Category: Economy

  • कच्चे तेल की कीमत 116 डॉलर के पार, फिर भी 24 अक्टूबर को पेट्रोल-डीजल के दाम स्थिर..

    कच्चे तेल की कीमत 116 डॉलर के पार, फिर भी 24 अक्टूबर को पेट्रोल-डीजल के दाम स्थिर..

    नई दिल्ली । अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेजी का सिलसिला जारी है। शनिवार, 24 अक्टूबर 2026 की सुबह ब्रेंट क्रूड ऑयल का भाव बढ़कर 116.27 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया। इससे एक दिन पहले इसकी कीमत 114.52 डॉलर प्रति बैरल थी। इस तरह एक दिन के भीतर कच्चे तेल के भाव में 1.75 डॉलर प्रति बैरल की बढ़ोतरी दर्ज की गई। हालांकि, अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेजी के बावजूद भारत में शनिवार को पेट्रोल और डीजल की खुदरा कीमतों में कोई बदलाव नहीं किया गया।

    देश में पेट्रोल और डीजल के दैनिक खुदरा भाव तेल विपणन कंपनियों की ओर से जारी किए जाते हैं। 24 अक्टूबर को जारी दरों के अनुसार, प्रमुख शहरों में ईंधन की कीमतें पहले के स्तर पर बनी रहीं। हालांकि, अलग-अलग राज्यों में करों, स्थानीय निकाय कर और अन्य शुल्कों में अंतर होने के कारण पेट्रोल-डीजल के दाम शहर और राज्य के हिसाब से अलग-अलग हैं।

    हाल के दिनों में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी भी हुई थी। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, पेट्रोल के दाम में 2.61 रुपये प्रति लीटर और डीजल की कीमत में 2.71 रुपये प्रति लीटर का इजाफा किया गया था। इसके बाद अब 24 अक्टूबर को दोनों ईंधनों के भाव में कोई नया बदलाव नहीं हुआ है।

    राजधानी दिल्ली में शनिवार को पेट्रोल 102.12 रुपये प्रति लीटर और डीजल 95.20 रुपये प्रति लीटर की दर से उपलब्ध रहा। आर्थिक राजधानी मुंबई में पेट्रोल की कीमत 111.21 रुपये प्रति लीटर और डीजल का भाव 97.83 रुपये प्रति लीटर दर्ज किया गया।

    कोलकाता में एक लीटर पेट्रोल के लिए 113.47 रुपये चुकाने पड़ रहे हैं, जबकि डीजल 99.82 रुपये प्रति लीटर पर बिक रहा है। चेन्नई में पेट्रोल की कीमत 107.87 रुपये प्रति लीटर और डीजल का भाव 99.66 रुपये प्रति लीटर रहा। इन महानगरों में ईंधन की कीमतों में अंतर स्थानीय कर व्यवस्था और अन्य लागतों के कारण बना हुआ है।

    अन्य प्रमुख शहरों की बात करें तो लखनऊ में पेट्रोल 101.86 रुपये और डीजल 95.36 रुपये प्रति लीटर रहा। चंडीगढ़ में पेट्रोल 101.54 रुपये और डीजल 89.47 रुपये प्रति लीटर की दर से उपलब्ध था। पटना में पेट्रोल की कीमत 113.37 रुपये और डीजल का भाव 99.36 रुपये प्रति लीटर दर्ज किया गया।

    तिरुवनंतपुरम में पेट्रोल 115.49 रुपये और डीजल 104.40 रुपये प्रति लीटर रहा। बेंगलुरु में पेट्रोल की कीमत 111.68 रुपये और डीजल 99.56 रुपये प्रति लीटर दर्ज की गई। भुवनेश्वर में पेट्रोल 108.97 रुपये और डीजल 100.68 रुपये प्रति लीटर पर उपलब्ध रहा।

    वहीं, हैदराबाद में पेट्रोल 115.69 रुपये और डीजल 103.82 रुपये प्रति लीटर रहा। जयपुर में पेट्रोल की कीमत 113.19 रुपये और डीजल का भाव 98.25 रुपये प्रति लीटर दर्ज किया गया। इन आंकड़ों से स्पष्ट है कि अलग-अलग शहरों में वाहन चालकों को ईंधन के लिए अलग-अलग राशि चुकानी पड़ रही है।

    कच्चे तेल की कीमतों में बढ़ोतरी के बीच घरेलू बाजार में पेट्रोल-डीजल के भाव स्थिर रहने से वाहन चालकों को शनिवार को तत्काल कोई अतिरिक्त कीमत नहीं चुकानी पड़ी। हालांकि, अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल के भाव में आगे होने वाले बदलावों पर नजर बनी हुई है। फिलहाल 24 अक्टूबर की जारी दरों के अनुसार, देश के प्रमुख शहरों में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में कोई नया संशोधन नहीं किया गया है।

  • अगले सप्ताह छह कंपनियों के डिविडेंड पर रहेगी नजर, रिकॉर्ड डेट से पहले जानें किस शेयर पर कितना मिलेगा लाभ

    अगले सप्ताह छह कंपनियों के डिविडेंड पर रहेगी नजर, रिकॉर्ड डेट से पहले जानें किस शेयर पर कितना मिलेगा लाभ

    नई दिल्ली । शेयर बाजार में अगले सप्ताह छह कंपनियों के अंतरिम डिविडेंड को लेकर निवेशकों की नजर बनी रह सकती है। वित्त वर्ष 2026-27 की दूसरी तिमाही के नतीजों के साथ इन कंपनियों ने शेयरधारकों के लिए लाभांश घोषित किया है। इनमें हेक्सावेयर टेक्नोलॉजीज, एलएंडटी टेक्नोलॉजी सर्विसेज, सायंट, निप्पॉन लाइफ इंडिया एसेट मैनेजमेंट, चेन्नई पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन और एडोर वेल्डिंग शामिल हैं। इन कंपनियों के प्रति शेयर घोषित डिविडेंड को जोड़ने पर कुल रकम 83.50 रुपये होती है। यह छह अलग-अलग कंपनियों के एक-एक शेयर पर घोषित लाभांश का जोड़ है, न कि किसी एक कंपनी के शेयर पर मिलने वाली राशि।

    हेक्सावेयर टेक्नोलॉजीज ने वित्त वर्ष 2026 के लिए 9.50 रुपये प्रति इक्विटी शेयर के दूसरे अंतरिम डिविडेंड की घोषणा की है। कंपनी के शेयर का अंकित मूल्य एक रुपये है। इस आधार पर घोषित लाभांश अंकित मूल्य का 950 प्रतिशत है। कंपनी ने 26 अक्टूबर 2026 को रिकॉर्ड डेट तय की है। इस तारीख के आधार पर तय होगा कि कौन से शेयरधारक घोषित डिविडेंड पाने के पात्र होंगे।

    एलएंडटी टेक्नोलॉजी सर्विसेज ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए 20 रुपये प्रति इक्विटी शेयर का अंतरिम डिविडेंड घोषित किया है। कंपनी के शेयर का अंकित मूल्य दो रुपये है, इसलिए यह लाभांश अंकित मूल्य का 1,000 प्रतिशत बैठता है। कंपनी ने 27 अक्टूबर 2026 को रिकॉर्ड डेट निर्धारित की है। लाभांश का लाभ उन्हीं शेयरधारकों को मिलेगा, जो लागू नियमों के अनुसार पात्र होंगे।

    सायंट लिमिटेड ने वित्त वर्ष 2026-27 की दूसरी तिमाही के नतीजों के साथ 12 रुपये प्रति इक्विटी शेयर के अंतरिम डिविडेंड को मंजूरी दी है। कंपनी के शेयर का अंकित मूल्य पांच रुपये है। इस हिसाब से घोषित लाभांश अंकित मूल्य का 240 प्रतिशत है। सायंट ने 28 अक्टूबर 2026 को रिकॉर्ड डेट तय की है। आईटी क्षेत्र की इस कंपनी का डिविडेंड भी अगले सप्ताह निवेशकों के ध्यान में रह सकता है।

    निप्पॉन लाइफ इंडिया एसेट मैनेजमेंट ने दूसरी तिमाही के परिणामों के साथ 9.50 रुपये प्रति इक्विटी शेयर के अंतरिम डिविडेंड की घोषणा की है। कंपनी के शेयर का अंकित मूल्य 10 रुपये है और घोषित लाभांश इसके 95 प्रतिशत के बराबर है। कंपनी ने पात्र शेयरधारकों की पहचान के लिए 28 अक्टूबर 2026 को रिकॉर्ड डेट निर्धारित की है।

    चेन्नई पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन ने 22 अक्टूबर 2026 को हुई बोर्ड बैठक में वित्त वर्ष 2026-27 के लिए 25 रुपये प्रति इक्विटी शेयर के अंतरिम डिविडेंड की घोषणा की। कंपनी के शेयर का अंकित मूल्य 10 रुपये है, जिसके आधार पर लाभांश 250 प्रतिशत होता है। इसकी रिकॉर्ड डेट 30 अक्टूबर 2026 रखी गई है। पात्र शेयरधारकों को भुगतान 21 नवंबर 2026 तक किए जाने की जानकारी दी गई है।

    एडोर वेल्डिंग लिमिटेड ने 7.50 रुपये प्रति शेयर के अंतरिम डिविडेंड की घोषणा की है। कंपनी ने इसके लिए भी 30 अक्टूबर 2026 को रिकॉर्ड डेट तय की है। इस प्रकार, छह कंपनियों की रिकॉर्ड डेट 26, 27, 28 और 30 अक्टूबर को निर्धारित हैं।

    निवेशकों के लिए यह समझना जरूरी है कि डिविडेंड की घोषणा और शेयर के अंकित मूल्य के आधार पर निकाला गया प्रतिशत, शेयर की मौजूदा बाजार कीमत पर मिलने वाले प्रतिफल के समान नहीं होता। रिकॉर्ड डेट के साथ पात्रता और लागू बाजार नियमों को भी ध्यान में रखना चाहिए। केवल डिविडेंड की राशि के आधार पर निवेश का निर्णय लेना उचित नहीं है।

  • एलन मस्क के फॉलो किए ऋषभ यादव कौन हैं, अमेरिका में भारतीय इंजीनियर की कामयाबी से छिड़ी ब्रेन ड्रेन बहस

    एलन मस्क के फॉलो किए ऋषभ यादव कौन हैं, अमेरिका में भारतीय इंजीनियर की कामयाबी से छिड़ी ब्रेन ड्रेन बहस

    नई दिल्ली । दुनिया के प्रमुख उद्योगपतियों में शामिल एलन मस्क सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर जिन लोगों को फॉलो करते हैं, उनमें भारतीय मूल के इंजीनियर ऋषभ यादव का नाम भी शामिल है। ऋषभ को लेकर एक सोशल मीडिया पोस्ट के बाद उनकी पहचान, पेशेवर उपलब्धियों और अमेरिका में उनके काम को लेकर चर्चा शुरू हो गई है। इसके साथ ही भारत से प्रतिभाशाली युवाओं के विदेश जाने यानी ब्रेन ड्रेन के मुद्दे पर भी बहस तेज हो गई है।

    यह चर्चा तब शुरू हुई, जब सोशल मीडिया यूजर माधव ने सवाल उठाया कि एलन मस्क द्वारा फॉलो किए जाने वाले ऋषभ यादव आखिर कौन हैं। उन्होंने बताया कि मस्क एक्स पर करीब 1,418 लोगों को फॉलो करते हैं और इनमें ऋषभ का नाम भी शामिल है। माधव ने यह भी कहा कि उन्हें पहले लगा था कि ऋषभ भारतीय होंगे, लेकिन उनका सोशल मीडिया अकाउंट अमेरिकी दिखाई देता है। इसके बाद उन्होंने इस इंजीनियर की पहचान जानने के लिए कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित चैटबॉट ग्रोक से सवाल किया।

    ग्रोक के जवाब के अनुसार, ऋषभ यादव कृत्रिम बुद्धिमत्ता से जुड़े कोडिंग टूल कर्सर के संस्थापक इंजीनियर हैं। यह टूल सॉफ्टवेयर डेवलपर्स को कोड लिखने और उससे जुड़े काम में सहायता देता है। ऋषभ भारतीय मूल के हैं और अमेरिका के सैन फ्रांसिस्को में रहते हैं। वह इससे पहले एप्पल और सिस्को जैसी बड़ी प्रौद्योगिकी कंपनियों में काम कर चुके हैं। एप्पल में अपने कार्यकाल के दौरान उन्होंने आईफोन के बैक टैप फीचर पर भी काम किया था।

    ऋषभ की पेशेवर पृष्ठभूमि और मस्क के साथ उनके जुड़ाव को लेकर भी सवाल उठे हैं। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, कर्सर और स्पेसएक्स के बीच हुए सौदे के बाद ऋषभ ने मस्क से जुड़ी कृत्रिम बुद्धिमत्ता कंपनी स्पेसएक्सएआई में काम शुरू किया। इसी पेशेवर संबंध को मस्क द्वारा उन्हें फॉलो किए जाने की चर्चा से जोड़ा जा रहा है। हालांकि, केवल सोशल मीडिया पर किसी व्यक्ति को फॉलो करना अपने आप में किसी विशेष व्यक्तिगत संबंध का प्रमाण नहीं है।

    इस मामले ने भारतीय प्रतिभाओं के विदेश जाने के मुद्दे को भी चर्चा के केंद्र में ला दिया है। माधव की पोस्ट पर प्रतिक्रिया देते हुए एक यूजर ने कहा कि भारत की प्रतिभा हर साल अमेरिका चली जाती है। कुछ लोगों ने इसे देश के लिए प्रतिभा पलायन की चुनौती बताया, जबकि अन्य ने विदेशों में काम कर रहे भारतीय पेशेवरों की उपलब्धियों को उनकी मेहनत और कौशल का परिणाम माना।

    बहस के दौरान भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थानों और भारतीय प्रबंधन संस्थानों से पढ़ाई करने वाले युवाओं का भी उल्लेख किया गया। कुछ यूजर्स का कहना था कि देश के प्रतिभाशाली विद्यार्थी उच्च शिक्षा प्राप्त करने के बाद विदेशों में काम करते हैं और वहां नई तकनीकों तथा कारोबार के विकास में योगदान देते हैं। उनके मुताबिक, इससे भारत में उपलब्ध अवसरों और प्रतिभाओं को रोकने की क्षमता पर सवाल उठते हैं।

    दूसरी ओर, कुछ प्रतिक्रियाओं में कहा गया कि केवल देशभक्ति की भावना के आधार पर प्रतिभा पलायन को नहीं रोका जा सकता। इसके लिए भारत में बेहतर रोजगार, अनुसंधान, तकनीकी विकास, प्रतिस्पर्धी वेतन और नवाचार के अवसर उपलब्ध कराना जरूरी है। इस दृष्टिकोण के अनुसार, यदि प्रतिभाशाली युवा देश में रहकर भारतीय कंपनियों और संस्थानों के साथ काम करें, तो उनकी विशेषज्ञता का लाभ घरेलू अर्थव्यवस्था को भी मिल सकता है।

    ऋषभ यादव की चर्चा इस तरह एक इंजीनियर की पेशेवर पहचान से आगे बढ़कर भारतीय प्रतिभाओं के वैश्विक योगदान और देश में उपलब्ध अवसरों के सवाल तक पहुंच गई है। विदेशों में काम करने वाले भारतीय पेशेवरों की सफलता जहां उनकी क्षमता को दर्शाती है, वहीं यह बहस भी महत्वपूर्ण बनी हुई है कि भारत किस तरह अपने युवाओं को देश में ही बेहतर अवसर उपलब्ध करा सकता है।

  • भारत के सेमीकंडक्टर मिशन को गति देने के लिए कुशल इंजीनियरों और उद्योग-अकादमिक सहयोग पर डॉ. प्रीति अदाणी ने दिया जोर

    भारत के सेमीकंडक्टर मिशन को गति देने के लिए कुशल इंजीनियरों और उद्योग-अकादमिक सहयोग पर डॉ. प्रीति अदाणी ने दिया जोर

    नई दिल्ली । भारत के सेमीकंडक्टर क्षेत्र को मजबूत बनाने के लिए आधुनिक तकनीक और विनिर्माण संयंत्रों के साथ कुशल मानव संसाधन तैयार करना भी जरूरी है। अदाणी विश्वविद्यालय की अध्यक्ष डॉ. प्रीति अदाणी ने उद्योग और शिक्षण संस्थानों के बीच बेहतर तालमेल स्थापित करने पर जोर देते हुए कहा कि देश के सेमीकंडक्टर मिशन की सफलता के लिए ऐसी प्रतिभाओं की आवश्यकता है, जो जटिल तकनीकों को डिजाइन करने, विकसित करने और उनमें सुधार करने की क्षमता रखती हों। उन्होंने स्पष्ट किया कि तकनीकी प्रगति का वास्तविक महत्व केवल मशीनों की बढ़ती क्षमता में नहीं, बल्कि मानव बुद्धिमत्ता का विवेकपूर्ण उपयोग करके बेहतर भविष्य तैयार करने में है।

    अहमदाबाद में आयोजित कॉन्क्लेव ऑन हार्डवेयर, इनोवेशन, प्रोसेसिंग एंड सेमीकंडक्टर टेक्नोलॉजीज (चिप्स) 2026 को संबोधित करते हुए डॉ. अदाणी ने भारत की तकनीकी महत्वाकांक्षाओं के लिए शिक्षा, शोध और उद्योग के बीच सहयोग को महत्वपूर्ण बताया। सम्मेलन का उद्देश्य सेमीकंडक्टर क्षेत्र में उभरते अवसरों, तकनीकी चुनौतियों और आवश्यक कौशल पर चर्चा करना था। इसमें विभिन्न कंपनियों और संस्थानों के विशेषज्ञों ने हिस्सा लेकर इस क्षेत्र के भविष्य से जुड़े विषयों पर विचार साझा किए।

    सम्मेलन में क्वालकॉम, एनएक्सपी सेमीकंडक्टर्स, माइक्रोन टेक्नोलॉजी, सिनोप्सिस और इनफिनियन टेक्नोलॉजीज सहित कई कंपनियों के विशेषज्ञ शामिल हुए। कानूनी क्षेत्र से भी विशेषज्ञों ने चर्चा में भाग लिया। विचार-विमर्श के दौरान वायरलेस तकनीक, सेमीकंडक्टर डिजाइन, मेमोरी एवं स्टोरेज, पावर सिस्टम और कानूनी ढांचे से जुड़े विषयों पर ध्यान केंद्रित किया गया। इन क्षेत्रों को सेमीकंडक्टर की पूरी मूल्य शृंखला के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है।

    कार्यक्रम में तीन प्रमुख परिचर्चाएं आयोजित की गईं। पहली चर्चा भारत में सेमीकंडक्टर डिजाइन की संभावनाओं और देश की डिजाइन क्षमताओं को मजबूत करने के उपायों पर केंद्रित रही। दूसरी परिचर्चा में सेमीकंडक्टर विनिर्माण की भूमिका और भारत के तकनीकी भविष्य पर उसके संभावित प्रभावों पर विचार किया गया। तीसरे सत्र में सेमीकंडक्टर क्षेत्र में रोजगार के अवसरों, जरूरी कौशल और भविष्य में करियर बनाने के रास्तों पर चर्चा हुई। इन सत्रों के माध्यम से तकनीकी शिक्षा और उद्योग की वास्तविक जरूरतों के बीच अंतर को कम करने पर जोर दिया गया।

    इस सम्मेलन का आयोजन आईआईटी मंडी, वीएलएसआई सोसाइटी ऑफ इंडिया और सिरिल अमरचंद मंगलदास के सहयोग से किया गया। इसमें गुजरात स्टेट इलेक्ट्रॉनिक्स मिशन, सेमीकंडक्टर कंपनियों और विभिन्न शैक्षणिक संस्थानों के प्रतिनिधियों ने भी भाग लिया। चर्चाओं में शोध को प्रोत्साहित करने, तकनीकी शिक्षा की गुणवत्ता बढ़ाने और उद्योग की जरूरतों के अनुरूप प्रशिक्षण उपलब्ध कराने की आवश्यकता सामने आई।

    भारत का सेमीकंडक्टर क्षेत्र केवल चिप बनाने वाले संयंत्रों तक सीमित नहीं है। चिप डिजाइन, विनिर्माण और पैकेजिंग में विशेषज्ञता विकसित करना भी देश की दीर्घकालिक रणनीति का हिस्सा है। इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन ने इस दिशा में प्रयासों को गति दी है। गुजरात के धोलेरा और साणंद में चल रही परियोजनाएं भी राज्य में सेमीकंडक्टर उद्योग के विकास से जुड़ी हैं।

    कृत्रिम बुद्धिमत्ता यानी एआई के तेजी से विस्तार ने उन्नत चिप्स, डेटा सेंटर और भरोसेमंद ऊर्जा अवसंरचना की मांग बढ़ा दी है। ऐसे में सेमीकंडक्टर तकनीक का महत्व लगातार बढ़ रहा है। इस क्षेत्र में विकास के लिए तकनीकी विशेषज्ञों, शोधकर्ताओं और प्रशिक्षित इंजीनियरों की जरूरत भी बढ़ सकती है।

    अदाणी विश्वविद्यालय ने अहमदाबाद में प्रस्तावित अपने बहुविषयक वैश्विक परिसर में सेमीकंडक्टर डिजाइन, विनिर्माण और पैकेजिंग के क्षेत्र में विशेष विशेषज्ञता विकसित करने की योजना घोषित की है। इसके तहत युवा इंजीनियरों के लिए विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम, उद्योग में कार्यरत पेशेवरों के लिए कार्यकारी शिक्षा और शिक्षकों की क्षमता बढ़ाने से जुड़े कार्यक्रम शुरू करने की योजना है। इसका उद्देश्य शिक्षा और शोध को उद्योग की आवश्यकताओं से जोड़ना तथा भारत के सेमीकंडक्टर क्षेत्र के लिए भविष्य की कुशल प्रतिभाएं तैयार करना है।

  • सोने-चांदी की कीमतों में बड़ी गिरावट, एक सप्ताह में सोना 3.5 प्रतिशत और चांदी 7.8 प्रतिशत फिसली

    सोने-चांदी की कीमतों में बड़ी गिरावट, एक सप्ताह में सोना 3.5 प्रतिशत और चांदी 7.8 प्रतिशत फिसली


    नई दिल्ली ।
    वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं और ब्याज दरों को लेकर बढ़ती चिंताओं के बीच सोने और चांदी की कीमतों में इस सप्ताह तेज गिरावट दर्ज की गई। अंतरराष्ट्रीय बाजार से लेकर घरेलू वायदा कारोबार तक दोनों कीमती धातुओं पर बिकवाली का दबाव बना रहा। सोने की कीमतों में साप्ताहिक आधार पर करीब 3.5 प्रतिशत की गिरावट आई, जबकि चांदी 7.8 प्रतिशत फिसल गई। सोने का यह जून के बाद सबसे कमजोर साप्ताहिक प्रदर्शन बताया जा रहा है। वहीं, चांदी की कीमत नवंबर 2025 के बाद के निचले स्तर तक पहुंच गई।

    विशेषज्ञों के अनुसार, पश्चिम एशिया में बढ़ता तनाव, कच्चे तेल की ऊंची कीमतें और अमेरिकी फेडरल रिजर्व की ब्याज दरों को लंबे समय तक ऊंचा बनाए रखने की आशंका ने कीमती धातुओं के बाजार को प्रभावित किया है। आम तौर पर सोने को आर्थिक अनिश्चितता के दौरान सुरक्षित निवेश माना जाता है, लेकिन मौजूदा परिस्थितियों में महंगाई और मौद्रिक नीति से जुड़े जोखिमों ने इसकी कीमतों पर दबाव बढ़ाया है। सोना निवेशकों को नियमित ब्याज नहीं देता, इसलिए ऊंची ब्याज दरों के माहौल में अन्य ब्याज देने वाले निवेश विकल्प अपेक्षाकृत आकर्षक हो सकते हैं।

    घरेलू बाजार में भी गिरावट का असर साफ दिखाई दिया। मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज पर दिसंबर वायदा सोने का भाव गिरकर करीब 1,42,150 रुपये प्रति 10 ग्राम पर पहुंच गया। कारोबार के दौरान इसकी कीमत 1,42,079 रुपये प्रति 10 ग्राम तक फिसल गई। यह पिछले कारोबारी सत्र की तुलना में लगभग 1,230 रुपये यानी 0.86 प्रतिशत की गिरावट थी।

    चांदी की कीमतों में इससे भी अधिक कमजोरी दर्ज की गई। दिसंबर वायदा चांदी का भाव करीब 1,95,408 रुपये प्रति किलोग्राम पर आ गया। इसमें 4,191 रुपये यानी लगभग 2.1 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। लगातार बिकवाली के कारण चांदी का भाव दो लाख रुपये प्रति किलोग्राम के महत्वपूर्ण स्तर से नीचे बना रहा।

    अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी दोनों धातुओं की कीमतें नीचे आईं। कॉमेक्स पर सोना करीब 1.24 प्रतिशत गिरकर 4,010 डॉलर प्रति औंस के आसपास पहुंच गया। कारोबार के दौरान यह 3,989.10 डॉलर प्रति औंस तक फिसल गया, जो 20 जुलाई के बाद का सबसे निचला स्तर बताया गया। इसी तरह अंतरराष्ट्रीय बाजार में चांदी लगभग 1.9 प्रतिशत गिरकर 53.96 डॉलर प्रति औंस पर आ गई।

    कच्चे तेल की कीमतों में तेजी को इस गिरावट की प्रमुख वजहों में शामिल किया जा रहा है। पश्चिम एशिया में तनाव और हूती विद्रोहियों के हमलों के बीच ब्रेंट क्रूड का भाव 116.7 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुंच गया। तेल महंगा होने से वैश्विक महंगाई बढ़ने की आशंका रहती है। ऐसी स्थिति में केंद्रीय बैंक ब्याज दरों को लंबे समय तक ऊंचा रख सकते हैं, जिससे सोने और चांदी जैसी ब्याज नहीं देने वाली संपत्तियों की मांग प्रभावित हो सकती है।

    इसके अलावा, मजबूत अमेरिकी डॉलर और अमेरिकी बॉन्ड पर बढ़ती यील्ड ने भी सोने की मांग को कमजोर किया है। बाजार की नजर अमेरिकी फेडरल रिजर्व की आगामी बैठक और दिसंबर में संभावित ब्याज दरों से जुड़े फैसलों पर बनी हुई है। विशेषज्ञों के अनुसार, दिसंबर में ब्याज दर बढ़ने की संभावना को लेकर बाजार में चिंता बनी हुई है, हालांकि मौद्रिक नीति के वास्तविक फैसले आर्थिक आंकड़ों पर निर्भर करेंगे।

    आने वाले दिनों में अमेरिकी व्यक्तिगत उपभोग व्यय यानी पीसीई मुद्रास्फीति के आंकड़े महत्वपूर्ण रहेंगे। फेडरल रिजर्व महंगाई के आकलन में इस सूचकांक पर विशेष ध्यान देता है। इसके साथ यूरोपीय केंद्रीय बैंक की बैठक, चीन के आर्थिक आंकड़े और वैश्विक ऊर्जा बाजार की परिस्थितियां भी कीमतों को प्रभावित कर सकती हैं। यदि महंगाई ऊंची रहती है और ब्याज दरें लंबे समय तक सख्त बनी रहती हैं, तो सोने-चांदी पर दबाव जारी रह सकता है। हालांकि, भू-राजनीतिक तनाव या बड़ी आर्थिक अनिश्चितता बढ़ने पर सोने को सुरक्षित निवेश की मांग से दोबारा समर्थन मिल सकता है।

  • मध्य पूर्व में युद्ध का खतरा बढ़ने से कच्चा तेल छह महीने के उच्चतम स्तर पर, ब्रेंट 116 डॉलर पार

    मध्य पूर्व में युद्ध का खतरा बढ़ने से कच्चा तेल छह महीने के उच्चतम स्तर पर, ब्रेंट 116 डॉलर पार

    नई दिल्ली । मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव और अमेरिका तथा ईरान के बीच संभावित सैन्य टकराव की आशंकाओं ने अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल बाजार में हलचल बढ़ा दी है। शुक्रवार, 23 अक्टूबर 2026 को कच्चे तेल की कीमतें छह महीने के उच्चतम स्तर पर पहुंच गईं। ब्रेंट क्रूड का भाव 116 डॉलर प्रति बैरल के पार निकल गया, जबकि अमेरिकी कच्चे तेल की कीमत भी 102 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर पहुंच गई। क्षेत्र में सैन्य गतिविधियों और तेल आपूर्ति को लेकर बनी अनिश्चितता को कीमतों में तेजी की प्रमुख वजह माना जा रहा है।

    अंतरराष्ट्रीय बाजार में कारोबार के दौरान ब्रेंट क्रूड फ्यूचर्स की कीमत 2.60 प्रतिशत बढ़कर 116.13 डॉलर प्रति बैरल हो गई। यह 30 अप्रैल के बाद इसका सबसे ऊंचा स्तर रहा। वहीं, अमेरिकी बेंचमार्क वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट यानी डब्ल्यूटीआई क्रूड का भाव लगभग 2.90 प्रतिशत बढ़कर 102.56 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया। दोनों प्रमुख मानकों में तेजी ने वैश्विक ऊर्जा बाजार में बढ़ते दबाव को रेखांकित किया।

    साप्ताहिक प्रदर्शन के लिहाज से भी कच्चे तेल की कीमतों में मजबूती दिखाई दी। ब्रेंट क्रूड में सप्ताह के दौरान लगभग छह प्रतिशत की बढ़त दर्ज की गई। इसके साथ ही इसमें लगातार तीसरे सप्ताह तेजी बनी रही। दूसरी ओर, डब्ल्यूटीआई क्रूड के वायदा भाव में साप्ताहिक आधार पर करीब 3.5 प्रतिशत की वृद्धि हुई। कीमतों में लगातार हो रही बढ़ोतरी के पीछे भू-राजनीतिक परिस्थितियों और संभावित आपूर्ति व्यवधानों को महत्वपूर्ण कारक माना जा रहा है।

    बाजार में तेजी की एक प्रमुख वजह अमेरिका और ईरान के बीच दोबारा युद्ध शुरू होने की आशंका है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में कहा था कि अमेरिका फिलहाल ईरान के साथ बातचीत नहीं कर रहा है। उन्होंने यह भी संकेत दिया था कि जल्द ही कुछ बड़ा हो सकता है। उनके बयान के बाद दोनों देशों के बीच तनाव और संभावित सैन्य कार्रवाई को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है।

    इसी बीच, अमेरिका और इजरायल की सैन्य तैयारियों को लेकर सामने आई रिपोर्टों ने भी बाजार की चिंताएं बढ़ाई हैं। रिपोर्ट के अनुसार, दोनों देशों ने एक सीमित लेकिन सघन सैन्य अभियान की तैयारी के तहत अभ्यास तेज किए हैं। इसमें ईरान के पश्चिमी पड़ोसी इराक के ऊपर से उड़ान भरने जैसी गतिविधियां भी शामिल बताई गई हैं। इन अभ्यासों का उद्देश्य संभावित हमले की रणनीतियों का पूर्वाभ्यास करना बताया गया है।

    रिपोर्ट में संभावित लक्ष्यों के रूप में ईरान के ऊर्जा केंद्रों, परमाणु सुविधाओं तथा मिसाइलों और ड्रोन के भंडार का उल्लेख किया गया है। हालांकि, इन संभावित लक्ष्यों को लेकर किसी वास्तविक सैन्य कार्रवाई की पुष्टि नहीं हुई है। फिर भी, ऐसी परिस्थितियों में तेल उत्पादक क्षेत्र से आपूर्ति प्रभावित होने की आशंका बाजार में कीमतों को ऊपर ले जा सकती है।

    दूसरी ओर, ईरान की सेना की ओर से भी कड़ा रुख सामने आया है। ईरान के सेना प्रमुख ने कहा है कि अपनी क्षमताओं को मजबूत करने के बाद देश की सेना युद्ध के लिए पूरी तरह तैयार है। इस बयान ने क्षेत्रीय तनाव की गंभीरता को और उजागर किया है।

    इसके अतिरिक्त, सऊदी अरब पर हूती विद्रोहियों के लगातार हमलों के कारण भी तेल आपूर्ति को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है। मध्य पूर्व वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए महत्वपूर्ण क्षेत्र है। यहां सैन्य संघर्ष बढ़ने या तेल परिवहन में बाधा आने की आशंका से बाजार में कीमतों पर दबाव बढ़ सकता है। फिलहाल ब्रेंट और डब्ल्यूटीआई दोनों के भाव में तेजी के बीच निवेशकों की नजर क्षेत्र के घटनाक्रम और संभावित आपूर्ति प्रभावों पर बनी हुई है।

  • शेयर बाजार में जियो का ऐतिहासिक धमाका! 1 करोड़ आवेदन का आंकड़ा पार कर दुनिया में बनाया नया रिकॉर्ड

    शेयर बाजार में जियो का ऐतिहासिक धमाका! 1 करोड़ आवेदन का आंकड़ा पार कर दुनिया में बनाया नया रिकॉर्ड


    नई दिल्ली । रिलायंस इंडस्ट्रीज की टेलीकॉम कंपनी जियो प्लेटफॉर्म्स के आईपीओ ने निवेशकों के बीच जबरदस्त लोकप्रियता हासिल करते हुए एक नया इतिहास रच दिया है। कंपनी के आईपीओ को 1.2 करोड़ से अधिक आवेदन मिलने का दावा किया गया है। यह आंकड़ा भारतीय शेयर बाजार के इतिहास में किसी आईपीओ के लिए सबसे अधिक बताया जा रहा है। इसके साथ ही जियो प्लेटफॉर्म्स का इश्यू दुनिया का पहला ऐसा आईपीओ बन गया है जिसे एक करोड़ से ज्यादा आवेदन मिले हैं। इस उपलब्धि के साथ कंपनी ने वारी एनर्जीज के पिछले रिकॉर्ड को भी पीछे छोड़ दिया है। वारी एनर्जीज के आईपीओ को लगभग 97 लाख आवेदन मिले थे। जियो के आईपीओ को मिले इस शानदार रिस्पॉन्स ने शेयर बाजार में कंपनी को लेकर निवेशकों के उत्साह को साफ तौर पर जाहिर किया है।

    जियो प्लेटफॉर्म्स के आईपीओ की शुरुआत से ही निवेशकों की दिलचस्पी देखने को मिली। 21 अक्टूबर को खुला यह इश्यू महज दो घंटे के भीतर पूरी तरह सब्सक्राइब हो गया था। पहले दिन कंपनी के आईपीओ के लिए लगभग 30.5 लाख आवेदन आए। इसके बाद दूसरे दिन के अंत तक आवेदनों की संख्या बढ़कर 75 लाख के पार पहुंच गई। तीसरे दिन निवेशकों की भागीदारी ने एक करोड़ का आंकड़ा पार कर लिया। आईपीओ के अंतिम दिन तक आवेदन 1.2 करोड़ से अधिक हो गए। सब्सक्रिप्शन के आंकड़ों के मुताबिक इश्यू को कुल मिलाकर 22 गुना से ज्यादा बोलियां मिलीं। कंपनी के 19.75 करोड़ शेयरों के मुकाबले करीब 438 करोड़ शेयरों के लिए बोलियां लगाई गईं। योग्य संस्थागत खरीदारों की श्रेणी में भी भारी मांग रही और यह हिस्सा लगभग 70 गुना सब्सक्राइब हुआ।

    जियो प्लेटफॉर्म्स के इस आईपीओ का प्राइस बैंड 1065 रुपये से 1119 रुपये प्रति शेयर निर्धारित किया गया था। निवेशकों के लिए एक लॉट में 12 शेयर रखे गए थे। कंपनी ने इश्यू के अपर प्राइस बैंड पर लगभग 30213 करोड़ रुपये जुटाने की योजना बनाई थी। इसके आधार पर कंपनी का मूल्यांकन करीब 108 अरब डॉलर आंका गया। आईपीओ की एक खास बात यह भी है कि इसमें रिलायंस इंडस्ट्रीज या अन्य मौजूदा शेयरधारक अपनी हिस्सेदारी नहीं बेच रहे हैं। उपलब्ध विवरण के अनुसार इश्यू में नए शेयर जारी किए गए हैं।

    आईपीओ खुलने से पहले ही बड़े संस्थागत निवेशकों ने जियो प्लेटफॉर्म्स पर भरोसा जताया था। कंपनी ने 19 अक्टूबर को 212 एंकर निवेशकों से लगभग 8110 करोड़ रुपये जुटाए थे। इन निवेशकों को 1119 रुपये प्रति शेयर की दर से शेयर आवंटित किए गए। एंकर निवेशकों की श्रेणी में 2.5 लाख करोड़ रुपये से अधिक की बोलियां मिलने की बात कही गई। इसमें ब्लैकरॉक फिडेलिटी इन्वेस्टमेंट्स जीआईसी और अबू धाबी इन्वेस्टमेंट अथॉरिटी जैसे बड़े वैश्विक निवेशक शामिल थे।

    आईपीओ से जुटाई जाने वाली राशि का इस्तेमाल कंपनी अपनी कारोबारी योजनाओं को आगे बढ़ाने और वित्तीय स्थिति मजबूत करने के लिए करेगी। जियो प्लेटफॉर्म्स की योजना 27500 करोड़ रुपये तक अपनी पूर्ण स्वामित्व वाली कंपनी रिलायंस जियो इन्फोकॉम का कर्ज चुकाने में लगाने की है। शेष राशि का उपयोग पूंजीगत खर्च और कार्यशील पूंजी की जरूरतों को पूरा करने के लिए किया जाएगा। कुल मिलाकर जियो प्लेटफॉर्म्स के आईपीओ को मिला यह ऐतिहासिक रिस्पॉन्स भारतीय शेयर बाजार में बड़े सार्वजनिक निर्गमों के प्रति निवेशकों की बढ़ती दिलचस्पी को दर्शाता है। हालांकि आईपीओ में भारी मांग मिलने का मतलब यह नहीं है कि लिस्टिंग के बाद शेयर से मुनाफा होना तय है।

  • अदाणी पावर के मुनाफे में 141.5% की छलांग, दूसरी तिमाही में कमाई बढ़कर 7,019 करोड़ रुपये के पार

    अदाणी पावर के मुनाफे में 141.5% की छलांग, दूसरी तिमाही में कमाई बढ़कर 7,019 करोड़ रुपये के पार

    नई दिल्ली । अदाणी पावर ने वित्त वर्ष 2026-27 की दूसरी तिमाही में मजबूत वित्तीय प्रदर्शन दर्ज किया है। कंपनी का समेकित शुद्ध लाभ सालाना आधार पर 141.5 प्रतिशत बढ़कर 7,019.32 करोड़ रुपये हो गया। पिछले वित्त वर्ष की समान तिमाही में कंपनी ने 2,906.46 करोड़ रुपये का शुद्ध लाभ कमाया था। कंपनी की आय और परिचालन से जुड़े प्रमुख आंकड़ों में भी बढ़ोतरी दर्ज की गई। नतीजे ऐसे समय आए हैं, जब देश में बिजली की मांग और अधिकतम बिजली खपत में वृद्धि देखने को मिली है।

    दूसरी तिमाही में कंपनी का कुल राजस्व 39.4 प्रतिशत बढ़कर 19,950.60 करोड़ रुपये पर पहुंच गया, जबकि एक साल पहले इसी अवधि में यह 14,307.79 करोड़ रुपये था। इस दौरान ब्याज, कर, मूल्यह्रास और परिशोधन से पहले की कमाई यानी ईबीआईटीडीए 45.7 प्रतिशत बढ़कर 8,743.22 करोड़ रुपये रही। वहीं, परिचालन से प्राप्त राजस्व 29.8 प्रतिशत की वृद्धि के साथ 17,014.06 करोड़ रुपये तक पहुंच गया। निरंतर परिचालन से ईबीआईटीडीए में 18.5 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई और यह 6,320.97 करोड़ रुपये रहा।

    चालू वित्त वर्ष की पहली छमाही में भी कंपनी ने बेहतर प्रदर्शन किया। अप्रैल से सितंबर 2026 के बीच अदाणी पावर का शुद्ध लाभ लगभग दोगुना होकर 11,885.92 करोड़ रुपये हो गया। इसी अवधि में कुल राजस्व 36 प्रतिशत बढ़कर 39,272.90 करोड़ रुपये दर्ज किया गया। कंपनी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी शेरसिंह बी. ख्यालिया ने कहा कि कंपनी लाभप्रदता और परियोजनाओं को लागू करने के मामले में लगातार बेहतर प्रदर्शन कर रही है। उनके मुताबिक, भारत की दीर्घकालिक बिजली जरूरतों को पूरा करने में घरेलू कोयला आधारित बिजली उत्पादन की भूमिका महत्वपूर्ण बनी हुई है।

    कंपनी के अनुसार, वित्त वर्ष की दूसरी तिमाही में भारत की बिजली मांग 11.5 प्रतिशत बढ़कर 502 अरब यूनिट हो गई। कुल बिजली आपूर्ति में कोयला और लिग्नाइट आधारित उत्पादन की हिस्सेदारी 66 प्रतिशत रही। इसी दौरान देश की अधिकतम बिजली मांग 18 प्रतिशत बढ़कर 270 गीगावाट तक पहुंच गई। बिजली की बढ़ती जरूरतों का असर कंपनी की बिक्री पर भी दिखाई दिया।

    अदाणी पावर की बिजली बिक्री दूसरी तिमाही में बढ़कर 26.4 अरब यूनिट हो गई, जबकि पिछले वर्ष की समान अवधि में यह 23.7 अरब यूनिट थी। कंपनी का प्लांट लोड फैक्टर यानी पीएलएफ 62.8 प्रतिशत से बढ़कर 70.1 प्रतिशत हो गया। पीएलएफ से पता चलता है कि किसी बिजली संयंत्र की उपलब्ध उत्पादन क्षमता का इस्तेमाल किस स्तर पर किया गया। कंपनी की कुल परिचालन क्षमता 18,150 मेगावाट रही।

    दीर्घकालिक बिजली खरीद समझौतों के तहत बिक्री 29.7 प्रतिशत बढ़कर 23.4 अरब यूनिट हो गई। इस श्रेणी में प्रति यूनिट प्राप्त टैरिफ भी 12.7 प्रतिशत बढ़कर 6.4 रुपये रहा। इसके विपरीत, अल्पकालिक और मर्चेंट बाजार में प्रति यूनिट प्राप्ति 33.1 प्रतिशत बढ़कर 7.2 रुपये हो गई, लेकिन इस श्रेणी में बिक्री की मात्रा 43 प्रतिशत घट गई। कंपनी के मुताबिक, अतिरिक्त खुली क्षमता को मध्यम अवधि के बिजली आपूर्ति अनुबंधों में स्थानांतरित किए जाने के कारण ऐसा हुआ।

    कंपनी का मानना है कि बिजली की बढ़ती मांग, औद्योगिक गतिविधियों और शहरीकरण से आने वाली तिमाहियों में क्षेत्र को समर्थन मिल सकता है। हालांकि, भविष्य का प्रदर्शन बिजली की मांग, उत्पादन, बिक्री और बाजार की परिस्थितियों पर निर्भर करेगा।

  • शेयर बाजार में लगातार चौथे दिन गिरावट, सेंसेक्स 125 अंक टूटा, मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में भारी बिकवाली

    शेयर बाजार में लगातार चौथे दिन गिरावट, सेंसेक्स 125 अंक टूटा, मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में भारी बिकवाली

    नई दिल्ली । भारतीय शेयर बाजार में शुक्रवार, 23 अक्टूबर 2026 को लगातार चौथे कारोबारी दिन गिरावट दर्ज की गई। कारोबार समाप्त होने पर सेंसेक्स 125.56 अंक यानी 0.17 प्रतिशत टूटकर 73,123.83 पर बंद हुआ। वहीं, निफ्टी 87.65 अंक यानी 0.39 प्रतिशत गिरकर 22,600.00 के स्तर पर आ गया। प्रमुख सूचकांकों में गिरावट के साथ बाजार में व्यापक बिकवाली भी देखने को मिली। खास तौर पर मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में दबाव अधिक रहा, जिससे निवेशकों की चिंता बढ़ी।

    शुक्रवार के कारोबार में छोटे और मध्यम आकार की कंपनियों के शेयर प्रमुख सूचकांकों की तुलना में अधिक कमजोर रहे। निफ्टी मिडकैप 100 इंडेक्स 1,263.30 अंक यानी 2.21 प्रतिशत गिरकर 55,800.65 पर बंद हुआ। इसी तरह निफ्टी स्मॉलकैप 100 इंडेक्स में 536.45 अंक यानी 2.94 प्रतिशत की गिरावट आई और यह 17,739.45 पर बंद हुआ। इन आंकड़ों से स्पष्ट हुआ कि बाजार में कमजोरी केवल चुनिंदा बड़ी कंपनियों तक सीमित नहीं रही, बल्कि इसका असर व्यापक स्तर पर दिखाई दिया।

    अधिकांश क्षेत्रीय सूचकांक भी लाल निशान में बंद हुए। निफ्टी मेटल में 2.71 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई, जबकि कंज्यूमर ड्यूरेबल्स इंडेक्स 2.63 प्रतिशत और इंडिया डिफेंस इंडेक्स 2.60 प्रतिशत नीचे आया। रियल्टी इंडेक्स में 2.38 प्रतिशत तथा सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों से जुड़े निफ्टी पीएसयू बैंक इंडेक्स में 2.26 प्रतिशत की कमजोरी रही। निफ्टी एनर्जी 1.66 प्रतिशत, निफ्टी पीएसई 1.64 प्रतिशत और निफ्टी इंडिया मैन्युफैक्चरिंग 1.57 प्रतिशत गिरकर बंद हुए।

    इसके अलावा निफ्टी कमोडिटीज में 1.41 प्रतिशत, निफ्टी मीडिया में 1.33 प्रतिशत और निफ्टी फार्मा में 1.04 प्रतिशत की गिरावट आई। अलग-अलग क्षेत्रों में एक साथ आई कमजोरी ने बाजार की व्यापक स्थिति को प्रभावित किया। इससे संकेत मिला कि बिकवाली का दबाव कई उद्योगों तक फैला हुआ था।

    सेंसेक्स में शामिल कुछ कंपनियों के शेयरों ने गिरते बाजार के बीच बढ़त दर्ज की। इटरनल, एलएंडटी, टीसीएस, अल्ट्राटेक सीमेंट, एशियन पेंट्स, मारुति सुजुकी, एक्सिस बैंक, इन्फोसिस और आईसीआईसीआई बैंक बढ़त के साथ बंद हुए। दूसरी ओर टाटा स्टील, ट्रेंट, टेक महिंद्रा, बीईएल, इंटरग्लोब एविएशन, बजाज फिनसर्व, कोटक महिंद्रा बैंक, टाइटन और बजाज फाइनेंस समेत कई शेयरों में गिरावट रही। एनटीपीसी, एसबीआई, एचयूएल, सन फार्मा, भारती एयरटेल, आईटीसी और एमएंडएम के शेयर भी नुकसान में बंद हुए।

    बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, मौजूदा दौर में सबसे बड़ी चिंता मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में प्रमुख सूचकांकों के मुकाबले ज्यादा गिरावट है। ऊंचे मूल्यांकन को लेकर चिंता, कर्ज लेकर किए गए निवेश वाली पोजीशन में कमी, कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें और कमजोर वैश्विक संकेत बाजार पर दबाव डाल रहे हैं। इंडिया वीआईएक्स में बढ़ोतरी को भी निकट भविष्य में उतार-चढ़ाव की आशंका से जोड़कर देखा जा रहा है।

    मध्य पूर्व में जारी तनाव के कारण कच्चे तेल की कीमतें ऊंची बने रहने की आशंका भी निवेशकों के लिए चिंता का विषय है। इसके साथ ही कृत्रिम बुद्धिमत्ता यानी एआई से जुड़े घटनाक्रमों के बीच वैश्विक शेयर बाजारों में बिकवाली का असर जोखिम लेने की निवेशकों की क्षमता पर पड़ रहा है। विशेषज्ञों के मुताबिक, आगे बाजार की दिशा महंगाई के आंकड़ों और प्रमुख केंद्रीय बैंकों के फैसलों से प्रभावित हो सकती है। ऐसे माहौल में कंपनियों की कमाई की स्पष्टता और शेयरों का उचित मूल्यांकन निवेश संबंधी फैसलों में अहम भूमिका निभा सकते हैं।

  • UPI PIN डालते ही कैसे पहुंचते हैं दूसरे खाते में पैसे, जानें यूपीआई पेमेंट का पूरा तरीका..

    UPI PIN डालते ही कैसे पहुंचते हैं दूसरे खाते में पैसे, जानें यूपीआई पेमेंट का पूरा तरीका..

    नई दिल्ली । आज के डिजिटल दौर में पैसे भेजने और भुगतान करने के लिए यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस यानी यूपीआई का इस्तेमाल तेजी से बढ़ा है। दुकानों पर खरीदारी करने, बिजली का बिल भरने, ऑनलाइन सामान खरीदने या किसी परिचित को रकम भेजने जैसे काम अब मोबाइल के जरिए कुछ ही सेकंड में पूरे हो जाते हैं। Google Pay, PhonePe, Paytm और BHIM जैसे ऐप के माध्यम से लोग सीधे अपने बैंक खाते से भुगतान कर सकते हैं। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि यूपीआई पिन डालते ही एक खाते से पैसे कटकर दूसरे खाते में कैसे पहुंच जाते हैं? इसके पीछे बैंकिंग व्यवस्था और डिजिटल भुगतान नेटवर्क की एक निर्धारित प्रक्रिया काम करती है।

    यूपीआई एक डिजिटल भुगतान प्रणाली है, जिसे नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) ने विकसित किया है। इसकी मदद से दो बैंक खातों के बीच तुरंत धनराशि ट्रांसफर की जा सकती है। इस व्यवस्था में हर बार बैंक खाता संख्या या आईएफएससी कोड दर्ज करना जरूरी नहीं होता। उपयोगकर्ता यूपीआई आईडी, पंजीकृत मोबाइल नंबर या क्यूआर कोड के माध्यम से भी भुगतान कर सकते हैं। इससे लेनदेन की प्रक्रिया आसान और तेज हो जाती है।

    मान लीजिए कि आपको किसी दुकानदार को 500 रुपये देने हैं। इसके लिए आप अपने मोबाइल में यूपीआई ऐप खोलते हैं और दुकानदार का क्यूआर कोड स्कैन करते हैं। इसके बाद भुगतान की जाने वाली रकम दर्ज करके आगे बढ़ते हैं। लेनदेन को अधिकृत करने के लिए आपको अपना यूपीआई पिन डालना होता है। पिन दर्ज करने के बाद ऐप भुगतान का अनुरोध संबंधित बैंकिंग प्रणाली तक पहुंचाता है। इसके बाद यूपीआई नेटवर्क इस अनुरोध को लेनदेन में शामिल बैंकों के बीच आगे बढ़ाता है।

    सबसे पहले भुगतान करने वाले व्यक्ति का बैंक जरूरी जांच करता है। इसमें यूपीआई पिन का सत्यापन और खाते में उपलब्ध राशि की जांच शामिल होती है। यदि पिन सही है, खाते में पर्याप्त बैलेंस है और अन्य आवश्यक जांच पूरी हो जाती हैं, तो बैंक भुगतान को मंजूरी देकर खाते से 500 रुपये काट लेता है। यदि पिन गलत हो या खाते में पर्याप्त राशि उपलब्ध न हो, तो लेनदेन असफल हो सकता है।

    इसके बाद यूपीआई नेटवर्क प्राप्तकर्ता के बैंक तक भुगतान से जुड़ी जानकारी पहुंचाता है। प्राप्तकर्ता बैंक संबंधित खाते में निर्धारित रकम जमा कर देता है। इस तरह भुगतान करने वाले व्यक्ति के खाते से पैसे निकलकर दूसरे व्यक्ति के खाते में पहुंच जाते हैं। पूरी प्रक्रिया इलेक्ट्रॉनिक तरीके से होती है, इसलिए सामान्य परिस्थितियों में लेनदेन कुछ ही सेकंड में पूरा हो जाता है। हालांकि, ग्राहक के खाते में राशि दिखने और बैंकों के बीच लेनदेन का अंतिम निपटान होने की प्रक्रियाएं अलग-अलग हो सकती हैं।

    यूपीआई भुगतान में पिन की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण है। यह भुगतान करने वाले व्यक्ति की पहचान और लेनदेन को अधिकृत करने में मदद करता है। इसलिए अपना यूपीआई पिन किसी अन्य व्यक्ति के साथ साझा नहीं करना चाहिए। मोबाइल या यूपीआई ऐप तक किसी की पहुंच होने मात्र से वह सामान्य भुगतान पूरा नहीं कर सकता, लेकिन पिन साझा करने या धोखाधड़ी के कारण जोखिम बढ़ सकता है।

    सबसे जरूरी बात यह है कि यूपीआई पिन का इस्तेमाल पैसे भेजने या भुगतान करने के लिए किया जाता है, पैसे प्राप्त करने के लिए नहीं। यदि कोई व्यक्ति रकम भेजने के नाम पर आपसे पिन डालने को कहता है, तो सावधान रहें। अनजान भुगतान अनुरोधों को स्वीकार करने से पहले उनकी जांच करें और किसी भी स्थिति में अपना पिन या गोपनीय बैंकिंग जानकारी साझा न करें।