

  • रिकॉर्ड EV बिक्री के बीच सिर्फ वाहन निर्माता नहीं, पूरी EV वैल्यू चेन की कंपनियां बन सकती हैं निवेशकों की बड़ी पसंद

    रिकॉर्ड EV बिक्री के बीच सिर्फ वाहन निर्माता नहीं, पूरी EV वैल्यू चेन की कंपनियां बन सकती हैं निवेशकों की बड़ी पसंद

    नई दिल्ली । भारत में इलेक्ट्रिक वाहनों का बाजार लगातार विस्तार की ओर बढ़ रहा है और इसके साथ ही निवेशकों की रुचि भी इस क्षेत्र में तेजी से बढ़ी है। हालांकि बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि केवल इलेक्ट्रिक कार या दोपहिया वाहन बनाने वाली कंपनियों में निवेश करना पर्याप्त नहीं है। EV उद्योग की वास्तविक मजबूती उन कंपनियों में भी दिखाई देती है जो इस पूरे इकोसिस्टम को आवश्यक तकनीक, उपकरण और पुर्जे उपलब्ध कराती हैं। ऐसे में निवेश का दायरा वाहन निर्माताओं से आगे बढ़कर पूरी EV वैल्यू चेन तक फैलता नजर आ रहा है।

    हाल के समय में इलेक्ट्रिक वाहनों की बिक्री में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। बढ़ती ईंधन कीमतों, स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा देने वाली नीतियों और उपभोक्ताओं की बदलती प्राथमिकताओं ने EV को तेजी से लोकप्रिय बनाया है। यही कारण है कि इस क्षेत्र से जुड़ी अनेक कंपनियों के कारोबार में भी विस्तार की संभावनाएं मजबूत हुई हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले वर्षों में EV उद्योग का विकास केवल वाहन निर्माण तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इससे जुड़े हर स्तर के उद्योग को इसका लाभ मिलेगा।

    EV वैल्यू चेन में बैटरी निर्माण, मोटर, कंट्रोल सिस्टम, इलेक्ट्रॉनिक्स, केमिकल्स, ऑटो कंपोनेंट्स, सॉफ्टवेयर, इंजीनियरिंग सेवाएं और चार्जिंग से जुड़े पावर उपकरण महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इन क्षेत्रों में कार्यरत कंपनियां वाहन निर्माताओं को जरूरी तकनीक और उत्पाद उपलब्ध कराती हैं। जैसे-जैसे इलेक्ट्रिक वाहनों का उत्पादन बढ़ेगा, इन कंपनियों की मांग भी समान गति से बढ़ने की संभावना है। यही वजह है कि निवेशकों का ध्यान अब पूरे इकोसिस्टम की ओर केंद्रित हो रहा है।

    बाजार विश्लेषकों ने इस क्षेत्र से जुड़ी कई कंपनियों के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण व्यक्त किया है। इनमें ऑटो कंपोनेंट, बैटरी, इंजीनियरिंग, पावर उपकरण और विशेष रसायन बनाने वाली कंपनियां शामिल हैं। ऐसे व्यवसाय EV उद्योग की रीढ़ माने जाते हैं क्योंकि इनके बिना बड़े पैमाने पर उत्पादन संभव नहीं है। यदि इलेक्ट्रिक वाहन बाजार अपेक्षित गति से आगे बढ़ता है, तो इन कंपनियों के राजस्व और ऑर्डर बुक पर भी इसका अनुकूल प्रभाव देखने को मिल सकता है।

    विशेषज्ञों का कहना है कि निवेशकों को केवल किसी एक प्रमुख वाहन निर्माता पर निर्भर रहने के बजाय विविधीकृत रणनीति अपनानी चाहिए। EV उद्योग कई स्तरों पर अवसर प्रदान करता है और अलग-अलग क्षेत्रों में काम करने वाली कंपनियां अपने-अपने हिस्से का लाभ अर्जित कर सकती हैं। इस कारण बैटरी, मोटर, ऑटो कंपोनेंट, इलेक्ट्रॉनिक्स और इंजीनियरिंग समाधान उपलब्ध कराने वाली कंपनियां भी दीर्घकालिक निवेश के लिहाज से महत्वपूर्ण मानी जा रही हैं।

    हालांकि किसी भी निवेश निर्णय से पहले कंपनी की वित्तीय स्थिति, कारोबार की गुणवत्ता, प्रतिस्पर्धी क्षमता और भविष्य की विकास संभावनाओं का मूल्यांकन करना आवश्यक है। शेयर बाजार में उतार-चढ़ाव स्वाभाविक होता है और किसी भी क्षेत्र में निवेश जोखिम से पूरी तरह मुक्त नहीं होता। इसके बावजूद भारत में इलेक्ट्रिक मोबिलिटी के बढ़ते दायरे और सरकार के स्वच्छ ऊर्जा पर बढ़ते जोर को देखते हुए EV वैल्यू चेन आने वाले वर्षों में निवेशकों के लिए महत्वपूर्ण अवसरों वाला क्षेत्र बन सकती है। इसी वजह से अब बाजार की नजर केवल इलेक्ट्रिक वाहन बनाने वाली कंपनियों पर नहीं, बल्कि पूरे EV इकोसिस्टम को मजबूत करने वाले उद्योगों पर भी बनी हुई है।

  • आरबीआई की विशेष योजना से विदेशी मुद्रा प्रवाह मजबूत, एफसीएनआर (बी) जमा में सार्वजनिक बैंकों की अहम भूमिका

    आरबीआई की विशेष योजना से विदेशी मुद्रा प्रवाह मजबूत, एफसीएनआर (बी) जमा में सार्वजनिक बैंकों की अहम भूमिका

    नई दिल्ली । भारतीय रिजर्व बैंक की विशेष जमा योजना के तहत विदेशी मुद्रा गैर-निवासी (बैंक) यानी एफसीएनआर (बी) डिपॉजिट में उल्लेखनीय तेजी देखने को मिल रही है। हालिया आकलनों के अनुसार, केवल 45 दिनों के भीतर इन जमाओं का स्तर वर्ष 2013 में दर्ज 26 अरब डॉलर के ऐतिहासिक रिकॉर्ड को पार कर चुका है। मौजूदा रुझानों को देखते हुए सितंबर के अंत तक एफसीएनआर (बी) डिपॉजिट 65 से 70 अरब डॉलर तक पहुंचने की संभावना जताई जा रही है, जबकि कुल जमा 80 से 85 अरब डॉलर के दायरे में रह सकती है।

    17 जुलाई 2026 तक उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, लगभग 20 अरब डॉलर का पूंजी प्रवाह दर्ज किया गया है। इसमें 17.4 अरब डॉलर का योगदान केवल एफसीएनआर (बी) डिपॉजिट से आया है। यह संकेत देता है कि विशेष योजना को प्रवासी भारतीयों और विदेशी मुद्रा निवेशकों से सकारात्मक प्रतिक्रिया मिल रही है। बैंकिंग क्षेत्र के विशेषज्ञों का मानना है कि जमा में आई यह तेजी देश के विदेशी मुद्रा भंडार को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।

    आर्थिक विश्लेषण के अनुसार, अगस्त और सितंबर 2026 के दौरान परिपक्व होने वाली बड़ी संख्या में मौजूदा एफसीएनआर (बी) जमाओं का नवीनीकरण होने की संभावना है। विशेष योजना के तहत उपलब्ध अपेक्षाकृत अधिक ब्याज दरें जमाकर्ताओं को अपनी राशि दोबारा निवेश करने के लिए आकर्षित कर सकती हैं। इससे कुल जमा राशि में और वृद्धि होने की उम्मीद है।

    रिपोर्ट में यह भी अनुमान लगाया गया है कि मौजूदा आधारभूत अनुमान के अतिरिक्त लगभग 10 अरब डॉलर की अतिरिक्त पूंजी भी देश में आ सकती है। यह अतिरिक्त निवेश मुख्य रूप से उन देशों से आने की संभावना है जहां कर संबंधी रियायतें उपलब्ध हैं और प्रवासी भारतीयों की अच्छी संख्या मौजूद है। यदि यह अनुमान सही साबित होता है तो विदेशी मुद्रा प्रवाह अपेक्षा से अधिक मजबूत हो सकता है।

    एफसीएनआर (बी) जमा अभियान को आगे बढ़ाने में सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण मानी जा रही है। इन बैंकों ने न केवल अपने व्यापक ग्राहक आधार का लाभ उठाया है, बल्कि विभिन्न देशों में रहने वाले भरोसेमंद और उच्च साख वाले ग्राहकों के साथ लंबे समय से बने संबंधों का भी प्रभावी उपयोग किया है। इसके साथ ही ऑनशोर और ऑफशोर बैंकिंग रणनीतियों के संतुलित उपयोग ने भी पूंजी जुटाने की प्रक्रिया को गति दी है।

    हालांकि मजबूत पूंजी प्रवाह के बावजूद विदेशी मुद्रा बाजार में कुछ सवाल भी बने हुए हैं। वित्तीय बाजारों में यह चर्चा जारी है कि इतनी बड़ी मात्रा में विदेशी मुद्रा आने के बाद भी रुपये पर दबाव क्यों बना हुआ है और विदेशी मुद्रा परिसंपत्तियों की स्थिति पर इसका वास्तविक प्रभाव किस प्रकार दिखाई देगा। यह विषय आने वाले समय में नीति निर्माताओं और बाजार विशेषज्ञों के लिए महत्वपूर्ण बना रह सकता है।

    विश्लेषण में यह भी कहा गया है कि पश्चिम एशिया में बढ़े भू-राजनीतिक तनाव के बाद विदेशी मुद्रा बाजार में केंद्रीय बैंक का हस्तक्षेप पूरी तरह नियमित नहीं रहा। इसके बावजूद यह आवश्यक माना गया है कि रुपये की मूलभूत मजबूती को बनाए रखा जाए, ताकि वह वैश्विक आर्थिक झटकों का प्रभावी ढंग से सामना कर सके और भारतीय अर्थव्यवस्था की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता पर प्रतिकूल असर न पड़े। वैश्विक व्यापार, आपूर्ति श्रृंखलाओं में बढ़ते तनाव और असंतुलित पूंजी प्रवाह के दौर में विदेशी मुद्रा प्रबंधन और अधिक महत्वपूर्ण हो गया है।

  • अमेरिका-ईरान तनाव में नरमी से कच्चे तेल में बड़ी गिरावट, वैश्विक बाजार में ब्रेंट और WTI करीब 5% टूटे

    अमेरिका-ईरान तनाव में नरमी से कच्चे तेल में बड़ी गिरावट, वैश्विक बाजार में ब्रेंट और WTI करीब 5% टूटे


    नई दिल्ली । 
    अमेरिका और ईरान के बीच सैन्य टकराव में फिलहाल नरमी आने के संकेतों का असर वैश्विक ऊर्जा बाजार पर तुरंत देखने को मिला। सोमवार को अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमतों में भारी गिरावट दर्ज की गई और प्रमुख तेल बेंचमार्क लगभग पांच प्रतिशत तक टूट गए। निवेशकों ने तनाव कम होने की संभावना के बीच मुनाफावसूली की, जिससे पिछले कुछ सप्ताह की तेज बढ़त के बाद बाजार में दबाव बढ़ गया।

    कारोबार के शुरुआती घंटों में अंतरराष्ट्रीय बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड की कीमत करीब 4.8 प्रतिशत गिरकर लगभग 87.55 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गई। वहीं अमेरिकी वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) कच्चा तेल भी करीब 5.09 प्रतिशत टूटकर लगभग 85 डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर कारोबार करता दिखाई दिया। एक ही कारोबारी सत्र में आई यह गिरावट हाल के समय की बड़ी गिरावटों में शामिल रही।

    बाजार में नरमी की मुख्य वजह अमेरिका और ईरान के बीच सैन्य गतिविधियों में विराम की संभावना रही। ईरान की ओर से यह संकेत दिए गए कि यदि अमेरिका सैन्य अभियान आगे नहीं बढ़ाता है तो वह भी जवाबी कार्रवाई नहीं करेगा। इस घटनाक्रम के बाद निवेशकों को लगा कि पश्चिम एशिया में तनाव फिलहाल और नहीं बढ़ेगा, जिससे तेल आपूर्ति पर तत्काल संकट की आशंका कुछ कम हुई है।

    हालांकि मौजूदा गिरावट के बावजूद ऊर्जा बाजार पूरी तरह सामान्य स्थिति में नहीं पहुंचा है। पिछले तीन सप्ताह के दौरान पश्चिम एशिया में बढ़ते संघर्ष के कारण कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल दर्ज किया गया था। उस दौरान ब्रेंट क्रूड 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गया था। बाजार को आशंका थी कि संघर्ष बढ़ने पर हॉर्मुज जलडमरूमध्य और बाब-अल-मंदेब जलमार्ग जैसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों से तेल आपूर्ति प्रभावित हो सकती है, जिससे वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला पर गंभीर असर पड़ता।

    विशेषज्ञों का मानना है कि ताजा गिरावट के बावजूद भू-राजनीतिक जोखिम पूरी तरह समाप्त नहीं हुए हैं। हाल के दिनों में लाल सागर क्षेत्र में ऊर्जा प्रतिष्ठानों और समुद्री मार्गों को लेकर बढ़ी गतिविधियों ने बाजार की चिंता को पूरी तरह खत्म नहीं होने दिया है। यदि क्षेत्र में फिर से तनाव बढ़ता है तो तेल की कीमतों में दोबारा उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है।

    बाजार विश्लेषकों के अनुसार, जुलाई महीने के दौरान आई तेज गिरावट के बावजूद कच्चे तेल की कीमतें अभी भी महीने की शुरुआत की तुलना में काफी ऊंचे स्तर पर बनी हुई हैं। इसका प्रमुख कारण यह है कि आपूर्ति से जुड़े जोखिम पूरी तरह खत्म नहीं हुए हैं और वैश्विक व्यापार के लिए महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों पर सामान्य आवाजाही अभी पूरी तरह बहाल नहीं हो सकी है। इसलिए निवेशकों की नजर अब भी पश्चिम एशिया के घटनाक्रम पर बनी हुई है।

    कच्चे तेल की कीमतों में नरमी का असर विदेशी मुद्रा बाजार पर भी दिखाई दिया। सोमवार को भारतीय रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले मजबूत होकर खुला। शुरुआती कारोबार में रुपया पिछले कारोबारी सत्र की तुलना में 41 पैसे की मजबूती के साथ 96.15 प्रति डॉलर के स्तर पर पहुंच गया। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट लंबे समय तक बनी रहती है तो इसका सकारात्मक प्रभाव तेल आयात करने वाले देशों की अर्थव्यवस्था और मुद्रास्फीति पर भी पड़ सकता है।

    आने वाले दिनों में वैश्विक निवेशकों की नजर अमेरिका-ईरान संबंधों, पश्चिम एशिया की सुरक्षा स्थिति और प्रमुख समुद्री मार्गों पर तेल आपूर्ति की सामान्य स्थिति पर रहेगी। इन कारकों के आधार पर ही कच्चे तेल की कीमतों की अगली दिशा तय होने की संभावना है।

  • कीमती धातुओं के बाजार में उतार-चढ़ाव के बीच सोने की कीमतों में बड़ी गिरावट, निवेशकों के लिए नए अवसर और चुनौतियां

    कीमती धातुओं के बाजार में उतार-चढ़ाव के बीच सोने की कीमतों में बड़ी गिरावट, निवेशकों के लिए नए अवसर और चुनौतियां

    नई दिल्ली । भारतीय बुलियन और सर्राफा बाजार में सोने की कीमतों में लगातार आ रही गिरावट ने निवेशकों और खरीदारों का ध्यान अपनी ओर खींचा है। वर्ष की शुरुआत में सर्वकालिक उच्च स्तर को छूने के बाद अब सोने के दामों में उल्लेखनीय कमी दर्ज की गई है। रिकॉर्ड स्तर से करीब 37 हजार रुपये प्रति दस ग्राम की गिरावट के बाद बाजार में यह चर्चा जोर पकड़ रही है कि क्या यह नए निवेश का सही समय है या अभी कीमतों में और सुधार देखने को मिल सकता है।

    वैश्विक बाजार के रुझानों का सीधा असर घरेलू सर्राफा बाजार पर देखने को मिल रहा है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भू-राजनीतिक तनावों, कच्चे तेल की अनिश्चित कीमतों और अमेरिकी केंद्रीय बैंक की सख्त मौद्रिक नीतियों के कारण सोने की वैश्विक दरों पर लगातार दबाव बना हुआ है। जनवरी महीने में अंतरराष्ट्रीय बाजार में 5,602 डॉलर प्रति औंस के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचने वाला सोना अब घटकर करीब 4,040 डॉलर प्रति औंस के आसपास कारोबार कर रहा है। इसी के प्रभाव से भारतीय बाजार में भी कीमतें एक लाख अस्सी हजार रुपये के पीक स्तर से गिरकर एक लाख तैंतालीस हजार रुपये प्रति दस ग्राम के स्तर पर आ गई हैं।

    बाजार विशेषज्ञों के अनुसार सोने की कीमतों में इस नरमी का मुख्य कारण केंद्रीय बैंकों की ब्याज दर नीतियां हैं। अमेरिका में महंगाई पर नियंत्रण के लिए अपनाई जा रही कड़ी मौद्रिक नीतियों और ब्याज दरों में कटौती की संभावना न के बराबर होने के कारण निवेशक फिक्स्ड रिटर्न देने वाले अन्य वित्तीय साधनों की ओर रुख कर रहे हैं। चूंकि सोना कोई प्रत्यक्ष ब्याज या लाभांश प्रदान नहीं करता, इसलिए उच्च ब्याज दर के दौर में इसकी मांग पर नकारात्मक प्रभाव देखने को मिलता है।

    बाजार के दीर्घकालिक आंकड़ों का विश्लेषण करने पर यह स्पष्ट होता है कि सोने ने ऐतिहासिक रूप से निवेशकों को सुरक्षित और आकर्षक रिटर्न दिया है। पिछले तीन दशकों के दौरान इस पीली धातु के मूल्यों में व्यापक वृद्धि दर्ज की गई है। यद्यपि अल्पकालिक अवधि में भू-राजनीतिक बदलावों और आर्थिक नीतियों के कारण इसमें बड़े उतार-चढ़ाव आते रहे हैं, लेकिन दीर्घकालिक नजरिए से इसे हमेशा से एक मजबूत परिसंपत्ति माना जाता रहा है।

    बाजार विश्लेषकों का सुझाव है कि जो निवेशक अपने पोर्टफोलियो में सोने को शामिल करना चाहते हैं, उनके लिए एकमुश्त निवेश के बजाय व्यवस्थित तरीके से किस्तों में खरीदारी करना अधिक जोखिम-रहित रणनीति हो सकती है। आने वाले समय में वैश्विक बाजार के रुझानों और नीतिगत निर्णयों के आधार पर कीमतों में सीमित दायरे का उतार-चढ़ाव जारी रहने की संभावना जताई जा रही है।

  • ITR: डेडलाइन के अंतिम दिनों में इनकम टैक्स पोर्टल हुआ ठप… टैक्सपेयर्स की बढ़ी टेंशन

    ITR: डेडलाइन के अंतिम दिनों में इनकम टैक्स पोर्टल हुआ ठप… टैक्सपेयर्स की बढ़ी टेंशन


    नई दिल्ली।
    अगर आपने अभी तक अपना ITR फाइल नहीं किया है, तो अलर्ट हो जाइए। 31 जुलाई की आखिरी तारीख से ठीक पहले इनकम टैक्स विभाग (Income Tax Department) का ई-फाइलिंग पोर्टल (E-filing portal) कई यूजर्स के लिए ठप पड़ गया। लोगों ने सोशल मीडिया पर शिकायत की कि न तो वेबसाइट खुल रही है, न लॉगिन हो रहा है और न ही टैक्स पेमेंट या ITR फाइल हो पा रहा है। 31 जुलाई को इनकम टैक्स रिटर्न (Income Tax Return 2026- ITR) भरने की आखिरी तारीख है। ऐसे में बड़ी संख्या में लोग अपना रिटर्न दाखिल करने और बाकी टैक्स का पेमेंट करने में जुटे हैं। लेकिन कई टैक्सपेयर्स और चार्टर्ड अकाउंटेंट्स ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर शिकायत की कि इनकम टैक्स विभाग का ई-फाइलिंग पोर्टल ठीक से काम नहीं कर रहा है।


    टैक्सपेयर्स ने की शिकायत

    यूजर्स के मुताबिक पोर्टल पर लॉगिन करने में दिक्कत आ रही है। कई लोगों का कहना है कि वे आईटीआर फाइल नहीं कर पा रहे हैं, जबकि कुछ यूजर्स टैक्स पेमेंट भी नहीं कर सके। एक यूजर ने लिखा कि पिछले दो घंटे से पोर्टल काम नहीं कर रहा है और इनकम टैक्स पर भी वेबसाइट का इस तरह बंद होना हैरान करने वाला है।


    आखिरी दिनों में पोर्टल पर बढ़ा ट्रैफिक

    इनकम टैक्स विभाग की वेबसाइट के मुताबिक असेसमेंट ईयर 2026-27 के लिए अब तक 3.5 करोड़ से ज्यादा आईटीआर दाखिल किए जा चुके हैं। हर साल की तरह इस बार भी आखिरी कुछ दिनों में बड़ी संख्या में लोग रिटर्न फाइल करने के लिए पोर्टल पर पहुंच रहे हैं। माना जा रहा है कि बढ़ते ट्रैफिक की वजह से भी तकनीकी दिक्कतें सामने आ सकती हैं, हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।

    31 जुलाई है आईटीआर फाइल करने की आखिरी तारीख
    फिलहाल इनकम टैक्स विभाग की ओर से पोर्टल में आई दिक्कतों पर कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है। साथ ही 31 जुलाई की आखिरी तारीख बढ़ाने को लेकर भी कोई घोषणा नहीं की गई है। ऐसे में जिन लोगों का आईटीआर अभी तक फाइल नहीं हुआ है, उन्हें सलाह दी जाती है कि पोर्टल सामान्य होते ही तुरंत अपना रिटर्न दाखिल करें। जब तक इनकम टैक्स विभाग की ओर से कोई नई सूचना नहीं आती, तब तक 31 जुलाई की अंतिम तारीख पहले की तरह ही लागू रहेगी।