Category: International

  • 17 साल बाद लंदन से बांग्लादेश लौटे तारिक रहमान, क्या बदलेंगे देश की राजनीतिक इबारत?

    17 साल बाद लंदन से बांग्लादेश लौटे तारिक रहमान, क्या बदलेंगे देश की राजनीतिक इबारत?

    नई दिल्ली। बांग्लादेश की राजनीति एक बार फिर ऐतिहासिक मोड़ पर है। 12 फरवरी को हुए आम चुनाव ने देश की सत्ता की दिशा तय करने का मंच तैयार कर दिया। इस बार अवामी लीग की गैरमौजूदगी ने मुकाबले को पूरी तरह नया रंग दिया है और बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी यानी बीएनपी सबसे मजबूत दावेदार के रूप में उभरी है। पार्टी के चेहरा हैं तारिक रहमान, जिन्होंने 17 साल के लंबे निर्वासन के बाद लंदन से लौटकर राजनीतिक परिदृश्य में धमाकेदार एंट्री की। उनकी वापसी केवल एक राजनीतिक घटना नहीं, बल्कि बांग्लादेश की सियासत के नए अध्याय की शुरुआत मानी जा रही है।

    कौन हैं तारिक रहमान
    तारिक रहमान बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री खालिदा जिया और पूर्व राष्ट्रपति जियाउर रहमान के बेटे हैं। उन्हें राजनीतिक विरासत परिवार से मिली और 1990 के दशक में उन्होंने सक्रिय राजनीति में कदम रखा। 2001 से 2007 तक वे बीएनपी में बेहद प्रभावशाली नेता रहे। उस दौर में उन्हें ‘डार्क प्रिंस’ कहा जाता था क्योंकि वे पर्दे के पीछे रणनीति बनाने वाले नेता के रूप में जाने जाते थे। संगठन पर उनकी पकड़ मजबूत थी और युवा कार्यकर्ताओं में उनका प्रभाव विशेष रूप से महसूस किया जाता था।

    निर्वासन और कानूनी चुनौतियां
    2007 में सैन्य समर्थित सरकार के दौरान तारिक रहमान पर भ्रष्टाचार के आरोप लगे और उन्हें जेल जाना पड़ा। बाद में इलाज के लिए वे लंदन चले गए और वहीं से पार्टी की गतिविधियों का संचालन करते रहे। 2018 और 2021 में उन्हें भ्रष्टाचार, मनी लॉन्ड्रिंग और 2004 के ग्रेनेड हमले से जुड़े मामलों में दोषी ठहराया गया था। हाल ही में अदालतों ने कई फैसलों को पलट दिया, जिससे उनके देश लौटने का रास्ता साफ हो गया।

    पत्नी डॉ जुबैदा रहमान
    तारिक रहमान की पत्नी डॉ जुबैदा रहमान पेशे से चिकित्सक हैं और लंदन से उच्च शिक्षा प्राप्त कर चुकी हैं। उन्होंने सरकारी सेवा में भी शीर्ष स्थान हासिल किया था। हाल ही में राजनीतिक बदलावों के बाद उनके खिलाफ सजा पर रोक लग गई है।

    बेटी जायमा रहमान

    तारिक रहमान की बेटी जायमा रहमान 30 वर्ष की हैं और कानून की पढ़ाई कर चुकी हैं। उन्होंने लंदन से बैरिस्टर की डिग्री हासिल की और बीएनपी की वर्चुअल बैठकों में सक्रिय रूप से हिस्सा ले रही हैं।

    बांग्लादेश का भविष्य
    तारिक रहमान की वापसी ने चुनावी समीकरण बदल दिए हैं। समर्थक इसे लोकतांत्रिक संतुलन की वापसी बता रहे हैं, जबकि आलोचक उनके पुराने मामलों को याद दिला रहे हैं। अब यह देखने वाली बात है कि क्या वे चुनावी जीत के साथ सत्ता संभाल पाएंगे और देश की राजनीति को नई दिशा दे पाएंगे। यह चुनाव केवल सत्ता परिवर्तन नहीं बल्कि बांग्लादेश की राजनीतिक धारा तय करने वाला मोड़ भी साबित हो सकता है।

  • चक्रवात गेजानी ने मेडागास्कर में मचाई तबाही, कम से कम 20 लोगों की मौत, कई लापता

    चक्रवात गेजानी ने मेडागास्कर में मचाई तबाही, कम से कम 20 लोगों की मौत, कई लापता


    अंतानानारिवो।
    हिंद महासागर द्वीप (Indian Ocean Island Country) देश मेडागास्कर (Madagascar) में आए शक्तिशाली उष्णकटिबंधीय चक्रवात गेजानी (Powerful Tropical Cyclone Gajani) ने भारी तबाही मचाई है। सरकारी आपदा प्रबंधन एजेंसी के अनुसार इस आपदा में अबतक कम से कम 20 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 15 लोग लापता बताए जा रहे हैं।

    रिपोर्ट के मुताबिक सबसे ज्यादा 18 मौतें देश के दूसरे सबसे बड़े शहर टोआमासिना में दर्ज की गईं, जबकि दो अन्य लोगों की जान पड़ोसी जिले में गई। चक्रवात ने मंगलवार देर रात तट से टकराते ही तेज हवा और बारिश के साथ व्यापक नुकसान पहुंचाया। स्थानीय निवासियों ने तेज हवा को बेहद भयावह बताते हुए कहा कि मजबूत धातु के दरवाजे और खिड़कियां तक कांप उठीं।

    इस आपदा में कम से कम 33 लोग घायल हुए हैं। एहतियातन 2,700 से अधिक लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया। चक्रवात के तटीय इलाकों से टकराने के बाद अंदरूनी हिस्सों की ओर बढ़ने से कई समुदाय प्रभावित हुए।

    मौसम विभाग के अनुसार अपने चरम पर गेज़ानी की रफ्तार लगभग 185 किमी प्रति घंटा रही, जबकि झोंके 270 किमी प्रति घंटा तक पहुंचे। तेज हवाओं से कई घरों की छतें उड़ गईं, पेड़ उखड़ गए और बिजली लाइनों को नुकसान पहुंचा, जिससे कई इलाकों में अंधेरा छा गया।

    यह इस वर्ष मेडागास्कर में आया दूसरा बड़ा चक्रवात है। इससे करीब दस दिन पहले आए चक्रवात फाइटिया में 14 लोगों की मौत हुई थी और हजारों लोग विस्थापित हुए थे।

    बुधवार सुबह मौसम सेवा ने बताया कि गेजानी अब कमजोर होकर मध्यम उष्णकटिबंधीय तूफान में बदल गया है और राजधानी अंतानानारिवो से उत्तर की ओर बढ़ते हुए आगे मोजाम्बिक चैनल की दिशा में निकल सकता है। अधिकारियों ने पहले ही स्कूल बंद कर दिए थे और राहत शिविरों की तैयारी की थी, जिससे बड़े पैमाने पर जनहानि को कुछ हद तक रोका जा सका।

  • US में H1B वीजा स्कीम को पूरी तरह बंद करने की तैयारी, रिपब्लिकन प्रतिनिधि ने पेश किया नया बिल

    US में H1B वीजा स्कीम को पूरी तरह बंद करने की तैयारी, रिपब्लिकन प्रतिनिधि ने पेश किया नया बिल


    वाशिंगटन।
    एक रिपब्लिकन प्रतिनिधि ग्रेग स्ट्यूबी (Republican Representative Greg Steube) ने अमेरिका (America) में H1B वीजा योजना (H1B Visa Scheme) को खत्म करने के लिए एक नया विधेयक (New Bill) सोमवार को पेश किया है। उन्होंने कहा कि यह योजना अमेरिकी नागरिकों के बजाय विदेशी कामगारों को ज्यादा प्राथमिकता देती है। इससे स्थानीय लोगों को नुकसान होता है। स्ट्यूबी ने इस विधेयक की घोषणा की। इसका सबसे ज्यादा असर भारतीयों पर पड़ेगा।

    इस प्रस्तावित कानून का नाम ‘एंडिंग एक्सप्लॉइटेटिव इम्पोर्टेड लेबर एग्जेम्प्शंस एक्ट’ है, जिसे संक्षेप में एक्साइल एक्ट कहा जा रहा है। इस विधेयक के जरिये आव्रजन और राष्ट्रीयता अधिनियम में बदलाव करने का प्रस्ताव है, ताकि H1B वीजा योजना को पूरी तरह बंद किया जा सके। स्ट्यूब ने कहा कि अमेरिकी नागरिकों की भलाई और समृद्धि के बजाय विदेशी कामगारों को प्राथमिकता देना हमारे मूल्यों और राष्ट्रीय हितों को कमजोर करता है। हमारे कर्मचारियों और युवाओं को H1B वीजा प्रोग्राम से लगातार बेघर किया जा रहा है। साथ ही उनको उनके अधिकार से वंचित किया जा रहा।

    उन्होंने कहा कि हम अपने बच्चों के लिए अमेरिकी सपने को तब तक सुरक्षित नहीं रख सकते जब तक हम उनका हिस्सा गैर-नागरिकों को देते रहेंगे। इसलिए मैं काम करने वाले अमेरिकियों को फिर से प्राथमिकता देने के लिए एक्साइल बिल पेश कर रहा हूं।


    विधेयक में क्या है?

    स्ट्यूबी के कार्यालय के मुताबिक (एक्साइल एक्ट) H1B वीजा प्रोग्राम को पूरी तरह से खत्म करने के लिए आव्रजन और राष्ट्रीयता अधिनियम के सेक्शन 214(जी)(1)(ए) में बदलाव करेगा। साल 2027 से हर वित्तीय वर्ष में H1B वीजा की संख्या शून्य कर दी जाएगी।


    क्या है H1B वीजा?

    H1B वीजा अमेरिका का एक नॉन-इमिग्रेंट वर्क वीजा है। इसके तहत अमेरिकी कंपनियों को तकनीक, इंजीनियरिंग, चिकित्सा और वित्त जैसे विशेष क्षेत्रों में विदेशी कर्मचारियों को नौकरी देने की अनुमति मिलती है।


    योजना की शुरुआत इसलिए हुई

    H1B वीजा योजना को शुरू इसलिए किया गया था ताकि विशेष योग्यता वाले विदेशी विशेषज्ञ अमेरिका में काम कर सकें। समय के साथ यह भारत और चीन जैसे देशों के पेशेवरों के लिए अमेरिका में काम करने का बड़ा रास्ता बन गई, लेकिन नौकरियों, वेतन और आव्रजन नीति को लेकर यह लगातार राजनीतिक बहस का विषय भी बनी हुई है।


    भारतीय पेशेवर पर सीधा असर

    H1B वीजा का सबसे ज्यादा इस्तेमाल भारतीय प्रोफेशनल्स अमेरिका में काम और रहने के लिए करते हैं। आधिकारिक दावे के मुताबिक H1B वीजा पाने वालों में 70 प्रतिशत से ज्यादा भारतीय हैं और इनमें बड़ी संख्या युवा कर्मचारियों की है। इस वजह से संसद में पेश इस बिल का असर सीधे तौर पर भारतीय आईटी और टेक प्रोफेशनल्स पर पड़ सकता है।


    अभी परीक्षा बाकी है

    H1B वीजा खत्म करने से जुड़ा यह विधेयक फिलहाल अमेरिकी संसद के निचले सदन प्रतिनिधिसभा में पेश किया गया है। अभी इस पर न तो बहस हुई है और न ही मतदान की कोई समयसीमा तय की गई है। विधेयक को अब संबंधित हाउस कमेटी के पास भेजा जाएगा। कमेटी यह फैसला करेगी कि इस पर औपचारिक सुनवाई होगी या नहीं। प्रतिनिधिसभा से पास होने के बाद विधेयक अमेरिकी संसद के ऊपरी सदन सीनेट में जाएगा।


    सरकार ने वीजा फीस बढ़ाई

    ट्रंप सरकार ने पिछले साल 21 सितंबर से H1B वीजा फीस बढ़ाकर 1 लाख डॉलर (करीब 88 लाख रुपए) कर दी है। व्हाइट हाउस के मुताबिक यह बढ़ी हुई फीस सिर्फ वन टाइम है, जो आवेदन के समय चुकानी होगी। इससे पहले वीजा के 5.5 से 6.7 लाख रुपए लगते थे। यह तीन साल के लिए मान्य होता था।

  • भारत से व्यापार समझौते को अंतिम रूप देने में जुटा अमेरिका…डील में रूस से तेल खरीदी बंद करने का जिक्र

    भारत से व्यापार समझौते को अंतिम रूप देने में जुटा अमेरिका…डील में रूस से तेल खरीदी बंद करने का जिक्र


    वाशिंगटन।
    अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (American President Donald Trump) के आधिकारिक आवास एवं कार्यालय ‘व्हाइट हाउस’ (White House) ने कहा है कि आने वाले हफ्तों में अमेरिका और भारत व्यापार (USA-India Trade) पर अंतरिम समझौते को अंतिम रूप देने की दिशा में काम करेंगे। ‘व्हाइट हाउस’ ने एक दस्तावेज (फैक्ट शीट) में कहा कि दोनों देश सेवाओं एवं निवेश, श्रम तथा सरकारी खरीद सहित शेष मुद्दों को सुलझाने के लिए बातचीत जारी रखेंगे।

    फैक्टशीट में लिखा है कि व्यापार समझौता भारत के 140 करोड़ से अधिक लोगों के बाजार को अमेरिकी उत्पादों के लिए खोल देगा। राष्ट्रपति ट्रंप भारत द्वारा रूसी तेल खरीदना बंद करने की प्रतिबद्धता को देखते हुए, भारतीय आयात पर अतिरिक्त 25 प्रतिशत टैरिफ हटाने पर सहमत हैं और राष्ट्रपति ने शुक्रवार को कार्यकारी आदेश पर हस्ताक्षर कर उसे हटा भी दिया है। साथ ही, अमेरिका पारस्परिक टैरिफ को 25 से घटाकर 18 प्रतिशत करेगा।


    अमेरिका के कृषि उत्पादों पर जीरो टैरिफ

    फैक्टशीट के मुताबिक, भारत अमेरिका के सभी औद्योगिक सामानों, सूखे अनाज, लाल ज्वार, मेवे, ताजे-प्रसंस्कृत फल, कुछ दालें, सोयाबीन तेल, शराब, स्पिरिट अन्य उत्पादों सहित अमेरिकी खाद्य एवं कृषि उत्पादों की एक विस्तृत श्रृंखला पर टैरिफ को समाप्त या कम करेगा।


    भारत डिजिटल सेवा कर हटाएगा:

    भारत प्राथमिकता वाले क्षेत्रों में द्विपक्षीय व्यापार को प्रभावित करने वाली गैर-टैरिफ बाधाओं को दूर करेगा। साथ ही, भारत अपने डिजिटल सेवा करों को हटाएगा।


    बाधाएं हटाने को जारी रखेगा बातचीत

    अमेरिका और भारत द्विपक्षीय व्यापार समझौते के संदर्भ की शर्तों में निर्धारित रोडमैप के अनुरूप कई मुद्दों पर बातचीत जारी रखेंगे। इसमें शेष टैरिफ बाधाओं, अतिरिक्त गैर-टैरिफ बाधाओं, व्यापार में तकनीकी बाधाओं, सीमा शुल्क और व्यापार सुविधा, अच्छी नियामक प्रथाओं, व्यापार उपचारों, सेवाओं और निवेश, बौद्धिक संपदा, श्रम, पर्यावरण, सरकारी खरीद और राज्य के स्वामित्व वाले उद्यमों की व्यापार-विकृत या अनुचित प्रथाओं को संबोधित करना शामिल होगा।

  • अमेरिकी बाजार में और मजबूत होगी भारतीय दवाओं की पकड़ एक्सपर्ट

    अमेरिकी बाजार में और मजबूत होगी भारतीय दवाओं की पकड़ एक्सपर्ट


    नई दिल्ली ।भारत और अमेरिका के बीच प्रस्तावित ट्रेड डील को लेकर जहां कई सेक्टरों में संशय और आशंकाएं बनी हुई हैं वहीं फार्मा सेक्टर को लेकर तस्वीर काफी सकारात्मक नजर आ रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस ट्रेड डील के बाद भारतीय फार्मा इंडस्ट्री की पकड़ अमेरिकी बाजार में और मजबूत होगी। कम लेबर कॉस्ट उन्नत निर्माण क्षमता और किफायती दवाओं के कारण भारत पहले से ही अमेरिका के लिए एक अहम फार्मा सप्लायर बना हुआ है और आने वाले समय में यह निर्भरता और गहरी हो सकती है।

    जोटा हेल्थकेयर के चेयरमैन केतन जोटा ने इस विषय पर कहा कि अमेरिका के बाद सबसे ज्यादा एफडीए अप्रूव्ड दवा निर्माण प्लांट भारत में स्थित हैं। यह अपने आप में भारतीय फार्मा सेक्टर की गुणवत्ता और विश्वसनीयता को दर्शाता है। भारत से अमेरिका को बड़ी मात्रा में जेनरिक दवाएं लाइफ सेविंग मेडिसिन और क्रॉनिक बीमारियों की दवाएं निर्यात की जाती हैं। यही वजह है कि अमेरिकी हेल्थकेयर सिस्टम में भारत की भूमिका बेहद अहम बन चुकी है।

    केतन जोटा के अनुसार प्रस्तावित ट्रेड डील भारत के लिए एक बड़ी कूटनीतिक और आर्थिक उपलब्धि मानी जा सकती है। उन्होंने कहा कि टैरिफ के मामलों में अमेरिका का रुख आमतौर पर सख्त रहा है और वह शायद ही कभी झुकता है। लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में कूटनीतिक स्तर पर संतुलित और लाभकारी समझौता संभव हुआ है। यह डील दोनों देशों के हितों को ध्यान में रखते हुए तैयार की गई है जिससे व्यापारिक संबंध और मजबूत होंगे।

    उन्होंने यह भी बताया कि भारत से अमेरिका को मुख्य रूप से लाइफस्टाइल और क्रॉनिक बीमारियों से जुड़ी दवाओं का निर्यात किया जाता है। इसमें डायबिटीज ब्लड प्रेशर थायराइड और अन्य लंबे समय तक चलने वाली बीमारियों की दवाएं शामिल हैं। अमेरिकी बाजार में इन दवाओं की मांग लगातार बनी रहती है क्योंकि वहां स्वास्थ्य सेवाओं की लागत काफी अधिक है और भारतीय जेनरिक दवाएं किफायती विकल्प के रूप में देखी जाती हैं।

    केवल अमेरिका ही नहीं बल्कि यूरोपीय संघ के साथ हुई ट्रेड डील से भी भारतीय फार्मा सेक्टर को बड़ा फायदा होने की उम्मीद है। इस समझौते के तहत कई दवाओं के एक्सपोर्ट पर ड्यूटी को शून्य प्रतिशत कर दिया गया है। इससे भारतीय कंपनियों को यूरोपीय बाजार में और प्रतिस्पर्धी बनने का मौका मिलेगा। साथ ही इस डील से टेक्नोलॉजी और व्यापार का ट्रांसफर भी भारत में होगा जिससे दवा निर्माण प्रक्रिया और उन्नत होगी।

    विशेषज्ञों का मानना है कि इन अंतरराष्ट्रीय समझौतों का सीधा असर भारत में दवा उत्पादन की लागत पर पड़ेगा। बड़े पैमाने पर उत्पादन और आधुनिक तकनीक के इस्तेमाल से दवाओं की लागत और कम होगी। इसका फायदा केवल एक्सपोर्ट तक सीमित नहीं रहेगा बल्कि घरेलू बाजार में भी मरीजों को सस्ती और प्रभावी दवाएं उपलब्ध हो सकेंगी।

    इस तरह भारत अमेरिका ट्रेड डील और यूरोपीय संघ के साथ हुए समझौते भारतीय फार्मा सेक्टर के लिए नए अवसरों के द्वार खोल रहे हैं। इससे भारत की वैश्विक साख मजबूत होगी एक्सपोर्ट में इजाफा होगा और देश के भीतर हेल्थकेयर सिस्टम को भी मजबूती मिलेगी। फार्मा सेक्टर आने वाले वर्षों में भारत की आर्थिक वृद्धि का एक मजबूत स्तंभ बनकर उभर सकता है।

  • अरबपतियों की दुनिया में महा-उलटफेर: मार्क जुकरबर्ग ने बेजोस को पछाड़ा, टॉप-20 से फिसले गौतम अडानी!

    अरबपतियों की दुनिया में महा-उलटफेर: मार्क जुकरबर्ग ने बेजोस को पछाड़ा, टॉप-20 से फिसले गौतम अडानी!


    नई दिल्ली।दुनिया के सबसे अमीर शख्सियतों की संपत्ति और उनकी रैंकिंग के लिए मशहूर ब्लूमबर्ग बिलियनेयर्स इंडेक्स की ताजा रिपोर्ट ने वैश्विक बाजार में हलचल पैदा कर दी है। सोमवार को आए आंकड़ों के अनुसार वैश्विक अमीरों की सूची में जबरदस्त उथल-पुथल देखने को मिली है जिसका सीधा असर अमेरिकी टेक दिग्गजों से लेकर भारतीय उद्योगपतियों तक पड़ा है। इस फेरबदल की सबसे बड़ी सुर्खी मेटा के सीईओ मार्क जुकरबर्ग रहे जिनकी संपत्ति में एक ही दिन में 5.58 अरब डॉलर का भारी इजाफा दर्ज किया गया। इस उछाल के साथ जुकरबर्ग अब 239 अरब डॉलर की कुल नेटवर्थ के साथ दुनिया के चौथे सबसे अमीर व्यक्ति बन गए हैं। उन्होंने अमेजन के संस्थापक जेफ बेजोस को पीछे छोड़ दिया है जिन्हें इस दौरान 822 मिलियन डॉलर का घाटा सहना पड़ा और वे अब पांचवें पायदान पर खिसक गए हैं।

    दुनिया के सबसे अमीर व्यक्ति के सिंहासन पर अब भी टेस्ला और एक्स (X) के मालिक एलन मस्क मजबूती से काबिज हैं। मस्क की दौलत में 4.35 अरब डॉलर की बढ़ोतरी हुई है जिससे उनकी कुल संपत्ति अब 676 अरब डॉलर के पार पहुंच गई है। उनके ठीक बाद गूगल के सह-संस्थापक लैरी पेज 278 अरब डॉलर के साथ दूसरे और सर्गी ब्रिन तीसरे स्थान पर मौजूद हैं। हालांकि संपत्ति में सबसे बड़ी छलांग ओरेकल के लैरी एलिसन ने लगाई जिनकी दौलत में 14.5 अरब डॉलर का अविश्वसनीय इजाफा हुआ लेकिन रैंकिंग के गणित के कारण वे फिलहाल छठे स्थान पर ही बने हुए हैं। टेक सेक्टर के अन्य दिग्गजों की बात करें तो एनवीडिया के सीईओ जेनसेन हुआंग की किस्मत भी चमकी है और वे अब 157 अरब डॉलर की संपत्ति के साथ दुनिया के आठवें सबसे अमीर व्यक्ति बन गए हैं।

    भारतीय संदर्भ में देखें तो यह रिपोर्ट गौतम अडानी के लिए किसी झटके से कम नहीं है। अडानी ग्रुप के चेयरमैन की संपत्ति में हालांकि 370 मिलियन डॉलर की मामूली वृद्धि हुई लेकिन वैश्विक प्रतिस्पर्धा और अन्य अरबपतियों की तेज रफ्तार के कारण वे टॉप-20 की प्रतिष्ठित सूची से बाहर हो गए हैं। अब 86 अरब डॉलर की नेटवर्थ के साथ अडानी 21वें स्थान पर पहुंच गए हैं। इसके उलट रिलायंस इंडस्ट्रीज के चेयरमैन मुकेश अंबानी के लिए सोमवार का दिन राहत लेकर आया। अंबानी की संपत्ति में 595 मिलियन डॉलर की बढ़ोतरी दर्ज की गई जिससे उनकी कुल नेटवर्थ अब 99 अरब डॉलर हो गई है और वे रैंकिंग में सुधार करते हुए 18वें स्थान पर पहुंच गए हैं।

    यह ताजा बदलाव स्पष्ट करता है कि वैश्विक अर्थव्यवस्था और शेयर बाजार की अस्थिरता किस तरह पलक झपकते ही अरबपतियों की किस्मत पलट देती है। जहां एक ओर अमेरिकी टेक कंपनियां एआई (AI) और डिजिटल विज्ञापनों के बूते अपनी तिजोरियां भर रही हैं वहीं भारतीय बाजारों में जारी उतार-चढ़ाव ने घरेलू दिग्गजों की रैंकिंग को प्रभावित किया है। वॉल्टन परिवार जैसे दिग्गजों को भी इस बार नुकसान उठाना पड़ा है फिर भी वे टॉप-10 में अपनी जगह बचाने में सफल रहे। ब्लूमबर्ग की यह सूची दर्शाती है कि आने वाले समय में तकनीक और ऊर्जा क्षेत्र के बीच की यह जंग और भी दिलचस्प होने वाली है।

  • लोहे के शरीर में कुंग-फू की आत्मा: शाओलिन मंदिर में भिक्षुओं संग रोबोट्स का महासंग्राम, तकनीक ने रचा नया इतिहास

    लोहे के शरीर में कुंग-फू की आत्मा: शाओलिन मंदिर में भिक्षुओं संग रोबोट्स का महासंग्राम, तकनीक ने रचा नया इतिहास


    नई दिल्ली।दुनिया तेजी से तकनीक के उस रोमांचक और कुछ हद तक चौंकाने वाले दौर में प्रवेश कर चुकी है, जहाँ इंसान और मशीन के बीच की लकीर धुंधली होती जा रही है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और रोबोटिक्स के क्षेत्र में हो रही प्रगति अब केवल औद्योगिक कारखानों या बंद प्रयोगशालाओं की चारदीवारी तक सीमित नहीं रह गई है; बल्कि इसने अब सदियों पुरानी परंपराओं, सांस्कृतिक धरोहरों और आध्यात्मिक केंद्रों की दहलीज पर भी दस्तक दे दी है। इसका सबसे ताजा और विस्मयकारी उदाहरण चीन के विश्व प्रसिद्ध शाओलिन मंदिर से सामने आया है, जहाँ अत्याधुनिक ह्यूमनॉइड रोबोट्स को बौद्ध भिक्षुओं के साथ कदम से कदम मिलाकर मार्शल आर्ट्स की ट्रेनिंग लेते देखा गया है।

    सोशल मीडिया के गलियारों में बिजली की गति से वायरल हो रहे एक वीडियो ने वैश्विक स्तर पर चर्चाओं का बाजार गर्म कर दिया है। इस वीडियो में एक तरफ जहाँ गेरुए वस्त्रों में सजे बौद्ध भिक्षु अपनी पारंपरिक शाओलिन कुंग-फू की मुद्राओं का अभ्यास कर रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ चमचमाते धातु के शरीर वाले रोबोट्स पूरी लय, गति और अचूक सटीकता के साथ उन कठिन मूवमेंट को दोहरा रहे हैं। चाहे वह हाथों की बिजली जैसी फुर्ती हो या पैरों के जटिल वार, ये रोबोट किसी मंझे हुए योद्धा की तरह प्रदर्शन कर रहे हैं। दृश्य ऐसा है मानो कोई प्राचीन कला और भविष्य की तकनीक एक ही मंच पर जुगलबंदी कर रहे हों।

    शाओलिन मंदिर, जो सदियों से आत्म-अनुशासन, ध्यान और मार्शल आर्ट्स का वैश्विक केंद्र रहा है, वहाँ इन मशीनों की उपस्थिति तकनीक और परंपरा के एक अभूतपूर्व ‘फ्यूजन’ को दर्शाती है। यह केवल एक प्रदर्शन नहीं है, बल्कि एक स्पष्ट संकेत है कि आने वाले समय में तकनीक केवल इंसानी बोझ को कम करने का जरिया नहीं होगी, बल्कि वह कला, संस्कृति और शारीरिक कौशल के क्षेत्रों में भी नए मानक स्थापित करेगी।

    इन रोबोट्स के पीछे ‘AgiBot’ नामक प्रमुख चीनी कंपनी का हाथ बताया जा रहा है। यह वही कंपनी है जो पहले भी घरेलू और औद्योगिक कार्यों के लिए उन्नत रोबोटिक समाधान पेश कर चुकी है। इन ‘अग्निबॉट’ में लगे हाई-डेफिनिशन सेंसर और जटिल एआई एल्गोरिदम उन्हें अपने सामने मौजूद इंसान की गतिविधियों को न केवल देखने, बल्कि उन्हें ‘रियल-टाइम’ में समझने और उनकी नकल करने की शक्ति प्रदान करते हैं। यही कारण है कि भिक्षुओं के हर पैंतरे पर रोबोट की प्रतिक्रिया बिल्कुल स्वाभाविक और वैसी ही शैली में नजर आती है।

    हालांकि, जहाँ एक ओर तकनीक प्रेमी इस प्रगति को देखकर गदगद हैं, वहीं दूसरी ओर डिजिटल दुनिया में एक नई बहस भी छिड़ गई है। कुछ आलोचकों का मानना है कि यह वीडियो एआई द्वारा जनरेटेड हो सकता है, जबकि कई लोग इसे मानवीय कौशल के लिए एक चुनौती मान रहे हैं। सोशल मीडिया पर जहाँ कुछ यूजर्स मजाकिया लहजे में इन रोबोट्स से घर के कामकाज कराने की इच्छा जता रहे हैं, वहीं गंभीर विशेषज्ञों ने चिंता व्यक्त की है कि यदि रोबोट्स को युद्ध कलाओं में इतना निपुण बना दिया गया, तो भविष्य में इनके सैन्य दुरुपयोग की संभावनाओं को नकारा नहीं जा सकता।

    चीन और जापान जैसे देश पहले ही सार्वजनिक सेवाओं में रोबोट्स को उतार चुके हैं, लेकिन शाओलिन के आंगन में इन मशीनों का अभ्यास करना यह साबित करता है कि अब मशीनें केवल सहयोग नहीं दे रहीं, बल्कि वे हमसे सीख रही हैं। यह घटनाक्रम जहाँ तकनीकी विकास की असीम शक्ति का जश्न मनाता है, वहीं मानवता के सामने यह यक्ष प्रश्न भी छोड़ जाता है कि हम भविष्य में इंसान और मशीन के बीच का संतुलन आखिर कैसे कायम रखेंगे?

  • रूस ने फिर दिखाई दोस्ती, विदेश मंत्री बोले- भारत की अध्यक्षता में BRICS का हम करेंगे समर्थन

    रूस ने फिर दिखाई दोस्ती, विदेश मंत्री बोले- भारत की अध्यक्षता में BRICS का हम करेंगे समर्थन


    मास्को।
    रूस (Russia) के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव (Foreign Minister Sergei Lavrov) ने सोमवार को कहा कि भारत (India) की अध्यक्षता में हम ब्रिक्स (BRICS) और उनके एजेंडे का पूरा समर्थन करेंगे। एक इंटरव्यू में लावरोव ने कहा कि आज के समय को देखते हुए भारत का एजेंडा बेहद प्रासंगिक, तार्किक है। वह आतंकवाद (Terrorism) और ऊर्जा सुरक्षा (Energy Security) से जुड़ा है। लावरोव ने कहा कि मेरी राय में भारत की अध्यक्षता में जो एजेंडा प्रस्तुत किया जा रहा है, वह भविष्य की तैयारी और वर्तमान चुनौतियों का समाधान करता है। हम इसका सक्रिय रूप से समर्थन करेंगे।

    रूसी विदेश मंत्री ने कहा कि भारत का जोर आतंकवाद विरोधी गतिविधियों पर है जो बेहद जरूरी भी है। क्योंकि इस समय विश्व के कई हिस्से आतंकवाद प्रभावित हैं। अफगानिस्तान सीमा, भारत-पाकिस्तान-अफगानिस्तान गलियारे के साथ-साथ अन्य जगहों पर आतंकी गतिविधियां देखी जा रही है।

    यह प्राथमिकता हमारे लिए विशेष रूप से महत्वपूर्ण है, खासकर जब हम संयुक्त राष्ट्र में भारत के साथ मिलकर एक वैश्विक आतंकवाद विरोधी एजेंडे को आगे बढ़ाने के लिए सक्रिय रूप से काम कर रहे हैं। इसका मसौदा पहले ही तैयार हो चुका है, हालांकि अभी तक आम सहमति नहीं बन पाई है।

    लावरोव ने कहा, भारत की अध्यक्षता खाद्य और ऊर्जा सुरक्षा के मुद्दों, सूचना प्रौद्योगिकी, को प्राथमिकता देती है। भारत आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस शिखर सम्मेलन की मेजबानी करेगा, जिसमें रूस को आमंत्रित किया गया है, और हम एजेंडे में सक्रिय रूप से योगदान दे रहे हैं।

  • इजरायल की विस्तारवादी नीतियों के खिलाफ 8 मुस्लिम देशों ने खोला मोर्चा… दी कड़ी चेतावनी

    इजरायल की विस्तारवादी नीतियों के खिलाफ 8 मुस्लिम देशों ने खोला मोर्चा… दी कड़ी चेतावनी


    इस्लामाबाद।
    पाकिस्तान (Pakistan) समेत आठ मुस्लिम देशों (Eight Muslim Countries) ने सोमवार (9 फरवरी) को एक संयुक्त बयान जारी कर कब्जे वाले पश्चिमी तट (वेस्ट बैंक) में इज़रायल (Israel) की “लगातार विस्तारवादी नीतियों” के खिलाफ कड़ी चेतावनी दी है। इन देशों ने इज़रायल पर अवैध तरीके से संप्रभुता थोपने, यहूदी बस्तियों के विस्तार और फ़िलिस्तीनी जनता को विस्थापित करने का आरोप लगाया है। इस संयुक्त बयान पर पाकिस्तान, मिस्र, जॉर्डन, संयुक्त अरब अमीरात (UAE), इंडोनेशिया, तुर्किये, सऊदी अरब और कतर के विदेश मंत्रियों के हस्ताक्षर हैं। बयान में कहा गया कि इज़रायल द्वारा लिए जा रहे फैसले पश्चिमी तट को अवैध रूप से अपने में मिलाने की प्रक्रिया को तेज कर रहे हैं।

    यह बयान ऐसे समय में आया है, जब इज़रायल की सुरक्षा कैबिनेट ने हाल ही में कुछ ऐसे कदमों को मंजूरी दी है, जिनसे पश्चिमी तट में यहूदी बसने वालों के लिए जमीन खरीदना आसान हो जाएगा और फ़िलिस्तीनियों पर इज़रायली प्रशासन के प्रवर्तन अधिकार बढ़ जाएंगे। इज़रायली मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, दशकों पुराने उन नियमों को हटाने का भी फैसला किया गया है, जो यहूदी नागरिकों को निजी तौर पर पश्चिमी तट में जमीन खरीदने से रोकते थे।


    इजरायल को चेतावनी

    ऐसी स्थिति में आठों मुस्लिम देशों ने दो टूक कहा कि इजरायल का कब्जे वाले फिलस्तीनी इलाकों पर कोई संप्रभु अधिकार नहीं है। बयान में चेतावनी दी गई है कि पश्चिमी तट में अपनाई जा रही नीतियाँ क्षेत्र में हिंसा और संघर्ष को और भड़का रही हैं। इन देशों के विदेश मंत्रियों ने इजरायल की कार्रवाइयों को अंतरराष्ट्रीय कानून का खुला उल्लंघन बताते हुए कहा कि ये कदम दो-राष्ट्र समाधान को कमजोर करते हैं और फ़िलिस्तीनी जनता के स्वतंत्र और संप्रभु राष्ट्र के अधिकार पर सीधा हमला हैं।


    संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव का भी हवाला

    बयान में संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव 2334 का भी हवाला दिया गया है, जिसमें 1967 के बाद कब्जे वाले फ़िलिस्तीनी इलाक़ों की जनसांख्यिकी, स्वरूप और स्थिति बदलने के किसी भी प्रयास की निंदा की गई है। साथ ही, अंतरराष्ट्रीय न्यायालय (ICJ) की 2024 की सलाहकारी राय का उल्लेख करते हुए कहा गया कि अदालत ने इजरायल की मौजूदगी और नीतियों को अवैध करार दिया है। विदेश मंत्रियों ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से अपील की कि वह अपनी क़ानूनी और नैतिक ज़िम्मेदारियाँ निभाए और इज़रायल को पश्चिमी तट में खतरनाक तनाव बढ़ाने और उसके नेताओं के भड़काऊ बयानों पर रोक लगाने के लिए मजबूर करे।


    दो-राष्ट्र समाधान के जरिये ही शांति संभव

    उन्होंने जोर देकर कहा कि फ़िलिस्तीनी जनता के आत्मनिर्णय और स्टेटहुड के अधिकार की पूर्ति ही स्थायी समाधान है, जो अंतरराष्ट्रीय प्रस्तावों और अरब शांति पहल के अनुरूप दो-राष्ट्र समाधान के जरिये ही संभव है। ग़ौरतलब है कि यही आठ देश पिछले वर्ष अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन के साथ गाज़ा में युद्ध और कथित नरसंहार को समाप्त करने की योजना पर भी काम कर चुके हैं। इस महीने की शुरुआत में इन देशों ने गाज़ा में संघर्ष विराम के बार-बार उल्लंघन को लेकर भी इजरायल की निंदा की थी।

  • एलन मस्क की स्टारलिंक को पाकिस्तान में प्रवेश के लिए नहीं मिल रहा लाइसेंस… फंसा पेच?

    एलन मस्क की स्टारलिंक को पाकिस्तान में प्रवेश के लिए नहीं मिल रहा लाइसेंस… फंसा पेच?


    नई दिल्ली।
    अरबपति व्यवसायी एलन मस्क (Billionaire Businessman Elon Musk) की स्टारलिंक (Starlink) को डेटा सुरक्षा संबंधी चिंताओं, मस्क-ट्रंप विवाद और चीनी कंपनियों से प्रतिस्पर्धा के कारण पाकिस्तान (Pakistan) के सैटेलाइट इंटरनेट बाजार (Satellite Internet Market.) में प्रवेश करने का लाइसेंस मिलने में देरी हो रही है। एक पाकिस्तानी अखबार में रविवार को प्रकाशित खबर में यह बात कही गई है।

    एक खबर में कहा है कि स्टारलिंक उन कई कंपनियों में शामिल है, जिन्होंने पाकिस्तान के सैटेलाइट इंटरनेट बाजार में परिचालन की अनुमति मांगी है, लेकिन विभिन्न अनसुलझे सुरक्षा और भूराजनीतिक मुद्दों के कारण अनुमोदन प्रक्रिया धीमी हो गई है। खबर के मुताबिक, सरकार को पता चला है कि स्टारलिंक पाकिस्तान के निगरानी, ​​नियामक और सुरक्षा ढांचे का उल्लंघन करते हुए कुछ डेटा प्रसारित कर सकता है।

    खबर में एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी के हवाले से कहा गया है कि हम पाकिस्तान में उपयोगकर्ताओं के डेटा की सुरक्षा सुनिश्चित करने और डेटा चोरी रोकने के लिए सुरक्षा जांच के बिना स्टारलिंक को लाइसेंस नहीं दे सकते। अधिकारियों के अनुसार, मस्क और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच विवाद एक और बड़ी वजह है, जिसके चलते पाकिस्तान सरकार सुरक्षा मंजूरी देने में हिचकिचा रही है।

    उन्होंने कहा कि ट्रंप के पिछले साल जनवरी में दूसरी बार अमेरिका का राष्ट्रपति बनने के बाद वाशिंगटन और इस्लामाबाद के बीच रिश्तों में सुधार हुआ है, ऐसे में पाकिस्तान ऐसा कोई कदम नहीं उठाना चाहता है, जो अमेरिका को नागवार गुजरे। खबर में कहा गया है कि मौजूदा समय में पांच कंपनियां पाकिस्तान में उपग्रह आधारित इंटरनेट सेवाओं के लिए लाइसेंस हासिल करने की कोशिश कर रही हैं और देश में लाखों अमेरिकी डॉलर का निवेश करने की योजना बना रही हैं।

    पाकिस्तान अंतरिक्ष गतिविधि नियामक बोर्ड (पीएसएआरबी) के मुताबिक, स्टारलिंक और चीन स्थित शंघाई स्पेसकॉम सैटेलाइट टेक्नोलॉजी लिमिटेड (एसएसएसटी) सहित पांच कंपनियों ने उपग्रह आधारित इंटरनेट सेवाएं प्रदान करने में गहरी दिलचस्पी दिखाई है।

    अधिकारियों के अनुसार, पाकिस्तानी बाजार में अमेरिकी कंपनियों की तुलना में चीनी कंपनियों की पहले से ही मजबूत पकड़ है और पाकिस्तान के सैटेलाइट इंटरनेट बाजार में कदम रखने की इच्छुक चीनी कंपनियां स्टारलिंक को अपना सीधा प्रतिस्पर्धी मानती हैं। हालांकि, अधिकारियों ने बताया कि पंजीकरण प्रक्रिया अभी भी पीएसएआरबी बोर्ड के पास लंबित है, जिसने लाइसेंसिंग व्यवस्था को अंतिम रूप नहीं दिया है।