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  • 50 साल बाद पहली बार रूस-अमेरिका के बीच कोई परमाणु सीमा नहीं, न्यू स्टार्ट संधि समाप्त, वैश्विक सुरक्षा पर चिंता

    50 साल बाद पहली बार रूस-अमेरिका के बीच कोई परमाणु सीमा नहीं, न्यू स्टार्ट संधि समाप्त, वैश्विक सुरक्षा पर चिंता


    नई दिल्ली। रूस और अमेरिका के बीच परमाणु हथियारों पर लगी अंतिम बड़ी कानूनी पाबंदी अब समाप्त हो गई है। 5 फरवरी 2026 को न्यू स्टार्ट संधि की अवधि पूरी हो गई, जिससे लगभग 50 साल बाद दोनों देशों के रणनीतिक परमाणु हथियारों-जैसे अंतरमहाद्वीपीय बैलिस्टिक मिसाइलें, सबमरीन-लॉन्च मिसाइलें और बॉम्बर-पर कोई बाध्यकारी सीमा नहीं रही। विशेषज्ञ इसे वैश्विक सुरक्षा के लिए गंभीर खतरे के रूप में देख रहे हैं।

    न्यू स्टार्ट संधि क्या थी?
    न्यू स्ट्रैटेजिक आर्म्स रिडक्शन ट्रीटीNew START2010 में अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा और रूसी राष्ट्रपति दिमित्री मेदवेदेव के बीच हस्ताक्षरित एक ऐतिहासिक समझौता था। यह संधि उन रणनीतिक हथियारों की तैनाती को सीमित करती थी जो देश के महत्वपूर्ण राजनीतिक और सैन्य ठिकानों को निशाना बना सकते थे। इसे 2011 में लागू किया गया और मूलतः 10 साल के लिए थी। 2021 में इसे राष्ट्रपति जो बाइडेन ने 5 साल बढ़ाकर 2026 तक कर दिया।

    संधि का इतिहास
    परमाणु हथियारों पर नियंत्रण की पहल शीत युद्ध के समय से चली आ रही है। 1970 के दशक में SALT समझौते ने संख्या पर सीमा लगाई, लेकिन कटौती नहीं की।

    1991: START I – हजारों हथियारों में कटौती

    1993: START II – और कटौती, पर पूरी तरह लागू नहीं

    2002: SORT – 1,700-2,200 वारहेड्स पर सहमति, जांच-पड़ताल सीमित

    2010: न्यू स्टार्ट – रणनीतिक हथियारों पर बाध्यकारी सीमा

    2021 के बाद स्थिति
    2023 में रूस ने निरीक्षण बंद कर दिया, लेकिन सीमा पालन का दावा जारी रखा। इसका कारण यूक्रेन युद्ध में अमेरिका की भूमिका बताया गया। अब संधि पूरी तरह समाप्त हो चुकी है और दोनों देश स्वतंत्र हैं।

    रूस का बयान
    रूसी विदेश मंत्रालय ने कहा कि अब न्यू स्टार्ट संधि के तहत कोई दायित्व या पारस्परिक घोषणा दोनों देशों पर लागू नहीं है। संयुक्त राष्ट्र ने इसे अंतरराष्ट्रीय शांति के लिए “गंभीर क्षण” करार दिया।

    संभावित असर

    संधि समाप्त होने के बाद रूस और अमेरिका दोनों अपनी मिसाइलों और रणनीतिक वारहेड्स की संख्या बढ़ा सकते हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि तकनीकी और लॉजिस्टिक कारणों से यह तुरंत संभव नहीं है, लेकिन लंबी अवधि में हथियारों की नई होड़ शुरू हो सकती है।

    वैश्विक संतुलन

    रूस और अमेरिका के पास दुनिया के 90% से अधिक परमाणु हथियार हैं। जनवरी 2025 तक रूस के पास 4,309 और अमेरिका के पास 3,700 वारहेड्स थे। अन्य देशों जैसे चीन600), फ्रांस290और ब्रिटेन225के पास अपेक्षाकृत कम हथियार हैं।

    विशेषज्ञों और अंतरराष्ट्रीय चेतावनी
    सुरक्षा विशेषज्ञों ने कहा है कि न्यू स्टार्ट के खत्म होने से वैश्विक परमाणु होड़ तेज हो सकती है। फेडरेशन ऑफ अमेरिकन साइंटिस्ट्स के मैट कोर्डा के अनुसार, दोनों देश अपनी तैनात क्षमताओं को लगभग दोगुना कर सकते हैं।

    संधि समाप्त होने से पहले पोप लियो और संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुतारेस ने दोनों देशों से अपील की कि वे परमाणु सीमाओं को बनाए रखें और नई, सत्यापनीय संधि पर तुरंत बातचीत शुरू करें। गुतारेस ने चेतावनी दी कि दशकों में पहली बार दुनिया सबसे बड़े परमाणु शक्ति संपन्न देशों के बिना किसी बाध्यकारी सीमा के दौर में प्रवेश कर रही है, जिससे हथियारों के इस्तेमाल का जोखिम सबसे अधिक बढ़ गया है।

  • अमेरिका ने ट्रेड डील पर ऐसे बदला रुख, अजीत डोभाल ने दिया था रूबियो को सख्त संदेश : रिपोर्ट

    अमेरिका ने ट्रेड डील पर ऐसे बदला रुख, अजीत डोभाल ने दिया था रूबियो को सख्त संदेश : रिपोर्ट


    नई दिल्ली। भारत-अमेरिका ट्रेड डील को लेकर हाल ही में सामने आए दावों पर नई रिपोर्ट में सवाल उठाए गए हैं। ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के मुताबिक, मोदी सरकार ने वाशिंगटन को साफ संकेत दिया कि वह ट्रंप प्रशासन के दौरान किसी जल्दबाजी में समझौता नहीं करेगी और जरूरत पड़ी तो इंतजार भी कर सकती है।

    रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल ने अमेरिकी विदेश सचिव मार्को रुबियो को स्पष्ट संदेश दिया: “बुली करने की नीति बंद करें।” इसके बाद अमेरिका ने अपनी स्थिति पर फिर से विचार किया और अधिक सौहार्दपूर्ण रुख अपनाया।

    अजीत डोभाल की रणनीति
    सितंबर 2025 में हुई अहम बैठक में डोभाल और रुबियो आमने-सामने थे। इस दौरान भारत ने साफ कर दिया कि वह अमेरिकी दबाव में समझौता नहीं करेगा। उस समय अमेरिकी उत्पादों पर 50% तक की ऊंची टैरिफ दरें लागू की गई थीं। डोभाल ने रुबियो से कहा कि भारत ट्रंप या उनके सहयोगियों के दबाव में नहीं आएगा और पूरे राष्ट्रपति कार्यकाल तक डील पर जल्दबाजी नहीं करेगा।
    बैठक के बाद अमेरिका ने अपने रुख में नरमी दिखाई। राष्ट्रपति ट्रंप ने सितंबर में पीएम मोदी को जन्मदिन पर फोन कर बधाई दी, जिसे भारतीय रणनीति का असर माना गया।

    ट्रंप टीम ने मोदी पर लगाए आरोप
    ट्रंप और उनके सहयोगियों ने मोदी पर कड़े आरोप लगाए। विशेष रूप से पीटर नवारो ने भारत को पाकिस्तान युद्ध और रूस-यूक्रेन विवाद में झूठे दावे करने का आरोप लगाया। नवारो ने मोदी की संस्कृति और धार्मिक प्रतीकों पर भी सवाल उठाए।

    भारत ने ट्रंप के दावों को ठुकराया
    मई 2025 में भारत-पाक युद्ध के दौरान हुई सीजफायर को ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर प्रस्तुत किया, लेकिन भारत ने इसे खारिज कर दिया। इसके बाद दोनों देशों के संबंध तनावपूर्ण हुए। ट्रंप ने अपने प्लेटफॉर्म पर भारत-अमेरिका ट्रेड डील पूरी होने की घोषणा कर दी, लेकिन मोदी सरकार ने सार्वजनिक रूप से कोई पुष्टि नहीं की। वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने कहा कि डील पर फरवरी 2025 से चर्चा जारी थी और अब इसे अंतिम रूप दिया गया।

    ट्रंप की एकतरफा घोषणा और विपक्षी सवाल
    ट्रंप की बिना औपचारिक प्रक्रिया के घोषणा से भारत में विपक्ष और विश्लेषक सवाल उठा रहे हैं। डील के विवरण सार्वजनिक नहीं होने के कारण आलोचना की जा रही है। हालांकि अजीत डोभाल की रणनीति ने स्पष्ट किया कि भारत ने कोई ऐसी शर्त स्वीकार नहीं की जो देशहित के खिलाफ हो।

    पूरे कार्यकाल तक इंतजार का मतलब
    ट्रंप का राष्ट्रपति कार्यकाल जनवरी 2025 से शुरू हुआ। भारत की रणनीति के मुताबिक, बिना शर्त डील के लिए इंतजार करना पड़ता तो यह समझौता 2029 तक स्थगित रह सकता था।

  • बांग्लादेश चुनाव: जमात-ए-इस्लामी का घोषणापत्र जारी, पड़ोसी देशों के साथ अच्‍छे संबंध बनाने का वादा

    बांग्लादेश चुनाव: जमात-ए-इस्लामी का घोषणापत्र जारी, पड़ोसी देशों के साथ अच्‍छे संबंध बनाने का वादा


    नई दिल्ली। बांग्लादेश में 12 फरवरी को होने वाले राष्ट्रीय चुनाव से पहले इस्लामिक कंजर्वेटिव पार्टी जमात-ए-इस्लामी ने अपना चुनावी घोषणापत्र जारी किया है। पार्टी ने इसमें भारत और अन्य पड़ोसी देशों के साथ सहयोगात्मक और रचनात्मक संबंध बनाने का वादा किया है। घोषणापत्र के मुताबिक ये संबंध आपसी सम्मान और निष्पक्षता पर आधारित होंगे।

    पार्टी ने भारत, भूटान, नेपाल, म्यांमार, श्रीलंका, मालदीव और थाइलैंड के साथ शांतिपूर्ण और मित्रतापूर्ण रिश्तों को प्राथमिकता देने का भरोसा दिया है। इसके जरिए क्षेत्रीय शांति, स्थिरता और साझा समृद्धि को बढ़ावा देने पर जोर दिया गया है। जमात-ए-इस्लामी ने बांग्लादेश की अंतरराष्ट्रीय प्रतिष्ठा बढ़ाने और देश के पासपोर्ट की वैश्विक स्वीकार्यता मजबूत करने का भी वादा किया है। इसका उद्देश्य बांग्लादेशी नागरिकों के लिए अंतरराष्ट्रीय यात्रा को आसान बनाना और देश की छवि को सुदृढ़ करना है।

    मुस्लिम दुनिया और अन्य क्षेत्रीय संबंध
    घोषणापत्र में मुस्लिम देशों के साथ मजबूत सहयोग और पूर्वी यूरोप, अफ्रीका और दक्षिण अमेरिका के देशों के साथ कूटनीतिक, आर्थिक और रणनीतिक संबंध बढ़ाने पर भी जोर दिया गया है।

    संयुक्त राष्ट्र और अंतरराष्ट्रीय संगठनों में सक्रियता
    जमात-ए-इस्लामी ने शांति, सुरक्षा, मानवाधिकार और आर्थिक विकास जैसी वैश्विक चुनौतियों से निपटने में संयुक्त राष्ट्र और अंतरराष्ट्रीय संगठनों में बांग्लादेश की सक्रिय भूमिका जारी रखने का संकल्प दोहराया।

    रोहिंग्या संकट और शांति मिशन
    पार्टी ने रोहिंग्या शरणार्थियों की सुरक्षित और सम्मानजनक वापसी सुनिश्चित करने और संयुक्त राष्ट्र शांति मिशनों में भागीदारी जारी रखने का भी वादा किया है।इस चुनाव में सत्तारूढ़ आवामी लीग को भाग लेने से रोका गया है। ऐसे में बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी और जमात-ए-इस्लामी प्रमुख प्रतियोगी हैं। जुलाई 2024 में हुए ‘जुलाई जनआंदोलन’ के बाद से देश के राजनीतिक परिदृश्य में बड़े बदलाव आए हैं। इंटरनेशनल क्राइसिस ग्रुप ने भी चुनाव की विश्वसनीयता और संभावित तनाव को लेकर चिंता जताई है। कुल मिलाकर 12 फरवरी का चुनाव बांग्लादेश के भविष्य और विदेश नीति की दिशा तय करेगा, और जमात-ए-इस्लामी का घोषणापत्र इस महत्वपूर्ण समय में जारी हुआ है।

  • शशि थरूर के बेटे ईशान थरूर को वॉशिंगटन पोस्ट ने निकाला, सोशल मीडिया पर जताई भावुक प्रतिक्रिया

    शशि थरूर के बेटे ईशान थरूर को वॉशिंगटन पोस्ट ने निकाला, सोशल मीडिया पर जताई भावुक प्रतिक्रिया


    नई दिल्ली। कांग्रेस सांसद शशि थरूर के बेटे ईशान थरूर को अमेरिका के अखबार द वॉशिंगटन पोस्ट से नौकरी से निकाला गया है। ईशान ने स्वयं इस खबर की पुष्टि की और सोशल मीडिया पर एक भावुक पोस्ट साझा करते हुए अपनी निराशा व्यक्त की। सूत्रों के अनुसार, ईशान उन पत्रकारों में शामिल हैं जिन्हें अखबार ने हाल ही में बड़े पैमाने पर छंटनी के तहत हटाया। इस कदम का असर वॉशिंगटन पोस्ट की अंतरराष्ट्रीय कवरेज और स्पोर्ट्स डेस्क पर भी पड़ा है।

    ईशान का भावुक संदेश
    ईशान ने सोशल मीडिया पोस्ट में लिखा कि यह दिन उनके लिए बेहद कठिन और विनाशकारी था। उन्होंने बताया कि ज्यादातर अंतरराष्ट्रीय कर्मचारी भी छंटनी की चपेट में आए हैं। ईशान ने न्यूज रूम की खाली तस्वीर साझा करते हुए कहा कि इस स्थिति ने उन्हें और उनके सहयोगियों को गहरा दुख पहुंचाया। उन्होंने विशेष रूप से उन पत्रकारों का जिक्र किया, जो वर्षों तक अंतरराष्ट्रीय कवरेज में योगदान देते रहे और जिनके साथ काम करना उनके लिए सम्मान की बात रहा।

    बड़ी छंटनी का असर
    रिपोर्ट के अनुसार, वॉशिंगटन पोस्ट की हालिया छंटनी से संगठन का लगभग एक तिहाई कर्मचारी वर्ग प्रभावित हुआ है। मिडिल ईस्ट, यूरोप, एशिया और लैटिन अमेरिका के कई वरिष्ठ संवाददाता और संपादक भी इसमें शामिल रहे। वॉशिंगटन पोस्ट गिल्ड ने इस कदम की आलोचना करते हुए मालिक जेफ बेजोस से अपील की कि वे अखबार के पत्रकारिता मिशन में निवेश जारी रखें और कर्मचारियों के भविष्य के प्रति जवाबदेही दिखाएं।

    300 से अधिक कर्मचारी प्रभावित
    अखबार ने बुधवार को लगभग 300 कर्मचारियों को नौकरी से हटाया। इसके तहत स्पोर्ट्स सेक्शन बंद कर दिया गया, कई अंतरराष्ट्रीय ब्यूरो को बंद किया गया और किताबों की कवरेज भी समाप्त कर दी गई। मीडिया विशेषज्ञ इसे अमेरिकी मीडिया क्षेत्र की अब तक की सबसे बड़ी छंटनी में से एक मान रहे हैं। इस कार्रवाई से नई दिल्ली और मिडिल ईस्ट के कई प्रमुख संवाददाता और संपादक भी प्रभावित हुए हैं।

    छंटनी की वजह
    वॉशिंगटन पोस्ट ने इसे अपने बड़े रीस्ट्रक्चरिंग प्लान का हिस्सा बताया है। एग्जीक्यूटिव एडिटर मैट मरे ने कहा कि यह कठिन लेकिन जरूरी कदम था। उन्होंने बताया कि संगठन को बदलती टेक्नोलॉजी और पाठकों की बदलती प्राथमिकताओं के अनुसार ढालना आवश्यक था। हालांकि, इस फैसले की कई आलोचनाएँ भी सामने आई हैं।

  • रूस का ट्रंप को जवाब…. भारत को तेल खरीदने की पूरी स्वतंत्रता, कोई नई बात नहीं

    रूस का ट्रंप को जवाब…. भारत को तेल खरीदने की पूरी स्वतंत्रता, कोई नई बात नहीं


    मास्को।
    भारत और अमेरिका (India and America) के बीच नए व्यापार समझौते (New trade Agreements.) के बाद एक बड़ा सवाल उठ खड़ा हुआ है कि क्या भारत रूस से तेल खरीदना जारी रखेगा या नहीं? हालांकि, इस मुद्दे पर भारत की ओर से कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है, लेकिन रूस (Russia) ने अब इस पर स्पष्ट जवाब दिया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (American President Donald Trump) ने हाल ही में दावा किया था कि भारत अब रूसी तेल की खरीद रोक देगा, लेकिन रूस ने इस पर प्रतिकार करते हुए कहा है कि भारत पूरी तरह से स्वतंत्र है कि वह किस देश से तेल खरीदे।

    रूस के राष्ट्रपति के प्रवक्ता दिमित्री पेस्कोव ने कहा कि भारत कोई एकमात्र देश नहीं है जो रूस से तेल खरीदता है। भारत हमेशा से विभिन्न देशों से तेल और पेट्रोलियम उत्पादों का आयात करता रहा है, और इसमें कोई नई बात नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि रूस और अन्य अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा विशेषज्ञ जानते हैं कि भारत रूस का एकमात्र तेल आपूर्तिकर्ता नहीं है। यह बयान ट्रंप के उस दावे पर आया है, जिसमें उन्होंने कहा था कि पीएम मोदी ने रूस से तेल खरीद बंद करने और अमेरिका से तेल खरीदने पर सहमति जताई है। पेस्कोव ने इस पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि रूस को इस मामले में नई दिल्ली से कोई जानकारी नहीं मिली है, और रूस अपने भारत के साथ संबंधों को बहुत महत्व देता है।

    ट्रंप का दावा और भारत का रुख
    अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोमवार को घोषणा की थी कि भारत और अमेरिका के बीच हुए व्यापार समझौते में भारत के लिए टैरिफ में कमी शामिल है, और इसके साथ ही उन्होंने दावा किया कि भारत अब रूस से तेल खरीदना बंद कर देगा। हालांकि, इस पर भारत की ओर से कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं हुआ है, और न ही प्रधानमंत्री मोदी के ट्वीट में रूस से तेल खरीदने पर कोई उल्लेख किया गया है। रूसी तेल आयात को लेकर प्रधानमंत्री मोदी के बयान में कोई प्रतिबद्धता या समझौता नहीं था, जबकि ट्रंप ने कहा कि दोनों देशों के बीच बातचीत के बाद यह तय हुआ कि भारत अमेरिकी तेल का आयात बढ़ाएगा और रूस से तेल खरीदने की मात्रा घटाएगा।

    भारत और रूस के ऊर्जा संबंध
    रूस के विशेषज्ञों का मानना है कि भारत रूस से प्रतिदिन 15 लाख से 20 लाख बैरल तेल आयात करता है, जो अमेरिका से प्राप्त शेल तेल के मुकाबले कहीं ज्यादा है। शेल तेल हल्के ग्रेड का होता है, जबकि रूस का यूराल तेल भारी और सल्फर युक्त होता है। इस वजह से भारत को अमेरिकी कच्चे तेल को अन्य ग्रेड के तेल के साथ मिलाना होगा, जिससे अतिरिक्त लागत आएगी। इसलिए, रूस का कहना है कि ट्रंप का दावा एक तरह से दिखावा हो सकता है, क्योंकि अमेरिकी तेल रूस के तेल का सीधे विकल्प नहीं बन सकता। यह स्थिति दिखाती है कि भारत और रूस के बीच तेल संबंधों में कोई तत्काल बदलाव होने की संभावना नहीं है, और भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए विभिन्न स्रोतों से आपूर्ति पर निर्भर रहेगा।

  • मोदी-ट्रंप की दोस्ती ने आसान की राह, लेकिन डील वार्ताकारों ने गढ़ी: मोबियस

    मोदी-ट्रंप की दोस्ती ने आसान की राह, लेकिन डील वार्ताकारों ने गढ़ी: मोबियस


    नई दिल्ली । अरबपति निवेशक और उभरते बाजारों के दिग्गज विशेषज्ञ मार्क मोबियस ने भारत-अमेरिका व्यापार समझौते को लेकर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि भारत का यूरोपीय संघ के साथ हालिया व्यापारिक समझौता अमेरिका के लिए एक स्पष्ट संकेत था, जिसके बाद उसने भारत के साथ अपने समझौते को तेजी से अंतिम रूप देने की दिशा में कदम बढ़ाए।

    नई दिल्ली में आईएएनएस से बातचीत के दौरान मोबियस ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच अच्छे व्यक्तिगत संबंधों ने इस प्रक्रिया को आसान जरूर बनाया, लेकिन समझौते को वास्तविक आकार दोनों देशों के पेशेवर वार्ताकारों ने ही दिया है।मोबियस ने स्पष्ट रूप से कहा कि भारत-अमेरिका व्यापार समझौते को फादर ऑफ ऑल ट्रेड डील कहना सही नहीं होगा। उनके अनुसार, भारत का यूरोपीय संघ के साथ हुआ फ्री ट्रेड एग्रीमेंट रणनीतिक और आर्थिक दृष्टि से कहीं अधिक महत्वपूर्ण साबित हो सकता है।

    उन्होंने कहा कि भारत का यूरोपीय संघ के साथ आगे बढ़ना उसकी स्वतंत्र और संतुलित विदेश नीति को दर्शाता है। इसी कदम ने संभवतः अमेरिका को यह एहसास कराया कि भारत वैश्विक व्यापार में विकल्पों के साथ आगे बढ़ रहा है, जिससे अमेरिका को भी अपने समझौते में तेजी लानी पड़ी।जब उनसे पूछा गया कि क्या प्रधानमंत्री मोदी अपनी व्यक्तिगत कूटनीति के चलते अमेरिका से बेहतर शर्तें हासिल कर पाए, तो मोबियस ने कहा कि अच्छे नेताओं के संबंध प्रक्रिया को सुगम बना सकते हैं, लेकिन किसी भी समझौते की बुनियाद पेशेवर बातचीत और तकनीकी वार्ताओं पर ही टिकी होती है।

    भारत की आर्थिक स्थिति पर बात करते हुए मोबियस ने भरोसा जताया कि देश निकट भविष्य में दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की ओर मजबूती से अग्रसर है। उन्होंने कहा कि अन्य उभरती अर्थव्यवस्थाओं की तुलना में भारत की विकास दर कहीं अधिक स्थिर और मजबूत है।शेयर बाजार को लेकर मोबियस ने सतर्क रुख अपनाया। उन्होंने कहा कि इस वर्ष भारतीय शेयर बाजार का एक लाख का आंकड़ा छूना मुश्किल दिखता है, क्योंकि इसके लिए लगभग 20 प्रतिशत की वृद्धि जरूरी होगी, जो मौजूदा परिस्थितियों में बहुत तेज़ मानी जाएगी।

    हालांकि, उन्होंने भारत की दीर्घकालिक विकास संभावनाओं को बेहद सकारात्मक बताया। मोबियस के अनुसार, देश की युवा आबादी, तेज़ शहरीकरण और बढ़ता उपभोक्ता आधार आर्थिक मजबूती की बड़ी वजह हैं। इसके साथ ही निर्यात में लगातार हो रही बढ़ोतरी भी भारत को आने वाले वर्षों में उच्च विकास दर बनाए रखने में मदद करेगी।

  • भारत-अमेरिका ट्रेड डील का असर बरकरार, शेयर बाजार में आज भी तेजी के मजबूत संकेत

    भारत-अमेरिका ट्रेड डील का असर बरकरार, शेयर बाजार में आज भी तेजी के मजबूत संकेत


    नई दिल्ली । भारत और अमेरिका के बीच हालिया व्यापार समझौते का असर भारतीय शेयर बाजार में लगातार दिखाई दे रहा है। मंगलवार को बाजार में आई जोरदार तेजी के बाद आज के कारोबार में भी निवेशकों के बीच सकारात्मक माहौल बना हुआ है। बाजार संकेतकों और सेक्टोरल ट्रेंड्स से साफ है कि फिलहाल निवेशकों का रुझान खरीदारी की ओर है और बाजार में विश्वास कायम है।

    मंगलवार को बीएसई सेंसेक्स दो हजार अंकों से अधिक की बढ़त के साथ बंद हुआ, जबकि एनएसई निफ्टी ने ढाई प्रतिशत से ज्यादा की मजबूती दर्ज की। यह तेजी केवल चुनिंदा शेयरों तक सीमित नहीं रही, बल्कि लार्जकैप, मिडकैप और स्मॉलकैप सभी श्रेणियों में व्यापक खरीदारी देखने को मिली। बाजार की इस मजबूती को भारत-अमेरिका ट्रेड डील से जुड़ी सकारात्मक उम्मीदों से जोड़कर देखा जा रहा है।

    सेक्टोरल प्रदर्शन पर नजर डालें तो रियल्टी और फाइनेंशियल सर्विसेज सेक्टर ने बाजार को ऊपर खींचने में अहम भूमिका निभाई। इसके साथ ही हेल्थकेयर, इंफ्रास्ट्रक्चर, फार्मा, एनर्जी, ऑटो और मेटल सेक्टर में भी अच्छी तेजी देखने को मिली। इससे यह संकेत मिलता है कि बाजार की मजबूती व्यापक आधार पर बनी हुई है।मुख्य सूचकांकों में शामिल अधिकांश शेयर हरे निशान में बंद हुए। बैंकिंग, पावर, मैन्युफैक्चरिंग, एविएशन और कंज्यूमर सेक्टर से जुड़े शेयरों में मजबूत खरीदारी दर्ज की गई। हालांकि, कुछ आईटी और डिफेंस सेक्टर के शेयरों में हल्का दबाव देखा गया, जिससे साफ है कि निवेशक सेक्टर चयन को लेकर सतर्क भी बने हुए हैं।

    लार्जकैप के साथ मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में भी तेजी का रुझान बना रहा। मिडकैप और स्मॉलकैप इंडेक्स में करीब तीन प्रतिशत तक की बढ़त दर्ज की गई। बाजार की चौड़ाई मजबूत रहने से निवेशकों के भरोसे को बल मिला है।बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि इस व्यापार समझौते से निर्यात आधारित उद्योगों को लंबी अवधि में लाभ मिल सकता है। खासतौर पर टेक्सटाइल, फार्मा, ऑटो कंपोनेंट और आईटी सर्विसेज से जुड़े क्षेत्रों में आगे बेहतर प्रदर्शन की संभावना जताई जा रही है। अमेरिकी बाजार में भारतीय कंपनियों की स्थिति मजबूत होने से ऑर्डर और राजस्व में इजाफा हो सकता है।

    हालांकि जानकारों की राय है कि तेजी के माहौल में भी निवेशकों को सतर्क रहना चाहिए। वैश्विक बाजारों के संकेत, ब्याज दरों में बदलाव और कच्चे तेल की कीमतों जैसे कारकों पर नजर रखना जरूरी होगा। कुल मिलाकर, मौजूदा संकेत यही बताते हैं कि भारत-अमेरिका ट्रेड समझौते का असर फिलहाल बाजार में बना रह सकता है।

  • इजरायली सेना में मुस्लिम महिला को मिली बड़ी जिम्मेदारी, बनीं पहली अरबी भाषा की प्रवक्ता

    इजरायली सेना में मुस्लिम महिला को मिली बड़ी जिम्मेदारी, बनीं पहली अरबी भाषा की प्रवक्ता

    द्वारा दो दशकों से अधिक समय तक संभाले गए इस महत्वपूर्ण पद पर बदलाव होगा। वावेया, जो वर्तमान में अद्राई की उप-प्रवक्ता हैं, अगले सप्ताह औपचारिक रूप से पदभार ग्रहण करेंगी और उन्हें लेफ्टिनेंट कर्नल के रैंक में पदोन्नति दी जाएगी। यह किसी मुस्लिम अधिकारी द्वारा IDF में प्राप्त की गई उच्चतम रैंक होगी। इस नियुक्ति को IDF के वरिष्ठ अधिकारियों ने मंजूरी दी है, जो सेना के सबसे महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय संचार पदों में से एक है।

    अरबी मीडिया में अहम भूमिका
    अरबी भाषा के प्रवक्ता की भूमिका विशेष रूप से महत्वपूर्ण होती है, खासकर जब क्षेत्रीय तनाव बढ़ते हैं। इस भूमिका में, प्रवक्ता अरबी मीडिया और भाषी दर्शकों के साथ IDF के प्राथमिक संपर्क सूत्र के रूप में कार्य करते हैं। वावेया की नियुक्ति इसे दर्शाती है कि इजरायली सेना में महिला अधिकारियों की भूमिका बढ़ रही है और इसे अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर अहमियत मिल रही है।

    वावेया का पृष्ठभूमि और करियर
    36 वर्षीय एला वावेया का जन्म इजरायल के क़लांस्वा (कलांसुवा) शहर में एक मुस्लिम परिवार में हुआ था। 2013 में उन्होंने स्वेच्छा से इजरायली सेना में भर्ती होने का निर्णय लिया, जो उनके समुदाय के कई हिस्सों के लिए एक अप्रत्याशित कदम था। वावेया IDF प्रवक्ता इकाई में अधिकारी के रूप में सेवा करने वाली पहली मुस्लिम अरब महिला बनीं। यह उस संस्थान में मील का पत्थर है, जहां अरब नागरिकों को अनिवार्य सैन्य सेवा से छूट प्राप्त है और केवल कुछ ही लोग सेना में भर्ती होते हैं।

    वावेया ने अपनी यात्रा की शुरुआत गैर-कमीशन अधिकारी के रूप में की, और बाद में 2015 में IDF के अधिकारी प्रशिक्षण पाठ्यक्रम में भाग लिया, जहां उन्हें राष्ट्रपति का विशिष्ट सेवा पदक भी मिला। इसके बाद, उन्होंने प्रवक्ता इकाई में अपनी सेवा जारी रखी और अरबी संचार शाखा में निरंतर प्रगति की, जिससे वह अंततः उप-प्रवक्ता बनीं।

    सोशल मीडिया पर ‘कैप्टन एला’ की प्रसिद्धि

    वावेया सोशल मीडिया पर विशेष रूप से ‘कैप्टन एला’ के नाम से जानी जाती हैं। वह टिकटॉक पर लाखों फॉलोअर्स से जुड़ी हुई हैं और नियमित रूप से सूचनात्मक वीडियो प्रस्तुत करती हैं। पिछले साल एक सुरक्षा सम्मेलन में उन्होंने मीडिया को ‘एक युद्धक्षेत्र’ करार दिया और कहा कि मीडिया का मैदान उतना ही कठिन होता है जितना कोई अन्य युद्ध।

    कर्नल अविचाई अद्राई का योगदान

    कर्नल अविचाई अद्राई, जो 2005 से IDF के अरबी प्रवक्ता के रूप में कार्यरत थे, ने इस भूमिका में महत्वपूर्ण योगदान दिया। उन्होंने अरबी मीडिया में इजरायली सैन्य मामलों की छवि बनाई और कई प्रमुख नेटवर्क्स जैसे अल जजीरा, अल अरबिया पर सैकड़ों बार इंटरव्यू दिए। इसके अलावा, उन्होंने फेसबुक, एक्स, इंस्टाग्राम, टेलीग्राम और टिकटॉक जैसे प्रमुख सोशल मीडिया प्लेटफार्मों पर IDF की अरबी भाषा में उपस्थिति का निर्माण और प्रबंधन किया।

    नवीनता और बदलाव की दिशा में कदम

    वावेया की नियुक्ति IDF में एक नया अध्याय है, जो न केवल अरबी भाषा में सेना के संचार के लिए महत्वपूर्ण है, बल्कि यह इजरायल के समाज में भी बदलाव और विविधता की दिशा में एक बड़ा कदम प्रतीत होता है।

  • भारत-अमेरिका ट्रेड डील पर पाकिस्तान में खलबली, खुद के देश में ट्रोल हो रहे मुनीर और शहबाज

    भारत-अमेरिका ट्रेड डील पर पाकिस्तान में खलबली, खुद के देश में ट्रोल हो रहे मुनीर और शहबाज

    नई दिल्ली। भारत और अमेरिका के बीच व्यापार समझौते पर जल्द ही आधिकारिक घोषणा होने वाली है। इस डील से भारत को बड़ा फायदा होने वाला है, क्योंकि अमेरिका अब भारत से आयातित सामान पर 50% की बजाय केवल 18% टैरिफ लगाएगा। खास बात यह है कि किसानों के हित पर किसी तरह का समझौता नहीं हुआ।

    इस समझौते के बाद पाकिस्तान में खलबली मच गई है। सोशल मीडिया पर पाकिस्तानी खुद अपने सैन्य प्रमुख फील्ड मार्शल आसिम मुनीर और प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ का मजाक उड़ा रहे हैं। वे कह रहे हैं कि भारत ने पाक की तरह किसी के दबाव में आकर अमेरिका की खुशामद नहीं की और अपनी शर्तों से पीछे नहीं हटा।

    एक पाकिस्तानी यूजर ने एक्स (पूर्व ट्विटर) पर मुनीर की रोती हुई तस्वीर साझा करते हुए लिखा कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने उनके साथ ऐसा बर्ताव किया जैसे कोई अपने निजी फायदे के लिए दूसरों का इस्तेमाल करता है। वहीं अन्य यूजर्स ने लिखा कि भारत ने यूरोपियन यूनियन, यूके, ओमान और न्यूजीलैंड के साथ फ्री ट्रेड समझौते किए और अब अमेरिका ने भी टैरिफ 18% कर दिया, वह भी बिना किसी झुकाव या पुरस्कार की उम्मीद के।

    पूर्व पीएम इमरान खान के समर्थकों और पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ ने भी शहबाज सरकार पर निशाना साधा। PTI के पूर्व मंत्री हम्माद अजहर ने कहा कि आधुनिक विदेश नीति दिखावे और निजी रिश्तों की नहीं, बल्कि आर्थिक ताकत, टैरिफ और बाजार तक पहुंच का फायदा उठाने की है। उन्होंने कहा, भारत के हालिया ट्रेड समझौते इस बात का उदाहरण हैं, पाकिस्तान में चापलूसी और फोटो खिंचवाना काम नहीं आता।

  • भारत में बड़े पैमाने पर निर्यात करेंगे कृषि उत्पाद… ट्रंप की मंत्री बोली- नई ट्रेड डील US के किसानों को मिलेगा लाभ

    भारत में बड़े पैमाने पर निर्यात करेंगे कृषि उत्पाद… ट्रंप की मंत्री बोली- नई ट्रेड डील US के किसानों को मिलेगा लाभ


    वाशिंगटन।
    अमेरिकी कृषि सचिव, ब्रुक रोलिंस (American Agriculture Secretary Brooke Rollins) ने हाल ही में भारत और अमेरिका (India and America) के बीच हुए नए व्यापार समझौते (New Trade Agreements) के बारे में बात करते हुए कहा कि अब अमेरिका अपने कृषि उत्पादों को भारत में बड़े पैमाने पर निर्यात कर सकेगा। उनका मानना है कि इससे अमेरिकी किसानों को अच्छे दाम मिलेंगे और ग्रामीण अमेरिका में आर्थिक लाभ होगा। हालांकि, यह समझौता भारत में बड़े पैमाने पर बहस का कारण बन सकता है, क्योंकि भारत का कृषि सेक्टर संवेदनशील है। आइए, जानते हैं इस समझौते के संभावित लाभ और विरोध के बारे में।


    **रोलिंस का दावा: अमेरिकी किसानों के लिए खुशखबरी**

    ब्रुक रोलिंस ने अपने सोशल मीडिया पोस्ट पर कहा, “राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का धन्यवाद, जिनकी वजह से अमेरिकी किसानों को फिर से सफलता मिल रही है। भारत के विशाल बाजार में अमेरिकी कृषि उत्पादों का निर्यात बढ़ेगा, जिससे कीमतें बढ़ेंगी और हमारे ग्रामीण इलाकों में पैसा आएगा।”


    **व्यापार घाटे में कमी की उम्मीद**

    रोलिंस ने बताया कि 2024 में भारत के साथ अमेरिका का कृषि व्यापार घाटा 1.3 बिलियन डॉलर था। उन्होंने भारतीय बाजार को अमेरिकी कृषि उत्पादों के लिए एक प्रमुख अवसर बताया, जो इस घाटे को कम करने में मदद करेगा। USDA के आंकड़ों के अनुसार, 2025 में भारत को अमेरिकी कृषि निर्यात 1.7 बिलियन अमेरिकी डॉलर तक पहुंच चुका था, जिसमें मुख्य रूप से बादाम, पिस्ता, कपास और सोयाबीन तेल शामिल थे।


    **समझौता: ट्रंप प्रशासन की शर्तें**

    यह समझौता ट्रंप प्रशासन द्वारा भारत पर लगाए गए कड़े प्रतिबंधों के बाद हुआ है। अगस्त 2025 में, ट्रंप प्रशासन ने भारतीय उत्पादों पर 50% टैरिफ लगा दिया था। इस नए समझौते के तहत, भारत को अमेरिकी कृषि उत्पादों के लिए अपना बाजार खोलने की बात की गई है, साथ ही भारत को रूस से तेल खरीदने पर रोक लगाने की शर्त भी रखी गई है।


    **भारत में राजनीतिक हलचल: कांग्रेस के सवाल**

    भारत में, कांग्रेस ने इस समझौते पर गंभीर सवाल उठाए हैं। कांग्रेस का कहना है कि यह सौदा भारत सरकार की बजाय अमेरिकी राष्ट्रपति ने घोषित किया, जो कि राजनीति का हिस्सा हो सकता है। इसके अलावा, पार्टी ने यह भी सवाल किया कि भारतीय किसानों की सुरक्षा पर इसका क्या असर पड़ेगा, और क्या इस सौदे से भारतीय उद्योगों पर प्रतिकूल असर नहीं पड़ेगा? कांग्रेस ने सरकार से अनुरोध किया है कि सौदे की सभी शर्तें सार्वजनिक की जाएं।


    **क्या भारत में बवाल मचने वाला है?**

    भारत में इस समझौते और अमेरिकी कृषि उत्पादों के बड़े पैमाने पर आयात के बाद बवाल मचने की संभावना है, क्योंकि भारतीय किसान संगठनों और विपक्षी दलों का कहना है कि सस्ते अमेरिकी आयातों से भारतीय उत्पादों की कीमतें गिर सकती हैं। इससे छोटे किसान आर्थिक रूप से प्रभावित हो सकते हैं। कृषि मंत्री या सरकार की ओर से अब तक यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि भारतीय कृषि बाजार कितना खुलेगा। कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि भारत इस संवेदनशील क्षेत्र में पूरी तरह से झुकेगा नहीं, लेकिन कुछ रियायतें जरूर दे सकता है।