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  • Pakistan: दौड़ते हुए आया हमलावर, गोलियां चलीं…. फिर इमामबाड़े में गूंजा धमाका… चश्मदीदों ने सुनाई ब्लास्ट की दास्तान

    Pakistan: दौड़ते हुए आया हमलावर, गोलियां चलीं…. फिर इमामबाड़े में गूंजा धमाका… चश्मदीदों ने सुनाई ब्लास्ट की दास्तान


    इस्लामाबाद।
    पाकिस्तान (Pakistan) की राजधानी इस्लामाबाद (Islamabad ) शुक्रवार को उस वक्त खौफ और दहशत में डूब गई, जब जुमे की नमाज़ के दौरान एक शिया इमामबाड़े (Shia Imambaras) को निशाना बनाकर आत्मघाती हमला (Suicide Blast) कर दिया गया। इस भीषण विस्फोट में अब तक कम से कम 31 लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है, जबकि 170 से ज़्यादा लोग घायल बताए जा रहे हैं। अधिकारियों का कहना है कि कई घायलों की हालत गंभीर है, ऐसे में मृतकों का आंकड़ा और बढ़ सकता है। धमाका ठीक उसी समय हुआ, जब नमाज़ शुरू हो रही थी और इमामबाड़ा पूरी तरह भरा हुआ था।


    गेट पर रोका, गोलियाँ चलीं और फिर मौत का मंजर

    पुलिस अधिकारियों और प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, आत्मघाती हमलावर को इमामबाड़े के मुख्य द्वार पर तैनात सुरक्षा गार्डों ने रोक लिया था। इसी दौरान अचानक हालात बिगड़ गए। चश्मदीदों का कहना है कि हमलावर ने सुरक्षा कर्मियों पर अंधाधुंध फायरिंग शुरू कर दी, जिसमें कुछ गार्ड घायल हो गए। इसके बाद वह लगभग 20 मीटर तक दौड़ता हुआ अंदर घुसा और नमाज़ के बीच खुद को विस्फोट से उड़ा लिया। यह आतंकी वारदात इस्लामाबाद के बाहरी इलाके में स्थित खदीजा तुल कुबरा इमामबाड़ा में हुई। वहां मौजूद लोगों को संभलने तक का मौका नहीं मिला और पलभर में इबादत की जगह मातम में बदल गई।


    “हर तरफ चीखें थीं, खून था” — आंखों देखा हाल

    एक चश्मदीद ने बताया, “हमलावर को गेट पर रोका गया था। तभी गोलियों की आवाज आई। इसके बाद वह अंदर की ओर भागा और नमाज़ के दौरान जाकर धमाका कर दिया।” वहीं, हुसैन शाह ने बताया कि वह इमामबाड़े के आंगन में नमाज़ अदा कर रहे थे। उन्होंने कहा, “अचानक एक बहुत ज़ोरदार धमाका हुआ। उसी पल समझ आ गया कि कोई बड़ा हमला हुआ है।” हुसैन शाह के मुताबिक, जब वे अंदर पहुंचे तो हर तरफ अफरातफरी थी। “चारों ओर चीख-पुकार मची थी, खून बिखरा हुआ था। मैंने करीब 30 शव खुद देखे, जबकि घायलों की संख्या उससे कहीं ज़्यादा थी।”


    धमाके से कांपी इमारत, आसपास के घर भी क्षतिग्रस्त

    विस्फोट की तीव्रता इतनी ज़्यादा थी कि इमामबाड़े की तीन मंज़िला इमारत की खिड़कियाँ चकनाचूर हो गईं। आसपास की रिहायशी इमारतों को भी नुकसान पहुंचा। मस्जिद के अंदर मौजूद बच्चों और बुज़ुर्गों समेत लगभग 200 लोग घायल हो गए। हालात इतने भयावह थे कि घायलों को स्ट्रेचर के अलावा निजी गाड़ियों और यहां तक कि कारों की डिक्की में डालकर अस्पताल पहुंचाया गया। एक अन्य प्रत्यक्षदर्शी ने बताया कि दृश्य दिल दहला देने वाला था। कई लोग खून से लथपथ पड़े थे और हर कोई अपनों को ढूंढने की कोशिश कर रहा था।


    अस्पतालों में इमरजेंसी, मरीज रावलपिंडी भेजे गए

    हमले के तुरंत बाद इस्लामाबाद के PIMS (पाकिस्तान इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज), पॉलीक्लिनिक अस्पताल और CDA अस्पताल में आपातकाल घोषित कर दिया गया। इस्लामाबाद के डिप्टी कमिश्नर इरफान नवाज़ मेमन ने बताया कि घायलों की संख्या अधिक होने के कारण कई मरीजों को रावलपिंडी के अस्पतालों में शिफ्ट किया गया है। इमरजेंसी वार्ड के बाहर परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल था।


    इलाका सील, सुरक्षा एजेंसियां हाई अलर्ट पर

    धमाके के बाद पाकिस्तान आर्मी, रेंजर्स और पुलिस ने पूरे इलाके को घेरकर सील कर दिया। फिलहाल रेस्क्यू ऑपरेशन और जांच की प्रक्रिया एक साथ चल रही है। अब तक किसी भी आतंकी संगठन ने इस हमले की जिम्मेदारी नहीं ली है। जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि सुरक्षा घेरा कैसे टूटा और हमलावर इमामबाड़े के अंदर तक कैसे पहुंचा। गौरतलब है कि यह हमला ऐसे समय में हुआ है, जब उज़्बेकिस्तान के राष्ट्रपति शौकत मिर्ज़ियोयेव दो दिन की आधिकारिक यात्रा पर इस्लामाबाद में मौजूद हैं। घटना के बाद राजधानी में सुरक्षा व्यवस्था और कड़ी कर दी गई है और हालात अब भी तनावपूर्ण बने हुए हैं।

  • AI वीडियो शेयर कर ट्रंप फिर विवादों में, ओबामा दंपति को बंदर दिखाने पर मचा राजनीतिक तूफान

    AI वीडियो शेयर कर ट्रंप फिर विवादों में, ओबामा दंपति को बंदर दिखाने पर मचा राजनीतिक तूफान


    वाशिंगटन।
    अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (American President Donald Trump) एक बार फिर अपने सोशल मीडिया पोस्ट (Social Media post) को लेकर जबरदस्त विवाद में घिर गए हैं। इस बार मामला देश के पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा (Former President Barack Obama.) और उनकी पत्नी मिशेल ओबामा (Michelle Obama) से जुड़ा है। ट्रंप द्वारा सोशल मीडिया पर साझा किए गए एक वीडियो में ओबामा दंपति को बंदर के रूप में दिखाए जाने के बाद सियासी हलकों में तीखी प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है। इस कथित नस्लभेदी कंटेंट को लेकर डेमोक्रेटिक पार्टी ने ट्रंप पर जमकर निशाना साधा है।

    दरअसल, गुरुवार रात ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर कई पोस्ट साझा किए। इन्हीं में से एक 62 सेकंड का वीडियो क्लिप सबसे ज्यादा चर्चा में है। शुरुआती जांच में यह वीडियो आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से तैयार किया गया प्रतीत होता है। वीडियो में 2020 के राष्ट्रपति चुनाव को लेकर यह दावा किया गया है कि कुछ अहम राज्यों में वोटिंग मशीनों के साथ जानबूझकर छेड़छाड़ की गई थी।


    वीडियो में क्या दिखाया गया?

    इस क्लिप के एक हिस्से में दो चिम्पैंजी नजर आते हैं, जिन पर बराक ओबामा और मिशेल ओबामा के मुस्कुराते हुए चेहरे एडिट कर दिए गए हैं। बताया जा रहा है कि यह दृश्य एक लंबे वीडियो से लिया गया है, जिसे पहले एक मीम पेज पर शेयर किया गया था। उसी वीडियो में डोनाल्ड ट्रंप को खुद को “जंगल का राजा” बताते हुए दिखाया गया है। इतना ही नहीं, वीडियो में मौजूदा राष्ट्रपति जो बाइडेन समेत कई अन्य डेमोक्रेटिक नेताओं को भी जानवरों के रूप में पेश किया गया है। बाइडेन को केले खाते हुए चिम्पैंजी के रूप में दर्शाया गया, जिससे डेमोक्रेटिक खेमे में नाराजगी और बढ़ गई।


    डेमोक्रेट्स का तीखा पलटवार

    देश के पहले अश्वेत राष्ट्रपति रहे बराक ओबामा और उनकी पत्नी के खिलाफ इस तरह के चित्रण को लेकर डेमोक्रेटिक नेताओं ने इसे नस्लवादी और अपमानजनक करार दिया है। आलोचकों का कहना है कि ट्रंप का यह कदम राजनीतिक मर्यादाओं को तोड़ने वाला है।

    कैलिफ़ोर्निया के गवर्नर गैविन न्यूज़ोम ने इस पोस्ट की कड़ी निंदा करते हुए इसे “घिनौना” बताया। उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा, “राष्ट्रपति का यह व्यवहार बेहद शर्मनाक है। हर एक रिपब्लिकन को इसकी निंदा करनी चाहिए। अभी।” वहीं, बराक ओबामा के पूर्व वरिष्ठ राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार बेन रोड्स ने भी ट्रंप पर हमला बोला। उन्होंने कहा कि इतिहास डोनाल्ड ट्रंप को एक नकारात्मक और विभाजनकारी व्यक्ति के रूप में याद रखेगा।


    पहले भी रहे हैं विवाद

    गौरतलब है कि यह पहली बार नहीं है जब डोनाल्ड ट्रंप ओबामा परिवार को लेकर विवादों में आए हों। इससे पहले भी वह बराक ओबामा और मिशेल ओबामा पर व्यक्तिगत हमले कर चुके हैं और कई मौकों पर उनके बयानों को भड़काऊ और नस्लभेदी बताया गया है। फिलहाल इस वीडियो को लेकर अमेरिका की राजनीति में बवाल मचा हुआ है। एक ओर ट्रंप समर्थक इसे राजनीतिक व्यंग्य बता रहे हैं, तो दूसरी ओर विरोधी इसे खुले तौर पर नस्लभेदी मानसिकता का उदाहरण बता रहे हैं।

  • नेपाल सरकार देशभर की 3 लाख बालिकाओं को एचपीवी टीका लगाएगी

    नेपाल सरकार देशभर की 3 लाख बालिकाओं को एचपीवी टीका लगाएगी

    काठमांडू। नेपाल सरकार ने देशभर की 3 लाख बालिकाओं को गर्भाशय ग्रीवा के कैंसर के खिलाफ ह्यूमन पैपिलोमा वायरस (एचपीवी) का टीका देने का निर्णय लिया है। यह टीकाकरण आगामी रविवार से शुरू होगा।

    परिवार कल्याण महाशाखा के अंतर्गत टीकाकरण शाखा के प्रमुख डॉ. अभियान गौतम के अनुसार यह कार्यक्रम कक्षा 6 में अध्ययनरत और 10 वर्ष की आयु पूरी कर चुकी बालिकाओं को लक्षित कर लागू किया गया है। उन्होंने कहा कि पहले इसे अभियान के रूप में चलाया गया था, लेकिन अब इसे नियमित कार्यक्रम में शामिल किया गया है। 10 वर्ष की आयु पूरी कर चुकी और कक्षा 6 में पढ़ने वाली बालिकाओं को एचपीवी टीका लगाया जाएगा। डॉ. गौतम ने बताया कि विद्यालयों में ही टीकाकरण केंद्र स्थापित किए जाएंगे, जिससे टीका वितरण प्रक्रिया अधिक सरल और प्रभावकारी होगी।

    सरकार ने गत वर्ष अभियान के रूप में कक्षा 6 से 10 तक की छात्राओं के साथ-साथ स्कूल न जाने वाली 10 से 14 वर्ष आयु वर्ग की किशोरियों सहित कुल 16 लाख किशोरियों को टीका लगाया था, जिनमें से 94 प्रतिशत ने टीका प्राप्त किया था। चिकित्सकों के अनुसार नेपाल में महिलाओं की मृत्यु के प्रमुख कारणों में गर्भाशय ग्रीवा का कैंसर भी एक है। इस कैंसर का मुख्य कारण ह्यूमन पैपिलोमा वायरस (एचपीवी) संक्रमण माना जाता है।

    एचपीवी एक संक्रामक वायरस है, जो आसानी से फैलता है और मुख्य रूप से त्वचा के संपर्क से संक्रमण होता है। ह्यूमन पैपिलोमा वायरस की 200 से अधिक प्रजातियां पाई जाती हैं, जिनमें से 12 प्रजातियां मानव शरीर में कैंसर का कारण बनती हैं। इनमें से लगभग 80 प्रतिशत गर्भाशय ग्रीवा के कैंसर के मामले एचपीवी की 16 और 18 प्रजातियों से होते हैं। अनुमान के अनुसार हर वर्ष 2,169 महिलाओं में गर्भाशय ग्रीवा का कैंसर होता है, जिनमें से 1,313 महिलाओं की मृत्यु इसी बीमारी के कारण होती है।

    चिकित्सकों के मुताबिक गर्भाशय ग्रीवा के कैंसर में योनि से दुर्गंधयुक्त या खून मिला स्राव, पेट दर्द, मासिक धर्म बंद हो जाने के बाद भी रक्तस्राव, तथा यौन संबंध के बाद रक्तस्राव जैसे लक्षण दिखाई देते हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि कम उम्र में विवाह, कम उम्र में प्रसव, अधिक संतान होना, कम अंतराल में बार-बार प्रसव, असुरक्षित यौन संबंध, अधिक धूम्रपान और मद्यपान, तथा जननांगों की स्वच्छता पर ध्यान न देने से एचपीवी संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है। एचपीवी टीका न केवल गर्भाशय ग्रीवा के कैंसर से, बल्कि एचपीवी से होने वाली अन्य बीमारियों से भी बचाव करता है। यह टीका गर्भाशय ग्रीवा, गुदद्वार, गले तथा जननांगों के कैंसर से भी सुरक्षा प्रदान करता है।

  • पश्चिम बंगाल सरकार की बड़ी पहल: बेरोजगार युवाओं को मिलेंगे हर महीने 1500 रुपये

    पश्चिम बंगाल सरकार की बड़ी पहल: बेरोजगार युवाओं को मिलेंगे हर महीने 1500 रुपये


    नई दिल्ली । पश्चिम बंगाल की ममता सरकार ने बेरोजगार युवाओं के लिए अहम घोषणा की है। राज्य सरकार 2026 के विधानसभा चुनाव से पहले ‘बांग्लार युवा साथी’ नामक योजना के तहत योग्य बेरोजगारों को आर्थिक सहायता देगी।

    इस योजना के तहत 21 से 41 साल की उम्र के योग्य युवाओं को हर महीने 1,500 रुपये का मासिक भत्ता दिया जाएगा। यह लाभ अधिकतम पांच साल तक या जब तक उन्हें स्थायी रोजगार नहीं मिलता, तब तक जारी रहेगा। योजना का उद्देश्य उन युवाओं को वित्तीय मदद प्रदान करना है, जिन्होंने माध्यमिक या समकक्ष परीक्षा पास की है लेकिन अभी तक नौकरी नहीं पाई और किसी अन्य सरकारी छात्रवृत्ति का लाभ नहीं ले रहे। योजना 15 अगस्त 2026 से लागू होगी।

    बजट और वित्तीय आवंटन:
    राज्य सरकार ने इस योजना के लिए 5,000 करोड़ रुपये का बजट तय किया है। इसके अलावा, महिलाओं के लिए लक्ष्मी भंडार योजना में भी बढ़ोतरी की गई है। फरवरी से सामान्य वर्ग की महिलाओं को 1,500 रुपये प्रति माह और एससी-एसटी वर्ग की महिलाओं को 1,700 रुपये प्रति माह दिया जाएगा। इस योजना के लिए कुल 15,000 करोड़ रुपये का आवंटन किया गया है। ऐसे में राज्य सरकार बेरोजगारों और महिलाओं के कल्याण के लिए कुल लगभग 20,000 करोड़ रुपये का बजट तैयार कर रही है।

    कर्मचारियों के लिए राहत:
    सरकार ने कर्मचारियों के लिए भी राहत का ऐलान किया है। 1 अप्रैल से बढ़ा हुआ महंगाई भत्ता (DA) लागू होगा और सातवें वेतन आयोग के गठन की भी संभावना जताई गई है।विश्लेषकों के अनुसार, यह योजना और घोषणाएं युवाओं, महिलाओं और कर्मचारियों के लिए बड़ी आर्थिक मदद हैं और 2026 के विधानसभा चुनाव से पहले ममता सरकार का मास्टरस्ट्रोक मानी जा रही हैं।

  • भारत-खाड़ी देशों के बीच FTA बातचीत फिर शुरू, पाक-सऊदी डील के बीच उठाया बड़ा कूटनीतिक कदम

    भारत-खाड़ी देशों के बीच FTA बातचीत फिर शुरू, पाक-सऊदी डील के बीच उठाया बड़ा कूटनीतिक कदम


    नई दिल्ली । GCC छह खाड़ी देशों का संगठन है जिसमें सऊदी अरब UAE कतर कुवैत ओमान और बहरीन शामिल हैं। पीयूष गोयल ने बताया कि भारत और इन देशों के बीच व्यापारिक संबंध लगभग 5000 साल पुराने हैं। वर्तमान में लगभग 1 करोड़ भारतीय इन देशों में रहते हैं और उनकी अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण योगदान दे रहे हैं। यह FTA वस्तुओं और सेवाओं के मुक्त प्रवाह को बढ़ाने निवेश को बढ़ावा देने और नीतिगत स्थिरता लाने का लक्ष्य रखता है।

    पाक-सऊदी रक्षा समझौते का प्रभाव
    भारत और GCC के बीच बातचीत उस समय शुरू हो रही है जब क्षेत्रीय भू-राजनीति जटिल है। सितंबर 2025 में सऊदी अरब और पाकिस्तान ने ‘सामरिक पारस्परिक रक्षा समझौता’SMDA पर हस्ताक्षर किए। यह समझौता मई 2025 में भारत और पाकिस्तान के बीच सैन्य गतिरोधऑपरेशन सिंदूर के कुछ महीनों बाद हुआ। अप्रैल 2025 में पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद भारत ने पाकिस्तान स्थित आतंकी ठिकानों पर हमला किया था।

    UAE और पाकिस्तान के रिश्तों में तनाव
    जहां पाकिस्तान-सऊदी नजदीकियां बढ़ रही हैं वहीं UAE और पाकिस्तान के संबंधों में खटास देखी जा रही है। UAE ने पाकिस्तान के साथ एक विमानतल प्रबंधन सौदा रद्द कर दिया। एक्सप्रेस ट्रिब्यून के अनुसार यह सौदा स्थगित किया गया क्योंकि पाकिस्तान ने स्थानीय साझेदार का नाम नहीं भेजा।

    विश्लेषकों के अनुसार पाकिस्तान-सऊदी रक्षा समझौते के बाद UAE-पाकिस्तान दूरी बढ़ी है।

    भारत-UAE के बढ़ते संबंध
    UAE के राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान की दिल्ली यात्रा ने भारत-UAE संबंधों को नई ऊंचाइयों पर पहुंचाया। यात्रा के कुछ घंटों बाद दोनों देशों ने 2032 तक द्विपक्षीय व्यापार $200 बिलियन तक बढ़ाने का लक्ष्य रखा। खाड़ी देशों में UAE और सऊदी अरब भारत के सबसे बड़े व्यापारिक साझेदार हैं।विश्लेषकों का मानना है कि सऊदी अरब के साथ पाकिस्तान की रणनीतिक साझेदारी और UAE के साथ भारत के बढ़ते संबंध खाड़ी देशों की प्राथमिकताओं में बदलाव को दिखाते हैं।

  • रूस से जारी रहेगी तेल खरीद? 1.4 अरब भारतीयों की एनर्जी सिक्योरिटी सरकार की प्राथमिकता; जानें MEA ने और क्या कहा

    रूस से जारी रहेगी तेल खरीद? 1.4 अरब भारतीयों की एनर्जी सिक्योरिटी सरकार की प्राथमिकता; जानें MEA ने और क्या कहा

    नई दिल्ली । भारत सरकार ने एक बार फिर साफ कर दिया है कि देश की ऊर्जा सुरक्षा उसकी सर्वोच्च प्राथमिकता है खासकर जब बात 1.4 अरब भारतीयों की ऊर्जा जरूरतों की हो। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने रूस से तेल आयात के सवाल पर जवाब देते हुए कहा कि वैश्विक ऊर्जा बाजार में अस्थिरता के बीच भारत अपने नागरिकों के हितों को पहले रखेगा। यह बयान ऐसे समय आया है जब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर रूस-यूक्रेन संघर्ष के कारण ऊर्जा आपूर्ति पर बहस छिड़ी हुई है। MEA ने जोर देकर कहा कि भारत की नीति संतुलित और स्वतंत्र है जो किसी एक देश पर निर्भर नहीं है।

    एनर्जी सिक्योरिटी है सबसे बड़ी प्राथमिकता

    MEA के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा भारत की ऊर्जा सुरक्षा 1.4 अरब लोगों की जरूरतों पर आधारित है। सरकार ने कई मौकों पर सार्वजनिक रूप से कहा है कि 1.4 अरब भारतीयों की एनर्जी सिक्योरिटी सुनिश्चित करना हमारी सरकार की सबसे बड़ी प्राथमिकता है। ऑब्जेक्टिव मार्केट की स्थितियों और बदलते अंतरराष्ट्रीय माहौल के हिसाब से अपने एनर्जी सोर्स को डाइवर्सिफाई करना इसे सुनिश्चित करने की हमारी रणनीति का मुख्य हिस्सा है। भारत के सभी फैसले इसी बात को ध्यान में रखकर लिए गए हैं और लिए जाएंगे।
    ​​वेनेजुएला लंबे समय से रहा है पार्टनर
    विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा जहां तक ​​वेनेजुएला की बात है यह ऊर्जा के क्षेत्र में व्यापार और निवेश दोनों तरफ से हमारा लंबे समय से पार्टनर रहा है। हम 2019-20 तक वेनेजुएला से ऊर्जा और कच्चा तेल आयात कर रहे थे जिसके बाद हमें इसे रोकना पड़ा। फिर हमने 2023-24 में वेनेजुएला से तेल खरीदना शुरू किया लेकिन प्रतिबंध फिर से लगने के बाद इसे रोकना पड़ा। ऊर्जा सुरक्षा के प्रति हमारे नजरिए के मुताबिक भारत वेनेजुएला सहित किसी भी कच्चे तेल की सप्लाई के कमर्शियल फायदों को देखने के लिए तैयार है।

    बाहरी दबाव से प्रभावित नहीं होगी ऊर्जा नीति

    जायसवाल ने यह भी स्पष्ट किया कि भारत अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों का सम्मान करता है लेकिन अपनी ऊर्जा नीति को किसी बाहरी दबाव से प्रभावित नहीं होने देगा। आंकड़ों के अनुसार 2022 से अब तक रूस भारत का सबसे बड़ा तेल आपूर्तिकर्ता बन गया है जो कुल आयात का लगभग 40 फीसदी हिस्सा प्रदान करता है। इससे पहले भारत मुख्य रूप से मध्य पूर्वी देशों जैसे सऊदी अरब और इराक पर निर्भर था।

  • स्पेसएक्स और एक्सएआई का विलय, मस्क ने कहा-यह अध्याय नहीं, अभियान की अगली किताब

    स्पेसएक्स और एक्सएआई का विलय, मस्क ने कहा-यह अध्याय नहीं, अभियान की अगली किताब


    वाशिंगटन।
    दुनिया के सबसे अमीर व्यक्ति और प्रसिद्ध टेक उद्यमी एलन मस्क की दो कंपनियों स्पेसएक्स और एक्सएआई का विलय हो गया। स्पेसएक्स ने सोमवार को घोषणा की कि उसने एक्सएआई को खरीद लिया है। इस विलय के बाद यह दुनिया की सबसे मूल्यवान प्राइवेट इकाई बन गई है। स्पेसएक्स की वेबसाइट पर एक बयान में मस्क ने कहा, यह सिर्फ अगला अध्याय नहीं, बल्कि स्पेसएक्स और एक्सएआई के अभियान की अगली किताब है।

    सीएनएन की रिपोर्ट में इस विलय की जानकारी देते हुए कहा गया है कि इस विलय को कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) के तेजी से बढ़ते क्षेत्र में मुकाबला करने के लिए एक्सएआई को जरूरी नकद पूंजी और साथ ही अंतरिक्ष अन्वेषण (स्पेस एक्सप्लोरेशन) के भविष्य में तकनीक (टेक्नोलॉजी) के महत्व के संकेत के तौर पर देखा जा सकता है।

    यह कदम यह भी दिखाता है कि मस्क जैसी कंपनियों जैसे टेक दिग्गज एआई में ऊंची छलांग लगाने के लिए कितनी मशक्कत कर रहे हैं। मस्क ने लिखा, एआई में मौजूदा तरक्की बड़े जमीनी डेटा सेंटर पर निर्भर है। इसके लिए बहुत अधिक बिजली और कूलिंग की जरूरत होती है। इसलिए इस क्षेत्र को ऐसी जगह ले जाना है जहां बहुत अधिक बिजली और जगह हो।

    स्पेसएक्स ने शुक्रवार को फेडरल कम्युनिकेशन कमीशन से 10 लाख सैटेलाइट का एक समूह ऑर्बिट में लॉन्च करने की इजाजत मांगी। अनुरोध में कहा गया है कि इसका मकसद सोलर-पावर्ड डेटा सेंटर का एक नेटवर्क देना है ताकि एआई की वजह से डेटा की बढ़ती डिमांड को पूरा किया जा सके। मस्क ने अनुमान जताया है कि दो से तीन साल में एआई कंप्यूट जेनरेट करने का सबसे सस्ता तरीका अंतरिक्ष में होगा।

  • क्लिंटन दम्पति आखिरकार जेफरी एपस्टीन जांच में बयान देने के लिए सहमत

    क्लिंटन दम्पति आखिरकार जेफरी एपस्टीन जांच में बयान देने के लिए सहमत


    वाशिंगटन। अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति बिल क्लिंटन और उनकी पत्नी पूर्व विदेश सचिव हिलेरी क्लिंटन आखिरकार कांग्रेस की जेफरी एपस्टीन जांच में व्यक्तिगत रूप से गवाही देने के लिए अपनी सहमति दे दी है। क्लिंटन दंपति ने यह सहमति हाउस में कांग्रेस की अवमानना ​​मत से बचने के लिए दी है। अभी यह साफ नहीं है कि हाउस ओवरसाइट चेयरमैन जेम्स कोमर इस आखिरी समय पर सहमति प्रस्ताव को स्वीकार करेंगे या नहीं। दोनों इससे पहले महीनों तक गवाही देने से बार-बार इनकार करते रहे हैं।

    सीएनएन की रिपोर्ट के अनुसार क्लिंटन के प्रवक्ता एंजेल उरेना ने कोमर को एक चुनौती भरे ‘एक्स’ पोस्ट में कहा, उन्होंने सद्भावना से बातचीत की, आपने नहीं की। बावजूद इसके पूर्व राष्ट्रपति और पूर्व विदेश सचिव इस अवसर मौजूद रहेंगे। वे एक ऐसा उदाहरण स्थापित करने के लिए उत्सुक हैं, जो सभी पर लागू हो। इसके बाद कोमर ने सोमवार शाम एक बयान में कहा कि उनके अभी भी इस प्रस्ताव पर कुछ सवाल हैं।

    उन्होंने कहा, क्लिंटन के वकील ने कहा है कि वे शर्तों से सहमत हैं, लेकिन उन शर्तों में एक बार फिर स्पष्टता की कमी है। उन्होंने गवाही के लिए कोई तारीख नहीं बताई है। उन्होंने शर्तों से सहमत होने की बात सिर्फ इसलिए कही है, क्योंकि हाउस ने अवमानना ​​की कार्रवाई आगे बढ़ाई है। उन्होंने कहा, मैं उन शर्तों को साफ करूंगा जिनसे वे सहमत हो रहे हैं और फिर अपनी कमेटी के सदस्यों के साथ अगले कदमों पर चर्चा करूंगा।

    हालांकि, ओवरसाइट कमेटी के टॉप डेमोक्रेट ने कहा कि उन्हें ऐसा नहीं लग रहा कि जिसमें पैनल के चेयरमैन प्रस्ताव को स्वीकार न करें। उन्होंने कहा कि क्लिंटन ने कोमर की सारी शर्तों को स्वीकार कर लिया है। रिपब्लिकन रॉबर्ट गार्सिया ने कहा, हमने पहले दिन से ही कहा है कि हम चाहते हैं कि बिल क्लिंटन ओवरसाइट कमेटी के सामने गवाही दें। मुझे खुशी है कि वे गवाही देने जा रहे हैं।

    कोमर ने क्लिंटन की कानूनी टीम से कहा, जब आपके मुवक्किल को पहली बार कमेटी का समन मिला था, तब से लगभग छह महीने हो गए हैं। क्लिंटन की विशेष सुविधा पाने की लालसा निराशाजनक है और अमेरिकी लोगों की पारदर्शिता की इच्छा का अपमान है।

    हाउस रूल्स कमेटी की चेयरपर्सन वर्जीनिया फॉक्स ने घोषणा की कि मौजूदा हालात को देखते हुए पैनल अवमानना ​​प्रस्तावों को आगे बढ़ाने से रुकेगा। हालांकि, उन्होंने कहा कि अगर रात भर में कोई और प्रगति नहीं होती है, तो अवमानना प्रस्ताव पर फिर से विचार होगा। बताया जा रहा है कि क्लिंटन की टीम कई दिनों से इस मामले से निकलने का रास्ता ढूंढ रही थी।

    उल्लेखनीय है कि जनवरी में दोनों पार्टियों के सांसदों ने क्लिंटन को एपस्टीन मामले की जांच के तहत व्यक्तिगत रूप से पेश होने से इनकार करने के लिए अवमानना ​​का दोषी ठहराने के लिए वोट दिया था। इसके बाद पूर्व राष्ट्रपति बिल क्लिंटन और पूर्व विदेश सचिव हिलेरी क्लिंटन के वकीलों ने रिपब्लिकन के नेतृत्व वाली कमेटी के साथ कई बार बातचीत की है। क्लिंटन के शुरुआती प्रस्ताव को खारिज करके कोमर ने लगभग यह पक्का कर दिया था कि हाउस इस हफ्ते अवमानना ​​प्रस्ताव पर अंतिम मतदान करेगा।

    क्लिंटन के वकीलों के 31 जनवरी के पत्र के अनुसार पूर्व राष्ट्रपति स्वैच्छिक रूप से हाउस में बैठेंगे और लिखित बयान देंगे। यह सिर्फ एपस्टीन जांच के दायरे तक सीमित होगा। इस बीच दोनों पार्टियों के सांसद उनसे सवाल पूछ सकते हैं। वकीलों ने कहा कि क्लिंटन और कमेटी दोनों के पास अपना अनुवादक मौजूद हो सकता है। बिल क्लिंटन ने दिवंगत दोषी यौन अपराधी एपस्टीन से जुड़े किसी भी गलत काम में शामिल रहने से भी बार-बार इनकार किया है।

  • ग्रीस में कोस्ट गार्ड के जहाज की प्रवासी नाव से टक्कर में 15 लोगों की मौत

    ग्रीस में कोस्ट गार्ड के जहाज की प्रवासी नाव से टक्कर में 15 लोगों की मौत

    एथेंस । ग्रीस और तुर्किये के मध्य स्थित एजियन सागर में चियोस द्वीप के तट पर ग्रीक कोस्ट गार्ड के एक गश्ती जहाज एवं प्रवासियों और शरणार्थियों को ले जा रही एक नाव के बीच टक्कर में 15 लोगों की मौत हो गई। इनमें से 14 के शव समुद्र से बरामद किए गए।

    ग्रीक नेशनल ब्रॉडकास्टर ईआरटी की रिपोर्ट के अनुसार, बचाए गए 24 प्रवासियों में से एक की पास के अस्पताल में चोटों के कारण मौत हो गई। स्वास्थ्य अधिकारियों के अनुसार, मृतकों में 11 पुरुष और चार महिलाएं शामिल हैं।

    यह दुर्घटना स्थानीय समय के अनुसार रात लगभग 9:00 बजे हुई। घायलों में कई बच्चे और दो गर्भवती महिलाएं शामिल हैं। दोनों महिलाएं चोट सह नहीं पाईं और कथित तौर पर गर्भपात हो गया। नेशनल इमरजेंसी एड सेंटर के अनुसार, बचाए गए ज्यादातर लोगों को मामूली चोटें आईं। कुछ लोग अभी भी लापता बताए जा रहे हैं। खोज और बचाव अभियान जारी है। इस अभियान में चार कोस्ट गार्ड जहाज, स्वयंसेवी गोताखोरों को ले जा रही एक निजी नाव और एक हेलेनिक वायु सेना का हेलीकॉप्टर शामिल हैं।

    ग्रीक के सरकारी रेडियो ईपीटी न्यूज की रिपोर्ट के अनुसार, घायलों की संख्या बढ़कर 25 हो गई है। रात लगभग 12 बजे घायलों में से एक महिला को चियोस अस्पताल में भर्ती कराया गया। घायलों में दस बच्चे हैं। इसी बीच, दो कोस्ट गार्ड अधिकारी भी घायल हो गए हैं और उन्हें अस्पताल ले जाया गया है। ओइनौसेस के मेयर जियोर्गोस डैनियल ने कहा कि गश्ती जहाज ओइनौसेस में था। उसी ने प्रवासी नाव को देखा।

    ग्रीक के समाचार आउटलेट प्रोटोथेमा की रिपोर्ट के अनुसार, चियोस का यह वाकया कोस्ट गार्ड और प्रवासी तस्करों के बीच हुई टक्कर का नतीजा है। कोस्ट गार्ड के गश्ती जहाज पर छोटी नाव पर सवार तस्करों ने ही पैंतरेबाजी करते हुए टक्कर मारी। इससे अफरातफरी मच गई। कोस्ट गार्ड की कार्रवाई में कई प्रवासी मारे गए। कई घायल हो गए। यह लोग मर्सिनिडी इलाके के बताए गए हैं। इस दौरान गोलीबारी की भी खबरें हैं। मगर इनकी पुष्टि नहीं हो सकी है। कहा जा रहा है कि नाव में लगभग 35 लोग सवार थे।

  • अमेरिका की नई योजना: 50 देशों के साथ चीन के खनिज प्रभुत्व को देगा चुनौती, भारत की भूमिका अहम

    अमेरिका की नई योजना: 50 देशों के साथ चीन के खनिज प्रभुत्व को देगा चुनौती, भारत की भूमिका अहम


    नई दिल्ली। अमेरिका चीन के वर्चस्व वाले क्रिटिकल मिनरल्स की वैश्विक सप्लाई चेन को सुरक्षित करने के लिए एक बड़ा रणनीतिक कदम उठा रहा है। 4 फरवरी 2026 को वॉशिंगटन में आयोजित ‘क्रिटिकल मिनरल्स मिनिस्टीरियल’ बैठक में अमेरिका ने करीब 50 देशों का एक ट्रेडिंग ब्लॉक बनाने का प्रस्ताव रखा। इसका उद्देश्य क्रिटिकल मिनरल्स जैसे लिथियम, कोबाल्ट, निकेल और रेयर अर्थ एलिमेंट्स के उत्पादन, प्रोसेसिंग और कीमतों को स्थिर करना और चीन के प्रभुत्व को तोड़ना है।

    अमेरिका की रणनीति
    उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने बैठक में कहा कि सदस्य देशों के उत्पादकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए न्यूनतम कीमत और टैरिफ जैसी व्यवस्थाएं की जाएंगी। उनका कहना था कि अमेरिका अपनी क्रिटिकल मिनरल्स इंडस्ट्री को पुनर्जीवित करना चाहता है और चीन जैसी बाजार-सक्रियता से बचाव जरूरी है। वेंस ने इसे “साथी और सहयोगी के बीच सुरक्षित जोन” बताया, जिसमें अमेरिकी उद्योग को आवश्यक खनिजों की निर्बाध आपूर्ति और मित्र देशों में संयुक्त उत्पादन बढ़ाने पर जोर होगा।

    ब्लॉक का उद्देश्य
    चीन वर्तमान में दुनिया के लगभग 70% रेयर अर्थ माइनिंग और 90% प्रोसेसिंग पर नियंत्रण रखता है। स्मार्टफोन, इलेक्ट्रिक वाहन, जेट इंजन, सेमीकंडक्टर और मिसाइल गाइडेंस सिस्टम के लिए ये खनिज जरूरी हैं। अमेरिका का यह ब्लॉक चीन के एकाधिकार को तोड़ने और सप्लाई चेन को ‘डी-रिस्क’ De-risk करने की वैश्विक रणनीति है।

    भारत की भागीदारी और अवसर
    भारत ने इस बैठक में सक्रिय भूमिका निभाई। विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने आपूर्ति शृंखला में अंतरराष्ट्रीय सहयोग की आवश्यकता पर जोर दिया। भारत के पास लिथियम और कॉपर के बड़े भंडार हैं, और इस ब्लॉक के माध्यम से उसे माइनिंग और प्रोसेसिंग में अमेरिकी तकनीक और फंड का लाभ मिल सकता है। इससे भारत अपनी चिप-मैन्युफैक्चरिंग और EV योजनाओं के लिए चीन पर निर्भर नहीं रहेगा।

    जयशंकर ने सोशल मीडिया पर कहा अत्यधिक संकेंद्रण से जुड़ी चुनौतियों और अंतरराष्ट्रीय सहयोग के माध्यम से आपूर्ति शृंखलाओं के जोखिम को कम करने के महत्व को रेखांकित किया। उन्होंने कनाडा, सिंगापुर, नीदरलैंड्स, इटली, मलेशिया, बहरीन, मंगोलिया, पोलैंड, रोमानिया, इजराइल और उज्बेकिस्तान के मंत्रियों के साथ भी बैठक की।