Category: International

  • अमेरिकी नीति में बदलाव: ट्रंप ने ग्रीनलैंड टैरिफ रोका, बातचीत से हल निकालने के संकेत

    अमेरिकी नीति में बदलाव: ट्रंप ने ग्रीनलैंड टैरिफ रोका, बातचीत से हल निकालने के संकेत

    नई दिल्ली। ट्रंप ने ग्रीनलैंड टैरिफ टाला, ताकत की बजाय बातचीत का रास्ता अपनाया
    दावोस। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बुधवार को यूरोपीय सहयोगी देशों पर लगाए जाने वाले प्रस्तावित टैरिफ को फिलहाल स्थगित करने की घोषणा की। ट्रंप ने कहा कि ग्रीनलैंड और व्यापक आर्कटिक क्षेत्र से जुड़े नाटो समझौते के फ्रेमवर्क पर सहमति बन गई है, जिससे 1 फरवरी से लागू होने वाले शुल्क अब लागू नहीं होंगे।

    ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर बताया कि नाटो महासचिव मार्क रुट्टे के साथ उनकी बैठक बेहद सकारात्मक रही और इसमें ग्रीनलैंड से जुड़े भविष्य के समझौते का आधार तैयार किया गया। उन्होंने कहा कि यह समाधान अगर अंतिम रूप लेता है, तो अमेरिका और सभी नाटो देशों के लिए लाभकारी होगा।

    राष्ट्रपति ने स्पष्ट किया कि उपराष्ट्रपति जेडी वेंस, विदेश मंत्री मार्को रुबियो और विशेष दूत स्टीव विटकॉफ इस बातचीत का नेतृत्व करेंगे और सीधे उन्हें रिपोर्ट करेंगे। हालांकि, ग्रीनलैंड से संबंधित फ्रेमवर्क के मुख्य बिंदुओं को अभी सार्वजनिक नहीं किया गया है।

    इससे पहले ट्रंप ने डावोस वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम में पहली बार यह स्पष्ट किया कि वे ग्रीनलैंड पर सैन्य ताकत का इस्तेमाल नहीं करेंगे और समाधान के लिए डेनमार्क से बातचीत को प्राथमिकता देंगे। ट्रंप ने कहा, “अगर मैं अत्यधिक शक्ति का इस्तेमाल करूं तो कोई रोक नहीं सकता, लेकिन मैं ऐसा नहीं करूंगा।”

    बीते दिनों ट्रंप ने उन यूरोपीय देशों को टैरिफ की चेतावनी दी थी, जो ग्रीनलैंड को लेकर उनके रुख का विरोध कर रहे थे। अब इन देशों के खिलाफ प्रस्तावित शुल्क फिलहाल हटाए जा चुके हैं। ग्रीनलैंड को लेकर अमेरिका की यह नई रणनीति और नाटो में बनती सहमति आने वाले दिनों में अंतरराष्ट्रीय राजनीति का प्रमुख मुद्दा बनी रहेगी।

  • भारत की बड़ी रणनीतिक पहल: अमेरिका के नेतृत्व वाले पैक्स सिलिका में शामिल होने के संकेत, सप्लाई चेन को मिलेगी वैश्विक मजबूती

    भारत की बड़ी रणनीतिक पहल: अमेरिका के नेतृत्व वाले पैक्स सिलिका में शामिल होने के संकेत, सप्लाई चेन को मिलेगी वैश्विक मजबूती


    नई दिल्ली। वैश्विक स्तर पर आपूर्ति श्रृंखलाओं को लेकर बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के बीच भारत एक अहम रणनीतिक कदम उठाने की तैयारी में नजर आ रहा है। रिपोर्ट्स के अनुसार भारत अमेरिका के नेतृत्व वाली पहल पैक्स सिलिका में शामिल हो सकता है। यह फैसला ऐसे समय पर सामने आ रहा है जब चीन और पश्चिमी देशों के बीच सेमीकंडक्टर और हाई-टेक सप्लाई चेन को लेकर खींचतान लगातार बढ़ रही है।पैक्स सिलिका में भारत की संभावित भागीदारी से देश को विकसित देशों के साथ तकनीकी साझेदारी आगे बढ़ाने बड़े पैमाने पर निवेश आकर्षित करने और रणनीतिक आपूर्ति श्रृंखलाओं को मजबूत करने में मदद मिल सकती है। हालांकि भारत इस प्रक्रिया में यह स्पष्ट करना चाहता है कि उसकी रणनीतिक स्वायत्तता पर कोई असर न पड़े और वह अपनी स्वतंत्र नीतिगत निर्णय क्षमता बनाए रखे।

    क्या है पैक्स सिलिका और इसका उद्देश्य
    पैक्स सिलिका उन देशों का समूह है जो सेमीकंडक्टर मैन्युफैक्चरिंग और एडवांस टेक्नोलॉजी की आपूर्ति श्रृंखलाओं में अहम भूमिका निभाते हैं। इस समूह में सिंगापुर इजराइल जापान दक्षिण कोरिया ऑस्ट्रेलिया और यूनाइटेड किंगडम जैसे देश शामिल हैं। इसका मुख्य उद्देश्य उपभोक्ता इलेक्ट्रॉनिक्स ऑटोमोबाइल और अत्याधुनिक एआई सिस्टम जैसी तकनीकों की रीढ़ मानी जाने वाली अत्यधिक केंद्रीकृत सप्लाई चेन की कमजोरियों को दूर करना है।बीते वर्षों में वैश्विक चिप संकट ने यह दिखा दिया है कि कुछ सीमित क्षेत्रों पर निर्भरता पूरी दुनिया के उद्योगों को प्रभावित कर सकती है। पैक्स सिलिका इसी निर्भरता को कम कर भरोसेमंद और विविध आपूर्ति नेटवर्क विकसित करने की दिशा में काम कर रहा है।

    भारत के लिए क्यों अहम है यह कदम

    भारत जैसे विकासशील बाजार के लिए यह पहल कई मायनों में फायदेमंद साबित हो सकती है। रिपोर्ट्स के मुताबिक नई दिल्ली सब्सिडी खरीद व्यवस्था में प्राथमिकता और संतुलित आयात नियमों के लिए नीतिगत गुंजाइश तलाश सकती है। हालांकि यह रुख कुछ पैक्स सिलिका सदस्य देशों के दृष्टिकोण से पूरी तरह मेल न भी खा सकता है।इसके बावजूद भारत पहले से ही जापान और सिंगापुर जैसे देशों के साथ लचीली सेमीकंडक्टर आपूर्ति श्रृंखला विकसित करने पर काम कर रहा है। यह दर्शाता है कि भारत वैश्विक टेक्नोलॉजी इकोसिस्टम में अपनी भूमिका को लेकर गंभीर और दीर्घकालिक सोच रखता है।

    अमेरिका का स्पष्ट संकेत

    नई दिल्ली में अपने पहले दिन भारत में नए अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने उन्नत प्रौद्योगिकी में अमेरिकी नेतृत्व वाली आपूर्ति श्रृंखला साझेदारी का जिक्र करते हुए पैक्स सिलिका में भारत को पूर्ण सदस्य के रूप में शामिल करने की घोषणा की थी। इसे भारत-अमेरिका रणनीतिक साझेदारी के लिहाज से एक अहम संकेत माना जा रहा है।

    भारत का सेमीकंडक्टर विजन

    इलेक्ट्रॉनिक्स और आईटी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने हाल ही में कहा था कि भारत संपूर्ण इलेक्ट्रॉनिक्स क्षेत्र-डिजाइन विनिर्माण ऑपरेटिंग सिस्टम एप्लिकेशन सामग्री और उपकरण-में एक प्रमुख वैश्विक खिलाड़ी बनने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। उन्होंने यह भी बताया कि देश में चार सेमीकंडक्टर प्लांट इस वर्ष वाणिज्यिक उत्पादन शुरू करेंगे।कुल मिलाकर पैक्स सिलिका में भारत की संभावित भागीदारी न सिर्फ आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत करेगी बल्कि भारत को वैश्विक टेक्नोलॉजी और सेमीकंडक्टर मैप पर एक अहम केंद्र के रूप में स्थापित करने में भी मदद कर सकती है।

  • ग्रीनलैंड विवाद पर रूस का कड़ा बयान, ट्रंप ने नोबेल यू-टर्न लिया; जानें आज की बड़ी खबरें

    ग्रीनलैंड विवाद पर रूस का कड़ा बयान, ट्रंप ने नोबेल यू-टर्न लिया; जानें आज की बड़ी खबरें


    नई दिल्ली। आज की टॉप खबरों में ग्रीनलैंड विवादट्रंप का नोबेल यू-टर्न और ठगी के मामले शामिल हैं। अंतरराष्ट्रीय और घरेलू राजनीति में उठापटक के बीच लोगों की नजरें इन घटनाओं पर टिक गई हैं।

    डेनमार्क का हिस्सा नहीं ग्रीनलैंडरूस का बयान

    ग्रीनलैंड विवाद ने वैश्विक राजनीति में नया तनाव पैदा कर दिया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बार-बार ग्रीनलैंड को खरीदने या नियंत्रण में लेने की बात कही और यूरोपीय संघ व डेनमार्क पर टैरिफ युद्ध की धमकी दी। अब रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने बयान देकर इस मुद्दे को और गरमा दिया। लावरोव ने कहा कि ग्रीनलैंड डेनमार्क का स्वाभाविक हिस्सा नहीं है और इसे लेकर रूस की अपनी स्थिति स्पष्ट है।

    मुझे नोबेल की कोई परवाह नहींट्रंप का यू-टर्न
    अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने कई बार शांति नोबेल पुरस्कार की इच्छा जाहिर की थीलेकिन अब उन्होंने पूरी तरह पलटी ले ली है। उन्होंने कहा कि उन्हें नोबेल पुरस्कार की कोई परवाह नहीं है। यह बयान उस चिट्ठी के लीक होने के बाद आयाजो उन्होंने नॉर्वे के प्रधानमंत्री को लिखी थी। इसमें उन्होंने स्पष्ट किया कि दुनिया में शांति की चिंता उनके लिए कोई बड़ी बात नहीं हैक्योंकि उन्हें शांति का नोबेल पुरस्कार तो मिला ही नहीं।

    जामिया प्रोफेसर पर हमलाआदिवासी युवक घायल
    दिल्ली की जामिया मिलिया इस्लामिया यूनिवर्सिटी का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ है। इसमें एक एसोसिएट प्रोफेसर ने अनुसूचित जनजाति के एक कर्मचारी को जमकर पीटामुंह भी तोड़ दिया और जातिसूचक गालियां दीं। इस मामले में पुलिस को मेडिकल रिपोर्ट और अन्य सबूतों के साथ लिखित शिकायत दर्ज कराई गई है।

    एलन मस्क के नाम पर ठगीशिमला का शख्स हुआ लाखों का शिकार

    हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला से ठगी का मामला सामने आया है। ठगों ने एलन मस्क के नाम का इस्तेमाल कर शख्स को फंसाया और लाखों रुपये ठग लिए। ठगी के चक्कर में पीड़ित को टेस्ला कारनकद राशि और 2.3 करोड़ रुपये के सोने का लालच दिया गया।

    दिल्ली-NCR में GRAP-4 हटायास्टेज-3 प्रतिबंध जारी
    दिल्ली-एनसीआर में प्रदूषण नियंत्रण के लिए लागू GRAP-4 प्रतिबंध हटा दिए गए हैं। वायु गुणवत्ता में सुधार के कारण यह फैसला लिया गया है। हालांकि स्टेज-1स्टेज-2 और स्टेज-3 के तहत लगाए गए कुछ प्रतिबंध अभी भी जारी रहेंगे।आज की इन खबरों ने अंतरराष्ट्रीय राजनीति और घरेलू मुद्दों पर लोगों की निगाहें टिकाए रखीं। रूस और अमेरिका की बयानबाजीशिक्षा संस्थानों में हिंसा और ठगी जैसे मामले लगातार चर्चा में बने हुए हैं

  • Draft NEP 2026: देश में बिजली की गुणवत्ता और किफायती आपूर्ति सुनिश्चित करने का बड़ा कदम, परामर्श के लिए सार्वजनिक किया गया

    Draft NEP 2026: देश में बिजली की गुणवत्ता और किफायती आपूर्ति सुनिश्चित करने का बड़ा कदम, परामर्श के लिए सार्वजनिक किया गया

    नई दिल्ली। सरकार ने बिजली क्षेत्र को भविष्य के लिए तैयार करने के उद्देश्य से ‘ड्राफ्ट नेशनल इलेक्ट्रिसिटी पॉलिसी (एनईपी) 2026’ को सार्वजनिक परामर्श के लिए जारी कर दिया है। इसका उद्देश्य देश में आर्थिक रूप से मजबूत, पर्यावरण के अनुकूल और भरोसेमंद बिजली व्यवस्था सुनिश्चित करना है। इस मसौदे पर सभी हितधारकों से सुझाव मांगे गए हैं। नीति को ‘विकसित भारत 2047’ के लक्ष्य को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है, जिसमें 2030 तक प्रति व्यक्ति बिजली खपत 2,000 यूनिट और 2047 तक 4,000 यूनिट से ज्यादा करने का लक्ष्य रखा गया है।

    स्वच्छ ऊर्जा और जलवायु प्रतिबद्धता
    ड्राफ्ट नीति भारत की जलवायु प्रतिबद्धताओं के अनुरूप भी है। इसके तहत 2030 तक कार्बन उत्सर्जन की तीव्रता को 2005 के स्तर से 45 प्रतिशत कम करने और 2070 तक नेट-जीरो उत्सर्जन का लक्ष्य हासिल करने की योजना है। इसके लिए स्वच्छ और कम कार्बन वाली ऊर्जा की ओर तेजी से बढ़ना जरूरी बताया गया है।

    राष्ट्रीय और राज्य स्तर पर योजना
    विद्युत मंत्रालय ने बताया कि नीति लागू होने के बाद यह 2005 की एनईपी की जगह लेगी। इसके तहत बिजली की मांग को समय पर पूरा करने के लिए डिस्कॉम और एसएलडीसी राज्य स्तर पर रिसोर्स एडिक्वेसी (आरए) प्लान तैयार करेंगे। वहीं, केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण (CEA) पूरे देश के लिए एक राष्ट्रीय योजना बनाएगा।

    बिजली दरों और सब्सिडी सुधार
    ड्राफ्ट नीति में कहा गया है कि बिजली टैरिफ को उपयुक्त इंडेक्स से जोड़ा जाना चाहिए, जिससे हर साल अपने आप संशोधन हो सके। इसके साथ ही फिक्स्ड लागत की भरपाई धीरे-धीरे डिमांड चार्ज के जरिए की जाएगी, ताकि अलग-अलग उपभोक्ताओं पर सब्सिडी का बोझ कम हो।

    उद्योगों के लिए राहत और प्रतिस्पर्धा बढ़ाना
    नीति में सुझाव दिया गया है कि मैन्युफैक्चरिंग उद्योग, रेलवे और मेट्रो रेलवे को क्रॉस-सब्सिडी और अतिरिक्त शुल्क से छूट दी जाए। इससे भारतीय उत्पादों की प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी और लॉजिस्टिक्स लागत कम होगी। साथ ही जिन उपभोक्ताओं का बिजली लोड 1 मेगावाट या उससे अधिक है, उनके लिए कुछ मामलों में यूनिवर्सल सर्विस ऑब्लिगेशन से छूट दी जा सकती है।

    विवाद निपटान और उपभोक्ता संरक्षण
    ड्राफ्ट नीति में विवाद निपटान व्यवस्था को मजबूत करने पर जोर दिया गया है, ताकि बिजली से जुड़े विवाद जल्दी सुलझें और उपभोक्ताओं पर आर्थिक बोझ कम हो।

    नवीकरणीय ऊर्जा को बढ़ावा
    नीति में रिन्यूएबल ऊर्जा को बढ़ावा देने के लिए बाजार आधारित तरीके अपनाने और कैप्टिव पावर प्लांट्स के जरिए नई क्षमता जोड़ने का सुझाव दिया गया है। छोटे उपभोक्ताओं के लिए स्टोरेज सुविधा डिस्कॉम के जरिए उपलब्ध कराई जाएगी, जिससे लागत कम होगी। इसके अलावा उपभोक्ता डिस्ट्रिब्यूटेड रिन्यूएबल एनर्जी (DRE) से बची हुई बिजली का व्यापार कर सकेंगे।

    परमाणु ऊर्जा में लक्ष्य
    शांति अधिनियम 2025 के तहत नीति में एडवांस न्यूक्लियर तकनीक, मॉड्यूलर रिएक्टर और छोटे परमाणु रिएक्टर का इस्तेमाल बढ़ाने और उद्योगों द्वारा परमाणु ऊर्जा का उपयोग कर 2047 तक 100 गीगावाट न्यूक्लियर ऊर्जा क्षमता हासिल करने की सिफारिश की गई है।

    इतिहास और प्रगति
    पहली राष्ट्रीय विद्युत नीति 2005 में बिजली की कमी, सीमित पहुंच और कमजोर ढांचे जैसी समस्याओं को दूर करने का लक्ष्य रखा गया था। तब से भारत के विद्युत क्षेत्र में अभूतपूर्व प्रगति हुई है। सरकार का कहना है कि ड्राफ्ट एनईपी 2026 एक ऐसा पूरा खाका है, जिससे देश के लोगों को सस्ती, भरोसेमंद और उच्च गुणवत्ता की बिजली मिल सकेगी।

  • Australian Open 2026: सबालेंका का दमदार प्रदर्शन, चीनी खिलाड़ी को हराकर तीसरे दौर में पहुंचीं

    Australian Open 2026: सबालेंका का दमदार प्रदर्शन, चीनी खिलाड़ी को हराकर तीसरे दौर में पहुंचीं

    नई दिल्ली। विश्व नंबर 1 टेनिस स्टार एरिना सबालेंका ने ऑस्ट्रेलियन ओपन 2026 में शानदार शुरुआत करते हुए तीसरे दौर में प्रवेश कर लिया है। उन्होंने चीनी क्वालिफायर बाई झूओक्सुआन को महज 32 मिनट में 6-3, 6-1 से हराया। मैच की शुरुआत में बाई पेस बनाने में कठिनाई महसूस कर रही थीं और पहले 15 मिनट में ही 0-5 से पीछे हो गईं। हालांकि, उन्होंने दो एस लगाकर अपनी स्थिति सुधारने की कोशिश की और शुरुआती सेट में सबालेंका की पकड़ थोड़ी ढीली भी हुई। बाई ने तीसरे गेम में तीन ब्रेक पॉइंट बचाए, लेकिन सबालेंका ने अपने दबदबे को कायम रखा और सेट जीतकर बढ़त बना ली।

    दूसरे राउंड की बढ़त और रिकॉर्ड तोड़ जीत
    दूसरे राउंड में सबालेंका ने फिर जोरदार प्रदर्शन करते हुए 4-0 से बढ़त बनाई और अंततः 74 मिनट में मैच जीतकर तीसरे राउंड में जगह पक्की की। अब उनका मुकाबला 28वीं सीड एम्मा राडुकानू या अनास्तासिया पोटापोवा से होगा। इस जीत के साथ सबालेंका ने अपनी 25वीं एकल मैच जीत दर्ज की और वह 2000 के बाद यह उपलब्धि हासिल करने वाली छठी महिला खिलाड़ी बन गई हैं। इस मुकाम से पहले सेरेना विलियम्स, लिंडसे डेवनपोर्ट, जस्टिन हेनिन, ऐश बार्टी और इगा स्वियाटेक तक ही पहुँच पाई थीं। दो बार की ऑस्ट्रेलियन ओपन चैंपियन सबालेंका ने लगातार सातवीं जीत दर्ज की और 2026 का सीजन बेहतरीन अंदाज में शुरू किया। वह लगातार छठे साल तीसरे राउंड तक पहुँच रही हैं और दूसरे राउंड में उनका रिकॉर्ड भी 7-0 का है।

    एलिना स्वितोलिना का फॉर्म जारी: तीसरे राउंड में जगह बनाई
    सबालेंका की जीत के साथ ही एलिना स्वितोलिना ने भी 2026 सीजन में अपने शानदार फॉर्म को जारी रखा। उन्होंने लिंडा क्लिमोविकोवा को 7-5, 6-1 से हराकर तीसरे राउंड में प्रवेश किया। अब उनका सामना डायना श्नैडर से होगा। श्नैडर ने ऑस्ट्रेलियाई वाइल्डकार्ड टैलिया गिब्सन के खिलाफ 3-6, 7-5, 6-3 से जीत दर्ज की, जिसमें उन्होंने दो मैच पॉइंट बचाए और जीत सुनिश्चित की।

    महिलाओं के सिंगल्स ड्रॉ में रोमांच और आगे की लड़ाई
    सबालेंका और स्वितोलिना की जीत ने महिलाओं के सिंगल्स ड्रॉ को और रोमांचक बना दिया है। तीसरे राउंड में उनका प्रदर्शन यह तय करेगा कि कौन ग्रैंड स्लैम में अगले राउंड में दबदबा दिखा पाएगा। ऑस्ट्रेलियन ओपन में अब तक की इस शानदार शुरुआत के बाद सबालेंका की गति और फोकस उन्हें शीर्ष फेवरेट बनाए हुए हैं। वहीं, स्वितोलिना की रणनीति और अनुभव भी उनके लिए मैचों को आसान बनाने में मदद कर रही है।

    रोचक तथ्य और रिकॉर्ड्स
    सबालेंका की लगातार सातवीं जीत, लगातार छठे साल तीसरे राउंड तक पहुंचना और 25वीं एकल मैच जीत ने उन्हें महिला टेनिस की चमकती हुई सितारा बना दिया है। वहीं, स्वितोलिना की जीत में लगातार अच्छा प्रदर्शन और मैच पॉइंट बचाने की क्षमता ने उनके आत्मविश्वास को और बढ़ा दिया है। इस टूर्नामेंट में अब हर मैच महत्वपूर्ण है और तीसरे राउंड में आने वाले मुकाबले दर्शकों के लिए रोमांचक होंगे।

  • यूक्रेन-युद्ध के बीच पुतिन को भी 'गाजा शांति बोर्ड' में शामिल होने का न्योता

    यूक्रेन-युद्ध के बीच पुतिन को भी 'गाजा शांति बोर्ड' में शामिल होने का न्योता

     जिस पर विचार किया जा रहा है। क्रेमलिन ने सोमवार को यह जानकारी दी। ‘क्रेमलिन’ (रूस के राष्ट्रपति का आधिकारिक आवास एवं कार्यालय) के प्रवक्ता दिमित्री पेस्कोव ने पत्रकारों को बताया, ‘‘वास्तव में, राष्ट्रपति पुतिन को भी राजनयिक चैनलों के माध्यम से इस शांति बोर्ड में शामिल होने का प्रस्ताव मिला था।’’

    उन्होंने कहा, ‘‘हम फिलहाल इस प्रस्ताव के सभी विवरणों का अध्ययन कर रहे हैं और सभी विवरणों को स्पष्ट करने के लिए अमेरिकी पक्ष से संपर्क किए जाने की उम्मीद है।’’ कई अन्य देशों को भी अमेरिका से इस संस्था में शामिल होने के प्रस्ताव मिले हैं। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और उनके पाकिस्तानी समकक्ष शहबाज शरीफ को भी शांति बोर्ड में शामिल होने का आमंत्रण मिला है।

    अमेरिकी राष्ट्रपति ने गाजा पट्टी में इजराइल और हमास के बीच युद्धविराम समझौते के दूसरे चरण के तहत इस बोर्ड का की शुरुआत की। इजराइल और हमास ने अक्टूबर में ट्रंप की शांति योजना पर सहमति जताई। अमेरिका इस बोर्ड को गाजा और उसके बाहर शांति एवं स्थिरता लाने के लिए एक नए अंतरराष्ट्रीय निकाय के रूप में पेश कर रहा है, जिससे अटकलें लगाई जा रही हैं कि यह अन्य वैश्विक संघर्षों पर भी प्रतिक्रिया दे सकता है।

    रूस के ‘चैनल-1 टीवी’ ने सोमवार को अपने राजनीतिक कार्यक्रम ‘प्रयामोई एफिर’ (लाइव ब्रॉडकास्ट) में कहा, ‘‘रूस गाजा शांति बोर्ड को संयुक्त राष्ट्र संगठन का प्रतिद्वंद्वी बनाने की अमेरिकी कोशिश के रूप में देखता है, जिसका अधिकार क्षेत्र अधिक व्यापक होगा।’’

    क्या हैं रूस को आमंत्रण देने के मायने
    रूस को आमंत्रण देने के कई मायने निकाले जा रहे हैं।

    अमेरिका में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के पदभार ग्रहण करने के बाद से ही वह रूस के प्रति नरमी बरत रहे हैं। वहीं वह यूक्रेन पर रूस से शांति वार्ता के लिए दबाव बना चुके हैं। ऐसे में एक देश पर आक्रमण करने वाले देश को शांति बोर्ड में जगह देने के कई मायने हो सकते हैं। लंबे समय से रूस और अमेरिका के बीच चली आ रही तनातनी के बाद भी यह विदेश नीति में भी बड़ा बदलाव कहा जा सकता है। अमेरिका राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप यूक्रेन से शांति वार्ता करने के लिए राष्ट्रपति पुतिन से मुलाकात भी कर चुके हैं।
  • आसिम मुनीर का इशारा, जिस मकसद से बना पाकिस्तान वो हासिल करेंगे

    आसिम मुनीर का इशारा, जिस मकसद से बना पाकिस्तान वो हासिल करेंगे

    लाहोर। पाकिस्तान के चीफ ऑफ डिफेंस, फील्ड मार्शल आसिम मुनीर का एक बयान काफी चर्चा में है। इस बयान में आसिम मुनीर ने कहा कि पाकिस्तान इस्लाम के नाम पर अस्तित्व में आया था। अब वह इस मोड़ पर है, जहां वह अपने इस लक्ष्य को हासिल कर सकता है। खास बात यह है कि जब मुनीर ने यह बात कही तब वहां पर प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ, पूर्व प्रधानमंत्री नवाज शरीफ, पंजाब की मुख्यमंत्री मरियम नवाज समेत कई अन्य वरिष्ठ सिविल और मिलिट्री अधिकारी मौजूद थे। इसके अलावा कैबिनेट मंत्री, पॉलिटिकल लीडर्स और शरीफ परिवार के सदस्य मौजूद थे। मौका था, नवाज शरीफ के नाती और मरियम नवाज के बेटे जुनैद सफदर की शादी का रिसेप्शन का।

    कहां बोल रहे थे मुनीर
    इस दौरान पत्रकारों से बात करते हुए आसिम मुनीर ने कहा कि पाकिस्तान तेजी से अपने लक्ष्य की तरफ बढ़ रहा है।

    इंडिया टुडे के मुताबिक मुनीर ने कहा कि पाकिस्तान को इस्लाम के नाम पर बनाया गया था। आज यह इस्लामिक देशों में अलग अहमियत रखता है। उन्होंने आगे कहा कि अल्लाह के रास्ते पर आगे बढ़ना खास नियामत है। पाकिस्तान ने हाल के दिनों में मुस्लिम एकता के नाम पर कुछ देशों से डिफेंस और फाइनेंस की डील की है। इन देशों में सऊदी अरब और तुर्की का नाम प्रमुख है। इसके अलावा पाकिस्तान इस्लामिक नाटो बनाने की भी योजना बना रहा है।

    अंतर्राष्ट्रीय पहचान की बात
    इतना ही नहीं, मुनीर ने अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर पाकिस्तान का दबदबा बढ़ाने की बात की। संभवत: वह डोनाल्ड ट्रंप के साथ वाइट हाउस में मीटिंग और डिनर की तरफ इशारा कर रहे थे। इसके अलावा पाकिस्तान के गाजा पीस में शामिल होने का भी उन्होंने जिक्र किया। इतना ही नहीं, मुनीर ने यह भी बताने की कोशिश की कि मई 2025 में भारत के साथ युद्ध में पाकिस्तान हावी रहा था।

    कैसे अलग हैं मुनीर
    बता दें कि फील्ड मार्शल आसिम मुनीर अपने पूर्ववर्तियों से काफी अलग हैं। पिछले आर्मी चीफ ज्यादातर सैंडहर्स्ट-प्रशिक्षित अधिकारी थे, जो औपचारिक रूप से राजनीति और धर्म दोनों से दूर रहते थे, और उन्हें पश्चिमी संगीत और व्हिस्की का शौक था। इसके उलट मुनीर, हाफिए-ए-कुरान हैं। हाफिज-ए-कुरान उसे कहते हैं, जिसे कुरान याद है। ऐसे में मुनीर के लिए धर्म एक बड़ा आधार है। मुनीर, मिलिट्री इंटेलीजेंस और आईएसआई दोनों के मुखिया हैं। उनके पद ग्रहण करने के बाद से ही पाकिस्तानी सेना में धर्म की तरफ रुझान दिखाई देने लगा है।

    सेना में धर्म का बढ़ता प्रभाव
    मुनीर के नेतृत्व में, सेना ने न केवल राज्य की रक्षा करने के रूप में ही नहीं, बल्कि इस्लाम की रक्षा करने के रूप में भी अधिक स्पष्ट रूप से प्रस्तुत किया है। इसमें 7वीं सदी के अरबी और इस्लामी प्रतीकों का भारी इस्तेमाल किया गया है। सशस्त्र विरोधियों, जिनमें बलोचिस्तान और खैबर पख्तूनख्वा के विद्रोही शामिल हैं, को ‘फितना अल-खवारिज’ और ‘फितना अल-हिंदुस्तान’ कहा गया है, जिससे उन्हें धर्मभ्रष्ट विद्रोही और भारतीय दलाल के रूप में चित्रित किया गया है।

  • बांग्लादेश में भारत विरोधी खुलासा, चीनी राजदूत को ‘चिकन नेक’ के पास लेकर गई यूनुस सरकार

    बांग्लादेश में भारत विरोधी खुलासा, चीनी राजदूत को ‘चिकन नेक’ के पास लेकर गई यूनुस सरकार

    बांग्लादेश में भारत विरोधी खुलासा, चीनी राजदूत को ‘चिकन नेक’ के पास लेकर गई यूनुस सरकार
    ढाका । भारत-बांग्लादेश संबंधों में जारी तनाव के बीच एक महत्वपूर्ण घटना सामने आई है। बांग्लादेश की अंतरिम सरकार ने चीन के राजदूत याओ वेन को तीस्ता नदी परियोजना क्षेत्र में जाने की अनुमति दी, जो भारत के रणनीतिक सिलीगुड़ी कॉरिडोर के बेहद करीब स्थित है। इसे ‘चिकन नेक’ के नाम से भी जाना जाता है। यह 22 किलोमीटर चौड़ा संकरा भू-भाग भारत की मुख्य भूमि को पूर्वोत्तर राज्यों से जोड़ता है।

    चीनी राजदूत याओ वेन ने सोमवार को रंगपुर जिले के कौनिया उपजिला में तीस्ता नदी के कटाव प्रभावित क्षेत्र का दौरा किया। इस दौरान बांग्लादेश की पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन सलाहकार सैयदा रिजवाना हसन उनके साथ थीं।

    मुहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली बांग्लादेश की अंतरिम सरकार ने कहा है कि चीनी राजदूत का यह दौरा तीस्ता रिवर कॉम्प्रिहेंसिव मैनेजमेंट एंड रेस्टोरेशन प्रोजेक्ट (TMP) के तहत चल रहे तकनीकी मूल्यांकन से जुड़ा हुआ है। यूनुस पिछले साल चीन में दिए गए अपने उस बयान को लेकर विवादों में रहे थे, जिसमें उन्होंने चीनी अर्थव्यवस्था के विस्तार और भारत के लैंडलॉक्ड पूर्वोत्तर की बात कही थी- इन टिप्पणियों की गूंज दिसंबर में ढाका सहित कई बांग्लादेशी शहरों में हुए भारत-विरोधी प्रदर्शनों तक सुनाई दी थी, जहां भारतीय राजनयिक ठिकानों को निशाना बनाया गया।
    चीन जल्द कार्यान्वयन का इच्छुक

    बांग्लादेश की जल संसाधन सलाहकार सैयदा रिजवाना हसन ने कहा कि चीन तीस्ता मास्टर प्लान (TMP) को जल्द से जल्द लागू करने का इच्छुक है। उनके अनुसार- बांग्लादेश और चीन दोनों ही TMP को अमल में लाने के लिए प्रतिबद्ध हैं। हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि परियोजना की जांच-परख (स्क्रूटनी) की प्रक्रिया अभी पूरी नहीं हुई है, इसलिए फिलहाल काम शुरू करना संभव नहीं है।
    भारत और पश्चिम बंगाल की चिंताएं

    बांग्लादेश के उत्तरी जिलों में कृषि और आजीविका के लिए तीस्ता नदी जीवनरेखा मानी जाती है। लेकिन भारत के लिए- खासतौर पर पश्चिम बंगाल के लिए भी यह नदी उतनी ही अहम है। इसी कारण तीस्ता जल-बंटवारे को लेकर दशकों से बातचीत चल रही है, मगर पश्चिम बंगाल सरकार की चिंताओं के चलते अंतिम समझौता अब तक नहीं हो सका है।

    ढाका-बीजिंग बातचीत

    रविवार को चीनी राजदूत याओ वेन और बांग्लादेश के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार खलीलुर रहमान के बीच हुई बैठक के बाद यूनुस की प्रेस विंग ने सोशल मीडिया मंच X पर बताया- दोनों पक्षों ने साझा हितों के मुद्दों पर विचारों का आदान-प्रदान किया और बांग्लादेश–चीन की दीर्घकालिक मित्रता व विकास सहयोग की पुष्टि की।

    पोस्ट के मुताबिक, बातचीत में तीस्ता रिवर कॉम्प्रिहेंसिव मैनेजमेंट एंड रेस्टोरेशन प्रोजेक्ट और प्रस्तावित बांग्लादेश–चीन फ्रेंडशिप हॉस्पिटल जैसे मुद्दे भी शामिल थे। इसमें यह भी कहा गया कि चीनी राजदूत ने परियोजना क्षेत्र का दौरा करने की जानकारी दी और तकनीकी मूल्यांकन को तेजी से पूरा करने की चीन की प्रतिबद्धता दोहराई।

    बांग्लादेश सरकार ने बताया कि चीनी राजदूत ने देश के लोकतांत्रिक बदलाव के लिए अपने देश का समर्थन जताया और आगामी राष्ट्रीय चुनावों के सफल आयोजन की शुभकामनाएं भी दीं। गौरतलब है कि 2024 में मुख्य सलाहकार नियुक्त किए गए मुहम्मद यूनुस ने 2025 में चीन में दिए एक इंटरव्यू में बीजिंग से बांग्लादेश में मजबूत आर्थिक ढांचे के निर्माण का आह्वान किया था। उन्होंने बांग्लादेश को क्षेत्र में समुद्र का एकमात्र संरक्षक बताते हुए उसके रणनीतिक महत्व का जिक्र किया था।

    सिलीगुड़ी कॉरिडोर भारत के लिए रणनीतिक गला है, क्योंकि कोई भी व्यवधान पूर्वोत्तर के लगभग 5 करोड़ लोगों की सुरक्षा को खतरे में डाल सकता है। यह क्षेत्र नेपाल, भूटान, बांग्लादेश और चीन से घिरा हुआ है। हाल के महीनों में बांग्लादेश द्वारा लालमोनिरहाट पुराने एयरबेस को सक्रिय करने और चीन की संभावित भागीदारी की खबरें भी भारत के लिए चिंता का विषय रही हैं।

  • ट्रंप की ग्रीनलैंड पर कब्जे की धमकी… अमेरिका ने पिटुफिक स्पेस बेस पर भेजा मिलिट्री एयरक्राफ्ट

    ट्रंप की ग्रीनलैंड पर कब्जे की धमकी… अमेरिका ने पिटुफिक स्पेस बेस पर भेजा मिलिट्री एयरक्राफ्ट


    वाशिंगटन।
    अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (American President Donald Trump) की ग्रीनलैंड पर (Occupation of Greenland) कब्जा करने की धमकियों के बीच अब अमेरिका ने एक ऐसा कदम उठाया जिससे तनाव और बढ़ गया है। अमेरिका ने हाल ही में ग्रीनलैंड के पिटुफिक स्पेस बेस (Pitufik Space Base) पर एक नॉर्थ अमेरिकन एयरोस्पेस डिफेंस कमांड (NORAD) विमान की तैनाती कर दी है। मिलिट्री एयरक्राफ्ट की तैनाती को लेकर अमेरिका का कहना है कि यह विमान अपने पुराने लक्ष्य को हासिल करने में मदद करेगा। अमेरिका ने यह भी कहा कि यह कार्रवाई डेनमार्क और ग्रीनलैंड को बताकर की गई है।

    बता दें कि पिटुफिक स्पेस बेस एक अहम अमेरिकी मिलिट्री इंस्टॉलेशन और कम्युनिकेशन हब है। यहां एक मिसाइल वॉर्निंग सिस्टम भी है जो उत्तर अमेरिका की सुरक्षा के लिए बहुत जरूरी है। वहीं हाई आर्कटिक में इसकी लोकेशन को वजह से इस क्षेत्र में इसका अहम रणनीतिक महत्व है।

    अमेरिका से पहले डेनमार्क ने भी ग्रीनलैंड में अपनी मिलिट्री मौजूदगी बढ़ा दी है। रिपोर्ट्स के मुताबिक सोमवार को कई डेनिश सैनिकों और मिलिट्री उपकरणों को ले जाने वाले कई विमान द्वीप पर उतारे गए हैं। डेनिश रक्षा बलों ने बताया है कि देश की सेना प्रमुख के साथ सैनिकों की एक बड़ी टुकड़ी को नुक और कांगेरलुसुआक में तैनात किया गया है। इससे पहले यहां डेनिश सुरक्षा बलों के नेतृत्व में एक मल्टीनेशनल मिलिट्री एक्सरसाइज भी हुआ था।

    ट्रंप ने लगाया 10 फीसदी टैरिफ
    इससे पहले अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने डेनमार्क, फिनलैंड, फ्रांस, जर्मनी, नीदरलैंड्स, नॉर्वे, स्वीडन और ब्रिटेन पर 10 फीसदी अतिरिक्त आयात शुल्क लगाने की घोषणा की थी। ट्रंप ने इन देशों द्वारा ग्रीनलैंड की राजधानी नूक में ‘ऑपरेशन आर्कटिक एंड्योरेंस’ नाम के एक सैन्य अभ्यास के तहत सैनिक तैनात करने के बाद यह कदम उठाया।

    नाटो देशों का कहना है कि यह तैनाती ग्रीनलैंड की स्वायत्तता के समर्थन के लिए की गई थी, खासकर उन रिपोर्टों के बाद, जिनमें दावा किया गया था कि ट्रंप प्रशासन संसाधन-समृद्ध इस आर्कटिक द्वीप को “राष्ट्रीय सुरक्षा कारणों” से अपने अधीन करना चाहता है। इसके जवाब में ट्रंप ने कहा कि यह आयात शुल्क एक फरवरी से लागू होगा और एक जून से बढ़ाकर 25 प्रतिशत कर दिया जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि यह शुल्क तब तक लागू रहेगा जब तक ग्रीनलैंड की पूर्ण और सम्पूर्ण खरीद को लेकर कोई समझौता नहीं हो जाता।

    यूरोपीय नेताओं ने प्रस्तावित आयात शुल्क की कड़ी निंदा की है और चेतावनी दी कि इस तरह के कदम अटलांटिक पार संबंधों को कमजोर कर सकते हैं और एक खतरनाक गिरावट के चक्र को जन्म दे सकते हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि डेनमार्क के नेतृत्व वाला सैन्य अभ्यास आवश्यक सुरक्षा जरूरतों के जवाब में है और इससे किसी को कोई खतरा नहीं है।

  • US-भारत ट्रेड डील पर रोड़ा बन सकती है दाल… इंपोर्ट ड्यूटी लगाने से अमेरिका को लगी मिर्ची

    US-भारत ट्रेड डील पर रोड़ा बन सकती है दाल… इंपोर्ट ड्यूटी लगाने से अमेरिका को लगी मिर्ची


    वाशिंगटन।
    अमेरिका और भारत (America and India) के बीच ट्रेड डील (Trade deal) एक बार फिर अटकती नजर आ रही है। इस बार इस डील के रास्ते में रोड़ा बनी है दाल। दो अमेरिकी सांसदों ने इसको लेकर राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (President Donald Trump) को पत्र लिखा है। इसमें ट्रंप से कहा गया है कि वो भारत पर दबाव बनाएं कि अमेरिकी दालों (American pulses) के आयात से 30 फीसदी इंपोर्ट ड्यूटी (30 Percent Import Duty) हटाई जाए। अमेरिकी सांसदों ने भारत द्वारा लगाई गई इंपोर्ट ड्यूटी को गैर-जरूरी बताया गया है। साथ ही इनका यह भी कहना है कि इसकी वजह से अमेरिकी उत्पादकों को काफी नुकसान हो रहा है। बता दें कि भारत ने यह आयात शुल्क अमेरिका द्वारा भारत पर 50 फीसदी टैरिफ लगाने के बाद लगाया है। आशंका है कि इसके चलते अमेरिका-भारत के बीच चल रही ट्रेड डील फिर पटरी से उतर सकती है।


    सांसदों के लेटर में क्या कहा गया

    अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को यह पत्र रिपब्लिकन सीनेटरों ने लिखे हैं। इनमें से एक हैं मोंटाना से स्टीव डेन्स और दूसरे हैं उत्तरी डकोटा से केविन क्रेमर। पत्र में कहा गया है कि उनके राज्य दो बड़े दाल उत्पादकों में से हैं, जिसमें मटर भी शामिल है। भारत इनका सबसे बड़ा उपभोक्ता है, जो विश्व का 27 फीसदी है। इसके मुताबिक भारत में लेंटिल्स, चिकपीज, सूखी दालों और मटर की सबसे ज्यादा खपत है। लेकिन भारत ने इन श्रेणियों में अमेरिकी निर्यात पर टैरिफ लगा रखा है। अमेरिकी सांसदों ने कहा कि भारत ने पिछले साल 30 अक्टूबर को पीली दाल पर भी 30 फीसदी टैरिफ लगा दिया।


    पीएम मोदी से बात करने की सलाह

    अमेरिकी सांसदों ने भारत द्वारा लगाए गए टैरिफ को अनफेयर बताते हुए अमेरिकी दाल उत्पादकों को नुकसान होने की बात कही है। साथ ही अमेरिकी सांसदों ने राष्ट्रपति ट्रंप को सलाह दी है कि वह दाल पर भारत द्वारा लगाए गए टैरिफ को लेकर पीएम मोदी से बात करें। ताकि दोनों देशों के बीच एक सहयोग बने, जिससे अमेरिकी उत्पादकों और भारतीय उपभोक्ताओं दोनों को फायदा मिल सके। दोनों सीनेटरों ने अपने राज्यों में बेहतर कृषि उत्पादों के लिए अमेरिकी राष्ट्रपति का शुक्रिया भी अदा किया।


    लंबे समय से तनाव

    बता दें कि टैरिफ के मुद्दे पर भारत और अमेरिका के बीच लंबे समय से तनाव कायम है। इसकी शुरुआत अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा भारत पर 50 प्रतिशत शुल्क (टैरिफ) लगाने के बाद हुई। इस टैरिफ में रूसी कच्चे तेल की खरीद पर 25 प्रतिशत का अतिरिक्त शुल्क भी शामिल है। इन तनावों के बीच अमेरिकी अधिकारियों द्वारा भारत के प्रति गलत टिप्पणियां माहौल को और खराब कर रही हैं। कुछ दिन पहले ही वाइट हाउस के व्यापार सलाहकार पीटर नवारो ने एक बार फिर भारत की आलोचना करते हुए सवाल उठाया कि अमेरिका के नागरिक भारत में कृत्रिम मेधा (एआई) के लिए भुगतान क्यों कर रहे हैं?