Category: Economy

  • एक हफ्ते में सोना 4 हजार और चांदी 10 हजार रुपये सस्ती, दिल्ली सर्राफा बाजार में फिर दिखी हलचल

    एक हफ्ते में सोना 4 हजार और चांदी 10 हजार रुपये सस्ती, दिल्ली सर्राफा बाजार में फिर दिखी हलचल


    नई दिल्ली ।
    दिल्ली के सर्राफा बाजार में शुक्रवार को सोने और चांदी की कीमतों में सप्ताहभर की बड़ी गिरावट के बाद कुछ बदलाव देखने को मिला। सोने के भाव में शुक्रवार को 200 रुपये की मामूली बढ़त दर्ज की गई और 99.9 प्रतिशत शुद्धता वाला सोना 1,52,600 रुपये प्रति 10 ग्राम पर पहुंच गया। इससे लगातार चार कारोबारी सत्रों से जारी सोने की गिरावट पर फिलहाल विराम लगा।

    इससे एक दिन पहले गुरुवार को सोना 1,52,400 रुपये प्रति 10 ग्राम पर बंद हुआ था। शुक्रवार की बढ़त के बावजूद पूरे सप्ताह की तस्वीर देखें तो कीमती धातुओं की कीमतों में काफी दबाव रहा। एक सप्ताह के दौरान सोने के भाव में करीब 4,000 रुपये यानी लगभग 2.5 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। वहीं, चांदी की कीमत में इससे भी बड़ी गिरावट देखने को मिली और यह एक सप्ताह में करीब 10,000 रुपये यानी लगभग 4 प्रतिशत सस्ती हो गई।

    स्थानीय सर्राफा बाजार में शुक्रवार को चांदी की कीमत 2.37 लाख रुपये प्रति किलोग्राम पर स्थिर रही। सप्ताह की शुरुआत में कीमती धातुओं की कीमतों में कमजोरी का असर लगातार कई कारोबारी सत्रों तक देखने को मिला। हालांकि, शुक्रवार को निचले स्तर पर खरीदारी बढ़ने से सोने के भाव को कुछ सहारा मिला और इसमें मामूली सुधार दर्ज किया गया।

    कीमती धातुओं की कीमतों पर अंतरराष्ट्रीय बाजार के घटनाक्रम का भी असर रहा। सप्ताह के दौरान अमेरिकी डॉलर में तेज मजबूती ने सोने पर दबाव बनाया। डॉलर की मजबूती आम तौर पर अंतरराष्ट्रीय बाजार में डॉलर में कारोबार करने वाली कीमती धातुओं के लिए चुनौती पैदा करती है। हालांकि, सप्ताह के अंत में डॉलर अपने हालिया उच्च स्तर से नीचे आया, जिससे सोने और चांदी को कुछ राहत मिली।

    कच्चे तेल की कीमतों में नरमी का असर भी बाजार के माहौल पर पड़ा। शुक्रवार को इन परिस्थितियों के बीच निवेशकों की धारणा में कुछ सुधार दिखाई दिया। इसके साथ ही बॉन्ड बाजार में स्थिरता आने से भी कीमती धातुओं की कीमतों को सीमित समर्थन मिला।

    विदेशी बाजार में भी शुक्रवार को सोने और चांदी की कीमतों में सुधार दर्ज किया गया। हाजिर सोना 27.73 डॉलर यानी करीब 1 प्रतिशत बढ़कर 4,301.40 डॉलर प्रति औंस पर पहुंच गया। इसी तरह हाजिर चांदी में करीब 1.4 प्रतिशत की तेजी आई और इसकी कीमत 64.72 डॉलर प्रति औंस रही।

    विदेशी बाजार में आई इस तेजी से सोने की कीमत एक बार फिर 4,300 डॉलर प्रति औंस के स्तर से ऊपर पहुंच गई, जबकि चांदी भी 65 डॉलर प्रति औंस के करीब पहुंची। इससे पिछले दो कारोबारी सत्रों में आई गिरावट से कुछ हद तक उबरने में मदद मिली।

    फिलहाल भारतीय बाजार में सप्ताहभर की गिरावट के बाद सोने और चांदी की कीमतों में शुक्रवार को मिला सुधार निवेशकों के लिए महत्वपूर्ण रहा। हालांकि, पूरे सप्ताह के आंकड़ों में दोनों कीमती धातुओं की कीमतें अभी भी निचले स्तर पर रहीं। शनिवार और रविवार को सर्राफा बाजार बंद रहने के कारण अब अगले कारोबारी सत्र में कीमतों की दिशा पर बाजार की नजर रहेगी।

  • Index Option में पैसा लगाने से पहले जान लें पूरा तरीका CE और PE कैसे काम करते हैं समझें आसान भाषा में

    Index Option में पैसा लगाने से पहले जान लें पूरा तरीका CE और PE कैसे काम करते हैं समझें आसान भाषा में


    नई दिल्ली। Index Option Trading शेयर बाजार में ट्रेडिंग का एक ऐसा तरीका है जिसमें किसी एक कंपनी के शेयर के बजाय पूरे इंडेक्स के उतार चढ़ाव पर ट्रेड किया जाता है। Nifty और Bank Nifty जैसे इंडेक्स के Options में ट्रेड करने वाले लोग बाजार की दिशा के अनुसार Call Option या Put Option खरीदने या बेचने की रणनीति अपनाते हैं। हालांकि Index Option में कम समय में बड़ा मुनाफा होने की संभावना के साथ नुकसान का जोखिम भी काफी अधिक होता है। इसलिए शुरुआत करने से पहले इसके बेसिक नियमों को समझना जरूरी है।

    Index Option में मुख्य रूप से दो तरह के कॉन्ट्रैक्ट होते हैं जिन्हें Call और Put कहा जाता है। Call Option यानी CE का इस्तेमाल आम तौर पर तब किया जाता है जब ट्रेडर को लगता है कि इंडेक्स का स्तर ऊपर जा सकता है। वहीं Put Option यानी PE का इस्तेमाल तब किया जाता है जब बाजार में गिरावट की संभावना दिखाई देती है। Option खरीदने वाला ट्रेडर इसके लिए Premium चुकाता है। यह Premium बाजार की स्थिति और कई अन्य कारकों के आधार पर लगातार बदलता रहता है।

    Index Option में ट्रेड शुरू करने के लिए सबसे पहले यह समझना जरूरी है कि किस इंडेक्स में ट्रेड करना है। इसके बाद Expiry Date और Strike Price को देखा जाता है। Strike Price वह स्तर होता है जिस पर Option Contract आधारित होता है। Expiry वह तारीख होती है जिस दिन उस Contract की अवधि समाप्त होती है। अलग अलग Index Options में Expiry से जुड़े नियम और कॉन्ट्रैक्ट की उपलब्धता अलग हो सकती है इसलिए ट्रेड करने से पहले एक्सचेंज की मौजूदा जानकारी देखना जरूरी है।

    मान लीजिए किसी ट्रेडर को लगता है कि इंडेक्स ऊपर जा सकता है। वह अपनी रणनीति और जोखिम क्षमता के अनुसार Call Option खरीदने पर विचार कर सकता है। अगर इंडेक्स की दिशा उसके अनुमान के अनुसार जाती है तो Option Premium बढ़ सकता है। इसी तरह बाजार में गिरावट की संभावना पर Put Option पर विचार किया जाता है। लेकिन केवल इंडेक्स के ऊपर या नीचे जाने का अनुमान सही होना पर्याप्त नहीं है क्योंकि Premium पर Time Decay और Implied Volatility जैसे कई कारकों का भी असर पड़ता है।

    Index Option में सबसे महत्वपूर्ण बात Risk Management है। शुरुआत में पूरी पूंजी को एक ही ट्रेड में लगाना जोखिम बढ़ा सकता है। इसलिए ट्रेड लेने से पहले यह तय करना चाहिए कि अधिकतम कितना नुकसान स्वीकार किया जा सकता है। Stop Loss का इस्तेमाल भी रणनीति का हिस्सा हो सकता है। बिना योजना के बार बार ट्रेड करने या नुकसान की भरपाई के लिए बड़ी रकम लगाने से जोखिम तेजी से बढ़ सकता है।

    Options Trading में Leverage के कारण छोटी पूंजी से बड़ी Contract Value पर एक्सपोजर मिल सकता है। यही वजह है कि मुनाफे के साथ नुकसान भी तेजी से बढ़ सकता है। Option Selling में जोखिम और भी अलग तरीके का हो सकता है और कुछ परिस्थितियों में नुकसान काफी बड़ा हो सकता है। इसलिए शुरुआती ट्रेडर को किसी भी रणनीति को वास्तविक पैसे से इस्तेमाल करने से पहले उसके जोखिम और संभावित नुकसान को अच्छी तरह समझना चाहिए।

    Index Option में ट्रेड करने से पहले बाजार का ट्रेंड वॉल्यूम Volatility Support और Resistance जैसे संकेतकों को समझना उपयोगी हो सकता है। इसके साथ ही किसी एक संकेत के आधार पर निर्णय लेने के बजाय पूरी ट्रेडिंग योजना बनाना बेहतर होता है। सबसे जरूरी बात यह है कि Options को आसान कमाई का जरिया न समझें। बाजार में कोई भी रणनीति निश्चित मुनाफे की गारंटी नहीं देती। सीखने के लिए पहले Paper Trading या छोटे स्तर से अभ्यास करना और जरूरत पड़ने पर SEBI पंजीकृत निवेश सलाहकार से सलाह लेना अधिक सुरक्षित तरीका हो सकता है।

  • एलजी इलेक्ट्रॉनिक्स इंडिया को 153.58 करोड़ रुपये की कस्टम ड्यूटी का नोटिस, आयातित सामान के मूल्यांकन पर उठे सवाल

    एलजी इलेक्ट्रॉनिक्स इंडिया को 153.58 करोड़ रुपये की कस्टम ड्यूटी का नोटिस, आयातित सामान के मूल्यांकन पर उठे सवाल

    नई दिल्ली ।एलजी इलेक्ट्रॉनिक्स इंडिया लिमिटेड को कस्टम अधिकारियों की ओर से 153.58 करोड़ रुपये की कस्टम ड्यूटी से जुड़ा कारण बताओ नोटिस मिला है। यह नोटिस कुछ आयातित सामानों के मूल्यांकन योग्य मूल्य में रॉयल्टी भुगतान को शामिल नहीं करने के आरोप से संबंधित है। कंपनी ने इस संबंध में जानकारी स्टॉक एक्सचेंज को दी गई फाइलिंग में साझा की है।

    मामले में डायरेक्टरेट ऑफ रेवेन्यू इंटेलिजेंस यानी डीआरआई की जांच के बाद कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है। जांच में आरोप लगाया गया है कि कुछ आयातित सामानों का मूल्यांकन योग्य मूल्य तय करते समय संबंधित रॉयल्टी भुगतान को शामिल नहीं किया गया। इसी आधार पर कस्टम ड्यूटी की अतिरिक्त राशि की मांग की गई है।

    22 सितंबर की तारीख वाला यह नोटिस नवी मुंबई के न्हावा शेवा पोर्ट स्थित कस्टम्स कमिश्नर कार्यालय से जारी किया गया था। कंपनी को यह नोटिस 24 सितंबर को प्राप्त हुआ। नोटिस में 153.58 करोड़ रुपये की कस्टम ड्यूटी की वसूली से जुड़ा मामला उठाया गया है।

    मामले में एलजी इलेक्ट्रॉनिक्स के आयात से संबंधित कस्टम मूल्यांकन को लेकर जांच की गई है। रॉयल्टी भुगतान को आयातित सामान के मूल्यांकन योग्य मूल्य में शामिल किए जाने के मुद्दे पर विभाग की ओर से आपत्ति दर्ज की गई है। इसी आधार पर कंपनी से जवाब मांगा गया है।

    इसके अलावा एलजी इलेक्ट्रॉनिक्स और उसकी प्रमुख प्रतिद्वंद्वी कंपनी सैमसंग से जुड़े ओएलईडी ग्लास स्क्रीन के आयात पर भी जांच चल रही है। यह जांच 5 प्रतिशत की रियायती कस्टम ड्यूटी के कथित गलत दावे को लेकर की जा रही है। जांच का केंद्र यह है कि आयात किए गए ओएलईडी ग्लास स्क्रीन पर किस दर से कस्टम ड्यूटी लागू होनी चाहिए।

    डीआरआई अधिकारियों का मानना है कि 5 प्रतिशत की रियायती कस्टम ड्यूटी की दर सामान्य बाजार में बिकने वाले उत्पादों में इस्तेमाल होने वाले पुराने एलसीडी और एलईडी से संबंधित है। ओएलईडी पार्ट्स के मामले में विभाग की ओर से अलग कस्टम ड्यूटी दर लागू होने की बात कही गई है।

    मामले में एलजी इलेक्ट्रॉनिक्स ने ओएलईडी आयात से जुड़े अधिकारियों के लिखित सवालों के जवाब दिए हैं। कंपनी ने अधिकारियों द्वारा आकलन किए गए कस्टम ड्यूटी अंतर की रकम भी स्वेच्छा से जमा कर दी है। हालांकि, कारण बताओ नोटिस अलग से 153.58 करोड़ रुपये की कस्टम ड्यूटी से जुड़े मामले में जारी किया गया है।

    कस्टम ड्यूटी से जुड़े इस मामले के बीच एलजी इलेक्ट्रॉनिक्स इंडिया के वित्तीय प्रदर्शन में भी बढ़ोतरी दर्ज की गई है। वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में कंपनी का शुद्ध मुनाफा सालाना आधार पर 27.2 प्रतिशत बढ़कर 653 करोड़ रुपये हो गया। वित्त वर्ष 2025-26 की समान तिमाही में कंपनी का शुद्ध मुनाफा 513 करोड़ रुपये था।

    अप्रैल से जून की तिमाही के दौरान कंपनी की आय भी बढ़ी। इस अवधि में कंपनी का राजस्व 15.5 प्रतिशत बढ़कर 7,233 करोड़ रुपये हो गया, जबकि पिछले वित्त वर्ष की समान तिमाही में यह 6,262 करोड़ रुपये था। कंपनी के अनुसार, गर्मियों के दौरान मजबूत मांग और प्रीमियम उत्पादों की बिक्री में बढ़ोतरी से वित्तीय प्रदर्शन को सहारा मिला।

  • बड़ी गिरावट के बाद संभला शेयर बाजार, सेंसेक्स 315 अंक चढ़ा और निफ्टी 23,140 के पार बंद

    बड़ी गिरावट के बाद संभला शेयर बाजार, सेंसेक्स 315 अंक चढ़ा और निफ्टी 23,140 के पार बंद

    नई दिल्ली । पिछले कारोबारी सत्र में बड़ी गिरावट के बाद भारतीय शेयर बाजार ने शुक्रवार को बढ़त के साथ कारोबार समाप्त किया। सप्ताह के आखिरी कारोबारी दिन सेंसेक्स और निफ्टी दोनों हरे निशान में बंद हुए। सेंसेक्स में 0.43 प्रतिशत और निफ्टी में 0.34 प्रतिशत की तेजी दर्ज की गई। कारोबार के दौरान बाजार में उतार-चढ़ाव बना रहा, लेकिन सत्र के अंत में प्रमुख सूचकांक बढ़त बनाए रखने में सफल रहे।

    शुक्रवार को सेंसेक्स 315.20 अंक यानी 0.43 प्रतिशत की बढ़त के साथ 73,895.74 पर बंद हुआ। इससे पहले यह पिछले कारोबारी सत्र के 73,580.54 के स्तर से 54.61 अंक नीचे 73,525.92 पर खुला था। दिन के कारोबार में सेंसेक्स ने 73,968.05 का उच्चतम स्तर छुआ। इस तरह इंट्रा-डे कारोबार में सूचकांक ने 387.51 अंक यानी करीब 0.52 प्रतिशत की बढ़त दर्ज की।

    निफ्टी 50 भी बढ़त के साथ बंद हुआ। निफ्टी में 77.40 अंक यानी 0.34 प्रतिशत की तेजी रही और यह 23,140.50 के स्तर पर बंद हुआ। कारोबार की शुरुआत में निफ्टी पिछले बंद स्तर की तुलना में करीब 28 अंक यानी 0.12 प्रतिशत की गिरावट के साथ 23,035 पर खुला था। दिन के दौरान इसने 23,162.70 का उच्चतम स्तर दर्ज किया, जो इंट्रा-डे आधार पर 99.60 अंक यानी 0.43 प्रतिशत की बढ़त थी।

    व्यापक बाजार की तस्वीर हालांकि पूरी तरह एक जैसी नहीं रही। निफ्टी मिडकैप 100 में 0.14 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई, जबकि निफ्टी स्मॉलकैप इंडेक्स 0.15 प्रतिशत की बढ़त के साथ बंद हुआ। इससे संकेत मिला कि बाजार में अलग-अलग श्रेणियों के शेयरों में निवेशकों की गतिविधियां अलग-अलग रहीं।

    सेक्टरवार कारोबार में निफ्टी रियल्टी और निफ्टी ऑटो में सबसे ज्यादा तेजी देखने को मिली। इसके विपरीत निफ्टी सीमेंट, निफ्टी मीडिया, निफ्टी आईटी और निफ्टी फार्मा में दबाव रहा। प्रमुख शेयरों में एक्सिस बैंक, एशियन पेंट्स, महिंद्रा एंड महिंद्रा, बजाज फाइनेंस, एचसीएल टेक, पावरग्रिड, टाइटन और इंडिगो बढ़त दर्ज करने वाले प्रमुख शेयरों में रहे।

    दूसरी ओर मैक्स हेल्थ, टीएमपीवी, इंफोसिस, ओएनजीसी और ट्रेंट के शेयरों में गिरावट देखने को मिली। कारोबार के दौरान अलग-अलग सेक्टर और कंपनियों के प्रदर्शन में अंतर बना रहा।

    बाजार के प्रदर्शन पर कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव और बॉन्ड यील्ड के ऊंचे स्तर का असर भी देखा गया। महंगाई को लेकर चिंता, विदेशी फंड की निकासी और उभरते बाजारों की करेंसी पर दबाव जैसे मुद्दे भी निवेशकों के लिए महत्वपूर्ण बने रहे। हालिया गिरावट के बाद कुछ चुनिंदा शेयरों में खरीदारी से बाजार को समर्थन मिला।

    बाजार के 23,000 के स्तर से ऊपर बने रहने को घरेलू बाजार में मजबूती और घरेलू लिक्विडिटी से मिलने वाले समर्थन से जोड़कर देखा गया। हालांकि कच्चे तेल की कीमतों और वैश्विक बॉन्ड यील्ड में बदलाव बाजार के लिए निकट अवधि में महत्वपूर्ण कारक बने रह सकते हैं। बेहतर वैल्यूएशन और घरेलू विकास की संभावनाओं के बीच चुनिंदा शेयरों में खरीदारी जारी रहने से शुक्रवार को बाजार ने पिछले सत्र की गिरावट के बाद बढ़त के साथ सप्ताह का कारोबार समाप्त किया।

  • केंद्र की पीएलआई योजनाओं से फार्मा और मेडटेक विनिर्माण को बढ़ावा, निवेश और घरेलू उत्पादन में बड़ी बढ़ोतरी

    केंद्र की पीएलआई योजनाओं से फार्मा और मेडटेक विनिर्माण को बढ़ावा, निवेश और घरेलू उत्पादन में बड़ी बढ़ोतरी


    नई दिल्ली ।केंद्र सरकार की उत्पादन से जुड़ी प्रोत्साहन यानी पीएलआई योजनाओं के जरिए देश में फार्मास्युटिकल, बल्क ड्रग्स और मेडिकल डिवाइस के घरेलू विनिर्माण को बढ़ावा मिला है। सरकार की ओर से जारी आंकड़ों के अनुसार, इन योजनाओं के माध्यम से निवेश बढ़ाने, उत्पादन क्षमता विकसित करने और महत्वपूर्ण उत्पादों के लिए आयात पर निर्भरता कम करने की दिशा में काम हुआ है। इसके साथ ही फार्मा और मेडटेक क्षेत्र में नई तकनीकों को अपनाने और उन्नत विनिर्माण क्षमता विकसित करने पर भी जोर दिया गया है।

    बल्क ड्रग्स के घरेलू उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए वर्ष 2020 में पीएलआई योजना को मंजूरी दी गई थी। इसके लिए 6,940 करोड़ रुपये का वित्तीय प्रावधान किया गया। योजना के तहत 41 महत्वपूर्ण उत्पादों के घरेलू निर्माण को मजबूत करने और एपीआई यानी एक्टिव फार्मास्युटिकल इंग्रीडिएंट्स तथा अन्य जरूरी कच्चे माल के लिए आयात पर निर्भरता घटाने का लक्ष्य रखा गया।

    जून 2026 तक इस योजना के तहत 5,210.74 करोड़ रुपये का निवेश हो चुका है। यह निर्धारित 4,330 करोड़ रुपये के निवेश लक्ष्य से अधिक है। योजना के तहत 28 एपीआई के विनिर्माण के लिए 39 परियोजनाएं शुरू हो चुकी हैं। इसके चलते पेनिसिलिन-जी, क्लैवुलैनिक एसिड और रिफैम्पिसिन जैसे महत्वपूर्ण फर्मेंटेशन आधारित उत्पादों का घरेलू उत्पादन भी संभव हुआ है।

    फार्मास्युटिकल क्षेत्र के लिए अलग पीएलआई योजना को 2021 में मंजूरी दी गई थी। इस योजना के लिए 15,000 करोड़ रुपये का वित्तीय प्रावधान रखा गया। इसका उद्देश्य देश की विनिर्माण क्षमता बढ़ाने के साथ निवेश और उत्पादन को प्रोत्साहित करना तथा उच्च मूल्य वाले फार्मास्युटिकल उत्पादों के निर्माण को बढ़ावा देना है।

    इस योजना में बायोफार्मास्युटिकल्स, कॉम्प्लेक्स जेनेरिक्स, पेटेंटेड और पेटेंट-मुक्त दवाएं, ऑर्फन ड्रग्स, ऑटो-इम्यून दवाएं तथा अन्य उच्च मूल्य वाले फार्मास्युटिकल उत्पाद शामिल हैं। योजना के तहत 55 आवेदकों का चयन किया गया है, जिनमें 20 एमएसएमई हैं। जून 2026 तक 46,744 करोड़ रुपये का वास्तविक निवेश आकर्षित हुआ, जबकि निर्धारित लक्ष्य 17,275 करोड़ रुपये था।

    फार्मा क्षेत्र की कई कंपनियों ने योजना के तहत कॉम्प्लेक्स जेनेरिक्स, बायोसिमिलर, ऑटो-इम्यून दवाओं और अन्य उच्च मूल्य वाले उत्पादों के निर्माण के लिए अपनी क्षमता बढ़ाई है।

    मेडिकल डिवाइस क्षेत्र के लिए वर्ष 2020 में पीएलआई योजना को मंजूरी दी गई थी। इसके लिए 3,420 करोड़ रुपये का वित्तीय प्रावधान किया गया। योजना के तहत भारत में निर्मित पात्र मेडिकल डिवाइस की अतिरिक्त बिक्री पर पांच साल तक पांच प्रतिशत प्रोत्साहन देने का प्रावधान है।

    इस योजना के जरिए कई ऐसे उच्च तकनीक वाले मेडिकल डिवाइस का घरेलू उत्पादन शुरू हुआ है, जिनके लिए पहले बड़े स्तर पर आयात पर निर्भरता थी। अब 57 अलग-अलग मेडिकल डिवाइस का उत्पादन शुरू हो चुका है। इनमें एमआरआई मशीन, सीटी स्कैनर, कैथ लैब, लीनियर एक्सेलरेटर, सी-आर्म, मैमोग्राफी मशीन, अल्ट्रासाउंड सिस्टम, एनेस्थीसिया मशीन और हार्ट वाल्व शामिल हैं।

    योजना ने वैश्विक निर्माताओं को भारत में विनिर्माण गतिविधियां स्थापित या विस्तारित करने के लिए भी आकर्षित किया है। इसके साथ तकनीक हस्तांतरण और उन्नत विनिर्माण क्षमताओं को बढ़ावा देने के लिए वैश्विक साझेदारियों पर भी काम हुआ है।

  • लिस्टिंग के दूसरे दिन एनएसई शेयरों में गिरावट, शुरुआती तेजी के बाद निवेशकों ने मुनाफावसूली को चुना

    लिस्टिंग के दूसरे दिन एनएसई शेयरों में गिरावट, शुरुआती तेजी के बाद निवेशकों ने मुनाफावसूली को चुना

    नई दिल्ली । नेशनल स्टॉक एक्सचेंज यानी एनएसई के शेयरों में लिस्टिंग के अगले ही दिन शुक्रवार को गिरावट देखने को मिली। शुरुआती कारोबार के बाद शेयरों में मुनाफावसूली का दबाव दिखाई दिया। कारोबार के दौरान एनएसई का शेयर करीब 1.6 प्रतिशत फिसलकर 1,790 रुपये के इंट्राडे निचले स्तर तक पहुंच गया। बाद में यह करीब 1,796 रुपये के आसपास कारोबार करता दिखा, जो पिछले बंद भाव के मुकाबले लगभग 1.20 प्रतिशत नीचे था।

    एनएसई के शेयर गुरुवार को अपने इश्यू प्राइस की तुलना में करीब 0.8 प्रतिशत प्रीमियम पर सूचीबद्ध हुए थे। लिस्टिंग वाले दिन शुरुआती कारोबार अपेक्षाकृत सीमित रहा, लेकिन बाद में शेयर में तेजी आई और दिन के दौरान इसमें 5 प्रतिशत से अधिक का उछाल दर्ज किया गया। कारोबार समाप्त होने तक शेयर करीब 1.8 प्रतिशत की बढ़त के साथ बंद हुआ था। इसके बाद अगले कारोबारी दिन कुछ निवेशकों ने शुरुआती तेजी का लाभ उठाते हुए मुनाफावसूली की।

    एनएसई का आईपीओ भारतीय शेयर बाजार के इतिहास में दूसरा सबसे बड़ा सार्वजनिक निर्गम रहा। इससे पहले 2024 में हुंडई मोटर इंडिया का 27,870 करोड़ रुपये का आईपीओ सबसे बड़ा सार्वजनिक निर्गम था। एनएसई के आईपीओ को भी निवेशकों की ओर से मजबूत प्रतिक्रिया मिली थी।

    17 सितंबर से 21 सितंबर तक खुले इस आईपीओ को कुल 5.71 गुना सब्सक्रिप्शन मिला था। 22,568.94 करोड़ रुपये के इश्यू आकार के मुकाबले करीब 90,287.33 करोड़ रुपये की बोलियां प्राप्त हुई थीं। इस मजबूत मांग के बाद कंपनी के शेयरों की लिस्टिंग को लेकर बाजार में काफी दिलचस्पी बनी हुई थी।

    लिस्टिंग के बाद एनएसई का बाजार पूंजीकरण लगभग 4.49 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया। इस मूल्यांकन के साथ कंपनी भारत की 10वीं सबसे मूल्यवान सूचीबद्ध कंपनियों में शामिल हो गई। बाजार मूल्य के लिहाज से एनएसई ने सन फार्मास्युटिकल्स और टाइटन जैसी कंपनियों को पीछे छोड़ दिया है।

    बाजार पूंजीकरण के आधार पर एनएसई से ऊपर रिलायंस इंडस्ट्रीज, एचडीएफसी बैंक, भारती एयरटेल, आईसीआईसीआई बैंक, भारतीय स्टेट बैंक, टीसीएस, बजाज फाइनेंस, एलएंडटी और हिंदुस्तान यूनिलीवर जैसी कंपनियां हैं। इस तरह शेयर बाजार में सूचीबद्ध होने के तुरंत बाद एनएसई का मूल्यांकन देश की बड़ी कंपनियों की सूची में महत्वपूर्ण स्तर पर पहुंच गया है।

    लिस्टिंग के बाद शेयर में आई गिरावट को अल्पकालिक मुनाफावसूली के तौर पर देखा जा रहा है। शुरुआती कारोबार में तेजी के बाद कुछ निवेशकों द्वारा मुनाफा बुक किए जाने से शेयर पर दबाव बढ़ा। हालांकि, भारतीय पूंजी बाजार के विस्तार और एनएसई की बाजार में मजबूत स्थिति के कारण कंपनी को लेकर निवेशकों की दीर्घकालिक दिलचस्पी बनी रहने की बात कही गई है।

    एनएसई के प्रबंध निदेशक और मुख्य कार्यकारी अधिकारी आशीष कुमार चौहान ने बताया कि एक्सचेंज एक व्यापक मोबाइल-फर्स्ट प्लेटफॉर्म पर काम कर रहा है। इसका उद्देश्य निवेशकों को ट्रेडिंग डेटा, पोर्टफोलियो से जुड़ी जानकारी और विश्लेषणात्मक सुविधाएं एक ही मंच पर उपलब्ध कराना है।

    कंपनी की आय में ट्रांजैक्शन शुल्क की महत्वपूर्ण भूमिका है। वित्त वर्ष 2025-26 में एनएसई की परिचालन आय का 78.65 प्रतिशत हिस्सा ट्रांजैक्शन चार्जेज से आया था। यह आंकड़ा कंपनी के मौजूदा कारोबार मॉडल में लेनदेन आधारित आय के महत्व को दर्शाता है। लिस्टिंग के बाद शेयर में शुरुआती उतार-चढ़ाव के बीच अब बाजार की नजर कंपनी के कारोबार और भविष्य के प्रदर्शन पर बनी हुई है।

  • बैंकों की 28 से 30 सितंबर तक तीन दिन की हड़ताल, ग्राहकों के लिए जारी हुई जरूरी बैंकिंग सलाह

    बैंकों की 28 से 30 सितंबर तक तीन दिन की हड़ताल, ग्राहकों के लिए जारी हुई जरूरी बैंकिंग सलाह

    नई दिल्ली ।देश में 28 से 30 सितंबर तक तीन दिन की प्रस्तावित बैंक हड़ताल के कारण बैंकिंग सेवाओं पर असर पड़ने की संभावना है। हड़ताल के मद्देनजर ग्राहकों को अपने जरूरी बैंकिंग काम पहले ही निपटाने की सलाह दी गई है। इस दौरान खास तौर पर बैंक शाखाओं में होने वाले काम प्रभावित हो सकते हैं।

    हड़ताल की तारीखों से पहले 26 सितंबर को सितंबर का चौथा शनिवार और 27 सितंबर को रविवार है। ऐसे में सामान्य बैंकिंग व्यवस्था के कारण शाखाओं से जुड़े काम पहले ही प्रभावित रहेंगे। इसके बाद 28 से 30 सितंबर तक प्रस्तावित हड़ताल होने से ग्राहकों को लगातार कई दिनों तक शाखा संबंधी काम के लिए इंतजार करना पड़ सकता है।

    इसी स्थिति को देखते हुए ग्राहकों को सलाह दी गई है कि वे हड़ताल शुरू होने से पहले अपने जरूरी लेनदेन और बैंक से जुड़े महत्वपूर्ण काम पूरे कर लें। इससे हड़ताल के दौरान शाखाओं में संभावित व्यवधान के कारण होने वाली परेशानी से बचा जा सकता है।

    ग्राहकों के लिए यह भी स्पष्ट किया गया है कि इंटरनेट बैंकिंग, मोबाइल बैंकिंग और यूपीआई जैसी डिजिटल सेवाएं उपलब्ध रहेंगी। एटीएम और ग्राहक सेवा केंद्रों के जरिए मिलने वाली सुविधाओं का भी इस्तेमाल किया जा सकता है। इसके अलावा मोबाइल बैंकिंग एप्लीकेशन के माध्यम से उपलब्ध वित्तीय सेवाओं का उपयोग जारी रखा जा सकता है।

    इंटरनेट बैंकिंग के जरिए कई जरूरी वित्तीय काम घर बैठे किए जा सकते हैं। इसी तरह यूपीआई के माध्यम से भुगतान और धनराशि से जुड़े कई सामान्य लेनदेन किए जा सकते हैं। इसलिए हड़ताल की अवधि में ग्राहकों को जहां संभव हो, डिजिटल माध्यमों को प्राथमिकता देने की सलाह दी गई है।

    प्रस्तावित हड़ताल को लेकर बैंक कर्मचारियों की यूनियनों की ओर से कई मांगें रखी गई हैं। इनमें पांच दिन का कार्य सप्ताह लागू करना प्रमुख मांग है। फिलहाल बैंकों में रविवार के अलावा दूसरे और चौथे शनिवार को अवकाश रहता है। कर्मचारी सभी शनिवार को छुट्टी देने की व्यवस्था लागू करने की मांग कर रहे हैं।

    पांच दिन के कार्य सप्ताह को लेकर मार्च 2024 में हुए वेतन समझौते के दौरान सहमति बनी थी, लेकिन कर्मचारियों के अनुसार इसे अभी तक लागू नहीं किया गया है। इसके अलावा प्रदर्शन आधारित प्रोत्साहन यानी पीएलआई व्यवस्था को लेकर भी यूनियनों ने विरोध जताया है।

    कर्मचारी संगठनों का कहना है कि संशोधित पीएलआई व्यवस्था में बैंक के वरिष्ठ अधिकारियों और निचले स्तर के कर्मचारियों के बीच प्रोत्साहन को लेकर अंतर है। कर्मचारियों के विरोध के बाद सितंबर 2026 में इस संशोधित व्यवस्था को फिलहाल रोक दिया गया है।

    ग्राहकों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए 27 सितंबर, रविवार को सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों और क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों में सामान्य बैंकिंग कामकाज की अनुमति दी गई है। इस दौरान शाखाएं, कार्यालय, एटीएम से जुड़ी शाखाएं और करेंसी चेस्ट संचालित रहेंगे। इसका उद्देश्य लगातार कई दिनों तक बैंकिंग सेवाओं में संभावित व्यवधान को कम करना है।

    इससे पहले 11 सितंबर को बैंक यूनियनों की ओर से एक दिन की हड़ताल की गई थी। अब 28 से 30 सितंबर तक तीन दिन की देशव्यापी हड़ताल प्रस्तावित है। यूनियनों ने यह भी चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों का समाधान नहीं हुआ तो 26 अक्टूबर से देशव्यापी अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू की जा सकती है।

  • पीयूष गोयल बोले- PPP के आधार पर भारतीय अर्थव्यवस्था करीब 20 ट्रिलियन डॉलर, 30 ट्रिलियन डॉलर लक्ष्य की ओर बढ़ता भारत

    पीयूष गोयल बोले- PPP के आधार पर भारतीय अर्थव्यवस्था करीब 20 ट्रिलियन डॉलर, 30 ट्रिलियन डॉलर लक्ष्य की ओर बढ़ता भारत

    नई दिल्ली ।वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने कहा है कि क्रय शक्ति समता यानी PPP के आधार पर भारतीय अर्थव्यवस्था का आकार करीब 20 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंच गया है। उन्होंने कहा कि इस आधार पर भारत दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है। मंत्री ने यह बात राष्ट्रीय राजधानी में आयोजित 13वें पीएएफआई एनुअल फोरम 2026 में कही।

    गोयल ने कहा कि भारत अब 30 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। उनके अनुसार, जैसे-जैसे देश इस लक्ष्य की ओर बढ़ेगा, अलग-अलग आर्थिक मापदंडों के बीच मौजूद अंतर भी कम होता जाएगा। उन्होंने भारत की बदलती आर्थिक स्थिति और वैश्विक बाजारों के साथ बढ़ते जुड़ाव को व्यापार वार्ताओं के संदर्भ में महत्वपूर्ण बताया।

    क्रय शक्ति समता ऐसी विनिमय दरों को दर्शाती है, जिनका उद्देश्य अलग-अलग देशों में वस्तुओं और सेवाओं की कीमतों के स्तर में अंतर को ध्यान में रखते हुए मुद्राओं की वास्तविक खरीद क्षमता की तुलना करना है। इसी आधार पर विभिन्न देशों की अर्थव्यवस्थाओं के आकार की तुलना की जाती है।

    गोयल ने कहा कि भारत व्यापार और आर्थिक साझेदारी को लेकर ऐसी अर्थव्यवस्था के रूप में बातचीत कर रहा है, जिसके 30 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनने की उम्मीद है। उन्होंने व्यापक आर्थिक साझेदारी की संभावनाओं पर भी जोर दिया। इसमें सामान, सेवाओं, पर्यटकों, शिक्षण संस्थानों और खेलों से जुड़े लोगों के आसान आवागमन को बढ़ावा देने की बात शामिल है।

    उन्होंने बताया कि भारत की कई देशों और क्षेत्रों के साथ व्यापार वार्ताएं चल रही हैं। इनमें कनाडा, चिली, पेरू, सदर्न अफ्रीकन कस्टम्स यूनियन, मेक्सिको, मालदीव, यूरेशिया, मध्य एशिया, रूस, गल्फ कोऑपरेशन काउंसिल और इजरायल शामिल हैं।

    इन वार्ताओं का प्रमुख उद्देश्य भारत के लिए वैश्विक वैल्यू चेन और सप्लाई चेन में भागीदारी के अवसर बढ़ाना है। इसके साथ ही सामान और सेवाओं के आवागमन को आसान बनाने पर भी ध्यान दिया जा रहा है। मंत्री ने कहा कि वैश्विक बाजारों से जुड़ाव बढ़ाने के लिए आर्थिक साझेदारी महत्वपूर्ण है।

    सेमीकंडक्टर क्षेत्र का उल्लेख करते हुए गोयल ने कहा कि अगले पांच वर्षों में भारत में सेमीकंडक्टर की सालाना खपत की मांग 150 अरब डॉलर से अधिक होने की उम्मीद है। उन्होंने इस क्षेत्र में बढ़ती जरूरतों के अनुरूप क्षमताओं के विकास पर जोर दिया।

    मंत्री ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के क्षेत्र में भी क्षमता विकसित करने की आवश्यकता बताई। उन्होंने बड़े लैंग्वेज मॉडल और एजेंटिक मॉडल सहित एआई इकोसिस्टम को मजबूत करने की जरूरत पर जोर दिया। साथ ही भारतीय स्टार्टअप्स के लिए इनोवेशन और डीप-टेक इकोसिस्टम को बढ़ावा देने की दिशा में काम करने की बात कही।

    गोयल ने अंतरिक्ष क्षेत्र में निजी भागीदारी का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि भारत निजी क्षेत्र द्वारा अंतरिक्ष में रॉकेट लॉन्च करने वाला तीसरा देश बन गया है। इसके अलावा उन्होंने भारत की युवा आबादी के वैश्विक घटनाक्रमों और अवसरों को लेकर बढ़ती जागरूकता का जिक्र किया। उन्होंने युवाओं की अपने भविष्य से जुड़े फैसले लेने की क्षमता पर भरोसा जताया और देश के स्टार्टअप इकोसिस्टम की वृद्धि का भी उल्लेख किया।

  • 25 सितंबर को शेयर बाजार में क्या होगा, अमेरिकी बॉन्ड यील्ड और क्रूड ऑयल पर नजर, जानिए अहम स्तर

    25 सितंबर को शेयर बाजार में क्या होगा, अमेरिकी बॉन्ड यील्ड और क्रूड ऑयल पर नजर, जानिए अहम स्तर


    नई दिल्ली। 25 सितंबर 2026 शुक्रवार को भारतीय शेयर बाजार की चाल पर निवेशकों की नजर रहेगी। इससे एक दिन पहले यानी 24 सितंबर को घरेलू बाजार में तेज गिरावट देखने को मिली। कारोबार के दौरान Sensex और Nifty दोनों दबाव में रहे। अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी और कच्चे तेल की कीमतों में तेजी ने निवेशकों की चिंता बढ़ाई। इसके साथ ही वैश्विक बाजारों से मिले कमजोर संकेतों का असर भी भारतीय बाजार पर दिखाई दिया।

    24 सितंबर की सुबह Sensex करीब 576 अंक की गिरावट के साथ 74251 के आसपास कारोबार कर रहा था जबकि Nifty 23245 के स्तर तक फिसल गया था। बाजार में गिरावट का असर कई प्रमुख शेयरों और सेक्टर पर देखने को मिला। बैंकिंग और वित्तीय शेयरों पर भी दबाव रहा। रिपोर्ट के मुताबिक बाजार पूंजीकरण में शुरुआती कारोबार के दौरान 4 लाख करोड़ रुपये से अधिक की कमी आई थी।

    अब 25 सितंबर को बाजार की दिशा तय करने में Nifty के अहम तकनीकी स्तर महत्वपूर्ण हो सकते हैं। बाजार विश्लेषण के अनुसार 23200 का स्तर एक महत्वपूर्ण सपोर्ट जोन के तौर पर देखा जा रहा है। यदि Nifty इस स्तर के नीचे टिकता है तो 23100 से 23000 का क्षेत्र अगला महत्वपूर्ण सपोर्ट बन सकता है। वहीं ऊपर की तरफ 23500 का स्तर अहम रेजिस्टेंस माना जा रहा है।

    बाजार की चाल पर अमेरिकी बॉन्ड यील्ड का असर भी बना रह सकता है। 24 सितंबर को अमेरिका की 10 वर्षीय ट्रेजरी यील्ड 5.1 प्रतिशत के ऊपर पहुंच गई थी जो 2007 के बाद का ऊंचा स्तर बताया गया। बढ़ती यील्ड के कारण निवेशकों के बीच ब्याज दरों को लेकर नए अनुमान बन रहे हैं। इसका असर दुनियाभर के शेयर बाजारों के साथ भारतीय बाजार पर भी पड़ सकता है।

    कच्चे तेल की कीमत भी निवेशकों के लिए अहम संकेत रहेगी। Brent crude 102 डॉलर प्रति बैरल के आसपास पहुंच गया था। भारत कच्चे तेल का बड़ा आयातक है इसलिए तेल की कीमतों में तेज बढ़ोतरी से आयात बिल और महंगाई पर दबाव बढ़ने की आशंका रहती है। इसी वजह से बाजार में तेल की हर बड़ी चाल पर नजर बनी रहेगी।

    इसके अलावा विदेशी निवेशकों की गतिविधियां भी बाजार के लिए महत्वपूर्ण रहेंगी। 23 सितंबर को विदेशी संस्थागत निवेशकों ने भारतीय शेयरों में खरीदारी की थी जबकि घरेलू संस्थागत निवेशक भी खरीदार रहे थे। ऐसे में 25 सितंबर को अगर संस्थागत निवेश का रुख बदलता है तो बाजार की चाल पर उसका असर दिखाई दे सकता है।

    निवेशकों के लिए फिलहाल बाजार में तेजी या गिरावट को लेकर जल्दबाजी में फैसला लेने के बजाय प्रमुख तकनीकी स्तरों और वैश्विक संकेतों पर नजर रखना जरूरी होगा। खासतौर पर Nifty का 23200 के आसपास व्यवहार और 23500 के स्तर की ओर उसकी चाल बाजार की दिशा के बारे में महत्वपूर्ण संकेत दे सकती है। शेयर बाजार में उतार चढ़ाव सामान्य है इसलिए किसी भी निवेश निर्णय से पहले जोखिम और अपनी निवेश रणनीति को ध्यान में रखना जरूरी है।

  • 28 सितंबर से 3 दिन हड़ताल… दूसरे बैंक के ATM से निकासी पर नहीं लगेगा शुल्क, रविवार को भी खुलेंगे बैंक

    28 सितंबर से 3 दिन हड़ताल… दूसरे बैंक के ATM से निकासी पर नहीं लगेगा शुल्क, रविवार को भी खुलेंगे बैंक


    नई दिल्ली।
    बैंक यूनियनों (Bank Unions) की 28 सिंतबर से प्रस्तावित तीन दिवसीय देशव्यापी हड़ताल (Three-day Nationwide Strike) के दौरान दूसरे बैंकों के एटीएम (ATMs Other Banks) से पैसे निकालने पर कोई शुल्क नहीं लगेगा। बैंक ऑफ इंडिया, इंडियन बैंक, सेंट्रल बैंक, पंजाब एंड सिंध समेत कई बैंकों ने इस संबंध में घोषणा की है। 

    हड़ताल के मद्देनजर 27 सितंबर रविवार को बैंक खुले रहेंगे। उधर, हड़ताल को देखते हुए केंद्र ने सितंबर के वेतन व पेंशन का भुगतान 5 दिन पहले करने का फैसला किया है। केंद्रीय कर्मियों, औद्योगिक कर्मचारियों और पेंशनरों के खाते में वेतन व पेंशन शुक्रवार को ही भेजने के निर्देश दिए गए हैं। रेलवे कर्मियों का वेतन भी इसी के साथ आएगा।