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  • भारत के UPI ने रचा वैश्विक रिकॉर्ड, हर महीने 20 अरब से अधिक ट्रांजैक्शन प्रोसेस कर बना डिजिटल भुगतान का बेंचमार्क

    भारत के UPI ने रचा वैश्विक रिकॉर्ड, हर महीने 20 अरब से अधिक ट्रांजैक्शन प्रोसेस कर बना डिजिटल भुगतान का बेंचमार्क


    नई दिल्ली ।
    भारत का यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस यानी UPI रियल-टाइम डिजिटल भुगतान के क्षेत्र में लगातार बड़े स्तर पर विस्तार कर रहा है। वर्तमान में यह डिजिटल पेमेंट नेटवर्क हर महीने 20 अरब से अधिक ट्रांजैक्शन प्रोसेस कर रहा है। इसके साथ ही भारत ने बड़े पैमाने पर डिजिटल भुगतान और वित्तीय समावेशन को एक साथ आगे बढ़ाने का उदाहरण पेश किया है।

    एक रिपोर्ट के मुताबिक, भारत का रियल-टाइम पेमेंट इकोसिस्टम डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर की प्रमुख सफलताओं में शामिल है। UPI के विस्तार ने बड़ी संख्या में लोगों को डिजिटल भुगतान व्यवस्था से जोड़ने में भूमिका निभाई है। इसके बावजूद डिजिटल लेनदेन की वृद्धि मजबूत बनी हुई है।

    रिपोर्ट में वैश्विक भुगतान उद्योग को लेकर भी अनुमान सामने रखा गया है। इसके अनुसार, वर्ष 2030 तक वैश्विक भुगतान उद्योग का राजस्व 2.6 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंच सकता है। हालांकि आने वाले वर्षों में इसकी वृद्धि दर पिछले पांच वर्षों की तुलना में कुछ धीमी रहने का अनुमान है। पिछले पांच वर्षों में यह वृद्धि करीब 7 प्रतिशत प्रतिवर्ष रही, जबकि आगे लगभग 5 प्रतिशत वार्षिक वृद्धि का अनुमान जताया गया है।

    भारत के डिजिटल भुगतान मॉडल को वित्तीय समावेशन और बड़े पैमाने पर उपयोग के बीच संतुलन बनाने वाले उदाहरण के तौर पर बताया गया है। UPI के जरिए करोड़ों लोगों को डिजिटल भुगतान व्यवस्था से जोड़े जाने के साथ लेनदेन में लगातार बढ़ोतरी दर्ज की गई है।

    डिजिटल भुगतान के साथ क्रेडिट कार्ड का इस्तेमाल भी बढ़ रहा है। खास तौर पर ऑनलाइन भुगतान के क्षेत्र में क्रेडिट कार्ड उपयोग में तेजी देखी जा रही है। इससे बैंकों, फिनटेक कंपनियों और भुगतान सेवा प्रदाताओं के लिए नई मूल्यवर्धित सेवाएं विकसित करने के अवसर बन रहे हैं।

    डिजिटल भुगतान क्षेत्र का अगला चरण आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और एजेंटिक कॉमर्स से जुड़ा हुआ बताया गया है। रिपोर्ट के अनुसार, भविष्य में एआई आधारित सिस्टम भुगतान प्रक्रिया को अधिक सहज, सुरक्षित और स्वचालित बनाने में मदद कर सकते हैं।

    एआई के बढ़ते इस्तेमाल का असर भुगतान और ट्रांजैक्शन बैंकिंग क्षेत्र पर भी पड़ रहा है। इससे कंपनियों को परिचालन लागत कम करने, उत्पादों में सुधार करने और पारंपरिक प्रक्रियाओं को स्वचालित करने में मदद मिल सकती है। ट्रेड फाइनेंस और भुगतान संचालन जैसी कागजी प्रक्रियाओं में भी तकनीक के इस्तेमाल की संभावनाएं बढ़ रही हैं।

    एजेंटिक कॉमर्स को लेकर बड़े व्यापारियों के रुख से भी इसकी बढ़ती अहमियत का संकेत मिलता है। सर्वेक्षण में शामिल 73 प्रतिशत बड़े व्यापारियों ने कहा कि बेहतर एजेंट-आधारित लेनदेन की सुविधा और समर्थन मिलने पर वे अपने भुगतान सेवा प्रदाता को बदलने पर विचार कर सकते हैं। इससे भुगतान कंपनियों के बीच प्रतिस्पर्धा में एजेंटिक कॉमर्स की भूमिका बढ़ने के संकेत मिलते हैं।

    रिपोर्ट में वैश्विक स्तर पर भुगतान संप्रभुता के बढ़ते महत्व का भी उल्लेख किया गया है। इसके अनुसार, दुनिया के 137 देशों में फिलहाल चौबीसों घंटे इंस्टेंट पेमेंट सिस्टम उपलब्ध हैं। इससे वैश्विक भुगतान व्यवस्था पहले की तुलना में अधिक विविध और व्यापक हो रही है।

    भारत का UPI इसी बदलते वैश्विक डिजिटल भुगतान परिदृश्य में बड़े पैमाने पर इस्तेमाल होने वाले रियल-टाइम भुगतान नेटवर्क के रूप में सामने आया है। हर महीने 20 अरब से अधिक ट्रांजैक्शन की प्रोसेसिंग इसके विस्तार और डिजिटल भुगतान के बढ़ते उपयोग को दर्शाती है।

  • दशहरा-दिवाली पर चीनी की कीमतें नियंत्रण में रखने की तैयारी, सरकार और उद्योग ने पर्याप्त आपूर्ति का दिया भरोसा

    दशहरा-दिवाली पर चीनी की कीमतें नियंत्रण में रखने की तैयारी, सरकार और उद्योग ने पर्याप्त आपूर्ति का दिया भरोसा


    नई दिल्ली ।दशहरा और दिवाली समेत आगामी त्योहारी सीजन में उपभोक्ताओं को उचित कीमत पर चीनी उपलब्ध कराने के लिए सरकार और चीनी उद्योग मिलकर काम कर रहे हैं। त्योहारों के दौरान चीनी की मांग बढ़ने की संभावना को देखते हुए बाजार में पर्याप्त आपूर्ति बनाए रखने और कीमतों को नियंत्रण में रखने पर जोर दिया जा रहा है।

    इंडियन शुगर एंड बायो-एनर्जी मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन के महानिदेशक दीपक बल्लानी ने कहा कि त्योहारी मौसम में उपभोक्ताओं को उचित दर पर चीनी उपलब्ध कराना प्राथमिकता है। उन्होंने कहा कि दशहरा और इसके बाद दिवाली सहित कई प्रमुख त्योहार आने वाले हैं, ऐसे में मांग में संभावित बढ़ोतरी के बावजूद चीनी की उपलब्धता और कीमतों पर नजर रखना जरूरी है।

    उन्होंने बताया कि घरेलू बाजार में फिलहाल चीनी की आपूर्ति पर्याप्त बनी हुई है। खुदरा कीमतों में भी नरमी की शुरुआत हो चुकी है और आने वाले सप्ताहों में इसमें और कमी आने की संभावना जताई गई है।

    चीनी की कीमतों में कमी का असर खुदरा बाजार में पूरी तरह दिखाई देने में कुछ समय लग सकता है। इसका कारण एक्स-मिल कीमतों और उपभोक्ताओं तक पहुंचने वाली खुदरा कीमतों के बीच रहने वाला अंतर है। मिल स्तर पर कीमत कम होने के बाद इसका लाभ आपूर्ति श्रृंखला के अलग-अलग चरणों से गुजरते हुए धीरे-धीरे खुदरा बाजार तक पहुंचता है।

    बताया गया है कि एक्स-मिल चीनी की कीमतों में करीब 25 से 30 प्रतिशत तक की कमी आ चुकी है। पूरे देश में एक्स-मिल कीमत का औसत वर्तमान में करीब 4,450 रुपये प्रति क्विंटल बताया गया है।

    एक्स-मिल कीमत वह दर होती है जिस पर चीनी मिल से निकलते समय चीनी की बिक्री की जाती है। इसके बाद परिवहन, भंडारण, थोक कारोबार और खुदरा स्तर से गुजरने के कारण अंतिम उपभोक्ता तक पहुंचने वाली कीमत अलग हो सकती है।

    त्योहारी सीजन में चीनी की खपत सामान्य दिनों की तुलना में बढ़ जाती है। मिठाइयों और अन्य खाद्य पदार्थों की मांग बढ़ने के कारण चीनी की जरूरत भी अधिक होती है। ऐसे में सरकार और उद्योग के सामने पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध रखने के साथ कीमतों को स्थिर बनाए रखने की चुनौती रहती है।

    चीनी उद्योग की ओर से कहा गया है कि मौजूदा स्थिति में घरेलू बाजार में आपूर्ति को लेकर कोई बड़ी कमी नहीं है। एक्स-मिल स्तर पर कीमतों में आई गिरावट का असर आने वाले समय में खुदरा बाजार पर भी दिखाई देने की उम्मीद है।

    बाजार में कम लागत के अनुरूप कीमतों में बदलाव होने के साथ उपभोक्ताओं को इसका लाभ मिलने की संभावना है। हालांकि, मिल स्तर से खुदरा बाजार तक कीमतों में बदलाव पहुंचने में कुछ समय लग सकता है।

    त्योहारों के दौरान मांग बढ़ने के बावजूद सरकार और उद्योग का लक्ष्य चीनी की उपलब्धता बनाए रखना और उपभोक्ताओं पर अतिरिक्त कीमत का दबाव नहीं पड़ने देना है। मौजूदा एक्स-मिल कीमतों में आई गिरावट के आधार पर आने वाले समय में खुदरा चीनी की कीमतों में भी नरमी की उम्मीद जताई गई है।

    इससे दशहरा और दिवाली के दौरान चीनी की बढ़ती मांग के बीच उपभोक्ताओं को राहत मिलने की संभावना है। सरकार और उद्योग की ओर से आपूर्ति तथा कीमतों पर लगातार नजर रखने की बात कही गई है।

  • सोने की कीमतों में बड़ी गिरावट, चांदी भी फिसली; दिल्ली समेत प्रमुख शहरों में आज इतने हुए भाव

    सोने की कीमतों में बड़ी गिरावट, चांदी भी फिसली; दिल्ली समेत प्रमुख शहरों में आज इतने हुए भाव

    नई दिल्ली । भारतीय सर्राफा बाजार में 24 सितंबर 2026, गुरुवार को सोने और चांदी की कीमतों में गिरावट देखने को मिली। दोनों प्रमुख कीमती धातुओं के भाव में कमजोरी दर्ज की गई है। सोने की कीमत में 390 रुपये प्रति 10 ग्राम की गिरावट आई, जबकि चांदी का भाव करीब 1,460 रुपये प्रति किलोग्राम तक फिसल गया।

    सोने की कीमतों में आई इस गिरावट के बाद 22 कैरेट गोल्ड का भाव अधिकांश प्रमुख शहरों में 1,39,060 रुपये प्रति 10 ग्राम से नीचे पहुंच गया है। वहीं 24 कैरेट सोने की कीमत 1,51,750 रुपये प्रति 10 ग्राम से कम हो गई है। अलग-अलग शहरों में सोने के भाव में मामूली अंतर दर्ज किया गया है।

    राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में 24 कैरेट सोने की कीमत 1,51,700 रुपये प्रति 10 ग्राम रही। वहीं 22 कैरेट सोने का भाव 1,39,058 रुपये प्रति 10 ग्राम दर्ज किया गया। दिल्ली में दोनों कैरेट के भाव में गिरावट के बाद ये कीमतें सामने आई हैं।

    मुंबई में 24 कैरेट सोने की कीमत 1,51,550 रुपये प्रति 10 ग्राम रही, जबकि 22 कैरेट गोल्ड का भाव 1,38,908 रुपये प्रति 10 ग्राम दर्ज किया गया। अहमदाबाद में 24 कैरेट सोना 1,51,600 रुपये और 22 कैरेट सोना 1,38,958 रुपये प्रति 10 ग्राम रहा।

    कोलकाता में 24 कैरेट सोने की कीमत 1,51,550 रुपये प्रति 10 ग्राम और 22 कैरेट का भाव 1,38,908 रुपये प्रति 10 ग्राम दर्ज किया गया। जयपुर में 24 कैरेट सोना 1,51,700 रुपये और 22 कैरेट सोना 1,39,058 रुपये प्रति 10 ग्राम रहा।

    बेंगलुरु में 24 कैरेट सोने का भाव 1,51,550 रुपये प्रति 10 ग्राम और 22 कैरेट की कीमत 1,38,908 रुपये प्रति 10 ग्राम दर्ज की गई। लखनऊ में 24 कैरेट सोना 1,51,700 रुपये और 22 कैरेट गोल्ड 1,39,058 रुपये प्रति 10 ग्राम रहा।

    मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में भी सोने की कीमतें प्रमुख शहरों के करीब रहीं। यहां 24 कैरेट सोने का भाव 1,51,600 रुपये प्रति 10 ग्राम और 22 कैरेट सोने की कीमत 1,38,958 रुपये प्रति 10 ग्राम दर्ज की गई।

    सोने के साथ चांदी के भाव में भी आज कमजोरी आई है। पिछले दिन की तुलना में चांदी की कीमत में करीब 1,460 रुपये प्रति किलोग्राम तक की गिरावट दर्ज की गई। इस गिरावट के बाद अधिकांश शहरों में चांदी का भाव 2,34,620 रुपये प्रति किलोग्राम के आसपास पहुंच गया है।

    24 सितंबर को सोने और चांदी दोनों की कीमतों में आई गिरावट से सर्राफा बाजार में दोनों धातुओं के भाव नीचे आए हैं। अलग-अलग शहरों में सोने की कीमतों में मामूली अंतर है, जबकि चांदी का भाव अधिकांश शहरों में करीब 2,34,620 रुपये प्रति किलोग्राम बताया गया है।

    अगर आप सोना या चांदी खरीदने की तैयारी कर रहे हैं, तो खरीदारी से पहले अपने शहर में लागू ताजा भाव की जानकारी लेना जरूरी है, क्योंकि शहर के अनुसार कीमतों में अंतर हो सकता है।

  • रुपये में मजबूती की गुंजाइश, चालू खाता घाटा घटने और एफटीए से निर्यात बढ़ने की उम्मीद

    रुपये में मजबूती की गुंजाइश, चालू खाता घाटा घटने और एफटीए से निर्यात बढ़ने की उम्मीद

    नई दिल्ली ।भारतीय रुपये में मौजूदा स्तर से स्थिरता आने के साथ आगे मजबूती की भी पर्याप्त गुंजाइश है। भारतीय रिजर्व बैंक की डिप्टी गवर्नर पूनम गुप्ता ने कहा कि आने वाले वर्षों में चालू खाते का घाटा कम होने की उम्मीद है। इसके साथ वस्तुओं के निर्यात में बढ़ती सफलता और हाल के मुक्त व्यापार समझौतों से मिलने वाले अवसर रुपये की स्थिति को बेहतर बनाने में मदद कर सकते हैं।

    31 मार्च 2025 से 16 सितंबर 2026 के बीच रुपया प्वाइंट-टू-प्वाइंट आधार पर कुल 13.1 प्रतिशत कमजोर हुआ है। ऐसे में मौजूदा स्तर से भारतीय मुद्रा के स्थिर होने और मजबूत होने की संभावना पर ध्यान दिया जा रहा है। पूनम गुप्ता ने कहा कि जब पूंजी प्रवाह से जुड़े उपाय पहली बार घोषित किए गए थे, तब बाजार विश्लेषकों ने भी रुपये के स्थिर होने और मजबूती की उम्मीद जताई थी।

    मुंबई में आयोजित एक सम्मेलन में पूनम गुप्ता ने कहा कि आरबीआई विदेशी मुद्रा बाजार में व्यवस्थित परिस्थितियां सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि केंद्रीय बैंक के पास कई दशकों के चालू खाते के घाटे या भुगतान संतुलन में दर्ज शुद्ध घाटे को पूरा करने की क्षमता है।

    भारत पारंपरिक रूप से चालू खाते में मामूली घाटा और पूंजी खाते में बड़ा अधिशेष दर्ज करता रहा है। इसी वजह से देश का कुल भुगतान संतुलन सामान्य तौर पर सकारात्मक रहा है। समय के साथ सकल घरेलू उत्पाद यानी जीडीपी के मुकाबले चालू खाते का घाटा कम हुआ है, जिससे बाहरी क्षेत्र की स्थिति को मजबूती मिली है।

    पूनम गुप्ता के मुताबिक, भारत का चालू खाता घाटा उन स्तरों से काफी नीचे रहा है, जिन्हें आमतौर पर उभरती अर्थव्यवस्थाओं के लिए उचित माना जाता है। देश के शुद्ध सेवा निर्यात और विदेशों से आने वाला धन यानी प्रेषण भारतीय अर्थव्यवस्था की महत्वपूर्ण संरचनात्मक ताकत बने हुए हैं। इन दोनों के मजबूत होने से वस्तुओं के व्यापार घाटे की भरपाई करने में मदद मिलती है और चालू खाता घाटे को जीडीपी के एक प्रतिशत से नीचे बनाए रखने में सहायता मिलती है।

    हालांकि, हाल में तेल और सोने की कीमतों में आए उतार-चढ़ाव के कारण चालू खाते का घाटा अस्थायी रूप से बढ़ा है। इसके अलावा पिछले दो वर्षों के दौरान पूंजी खाते का अधिशेष भी चालू खाते के घाटे की तुलना में कम रहा। इसके परिणामस्वरूप वित्त वर्ष 2024-25 में करीब 5 अरब डॉलर और वित्त वर्ष 2025-26 में 23.6 अरब डॉलर का नकारात्मक भुगतान संतुलन दर्ज हुआ।

    उन्होंने कहा कि भविष्य में वैकल्पिक ऊर्जा स्रोतों के बढ़ते इस्तेमाल और देश में तेल भंडार खोजने के प्रयासों से आयातित तेल पर भारत की निर्भरता कम होने की उम्मीद है। इससे जीडीपी के मुकाबले तेल की मांग में लंबे समय से जारी गिरावट की प्रवृत्ति और मजबूत हो सकती है।

    पूनम गुप्ता ने यह भी कहा कि यदि संघर्ष समाप्त होने के बाद तेल की कीमतों में स्थिरता आती है, तो बाहरी क्षेत्र को अतिरिक्त राहत मिल सकती है। इसके साथ हाल के मुक्त व्यापार समझौतों के सकारात्मक प्रभाव सामने आने और अनुकूल विनिमय दर की स्थिति बने रहने से आने वाले वर्षों में रुपये को मजबूती मिलने की संभावना बढ़ सकती है।

  • चांदी में तेजी का अनुमान, अगली दिवाली तक 4 लाख रुपये किलो तक पहुंचने की संभावना

    चांदी में तेजी का अनुमान, अगली दिवाली तक 4 लाख रुपये किलो तक पहुंचने की संभावना

    नई दिल्ली ।चांदी की कीमतों को लेकर आने वाले समय के लिए एक बड़ा अनुमान सामने आया है। एक रिपोर्ट के मुताबिक, औद्योगिक मांग में लगातार बढ़ोतरी और खदानों से सीमित आपूर्ति के कारण वैश्विक बाजार में चांदी की कीमतों में आगे भी तेजी देखने को मिल सकती है। अनुमान के अनुसार अगले छह महीनों में अंतरराष्ट्रीय बाजार में चांदी की कीमत 85 से 90 डॉलर प्रति औंस तक पहुंच सकती है, जबकि दिवाली 2027 तक यह 120 डॉलर प्रति औंस के स्तर तक जाने की संभावना जताई गई है।

    सितंबर 2026 में घरेलू बाजार में चांदी का बेंचमार्क भाव करीब 2.34 लाख रुपये प्रति किलोग्राम बताया गया है। रिपोर्ट में अनुमान लगाया गया है कि रुपये-डॉलर की विनिमय दर, आयात शुल्क और प्रीमियम जैसे कारकों को ध्यान में रखते हुए घरेलू बाजार में चांदी की कीमत दिवाली 2027 तक करीब 4 लाख रुपये प्रति किलोग्राम के स्तर तक पहुंच सकती है। यह मौजूदा स्तर की तुलना में लगभग 71 फीसदी तक की संभावित बढ़ोतरी का संकेत देता है। हालांकि यह एक अनुमान है और वास्तविक कीमत बाजार की परिस्थितियों के अनुसार बदल सकती है।

    चांदी में संभावित तेजी के पीछे सबसे प्रमुख कारण औद्योगिक मांग को माना गया है। चांदी का इस्तेमाल इलेक्ट्रॉनिक्स, ऊर्जा, तकनीकी उपकरणों और कई औद्योगिक उत्पादों में होता है। तकनीकी क्षेत्र के विस्तार के साथ इसकी मांग बढ़ने की संभावना जताई जा रही है। दूसरी ओर, खदानों से चांदी की आपूर्ति उसी गति से बढ़ाना आसान नहीं है।

    वैश्विक बाजार में 2026 के दौरान चांदी की मांग और आपूर्ति के बीच करीब 4.63 करोड़ औंस का अंतर रहने का अनुमान लगाया गया है। यह लगातार छठा वर्ष हो सकता है जब चांदी की वैश्विक आपूर्ति मांग से कम रहेगी। मांग और आपूर्ति के इस अंतर को कीमतों पर दबाव बढ़ाने वाले प्रमुख कारकों में शामिल किया जा रहा है।

    चांदी के उत्पादन की संरचना भी इसकी आपूर्ति को प्रभावित करती है। अनुमान के अनुसार 2026 में वैश्विक चांदी उत्पादन करीब 84.41 करोड़ औंस रह सकता है। खास बात यह है कि कुल चांदी उत्पादन का केवल लगभग एक चौथाई हिस्सा प्राथमिक चांदी की खदानों से आता है। चांदी की बड़ी मात्रा तांबा, जस्ता और सीसा जैसी दूसरी धातुओं के खनन के दौरान उप-उत्पाद के रूप में प्राप्त होती है।

    इस वजह से चांदी की कीमत बढ़ने के बावजूद इसका उत्पादन उसी अनुपात में बढ़ाना चुनौतीपूर्ण रहता है। यदि औद्योगिक मांग आगे भी मजबूत बनी रहती है और खनन से मिलने वाली आपूर्ति सीमित रहती है, तो बाजार में मांग और उपलब्धता के बीच अंतर बढ़ सकता है।

    रिपोर्ट में अगले छह महीनों के लिए अंतरराष्ट्रीय चांदी की कीमत 85 से 90 डॉलर प्रति औंस और दिवाली 2027 तक 120 डॉलर प्रति औंस का अनुमान दिया गया है। घरेलू बाजार के लिए करीब 4 लाख रुपये प्रति किलोग्राम का संभावित स्तर बताया गया है। हालांकि चांदी की कीमतों पर वैश्विक बाजार, मुद्रा विनिमय दर, आयात शुल्क, औद्योगिक मांग, निवेश मांग और उपलब्ध आपूर्ति जैसे कई कारकों का असर पड़ता है। इसलिए ये आंकड़े बाजार का अनुमान हैं, निश्चित कीमत नहीं।

  • खाद्य तेल होगा सस्ता…! केन्द्र ने घटाया मूल सीमा शुल्क…. नई दरें आज से लागू

    खाद्य तेल होगा सस्ता…! केन्द्र ने घटाया मूल सीमा शुल्क…. नई दरें आज से लागू


    नई दिल्ली।
    केंद्र सरकार (Central Government) ने खाद्य तेलों (Edible Oil) पर मूल सीमा शुल्क घटाया है। कच्चे सोयाबीन (Raw Soybeans) और पाम तेल पर शुल्क 10 से 5 फीसदी, जबकि रिफाइंड पर 32.5 से 27.5 फीसदी हुआ। कच्चे सूरजमुखी तेल पर शुल्क 10 फीसदी से शून्य, और रिफाइंड पर 32.5 से 22.5 फीसदी किया गया। ये बदलाव आज यानी 24 सितंबर से प्रभावी हो गए हैं।

    केंद्र सरकार की अधिसूचना के मुताबिक सोयाबीन, पाम और सूरजमुखी तेल सहित विभिन्न खाद्य तेलों पर मूल सीमा शुल्क (BCD) में कटौती की गई है। सरकार का लक्ष्य खाद्य तेलों की कीमतों को कम करके उपभोक्ताओं को राहत देना है। इससे समग्र मुद्रास्फीति को नियंत्रित करने में भी मदद मिलेगी।

    अधिसूचना के अनुसार, कच्चे सोयाबीन तेल और कच्चे पाम तेल पर BCD 10 फीसदी से घटाकर 5 फीसदी कर दिया गया है। रिफाइंड सोयाबीन तेल और रिफाइंड पाम तेल पर शुल्क 32.5 फीसदी से घटाकर 27.5 फीसदी किया गया है। कच्चे सूरजमुखी तेल पर BCD 10 फीसदी से घटाकर शून्य कर दिया गया है। वहीं, रिफाइंड सूरजमुखी तेल पर शुल्क 32.5 फीसदी से घटाकर 22.5 फीसदी किया गया है।


    क्या है सरकार का उद्देश्य?

    उपभोक्ता मामले, खाद्य और सार्वजनिक वितरण मंत्रालय ने बताया कि आयात शुल्क में कमी से खाद्य तेलों की लैंडेड लागत और खुदरा कीमतें घटेंगी। इससे उपभोक्ताओं को राहत मिलेगी और कुल मुद्रास्फीति कम होगी। यह कदम घरेलू रिफाइनिंग को भी बढ़ावा देगा। साथ ही, किसानों के लिए उचित मुआवजा बनाए रखने में मदद करेगा। 2025 में भी केंद्र ने कच्चे खाद्य तेलों, जैसे सूरजमुखी, सोयाबीन और पाम तेल पर BCD 20 फीसदी से घटाकर 10 फीसदी किया था। उस समय कच्चे और रिफाइंड खाद्य तेलों के बीच आयात शुल्क अंतर 8.75 फीसदी से 19.25 फीसदी था।


    क्या महंगाई पर पड़ेगा असर?

    वित्त मंत्रालय की अगस्त 2026 की मासिक आर्थिक रिपोर्ट के अनुसार, भारत की खाद्य मुद्रास्फीति में बदलाव आया है। प्रोटीन युक्त वस्तुएं, प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थ और खाद्य तेल मूल्य दबाव के प्रमुख कारण बने हैं। जुलाई 2026 में उपभोक्ता खाद्य मूल्य सूचकांक (CFPI) आधारित मुद्रास्फीति 5.52 फीसदी तक बढ़ गई थी, जो जून के 5.32 फीसदी से अधिक थी। वैश्विक वनस्पति तेल की बढ़ती कीमतें भारत के लिए लगातार मुद्रास्फीति दबाव का स्रोत हैं। देश कच्चे पाम, सोयाबीन और सूरजमुखी तेल के आयात पर निर्भर है। रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि वैश्विक वनस्पति तेल आपूर्ति में कमी का एक कारण पाम, सोयाबीन और रेपसीड तेलों का बायोफ्यूल उत्पादन की ओर मोड़ना है। एल नीनो की स्थिति फसल उपज और खाद्य कीमतों के लिए जोखिम बढ़ाती है।

  • 24 सितंबर को शेयर बाजार में बड़ा हलचल वाला दिन NSE की लिस्टिंग पर रहेगी निवेशकों की नजर

    24 सितंबर को शेयर बाजार में बड़ा हलचल वाला दिन NSE की लिस्टिंग पर रहेगी निवेशकों की नजर


    नई दिल्ली । 24 सितंबर 2026 को भारतीय शेयर बाजार के लिए कारोबारी लिहाज से महत्वपूर्ण दिन रहने वाला है। इस दिन बाजार में सामान्य कारोबार के साथ नेशनल स्टॉक एक्सचेंज यानी NSE के शेयरों की लिस्टिंग भी होने जा रही है। NSE का आईपीओ निवेशकों के बीच काफी चर्चा में रहा और अब इसकी लिस्टिंग पर बाजार की नजर बनी हुई है। आईपीओ को कुल 5.71 गुना सब्सक्रिप्शन मिला था जबकि योग्य संस्थागत निवेशकों के हिस्से को 12.68 गुना सब्सक्रिप्शन मिला।

    NSE के शेयर 24 सितंबर को BSE पर कारोबार के लिए उपलब्ध होंगे। इसके अलावा NSE के शेयर Metropolitan Stock Exchange of India पर भी कारोबार के लिए उपलब्ध होने की जानकारी सामने आई है। NSE की लिस्टिंग ऐसे समय हो रही है जब भारतीय शेयर बाजार हाल के सत्रों में उतार चढ़ाव के दौर से गुजर रहा है।

    बुधवार 23 सितंबर के कारोबार के दौरान भी बाजार की गतिविधियों पर निवेशकों की नजर रही। इससे एक दिन पहले 22 सितंबर को Sensex करीब 0.44 प्रतिशत गिरकर 74529.08 के स्तर पर बंद हुआ था। इस दौरान Reliance Industries समेत कुछ बड़े शेयरों में कमजोरी देखने को मिली।

    वहीं 21 सितंबर को भारतीय बाजार में हाल की लगातार गिरावट के बाद खरीदारी देखने को मिली थी। उस दिन Nifty 50 करीब 0.29 प्रतिशत बढ़कर 23414.30 पर जबकि Sensex 0.76 प्रतिशत की बढ़त के साथ 74858.99 पर बंद हुआ था। बाजार में इस दौरान कच्चे तेल की कीमतों और वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों को लेकर भी निवेशकों की नजर बनी रही।

    24 सितंबर के कारोबार में NSE की लिस्टिंग सबसे ज्यादा चर्चा में रहने वाले घटनाक्रमों में शामिल हो सकती है। NSE के आईपीओ का इश्यू साइज करीब 22568.94 करोड़ रुपए था और यह पूरी तरह ऑफर फॉर सेल यानी OFS था। इसका मतलब है कि आईपीओ के जरिए कंपनी के मौजूदा शेयरधारकों ने अपने शेयर बिक्री के लिए पेश किए थे।

    लिस्टिंग से पहले ग्रे मार्केट में NSE के शेयरों को लेकर प्रीमियम की चर्चा भी रही है। हालांकि ग्रे मार्केट के संकेत आधिकारिक लिस्टिंग कीमत या शेयर के भविष्य के प्रदर्शन की गारंटी नहीं होते। इसलिए निवेशकों के लिए वास्तविक बाजार भाव और कारोबार शुरू होने के बाद सामने आने वाली स्थिति ज्यादा महत्वपूर्ण होगी।

    इसके अलावा भारतीय बाजार की दिशा तय करने में वैश्विक बाजारों की चाल कच्चे तेल की कीमतें विदेशी निवेशकों की गतिविधियां बॉन्ड यील्ड और प्रमुख कंपनियों के शेयरों में खरीदारी या बिकवाली जैसे कारक भी अहम रहेंगे। हाल के सत्रों में कच्चे तेल की कीमतों में बदलाव और वैश्विक स्तर पर आर्थिक अनिश्चितता बाजार के लिए महत्वपूर्ण संकेत बने हुए हैं।

    ऐसे में 24 सितंबर का कारोबारी सत्र निवेशकों के लिए कई कारणों से महत्वपूर्ण रहेगा। एक तरफ Sensex और Nifty के रुख पर नजर होगी तो दूसरी तरफ NSE के शेयर बाजार में अपनी पहली कीमत पर कारोबार शुरू करेंगे। निवेशकों को किसी भी शेयर में निर्णय लेने से पहले कंपनी की वित्तीय स्थिति बाजार की परिस्थितियों और अपने जोखिम स्तर को ध्यान में रखना चाहिए। बाजार में तेजी या गिरावट की कोई भी संभावना निश्चित नहीं मानी जा सकती।

  • शेयर बाजार में लौटी तेजी, सेंसेक्स 299 अंक चढ़ा और निफ्टी 0.50 प्रतिशत बढ़कर बंद हुआ

    शेयर बाजार में लौटी तेजी, सेंसेक्स 299 अंक चढ़ा और निफ्टी 0.50 प्रतिशत बढ़कर बंद हुआ


    नई दिल्ली । भारतीय शेयर बाजार ने पिछले कारोबारी सत्र की गिरावट से उबरते हुए बुधवार को बढ़त के साथ कारोबार समाप्त किया। वैश्विक स्तर पर अमेरिकी-ईरान वार्ता की उम्मीदों के बीच कच्चे तेल की कीमतों के करीब 100 डॉलर प्रति बैरल के आसपास स्थिर रहने से बाजार धारणा को कुछ सहारा मिला। इसके साथ ही घरेलू आर्थिक गतिविधियों में मजबूती के संकेतों ने भी निवेशकों के रुख को सकारात्मक बनाए रखा।

    कारोबार के अंत में सेंसेक्स 299.17 अंक यानी 0.40 प्रतिशत की बढ़त के साथ 74,828.25 के स्तर पर बंद हुआ। इसी तरह निफ्टी50 में 117.80 अंक यानी 0.50 प्रतिशत की तेजी दर्ज की गई और यह 23,446.80 के स्तर पर पहुंच गया। इस तरह दोनों प्रमुख सूचकांकों ने पिछले सत्र की कमजोरी के बाद अच्छी वापसी की।

    व्यापक बाजार में भी खरीदारी का माहौल देखने को मिला। निफ्टी मिडकैप इंडेक्स में 0.70 प्रतिशत की बढ़त रही, जबकि निफ्टी स्मॉलकैप 0.89 प्रतिशत चढ़कर बंद हुआ। इससे संकेत मिला कि तेजी का असर केवल बड़ी कंपनियों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में भी निवेशकों की सक्रियता बनी रही।

    सेक्टरवार प्रदर्शन की बात करें तो निफ्टी मेटल इंडेक्स 2.4 प्रतिशत की तेजी के साथ सबसे मजबूत प्रदर्शन करने वाले क्षेत्रों में रहा। इसके अलावा एफएमसीजी, पीएसयू बैंक, रियल्टी और सीमेंट से जुड़े शेयरों में भी एक प्रतिशत से अधिक की बढ़त दर्ज की गई। बैंकिंग और मेटल शेयरों में खरीदारी ने बाजार को मजबूती देने में अहम भूमिका निभाई।

    दूसरी ओर, आईटी और मीडिया क्षेत्र दबाव में रहे। निफ्टी आईटी इंडेक्स में 0.87 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई, जबकि निफ्टी मीडिया 0.50 प्रतिशत कमजोर होकर बंद हुआ। आईटी शेयरों में सुस्ती के कारण बाजार की कुल बढ़त ऊपरी स्तरों पर कुछ सीमित रही।

    निफ्टी50 के प्रमुख तेजी वाले शेयरों में बजाज फाइनेंस, हिंडाल्को, टाटा स्टील, अपोलो हॉस्पिटल्स और जेएसडब्ल्यू स्टील शामिल रहे। इनके अलावा ग्रासिम, नेस्ले इंडिया, आईटीसी, एलएंडटी, पावर ग्रिड और अदाणी पोर्ट्स में भी खरीदारी देखने को मिली। वहीं एचसीएल टेक, टाइटन, इंफोसिस, कोल इंडिया, टीसीएस, विप्रो, एनटीपीसी, बीईएल और ट्रेंट जैसे शेयरों में कमजोरी रही।

    बाजार की चाल पर नजर डालें तो कारोबारी सत्र के दौरान कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव और वैश्विक भू-राजनीतिक घटनाक्रमों का असर बना रहा। मजबूत अमेरिकी डॉलर के बीच भारतीय रुपये पर भी दबाव देखने को मिला। हालांकि, सितंबर के फ्लैश पीएमआई के उम्मीद से बेहतर आंकड़ों ने घरेलू आर्थिक गतिविधियों को लेकर सकारात्मक संकेत दिए।

    महंगाई का दबाव बढ़े बिना आर्थिक गतिविधियों की रफ्तार मजबूत रहने की उम्मीद ने निवेशकों के भरोसे को सहारा दिया। व्यापक बाजार में खरीदारी और एशियाई बाजारों की मजबूती के बीच घरेलू शेयरों में भी सकारात्मक रुख बना रहा। हालांकि, आईटी क्षेत्र की कमजोरी के कारण प्रमुख सूचकांकों की बढ़त दिन के ऊपरी स्तरों तक पूरी तरह कायम नहीं रह सकी।

  • NSE IPO में 20 निवेश बैंकरों की बड़ी कमाई, फीस और कमीशन से मिले 186 करोड़ रुपये

    NSE IPO में 20 निवेश बैंकरों की बड़ी कमाई, फीस और कमीशन से मिले 186 करोड़ रुपये

    नई दिल्ली । नेशनल स्टॉक एक्सचेंज यानी NSE के बहुप्रतीक्षित आईपीओ को पूरा कराने में शामिल 20 निवेश बैंकरों ने फीस और कमीशन के रूप में कुल 186.20 करोड़ रुपये कमाए हैं। एक्सचेंज से जुड़ी हालिया फाइलिंग में आईपीओ की प्रक्रिया पर हुए खर्च और अलग-अलग मदों में भुगतान की जानकारी सामने आई है।

    NSE का 22,561.5 करोड़ रुपये का ऑफर फॉर सेल यानी OFS 17 सितंबर से 21 सितंबर 2026 तक निवेशकों के लिए खुला था। इस आईपीओ की लिस्टिंग 24 सितंबर 2026 को निर्धारित है। पूरे ऑफर को पूरा करने में कुल अनुमानित खर्च 392.12 करोड़ रुपये रहा, जो इश्यू के कुल आकार का करीब 1.74 प्रतिशत है।

    आईपीओ प्रक्रिया से जुड़े कुल खर्च में सबसे बड़ा हिस्सा निवेश बैंकरों की फीस का रहा। 20 मर्चेंट बैंकर्स को कुल 186.20 करोड़ रुपये का भुगतान किया गया। यह रकम आईपीओ से जुड़े कुल खर्च का 47.49 प्रतिशत है। वहीं, पूरे 22,561.5 करोड़ रुपये के इश्यू आकार के मुकाबले यह खर्च करीब 0.82 प्रतिशत बैठता है।

    आईपीओ की पूरी प्रक्रिया में कई तरह के खर्च शामिल होते हैं। इनमें सेबी के पास जमा किए जाने वाले ड्राफ्ट पेपर तैयार करने से लेकर निवेशकों तक आईपीओ की जानकारी पहुंचाने, आवेदन प्रक्रिया को संभालने और विभिन्न पेशेवर सेवाओं के भुगतान तक की लागत शामिल होती है।

    कुल 392.12 करोड़ रुपये के खर्च में बैंकरों की फीस निकालने के बाद 205.92 करोड़ रुपये अन्य मदों में खर्च हुए। यह कुल खर्च का लगभग 52.51 प्रतिशत हिस्सा है। इसमें नियामकीय शुल्क, स्टॉक एक्सचेंजों से जुड़े खर्च, विज्ञापन और मार्केटिंग, कानूनी सलाहकारों की फीस, रजिस्ट्रार का खर्च और स्टांप ड्यूटी जैसी लागत शामिल है।

    NSE के आईपीओ के लिए नियुक्त 20 मर्चेंट बैंकर्स में कोटक महिंद्रा कैपिटल, जेएम फाइनेंशियल, मॉर्गन स्टेनली इंडिया, सिटीग्रुप ग्लोबल मार्केट्स और एचएसबीसी सिक्योरिटीज शामिल हैं। इनके अलावा जेपी मॉर्गन इंडिया, आईसीआईसीआई सिक्योरिटीज, एचडीएफसी बैंक और एक्सिस कैपिटल भी इस सिंडिकेट का हिस्सा रहे।

    इस सूची में मोतीलाल ओसवाल इन्वेस्टमेंट एडवाइजर्स, एसबीआई कैपिटल मार्केट्स, आईआईएफएल कैपिटल सर्विसेज, नुवामा वेल्थ मैनेजमेंट, एवेन्डस कैपिटल और आईडीबीआई कैपिटल मार्केट्स भी शामिल हैं। 360 वन वैम, आनंद राठी एडवाइजर्स, डैम कैपिटल एडवाइजर्स, पंतोमथ कैपिटल और एक्विरेस कैपिटल भी आईपीओ प्रक्रिया में नियुक्त मर्चेंट बैंकर्स में शामिल रहे।

    मेनबोर्ड सेगमेंट के किसी आईपीओ के लिए 20 मर्चेंट बैंकर्स का इतना बड़ा सिंडिकेट भारतीय कॉर्पोरेट बाजार में एक उल्लेखनीय व्यवस्था रही। इतने बड़े नेटवर्क के जरिए अलग-अलग श्रेणी के संस्थागत निवेशकों तक पहुंच बनाने की कोशिश की गई।

    इसमें सॉवरेन वेल्थ फंड्स, वैश्विक पेंशन फंड्स और बड़े म्यूचुअल फंड्स जैसे संस्थागत निवेशक शामिल रहे। आईपीओ की पूरी प्रक्रिया में बैंकरों की भूमिका निवेशकों तक पहुंच, इश्यू प्रबंधन और अन्य संबंधित गतिविधियों को संभालने से जुड़ी रही।

    NSE के इस आईपीओ में कुल 392.12 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत में से करीब आधा हिस्सा अकेले 20 निवेश बैंकरों की फीस और कमीशन पर खर्च हुआ। बाकी राशि नियामकीय शुल्क, मार्केटिंग, कानूनी सेवाओं और अन्य जरूरी प्रक्रियाओं से जुड़े खर्चों में गई।

  • इंटरनेट बंद होने पर भी पेमेंट की तैयारी, RBI की HaRBInger पहल में e₹ के लिए खोजा जा रहा नया रास्ता

    इंटरनेट बंद होने पर भी पेमेंट की तैयारी, RBI की HaRBInger पहल में e₹ के लिए खोजा जा रहा नया रास्ता

    नई दिल्ली ।डिजिटल भुगतान के बढ़ते इस्तेमाल के बीच इंटरनेट कनेक्टिविटी पर निर्भरता कम करने की दिशा में नई तकनीकों पर काम किया जा रहा है। भारतीय रिजर्व बैंक की HaRBInger Innovation Challenge पहल में ऑफलाइन डिजिटल भुगतान से जुड़े समाधान को भी शामिल किया गया है। इसके तहत डिजिटल रुपये यानी e₹ का इस्तेमाल इंटरनेट के बिना करने की संभावनाओं पर ध्यान दिया जा रहा है।

    फिलहाल ज्यादातर डिजिटल भुगतान के लिए मोबाइल इंटरनेट और नेटवर्क कनेक्टिविटी की जरूरत होती है। ऐसे में कमजोर नेटवर्क वाले इलाकों, यात्रा के दौरान या इंटरनेट सेवा बाधित होने की स्थिति में डिजिटल भुगतान करना मुश्किल हो सकता है। ऑफलाइन भुगतान से जुड़ी तकनीक इसी समस्या का समाधान तलाशने की दिशा में एक प्रयास है।

    HaRBInger के तहत ऑफलाइन डिजिटल भुगतान के लिए Bluetooth और NFC जैसी तकनीकों के इस्तेमाल की संभावनाएं देखी जा रही हैं। इन तकनीकों के जरिए आसपास मौजूद दो डिवाइस के बीच सीधे कनेक्शन स्थापित करके भुगतान से जुड़ी प्रक्रिया पूरी करने के विकल्प तलाशे जा रहे हैं।

    NFC यानी Near Field Communication ऐसी तकनीक है, जिसके जरिए पास रखे दो संगत डिवाइस के बीच डेटा का आदान-प्रदान किया जा सकता है। वहीं Bluetooth के माध्यम से भी आसपास मौजूद डिवाइस को कनेक्ट किया जा सकता है। ऑफलाइन भुगतान के संभावित मॉडल में इन तकनीकों की भूमिका महत्वपूर्ण हो सकती है।

    इस पहल का एक प्रमुख उद्देश्य डिजिटल भुगतान के लिए हर बार मोबाइल इंटरनेट पर निर्भरता को कम करना है। खास तौर पर ऐसे स्थानों पर इसका इस्तेमाल उपयोगी हो सकता है, जहां नेटवर्क कमजोर रहता है या इंटरनेट कनेक्टिविटी लगातार उपलब्ध नहीं होती।

    e₹ यानी डिजिटल रुपया केंद्रीय बैंक की ओर से जारी डिजिटल मुद्रा है। HaRBInger Innovation Challenge में Offline CBDC यानी ऑफलाइन e₹ को एक प्रमुख तकनीकी चुनौती के तौर पर शामिल किया गया है। यदि इससे जुड़े समाधान सफल होते हैं, तो इंटरनेट कनेक्टिविटी के बिना डिजिटल रुपये के इस्तेमाल की संभावनाएं बढ़ सकती हैं।

    कमजोर नेटवर्क वाले ग्रामीण और दूरदराज के इलाकों में इस तरह की तकनीक उपयोगी हो सकती है। इसके अलावा यात्रा के दौरान नेटवर्क नहीं मिलने या किसी क्षेत्र में अस्थायी रूप से इंटरनेट सेवा बाधित होने जैसी परिस्थितियों में भी ऑफलाइन डिजिटल भुगतान का विकल्प महत्वपूर्ण हो सकता है।

    हालांकि, अभी यह समझना जरूरी है कि ऑफलाइन e₹ भुगतान पर तकनीकी समाधान तलाशे जाने का अर्थ यह नहीं है कि हर व्यक्ति वर्तमान समय में तुरंत बिना इंटरनेट डिजिटल रुपये से भुगतान कर सकता है। यह पहल मुख्य रूप से ऐसी तकनीक विकसित करने और संभावित समाधान तलाशने से जुड़ी है।

    HaRBInger RBI का ग्लोबल हैकेथॉन है, जिसका उद्देश्य फिनटेक और डिजिटल भुगतान से जुड़ी नई तकनीकों तथा समाधान को बढ़ावा देना है। इसके माध्यम से अलग-अलग तकनीकी चुनौतियों के समाधान के लिए नए विचारों और नवाचारों को सामने लाने का प्रयास किया जाता है।

    वर्ष 2025 में शुरू की गई इस पहल में Tokenised KYC, Offline CBDC यानी e₹ और Enhancing Trust जैसी तीन प्रमुख चुनौतियों पर नवाचार के लिए ध्यान केंद्रित किया गया था। ऑफलाइन e₹ से जुड़ी तकनीक पर काम इसी व्यापक प्रयास का हिस्सा है।

    अगर भविष्य में सुरक्षित और प्रभावी ऑफलाइन भुगतान प्रणाली विकसित होती है, तो डिजिटल भुगतान का इस्तेमाल उन परिस्थितियों में भी संभव हो सकता है, जहां सामान्य इंटरनेट कनेक्टिविटी उपलब्ध नहीं रहती। हालांकि, इसके वास्तविक उपयोग, उपलब्धता और तकनीकी सीमाएं समाधान के सफल विकास तथा लागू होने के बाद ही स्पष्ट होंगी।