सुरक्षा स्थिति और प्रतिबंध
आतंकवादी गतिविधियां और अभियान
मुख्यमंत्री और खुफिया जानकारी
भारत ने आरोप खारिज किए

सुरक्षा स्थिति और प्रतिबंध
मुख्यमंत्री और खुफिया जानकारी


पाकिस्तानी अधिकारियों का कहना है कि इन हमलों में कुल मिलाकर करीब 200 लोगों की जान गई, जिनमें 31 नागरिक और 17 सुरक्षाकर्मी शामिल हैं। सेना ने जवाबी कार्रवाई का हवाला देते हुए दावा किया है कि 145 बीएलए लड़ाकों को ढेर कर दिया गया। बलूचिस्तान के मुख्यमंत्री सरफराज बुग्टी ने बीबीसी से बातचीत में स्वीकार किया कि मृतकों में आम नागरिकों के साथ-साथ सुरक्षा बलों के जवान भी शामिल हैं।
पाकिस्तानी सेना ने इन हमलों के पीछे भारत का हाथ होने का आरोप लगाया है, हालांकि भारत ने इन दावों को खारिज करते हुए कहा है कि पाकिस्तान अपनी आंतरिक विफलताओं से ध्यान भटकाने की कोशिश कर रहा है। यह ताजा हिंसा बलूचिस्तान में दशकों से चल रहे अलगाववादी संघर्ष की गंभीरता को उजागर करती है।
बलूचिस्तान पाकिस्तान के लिए क्यों है अहम
बलूचिस्तान क्षेत्रफल के लिहाज से पाकिस्तान का सबसे बड़ा प्रांत है और रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। यह ईरान और अफगानिस्तान से सटा हुआ है और अरब सागर तक सीधी पहुंच देता है। यहां प्राकृतिक गैस, कोयला, तांबा, सोना और अन्य दुर्लभ खनिजों के बड़े भंडार मौजूद हैं। सुई गैस फील्ड जैसे संसाधन पाकिस्तान की ऊर्जा जरूरतों की रीढ़ माने जाते हैं।
इसके अलावा ग्वादर बंदरगाह चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारे (CPEC) का केंद्र है, जो चीन की बेल्ट एंड रोड पहल का अहम हिस्सा है। यह परियोजना चीन को मलक्का जलडमरूमध्य पर निर्भरता कम करने और ऊर्जा आपूर्ति का वैकल्पिक मार्ग उपलब्ध कराती है।
बीएलए लंबे समय से आरोप लगाता रहा है कि बाहरी शक्तियां बलूचिस्तान के संसाधनों का दोहन कर रही हैं, जबकि स्थानीय आबादी को इसका कोई ठोस लाभ नहीं मिल रहा। हालिया हमले न सिर्फ पाकिस्तान की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठाते हैं, बल्कि विदेशी निवेशकों के लिए भी यह साफ संदेश देते हैं कि इस क्षेत्र में स्थिरता अभी दूर है।

40 घंटों में 17 सुरक्षाकर्मियों की मौत
बलूचिस्तान के मुख्यमंत्री सरफराज बुगती ने रविवार को बताया कि पिछले करीब 40 घंटों में आतंकवाद विरोधी अभियानों के दौरान 145 विद्रोही और 17 सुरक्षाकर्मी मारे गए हैं। क्वेटा में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में उन्होंने कहा कि मारे गए सभी विद्रोहियों के शव सुरक्षा एजेंसियों के कब्जे में हैं और उनकी पहचान की प्रक्रिया जारी है। बुगती ने इसे हाल के वर्षों में सबसे बड़ा अभियान बताया।
जेल, सरकारी दफ्तर और सैन्य ठिकाने बने निशाना
बीएलए के लड़ाकों ने अलग-अलग इलाकों में जेलों, सैन्य ठिकानों और सरकारी कार्यालयों पर हमले किए। हालात उस वक्त और बिगड़ गए जब एक डिप्टी डिस्ट्रिक्ट कमिश्नर के अपहरण की खबर सामने आई। सुरक्षा कारणों से बलूचिस्तान में 24 घंटे के लिए इंटरनेट सेवाएं ठप कर दी गईं, रेल यातायात रोका गया और कई इलाकों में सड़क मार्ग भी बंद कर दिए गए। रविवार को अधिकांश बाजार बंद रहे और सड़कों पर सन्नाटा पसरा रहा।
बलूचिस्तान में हालात इतने खराब हो गए हैं कि लोगों के लिए घर से बाहर निकलना जान जोखिम में डालने जैसा हो गया है। क्वेटा के दुकानदार हमदुल्लाह ने बताया कि रोजमर्रा की जरूरतों के लिए भी बाहर निकलते समय डर लगता है कि लौटकर घर पहुंचेंगे या नहीं। वहीं सेना का कहना है कि वह पूरे इलाके में व्यापक सफाई अभियान चला रही है और आतंकियों के खिलाफ निर्णायक कार्रवाई जारी है।
कई जिलों में एक साथ हमले
सेना के अनुसार आतंकियों ने क्वेटा, मस्तुंग, नुश्की, दलबंदीन, खरान, पंजगुर, तुम्प, ग्वादर और पसनी के आसपास हिंसक गतिविधियों के जरिए हालात बिगाड़ने की कोशिश की। बयान में कहा गया कि सतर्क सुरक्षा बलों और कानून प्रवर्तन एजेंसियों ने तुरंत कार्रवाई करते हुए इन प्रयासों को नाकाम किया।
आम नागरिक भी बने निशाना
सेना ने बताया कि हमलों में आम नागरिकों को भी निशाना बनाया गया, जिसमें महिलाओं, बच्चों, बुजुर्गों और मजदूरों सहित 18 लोगों की मौत हुई। वहीं अलग-अलग मुठभेड़ों में 15 सैनिकों ने भी जान गंवाई। मुख्यमंत्री बुगती ने कहा कि पसनी और क्वेटा में आतंकियों ने दो महिला आत्मघाती हमलावरों का इस्तेमाल किया था। उन्होंने यह भी बताया कि खुफिया एजेंसियों ने पहले ही क्वेटा में बड़े हमले की चेतावनी दी थी और शनिवार रात 12 अलग-अलग स्थानों पर हमले किए गए।
भारत पर आरोप, नई दिल्ली का सख्त जवाब
बलूचिस्तान में बढ़ती अशांति के बीच पाकिस्तान ने एक बार फिर भारत पर आरोप लगाए हैं। हालांकि भारत ने इन आरोपों को पूरी तरह खारिज करते हुए कहा है कि पाकिस्तान अपनी आंतरिक समस्याओं और नाकामियों से ध्यान हटाने के लिए इस तरह के बयान देता है। भारतीय विदेश मंत्रालय ने स्पष्ट कहा कि पाकिस्तान को बलूचिस्तान के लोगों की जायज मांगों पर ध्यान देना चाहिए और वहां हो रहे अत्याचारों को रोकना चाहिए, न कि बाहरी देशों को दोषी ठहराना चाहिए।

एएफपी की रिपोर्ट के अनुसार, तुर्किए के रक्षा अधिकारी स्पष्ट हैं कि राष्ट्रपति एर्दोगान की सरकार न तो बहुपक्षीय समझौते में शामिल है और न ही इस पर विचार कर रही है। उनका कहना है कि वर्तमान में पाकिस्तान और सऊदी अरब के साथ संबंध केवल रणनीतिक उद्देश्यों तक ही सीमित हैं। सऊदी अरब भी किसी बहुपक्षीय रक्षा ढांचे के पक्ष में नहीं है और केवल द्विपक्षीय समझौतों को ही प्राथमिकता देती है।
पाकिस्तानी सेना की चुनौतियां
तुर्किए के सुरक्षा सूत्रों ने पाकिस्तान की सेना की सीमित संसाधन क्षमता पर चिंता व्यक्त की है।
तकनीकी निर्भरता और आर्थिक सीमाएं
पाकिस्तान की अधिकांश सैन्य तकनीक चीन पर निर्भर है, विशेष रूप से एयर डिफेंस और एयरफोर्स क्षेत्र में। तुर्किए के अनुसार, पाकिस्तान की एकमात्र प्रमुख रणनीतिक ताकत उसकी परमाणु क्षमता है। इसके अलावा आर्थिक दबाव और सीमित वित्तीय संसाधन भी बहुपक्षीय गठबंधन की संभावना को चुनौती देते हैं।
तुर्किए ने जोर दिया कि पाकिस्तान के साथ द्विपक्षीय रक्षा सहयोग मजबूत है। अंकारा पहले से ही पाकिस्तान को सैन्य उपकरण, ड्रोन तकनीक और वायु रक्षा प्रणाली उपलब्ध करा रहा है। दोनों देश साझा रणनीतिक उद्देश्यों के लिए प्रशिक्षण, संयुक्त अभ्यास और क्षमता निर्माण पर काम कर रहे हैं, लेकिन कोई बहुपक्षीय समझौता नहीं हुआ।
इस्लामिक नाटो का सपना अधर में
पाकिस्तान के पीएम और सेना प्रमुख मुनीर ने मध्य-पूर्व में इस्लामिक नाटो बनाने का प्रयास किया था, जिसमें सऊदी अरब के साथ हालिया रक्षा समझौते ने संभावनाओं को बढ़ाया। 30 जनवरी को तुर्किए के चीफ ऑफ जनरल स्टाफ सेल्चुक बायरक्तारओग्लू की पाकिस्तान यात्रा के दौरान यह प्रचार हुआ कि जल्द ही बहुपक्षीय समझौते की घोषणा होगी। लेकिन यात्रा के बाद केवल द्विपक्षीय रणनीतिक सहयोग पर सहमति बनी, कोई बहुपक्षीय रक्षा गठबंधन नहीं बनाया गया।

भारत-अमेरिका व्यापार बातचीत
भारत और अमेरिका के बीच प्रस्तावित व्यापार समझौते की बातचीत सकारात्मक दिशा में आगे बढ़ रही है।
गोयल ने कहा, “हर मुक्त व्यापार समझौता (एफटीए) अपनी शर्तों और खूबियों पर आधारित होता है। हमारी बातचीत शानदार कामकाजी संबंध और व्यक्तिगत मित्रता पर टिकी है। हम इसे जल्द पूरा करने की दिशा में काम कर रहे हैं।”
जब उनसे पूछा गया कि ‘मदर ऑफ ऑल डील्स’ (भारत-ईयू समझौता) के बाद भारत-अमेरिका ‘फादर ऑफ ऑल डील्स’ कब तक बनेगा, तो उन्होंने कहा कि व्यापार समझौते के लिए कोई निश्चित समय सीमा नहीं होती। इसे दोनों देशों के हितों के अनुसार सही समय पर अंतिम रूप दिया जाएगा।
विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने बृहस्पतिवार को अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर के साथ व्यापार, महत्वपूर्ण खनिज और रक्षा संबंधों सहित द्विपक्षीय सहयोग के प्रमुख मुद्दों पर चर्चा की। उम्मीद है कि वह अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो के साथ भी बैठक करेंगे।
पीयूष गोयल ने यह भी कहा कि रूस से तेल खरीद को लेकर भारत और अमेरिका के बीच कोई असहमति नहीं है। “कुछ गलतफहमियां हो सकती थीं, लेकिन उन्हें काफी हद तक सुलझा लिया गया है,” उन्होंने स्पष्ट किया।

उन्होंने कहा कि जब हमने पदभार संभाला, तब आर्थिक स्थिति बेहद नाजुक थी और आम आदमी को गंभीर कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा था। प्रधानमंत्री ने 2023 में पेरिस में अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष के प्रबंध निदेशक के साथ अपनी मुलाकात का जिक्र किया, जिसके बाद वैश्विक ऋणदाता ने एक आर्थिक कार्यक्रम को मंजूरी दी। इसके बाद देश की अर्थव्यवस्था को स्थिर करने में मदद मिली। शरीफ ने कहा कि मित्र देशों ने मुश्किल समय में पाकिस्तान का पूरा समर्थन किया है और उन्होंने सेना प्रमुख एवं रक्षा बलों के प्रमुख फील्ड मार्शल असीम मुनीर के साथ मिलकर कई देशों के नेताओं से अरबों डॉलर के ऋण मांगने के लिए मुलाकात की।
ऋण लेने के लिए इन देशों पर निर्भर
पाकिस्तान अपने विदेशी मुद्रा भंडार और ऋण के प्रबंधन के लिए चीन, सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) और कतर सहित कई देशों से मिलने वाली वित्तीय सहायता पर अत्यधिक निर्भर है। ये देश अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष के साथ मिलकर नकदी संकट से जूझ रहे पाकिस्तान को नियमित ऋण और पुनर्भुगतान प्रदान करते हैं। इस कार्यक्रम के दौरान प्रधानमंत्री ने उद्योगों के लिए राहत उपायों की घोषणा की।
मित्र देशों से काफी अनुरोध किया
पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने कहा कि मैं कैसे बताऊं कि हमने मित्र देशों से ऋण के लिए किस तरह अनुरोध किया? मित्र देशों ने हमें निराश नहीं किया, लेकिन जो ऋण मांगने जाता है, उसका सिर झुका रहता है। ऋण से दायित्व भी उत्पन्न होते हैं, जिन्हें पूरा करना होता है। उन्होंने कहा कि जब आप ऋण लेने जाते हैं तो आपको अपने आत्मसम्मान की कीमत चुकानी पड़ती है। आपको समझौता करना पड़ता है। कभी-कभी, अनुचित मांगें सामने आ सकती हैं और आपको उन्हें पूरा करना पड़ सकता है, भले ही उन्हें पूरा करने का कोई कारण न हो।

पाकिस्तानी अधिकारियों और सुरक्षा सूत्रों के अनुसार, पिछले दो दिनों में हुए संघर्ष में अब तक का सबसे बड़ा नुकसान दर्ज किया गया है। बलूचिस्तान के मुख्यमंत्री सरफराज बुगती ने पुष्टि की है कि सुरक्षा बलों ने जवाबी कार्रवाई में अब तक 70 उग्रवादियों को मार गिराया है। मंत्री मोहसिन नकवी ने पुष्टि की कि इस संघर्ष में 10 पुलिस और फ्रंटियर कोर (FC) के जवान शहीद हुए हैं। ग्वादर के पास उग्रवादियों ने एक ही परिवार के 5 सदस्यों की हत्या कर दी।
BLA ने इस हमले की जिम्मेदारी लेते हुए दावा किया है कि उन्होंने 14 शहरों में 48 अलग-अलग स्थानों पर हमले किए हैं। प्रवक्ता जयंद बलोच ने दावा किया कि उन्होंने नुश्की में काउंटर टेररिज्म डिपार्टमेंट (CTD) के मुख्यालय पर कब्जा कर लिया है और 84 पाकिस्तानी सैनिकों को मार गिराया है। हालांकि, पाकिस्तानी सेना ने इन दावों को दुष्प्रचार बताकर खारिज कर दिया है। इस बार BLA ने ‘मजीद ब्रिगेड’ के आत्मघाती हमलावरों और महिला लड़ाकों का भी इस्तेमाल किया है।
रेल और सड़क संपर्क ठप
उग्रवादियों ने राज्य की जीवन रेखा मानी जाने वाली सड़कों और रेलवे को भारी नुकसान पहुंचाया है। नसीराबाद जिले में रेलवे ट्रैक पर लगाए गए विस्फोटकों को डिफ्यूज किया गया, जिससे एक बड़ा हादसा टल गया। फिलहाल प्रांत में ट्रेन सेवाएं निलंबित हैं। कई स्थानों पर उग्रवादियों ने राजमार्गों को जाम कर दिया और वाहनों की तलाशी लेकर गैर-बलूच लोगों को निशाना बनाने की कोशिश की।
बलूचिस्तान में बढ़ती हिंसा के पीछे का कारण
एक स्वतंत्र थिंक टैंक (CRSS) की रिपोर्ट के अनुसार, 2025 में पाकिस्तान में आतंकी हमलों में 34% की वृद्धि हुई है। बलूचिस्तान में यह गुस्सा मुख्य रूप से चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारे (CPEC) और संसाधनों के दोहन के खिलाफ है।

ईरानी समाचार चैनल तेहरान टाइम्स के अनुसार, दक्षिण-पश्चिमी शहर अहवाज (Southwestern City Ahvaz) में एक आवासीय इमारत में जोरदार विस्फोट (Strong Explosion) हुआ। शहर के फायर डिपार्टमेंट प्रमुख के हवाले से बताया गया कि इस हादसे में मौके पर ही चार लोगों की मौत हो गई। विस्फोट से इमारत को गंभीर नुकसान पहुंचा और आसपास के इलाके में अफरा-तफरी मच गई।
दूसरी घटना ईरान के दक्षिणी बंदरगाह शहर बंदर अब्बास में सामने आई। स्थानीय अधिकारियों के मुताबिक, यहां हुए एक विस्फोट में एक व्यक्ति की मौत हो गई, जबकि 14 लोग घायल हो गए। धमाके की तीव्रता इतनी ज्यादा थी कि एक इमारत की दो मंजिलें पूरी तरह ध्वस्त हो गईं, कई वाहन क्षतिग्रस्त हो गए और आसपास की दुकानों को भी भारी नुकसान पहुंचा।
इन घटनाओं के बाद क्षेत्र में सुरक्षा कड़ी कर दी गई है। इस बीच, इजराइल ने इन धमाकों से किसी भी तरह की संलिप्तता से इनकार किया है। इजराइल के दो अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि ईरान में हुए विस्फोटों से उनका देश किसी भी प्रकार से जुड़ा नहीं है।
सोशल मीडिया पर इन धमाकों को लेकर कई तरह के दावे किए जा रहे हैं, जिनमें इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर (आईआरजीसी) के नौसेना कमांडर को निशाना बनाए जाने की बात भी शामिल है। हालांकि, अर्ध-सरकारी समाचार एजेंसी तसनीम ने इन दावों को पूरी तरह झूठा बताते हुए खारिज कर दिया है।
ईरान की सरकारी समाचार एजेंसी आईआरएनए के अनुसार, होर्मोजगान प्रांत के क्राइसिस मैनेजमेंट के महानिदेशक मेहरदाद हसनजादेह ने कहा कि दोनों विस्फोटों के वास्तविक कारणों का पता लगाने के लिए जांच की जा रही है। उन्होंने बताया कि घायलों को आपातकालीन सेवाओं की मदद से अस्पतालों में भर्ती कराया गया है।

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