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  • फेस्टिव सीजन में नहीं होगी LPG की किल्लत …. मोदी सरकार ने Plan-B पर शुरू किया काम

    फेस्टिव सीजन में नहीं होगी LPG की किल्लत …. मोदी सरकार ने Plan-B पर शुरू किया काम


    नई दिल्ली।
    अमेरिका और ईरान (America and Iran) के बीच अभी भी सबकुछ ठीक नहीं हो पाया है, मिडिल ईस्ट टेंशन (Middle East Tensions) के बीच होर्मुज (Hormuz) ही नहीं, बाब-अल-मंदेब समेत अन्य समुद्री रूट्स में बाधाएं जारी हैं. भारत (India) के लिए ये सब इसलिए खास है, क्योंकि देश में फेस्टिव सीजन (Festive season) शुरू होने वाला है. यानी LPG की खपत बढ़ना तय है, लेकिन इस तेज त्योहारी मांग को पूरा करने में खाड़ी देशों से सप्लाई में रुकावट का बुरा असर पड़ सकता है. ऐसे में अभी से सरकार ने अपने प्लान-बी (Modi Govt Plan-B) पर काम करना शुरू कर दिया है, ताकि आम जनता को त्योहारों पर एलपीजी सिलेंडर की किल्लत से न जूझना पड़े. इसके लिए सरकारी स्वामित्व वाली रिफाइनरियां एलपीजी का घरेलू उत्पादन बढ़ाने पर फोकस कर रही हैं.


    घरेलू मांग पूरा करने के लिए तैयारी

    ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के मुताबिक, त्योहारी मौसम में एलपीजी की घरेलू मांग बढ़ने के कारण सरकारी स्वामित्व वाली रिफाइनरियां लिक्विड पेट्रोलियम गैस (LPG) का उत्पादन बढ़ाने लगी हैं. इसके पीछे वजह ये है कि वेस्ट एशिया टेंशन के बीच फारस की खाड़ी से एलपीजी आपूर्ति में व्यवधान जारी है, जिससे देश की कुकिंग गैस सुरक्षा के लिए जोखिम पैदा हो रहा है. सप्लाई को लेकर अनिश्चितता के चलते त्योहारों से पहले ही उत्पादन में इजाफा किया जाने लगा है।


    20% बढ़ा देश में LPG का उत्पादन

    त्योहारी सीजन और सप्लाई में रुकावट के बीच सरकार का प्लान काम करता नजर आने लगा है. सरकारी स्वामित्व वाली रिफाइनरियों का घरेलू एलपीजी उत्पादन बढ़कर लगभग 44,000 टन प्रतिदिन हो गया है, जो बीते अगस्त महीने के औसत उत्पादन से लगभग 20% ज्यादा है. LPG Production में घरेलू स्तर पर ये बढ़ोतरी ऐसे समय में हुई है, जबकि भारत नवंबर में दिवाली तक चलने वाली उच्च खपत की अवधि के लिए तैयार हो रहा है, जबकि सर्दियों की मांग से इसे और बढ़ावा मिल सकता है।


    सरकार लगातार उठा रही कदम

    भले ही अमेरिका और ईरान के बीच हमलों का सिलसिला थमा हुआ है, लेकिन होर्मुज स्ट्रेट को लेकर दोनों के बीच तनातनी बिल्कुल खत्म नहीं है. ऐसे में लंबे समय से बाधित तेल-गैस आवाजाही के लिए महत्वपूर्ण इस समुद्री रूट की वजह से भारत में एलपीजी शॉर्टेज (LPG Shortage In India) को पूरा करने के लिए सरकार लगातार कदम उठा रही है. इसे लेकर अब केंद्र ने राज्यों और प्रमुख उद्योगों के लिए एलपीजी आवंटन तय कर दिया है।

    बता दें कि घरेलू रिफाइनरियों ने युद्ध के दौरान के अपने हाई एलपीजी प्रोडक्शन को कम कर दिया था, क्योंकि गर्मियों के दौरान अमेरिका और अफ्रीका से वैकल्पिक आपूर्ति होने लगी थी. लेकिन त्योहारों के लिए ये काफी नहीं है, ऐसे में घरेलू एलपीजी उत्पादन में फिर से बढ़ोतरी शुरू की गई है. इसके साथ ही सरकार ने मार्च में LPG Supply Crisis के दौरान लागू न्यूनतम रिफिल वेटिंग टाइम को 45 दिनों से घटाकर अब 25 दिन कर दिया है।


    भारत दूसरा बड़ा LPG आयातक

    भारत विश्व का दूसरा सबसे बड़ा एलपीजी आयातक है और ऐतिहासिक रूप से फारस की खाड़ी से आपूर्ति पर बहुत अधिक निर्भर रहा है. इस निर्भरता के कारण देश में इस क्षेत्र में जारी संघर्ष और व्यापारिक उथल-पुथल से पैदा होने वाली रुकावटों का बड़ा असर देखने को मिलता है।

    फिलहाल देश में एलपीजी सिलेंडर की कीमतों (LPG Cylinder Price) की बात करें, तो दिल्ली में 14.2 किलोग्राम के घरेलू एलपीजी सिलेंडर की कीमत 942 रुपये, मुंबई में 941.50 रुपये और कोलकाता में 968 रुपये है. बात नोएडा की करें, तो यहां पर घरेलू एलपीजी सिलेंडर 939.50 रुपये पर मिल रहा है, जबकि हैदराबाद में इसका दाम सबसे अधिक 994 रुपये है. वहीं कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर यानी 19 किलोग्राम के LPG Cylinder का रेट देखें, तो दिल्ली 2,747.50 रुपये, जबकि मुंबई में ये 2,701 रुपये का है।

  • LPG Rule Change: 1 अक्टूबर से सब्सिडी वाले सिलेंडर के लिए बदलेगा नियम, जानें क्या करना होगा ?

    LPG Rule Change: 1 अक्टूबर से सब्सिडी वाले सिलेंडर के लिए बदलेगा नियम, जानें क्या करना होगा ?


    नई दिल्ली। LPG उपभोक्ताओं के लिए 1 अक्टूबर 2026 से नया नियम लागू होने जा रहा है। अब घरेलू LPG सिलेंडर को लागू सब्सिडी के साथ रेगुलेटेड रिटेल सेलिंग प्राइस (RSP) पर बुक करने के लिए Biometric Aadhaar Authentication (BAA) पूरा करना जरूरी होगा। जिन उपभोक्ताओं का यह ऑथेंटिकेशन पहले ही हो चुका है, उन्हें दोबारा प्रक्रिया नहीं करनी होगी। सरकार के मुताबिक, 19 सितंबर 2026 तक 27.43 करोड़ सक्रिय घरेलू LPG उपभोक्ता यानी 89.9% पहले ही BAA पूरा कर चुके हैं।

    1 अक्टूबर से क्या बदलेगा?

    पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय के मुताबिक, 1 अक्टूबर से जिन घरेलू LPG उपभोक्ताओं ने Biometric Aadhaar Authentication पूरा नहीं किया है, उनके लिए सब्सिडी के साथ RSP पर रिफिल बुकिंग BAA पूरा होने के बाद ही उपलब्ध होगी। यानी ऑथेंटिकेशन पूरा कराने के बाद ही सब्सिडी वाले रेट पर रिफिल बुक किया जा सकेगा।

    हालांकि, सरकार ने स्पष्ट किया है कि BAA नहीं कराने वाले उपभोक्ताओं को LPG मिलना पूरी तरह बंद नहीं होगा। ऐसे उपभोक्ता अपनी पसंद दर्ज कराने के बाद स्थानीय उपलब्धता के आधार पर 5 या 10 किलो के सिलेंडर बाजार कीमत पर बिना सब्सिडी के ले सकेंगे।

    जिन्हें पहले ही करा लिया, उन्हें कुछ नहीं करना

    अगर किसी LPG उपभोक्ता का Biometric Aadhaar Authentication पहले ही पूरा हो चुका है, तो उसे यह प्रक्रिया दोबारा कराने की जरूरत नहीं है। ऐसे उपभोक्ताओं को रिफिल पहले की तरह मिलता रहेगा।

    सरकार का कहना है कि BAA का उद्देश्य सब्सिडी वाले LPG सिलेंडर का लाभ वास्तविक और पात्र परिवारों तक पहुंचाना है। इससे घरेलू सब्सिडी वाले सिलेंडरों के व्यावसायिक और औद्योगिक इस्तेमाल को रोकने, डुप्लीकेट कनेक्शन की पहचान करने और अपात्र कनेक्शन हटाने में मदद मिलेगी।

    27.43 करोड़ उपभोक्ता करा चुके हैं BAA

    पेट्रोलियम मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, 19 सितंबर 2026 तक देश में 27.43 करोड़ सक्रिय घरेलू LPG उपभोक्ताओं ने Biometric Aadhaar Authentication पूरा कर लिया था। यह कुल सक्रिय घरेलू LPG उपभोक्ताओं का 89.9% है।

    उपभोक्ताओं को पहले 30 जून 2026 तक BAA पूरा करने के लिए कहा गया था। बाद में समयसीमा कई बार बढ़ाई गई। इसे 31 जुलाई, 7 अगस्त, 15 अगस्त, 23 अगस्त, 31 अगस्त, 7 सितंबर और अंत में 14 सितंबर 2026 तक बढ़ाया गया था। अब 1 अक्टूबर से सब्सिडी वाले रिफिल की बुकिंग के लिए BAA पूरा होना जरूरी होगा।

    घर बैठे भी पूरा कर सकते हैं ऑथेंटिकेशन

    LPG उपभोक्ताओं के लिए BAA पूरा करने के कई विकल्प उपलब्ध हैं। इसके लिए गैस एजेंसी के चक्कर लगाने की जरूरत नहीं है।

    डिलीवरी के समय: LPG सिलेंडर की डिलीवरी के दौरान डिलीवरी कर्मचारी OMC के मोबाइल ऐप के जरिए मौके पर ही ऑथेंटिकेशन पूरा कर सकता है।

    गैस एजेंसी पर: उपभोक्ता अपने LPG डिस्ट्रीब्यूटर के शोरूम पर जाकर भी Biometric Aadhaar Authentication करा सकते हैं।

    मोबाइल ऐप से: घर बैठे संबंधित ऑयल मार्केटिंग कंपनी के मोबाइल ऐप से भी प्रक्रिया पूरी की जा सकती है। इंडेन के लिए IndianOil ONE, भारत गैस के लिए HelloBPCL और HP गैस के लिए HP PAY ऐप का इस्तेमाल किया जा सकता है।

    सितंबर में 14.2 किलो सिलेंडर पर करीब 210 रुपए की सब्सिडी

    सरकार के मुताबिक सितंबर 2026 में 14.2 किलो के घरेलू LPG सिलेंडर पर निहित सब्सिडी करीब 210 रुपए प्रति सिलेंडर है। जून 2026 में यह राशि 721 रुपए प्रति सिलेंडर तक पहुंच गई थी। सरकार का कहना है कि घरेलू LPG को किफायती बनाए रखने के लिए सब्सिडी को वास्तविक पात्र उपभोक्ताओं तक पहुंचाना जरूरी है।

    1 अक्टूबर से पहले करा लें BAA

    जिन उपभोक्ताओं ने अब तक Biometric Aadhaar Authentication नहीं कराया है, उन्हें सरकार ने 1 अक्टूबर से पहले यह प्रक्रिया पूरी करने की सलाह दी है। यह सुविधा शहरी और ग्रामीण दोनों क्षेत्रों में उपलब्ध है। LPG सेवाओं से संबंधित सहायता के लिए उपभोक्ता 1800 2333 555 टोल-फ्री हेल्पलाइन पर संपर्क कर सकते हैं।

  • SEBI ने बदले निवेश के नियम: PMS के लिए विदेशी शेयर, IPO, REIT-InvIT समेत कई नए रास्ते खुले

    SEBI ने बदले निवेश के नियम: PMS के लिए विदेशी शेयर, IPO, REIT-InvIT समेत कई नए रास्ते खुले


    नई दिल्ली। शेयर बाजार में निवेश करने वालों के लिए सिक्योरिटीज एंड एक्सचेंज बोर्ड ऑफ इंडिया (SEBI) ने कई अहम बदलावों को मंजूरी दी है। नए नियमों के तहत पोर्टफोलियो मैनेजर्स (PMS) के निवेश का दायरा बढ़ेगा। अब विदेशी लिस्टेड शेयर, डेट सिक्योरिटीज, REIT, विदेशी म्यूचुअल फंड, ETF, इंडेक्स फंड और विदेशी सरकारी सिक्योरिटीज जैसे विकल्प भी उनके निवेश दायरे में आ सकेंगे। इसके साथ ही IPO, प्राइमरी मार्केट डेट, FPI, REIT-InvIT, विज्ञापन और सेटलमेंट से जुड़े नियमों में भी बदलाव किए गए हैं। SEBI ने 2026 के नए PMS रेगुलेशन को मंजूरी दी है।

    PMS के जरिए निवेश के विकल्प बढ़ेंगे
    SEBI ने 2020 के पुराने नियमों की जगह 2026 के नए पोर्टफोलियो मैनेजर्स रेगुलेशन को मंजूरी दी है। इसके बाद PMS के लिए निवेश के विकल्प बढ़ जाएंगे। तय नियमों और सीमाओं के तहत पोर्टफोलियो मैनेजर्स विदेशी लिस्टेड शेयरों, डेट सिक्योरिटीज, REIT, विदेशी म्यूचुअल फंड, ETF, इंडेक्स फंड और विदेशी सरकारी सिक्योरिटीज में निवेश कर सकेंगे।

    क्लाइंट की मंजूरी मिलने पर पोर्टफोलियो मैनेजर उसके कुल एसेट्स अंडर मैनेजमेंट (AUM) का 10% तक इन्वेस्टमेंट-ग्रेड अनलिस्टेड नॉन-कन्वर्टिबल डेट सिक्योरिटीज में भी लगा सकेगा।

    IPO और प्राइमरी मार्केट में भी निवेश
    नए नियमों के तहत PMS के लिए IPO और प्राइमरी मार्केट डेट में निवेश का रास्ता भी खुला है। इसका मतलब है कि PMS के जरिए अपना पैसा मैनेज कराने वाले निवेशकों के लिए नए शेयर जारी होने के समय निवेश का विकल्प उपलब्ध होगा।

    भारतीय म्यूचुअल फंड की डायरेक्ट प्लान स्कीमों में निवेश की भी अनुमति दी गई है। इनमें ETF, इंडेक्स फंड और स्पेशलाइज्ड इनवेस्टमेंट फंड शामिल हैं। इस सुविधा के लिए न्यूनतम निवेश सीमा 25 लाख रुपए रखी गई है।

    PMS के नियमों का आकार भी हुआ छोटा
    SEBI ने निवेश के विकल्प बढ़ाने के साथ नियमों को आसान बनाने पर भी जोर दिया है। नए PMS नियमों का दस्तावेज 70 पेज से घटाकर 33 पेज कर दिया गया है। SEBI के मुताबिक, इसमें शब्दों की संख्या भी करीब 42% कम की गई है।

    इसके अलावा इंडिपेंडेंट फंड मैनेजर का नया कॉन्सेप्ट भी मंजूर किया गया है। ऐसे फंड मैनेजर रजिस्टर्ड पोर्टफोलियो मैनेजर के साथ मिलकर क्लाइंट का पोर्टफोलियो संभाल सकेंगे। हालांकि, उनके काम की जिम्मेदारी और देनदारी रजिस्टर्ड पोर्टफोलियो मैनेजर की ही रहेगी।

    प्रिंसिपल ऑफिसर बनने के लिए शैक्षणिक योग्यता से जुड़ी शर्तों में भी राहत दी गई है। वहीं, 100 करोड़ रुपए से कम AUM वाले पोर्टफोलियो मैनेजर्स को डीलिंग रूम की अनिवार्य शर्त से छूट मिलेगी। हालांकि, उन्हें ऑडिट ट्रेल और मजबूत इंटरनल कंट्रोल बनाए रखना होगा।

    FPI को कमोडिटी डेरिवेटिव्स में नया विकल्प
    SEBI ने विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों यानी FPI के लिए भी निवेश का दायरा बढ़ाया है। अब FPI फिजिकली सेटल्ड नॉन-एग्रीकल्चर कमोडिटी डेरिवेटिव कॉन्ट्रैक्ट्स में हिस्सा ले सकेंगे।

    इनमें ऐसे फ्यूचर्स और ऑप्शंस शामिल होते हैं, जिनका अंतर्निहित मूल्य कृषि उत्पादों के बजाय अन्य कच्चे माल, धातुओं या ऊर्जा स्रोतों से जुड़ा होता है। हालांकि, इसके लिए समयसीमा तय की गई है। FPI को टेंडर पीरियड शुरू होने से पहले और एक्सपायरी से कम से कम तीन दिन पहले अपनी पोजिशन खत्म करनी होगी।

    5 करोड़ की संपत्ति वाले व्यक्ति भी बन सकेंगे Accredited Investor
    SEBI ने Accredited Investor की कैटेगरी का दायरा भी बढ़ाया है। अब सिक्योरिटीज मार्केट में 5 करोड़ रुपए की संपत्ति रखने वाले व्यक्तिगत निवेशक और 20 करोड़ रुपए की संपत्ति वाले बॉडी कॉरपोरेट्स भी कुछ मौजूदा आय और नेटवर्थ शर्तें पूरी करने पर इस कैटेगरी में शामिल हो सकेंगे।

    Accredited Investor ऐसे निवेशकों की श्रेणी है, जिन्हें कुछ विशेष निवेश विकल्पों में निवेश के लिए अपेक्षाकृत अधिक वित्तीय क्षमता वाला माना जाता है। SEBI ने अगस्त 2026 में इस फ्रेमवर्क की समीक्षा से जुड़ा कंसल्टेशन पेपर भी जारी किया था।

    सेलिब्रिटी के वित्तीय विज्ञापनों पर नए नियम
    वित्तीय कंपनियों और मार्केट इंटरमीडियरी के विज्ञापनों में सेलिब्रिटी की भूमिका को लेकर भी नियम बदले गए हैं। SEBI ने Common Advertisement Code को मंजूरी दी है।

    इसके तहत कोई सेलिब्रिटी किसी ब्रांड या कंपनी का प्रचार कर सकता है, लेकिन किसी खास वित्तीय प्रोडक्ट या सर्विस को सीधे एंडोर्स नहीं कर सकेगा। यानी वह किसी कंपनी के विज्ञापन में नजर आ सकता है, लेकिन निवेशकों से किसी विशेष वित्तीय प्रोडक्ट को खरीदने या उसमें पैसा लगाने की अपील नहीं कर सकेगा। इस विषय पर SEBI ने जून 2026 में कंसल्टेशन पेपर जारी किया था।

    10 लाख रुपए तक के मामलों में फास्ट-ट्रैक सेटलमेंट
    शेयर बाजार से जुड़े विवादों और नियमों के उल्लंघन के मामलों में सेटलमेंट प्रक्रिया को भी बदला गया है। SEBI ने सेटलमेंट अमाउंट तय करने का नया फॉर्मूला मंजूर किया है।

    10 लाख रुपए तक के मामलों के लिए फास्ट-ट्रैक सेटलमेंट का रास्ता होगा। गलत तरीके से कमाई गई रकम, बचाए गए नुकसान या निवेशकों को हुए नुकसान की वसूली अलग से तय होगी। नए फॉर्मूले का उद्देश्य सेटलमेंट राशि तय करते समय एक ही नुकसान या रकम की दो बार गणना की समस्या को दूर करना है।

    SEBI के आंकड़ों के मुताबिक, FY24-25 में सेटलमेंट के 703 आवेदन आए थे। FY25-26 में 439 आवेदन आए और 170 मामलों का निपटारा हुआ। इसके साथ ही 1 अप्रैल 2014 से 30 सितंबर 2015 के बीच BSE के इलिक्विड स्टॉक ऑप्शंस में गैर-असली ट्रेड से जुड़े मामलों के लिए चौथी सेटलमेंट स्कीम, 2026 को भी मंजूरी दी गई है।

    REIT और InvIT के लिए विदेशी फंड जुटाने का रास्ता
    SEBI ने REIT और पब्लिकली लिस्टेड InvIT से जुड़े नियमों में भी बदलाव किया है। अब ये मंजूर विदेशी बाजारों में डिपॉजिटरी रिसीट्स जारी कर सकेंगे। इससे इन साधनों के लिए विदेशी निवेश जुटाने का एक नया माध्यम उपलब्ध हो सकता है। REIT और InvIT से जुड़े नियमों को आसान बनाने के लिए SEBI ने अगस्त 2026 में अलग-अलग कंसल्टेशन पेपर भी जारी किए थे।

    वोटिंग नियमों में भी बदलाव किया गया है। अब 75% आउटस्टैंडिंग यूनिट्स की जगह डाले गए वोट्स का 75% होना पर्याप्त होगा। स्पॉन्सर बदलने की स्थिति में एग्जिट ऑफर के नियमों में भी बदलाव किया गया है और असहमत यूनिटहोल्डर्स के साथ व्यवहार को स्पष्ट किया गया है।

    रिसर्च एनालिस्ट और वॉल्ट मैनेजर के नियमों में बदलाव
    SEBI ने रिसर्च एनालिस्ट और रिसर्च एंटिटीज के लिए कुछ कंप्लायंस नियमों को भी आसान किया है। संस्थागत निवेशकों के साथ बातचीत की रिकॉर्डिंग रखने से जुड़ी शर्तों में राहत दी गई है।

    वहीं, वॉल्ट मैनेजर्स के लिए न्यूनतम नेटवर्थ की सीमा 50 करोड़ रुपए से बढ़ाकर 75 करोड़ रुपए कर दी गई है। नए नियमों में स्टोरेज, सुरक्षा, इंश्योरेंस, गवर्नेंस और रिस्क मैनेजमेंट से जुड़ी शर्तों को भी मजबूत किया गया है। वॉल्ट मैनेजर्स के नियमों में गोल्ड और सिल्वर ETF तथा बुलियन डेरिवेटिव्स से जुड़े बुलियन को भी शामिल किया गया है।

    इस तरह SEBI के हालिया फैसलों में एक तरफ पोर्टफोलियो मैनेजर्स और कुछ निवेशकों के लिए निवेश के विकल्प बढ़ाए गए हैं, वहीं विज्ञापन, सेटलमेंट, रिस्क मैनेजमेंट और अनुपालन से जुड़े कई नियमों में बदलाव किया गया है।

  • 1 अक्टूबर से SBI के BSBD खाताधारकों के लिए बदलेगा ATM कैश निकासी नियम, लिमिट के बाद लगेगा अतिरिक्त चार्ज

    1 अक्टूबर से SBI के BSBD खाताधारकों के लिए बदलेगा ATM कैश निकासी नियम, लिमिट के बाद लगेगा अतिरिक्त चार्ज

    नई दिल्ली ।भारतीय स्टेट बैंक यानी SBI के कुछ खाताधारकों के लिए 1 अक्टूबर 2026 से कैश निकासी के नियम बदलने जा रहे हैं। यह बदलाव खास तौर पर ब्रांच के जरिए खोले गए Basic Savings Bank Deposit यानी BSBD खातों से जुड़े ग्राहकों पर लागू होगा। नए नियम के तहत महीने में तय मुफ्त कैश निकासी की सीमा पार करने पर अतिरिक्त शुल्क देना पड़ सकता है।

    BSBD खाताधारकों को हर महीने चार बार तक कैश निकालने की सुविधा मुफ्त मिलेगी। इसका मतलब है कि ग्राहक एक महीने में अधिकतम चार कैश निकासी ट्रांजैक्शन बिना अतिरिक्त शुल्क के कर सकेंगे। यह निकासी ATM या लागू अन्य माध्यमों से की जा सकती है।

    अगर कोई ग्राहक एक महीने में चार बार से ज्यादा कैश निकालता है, तो पांचवें और उसके बाद होने वाले प्रत्येक अतिरिक्त कैश निकासी ट्रांजैक्शन पर 15 रुपये का शुल्क लगाया जाएगा। इसके साथ लागू GST भी देना होगा। ऐसे में बार-बार नकद राशि निकालने वाले ग्राहकों के लिए हर अतिरिक्त ट्रांजैक्शन पर शुल्क का असर पड़ेगा।

    ग्राहकों के लिए यह समझना जरूरी है कि नया नियम SBI के सभी खाताधारकों पर लागू नहीं होगा। इसमें विशेष रूप से BSBD खातों से जुड़े ग्राहकों को ध्यान में रखा गया है। इसलिए कैश निकालने से पहले यह देखना जरूरी होगा कि उनका खाता किस श्रेणी में आता है और उस पर कौन से नियम लागू हैं।

    डिजिटल ट्रांजैक्शन को लेकर इस बदलाव का कोई असर नहीं बताया गया है। ग्राहक पहले की तरह डिजिटल पेमेंट के माध्यम से लेन-देन कर सकेंगे और डिजिटल ट्रांजैक्शन की संख्या पर इस बदलाव के तहत कोई सीमा नहीं होगी। यानी नया शुल्क केवल तय मुफ्त कैश निकासी सीमा पार करने वाले अतिरिक्त ट्रांजैक्शन से संबंधित है।

    Aadhaar Enabled Payment System यानी AePS से होने वाली कैश निकासी को लेकर भी नियम में बदलाव किया गया है। पहले AePS के जरिए किए जाने वाले ट्रांजैक्शन को डिजिटल लेन-देन माना जाता था और इन्हें महीने में मिलने वाली चार मुफ्त कैश निकासी की सीमा में शामिल नहीं किया जाता था। अब यह छूट हटा दी गई है। बदले हुए नियमों के तहत AePS से होने वाली कैश निकासी भी संबंधित मुफ्त सीमा और अतिरिक्त शुल्क के दायरे में आएगी।

    SBI ने हाल के महीनों में बैंकिंग सेवाओं से जुड़े अन्य बदलाव भी किए हैं। अगस्त में बैंक ने 3 करोड़ रुपये या उससे अधिक की घरेलू बल्क फिक्स्ड डिपॉजिट पर ब्याज दरों में बदलाव किया था। नई ब्याज दरें 15 अगस्त से लागू की गई थीं।

    बैंक ने वित्त वर्ष 2027 की पहली तिमाही में वित्तीय प्रदर्शन में भी बढ़ोतरी दर्ज की थी। अप्रैल से जून तिमाही में SBI का नेट प्रॉफिट 21,121 करोड़ रुपये रहा, जबकि पिछले वित्त वर्ष की इसी अवधि में यह 19,160 करोड़ रुपये था। इस तरह नेट प्रॉफिट में 10.23 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई।

  • बैंक हड़ताल से पहले रविवार को खुलेंगी बैंक शाखाएं, ग्राहकों की सुविधा के लिए सरकार ने लिया अहम फैसला

    बैंक हड़ताल से पहले रविवार को खुलेंगी बैंक शाखाएं, ग्राहकों की सुविधा के लिए सरकार ने लिया अहम फैसला

    नई दिल्ली । बैंक कर्मचारियों की प्रस्तावित तीन दिवसीय देशव्यापी हड़ताल से पहले आम लोगों को बैंकिंग सेवाओं में परेशानी से बचाने के लिए रविवार को बैंक खुले रखने का फैसला किया गया है। सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक और क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक रविवार को सामान्य रूप से काम करेंगे। इसका उद्देश्य लगातार कई दिनों तक बैंकिंग सेवाएं प्रभावित होने की स्थिति को कम करना है।

    बैंक कर्मचारियों की हड़ताल 28 से 30 सितंबर तक प्रस्तावित है। इससे पहले 26 और 27 सितंबर को सप्ताहांत की छुट्टियां हैं। ऐसे में शनिवार और रविवार की छुट्टी के बाद लगातार तीन दिन हड़ताल होने पर बैंकिंग गतिविधियां कई दिनों तक प्रभावित हो सकती थीं। रविवार को बैंक खोलने का फैसला इसी संभावित व्यवधान को कम करने के लिए किया गया है।

    भारतीय रिजर्व बैंक ने बैंक शाखाओं, कार्यालयों, एटीएम से जुड़ी शाखाओं और करेंसी चेस्ट को रविवार को पूरी तरह चालू रखने की अनुमति दी है। इसके साथ ही सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों और क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों को रविवार को सामान्य कामकाज सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं।

    प्रस्तावित हड़ताल बैंक यूनियनों की कुछ मांगों को लेकर है। यूनियनों की प्रमुख मांगों में पांच दिन की बैंकिंग व्यवस्था लागू करना और परफॉर्मेंस लिंक्ड इंसेंटिव यानी पीएलआई योजना को वापस लेना शामिल है। मौजूदा व्यवस्था में बैंक कर्मचारियों को महीने में दो शनिवार की छुट्टी मिलती है। यूनियनें बाकी दो शनिवार को भी अवकाश घोषित किए जाने की मांग कर रही हैं।

    पीएलआई योजना को लेकर सरकार ने पहले ही एक कदम उठाया है। कर्मचारियों और यूनियनों की ओर से उठाई गई चिंताओं पर चर्चा के बाद सरकार ने इस योजना को फिलहाल स्थगित रखने का फैसला किया है। सरकार का कहना है कि इससे यूनियनों की दो प्रमुख मांगों में से एक पर कार्रवाई हो चुकी है।

    सरकार ने कहा है कि बैंक ग्राहकों का कल्याण और उनकी सुविधा प्राथमिकता में है। इसी को ध्यान में रखते हुए आवश्यक बैंकिंग सेवाओं को लगातार जारी रखने के लिए कदम उठाए गए हैं। सरकार और बैंक प्रबंधन ने यूनियनों से प्रस्तावित हड़ताल को वापस लेने की अपील भी की है।

    सरकार का कहना है कि यूनियनों की अधिकांश चिंताओं का काफी हद तक समाधान किया जा चुका है, जबकि शेष मांग पर अभी विचार किया जा रहा है। बैंकिंग क्षेत्र के कर्मचारियों से बातचीत के जरिए मुद्दों का समाधान करने और बैंकिंग सेवाओं को निर्बाध बनाए रखने की अपील की गई है।

    रविवार को बैंक खुले रहने से ग्राहकों को हड़ताल से पहले बैंकिंग से जुड़े जरूरी काम निपटाने का अवसर मिलेगा। नकदी से जुड़े काम, शाखा स्तर की सेवाओं और अन्य जरूरी बैंकिंग गतिविधियों के लिए रविवार को सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक और क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक सामान्य रूप से उपलब्ध रहेंगे। इसके अलावा एटीएम से जुड़ी व्यवस्थाओं और करेंसी चेस्ट को भी चालू रखने की अनुमति दी गई है।

    प्रस्तावित हड़ताल के दौरान बैंकिंग सेवाओं पर कितना असर पड़ेगा, यह कर्मचारियों की भागीदारी और संबंधित संस्थानों की व्यवस्था पर निर्भर करेगा। फिलहाल सरकार की ओर से रविवार को बैंक खुले रखने का निर्णय ग्राहकों के लिए लगातार छुट्टियों और हड़ताल से पैदा होने वाले संभावित व्यवधान को कम करने के उद्देश्य से लिया गया है।

  • कच्चे तेल और बॉन्ड यील्ड बढ़ने से शेयर बाजार में भारी गिरावट, सेंसेक्स 1,247 अंक टूटा

    कच्चे तेल और बॉन्ड यील्ड बढ़ने से शेयर बाजार में भारी गिरावट, सेंसेक्स 1,247 अंक टूटा

    नई दिल्ली ।भारतीय शेयर बाजार में गुरुवार, 24 सितंबर को भारी बिकवाली देखने को मिली। कच्चे तेल की कीमतों में मजबूती, वैश्विक बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी और जोखिम से बचने की प्रवृत्ति बढ़ने के कारण प्रमुख सूचकांक बड़ी गिरावट के साथ बंद हुए। सेंसेक्स 1,247.71 अंक यानी 1.67 प्रतिशत टूटकर 73,580.54 के स्तर पर बंद हुआ। वहीं निफ्टी 50 में 383.70 अंक यानी 1.64 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई और यह 23,063.10 के स्तर पर बंद हुआ।

    कारोबार की शुरुआत भी कमजोर रही। सेंसेक्स पिछले सत्र के 74,828.25 के बंद स्तर से 555.85 अंक यानी 0.74 प्रतिशत नीचे 74,272.40 पर खुला। दिन के कारोबार में गिरावट और बढ़ी तथा सूचकांक 1,264.33 अंक यानी 1.68 प्रतिशत फिसलकर 73,563.92 के निचले स्तर तक पहुंच गया।

    निफ्टी 50 भी पिछले बंद स्तर 23,446.80 से 225 अंक यानी 0.95 प्रतिशत नीचे 23,221.80 पर खुला। कारोबार के दौरान यह 400.65 अंक यानी 1.70 प्रतिशत की गिरावट के साथ 23,046.15 के निचले स्तर तक चला गया।

    व्यापक बाजार में भी दबाव देखने को मिला। निफ्टी मिडकैप में 2.25 प्रतिशत और निफ्टी स्मॉलकैप में 1.53 प्रतिशत की गिरावट रही। सेक्टरवार कारोबार में सभी प्रमुख सेक्टर लाल निशान में बंद हुए। निफ्टी फाइनेंशियल सर्विसेज और निफ्टी प्राइवेट बैंक में 2 प्रतिशत से अधिक की गिरावट दर्ज की गई।

    इसके अलावा निफ्टी मेटल 1.96 प्रतिशत, निफ्टी ऑटो 1.57 प्रतिशत, निफ्टी पीएसयू बैंक 1.13 प्रतिशत, निफ्टी रियल्टी 1.10 प्रतिशत और निफ्टी एफएमसीजी 1.08 प्रतिशत गिरकर बंद हुए। निफ्टी 50 में केवल सिप्ला, ओएनजीसी और एनटीपीसी के शेयरों में तेजी रही, जबकि बाकी अधिकतर शेयरों पर बिकवाली का दबाव रहा। एचडीएफसी लाइफ, बजाज फाइनेंस, एक्सिस बैंक और बजाज फिनसर्व में अपेक्षाकृत अधिक गिरावट दर्ज हुई।

    बाजार में व्यापक बिकवाली का असर निवेशकों की संपत्ति पर भी पड़ा। एक ही कारोबारी सत्र में करीब 5 लाख करोड़ रुपये की बाजार पूंजी घट गई। बीएसई पर सूचीबद्ध कंपनियों का कुल बाजार पूंजीकरण पिछले सत्र के लगभग 485 लाख करोड़ रुपये से घटकर 480.95 लाख करोड़ रुपये रह गया।

    गुरुवार के कारोबार में कच्चे तेल की कीमतों में कुछ नरमी आई, लेकिन वे 102 डॉलर प्रति बैरल के मनोवैज्ञानिक स्तर से ऊपर बनी रहीं। इसके साथ वैश्विक बॉन्ड यील्ड में तेज बढ़ोतरी हुई। इससे इक्विटी निवेशकों के बीच जोखिम को लेकर चिंता बढ़ी और जोखिम वाली परिसंपत्तियों का आकर्षण प्रभावित हुआ।

    इसी दिन नेशनल स्टॉक एक्सचेंज के शेयरों की लिस्टिंग भी हुई। शेयर 1.79 प्रतिशत की बढ़त के साथ 1,817 रुपये पर बंद हुए, जो इसके 1,785 रुपये के आईपीओ प्राइस बैंड से ऊपर था।

    बाजार में कमजोरी के बीच महंगाई और आर्थिक विकास को लेकर बनी अनिश्चितताओं ने ब्याज दरों की दिशा पर भी चिंता बढ़ाई। घरेलू स्तर पर इंश्योरेंस और बैंकिंग क्षेत्र में कमीशन स्ट्रक्चर की नियामकीय समीक्षा तथा मुनाफे पर संभावित असर को लेकर भी दबाव बना रहा।

    आने वाले समय में बाजार की दिशा पर निवेशकों की नजर वैश्विक परिस्थितियों, कच्चे तेल की कीमतों और कंपनियों की कमाई पर बनी रह सकती है।

  • दूध-दही से स्नैक्स तक ऑनलाइन बिक्री पर FSSAI की सख्ती, प्रोडक्ट दावों और धतूरे की बिक्री पर उठे सवाल

    दूध-दही से स्नैक्स तक ऑनलाइन बिक्री पर FSSAI की सख्ती, प्रोडक्ट दावों और धतूरे की बिक्री पर उठे सवाल

    नई दिल्ली ।घर बैठे किराने का सामान और खाने-पीने की चीजें मंगाने वाले ग्राहकों के लिए ऑनलाइन प्लेटफॉर्म से जुड़ी एक महत्वपूर्ण कार्रवाई सामने आई है। खाद्य सुरक्षा और मानक से जुड़े मामलों की निगरानी करने वाली संस्था FSSAI ने Amazon, Flipkart, Zepto, Swiggy Instamart और BigBasket के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई शुरू की है। इन प्लेटफॉर्म पर कुछ खाद्य उत्पादों से जुड़े दावों को नियमों के अनुरूप नहीं पाए जाने और एक मामले में धतूरे के फल तथा बीज की ऑनलाइन बिक्री से संबंधित मामला सामने आया है।

    FSSAI की कार्रवाई Happilo Premium Date Bites Zesty Orange से जुड़े मामले में पांचों प्लेटफॉर्म तक पहुंची है। जानकारी के अनुसार इस उत्पाद पर किए गए कुछ दावों को निर्धारित नियमों के अनुरूप नहीं माना गया और उन्हें भ्रामक बताया गया। यह उत्पाद Amazon, Flipkart, Zepto, Swiggy Instamart और BigBasket पर उपलब्ध था। इसी वजह से इस मामले में सभी पांच प्लेटफॉर्म के खिलाफ कार्रवाई शुरू की गई है।

    इसके अलावा Milky Mist के कुछ डेयरी उत्पादों को लेकर भी आपत्ति सामने आई है। इनमें Fresh Low Fat Cream, Farm Fresh Curd और Greek Yoghurt शामिल हैं। इन उत्पादों से जुड़े मामलों में Swiggy Instamart और BigBasket के खिलाफ कार्रवाई शुरू की गई है।

    पूरे मामले में धतूरे के फल और बीज की ऑनलाइन बिक्री से जुड़ा प्रकरण भी सामने आया है। धतूरा खाने की वस्तु नहीं है और इसके फल तथा बीज जहरीले माने जाते हैं। FSSAI ने इसे प्रतिबंधित खाद्य पदार्थों की श्रेणी में रखा है।

    FSSAI के अनुसार Amazon, Swiggy Instamart और BigBasket पर धतूरे के फल और बीज को ऑनलाइन प्रदर्शित करने तथा बेचने से जुड़े मामले सामने आए हैं। इसी आधार पर इन तीनों प्लेटफॉर्म के खिलाफ कार्रवाई शुरू की गई है।

    प्लेटफॉर्म के हिसाब से देखें तो BigBasket और Swiggy Instamart पर तीन तरह के मामले सामने आए हैं। इनमें Happilo उत्पाद से जुड़ा मामला, Milky Mist के उत्पादों से संबंधित आपत्ति और धतूरे की ऑनलाइन बिक्री का मामला शामिल है। Amazon पर Happilo उत्पाद और धतूरे से जुड़े मामलों में कार्रवाई शुरू की गई है। वहीं Flipkart और Zepto के खिलाफ फिलहाल Happilo उत्पाद से जुड़े मामले में कार्रवाई शुरू होने की जानकारी है।

    इस कार्रवाई का असर सीधे तौर पर ऑनलाइन खरीदारी करने वाले ग्राहकों के लिए भी महत्वपूर्ण है। अब ग्राहक किराने के सामान के साथ दूध, दही, पनीर, स्नैक्स और दूसरी खाद्य वस्तुएं भी ऑनलाइन मंगाते हैं। ऐसे में खरीदारी के दौरान वे अक्सर ऑनलाइन लिस्टिंग में दी गई जानकारी और उत्पाद की पैकिंग पर लिखे दावों पर निर्भर करते हैं।

    FSSAI की कार्रवाई से यह स्पष्ट है कि ऑनलाइन माध्यम से खाद्य उत्पादों की बिक्री करने वाले प्लेटफॉर्म भी खाद्य सुरक्षा से जुड़े नियमों के दायरे में आते हैं। ऑनलाइन उपलब्ध किसी उत्पाद की लिस्टिंग में दी गई जानकारी और उसके दावों को लेकर भी नियामकीय कार्रवाई हो सकती है।

    हालांकि इस मामले में अभी अंतिम जुर्माने या दंड की जानकारी सामने नहीं आई है। FSSAI ने फिलहाल दंडात्मक कार्रवाई शुरू करने की बात कही है, इसलिए प्रक्रिया अभी जारी है और अंतिम निर्णय आना बाकी है।

    साथ ही इस कार्रवाई को संबंधित उत्पादों और ऑनलाइन लिस्टिंग से जुड़े मामलों के रूप में देखा जा रहा है। उपलब्ध जानकारी के आधार पर इसे संबंधित कंपनियों के खिलाफ अंतिम दोषसिद्धि नहीं माना जा सकता, क्योंकि कार्रवाई की प्रक्रिया अभी पूरी नहीं हुई है।

  • एचडीएफसी बैंक ने डिजिटल रुपये के इस्तेमाल को बढ़ावा देने वाले पांच नए प्रयोग किए

    एचडीएफसी बैंक ने डिजिटल रुपये के इस्तेमाल को बढ़ावा देने वाले पांच नए प्रयोग किए


    मुंबई।
    एचडीएफसी बैंक ने देश में केंद्रीय बैंक डिजिटल करेंसी (सीबीडीसी) यानी डिजिटल रुपये के इस्तेमाल को बढ़ावा देने के लिए पांच नए उपयोग मामलों का प्रदर्शन किया है। बैंक का कहना है कि इन पहलों के जरिए डिजिटल रुपये को उपभोक्ताओं की रोजमर्रा की जरूरतों से लेकर कॉर्पोरेट भुगतान और कर्मचारी लाभ तक के क्षेत्रों से जोड़ने की दिशा में काम किया जा रहा है।

    पिछले सप्ताह एक उद्योग मंच पर प्रदर्शित इन पहलों में डिजिटल रुपये की उपयोगिता, प्रोग्रामेबिलिटी, नियामकीय अनुपालन और पहुंच को केंद्र में रखा गया। बैंक के मुताबिक, इन प्रयोगों का उद्देश्य डिजिटल रुपये को देश की डिजिटल अर्थव्यवस्था में अधिक व्यावहारिक और रोजमर्रा के इस्तेमाल वाली भुगतान व्यवस्था के रूप में विकसित करना है।

    क्रेडिट कार्ड रिवॉर्ड को डिजिटल रुपये में बदलने की सुविधा

    एचडीएफसी बैंक के नए प्रयोगों में क्रेडिट कार्ड रिवॉर्ड पॉइंट को डिजिटल रुपये में भुनाने की सुविधा शामिल है। इसके तहत ग्राहक अपने रिवॉर्ड पॉइंट का इस्तेमाल ब्रांड-विशेष वाउचर के बजाय डिजिटल रुपये के रूप में कर सकेंगे। इन डिजिटल रुपयों का उपयोग भोजन, ईंधन, कपड़े और इलेक्ट्रॉनिक्स जैसी विभिन्न श्रेणियों में किया जा सकेगा।

    बैंक के अनुसार, इस व्यवस्था में ग्राहक अपने रिवॉर्ड का पूरा मूल्य इस्तेमाल कर सकेंगे। इससे रिवॉर्ड कार्यक्रमों में ग्राहकों को अधिक विकल्प और पारदर्शिता मिलने की उम्मीद है।

    प्रचार अभियानों में डिजिटल रुपया वाउचर

    दूसरे प्रयोग के तहत बैंक प्रचार अभियानों में डिजिटल रुपया गिफ्ट वाउचर का इस्तेमाल करेगा। पात्र ग्राहक किसी निर्धारित प्रचार अभियान या कार्यक्रम की शर्तें पूरी करने पर डिजिटल रुपया वाउचर प्राप्त कर सकेंगे। बैंक द्वारा ट्रिगर किए जाने के बाद यह वाउचर सीधे ग्राहक के एचडीएफसी बैंक डिजिटल रुपया वॉलेट में डाला जा सकेगा।

    ग्राहक इन वाउचर का इस्तेमाल मर्चेंट श्रेणियों में उपलब्ध यूपीआई क्यूआर कोड को स्कैन कर भुगतान के लिए कर सकेंगे। बैंक का मानना है कि इससे प्रचार अभियानों को ग्राहकों की जरूरत के मुताबिक अधिक उपयोगी बनाया जा सकता है।

    कर्मचारी भत्तों और प्रतिपूर्ति में डिजिटल रुपये का इस्तेमाल

    तीसरे प्रयोग में कॉर्पोरेट क्षेत्र के लिए डिजिटल रुपये के इस्तेमाल की व्यवस्था प्रदर्शित की गई। इसके तहत संगठन एचडीएफसी बैंक के कॉर्पोरेट नेट बैंकिंग मंच के माध्यम से अपने कर्मचारियों को भोजन, ईंधन और यात्रा जैसे निर्धारित भत्ते डिजिटल रुपये में वितरित कर सकेंगे।

    प्रोग्रामेबल भुगतान की मदद से कंपनियां यह सुनिश्चित कर सकती हैं कि जारी की गई राशि का इस्तेमाल निर्धारित उद्देश्य के लिए ही किया जाए। इससे नियामकीय अनुपालन के साथ-साथ वित्तीय टीमों के लिए भुगतान के मिलान और निगरानी की प्रक्रिया को भी आसान बनाने का लक्ष्य है।

    भीम के जरिए डिजिटल रुपया वॉलेट तक पहुंच

    बैंक ने डिजिटल रुपये को भीम के साथ जोड़ने की सुविधा भी प्रदर्शित की। इसके तहत एचडीएफसी बैंक के डिजिटल रुपया वॉलेट भीम के माध्यम से उपलब्ध होंगे और ग्राहक अपने सीबीडीसी वॉलेट से यूपीआई जैसी परिचित भुगतान प्रक्रिया के जरिए लेन-देन कर सकेंगे।

    बैंक के अनुसार, इस एकीकरण से डिजिटल रुपये के उपयोग में आसानी बढ़ने के साथ व्यापारी स्वीकार्यता के दायरे को भी विस्तार मिल सकता है।

    बिना इंटरनेट के विमान में भुगतान

    पांचवीं पहल ऑफलाइन सीबीडीसी भुगतान से जुड़ी है। इसके तहत विमान में यात्रा के दौरान इंटरनेट कनेक्टिविटी उपलब्ध नहीं होने की स्थिति में भी डिजिटल रुपये के माध्यम से भुगतान किया जा सकेगा। बैंक ने इसे डिजिटल रुपये के इस्तेमाल को जमीनी कनेक्टिविटी से आगे बढ़ाने वाली पहल के रूप में प्रदर्शित किया है।

    एचडीएफसी बैंक के ब्रांच बैंकिंग, पेमेंट्स, ट्रेजरी, लायबिलिटी प्रोडक्ट्स, मार्केटिंग, वर्चुअल चैनल्स और इंफ्रास्ट्रक्चर के ग्रुप हेड आशीष पार्थसारथी ने कहा कि डिजिटल रुपया सरकारी मुद्रा में लोगों के भरोसे को प्रोग्रामेबिलिटी, पारदर्शिता और मजबूत नियंत्रण के साथ जोड़ता है। उन्होंने कहा कि बैंक द्वारा प्रदर्शित उपयोग के मामले खुदरा और थोक बाजार में उद्देश्य आधारित भुगतान, अनुपालन और ऑडिट से जुड़ी उभरती जरूरतों को पूरा करने की दिशा में हैं।

    एचडीएफसी बैंक के सीनियर ईवीपी रजनीश प्रभु ने कहा कि डिजिटल रुपये को बड़े स्तर पर अपनाने का अगला चरण उसकी रोजमर्रा की उपयोगिता से जुड़ा होगा। यूपीआई, मर्चेंट स्वीकार्यता, रिवॉर्ड, कर्मचारी लाभ और ऑफलाइन भुगतान जैसे परिचित क्षेत्रों के साथ सीबीडीसी को जोड़ने से ग्राहकों और कारोबारों के लिए इसका इस्तेमाल आसान हो सकता है।

    बैंक के अनुसार, सीबीडीसी और यूपीआई की प्रकृति अलग-अलग होने के बावजूद दोनों भुगतान व्यवस्था के व्यापक डिजिटल पारिस्थितिकी तंत्र का हिस्सा हैं। डिजिटल रुपये की प्रोग्रामेबिलिटी का इस्तेमाल कॉर्पोरेट भुगतान को निर्धारित उद्देश्यों से जोड़ने, अनुपालन को बेहतर बनाने और लेन-देन की निगरानी को आसान करने के लिए किया जा सकता है। एचडीएफसी बैंक ने कहा कि वह भारतीय रिजर्व बैंक के साथ मिलकर सीबीडीसी की संभावनाओं को व्यावहारिक और बड़े स्तर पर इस्तेमाल किए जा सकने वाले समाधानों में बदलने की दिशा में काम करने के लिए प्रतिबद्ध है।

  • मानेसर में मारुति सुजुकी ने शुरू किया ग्रीन हाइड्रोजन प्लांट, कम कार्बन उत्सर्जन वाले विनिर्माण को मिलेगा बढ़ावा

    मानेसर में मारुति सुजुकी ने शुरू किया ग्रीन हाइड्रोजन प्लांट, कम कार्बन उत्सर्जन वाले विनिर्माण को मिलेगा बढ़ावा


    नई दिल्ली ।
    मारुति सुजुकी इंडिया ने हरियाणा के मानेसर स्थित अपने विनिर्माण संयंत्र में 300 किलोवाट क्षमता वाले ग्रीन हाइड्रोजन इलेक्ट्रोलाइजर प्लांट का संचालन शुरू कर दिया है। इस परियोजना को स्वच्छ ऊर्जा के इस्तेमाल और उत्पादन प्रक्रिया से होने वाले कार्बन उत्सर्जन को कम करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल के तौर पर देखा जा रहा है।

    यह परियोजना पायलट आधार पर संचालित की जाएगी। इसके तहत नवीकरणीय ऊर्जा का इस्तेमाल करके ग्रीन हाइड्रोजन तैयार की जाएगी। तैयार हाइड्रोजन को प्राकृतिक गैस के साथ मिलाकर विनिर्माण गतिविधियों में ईंधन के रूप में इस्तेमाल किया जाएगा। इससे उत्पादन प्रक्रिया में स्वच्छ ऊर्जा की हिस्सेदारी बढ़ाने का प्रयास किया जाएगा।

    परियोजना का एक महत्वपूर्ण पहलू मानेसर संयंत्र में पहले से स्थापित सौर ऊर्जा प्रणाली का बेहतर उपयोग करना है। छुट्टियों या कम उत्पादन वाले दिनों में जब संयंत्र में उपलब्ध सौर ऊर्जा का पूरी तरह इस्तेमाल नहीं हो पाता, तब अतिरिक्त बिजली का उपयोग हाइड्रोजन उत्पादन के लिए किया जाएगा।

    इसके लिए अतिरिक्त सौर ऊर्जा से इलेक्ट्रोलिसिस प्रक्रिया के जरिए ग्रीन हाइड्रोजन तैयार की जाएगी। उत्पादन के बाद हाइड्रोजन को संग्रहित किया जाएगा और आवश्यकता के अनुसार विनिर्माण कार्यों में इसका उपयोग किया जाएगा। इस व्यवस्था से अतिरिक्त नवीकरणीय ऊर्जा को उपयोगी ईंधन में बदलने की दिशा में काम किया जाएगा।

    इस परियोजना को भविष्य में ग्रीन हाइड्रोजन तकनीक के व्यापक इस्तेमाल के लिए एक लर्निंग प्लेटफॉर्म के रूप में भी विकसित किया जा रहा है। इससे हरियाणा और गुजरात में स्थित अन्य विनिर्माण इकाइयों में इस तकनीक के इस्तेमाल की संभावनाओं को समझने और आगे बढ़ाने में मदद मिलेगी।

    यह पहल केंद्र सरकार के राष्ट्रीय ग्रीन हाइड्रोजन मिशन के अनुरूप है। इसके साथ ही यह उत्पादन गतिविधियों में नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों का इस्तेमाल बढ़ाने की व्यापक रणनीति का हिस्सा है।

    कंपनी के प्रबंध निदेशक एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी हिसाशी ताकेउची ने कहा कि कंपनी ने अपने उत्पादों के साथ-साथ विनिर्माण प्रक्रियाओं के लिए भी मल्टी-पाथवे रणनीति अपनाई है। उनके अनुसार, ग्रीन हाइड्रोजन परियोजना के अलावा सौर ऊर्जा, बायोगैस और बैटरी ऊर्जा भंडारण प्रणालियों में भी निवेश किया जा रहा है।

    उन्होंने कहा कि भारत तेजी से वैश्विक विनिर्माण केंद्र के रूप में उभर रहा है। ऐसे में भविष्य में प्रतिस्पर्धात्मकता का निर्धारण केवल लागत और गुणवत्ता से नहीं होगा, बल्कि कार्बन उत्सर्जन की तीव्रता भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

    कंपनी के अनुसार, वह कम-कार्बन और ऊर्जा दक्ष विनिर्माण के लिए आवश्यक क्षमताएं अभी से विकसित कर रही है। इसके तहत विनिर्माण परिचालनों से होने वाले कार्बन उत्सर्जन में बड़ी कमी लाने का लक्ष्य तय किया गया है।

    वित्त वर्ष 2030-31 तक विनिर्माण परिचालनों से होने वाले उत्सर्जन को मौजूदा 6.15 लाख टन से घटाकर 2.66 लाख टन तक लाने का लक्ष्य रखा गया है। ग्रीन हाइड्रोजन परियोजना इसी दिशा में उठाए गए कदमों में शामिल है।

  • कोलकाता में 2,000 बेड वाले गैर-लाभकारी अस्पताल का शिलान्यास, गौतम अदाणी बोले- बंगाल का चिकित्सा भविष्य होगा बेहतर

    कोलकाता में 2,000 बेड वाले गैर-लाभकारी अस्पताल का शिलान्यास, गौतम अदाणी बोले- बंगाल का चिकित्सा भविष्य होगा बेहतर

    नई दिल्ली ।अदाणी ग्रुप के चेयरमैन गौतम अदाणी ने गुरुवार को कोलकाता में 2,000 बेड वाले गैर-लाभकारी अस्पताल अदाणी आरोग्य मंदिर के शिलान्यास के मौके पर इसे पश्चिम बंगाल के चिकित्सा क्षेत्र के भविष्य से जुड़ी महत्वपूर्ण पहल बताया। उन्होंने कहा कि यह संस्थान आधुनिक चिकित्सा सुविधाओं के साथ टेक्नोलॉजी और डिजिटल हेल्थ के इस्तेमाल पर भी केंद्रित होगा।

    गौतम अदाणी ने अस्पताल की शुरुआत के अवसर को विशेष दिन बताते हुए कहा कि 2,000 बेड वाला यह गैर-लाभकारी संस्थान आधुनिक मेडिकल कॉलेज, उन्नत शोध और स्वास्थ्य सेवाओं की सुविधाओं से जुड़ा होगा। उनका कहना है कि टेक्नोलॉजी और डिजिटल हेल्थ को इसमें महत्वपूर्ण स्थान दिया जाएगा, जिससे बंगाल में चिकित्सा व्यवस्था को आगे बढ़ाने में मदद मिलेगी।

    उन्होंने कहा कि अदाणी आरोग्य मंदिर बंगाल के प्रति समूह की व्यापक प्रतिबद्धता का हिस्सा है। इसके तहत विश्वस्तरीय भौतिक और डिजिटल बुनियादी ढांचे के निर्माण के साथ क्षेत्र की सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करने में योगदान देने की बात कही गई है।

    शिलान्यास कार्यक्रम में गौतम अदाणी ने मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी के कार्यक्रम में शामिल होने के लिए उनका आभार भी जताया। इस दौरान उन्होंने अस्पताल की प्रस्तावित सुविधाओं और इसके सामाजिक उद्देश्य को लेकर जानकारी साझा की।

    अदाणी के अनुसार अदाणी आरोग्य मंदिर एक विश्वस्तरीय और गैर-लाभकारी चिकित्सा संस्थान होगा। इसमें कुल 2,000 बेड होंगे। इनमें से 1,000 बेड आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के लिए निर्धारित किए जाएंगे। ऐसे लोग जो राज्य और केंद्र की स्वास्थ्य बीमा योजनाओं के तहत पात्र हैं, उनके लिए इन बेड की सुविधा उपलब्ध कराने की योजना बताई गई है।

    अस्पताल के केंद्र में एक मेडिकल कॉलेज भी होगा। इसके साथ उन्नत शोध और चिकित्सा देखभाल से जुड़ी सुविधाएं विकसित की जाएंगी। गौतम अदाणी ने कहा कि इस व्यवस्था से बंगाल में कुशल स्वास्थ्यकर्मियों को तैयार करने की नींव रखी जाएगी।

    उन्होंने बताया कि अस्पताल, मेडिकल कॉलेज और रिसर्च सुविधाओं के निर्माण में 4,000 करोड़ रुपये से अधिक का निवेश किया जाएगा। उनके अनुसार इस संस्थान से राज्य के स्वास्थ्य क्षेत्र के पारिस्थितिकी तंत्र में 10,000 से अधिक रोजगार के अवसर पैदा होने की उम्मीद है।

    गौतम अदाणी ने कार्यक्रम के दौरान पश्चिम बंगाल में समूह के व्यापक निवेश की योजना भी साझा की। उन्होंने कहा कि 2035 तक बंगाल में 1 लाख करोड़ रुपये से अधिक का निवेश किया जाएगा।

    प्रस्तावित निवेश में कई अलग-अलग क्षेत्र शामिल होंगे। इनमें बंदरगाह, लॉजिस्टिक्स, बिजली उत्पादन, बिजली ट्रांसमिशन और वितरण, सड़कें, पुल और रोपवे के साथ ग्रीन सीमेंट तथा हाइपरस्केल डेटा सेंटर जैसे क्षेत्र शामिल हैं।

    अदाणी ने कहा कि स्वास्थ्य क्षेत्र की इस परियोजना के साथ राज्य में बुनियादी ढांचे और अन्य क्षेत्रों में भी निवेश की योजना आगे बढ़ाई जाएगी। 2,000 बेड वाला अदाणी आरोग्य मंदिर अस्पताल, मेडिकल कॉलेज और रिसर्च सुविधाओं के साथ विकसित किया जाएगा।

    परियोजना में आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के लिए प्रस्तावित 1,000 बेड की व्यवस्था को भी प्रमुख हिस्सा बताया गया है। इसके अलावा मेडिकल शिक्षा और उन्नत शोध के जरिए स्वास्थ्य क्षेत्र के लिए कुशल कार्यबल तैयार करने पर जोर दिया गया है।

    इस तरह शिलान्यास कार्यक्रम में अस्पताल की स्वास्थ्य सेवाओं, मेडिकल शिक्षा, शोध, डिजिटल तकनीक और रोजगार से जुड़ी योजनाओं की जानकारी सामने रखी गई। साथ ही पश्चिम बंगाल में 2035 तक 1 लाख करोड़ रुपये से अधिक निवेश की योजना भी बताई गई।