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  • 48 घंटे में खोलो होर्मुज स्ट्रेट, डेडलाइन पार हुई बरपेगा कहर… ट्रंप की ईरान को कड़ी चेतावनी

    48 घंटे में खोलो होर्मुज स्ट्रेट, डेडलाइन पार हुई बरपेगा कहर… ट्रंप की ईरान को कड़ी चेतावनी


    वाशिंगटन।
    मिडिल ईस्ट (Middle East.) में तनाव चरम पर है. ईरान और अमेरिका (America) के बीच को भी पीछे हटने या झुकने को तैयार नहीं है. सीजफायर की कोशिशों के बीच लगातार हमले जारी है. इसी बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (American President Donald Trump) ने ईरान (Iran) को लेकर कड़ा रुख अपनाते हुए चेतावनी दी है कि यदि होर्मुज स्ट्रेट (Strait of Hormuz) को खोलने की तय समय सीमा का पालन नहीं किया गया, तो इसके गंभीर परिणाम भुगतने होंगे।

    डोनाल्ड ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर आक्रामक अंदाज में लिखा कि समय तेजी से खत्म हो रहा है. ईरान को समझौते और होर्मुज स्ट्रेट खोलने के लिए पहले ही समय दिया गया था, लेकिन अब सिर्फ 48 घंटे बचे हैं. यदि ये डेडलाइन पार हुई, तो ईरान पर अमेरिका कहर बनकर टूटेगा. हैरानी की बात ये है कि कुछ दिन पहले तक ट्रंप का रुख अपेक्षाकृत नरम दिखाई दे रहा था।

    उन्होंने ईरान के साथ चल रही बातचीत को लेकर उम्मीद जताई थी और समय सीमा को 10 दिन तक बढ़ाते हुए 6 अप्रैल तक का वक्त दिया था. यह कदम संकेत दे रहा था कि वाशिंगटन अभी भी कूटनीतिक रास्ता खुला रखना चाहता है. लेकिन अब उनके तेवर बदल चुके हैं. उन्होंने साफ संदेश दे दिया है कि धैर्य की सीमा खत्म होने के करीब है. इसके बाद भीषण हमले किए जाएंगे।

    स्ट्रेट ऑफ होर्मुज दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों में से एक माना जाता है, जहां से वैश्विक तेल आपूर्ति का बड़ा हिस्सा गुजरता है. ऐसे में यहां किसी भी तरह की रुकावट का असर सिर्फ क्षेत्रीय नहीं, बल्कि वैश्विक अर्थव्यवस्था पर भी पड़ सकता है. इससे अमेरिका मुद्दे को सिर्फ क्षेत्रीय विवाद के तौर पर नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा और ऊर्जा स्थिरता से जुड़ा मामला मानता है.

    ट्रंप की बातों से साफ है कि अब यह मामला सिर्फ कूटनीतिक बातचीत तक सीमित नहीं रहा. 48 घंटे की चेतावनी ने संकेत दिया है कि आने वाले दिन बेहद अहम होने वाले हैं. ईरान की ओर से अभी तक इस पर कोई औपचारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है, लेकिन जिस तरह से हालात तेजी से बदल रहे हैं, उससे दोनों देशों के बीच तनाव एक नए स्तर पर पहुंच सकता है।

    28 फरवरी को जब डोनाल्ड ट्रंप ने इजरायल के साथ मिलकर ‘ऑपरेशन एपिक फ्यूरी’ का आगाज किया तब उनके इरादे बिल्कुल साफ थे. दोनों ईरान की मिसाइल शक्ति को मिट्टी में मिलाना चाहते थे. उसके परमाणु ख्वाबों पर हमेशा के लिए ताला जड़ना चाहते थे. लेकिन युद्ध के पांचवें हफ्ते तक आते-आते अमेरिकी प्रशासन के ये लक्ष्य किसी पहेली की तरह उलझ गए हैं।

    कभी ट्रंप आक्रामकता की बात करते हैं, तो कभी अपने ही पुराने बयानों का खंडन कर दुनिया को हैरत में डाल देते हैं. इस टकराव का सबसे विचित्र पहलू ट्रंप के विरोधाभासी बयान रहे हैं. युद्ध के शुरुआती हफ्तों में उन्होंने बड़े आत्मविश्वास से कहा था कि इस लड़ाई का तेल से कोई लेना-देना नहीं है. लेकिन कुछ ही समय बाद उनके सुर बदल गए. अब ईरान के तेल पर कब्जे की बात करते हैं।

    होर्मुज स्ट्रेट पर भी वॉशिंगटन का रुख डगमगाता दिखता है. पहले ट्रंप ने कहा कि अमेरिका के हटने पर दूसरे देश इसे खोल सकते हैं, लेकिन महज कुछ ही दिनों में उन्होंने जोर देकर कहा कि वो आसानी से खुद संभाल सकते हैं. कभी वे जंग खत्म होने का ऐलान करते हैं, तो कभी बुनियादी ढांचे पर हफ्तों तक बमबारी की चेतावनी देते हैं. यह अनिश्चितता वैश्विक बाजारों के लिए चिंता का सबब बन गई है।

  • अमेरिका-ईरान संघर्ष: एफ-15 और ए-10 का नुकसान, पायलटों की खोज जारी

    अमेरिका-ईरान संघर्ष: एफ-15 और ए-10 का नुकसान, पायलटों की खोज जारी


    नई दिल्ली । अमेरिका और ईरान के बीच तनाव का सिलसिला लगातार बढ़ता जा रहा है। आज संघर्ष का 36वां दिन है और ईरान ने अमेरिकी वायुसेना को गंभीर झटका दिया है। पहले एफ 15ई जेट विमान को मार गिराने के बाद ईरान ने अमेरिकी ए 10 वॉर्थोग फाइटर को भी निशाना बनाया। अमेरिकी मीडिया और वॉशिंगटन पोस्ट की रिपोर्ट के अनुसार एफ 15ई के ढेर होने के बाद पायलट को बचाने के लिए भेजे गए ब्लैक हॉक हेलीकॉप्टर को भी ईरानी हमले का सामना करना पड़ा।

    एफ 15ई जेट दो सीटों वाला लड़ाकू विमान है। इसमें एक पायलट और एक वेपन सिस्टम ऑफिसर शामिल होता है। इस विमान के क्रू मेंबर में से एक को अमेरिकी स्पेशल फोर्स ने बचा लिया जबकि दूसरा अभी लापता है। अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार यह घटना शुक्रवार को हुई जिसमें दो पायलटों को रेस्क्यू किया गया और एक अभी भी तलाश के दायरे में है।

    वहीं अमेरिकी दूसरा विमान ए 10 वॉर्थोग फाइटर भी ईरानी हमले का शिकार हुआ। इसके पायलट ने विमान को कुवैत के हवाई क्षेत्र में लाकर खुद को इजेक्ट किया और सुरक्षित बचाव पाया। एफ 15ई के रेस्क्यू प्रयासों में शामिल दो अमेरिकी सैन्य हेलीकॉप्टर भी ईरानी फायरिंग की चपेट में आए। हालांकि हेलीकॉप्टरों में सवार अमेरिकी कर्मी घायल हुए लेकिन दोनों हेलीकॉप्टर सुरक्षित लौट आए।

    व्हाइट हाउस की प्रेस सेक्रेटरी कैरोलिन लेविट ने बताया कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को इस बारे में सूचित कर दिया गया है। एनबीसी न्यूज से बात करते हुए ट्रंप ने कहा कि एफ 15 के नुकसान से ईरान के साथ बातचीत पर कोई असर नहीं पड़ेगा। यह बयान पिछले सप्ताह उनके उस दावे के एक हफ्ते बाद आया जिसमें उन्होंने कहा था कि ईरान की सेना इतनी कमजोर हो गई है कि हमारे प्लेन उनके देश में आसानी से उड़ रहे हैं और ईरान कुछ नहीं कर सकता।

    ईरानी मीडिया ने इस घटना को भव्य रूप से दिखाया। ईरानी टेलीविजन रिपोर्टर ने कहा कि जो कोई भी अमेरिकी पायलट को पकड़ता है उसे भारी इनाम मिलेगा। इसके अलावा ईरानी गवर्नर ने वादा किया कि जो कोई भी दुश्मन की सेना को मारता या पकड़ता है उसकी सराहना की जाएगी।

    रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स ने दक्षिण पश्चिमी ईरान में उस क्षेत्र के पास तलाशी अभियान शुरू किया है जहां विमान गिरा था। ईरान के पार्लियामेंट स्पीकर मोहम्मद बाकर कलीबाफ ने कहा कि अमेरिका और इजरायल की युद्ध रणनीति अब पायलटों की तलाश तक सिमट गई है। उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा कि अमेरिका की बेतुकी लड़ाई अब “शासन बदलने” से घटकर “क्या कोई हमारे पायलट ढूंढ सकता है?” तक आ गई है।

    इस घटनाक्रम ने अमेरिका ईरान संघर्ष की गंभीरता को और बढ़ा दिया है। दोनों पक्षों के बीच लड़ाई और नुकसान की खबरें अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चिंता का विषय बनी हुई हैं। अब सभी की निगाहें इस बात पर हैं कि खोए हुए पायलटों की तलाश में आगे क्या कदम उठाए जाएंगे और इस संघर्ष के परिणाम क्या होंगे।

  • अमेरिकी एफ-15ई स्ट्राइक ईगल: हवा और जमीन पर हमला करने वाला बहु भूमिका फाइटर

    अमेरिकी एफ-15ई स्ट्राइक ईगल: हवा और जमीन पर हमला करने वाला बहु भूमिका फाइटर

    नई दिल्ली । ईरान द्वारा अमेरिकी लड़ाकू विमान को मार गिराने के दावे ने एक बार फिर दुनिया का ध्यान एफ 15ई स्ट्राइक ईगल पर केंद्रित कर दिया है। यह विमान अमेरिकी वायुसेना के सबसे भरोसेमंद और बहु भूमिका वाले फाइटर जेट्स में से एक माना जाता है। यूएस एयरफोर्स की आधिकारिक वेबसाइट एएफडॉटएमआईएल के अनुसार एफ 15ई स्ट्राइक ईगल को विशेष रूप से इस तरह डिजाइन किया गया है कि यह न केवल हवा में दुश्मन के विमानों से लड़ सके बल्कि जमीन पर स्थित लक्ष्य पर भी सटीक हमला कर सके।

    एफ 15ई में दो सदस्यीय क्रू होता है, जिसमें एक पायलट और एक वेपन सिस्टम ऑफिसर शामिल होता है। यह संयोजन जटिल मिशनों को अधिक कुशलता और सुरक्षा के साथ अंजाम देने में सहायक होता है। विमान किसी भी मौसम में दिन रात उड़ान भरने में सक्षम है और इसमें अत्याधुनिक एवियोनिक्स और रडार सिस्टम लगे हैं, जो लंबी दूरी से लक्ष्यों की पहचान और उन पर सटीक हमला करने की क्षमता प्रदान करते हैं।

    एफ 15ई का एपीजी 70 रडार सिस्टम हवा और जमीन दोनों प्रकार के लक्ष्यों को ट्रैक कर सकता है। इसके साथ ही एलएएनटीआईआरएन सिस्टम लो एल्टीट्यूड नेविगेशन एंड टारगेटिंग इंफ्रारेड इसे अत्यंत कम ऊंचाई पर उड़ान भरने और खराब मौसम या रात के समय भी सटीक हमले करने की सुविधा देता है। यह सिस्टम पायलट को जमीन के करीब सुरक्षित उड़ान भरने में मदद करता है, जिससे मिशन अधिक प्रभावी बनते हैं।

    प्रदर्शन के मामले में भी एफ 15ई बहुत शक्तिशाली है। इसकी अधिकतम गति लगभग 1,875 मील प्रति घंटा मैक 2.5 से अधिक है और यह लगभग 60,000 फीट की ऊंचाई तक उड़ सकता है। इसकी लंबी रेंज और भारी हथियार ले जाने की क्षमता इसे दुश्मन के गहरे इलाके में जाकर भी हमला करने में सक्षम बनाती है।

    हथियारों की बात करें तो एफ 15ई में 20 मिमी की आंतरिक तोप लगी होती है। इसके अलावा यह एम 9 साइडवाइंडर और एम 120 अमराम जैसी हवा से हवा में मार करने वाली मिसाइलें भी ले जा सकता है। इसके साथ ही विभिन्न प्रकार के प्रिसिजन गाइडेड और पारंपरिक बमों को भी वाहन कर सकता है, जो इसे बहु भूमिका फाइटर बनाते हैं।

    एफ 15ई स्ट्राइक ईगल का निर्माण अमेरिकी एयरोस्पेस कंपनी बोइंग ने किया है। शुरुआत में इसकी कीमत लगभग 31 मिलियन डॉलर थी, लेकिन आधुनिक अपग्रेड और तकनीकी सुधारों के साथ इसकी कीमत बढ़कर लगभग 100 मिलियन डॉलर हो गई है। यूएस एयरफोर्स के अनुसार इसकी लंबी रेंज, भारी पेलोड क्षमता और मिशन पूरा करते समय सुरक्षा इसे अमेरिकी वायुसेना की एक प्रमुख ताकत बनाती है।

    इसलिए, चाहे ईरान का दावा सही हो या नहीं, एफ 15ई स्ट्राइक ईगल अपने आधुनिक रडार, हथियार प्रणाली और उड़ान प्रदर्शन के कारण दुनिया के सबसे खतरनाक और भरोसेमंद लड़ाकू विमानों में शुमार है।

  • क्या ईरान बना सकता है अमेरिका पर दबाव? लापता पायलट से बदल सकता है जंग का समीकरण

    क्या ईरान बना सकता है अमेरिका पर दबाव? लापता पायलट से बदल सकता है जंग का समीकरण

    नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में जारी तनाव अब नए मोड़ पर पहुंचता दिख रहा है। इजरायल और अमेरिका द्वारा 28 फरवरी को ईरान पर किए गए हमले के बाद से हालात लगातार गंभीर बने हुए हैं। होर्मुज क्षेत्र में बढ़ती गतिविधियों के कारण संघर्ष थमता नजर नहीं आ रहा है। इसी बीच अमेरिका का एक फाइटर जेट ईरान में क्रैश हो गया, जिसने हालात को और जटिल बना दिया है।

    विमान में सवार दो पायलटों में से एक को सुरक्षित निकाल लिया गया है, लेकिन दूसरा अभी भी लापता है। इस पायलट की स्थिति को लेकर ही अब पूरे घटनाक्रम की दिशा तय होने की संभावना जताई जा रही है।

    संघर्ष में अहम मोड़
    ईरान की जमीन पर अमेरिकी फाइटर जेट का गिरना इस संघर्ष में अहम मोड़ माना जा रहा है। अब तक अमेरिका जिन हादसों को ‘फ्रेंडली फायर’ बताता रहा, इस घटना ने उस दावे पर सवाल खड़े कर दिए हैं। यह पहली बार स्पष्ट रूप से सामने आया है कि अमेरिकी विमान ईरान में गिरा है और एक पायलट का कोई सुराग नहीं है।

    पायलट की स्थिति तय करेगी अगला कदम
    विशेषज्ञों के अनुसार, अगर लापता अमेरिकी पायलट को ईरान पकड़ लेता है, तो यह स्थिति पूरी जंग का रुख बदल सकती है। पायलट को नुकसान पहुंचाने से ईरान को कोई खास रणनीतिक फायदा नहीं होगा, बल्कि इससे अमेरिका को बड़ा सैन्य कदम उठाने का मौका मिल सकता है, खासकर डोनाल्ड ट्रंप के लिए। यदि पायलट की मौत होती है, तो अमेरिका इसे जवाबी कार्रवाई के लिए आधार बना सकता है, जिससे संघर्ष और उग्र हो सकता है। वहीं, अगर पायलट जिंदा और ईरान के कब्जे में होता है, तो यह तेहरान के लिए एक मजबूत रणनीतिक बढ़त बन सकती है।

    जिंदा पायलट से बढ़ेगा दबाव
    पायलट के जिंदा होने की स्थिति में अमेरिका पर उसे सुरक्षित वापस लाने का दबाव बढ़ेगा। इससे दोनों देशों के बीच बातचीत की संभावना बन सकती है। ऐसे हालात में ईरान इस स्थिति का इस्तेमाल अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी स्थिति मजबूत करने के लिए कर सकता है। इसे एक तरह का ‘स्ट्रॉन्ग होल्ड’ माना जा रहा है, जिसे वह कूटनीतिक रूप से भुना सकता है।

    लोकेशन सबसे बड़ा सवाल
    इस पूरे घटनाक्रम में सबसे अहम पहलू पायलट की लोकेशन है। आमतौर पर इजेक्शन के बाद पायलट घायल हो जाते हैं, जिससे उनका सुरक्षित निकल पाना मुश्किल होता है। ईरान जैसे बड़े और विविध भूगोल वाले देश में उनकी तलाश करना एक बड़ी चुनौती बन सकता है।

    ईरान की संभावित रणनीति
    अगर पायलट जीवित है, तो ईरान उसे पकड़ने की पूरी कोशिश करेगा। गिरफ्तारी के बाद ही वह बातचीत की शर्तें तय कर सकता है। साथ ही, पायलट से जुड़े सबूत या तस्वीरें जारी कर अंतरराष्ट्रीय दबाव बनाने की रणनीति भी अपनाई जा सकती है।

    अलग रणनीति, एक लक्ष्य
    इस पूरे मामले में अमेरिका और ईरान दोनों अलग-अलग रणनीतियों पर काम कर रहे हैं, लेकिन दोनों का मकसद एक ही है- स्थिति को अपने पक्ष में मोड़ना। आने वाले दिनों में पायलट की स्थिति और लोकेशन ही तय करेगी कि यह तनाव किस दिशा में आगे बढ़ेगा।

  • पाकिस्तान में हिंदू विरासत पर फिर हमला, कराची में भगवान कृष्ण की मूर्तियां तोड़ी गईं

    पाकिस्तान में हिंदू विरासत पर फिर हमला, कराची में भगवान कृष्ण की मूर्तियां तोड़ी गईं


    लाहौर। पाकिस्तान में अल्पसंख्यक हिंदू समुदाय को निशाना बनाए जाने की घटनाएं थमने का नाम नहीं ले रही हैं। ताजा मामला कराची से सामने आया है, जहां एक ऐतिहासिक इमारत में भगवान कृष्ण और गोपियों की मूर्तियों को कथित रूप से खंडित कर दिया गया।

    इस घटना की जानकारी पाकिस्तान दरवार इत्तेहाद के अध्यक्ष शिव कच्छी ने दी। उन्होंने बताया कि कराची स्थित ऐतिहासिक सगन मेसन भवन में रखी धार्मिक मूर्तियों को नुकसान पहुंचाया गया, जिसे उन्होंने बेहद निंदनीय बताया।

    शिव कच्छी ने सोशल मीडिया पर पोस्ट करते हुए कहा कि यह सिर्फ एक इमारत को नुकसान पहुंचाने की घटना नहीं है, बल्कि पाकिस्तान की बहुसांस्कृतिक विरासत, धार्मिक सद्भाव और अल्पसंख्यक समुदायों की भावनाओं पर सीधा हमला है। उन्होंने सरकार से मामले की निष्पक्ष जांच कराने और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की।

    उन्होंने कहा कि हिंदू समुदाय इस घटना से आहत है और जिम्मेदार लोगों की जल्द गिरफ्तारी जरूरी है।

    साथ ही, ऐतिहासिक इमारत के तत्काल जीर्णोद्धार और संरक्षण की मांग भी उठाई गई है।

    बताया जा रहा है कि यह भवन स्वतंत्रता-पूर्व काल में 1937 में निर्मित हुआ था और यहां हिंदू समुदाय की कई धार्मिक मूर्तियां व प्रतीक सुरक्षित रखे गए थे। इससे पहले भी पाकिस्तान में मंदिरों और हिंदू स्थलों पर हमलों की कई घटनाएं सामने आती रही हैं, जिन पर भारत अंतरराष्ट्रीय मंचों, जिनमें संयुक्त राष्ट्र भी शामिल है, पर चिंता जता चुका है।

  • 10 मिनट ‘क्लीनिकली डेड’ रही महिला का दावा, 2030 की दुनिया देखकर लौटी; अनुभव ने चौंकाया

    10 मिनट ‘क्लीनिकली डेड’ रही महिला का दावा, 2030 की दुनिया देखकर लौटी; अनुभव ने चौंकाया


    नई दिल्ली। मेक्सिको की एक महिला ने दावा किया है कि 10 मिनट तक ‘क्लीनिकली डेड’ रहने के दौरान वह भविष्य यानी साल 2030 में पहुंच गई थीं। होश में आने के बाद उन्होंने जो अनुभव साझा किया, उसने लोगों के साथ-साथ वैज्ञानिकों को भी हैरान कर दिया।

    रिपोर्ट के मुताबिक, 24 वर्षीय मेडिकल स्टूडेंट रूबी रोल्गु को पिछले साल अप्रैल में फेफड़ों में खून के थक्के जमने की वजह से अस्पताल में भर्ती कराया गया था। उनकी हालत बिगड़ने पर उन्हें दिल का दौरा पड़ा और डॉक्टरों ने उन्हें लगभग 10 मिनट तक ‘क्लीनिकली डेड’ बताया। परिवार को भी उनकी स्थिति बेहद गंभीर होने की जानकारी दी गई थी।

    2030 की दुनिया देखने का दावा

    होश में आने के बाद रूबी ने बताया कि उन 10 मिनटों में उन्होंने खुद को साल 2030 की दुनिया में पाया। उनके अनुसार, भविष्य की दुनिया आज की तुलना में अधिक शांत और व्यवस्थित थी। उन्होंने दावा किया कि तकनीक और ऑटोमेशन के कारण लोगों का जीवन आसान हो गया था और वे परिवार व समाज के साथ ज्यादा समय बिताते दिखे।

    रूबी ने यह भी कहा कि उन्होंने खुद को और अपने परिवार को उम्रदराज होते देखा, मानो वह आने वाले वर्षों को दिन-प्रतिदिन जी रही हों। उनके मुताबिक भविष्य में तकनीक और मानवीय संवेदनाओं का संतुलन बेहतर दिखाई दिया।

    ‘वापस आना किसी नरक जैसा लगा’

    रूबी के अनुसार, यह अनुभव इतना सुखद था कि जब उनकी आंखें अस्पताल में खुलीं तो उन्हें वास्तविक दुनिया में लौटना कठिन लगा। उन्होंने बताया कि उन्हें रोशनी से भरी सुरंग दिखाई दी और फिर अचानक वह अपने अस्पताल के बेड पर थीं। होश में आने पर जब उन्होंने अपने भाई को देखा तो वह उन्हें अपनी ‘भविष्य की यादों’ के मुकाबले काफी छोटा लगा।

    रूबी ने कहा कि भविष्य की शांति के बाद वर्तमान की भागदौड़ भरी दुनिया में लौटना उन्हें किसी “नरक” जैसा महसूस हुआ। हालांकि वैज्ञानिक ऐसे दावों को अक्सर मस्तिष्क की जटिल गतिविधियों और ‘नियर-डेथ एक्सपीरियंस’ से जोड़कर देखते हैं, फिर भी यह घटना चर्चा का विषय बनी हुई है।

  • चीन में फैली फिर नई बीमारी, मारे जा रहे जानवर; बॉर्डर पर नियंत्रण कड़ा

    चीन में फैली फिर नई बीमारी, मारे जा रहे जानवर; बॉर्डर पर नियंत्रण कड़ा

    वीजिंग। चीन में एक नई बीमारी फैली है, जिसके बाद जानवरों को मारा जा रहा है। उत्तर-पश्चिम में ‘फुट-एंड-माउथ’ बीमारी के छोटे से प्रकोप के बाद चीन ने अपनी सीमा पर नियंत्रण कड़ा कर दिया है। इसके साथ ही, टीकों की प्रक्रिया तेज कर दी है और मवेशियों को मारना शुरू कर दिया है। अधिकारियों का कहना है कि यह बीमारी विदेश से आई है। कृषि मंत्रालय ने पिछले बताया कि उसने जानवरों को मारना और प्रभावित इलाकों को कीटाणु-मुक्त करना शुरू कर दिया है। यह कदम तब उठाया गया जब गांसु प्रांत और शिनजियांग उइघुर स्वायत्त क्षेत्र में कुल 6,229 मवेशियों के झुंड इस बीमारी की चपेट में आ गए।
    उद्योग एक्सपर्ट ने बताया कि यह पहली बार है जब चीन में एसएटी-एक सेरोटाइप-जो अफ्रीका में आम तौर पर पाई जाने वाली इस बीमारी का ही एक प्रकार है, का पता चला है। उन्होंने यह भी कहा कि इस बीमारी के अधिक सामान्य ‘O’ और ‘A’ सेरोटाइप के लिए देश में उपलब्ध मौजूदा टीके इस नए प्रकार से सुरक्षा प्रदान नहीं करते हैं। वर्ष 2025 से, SAT-1 अफ्रीका से फैलकर मध्य-पूर्व, पश्चिम एशिया और दक्षिण एशिया के कुछ हिस्सों तक पहुंच चुका है।

    अधिकारियों ने सोमवार को बताया कि यह प्रकोप चीन में उत्तर-पश्चिमी सीमा के रास्ते से आया है। यह वह क्षेत्र है जो कजाकिस्तान, मंगोलिया, रूस और अन्य देशों से सटा हुआ है।

    आधिकारिक सूचनाओं के अनुसार, शिनजियांग और गांसु सहित सीमावर्ती प्रांतों को गश्त बढ़ाने और तस्करी या अवैध परिवहन के जरिए इस बीमारी को देश में प्रवेश करने से रोकने के निर्देश दिए गए हैं। शंघाई जेसी इंटेलिजेंस कंपनी की विश्लेषक रोजा वांग ने कहा, “मौजूदा प्रकोप एक बड़े क्षेत्र के लिए खतरा बन गया है, और इसकी रोकथाम तथा नियंत्रण पर भारी दबाव है।”

    यह प्रकोप ऐसे समय में सामने आया है जब रूस साइबेरिया के नोवोसिबिर्स्क क्षेत्र में मवेशियों की एक गंभीर बीमारी के प्रकोप से जूझ रहा है। यह क्षेत्र कजाकिस्तान की सीमा से लगा हुआ है और शिनजियांग और गांसु में प्रकोप वाली जगहों से क्रमशः लगभग 1200 किमी (750 मील) और 2500 किमी दूर है। 20 मार्च को प्रकाशित एक रिपोर्ट में, अमेरिकी कृषि विभाग ने कहा कि चीन की प्रतिक्रिया का पैमाना यह संकेत दे सकता है कि वहां ‘फुट-एंड-माउथ’ (खुरपका-मुंहपका) बीमारी का कोई ऐसा प्रकोप हुआ है जिसकी अभी तक पुष्टि नहीं हुई है। रूस ने ऐसे किसी भी प्रकोप से इनकार किया है।

  • तेहरान के पास पुल पर हमला, अमेरिका-ईरान टकराव गहराया, ट्रंप ने दी बड़ी चेतावनी

    तेहरान के पास पुल पर हमला, अमेरिका-ईरान टकराव गहराया, ट्रंप ने दी बड़ी चेतावनी


    वाशिंगटन । अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव अब और गहराता नजर आ रहा है। अमेरिकी सेना ने तेहरान के पास एक महत्वपूर्ण हाईवे पुल पर हमला किया है, जिससे क्षेत्रीय हालात और ज्यादा संवेदनशील हो गए हैं। यह हमला उस पुल पर किया गया जो तेहरान को करज शहर से जोड़ता है और जिसे रणनीतिक रूप से अहम माना जाता है।

    अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार, यह पुल ईरान की मिसाइल और ड्रोन प्रणाली के लिए जरूरी आपूर्ति मार्ग के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा था। इसी वजह से इसे निशाना बनाया गया। उनका कहना है कि यह कार्रवाई ईरान की सैन्य क्षमताओं को कमजोर करने की एक व्यापक रणनीति का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य हथियारों और सैन्य उपकरणों की आवाजाही को रोकना है।

    हालांकि ईरान ने इस दावे को खारिज कर दिया है। सरकारी मीडिया के अनुसार, यह पुल अभी पूरी तरह चालू नहीं था और सेना द्वारा इसका इस्तेमाल नहीं किया जा रहा था। ईरानी अधिकारियों ने बताया कि इस हमले में कम से कम आठ लोगों की मौत हुई है और कई अन्य घायल हुए हैं। घायलों में आम नागरिक भी शामिल हैं, जो नवरोज के मौके पर बाहर मौजूद थे।

    अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस हमले के बाद कड़ी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने सोशल मीडिया पर इस कार्रवाई की सराहना करते हुए कहा कि ईरान का एक बड़ा पुल नष्ट कर दिया गया है और अब इसका उपयोग संभव नहीं होगा। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि अभी बहुत कुछ होना बाकी है और ईरान को जल्द से जल्द समझौता कर लेना चाहिए, अन्यथा आगे और कड़ी कार्रवाई की जा सकती है।

    ईरान की ओर से भी तीखी प्रतिक्रिया सामने आई है। संसद अध्यक्ष मोहम्मद गालिबाफ ने कहा कि जब देश की सुरक्षा की बात आती है तो हर नागरिक सैनिक बन जाता है। उन्होंने साफ किया कि ईरान इस तरह के हमलों से डरने वाला नहीं है और पूरी मजबूती के साथ जवाब देगा।

    इस बीच, तेहरान ने अमेरिका के साथ किसी भी तरह की बातचीत से इनकार कर दिया है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा कि मौजूदा हालात में वार्ता संभव नहीं है। इससे यह साफ हो गया है कि कूटनीतिक स्तर पर भी हालात सामान्य होने के आसार फिलहाल नजर नहीं आ रहे हैं।

    स्थिति को और गंभीर बनाते हुए अन्य क्षेत्रों में भी तनाव बढ़ गया है। इजरायल ने दावा किया है कि उसने ईरान से दागी गई मिसाइलों को बीच में ही रोक दिया। वहीं यमन के हूती विद्रोहियों ने भी इजरायल की ओर मिसाइल दागी, जिससे संघर्ष का दायरा और फैलता नजर आ रहा है।

    अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी इस मुद्दे पर मतभेद देखने को मिले हैं। रूस चीन और फ्रांस ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में होर्मुज जलडमरूमध्य को खोलने के लिए बल प्रयोग की अनुमति देने के प्रस्ताव को रोक दिया है।इस पूरे घटनाक्रम ने वैश्विक चिंता को बढ़ा दिया है और विशेषज्ञों का मानना है कि अगर जल्द ही कूटनीतिक समाधान नहीं निकाला गया तो यह संघर्ष और व्यापक रूप ले सकता है।

  • चीन के नए परमाणु केंद्र पर बढ़ीं आशंकाएं, उपग्रह तस्वीरों में दिखीं नई इमारतें और मशीनें

    चीन के नए परमाणु केंद्र पर बढ़ीं आशंकाएं, उपग्रह तस्वीरों में दिखीं नई इमारतें और मशीनें

    बीजिंग। चीन ने अपने परमाणु कार्यक्रम को लेकर गतिविधियां तेज कर दी हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक भारत से करीब 1,400 किलोमीटर दूर सिचुआन प्रांत में बनाए जा रहे एक नए परमाणु केंद्र (new nuclear center) में कई नई इमारतों का निर्माण पूरा होने की जानकारी सामने आई है।

    ताजा उपग्रह तस्वीरों ने इस परियोजना को लेकर नई आशंकाएं पैदा कर दी हैं।

    बताया जा रहा है कि चीन ने कुछ गांवों को खाली कराकर इस विशाल परमाणु सुविधा का निर्माण किया है। उपग्रह चित्रों में रेडिएशन मॉनिटर, धमाका-रोधी दरवाजों और यूरेनियम व प्लूटोनियम से जुड़े उपकरणों की संभावित मौजूदगी के संकेत मिले हैं। साइट को ‘साइट-906’ नाम दिया गया है और यहां काम तेज गति से आगे बढ़ता दिख रहा है।

    रिपोर्ट के अनुसार बड़े ट्रालों में रखी मशीनें भी देखी गई हैं, जिन्हें यूरेनियम या प्लूटोनियम संवर्धन से जुड़ा माना जा रहा है। बताया गया है कि इस स्थल को तीन अन्य परमाणु ठिकानों से जोड़ा गया है, जिससे चीन की परमाणु क्षमताओं के विस्तार की अटकलें तेज हो गई हैं।

    सीएनएन की रिपोर्ट के मुताबिक 2022 में इस परियोजना के लिए स्थानीय ग्रामीणों की जमीन अधिग्रहित की गई थी। उस समय अधिकारियों ने इसे सरकार की गुप्त योजना बताया था। अब सामने आए उपग्रह चित्र संकेत देते हैं कि गांव खाली कराकर तेज गति से परमाणु ढांचे का विकास किया गया।
    भौगोलिक रूप से दुर्गम माने जाने वाले सिचुआन क्षेत्र में यह सुविधा विकसित की गई है। यहां यांग्जी नदी और उसकी सहायक नदियों—मिन नदी, तुओ नदी और जियालिंग नदी—के आसपास का इलाका शामिल है, जहां पहुंचना अपेक्षाकृत कठिन माना जाता है।

    उपग्रह तस्वीरों से यह भी संकेत मिला है कि गांवों की लगभग 600 इमारतें हटाकर नई संरचनाएं बनाई गई हैं और परियोजना का करीब 70 प्रतिशत काम पूरा हो चुका है। हाल के दिनों में कई उपकरण लगाए जाने से इस सुविधा के जल्द संचालन शुरू होने की संभावना जताई जा रही है।

  • US: ट्रंप ने पैम बॉन्डी से छीना अटॉर्नी जनरल का पद… क्या है पूरा मामला?

    US: ट्रंप ने पैम बॉन्डी से छीना अटॉर्नी जनरल का पद… क्या है पूरा मामला?


    वॉशिंगटन। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अटॉर्नी जनरल पैम बॉन्डी की सराहना करते हुए उन्हें एक महान देशभक्त और वफादार सहयोगी बताया। ट्रंप ने बताया कि पैम बॉन्डी निजी क्षेत्र में नई जिम्मेदारी संभालने जा रही हैं। ट्रंप ने कहा कि अटॉर्नी जनरल के रूप में पैम ने देशभर में अपराध पर कड़ा प्रहार किया। वहीं, डिप्टी अटॉर्नी जनरल टॉड ब्लैंच को कार्यवाहक अटॉर्नी जनरल नियुक्त किया गया है।
    टॉड ब्लैंच संभालेंगे कार्यवाहक अटॉर्नी जनरल का जिम्मा
    राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘ट्रुथ सोशल’ पर पोस्ट कर कहा, ‘पैम बॉन्डी एक महान अमेरिकी देशभक्त और एक वफादार दोस्त हैं, जिन्होंने पिछले एक साल से मेरे अटॉर्नी जनरल के तौर पर पूरी निष्ठा से सेवा की है। पैम ने पूरे देश में अपराधों पर नकेल कसने का जबरदस्त काम किया है, जिसके चलते हत्याओं की दर 1900 के बाद से अब तक के सबसे निचले स्तर पर पहुंच गई है।
    हम पैम से बहुत प्यार करते हैं, और वह अब निजी क्षेत्र में एक बेहद जरूरी और अहम नई जिम्मेदारी संभालने जा रही हैं, जिसकी घोषणा जल्द ही की जाएगी। वहीं, हमारे डिप्टी अटॉर्नी जनरल जो कि एक बेहद प्रतिभाशाली और सम्मानित कानूनी विशेषज्ञ हैं, टॉड ब्लैंच, अब कार्यवाहक अटॉर्नी जनरल के तौर पर कार्यभार संभालेंगे।’
    विवादों भरा पैम बॉन्डी का कार्यकाल
    पैम बॉन्डी के कार्यकाल में बड़ी संख्या में सरकारी कर्मचारियों को नौकरी से निकाला गया और कई अनुभवी अधिकारियों ने खुद इस्तीफा दे दिया। इससे विभाग के अंदर अस्थिरता और तनाव का माहौल बन गया। सबसे बड़ा विवाद जेफरी एपस्टीन केस से जुड़ा रहा। जेफरी एपस्टीन के ट्रैफिकिंग मामले की फाइलों को लेकर बॉन्डी पर भारी दबाव था। उन्होंने पहले दावा किया था कि उनके पास एपस्टीन की क्लाइंट लिस्ट मौजूद है, लेकिन बाद में विभाग ने माना कि ऐसा कोई दस्तावेज है ही नहीं। इस मामले को लेकर उन्हें अपने ही समर्थकों की आलोचना झेलनी पड़ी।
    पैम बॉन्डी पर लगे कई आरोप
    बॉन्डी पर यह भी आरोप लगा कि उन्होंने ट्रंप के राजनीतिक विरोधियों के खिलाफ जांच शुरू कराई। इनमें जेरोम पॉवेल, लेटिशिया जेम्स, जेम्स कोमी और जॉन ब्रेनन जैसे नाम शामिल थे। हालांकि इन मामलों में से कई को अदालतों ने खारिज कर दिया, जिससे उनकी कार्यशैली पर सवाल और बढ़ गए। डेमोक्रेट नेताओं ने बॉन्डी पर आरोप लगाया कि उन्होंने न्याय विभाग को बदले का हथियार बना दिया। वहीं खुद बॉन्डी का कहना था कि वह विभाग की विश्वसनीयता बहाल करने के लिए काम कर रही थीं और पिछली सरकार में हुई कथित गलतियों को सुधार रही थीं।

    ट्रंप के साथ उनका रिश्ता बेहद करीबी माना जाता था। वह खुले तौर पर ट्रंप का समर्थन करती थीं और कई बार सार्वजनिक मंचों पर उनकी तारीफ भी करती थीं। लेकिन समय के साथ ट्रंप खुद भी उनके काम से नाखुश दिखे, खासकर तब जब वह उनके राजनीतिक विरोधियों पर कार्रवाई नहीं कर पाईं।

    बॉन्डी के हटने के साथ ही ट्रंप के शासन में न्याय विभाग में लगातार हो रहे बदलाव की एक और कड़ी जुड़ गई है। उनके दोनों कार्यकाल में कई अटॉर्नी जनरल या तो हटाए गए या इस्तीफा देने पर मजबूर हुए, जिससे यह साफ होता है कि इस पद पर स्थिरता बनाए रखना ट्रंप प्रशासन के लिए चुनौती बना हुआ है।

    राष्ट्रीय धोखाधड़ी प्रवर्तन के लिए सहायक अटॉर्नी जनरल का शपथ
    बता दें एक दिन पहले बुधवार को उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने कोलिन मैकडॉनल्ड को राष्ट्रीय धोखाधड़ी प्रवर्तन के लिए सहायक अटॉर्नी जनरल के तौर पर शपथ दिलाई।

    उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने राष्ट्रीय धोखाधड़ी प्रवर्तन के लिए सहायक अटॉर्नी जनरल के तौर पर शपथ लेने से पहले कोलिन मैकडॉनल्ड का परिचय कराते हुए कहा, ‘कोलिन जिन कामों को करेंगे, उनमें से एक यह पक्का करना है कि कोई भी धोखाधड़ी इतनी छोटी या इतनी बड़ी न हो कि उसे नजरअंदाज किया जा सके।’ राष्ट्रीय धोखाधड़ी प्रवर्तन के लिए सहायक अटॉर्नी जनरल की शपथ लेने के बाद कोलिन मैकडॉनल्ड ने कहा, ‘मैं दिन-रात बिना थके काम करूंगा, ताकि यह पक्का कर सकूं कि अगर कोई आपके टैक्स के पैसे चुराने की हिम्मत करता है तो उस गलत फैसले के बाद उसे एक संघीय अभियोजक का सामना करना पड़े।’