Category: Economy

  • गांव से निकले युवा की प्रेरक उड़ान सीमित संसाधनों से शुरू किया सफर आज 285 करोड़ के कारोबार के मालिक

    गांव से निकले युवा की प्रेरक उड़ान सीमित संसाधनों से शुरू किया सफर आज 285 करोड़ के कारोबार के मालिक


    नई दिल्ली । सफलता केवल बड़े संसाधनों या ऊंची डिग्रियों की मोहताज नहीं होती बल्कि मजबूत इरादे कठिन मेहनत और कभी हार न मानने वाले जज्बे से भी बड़ी मंजिल हासिल की जा सकती है। उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद जिले के छोटे से गांव सपनावत से निकलकर राजीव कुमार गुप्ता ने यह साबित कर दिया कि यदि लक्ष्य स्पष्ट हो और मेहनत ईमानदारी से की जाए तो साधारण शुरुआत भी असाधारण सफलता में बदल सकती है। आज वह थर्मोकूल होम अप्लायंसेज लिमिटेड के चेयरमैन और मैनेजिंग डायरेक्टर हैं और उनकी कंपनी का सालाना कारोबार करीब 285 करोड़ रुपये तक पहुंच चुका है।

    राजीव कुमार गुप्ता का जन्म एक साधारण ग्रामीण परिवार में हुआ जहां आर्थिक संसाधन सीमित थे। उनके पिता किराना दुकान चलाते थे और बचपन से ही राजीव परिवार की जिम्मेदारियों में हाथ बंटाने लगे थे। कई बार ऐसे हालात भी आए जब उनकी जेब में खर्च करने तक के पैसे नहीं होते थे लेकिन उन्होंने कठिनाइयों को अपनी कमजोरी नहीं बनने दिया। उन्होंने इन्हीं परिस्थितियों से संघर्ष करना सीखा और आगे बढ़ने का संकल्प लिया।

    चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय से स्नातक की पढ़ाई पूरी करने के बाद उनके मन में ऐसा कारोबार शुरू करने का विचार आया जो भारतीय परिवारों को बेहतर गुणवत्ता वाले और किफायती घरेलू उपकरण उपलब्ध करा सके। उस समय देश का उपभोक्ता बाजार तेजी से बदल रहा था और इसी अवसर को पहचानते हुए उन्होंने वर्ष 1992 में गाजियाबाद से थर्मोकूल की शुरुआत की।

    कारोबार शुरू करना आसान नहीं था क्योंकि बाजार में पहले से कई बड़े और स्थापित ब्रांड मौजूद थे। उनके पास मजबूत डीलर नेटवर्क बड़ा निवेश और व्यापक बाजार था जबकि राजीव के पास सीमित पूंजी और सीमित संसाधन थे। इसके बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी और अपने उत्पादों की गुणवत्ता तथा ग्राहकों के विश्वास को सबसे बड़ी ताकत बनाया। उनका मानना था कि यदि ग्राहक को उचित कीमत पर भरोसेमंद उत्पाद मिलेगा तो वह स्वयं ब्रांड को आगे बढ़ाएगा।

    शुरुआत एयर कूलर और पंखों के निर्माण से हुई लेकिन समय के साथ कंपनी ने अपने उत्पादों का लगातार विस्तार किया। आज थर्मोकूल वॉशिंग मशीन गीजर रेफ्रिजरेटर एलईडी टीवी और कई तरह के किचन अप्लायंसेज का निर्माण कर रही है। कंपनी ने उत्तर प्रदेश बिहार राजस्थान और मध्य प्रदेश सहित कई राज्यों के शहरी और अर्ध शहरी बाजारों में अपनी मजबूत पहचान बनाई है।

    आज कंपनी का सालाना कारोबार लगभग 285 करोड़ रुपये तक पहुंच चुका है। यह उपलब्धि केवल व्यावसायिक सफलता नहीं बल्कि उस सोच का परिणाम है जिसमें मेहनत ईमानदारी गुणवत्ता और ग्राहकों के विश्वास को सबसे अधिक महत्व दिया गया। कंपनी आने वाले वर्षों में भारतीय होम अप्लायंसेज बाजार में अपनी हिस्सेदारी को और बढ़ाने की दिशा में काम कर रही है।

    राजीव कुमार गुप्ता की सफलता उन लाखों युवाओं के लिए प्रेरणा है जो सीमित संसाधनों के कारण अपने सपनों को अधूरा मान लेते हैं। उनका सफर यह संदेश देता है कि परिस्थितियां चाहे कितनी भी कठिन क्यों न हों यदि संकल्प मजबूत हो और मेहनत लगातार जारी रहे तो सफलता की नई कहानी लिखी जा सकती है।

  • ड्रोन तकनीक का कमाल चलती ट्रेनों पर पत्थर फेंकने वालों की बढ़ी गिरफ्तारी आरपीएफ की सख्ती से घटी घटनाएं

    ड्रोन तकनीक का कमाल चलती ट्रेनों पर पत्थर फेंकने वालों की बढ़ी गिरफ्तारी आरपीएफ की सख्ती से घटी घटनाएं


    नई दिल्ली । दिल्ली एनसीआर में चलती ट्रेनों पर पत्थर फेंकने की घटनाओं पर लगाम लगाने के लिए रेलवे सुरक्षा बल ने जिस नई रणनीति को अपनाया है उसके सकारात्मक परिणाम अब साफ दिखाई देने लगे हैं। रेलवे पटरियों के किनारे ड्रोन से निगरानी शुरू होने के बाद न केवल ऐसी घटनाओं में कमी दर्ज की गई है बल्कि पत्थरबाजी करने वाले आरोपियों की गिरफ्तारी में भी उल्लेखनीय बढ़ोतरी हुई है। आधुनिक तकनीक और सतर्क निगरानी के इस संयोजन ने रेल यात्रियों की सुरक्षा को पहले से कहीं अधिक मजबूत बना दिया है।

    आरपीएफ के आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2025 में मई तक चलती ट्रेनों पर पत्थरबाजी की 176 घटनाएं दर्ज की गई थीं। इनमें 144 मामले रेलवे अधिनियम के तहत दर्ज हुए थे और 32 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया था। वहीं वर्ष 2026 की इसी अवधि में घटनाओं की संख्या घटकर 144 रह गई जबकि 138 मामलों में कार्रवाई करते हुए 79 लोगों को गिरफ्तार किया गया। इस प्रकार गिरफ्तारियों में लगभग 146 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई जो आरपीएफ की नई रणनीति की प्रभावशीलता को दर्शाती है।

    आरपीएफ अधिकारियों के अनुसार वर्तमान में संवेदनशील रेलवे मार्गों पर दो ड्रोन लगातार निगरानी कर रहे हैं। आदर्श नगर नरेला पानीपत रेलखंड को सबसे संवेदनशील क्षेत्रों में शामिल किया गया है। जैसे ही कोई ट्रेन इस मार्ग से गुजरती है ड्रोन हवा में सक्रिय हो जाते हैं और आसपास की गतिविधियों पर रियल टाइम नजर रखते हैं। किसी भी संदिग्ध गतिविधि की जानकारी मिलते ही निकट मौजूद सुरक्षा दल को तुरंत अलर्ट भेजा जाता है जिससे आरोपी मौके पर ही पकड़ लिए जाते हैं।

    हालांकि आरपीएफ का मानना है कि पत्थरबाजी की हर घटना के पीछे संगठित अपराध नहीं होता। कई मामलों में रेलवे ट्रैक के आसपास रहने वाले बच्चे भी शरारत में पत्थर फेंक देते हैं। वर्ष 2025 में 37 बच्चों की संलिप्तता वाली 32 घटनाओं में कोई मामला दर्ज नहीं किया गया था जबकि इस वर्ष 11 बच्चों से जुड़ी छह घटनाएं सामने आईं। इन मामलों में भी कानूनी कार्रवाई के बजाय समझाइश और परामर्श को प्राथमिकता दी गई।

    अधिकारियों का कहना है कि रेलवे लाइन के आसपास रहने वाले कई बच्चे स्कूल नहीं जाते और अपना अधिकांश समय पटरियों के पास खेलते हुए बिताते हैं। खेल खेल में वे गुजरती ट्रेनों पर पत्थर फेंक देते हैं जिससे यात्रियों की जान जोखिम में पड़ जाती है। इस चुनौती से निपटने के लिए आरपीएफ गैर सरकारी संगठनों के सहयोग से जागरूकता अभियान चला रही है। बच्चों की काउंसलिंग की जा रही है और अभिभावकों के साथ बैठक कर उन्हें रेलवे ट्रैक के पास बच्चों को न खेलने देने की सलाह दी जा रही है।

    आरपीएफ की रिपोर्ट में यह भी सामने आया है कि रेलवे पटरियों के किनारे बनी अनधिकृत बस्तियां असामाजिक तत्वों की गतिविधियों का केंद्र बनी हुई हैं। कई बार शराब के नशे में लोग ट्रेनों पर पत्थर फेंक देते हैं। इसके अलावा अवैध रेलवे क्रॉसिंग का इस्तेमाल करने वाले कुछ लोग ट्रेन गुजरने के दौरान इंतजार से नाराज होकर भी इस तरह की घटनाओं को अंजाम देते हैं।

    ड्रोन निगरानी के साथ साथ रेलवे पटरियों के किनारे सोलर ऊर्जा से संचालित सीसीटीवी कैमरे भी तेजी से लगाए जा रहे हैं। पहले दो चरणों में 76 कैमरे लगाए जा चुके हैं और अब 50 नए कैमरे स्थापित किए जा रहे हैं। आधुनिक तकनीक मजबूत निगरानी और जनजागरूकता के संयुक्त प्रयासों से आरपीएफ को उम्मीद है कि आने वाले समय में चलती ट्रेनों पर पत्थरबाजी की घटनाओं में और अधिक कमी आएगी तथा रेल यात्रियों की सुरक्षा पहले से कहीं अधिक सुनिश्चित हो सकेगी।

  • गगनयान मिशन के लिए इसरो पूरी तरह तैयार सफल इंजन परीक्षण के बाद जल्द होगी पहली मानव रहित उड़ान

    गगनयान मिशन के लिए इसरो पूरी तरह तैयार सफल इंजन परीक्षण के बाद जल्द होगी पहली मानव रहित उड़ान


    नई दिल्ली । भारत के महत्वाकांक्षी गगनयान मिशन की तैयारियां अब निर्णायक चरण में पहुंच चुकी हैं। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन इसरो ने स्पष्ट किया है कि देश के पहले मानव अंतरिक्ष मिशन को पूरी तरह सुरक्षित और सफल बनाने के लिए सभी आवश्यक तकनीकी परीक्षण तेजी से पूरे किए जा रहे हैं। इसरो के चेयरमैन डॉ वी नारायणन ने बताया कि मिशन से जुड़ी अधिकांश महत्वपूर्ण तकनीकों का विकास पूरा हो चुका है और अब अंतरिक्ष यात्रियों को भेजने से पहले तीन मानव रहित मिशनों का संचालन किया जाएगा। इनमें पहला मिशन जल्द लॉन्च किए जाने की तैयारी अंतिम चरण में है और इसकी तारीख भी जल्द घोषित की जाएगी।

    डॉ वी नारायणन ने कहा कि गगनयान केवल एक अंतरिक्ष मिशन नहीं बल्कि भारत की वैज्ञानिक क्षमता और तकनीकी आत्मनिर्भरता का सबसे बड़ा प्रदर्शन है। उन्होंने कहा कि किसी भी कीमत पर मानव जीवन से जुड़े इस मिशन में जोखिम की कोई गुंजाइश नहीं छोड़ी जाएगी। इसलिए हर तकनीक और सुरक्षा प्रणाली को कई स्तरों पर परखा जा रहा है ताकि वास्तविक मिशन पूरी तरह सुरक्षित और सफल हो सके।

    इसरो प्रमुख ने हाल ही में सफल रहे सेमी क्रायोजेनिक इंजन के पावर हेड परीक्षण को बड़ी उपलब्धि बताया। उन्होंने कहा कि इस परीक्षण के दौरान इंजन की लगभग अट्ठासी प्रतिशत क्षमता का सफल परीक्षण किया गया। यह उपलब्धि भविष्य में पूर्ण क्षमता वाले इंजन परीक्षण और भारी प्रक्षेपण यानों के विकास के लिए बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है। वैज्ञानिक अब इंजन को उसकी पूरी क्षमता पर संचालित करने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहे हैं।

    इसरो के अनुसार चौबीस जून को तमिलनाडु के महेंद्रगिरि स्थित इसरो प्रोपल्शन कॉम्प्लेक्स में सेमी क्रायोजेनिक इंजन के पावर हेड टेस्ट का सफल हॉट टेस्ट किया गया। यह परीक्षण एक सौ पचहत्तर टन थ्रस्ट स्तर पर किया गया जो अब तक का सबसे बड़ा परीक्षण रहा। इससे पहले इंजन का परीक्षण कम क्षमता पर किया गया था लेकिन इस बार मिले परिणामों ने वैज्ञानिकों का आत्मविश्वास और बढ़ा दिया है।

    परीक्षण के दौरान इंजन के सभी प्रमुख सिस्टम उम्मीद के अनुरूप कार्य करते रहे। मुख्य टर्बोपंप ने भी निर्धारित दबाव पर सफल प्रदर्शन किया जिससे यह साबित हुआ कि इंजन भविष्य के जटिल अंतरिक्ष अभियानों के लिए पूरी तरह सक्षम बनने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। इस सफलता के बाद अब दो सौ टन यानी पूर्ण क्षमता वाले इंजन परीक्षण की तैयारी शुरू कर दी गई है।

    गगनयान मिशन भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम के इतिहास में एक नया अध्याय जोड़ने जा रहा है। इस मिशन के सफल होने के बाद भारत उन चुनिंदा देशों की सूची में शामिल हो जाएगा जिन्होंने अपने दम पर मानव को अंतरिक्ष में भेजने की क्षमता विकसित की है। इससे अंतरिक्ष विज्ञान अनुसंधान रक्षा तकनीक और भविष्य के अंतरिक्ष अभियानों को नई गति मिलेगी।

    इसरो का मानना है कि गगनयान केवल वैज्ञानिक उपलब्धि नहीं बल्कि देश के युवाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत भी बनेगा। सफल इंजन परीक्षण और तेजी से आगे बढ़ती तैयारियां इस बात का संकेत हैं कि भारत अब मानव अंतरिक्ष अभियान के अपने सबसे बड़े सपने को साकार करने के बेहद करीब पहुंच चुका है।

  • मेड इन इंडिया केवल पहचान नहीं बल्कि भारत की प्रतिष्ठा है पीयूष गोयल ने उद्यमियों को दिया गुणवत्ता का मंत्र

    मेड इन इंडिया केवल पहचान नहीं बल्कि भारत की प्रतिष्ठा है पीयूष गोयल ने उद्यमियों को दिया गुणवत्ता का मंत्र


    नई दिल्ली । भारत तेजी से वैश्विक विनिर्माण शक्ति के रूप में अपनी पहचान मजबूत कर रहा है और इसी दिशा में केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने भारतीय उद्यमियों को गुणवत्ता और विश्वसनीयता को सर्वोच्च प्राथमिकता देने का संदेश दिया है। उनका कहना है कि किसी भी उत्पाद पर मेड इन इंडिया लिखा होना केवल निर्माण स्थल की जानकारी नहीं बल्कि पूरे देश की प्रतिष्ठा और विश्वास का प्रतीक होता है। इसलिए हर भारतीय निर्माता की जिम्मेदारी है कि वह ऐसा उत्पाद तैयार करे जिस पर दुनिया बिना किसी संकोच के भरोसा कर सके।

    पीयूष गोयल ने कहा कि भारतीय उद्योगों की सफलता केवल उत्पादन बढ़ाने तक सीमित नहीं होनी चाहिए बल्कि उनका लक्ष्य विश्व स्तरीय गुणवत्ता हासिल करना भी होना चाहिए। जब कोई भारतीय उत्पाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में पहुंचता है तब वह अपने साथ देश की छवि और भारतीय उद्योग की क्षमता भी लेकर जाता है। ऐसे में गुणवत्ता से किसी भी प्रकार का समझौता भारत की वैश्विक साख को प्रभावित कर सकता है।

    उन्होंने तमिलनाडु के अंबूर स्थित फ्लोरेंस शू कंपनी के संस्थापक अकील पनारुना का उदाहरण देते हुए बताया कि उनकी मुलाकात लंदन में आयोजित एक कारोबारी कार्यक्रम के दौरान हुई। अकील ने उन्हें बताया कि एक विदेशी ग्राहक ने काहिरा हवाई अड्डे पर प्रसिद्ध अंतरराष्ट्रीय ब्रांड का जूता खरीदा और जब उसने उस पर लगा लेबल देखा तो उस पर मेड इन इंडिया लिखा हुआ था। यह जूता उनकी कंपनी में तैयार किया गया था। इस अनुभव ने यह साबित किया कि भारतीय निर्माता अब दुनिया के बड़े ब्रांडों के भरोसेमंद साझेदार बन चुके हैं।

    गोयल ने कहा कि ऐसे उद्यमी केवल कारोबार नहीं कर रहे बल्कि भारत की प्रतिष्ठा को भी नई ऊंचाई दे रहे हैं। उन्होंने बताया कि फ्लोरेंस शू कंपनी ने ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के नए अवसर पैदा किए हैं। महिलाओं को बड़े पैमाने पर रोजगार उपलब्ध कराया है और पर्यावरण संरक्षण के लिए आधुनिक तथा टिकाऊ तकनीकों को भी अपनाया है। इस तरह के प्रयास भारत के औद्योगिक विकास को नई दिशा देने के साथ सामाजिक और पर्यावरणीय जिम्मेदारियों को भी मजबूत करते हैं।

    उन्होंने कहा कि भारत और ब्रिटेन के बीच व्यापक आर्थिक एवं व्यापार समझौते के लागू होने के बाद दोनों देशों के बीच व्यापार और निवेश के नए अवसर खुलेंगे। इससे भारतीय उत्पादों की वैश्विक बाजार तक पहुंच और मजबूत होगी। ऐसे समय में भारतीय कंपनियों के लिए गुणवत्ता नवाचार और प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता को लगातार बेहतर बनाना बेहद जरूरी है ताकि वे अंतरराष्ट्रीय बाजार में अपनी अलग पहचान कायम रख सकें।

    केंद्रीय मंत्री ने यह भी बताया कि उन्होंने लंदन में कई वैश्विक कंपनियों के वरिष्ठ अधिकारियों और उद्योग जगत के प्रतिनिधियों के साथ चर्चा की। इन बैठकों में भारत की मजबूत विनिर्माण क्षमता निवेश के अवसर और भविष्य की साझेदारियों पर विस्तार से विचार किया गया। उनका मानना है कि भारत आज दुनिया के सबसे भरोसेमंद निवेश और विनिर्माण केंद्रों में तेजी से उभर रहा है।

    उन्होंने सभी भारतीय उद्यमियों का आह्वान किया कि वे हर उत्पाद को उत्कृष्ट गुणवत्ता के साथ तैयार करें ताकि मेड इन इंडिया पूरी दुनिया में विश्वास उत्कृष्टता और गर्व का पर्याय बन सके। उनका विश्वास है कि यदि उद्योग जगत इसी सोच के साथ आगे बढ़ेगा तो ब्रांड इंडिया आने वाले वर्षों में वैश्विक बाजार में और अधिक मजबूत स्थान हासिल करेगा।

  • India UK Trade Deal से पहले बड़ा कदम पीयूष गोयल ने जारी किया CETA बिजनेस मैनुअल कारोबारियों को मिलेगा व्यापार बढ़ाने का पूरा रोडमैप

    India UK Trade Deal से पहले बड़ा कदम पीयूष गोयल ने जारी किया CETA बिजनेस मैनुअल कारोबारियों को मिलेगा व्यापार बढ़ाने का पूरा रोडमैप


    नई दिल्ली । भारत और ब्रिटेन के बीच आर्थिक संबंधों को नई मजबूती देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने लंदन में भारत यूके व्यापक आर्थिक एवं व्यापार समझौते यानी सीईटीए के लिए विशेष बिजनेस मैनुअल लॉन्च किया है। यह मैनुअल ऐसे समय जारी किया गया है जब दोनों देशों के बीच ऐतिहासिक व्यापार समझौता 15 जुलाई से लागू होने जा रहा है। इसका उद्देश्य भारतीय और ब्रिटिश कारोबारियों को समझौते के प्रावधानों को सरल तरीके से समझाना और उनके माध्यम से अधिकतम व्यावसायिक लाभ प्राप्त करने में सहायता देना है।

    सीईटीए बिजनेस यूटिलाइजेशन मैनुअल को एक व्यावहारिक मार्गदर्शिका के रूप में तैयार किया गया है। इसमें व्यापार से जुड़े नियमों प्रक्रियाओं और उपलब्ध अवसरों को आसान भाषा में समझाया गया है ताकि छोटे मध्यम और बड़े सभी प्रकार के उद्योग इस समझौते का प्रभावी उपयोग कर सकें। इस पहल से दोनों देशों के बीच व्यापारिक सहयोग को नई गति मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।

    इस मैनुअल का विमोचन एफआईसीसीआई द्वारा आयोजित कार्यक्रम में किया गया जिसमें यूके इंडिया बिजनेस काउंसिल और एचएसबीसी इंडिया ने भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। दोनों संस्थानों ने संयुक्त रूप से इस दस्तावेज को तैयार किया है। इसे एक लिविंग डॉक्यूमेंट के रूप में विकसित किया गया है जिसका अर्थ है कि समय समय पर बदलती व्यापारिक जरूरतों और नए नियमों के अनुसार इसमें संशोधन और अपडेट किए जाएंगे।

    विशेषज्ञों का मानना है कि सीईटीए लागू होने के बाद दोनों देशों के बीच बाजार तक पहुंच पहले से अधिक आसान होगी। व्यापारिक बाधाएं कम होंगी और निवेश के नए अवसर सामने आएंगे। इससे निर्यातकों आयातकों और विभिन्न औद्योगिक क्षेत्रों को प्रत्यक्ष लाभ मिलने की संभावना है। यह समझौता भारत और ब्रिटेन के आर्थिक संबंधों को नई ऊंचाई देने वाला माना जा रहा है।

    यूके इंडिया बिजनेस काउंसिल के ग्रुप मुख्य कार्यकारी अधिकारी डॉ किशोर जयरामन ने कहा कि यह मैनुअल केवल जानकारी देने वाला दस्तावेज नहीं बल्कि कारोबारियों के लिए एक व्यावहारिक रोडमैप है। इसके माध्यम से कंपनियां व्यापार समझौते के नियमों को बेहतर ढंग से समझ सकेंगी और उनका लाभ उठाकर अपने कारोबार का विस्तार कर सकेंगी।

    एचएसबीसी इंडिया के मुख्य कार्यकारी अधिकारी हितेंद्र दवे ने भी इस पहल को महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि यह समझौता दोनों देशों के उद्योगों को अधिक भरोसा बेहतर बाजार पहुंच और मजबूत व्यावसायिक साझेदारी का अवसर देगा। उनका मानना है कि कंपनियों को इस मैनुअल का उपयोग करते हुए सीमा पार व्यापार और निवेश को नई दिशा देनी चाहिए।

    भारत और ब्रिटेन के बीच व्यापार लगातार मजबूत हो रहा है। हाल के वर्षों में दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। वर्ष 2025 की चौथी तिमाही तक दोनों देशों के बीच कुल व्यापार लगभग अड़तालीस अरब पाउंड के करीब पहुंच चुका है जो पिछले वर्षों की तुलना में उल्लेखनीय बढ़ोतरी को दर्शाता है। ऐसे में सीईटीए और इसके लिए तैयार किया गया यह बिजनेस मैनुअल भविष्य में व्यापार निवेश और आर्थिक सहयोग को नई गति देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

  • ऊर्जा सुरक्षा पर भारत का बड़ा विजन BRICS 2026 की अध्यक्षता में ग्लोबल साउथ को नई दिशा देगा भारत पीएम मोदी का ऐलान

    ऊर्जा सुरक्षा पर भारत का बड़ा विजन BRICS 2026 की अध्यक्षता में ग्लोबल साउथ को नई दिशा देगा भारत पीएम मोदी का ऐलान


    नई दिल्ली । नई दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्पष्ट किया है कि वर्ष 2026 में ब्रिक्स की अध्यक्षता संभालने के दौरान भारत की सबसे बड़ी प्राथमिकताओं में ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत बनाना और ग्लोबल साउथ के देशों को वैश्विक ऊर्जा व्यवस्था के केंद्र में स्थापित करना शामिल होगा। उनका कहना है कि तेजी से बदलती वैश्विक परिस्थितियों में केवल घरेलू नीतियां ही पर्याप्त नहीं हैं बल्कि मजबूत अंतरराष्ट्रीय सहयोग और साझा प्रयासों के माध्यम से ही सुरक्षित विश्वसनीय और टिकाऊ ऊर्जा व्यवस्था का निर्माण किया जा सकता है। भारत इसी सोच के साथ आगे बढ़ रहा है और आने वाले समय में ब्रिक्स मंच के जरिए विकासशील देशों की आवाज को और अधिक मजबूती देने का प्रयास करेगा।

    प्रधानमंत्री ने केंद्रीय ऊर्जा मंत्री मनोहर लाल खट्टर के विचारों का समर्थन करते हुए कहा कि भारत का लक्ष्य ऐसी वैश्विक ऊर्जा व्यवस्था तैयार करना है जो सभी देशों के लिए समान अवसर उपलब्ध कराए और ऊर्जा सुरक्षा के साथ आर्थिक विकास तथा पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन स्थापित करे। उनका मानना है कि ग्लोबल साउथ के देशों के सामने ऊर्जा उपलब्धता स्वच्छ तकनीक और वित्तीय संसाधनों जैसी कई चुनौतियां हैं जिनका समाधान सामूहिक सहयोग से ही संभव है।

    मनोहर लाल खट्टर ने भी अपने विचारों में कहा कि दुनिया का ऊर्जा क्षेत्र तेजी से बदलाव के दौर से गुजर रहा है। ऐसे समय में विकासशील अर्थव्यवस्थाओं को नई तकनीकों नवाचार और मजबूत साझेदारी की सबसे अधिक आवश्यकता है। भारत ब्रिक्स की अध्यक्षता के दौरान इसी दिशा में ठोस पहल करेगा ताकि स्वच्छ ऊर्जा परिवर्तन को गति मिले और सदस्य देशों के बीच तकनीकी सहयोग तथा निवेश को बढ़ावा मिल सके।

    उन्होंने बताया कि भारत ने पिछले कुछ वर्षों में ऊर्जा क्षेत्र में उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल की हैं। देश ने गैर जीवाश्म ईंधन आधारित बिजली उत्पादन क्षमता में तेजी से वृद्धि की है और राष्ट्रीय लक्ष्य से पहले ही कुल स्थापित बिजली क्षमता का आधे से अधिक हिस्सा स्वच्छ ऊर्जा स्रोतों से प्राप्त करने में सफलता हासिल की है। यह उपलब्धि भारत की ऊर्जा नीति और हरित विकास के प्रति उसकी प्रतिबद्धता को दर्शाती है।

    भारत ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत बनाने के लिए ग्रीन हाइड्रोजन कोयला गैसीकरण इलेक्ट्रिक मोबिलिटी आधुनिक ट्रांसमिशन नेटवर्क और डिजिटल तकनीकों पर लगातार निवेश कर रहा है। स्मार्ट मीटर और इंडिया एनर्जी स्टैक जैसी पहल बिजली क्षेत्र को अधिक पारदर्शी सक्षम और आधुनिक बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। सरकार का मानना है कि भविष्य की ऊर्जा व्यवस्था डिजिटल तकनीक और स्वच्छ संसाधनों के बेहतर समन्वय पर आधारित होगी।

    प्रधानमंत्री मोदी ने इस बात पर भी जोर दिया कि ब्रिक्स देशों की अलग अलग क्षमताएं एक दूसरे की ताकत बन सकती हैं। यदि सदस्य देश मिलकर अनुसंधान तकनीक निवेश और ऊर्जा अवसंरचना के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाते हैं तो न केवल ऊर्जा सुरक्षा मजबूत होगी बल्कि जलवायु परिवर्तन जैसी वैश्विक चुनौतियों का भी प्रभावी समाधान निकाला जा सकेगा। भारत इसी साझा सोच को आगे बढ़ाते हुए ब्रिक्स 2026 के दौरान ग्लोबल साउथ की आकांक्षाओं को वैश्विक मंच पर नई पहचान दिलाने के लिए सक्रिय भूमिका निभाएगा।

  • ऊर्जा सुरक्षा की नई राह सागर अदाणी बोले तेज विद्युतीकरण ही भारत के आर्थिक विकास की सबसे बड़ी ताकत

    ऊर्जा सुरक्षा की नई राह सागर अदाणी बोले तेज विद्युतीकरण ही भारत के आर्थिक विकास की सबसे बड़ी ताकत


    नई दिल्ली । ऊर्जा सुरक्षा आर्थिक विकास और जलवायु परिवर्तन जैसी वैश्विक चुनौतियों से निपटने के लिए अब तेजी से विद्युतीकरण सबसे प्रभावी समाधान बनकर उभर रहा है। अदाणी ग्रीन एनर्जी लिमिटेड के एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर सागर अदाणी ने कहा कि भविष्य की ऊर्जा व्यवस्था ऐसी होनी चाहिए जो भरोसेमंद किफायती और चौबीसों घंटे स्वच्छ बिजली उपलब्ध करा सके। इसके लिए नवीकरणीय ऊर्जा के साथ आधुनिक ऊर्जा भंडारण तकनीकों का विस्तार बेहद जरूरी है।

    लंदन क्लाइमेट एक्शन वीक के दौरान आयोजित अदाणी ग्रीन एनर्जी डायलॉग में सागर अदाणी ने कहा कि दुनिया के सामने ऊर्जा सुरक्षा वहनीयता और पर्यावरण संरक्षण जैसी बड़ी चुनौतियां हैं। इन तीनों समस्याओं का सबसे मजबूत समाधान तेजी से बढ़ता विद्युतीकरण है। उनका कहना था कि जो देश दीर्घकालिक आर्थिक विकास और ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनना चाहते हैं उन्हें अब इस दिशा में तेजी से कदम बढ़ाने होंगे।

    उन्होंने बताया कि केवल सौर और पवन ऊर्जा उत्पादन पर्याप्त नहीं है बल्कि इन्हें बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम और पंप्ड स्टोरेज प्रोजेक्ट जैसी आधुनिक तकनीकों के साथ जोड़ना भी आवश्यक है। इससे स्वच्छ ऊर्जा की उपलब्धता हर समय सुनिश्चित की जा सकती है और बिजली आपूर्ति अधिक स्थिर तथा विश्वसनीय बनती है।

    सागर अदाणी ने कहा कि अदाणी ग्रीन इसी सोच के साथ वर्ष 2030 तक 50 गीगावाट नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता विकसित करने के लक्ष्य पर तेजी से काम कर रही है। गुजरात के खावड़ा में दुनिया का सबसे बड़ा नवीकरणीय ऊर्जा पार्क विकसित किया जा रहा है जहां बड़े पैमाने पर ऊर्जा भंडारण तकनीकों को भी शामिल किया जा रहा है। इससे भविष्य की स्वच्छ ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने में महत्वपूर्ण मदद मिलेगी।

    इस कार्यक्रम में दुनिया भर के नीति निर्माता निवेशक उद्योग विशेषज्ञ और जलवायु परिवर्तन से जुड़े प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया। चर्चा के दौरान स्वच्छ ऊर्जा परिवर्तन को तेज करने के लिए निवेश नई नीतियों और मजबूत बुनियादी ढांचे की आवश्यकता पर विशेष जोर दिया गया। विशेषज्ञों का मानना है कि वैश्विक स्तर पर सहयोग बढ़ाकर ही कम कार्बन अर्थव्यवस्था की दिशा में तेज बदलाव संभव होगा।

    एनर्जी ट्रांजिशन्स कमीशन के सह अध्यक्ष लॉर्ड अडेयर टर्नर ने कहा कि यदि दुनिया को शून्य उत्सर्जन वाली अर्थव्यवस्था बनानी है तो बिजली उत्पादन को अधिकतम स्तर तक स्वच्छ और कार्बन मुक्त बनाना होगा। उन्होंने कहा कि सड़क परिवहन भवनों की ऊर्जा जरूरतों और औद्योगिक क्षेत्रों में विद्युतीकरण अब आर्थिक रूप से भी लाभदायक साबित हो रहा है।

    अदाणी समूह आने वाले वर्षों में ऊर्जा परिवर्तन और उससे जुड़े बुनियादी ढांचे के विकास के लिए 100 अरब डॉलर से अधिक निवेश करने की योजना पर काम कर रहा है। समूह ग्रीन हाइड्रोजन ऊर्जा भंडारण ट्रांसमिशन डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर और आधुनिक औद्योगिक तकनीकों में भी निवेश बढ़ा रहा है। हाल ही में समूह के चेयरमैन गौतम अदाणी ने भी परमाणु ऊर्जा नवीकरणीय ऊर्जा और ऊर्जा भंडारण को मिलाकर विविध ऊर्जा पोर्टफोलियो विकसित करने की प्रतिबद्धता दोहराई। उनका मानना है कि यही मॉडल भविष्य में भारत की बढ़ती ऊर्जा जरूरतों को सुरक्षित किफायती और पर्यावरण अनुकूल तरीके से पूरा करेगा।

  • तेल सस्ता तो बाजार मजबूत: निफ्टी-सेंसेक्स ने तीसरे सप्ताह भी दिखाई तेजी, आगे इन आंकड़ों पर रहेगी नजर

    तेल सस्ता तो बाजार मजबूत: निफ्टी-सेंसेक्स ने तीसरे सप्ताह भी दिखाई तेजी, आगे इन आंकड़ों पर रहेगी नजर


    नई दिल्ली । भारतीय शेयर बाजार ने लगातार तीसरे सप्ताह मजबूती का प्रदर्शन करते हुए निवेशकों का भरोसा कायम रखा। कच्चे तेल की कीमतों में तेज गिरावट और पश्चिम एशिया में भू राजनीतिक तनाव कम होने से बाजार को मजबूत समर्थन मिला। इसके साथ ही भारत और अमेरिका के बीच संभावित व्यापार समझौते की उम्मीदों ने भी निवेशकों का उत्साह बढ़ाया। सप्ताह के आखिरी कारोबारी दिन निफ्टी और सेंसेक्स दोनों बढ़त के साथ बंद हुए और पूरे सप्ताह बाजार सकारात्मक दायरे में बना रहा।

    साप्ताहिक कारोबार के दौरान निफ्टी में 0.18 प्रतिशत की बढ़त दर्ज की गई जबकि अंतिम कारोबारी सत्र में यह 24 हजार 56 अंक पर बंद हुआ। वहीं सेंसेक्स 109 अंक की बढ़त के साथ 77 हजार 100 अंक पर बंद हुआ। पूरे सप्ताह सेंसेक्स में करीब 0.39 प्रतिशत की तेजी दर्ज की गई। हालांकि प्रमुख सूचकांकों की मजबूती के बीच व्यापक बाजार में मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों का प्रदर्शन अपेक्षाकृत कमजोर रहा।

    बाजार विशेषज्ञों के अनुसार अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत आगे बढ़ने तथा होर्मुज़ जलडमरूमध्य में सामान्य होते हालात से कच्चे तेल की कीमतें फिर से युद्ध पूर्व स्तर के करीब पहुंच गई हैं। इसका सीधा फायदा भारत जैसे तेल आयातक देशों को मिल रहा है। सस्ता कच्चा तेल महंगाई पर दबाव कम करता है और चालू खाते के घाटे तथा राजकोषीय स्थिति को भी बेहतर बनाने में मदद करता है। इससे भारतीय रिजर्व बैंक के लिए मौद्रिक नीति में लचीलापन बनाए रखने की संभावना मजबूत होती है।

    इस सप्ताह सेक्टर आधारित प्रदर्शन की बात करें तो फार्मा और हेल्थकेयर शेयरों में सबसे अधिक तेजी देखने को मिली। निजी बैंकों के शेयरों को भी आरबीआई की एफसीएनआर जमा स्वैप योजना से जुड़ी स्पष्टता का लाभ मिला। दूसरी ओर धातु क्षेत्र के शेयरों पर कमोडिटी कीमतों में गिरावट का असर दिखाई दिया जबकि उपभोक्ता मांग को लेकर बनी चिंताओं के कारण कंज्यूमर ड्यूरेबल्स सेक्टर भी दबाव में रहा।

    हालांकि बाजार के लिए कुछ चुनौतियां भी बनी हुई हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि देश में मानसून का असमान वितरण कृषि उत्पादन और ग्रामीण मांग को प्रभावित कर सकता है जिससे महंगाई बढ़ने का जोखिम बना रहेगा। इसके बावजूद निवेशकों का रुझान फिलहाल सकारात्मक बना हुआ है।

    तकनीकी विश्लेषकों के अनुसार निकट भविष्य में निफ्टी के लिए 24 हजार 400 और 24 हजार 500 अंक प्रमुख प्रतिरोध स्तर रहेंगे जबकि 23 हजार 900 और 23 हजार 800 अंक मजबूत समर्थन माने जा रहे हैं। बैंक निफ्टी के लिए 57 हजार 500 से 57 हजार 400 का दायरा सपोर्ट और 58 हजार 900 से 59 हजार का स्तर रेजिस्टेंस माना जा रहा है।

    आने वाले सप्ताह में निवेशकों की नजर कंपनियों के पहली तिमाही के नतीजों पर रहेगी। इसके साथ ही अमेरिका के पीसीई महंगाई आंकड़े नॉन फार्म पेरोल बेरोजगारी दर तथा भारत के औद्योगिक उत्पादन और जून महीने के पीएमआई आंकड़े भी बाजार की अगली दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। विशेषज्ञों का मानना है कि मजबूत बुनियादी आधार वाली कंपनियों में लंबी अवधि के निवेश के अवसर अभी भी बने हुए हैं।

  • 1 जुलाई से बदलेंगे ये 5 बड़े नियम, आम जनता की जेब और रोजमर्रा पर पड़ेगा असर

    1 जुलाई से बदलेंगे ये 5 बड़े नियम, आम जनता की जेब और रोजमर्रा पर पड़ेगा असर


    नई दिल्‍ली । जून का महीना (June Month) खत्म होने में अब चंद दिन बाकी हैं। हर बार की तरह इस बार भी नए महीने यानी जुलाई की शुरुआत कई बड़े बदलावों (Rule Change) के साथ होगी। इन बदलावों का असर आम लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी और जेब दोनों पर पड़ सकता है। आइए जानते हैं पहली तारीख से होने वाले 5 बड़े बदलावों के बारे में।

    एलपीजी सिलेंडर 
    हर महीने की पहली तारीख को ऑयल मार्केटिंग कंपनियां एलपीजी सिलेंडर की कीमतों की समीक्षा करती हैं। इसलिए 1 जुलाई को भी घरेलू और कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर के दाम में बदलाव देखने को मिल सकता है। हाल के दिनों में अमेरिका-ईरान तनाव और अंतरराष्ट्रीय बाजार में उतार-चढ़ाव का असर एलपीजी कीमतों पर भी देखने को मिला है। 1 जून को 19 किलो वाले कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर की कीमत में 53.50 रुपये की बढ़ोतरी की गई थी। इसके बाद दिल्ली में इसकी कीमत 3,113.50 रुपये हो गई थी। वहीं 5 किलो वाले सिलेंडर के दाम भी बढ़े थे। हालांकि, 14.2 किलो वाले घरेलू रसोई गैस सिलेंडर की कीमत में कोई बदलाव नहीं किया गया था।

    हवाई यात्रा
    हर महीने ऑयल कंपनियां एयर टर्बाइन फ्यूल (ATF) की कीमतों में भी संशोधन करती हैं। अगर ATF महंगा होता है तो एयरलाइंस की लागत बढ़ती है, जिसका असर यात्रियों के टिकट पर पड़ सकता है। वहीं यदि इसकी कीमत घटती है तो हवाई यात्रा का खर्च कम होने की संभावना रहती है। इसलिए 1 जुलाई को ATF की नई कीमतें भी यात्रियों के लिए अहम रहेंगी।

    रीगैलिया गोल्ड कार्ड 
    अगर आप HDFC Bank Regalia Gold Credit Card इस्तेमाल करते हैं तो 1 जुलाई से आपके लिए नया नियम लागू होगा। बैंक के नए नियम के मुताबिक, घरेलू एयरपोर्ट लाउंज की फ्री सुविधा जारी रखने के लिए कार्डधारकों को पिछली तिमाही में कम से कम 60,000 रुपये खर्च करना होगा। यदि यह खर्च पूरा नहीं किया गया, तो अगली तिमाही में मुफ्त एयरपोर्ट लाउंज एक्सेस का लाभ नहीं मिलेगा।

    ईमेल अपडेट
    1 जुलाई से आधार कार्ड धारकों के लिए भी एक राहत की खबर है। UIDAI ने घोषणा की है कि आधार में ईमेल आईडी अपडेट कराने की सुविधा अब मुफ्त दी जाएगी। यह सुविधा अगले 6 महीने, यानी दिसंबर तक उपलब्ध रहेगी। इससे पहले आधार में ईमेल अपडेट कराने के लिए 75 रुपये का शुल्क देना पड़ता था।

    कार खरीदना 
    अगर आप नई कार खरीदने की योजना बना रहे हैं तो 1 जुलाई से पहले फैसला करना आपके लिए फायदेमंद हो सकता है। Kia Motors ने अपनी कारों की कीमतों में 2 प्रतिशत तक बढ़ोतरी करने का ऐलान किया है। वहीं, Tata Motors भी अपने ICE (Internal Combustion Engine) और Electric Vehicle (EV) मॉडल्स की कीमतों में 1.5 प्रतिशत तक बढ़ोतरी की तैयारी कर रही है। इस बदलाव के बाद नई कार खरीदने वालों को पहले के मुकाबले अधिक कीमत चुकानी पड़ सकती है।

  • देश का 16 फीसदी केला देता है महाराष्ट्र का यह जिला, आधुनिक खेती और GI टैग ने बनाया ‘बनाना कैपिटल ऑफ इंडिया’

    देश का 16 फीसदी केला देता है महाराष्ट्र का यह जिला, आधुनिक खेती और GI टैग ने बनाया ‘बनाना कैपिटल ऑफ इंडिया’

    नई दिल्ली । भारत दुनिया का सबसे बड़ा केला उत्पादक देश है और वैश्विक उत्पादन में उसकी हिस्सेदारी लगभग एक-चौथाई मानी जाती है। देश में हर वर्ष करोड़ों टन केले का उत्पादन होता है, जिसमें महाराष्ट्र अग्रणी राज्य है। इसी राज्य का जलगांव जिला अपनी असाधारण उत्पादन क्षमता के कारण ‘बनाना कैपिटल ऑफ इंडिया’ के नाम से जाना जाता है। यह जिला अकेले देश के कुल केला उत्पादन में लगभग 16 प्रतिशत योगदान देता है, जबकि महाराष्ट्र में केले की खेती के कुल क्षेत्रफल का करीब 69 प्रतिशत हिस्सा भी यहीं स्थित है।

    जलगांव की सफलता के पीछे उसकी अनुकूल भौगोलिक परिस्थितियां सबसे बड़ा कारण मानी जाती हैं। उत्तर में सतपुड़ा और दक्षिण में अजंता पर्वत श्रृंखलाओं के बीच स्थित यह क्षेत्र उपजाऊ काली मिट्टी, पर्याप्त धूप और गर्म जलवायु के कारण केले की खेती के लिए बेहद उपयुक्त माना जाता है। यहां की मिट्टी में नमी बनाए रखने की क्षमता अधिक है, जिससे फसल की गुणवत्ता और उत्पादन दोनों बेहतर होते हैं।

    केले की खेती केवल कृषि तक सीमित नहीं है, बल्कि जलगांव की स्थानीय अर्थव्यवस्था की मजबूत नींव भी है। जिले के हजारों किसान सीधे तौर पर इस फसल पर निर्भर हैं। इसके अलावा परिवहन, पैकेजिंग, भंडारण, प्रसंस्करण और व्यापार जैसे क्षेत्रों में भी बड़ी संख्या में लोगों को रोजगार मिलता है। इस कारण केला उत्पादन यहां की आर्थिक गतिविधियों का प्रमुख आधार बन चुका है।

    जलगांव के किसानों ने समय के साथ आधुनिक कृषि तकनीकों को तेजी से अपनाया है। टिश्यू कल्चर पौधों का उपयोग, ड्रिप सिंचाई प्रणाली और वैज्ञानिक फसल प्रबंधन ने उत्पादन क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि की है। विशेष रूप से ड्रिप सिंचाई तकनीक ने पानी की बचत के साथ पौधों तक आवश्यक मात्रा में सिंचाई सुनिश्चित की है, जिससे लागत कम हुई और गुणवत्ता में सुधार आया।

    इस जिले में कई लोकप्रिय केले की किस्मों की खेती होती है। बसराई किस्म अपनी गुणवत्ता, स्वाद और लंबे समय तक ताजा रहने की क्षमता के कारण देशभर के बाजारों में पसंद की जाती है। वहीं जी-9 (G-9) किस्म अधिक उत्पादन, बड़े आकार, रोग प्रतिरोधक क्षमता और निर्यात की संभावनाओं के कारण किसानों के बीच तेजी से लोकप्रिय हुई है। इन उन्नत किस्मों ने जलगांव को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में मजबूत पहचान दिलाई है।

    जलगांव की एक और बड़ी ताकत उसका बेहतर परिवहन नेटवर्क है। सड़क और रेल मार्ग से देश के प्रमुख व्यापारिक केंद्रों से जुड़ा होने के कारण यहां से केले की आपूर्ति तेजी और आसानी से की जाती है। भुसावल जंक्शन देश के महत्वपूर्ण रेलवे जंक्शनों में शामिल है, जिससे कृषि उत्पादों का परिवहन और भी सुगम हो जाता है।

    जलगांव के केले को वर्ष 2016 में भौगोलिक संकेतक (GI) टैग भी प्राप्त हो चुका है। यह मान्यता इस बात का प्रमाण है कि यहां उत्पादित केले की गुणवत्ता और विशेषताएं इस क्षेत्र की भौगोलिक परिस्थितियों से जुड़ी हुई हैं। आधुनिक कृषि तकनीक, अनुकूल प्राकृतिक संसाधन, मजबूत परिवहन व्यवस्था और किसानों की नवाचार अपनाने की क्षमता ने जलगांव को देश ही नहीं, बल्कि वैश्विक स्तर पर भी केले के प्रमुख उत्पादन केंद्र के रूप में स्थापित किया है।