Category: International

  • रूस पर ब्रिटेन का बड़ा दावा, यूरोप की केबल-पाइपलाइनों को निशाना बनाने की कोशिश का लगाया आरोप

    रूस पर ब्रिटेन का बड़ा दावा, यूरोप की केबल-पाइपलाइनों को निशाना बनाने की कोशिश का लगाया आरोप


    नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष के बीच अब यूरोप में रूस को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। ब्रिटेन ने आरोप लगाया है कि रूसी पनडुब्बियों ने समुद्र के नीचे बिछी महत्वपूर्ण केबल्स और पाइपलाइनों को निशाना बनाने की कोशिश की जिसे ब्रिटिश और नॉर्वेजियन सेनाओं ने संयुक्त अभियान के जरिए विफल कर दिया।

    रूस की कथित गतिविधियों पर ब्रिटेन की नजर

    ब्रिटेन के रक्षा मंत्री जॉन हीली ने दावा किया कि रूस की यह गतिविधि लंबे समय से चल रही थी और इसमें युद्धपोत सैन्य विमान और कई पनडुब्बियां शामिल थीं। उनके अनुसार यह अभियान करीब दो महीने तक चला जिसे निगरानी और रणनीतिक जवाबी कार्रवाई के जरिए रोका गया।

    समुद्री सुरक्षा को लेकर बड़ा अभियान

    ब्रिटिश रॉयल नेवी ने नॉर्वे के साथ मिलकर एक संयुक्त सैन्य अभियान चलाया जिसमें रूसी अटैक और जासूसी पनडुब्बियों की गतिविधियों पर नजर रखी गई। ब्रिटेन का कहना है कि जैसे ही उनकी निगरानी बढ़ाई गई रूसी इकाइयां पीछे हट गईं और मिशन छोड़ दिया।

    कठोर परिणाम की चेतावनी
    ब्रिटिश रक्षा मंत्री ने रूस को सख्त चेतावनी देते हुए कहा कि समुद्र के नीचे मौजूद महत्वपूर्ण इंफ्रास्ट्रक्चर को नुकसान पहुंचाने की किसी भी कोशिश के गंभीर परिणाम होंगे। उन्होंने यह भी कहा कि ब्रिटेन लगातार इस क्षेत्र में रूस की हर गतिविधि पर नजर बनाए हुए है।

    रणनीतिक महत्व की केबल्स और पाइपलाइन
    ब्रिटेन के अनुसार जिन समुद्री केबल्स और पाइपलाइनों की सुरक्षा की जा रही है वे वैश्विक संचार और ऊर्जा आपूर्ति के लिए बेहद महत्वपूर्ण हैं। दावा किया गया है कि दुनिया का बड़ा डेटा ट्रैफिक इन्हीं केबल्स से होकर गुजरता है जिससे इनकी सुरक्षा रणनीतिक रूप से अत्यंत संवेदनशील बन जाती है।

    रूस-नाटो तनाव के बीच बढ़ती टकराहट

    यह पूरा घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है जब रूस और पश्चिमी देशों के बीच तनाव पहले से ही चरम पर है। दूसरी ओर अमेरिका में राजनीतिक हलकों में भी नाटो की भूमिका और यूरोपीय देशों की सुरक्षा जिम्मेदारी को लेकर बहस तेज है जिससे वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव और बढ़ता दिख रहा है।

  • इस्लामाबाद में अमेरिका-ईरान के बीच होगी अहम वार्ता, पाकिस्तान मेजबान, इजरायली हमलों ने बढ़ाई चिंता

    इस्लामाबाद में अमेरिका-ईरान के बीच होगी अहम वार्ता, पाकिस्तान मेजबान, इजरायली हमलों ने बढ़ाई चिंता


    नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में तनाव कम करने के उद्देश्य से अमेरिका और ईरान के बीच उच्चस्तरीय वार्ता की मेजबानी पाकिस्तान करने जा रहा है। शुक्रवार को इस्लामाबाद में होने वाली इस अहम बैठक से पहले पाकिस्तान ने राजधानी में सुरक्षा व्यवस्था बेहद कड़ी कर दी है। हालांकि, क्षेत्रीय हालात और इजरायल के हालिया हमलों को लेकर तनाव लगातार बढ़ता जा रहा है।

    ईरान की कड़ी चेतावनी से बढ़ी चिंता

    वार्ता से ठीक पहले ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन ने चेतावनी दी है कि लेबनान पर इजरायल के हमले शुरुआती युद्धविराम का उल्लंघन हैं और इससे बातचीत पर गंभीर असर पड़ सकता है। ईरानी नेतृत्व का कहना है कि ऐसे कदम शांति प्रक्रिया को “निरर्थक” बना सकते हैं। लेबनान में हुए हालिया हमलों में भारी जनहानि की रिपोर्ट के बाद तेहरान का रुख और सख्त हो गया है, और उसने संकेत दिया है कि वह अपने क्षेत्रीय सहयोगियों के साथ खड़ा रहेगा।

    इस्लामाबाद में हाई-लेवल डिप्लोमैसी की तैयारी

    पाकिस्तान इस पूरी वार्ता प्रक्रिया में मध्यस्थ की भूमिका निभा रहा है। प्रधानमंत्री कार्यालय के अनुसार प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और सेना प्रमुख के बीच क्षेत्रीय शांति प्रयासों की समीक्षा भी की गई है। पाकिस्तान ने दोनों पक्षों को भरोसा दिलाया है कि सभी विदेशी प्रतिनिधिमंडलों को “पूर्ण सुरक्षा” प्रदान की जाएगी और बातचीत को सफल बनाने के लिए हर संभव सहयोग दिया जाएगा।

    ईरानी पक्ष में अब भी संशय बरकरार
    पाकिस्तान में ईरान के राजदूत रजा अमीरी मोघादम ने स्पष्ट किया है कि इजरायली हमलों के चलते शांति वार्ता को लेकर गंभीर संदेह बना हुआ है। इसके बावजूद ईरानी प्रतिनिधिमंडल इस्लामाबाद पहुंच रहा है और प्रस्तावित 10-बिंदु एजेंडे पर बातचीत करेगा।

    सुरक्षा की कड़ी व्यवस्था और अंतरराष्ट्रीय भागीदारी

    वार्ता में अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल के शामिल होने की संभावना जताई जा रही है, जिसमें वरिष्ठ अमेरिकी नेतृत्व के साथ प्रमुख रणनीतिक सलाहकार भी मौजूद हो सकते हैं। पाकिस्तान ने अमेरिकी पक्ष को आश्वासन दिया है कि उनकी यात्रा के दौरान अभेद्य सुरक्षा उपलब्ध कराई जाएगी। इस बीच सुरक्षा प्रबंधों की समीक्षा के लिए एक विशेष टीम पहले ही इस्लामाबाद पहुंच चुकी है।

    शांति समझौते पर वैश्विक नजरें
    इस वार्ता में मुख्य ध्यान दीर्घकालिक शांति ढांचे पर रहेगा, जिसमें प्रतिबंधों में राहत, क्षेत्रीय सुरक्षा गारंटी और ईरान के परमाणु व मिसाइल कार्यक्रम जैसे संवेदनशील मुद्दे शामिल हो सकते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यह बातचीत सफल होती है या असफल, इसका सीधा असर पश्चिम एशिया की सुरक्षा स्थिति और वैश्विक ऊर्जा बाजारों पर पड़ेगा।

  • पाक मंत्री के बयान से बढ़ा विवाद, इजरायल ने दी कड़ी चेतावनी, कहा- ये टिप्पणियां बर्दाश्त नहीं करेंगे

    पाक मंत्री के बयान से बढ़ा विवाद, इजरायल ने दी कड़ी चेतावनी, कहा- ये टिप्पणियां बर्दाश्त नहीं करेंगे


    नई दिल्ली। ईरान और अमेरिका के बीच मध्यस्थ बनने की कोशिश कर रहा पाकिस्तान अब अंतरराष्ट्रीय विवाद में घिर गया है। लेबनान में जारी तनाव के बीच पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ के बयान ने इजरायल को भड़का दिया है। इजरायल ने साफ चेतावनी दी है कि इस तरह की टिप्पणियां बर्दाश्त नहीं की जाएंगी।

    लेबनान हमलों पर बयान से बढ़ा तनाव
    ख्वाजा आसिफ ने लेबनान पर इजरायली हमलों को लेकर कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए उसे नरसंहार बताया। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर इजरायल को मानवता के लिए खतरा और “कैंसर” तक कह दिया। अपने बयान में उन्होंने गाजा, ईरान और लेबनान में जारी हिंसा का हवाला देते हुए तीखी आलोचना की।

    इजरायल की तीखी प्रतिक्रिया

    इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के कार्यालय ने इस बयान को बेहद आपत्तिजनक बताया। उन्होंने कहा कि किसी भी देश के लिए इजरायल के विनाश की बात स्वीकार्य नहीं हो सकती, खासकर तब जब वह खुद को शांति प्रक्रिया में निष्पक्ष मध्यस्थ बताता हो।

    विदेश मंत्री ने बताया अनुचित बयान

    इजरायल के विदेश मंत्री गिदोन सार ने भी इस टिप्पणी की आलोचना करते हुए इसे यहूदी-विरोधी बताया। उन्होंने कहा कि इस तरह के बयान शांति वार्ता की भावना के खिलाफ हैं और ऐसे शब्द किसी जिम्मेदार राष्ट्र के अनुरूप नहीं हैं।

    शांति वार्ता के बीच बढ़ा सैन्य तनाव
    इस बीच बेंजामिन नेतन्याहू ने संकेत दिया है कि इजरायल लेबनान के साथ जल्द सीधी बातचीत शुरू करना चाहता है। हालांकि हाल के दिनों में इजरायल ने हिजबुल्लाह के ठिकानों पर बड़े हमले किए हैं, जिनमें भारी नुकसान की खबर है।

    ईरान की चेतावनी, बातचीत पर असर
    लेबनान पर हमलों के बाद ईरान ने भी कड़ी प्रतिक्रिया दी है। उसका कहना है कि इस तरह की सैन्य कार्रवाई से शांति वार्ता का महत्व कम हो जाता है और बातचीत की प्रक्रिया प्रभावित होती है।

  • दिन में मशहूर आर्किटेक्ट, रात में सीरियल किलर: ‘गिलगो बीच’ केस में पिज्जा के टुकड़े से पकड़ा गया आरोपी

    दिन में मशहूर आर्किटेक्ट, रात में सीरियल किलर: ‘गिलगो बीच’ केस में पिज्जा के टुकड़े से पकड़ा गया आरोपी

    न्यूयॉर्क। करीब दो दशकों तक दहशत फैलाने वाले चर्चित ‘गिलगो बीच’ सीरियल किलर मामले में बड़ा मोड़ आया है। लॉन्ग आइलैंड के 62 वर्षीय आर्किटेक्ट रेक्स ह्युएरमैन ने अदालत में महिलाओं की हत्या करने की बात स्वीकार कर ली है। 1993 से 2010 के बीच कई महिलाओं की गला घोंटकर हत्या की गई थी और उनके शवों को समुद्र तटीय इलाके में फेंक दिया जाता था।

    इस सनसनीखेज मामले पर Netflix ने ‘Gone Girls: The Long Island Serial Killer’ नाम से डॉक्यूमेंट्री सीरीज भी बनाई है, जिसने इस केस को वैश्विक चर्चा में ला दिया।

    कैसे खुला राज?

    मामले की परतें 2010 में 23 वर्षीय शैनन गिल्बर्ट के लापता होने के बाद खुलनी शुरू हुईं। उसने 911 पर मदद मांगते हुए कॉल किया था। तलाश के दौरान ओशन पार्कवे के पास पुलिस को कई मानव अवशेष मिले, जिससे सीरियल किलर की आशंका पुख्ता हुई।

    शुरुआत में चार पीड़ितों—मेलिसा बार्थेलेमी, मौरीन ब्रेनार्ड-बार्न्स, एम्बर लिन कॉस्टेलो और मेगन वाटरमैन—को “गिलगो फोर” नाम दिया गया।

    दोहरी जिंदगी जी रहा था आरोपी

    रेक्स ह्युएरमैन मैनहट्टन में एक सफल आर्किटेक्ट था और ‘RH Consultants & Associates’ नाम की कंपनी चलाता था। पड़ोसियों के मुताबिक वह शांत स्वभाव का पारिवारिक व्यक्ति लगता था, लेकिन जांच में सामने आया कि वह दोहरी जिंदगी जी रहा था।

    पुलिस ने उसके घर की 12 दिन तक तलाशी ली, जिसमें बेसमेंट की तिजोरी से 279 हथियार और कंप्यूटर से हत्या की योजना से जुड़े दस्तावेज बरामद हुए।

    कैसे फंसा ‘पिज्जा’ से?

    जांच के दौरान पुलिस को एक फेंके गए पिज्जा बॉक्स से डीएनए सैंपल मिला, जिसे ह्युएरमैन से मैच किया गया। यही अहम सबूत उसे गिरफ्तारी तक ले आया।

    अदालत में कबूलनामा

    8 अप्रैल को आरोपी ने माना कि उसने बर्नर फोन से महिलाओं को पैसों का लालच देकर बुलाया, घर में हत्या की और शवों को बोरियों में लपेटकर गिलगो बीच इलाके में फेंक दिया।

    अब क्या होगी सजा?

    आगामी 17 जून को उसे फर्स्ट-डिग्री मर्डर के लिए बिना पैरोल उम्रकैद और सेकंड-डिग्री मर्डर के मामलों में 25 साल से उम्रकैद तक की सजा सुनाई जा सकती है।

    सफोल्क काउंटी के डिस्ट्रिक्ट अटॉर्नी रे टियरनी ने कहा कि आरोपी आम पारिवारिक व्यक्ति होने का दिखावा करता रहा, जबकि वह महिलाओं को निशाना बनाकर उनकी हत्या करता था।

  • पहली बार भारत दौरे पर आएंगे ऑस्ट्रिया के चांसलर, पीएम मोदी से करेंगे मुलाकात

    पहली बार भारत दौरे पर आएंगे ऑस्ट्रिया के चांसलर, पीएम मोदी से करेंगे मुलाकात

    नई दिल्‍ली। भारत और ऑस्ट्रिया के बीच द्विपक्षीय संबंधों को नई मजबूती देने के उद्देश्य से ऑस्ट्रिया के चांसलर क्रिस्टियन स्टॉकर अगले सप्ताह भारत की पहली आधिकारिक यात्रा पर आ रहे हैं। वह 14 से 17 अप्रैल तक भारत में रहेंगे और इस दौरान कई अहम बैठकों में हिस्सा लेंगे।

    यात्रा के दौरान स्टॉकर, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू और विदेश मंत्री एस. जयशंकर से मुलाकात करेंगे। उनके साथ ऑस्ट्रिया के कई मंत्री और कारोबारी प्रतिनिधि भी आएंगे।

    यात्रा का उद्देश्य

    विदेश मंत्रालय के अनुसार यह स्टॉकर की पहली एशिया यात्रा होगी। इस दौरान दोनों देश विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने, क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों पर विचार-विमर्श करने तथा बहुपक्षीय मंचों पर साझेदारी मजबूत करने पर चर्चा करेंगे।

    पहले भी हुई उच्चस्तरीय मुलाकात

    साल 2024 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ऑस्ट्रिया का दौरा किया था। उस दौरान दोनों देशों ने संबंधों को नई दिशा देने और आर्थिक सहयोग बढ़ाने पर सहमति जताई थी।

    भारत-ऑस्ट्रिया संबंधों का इतिहास

    दोनों देशों के बीच कूटनीतिक संबंध 1949 में स्थापित हुए थे। 1970 के दशक में ऑस्ट्रिया के नेता ब्रूनो कैरिस्की की भारत यात्रा के बाद रिश्तों में नई गति आई। हाल के वर्षों में मशीनरी, इंजीनियरिंग, ऑटोमोबाइल, स्टील, मेटल और केमिकल क्षेत्र में सहयोग बढ़ा है।

    इसके अलावा दोनों देश आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और क्वांटम टेक्नोलॉजी जैसे उभरते क्षेत्रों में भी साथ काम करने पर सहमत हो चुके हैं। यह यात्रा इन सहयोगों को और आगे बढ़ाने के लिहाज से महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

  • चीन ने ताइवान के आसपास का बड़ा हवाई क्षेत्र 40 दिन के लिए किया बंद… ?

    चीन ने ताइवान के आसपास का बड़ा हवाई क्षेत्र 40 दिन के लिए किया बंद… ?


    बीजिंग।
    चीन (China) ने ताइवान (Taiwan.) के आसपास बड़ा हवाई क्षेत्र (Large Airfield) नागरिक विमानों के लिए बंद कर दिया है। इस बार प्रतिबंधित क्षेत्र ताइवान से दोगुना बड़ा है। अधिकारियों ने इसका कोई स्पष्ट कारण नहीं बताया है। न्यूज एजेंसी रॉयटर्स के अनुसार, अमेरिकी संघीय विमानन प्रशासन (US Federal Aviation Administration.- FAA) ने 27 मार्च को विमान चालकों के लिए एक नोटिस (NOTAM) जारी किया, जो कुछ घंटों बाद प्रभावी हो गया। यह नोटिस 6 मई तक, यानी कुल 40 दिनों तक लागू रहेगा। प्रतिबंधित क्षेत्र 73000 वर्ग किलोमीटर में फैला हुआ है, जो ताइवान के कुल क्षेत्रफल (36,197 वर्ग किलोमीटर) से लगभग दोगुना है। यह क्षेत्र ताइवान से कुछ सौ किलोमीटर उत्तर में स्थित है और पीले सागर तथा पूर्वी चीन सागर के ऊपर फैला हुआ है।

    हालांकि चीन ने इस प्रतिबंध का कोई आधिकारिक कारण नहीं बताया है, लेकिन सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि इसका सैन्य उपयोग के अलावा कोई अन्य उद्देश्य नहीं हो सकता। एएफपी को दिए गए बयान में सुरक्षा विशेषज्ञ बेंजामिन ब्लैंडिन ने कहा कि इस तरह के हवाई क्षेत्र प्रतिबंध का सैन्य उपयोग के अलावा कोई अन्य संभावित उपयोग नहीं है। यह मिसाइल परीक्षण, हवाई अभ्यास या अन्य सैन्य गतिविधियों के लिए हो सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि यह पहली बार है जब चीन ने इतने बड़े भौगोलिक क्षेत्र को इतने लंबे समय तक अचानक प्रतिबंधित किया है।

    विमानन और रक्षा सलाहकार एनएक्सटी के जेवियर टाइटेलमैन ने भी इस प्रतिबंध को ‘असामान्य’ बताया। उन्होंने कहा कि इसकी अवधि, आकार और ऊंचाई पर किसी भी प्रकार की सीमा न होने के कारण यह सामान्य NOTAM से अलग है। आमतौर पर NOTAM सैन्य अभ्यास, आग या ज्वालामुखी विस्फोट जैसी घटनाओं के लिए जारी किए जाते हैं।

    नागरिक विमानों पर प्रतिबंध, सैन्य विमानों पर नहीं
    टाइटेलमैन ने बताया कि इस क्षेत्र को केवल नागरिक उड्डयन के लिए बंद किया गया है। सैन्य विमान, हेलीकॉप्टर और ड्रोन इस प्रतिबंध से प्रभावित नहीं होंगे। इसका मतलब है कि चीन सरकार ने अपने सैन्य उपयोग के लिए यह क्षेत्र आरक्षित कर लिया है। प्रतिबंध दो क्षेत्रों पर पीले सागर में (चीन-दक्षिण कोरिया के बीच) और तीन क्षेत्रों पर पीले सागर व पूर्वी चीन सागर के बीच (चीन-जापान के बीच) लागू है। इन प्रतिबंधित क्षेत्रों के बीच लगभग 100 किलोमीटर चौड़े हवाई गलियारे छोड़े गए हैं, जिससे शंघाई तक नागरिक विमानों की आवाजाही संभव हो सके।


    क्या है ताइवान का आरोप?

    ताइवान के एक वरिष्ठ सुरक्षा अधिकारी ने आरोप लगाया है कि चीन मध्य पूर्व में अमेरिका के व्यस्त होने का फायदा उठाते हुए हिंद-प्रशांत क्षेत्र में अपनी सैन्य गतिविधियां तेज कर रहा है। अधिकारी ने कहा कि चीन का मकसद अमेरिका के क्षेत्रीय सहयोगियों को डराना और हिंद-प्रशांत में अमेरिकी सैन्य प्रभाव को कमजोर करना है। सुरक्षा विशेषज्ञ बेंजामिन ब्लैंडिन ने इसे चीन की ‘पहुंच से इनकार’ की रणनीति का हिस्सा बताया। उन्होंने कहा कि यह चीन द्वारा अपने पड़ोसी देशों की भूमि और समुद्री सीमाओं पर दबाव बढ़ाने और कब्जा करने के निरंतर प्रयासों का एक हिस्सा है।

  • ट्रंप के ऐलान के बाद भी संशय कायम, इस्लामाबाद में बातचीत से पहले बढ़ी सुरक्षा और चिंता

    ट्रंप के ऐलान के बाद भी संशय कायम, इस्लामाबाद में बातचीत से पहले बढ़ी सुरक्षा और चिंता


    नई दिल्ली । अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा ईरान के साथ दो हफ्ते के संघर्षविराम की घोषणा के बाद दुनिया को उम्मीद थी कि हालात सामान्य होंगे और तनाव कम होगा लेकिन घटनाक्रम ने एक अलग ही तस्वीर पेश कर दी है। सीजफायर के ऐलान के बावजूद जमीनी हालात और प्रमुख नेताओं के बयानों ने इस समझौते की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

    ट्रंप ने पाकिस्तान की मध्यस्थता का उल्लेख करते हुए संघर्षविराम की घोषणा की थी जिसे वैश्विक स्तर पर राहत के रूप में देखा गया। पाकिस्तान ने भी इसे अपनी कूटनीतिक सफलता के तौर पर प्रस्तुत किया लेकिन इसके तुरंत बाद इजरायल की सैन्य गतिविधियां और अमेरिका के शीर्ष नेताओं के बयान इस उम्मीद पर पानी फेरते नजर आए।

    अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस और रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ के बयानों में कई ऐसे संकेत मिले जिससे यह स्पष्ट हुआ कि सीजफायर को लेकर पूरी तरह सहमति और स्पष्टता नहीं है। इजरायल द्वारा लेबनान पर किए गए हमले और हिज्बुल्लाह को लेकर अस्पष्ट स्थिति ने इस समझौते को और अधिक उलझा दिया है। खुद ट्रंप ने यह कहा कि हिज्बुल्लाह को लेकर इस समझौते में कोई स्पष्ट उल्लेख नहीं है जबकि पाकिस्तान का दावा था कि यह भी समझौते का हिस्सा है।

    इसी बीच पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में एक अलग ही माहौल देखने को मिल रहा है। आम दिनों की चहल-पहल की जगह अब सन्नाटा और कड़ी सुरक्षा व्यवस्था ने ले ली है। शहर के कई हिस्सों में आवागमन सीमित कर दिया गया है और सुरक्षा बलों की तैनाती बढ़ा दी गई है। इसका मुख्य कारण ईरान के उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल का आगमन है जो अमेरिका के साथ संवेदनशील कूटनीतिक वार्ता के लिए यहां पहुंच रहा है।

    पाकिस्तान इस पूरी प्रक्रिया में मध्यस्थ की भूमिका निभा रहा है और उसने दोनों पक्षों को बातचीत की मेज तक लाने में अहम भूमिका निभाई है। हालांकि इस प्रयास को जितनी सराहना मिल रही है उतनी ही शंका भी इसके परिणामों को लेकर बनी हुई है।

    इस वार्ता के सफल होने में सबसे बड़ी बाधा भरोसे की कमी है। ईरान के भीतर ही इस बात को लेकर संदेह है कि क्या यह बातचीत किसी ठोस नतीजे तक पहुंचेगी या केवल तनाव को अस्थायी रूप से टालने का एक प्रयास साबित होगी। ईरानी संसद के स्पीकर मोहम्मद बाघेर गालिबफ ने पहले ही अमेरिका पर सीजफायर के 10 में से तीन बिंदुओं के उल्लंघन का आरोप लगा दिया है जिससे स्थिति और जटिल हो गई है।

    वहीं पाकिस्तान में ईरान के राजदूत रेजा अमीरी मोगादम द्वारा सोशल मीडिया पर किया गया पोस्ट और उसका बाद में डिलीट होना भी इस पूरे घटनाक्रम की संवेदनशीलता को दर्शाता है। उनके पोस्ट में ईरानी प्रतिनिधिमंडल के इस्लामाबाद पहुंचने और 10 बिंदुओं पर गंभीर बातचीत की बात कही गई थी लेकिन पोस्ट हटाए जाने से कूटनीतिक गोपनीयता और अनिश्चितता दोनों उजागर हुई हैं।

    यह वार्ता केवल अमेरिका और ईरान के बीच संबंधों तक सीमित नहीं है बल्कि इसका असर पूरे पश्चिम एशिया की स्थिरता वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति और अंतरराष्ट्रीय राजनीति पर पड़ सकता है। ऐसे में दुनिया की नजरें इस्लामाबाद पर टिकी हैं जहां सन्नाटे और सख्त सुरक्षा के बीच शांति की एक कठिन कोशिश जारी है।

  • ईरान बोला, बिना अनुमति स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में घुसा जहाज ‘नष्ट’ होगा

    ईरान बोला, बिना अनुमति स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में घुसा जहाज ‘नष्ट’ होगा


    तेहरान।
     ईरान ने अमेरिका  के साथ दो सप्ताह के युद्धविराम की घोषणा के कुछ घंटों बाद ही कड़ा रुख अपनाते हुए स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में जहाजों को सख्त चेतावनी जारी की है। ईरानी नौसेना ने कहा है कि तेहरान की अनुमति के बिना इस अहम समुद्री मार्ग में प्रवेश करने वाले किसी भी पोत को नष्ट कर दिया जाएगा।

    रिपोर्ट के अनुसार, ईरानी नौसेना ने समुद्री मार्ग के आसपास मौजूद जहाजों को रेडियो संदेश भेजकर स्पष्ट किया कि होर्मुज पार करने के लिए इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (सेपाह) की नौसेना से अनुमति लेना अनिवार्य होगा। चेतावनी में कहा गया कि बिना अनुमति गुजरने की कोशिश करने वाले जहाज को “उड़ा दिया जाएगा।”

    The Wall Street Journal की रिपोर्ट में चालक दल द्वारा साझा किए गए ऑडियो का हवाला देते हुए बताया गया कि इस चेतावनी के बाद कई जहाज फिलहाल होर्मुज के आसपास रुके हुए हैं। फारस की खाड़ी के ऊपर युद्धक विमानों की तैनाती भी जारी बताई गई है।

    वैश्विक तेल आपूर्ति के लिए अहम मार्ग
    ईरान और ओमान के बीच स्थित यह समुद्री मार्ग करीब 34 किलोमीटर चौड़ा है और खाड़ी को हिंद महासागर से जोड़ता है। दुनिया की लगभग एक-पांचवीं तेल आपूर्ति इसी रास्ते से गुजरती है, इसलिए यहां तनाव बढ़ने से वैश्विक ऊर्जा बाजार पर असर पड़ सकता है।

    दो सप्ताह के युद्धविराम की घोषणा
    डोनाल्ड ट्रंप ने मंगलवार को कहा था कि वे ईरान पर हमले दो सप्ताह के लिए निलंबित करने पर सहमत हुए हैं, बशर्ते होर्मुज मार्ग “पूर्ण, तत्काल और सुरक्षित” तरीके से खुला रहे। उन्होंने बताया कि यह फैसला शहबाज शरीफ और आसिम मुनीर के प्रस्ताव के बाद लिया गया।

    ईरान का संदेश—यह युद्ध का अंत नहीं

    दूसरी ओर, ईरान की सर्वोच्च राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद ने युद्धविराम को स्वीकार करते हुए कहा कि यह संघर्ष का अंत नहीं है। तेहरान ने चेतावनी दी कि यदि विरोधी पक्ष कोई गलती करता है तो “पूर्ण शक्ति” से जवाब दिया जाएगा।

    बताया जा रहा है कि दोनों पक्षों के बीच आगे की बातचीत पाकिस्तान में हो सकती है। हालांकि, होर्मुज में बढ़ी सख्ती ने यह संकेत दे दिया है कि युद्धविराम के बावजूद क्षेत्र में तनाव कम होने के बजाय और संवेदनशील बना हुआ है।

  • सीजफायर, ईरान-इजरायल-अमेरिका की तनातनी से फिर भड़क सकता है मिडिल ईस्ट

    सीजफायर, ईरान-इजरायल-अमेरिका की तनातनी से फिर भड़क सकता है मिडिल ईस्ट


    तेहरान।
     करीब 40 दिनों से जारी भीषण संघर्ष के बाद जब अमेरिका और ईरान के बीच सीजफायर का ऐलान हुआ, तो क्षेत्र में शांति की उम्मीद जगी थी। लेकिन महज 24 घंटे के भीतर ही हालात बदलते नजर आ रहे हैं। तीनों प्रमुख पक्ष—ईरान, इजरायल और अमेरिका—के बयान अलग-अलग दिशा में जाते दिख रहे हैं, जिससे सीजफायर पर संकट के बादल मंडराने लगे हैं।

    अमेरिका ने खारिज किया ईरान का प्रस्ताव
    कूटनीतिक मोर्चे पर सबसे बड़ा विवाद तब शुरू हुआ जब अमेरिका ने ईरान के 10 सूत्रीय शांति प्रस्ताव को सिरे से खारिज कर दिया। अमेरिकी प्रशासन ने तीखे शब्दों में कहा कि प्रस्ताव को “कूड़े के डिब्बे में डाल दिया गया।” इससे संकेत मिला कि वॉशिंगटन ईरान की शर्तों पर आगे बढ़ने को तैयार नहीं है और वह इजरायल के रुख का समर्थन कर रहा है।


    अमेरिका ने यह भी स्पष्ट किया कि सीजफायर समझौते में लेबनान से जुड़े हमलों को शामिल नहीं किया गया है, इसलिए उस मोर्चे पर कार्रवाई जारी रह सकती है।

    लेबनान पर इजरायल के हमले तेज
    सीजफायर के तुरंत बाद इजरायल ने समझौते की तकनीकी खामी का हवाला देते हुए कहा कि लेबनान में उसके सैन्य अभियान जारी रहेंगे। इसके बाद इजरायली हमलों में तेजी देखी गई, जिनमें 100 से अधिक लोगों के मारे जाने की खबर है।
    इजरायल का कहना है कि वह हिजबुल्लाह के ठिकानों को निशाना बनाता रहेगा और यह कार्रवाई सीजफायर का उल्लंघन नहीं मानी जाएगी।

    ईरान की चेतावनी—हमले हुए तो खत्म समझौता
    इजरायल के रुख पर ईरान ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है। तेहरान ने कहा कि अगर लेबनान पर हमले जारी रहे तो सीजफायर स्वतः समाप्त माना जाएगा। ईरान ने अमेरिका और इजरायल को चेतावनी देते हुए कहा कि “गेंद अब आपके पाले में है”, यानी जवाबी कार्रवाई की संभावना बनी हुई है।

    क्या हो सकता है असर?

    अगर सीजफायर पूरी तरह टूटता है तो इसका असर पूरे मिडिल ईस्ट पर पड़ सकता है। हिजबुल्लाह के सीधे युद्ध में उतरने से संघर्ष कई मोर्चों पर फैल सकता है और ईरान की प्रत्यक्ष भागीदारी का खतरा बढ़ जाएगा।
    विशेषज्ञों का मानना है कि हालात बिगड़ने पर होर्मुज जलडमरूमध्य से कच्चे तेल की आपूर्ति प्रभावित हो सकती है, जिससे वैश्विक स्तर पर पेट्रोल-डीजल की कीमतों में तेज उछाल आ सकता है।

    महज 24 घंटे में समझौते का डगमगाना यह दिखाता है कि पक्षों के बीच अविश्वास कितना गहरा है और शांति की राह अभी भी बेहद कठिन बनी हुई है।

  • ईरान युद्ध में सऊदी अरब को मिला दोहरा जख्म, तेल सप्लाई के दूसरे रास्ते पर भी हमला

    ईरान युद्ध में सऊदी अरब को मिला दोहरा जख्म, तेल सप्लाई के दूसरे रास्ते पर भी हमला

    तेहरान। पश्चिम एशिया में जारी जंग ट्रंप के सीजफायर के ऐलान के बाद थम गई है। लेकिन इसकी वजह से होने वाले नुकसान की भरपाई करने में कई वर्ष लग जाएंगे। इस युद्ध  के दौरान ईरान ने होर्मुज स्ट्रेट को बंद कर दिया था, जिसकी वजह से पूरी दुनिया में कच्चे तेल के दामों में उछाल आ गया था। सऊदी अरब ने तेल सप्लाई के अपने दूसरे रास्ते (ईस्ट-वेस्ट तेल पाइपलाइन) का उपयोग करना शुरू कर दिया था। हालांकि, अब सामने आईं रिपोर्ट्स के मुताबिक ईरानी हमले में इस पाइपलाइन को भी नुकसान पहुंचा है।

    रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, भले ही ट्रंप के सीजफायर ऐलान के बाद होर्मुज का रास्ता खुल गया हो, लेकिन इसके बाद भी लाखों बैरल तेल कच्चे बाजार से बाहर होने की आशंका है। सऊदी अरब में मौजूद एक स्त्रोत के मुताबिक ईरान ने अपने हमलों के दौरान सऊदी अरब के कई तेल प्रतिष्ठानों और तेल सप्लाई प्वाइंट्स को निशाना बनाया था। इसमें ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन और उसके एक केंद्र (यानबू बंदरगाह) को भी निशाना बनाया गया है। इस पाइपलाइन के जरिए सऊदी अरब होर्मुज को बायपास करके तेल की सप्लाई को चालू रखता है।

    बता दें, ईरान के साथ बढ़ते तनाव और होर्मुज स्ट्रेट पर अपनी निर्भरता को कम करने के लिए ही सऊदी अरब ने ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन का निर्माण किया था। इसके जरिए तेल सप्लाई को यानबू पर ले जाकर लाल सागर के जरिए आगे बढ़ाया जाता है। इस पाइपलाइन के जरिए प्रतिदिन लगभग 70 लाख बैरल तेल सप्लाई होता था। 28 फरवरी के बाद सामने आए शिपिंग डेटा के मुताबिक यानबू की क्षमता करीब 4.6 मिलियन बैरल प्रतिदिन है। पिछले कुछ दिनों से यह लगातार अपनी पूरी क्षमता के साथ काम कर रही थी। लेकिन अब इस पर भी हमला करके ईरान ने सऊदी के इस कदम पर भी पानी फेर दिया है।

    तेल प्रतष्ठानों पर हुए इन हमलों की जिम्मेदारी आईआरजीसी ने ली है। बुधवार को जारी एक बयान में आईआरजीसी की तरफ से कहा गया कि फारस की खाड़ी में कई लक्ष्यों के ऊपर मिसाइलों और ड्रोन्स के जरिए हमला किया गया है। इसमें यानबू में मौजूद अमेरिकी कंपनियों के ठिकानों को भी निशाना बनाया। यह पहली बार नहीं है कि जब इस संघर्ष के दौरान ईरान ने यानबू बंदरगाह को निशाना बनाने की कोशिश की है। इससे पहले भी ईरान ने खाड़ी क्षेत्र के तमाम ऊर्जा केंद्रों को निशाना बनाया था। होर्मुज के ऊपर तेहरान ने पहले से ही पाबंदी लगा रखी थी। इसकी वजह से पूरी दुनिया में तेल के दाम आसमान छू रहे थे। हालांकि, अब सीजफायर के ऐलान के साथ ही होर्मुज को खोलने पर भी सहमति बनी है। विशेषज्ञों के मुताबिक अगर कल से होर्मुज अपनी पूरी क्षमता के साथ शुरू भी हो जाता है, तब भी स्थिति को सामान्य होने में कई महीनों का वक्त लग जाएगा।