Category: Economy

  • आज का शेयर बाजार रहेगा उतार चढ़ाव भरा या मिलेगी शानदार तेजी निवेशकों के लिए जानना जरूरी है ये बड़े फैक्टर

    आज का शेयर बाजार रहेगा उतार चढ़ाव भरा या मिलेगी शानदार तेजी निवेशकों के लिए जानना जरूरी है ये बड़े फैक्टर


    नई दिल्ली । भारतीय शेयर बाजार में हर कारोबारी दिन नई संभावनाएं और नई चुनौतियां लेकर आता है। बाजार की चाल कई घरेलू और वैश्विक कारकों पर निर्भर करती है। ऐसे में निवेशकों की नजर सिर्फ सेंसेक्स और निफ्टी के उतार चढ़ाव पर ही नहीं बल्कि विदेशी बाजारों कच्चे तेल की कीमतों डॉलर की स्थिति विदेशी निवेशकों की खरीद बिक्री और कंपनियों के तिमाही नतीजों पर भी रहती है। आज भी बाजार की दिशा इन्हीं महत्वपूर्ण संकेतों से तय हो सकती है।

    अगर वैश्विक बाजारों से सकारात्मक संकेत मिलते हैं तो भारतीय बाजार में भी खरीदारी का माहौल बन सकता है। वहीं अमेरिका और एशियाई बाजारों में कमजोरी या किसी बड़ी आर्थिक घटना का असर घरेलू बाजार पर भी दिखाई दे सकता है। निवेशकों की नजर विदेशी संस्थागत निवेशकों और घरेलू संस्थागत निवेशकों की गतिविधियों पर भी रहेगी क्योंकि बड़े निवेशकों की खरीद और बिकवाली बाजार की दिशा बदलने की क्षमता रखती है।

    इस समय कंपनियों के तिमाही नतीजों का दौर भी जारी है। जिन कंपनियों के वित्तीय परिणाम उम्मीद से बेहतर आते हैं उनके शेयरों में तेजी देखने को मिल सकती है जबकि कमजोर नतीजे निवेशकों की निराशा बढ़ा सकते हैं। बैंकिंग आईटी ऑटो फार्मा एफएमसीजी और इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर के शेयरों पर बाजार की खास नजर बनी रह सकती है।

    कच्चे तेल की कीमतों में उतार चढ़ाव भी भारतीय शेयर बाजार के लिए महत्वपूर्ण संकेत माना जाता है। यदि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चा तेल महंगा होता है तो इसका असर कई कंपनियों की लागत पर पड़ सकता है। वहीं तेल की कीमतों में नरमी आने से बाजार को राहत मिल सकती है। इसके साथ ही डॉलर के मुकाबले रुपये की चाल भी निवेशकों के फैसलों को प्रभावित करती है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि छोटे निवेशकों को बाजार की हर हलचल देखकर घबराने की जरूरत नहीं है। यदि निवेश लंबी अवधि के लिए किया गया है तो मजबूत कंपनियों में बने रहना अधिक लाभदायक साबित हो सकता है। बाजार में उतार चढ़ाव सामान्य प्रक्रिया है इसलिए केवल अफवाहों या सोशल मीडिया पर चल रही अपुष्ट खबरों के आधार पर निवेश संबंधी निर्णय लेने से बचना चाहिए।

    जो लोग पहली बार शेयर बाजार में निवेश करना चाहते हैं उन्हें किसी भी शेयर में पैसा लगाने से पहले कंपनी के कारोबार वित्तीय स्थिति और भविष्य की संभावनाओं का अध्ययन जरूर करना चाहिए। पोर्टफोलियो में विविधता बनाए रखना भी जोखिम कम करने का अच्छा तरीका माना जाता है। एक ही सेक्टर या एक ही कंपनी में पूरा निवेश करना समझदारी नहीं होती।

    आज के कारोबार में बाजार की दिशा वैश्विक संकेतों आर्थिक आंकड़ों विदेशी निवेशकों की गतिविधियों और कंपनियों के प्रदर्शन से तय हो सकती है। ऐसे में निवेशकों को धैर्य के साथ बाजार पर नजर रखनी चाहिए और किसी भी निवेश से पहले पूरी जानकारी हासिल करनी चाहिए। समझदारी से लिया गया फैसला लंबे समय में बेहतर रिटर्न देने में मदद कर सकता है जबकि जल्दबाजी नुकसान का कारण बन सकती है।

  • मारुति सुजुकी का चालू वित्त वर्ष में 9 लाख सीएनजी वाहन बेचने का लक्ष्य

    मारुति सुजुकी का चालू वित्त वर्ष में 9 लाख सीएनजी वाहन बेचने का लक्ष्य


    नई दिल्ली।
    देश की सबसे बड़ी कार विनिर्माता कंपनी मारुति सुजुकी इंडिया (एमएसआई) ने चालू वित्त वर्ष 2026-27 में करीब 9 लाख सीएनजी वाहन बेचने का लक्ष्य रखा है। यह पिछले वित्त वर्ष में बेची गई 7 लाख से अधिक इकाइयों की तुलना में लगभग 30 फीसदी की वृद्धि होगी।

    मारुति सुज़ुकी इंडिया के वरिष्ठ कार्यकारी अधिकारी (विपणन एवं बिक्री) पार्थो बनर्जी ने रविवार को जारी बयान में कहा कि चालू वित्त वर्ष 2026-27 की (अप्रैल-जून) पहली तिमाही में कंपनी ने विभिन्न मॉडल श्रेणियों में 2.2 लाख सीएनजी वाहन बेचे हैं, जो पिछले वित्त वर्ष की समान अवधि की तुलना में 58 फीसदी अधिक है।

    पार्थो बनर्जी ने कहा कि पश्चिम एशिया युद्ध के बाद ईंधन के दाम बढ़ने से सीएनजी वाहनों की मांग बढ़ी है। उन्होंने बताया कि कंपनी का मानना है कि पश्चिम एशिया में जारी युद्ध के बाद ईंधन की कीमतों में बढ़ोतरी से सीएनजी वाहनों की मांग तेजी से बढ़ी है। कंपनी को मांग में पहले ही तीव्र वृद्धि देखने को मिल रही है।

    चालू वित्त वर्ष 2026-27 के लिए सीएनजी वाहन बिक्री लक्ष्य के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि पहली तिमाही के आंकड़े को देखते हुए हम लगभग नौ लाख इकाई की बिक्री की उम्मीद कर रहे हैं। बनर्जी ने कहा कि पिछले वित्त वर्ष 2025-26 में कंपनी ने सात लाख से ज्यादा सीएनजी वाहन बेचे थे। उन्होंने कहा कि पहले सीएनजी वाहनों की मांग मुख्य रूप से छोटी कारों, वैन और अर्टिगा तक सीमित थी लेकिन अब कंपनी की एसयूवी श्रेणी में भी इनकी मांग तेजी से बढ़ रही है।

    बनर्जी के अनुसार कंपनी की विक्टोरिस एसयूवी की कुल बिक्री में 50 प्रतिशत से अधिक हिस्सेदारी गाड़ी के नीचे लगे सीएनजी टैंक (अंडरबॉडी) संस्करण की है। इसी रुझान को देखते हुए कंपनी ने नई ब्रेज़ा एस-सीएनजी में भी अंडरबॉडी सीएनजी टैंक की सुविधा दी है। उन्होंने कहा कि मारुति सुज़ुकी फिलहाल घरेलू बाजार में 15 सीएनजी मॉडल, जिनमें हल्के वाणिज्यिक वाहन भी शामिल हैं, बेच रही है। पिछले महीने कंपनी की कुल बिक्री में सीएनजी वाहनों की हिस्सेदारी 42 प्रतिशत रही, जो इस श्रेणी की बढ़ती लोकप्रियता को दर्शाता है।

  • अनिल अग्रवाल की वेदांता डीमर्जर योजना ने पार किया अहम पड़ाव, ऑयल एंड गैस बिजनेस ट्रांसफर को मिली सरकारी मंजूरी

    अनिल अग्रवाल की वेदांता डीमर्जर योजना ने पार किया अहम पड़ाव, ऑयल एंड गैस बिजनेस ट्रांसफर को मिली सरकारी मंजूरी

    नई दिल्ली । अनिल अग्रवाल के नेतृत्व वाली वेदांता लिमिटेड की बहुप्रतीक्षित डीमर्जर योजना को एक महत्वपूर्ण सफलता मिली है। कंपनी के ऑयल एंड गैस कारोबार को अलग इकाई में स्थानांतरित करने की प्रक्रिया में भारत सरकार के पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने अनापत्ति प्रमाणपत्र जारी कर दिया है। इस मंजूरी के साथ कंपनी के पुनर्गठन कार्यक्रम ने एक अहम चरण पार कर लिया है और आगे की कानूनी एवं प्रशासनिक प्रक्रियाओं का रास्ता भी साफ हो गया है।

    सरकारी स्वीकृति के तहत वेदांता ऑयल एंड गैस लिमिटेड को तेल एवं गैस ब्लॉकों में पार्टिसिपेटिंग इंटरेस्ट और ऑपरेटरशिप के हस्तांतरण की अनुमति दी गई है। यह नई इकाई पहले माल्को एनर्जी लिमिटेड के नाम से जानी जाती थी। कंपनी की पुनर्गठन योजना के अनुसार अब ऑयल एंड गैस कारोबार को अलग कॉर्पोरेट पहचान के साथ संचालित किया जाएगा, जिससे इस व्यवसाय के संचालन और विस्तार पर स्वतंत्र रूप से ध्यान केंद्रित किया जा सकेगा।

    कंपनी ने शेयर बाजार को दी गई जानकारी में बताया कि यह मंजूरी एक मई 2026 से प्रभावी डीमर्जर योजना के अनुरूप प्रदान की गई है। इसके तहत वेदांता लिमिटेड से ऑयल एंड गैस कारोबार का हस्तांतरण नई इकाई को किया जाएगा। इस कदम का उद्देश्य विभिन्न व्यवसायों को अलग-अलग संस्थाओं के रूप में विकसित करना और प्रत्येक क्षेत्र को स्वतंत्र रणनीतिक दिशा प्रदान करना है।

    मंजूरी के साथ कुछ महत्वपूर्ण शर्तें भी निर्धारित की गई हैं। नई इकाई को तेल एवं गैस परियोजनाओं से जुड़े सभी मौजूदा अनुबंधों के तहत लंबित दायित्वों का निर्वहन करना होगा। इसके अलावा संबंधित परियोजनाओं के लिए आवश्यक नई बैंक गारंटी जमा करनी होगी तथा यह सुनिश्चित करना होगा कि सरकार के प्रति किसी प्रकार का वित्तीय बकाया शेष न रहे। इन शर्तों का पालन डीमर्जर प्रक्रिया को अंतिम रूप देने के लिए आवश्यक माना गया है।

    सरकारी दस्तावेजों में एक विशेष ब्लॉक से जुड़े कानूनी पहलुओं का भी उल्लेख किया गया है। संबंधित परियोजना से जुड़े न्यायिक निर्णयों और नियामकीय प्रावधानों को ध्यान में रखते हुए कंपनी को सभी निर्धारित नियमों का पालन करना होगा। इससे स्पष्ट है कि पुनर्गठन प्रक्रिया केवल कॉर्पोरेट निर्णय नहीं, बल्कि नियामकीय और कानूनी शर्तों के अनुरूप चरणबद्ध तरीके से आगे बढ़ाई जा रही है।

    डीमर्जर के बाद वेदांता के ऑयल एंड गैस कारोबार को स्वतंत्र पहचान मिलने की उम्मीद है। इससे इस क्षेत्र में निवेश, परिचालन निर्णय और व्यवसाय विस्तार की प्रक्रिया अधिक केंद्रित और प्रभावी हो सकती है। विशेषज्ञों का मानना है कि अलग इकाई बनने से कारोबार के प्रदर्शन का स्वतंत्र मूल्यांकन आसान होगा और निवेशकों को भी प्रत्येक व्यवसाय की वास्तविक क्षमता समझने का बेहतर अवसर मिलेगा।

    अब कंपनी को निर्धारित समयसीमा के भीतर सभी आवश्यक कानूनी औपचारिकताएं पूरी करनी होंगी। इसमें कंपनी के नाम परिवर्तन, डीमर्जर से जुड़े दस्तावेजों का पंजीकरण और अन्य नियामकीय प्रक्रियाएं शामिल हैं। इन चरणों के पूरा होने के बाद नई संरचना के तहत ऑयल एंड गैस कारोबार स्वतंत्र रूप से संचालित किया जा सकेगा।

    वेदांता की व्यापक डीमर्जर योजना का उद्देश्य समूह के विभिन्न कारोबारों को अलग-अलग इकाइयों के रूप में विकसित करना है, ताकि प्रत्येक व्यवसाय अपनी रणनीति, पूंजी प्रबंधन और विकास योजनाओं पर स्वतंत्र रूप से काम कर सके। सरकार की ओर से मिली यह मंजूरी उसी दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि मानी जा रही है। इससे न केवल पुनर्गठन प्रक्रिया को गति मिलेगी, बल्कि कंपनी के भविष्य के विस्तार और निवेश संबंधी योजनाओं को भी नई मजबूती मिलने की संभावना जताई जा रही है।

  • रिलायंस से SBI तक बाजार पूंजीकरण में भारी गिरावट, एक सप्ताह में 2.74 लाख करोड़ रुपये घटे

    रिलायंस से SBI तक बाजार पूंजीकरण में भारी गिरावट, एक सप्ताह में 2.74 लाख करोड़ रुपये घटे


    नई दिल्ली ।
    वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता और निवेशकों की सतर्कता का असर बीते कारोबारी सप्ताह भारतीय शेयर बाजार पर स्पष्ट रूप से दिखाई दिया। व्यापक बिकवाली के चलते देश की शीर्ष 10 सूचीबद्ध कंपनियों में से नौ के बाजार पूंजीकरण में बड़ी गिरावट दर्ज की गई। इस दौरान इन कंपनियों का संयुक्त मार्केटकैप लगभग 2.74 लाख करोड़ रुपये घट गया। बाजार में कमजोरी का असर बैंकिंग, आईटी, दूरसंचार, वित्तीय सेवाओं और ऊर्जा क्षेत्र की प्रमुख कंपनियों पर देखने को मिला, जबकि केवल एक कंपनी इस दबाव के बीच बढ़त दर्ज करने में सफल रही।

    20 से 24 जुलाई के कारोबारी सप्ताह के दौरान सेंसेक्स 2,091.68 अंक यानी 2.68 प्रतिशत फिसलकर 76,059.77 अंक पर बंद हुआ। वहीं निफ्टी 566.85 अंक या 2.33 प्रतिशत की गिरावट के साथ 23,767.45 अंक पर आ गया। वैश्विक बाजारों में अस्थिरता, निवेशकों की मुनाफावसूली और जोखिम से बचने की रणनीति का असर घरेलू शेयर बाजार पर भी पड़ा, जिससे बड़े शेयरों में लगातार दबाव बना रहा।

    सबसे अधिक नुकसान देश के सबसे बड़े निजी बैंक एचडीएफसी बैंक को हुआ। सप्ताह भर में कंपनी का बाजार पूंजीकरण 1.18 लाख करोड़ रुपये से अधिक घट गया। इसके बाद रिलायंस इंडस्ट्रीज को भी बड़ा झटका लगा, जिसका मार्केटकैप 65 हजार करोड़ रुपये से ज्यादा कम हो गया। भारतीय शेयर बाजार की सबसे मूल्यवान कंपनी होने के बावजूद रिलायंस अपनी शीर्ष स्थिति बनाए रखने में सफल रही।

    स्टेट बैंक ऑफ इंडिया, बजाज फाइनेंस, आईसीआईसीआई बैंक, भारती एयरटेल, टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज, लाइफ इंश्योरेंस कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया और लार्सन एंड टुब्रो जैसी कंपनियों के बाजार पूंजीकरण में भी उल्लेखनीय गिरावट दर्ज की गई। इन सभी कंपनियों के शेयरों पर बिकवाली का दबाव बना रहा, जिससे उनके कुल मूल्यांकन में कमी आई।

    इस पूरे सप्ताह के दौरान केवल हिंदुस्तान यूनिलीवर लिमिटेड ने सकारात्मक प्रदर्शन किया। कंपनी का बाजार पूंजीकरण मामूली बढ़त के साथ ऊपर गया और वह शीर्ष 10 कंपनियों में अकेली ऐसी कंपनी रही, जिसने निवेशकों को राहत दी। उपभोक्ता उत्पाद क्षेत्र की इस कंपनी में अपेक्षाकृत स्थिर निवेश के कारण उसका मूल्यांकन बढ़ने में सफलता मिली।

    हालांकि बाजार में कमजोरी के बावजूद कंपनियों की रैंकिंग में कोई बड़ा बदलाव नहीं आया। रिलायंस इंडस्ट्रीज देश की सबसे अधिक बाजार पूंजीकरण वाली सूचीबद्ध कंपनी बनी रही। इसके बाद भारती एयरटेल, एचडीएफसी बैंक, आईसीआईसीआई बैंक, स्टेट बैंक ऑफ इंडिया, टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज, बजाज फाइनेंस, एलआईसी, लार्सन एंड टुब्रो और हिंदुस्तान यूनिलीवर का स्थान रहा।

    विशेषज्ञों का मानना है कि वैश्विक आर्थिक घटनाक्रम, विदेशी निवेशकों की गतिविधियां और अंतरराष्ट्रीय बाजारों का रुख निकट भविष्य में भी भारतीय शेयर बाजार की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। यदि वैश्विक स्तर पर अनिश्चितता कम होती है और निवेशकों का भरोसा लौटता है तो बाजार में सुधार की संभावना बन सकती है। फिलहाल निवेशक आगामी आर्थिक आंकड़ों, कंपनियों के वित्तीय परिणामों और वैश्विक संकेतों पर नजर बनाए हुए हैं, क्योंकि इन्हीं के आधार पर बाजार की अगली चाल तय होगी।

  • 'कर वसूली ही नहीं, नागरिक सुविधा भी प्राथमिकता बने', आयकर विभाग को निर्मला सीतारमण का स्पष्ट संदेश

    'कर वसूली ही नहीं, नागरिक सुविधा भी प्राथमिकता बने', आयकर विभाग को निर्मला सीतारमण का स्पष्ट संदेश


    नई दिल्ली ।
    वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने आयकर विभाग को स्पष्ट संदेश देते हुए कहा कि उसकी जिम्मेदारी केवल कर संग्रह तक सीमित नहीं है, बल्कि आम नागरिकों को बिना अनावश्यक परेशानी के समय पर और प्रभावी सेवाएं उपलब्ध कराना भी उतना ही महत्वपूर्ण दायित्व है। उन्होंने कहा कि सरकारी व्यवस्था का उद्देश्य लोगों के काम को आसान बनाना होना चाहिए, ताकि उन्हें अपने वैध अधिकारों के लिए बार-बार कार्यालयों के चक्कर न लगाने पड़ें।

    मुंबई के नरीमन पॉइंट स्थित आयकर विभाग की नई 13 मंजिला इमारत ‘आयकर सिंधु’ के उद्घाटन के अवसर पर वित्त मंत्री ने प्रशासनिक कार्यप्रणाली में सुधार की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि सरकारी विभागों को नागरिकों की समस्याओं को संवेदनशीलता के साथ समझना चाहिए और ऐसी व्यवस्था विकसित करनी चाहिए, जिसमें सेवाएं समय पर और पारदर्शी तरीके से उपलब्ध हों। उनके अनुसार, प्रभावी प्रशासन वही है जो नियमों का पालन करते हुए लोगों की कठिनाइयों को कम करे।

    वित्त मंत्री ने सरकारी भूमि और संपत्तियों के संरक्षण के विषय पर भी चिंता व्यक्त की। उन्होंने बताया कि जिस भूमि पर नई इमारत का निर्माण हुआ है, वह कई दशक पहले विभाग को आवंटित की गई थी, लेकिन लंबे समय तक उपयोग नहीं होने के कारण वहां अवैध कब्जे की स्थिति उत्पन्न हो गई। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि सार्वजनिक संपत्तियों की सुरक्षा और उनका समय पर उपयोग सुनिश्चित करना उनकी महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है, ताकि राष्ट्रीय संसाधनों का बेहतर उपयोग हो सके।

    अपने संबोधन में उन्होंने भवन निर्माण से जुड़ी प्रशासनिक और मंजूरी संबंधी प्रक्रियाओं का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि यदि एक बड़े सरकारी विभाग को विभिन्न अनुमतियां प्राप्त करने में लंबा समय और कई स्तरों की जटिलताओं का सामना करना पड़ता है, तो आम नागरिकों को होने वाली परेशानियों का सहज अनुमान लगाया जा सकता है। इसलिए विभागों को प्रक्रियाओं को अधिक सरल, पारदर्शी और समयबद्ध बनाने की दिशा में लगातार प्रयास करना चाहिए।

    सीतारमण ने स्पष्ट किया कि उनका उद्देश्य नियमों में ढील देने का नहीं है, बल्कि यह सुनिश्चित करना है कि नियमों का पालन करते हुए भी लोगों के कार्य अनावश्यक रूप से लंबित न रहें। उन्होंने कहा कि किसी भी नागरिक को अपने वैध अधिकार या सरकारी सेवा प्राप्त करने के लिए अत्यधिक प्रयास करने की स्थिति नहीं आनी चाहिए। प्रशासन की कार्यशैली ऐसी होनी चाहिए, जिसमें जवाबदेही और दक्षता दोनों दिखाई दें।

    उन्होंने आयकर विभाग के अधिकारियों के आवास से जुड़ी समस्याओं का भी उल्लेख किया। वित्त मंत्री ने कहा कि मुंबई और नवी मुंबई क्षेत्र में अनेक अधिकारियों को सरकारी आवास उपलब्ध नहीं हो पाता, जिसके कारण उन्हें लंबी दूरी तय करके कार्यालय पहुंचना पड़ता है। इससे उनके कार्य और व्यक्तिगत जीवन दोनों पर प्रभाव पड़ता है। उन्होंने इस समस्या के समाधान के लिए आवश्यक सरकारी भूमि के हस्तांतरण को प्राथमिकता देने का आश्वासन दिया।

    वित्त मंत्री ने कहा कि भूमि हस्तांतरण की प्रक्रिया को गति देने के लिए केंद्र स्तर पर आवश्यक सहयोग दिया जाएगा। इसके बाद भवन निर्माण, स्वीकृतियां, निविदाएं और अन्य प्रशासनिक प्रक्रियाओं को संबंधित विभागों द्वारा समयबद्ध तरीके से पूरा किया जाना चाहिए। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि बेहतर बुनियादी ढांचे, पारदर्शी कार्यप्रणाली और नागरिक-केंद्रित सोच के साथ आयकर विभाग अधिक प्रभावी सेवाएं प्रदान कर सकेगा और प्रशासनिक व्यवस्था पर लोगों का विश्वास भी और मजबूत होगा।

  • भारतीय निर्यातकों के लिए राहत भरी खबर अमेरिका ने सेक्शन 301 के तहत भारत को कम टैरिफ श्रेणी में रखा

    भारतीय निर्यातकों के लिए राहत भरी खबर अमेरिका ने सेक्शन 301 के तहत भारत को कम टैरिफ श्रेणी में रखा


    नई दिल्ली। भारत और अमेरिका के बीच व्यापारिक संबंधों के लिए एक सकारात्मक खबर सामने आई है। केंद्र सरकार ने जानकारी दी है कि अमेरिका द्वारा सेक्शन 301 के तहत लागू किए गए अंतिम टैरिफ उपायों में भारत को अपेक्षाकृत कम शुल्क श्रेणी में रखा गया है। सरकार का कहना है कि जांच प्रक्रिया के दौरान अमेरिका के व्यापार प्रतिनिधि कार्यालय के साथ लगातार संवाद और सक्रिय भागीदारी का ही परिणाम है कि भारत को प्रस्तावित शुल्क की तुलना में राहत मिली है। इससे भारतीय निर्यातकों को कई प्रमुख क्षेत्रों में प्रतिस्पर्धात्मक लाभ मिलने की उम्मीद है।

    अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि कार्यालय ने 23 जुलाई को अमेरिकी व्यापार अधिनियम 1974 के सेक्शन 301 के तहत अंतिम उपायों की घोषणा की थी। यह कार्रवाई उन देशों और अर्थव्यवस्थाओं की नीतियों की समीक्षा के बाद की गई जिनकी जांच कथित फोर्स्ड लेबर से जुड़े आयात नियमों के संदर्भ में की गई थी। इस प्रक्रिया में भारत सहित 60 अर्थव्यवस्थाएं शामिल थीं।

    सरकार के अनुसार शुरुआती प्रस्ताव में भारत से आयातित उत्पादों पर 12.5 प्रतिशत अतिरिक्त शुल्क लगाने की बात कही गई थी लेकिन अंतिम निर्णय में इसे घटाकर 10 प्रतिशत कर दिया गया। सरकार का मानना है कि यह कमी भारत की सक्रिय कूटनीतिक और व्यापारिक पहल का परिणाम है। वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय ने बताया कि भारत ने लिखित प्रस्तुतियों व्यक्तिगत स्तर पर विचार विमर्श और सार्वजनिक सुनवाई के माध्यम से लगातार अपना पक्ष प्रभावी ढंग से रखा।

    सरकार ने यह भी स्पष्ट किया कि अमेरिका को होने वाले भारत के कुल निर्यात का बड़ा हिस्सा इस अतिरिक्त शुल्क के दायरे से बाहर रहेगा। जेनेरिक दवाएं स्मार्टफोन और कुछ अन्य निर्दिष्ट उत्पादों पर अतिरिक्त शुल्क लागू नहीं होगा। इसके अलावा स्टील एल्युमीनियम और ऑटो पार्ट्स जैसे वे उत्पाद जो पहले से सेक्शन 232 के तहत अलग व्यवस्था में आते हैं उन पर भी यह अतिरिक्त 10 प्रतिशत शुल्क लागू नहीं किया जाएगा।

    इन छूटों के कारण अमेरिका को भारत के कुल निर्यात का लगभग 45 प्रतिशत हिस्सा अतिरिक्त सेक्शन 301 शुल्क से मुक्त रहेगा। शेष लगभग 55 प्रतिशत निर्यात पर अतिरिक्त शुल्क लागू होगा लेकिन सरकार का कहना है कि अन्य कई देशों की तुलना में भारत पर कुल टैरिफ का प्रभाव अपेक्षाकृत कम रहेगा। इससे भारतीय निर्यातकों की प्रतिस्पर्धात्मक स्थिति मजबूत बनी रहने की संभावना है।

    सरकार ने यह भी दोहराया कि भारत और अमेरिका के बीच प्रस्तावित द्विपक्षीय व्यापार समझौते को जल्द अंतिम रूप देने के लिए बातचीत लगातार जारी है। विशेष रूप से टेक्सटाइल क्षेत्र से जुड़े मुद्दों पर दोनों देशों के बीच संवाद चल रहा है। सरकार का मानना है कि भविष्य में यह समझौता दोनों देशों के व्यापार और निवेश संबंधों को नई ऊंचाई देगा तथा भारतीय उद्योगों को वैश्विक बाजार में और बेहतर अवसर उपलब्ध कराएगा।

    विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका की ओर से कम टैरिफ श्रेणी में रखा जाना भारतीय निर्यात के लिए सकारात्मक संकेत है। इससे कई क्षेत्रों में लागत का दबाव कम रहेगा और भारतीय कंपनियां अमेरिकी बाजार में अपनी प्रतिस्पर्धा बनाए रखने में सक्षम होंगी। साथ ही यह निर्णय दोनों देशों के बीच बढ़ते आर्थिक सहयोग और व्यापारिक विश्वास का भी संकेत माना जा रहा है।

  • सरकारी तेल कंपनियों ने अपडेट किए ईंधन के भाव, अलग-अलग शहरों में पेट्रोल-डीजल की कीमतों में बना अंतर

    सरकारी तेल कंपनियों ने अपडेट किए ईंधन के भाव, अलग-अलग शहरों में पेट्रोल-डीजल की कीमतों में बना अंतर

    नई दिल्ली । देशभर में पेट्रोल और डीजल की नई कीमतें 26 जुलाई के लिए जारी कर दी गई हैं। सरकारी तेल विपणन कंपनियां प्रतिदिन सुबह ईंधन के दाम अपडेट करती हैं, जिसके तहत आज भी प्रमुख महानगरों समेत विभिन्न शहरों के ताजा रेट सामने आए हैं। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत, डॉलर के मुकाबले रुपये की विनिमय दर और केंद्र व राज्य सरकारों द्वारा लगाए जाने वाले करों के आधार पर ईंधन की कीमतों में समय-समय पर बदलाव देखने को मिलता है। हालांकि, अलग-अलग राज्यों में वैट और अन्य स्थानीय करों की दरें भिन्न होने के कारण प्रत्येक शहर में पेट्रोल और डीजल के दाम अलग-अलग बने रहते हैं।

    राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में आज पेट्रोल 102.12 रुपये प्रति लीटर और डीजल 95.20 रुपये प्रति लीटर पर उपलब्ध है। देश की आर्थिक राजधानी मुंबई में पेट्रोल की कीमत 111.21 रुपये प्रति लीटर जबकि डीजल 97.83 रुपये प्रति लीटर दर्ज की गई है। पूर्वी भारत के प्रमुख महानगर कोलकाता में पेट्रोल 113.51 रुपये प्रति लीटर और डीजल 99.82 रुपये प्रति लीटर बिक रहा है। वहीं दक्षिण भारत के प्रमुख शहर चेन्नई में पेट्रोल का दाम 107.76 रुपये प्रति लीटर और डीजल 99.55 रुपये प्रति लीटर निर्धारित किया गया है।

    ईंधन की कीमतों में दिखाई देने वाला यह अंतर मुख्य रूप से राज्यों के कर ढांचे के कारण होता है। केंद्र सरकार द्वारा लगाए जाने वाले उत्पाद शुल्क के अलावा प्रत्येक राज्य अपनी कर नीति के अनुसार वैट और अन्य स्थानीय शुल्क निर्धारित करता है। इसी वजह से एक ही दिन देश के अलग-अलग शहरों में पेट्रोल और डीजल की कीमतें अलग दिखाई देती हैं। परिवहन लागत और स्थानीय प्रशासनिक शुल्क भी कुछ क्षेत्रों में खुदरा कीमतों को प्रभावित करते हैं।

    तेल विपणन कंपनियां प्रतिदिन सुबह छह बजे नई कीमतें जारी करती हैं। यदि वैश्विक बाजार में कच्चे तेल के दाम बढ़ते या घटते हैं अथवा विदेशी मुद्रा विनिमय दर में उल्लेखनीय परिवर्तन होता है, तो उसका प्रभाव घरेलू ईंधन कीमतों पर भी पड़ सकता है। हालांकि कई बार अंतरराष्ट्रीय बाजार में उतार-चढ़ाव के बावजूद खुदरा कीमतों में तत्काल बदलाव नहीं होता और कंपनियां समग्र बाजार परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए निर्णय लेती हैं।

    वाहन चालकों और आम उपभोक्ताओं के लिए यात्रा या ईंधन भरवाने से पहले अपने शहर के ताजा रेट की जानकारी लेना उपयोगी माना जाता है। इसके लिए संबंधित तेल कंपनियों की आधिकारिक वेबसाइट, मोबाइल एप और एसएमएस सेवा का उपयोग किया जा सकता है। इन माध्यमों पर प्रतिदिन अपडेट किए गए रेट उपलब्ध रहते हैं, जिससे उपभोक्ताओं को अपने क्षेत्र की वास्तविक कीमत की जानकारी मिल जाती है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल के बाजार, वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों और मुद्रा विनिमय दर में होने वाले बदलाव आने वाले समय में भी ईंधन की कीमतों को प्रभावित कर सकते हैं। ऐसे में उपभोक्ताओं के लिए नियमित रूप से ताजा रेट पर नजर रखना आवश्यक है। फिलहाल 26 जुलाई के लिए जारी नई कीमतों में प्रमुख महानगरों के बीच पहले की तरह अंतर बना हुआ है और राज्यवार कर संरचना इसका प्रमुख कारण बनी हुई है।

  • 31 जुलाई से पहले ITR फाइल करते समय न भूलें ये जरूरी टैक्स छूट, सही क्लेम से बच सकते हैं हजारों रुपये

    31 जुलाई से पहले ITR फाइल करते समय न भूलें ये जरूरी टैक्स छूट, सही क्लेम से बच सकते हैं हजारों रुपये

    नई दिल्ली । आयकर रिटर्न दाखिल करने की अंतिम तिथि नजदीक आने के साथ ही लाखों करदाता अपनी टैक्स प्रक्रिया पूरी करने में जुटे हैं। हालांकि जल्दबाजी में रिटर्न भरते समय कई लोग ऐसे महत्वपूर्ण टैक्स डिडक्शन का दावा करना भूल जाते हैं, जिनसे उनकी कर देनदारी काफी कम हो सकती है। विशेष रूप से पुरानी टैक्स व्यवस्था अपनाने वाले करदाताओं के लिए उपलब्ध विभिन्न छूटों की सही जानकारी होना आवश्यक है, क्योंकि एक छोटी सी चूक भी अतिरिक्त टैक्स भुगतान का कारण बन सकती है।

    पुरानी टैक्स व्यवस्था के तहत सबसे अधिक उपयोग किए जाने वाले प्रावधानों में धारा 80C प्रमुख है। इसके अंतर्गत पीपीएफ, ईपीएफ, ईएलएसएस, टैक्स सेविंग फिक्स्ड डिपॉजिट, राष्ट्रीय बचत पत्र, सुकन्या समृद्धि योजना, जीवन बीमा प्रीमियम, बच्चों की ट्यूशन फीस और होम लोन की मूल राशि के भुगतान जैसी योग्य निवेश एवं खर्च पर अधिकतम 1.5 लाख रुपये तक की टैक्स छूट प्राप्त की जा सकती है। यदि किसी करदाता ने इन योजनाओं में निवेश किया है, तो रिटर्न दाखिल करते समय उसका सही दावा करना आवश्यक है।

    राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली यानी एनपीएस में निवेश करने वाले करदाताओं को भी अतिरिक्त लाभ मिलता है। धारा 80CCD(1B) के अंतर्गत 80C की सीमा से अलग 50 हजार रुपये तक की अतिरिक्त कटौती उपलब्ध है। कई करदाता इस अलग प्रावधान का लाभ लेना भूल जाते हैं, जबकि इससे कुल टैक्स देनदारी में उल्लेखनीय कमी आ सकती है।

    स्वास्थ्य बीमा पर चुकाया गया प्रीमियम भी टैक्स बचाने का महत्वपूर्ण माध्यम है। धारा 80D के तहत स्वयं, जीवनसाथी, बच्चों और माता-पिता के लिए खरीदे गए स्वास्थ्य बीमा पर निर्धारित सीमा तक कर छूट का दावा किया जा सकता है। वरिष्ठ नागरिकों के लिए यह सीमा अधिक निर्धारित की गई है, जिससे परिवार के स्वास्थ्य सुरक्षा खर्च पर भी कर राहत मिलती है।

    जिन लोगों ने घर खरीदने के लिए होम लोन लिया है, वे धारा 24(b) के अंतर्गत होम लोन के ब्याज पर दो लाख रुपये तक की टैक्स छूट प्राप्त कर सकते हैं। वहीं लोन की मूल राशि के भुगतान का लाभ अलग से धारा 80C के अंतर्गत लिया जा सकता है। इस प्रकार दोनों प्रावधानों का सही उपयोग कर टैक्स बचत को और प्रभावी बनाया जा सकता है।

    उच्च शिक्षा के लिए लिए गए एजुकेशन लोन पर भी कर राहत उपलब्ध है। धारा 80E के तहत शिक्षा ऋण पर चुकाए गए ब्याज की पूरी राशि पर कटौती का दावा किया जा सकता है। इसके अतिरिक्त सरकार से मान्यता प्राप्त संस्थाओं, ट्रस्टों या राहत कोष में किए गए दान पर धारा 80G के अंतर्गत निर्धारित नियमों के अनुसार 50 प्रतिशत या 100 प्रतिशत तक टैक्स छूट मिल सकती है। इसके लिए संबंधित रसीद और आवश्यक दस्तावेज सुरक्षित रखना जरूरी होता है।

    आईटीआर दाखिल करने से पहले सभी वित्तीय विवरणों का मिलान करना भी बेहद महत्वपूर्ण है। करदाताओं को फॉर्म-16, वार्षिक सूचना विवरण और फॉर्म 26एएस में दर्ज जानकारी की जांच करनी चाहिए ताकि आय और कर कटौती से संबंधित कोई अंतर न रहे। साथ ही सभी निवेश प्रमाण, बीमा प्रीमियम की रसीदें और अन्य आवश्यक दस्तावेज अपने पास सुरक्षित रखें। पुरानी और नई टैक्स व्यवस्था की तुलना कर वही विकल्प चुनें, जिससे अधिक कर लाभ मिले। बैंक खाते की जानकारी सावधानीपूर्वक भरने के बाद रिटर्न का ई-वेरिफिकेशन समय पर पूरा करना भी आवश्यक है, क्योंकि इसके बिना आयकर रिटर्न की प्रक्रिया अधूरी मानी जाती है और रिफंड में भी देरी हो सकती है।

  • बाजार की अस्थिरता से घबराने की जरूरत नहीं, लंबी अवधि के निवेशकों के लिए मौजूदा समय बेहतर अवसर: रमेश दमानी

    बाजार की अस्थिरता से घबराने की जरूरत नहीं, लंबी अवधि के निवेशकों के लिए मौजूदा समय बेहतर अवसर: रमेश दमानी

    नई दिल्ली । शेयर बाजार में जारी उतार-चढ़ाव के बीच दिग्गज निवेशक रमेश दमानी ने लंबी अवधि के निवेशकों को धैर्य बनाए रखने और बाजार की अल्पकालिक अस्थिरता से प्रभावित न होने की सलाह दी है। उनका मानना है कि वर्तमान परिस्थितियों में बाजार की दैनिक हलचल पर ध्यान देने के बजाय मजबूत कंपनियों में लंबे समय तक निवेश बनाए रखना बेहतर रणनीति साबित हो सकती है। उन्होंने कहा कि भारत की अर्थव्यवस्था की दीर्घकालिक संभावनाएं मजबूत हैं और यही निवेशकों के लिए सबसे बड़ा सकारात्मक संकेत है।

    एक कार्यक्रम के दौरान अपने विचार रखते हुए रमेश दमानी ने कहा कि शेयर बाजार स्वभाव से अस्थिर होता है और समय-समय पर इसमें तेज उतार-चढ़ाव देखने को मिलते हैं। ऐसे दौर में कई निवेशक घबराकर जल्दबाजी में फैसले लेते हैं, जिससे उन्हें नुकसान उठाना पड़ सकता है। उन्होंने कहा कि जो निवेशक अनुशासन बनाए रखते हैं और बाजार की अल्पकालिक चाल के बजाय लंबी अवधि के लक्ष्य पर ध्यान देते हैं, उनके लिए संपत्ति निर्माण की संभावनाएं अधिक मजबूत होती हैं।

    उन्होंने कहा कि निवेश के क्षेत्र में धैर्य सबसे महत्वपूर्ण गुणों में से एक है। यदि किसी निवेशक ने मजबूत आधार वाली कंपनियों का चयन किया है, तो उसे बाजार में आने वाली अस्थायी गिरावट से घबराने की आवश्यकता नहीं है। उनके अनुसार, समय के साथ गुणवत्तापूर्ण कंपनियां बेहतर प्रदर्शन करती हैं और निवेशकों को अच्छे प्रतिफल का अवसर देती हैं।

    रमेश दमानी ने भारत की आर्थिक स्थिति पर भी विश्वास जताया। उन्होंने कहा कि देश की युवा आबादी, बढ़ती खपत, तेज़ी से विकसित होता औद्योगिक ढांचा और सुधारों पर आधारित आर्थिक नीतियां भारत की दीर्घकालिक विकास यात्रा को मजबूत आधार प्रदान कर रही हैं। उनका मानना है कि आने वाले वर्षों में भारत वैश्विक निवेशकों के लिए आकर्षण का प्रमुख केंद्र बना रहेगा।

    उन्होंने यह भी कहा कि भारत को लगभग आठ प्रतिशत की आर्थिक विकास दर बनाए रखने के लिए लगातार विदेशी निवेश की आवश्यकता होगी। विदेशी पूंजी से उद्योगों का विस्तार, रोजगार के नए अवसर और आधुनिक तकनीकों का विकास संभव होता है। उनके अनुसार, यदि भारत अपनी विकास गति को बनाए रखना चाहता है, तो विदेशी प्रत्यक्ष निवेश की निरंतर उपलब्धता महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

    आधुनिक तकनीकों पर चर्चा करते हुए रमेश दमानी ने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस तेजी से वैश्विक अर्थव्यवस्था को प्रभावित कर रहा है। हालांकि उन्होंने यह भी माना कि ऐसे कई उद्योग और व्यवसाय हैं, जिन पर एआई का प्रभाव अपेक्षाकृत कम रहेगा और भविष्य में वही क्षेत्र निवेशकों के लिए नए अवसर लेकर आ सकते हैं। उनका कहना था कि निवेशकों को केवल चर्चित क्षेत्रों तक सीमित रहने के बजाय व्यापक दृष्टिकोण अपनाकर संभावनाओं का आकलन करना चाहिए।

    उन्होंने विदेशी निवेश के रुझानों का उल्लेख करते हुए कहा कि भारत में सेमीकंडक्टर, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और नई तकनीकों से जुड़े क्षेत्रों में निवेश लगातार बढ़ रहा है। इससे देश के तकनीकी और औद्योगिक विकास को गति मिलने की संभावना है। उन्होंने यह भी कहा कि वैश्विक निवेशकों का भरोसा भारत की आर्थिक क्षमता और भविष्य की विकास संभावनाओं को दर्शाता है।

    वैश्विक बाजारों पर टिप्पणी करते हुए रमेश दमानी ने कहा कि अमेरिकी शेयर बाजार अपने उच्च स्तर के करीब दिखाई देता है, जबकि कुछ औद्योगिक और विनिर्माण क्षेत्रों में चीन अब भी मजबूत स्थिति में है। इसके बावजूद उनका मानना है कि भारत के पास विकास की व्यापक संभावनाएं मौजूद हैं। उन्होंने निवेशकों से अपील की कि वे अल्पकालिक उतार-चढ़ाव के बजाय दीर्घकालिक दृष्टिकोण अपनाएं, क्योंकि अनुशासित निवेश और धैर्य ही समय के साथ बेहतर संपत्ति निर्माण का सबसे प्रभावी माध्यम साबित होता है।

  • होर्मुज के बाद लाल सागर में भी बढ़ा तनाव….. फिर भी Crude Oil की कीमतों में बड़ी गिरावट

    होर्मुज के बाद लाल सागर में भी बढ़ा तनाव….. फिर भी Crude Oil की कीमतों में बड़ी गिरावट


    नई दिल्ली।
    ग्लोबल ऑयल सप्लाई के दो अहम रास्ते तनाव में फंसे हुए हैं. ईरान ने होर्मुज स्ट्रेट पर नाकेबंदी कर रखी है. जबकि हूती विद्रोहियों ने लाल सागर का टेंशन बढ़ा दिया है. तनाव के बीच भी कच्चे तेल की कीमतों में बड़ी गिरावट देखी गई है. जो तेल 101 डॉ लर प्रति बैरल के आंकड़े को फिर से छू चुका था,वो गिरकर 98.38 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच चुका है।

    26 जुलाई को कच्चे तेल की कीमत (Crude Oil Price) में बड़ी गिरावट देखने को मिली. कच्चा तेल 2.29 डॉलर तक गिर गया. इंटरनेशनल मार्केट में ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमत 2.29 फीसदी की गिरावट के साथ 98.38 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया. इसी तरह से WTI 1.87 फीसदी फिसलकर 90.47 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया।

    क्यों गिरा कच्चे तेल का भाव ?
    अमेरिका-ईरान युद्ध (America-Iran War) की वजह से होर्मुज स्ट्रेट का रास्ता बंद है. इस रास्ते से दुनिया के 20 फीसदी तेल सप्लाई का आयात-निर्यात होता है. होर्मुज पर पहरा जारी ही है, इस बीच लाल सागर में भी टेंशन बढ़ गई है.यमन के हूती विद्रोहियों और सऊदी अरब के बीच सीधा टकराव बढ़ गया है. हूतियों ने लाल सागर में सऊदी के कार्गों को निशाना बनाया, जिसके बाद से बदले की कार्रवाई करते हुए सऊदी अरब ने हूतियों के नियंत्रण वाले यमन के हुदैदाह शहर में हवाई हमले किए. दूसरी ओर अमेरिका की ओर से हूती विद्रोहियों और ईरान दोनों को चेतावनी दी जा रही है. इस टेंशन ने कच्चे तेल की सप्लाई पर खतरा पैदा कर दिया है।


    क्यों गिरा कच्चा तेल?

    दरअसल 13 दिन की बमबारी के बाद ट्रंप ने ईरान (Iran) में अचानक हमला रोक दिया है.अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अचानक बड़ा फैसला लेते हुए ईरान पर नए सैन्य हमलों को फिलहाल रोक दिया है. ओमान की ओर से मध्यस्थता किए जाने के बाद ये फैसला लिया गया है. होर्मुज स्ट्रेट को दोबारा खोलने और तनाव कम करने को लेकर बातचीत फिर से शुरू हुई है. माना जा रहा है कि दोनों देशों के बीच युद्ध खत्म करने पर सहमति बन सकती है. अगर ऐसा होता है, तो तेल सप्लाई फिर से जारी हो सकेगी और कच्चे तेल के दाम गिरेंगे. इस खबर ने तेल की कीमतों में तेजी पर फिलहाल ब्रेक लगा दिया है।


    भारत में पेट्रोल-डीजल की आज की कीमत क्या है ?

    भारत में पेट्रोल डीजल के दाम में फिलहाल कोई बदलाव नहीं हुआ है. कच्चे तेल की कीमतों में तेजी तेल कंपनियों के घाटे को बढ़ा रही है. पहले ही पेट्रोल-डीजल (Petrol and Diesel) के दाम बढ़ाए जा चुके हैं. देश के 4 महानगरों में पेट्रोल-डीजल की कीमत कुछ इस तरह से है…
    – नई दिल्ली: पेट्रोल ₹102.12, डीजल ₹95.20
    – मुंबई: पेट्रोल ₹111.21, डीजल ₹97.83
    – कोलकाता: पेट्रोल ₹113.51, डीजल ₹99.82
    – चेन्नई: पेट्रोल ₹108.01, डीजल ₹99.55