Category: International

  • अमेरिका में कुदरत का कहर: बर्फीले तूफान में प्राइवेट जेट क्रैश, एयरपोर्ट पूरी तरह बंद, 19 करोड़ लोग प्रभावित

    अमेरिका में कुदरत का कहर: बर्फीले तूफान में प्राइवेट जेट क्रैश, एयरपोर्ट पूरी तरह बंद, 19 करोड़ लोग प्रभावित


    वॉशिंगटन। अमेरिका में बर्फीले तूफान ने तबाही मचा दी है और इसी बीच मेन राज्य के बैंगर एयरपोर्ट पर एक निजी जेट क्रैश होने की खबर ने हालात और बिगाड़ दिए हैं। रविवार शाम टेकऑफ के दौरान ही बॉम्बार्डियर चैलेंजर 650 बिजनेस जेट क्रैश हो गया। इस विमान में 8 लोग सवार थे—3 क्रू मेंबर और 5 यात्री। हादसे के बाद एयरपोर्ट को तुरंत बंद कर दिया गया और राहत-बचाव दल मौके पर पहुंच गया। अभी तक यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि यात्रियों की स्थिति क्या है।

    हादसा कब और कैसे हुआ?
    CNN की रिपोर्ट के मुताबिक हादसा रविवार शाम 7.45 बजे के करीब हुआ। टेकऑफ से कुछ मिनट पहले कंट्रोल रूम और पायलट के बीच बातचीत में कम दृश्यता और बर्फ जमने की समस्या का जिक्र हुआ। रनवे से उड़ान की अनुमति मिलने के करीब दो मिनट बाद कंट्रोलर ने आदेश दिया“सभी विमानों की आवाजाही रोक दी जाए।”

    इसके बाद बताया गया कि विमान उल्टा पड़ा हुआ है। तुरंत एयरपोर्ट पर इमरजेंसी लागू कर दी गई और सिर्फ इमरजेंसी वाहनों को रनवे पर जाने की अनुमति दी गई।

    बर्फीले तूफान की चपेट में अमेरिका: 37 राज्य प्रभावित, 20 से ज्यादा में आपात स्थिति
    यह हादसा ऐसे समय में हुआ जब अमेरिका का बड़ा हिस्सा भीषण बर्फीले तूफान की चपेट में है।

    भारी बर्फबारी और जमाव वाली बारिश से 37 राज्यों में करीब 19 करोड़ लोग प्रभावित हैं। 20 से ज्यादा राज्यों में आपात स्थिति घोषित करनी पड़ी है।

    रॉकी पर्वत से लेकर न्यू इंग्लैंड तक बर्फ की चादर बिछ गई है। कई इलाकों में तापमान माइनस 20 से माइनस 30 डिग्री तक महसूस किया गया। इतना ही नहीं, व्हाइट हाउस भी बर्फ से ढक गया है।

    तूफान से उड़ानें और बिजली व्यवस्था चरमरा गई, हजारों उड़ानें रद्द
    तूफान के कारण घरों में बिजली गुल हो चुकी है।

    शनिवार तक लगभग 1.32 लाख घरों में बिजली बंद थी। टेक्सास और लुइज़ियाना सबसे ज्यादा प्रभावित राज्यों में शामिल हैं, जहां बर्फ और जमाव से बिजली की लाइनें टूट रही हैं और ढांचों को नुकसान पहुंच रहा है।

    यात्रा व्यवस्था भी बुरी तरह प्रभावित हुई है। वीकेंड में पूरे अमेरिका में 14 हजार से ज्यादा उड़ानें रद्द करनी पड़ीं। अधिकारियों का कहना है कि यह रविवार विमानन इतिहास के सबसे खराब दिनों में से एक साबित हो सकता है। डलास-फोर्ट वर्थ, शार्लेट और नैशविले जैसे बड़े एयरपोर्ट सबसे ज्यादा प्रभावित हुए हैं।

    अमेरिका में यह बर्फीला तूफान केवल मौसम की आपदा नहीं, बल्कि लाइव यात्रा, बिजली और जनजीवन को प्रभावित करने वाली बड़ी तबाही बनकर उभरा है। और इसी बीच प्राइवेट जेट क्रैश ने स्थिति को और गंभीर कर दिया है।

  • हांगकांग, मलेशिया जैसे देशों से आगे निकला भारत, कर-से-जीडीपी अनुपात 19.6 प्रतिशत हुआ

    हांगकांग, मलेशिया जैसे देशों से आगे निकला भारत, कर-से-जीडीपी अनुपात 19.6 प्रतिशत हुआ

    नई दिल्ली। भारत का कर-से-जीडीपी अनुपात बढ़कर 19.6 प्रतिशत हो गया है, यह अन्य उभरते हुई बाजार हांगकांग, मलेशिया और इंडोनेशिया से अधिक है। यह जानकारी बैंक ऑफ बड़ौदा की एक रिपोर्ट में दी गई।

    अधिक कर-से-जीडीपी अनुपात दिखाता है कि देश में कर दक्षता बढ़ रही है और संग्रह में सुधार हो रहा है। इसमें केंद्र और राज्य सरकारों की ओर से किया जाने वाला कर संग्रह शामिल है।

    रिपोर्ट में कहा गया है कि हालांकि भारत का केंद्रीय सकल कर राजस्व जीडीपी के 11.7 प्रतिशत पर कम है, लेकिन समग्र एकीकृत आंकड़ा राज्यों की मजबूत भागीदारी और पूरे सिस्टम में बेहतर अनुपालन को दर्शाता है।

    हालांकि, अभी भी भारत का कर-से-जीडीपी अनुपात जर्मनी के 38 प्रतिशत और अमेरिका के 25.6 प्रतिशत से काफी कम है।

    बैंक ऑफ बड़ौदा ने कहा कि विशेष रूप से इसकी अनुकूल जनसांख्यिकीय स्थिति को देखते हुए, यह अंतर भारत के लिए एक बड़ा नीतिगत अवसर प्रस्तुत करता है।

    रिपोर्ट में कहा गया कि सरकार सरलीकरण, युक्तिकरण और डिजिटलीकरण के उद्देश्य से व्यापक कर सुधारों पर तेजी से ध्यान केंद्रित कर रही है।

    इन प्रयासों से आने वाले वर्षों में कर-से-जीडीपी अनुपात में वृद्धि होने की उम्मीद है।

    आयकर अधिनियम, 2025 की शुरुआत और कॉर्पोरेट कर संरचनाओं का सरलीकरण सहित प्रमुख नियामकीय कदमों से पारदर्शिता में सुधार और अनुपालन में आसानी होने की उम्मीद है।

    नया आयकर अधिनियम, जो 1 अप्रैल, 2026 से प्रभावी होने वाला है, अनौपचारिक अर्थव्यवस्था के अधिक हिस्से को औपचारिक प्रणाली में लाकर कर आधार को व्यापक बनाने की भी उम्मीद है।

    रिपोर्ट में कहा गया कि ऐतिहासिक विश्लेषण से पता चलता है कि समय के साथ कर संग्रह और नॉमिनल जीडीपी में निकटता बढ़ने लगी है।

    रिपोर्ट में बताया गया कि आयकर संग्रह का नॉमिनल जीडीपी और प्रति व्यक्ति आय दोनों के साथ मजबूत सहसंबंध दिखता है – जो बढ़ती आय और बेहतर अनुपालन को दर्शाता है।

    कंपनियों को बेहतर मुनाफे से कॉर्पोरेट कर संग्रह को भी लाभ हुआ है, और ऐतिहासिक रुझानों की तुलना में इसमें मजबूती का स्तर बरकरार है।

  • ट्रंप के टैरिफ से हुए नुकसान की भरपाई! एक डील से भारत कमाएगा 10 गुना, कई सेक्टर्स को फायदा

    ट्रंप के टैरिफ से हुए नुकसान की भरपाई! एक डील से भारत कमाएगा 10 गुना, कई सेक्टर्स को फायदा


    नई दिल्ली। अमेरिकी राष्‍ट्रपति डोनाल्‍ड ट्रंप ने पिछले साल अप्रैल और अगस्‍त में भारत पर 25-25 फीसदी का टैरिफ लगाया था. भारत से अमेरिका जाने वाले उत्‍पादों पर 50 फीसदी टैरिफ लगाए जाने के बाद भारतीय निर्यात क्षेत्र को करीब 6 अरब डॉलर का नुकसान हुआ था. अब भारत ने ऐसा दांव खेला है कि सिर्फ एक डील से न सिर्फ इस पूरे नुकसान की भरपाई हो जाएगी, बल्कि इस नुकसान के मुकाबले 10 गुना ज्‍यादा कमाई हो जाएगी. यह डील कल यानी 27 जनवरी को पूरी होने का अनुमान है और इससे भारत एकसाथ 27 देशों को साधने में सफल होगा.
    भारत और यूरोपीय यूनियन मुक्‍त व्‍यापार समझौते (FTA) पर 27 जनवरी को हस्‍ताक्षर कर सकते हैं. दोनों पक्षों के नेताओं ने इसे ‘मदर ऑफ आल डील’ का नाम दिया है, क्‍योंकि इस एक डील से ही भारत को यूरोप के 27 देशों में बिना शुल्‍क के कारोबार करने की अनुमति मिल जाएगी. फिलहाल यूरोपीय यूनियन की अध्‍यक्ष भारत में गणतंत्र दिवस के मौके पर बतौर मुख्‍य अतिथि मौजूद हैं. इस दौरान दोनों देशों के बीच ट्रेड को लेकर बातचीत भी हुई है और अब इस पर अंतिम मुहर लगने का इंतजार है.
    भारतीय निर्यात को कितना फायदा
    भारत और यूरोप के बीच में फ्री ट्रेड एग्रीमेंट होता है तो भारतीय निर्यात का ट्रेड सरप्‍लस करीब 50 अरब डॉलर बढ़ जाएगा. एमके ग्‍लोबल ने अपनी शोध में बताया है कि यह डील पूरी हुई तो वित्‍तवर्ष 2031 तक भारत का यूरोप के साथ ट्रेड सरप्‍लस 50 अरब डॉलर का हो जाएगा. वित्‍तवर्ष 2025 में भारत के कुल निर्यात में यूरोप की हिस्‍सेदारी 17.3 थी, जो इस डील के बाद 2031 तक 22 से 23 फीसदी तक पहुंचने का अनुमान है.
    यूरोप के लिए भी फायदे की डील
    यह डील सिर्फ भारत को ही नहीं, बल्कि यूरोपीय बाजार को भी फायदा पहुंचाएगी. भले ही अभी यूरोप के निर्यात बाजार में भारत की हिस्‍सेदारी महज 0.8 फीसदी है, लेकिन वित्‍तवर्ष 2025 में यूरोप का भारत के साथ 15 अरब डॉलर का व्‍यापार घाटा रहा था. वित्‍तवर्ष 2019 में यूरोप का भारत के साथ 3 अरब डॉलर का ट्रेड सरप्‍लस था. अगर यह डील पूरी होती है तो निश्चित रूप से भारत के कारोबार को और गति मिलेगी और भारत का यूरोप के साथ ट्रेड सरप्‍लस और भी ज्‍यादा हो जाएगा.

    किस सेक्‍टर को सबसे ज्‍यादा लाभ
    यूरोप के साथ फ्री ट्रेड डील पूरी होने से भारत के इलेक्‍ट्रॉनिक्‍स, मशीनरी और केमिकल उद्योग को सबसे ज्‍यादा लाभ मिलेगा. चालू वित्‍तवर्ष में भारत के कुल निर्यात में यूरोप की हिस्‍सेदारी मामूली रूप से गिरकर 16.8 फीसदी पर आ गई है. यह अलग बात है कि इस डील से भारत के साथ यूरोप का व्‍यापार घाटा और बढ़ जाएगा. बावजूद इसके यूरोप ने रूस के ऊपर अपनी ऊर्जा निर्भरता कम करने और चीन की सप्‍लाई का विकल्‍प खोजने की तैयारी कर ली है. यूरोप में अभी से भारतीय रिफाइनरी के तेल, इलेक्‍ट्रॉनिक्‍स और केमिकल की खरीद बढ़ गई है. एफटीए के बाद इसमें और बढ़ोतरी हो जाएगी.

  • ट्रंप की सख्त इमिग्रेशन पॉलिसी का कहर: एक महीने में 8 मौतें, अमेरिका में विद्रोह क्यों भड़का?

    ट्रंप की सख्त इमिग्रेशन पॉलिसी का कहर: एक महीने में 8 मौतें, अमेरिका में विद्रोह क्यों भड़का?

    नई दिल्ली।  अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की नीतियां ने विदेशों में ही नहीं अमेरिका के अंदर भी उथल-पुथल मचा रखा है. अमेरिका के अंदर से अवैध प्रवासियों को निकालने के लिए डोनाल्ड ट्रंप सख्त इमिग्रेशन पॉलिसी अपना रहे हैं लेकिन इसे अंजाम देने की कोशिश में ट्रंप के एजेंट सीमा लांघते नजर आ रहे हैं. उनपर अमेरिकियों को ही गोली मारकर मौत के घाट उतारने का आरोप लग रहा है. अमेरिका में मिनेसोटा के मिनियापोलिस में अमेरिका में इमिग्रेशन एजेंटों (ICE) की गोली से एक और शख्स की मौत हो गई है और वहां तनाव बढ़ गया है.

    यह घटना जनवरी में हुई ऐसी पांच गोलीबारी में से एक थी, जिसमें अवैध प्रवासियों को खोजने वाले वाले फेडरल एजेंट शामिल थे. इससे पहले मिनेसोटा की महिला रेनी गुड की भी ICE एजेंटों ने गोली मारकर जान ले ली थी. इतना ही नहीं रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार इस महीने अवैध प्रवासियों को रखे जाने वाले फेडरल हिरासत केंद्र में कम से कम छह अप्रवासियों की मौत हो गई है, जो असामान्य रूप से काफी अधिक है.

    अमेरिका में अब क्या हुआ है?
    शनिवार को फेडरल इमिग्रेशन एजेंटों ने एक और अमेरिकी नागरिक एलेक्स प्रेट्टी की हत्या कर दी, जो ICU नर्स थे. कुछ हफ्ते पहले ही मिनियापोलिस में ICE अधिकारियों ने 37 साल की एक महिला, रेनी गुड को गोली मारकर मौत के घाट उतार दिया था. इसके बाद इलाके में यह दूसरी हत्या है.

    एजेंट की कार्रवाई पर ट्रंप सरकार ने क्या कहा?
    अमेरिका के राष्ट्रपति ट्रंप ने ICE की कार्रवाई का समर्थन करते हुए कहा था कि वह सेल्फ डिफेंस था. डिपार्टमेंट ऑफ होमलैंड सिक्योरिटी ने प्रेट्टी के पास से मिला एक पिस्तौल की ओर इशारा किया है. डोनाल्ड ट्रम्प ने विपक्षी डेमोक्रेटिक पार्टी पर ही “अराजकता” पैदा करने का आरोप लगाया है जिसके कारण संघीय एजेंटों के हाथों दो अमेरिकियों की मौत हो गई है. राष्ट्रपति ने अपने ट्रुथ सोशल प्लेटफॉर्म पर यह भी दावा किया कि डेमोक्रेट के कंट्रोल वाले शहर और राज्य ICE के साथ सहयोग करने से इनकार कर रहे हैं और “वास्तव में वामपंथी आंदोलनकारियों को उनके कार्यों में गैरकानूनी रूप से बाधा डालने के लिए प्रोत्साहित कर रहे हैं”.

    असल में वीडियो में क्या दिखा था?
    वायरल हो रहे वीडियो में प्रेट्टी बर्फ से ढकी सड़क पर एजेंटों को फिल्माते और ट्रैफिक को कंट्रोल करते हुए दिख रहे हैं. एक वीडियो में ICE अधिकारी को एक महिला प्रदर्शनकारी को फुटपाथ पर जमीन पर धकेलते हुए देखा गया. इसके बाद प्रेट्टी उनके बीच आ जाते हैं और एजेंट के चेहरे पर एक केमिकल इरिटेंट स्प्रे कर देता है. इसके बाद एजेंट, प्रेट्टी को जमीन पर खींच लेता है और कई अधिकारी उसे बर्फ वाली सड़क पर हिरासत में लेने की कोशिश करने लगते हैं. इस बीच जैसे ही एक अधिकारी को लगता है कि प्रेट्टी के पास बंदूक है, वह उसके पैंट से बंदूक निकालता है कि तभी दूसरा एजेंट प्रेट्टी पर गोली चला देता है. इसके बाद ICE अधिकारी दूर से उसके बेजान शरीर पर कई बार गोली चलाते हैं.

    ट्रंप सरकार के खिलाफ अमेरिका में क्या हो रहा?
    ट्रंप सरकार की सख्त कार्रवाई के कारण मिनेसोटा राज्य में व्यापक प्रदर्शन हो रहे हैं. यहां ट्रंप सरकार से ऑर्डर मिलने के बाद ICE का ऑपरेशन छह सप्ताह से अधिक समय से चल रहा है. इहां सरकार ने इसे एक सार्वजनिक सुरक्षा अभियान बताया है, जिसका उद्देश्य देश में अवैध रूप से अपराधियों को निर्वासित करना है. लेकिन आलोचकों का कहना है कि उन प्रवासियों को भी निशाना बनाया जा रहा है जिनका कोई आपराधिक रिकॉर्ड नहीं है और अमेरिकी नागरिकों को भी हिरासत में लिया जा रहा है. इसी महीने 2 अमेरिकी नागरिकों की कार्रवाई में मौत के बाद लोगों का गुस्सा अलग लेबल पर पहुंच गया है.

    ट्रंप सरकार पर कैसे दबाव बढ़ रहा है?
    मिनियापोलिस में एलेक्स प्रेट्टी की हत्या की पूरी तरह से जांच करने के लिए डोनाल्ड ट्रंप की सरकार पर दबाव बढ़ गया है. पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा और उनकी पत्नी मिशेल ने हत्या को “एक दिल दहला देने वाली त्रासदी” कहा है. उन्होंने कहा कि पार्टी की परवाह किए बिना यह घटना हर अमेरिकी के लिए एक अलार्म है कि एक राष्ट्र के रूप में कई मूल मूल्यों पर तेजी से हमला हो रहा है. पूर्व राष्ट्रपति बिल क्लिंटन ने भी कहा है कि अमेरिका एक ऐतिहासिक क्षण का सामना कर रहा है जो आने वाले वर्षों में इसे आकार देगा और उन्होंने अमेरिकियों से बोलने और “यह दिखाने का आग्रह किया है कि हमारा देश अभी भी हम लोगों का है”.

    विपक्षी पार्टी ही नहीं, ट्रंप की रिपब्लिकन पार्टी के अंदर से भी आवाज उठने लगी है. हाउस होमलैंड सुरक्षा समिति के रिपब्लिकन अध्यक्ष एंड्रयू गारबेरिनो ने ICE समेत इमिग्रेशन से जुड़े सभी एजेंसियों के टॉप अधिकारी से गवाही मांगी है और कहा है, “मेरी सर्वोच्च प्राथमिकता अमेरिकियों को सुरक्षित रखना है”. कई अन्य कांग्रेसी रिपब्लिकन भी मामले में अधिक जानकारी के लिए दबाव डाल रहे हैं. इनमें टेक्सास के प्रतिनिधि माइकल मैककॉल और उत्तरी कैरोलिना के सीनेटर थॉम टिलिस, लुइसियाना के बिल कैसिडी, मेन के सुसान कोलिन्स और अलास्का के लिसा मुर्कोव्स्की शामिल हैं.

    मिनेसोटा राज्या और स्थानीय एजेंसियों ने भी इस मामले में मुकदमा दायर कर दिया है. इसके बाद एक अमेरिकी संघीय न्यायाधीश ने एक आपातकालीन आदेश जारी किया है जिसमें अधिकारियों को एलेक्स प्रेट्टी की मौत से संबंधित सभी सबूतों को संभाल कर रखने को कहा गया है

  • शी जिनपिंग का बड़ा कदम: सेना में भ्रष्टाचार पर कार्रवाई, 200,000 अधिकारियों पर गिरी गाज

    शी जिनपिंग का बड़ा कदम: सेना में भ्रष्टाचार पर कार्रवाई, 200,000 अधिकारियों पर गिरी गाज


    नई दिल्ली । चीन के रक्षा मंत्रालय ने देश के शीर्ष सैन्य नेतृत्व के खिलाफ बड़ी कार्रवाई की है। जनरल झांग योउशिया और जनरल लियू झेनली के खिलाफ जांच शुरू की गई है। झांग पर अनुशासन और कानून के गंभीर उल्लंघन के आरोप लगाए गए हैंजो आमतौर पर भ्रष्टाचार मामलों में इस्तेमाल होती है।

    75 साल के झांगसेंट्रल मिलिट्री कमीशन CMC के उपाध्यक्ष और पोलितब्यूरो के सदस्य रहे हैं। CMC सीधे राष्ट्रपति शी जिनपिंग के नियंत्रण में काम करती है। झांग ने 1968 में पीपुल्स लिबरेशन आर्मी जॉइन की थी और वे वरिष्ठ अधिकारी थे जिनके पास असली युद्ध का अनुभव था। उन्हें तय उम्र से आगे पद पर बनाए रखना शी के भरोसे को दर्शाता था।

    पिछले साल अक्टूबर में चीन की कम्युनिस्ट पार्टी ने सेना के 9 बड़े जनरलों को सस्पेंड किया था। विशेषज्ञ इसे दशकों में सेना का सबसे बड़ा सफाई अभियान मानते हैं। इसके बाद 200,000 अधिकारियों पर भ्रष्टाचार के लिए कार्रवाई की गई है।

    शी जिनपिंग ने बार-बार कहा है कि भ्रष्टाचार पार्टी के लिए सबसे बड़ा खतरा है। हालांकि आलोचक मानते हैं कि यह अभियान केवल सुधार के लिए नहींबल्कि सत्ता को मजबूत करने और विरोधियों को हटाने का जरिया भी है। इस कार्रवाई को सेना को अनुशासित और शी के प्रति वफादार बनाने की रणनीति का हिस्सा बताया जा रहा है।

  • नॉर्वे का 4 महीने का अंधेरा: इंसानों से ज्यादा भालू और ‘कोसेलिग’ में बसा जीवन

    नॉर्वे का 4 महीने का अंधेरा: इंसानों से ज्यादा भालू और ‘कोसेलिग’ में बसा जीवन


    नई दिल्ली। सोचिए सुबह 8 बजे दफ्तर निकलें और बाहर घना अंधेरा हो। लंच ब्रेक में भी तारे चमक रहे हों और शाम को लौटते समय भी वही सन्नाटा। नॉर्वे के लॉन्गइयरबायेन में करीब 2500 लोग हर साल नवंबर से फरवरी तक लगातार चार महीने इसी घने अंधेरे में बिताते हैं। विज्ञान की भाषा में इसे पोलर नाइट कहते हैं जब सूरज पर्दे के पीछे ही रहता है और दुनिया पूरी तरह कृत्रिम रोशनी पर निर्भर हो जाती है।

    यहां की डेली रूटीन सूरज पर नहीं बल्कि नंबरों और कृत्रिम लाइट पर निर्भर होती है। लोग विटामिन-डी की गोलियां और विशेष लैंप्स का सहारा लेते हैं ताकि शरीर को लगे कि दिन हो गया।अंधेरे में मानसिक स्वास्थ्य का ध्यान रखने के लिए लोग कोसेलिग नाम की फिलॉसफी अपनाते हैं। यह उनके लिए सुकून की भावना है। घरों को मोमबत्तियों ऊनी कंबलों और गर्म कॉफी से सजाया जाता है। संगीत बोर्ड गेम्स और कहानियों की महफिल घर-घर में सजती रहती है।

    सामूहिक जीवन और नॉर्दर्न लाइट्स:
    अकेलेपन को दूर करने के लिए सामूहिक भोज यानी कम्युनिटी डिनर आयोजित होते हैं। द्वीप पर करीब 50 देशों के लोग रहते हैं जो मुख्य रूप से रिसर्च और माइनिंग के लिए आए हैं। अंधेरे के महीनों में यहां की सोशल लाइफ बेहद एक्टिव रहती है। लोग स्नोमोबाइल में सवार होकर नीली बर्फ की वादियों में नॉर्दर्न लाइट्स देखने निकलते हैं। पोलर जैज जैसे संगीत फेस्टिवल्स सन्नाटे को संगीत से भर देते हैं।

    अंधेरे में सुरक्षा और भालू का खतरा:
    यहां इंसानों से ज्यादा भालू हैं और अंधेरे में वे और भी खतरनाक हो जाते हैं। लोग हमेशा हेडलाइट्स और रिफ्लेक्टिव जैकेट्स पहनकर चलते हैं। सड़कों पर अजनबियों का हेलो कहना आम है क्योंकि हर इंसान एक-दूसरे का सहारा है।

    सूरज की वापसी का उत्सव:
    फरवरी के अंत में जब पहली बार सूरज की किरण गिरती है तो पूरा शहर सोलफेस्टुका मनाता है। लोग हफ्तों से उस एक किरण का इंतजार करते हैं जो उन्हें याद दिलाती है कि अंधेरा कितना लंबा भी हो उजाला लौटकर जरूर आता है।स्वालबार्ड का यह द्वीप सिखाता है कि खुशियां बाहरी परिस्थितियों पर निर्भर नहीं होतीं। चार महीने का अंधेरा भी लोग प्यार उत्सव और समुदाय के साथ जीत सकते हैं।

  • मिनियापोलिस में ICE फायरिंग: एक की मौत, ट्रंप और राज्य सरकार के बीच तनाव बढ़ा

    मिनियापोलिस में ICE फायरिंग: एक की मौत, ट्रंप और राज्य सरकार के बीच तनाव बढ़ा


    वॉशिंगटन। अमेरिका के मिनेसोटा राज्य के मिनियापोलिस में ICE एजेंट की गोलीबारी से एक शख्स की मौत हो गई, जिससे इलाके में तनाव बढ़ गया है। इस घटना के बाद राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और मिनेसोटा के गवर्नर टिम वॉल्ज़ के बीच विवाद तेज हो गया।

    ट्रंप ने मिनेसोटा के गवर्नर और मिनियापोलिस के मेयर जैकब फ्रे पर आरोप लगाया कि वे विद्रोह भड़का रहे हैं। ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर कहा कि नेता अपनी “घमंडी और अहंकारी बयानबाजी” से हिंसा बढ़ा रहे हैं और उन्हें लोगों के पैसे और सुरक्षा का ध्यान रखना चाहिए। ट्रंप ने ICE एजेंट पर हमला करने वाले व्यक्ति की फिंगर की तस्वीरें भी साझा कीं।राष्ट्रपति ने सवाल उठाया कि स्थानीय पुलिस को ICE अधिकारियों की सुरक्षा के लिए क्यों तैनात नहीं किया गया और दावा किया कि मृतक हथियारबंद था। ट्रंप ने कहा कि ICE एजेंट्स को आत्मरक्षा में कार्रवाई करनी पड़ी और उन्हें अपना काम करने दिया जाना चाहिए।

    वहीं, गवर्नर टिम वॉल्ज़ ने संघीय कार्रवाई की निंदा की और अधिकारियों को मिनेसोटा से तुरंत बाहर निकालने की मांग की। उन्होंने कहा कि यह अभियान गलत है और राष्ट्रपति को इसे तुरंत रोकना चाहिए।घटना मिनियापोलिस के दक्षिणी हिस्से में हुई, और स्थानीय अधिकारी जांच में जुटे हैं। लोगों से शांति बनाए रखने और प्रभावित इलाके से दूर रहने की अपील की गई है।

    यह घटना ICE के बड़े पैमाने पर चलाए जा रहे एंटी-इमिग्रेशन ऑपरेशन के दौरान हुई। इससे पहले 7 जनवरी को 37 वर्षीय रेनी गुड नामक महिला की ICE फायरिंग में मौत हो गई थी, जिससे अमेरिका में भारी विरोध हुआ था। रेनी गुड तीन बच्चों की मां थीं, और DHS का दावा था कि वह एजेंट पर हमला कर रही थी। उस समय राष्ट्रपति ट्रंप और उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने ICE एजेंट का बचाव किया था

  • ट्रम्प का कनाडा पर तीखा हमला: बोले-चीन एक साल में निगल जाएगा, गोल्डन डोम विरोध से बिगड़े रिश्ते

    ट्रम्प का कनाडा पर तीखा हमला: बोले-चीन एक साल में निगल जाएगा, गोल्डन डोम विरोध से बिगड़े रिश्ते


    नई दिल्ली।ट्रम्प का बयान कनाडा अमेरिका की बजाय चीन की ओर झुक रहा है। ट्रम्प ने कहा कि यह उत्तर अमेरिका की सामूहिक सुरक्षा के लिए खतरा है।

    व्यापार विवाद

    कनाडा-चीन व्यापार समझौते में चीनी ईवी पर टैरिफ 100% से घटाकर 6.1% किया गया।

    चीन ने कनाडा के कृषि उत्पादों पर जवाबी शुल्क कम करने पर सहमति दी।

    अमेरिका इसे अपने हितों के खिलाफ मान रहा है।

    गोल्डन डोम प्रोजेक्ट पर मतभेद

    अमेरिका का मिसाइल डिफेंस प्रोजेक्ट 175 अरब डॉलर इजराइल के आयरन डोम पर आधारित है।

    ट्रम्प इसे अमेरिका की सुरक्षा के लिए अहम मानते हैं, जबकि कार्नी इसे क्षेत्रीय असंतुलन बढ़ाने वाला कदम बताते हैं।

    दावोस फोरम में तल्खी

    वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम में कार्नी ने बड़ी शक्तियों के दबदबे की आलोचना की।

    ट्रम्प ने इसे अमेरिका के प्रति कृतज्ञता की कमी बताया।

    पूर्व विवाद और संभावित भविष्य

    ग्रीनलैंड और नाटो मुद्दों पर दोनों नेताओं के पहले भी मतभेद रहे।

    विशेषज्ञों के अनुसार, चीन, रक्षा और वैश्विक शक्ति संतुलन के मुद्दों से अमेरिका-कनाडा संबंध और जटिल हो सकते हैं।

  • यूरोप में नए शक्ति संतुलन का उदय: फ्रांस से बढ़ी दूरी, इटली बना जर्मनी का नया 'पावर पार्टनर'

    यूरोप में नए शक्ति संतुलन का उदय: फ्रांस से बढ़ी दूरी, इटली बना जर्मनी का नया 'पावर पार्टनर'


    नई दिल्ली।द्वितीय विश्व युद्ध की राख से उबरकर जिस फ्रांस-जर्मनी की जोड़ी ने आधुनिक यूरोप की नींव रखी थी, आज वही ऐतिहासिक धुरी डगमगाती नजर आ रही है। बर्लिन और पेरिस के बीच बढ़ते कूटनीतिक गतिरोध ने यूरोपीय संघ (EU) के भीतर एक बड़े सत्ता परिवर्तन के संकेत दे दिए हैं। जर्मन चांसलर फ्रेडरिक मर्ज और फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों के बीच बढ़ती तल्खी ने अब जर्मनी को इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी की ओर झुकने पर मजबूर कर दिया है। दावोस में हुए वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम के दौरान चांसलर मर्ज के बयानों ने इस बात की पुष्टि कर दी है कि अब यूरोप का संचालन पुराने ढर्रे पर नहीं बल्कि नए और अलग तरीके से होगा।

    इस दरार की सबसे बड़ी वजह आर्थिक और रक्षा रणनीतियों में विरोधाभास है। जर्मनी की निर्यात आधारित अर्थव्यवस्था के लिए दक्षिण अमेरिकी देशों के साथ प्रस्तावित ‘मर्कोसुर’ व्यापार समझौता संजीवनी की तरह है। इसके विपरीत राष्ट्रपति मैक्रों अपने देश के नाराज किसानों को शांत करने के लिए इस डील का पुरजोर विरोध कर रहे हैं। फ्रांस को डर है कि सस्ते लैटिन अमेरिकी कृषि उत्पाद उसके घरेलू बाजार को बर्बाद कर देंगे। यह आर्थिक टकराव केवल व्यापार तक सीमित नहीं है। रक्षा क्षेत्र के सबसे बड़े प्रोजेक्ट फ्यूचर कॉम्बैट एयर सिस्टम FCAS को लेकर भी दोनों देश आमने-सामने हैं। फ्रांस जहां इस 100 अरब यूरो के फाइटर जेट प्रोजेक्ट पर अपना एकाधिकार और तकनीकी नियंत्रण चाहता है वहीं जर्मनी बराबरी की हिस्सेदारी और अपनी कंपनी एयरबस के लिए समान अधिकारों पर अड़ा है।

    इन्हीं मतभेदों के बीच इटली एक मजबूत विकल्प बनकर उभरा है। मेलोनी और मर्ज के बीच न केवल वैचारिक तालमेल दिख रहा है बल्कि अमेरिका के प्रति उनके व्यवहारिक नजरिए ने भी उन्हें करीब लाया है। डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन के साथ संबंधों को लेकर जहां फ्रांस आक्रामक रुख अपना सकता है वहीं जर्मनी और इटली मिलकर एक बैलेंस बनाने की कोशिश में हैं। 23 जनवरी को रोम में होने वाली इटली-जर्मनी शिखर बैठक इस नए गठजोड़ की आधिकारिक मुहर बन सकती है। हालांकि विशेषज्ञ मानते हैं कि फ्रांस-जर्मनी के रिश्ते पूरी तरह खत्म नहीं होंगे लेकिन यूरोप के नेतृत्व का वह दौर अब बीत चुका है जहां सिर्फ पेरिस और बर्लिन की मर्जी चलती थी। अब यूरोप की राजनीति की नई पटकथा रोम के रास्तों से होकर गुजरेगी।

  • कनाडा को एक साल में ही निगल जाएगा चीन बोर्ड ऑफ पीस से हटाने के बाद ट्रंप की कड़ी चेतावनी

    कनाडा को एक साल में ही निगल जाएगा चीन बोर्ड ऑफ पीस से हटाने के बाद ट्रंप की कड़ी चेतावनी


    नई दिल्ली।अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप एक बार फिर अपने बयान को लेकर वैश्विक सुर्खियों में आ गए हैं ताजा बयान में उन्होंने कनाडा को कड़ी चेतावनी देते हुए कहा है कि अगर उसने अमेरिका के बजाय चीन के साथ नजदीकी बढ़ाई तो वह एक साल के भीतर ही उसे निगल जाएगा

    ट्रंप ने यह बयान उस समय दिया जब कनाडा ने अमेरिका के प्रस्तावित गोल्डन डोम मिसाइल डिफेंस सिस्टम का विरोध किया यह सिस्टम इजरायल के आयरन डोम से प्रेरित बताया जा रहा है और ग्रीनलैंड के ऊपर तैनात किए जाने की योजना है अमेरिकी राष्ट्रपति का कहना है कि यह सिस्टम न केवल अमेरिका बल्कि कनाडा की सुरक्षा के लिए भी जरूरी हैडोनाल्ड ट्रंप ने ट्रूथ सोशल पर लिखा कि कनाडा ग्रीनलैंड के ऊपर बनने वाले गोल्डन डोम के खिलाफ है जबकि यह सिस्टम कनाडा को भी सुरक्षा प्रदान करेगा इसके बजाय कनाडा ने चीन के साथ व्यापार बढ़ाने के समर्थन में रुख अपनाया है जो आने वाले एक साल में ही उसे खत्म कर देगा

    अमेरिकी राष्ट्रपति ने यह भी कहा कि वह चाहते हैं कि गोल्डन डोम ग्रीनलैंड को पूरी तरह कवर करे उनका तर्क है कि आर्कटिक क्षेत्र पर नियंत्रण से अमेरिका को रूस और चीन के बढ़ते प्रभाव का मुकाबला करने में मदद मिलेगीइससे पहले दावोस में आयोजित विश्व आर्थिक मंच की बैठक के दौरान ट्रंप ने कहा था कि कनाडा को अपनी सुरक्षा के लिए अमेरिका का आभारी होना चाहिए उन्होंने यह भी कहा था कि कनाडा अमेरिका की वजह से ही जीवित है

    हालांकि कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने ट्रंप के इस दावे को सिरे से खारिज कर दिया कार्नी ने कहा कि कनाडा और अमेरिका के बीच मजबूत साझेदारी जरूर है लेकिन कनाडा की प्रगति का श्रेय अमेरिका को नहीं दिया जा सकता उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिकी दबदबे पर आधारित वैश्विक व्यवस्था टूटने की कगार पर हैकार्नी के इस बयान के बाद ट्रंप ने कड़ा कदम उठाते हुए उन्हें अपने बोर्ड ऑफ पीस से बाहर कर दिया यह बोर्ड दुनिया में शांति स्थापित करने के उद्देश्य से ट्रंप द्वारा शुरू किया गया था

    बोर्ड ऑफ पीस में शामिल होने के लिए ट्रंप ने दुनिया के लगभग साठ देशों को आमंत्रण भेजा था इजरायली मीडिया के अनुसार इनमें से पच्चीस देशों ने इस न्योते को स्वीकार कर लिया है बोर्ड में शामिल देशों में इजरायल सऊदी अरब संयुक्त अरब अमीरात पाकिस्तान कतर तुर्किए मिस्र इंडोनेशिया अर्जेंटीना और मंगोलिया समेत कई देश शामिल हैंट्रंप का यह बयान और कदम एक बार फिर अमेरिका और उसके सहयोगी देशों के बीच बढ़ते मतभेदों को उजागर करता है