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  • रूपपुर परमाणु संयंत्र के लिए यूरेनियम की खेप अटकी, पाकिस्तानी एयरस्पेस मंजूरी नहीं मिलने से विमान बांग्लादेश नहीं पहुंच सका

    रूपपुर परमाणु संयंत्र के लिए यूरेनियम की खेप अटकी, पाकिस्तानी एयरस्पेस मंजूरी नहीं मिलने से विमान बांग्लादेश नहीं पहुंच सका

    नई दिल्ली ।बांग्लादेश के रूपपुर न्यूक्लियर पावर प्लांट के लिए रूस से भेजी जा रही यूरेनियम की खेप तय समय पर नहीं पहुंच सकी है। यूनिट-2 के लिए न्यूक्लियर फ्यूल लेकर आने वाले कार्गो विमान को पाकिस्तानी एयरस्पेस इस्तेमाल करने की मंजूरी नहीं मिलने के कारण उसकी उड़ान प्रभावित हुई। अब यूरेनियम की नई खेप अक्टूबर के पहले सप्ताह में बांग्लादेश पहुंचने की उम्मीद जताई गई है।

    बांग्लादेश के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्री फकीर महबूब अनाम के मुताबिक, यूरेनियम लेकर आने वाले कार्गो विमान के 24 सितंबर को बांग्लादेश पहुंचने की उम्मीद थी। हालांकि, पाकिस्तानी एयरस्पेस के इस्तेमाल की अनुमति नहीं मिलने के कारण विमान तय कार्यक्रम के अनुसार नहीं पहुंच सका।

    एयरस्पेस क्लियरेंस नहीं मिलने की वजह फिलहाल स्पष्ट नहीं है। मंत्री ने बताया कि यूरेनियम की डिलीवरी के लिए नई तारीख प्रस्तावित की गई है और रूस की ओर से इसके अक्टूबर के पहले सप्ताह में बांग्लादेश पहुंचने की बात कही गई है।

    इस मामले में बांग्लादेश के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय के संयुक्त सचिव शेख मोहम्मद तौहिदुल इस्लाम ने भी जानकारी दी। उन्होंने बताया कि विमान के आने से पहले एयरपोर्ट पर आवश्यक तैयारियां पूरी कर ली गई थीं और अधिकारी उसके पहुंचने का इंतजार कर रहे थे।

    उनके अनुसार, रोसाटॉम के संपर्क अधिकारी ने जानकारी दी कि एयरस्पेस क्लियर नहीं है। इसके चलते यूरेनियम को भेजना संभव नहीं हो सका। अब खेप की उड़ान को दोबारा निर्धारित किया जाना पड़ सकता है। हालांकि, इस दौरान यह स्पष्ट नहीं हो सका कि किस देश की ओर से एयरस्पेस को ब्लॉक किया गया था।

    रूपपुर न्यूक्लियर पावर प्लांट बांग्लादेश का पहला परमाणु ऊर्जा संयंत्र है। इसका निर्माण रूस की स्टेट एटॉमिक एनर्जी कॉरपोरेशन रोसाटॉम की तकनीकी सहायता से किया जा रहा है। परियोजना की निगरानी बांग्लादेश एटॉमिक एनर्जी कमीशन कर रहा है।

    यह संयंत्र बांग्लादेश के पाबना जिले के ईश्वरडी उपजिला के पाकशी यूनियन में पद्मा नदी के किनारे रूपपुर गांव में बनाया जा रहा है। परियोजना में तीसरी पीढ़ी के दो VVER-1200 रिएक्टर लगाए जा रहे हैं। दोनों रिएक्टरों की संयुक्त क्षमता 2,400 मेगावाट बेसलोड बिजली उत्पादन की होगी।

    रूपपुर परियोजना की यूनिट-1 के लिए लो-एनरिच्ड यूरेनियम फ्यूल की पहली खेप पहले ही रूस से बांग्लादेश पहुंच चुकी है। इस खेप में 164 नए फ्यूल असेंबली शामिल थे। इन्हें रूस के नोवोसिबिर्स्क केमिकल कंसंट्रेट्स प्लांट में तैयार किया गया था और भारी क्षमता वाले रूसी कार्गो विमान के जरिए ढाका के हजरत शाहजलाल इंटरनेशनल एयरपोर्ट लाया गया था।

    ढाका पहुंचने के बाद रेडिएशन-शील्डेड कंटेनरों को कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच पाबना के ईश्वरडी स्थित रूपपुर प्लांट तक पहुंचाया गया था। इसके लिए बांग्लादेश सेना और कानून-प्रवर्तन एजेंसियों की निगरानी में विशेष ग्रीन कॉरिडोर बनाया गया था।

    अक्टूबर 2023 में प्लांट साइट पर यूरेनियम फ्यूल के आधिकारिक हैंडओवर का समारोह भी आयोजित किया गया था। अब यूनिट-2 के लिए आने वाली नई खेप की डिलीवरी एयरस्पेस क्लियरेंस से जुड़ी समस्या के कारण निर्धारित समय से आगे खिसक गई है। रूस की ओर से इसे अक्टूबर के पहले सप्ताह में बांग्लादेश पहुंचाने की नई समयसीमा बताई गई है।

  • ट्रंप प्रशासन की चुनावी शर्तों पर कोर्ट की रोक, एंटी-टेरर फंडिंग को चुनावी बदलावों से जोड़ने पर फटकार

    ट्रंप प्रशासन की चुनावी शर्तों पर कोर्ट की रोक, एंटी-टेरर फंडिंग को चुनावी बदलावों से जोड़ने पर फटकार


    वाशिंगटन। अमेरिका में चुनावी नियमों को लेकर डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन को संघीय अदालत से झटका लगा है। वॉशिंगटन डीसी के अमेरिकी जिला न्यायाधीश अमीर एच. अली ने ट्रंप प्रशासन की उस नीति पर रोक लगा दी, जिसके तहत राज्यों और स्थानीय सरकारों को मिलने वाली आतंकवाद-रोधी (एंटी-टेरर) फंडिंग को चुनावी नियमों में बदलाव से जोड़ा गया था। 28 सितंबर को दिए गए 24 पेज के फैसले में अदालत ने कहा कि संघीय एजेंसियों के पास कांग्रेस से मिली ऐसी शर्तें लगाने की वैधानिक अनुमति नहीं थी।

    यह मामला करीब 1.1 अरब डॉलर के Homeland Security Grant Program से जुड़ा है। इस कार्यक्रम के तहत राज्यों और स्थानीय सरकारों को आतंकवादी हमलों और अन्य सुरक्षा खतरों से निपटने के लिए फंड दिया जाता है। ट्रंप प्रशासन ने फंडिंग की शर्तों में चुनाव संबंधी कई बदलाव शामिल किए थे। इनमें कुछ इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग सिस्टम को हाथ से चिह्नित पेपर बैलेट से बदलना, चुनाव परिणामों के मैनुअल ऑडिट और मतदाता सूची में नागरिकता की जांच जैसी शर्तें शामिल थीं।

    20 फीसदी फंड रोकने की थी शर्त

    FEMA की ओर से जारी फंडिंग नियमों में कहा गया था कि तय चुनावी शर्तों को पूरा नहीं करने वाले राज्यों और शहरी क्षेत्रों की करीब 20 फीसदी ग्रांट राशि रोकी जा सकती है। शर्तों में मतदाताओं और चुनावकर्मियों की नागरिकता की जांच के लिए संघीय डेटाबेस के इस्तेमाल तथा मतदान प्रणाली और चुनावी ऑडिट में बदलाव जैसी आवश्यकताएं शामिल थीं।

    प्रशासन का तर्क था कि इन बदलावों का उद्देश्य चुनावों को विदेशी हस्तक्षेप और साइबर हमलों से सुरक्षित करना है। हालांकि, स्थानीय सरकारों ने अदालत में चुनौती देते हुए कहा कि FEMA को आतंकवाद-रोधी फंड के बदले चुनावी व्यवस्था में बदलाव कराने का अधिकार नहीं है।

    जज बोले- FEMA को चुनावी नियम तय करने का अधिकार नहीं

    जज अमीर अली ने अपने फैसले में कहा कि कांग्रेस ने FEMA को आतंकवाद और अन्य सुरक्षा खतरों से महत्वपूर्ण ढांचे की रक्षा के लिए अनुदान देने का अधिकार दिया है, लेकिन इस अधिकार का इस्तेमाल चुनाव प्रशासन के नियम तय करने के लिए नहीं किया जा सकता। अदालत के अनुसार, चुनावी बदलावों की शर्तें उस ग्रांट के मूल उद्देश्य से पर्याप्त रूप से जुड़ी हुई नहीं थीं।

    अदालत ने इस तरह FEMA को एंटी-टेरर ग्रांट के जरिए राज्यों और स्थानीय निकायों पर चुनावी बदलाव लागू कराने से रोक दिया।

    ओहायो, टेनेसी और टेक्सास के स्थानीय निकायों ने की थी चुनौती

    यह मुकदमा ओहायो के कोलंबस, टेनेसी के नैशविल और डेविडसन काउंटी तथा टेक्सास की हैरिस, एल पासो, ट्रैविस और डलास काउंटी समेत स्थानीय सरकारों की ओर से दायर किया गया था। उनका आरोप था कि DHS और FEMA ने कांग्रेस द्वारा दिए गए अधिकारों से आगे जाकर चुनाव प्रशासन को प्रभावित करने की कोशिश की।

    अदालत का फैसला ऐसे समय आया है जब अमेरिका में नवंबर के मध्यावधि चुनावों से पहले चुनावी नियमों को लेकर संघीय सरकार और राज्यों के बीच कई कानूनी विवाद चल रहे हैं। इस मामले में अदालत ने फिलहाल यह स्पष्ट कर दिया है कि एंटी-टेररिज्म फंडिंग को चुनावी नियमों में बदलाव की शर्त से जोड़ने के लिए FEMA को कांग्रेस की ओर से पर्याप्त वैधानिक अधिकार नहीं मिला था।

  • एलन मस्क की स्पेसएक्स ने रचा नया इतिहास, स्टारशिप पहली बार पृथ्वी की कक्षा में पहुंचा, 26 स्टारलिंक V3 सैटेलाइट भी तैनात

    एलन मस्क की स्पेसएक्स ने रचा नया इतिहास, स्टारशिप पहली बार पृथ्वी की कक्षा में पहुंचा, 26 स्टारलिंक V3 सैटेलाइट भी तैनात

    नई दिल्ली। एलन मस्क की कंपनी स्पेसएक्स ने अंतरिक्ष अभियान के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। विशाल अंतरिक्ष यान स्टारशिप पहली बार पृथ्वी की कक्षा में सफलतापूर्वक पहुंचा। इसके साथ ही मिशन के दौरान 26 अगली पीढ़ी के स्टारलिंक V3 सैटेलाइट भी कक्षा में तैनात किए गए। यह उपलब्धि पूरी तरह पुन: उपयोग योग्य प्रक्षेपण प्रणाली विकसित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।

    यह उड़ान 28 सितंबर को भारतीय समयानुसार शाम 6:16 बजे शुरू हुई। यह स्टारशिप का 14वां परीक्षण था। मिशन का उद्देश्य केवल अंतरिक्ष यान को कक्षा तक पहुंचाना नहीं था, बल्कि इसके विभिन्न सिस्टम और भविष्य की अंतरिक्ष गतिविधियों से जुड़ी तकनीकों का परीक्षण करना भी था।

    हालांकि उड़ान के दौरान एक तकनीकी चुनौती भी सामने आई। वाहन के छह रैप्टर वैक्यूम यानी आरवी इंजनों में से एक इंजन बंद हो गया। इससे मिशन के दौरान कुछ समय के लिए चुनौती की स्थिति बनी। इसके बावजूद बाकी इंजनों के प्रदर्शन और उनकी स्थिति का आकलन करने के बाद मिशन को जारी रखा गया और स्टारशिप कक्षा तक पहुंचने में सफल रहा।

    स्टारशिप को करीब 275 किलोमीटर की ऊंचाई पर उड़ान भरते हुए पृथ्वी के लगभग छह चक्कर लगाने के लिए तैयार किया गया था। मिशन की शुरुआती योजना करीब 10 घंटे की थी। इसके बाद अंतरिक्ष यान को नियंत्रित तरीके से पृथ्वी के वातावरण में दोबारा प्रवेश कर प्रशांत महासागर में चिली के पश्चिमी तट के पास स्प्लैशडाउन करना था।

    इस मिशन की सबसे अहम उपलब्धियों में 26 स्टारलिंक V3 सैटेलाइट की तैनाती भी शामिल रही। ये सैटेलाइट नई पीढ़ी के स्टारलिंक नेटवर्क का हिस्सा हैं। इन्हें अधिक डेटा क्षमता, ज्यादा पावर और बेहतर नेटवर्क क्षमता के लिए डिजाइन किया गया है। उपलब्ध मिशन विवरण के अनुसार प्रत्येक सैटेलाइट करीब 1 Tbps डाउनलिंक क्षमता जोड़ सकता है।

    स्टारशिप-सुपर हेवी की ऊंचाई करीब 124.4 मीटर यानी 407 फीट है। इसके दो प्रमुख हिस्से हैं—सुपर हेवी बूस्टर और स्टारशिप का ऊपरी चरण। दोनों को भविष्य में तेजी से दोबारा इस्तेमाल किए जाने के उद्देश्य से तैयार किया गया है।

    मिशन में सुपर हेवी बूस्टर की चढ़ाई, स्टेज सेपरेशन, बूस्टबैक बर्न और लैंडिंग बर्न भी महत्वपूर्ण परीक्षणों का हिस्सा थे। पिछले परीक्षणों में सामने आई समस्याओं को देखते हुए हार्डवेयर और सॉफ्टवेयर में बदलाव किए गए थे।

    स्टारशिप के ऊपरी चरण ने ऑर्बिटल इंसर्शन मैनूवर के साथ 26 स्टारलिंक V3 सैटेलाइट तैनात किए। इसके बाद रैप्टर इंजन की मदद से डीऑर्बिट बर्न और नियंत्रित पुनः प्रवेश की प्रक्रिया पूरी करने की योजना थी। तीन स्टारलिंक V3 सैटेलाइटों में अतिरिक्त कैमरे भी लगाए गए, जिनका इस्तेमाल स्टारशिप की हीट शील्ड की तस्वीरें लेने के लिए किया जाना था।

    कक्षा में पहुंचने के बाद सैटेलाइट अपने एंटीना और सोलर एरे तैनात करेंगे। इसके बाद रेडियो फ्रीक्वेंसी और लेजर लिंक के जरिए ग्राउंड सिस्टम तथा मौजूदा नेटवर्क से संपर्क स्थापित किया जाएगा। ऑर्बिट में जरूरी जांच पूरी होने के बाद कुछ हफ्तों में इनके ग्राहकों को सेवा देने की उम्मीद है।

    स्टारशिप की यह उड़ान भविष्य में पृथ्वी की कक्षा से आगे चांद और मंगल तक इंसानों तथा कार्गो को पहुंचाने की क्षमता विकसित करने के लक्ष्य की दिशा में एक अहम परीक्षण है।

  • ईरान के सुप्रीम लीडर का अमेरिका को लेकर बड़ा बयान…., बोले- दुश्मन को जल्द अरब सागर से निकाल देंगे

    ईरान के सुप्रीम लीडर का अमेरिका को लेकर बड़ा बयान…., बोले- दुश्मन को जल्द अरब सागर से निकाल देंगे


    तेहरान।
    ईरान (Iran) के सुप्रीम लीडर मोजतबा खामेनेई (Supreme Leader Mojtaba Khamenei) ने सोमवार को बिना अमेरिका (America) का नाम लिए बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि दुश्मन ताकतों को जल्द अरब सागर से निकाल दिया जाएगा। उनके मुताबिक, हमलावर ताकतें अब खुद लड़ाई जारी रखने की बजाय युद्ध खत्म करने की अपील कर रही हैं। यह बयान ऐसे समय आया है जब क्षेत्र में तनाव पहले से काफी बढ़ा हुआ माना जा रहा है। खामेनेई ने यह बात ईरान-इराक युद्ध (Iran-Iraq War) की बरसी और हिजबुल्लाह नेता हसन नसरल्लाह (Hezbollah leader Hassan Nasrallah) की बरसी पर जारी संदेश में कही। नसरल्लाह की 2024 में हत्या कर दी गई थी। इन दोनों मौकों का जिक्र कर उन्होंने ईरान की सैन्य ताकत, क्षेत्रीय स्थिति और दुश्मन ताकतों के दबाव का भी जिक्र किया।

    उन्होंने कहा कि ‘सिस्टम ऑफ डोमिनेशन’ यानी दबदबा बनाने वाली ताकतों के हमलों के शुरुआती दिनों में ईरान की स्थिति बहुत कमजोर थी। उस समय देश को पिछली सरकार से कई खतरे विरासत में मिले थे। उनके शब्दों में, तब देश लगभग खाली हाथ था और अपने बचाव के लिए तैयारियां पर्याप्त नहीं थीं। खामेनेई का दावा है कि उसके बाद ईरान ने अपनी सैन्य क्षमता को तेजी से बढ़ाया। अब स्थिति इतनी बदल गई है कि हमलावर ताकतें खुद ईरानी सेना के हमलों से बचने की कोशिश कर रही हैं। उन्होंने कहा कि सच्चाई और खुदा की मदद से देश अब उस मुकाम पर पहुंच गया है जहां बहुत सी हमलावर ताकतें खुद, सिर्फ उनके साथी नहीं, इस्लामी गणराज्य के लड़ाकों के हमलों से बचने के लिए पनाह मांग रही हैं और युद्ध खत्म करने की गुहार लगा रही हैं।

    इस दौरान खामेनेई ने समुद्री मोर्चे का भी जिक्र किया। उन्होंने दावा किया कि ईरानी सेना ने दक्षिणी ईरान के पानी से दुश्मन को पीछे धकेल दिया है और उसे अरब सागर की ओर हटना पड़ा है। उनके अनुसार, होर्मुज की सुरक्षा करने वाले ईरानी लड़ाकों ने दुश्मन को बड़ा नुकसान पहुंचाया है। उन्होंने कहा कि हमारे बहादुर लड़ाकों और होर्मुज के रखवालों से दर्दनाक चोटें खाने के बाद वे अरब सागर से आगे जाने की हिम्मत नहीं करते। खामेनेई ने आगे कहा कि जब भी दुश्मन ताकतों ने आगे बढ़ने की कोशिश की, नुकसान उन्हें ही हुआ। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि वह समय तेजी से आ रहा है जब अरब सागर भी उनकी मौजूदगी से साफ हो जाएगा।

    इस दौरान उन्होंने ईरान की अंदरूनी एकता पर भी जोर दिया। खामेनेई ने कहा कि देश के अलग-अलग वर्गों में मतभेद हो सकते हैं, लेकिन जब बात देश की सुरक्षा और सही मांगों की आती है, तो सब एक साथ खड़े हैं। इसमें सबसे अहम मुद्दा होर्मुज स्ट्रेट पर नियंत्रण बनाए रखना है। यह जलमार्ग दुनिया के तेल व्यापार के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। इसलिए इस पर कब्जा या दबाव बनाए रखना ईरान की रणनीति का बड़ा हिस्सा है।

  • US ने कुछ खास दवाओं के कच्चे माल पर 100% टैरिफ से दी छूट… भारत समेत 20 देशों को फायदा

    US ने कुछ खास दवाओं के कच्चे माल पर 100% टैरिफ से दी छूट… भारत समेत 20 देशों को फायदा


    वाशिंगटन।
    अमेरिका (America) ने भारत (India) समेत 20 देशों से आने वाली कुछ खास दवाओं और उनके इस्तेमाल होने वाले कच्चे माल (Raw materials) पर 100% टैरिफ लगाने से छूट दी है। यह फैसला भारतीय फार्मा कंपनियों (Indian Pharmaceutical Companies) के लिए राहत देने वाला है। हालांकि, यह छूट भारत से अमेरिका भेजी जाने वाली सभी दवाओं पर लागू नहीं होगी।

    एक खबर के मुताबिक अमेरिका 29 सितंबर यानी आज से कुछ पेटेंट वाली दवाओं और उनसे जुड़े उत्पादों पर 100 प्रतिशत टैरिफ लगाने की तैयारी कर रहा है, लेकिन कुछ विशेष श्रेणी की दवाओं को इस शुल्क से बाहर रखा गया है।


    सभी भारतीय दवाओं को छूट नहीं

    अमेरिका का फैसला भारत की सभी दवाओं पर लागू नहीं है। केवल तय की गई विशेष श्रेणी की दवाओं और उनसे जुड़े घटकों को ही 100 प्रतिशत टैरिफ से छूट मिलेगी। वहीं, सामान्य जेनेरिक दवाएं और उनके संबंधित घटक पहले से ही इस विशेष टैरिफ के दायरे में नहीं हैं।


    किन दवाओं को मिलेगी छूट?

    अमेरिका की इस व्यवस्था में मुख्य रूप से नीचे दी गई दवाओं में छूट दी गई है।
    – दुर्लभ बीमारियों के इलाज की दवाएं।
    – बांझपन के इलाज में इस्तेमाल होने वाली दवाएं।
    – सेल थेरेपी से जुड़ी दवाएं।
    – जीन थेरेपी से जुड़ी दवाएं।
    – एंटीबॉडी-ड्रग कंजुगेट्स (ADCs)।
    – पशुओं के इलाज में इस्तेमाल होने वाली कुछ दवाएं।
    इन दवाओं को बनाने में इस्तेमाल होने वाले संबंधित कच्चे माल और अन्य जरूरी घटकों को भी इस छूट में शामिल किया गया है।


    भारत समेत और कौन-कौन से देशों को होगा फायदा

    अमेरिका की इस लिस्ट में भारत के अलावा अर्जेंटीना, बांग्लादेश, कंबोडिया, इक्वाडोर, अल सल्वाडोर, यूरोपीय यूनियन, ग्वाटेमाला, इंडोनेशिया, जापान, जॉर्डन, मलेशिया, नॉर्थ मैसेडोनिया, दक्षिण कोरिया, स्विट्जरलैंड, लिकटेंस्टीन, ताइवान, थाईलैंड, ब्रिटेन और वियतनाम शामिल हैं।


    क्यों दी गई सुविधा:

    अमेरिकी वाणिज्य विभाग के मुताबिक इन देशों को यह सुविधा इसलिए दी गई है, क्योंकि इनके साथ अमेरिका के मौजूदा या भविष्य में लागू होने वाले व्यापार और सुरक्षा समझौते हैं।


    अमेरिका ने क्यों लगाया 100% टैरिफ?

    अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (American President Donald Trump) ने अप्रैल में पेटेंट वाली दवाओं, बायोलॉजिक्स और उनसे जुड़े कुछ घटकों के आयात पर शुल्क लगाने की घोषणा की थी। यह फैसला अमेरिकी कानून के सेक्शन 232 के तहत लिया गया है। अमेरिकी सरकार का कहना है कि इस कदम का उद्देश्य अमेरिका में दवाओं का उत्पादन बढ़ाना है।


    आज से लागू होना है टैरिफ

    100 प्रतिशत टैरिफ का प्रावधान कुछ कंपनियों के लिए 31 जुलाई से प्रभावी हो चुका है। बाकी कवर की गई कंपनियों पर यह व्यवस्था 29 सितंबर 2026 यानी आज से लागू होनी है।अमेरिका ने इस व्यवस्था में कुछ तकनीकी बदलाव भी किए हैं। इनमें जेनेरिक दवाओं की परिभाषा को स्पष्ट करना शामिल है। इसके अलावा यह भी स्पष्ट किया गया है कि ‘फार्मास्युटिकल आर्टिकल्स’ में तैयार दवाओं के साथ-साथ उनके एक्टिव फार्मास्युटिकल इंग्रेडिएंट्स (API) और इन्हें बनाने में इस्तेमाल होने वाले प्रमुख शुरुआती कच्चे माल को भी शामिल किया जा सकता है।

  • चीन को अमेरिकी हथियार बेचने के दावे पर ट्रंप का यू-टर्न? अपने ही राजदूत के बयान से किया किनारा

    चीन को अमेरिकी हथियार बेचने के दावे पर ट्रंप का यू-टर्न? अपने ही राजदूत के बयान से किया किनारा

    वाशिंगटन। चीन को अमेरिकी हथियार बेचने के दावे को लेकर ट्रंप प्रशासन में ही विरोधाभासी बयान सामने आए हैं। अमेरिका में चीन के राजदूत डेविड पर्ड्यू ने कहा था कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग से पूछा था कि क्या चीन अमेरिका से हथियार खरीदना चाहेगा। हालांकि, ट्रंप ने इस दावे से अनभिज्ञता जताते हुए कहा कि उन्हें ऐसी किसी बातचीत की जानकारी नहीं है। बाद में उन्होंने यह जरूर कहा कि चीन अमेरिकी हथियार खरीदना चाहेगा, क्योंकि अमेरिका बेहतर हथियार बनाता है।

    ट्रंप से सोमवार को पत्रकारों ने पर्ड्यू के बयान को लेकर सवाल किया। ट्रंप ने कहा कि उन्होंने शी के साथ चीन को हथियार बेचने की बात नहीं की थी और संकेत दिया कि संभव है पर्ड्यू ताइवान से संबंधित बातचीत का जिक्र कर रहे हों। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि चीन अमेरिकी हथियार खरीदना चाहे तो यह अच्छा विचार हो सकता है।

    विदेश विभाग बोला- चीन को हथियार बेचने की कोई योजना नहीं

    ट्रंप के बयान के बाद अमेरिकी विदेश विभाग ने भी स्थिति स्पष्ट की। विभाग ने कहा कि अमेरिकी कानून चीन को हथियारों की बिक्री पर रोक लगाता है और चीन को हथियार बेचने का न तो कोई प्रस्ताव है और न ही ऐसी कोई योजना। एक अमेरिकी अधिकारी ने भी कहा कि सरकार की चीन को हथियार बेचने की कोई योजना नहीं है।

    इससे पर्ड्यू के बयान और प्रशासन की आधिकारिक स्थिति के बीच अंतर साफ दिखाई देता है। पर्ड्यू ने यह नहीं बताया था कि ट्रंप ने शी से यह सवाल कब और किस संदर्भ में पूछा था। उन्होंने यह भी नहीं बताया कि शी ने इसके जवाब में क्या कहा।

    पर्ड्यू ने फॉक्स न्यूज पर किया था दावा

    अमेरिकी राजदूत डेविड पर्ड्यू ने रविवार को फॉक्स न्यूज के कार्यक्रम में ट्रंप-शी बैठक से जुड़े सवालों का जवाब देते हुए कहा था कि राष्ट्रपति ट्रंप दुनिया के दूसरे देशों को अमेरिकी हथियार बेचने की बात करते रहे हैं और उन्होंने एक मौके पर शी जिनपिंग से भी पूछा था कि क्या वह कुछ अमेरिकी हथियार खरीदना चाहेंगे।

    पर्ड्यू का यह बयान ऐसे समय आया जब ताइवान को अमेरिकी हथियारों की बिक्री को लेकर वाशिंगटन और बीजिंग के बीच तनाव बना हुआ है। पर्ड्यू ने साथ ही कहा था कि ट्रंप ताइवान के प्रति अमेरिकी नीति में बदलाव नहीं कर रहे हैं और ‘वन चाइना’ नीति पर उनका रुख कायम है।

    ताइवान को हथियारों की बिक्री पर चीन का विरोध

    ताइवान को अमेरिकी हथियारों की बिक्री लंबे समय से अमेरिका और चीन के बीच विवाद का मुद्दा रही है। बीजिंग वॉशिंगटन से ताइवान को हथियारों की बिक्री रोकने की मांग करता रहा है। दूसरी ओर, अमेरिका ताइवान को अपनी रक्षा क्षमता मजबूत करने के लिए सैन्य उपकरण उपलब्ध कराता रहा है।

    ट्रंप प्रशासन ने ताइवान के लिए करीब 14 अरब डॉलर के हथियार पैकेज पर फिलहाल रोक लगा रखी है। इस मुद्दे को ट्रंप ने चीन के साथ बातचीत में एक संभावित सौदेबाजी के विषय के रूप में भी पेश किया है।

    अगर चीन को हथियार बेचने की बात होती तो क्यों अहम होता मामला?

    अमेरिका और चीन के बीच सैन्य प्रतिस्पर्धा को देखते हुए चीन को अमेरिकी हथियारों की बिक्री अमेरिकी नीति में बड़ा बदलाव होती। रिपोर्टों के मुताबिक अमेरिका ने आखिरी बार 1980 के दशक में चीन को हथियार बेचे थे। मौजूदा समय में चीन को अमेरिका का प्रमुख रणनीतिक प्रतिस्पर्धी माना जाता है।

    फिलहाल अमेरिकी प्रशासन की आधिकारिक स्थिति स्पष्ट है कि चीन को हथियार बेचने का कोई प्रस्ताव या योजना नहीं है। वहीं, ट्रंप और उनके राजदूत डेविड पर्ड्यू के बयानों में अंतर ने इस मुद्दे को चर्चा में ला दिया है। चीन ने भी ट्रंप के कथित प्रस्ताव की पुष्टि नहीं की है।

  • अस्पताल के मलबे से निकाले गए थे मुज्तबा खामेनेई, दावा- तीन अस्पतालों पर हुई थी बमबारी

    अस्पताल के मलबे से निकाले गए थे मुज्तबा खामेनेई, दावा- तीन अस्पतालों पर हुई थी बमबारी


    तेहरान। ईरान के सर्वोच्च नेता मुज्तबा खामेनेई की स्थिति और ठिकाने को लेकर चल रही अटकलों के बीच एक नया दावा सामने आया है। ‘न्यूयॉर्क पोस्ट’ की रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिकी और इजरायली हमलों के दौरान तेहरान के एक अस्पताल पर बमबारी के बाद मुज्तबा खामेनेई को मलबे से बाहर निकाला गया था। दावा है कि घायल होने के बाद उन्हें इलाज के लिए अस्पताल ले जाया गया था, लेकिन इसके बाद तेहरान के तीन अस्पतालों को निशाना बनाया गया। मुज्तबा तीसरे अस्पताल में मौजूद थे।

    यह दावा ईरान की ‘असेंबली ऑफ एक्सपर्ट्स’ के सदस्य मोहसेन हैदरी ने कतर के टेलीविजन नेटवर्क ‘अल अरबी’ को दिए एक साक्षात्कार में किया। हैदरी के अनुसार, मुज्तबा खामेनेई पहले हुए हमले में घायल हुए थे और उन्हें अस्पताल ले जाया गया था। इसके बाद तीन अस्पतालों पर हमले हुए और तीसरे अस्पताल के मलबे से मुज्तबा को निकाला गया।

    तीन अस्पतालों पर बमबारी का दावा

    मोहसेन हैदरी ने कहा कि मुज्तबा के घायल होने और अस्पताल पहुंचाए जाने के बावजूद तेहरान के तीन अस्पतालों पर बमबारी की गई। उनके मुताबिक, मुज्तबा तीसरे अस्पताल में थे और हमले के बाद उन्हें मलबे से बाहर निकाला गया।

    रिपोर्ट के अनुसार, इसके बाद 56 वर्षीय मुज्तबा खामेनेई को किसी अज्ञात स्थान पर ले जाया गया। तब से वह सार्वजनिक रूप से नजर नहीं आए हैं और उनके बारे में भी कोई आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है। हालांकि, मलबे से निकाले जाने संबंधी यह दावा स्वतंत्र रूप से सत्यापित नहीं हुआ है।

    सुप्रीम लीडर चुने जाने की प्रक्रिया पर भी खुलासा

    हैदरी ने मुज्तबा खामेनेई को 8 मार्च को ईरान का नया सर्वोच्च नेता चुने जाने की प्रक्रिया के बारे में भी जानकारी दी। उनके अनुसार, मुज्तबा को कथित तौर पर तब तक यह जानकारी नहीं थी कि उन्हें सर्वोच्च नेता चुना जा चुका है, जब तक कि ईरानी सरकारी टेलीविजन पर इसकी घोषणा नहीं हुई।

    सर्वोच्च नेता के चयन की जिम्मेदारी निभाने वाली ‘असेंबली ऑफ एक्सपर्ट्स’ भी इन हमलों की चपेट में आई थी। ‘न्यूयॉर्क पोस्ट’ की रिपोर्ट के अनुसार, क़ोम स्थित इसके सचिवालय पर बमबारी में आठ लोगों की मौत हुई और उत्तराधिकारी के चयन से संबंधित रिपोर्ट तथा सिफारिशें नष्ट हो गईं।

    हैदरी के मुताबिक, इसके बाद असेंबली के सदस्यों ने अपने वोट कागज पर लिखे और उन्हें एक गुप्त स्थान पर बैठक के लिए बुलाया गया। उन्होंने दावा किया कि मुज्तबा खामेनेई का नाम प्रस्तावित करने वाले वह पहले सदस्य थे।

    59 में से 50 वोट मिलने का दावा

    हैदरी के अनुसार, चयन प्रक्रिया में मुज्तबा खामेनेई को 59 में से 50 वोट मिले। आठ सदस्यों ने अयातुल्ला अलीरेजा अराफी के पक्ष में मतदान किया, जबकि एक सदस्य ने मतदान नहीं किया।

    हैदरी ने मुज्तबा को ‘परछाई में रहने वाला व्यक्ति’ बताया। उनके अनुसार, सर्वोच्च नेता बनने से पहले मुज्तबा ने ईरानी सरकार में कोई औपचारिक राजनीतिक पद नहीं संभाला था। हालांकि, विभिन्न रिपोर्टों में उन्हें अपने पिता अयातुल्ला अली खामेनेई के सलाहकार के तौर पर काम करने वाला बताया गया है।

    स्वास्थ्य को लेकर पहले भी सामने आई थीं अलग-अलग रिपोर्टें

    मुज्तबा खामेनेई की हालत को लेकर पहले भी अलग-अलग दावे सामने आते रहे हैं। रिपोर्टों के मुताबिक, 28 फरवरी के हमले में उनके पिता अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत हुई थी और मुज्तबा भी घायल हुए थे। इसके बाद उनकी स्थिति को लेकर अटकलें लगती रहीं।

    अमेरिकी खुफिया आकलनों में उनके गंभीर रूप से घायल होने की खबरें सामने आने का दावा किया गया था। वहीं, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पिछले महीने कहा था कि उन्हें विश्वास है कि मुज्तबा खामेनेई जीवित हैं, हालांकि उन्हें गंभीर चोटें आई हैं। अस्पताल के मलबे से निकाले जाने का नया दावा भी उनकी स्थिति और लंबे समय से सार्वजनिक रूप से सामने नहीं आने को लेकर जारी सवालों के बीच आया है।

  • हूती विद्रोहियों के हमलों से खतरा बढ़ा … रियाद के स्कूलों को एक हफ्ते के लिए किया ऑनलाइन

    हूती विद्रोहियों के हमलों से खतरा बढ़ा … रियाद के स्कूलों को एक हफ्ते के लिए किया ऑनलाइन


    रियाद।
    सऊदी अरब (Saudi Arabia) से एक बड़ी खबर समाने आई है। राजधानी रियाद (Riyadh) के स्कूलों को एक हफ्ते के ऑनलाइन क्लास कर (Online Class) दिया गया है। यानी बच्चे और शिक्षक घर से ही क्लास लेंगे और ऑनलाइन ही पढ़ाई होगी। बताया जा रहा है कि यमन के ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों (Houthi rebels) के ड्रोन और मिसाइल हमलों का खतरा बढ़ने के बीच रविवार को अभिभावकों को अचानक यह जानकारी मिली। हालांकि अधिकारियों ने फैसले की कोई वजह नहीं बताई, लेकिन यह कदम सऊदी अरब पर तेज होते हमलों के बीच उठाया गया है।

    एजेंसी के मुताबिक, रियाद भर के स्कूलों से अभिभावकों को ईमेल आए हैं। दो अलग-अलग संदेशों में लिखा था कि हमें अभी सऊदी अधिकारियों ने बताया है कि स्कूल पूरे हफ्ते बंद रहेंगे। बच्चे अब मदरसती ऑनलाइन प्लेटफॉर्म से पढ़ेंगे। शिक्षकों और स्टाफ को भी घर से काम करने को कहा गया है। शिक्षा मंत्रालय ने फिलहाल कोई सार्वजनिक बयान नहीं दिया।


    अभिभावक नाराज और परेशान

    कई माता-पिता ने कहा कि फैसला बहुत अचानक आया। एक अभिभावक ने नाम न बताते हुए कहा कि जब पूरा स्कूल एक हफ्ते के लिए बंद हो रहा है, तो परिवारों को साफ वजह बतानी चाहिए। रियाद में रहने वाले एक लेबनानी नागरिक ने कहा कि यह लास्ट-मिनट फैसला है। हमें कुछ समझ नहीं आ रहा कि क्या हो रहा है।


    एक दिन पहले हमले रोके गए

    स्कूल बंद करने का फैसला शनिवार के हमलों के अगले दिन आया। सऊदी नेतृत्व वाले गठबंधन ने कहा कि उसने यमन से दागे गए दो ड्रोन और दो बैलिस्टिक मिसाइलें रोक लीं। ड्रोन रियाद की तरफ जा रहे थे और मिसाइलें दक्षिण-पश्चिम के शहर खमीस मुशैत की तरफ, जहां एक बड़ा एयरबेस है। सऊदी सिविल डिफेंस ने खमीस मुशैत और पास के शहर आभा के लिए रात भर अलर्ट जारी किया। रियाद के लिए कोई अलर्ट नहीं था। गठबंधन ने कहा कि सेना यमन से आने वाले खतरे पर लगातार नजर रख रही है।


    जुलाई से फिर शुरू हुई लड़ाई

    ये हमले जुलाई से चले आ रहे तनाव का हिस्सा हैं। उससे पहले सऊदी अरब और हूतियों के बीच करीब चार साल की शांति चल रही थी। जुलाई में शांति टूट गई और यमन फिर मध्य पूर्व की बड़ी लड़ाई में शामिल हो गया। हूती यमन के सबसे ज्यादा आबादी वाले इलाकों, खासकर उत्तर और राजधानी सना पर नियंत्रण रखते हैं। जैसे-जैसे इलाके में लड़ाई बढ़ी, उन्होंने हमले यमन की सीमा से बाहर निकालकर सऊदी शहरों, तेल सुविधाओं और जहाजों तक पहुंचा दिए।

    संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने पहले भी हूती हमलों की निंदा की है। परिषद ने कहा कि इन हमलों में महिलाएं और बच्चे समेत आम नागरिक घायल हुए हैं। इस महीने की शुरुआत में खमीस मुशैत, आभा और ताइफ पर हमलों में 13 नागरिक घायल हुए थे। घर और गाड़ियां भी क्षतिग्रस्त हुईं। यमन के अंदर 1 लाख 20 हजार से ज्यादा लोग विस्थापित हो चुके हैं।

    सऊदी अरब दुनिया के तेल व्यापार का बड़ा केंद्र है। उसके इलाके या समुद्री रास्ते पर रुकावट सिर्फ देश तक नहीं रहती, पूरी दुनिया पर असर डालती है। हूती अभियान में सऊदी शहर, ऊर्जा सुविधाएं और लाल सागर में चलने वाले जहाज शामिल हैं। जुलाई में समूह ने रियाद के खिलाफ नौसैनिक नाकाबंदी की घोषणा की थी। उसके बाद प्रमुख समुद्री मार्गों पर हमले तेज हो गए। पवित्र शहर मक्का को निशाना बनाने का दावा भी किया गया।

    लाल सागर खाड़ी के तेल निर्यातकों के लिए दूसरा बड़ा रास्ता है। होर्मुज स्ट्रेट पहले से प्रभावित है। लाल सागर में और रुकावट आने से तेल सप्लाई पर दबाव और बढ़ सकता है। यही वजह है कि राजधानी रियाद में स्कूलों को अस्थायी रूप से घर से पढ़ाई पर शिफ्ट किया गया है।

  • अमेरिका ने बढ़ाई भारतीय प्रोफेशनल की चिंता… पूरी तरह खत्म हो सकता है H-1B वीजा….

    अमेरिका ने बढ़ाई भारतीय प्रोफेशनल की चिंता… पूरी तरह खत्म हो सकता है H-1B वीजा….


    वाशिंगटन।
    अमेरिका (America) में नौकरी करने का सपना देखने वाले भारतीय आईटी पेशेवरों (Indian IT professionals) के लिए एक बार फिर चिंता बढ़ाने वाली खबर सामने आ रही है। खबर है कि ट्रंप प्रशासन (Trump administration) H-1B वीजा को लेकर बड़ी तैयारी कर रहा है। इसके तहत अब नियमों को और सख्त बनाया जाएगा। वहीं कहा जा रहा है कि H-1B वीजा को हमेशा के लिए खत्म भी किया जा सकता है। यही नहीं अमेरिका की ओर से हथकड़ी वाली चेतावनी भी आई है।

    अमेरिकी श्रम विभाग के इंस्पेक्टर जनरल एंथनी डी’एस्पोसिटो ने हाल ही में इसके संकेत दिए हैं। एक पोस्टकास्ट में उन्होंने चेतावनी दी है कि अगले 365 दिनों में H-1B वीजा व्यवस्था का रूप पूरी तरह बदल जाएगा और धोखाधड़ी करने वाले एम्प्लॉयर्स के खिलाफ कड़ा कानूनी शिकंजा कसा जा रहा है।


    भारतीय टेक प्रोफेशनल्स को झटका

    H-1B वीजा प्रोग्राम पर किसी भी तरह की आंच का सीधा असर भारतीय नागरिकों पर पड़ता है। अमेरिकी आईटी कंपनियों, टेक सेक्टर और कॉरपोरेट जगत में काम करने वाले कुल H-1B वीजा धारकों में 70 प्रतिशत से अधिक हिस्सेदारी अकेले भारतीय पेशेवरों की होती है। अगर अमेरिका इस प्रोग्राम को पूरी तरह बंद करता है तो हजारों भारतीय टेक प्रोफेशनल्स, अमेरिका में पढ़ रहे भारतीय छात्रों और वहां जाने की तैयारी कर रहे युवाओं के करियर को बहुत बड़ा झटका लगेगा। वहीं पहले से अमेरिका में मौजूद भारतीयों के लिए वीजा रिन्यूअल और ग्रीन कार्ड की राह में नई रुकावटें खड़ी हो सकती हैं।


    365 दिनों में बदल जाएगा पूरा नियम

    अमेरिकी कमेंटेटर और यूट्यूबर बेनी जॉनसन को दिए एक इंटरव्यू में इंस्पेक्टर जनरल एंथनी डी’एस्पोसिटो ने अमेरिका की रणनीति को लेकर स्थिति साफ की। उन्होंने बताया कि जांच अधिकारियों ने स्पष्ट संकेत दिए हैं कि वीजा के नाम पर धांधली और शेल कंपनियों के जरिए फर्जीवाड़े में शामिल लोगों के खिलाफ आपराधिक मामले दर्ज कर गिरफ्तारी की तैयारी है। डी’एस्पोसिटो ने कहा, “मुझे लगता है कि विदेशी श्रम वीजा प्रोग्राम आज से 365 दिनों के भीतर पूरी तरह से अलग नजर आएगा।” उन्होंने बताया कि अमेरिकी सरकार H-1B वीजा प्रोग्राम से जुड़ी धोखाधड़ी, कर्मचारियों के शोषण और मानव तस्करी जैसे गंभीर आरोपों की जांच कर रहा है।


    दिग्गज कंपनियां निशाने पर

    जांच एजेंसियों ने विदेशी कर्मचारियों की भर्ती में अनियमितता बरतने वाली दिग्गज कंपनियों पर कार्रवाई शुरू कर दी है। इससे पहले आपराधिक जांच की वजह से टेक क्षेत्र की दिग्गज कंपनियों कॉग्निजेंट और क्लाउडेरा से जुड़े H-1B वीजा आवेदनों को फिलहाल निलंबित कर दिया गया है। अमेरिकी श्रम विभाग के अनुसार, जांच अधिकारियों ने दर्जनों समन जारी किए हैं और कई ठिकानों पर सर्च वारंट जारी कर छापेमारी की है।


    क्या है प्रोजेक्ट फायरवॉल?

    अमेरिका में विदेशी पेशेवरों के बजाय अमेरिकी नागरिकों की नौकरियों को प्राथमिकता देने के लिए कई नए नियम लागू किए जा रहे हैं। सितंबर 2025 में अमेरिकी सरकार प्रोजेक्ट फायरवॉल ले कर आई थी। इस प्रोजेक्ट का मुख्य उद्देश्य हाइली स्किल्ड अमेरिकी कर्मचारियों के वेतन, अधिकारों और नौकरी के अवसरों की रक्षा करना है, ताकि एंप्लॉयर्स विदेशी कर्मचारियों को प्राथमिकता देने के बजाय पहले योग्य अमेरिकियों को काम पर रखें।

    इसके अलावा ट्रंप प्रशासन ने श्रम, होमलैंड सिक्योरिटी और विदेश विभाग को निर्देश दिया है कि किसी भी कंपनी के H-1B आवेदन की समीक्षा करते समय यह जरूर जांचा जाए कि उस कंपनी ने हाल ही में उसी पद पर काम कर रहे अमेरिकी कर्मचारियों की छंटनी तो नहीं की है। इसके साथ ही अमेरिका ने H-1B वीजा श्रेणी के तहत कुछ विशेष वीजा धारकों के अमेरिका में प्रवेश पर लगी पाबंदी को 21 सितंबर 2027 तक बढ़ा दिया है।


    क्या है H-1B वीजा और इसका कोटा?

    H-1B वीजा एक नॉन-इमीग्रेंट वीजा है, जिसके जरिए अमेरिकी कंपनियां आईटी और अन्य तकनीकी क्षेत्रों में विशेषज्ञता रखने वाले विदेशी कुशल कर्मचारियों को अपने यहां नौकरी देती हैं। अमेरिकी कानून के तहत हर वित्त वर्ष में केवल 65,000 नए H-1B वीजा जारी किए जाते हैं। वहीं अमेरिका के उच्च शिक्षण संस्थानों से मास्टर या पीएचडी की डिग्री हासिल करने वाले विदेशी छात्रों के लिए 20,000 अतिरिक्त कोटा तय होता है।

  • नेपाल में भारी बारिश ने मचाई तबाही…बाढ़ और भूस्खलन की घटनाओं में 21 लोगों की मौत

    नेपाल में भारी बारिश ने मचाई तबाही…बाढ़ और भूस्खलन की घटनाओं में 21 लोगों की मौत


    काठमांडू।
    नेपाल (Nepal) में पिछले कुछ दिनों से जारी भारी बारिश (Heavy rain) ने तबाही मचाई है। बाढ़ (Floods), भूस्खलन (Landslides) और अन्य बारिश संबंधी घटनाओं में कम से कम 21 लोगों की मौत हो गई है। अधिकारियों ने रविवार को यह जानकारी दी।


    पिछले महीने की विनाशकारी बाढ़ में भी हजारों लोग प्रभावित

    लगातार हो रही बारिश से देश के कई हिस्सों में नई बाढ़ आ गई। इससे कई घर बह गए और सड़क यातायात बाधित हुआ। नेपाल अभी भी पिछले महीने अचानक आई विनाशकारी बाढ़ से उबर रहा है। उस बाढ़ में कम से कम 1,453 लोग मारे गए थे, जबकि 5,000 से अधिक लोग अभी भी लापता हैं।

    बाढ़, भूस्खलन और बिजली गिरने से कितने लोग प्रभावित?
    शनिवार रात पाल्पा जिले के माथागढी ग्रामीण नगर पालिका में भूस्खलन से एक घर दब गया। इसमें पांच लोगों की जान चली गई, जिनके शव रविवार सुबह बरामद किए गए। पिछले चार दिनों में बाढ़, भूस्खलन और बिजली गिरने जैसी घटनाओं में 16 अन्य लोग मारे गए, जिससे कुल मृतकों की संख्या 21 हो गई। देश में पिछले पांच दिनों में मानसून से संबंधित 439 घटनाएं दर्ज की गईं। सुरक्षा कर्मियों ने बाढ़ और भूस्खलन से प्रभावित 1,284 लोगों को बचाया।


    नदियों का जलस्तर क्यों बढ़ा और क्या हुआ?

    लुम्बिनी प्रांत के रुपन्देही जिले में तिनाऊ नदी का जलस्तर खतरे के निशान से ऊपर चला गया। शनिवार रात बुटवल में नदी किनारे के छह घर बाढ़ के पानी में बह गए। काठमांडू पोस्ट ने यह रिपोर्ट दी। लगातार बारिश के कारण तिनाऊ और आसपास की धाराएं उफान पर थीं। लगभग 200 घर खतरे में थे, जिससे सुरक्षा कर्मियों ने रात भर में करीब 1,000 लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया।


    अन्य जिलों में क्या स्थिति रही?

    चितवन जिले में रविवार सुबह नारायणी नदी और रियू धारा भी खतरे के निशान से ऊपर बहने लगीं। देवघाट में नारायणी नदी 9.23 मीटर पर पहुंच गई, जो उसके खतरे के स्तर 9 मीटर से अधिक है। रियू नदी 3.92 मीटर पर पहुंच गई, जबकि उसका खतरे का निशान 3.8 मीटर है। भारी बारिश से चितवन में कई जगहों पर भूस्खलन और कीचड़ धंसने की घटनाएं हुईं, जिससे सड़कें अवरुद्ध हो गईं। करनाली प्रांत में भी भूस्खलन के कारण राजमार्गों पर यातायात बाधित हुआ। शनिवार को नारायणी और सप्तकोशी नदियों की बाढ़ से नवलपरासी पश्चिम और सप्तरी जिलों में 389 घर जलमग्न हो गए। इससे सैकड़ों परिवारों को सुरक्षित स्थानों पर जाने के लिए मजबूर होना पड़ा। अधिकारियों ने बाढ़ और भूस्खलन संभावित क्षेत्रों में रहने वाले लोगों से सतर्क रहने का आग्रह किया है।


    मनांग में हिमस्खलन, दो की मौत, 10 लापता

    मनांग जिले में रविवार को हिमस्खलन की चपेट में आने से दो लोगों की मौत हो गई और 10 अन्य लापता हो गए। पुलिस ने बताया कि 7,126 मीटर ऊंचे हिमलूंग हिमाल शिखर के बेस कैंप पर एक टेंट दब गया। इसमें नौ पर्वतारोही और 13 सहायक कर्मचारी शरण लिए हुए थे। उप पुलिस अधीक्षक शैलेंद्र थापा के अनुसार, शुरुआत में 12 लोग लापता हुए थे, जिनमें से दो के शव मिले और 10 अभी भी लापता हैं। सभी लापता व्यक्ति नेपाली नागरिक हैं। बचाव अभियान के लिए एक हेलीकॉप्टर भेजा गया है। लापता लोग हिमालयन हॉलिडेज नेपाल और इमेजिन नेपाल ट्रेक्स से संबंधित हैं। नेपाल के पहाड़ी जिलों में लगातार बारिश और बर्फबारी के कारण यह घटना हुई। पर्यटन विभाग के महानिदेशक राम कृष्ण लामिछाने ने स्थिति पर नजर रखने की बात कही।