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  • बलूचिस्तान में पाकिस्तान सेना का ऑपरेशन जारी, 145 विद्रोही और 17 सैनिकों की मौत

    बलूचिस्तान में पाकिस्तान सेना का ऑपरेशन जारी, 145 विद्रोही और 17 सैनिकों की मौत


    नई दिल्ली। पाकिस्तान के बलूचिस्तान प्रांत में हालात बेहद गंभीर हैं। बीते दिनों विद्रोहियों और सुरक्षा बलों के बीच हुई झड़पों में 145 विद्रोही और 17 सैनिकों की मौत हो गई। घटनाओं की शुरुआत विद्रोहियों के हमलों से हुई, जिसमें कम से कम 31 लोग मारे गए। इसके जवाब में पाकिस्तानी सेना ने व्यापक सैन्य अभियान शुरू किया, जो अभी भी जारी है।

    सुरक्षा स्थिति और प्रतिबंध

    बलूचिस्तान के मुख्यमंत्री सरफराज बुगती ने बताया कि पिछले 40 घंटों में आतंकवाद विरोधी अभियानों में 145 आतंकवादी और 17 सुरक्षा कर्मियों की जान गई। सभी आतंकवादियों के शव अधिकारियों के कब्जे में हैं और पहचान की प्रक्रिया जारी है सुरक्षा कारणों से इंटरनेट और ट्रेन सेवाएं बंद कर दी गई हैं, साथ ही कई सड़क मार्ग भी बंद हैं। क्वेटा और आसपास के बाजारों में सन्नाटा पसरा है।

    आतंकवादी गतिविधियां और अभियान
    बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी के लड़ाकों ने जेलों, सेना के ठिकानों और सरकारी कार्यालयों को निशाना बनाया। डिप्टी डिस्ट्रिक्ट कमिश्नर को भी किडनैप किया गया। पाकिस्तान सेना ने बताया कि आतंकवादियों ने आम नागरिकों पर भी हमला किया, जिसमें महिलाओं, बच्चों और बुजुर्गों समेत 18 लोग मारे गए। अभियान में 15 सैनिकों की भी मौत हुई। सेना ने कहा कि क्वेटा, मस्तुंग, नुश्की, दलबंदीन, खरान, पंजगुर, तुम्प, ग्वादर और पसनी में आतंकवादियों की गतिविधियों को नाकाम किया गया। तीन आत्मघाती हमलावरों समेत 92 आतंकवादियों को मुठभेड़ में मार गिराया गया।

    मुख्यमंत्री और खुफिया जानकारी

    मुख्यमंत्री बुगती ने कहा कि खुफिया एजेंसियों ने पहले ही क्वेटा में बड़े हमले की चेतावनी दी थी। शनिवार रात आतंकवादियों ने पुलिस और सीमावर्ती जवानों समेत सुरक्षा बलों और नागरिकों पर 12 अलग-अलग स्थानों पर हमला किया। क्वेटा में दो आत्मघाती हमलावरों को भी मार गिराया गया।

    भारत ने आरोप खारिज किए
    पाकिस्तान ने हिंसा का ठीकरा भारत पर फोड़ने की कोशिश की, लेकिन भारत ने इसे पूरी तरह खारिज किया। विदेश मंत्रालय ने कहा कि यह केवल पाकिस्तान की रणनीति है, जो अपनी घरेलू विफलताओं और बलूचिस्तान में उत्पीड़न से ध्यान हटाने के लिए भारत का नाम ले रहा है।

  • पेंटागन में अमेरिका-इज़राइल की गुप्त बैठक, ईरान पर संभावित सैन्य कार्रवाई पर चर्चा

    पेंटागन में अमेरिका-इज़राइल की गुप्त बैठक, ईरान पर संभावित सैन्य कार्रवाई पर चर्चा

    Pentagon meeting,
    नई दिल्ली। मध्य पूर्व में तनाव बढ़ता जा रहा है, और अमेरिका-इज़राइल और ईरान के बीच संभावित युद्ध की आशंका गहराती दिख रही है। इसी बीच पेंटागन में अमेरिका और इज़राइल के उच्च सैन्य अधिकारियों के बीच एक गुप्त बैठक हुई। बैठक के केंद्र में ईरान और उसके खिलाफ संभावित सैन्य कदम रहे।

    बैठक में कौन शामिल था
    रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिकी जनरल डैन केन और इज़राइली चीफ ऑफ स्टाफ आयल ज़मीर ने बीते शुक्रवार को बंद कमरे में चर्चा की। जमीर के वॉशिंगटन से लौटते ही इज़राइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने शीर्ष सुरक्षा अधिकारियों के साथ आपात बैठकें कीं। इसमें इज़राइल के रक्षा मंत्री काट्ज़, मोसाद प्रमुख डेविड बार्निया और अन्य वरिष्ठ अधिकारी शामिल थे। अधिकारीयों ने संभावित सैन्य तैयारी और किसी भी आपात स्थिति का आकलन किया।

    संभावित कार्रवाई और क्षेत्रीय तनाव
    अमेरिकी अधिकारी ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई पर गंभीरता से विचार कर रहे हैं। इससे पहले सऊदी अरब और यूएई जैसे मुस्लिम देश राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को हमला न करने के लिए मना चुके थे। हालांकि, अब हमले की संभावना फिर से बढ़ रही है।

    ईरान की चेतावनी
    ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई ने रविवार को चेतावनी दी कि अगर अमेरिका युद्ध छेड़ेगा, तो यह केवल दो देशों तक सीमित नहीं रहेगा बल्कि पूरे क्षेत्र में फैल जाएगा। उन्होंने कहा कि ईरान युद्ध शुरू नहीं करेगा और किसी पर हमला करने का इरादा नहीं रखता, लेकिन “ईरानी जनता उन पर करारा जवाब देगी, जो हमला या परेशान करने की कोशिश करेंगे।” इससे पहले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि विमानवाहक पोत अब्राहम लिंकन के नेतृत्व में नौसैनिक बेड़ा ईरान की ओर बढ़ रहा है। उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि ईरान के पास अमेरिका के साथ समझौते के लिए समय तेजी से समाप्त हो रहा है।

  • बलूच विद्रोहियों के हमलों से हिला पाकिस्तान, अमेरिका और चीन के लिए क्यों है यह बड़ा संकेत

    बलूच विद्रोहियों के हमलों से हिला पाकिस्तान, अमेरिका और चीन के लिए क्यों है यह बड़ा संकेत

    इस्लामाबाद। पाकिस्तान के बलूचिस्तान प्रांत में बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी (BLA) ने शनिवार को एक साथ कई इलाकों में बड़े पैमाने पर हिंसक हमले किए। ‘हेरोफ-2’ नाम दिए गए इस अभियान के तहत क्वेटा, ग्वादर, मस्तुंग, नोशकी, कलात, खारान और पंजगुर जैसे जिलों में आत्मघाती हमले, गोलीबारी और बम धमा
    के किए गए। इन हमलों में पुलिस थाने, जेल, सरकारी इमारतें, सुरक्षा ठिकाने और आम नागरिक क्षेत्र निशाने पर रहे।
    मस्तुंग में जेल पर हुए हमले के बाद करीब 30 कैदियों के फरार होने की खबर है। वहीं ग्वादर में प्रवासी मजदूरों के कैंप पर किए गए हमले में 11 लोगों की मौत हो गई, जिनमें महिलाएं और बच्चे भी शामिल बताए जा रहे हैं। बीएलए ने दावा किया है कि इस अभियान में उसके लड़ाकों ने 84 पाकिस्तानी सुरक्षा कर्मियों को मार गिराया और 18 को जिंदा पकड़ लिया, जबकि संगठन के सात लड़ाके मारे गए।

    पाकिस्तानी अधिकारियों का कहना है कि इन हमलों में कुल मिलाकर करीब 200 लोगों की जान गई, जिनमें 31 नागरिक और 17 सुरक्षाकर्मी शामिल हैं। सेना ने जवाबी कार्रवाई का हवाला देते हुए दावा किया है कि 145 बीएलए लड़ाकों को ढेर कर दिया गया। बलूचिस्तान के मुख्यमंत्री सरफराज बुग्टी ने बीबीसी से बातचीत में स्वीकार किया कि मृतकों में आम नागरिकों के साथ-साथ सुरक्षा बलों के जवान भी शामिल हैं।

    पाकिस्तानी सेना ने इन हमलों के पीछे भारत का हाथ होने का आरोप लगाया है, हालांकि भारत ने इन दावों को खारिज करते हुए कहा है कि पाकिस्तान अपनी आंतरिक विफलताओं से ध्यान भटकाने की कोशिश कर रहा है। यह ताजा हिंसा बलूचिस्तान में दशकों से चल रहे अलगाववादी संघर्ष की गंभीरता को उजागर करती है।

    बलूचिस्तान पाकिस्तान के लिए क्यों है अहम
    बलूचिस्तान क्षेत्रफल के लिहाज से पाकिस्तान का सबसे बड़ा प्रांत है और रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। यह ईरान और अफगानिस्तान से सटा हुआ है और अरब सागर तक सीधी पहुंच देता है। यहां प्राकृतिक गैस, कोयला, तांबा, सोना और अन्य दुर्लभ खनिजों के बड़े भंडार मौजूद हैं। सुई गैस फील्ड जैसे संसाधन पाकिस्तान की ऊर्जा जरूरतों की रीढ़ माने जाते हैं।

    इसके अलावा ग्वादर बंदरगाह चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारे (CPEC) का केंद्र है, जो चीन की बेल्ट एंड रोड पहल का अहम हिस्सा है। यह परियोजना चीन को मलक्का जलडमरूमध्य पर निर्भरता कम करने और ऊर्जा आपूर्ति का वैकल्पिक मार्ग उपलब्ध कराती है।

    अमेरिका और चीन के लिए क्यों है यह चेतावनी
    बलूचिस्तान में बढ़ती हिंसा अमेरिका और चीन दोनों के लिए चिंता का विषय बनती जा रही है। अमेरिका ने हाल ही में रेको डिक खदान में अहम खनिजों के लिए 1.25 अरब डॉलर के निवेश की घोषणा की है, साथ ही दुर्लभ पृथ्वी तत्वों को लेकर 500 मिलियन डॉलर का समझौता भी किया गया है। दूसरी ओर चीन के लिए सीपीईसी और ग्वादर पोर्ट उसकी क्षेत्रीय रणनीति का आधार हैं।

    बीएलए लंबे समय से आरोप लगाता रहा है कि बाहरी शक्तियां बलूचिस्तान के संसाधनों का दोहन कर रही हैं, जबकि स्थानीय आबादी को इसका कोई ठोस लाभ नहीं मिल रहा। हालिया हमले न सिर्फ पाकिस्तान की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठाते हैं, बल्कि विदेशी निवेशकों के लिए भी यह साफ संदेश देते हैं कि इस क्षेत्र में स्थिरता अभी दूर है।

  • बलूचिस्तान में हिंसा की आग, एक ही दिन में हालात बेकाबू, पाकिस्तानी सेना को झोंकनी पड़ी पूरी ताकत

    बलूचिस्तान में हिंसा की आग, एक ही दिन में हालात बेकाबू, पाकिस्तानी सेना को झोंकनी पड़ी पूरी ताकत

    इस्लामाबाद। पाकिस्तान का बलूचिस्तान प्रांत इस वक्त अभूतपूर्व हिंसा की चपेट में है। बीते कई वर्षों में पहली बार यहां इतनी व्यापक और खूनखराबे वाली घटनाएं सामने आई हैं। विद्रोहियों के ताबड़तोड़ हमलों में कम से कम 31 लोगों की मौत के बाद हालात और बिगड़ गए। इसके जवाब में पाकिस्तानी सुरक्षाबलों ने बड़े पैमाने पर अभियान चलाया, जिसमें बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी (BLA) के 145 लड़ाकों के मारे जाने का दावा किया गया है। यह अभियान रविवार से शुरू हुआ और अब भी जारी है। हालात को काबू में रखने के लिए पूरे प्रांत में सख्त प्रतिबंध लगाए गए हैं, इंटरनेट और कई जरूरी सेवाएं अस्थायी रूप से बंद कर दी गई हैं।

    40 घंटों में 17 सुरक्षाकर्मियों की मौत

    बलूचिस्तान के मुख्यमंत्री सरफराज बुगती ने रविवार को बताया कि पिछले करीब 40 घंटों में आतंकवाद विरोधी अभियानों के दौरान 145 विद्रोही और 17 सुरक्षाकर्मी मारे गए हैं। क्वेटा में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में उन्होंने कहा कि मारे गए सभी विद्रोहियों के शव सुरक्षा एजेंसियों के कब्जे में हैं और उनकी पहचान की प्रक्रिया जारी है। बुगती ने इसे हाल के वर्षों में सबसे बड़ा अभियान बताया।

    जेल, सरकारी दफ्तर और सैन्य ठिकाने बने निशाना

    बीएलए के लड़ाकों ने अलग-अलग इलाकों में जेलों, सैन्य ठिकानों और सरकारी कार्यालयों पर हमले किए। हालात उस वक्त और बिगड़ गए जब एक डिप्टी डिस्ट्रिक्ट कमिश्नर के अपहरण की खबर सामने आई। सुरक्षा कारणों से बलूचिस्तान में 24 घंटे के लिए इंटरनेट सेवाएं ठप कर दी गईं, रेल यातायात रोका गया और कई इलाकों में सड़क मार्ग भी बंद कर दिए गए। रविवार को अधिकांश बाजार बंद रहे और सड़कों पर सन्नाटा पसरा रहा।

    घर से निकलना भी बना जोखिम

    बलूचिस्तान में हालात इतने खराब हो गए हैं कि लोगों के लिए घर से बाहर निकलना जान जोखिम में डालने जैसा हो गया है। क्वेटा के दुकानदार हमदुल्लाह ने बताया कि रोजमर्रा की जरूरतों के लिए भी बाहर निकलते समय डर लगता है कि लौटकर घर पहुंचेंगे या नहीं। वहीं सेना का कहना है कि वह पूरे इलाके में व्यापक सफाई अभियान चला रही है और आतंकियों के खिलाफ निर्णायक कार्रवाई जारी है।

    कई जिलों में एक साथ हमले

    सेना के अनुसार आतंकियों ने क्वेटा, मस्तुंग, नुश्की, दलबंदीन, खरान, पंजगुर, तुम्प, ग्वादर और पसनी के आसपास हिंसक गतिविधियों के जरिए हालात बिगाड़ने की कोशिश की। बयान में कहा गया कि सतर्क सुरक्षा बलों और कानून प्रवर्तन एजेंसियों ने तुरंत कार्रवाई करते हुए इन प्रयासों को नाकाम किया।

    सेना का दावा है कि लंबे और भीषण अभियानों के दौरान तीन आत्मघाती हमलावरों समेत 92 आतंकवादियों को मार गिराया गया।

    आम नागरिक भी बने निशाना

    सेना ने बताया कि हमलों में आम नागरिकों को भी निशाना बनाया गया, जिसमें महिलाओं, बच्चों, बुजुर्गों और मजदूरों सहित 18 लोगों की मौत हुई। वहीं अलग-अलग मुठभेड़ों में 15 सैनिकों ने भी जान गंवाई। मुख्यमंत्री बुगती ने कहा कि पसनी और क्वेटा में आतंकियों ने दो महिला आत्मघाती हमलावरों का इस्तेमाल किया था। उन्होंने यह भी बताया कि खुफिया एजेंसियों ने पहले ही क्वेटा में बड़े हमले की चेतावनी दी थी और शनिवार रात 12 अलग-अलग स्थानों पर हमले किए गए।

    भारत पर आरोप, नई दिल्ली का सख्त जवाब

    बलूचिस्तान में बढ़ती अशांति के बीच पाकिस्तान ने एक बार फिर भारत पर आरोप लगाए हैं। हालांकि भारत ने इन आरोपों को पूरी तरह खारिज करते हुए कहा है कि पाकिस्तान अपनी आंतरिक समस्याओं और नाकामियों से ध्यान हटाने के लिए इस तरह के बयान देता है। भारतीय विदेश मंत्रालय ने स्पष्ट कहा कि पाकिस्तान को बलूचिस्तान के लोगों की जायज मांगों पर ध्यान देना चाहिए और वहां हो रहे अत्याचारों को रोकना चाहिए, न कि बाहरी देशों को दोषी ठहराना चाहिए।

  • तुर्किए ने तोड़ा पाकिस्तान का इस्लामिक नाटो सपना, द्विपक्षीय सहयोग तक सीमित रह गया रक्षा समझौता

    तुर्किए ने तोड़ा पाकिस्तान का इस्लामिक नाटो सपना, द्विपक्षीय सहयोग तक सीमित रह गया रक्षा समझौता

    इस्लामाबाद। पाकिस्तान के करीबी साथी तुर्किए ने इस्लामाबाद की महत्वाकांक्षा,मध्य-पूर्व में इस्लामिक नाटो बनाने की योजना, को झटका दे दिया है। अंकारा ने स्पष्ट किया है कि वह सऊदी अरब और पाकिस्तान के साथ किसी बहुपक्षीय रक्षा गठबंधन में शामिल नहीं होगा। पाकिस्तान ने हाल ही में सऊदी अरब के साथ रक्षा समझौता किया था, और उस समय यह उम्मीद जताई जा रही थी कि इसमें जल्द ही तुर्किए और अजरबैजान जैसे देश भी शामिल हो सकते हैं। लेकिन तुर्किए ने साफ कर दिया कि फिलहाल सभी चर्चाएँ केवल रणनीतिक और द्विपक्षीय सहयोग तक ही सीमित हैं।

    एएफपी की रिपोर्ट के अनुसार, तुर्किए के रक्षा अधिकारी स्पष्ट हैं कि राष्ट्रपति एर्दोगान की सरकार न तो बहुपक्षीय समझौते में शामिल है और न ही इस पर विचार कर रही है। उनका कहना है कि वर्तमान में पाकिस्तान और सऊदी अरब के साथ संबंध केवल रणनीतिक उद्देश्यों तक ही सीमित हैं। सऊदी अरब भी किसी बहुपक्षीय रक्षा ढांचे के पक्ष में नहीं है और केवल द्विपक्षीय समझौतों को ही प्राथमिकता देती है।

    पाकिस्तानी सेना की चुनौतियां
    तुर्किए के सुरक्षा सूत्रों ने पाकिस्तान की सेना की सीमित संसाधन क्षमता पर चिंता व्यक्त की है।

    पाकिस्तान पहले से ही तीन सीमाओं, भारत, अफगानिस्तान और ईरान—पर सक्रिय है और आंतरिक स्तर पर भी कई चुनौतियों का सामना कर रहा है। तुर्किए के अधिकारियों के अनुसार, हाल ही में सऊदी अरब के साथ समझौता पाकिस्तानी सेना को और भी अधिक बंटवारा कर रहा है, जिससे बहुपक्षीय रक्षा जिम्मेदारियों को निभाना कठिन हो जाएगा।

    तकनीकी निर्भरता और आर्थिक सीमाएं
    पाकिस्तान की अधिकांश सैन्य तकनीक चीन पर निर्भर है, विशेष रूप से एयर डिफेंस और एयरफोर्स क्षेत्र में। तुर्किए के अनुसार, पाकिस्तान की एकमात्र प्रमुख रणनीतिक ताकत उसकी परमाणु क्षमता है। इसके अलावा आर्थिक दबाव और सीमित वित्तीय संसाधन भी बहुपक्षीय गठबंधन की संभावना को चुनौती देते हैं।

    तुर्किए ने जोर दिया कि पाकिस्तान के साथ द्विपक्षीय रक्षा सहयोग मजबूत है। अंकारा पहले से ही पाकिस्तान को सैन्य उपकरण, ड्रोन तकनीक और वायु रक्षा प्रणाली उपलब्ध करा रहा है। दोनों देश साझा रणनीतिक उद्देश्यों के लिए प्रशिक्षण, संयुक्त अभ्यास और क्षमता निर्माण पर काम कर रहे हैं, लेकिन कोई बहुपक्षीय समझौता नहीं हुआ।

    इस्लामिक नाटो का सपना अधर में
    पाकिस्तान के पीएम और सेना प्रमुख मुनीर ने मध्य-पूर्व में इस्लामिक नाटो बनाने का प्रयास किया था, जिसमें सऊदी अरब के साथ हालिया रक्षा समझौते ने संभावनाओं को बढ़ाया। 30 जनवरी को तुर्किए के चीफ ऑफ जनरल स्टाफ सेल्चुक बायरक्तारओग्लू की पाकिस्तान यात्रा के दौरान यह प्रचार हुआ कि जल्द ही बहुपक्षीय समझौते की घोषणा होगी। लेकिन यात्रा के बाद केवल द्विपक्षीय रणनीतिक सहयोग पर सहमति बनी, कोई बहुपक्षीय रक्षा गठबंधन नहीं बनाया गया।

  • भारत अब वेनेजुएला से तेल खरीदेगा? डोनाल्ड ट्रंप बोले- ‘डील हो गई’

    भारत अब वेनेजुएला से तेल खरीदेगा? डोनाल्ड ट्रंप बोले- ‘डील हो गई’

    अमेरिका ने हाल ही में भारत को वेनेजुएला से तेल खरीदने का प्रस्ताव दिया। हालांकि भारत की ओर से अभी तक इस प्रस्ताव पर आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। अमेरिका चाहता है कि भारत रूस और ईरान से तेल आयात कम करे। दिलचस्प है कि जिस वेनेजुएला से ट्रंप अब तेल खरीदने की बात कर रहे हैं, उस पर पहले वे अमेरिका की ओर से विरोध जताते थे। ट्रंप ने कहा कि वेनेजुएला से तेल खरीदने के लिए चीन का स्वागत भी है।

    भारत-अमेरिका व्यापार बातचीत
    भारत और अमेरिका के बीच प्रस्तावित व्यापार समझौते की बातचीत सकारात्मक दिशा में आगे बढ़ रही है।

    केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने शनिवार को बताया कि बातचीत अच्छे ढंग से चल रही है और निकट भविष्य में इस मोर्चे पर अच्छी खबर की उम्मीद है।

    गोयल ने कहा, “हर मुक्त व्यापार समझौता (एफटीए) अपनी शर्तों और खूबियों पर आधारित होता है। हमारी बातचीत शानदार कामकाजी संबंध और व्यक्तिगत मित्रता पर टिकी है। हम इसे जल्द पूरा करने की दिशा में काम कर रहे हैं।”

    जब उनसे पूछा गया कि ‘मदर ऑफ ऑल डील्स’ (भारत-ईयू समझौता) के बाद भारत-अमेरिका ‘फादर ऑफ ऑल डील्स’ कब तक बनेगा, तो उन्होंने कहा कि व्यापार समझौते के लिए कोई निश्चित समय सीमा नहीं होती। इसे दोनों देशों के हितों के अनुसार सही समय पर अंतिम रूप दिया जाएगा।

    विदेश मंत्री जयशंकर की तैयारियां

    विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने बृहस्पतिवार को अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर के साथ व्यापार, महत्वपूर्ण खनिज और रक्षा संबंधों सहित द्विपक्षीय सहयोग के प्रमुख मुद्दों पर चर्चा की। उम्मीद है कि वह अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो के साथ भी बैठक करेंगे।

    पीयूष गोयल ने यह भी कहा कि रूस से तेल खरीद को लेकर भारत और अमेरिका के बीच कोई असहमति नहीं है। “कुछ गलतफहमियां हो सकती थीं, लेकिन उन्हें काफी हद तक सुलझा लिया गया है,” उन्होंने स्पष्ट किया।

  • पाकिस्तानी PM शहबाज बोले- मित्र देशों से कर्जा मांगने के दौरान करना पड़ा अपमानजनक स्थिति का सामना

    पाकिस्तानी PM शहबाज बोले- मित्र देशों से कर्जा मांगने के दौरान करना पड़ा अपमानजनक स्थिति का सामना


    इस्लामाबाद।
    पाकिस्तान (Pakistan) के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ (Prime Minister Shahbaz Sharif) ने कहा कि मित्र देशों से कर्ज मांगने के दौरान अपमानजनक स्थिति का सामना करना पड़ा है। उन्होंने कहा कि ऋण लेने की मजबूरी में पाकिस्तान को अपना सिर झुकाना पड़ा है। साथ ही आत्मसम्मान की कीमत पर समझौता करना पड़ा। इस्लामाबाद (Islamabad.) में शुक्रवार को देश के प्रख्यात व्यापारियों और निर्यातकों के सम्मान में आयोजित एक समारोह को संबोधित करते हुए शरीफ ने उस कठिन दौर को याद किया, जब पाकिस्तान को दिवालियापन के डर का सामना करना पड़ा था और कुछ लोग पाकिस्तान को तकनीकी रूप से विफल होने के कगार पर बता रहे थे।

    उन्होंने कहा कि जब हमने पदभार संभाला, तब आर्थिक स्थिति बेहद नाजुक थी और आम आदमी को गंभीर कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा था। प्रधानमंत्री ने 2023 में पेरिस में अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष के प्रबंध निदेशक के साथ अपनी मुलाकात का जिक्र किया, जिसके बाद वैश्विक ऋणदाता ने एक आर्थिक कार्यक्रम को मंजूरी दी। इसके बाद देश की अर्थव्यवस्था को स्थिर करने में मदद मिली। शरीफ ने कहा कि मित्र देशों ने मुश्किल समय में पाकिस्तान का पूरा समर्थन किया है और उन्होंने सेना प्रमुख एवं रक्षा बलों के प्रमुख फील्ड मार्शल असीम मुनीर के साथ मिलकर कई देशों के नेताओं से अरबों डॉलर के ऋण मांगने के लिए मुलाकात की।


    ऋण लेने के लिए इन देशों पर निर्भर

    पाकिस्तान अपने विदेशी मुद्रा भंडार और ऋण के प्रबंधन के लिए चीन, सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) और कतर सहित कई देशों से मिलने वाली वित्तीय सहायता पर अत्यधिक निर्भर है। ये देश अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष के साथ मिलकर नकदी संकट से जूझ रहे पाकिस्तान को नियमित ऋण और पुनर्भुगतान प्रदान करते हैं। इस कार्यक्रम के दौरान प्रधानमंत्री ने उद्योगों के लिए राहत उपायों की घोषणा की।


    मित्र देशों से काफी अनुरोध किया

    पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने कहा कि मैं कैसे बताऊं कि हमने मित्र देशों से ऋण के लिए किस तरह अनुरोध किया? मित्र देशों ने हमें निराश नहीं किया, लेकिन जो ऋण मांगने जाता है, उसका सिर झुका रहता है। ऋण से दायित्व भी उत्पन्न होते हैं, जिन्हें पूरा करना होता है। उन्होंने कहा कि जब आप ऋण लेने जाते हैं तो आपको अपने आत्मसम्मान की कीमत चुकानी पड़ती है। आपको समझौता करना पड़ता है। कभी-कभी, अनुचित मांगें सामने आ सकती हैं और आपको उन्हें पूरा करना पड़ सकता है, भले ही उन्हें पूरा करने का कोई कारण न हो।

  • 48 घंटे… 14 शहर… 48 जगह धमाके… पाकिस्तान के बलूचिस्तान प्रांत में भारी हिंसा, 80 लोगों की मौत

    48 घंटे… 14 शहर… 48 जगह धमाके… पाकिस्तान के बलूचिस्तान प्रांत में भारी हिंसा, 80 लोगों की मौत


    इस्लामाबाद।
    पाकिस्तान (Pakistan) के बलूचिस्तान प्रांत (Balochistan Province) में बीते 48 घंटों में भारी हिंसा और सैन्य संघर्ष की खबरें सामने आई हैं। प्रतिबंधित (Banned) बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी (Balochistan Liberation Army- BLA) द्वारा शुरू किए गए ‘ऑपरेशन हेरोफ’ (Operation Herof) के दूसरे चरण के तहत राज्य के 12 से अधिक शहरों में हमले किए गए, जिसके जवाब में पाकिस्तानी सेना ने व्यापक जवाबी कार्रवाई की है। शुक्रवार रात से शुरू हुई हिंसा ने बलूचिस्तान के क्वेटा, ग्वादर, मकरान, हब, चमन और नुश्की जैसे प्रमुख शहरों को अपनी चपेट में ले लिया है। BLA के उग्रवादियों ने पुलिस चौकियों, अर्धसैनिक बल के ठिकानों और बुनियादी ढांचों को निशाना बनाया।

    पाकिस्तानी अधिकारियों और सुरक्षा सूत्रों के अनुसार, पिछले दो दिनों में हुए संघर्ष में अब तक का सबसे बड़ा नुकसान दर्ज किया गया है। बलूचिस्तान के मुख्यमंत्री सरफराज बुगती ने पुष्टि की है कि सुरक्षा बलों ने जवाबी कार्रवाई में अब तक 70 उग्रवादियों को मार गिराया है। मंत्री मोहसिन नकवी ने पुष्टि की कि इस संघर्ष में 10 पुलिस और फ्रंटियर कोर (FC) के जवान शहीद हुए हैं। ग्वादर के पास उग्रवादियों ने एक ही परिवार के 5 सदस्यों की हत्या कर दी।

    BLA ने इस हमले की जिम्मेदारी लेते हुए दावा किया है कि उन्होंने 14 शहरों में 48 अलग-अलग स्थानों पर हमले किए हैं। प्रवक्ता जयंद बलोच ने दावा किया कि उन्होंने नुश्की में काउंटर टेररिज्म डिपार्टमेंट (CTD) के मुख्यालय पर कब्जा कर लिया है और 84 पाकिस्तानी सैनिकों को मार गिराया है। हालांकि, पाकिस्तानी सेना ने इन दावों को दुष्प्रचार बताकर खारिज कर दिया है। इस बार BLA ने ‘मजीद ब्रिगेड’ के आत्मघाती हमलावरों और महिला लड़ाकों का भी इस्तेमाल किया है।


    रेल और सड़क संपर्क ठप

    उग्रवादियों ने राज्य की जीवन रेखा मानी जाने वाली सड़कों और रेलवे को भारी नुकसान पहुंचाया है। नसीराबाद जिले में रेलवे ट्रैक पर लगाए गए विस्फोटकों को डिफ्यूज किया गया, जिससे एक बड़ा हादसा टल गया। फिलहाल प्रांत में ट्रेन सेवाएं निलंबित हैं। कई स्थानों पर उग्रवादियों ने राजमार्गों को जाम कर दिया और वाहनों की तलाशी लेकर गैर-बलूच लोगों को निशाना बनाने की कोशिश की।


    बलूचिस्तान में बढ़ती हिंसा के पीछे का कारण

    एक स्वतंत्र थिंक टैंक (CRSS) की रिपोर्ट के अनुसार, 2025 में पाकिस्तान में आतंकी हमलों में 34% की वृद्धि हुई है। बलूचिस्तान में यह गुस्सा मुख्य रूप से चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारे (CPEC) और संसाधनों के दोहन के खिलाफ है।

  • ईरान में दो अलग-अलग धमाकों से पांच की मौत, 14 घायल

    ईरान में दो अलग-अलग धमाकों से पांच की मौत, 14 घायल


    तेहरान।
    ईरान (Iran) में शनिवार को दो अलग-अलग स्थानों पर हुए धमाकों (Strong Explosion) में कम से कम पांच लोगों (Five People) की मौत हो गई, जबकि 14 अन्य घायल हो गए। दोनों घटनाओं के कारणों का फिलहाल पता नहीं चल पाया है और जांच जारी है।

    ईरानी समाचार चैनल तेहरान टाइम्स के अनुसार, दक्षिण-पश्चिमी शहर अहवाज (Southwestern City Ahvaz) में एक आवासीय इमारत में जोरदार विस्फोट (Strong Explosion) हुआ। शहर के फायर डिपार्टमेंट प्रमुख के हवाले से बताया गया कि इस हादसे में मौके पर ही चार लोगों की मौत हो गई। विस्फोट से इमारत को गंभीर नुकसान पहुंचा और आसपास के इलाके में अफरा-तफरी मच गई।

    दूसरी घटना ईरान के दक्षिणी बंदरगाह शहर बंदर अब्बास में सामने आई। स्थानीय अधिकारियों के मुताबिक, यहां हुए एक विस्फोट में एक व्यक्ति की मौत हो गई, जबकि 14 लोग घायल हो गए। धमाके की तीव्रता इतनी ज्यादा थी कि एक इमारत की दो मंजिलें पूरी तरह ध्वस्त हो गईं, कई वाहन क्षतिग्रस्त हो गए और आसपास की दुकानों को भी भारी नुकसान पहुंचा।

    इन घटनाओं के बाद क्षेत्र में सुरक्षा कड़ी कर दी गई है। इस बीच, इजराइल ने इन धमाकों से किसी भी तरह की संलिप्तता से इनकार किया है। इजराइल के दो अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि ईरान में हुए विस्फोटों से उनका देश किसी भी प्रकार से जुड़ा नहीं है।

    सोशल मीडिया पर इन धमाकों को लेकर कई तरह के दावे किए जा रहे हैं, जिनमें इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर (आईआरजीसी) के नौसेना कमांडर को निशाना बनाए जाने की बात भी शामिल है। हालांकि, अर्ध-सरकारी समाचार एजेंसी तसनीम ने इन दावों को पूरी तरह झूठा बताते हुए खारिज कर दिया है।

    ईरान की सरकारी समाचार एजेंसी आईआरएनए के अनुसार, होर्मोजगान प्रांत के क्राइसिस मैनेजमेंट के महानिदेशक मेहरदाद हसनजादेह ने कहा कि दोनों विस्फोटों के वास्तविक कारणों का पता लगाने के लिए जांच की जा रही है। उन्होंने बताया कि घायलों को आपातकालीन सेवाओं की मदद से अस्पतालों में भर्ती कराया गया है।

  • क्यूबा पर ट्रंप का कड़ा वार, तेल सप्लाई करने वालों पर अमेरिकी ने की टैरिफ की तैयारी

    क्यूबा पर ट्रंप का कड़ा वार, तेल सप्लाई करने वालों पर अमेरिकी ने की टैरिफ की तैयारी


    नई दिल्ली । अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने वेनेजुएला के बाद अब क्यूबा को निशाने पर लेते हुए सख्त रुख अपनाया है। गुरुवार को उन्होंने एक ऐसे आदेश पर हस्ताक्षर किए हैं, जिसके तहत क्यूबा को तेल देने वाले देशों से अमेरिका आने वाले उत्पादों पर भारी टैरिफ लगाया जा सकता है। इस फैसले को क्यूबा पर आर्थिक दबाव बढ़ाने की नई रणनीति के तौर पर देखा जा रहा है। जानकारों का मानना है कि इससे पहले से जूझ रहे क्यूबा के ऊर्जा संकट की स्थिति और गंभीर हो सकती है।
    क्या है ट्रंप की मंशा?
    सूत्रों के मुताबिक ट्रंप प्रशासन का यह कदम सीधे तौर पर मेक्सिको को चेतावनी देने जैसा है। क्यूबा को लंबे समय से तेल सप्लाई करने वाला मेक्सिको अब अमेरिका की सख्त निगरानी में है। माना जा रहा है कि यह आदेश उन देशों पर दबाव बनाने के लिए है, जो क्यूबा के साथ ऊर्जा व्यापार जारी रखे हुए हैं।

    मेक्सिको-क्यूबा संबंधों पर असर की आशंका

    ट्रंप के फैसले के बाद अटकलें तेज हैं कि अमेरिकी दबाव के चलते मेक्सिको क्यूबा को तेल आपूर्ति में कटौती कर सकता है। यदि ऐसा होता है, तो दोनों देशों के बीच राजनीतिक और आर्थिक रिश्तों में तनाव बढ़ने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।

    क्यूबा में और गहराएगा संकट?

    अमेरिका के प्रतिबंधों के चलते क्यूबा पहले ही गंभीर आर्थिक और ऊर्जा संकट से गुजर रहा है और उसे विदेशी सहयोग पर निर्भर रहना पड़ रहा है। अब तक वह मेक्सिको, वेनेजुएला और रूस जैसे देशों से तेल मंगाता रहा है। इससे पहले ट्रंप यह भी साफ कर चुके हैं कि वेनेजुएला का तेल अब क्यूबा नहीं पहुंचेगा। ऐसे में नए अमेरिकी आदेश ने क्यूबा की सरकार के सामने चुनौतियां और बढ़ा दी हैं।

    मेक्सिको से क्यूबा को कितनी तेल सप्लाई होती है?

    मेक्सिको की सरकारी तेल कंपनी पेमेक्स  के मुताबिक, जनवरी से सितंबर 2025 के बीच क्यूबा को रोजाना करीब 20 हजार बैरल तेल की आपूर्ति की गई। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर यह सप्लाई प्रभावित होती है, तो क्यूबा को बड़े आर्थिक और ऊर्जा संकट का सामना करना पड़ सकता है।