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  • ईरान के गेराश इलाके में 4.3 तीव्रता का भूकंप, अमेरिका-इजरायल के हमलों के बीच बढ़ी मुश्किलें

    ईरान के गेराश इलाके में 4.3 तीव्रता का भूकंप, अमेरिका-इजरायल के हमलों के बीच बढ़ी मुश्किलें


    तेहरान। अमेरिका और इजरायल के सैन्य हमलों के बीच मंगलवार दोपहर ईरान में भूकंप के झटके महसूस किए गए। दक्षिणी ईरान के गेराश इलाके में आए इस भूकंप की तीव्रता रिक्टर स्केल पर 4.3 मापी गई। सैन्य हमलों से पहले ही तनाव झेल रहे देश में भूकंप के झटकों ने आम लोगों और प्रशासन की चिंता और बढ़ा दी।

    यूएस जियोलॉजिकल सर्वे के मुताबिक गेराश के पास आया यह 4.3 मैग्नीट्यूड का भूकंप जमीन से लगभग 10 किलोमीटर की गहराई पर दर्ज किया गया। फिलहाल किसी बड़े नुकसान या जनहानि की तत्काल सूचना नहीं है, हालांकि स्थानीय प्रशासन का कहना है कि पूरी स्थिति स्पष्ट होने में कुछ समय लग सकता है।

    हमलों के बीच कांपा ईरान
    इजरायल और अमेरिका ने शनिवार से ईरान पर अपने हमले तेज कर रखे हैं। इन एयरस्ट्राइक में देश के कई हिस्सों में भारी तबाही की खबरें हैं। मंगलवार को तेहरान से लगभग 800 किलोमीटर दक्षिण-पूर्व स्थित केरमान एयर बेस पर हुए हमले में कम से कम 13 ईरानी सैनिकों के मारे जाने की सूचना है। बताया गया है कि एक सैन्य हेलीकॉप्टर को निशाना बनाकर हमला किया गया।

    अमेरिका और इजरायल का कहना है कि उनका उद्देश्य ईरान के मिसाइल भंडार और सुरक्षा ढांचे को पूरी तरह ध्वस्त करना है। इन हमलों में ईरान के सुप्रीम लीडर अली खामेनेई समेत कई वरिष्ठ नेता और सैन्य अधिकारी मारे गए हैं।

    लंबे अभियान की तैयारी
    इजरायली सेना के प्रवक्ता लेफ्टिनेंट कर्नल नदाव शोशानी ने कहा है कि उनकी सेना ईरान में कई हफ्तों तक चलने वाले अभियान की तैयारी कर रही है। हालांकि फिलहाल जमीनी सेना उतारने की कोई योजना नहीं है और हवाई हमलों के जरिए ही ईरान की सैन्य क्षमता और सत्ता ढांचे को कमजोर किया जाएगा।

    ईरान की ओर से भी जवाबी कार्रवाई जारी है। मिसाइल हमलों के जरिए इजरायल और अरब देशों में स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया गया है। ईरान ने इजरायल के अलावा सऊदी अरब, यूएई, कतर, कुवैत और बहरीन में मौजूद अमेरिकी बेस पर मिसाइलें दागी हैं। सैन्य तनाव के इस दौर में आए भूकंप ने हालात को और जटिल बना दिया है, जिससे प्रभावित इलाकों में दहशत और अनिश्चितता का माहौल बना हुआ है।

  • कतर सरकार की सख्त अपील: घटनास्थल की फोटो-वीडियो सोशल मीडिया पर न करें पोस्ट

    कतर सरकार की सख्त अपील: घटनास्थल की फोटो-वीडियो सोशल मीडिया पर न करें पोस्ट


    नई दिल्ली पश्चिम एशिया में जारी युद्ध के चौथे दिन कतर और बहरीन की सरकारों ने नागरिकों के लिए अहम सार्वजनिक नोटिस जारी किए हैं। कतर के आंतरिक मंत्रालय ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लोगों से अपील की है कि वे किसी भी घटना से जुड़ी वीडियो क्लिप या तस्वीरें साझा न करें और घटनास्थल के आसपास इकट्ठा होने से बचें।

    मंत्रालय ने चेतावनी दी है कि चल रहे फील्ड ऑपरेशन या घटनास्थल से जुड़ा कंटेंट शूट कर उसे प्रकाशित करना कानूनी जवाबदेही का कारण बन सकता है। बयान में कहा गया कि ऐसी गतिविधियों से संबंधित अधिकारियों के काम में बाधा आती है, जिससे रिस्पॉन्स स्पीड और सार्वजनिक सुरक्षा प्रभावित हो सकती है।

    भीड़ न जुटाएं, अफवाहों से बचें
    कतर के अधिकारियों ने साफ कहा है कि किसी भी दुर्घटना या हमले की जगह पर जाने, भीड़ लगाने या वहां की गतिविधियों को रिकॉर्ड कर सोशल मीडिया पर डालने से बचें। सरकार का जोर इस बात पर है कि संवेदनशील हालात में सुरक्षा एजेंसियों को बिना व्यवधान काम करने दिया जाए।

    Ministry of Interior Bahrain की भी चेतावनी
    इसी बीच बहरीन के आंतरिक मंत्रालय ने भी नागरिकों और निवासियों से शांत और सतर्क रहने की अपील की है। एक्स पर जारी संदेश में बताया गया कि सायरन बज चुका है और सभी लोग अपने नजदीकी सुरक्षित स्थानों पर चले जाएं। मंत्रालय ने लोगों से संयम बरतने और आधिकारिक निर्देशों का पालन करने को कहा है।

    तेहरान में एयरस्ट्राइक की खबर
    ईरान के ‘शारघ’ अखबार के मुताबिक, तेहरान के डाउनटाउन इलाके में पुरानी संसद भवन के पास एयरस्ट्राइक हुई है। हमला वलियासर और जामी स्ट्रीट के चौराहे के पास बताया जा रहा है, जहां कई सांस्कृतिक स्थल और संग्रहालय स्थित हैं। फिलहाल किसी के हताहत होने की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।

    Islamic Revolutionary Guard Corps का दावा
    आईआरजीसी ने दावा किया है कि उसने बहरीन के शेख ईसा इलाके में स्थित एक अमेरिकी एयर बेस पर बड़ा ड्रोन और मिसाइल हमला किया। संगठन के अनुसार 20 ड्रोन और तीन मिसाइलें दागी गईं, जिससे “एयर बेस की मुख्य कमांड और मुख्यालय इमारत तबाह हो गई और ईंधन टैंक में आग लग गई।” इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है।

    बढ़ती मानवीय चिंता
    अमेरिका स्थित मानवाधिकार संस्था Human Rights Activists News Agency (एचआरएएनए) के अनुसार, संघर्ष शुरू होने के बाद से ईरान में 700 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है। सोमवार शाम तक कम से कम 742 लोगों के मारे जाने की बात कही गई, जिनमें 176 बच्चे शामिल बताए गए हैं। 900 से ज्यादा नागरिक घायल हुए हैं। संस्था का कहना है कि वह अन्य सैकड़ों मौतों की रिपोर्ट की पुष्टि कर रही है।

    क्षेत्र में बढ़ता तनाव
    कतर और बहरीन की एडवाइजरी इस बात का संकेत है कि खाड़ी क्षेत्र में हालात बेहद संवेदनशील बने हुए हैं। सरकारें एक ओर सुरक्षा बलों को सक्रिय रखे हुए हैं, वहीं दूसरी ओर नागरिकों से संयम और जिम्मेदारी की अपील कर रही हैं।  मानना है कि ऐसे समय में सोशल मीडिया पर अनियंत्रित तस्वीरें और वीडियो न केवल अफवाहों को बढ़ा सकते हैं, बल्कि सैन्य और सुरक्षा अभियानों को भी प्रभावित कर सकते हैं।

  • अमेरिका-इजराइल का संयुक्त हमला, ईरान परमाणु विवाद में 742 मौतों के बाद सुरक्षा अलर्ट

    अमेरिका-इजराइल का संयुक्त हमला, ईरान परमाणु विवाद में 742 मौतों के बाद सुरक्षा अलर्ट



    नई दिल्ली। अमेरिका और इजराइल के संयुक्त हमलों के बीच ईरान में संकट गहराता जा रहा है। यह संघर्ष अब चौथे दिन में प्रवेश कर चुका है। अमेरिका के स्पेशल प्रतिनिधि स्टीव विटकॉफ ने स्पष्ट किया कि ईरान के साथ परमाणु समझौते की अंतिम कोशिश भी नाकाम रही। अमेरिका ने ईरान को प्रस्ताव दिया था कि वह अगले 10 साल तक यूरेनियम इनरिचमेंट पूरी तरह बंद कर दे, और बदले में अमेरिका न्यूक्लियर फ्यूल उपलब्ध कराने को तैयार था। हालांकि, ईरान ने इस प्रस्ताव को अस्वीकार कर दिया। बातचीत टूटते ही अमेरिका और इजराइल ने मिलकर सैन्य कार्रवाई शुरू कर दी।

    इस संघर्ष में अब तक ईरान में 742 लोगों की मौत हो चुकी है, जिनमें 176 बच्चे शामिल हैं। घायल हुए लोगों की संख्या 750 से अधिक है। इस हिंसा ने पूरे क्षेत्र में भय और असुरक्षा की स्थिति पैदा कर दी है। लेबनान के बेरूत में इजराइली सेना ने हिज्बुल्लाह से जुड़े अल-मनार टीवी स्टेशन की इमारत को निशाना बनाया, जिससे प्रसारण कुछ समय के लिए बाधित हुआ। हालांकि, हमले के बाद प्रसारण फिर से शुरू कर दिया गया।

    ईरान के मिनाब शहर में गर्ल्स स्कूल पर हुए हमले में मारी गई 165 लड़कियों का अंतिम संस्कार भी हुआ। इस दौरान हजारों लोग इकट्ठा हुए, और एक मां ने मंच से अमेरिका पर हमले का आरोप लगाया। भीड़ ने ‘अमेरिका मुर्दाबाद’, ‘इजराइल मुर्दाबाद’ और ‘नो सरेंडर’ जैसे नारे लगाए। ईरानी मीडिया ने हमले का आरोप इजराइल पर लगाया, जबकि इजराइली सेना ने इसे नकारा।

    इजराइल के प्रधानमंत्री नेतन्याहू ने कहा कि ईरान के खिलाफ युद्ध लंबा और अंतहीन नहीं होगा। उनका कहना है कि यह संघर्ष क्षेत्र में स्थायी शांति लाने का अवसर बन सकता है। उन्होंने पहले हुए अब्राहम अकॉर्ड्स का हवाला देते हुए कहा कि अमेरिका के साथ मिलकर अब और देशों के साथ शांति समझौते भी संभव हैं।

    अमेरिका के उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने बताया कि राष्ट्रपति ट्रम्प अमेरिका को लंबी और अनिश्चित लड़ाई में नहीं फंसने देंगे। उन्होंने कहा कि ईरान पर हमला विशेष रणनीति के तहत किया गया है, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि ईरान के पास परमाणु हथियार न हों। ट्रम्प की अनुमति के बिना कोई युद्ध लंबे समय तक जारी नहीं रहेगा, जिससे अमेरिका को इराक और अफगानिस्तान जैसी लंबी लड़ाइयों का सामना नहीं करना पड़ेगा।

    सुरक्षा के मद्देनजर अमेरिका ने जॉर्डन, बहरीन और इराक से गैर-जरूरी सरकारी कर्मचारियों और उनके परिवारों को सुरक्षित स्थानों पर जाने की चेतावनी दी है। जॉर्डन और बहरीन में ईरान से ड्रोन और मिसाइल हमले का खतरा है, जबकि इराक में हिंसा और अपहरण का भी जोखिम बना हुआ है। अमेरिकी दूतावासों में केवल आवश्यक स्टाफ ही रहेंगे, और फ्लाइट्स रद्द होने के कारण नागरिकों को सुरक्षित निकासी का निर्देश दिया गया है।

    अमेरिका, इजराइल और ईरान के बीच बढ़ते तनाव ने मध्य-पूर्व की सुरक्षा स्थिति को गंभीर बना दिया है। अंतरराष्ट्रीय समुदाय ने शांति बहाल करने और संघर्ष को नियंत्रित करने के लिए तुरंत कदम उठाने की आवश्यकता पर जोर दिया है। इस बीच अमेरिका और इजराइल की मिलीजुली कार्रवाई, ईरानी नागरिकों की सुरक्षा और क्षेत्रीय स्थिरता के लिए नए संकट की घंटी साबित हो रही है।

  • खाड़ी युद्ध से प्रभावित भारत का चावल निर्यात, लाखों करोड़ रुपये का स्टॉक समंदर में…

    खाड़ी युद्ध से प्रभावित भारत का चावल निर्यात, लाखों करोड़ रुपये का स्टॉक समंदर में…


    नई दिल्ली : ईरान-इजरायल युद्ध की गर्मी Iran और होर्मुज जलडमरूमध्य के बंद होने का असर अब भारतीय बासमती चावल के निर्यात पर भी पड़ रहा है। खाड़ी देशों में पानी के जहाजों का आवागमन रुक जाने के कारण भारत से निर्यात होने वाला चावल फंसा हुआ है। इस वजह से न केवल कच्चे तेल और नेचुरल गैस का आयात प्रभावित हुआ है, बल्कि भारत का बासमती चावल भी समय पर नहीं पहुंच पा रहा है।

    ऑल इंडिया राइस एक्सपोर्टर्स एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष विजय सेतिया के मुताबिक, भारत से खाड़ी देशों को भेजा जाने वाला चावल का ट्रांजिट समय लगभग 40 दिन का होता है। इसमें भारतीय बंदरगाह पर लगने वाला समय, जहाजों पर यात्रा का समय और डेस्टिनेशन कंट्री के बंदरगाह पर लगने वाला समय शामिल है। अभी हालात की वजह से निर्यात ठहरा हुआ है, लेकिन इससे पहले भेजे गए लगभग छह लाख टन बासमती चावल बंदरगाहों, समंदर में या गंतव्य देशों के पोर्ट पर फंसे हैं।

    निर्यातकों का कहना है कि इस समय अटके हुए भारतीय बासमती चावल का वैल्यू पांच से छह हजार करोड़ रुपये है। इतने बड़े कंशाइनमेंट के फंसने के कारण नए कंशाइनमेंट की पैकिंग और बैगिंग का काम फिलहाल रोक दिया गया है। जब हालात सामान्य होंगे, तब यह काम फिर से शुरू किया जाएगा।

    भारत से हर साल करीब 60 लाख टन बासमती चावल का निर्यात होता है, जिसमें से लगभग 70 फीसदी खाड़ी देशों को जाता है। इसका मतलब सालाना करीब 45 लाख टन बासमती चावल खाड़ी देशों में भेजा जाता है। इनमें से छह से सात लाख टन का निर्यात अकेले ईरान को होता रहा है। ईरान को निर्यात का रिकॉर्ड 14 लाख टन तक पहुंच चुका है।

    अब जबकि खाड़ी में युद्ध छिड़ गया है, भारत के निर्यातकों के सामने बड़ी चुनौतियां खड़ी हो गई हैं। न केवल वर्तमान कंशाइनमेंट फंसा है, बल्कि भविष्य में खाड़ी देशों को निर्यात की योजनाओं पर भी संकट मंडरा रहा है। यह स्थिति भारत के बासमती निर्यातकों और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला दोनों के लिए तनावपूर्ण स्थिति पैदा कर रही है।

  • स्वच्छ ऊर्जा बनेगी भारतीय कंपनियों की नई ताकत, दुनिया के बाजारों में मिलेगा मौका: पीएम मोदी

    स्वच्छ ऊर्जा बनेगी भारतीय कंपनियों की नई ताकत, दुनिया के बाजारों में मिलेगा मौका: पीएम मोदी


    नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने ईरान पर की गई हालिया सैन्य कार्रवाई का जोरदार बचाव किया है। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि अगर यह कदम अभी नहीं उठाया जाता, तो भविष्य में ईरान को रोक पाना लगभग असंभव हो जाता। उनके मुताबिक यह हमला महज जवाबी कार्रवाई नहीं, बल्कि वैश्विक सुरक्षा के लिहाज से एक रणनीतिक और समयबद्ध निर्णय था।

    ‘नागरिकों को निशाना बनाता है तेहरान’
    फॉक्स न्यूज को दिए इंटरव्यू में नेतन्याहू ने आरोप लगाया कि ईरान जानबूझकर आम नागरिकों को निशाना बना रहा है, जबकि इजरायल और अमेरिका की कार्रवाई आतंकवादियों और सैन्य ढांचों पर केंद्रित है। उन्होंने कहा, “यही तेहरान और हमारे बीच मूल अंतर है। वे नागरिकों को निशाना बनाते हैं, हम आतंकियों को।”

    प्रधानमंत्री ने हालिया बैलिस्टिक मिसाइल हमलों का जिक्र करते हुए कहा कि ऐसी मिसाइलें “टीएनटी से भरी बस की तरह होती हैं, जो मैक 8 की रफ्तार से आकर गिरती हैं।” उनके अनुसार, एक हमले में नौ लोगों की मौत हुई। उन्होंने इसे ‘सामूहिक हत्या’ करार दिया और कहा कि दुनिया को ऐसे खतरों से बचाना जरूरी है।

    परमाणु और मिसाइल कार्यक्रम बना कारण
    नेतन्याहू का कहना है कि इजरायल ने पहले भी ईरान के परमाणु और बैलिस्टिक मिसाइल ठिकानों पर प्रहार किया था, लेकिन इसके बावजूद तेहरान ने अपनी सैन्य क्षमताओं को और आगे बढ़ाया। “हमें लगा था कि वे सबक सीखेंगे, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। वे सुधार से परे हैं और अमेरिका को नष्ट करने के लक्ष्य को लेकर कट्टर हैं,” उन्होंने कहा।

    उन्होंने दावा किया कि ईरान नए भूमिगत ठिकाने बना रहा था, जिससे उसका परमाणु और मिसाइल कार्यक्रम भविष्य की किसी भी सैन्य कार्रवाई से सुरक्षित हो सकता था। यदि ये ठिकाने पूरी तरह तैयार हो जाते, तो इजरायल या अमेरिका के लिए उन्हें निष्क्रिय करना बेहद कठिन हो जाता।

    ‘देरी का मतलब होता रणनीतिक हार’
    नेतन्याहू ने स्पष्ट किया कि “अगर अभी कार्रवाई नहीं करते, तो भविष्य में कोई कदम उठाना संभव नहीं होता।” उनके अनुसार, ईरान न केवल इजरायल बल्कि अमेरिका और अन्य देशों को भी निशाना बना सकता था, उन्हें ब्लैकमेल कर सकता था और क्षेत्रीय संतुलन को पूरी तरह बिगाड़ सकता था।

    उन्होंने कहा कि यह सिर्फ इजरायल की सुरक्षा का सवाल नहीं, बल्कि व्यापक वैश्विक स्थिरता का मुद्दा है। “हमें अपनी दुनिया को इन लोगों से बचाना होगा,” उन्होंने दोहराया।

    ट्रंप की सराहना, गठबंधन पर भरोसा
    इजरायली प्रधानमंत्री ने अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump की सराहना करते हुए कहा कि ऐसी निर्णायक कार्रवाई के लिए “पक्के इरादे वाले राष्ट्रपति” की जरूरत होती है। उन्होंने कहा, “हम उनके बहुत मजबूत और काबिल साझेदार हैं। हमारा गठबंधन आज बेहद मजबूत है।”

    नेतन्याहू के मुताबिक, अमेरिका और इजरायल के बीच रणनीतिक तालमेल ने इस कार्रवाई को संभव बनाया। उन्होंने संकेत दिया कि यह कदम लंबे समय से मिल रही खुफिया जानकारियों और सुरक्षा आकलन के आधार पर उठाया गया।

    बढ़ता तनाव, दुनिया की नजरें
    ईरान पर हमले और उसके बाद की जवाबी कार्रवाइयों से पश्चिम एशिया में तनाव चरम पर पहुंच गया है। अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नजर अब इस बात पर है कि यह टकराव सीमित दायरे में रहेगा या व्यापक क्षेत्रीय संघर्ष का रूप ले सकता है।

    नेतन्याहू ने हालांकि साफ कर दिया है कि उनके मुताबिक यह कार्रवाई टाली नहीं जा सकती थी। “हमें अभी करना था और हमने किया। वरना ईरान की सरकार भविष्य की किसी भी कार्रवाई से सुरक्षित हो जाती,” उन्होंने कहा।

  • ईरान पर हमला क्यों था जरूरी? इजरायली पीएम बोले– खतरा बढ़ने से पहले लिया एक्शन

    ईरान पर हमला क्यों था जरूरी? इजरायली पीएम बोले– खतरा बढ़ने से पहले लिया एक्शन


    नई दिल्ली। इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने ईरान के खिलाफ हालिया सैन्य कार्रवाई को “जरूरी और समयबद्ध” बताते हुए कहा कि अगर अभी कदम नहीं उठाया जाता, तो भविष्य में कार्रवाई करना लगभग असंभव हो जाता। फॉक्स न्यूज को दिए इंटरव्यू में नेतन्याहू ने आरोप लगाया कि ईरान जानबूझकर आम नागरिकों को निशाना बना रहा है, जबकि इजरायल और अमेरिका “आतंकियों” पर फोकस कर रहे हैं।

    बैलिस्टिक मिसाइलों पर तीखी टिप्पणी
    नेतन्याहू ने ईरान के बैलिस्टिक मिसाइल हमलों को बेहद खतरनाक बताते हुए कहा कि ऐसी मिसाइल “टीएनटी से भरी बस की तरह होती है, जो मैक 8 की रफ्तार से आकर गिरती है।”

    उन्होंने दावा किया कि हालिया हमलों में नौ लोगों की जान गई और कहा:
    “यही तेहरान और हमारे बीच फर्क है। तेहरान के सामूहिक हत्यारे नागरिकों को निशाना बनाते हैं, जबकि इजरायल और अमेरिका आतंकियों को निशाना बनाते हैं।”

    “परमाणु और मिसाइल कार्यक्रम रोकना जरूरी था”
    नेतन्याहू के मुताबिक, इजरायल ने ईरान के परमाणु ठिकानों और बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रम पर पहले भी प्रहार किया था, लेकिन तेहरान ने अपनी सैन्य क्षमताओं को आगे बढ़ाना जारी रखा। उनका दावा है कि ईरान नए भूमिगत ठिकाने बना रहा था, जिससे उसका परमाणु और मिसाइल कार्यक्रम भविष्य की सैन्य कार्रवाई से सुरक्षित हो सकता था।

    उन्होंने कहा,
    “अगर हम अभी कार्रवाई नहीं करते, तो भविष्य में ईरान को रोकना संभव नहीं होता। वह अमेरिका को निशाना बना सकता था, ब्लैकमेल कर सकता था और हमें व अन्य देशों को धमका सकता था।”

    ट्रंप की सराहना
    नेतन्याहू ने अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump की सराहना करते हुए कहा कि ऐसी कार्रवाई के लिए “पक्के इरादों वाले राष्ट्रपति” की जरूरत थी। उन्होंने कहा, हमारा गठबंधन आज बेहद मजबूत है। हमें अभी कार्रवाई करनी थी और हमने की।”

    बढ़ता क्षेत्रीय तनाव
    ईरान पर हमले और उसके बाद जवाबी कार्रवाइयों के चलते पश्चिम एशिया में तनाव चरम पर है। इजरायल का कहना है कि यह कदम आत्मरक्षा और वैश्विक सुरक्षा के लिए जरूरी था, जबकि तेहरान इसे आक्रामक और गैरकानूनी कार्रवाई बता रहा है।

  • सऊदी में अमेरिकी दूतावास पर ड्रोन हमला, यूएस एंबेसी ने जारी की सुरक्षा एडवाइजरी

    सऊदी में अमेरिकी दूतावास पर ड्रोन हमला, यूएस एंबेसी ने जारी की सुरक्षा एडवाइजरी


    नई दिल्ली ईरान और अमेरिका-इजरायल के बीच जारी संघर्ष के चौथे दिन सऊदी अरब की राजधानी रियाद में अमेरिकी दूतावास को निशाना बनाकर ड्रोन हमला किया गया। Ministry of Defense Saudi Arabia ने मंगलवार सुबह बताया कि दूतावास परिसर पर दो ड्रोन से हमला हुआ, जिससे आग लग गई और संपत्ति को नुकसान पहुंचा। राहत की बात यह रही कि घटना के समय इमारत खाली थी, इसलिए किसी के घायल होने की खबर नहीं है।

    ट्रंप की चेतावनी
    हमले के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने तेहरान को कड़ी चेतावनी देते हुए कहा,
    “तुम्हें जल्द ही पता चल जाएगा कि जवाबी कार्रवाई क्या होगी। यह बयान ऐसे समय आया है जब खाड़ी क्षेत्र में अमेरिकी और इजरायली सैन्य ठिकानों पर हमलों की खबरें लगातार सामने आ रही हैं।

    एंबेसी की ‘शेल्टर-इन-प्लेस’ एडवाइजरी
    हमले के तुरंत बाद अमेरिकी दूतावास ने एक्स (पूर्व ट्विटर) के जरिए रियाद, जेद्दा और धाहरान में मौजूद अमेरिकी नागरिकों के लिए ‘शेल्टर-इन-प्लेस’ एडवाइजरी जारी की।

    एडवाइजरी में कहा गया:

    गैर-जरूरी यात्रा से बचें, खासकर सैन्य ठिकानों के आसपास।

    नवीनतम सुरक्षा अलर्ट पर नजर रखें।

    व्यक्तिगत सुरक्षा योजना (Personal Safety Plan) तैयार रखें।

    किसी भी आपात स्थिति में सुरक्षित स्थान पर शरण लें।

    दूतावास ने कहा कि क्षेत्रीय हालात तेजी से बदल रहे हैं और अचानक संकट की स्थिति बन सकती है।

    वीडियो वायरल, एयरपोर्ट संचालन जारी
    सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में दूतावास परिसर से धुएं का गुबार उठता दिख रहा है, जबकि फायर ब्रिगेड की टीमें मौके पर आग बुझाती नजर आ रही हैं। हालांकि रियाद का King Khalid International Airport फिलहाल चालू है, लेकिन खाड़ी देशों के कुछ हिस्सों में एयरस्पेस बंद होने और क्षेत्रीय हमलों के कारण सैकड़ों उड़ानें प्रभावित हुई हैं।

    क्षेत्र में बढ़ता तनाव
    यह हमला ऐसे समय हुआ है जब ईरान पर अमेरिका और इजरायल की एयरस्ट्राइक के बाद जवाबी हमलों का सिलसिला जारी है। ईरान के सुप्रीम लीडर Ali Khamenei की मौत के बाद क्षेत्रीय हालात और अधिक संवेदनशील हो गए हैं। सऊदी अधिकारियों ने अभी यह स्पष्ट नहीं किया है कि ड्रोन को रोका गया था या वे राजधानी की एयर डिफेंस को भेदकर दूतावास तक पहुंचे।

    स्थिति पर नजर
    मिडिल ईस्ट में बढ़ते इस टकराव के बीच कूटनीतिक मिशनों की सुरक्षा, हवाई यातायात और क्षेत्रीय स्थिरता पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। अमेरिकी मिशन ने संकेत दिया है कि हालात के अनुसार आगे और सुरक्षा कदम उठाए जा सकते हैं।

  • अमेरिका-ईरान में जुबानी जंग तेज, अराघची ने मार्को रुबियो पर साधा निशाना

    अमेरिका-ईरान में जुबानी जंग तेज, अराघची ने मार्को रुबियो पर साधा निशाना


    नई दिल्ली ईरान और अमेरिका के बीच जारी तनाव के बीच मंगलवार को जुबानी जंग तेज हो गई। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने अमेरिकी विदेश सचिव मार्को रुबियो के हालिया बयान पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि “ईरान से कभी कोई खतरा था ही नहीं” और अमेरिकी कार्रवाई महज एक बहाना थी। अराघची ने दोनों देशों के नागरिकों के खून-खराबे के लिए सीधे तौर पर इजरायल को जिम्मेदार ठहराया और कहा कि अमेरिका ने इजरायल की ओर से अपनी मर्जी से युद्ध लड़ा है।

    क्या कहा था रुबियो ने?
    सोमवार को मीडिया से बातचीत में मार्को रुबियो ने कहा था कि अमेरिका ने ईरान पर हमला तब किया जब उसे जानकारी मिली कि उसका सहयोगी इजरायल सैन्य कार्रवाई की तैयारी कर रहा है।

    रुबियो के मुताबिक, वॉशिंगटन को आशंका थी कि इजरायल की कार्रवाई के बाद तेहरान क्षेत्र में तैनात अमेरिकी सेना के खिलाफ जवाबी हमला कर सकता है। उन्होंने कहा,
    “हमें पता था कि इजरायल कार्रवाई करने वाला है। यदि हम पहले कदम नहीं उठाते, तो हमें ज्यादा नुकसान उठाना पड़ सकता था। रुबियो ने यह भी स्पष्ट किया कि राष्ट्रपति Donald Trump के प्रशासन का मानना था कि ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई आवश्यक थी, भले ही इसका घोषित उद्देश्य ईरानी शासन का अंत नहीं था।

    अराघची का तीखा जवाब
    रुबियो के बयान के बाद अब्बास अराघची ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर कहा,
    “मिस्टर रुबियो ने वह माना जो हम सब जानते थे। अमेरिका ने इजरायल की तरफ से अपनी मर्जी से जंग लड़ी है। ईरान से कभी कोई खतरा था ही नहीं।”

    उन्होंने आरोप लगाया कि इस पूरे घटनाक्रम में अमेरिकी और ईरानी दोनों नागरिकों का खून बहा है, जिसकी जिम्मेदारी इजरायल पर है। अराघची ने लिखा,
    “अमेरिकी लोग इससे बेहतर के हकदार हैं।”

    ईरान का यह बयान साफ संकेत देता है कि तेहरान अमेरिकी कार्रवाई को आत्मरक्षा नहीं, बल्कि पूर्व-नियोजित आक्रामक कदम मान रहा है।

    तेहरान हमले पर नया खुलासा
    इससे पहले अमेरिकी रक्षा सचिव Pete Hegseth ने कहा था कि शनिवार को तेहरान में हुआ हमला इजरायल द्वारा किया गया था। इस हमले में ईरान के सर्वोच्च नेता Ali Khamenei और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों के मारे जाने की खबर सामने आई थी। अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार, खुफिया जानकारी से संकेत मिला था कि खामेनेई उस समय एक अहम बैठक में मौजूद थे। हालांकि, इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि अब तक नहीं हुई है।

    बढ़ता कूटनीतिक टकराव
    रुबियो ने यह भी कहा कि अमेरिका “खामेनेई प्रतिष्ठान के अंत” को देखना पसंद करेगा, लेकिन मौजूदा सैन्य अभियान का घोषित लक्ष्य शासन परिवर्तन नहीं है। दूसरी ओर, ईरान इस पूरी कार्रवाई को क्षेत्रीय अस्थिरता का कारण बता रहा है और अमेरिका-इजरायल पर संयुक्त साजिश का आरोप लगा रहा है।

    मानना है कि दोनों देशों के बीच बयानबाजी का यह दौर आगे और तीखा हो सकता है। पश्चिम एशिया पहले ही अस्थिर हालात से गुजर रहा है, ऐसे में कूटनीतिक संवाद के बजाय आरोप-प्रत्यारोप की राजनीति क्षेत्रीय तनाव को और बढ़ा सकती है।

  • अमेरिका ने ईरान के दो महत्वपूर्ण नेवल बेस को किया तबाह, युद्ध का चौथा दिन, जानें 10 बड़ी बातें

    अमेरिका ने ईरान के दो महत्वपूर्ण नेवल बेस को किया तबाह, युद्ध का चौथा दिन, जानें 10 बड़ी बातें


    तेहरान। अमेरिका ने ईरानी नेवी के दो सबसे महत्वपूर्ण नेवल बेस बंदर अब्बास नेवल बेस और कोनार्क नेवल बेस-पर भीषण हमले किए हैं। अमेरिका और इजरायल के हमलों के बाद इन दोनों नेवल बेस को लेकर कई सैटेलाइट तस्वीरें सामने आई हैं। इन तस्वीरों में बंदर अब्बास नेवल बेस पर तैनात IRINS मकरान सी बेस-टाइप जहाज पर आग लगी हुई दिख रही है। बंदर अब्बास ईरान के होर्मुज स्ट्रेट को कंट्रोल करने के उद्देश्य से बनाया गया नौसेना बेस होने के साथ-साथ ईरानी नौसेना का मुख्य हेडक्वार्टर भी है। अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने कहा है कि ईरान की नौसेना फोर्स को खत्म करना अमेरिकी अधिकारियों का मुख्य मकसद है। अमेरिका ने अब तक 10 ईरानी जहाजों को नुकसान पहुंचाने की बात भी कही है।

    बंदर अब्बास नेवल बेस की तबाही
    प्लैनेट लैब्स की तरफ से जारी की गई सैटेलाइट तस्वीरों में रात को ली गई बंदर अब्बास नेवल बेस की स्थिति का पता चलता है। तस्वीरों में ईरानी नेवी का मुख्य हेडक्वार्टर और इसके कई सबसे काबिल जहाज और सबमरीन तैनात दिख रहे हैं। तस्वीरों में नेवल बेस के ज्यादातर हिस्सों में घना काला धुआं उठता हुआ दिखाई दे रहा है। फैसेलिटी के कई हिस्सों पर हमले का असर साफ देखा जा सकता है। तस्वीरों के आकलन से यह भी पता चलता है कि फ्लोटिंग डॉक को गंभीर नुकसान पहुंचा है, पेट्रोल बोट डैमेज हो चुके हैं और कई बिल्डिंग पूरी तरह से ध्वस्त हो चुकी हैं।

    तस्वीरों से स्पष्ट है कि IRINS मकरान जहाज पर हमला किया गया है। इसे नौसेना अड्डे के दक्षिणी छोर पर एक बर्थ पर डॉक किया गया था। यह जहाज मूल रूप से एक ऑयल टैंकर था जिसे ईरानी अधिकारियों ने “फॉरवर्ड बेस शिप” में बदल दिया था। इसके आगे का हिस्सा बड़ा खुला फ्लाइट डेक और कई अन्य खूबियों से लैस था। मकरान जहाज ने 2021 में कमीशन होने के बाद कई बार विदेश यात्राएं की हैं और यह उन कई समुद्री बेस जैसे जहाजों में से एक है जिन्हें ईरान ने हाल के सालों में सेवा में लगाया। 2 मार्च की तस्वीरों की तुलना पहले की तस्वीरों से करने पर लगता है कि एक या दो फ्रिगेट साइज के वॉरशिप पर भी हमला हुआ है। ये साफ तौर पर पोर्ट पर सबसे कीमती टारगेट में से एक थे। पोर्ट में जो एक किलो क्लास पनडुब्बी और छोटी पनडुब्बी हैं, उन्हें कोई नुकसान नहीं पहुंचा है। कुछ अन्य सैटेलाइट तस्वीरों से पता चलता है कि ईरानी नौसना के कई और मुख्य युद्धपोत शायद तबाह हो गए या उन्हें गंभीर नुकसान पहुंचा है। बंदर अब्बास पोर्ट ईरान के होर्मोज़्गन प्रांत की राजधानी बंदर अब्बास में स्थित है और हॉर्मुज जलडमरूमध्य इसके बिल्कुल पास है।

    कोनार्क पोर्ट पर भी अमेरिकी हमले
    बंदर अब्बास की तस्वीर में धुएं की वजह से यह अंदाजा लगाना मुश्किल है कि पोर्ट में कितने जहाजों को नुकसान हुआ। 2 मार्च की तस्वीर की तुलना 26 फरवरी की तस्वीर से करने पर साफ पता चलता है कि कई छोटी नावें और कुछ बड़े जहाज पोर्ट से बाहर कर दिए गए। संभव है कि कुछ जहाज डूब गए हों, लेकिन इसके कोई स्पष्ट संकेत नहीं दिख रहे हैं। फिर भी ईरानी नौसेना के कई जहाज अभी भी बचे हैं और ड्राईडॉक में कई जंगी जहाज दिखाई दे रहे हैं।

    बंदर अब्बास के बाहर भी ईरानी नौसेना के एसेट्स पर हमला हुआ। सैटेलाइट तस्वीरों से पता चलता है कि ईरान के दक्षिण-पूर्वी सिरे के पास कोनार्क में पोर्ट पर हमले हुए। कई जंगी जहाज नष्ट हो गए या उन्हें गंभीर नुकसान पहुंचा। शुरुआती अनुमान में यह अलवंद क्लास का फ्रिगेट बताया गया, लेकिन बाद में यूएस सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने इसे मौज क्लास के वॉरशिप के रूप में पहचाना, जिसे कभी-कभी जमरान क्लास भी कहा जाता है। कोनार्क पोर्ट ईरान के सिस्तान और बलूचिस्तान प्रांत में स्थित है और चाबहार बंदरगाह के ठीक बगल, ओमान की खाड़ी के पास स्थित है।

    युद्ध के चौथे दिन की 10 बड़ी बातें
    1. 28 फरवरी को युद्ध के पहले दिन ईरान के सर्वोच्च नेता Ali Khamenei की मौत हो गई।
    2. अमेरिका ने हमले को ‘ऑपरेशन एपिक फ्यूरी’ और इजरायल ने ‘ऑपरेशन रोअर ऑफ द लॉयन’ नाम दिया।
    3. ईरान ने जवाबी कार्रवाई में होर्मुज स्ट्रेट को बंद करने का दावा किया, जिससे तेल की कीमतों में इजाफा हुआ।
    4. पेंटागन ने 6 अमेरिकी सैनिकों की मौत और 18 घायल होने की पुष्टि की, जबकि इजरायल में अब तक 12 लोगों की मौत हुई।
    5. खामेनेई की मौत के बाद ईरान में सरकार चलाने के लिए अंतरिम शासी परिषद का गठन किया गया।
    6. ईरान ने खाड़ी के कई देशों जैसे सऊदी अरब, कतर, बहरीन, संयुक्त अरब अमीरात और कुवैत पर हमले किए।
    7. अमेरिका के बी-2 बॉम्बर्स ने ईरान के अंडरग्राउंड परमाणु केंद्रों और मिसाइल भंडारण सुविधाओं पर हमला किया।
    8. ईरान के रेड क्रेसेंट के अनुसार मरने वालों की संख्या 600 से अधिक पहुंच गई, जिनमें सैनिक और आम नागरिक शामिल हैं।
    9. अमेरिका ने खाड़ी देशों में स्थित प्रमुख दूतावासों जैसे इराक, जॉर्डन और कुवैत से अपने अधिकारियों को तुरंत निकालने का आदेश दिया।
    10. डोनाल्ड ट्रंप और युद्ध मंत्री पीट हेगसेथ ने कहा कि युद्ध 4-5 हफ्ते या उससे अधिक समय तक चल सकता है, और उन्होंने ईरान में सैनिकों को उतारने की संभावना से इनकार नहीं किया।

  • US के लिए लंबी और महंगी चुनौती साबित हो सकता है ईरान युद्ध… अमेरिकी रणनीतिकार नहीं लगा पाए अंदाजा

    US के लिए लंबी और महंगी चुनौती साबित हो सकता है ईरान युद्ध… अमेरिकी रणनीतिकार नहीं लगा पाए अंदाजा


    तेहरान।
    पश्चिम एशिया (West Asia) में छिड़ा संघर्ष अब ऐसे मोड़ पर पहुंच गया है, जिसकी कल्पना शायद अमेरिकी युद्ध नीतिकारों (American War Policymakers) ने नहीं की थी। ऑपरेशन एपिक फ्यूरी (Operation Epic Fury) के जरिये खामनेई के खात्मे के बाद यह युद्ध अमेरिका के लिए किसी त्वरित जीत के बजाय एक लंबी और महंगी चुनौती साबित हो सकता है। ईरान की रणनीति अमेरिका को लंबे और थका देने वाले युद्ध की ओर धकेलने की दिख रही है। अमेरिकी अड्डों पर हुए मिसाइल हमलों और कुवैत में कई लड़ाकू विमान गिराए जाने की सूचनाओं ने वाशिंगटन की वॉर गेमिंग पर सवाल खड़े किए हैं। अमेरिका सऊदी अरब के तेल क्षेत्रों और व्यापारिक केंद्रों की सुरक्षा ढाल बनने में नाकाम रहा है। यह अमेरिकी योजना के बिल्कुल विपरीत है।


    ईरान की रणनीति

    ईरान की रणनीति वॉर ऑफ एट्रिशन यानी लंबे और थकाऊ युद्ध की है। अमेरिका और इस्राइल की बेहतर एयरपावर से बचाव के लिए उसने अपने अहम हथियार भूमिगत बंकरों में सुरक्षित कर लिए हैं। उसका इरादा ड्रोन एवं मिसाइलों से अमेरिका के प्रतिष्ठित ठिकानों पर निशाना साधने का है। इससे दुश्मन के अजेय होने की छवि को नुकसान पहुंचेगा और घरेलू मोर्चे पर राजनीतिक दबाव भी बढ़ेगा।

    जमीनी हमला: विशेषज्ञों की राय में ईरान की कोशिश दुश्मन को जमीनी आक्रमण के लिए उकसाने की दिख रही है। युद्ध जमीन पर आने पर ईरान की बड़ी सेना व दुर्गम भौगोलिक परिस्थितयां अमेरिका व इस्राइल के लिए इसे अफगानिस्तान या वियतनाम जैसा अंतहीन युद्ध भी बना सकते हैं।

    अराघची का बयान: ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने बताया कि शीर्ष कमांडरों को खोने के बाद उन्हें फौरन रिप्लेस कर लिया गया है। उन्होंने दावा किया कि इस युद्ध में दूसरे पक्ष के लिए कोई विजय नहीं है। विकेंद्रीकृत कमान के कारण ईरान का मिसाइल नेटवर्क नेतृत्व की कमी के बावजूद सक्रिय है।

    इस्राइल पर प्रभाव: छोटा देश होने के नाते इस्राइल की अर्थव्यवस्था तेज और निर्णायक युद्ध के लिए बनी है, लंबे युद्ध के लिए नहीं। लाखों नागरिक (रिजर्विस्ट) दफ्तर छोड़कर मोर्चे पर तैनात हैं, जिससे हाई-टेक और उत्पादन क्षेत्र प्रभावित रहेगा। ईरान युद्ध को लंबा खींचने में कामयाब रहा तो इस्राइल की अर्थव्यवस्था पतली हो सकती है, इसलिए इस्राइल युद्ध को जल्द खत्म करने के लिए आक्रामक रुख अपनाता है।


    विशेषज्ञ की राय

    रक्षा विशेषज्ञ मेजर जनरल जीडी बख्शी ने कहा कि ट्रंप ने बहुत बड़ी गलती की है। पहली ही स्ट्राइक में ईरान का शीर्ष नेतृत्व साफ कर दिया। अब इस युद्ध पर नियंत्रण नहीं रह गया है। इससे वैश्विक मंदी आ सकती है, जिससे अमेरिका भी अछूता नहीं रहेगा। ईरान ने इनका युद्धपोत हिट किया तो 250 सैनिक मारे जाएंगे। अब यह अपना एयरक्राफ्ट कैरियर लिंकन छुपाते फिर रहे हैं। ट्रंप बुरी तरह फंसने वाले हैं। उनके खिलाफ महाभियोग भी चलाया जाए तो मुझे आश्चर्य नहीं होगा।