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  • सीजफायर के बाद कूटनीति तेज, ईरान के 10 सूत्रीय प्रस्ताव पर अमेरिका से होगी अहम वार्ता

    सीजफायर के बाद कूटनीति तेज, ईरान के 10 सूत्रीय प्रस्ताव पर अमेरिका से होगी अहम वार्ता


    नई दिल्ली। ईरान और अमेरिका के बीच दो हफ्ते के सीज़फायर के बाद अब दोनों देशों के बीच कूटनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। ईरान की सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल ने पुष्टि की है कि दोनों पक्षों के बीच बातचीत शुक्रवार, 10 अप्रैल से इस्लामाबाद में शुरू होगी। ईरान ने पाकिस्तान के जरिए अमेरिका को एक विस्तृत 10 बिंदुओं वाला प्रस्ताव भेजा है, जिस पर अब बातचीत की जाएगी। ईरानी मीडिया के अनुसार, इस प्रस्ताव में कई अहम शर्तें शामिल हैं।

    ईरान के 10 प्रमुख प्रस्ताव इस प्रकार हैं:

    1. अहिंसा के प्रति प्रतिबद्धता
    2. होर्मुज स्ट्रेट पर ईरान का नियंत्रण बरकरार रखना
    3. यूरेनियम संवर्धन की अनुमति
    4. सभी प्राथमिक प्रतिबंधों को समाप्त करना
    5. द्वितीयक प्रतिबंधों को भी हटाना
    6. संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के सभी प्रस्तावों को खत्म करना
    7. बोर्ड ऑफ गवर्नर्स के प्रस्तावों को समाप्त करना
    8. ईरान को मुआवजा देना
    9. क्षेत्र से अमेरिकी सैन्य बलों की वापसी
    10. लेबनान में हिज़्बुल्लाह के खिलाफ कार्रवाई सहित सभी मोर्चों पर युद्धविराम

    ईरानी सरकारी मीडिया के मुताबिक, प्रस्ताव में विशेष रूप से होर्मुज स्ट्रेट पर नियंत्रण, प्रतिबंधों में ढील और क्षेत्र से अमेरिकी सेनाओं की वापसी जैसे मुद्दों पर जोर दिया गया है। हालांकि, ईरान की सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल ने साफ किया है कि इस पहल का मतलब जमीनी स्तर पर तनाव पूरी तरह खत्म होना नहीं है। उनका कहना है कि यह युद्ध का अंत नहीं है और किसी भी गलती का कड़ा जवाब दिया जाएगा।

    यह घटनाक्रम उस समय सामने आया है जब ईरान ने दो हफ्ते के सीज़फायर को स्वीकार किया है, जिसे उसने अपनी “जीत” बताया है। यह सीज़फायर पाकिस्तान की मध्यस्थता से संभव हुआ है। इस्लामाबाद में होने वाली यह वार्ता करीब 15 दिनों तक चल सकती है और जरूरत पड़ने पर इसे आगे बढ़ाया भी जा सकता है। इसका उद्देश्य एक व्यापक समझौते की दिशा में रूपरेखा तैयार करना है।

    ईरानी अधिकारियों ने संकेत दिया है कि इस दौरान समुद्री मार्गों पर सीमित सहयोग किया जाएगा और होर्मुज स्ट्रेट से सुरक्षित आवाजाही ईरानी सशस्त्र बलों के समन्वय से सुनिश्चित की जा सकती है।वहीं, व्हाइट हाउस के एक अधिकारी ने कहा है कि सीज़फायर औपचारिक रूप से तभी लागू माना जाएगा, जब ईरान वैश्विक तेल आपूर्ति के लिए महत्वपूर्ण होर्मुज स्ट्रेट को दोबारा खोल देगा।

    अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की घोषणा के बाद आई एक रिपोर्ट में बताया गया कि तेहरान ने अमेरिका-इजराइल तनाव के बीच पाकिस्तान के प्रस्ताव को स्वीकार कर लिया है। रिपोर्ट के अनुसार, चीन ने भी अंतिम समय में हस्तक्षेप कर तनाव कम करने की अपील की थी।

    इसी बीच, ईरान के नए सर्वोच्च नेता मोजतबा खामेनेई ने सीज़फायर को मंजूरी दे दी है। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराकची ने कहा कि यदि ईरान पर हमले रुकते हैं तो वे भी जवाबी कार्रवाई रोक देंगे और दो हफ्तों तक होर्मुज स्ट्रेट में सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित की जाएगी। उन्होंने सीज़फायर को लागू कराने में भूमिका निभाने के लिए पाकिस्तानी प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और सेना प्रमुख आसिम मुनीर के प्रति आभार भी जताया।

  • Iran-Israel War: पाकिस्तान में ‘लॉकडाउन जैसे हालात’, रात 8 बजे बंद होंगे बाजार-मॉल

    Iran-Israel War: पाकिस्तान में ‘लॉकडाउन जैसे हालात’, रात 8 बजे बंद होंगे बाजार-मॉल


    नई दिल्ली। ईरान युद्ध (Iran-Israel War) के असर के बीच पाकिस्तान में हालात लगातार बिगड़ते जा रहे हैं। बढ़ते ऊर्जा संकट और महंगाई को देखते हुए प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ सरकार ने देशभर में सख्त कदम उठाए हैं, जिससे आम लोगों की जिंदगी पर बड़ा असर पड़ रहा है। हालात ऐसे बन गए हैं कि देश में लॉकडाउन जैसी स्थिति देखने को मिल रही है।

    सरकार ने बिजली और ईंधन बचाने के लिए बाजारों और शॉपिंग मॉल्स के समय में कटौती कर दी है। नए आदेश के मुताबिक ज्यादातर इलाकों में बाजार और मॉल अब रात 8 बजे तक ही खुले रहेंगे।

    ऊर्जा संकट से उठाया बड़ा कदम
    दरअसल, ईरान युद्ध के कारण वैश्विक स्तर पर तेल की कीमतों में भारी उछाल आया है, जिसका सीधा असर पाकिस्तान पर पड़ा है। देश अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए काफी हद तक आयात पर निर्भर है, इसलिए तेल महंगा होने से आर्थिक दबाव बढ़ गया है।

    सरकार ने इस संकट से निपटने के लिए ऊर्जा बचत अभियान शुरू किया है। इसके तहत सिर्फ बाजार ही नहीं, बल्कि रेस्टोरेंट, शादी हॉल और अन्य व्यावसायिक गतिविधियों के समय पर भी पाबंदी लगाई गई है। कई जगहों पर शादी समारोह भी रात 10 बजे तक खत्म करने के निर्देश दिए गए हैं।

    Iran-Israel War के बीच आम लोगों और कारोबार पर असर
    इन फैसलों का सीधा असर आम लोगों और छोटे व्यापारियों पर पड़ रहा है। बाजार जल्दी बंद होने से कारोबार प्रभावित हो रहा है, वहीं लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी भी बदल गई है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, सरकार का मकसद बिजली और ईंधन की खपत कम करना है ताकि आर्थिक संकट को कुछ हद तक नियंत्रित किया जा सके।

    विशेषज्ञों का मानना है कि अगर हालात जल्द नहीं सुधरे तो पाकिस्तान को और सख्त कदम उठाने पड़ सकते हैं। फिलहाल सरकार स्थिति पर नजर बनाए हुए है और जरूरत के हिसाब से नए फैसले ले सकती है।

  • बंदूक नहीं, दिमाग से जंग’-भारत के खिलाफ नई रणनीति पर काम कर रहा पाकिस्तान, रिपोर्ट में खुलासा

    बंदूक नहीं, दिमाग से जंग’-भारत के खिलाफ नई रणनीति पर काम कर रहा पाकिस्तान, रिपोर्ट में खुलासा

    इस्लामाबाद। आसिम मुनीर के नेतृत्व में पाकिस्तान भारत के खिलाफ नई रणनीति पर काम कर रहा है। आरोप है कि सैन्य टकराव के बजाय अब “इन्फॉर्मेशन वॉर” के जरिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत की छवि को चुनौती देने की कोशिश हो रही है।

    DisinfoLab की हालिया रिपोर्ट में दावा किया गया है कि पाकिस्तान एक वैश्विक मीडिया नेटवर्क और थिंक टैंक इकोसिस्टम तैयार कर रहा है, जिसका उद्देश्य अंतरराष्ट्रीय राय को प्रभावित करना है। यह पहल कथित तौर पर पिछले साल के ऑपरेशन सिंदूर के बाद शुरू हुई, जब पाकिस्तान का नैरेटिव वैश्विक मंच पर प्रभाव नहीं डाल सका।

    ‘नैरेटिव वॉर’ का मास्टर प्लान

    रिपोर्ट के मुताबिक, पाकिस्तान ने 2025 में “रणनीतिक संचार मास्टर प्लान” नाम से पहल शुरू की है। इसका लक्ष्य अंग्रेजी भाषा के ऐसे प्लेटफॉर्म बनाना है जो अंतरराष्ट्रीय दर्शकों में विश्वसनीय दिखें और कश्मीर जैसे मुद्दों पर पाकिस्तान-समर्थक दृष्टिकोण को आगे बढ़ाएं। पहले उर्दू-केंद्रित मैसेजिंग वैश्विक स्तर पर प्रभावी नहीं रही, इसलिए यह बदलाव किया गया।

    थिंक टैंक नेटवर्क पर फोकस

    बताया गया है कि मिन्हाज यूनिवर्सिटी लाहौर में “हिमालयन इंस्टीट्यूट ऑफ रिसर्च एंड पॉलिसी स्टडीज” जैसे संस्थान स्थापित किए गए हैं। ये भू-राजनीति, सुरक्षा और जलवायु जैसे विषयों पर काम करने का दावा करते हैं, लेकिन रिपोर्ट के अनुसार इनमें रणनीतिक तंत्र से जुड़े लोगों की भागीदारी बताई गई है।

    ग्लोबल मीडिया में पैठ की कोशिश

    रिपोर्ट में कहा गया है कि कई डिजिटल मीडिया प्लेटफॉर्म को अंतरराष्ट्रीय दर्शकों के लिए सक्रिय किया गया है, जिनमें AsiaOne News, DM News English, FP92TV और Afrik1 TV शामिल बताए गए हैं। इन प्लेटफॉर्म्स को कथित तौर पर “निष्पक्ष पत्रकारिता” के रूप में पेश किया जा रहा है, जबकि आलोचकों का आरोप है कि इनके जरिए नैरेटिव सेट करने की कोशिश हो रही है।

    ‘न्यूट्रल मीडिया’ के नाम पर रणनीति

    विशेषज्ञों का मानना है कि सरकारी समर्थन वाले मीडिया पर भरोसे की कमी को देखते हुए पाकिस्तान ने थिंक टैंक, सोशल मीडिया और अंतरराष्ट्रीय डिजिटल चैनलों के जरिए “सॉफ्ट पावर” आधारित रणनीति अपनाई है। इसका उद्देश्य बिना प्रत्यक्ष सैन्य टकराव के कूटनीतिक और सूचना स्तर पर प्रभाव बनाना है।
    कुल मिलाकर, रिपोर्ट में दावा किया गया है कि पाकिस्तान अब पारंपरिक सैन्य टकराव के बजाय सूचना और प्रचार के जरिए वैश्विक मंच पर भारत को चुनौती देने की रणनीति अपना रहा है।

  • होर्मुज पर ट्रंप का बड़ा बयान, बोले- अब टोल वसूलने का अधिकार हमारा, ईरान पर जीत का किया दावा

    होर्मुज पर ट्रंप का बड़ा बयान, बोले- अब टोल वसूलने का अधिकार हमारा, ईरान पर जीत का किया दावा

    नई दिल्ली। होर्मुज जलडमरूमध्य के माध्यम से तेल की आवाजाही को लेकर जारी तनाव के बीच डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान पर अमेरिका की जीत का दावा करते हुए कहा कि अब टोल वसूलने का अधिकार भी उनके पास है। उन्होंने वाइट हाउस में प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान कहा कि जब अमेरिका विजेता है, तो होर्मुज से गुजरने वाले जहाजों से शुल्क वसूलने का अधिकार भी उनके पास है।

    ट्रंप ने कहा कि उन्हें ईरान से कई संदेश मिले हैं, जिनसे पता चला कि वहां की जनता अपनी सरकार के खिलाफ और अधिक हमलों की मांग कर रही है। जब उनसे पूछा गया कि इन हमलों का आम ईरानी नागरिकों पर क्या असर पड़ेगा, तो उन्होंने दावा किया कि ईरानी लोग अपनी आजादी पाने के लिए तकलीफ उठाने को तैयार हैं।

    ट्रंप की चेतावनी
    उन्होंने ईरान के बुनियादी ढांचे को निशाना बनाने की योजना का बचाव करते हुए कहा कि हर फैसला सोच-समझकर लिया गया है। ट्रंप ने साफ किया कि यदि समझौता नहीं हुआ, तो ईरान के कोई पुल या पावर प्लांट सुरक्षित नहीं रहेंगे और देश पूरी तरह तबाह हो जाएगा। उन्होंने अपने सख्त समय-सीमा की बात भी दोहराई, जिसमें कहा कि मंगलवार रात 8 बजे (भारतीय समयानुसार बुधवार सुबह 1 बजे) तक कोई रियायत नहीं दी जाएगी।

    ट्रंप ने रखी शर्त
    ट्रंप ने शर्त रखी कि वे केवल ऐसे समझौते को मंजूर करेंगे जिसमें तेल की बिना रोक-टोक आवाजाही सुनिश्चित हो। होर्मुज जलडमरूमध्य के विवाद पर उन्होंने नया बयान देते हुए कहा कि ईरान जहाजों से टोल नहीं वसूल सकता। ट्रंप ने स्पष्ट किया, “जीत हमारी है, वे सैन्य रूप से हार चुके हैं।” उन्होंने दोहराया कि अमेरिका ने इस संघर्ष को जीत लिया है और अब शर्तें उनके अनुसार तय होंगी।

    पूर्व ईरानी विदेश मंत्री की प्रतिक्रिया
    पूर्व ईरानी विदेश मंत्री ने इस बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए ट्रंप को मूर्ख राष्ट्रपति बताया और चेताया कि अरब देशों के शासकों को अमेरिकी हस्तक्षेप से बचाव करना चाहिए, ताकि पूरे क्षेत्र को अंधेरे में डूबने से रोका जा सके।

    गौरतलब है कि होर्मुज का मार्ग दुनिया के 20 प्रतिशत कच्चे तेल के आयात-निर्यात के लिए महत्वपूर्ण है, और इस तनाव ने वैश्विक ऊर्जा संकट की संभावना बढ़ा दी है।

  • अंतरिक्ष से पृथ्वी का रहस्य: आर्टेमिस-II ने मैनिकौगन क्रेटर का ऐतिहासिक दृश्य भेजा

    अंतरिक्ष से पृथ्वी का रहस्य: आर्टेमिस-II ने मैनिकौगन क्रेटर का ऐतिहासिक दृश्य भेजा


    नई दिल्ली। नासा के आर्टेमिस-II मिशन के क्रू जैसे-जैसे चांद के करीब पहुंच रहे हैं, वे न केवल चंद्रमा की सतह बल्कि पृथ्वी की अनोखी झलक भी साझा कर रहे हैं। हाल ही में अमेरिकी एस्ट्रोनॉट क्रिस विलियम्स ने अपने कैमरे में कैद पृथ्वी के 20 करोड़ साल पुराने टकराव का निशान, यानी मैनिकौगन क्रेटर, की तस्वीर सोशल मीडिया पर पोस्ट की।

    क्रिस ने अपने एक्स अकाउंट पर लिखा कि जैसे-जैसे आर्टेमिस-II का क्रू चांद के पास पहुंचता है, उन्हें चांद की सतह का सीधा नजारा देखने को मिलेगा। विशेष रूप से चांद की दूसरी तरफ (फार साइड) स्थित गड्ढे यानी क्रेटर्स सौर मंडल के इतिहास में हुए क्षुद्रग्रह और उल्कापिंड टकरावों के साक्षी हैं। ये गड्ढे हमें सौर मंडल और पृथ्वी के प्राचीन इतिहास की कहानी समझने में मदद करते हैं।

    विलियम्स ने बताया कि पृथ्वी पर भी ऐसे टकराव हुए हैं जिनका बड़ा प्रभाव पड़ा। उदाहरण के लिए, डायनासोर युग के अंत में हुए टकराव ने इन जीवों के विलुप्त होने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। हालांकि, पृथ्वी पर प्लेट टेक्टोनिक्स, मौसम और ज्वालामुखी गतिविधियों की वजह से अधिकांश पुराने गड्ढे मिट गए हैं। यही कारण है कि पृथ्वी पर टकराव का इतिहास चंद्रमा की तुलना में स्पष्ट रूप से दिखाई नहीं देता।

    उनके अनुसार, पृथ्वी पर अब भी कई क्रेटर मौजूद हैं, लेकिन वे चांद की सतह पर दिखाई देने वाले गड्ढों की तरह स्पष्ट नहीं हैं। क्रिस ने कनाडा के क्यूबेक में स्थित मैनिकौगन क्रेटर का उदाहरण दिया। यह क्रेटर लगभग 20 करोड़ साल पहले बना था, जब करीब 5 किलोमीटर चौड़ा एक क्षुद्रग्रह पृथ्वी से टकराया। आज इस क्रेटर की चौड़ाई 70 किलोमीटर से अधिक है और यह अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन से भी देखा जा सकता है।

    क्रिस ने अपनी पोस्ट में बताया कि जब वे व्यायाम कर रहे थे, तब उन्होंने आईएसएस के कूपोला खिड़की से इस क्रेटर का दृश्य देखा। दृश्य इतना अद्भुत था कि उन्होंने व्यायाम रोककर इसकी तस्वीर ली। उन्होंने लिखा कि यह नजारा न केवल वैज्ञानिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है बल्कि देखने में बेहद खूबसूरत भी था।

    इस पोस्ट के जरिए क्रिस विलियम्स ने एक बार फिर पृथ्वी और चंद्रमा के बीच के संबंध और सौर मंडल के प्राचीन इतिहास की झलक साझा की। आर्टेमिस-II मिशन के जरिए मिलने वाले ऐसे दृश्य न केवल वैज्ञानिकों के लिए ज्ञानवर्धक हैं, बल्कि आम जनता को भी हमारे ग्रह और उसके इतिहास को करीब से समझने का मौका देते हैं।
    इस पोस्ट के जरिए क्रिस विलियम्स ने एक बार फिर पृथ्वी और चंद्रमा के बीच के संबंध और सौर मंडल के प्राचीन इतिहास की झलक साझा की। आर्टेमिस-II मिशन के जरिए मिलने वाले ऐसे दृश्य न केवल वैज्ञानिकों के लिए ज्ञानवर्धक हैं, बल्कि आम जनता को भी हमारे ग्रह और उसके इतिहास को करीब से समझने का मौका देते हैं।

    आर्टेमिस-II मिशन ने चांद के पास क्रू को पृथ्वी और चंद्रमा की नई झलक दिखाई।
    एस्ट्रोनॉट क्रिस विलियम्स ने मैनिकौगन क्रेटर की तस्वीर सोशल मीडिया पर साझा की।
    मैनिकौगन क्रेटर लगभग 20 करोड़ साल पुराना है, 70 किलोमीटर चौड़ा और क्षुद्रग्रह टकराव से बना।
    पृथ्वी पर पुराने क्रेटर चांद के मुकाबले कम दिखाई देते हैं।
    यह मिशन पृथ्वी के प्राचीन इतिहास और सौर मंडल की समझ को बढ़ाने में मदद करता है।

  • अमेरिका ईरान तनाव चरम पर ट्रंप की सख्त चेतावनी दूतावास ने कहा स्ट्रेट पहले से खुला

    अमेरिका ईरान तनाव चरम पर ट्रंप की सख्त चेतावनी दूतावास ने कहा स्ट्रेट पहले से खुला


    नई दिल्ली । अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव अब बेहद खतरनाक मोड़ पर पहुंचता नजर आ रहा है जहां बयानबाजी के साथ साथ सैन्य कार्रवाई की आशंकाएं भी तेज हो गई हैं। डोनाल्ड ट्रम्प ने एक बार फिर ईरान को कड़ा अल्टीमेटम देते हुए साफ कर दिया है कि अगर होर्मुज स्ट्रेट को लेकर उसकी मांगें पूरी नहीं हुईं तो बड़े पैमाने पर हमले किए जा सकते हैं।

    ट्रंप ने ईरान को सोमवार तक की मोहलत देते हुए चेतावनी दी है कि यदि मंगलवार तक स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को पूरी तरह नहीं खोला गया तो ईरान के पावर प्लांट और पुलों को निशाना बनाया जाएगा। उन्होंने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर बेहद सख्त लहजे में लिखा कि ईरान के लिए आने वाला दिन पावर प्लांट और ब्रिज डे जैसा साबित हो सकता है जो अभूतपूर्व होगा। यह बयान इस बात का संकेत है कि अमेरिका केवल कूटनीतिक दबाव तक सीमित नहीं रहना चाहता बल्कि सैन्य विकल्पों पर भी गंभीरता से विचार कर रहा है।

    हालांकि ईरान की ओर से इस पर तुरंत प्रतिक्रिया आई है। फिनलैंड में स्थित ईरानी दूतावास ने ट्रंप के बयान को खारिज करते हुए कहा कि होर्मुज स्ट्रेट पहले से खुला हुआ है और उसके मित्र देशों के जहाजों के लिए किसी तरह की बाधा नहीं है। दूतावास ने यह भी कहा कि इस तरह के संवेदनशील मुद्दों पर सार्वजनिक बयान देते समय संयम और तथ्यों का ध्यान रखना जरूरी है।

    ईरान की इस प्रतिक्रिया से साफ है कि वह अमेरिकी आरोपों को स्वीकार करने के लिए तैयार नहीं है और अपने रुख पर कायम है। साथ ही उसने ट्रंप के बयान के लहजे पर भी सवाल उठाते हुए अप्रत्यक्ष रूप से इसे गैर जिम्मेदाराना बताया है।

    इस बीच ट्रंप ने द वॉल स्ट्रीट जर्नल को दिए इंटरव्यू में भी अपने सख्त रुख को दोहराया। उन्होंने कहा कि अगर ईरान तय समयसीमा तक कदम नहीं उठाता है तो उसके इंफ्रास्ट्रक्चर को भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है। उन्होंने यहां तक कहा कि ईरान अपने पूरे देश में मौजूद पावर प्लांट्स और अन्य महत्वपूर्ण सुविधाएं खो सकता है।

    ट्रंप का यह बयान ऐसे समय में आया है जब दोनों देशों के बीच बातचीत की कोशिशें भी जारी हैं लेकिन नतीजा अभी तक सामने नहीं आया है। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि बातचीत के दरवाजे पूरी तरह बंद नहीं हुए हैं लेकिन यदि ईरान ने सहयोग नहीं किया तो अमेरिका कड़े कदम उठाने से पीछे नहीं हटेगा।

    होर्मुज स्ट्रेट वैश्विक स्तर पर बेहद महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग है जहां से दुनिया के बड़े हिस्से का तेल परिवहन होता है। ऐसे में इस क्षेत्र में किसी भी तरह का तनाव न केवल मध्य पूर्व बल्कि पूरी वैश्विक अर्थव्यवस्था को प्रभावित कर सकता है।

    कुल मिलाकर स्थिति बेहद संवेदनशील बनी हुई है जहां एक ओर कूटनीतिक बातचीत जारी है वहीं दूसरी ओर सैन्य टकराव का खतरा भी मंडरा रहा है। अब सबकी नजर इस बात पर टिकी है कि क्या आने वाले दिनों में कोई समाधान निकलता है या फिर यह तनाव और ज्यादा गहरा होकर बड़े संघर्ष का रूप ले लेता है।

  • अमेरिका ईरान तनाव के बीच ट्रंप का बड़ा दावा समझौते की उम्मीद लेकिन सैन्य विकल्प तैयार

    अमेरिका ईरान तनाव के बीच ट्रंप का बड़ा दावा समझौते की उम्मीद लेकिन सैन्य विकल्प तैयार


    नई दिल्ली । अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के बीच Donald Trump का ताजा बयान वैश्विक राजनीति में हलचल पैदा कर रहा है। उन्होंने दावा किया है कि अमेरिका ईरान के साथ गहरी और गंभीर बातचीत में जुटा हुआ है लेकिन साथ ही यह भी साफ कर दिया है कि अगर हालात नहीं सुधरे तो सैन्य कार्रवाई का रास्ता भी खुला रखा गया है। इस दोहरे रुख ने संकेत दिया है कि आने वाले दिन मध्य पूर्व के लिए बेहद अहम साबित हो सकते हैं।

    इजरायली मीडिया से बातचीत में ट्रंप ने कहा कि उनकी सरकार ईरान के साथ संघर्ष विराम की दिशा में लगातार प्रयास कर रही है और इसके लिए कई चैनलों के जरिए संपर्क बनाए हुए हैं। उन्होंने बताया कि इस कूटनीतिक पहल की अगुवाई उनके करीबी सहयोगी स्टीव विटकॉफ और Jared Kushner कर रहे हैं जो अलग अलग देशों के माध्यम से बातचीत को आगे बढ़ा रहे हैं।

    सूत्रों के अनुसार बातचीत दो स्तरों पर चल रही है। एक तरफ पाकिस्तान मिस्र और तुर्की जैसे देश मध्यस्थ की भूमिका निभा रहे हैं और दोनों पक्षों के बीच अप्रत्यक्ष संवाद कायम कर रहे हैं। दूसरी तरफ अमेरिकी प्रतिनिधि सीधे ईरान के विदेश मंत्री Abbas Araghchi के संपर्क में हैं। इन प्रयासों का मकसद किसी ऐसे समझौते तक पहुंचना है जिससे तनाव कम हो सके और टकराव टाला जा सके।

    हालांकि अब तक की बातचीत से कोई ठोस नतीजा सामने नहीं आया है लेकिन ट्रंप ने उम्मीद जताई है कि तय समय सीमा से पहले समझौता हो सकता है। उन्होंने संकेत दिया कि मंगलवार तक स्थिति स्पष्ट हो जाएगी। इसी के साथ उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि अगर ईरान ने अमेरिका की शर्तें नहीं मानी तो उसे गंभीर परिणाम भुगतने पड़ सकते हैं।

    ट्रंप का बयान खास तौर पर उस समय आया है जब स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। यह समुद्री मार्ग वैश्विक तेल आपूर्ति के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है और इसके बंद होने से पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था प्रभावित हो सकती है। ट्रंप ने ईरान से इसे तुरंत खोलने की मांग दोहराई है।

    उन्होंने यहां तक कहा कि अगर ईरान तय समय सीमा तक इस मुद्दे पर सहमति नहीं देता तो अमेरिका उसके पावर प्लांट्स को निशाना बना सकता है। यह बयान इस बात का संकेत है कि अमेरिका केवल कूटनीतिक दबाव तक सीमित नहीं रहना चाहता बल्कि जरूरत पड़ने पर सैन्य कार्रवाई के लिए भी तैयार है।

    कुल मिलाकर स्थिति बेहद संवेदनशील बनी हुई है जहां एक ओर बातचीत के जरिए समाधान निकालने की कोशिश हो रही है वहीं दूसरी ओर युद्ध जैसे हालात बनने का खतरा भी बना हुआ है। अब पूरी दुनिया की नजर इस बात पर टिकी है कि क्या दोनों देश बातचीत के जरिए समाधान निकाल पाएंगे या फिर यह तनाव किसी बड़े टकराव में बदल जाएगा।

  • ईरान-अमेरिका तनाव के बीच 45 दिन के युद्धविराम की चर्चा

    ईरान-अमेरिका तनाव के बीच 45 दिन के युद्धविराम की चर्चा

    वाशिंगटन। ईरान और अमेरिका के बीच जारी संघर्ष के बीच संभावित युद्धविराम की उम्मीद जगी है। रिपोर्ट्स के अनुसार पाकिस्तान समेत कई देशों की मध्यस्थता से 45 दिनों के सीजफायर प्लान पर बातचीत शुरू हो गई है। 28 फरवरी को ईरान पर अमेरिकी और इजरायल के हमलों के बाद शुरू हुआ यह संघर्ष क्षेत्रीय और वैश्विक स्तर पर चिंता का कारण बना हुआ है।
    45 दिन के सीजफायर का प्रस्ताव

    रिपोर्ट के मुताबिक दो चरणों वाला प्रस्ताव तैयार किया जा रहा है—

    पहला चरण: 45 दिन का अस्थायी युद्धविराम
    दूसरा चरण: स्थायी शांति समझौते पर बातचीत

    बताया गया है कि जरूरत पड़ने पर सीजफायर की अवधि बढ़ाई भी जा सकती है।

    किन देशों की मध्यस्थता?

    सूत्रों के अनुसार पाकिस्तान के अलावा तुर्किये और मिस्र भी दोनों पक्षों को बातचीत की मेज पर लाने की कोशिश कर रहे हैं।

    पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय की ओर से भी कहा गया है कि संघर्षविराम के प्रयास सही दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।

    ईरान की शर्तें

    सूत्रों के अनुसार ईरान ने युद्ध समाप्त करने के लिए कुछ मांगें रखी हैं, जिनमें

    युद्ध का हर्जाना
    सुरक्षा की गारंटी
    कुछ प्रतिबंधों में राहत
    जैसे मुद्दे शामिल बताए जा रहे हैं। इसके अलावा स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को लेकर भी बातचीत अहम मानी जा रही है।
    ट्रंप की चेतावनी

    अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि जल्द समझौता होने की संभावना है, लेकिन अगर ईरान ने तेजी नहीं दिखाई तो हमले तेज किए जा सकते हैं।

    उन्होंने जलमार्ग खुला रखने को लेकर भी सख्त रुख दिखाया।

    ईरान का पलटवार

    ईरान के संस्कृति मंत्री सैयद रजा सालिही-अमीरी ने ट्रंप के बयानों को खारिज करते हुए कहा कि ईरानी समाज उन्हें गंभीरता से नहीं लेता। उन्होंने कहा कि होर्मुज दुनिया के लिए खुला है, लेकिन ईरान के दुश्मनों के लिए नहीं।
    कुल मिलाकर, 45 दिन के संभावित युद्धविराम पर बातचीत ने तनाव के बीच उम्मीद जरूर जगाई है, लेकिन शर्तों और भरोसे की कमी के कारण स्थिति अभी भी अनिश्चित बनी हुई है।

  • दुबई का पर्यटन गहरे संकट में… ईरान युद्ध के चलते सूने पड़े होटल-रेस्तरां, 80% घटी कमाई

    दुबई का पर्यटन गहरे संकट में… ईरान युद्ध के चलते सूने पड़े होटल-रेस्तरां, 80% घटी कमाई


    दुबई।
    दुनिया के सबसे व्यस्त पर्यटन केंद्रों (Busiest Tourist Centers) में शामिल दुबई (Dubai) पश्चिम एशिया में जारी युद्ध (West Asia War) के चलते गहरे संकट से गुजर रहा है। पिछले साल यानी 2025 में 19.59 मिलियन अंतरराष्ट्रीय पर्यटकों का स्वागत करने वाला यह शहर अब खाली होटलों, सूने रेस्तरां और ठप पड़े एयर ट्रैफिक की मार झेल रहा है। पर्यटन उद्योग से जुड़े कारोबारियों के अनुसार, आय में 50% से 80% तक की गिरावट आई है, जबकि होटल ऑक्यूपेंसी कई जगह 15-20% तक सिमट गई है। बीबीसी, बुकिंग प्लेटफार्म वेगो, डाटा एनालिटिक्स कंपनी एयरडीएनए और ऑक्सफोर्ड इकोनॉमिक्स के अनुसार दुबई के रेस्तरां, जो आमतौर पर पर्यटकों और स्थानीय लोगों की भीड़ से गुलजार रहते थे, अब खाली नजर आ रहे हैं।

    टाशस हॉस्पिटैलिटी ग्रुप की संस्थापक नताशा साइडेरिस कहती हैं कि देशभर में 14 आउटलेट्स और 1,000 से अधिक कर्मचारियों वाले उनके ग्रुप में राजस्व 50% से अधिक गिर चुका है, जबकि पर्यटकों पर निर्भर आउटलेट्स में यह गिरावट 70% से 80% तक पहुंच गई है। हालात इतने खराब हैं कि कई प्रतिष्ठानों को अपने आधे से ज्यादा कर्मचारियों को बिना वेतन छुट्टी पर भेजना पड़ा है।


    2.26 लाख से अधिक बुकिंग रद्द

    डेटा फर्म एयरडीएनए के अनुसार, युद्ध शुरू होने के पहले महीने (28 फरवरी से 29 मार्च) के दौरान यूएई में 2,26,500 से अधिक शॉर्ट-टर्म बुकिंग रद्द हुई हैं।पिछले कुछ वर्षों में तेजी से बढ़ी होटल और शॉर्ट-टर्म अपार्टमेंट सप्लाई अब भारी दबाव में है, क्योंकि मांग अचानक गिर गई है।


    प्रवासी कामगारों पर सबसे ज्यादा मार

    दुबई के हॉस्पिटैलिटी सेक्टर में काम करने वाले प्रवासी कामगार इस संकट से सबसे ज्यादा प्रभावित हुए हैं। कई कर्मचारियों की नौकरी चली गई है या उन्हें बिना वेतन छुट्टी पर भेज दिया गया है। एक दक्षिण एशियाई वेटर के मुताबिक, यह कोविड-19 जैसा लग रहा है।हमें डर है कि फिर से नौकरी खोकर घर लौटना पड़ सकता है।मानवाधिकार समूहों के अनुसार यूएई में कई प्रवासी पहले से ही कर्ज के बोझ में दबे हैं, जिससे यह संकट उनके लिए और गंभीर हो गया है।


    क्षेत्रीय स्तर पर अरबों डॉलर का नुकसान संभव

    ऑक्सफोर्ड इकोनॉमिक्स की इकाई टूरिज्म इकोनॉमिक्स के अनुसार अगर युद्ध लंबा खिंचता है तो मध्य पूर्व में 23 से 38 मिलियन कम पर्यटक आ सकते हैं। इससे 34 अरब डॉलर से 56 अरब डॉलर तक के पर्यटन राजस्व का नुकसान हो सकता है। मामून हमीदेन के अनुसार अगर युद्ध जल्दी खत्म होता है तो रिकवरी संभव है, लेकिन लंबा खिंचने पर पूरे समर सीजन पर सवाल खड़े हो सकते हैं।


    हवाई यातायात को झटका किराया बढ़ने के भी संकेत

    युद्ध के कारण वैश्विक विमानन उद्योग की रीढ़ माने जाने वाला गल्फ हब मॉडल को गहरे संकट में डाल दिया है। दुबई, अबू धाबी और दोहा जैसे विश्व के सबसे व्यस्त ट्रांजिट केंद्रों पर उड़ानों में भारी बाधा, ईंधन संकट और यात्रियों की सुरक्षा चिंताओं ने न केवल तत्काल संचालन को प्रभावित किया है, बल्कि लंबे समय में हवाई यात्रा के स्वरूप को भी बदलने की आशंका पैदा कर दी है। बीबीसी और इंटरनेशनल एयर ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन (आईएटीए) के अनुसार दुबई, अबू धाबी और दोहा से सीमित लेकिन नियमित उड़ानें संचालित हो रही हैं।

    हालांकि शेड्यूल अभी भी बार-बार बदल रहे हैं और कई रूट्स पर प्रतिबंध जारी हैं। ईंधन आपूर्ति भी पूरी तरह स्थिर नहीं हो पाई है। जेट फ्यूल की कीमतें ऊंचे स्तर पर बनी हुई हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर गल्फ कैरियर्स की क्षमता घटती है, तो हवाई किराए बढ़ना तय है। संघर्ष के बाद से सिरियम के विश्लेषकों के अनुसार, संघर्ष शुरू होने के बाद से मिडिल ईस्ट के लिए 30,000 से अधिक उड़ानें रद्द की जा चुकी हैं।

  • डोनाल्ड ट्रंप की चेतावनी पर ईरान का तीखा जवाब, ‘मिडिल ईस्ट को बना देंगे नरक’

    डोनाल्ड ट्रंप की चेतावनी पर ईरान का तीखा जवाब, ‘मिडिल ईस्ट को बना देंगे नरक’


    तेहरान। डोनाल्ड ट्रंप की सख्त चेतावनी के बाद ईरान ने कड़ा पलटवार किया है। ट्रंप ने कहा था कि यदि ईरान समझौता नहीं करता तो उस पर “कहर” बरसेगा। इसके जवाब में ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स ने मिडिल ईस्ट में हालात और बिगड़ने की चेतावनी दी है।  खातम अल-अनबिया सेंट्रल हेडक्वार्टर के प्रवक्ता इब्राहिम जोल्फाघारी ने कहा कि अगर तनाव इसी तरह बढ़ता रहा तो पूरा क्षेत्र अमेरिका और इजरायल के लिए “नरक” बन सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि ईरान को हराने का भ्रम विरोधियों को दलदल में फंसा देगा।

    ड्रोन और मिसाइल हमलों का दावा

    इब्राहिम जोल्फाघारी ने दावा किया कि ईरान ने अपने ड्रोन और मिसाइलों से इजरायल और अमेरिका से जुड़े कई ठिकानों को निशाना बनाया है। उनका यह बयान ऐसे समय में आया है जब अमेरिका और इजरायल, ईरान पर रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को खोलने का दबाव बना रहे हैं। ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर पोस्ट करते हुए कहा कि ईरान के पास समझौते या होर्मुज खोलने के लिए बहुत कम समय बचा है। उन्होंने लिखा कि पहले 10 दिन का समय दिया गया था और अब 48 घंटे बाद कड़ी कार्रवाई हो सकती है।


    लगातार बदलते बयान, बढ़ता तनाव

    28 फरवरी को अमेरिका और इजरायल के संयुक्त हमलों के बाद शुरू हुए इस संघर्ष में ट्रंप के बयान लगातार बदलते रहे हैं। एक ओर वे कूटनीतिक समाधान की बात करते हैं, तो दूसरी ओर ईरान को “स्टोन एज” में भेजने जैसी कड़ी चेतावनी भी देते हैं। युद्ध को एक महीने से ज्यादा समय हो चुका है, लेकिन होर्मुज अब भी पूरी तरह नहीं खुला है। दुनिया की करीब 20 प्रतिशत तेल और गैस आपूर्ति इसी समुद्री मार्ग से गुजरती है, जिससे इसकी अहमियत और बढ़ जाती है।

    ऊर्जा संकट और बढ़ती कीमतें

    होर्मुज के बंद रहने से वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति प्रभावित हुई है और ईंधन की कीमतों में तेज उछाल आया है। पहले जहां ब्रेंट क्रूड की कीमत 73 डॉलर प्रति बैरल थी, अब यह 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच चुकी है। हालांकि, कुछ देशों के जहाजों को सीमित रूप से होर्मुज से गुजरने की अनुमति दी गई है, जिनमें भारत भी शामिल है। हाल ही में एक फ्रांसीसी कंपनी का जहाज इस मार्ग से गुजरने वाला पहला बड़ा पश्चिमी यूरोपीय जहाज बना। इसके बावजूद, क्षेत्र में लगातार हो रहे ड्रोन और मिसाइल हमलों के चलते सामान्य समुद्री आवाजाही अब भी प्रभावित बनी हुई है।