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  • IPO में पैसा लगाने से पहले पूरी तैयारी जरूरी सही जानकारी के साथ बढ़ाएं मुनाफे की संभावना और घटाएं जोखिम

    IPO में पैसा लगाने से पहले पूरी तैयारी जरूरी सही जानकारी के साथ बढ़ाएं मुनाफे की संभावना और घटाएं जोखिम


    नई दिल्ली। शेयर बाजार में निवेश करने वाले लोगों के बीच आईपीओ यानी इनिशियल पब्लिक ऑफरिंग तेजी से लोकप्रिय हो रहा है। जब कोई कंपनी पहली बार आम निवेशकों के लिए अपने शेयर जारी करती है तो उसे आईपीओ कहा जाता है। कई निवेशक लिस्टिंग के दिन होने वाले संभावित मुनाफे की उम्मीद में आईपीओ में पैसा लगाते हैं जबकि कुछ लोग लंबे समय के निवेश के उद्देश्य से इसमें भाग लेते हैं। हालांकि हर आईपीओ मुनाफा ही देगा ऐसा जरूरी नहीं है। इसलिए निवेश करने से पहले कुछ महत्वपूर्ण बातों को समझना बेहद जरूरी है।
    सबसे पहले यह जानना चाहिए कि कंपनी किस क्षेत्र में काम करती है और उसका बिजनेस मॉडल कितना मजबूत है। यदि कंपनी का कारोबार लगातार बढ़ रहा है और भविष्य में उसके विस्तार की अच्छी संभावना है तो निवेश का अवसर बेहतर माना जा सकता है। केवल चर्चा या प्रचार के आधार पर किसी आईपीओ में पैसा लगाना समझदारी नहीं होती।

    दूसरा महत्वपूर्ण पहलू कंपनी की वित्तीय स्थिति है। निवेश से पहले कंपनी के राजस्व मुनाफे कर्ज और पिछले कुछ वर्षों के प्रदर्शन को जरूर देखना चाहिए। यदि कंपनी लगातार लाभ में है और उसकी आय में स्थिर वृद्धि हो रही है तो यह सकारात्मक संकेत माना जाता है। वहीं अधिक कर्ज या लगातार घाटे वाली कंपनियों में निवेश करने से पहले अतिरिक्त सावधानी बरतनी चाहिए।

    आईपीओ का प्राइस बैंड और लॉट साइज भी निवेश का महत्वपूर्ण हिस्सा है। प्राइस बैंड बताता है कि शेयर किस कीमत पर जारी किए जा रहे हैं जबकि लॉट साइज यह तय करता है कि न्यूनतम कितने शेयरों के लिए आवेदन करना होगा। निवेशक को अपने बजट और जोखिम क्षमता के अनुसार आवेदन करना चाहिए।

    कई निवेशक ग्रे मार्केट प्रीमियम यानी जीएमपी को भी देखते हैं। यदि किसी आईपीओ का जीएमपी अच्छा है तो माना जाता है कि बाजार में उसकी मांग मजबूत हो सकती है। हालांकि केवल जीएमपी के आधार पर निवेश का फैसला नहीं करना चाहिए क्योंकि यह कोई आधिकारिक संकेतक नहीं है और इसमें तेजी से बदलाव हो सकता है।

    कंपनी जुटाई गई राशि का उपयोग किस उद्देश्य के लिए करेगी यह जानकारी भी बेहद महत्वपूर्ण होती है। यदि कंपनी इस राशि का उपयोग कारोबार बढ़ाने नई परियोजनाओं में निवेश करने या कर्ज कम करने के लिए कर रही है तो इसे सकारात्मक माना जा सकता है। इसके विपरीत यदि अधिकांश राशि केवल पुराने निवेशकों की हिस्सेदारी बेचने में जा रही है तो निवेशकों को सावधानी से निर्णय लेना चाहिए।

    आईपीओ का रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस भी पढ़ना चाहिए जिसमें कंपनी के जोखिम भविष्य की योजनाएं कानूनी मामले और वित्तीय जानकारी विस्तार से दी जाती है। इससे निवेशक को कंपनी की वास्तविक स्थिति समझने में मदद मिलती है और जोखिम का सही आकलन किया जा सकता है।

    निवेश करने से पहले यह भी सुनिश्चित करें कि आपके पास सक्रिय डीमैट अकाउंट ट्रेडिंग अकाउंट और बैंक खाते से जुड़ी यूपीआई या एएसबीए सुविधा उपलब्ध हो। आवेदन की अंतिम तिथि से पहले सभी दस्तावेज सही तरीके से अपडेट होना जरूरी है ताकि आवेदन में किसी प्रकार की परेशानी न आए।

    विशेषज्ञों का मानना है कि आईपीओ में निवेश करते समय केवल लिस्टिंग गेन के लालच में फैसला नहीं लेना चाहिए। कंपनी के फंडामेंटल उद्योग की स्थिति प्रबंधन की विश्वसनीयता और भविष्य की विकास क्षमता का विश्लेषण करने के बाद ही निवेश करना बेहतर होता है। सही जानकारी और सोच समझकर लिया गया निर्णय लंबे समय में बेहतर रिटर्न देने की संभावना बढ़ा सकता है।

  • आत्मनिर्भर भारत की बड़ी छलांग पहली हाइड्रोजन ट्रेन का सफल ट्रायल स्वच्छ रेल परिवहन की दिशा में ऐतिहासिक कदम

    आत्मनिर्भर भारत की बड़ी छलांग पहली हाइड्रोजन ट्रेन का सफल ट्रायल स्वच्छ रेल परिवहन की दिशा में ऐतिहासिक कदम


    नई दिल्ली। भारतीय रेलवे ने स्वच्छ और टिकाऊ परिवहन की दिशा में एक ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल करते हुए देश की पहली स्वदेशी हाइड्रोजन ट्रेन का सफल परीक्षण पूरा कर लिया है। यह 10 कोच वाली आधुनिक ट्रेन अब तक 1200 किलोमीटर से अधिक की दूरी सफलतापूर्वक तय कर चुकी है और इस दौरान 3200 लीटर से अधिक डीजल की बचत हुई है। सबसे बड़ी बात यह है कि इस ट्रेन से संचालन के दौरान केवल जलवाष्प निकलती है जिससे यह पूरी तरह पर्यावरण अनुकूल परिवहन प्रणाली के रूप में सामने आई है।

    रेल मंत्रालय के अनुसार इस ट्रेन में बिजली पैदा करने के लिए हाइड्रोजन और ऑक्सीजन के बीच रासायनिक प्रक्रिया का उपयोग किया जाता है। इस प्रक्रिया से उत्पन्न ऊर्जा ट्रेन को चलाती है और उप उत्पाद के रूप में केवल जलवाष्प निकलती है। धुआं और कार्बन उत्सर्जन नहीं होने के कारण इसे वर्तमान समय की सबसे स्वच्छ रेल प्रौद्योगिकियों में शामिल माना जा रहा है। इससे न केवल प्रदूषण कम होगा बल्कि भविष्य में हरित ऊर्जा आधारित परिवहन को भी नई गति मिलेगी।

    इस स्वदेशी हाइड्रोजन ट्रेन में दो हाइड्रोजन ड्राइविंग पावर कार लगाई गई हैं जो कुल 2400 किलोवाट की शक्ति प्रदान करती हैं। ट्रेन में लिथियम आयरन फॉस्फेट बैटरियों का भी उपयोग किया गया है जो ऊर्जा प्रबंधन को अधिक प्रभावी बनाती हैं। इसके साथ लगभग 3000 किलोग्राम हाइड्रोजन संग्रहित करने की क्षमता विकसित की गई है। हाइड्रोजन को उच्च दबाव पर सुरक्षित रखा जाता है और नियंत्रित तरीके से ऊर्जा उत्पादन के लिए उपयोग में लाया जाता है।

    सुरक्षा के लिहाज से भी इस ट्रेन में अत्याधुनिक तकनीकों का इस्तेमाल किया गया है। गैस रिसाव अत्यधिक तापमान आग और धुएं का तुरंत पता लगाने वाली कई स्वतंत्र सुरक्षा प्रणालियां इसमें लगाई गई हैं। इसके अलावा ऑटोमैटिक शट ऑफ सिस्टम निरंतर वेंटिलेशन और अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा मानकों के अनुरूप सभी आवश्यक परीक्षण भी पूरे किए गए हैं। इन व्यवस्थाओं का उद्देश्य यात्रियों और परिचालन दोनों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है।

    रेल मंत्रालय ने बताया कि जींद और सोनीपत के बीच सफल परीक्षण के बाद अब इस ट्रेन का ट्रायल दिल्ली मार्ग पर भी शुरू किया जाएगा। यदि आगामी परीक्षण भी सफल रहते हैं तो भविष्य में इस तकनीक का विस्तार देश के अन्य रेल मार्गों पर भी किया जा सकता है। इससे डीजल पर निर्भरता घटेगी और रेलवे के कार्बन उत्सर्जन को कम करने में महत्वपूर्ण मदद मिलेगी।

    केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने इस उपलब्धि को आत्मनिर्भर भारत अभियान की बड़ी सफलता बताया। उन्होंने कहा कि इस स्वदेशी हाइड्रोजन तकनीक के बौद्धिक संपदा अधिकार भारत के पास सुरक्षित हैं जिससे भविष्य में इस तकनीक का निर्यात भी किया जा सकेगा। उनके अनुसार हाइड्रोजन आने वाले समय का प्रमुख स्वच्छ ईंधन बनने जा रहा है और भारतीय रेलवे इस दिशा में लगातार नवाचार कर रहा है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि हाइड्रोजन ट्रेन केवल पर्यावरण संरक्षण का माध्यम नहीं बल्कि ऊर्जा सुरक्षा और आधुनिक परिवहन व्यवस्था की दिशा में भी बड़ा कदम है। इससे जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता कम होगी और स्वदेशी तकनीक को वैश्विक पहचान मिलेगी। भारत की यह उपलब्धि न केवल रेलवे के लिए बल्कि हरित ऊर्जा आधारित भविष्य की ओर बढ़ते देश के संकल्प का भी मजबूत प्रतीक बनकर उभरी है।

  • महानदी ऑफशोर बेसिन में शुरू हुई पहली डीपवॉटर ड्रिलिंग भारत की ऊर्जा आत्मनिर्भरता की ओर बड़ा कदम

    महानदी ऑफशोर बेसिन में शुरू हुई पहली डीपवॉटर ड्रिलिंग भारत की ऊर्जा आत्मनिर्भरता की ओर बड़ा कदम


    नई दिल्ली। भारत ने ऊर्जा आत्मनिर्भरता की दिशा में एक और महत्वपूर्ण कदम बढ़ाते हुए महानदी ऑफशोर बेसिन में पहले अप्रेजल वेल की ड्रिलिंग शुरू कर दी है। केंद्र सरकार ने इस परियोजना को देश की ऊर्जा सुरक्षा के लिए एक नए युग की शुरुआत बताया है। केंद्रीय पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने कहा कि यह उपलब्धि पिछले एक दशक में किए गए व्यापक नीतिगत सुधारों और ऊर्जा क्षेत्र में अपनाई गई नई रणनीतियों का परिणाम है। उनका कहना है कि इस पहल से न केवल नए हाइड्रोकार्बन संसाधनों की खोज को गति मिलेगी बल्कि भारत की आयातित ऊर्जा पर निर्भरता भी धीरे धीरे कम होगी।

    महानदी ऑफशोर बेसिन में शुरू किया गया एमएन डीडब्ल्यूएन18 1 एचडी अप्रेजल वेल चार प्रस्तावित डीपवॉटर कुओं में पहला है। इन सभी कुओं के जरिए देश के सबसे संभावनाशील अपतटीय क्षेत्रों में मौजूद तेल और गैस संसाधनों का चरणबद्ध आकलन किया जाएगा। पेट्रोलियम मंत्रालय के अनुसार इस परियोजना में अत्याधुनिक डीपवॉटर ड्रिलिंग तकनीक का उपयोग किया जाएगा जिससे समुद्र की गहराई में छिपे संभावित हाइड्रोकार्बन भंडारों की पहचान और उनका दोहन आसान हो सकेगा।

    हरदीप सिंह पुरी ने कहा कि पिछले दस वर्षों में सरकार ने एक्सप्लोरेशन एंड प्रोडक्शन क्षेत्र में कई ऐतिहासिक सुधार लागू किए हैं जिनसे इस क्षेत्र की कार्यप्रणाली पूरी तरह बदल गई है। उन्होंने कहा कि आज शुरू हुई ड्रिलिंग केवल समुद्र की तलहटी में खुदाई भर नहीं है बल्कि यह भारत की भविष्य की ऊर्जा सुरक्षा की मजबूत नींव रखने का कार्य है। उनके अनुसार ड्रिलिंग का प्रत्येक मीटर देश को ऊर्जा आत्मनिर्भरता की ओर आगे बढ़ाएगा और विकसित भारत के लक्ष्य को साकार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

    मंत्री ने इस अवसर पर ऑयल एंड नेचुरल गैस कॉरपोरेशन ओएनजीसी ऑयल इंडिया लिमिटेड डायरेक्टरेट जनरल ऑफ हाइड्रोकार्बन्स तकनीकी साझेदारों और इस परियोजना से जुड़े सभी विशेषज्ञों को बधाई दी। उन्होंने विश्वास जताया कि महानदी ऑफशोर बेसिन में शुरू हुई यह पहल भविष्य में भारत के अपतटीय तेल और गैस अन्वेषण को नई गति देगी तथा घरेलू उत्पादन क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि करेगी।

    हरदीप पुरी ने सरकार द्वारा लागू किए गए प्रमुख सुधारों का भी उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि हाइड्रोकार्बन एक्सप्लोरेशन एंड लाइसेंसिंग पॉलिसी लागू होने के बाद ऊर्जा क्षेत्र में पारदर्शिता और निवेश दोनों बढ़े हैं। इसके साथ ही नामांकन आधारित पुरानी व्यवस्था को समाप्त कर ओपन एकरेज लाइसेंसिंग प्रोग्राम लागू किया गया जिससे निजी और सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों को अधिक अवसर मिले। सरकार ने पारदर्शी रेवेन्यू शेयरिंग मॉडल अपनाने के साथ पहले प्रतिबंधित रहे लगभग 99 प्रतिशत ऑफशोर नो गो क्षेत्रों को भी अन्वेषण के लिए खोल दिया है। इन कदमों से ऊर्जा क्षेत्र में निवेशकों का भरोसा काफी मजबूत हुआ है।

    मंत्री के अनुसार वर्ष 2014 के बाद देश के कुल सक्रिय एक्सप्लोरेशन क्षेत्र का लगभग 81 प्रतिशत हिस्सा आवंटित किया जा चुका है। ओपन एकरेज लाइसेंसिंग प्रोग्राम के तहत अब तक लगभग 3.8 लाख वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में फैले 172 एक्सप्लोरेशन ब्लॉक आवंटित किए गए हैं जिनमें 4.3 अरब डॉलर से अधिक के निवेश की प्रतिबद्धता प्राप्त हुई है। यह दर्शाता है कि भारत का ऊर्जा क्षेत्र वैश्विक निवेशकों के लिए तेजी से आकर्षण का केंद्र बन रहा है।

    सरकार के आंकड़ों के अनुसार केवल वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान ही देश में लगभग 674 वेल की ड्रिलिंग की गई। इसी अवधि में पांच नई हाइड्रोकार्बन खोजें हुईं और सात खोजों का व्यावसायिक उत्पादन भी शुरू किया गया। इन उपलब्धियों के आधार पर सरकार को उम्मीद है कि आने वाले वर्षों में घरेलू तेल और गैस उत्पादन में उल्लेखनीय वृद्धि होगी तथा भारत की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने में स्वदेशी संसाधनों की भूमिका और मजबूत होगी।

  • एनआईआई में शानदार उछाल के दम पर एयू स्मॉल फाइनेंस बैंक की मजबूत कमाई तिमाही लाभ में हल्की गिरावट

    एनआईआई में शानदार उछाल के दम पर एयू स्मॉल फाइनेंस बैंक की मजबूत कमाई तिमाही लाभ में हल्की गिरावट


    नई दिल्ली। एयू स्मॉल फाइनेंस बैंक ने वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही के वित्तीय नतीजे जारी करते हुए मिश्रित प्रदर्शन पेश किया है। अप्रैल से जून 2026 की अवधि में बैंक का शुद्ध लाभ तिमाही आधार पर 4.3 प्रतिशत घटकर 795.95 करोड़ रुपए रह गया। हालांकि सालाना आधार पर बैंक ने शानदार प्रदर्शन करते हुए 37 प्रतिशत की मजबूत वृद्धि दर्ज की है। बेहतर ब्याज आय और घटती क्रेडिट लागत ने बैंक की कमाई को मजबूती प्रदान की है।

    बैंक की ओर से जारी एक्सचेंज फाइलिंग के अनुसार जनवरी से मार्च 2026 की तिमाही में बैंक का शुद्ध लाभ 831.87 करोड़ रुपए था जबकि पिछले वित्त वर्ष की समान तिमाही में यह 581 करोड़ रुपए रहा था। इस तुलना से स्पष्ट है कि तिमाही आधार पर हल्की गिरावट के बावजूद बैंक की दीर्घकालिक वृद्धि मजबूत बनी हुई है और उसका मुख्य कारोबार लगातार विस्तार कर रहा है।

    बैंक के प्रदर्शन की सबसे बड़ी खासियत नेट इंटरेस्ट इनकम यानी ब्याज से होने वाली शुद्ध आय रही। पहली तिमाही में यह सालाना आधार पर 31.9 प्रतिशत बढ़कर 2696 करोड़ रुपए पर पहुंच गई जबकि एक वर्ष पहले समान अवधि में यह 2044 करोड़ रुपए थी। नेट इंटरेस्ट इनकम में यह तेज बढ़ोतरी दर्शाती है कि बैंक का ऋण कारोबार और ब्याज से होने वाली कमाई लगातार मजबूत हो रही है।

    ऑपरेटिंग प्रॉफिट के मोर्चे पर भी बैंक ने सकारात्मक प्रदर्शन किया। पहली तिमाही में परिचालन लाभ 9.4 प्रतिशत बढ़कर 1435 करोड़ रुपए हो गया जबकि पिछले वर्ष की समान अवधि में यह 1312 करोड़ रुपए था। इससे संकेत मिलता है कि बैंक की मुख्य परिचालन गतिविधियां लगातार बेहतर प्रदर्शन कर रही हैं और आय के स्रोत मजबूत बने हुए हैं।

    बैंक के लिए एक और सकारात्मक संकेत प्रावधानों में आई बड़ी कमी रही। खराब ऋणों के संभावित जोखिम को देखते हुए किए जाने वाले प्रावधान सालाना आधार पर 30.4 प्रतिशत घटकर 371 करोड़ रुपए रह गए जबकि पिछले वर्ष इसी अवधि में यह 533 करोड़ रुपए थे। कम प्रावधान यह दर्शाते हैं कि बैंक की क्रेडिट लागत में सुधार हुआ है और जोखिम प्रबंधन पहले की तुलना में अधिक प्रभावी साबित हो रहा है।

    हालांकि एसेट क्वालिटी के मोर्चे पर कुछ दबाव देखने को मिला। 30 जून तक बैंक का सकल गैर निष्पादित परिसंपत्ति अनुपात बढ़कर 2.10 प्रतिशत हो गया जबकि मार्च तिमाही के अंत में यह 2.03 प्रतिशत था। इसी तरह शुद्ध गैर निष्पादित परिसंपत्ति अनुपात भी 0.74 प्रतिशत से बढ़कर 0.76 प्रतिशत पर पहुंच गया। हालांकि यह बढ़ोतरी सीमित है लेकिन बैंक के लिए आने वाली तिमाहियों में एसेट क्वालिटी बनाए रखना महत्वपूर्ण रहेगा।

    शेयर बाजार में बैंक के प्रदर्शन की बात करें तो शुक्रवार को नेशनल स्टॉक एक्सचेंज पर एयू स्मॉल फाइनेंस बैंक का शेयर 1002.25 रुपए पर बंद हुआ। पिछले 52 सप्ताह के दौरान शेयर ने 1090.40 रुपए का उच्चतम स्तर और 682.50 रुपए का न्यूनतम स्तर छुआ है। हाल के सप्ताहों में बैंक का शेयर व्यापक बाजार की तुलना में कमजोर प्रदर्शन करता दिखाई दिया है। पिछले एक सप्ताह में इसमें 2.68 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई जबकि दो सप्ताह में यह 6.54 प्रतिशत और एक महीने में 6.11 प्रतिशत तक फिसला है। इसी अवधि में बीएसई सेंसेक्स में अपेक्षाकृत कम गिरावट दर्ज की गई जिससे स्पष्ट होता है कि बैंक का शेयर फिलहाल अपने बेंचमार्क सूचकांक से पीछे चल रहा है।

    कुल मिलाकर बैंक के पहली तिमाही के नतीजे यह संकेत देते हैं कि मजबूत ब्याज आय और बेहतर परिचालन प्रदर्शन के दम पर उसकी वित्तीय स्थिति मजबूत बनी हुई है। हालांकि एसेट क्वालिटी में मामूली दबाव और शेयर बाजार में कमजोर प्रदर्शन आने वाले समय में निवेशकों की नजर में प्रमुख विषय बने रहेंगे।

  • डोडला डेयरी की पहली तिमाही में झटका राजस्व रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचा लेकिन मुनाफे में 42 प्रतिशत की गिरावट

    डोडला डेयरी की पहली तिमाही में झटका राजस्व रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचा लेकिन मुनाफे में 42 प्रतिशत की गिरावट


    नई दिल्ली। डोडला डेयरी लिमिटेड ने वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही के वित्तीय नतीजे जारी करते हुए रिकॉर्ड राजस्व दर्ज किया है लेकिन बढ़ती लागत और महंगे कच्चे माल के कारण कंपनी की लाभप्रदता पर बड़ा असर पड़ा है। अप्रैल से जून 2026 की तिमाही में कंपनी का कंसोलिडेटेड शुद्ध मुनाफा घटकर 40.64 करोड़ रुपए रह गया जो पिछली तिमाही के 69.80 करोड़ रुपए की तुलना में करीब 42 प्रतिशत कम है। मजबूत बिक्री के बावजूद लागत में तेज बढ़ोतरी ने कंपनी के मुनाफे को प्रभावित किया।

    हालांकि राजस्व के मोर्चे पर कंपनी ने शानदार प्रदर्शन किया। पहली तिमाही में डोडला डेयरी का कुल राजस्व 19 प्रतिशत की वृद्धि के साथ रिकॉर्ड 1197.94 करोड़ रुपए तक पहुंच गया। कंपनी ने बताया कि दूध की खरीद कीमतों में लगातार बढ़ोतरी और आने वाले महीनों की मांग को ध्यान में रखते हुए अतिरिक्त इन्वेंट्री तैयार करने की रणनीति अपनाई गई। इसी वजह से परिचालन लागत बढ़ी और शुद्ध लाभ पर दबाव देखने को मिला।

    कंपनी के प्रबंध निदेशक डोडला सुनील रेड्डी ने कहा कि अधिक इन्वेंट्री तैयार करने का फैसला पूरे डेयरी उद्योग की मौजूदा परिस्थितियों को देखते हुए लिया गया है। उनका मानना है कि दूसरी तिमाही से दूध की खरीद कीमतों में धीरे धीरे सामान्य स्थिति लौटने लगेगी जिससे कंपनी की लाभप्रदता में भी सुधार आने की संभावना है।

    गर्मी का लंबा मौसम कंपनी के लिए बिक्री के लिहाज से फायदेमंद साबित हुआ। दही छाछ लस्सी और आइसक्रीम जैसे वैल्यू एडेड उत्पादों की रिकॉर्ड मांग दर्ज की गई। इन उत्पादों की मजबूत बिक्री के कारण अब कंपनी की कुल बिक्री में इनकी हिस्सेदारी लगभग एक तिहाई तक पहुंच गई है। इससे यह भी संकेत मिलता है कि उपभोक्ताओं की पसंद तेजी से वैल्यू एडेड डेयरी उत्पादों की ओर बढ़ रही है।

    कंपनी का ईबीआईटीडीए भी बेहतर रहा और यह बढ़कर 64.9 करोड़ रुपए पर पहुंच गया जबकि पिछली तिमाही में यह 53.8 करोड़ रुपए था। इसके बावजूद कर्मचारियों पर बढ़ते खर्च और दूध खरीद की ऊंची कीमतों ने कुल लाभ को सीमित कर दिया। नए श्रम कानूनों के तहत ऑफ रोल कर्मचारियों के लिए न्यूनतम वेतन लागू होने से कर्मचारियों पर होने वाला खर्च लगातार बढ़ा है। तिमाही आधार पर यह खर्च 51.7 करोड़ रुपए से बढ़कर 55.7 करोड़ रुपए हो गया जबकि सालाना आधार पर इसमें 18 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई।

    डोडला डेयरी ने इस तिमाही में अब तक की सबसे अधिक दूध खरीद भी दर्ज की। कंपनी ने प्रतिदिन औसतन 21.1 लाख लीटर दूध की खरीद की जो पिछले वर्ष की समान अवधि की तुलना में 13 प्रतिशत अधिक है। कंपनी का कहना है कि परिचालन दक्षता में लगातार सुधार के कारण ऑपरेटिंग मार्जिन पूरे पिछले वित्त वर्ष की तुलना में बेहतर बना हुआ है और आने वाले महीनों में इसका सकारात्मक असर दिखाई देगा।

    कंपनी का अंतरराष्ट्रीय कारोबार भी मजबूती से बढ़ा है। अफ्रीका बिजनेस से होने वाला राजस्व सालाना आधार पर 45.6 प्रतिशत बढ़ा है जिसमें दूध की बिक्री में 52.3 प्रतिशत की मजबूत वृद्धि का महत्वपूर्ण योगदान रहा। इससे कंपनी के वैश्विक कारोबार को भी नई गति मिली है।

    भविष्य की विस्तार रणनीति के तहत डोडला डेयरी के निदेशक मंडल ने डायरेक्ट टू कंज्यूमर डेयरी ब्रांड सिड्स फार्म में करीब 11.6 करोड़ रुपए का प्राथमिक निवेश करने को मंजूरी दी है। इस निवेश के जरिए कंपनी ब्रांड में 2 प्रतिशत हिस्सेदारी खरीदेगी। विशेषज्ञों का मानना है कि यह निवेश कंपनी को प्रीमियम डेयरी और डायरेक्ट टू कंज्यूमर बाजार में अपनी मौजूदगी मजबूत करने में मदद करेगा।

  • हाईवे पर पुल-टनल या एलिवेटेड स्ट्रक्चर है तो 40% तक कम लगेगा टोल टैक्स… NHAI ने बदला नियम

    हाईवे पर पुल-टनल या एलिवेटेड स्ट्रक्चर है तो 40% तक कम लगेगा टोल टैक्स… NHAI ने बदला नियम


    नई दिल्ली।
    राष्ट्रीय राजमार्गों (NH) पर सफर करने वाले करोड़ों वाहन चालकों के लिए एक बड़ी और राहत भरी खबर सामने आई है। यदि आपके रास्ते में लंबे पुल, सुरंगें, फ्लाईओवर या एलिवेटेड रोड आते हैं तो अब आपको पहले के मुकाबले कम टोल टैक्स (Toll Tax) चुकाना होगा। सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय द्वारा राष्ट्रीय राजमार्ग शुल्क नियमों में संशोधन किया गया है। इसे लागू करते हुए भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) ने अपने सभी क्षेत्रीय कार्यालयों को नए नियमों के तहत टोल दरों की समीक्षा और संशोधन प्रक्रिया शुरू करने का कड़ा निर्देश जारी कर दिया है।

    आमतौर पर किसी भी हाईवे पर पुल, टनल या एलिवेटेड स्ट्रक्चर (Elevated structure) का निर्माण करना और उसका रखरखाव करना बेहद खर्चीला काम होता है। यही वजह थी कि पुराने नियमों के तहत इनकी लंबाई को 10 गुना मानकर टोल की गणना की जाती थी।

    उदाहरण के लिए यदि किसी हाईवे पर 5 किलोमीटर लंबी टनल (Long tunnel) या एलिवेटेड स्ट्रक्चर होता था तो टोल लेते वक्त उसे 50 किलोमीटर सड़क के बराबर माना जाता था। पहाड़ी इलाकों, एक्सप्रेसवे और बड़े शहरी रास्तों में जहां कई किलोमीटर लंबे ब्रिज या एलिवेटेड हाईवे बने हैं वहां इस नियम के कारण टोल का बोझ आम जनता और वाहन चालकों की जेब पर बेहद भारी पड़ रहा था। इसी समस्या को हल करने और टोल की दरों को व्यावहारिक बनाने के लिए सरकार ने टोल संशोधन नियमों को जारी किया है।


    क्या है नया टोल फॉर्मूला? समझें गणित

    संशोधित राष्ट्रीय राजमार्ग शुल्क (दरों का निर्धारण और संग्रहण) नियम, 2008 के तहत अब टोल की गणना के लिए एक पारदर्शी और संतुलित फॉर्मूला पेश किया गया है। नए फॉर्मूले के अनुसार, जिन हाईवे पर एक या एक से अधिक ब्रिज, टनल, फ्लाईओवर या एलिवेटेड सेक्शन हैं वहां टोल की गणना के लिए दो तरीके अपनाए जाएंगे।

    पहला तरीका यह है कि विशेष संरचनाओं जैसे कि ब्रिज या टनल की लंबाई का 10 गुना करके, उसे हाईवे के शेष सामान्य हिस्से की लंबाई में जोड़ दिया जाए। दूसरा तरीका यह है कि पूरे हाईवे सेक्शन की कुल लंबाई का 5 गुना कर दिया जाए।

    NHAI को अनिवार्य रूप से इन दोनों गणनाओं में से जो भी दूरी कम होगी उसी के आधार पर टोल तय करना होगा। इसके अलावा जिन पुलों या फ्लाईओवरों की लंबाई 60 मीटर या उससे कम होगी उन्हें अलग से विशेष संरचना नहीं माना जाएगा और उन पर कोई अतिरिक्त नियम नहीं होगा।


    केस स्टडी से समझें टोल का गणित

    केस 1: मान लीजिए कोई हाईवे 40 किलोमीटर लंबा है, जिसमें से 30 किलोमीटर हिस्सा एलिवेटेड या ब्रिज का है और 10 किलोमीटर सामान्य सड़क है। पुराने फॉर्मूले के मुताबिक, 30 किमी × 10 + 10 किमी = 310 किमी की दूरी पर टोल लगता है। नए फॉर्मूले के मुताबिक, कुल दूरी का 5 गुना (40 किमी × 5) यानी कि 200 किमी ही होगा। चूंकि 200 किमी की दूरी कम है, इसलिए जनता को 310 किमी के बजाय केवल 200 किमी का ही टोल देना होगा।

    केस 2: अगर 40 किलोमीटर के हाईवे में 10 किलोमीटर ब्रिज है और 30 किलोमीटर सामान्य सड़क है। पहले तरीके से दूरी 10 किमी × 10 + 30 किमी यानी कि 130 किमी होगी। दूसरे तरीके से दूरी 40 किमी × 5 यानी कि 200 किमी होगी। आपको बता दें कि यहां 130 किलोमीटर वाली दूरी कम है, इसलिए केवल 130 किमी का टोल लागू होगा। पहले यहां 200 किमी के हिसाब से टोल देना पड़ता था।

    दोनों फॉर्मूले को देखें तो करीब 40 प्रतिशत तक की दूरी कम हो रही है। इस हिसाब से टोल भी 40 प्रतिशत तक सस्ता हो सकता है।


    कब से लागू होंगी नई दरें?

    नियमों में यह संशोधन लागू कर दिया गया है, लेकिन टोल प्लाजा के प्रकार के आधार पर इसका फायदा वाहन चालकों को अलग-अलग समय पर मिलेगा। वर्तमान में चल रहे ऐसे सार्वजनिक टोल प्लाजा पर नई दरें उनके अगले निर्धारित वार्षिक शुल्क संशोधन की तारीख से लागू हो जाएंगी। पीपीपी (PPP) मॉडल या प्राइवेट कंपनियों द्वारा संचालित टोल प्लाजा पर यह नया नियम उनकी रियायत अवधि पूरी होने या प्रोजेक्ट एनएचएआई को वापस सौंपे जाने के बाद प्रभावी होगा। भविष्य में शुरू होने वाले सभी नए टोल प्लाजा पर टोल टैक्स की वसूली पहले दिन से ही इसी संशोधित और सस्ते फॉर्मूले के तहत की जाएगी।

    सरकार के इस कदम से न केवल लंबी दूरी का सफर तय करने वाले निजी वाहन मालिकों को राहत मिलेगी, बल्कि माल ढुलाई करने वाले व्यावसायिक वाहनों का परिचालन खर्च भी कम होगा। इसका सकारात्मक असर आने वाले समय में महंगाई और लॉजिस्टिक्स लागत पर देखने को मिल सकता है।

  • ऑनलाइन शॉपिंग में बड़ी लापरवाही iPhone की जगह मिला Beard Oil उपभोक्ता अदालत ने Flipkart को सुनाया बड़ा फैसला

    ऑनलाइन शॉपिंग में बड़ी लापरवाही iPhone की जगह मिला Beard Oil उपभोक्ता अदालत ने Flipkart को सुनाया बड़ा फैसला


    नई दिल्ली । ऑनलाइन शॉपिंग आज लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी का अहम हिस्सा बन चुकी है। घर बैठे महंगे स्मार्टफोन से लेकर घरेलू सामान तक आसानी से ऑर्डर किए जा सकते हैं। हालांकि कई बार ऑनलाइन खरीदारी के दौरान ऐसी घटनाएं सामने आती हैं जो ग्राहकों के भरोसे को झटका देती हैं। मुंबई में सामने आया एक ऐसा ही मामला अब चर्चा का विषय बन गया है जहां एक ग्राहक ने लाखों रुपये का प्रीमियम स्मार्टफोन मंगाया लेकिन पार्सल खोलने पर उसमें दाढ़ी बढ़ाने वाला तेल निकला। मामला उपभोक्ता अदालत तक पहुंचा और अदालत ने ग्राहक के पक्ष में महत्वपूर्ण फैसला सुनाया।

    जानकारी के अनुसार मुंबई के एक ग्राहक ने ऑनलाइन शॉपिंग प्लेटफॉर्म Flipkart से लगभग एक लाख ग्यारह हजार रुपये की कीमत वाला iPhone 14 Pro खरीदा था। ग्राहक को उम्मीद थी कि उसे नया स्मार्टफोन मिलेगा लेकिन जब उसने डिलीवरी के बाद पैकेट खोला तो उसके अंदर iPhone की जगह Beard Growth Oil मौजूद था। महंगे स्मार्टफोन के स्थान पर पूरी तरह अलग उत्पाद मिलने से ग्राहक हैरान रह गया।

    घटना के बाद ग्राहक ने सबसे पहले ई कॉमर्स प्लेटफॉर्म और विक्रेता से शिकायत की लेकिन उसे संतोषजनक समाधान नहीं मिला। कई बार संपर्क करने के बावजूद समस्या का निपटारा नहीं होने पर ग्राहक ने उपभोक्ता अदालत का दरवाजा खटखटाया और न्याय की मांग की।

    मामले की सुनवाई के दौरान अदालत ने पाया कि ग्राहक ने निर्धारित राशि का पूरा भुगतान किया था और सही उत्पाद की डिलीवरी सुनिश्चित करना विक्रेता और ई कॉमर्स प्लेटफॉर्म दोनों की जिम्मेदारी थी। अदालत ने कहा कि ऑनलाइन मार्केटप्लेस केवल बिक्री का माध्यम होने का दावा कर अपनी जिम्मेदारी से बच नहीं सकता क्योंकि ग्राहक का लेनदेन उसी प्लेटफॉर्म के माध्यम से पूरा हुआ है।

    उपभोक्ता अदालत ने अपने फैसले में Flipkart को ग्राहक की जमा राशि वापस करने का निर्देश दिया। साथ ही अदालत ने मुआवजे और मुकदमे के खर्च के रूप में अतिरिक्त सत्तर हजार रुपये का भुगतान करने का भी आदेश दिया। अदालत ने यह भी माना कि ग्राहक की शिकायतों का उचित समाधान न करना सेवा में स्पष्ट कमी का मामला है।

    अदालत ने विक्रेता को भी जिम्मेदार ठहराते हुए कहा कि ग्राहक की बार बार की गई शिकायतों के बावजूद सही उत्पाद उपलब्ध नहीं कराया गया और न ही प्रभावी समाधान दिया गया। इसलिए ई कॉमर्स प्लेटफॉर्म और विक्रेता दोनों को संयुक्त रूप से जवाबदेह माना गया।

    यह फैसला ऑनलाइन खरीदारी करने वाले उपभोक्ताओं के लिए भी महत्वपूर्ण संदेश देता है। यदि किसी ग्राहक को ऑर्डर से अलग सामान मिलता है या शिकायत का समाधान नहीं किया जाता तो वह उपभोक्ता संरक्षण कानून के तहत अपने अधिकारों का उपयोग कर सकता है। अदालत ने स्पष्ट किया कि ग्राहकों का विश्वास बनाए रखना ई कॉमर्स कंपनियों की जिम्मेदारी है और लापरवाही की स्थिति में उन्हें जवाबदेह ठहराया जा सकता है।

    ऑनलाइन शॉपिंग करते समय ग्राहकों को भी कुछ सावधानियां बरतनी चाहिए। महंगे उत्पादों की डिलीवरी लेते समय पैकेज की स्थिति जांचें यदि संभव हो तो अनबॉक्सिंग का वीडियो रिकॉर्ड करें और किसी भी गड़बड़ी की स्थिति में तुरंत प्लेटफॉर्म पर शिकायत दर्ज कराएं। इससे विवाद की स्थिति में जरूरी साक्ष्य उपलब्ध रहते हैं।

    यह मामला याद दिलाता है कि डिजिटल खरीदारी जितनी सुविधाजनक है उतनी ही सतर्कता भी मांगती है। वहीं उपभोक्ता अदालत का यह फैसला ई कॉमर्स कंपनियों के लिए भी स्पष्ट संदेश है कि ग्राहक सेवा और सही डिलीवरी में लापरवाही की कीमत उन्हें चुकानी पड़ सकती है।

  • पश्चिम एशिया संकट से शेयर बाजार पर दबाव, लगातार पांचवें दिन टूटा सेंसेक्स-निफ्टी, निवेशकों की चिंता बढ़ी

    पश्चिम एशिया संकट से शेयर बाजार पर दबाव, लगातार पांचवें दिन टूटा सेंसेक्स-निफ्टी, निवेशकों की चिंता बढ़ी


    नई दिल्ली । पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में लगातार हो रही बढ़ोतरी का असर भारतीय शेयर बाजार पर साफ दिखाई दिया। सप्ताह के अंतिम कारोबारी दिन शुक्रवार को घरेलू बाजार लगातार पांचवें सत्र में गिरावट के साथ बंद हुआ। निवेशकों के बीच बढ़ती सतर्कता और वैश्विक अनिश्चितताओं के कारण प्रमुख सूचकांक सेंसेक्स और निफ्टी दोनों लाल निशान में कारोबार समाप्त करने पर मजबूर रहे। लगातार पांच दिनों की गिरावट ने बाजार की धारणा को कमजोर किया है और निवेशकों की चिंता भी बढ़ा दी है।

    कारोबार के अंत में बीएसई सेंसेक्स 331.62 अंक यानी 0.43 प्रतिशत की गिरावट के साथ 76,059.77 अंक पर बंद हुआ। वहीं, एनएसई निफ्टी 50 भी 102 अंक यानी 0.43 प्रतिशत टूटकर 23,767.45 अंक पर आ गया। कारोबार की शुरुआत से ही बाजार दबाव में रहा और दिन के दौरान दोनों प्रमुख सूचकांक अपने निचले स्तर तक फिसल गए। हालांकि अंतिम घंटे में कुछ खरीदारी देखने को मिली, लेकिन इससे शुरुआती नुकसान की पूरी भरपाई नहीं हो सकी।

    व्यापक बाजार में भी कमजोरी का माहौल बना रहा। मिडकैप और स्मॉलकैप सूचकांकों में भी गिरावट दर्ज की गई, जिससे यह संकेत मिला कि बिकवाली केवल बड़ी कंपनियों तक सीमित नहीं रही। निवेशकों ने जोखिम वाले शेयरों में नई खरीदारी से दूरी बनाए रखी और सुरक्षित निवेश विकल्पों को प्राथमिकता दी।

    सेक्टरवार प्रदर्शन मिश्रित रहा। सूचना प्रौद्योगिकी, मीडिया, बैंकिंग और सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों से जुड़े शेयरों में सीमित मजबूती देखने को मिली, जबकि ऑटो, धातु, ऊर्जा, रियल्टी, ऑयल एंड गैस, फार्मा और इंफ्रास्ट्रक्चर क्षेत्र के शेयरों पर दबाव बना रहा। ऑटो सेक्टर में सबसे अधिक कमजोरी दर्ज की गई, जबकि आईटी कंपनियों ने बाजार को कुछ हद तक सहारा देने का प्रयास किया।

    विश्लेषकों का मानना है कि बाजार पर सबसे बड़ा दबाव कच्चे तेल की कीमतों में तेजी का रहा। ब्रेंट क्रूड का दाम लगातार छठे कारोबारी सत्र में बढ़ते हुए 101 डॉलर प्रति बैरल के स्तर तक पहुंच गया। जुलाई महीने में कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल ने उन देशों की चिंता बढ़ा दी है जो ऊर्जा आयात पर अधिक निर्भर हैं। भारत जैसे बड़े आयातक देश के लिए महंगा कच्चा तेल महंगाई, आयात बिल और कॉरपोरेट लागत बढ़ाने का कारण बन सकता है, जिसका सीधा असर शेयर बाजार की धारणा पर पड़ता है।

    साप्ताहिक आधार पर भी बाजार का प्रदर्शन कमजोर रहा। पूरे सप्ताह में सेंसेक्स करीब 2,100 अंक नीचे आया, जबकि निफ्टी में भी दो प्रतिशत से अधिक की गिरावट दर्ज की गई। लगातार बिकवाली यह संकेत देती है कि वैश्विक घटनाक्रमों के बीच निवेशक फिलहाल सतर्क रणनीति अपना रहे हैं और नए निवेश से पहले स्पष्ट संकेतों का इंतजार कर रहे हैं।

    बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि आने वाले कारोबारी सत्रों में निफ्टी के लिए 23,650 से 23,600 अंक का स्तर महत्वपूर्ण समर्थन माना जाएगा। यदि यह स्तर टूटता है तो गिरावट और गहरी हो सकती है। वहीं 23,950 से 24,000 अंक का दायरा निकटतम प्रतिरोध रहेगा। यदि बाजार इस स्तर को पार करने में सफल होता है तो निवेशकों का भरोसा लौट सकता है और सीमित अवधि के लिए राहत भरी तेजी देखने को मिल सकती है। फिलहाल वैश्विक तनाव, कच्चे तेल की चाल और विदेशी निवेशकों की गतिविधियां ही बाजार की अगली दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाएंगी।

  • आईपीओ, फिर भी मजबूत निवेश, एसएमई कंपनियों ने छह महीने में 3,752 करोड़ रुपये जुटाकर दिखाया भरोसा

    आईपीओ, फिर भी मजबूत निवेश, एसएमई कंपनियों ने छह महीने में 3,752 करोड़ रुपये जुटाकर दिखाया भरोसा

    नई दिल्ली । देश के लघु एवं मध्यम उद्यम (एसएमई) पूंजी बाजार के माध्यम से निवेश जुटाने में लगातार सक्रिय बने हुए हैं। वर्ष 2026 की पहली छमाही के दौरान 78 एसएमई कंपनियों ने प्रारंभिक सार्वजनिक निर्गम (आईपीओ) के जरिए कुल 3,752 करोड़ रुपये की पूंजी जुटाई। आईपीओ की संख्या पिछले दो वर्षों की समान अवधि की तुलना में कम रही, लेकिन निवेश जुटाने का स्तर मजबूत बना रहा। इससे संकेत मिलता है कि निवेशक अब गुणवत्ता आधारित कंपनियों में निवेश को प्राथमिकता दे रहे हैं और मजबूत कारोबारी मॉडल वाली कंपनियों को बाजार से पर्याप्त समर्थन मिल रहा है।

    रिपोर्ट के अनुसार जुटाई गई कुल राशि में सबसे बड़ा योगदान फ्रेश इश्यू का रहा। नई इक्विटी जारी कर कंपनियों ने लगभग 3,555 करोड़ रुपये जुटाए, जो कुल इश्यू आकार का करीब 95 प्रतिशत है। दूसरी ओर, ऑफर फॉर सेल (ओएफएस) के जरिए केवल 197 करोड़ रुपये जुटाए गए। यह पिछले वर्ष की समान अवधि की तुलना में काफी कम है। इससे स्पष्ट होता है कि कंपनियां मौजूदा शेयरधारकों की हिस्सेदारी बेचने के बजाय अपने विस्तार, नई परियोजनाओं और कारोबार को बढ़ाने के लिए ताजा पूंजी जुटाने पर अधिक जोर दे रही हैं।

    हालांकि आईपीओ की संख्या में कमी दर्ज की गई है। वर्ष 2025 की पहली छमाही में 88 और वर्ष 2024 की पहली छमाही में 116 एसएमई आईपीओ आए थे, जबकि इस वर्ष यह संख्या घटकर 78 रह गई। इसके बावजूद कुल जुटाई गई राशि में केवल मामूली गिरावट आई है। वर्ष 2025 की पहली छमाही में एसएमई कंपनियों ने 4,004 करोड़ रुपये जुटाए थे। यह अंतर दर्शाता है कि बाजार में कम लेकिन अपेक्षाकृत बड़े और मजबूत आईपीओ आ रहे हैं, जिन्हें निवेशकों का अच्छा समर्थन मिल रहा है।

    रिपोर्ट में कहा गया है कि वर्ष 2026 की दूसरी तिमाही, यानी अप्रैल से जून के बीच 38 एसएमई कंपनियां शेयर बाजार में सूचीबद्ध हुईं। इन कंपनियों ने लगभग 1,891 करोड़ रुपये की पूंजी जुटाई, जो पिछले वर्ष की समान अवधि में जुटाई गई 1,644 करोड़ रुपये की राशि से अधिक है। इससे यह संकेत मिलता है कि बाजार में निवेशकों की रुचि अभी भी बनी हुई है और विकास की संभावनाओं वाली कंपनियों को पूंजी जुटाने में अपेक्षाकृत आसानी हो रही है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि पिछले वर्ष की तीसरी और चौथी तिमाही में एसएमई आईपीओ गतिविधियों में असाधारण तेजी देखने को मिली थी, जबकि मौजूदा वर्ष में बाजार अपेक्षाकृत संतुलित स्थिति में पहुंच गया है। अब निवेशकों का ध्यान केवल बड़ी संख्या में आने वाले आईपीओ पर नहीं, बल्कि उन कंपनियों पर है जिनकी वित्तीय स्थिति, विकास की योजना और कारोबारी संभावनाएं मजबूत हैं। यही कारण है कि कम लिस्टिंग के बावजूद पूंजी जुटाने की क्षमता पर कोई बड़ा असर नहीं पड़ा।

    विश्लेषकों के अनुसार एसएमई क्षेत्र भारतीय अर्थव्यवस्था की रीढ़ माना जाता है और पूंजी बाजार तक इसकी आसान पहुंच आर्थिक विकास के लिए महत्वपूर्ण है। मजबूत आईपीओ बाजार से इन कंपनियों को विस्तार, तकनीकी उन्नयन और रोजगार सृजन के लिए आवश्यक वित्तीय संसाधन उपलब्ध होते हैं। मौजूदा आंकड़े संकेत देते हैं कि निवेशकों का भरोसा गुणवत्ता वाली एसएमई कंपनियों पर कायम है और आने वाले महीनों में भी यह रुझान जारी रहने की संभावना है।