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  • नीट विवाद के बाद परीक्षा सुधार की बड़ी पहल, छह विशेषज्ञों की टास्क फोर्स करेगी प्रवेश परीक्षा प्रणाली की समीक्षा

    नीट विवाद के बाद परीक्षा सुधार की बड़ी पहल, छह विशेषज्ञों की टास्क फोर्स करेगी प्रवेश परीक्षा प्रणाली की समीक्षा

    नई दिल्ली । देश की प्रवेश परीक्षा प्रणाली को अधिक सुरक्षित, पारदर्शी और तकनीक आधारित बनाने की दिशा में केंद्र सरकार ने एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। नीट परीक्षा में सामने आई अनियमितताओं के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में छह सदस्यीय उच्चस्तरीय परीक्षा सुधार टास्क फोर्स का गठन किया गया है। इस समिति की अध्यक्षता इंफोसिस के सह-संस्थापक नंदन नीलेकणी करेंगे। टास्क फोर्स का उद्देश्य सरकारी प्रवेश परीक्षाओं में संरचनात्मक और तकनीकी सुधारों के लिए व्यापक सुझाव तैयार करना है, ताकि भविष्य में परीक्षा प्रक्रिया को अधिक विश्वसनीय और लीक-रोधी बनाया जा सके।

    सरकार का मानना है कि बढ़ती तकनीकी चुनौतियों और बड़े स्तर पर आयोजित होने वाली प्रतियोगी परीक्षाओं को देखते हुए मौजूदा परीक्षा प्रणाली में व्यापक सुधार की आवश्यकता है। इसी उद्देश्य से गठित यह समिति विभिन्न क्षेत्रों के अनुभवी विशेषज्ञों को एक मंच पर लेकर आई है। इसमें तकनीक, शिक्षा, सुरक्षा, अंतरिक्ष विज्ञान, प्रशासन और लॉजिस्टिक्स से जुड़े विशेषज्ञ शामिल किए गए हैं, जो परीक्षा संचालन की पूरी प्रक्रिया का अध्ययन कर सुधार संबंधी सुझाव देंगे।

    समिति के अध्यक्ष नंदन नीलेकणी को बड़े डिजिटल प्लेटफॉर्म विकसित करने और सुरक्षित तकनीकी ढांचे तैयार करने का व्यापक अनुभव है। उनसे अपेक्षा की जा रही है कि वे डिजिटल पहचान, डेटा सुरक्षा और आधुनिक तकनीकी समाधान के आधार पर परीक्षा प्रणाली को अधिक मजबूत बनाने की दिशा में सुझाव देंगे। सरकार का लक्ष्य ऐसी व्यवस्था विकसित करना है, जिसमें प्रश्नपत्रों की सुरक्षा, अभ्यर्थियों की पहचान और परीक्षा संचालन के प्रत्येक चरण में पारदर्शिता सुनिश्चित की जा सके।

    टास्क फोर्स में भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान मद्रास के निदेशक प्रोफेसर वी. कामाकोटी को भी शामिल किया गया है। कंप्यूटर विज्ञान, सूचना सुरक्षा और उन्नत तकनीकी प्रणालियों में उनका अनुभव समिति को तकनीकी दृष्टि से मजबूत सुझाव देने में सहायक माना जा रहा है। परीक्षा से जुड़े डिजिटल ढांचे को अधिक सुरक्षित और आधुनिक बनाने में उनकी विशेषज्ञता महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।

    समिति में वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी अनीता करवाल को भी स्थान दिया गया है। शिक्षा नीति और प्रशासनिक सुधारों के क्षेत्र में उनके लंबे अनुभव को देखते हुए उन्हें शामिल किया गया है। इसके अलावा पूर्व खुफिया प्रमुख तपन डेका भी इस समिति का हिस्सा हैं। सुरक्षा और संवेदनशील मामलों से जुड़े उनके अनुभव के आधार पर परीक्षा प्रक्रिया में गोपनीयता और सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के उपायों पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।

    इसरो के पूर्व अध्यक्ष डॉ. एस. सोमनाथ को बड़े वैज्ञानिक और तकनीकी मिशनों के संचालन का अनुभव है। जटिल परियोजनाओं के सफल प्रबंधन और तकनीकी संस्थानों के संचालन में उनकी विशेषज्ञता परीक्षा प्रणाली के आधुनिकीकरण में उपयोगी मानी जा रही है। वहीं वरिष्ठ आईएएस अधिकारी अमृत लाल मीणा को प्रशासनिक और लॉजिस्टिक प्रबंधन के अनुभव के आधार पर समिति में शामिल किया गया है, जिससे देशभर में बड़े स्तर पर आयोजित होने वाली परीक्षाओं के संचालन संबंधी व्यावहारिक सुझाव मिल सकें।

    सरकार का कहना है कि यह उच्चस्तरीय टास्क फोर्स राष्ट्रीय परीक्षा प्रणाली की कार्यप्रणाली का व्यापक मूल्यांकन करेगी और ऐसे उपाय सुझाएगी, जिनसे भविष्य में प्रश्नपत्रों की सुरक्षा, परीक्षा केंद्रों का संचालन, डिजिटल निगरानी, अभ्यर्थियों की सत्यापन प्रक्रिया तथा परीक्षा प्रबंधन के सभी चरण अधिक प्रभावी बन सकें। समिति की सिफारिशों के आधार पर परीक्षा प्रणाली में आवश्यक सुधार लागू किए जाने की संभावना है, जिससे देशभर के लाखों अभ्यर्थियों का विश्वास और मजबूत किया जा सके।

  • PoK चुनाव में PML-N और PPP आमने-सामने, JAAC के बहिष्कार और विरोध प्रदर्शनों के बीच आज पहले चरण का मतदान

    PoK चुनाव में PML-N और PPP आमने-सामने, JAAC के बहिष्कार और विरोध प्रदर्शनों के बीच आज पहले चरण का मतदान

    नई दिल्ली । पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoK) में विधानसभा चुनाव के पहले चरण के साथ राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। 45 सदस्यीय विधानसभा के लिए मतदान तीन चरणों में कराया जा रहा है। चुनाव ऐसे समय हो रहे हैं जब क्षेत्र में पिछले कई महीनों से विरोध प्रदर्शन, राजनीतिक असंतोष और सुरक्षा संबंधी चुनौतियां लगातार बनी हुई हैं। चुनावी प्रक्रिया के केंद्र में 12 आरक्षित शरणार्थी सीटों को लेकर विवाद है, जिसने स्थानीय राजनीति को और अधिक संवेदनशील बना दिया है।

    पहले चरण में मीरपुर डिवीजन की सीटों पर मतदान हो रहा है, जबकि दूसरे चरण में मुजफ्फराबाद डिवीजन के साथ 12 शरणार्थी सीटों पर मतदान निर्धारित है। अंतिम चरण में पुंछ डिवीजन की सीटों पर चुनाव होंगे। प्रशासन ने सभी चरणों के लिए सुरक्षा व्यवस्था कड़ी करने के साथ चुनावी प्रक्रिया को शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न कराने की तैयारी की है।

    क्षेत्र में जारी विरोध प्रदर्शनों का नेतृत्व जम्मू-कश्मीर जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी (JAAC) कर रही है। संगठन ने चुनाव प्रक्रिया का बहिष्कार करते हुए अपने समर्थकों से मतदान में हिस्सा नहीं लेने की अपील की है। संगठन का आरोप है कि मौजूदा चुनावी व्यवस्था स्थानीय जनता के राजनीतिक प्रतिनिधित्व को प्रभावित करती है। दूसरी ओर, प्रशासन का कहना है कि चुनाव संवैधानिक प्रक्रिया के तहत कराए जा रहे हैं और लोकतांत्रिक व्यवस्था को बनाए रखना आवश्यक है।

    चुनाव से पहले कई स्थानों पर प्रदर्शन और सुरक्षा बलों के साथ झड़पों की खबरें सामने आईं। इन घटनाओं के कारण कुछ क्षेत्रों में सामान्य जनजीवन प्रभावित हुआ। कई इलाकों में यातायात बाधित रहा, जबकि कुछ स्थानों पर संचार सेवाओं और व्यापारिक गतिविधियों पर भी असर देखने को मिला। सीमावर्ती क्षेत्रों में आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति पर भी प्रभाव पड़ने की जानकारी सामने आई है।

    इस चुनाव का सबसे बड़ा विवाद विधानसभा की 12 आरक्षित शरणार्थी सीटों को लेकर है। ये सीटें उन लोगों के लिए आरक्षित हैं, जो भारतीय प्रशासित जम्मू-कश्मीर से पाकिस्तान जाकर बसे थे। सरकार इन सीटों को ऐतिहासिक और संवैधानिक व्यवस्था का हिस्सा मानती है। वहीं, JAAC का दावा है कि इस व्यवस्था से स्थानीय मतदाताओं की राजनीतिक भूमिका सीमित होती है और चुनावी संतुलन प्रभावित होता है। संगठन का यह भी आरोप है कि इन सीटों का राजनीतिक लाभ अक्सर पाकिस्तान की प्रमुख राष्ट्रीय पार्टियों को मिलता है।

    चुनाव प्रचार के दौरान पाकिस्तान मुस्लिम लीग-नवाज (PML-N) और पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी (PPP) के बीच सीधा मुकाबला देखने को मिला। दोनों दलों के शीर्ष नेताओं ने क्षेत्र में जनसभाएं कर मतदाताओं को अपने पक्ष में करने का प्रयास किया। पूर्व प्रधानमंत्री नवाज शरीफ ने चुनाव प्रचार के दौरान क्षेत्र को अपना दूसरा घर बताते हुए कहा कि यदि उनकी पार्टी सत्ता में आती है तो वह विकास कार्यों की निगरानी में सक्रिय भूमिका निभाना चाहेंगे। दूसरी ओर, PPP नेतृत्व ने भी विकास, प्रशासनिक सुधार और क्षेत्रीय मुद्दों को चुनावी अभियान का प्रमुख विषय बनाया।

    दिलचस्प बात यह है कि राष्ट्रीय स्तर पर सहयोगी मानी जाने वाली PML-N और PPP इस चुनाव में एक-दूसरे के खिलाफ मैदान में हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि चुनाव परिणाम न केवल क्षेत्रीय राजनीति बल्कि पाकिस्तान की राष्ट्रीय राजनीतिक रणनीति पर भी प्रभाव डाल सकते हैं। अब सभी की नजर पहले चरण के मतदान, आगामी चरणों की प्रक्रिया और चुनाव परिणामों पर बनी हुई है, जिनसे क्षेत्र की राजनीतिक दिशा तय होने की उम्मीद है।

  • पेपर लीक के बाद नेपाल में शिक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल, सरकार ने जांच तेज कर आरोपी को किया गिरफ्तार

    पेपर लीक के बाद नेपाल में शिक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल, सरकार ने जांच तेज कर आरोपी को किया गिरफ्तार

    नई दिल्ली । नेपाल के सबसे बड़े और प्रतिष्ठित शिक्षण संस्थानों में शामिल त्रिभुवन विश्वविद्यालय में मास्टर ऑफ बिजनेस स्टडीज (एमबीएस) प्रथम सेमेस्टर का प्रश्नपत्र लीक होने के बाद शिक्षा व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। घटना सामने आने के बाद बड़ी संख्या में छात्र सड़कों पर उतर आए और परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता तथा दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग करने लगे। मामले की गंभीरता को देखते हुए नेपाल पुलिस ने एक शिक्षक को गिरफ्तार कर जांच शुरू कर दी है, जबकि सरकार ने निष्पक्ष जांच का भरोसा दिया है।

    जानकारी के अनुसार, 24 जुलाई को आयोजित एमबीएस प्रथम सेमेस्टर की परीक्षा का प्रश्नपत्र परीक्षा शुरू होने के कुछ ही मिनट बाद एक व्हाट्सएप समूह में साझा किया गया। अगले दिन इस घटना से जुड़े डिजिटल साक्ष्य सामने आने के बाद विश्वविद्यालय की परीक्षा प्रणाली और गोपनीयता व्यवस्था पर सवाल उठने लगे। छात्रों ने आरोप लगाया कि यदि परीक्षा के दौरान प्रश्नपत्र ऑनलाइन उपलब्ध था तो पूरी परीक्षा प्रक्रिया की विश्वसनीयता प्रभावित हुई है।

    पुलिस जांच में सामने आया कि प्रश्नपत्र प्रसारित करने के आरोप में संदीप सिंह नामक शिक्षक को गिरफ्तार किया गया है। जांच एजेंसियों के अनुसार, वह काठमांडू के दो शिक्षण संस्थानों से जुड़े हुए हैं और विद्यार्थियों के बीच एक लोकप्रिय नाम से जाने जाते हैं। पुलिस ने उनके खिलाफ परीक्षा गोपनीयता से जुड़े प्रावधानों के उल्लंघन के आरोप में मामला दर्ज कर आगे की जांच शुरू कर दी है।

    पूछताछ के दौरान आरोपी ने दावा किया कि उसने केवल किसी अन्य व्यक्ति से प्राप्त प्रश्नपत्र को संबंधित व्हाट्सएप समूह में आगे भेजा था। उसने यह भी कहा कि उसे इस घटना से कोई आर्थिक लाभ नहीं हुआ और वह केवल पहले से प्रसारित सामग्री को साझा कर रहा था। हालांकि जांच एजेंसियां यह पता लगाने का प्रयास कर रही हैं कि प्रश्नपत्र सबसे पहले किस स्रोत से बाहर आया और इसके पीछे कोई संगठित नेटवर्क तो सक्रिय नहीं था।

    मामले का खुलासा तब हुआ जब एक छात्र ने संबंधित व्हाट्सएप चैट के स्क्रीनशॉट सार्वजनिक कर दिए। जांच के दौरान सामने आए डिजिटल रिकॉर्ड में परीक्षा शुरू होने के कुछ मिनट बाद प्रश्नपत्र की पीडीएफ साझा किए जाने के साथ-साथ उसके विस्तृत उत्तर भी उपलब्ध कराए जाने के संकेत मिले। इसके बाद पुलिस ने कई लोगों से पूछताछ की। प्रारंभिक जांच में पर्याप्त साक्ष्य नहीं मिलने पर कुछ लोगों को छोड़ दिया गया, जबकि मुख्य आरोपी के खिलाफ कार्रवाई जारी रखी गई।

    नेपाल के शिक्षा मंत्रालय ने मामले को गंभीर मानते हुए गृह मंत्रालय और पुलिस अधिकारियों के साथ समन्वय स्थापित किया। मंत्रालय का कहना है कि प्रारंभिक जांच में संकेत मिले हैं कि प्रश्नपत्र लीक की घटना किसी विश्वविद्यालय कर्मचारी के बजाय एक शिक्षक से जुड़ी हो सकती है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाएगी और दोषी पाए जाने वाले किसी भी व्यक्ति के खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई होगी।

    इस घटना ने नेपाल की उच्च शिक्षा व्यवस्था की विश्वसनीयता पर नई बहस छेड़ दी है। हाल के वर्षों में शिक्षा क्षेत्र में पारदर्शिता, परीक्षा सुरक्षा और युवाओं के विश्वास जैसे मुद्दे लगातार चर्चा में रहे हैं। अब छात्र संगठनों का कहना है कि केवल दोषियों की गिरफ्तारी ही पर्याप्त नहीं होगी, बल्कि परीक्षा प्रणाली को अधिक सुरक्षित, तकनीकी रूप से मजबूत और पारदर्शी बनाने के लिए व्यापक सुधार भी आवश्यक हैं। आने वाले दिनों में जांच की प्रगति और सरकार के अगले कदम इस मामले की दिशा तय करेंगे।

  • ईरानी जहाज पर कथित यूक्रेनी हमले से बढ़ा तनाव, अराघची और लावरोव ने फोन पर साझा की रणनीतिक चिंता

    ईरानी जहाज पर कथित यूक्रेनी हमले से बढ़ा तनाव, अराघची और लावरोव ने फोन पर साझा की रणनीतिक चिंता

    नई दिल्ली । कैस्पियन सागर में एक ईरानी वाणिज्यिक जहाज पर हुए कथित हमले के बाद पश्चिम एशिया और यूरोपीय क्षेत्र में कूटनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। इस घटनाक्रम के बीच ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची और रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने फोन पर बातचीत कर सुरक्षा स्थिति, क्षेत्रीय तनाव और आगे की रणनीति पर विचार-विमर्श किया। दोनों नेताओं ने हमले की निंदा करते हुए इसे अंतरराष्ट्रीय कानून और संयुक्त राष्ट्र चार्टर के मूल सिद्धांतों के विरुद्ध बताया।

    ईरानी विदेश मंत्रालय के अनुसार, अराघची ने बातचीत के दौरान कहा कि किसी भी संप्रभु देश के वाणिज्यिक जहाज को निशाना बनाना गंभीर चिंता का विषय है। उन्होंने इस घटना को क्षेत्रीय स्थिरता के लिए खतरा बताते हुए कहा कि ईरान अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा और समुद्री हितों की रक्षा के लिए आवश्यक कदम उठाने का अधिकार रखता है। उनका कहना था कि ऐसे हमलों को अनदेखा नहीं किया जा सकता और जिम्मेदार पक्षों को जवाबदेह ठहराया जाना चाहिए।

    रूसी विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने भी कथित हमले की आलोचना करते हुए इसे अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन बताया। उन्होंने कहा कि इस प्रकार की घटनाएं रूस और ईरान के बीच विकसित हो रहे व्यापारिक और समुद्री संपर्क मार्गों के लिए भी जोखिम पैदा करती हैं। दोनों देशों ने इस बात पर सहमति जताई कि समुद्री व्यापार की सुरक्षा सुनिश्चित करना क्षेत्रीय और वैश्विक आर्थिक स्थिरता के लिए महत्वपूर्ण है।

    बातचीत के दौरान दोनों विदेश मंत्रियों ने हाल के क्षेत्रीय घटनाक्रमों पर भी चर्चा की। इसमें होर्मुज जलडमरूमध्य से जुड़ी सुरक्षा स्थिति और पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव का भी उल्लेख किया गया। दोनों पक्षों ने माना कि मौजूदा परिस्थितियों में कूटनीतिक प्रयासों को मजबूत करना और तनाव को नियंत्रित करने के लिए संवाद बनाए रखना आवश्यक है।

    ईरानी विदेश मंत्री ने इससे पहले यूरोपीय संघ की विदेश नीति प्रमुख काजा कैलास के साथ भी टेलीफोन पर बातचीत की थी। इस दौरान उन्होंने कथित हमले की निंदा करते हुए यूरोपीय संघ, संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद और अंतरराष्ट्रीय समुदाय से इस घटना की निष्पक्ष जांच कराने तथा जिम्मेदार लोगों के खिलाफ उचित कार्रवाई सुनिश्चित करने की अपील की। दोनों पक्षों ने क्षेत्रीय सुरक्षा और समुद्री मार्गों की स्थिरता बनाए रखने की आवश्यकता पर भी चर्चा की।

    ईरान ने इस मामले को लेकर तेहरान में यूक्रेन के प्रभारी राजनयिक को तलब कर औपचारिक विरोध दर्ज कराया है। विदेश मंत्रालय के अनुसार, संबंधित अधिकारी को विरोध पत्र सौंपते हुए घटना पर ईरान की कड़ी आपत्ति से अवगत कराया गया। मंत्रालय का कहना है कि कथित हमला स्थानीय समयानुसार शनिवार तड़के हुआ, जिसमें जहाज को नुकसान पहुंचा और एक नाविक की मृत्यु हो गई।

    ईरानी विदेश मंत्री ने सार्वजनिक रूप से भी इस घटना पर कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि देश अपनी सुरक्षा और संप्रभुता से जुड़े मामलों पर दृढ़ रुख अपनाएगा। दूसरी ओर, इस पूरे घटनाक्रम पर यूक्रेन की ओर से तत्काल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। ऐसे में मामले को लेकर अलग-अलग पक्षों के दावों के बीच अंतरराष्ट्रीय समुदाय की निगाहें संभावित कूटनीतिक कदमों और आगे की जांच पर टिकी हुई हैं। यह घटनाक्रम पहले से संवेदनशील क्षेत्रीय परिस्थितियों के बीच समुद्री सुरक्षा और अंतरराष्ट्रीय संबंधों पर व्यापक प्रभाव डाल सकता है।

  • पीओके में जेएएसी का लॉन्ग मार्च शुरू, अधिकारियों से वार्ता विफल होने के बाद बढ़ा राजनीतिक तनाव

    पीओके में जेएएसी का लॉन्ग मार्च शुरू, अधिकारियों से वार्ता विफल होने के बाद बढ़ा राजनीतिक तनाव

    नई दिल्ली । पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (पीओके) में जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी (जेएएसी) और पाकिस्तानी अधिकारियों के बीच हुई बातचीत किसी साझा सहमति पर नहीं पहुंच सकी, जिसके बाद क्षेत्र में प्रस्तावित लॉन्ग मार्च शुरू हो गया। रावलकोट से मुजफ्फराबाद तक निकाले जा रहे इस मार्च के चलते इलाके में राजनीतिक और सुरक्षा संबंधी गतिविधियां तेज हो गई हैं। घटनाक्रम पर विभिन्न संगठनों और अंतरराष्ट्रीय समुदाय की भी नजर बनी हुई है।

    जेएएसी ने पहले ही घोषणा कर दी थी कि वह अपनी मांगों को लेकर चरणबद्ध तरीके से लॉन्ग मार्च आयोजित करेगा। योजना के अनुसार विभिन्न स्थानों से प्रदर्शनकारी एकत्र होकर रावलकोट पहुंचे और वहां से मुजफ्फराबाद की ओर कूच किया। आंदोलन के आयोजकों का कहना है कि उनकी मांगों को लेकर हुई वार्ता का कोई स्वीकार्य समाधान नहीं निकल सका, जिसके कारण आंदोलन को आगे बढ़ाने का निर्णय लिया गया।

    इस बीच यूनाइटेड कश्मीर पीपुल्स नेशनल पार्टी (यूकेपीएनपी) ने पाकिस्तानी प्रशासन से संयम बरतने की अपील की है। संगठन ने कहा कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन में भाग लेने वाले लोगों के खिलाफ किसी भी प्रकार के बल प्रयोग से बचा जाना चाहिए। उसके अनुसार शांतिपूर्ण विरोध, संगठन बनाने की स्वतंत्रता और अभिव्यक्ति की आजादी अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार सिद्धांतों के तहत महत्वपूर्ण अधिकार हैं, जिनका हर परिस्थिति में सम्मान किया जाना चाहिए।

    यूकेपीएनपी ने यह भी दावा किया कि क्षेत्र में पिछले कुछ समय से जारी अशांति के दौरान कई लोगों की जान जा चुकी है। संगठन ने ऐसी सभी घटनाओं पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि प्रत्येक मौत या घायल होने की घटना की निष्पक्ष, स्वतंत्र और समयबद्ध जांच होनी चाहिए, ताकि यदि कहीं कोई जिम्मेदारी बनती है तो कानून के अनुसार कार्रवाई सुनिश्चित की जा सके।

    मार्च की घोषणा के बाद क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था भी कड़ी कर दी गई है। विभिन्न सुरक्षा बलों की अतिरिक्त तैनाती की खबरों के बीच प्रशासन हालात पर नजर बनाए हुए है। बढ़ी हुई सुरक्षा व्यवस्था के कारण इलाके में तनाव का माहौल बना हुआ है, हालांकि प्रदर्शनकारी अपने कार्यक्रम को शांतिपूर्ण तरीके से आगे बढ़ाने की बात कह रहे हैं। प्रशासन की ओर से भी कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं।

    यूकेपीएनपी ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से भी सक्रिय भूमिका निभाने की अपील की है। संगठन का कहना है कि वैश्विक संस्थाओं और प्रमुख देशों को क्षेत्र की स्थिति पर नजर रखनी चाहिए तथा संवाद और शांतिपूर्ण समाधान को प्रोत्साहित करना चाहिए। इसके साथ ही स्वतंत्र मानवाधिकार संगठनों और अंतरराष्ट्रीय मीडिया से भी घटनाक्रम की निष्पक्ष निगरानी और रिपोर्टिंग की अपील की गई है।

    विश्लेषकों का मानना है कि पीओके में मौजूदा घटनाक्रम आने वाले दिनों में क्षेत्रीय स्थिति को प्रभावित कर सकता है। यदि वार्ता की प्रक्रिया दोबारा शुरू होती है और सभी पक्ष बातचीत के माध्यम से समाधान तलाशते हैं तो तनाव कम होने की संभावना बन सकती है। वहीं यदि गतिरोध बना रहता है तो क्षेत्र में राजनीतिक गतिविधियां और विरोध प्रदर्शन आगे भी जारी रह सकते हैं। फिलहाल सभी की नजर इस बात पर है कि प्रशासन और आंदोलनकारी आगे की स्थिति को किस प्रकार संभालते हैं और क्या दोनों पक्ष किसी नए संवाद के रास्ते पर सहमत हो पाते हैं।

  • अमेरिका के सिएटल में सार्वजनिक कार्यक्रम के दौरान फायरिंग, दो की मौत के बाद सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल

    अमेरिका के सिएटल में सार्वजनिक कार्यक्रम के दौरान फायरिंग, दो की मौत के बाद सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल


    नई दिल्ली । 
    अमेरिका के वॉशिंगटन राज्य के सिएटल शहर में आयोजित एक लोकप्रिय फूड फेस्टिवल के दौरान हुई गोलीबारी ने लोगों को झकझोर दिया। इस घटना में अब तक दो लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है, जबकि पांच अन्य घायल हुए हैं। घायलों का विभिन्न अस्पतालों में इलाज चल रहा है और स्थानीय पुलिस पूरे मामले की जांच में जुटी हुई है। घटना के बाद पूरे इलाके को सुरक्षा घेरे में लेकर आम लोगों की आवाजाही पर अस्थायी रोक लगा दी गई।

    जानकारी के अनुसार यह घटना रविवार शाम सिएटल सेंटर परिसर में आयोजित फूड फेस्टिवल के दौरान हुई। उस समय बड़ी संख्या में लोग कार्यक्रम में मौजूद थे। अचानक गोलियां चलने की आवाज सुनते ही वहां अफरा-तफरी मच गई और लोग अपनी जान बचाने के लिए इधर-उधर भागने लगे। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार कुछ ही क्षणों में पूरा आयोजन स्थल दहशत के माहौल में बदल गया।

    आपातकालीन सेवाओं और पुलिस दल ने सूचना मिलते ही तुरंत मौके पर पहुंचकर राहत एवं बचाव अभियान शुरू किया। अधिकारियों ने बताया कि दो लोगों की घटनास्थल पर ही मौत हो गई। घायलों में एक दो वर्षीय बच्चा, एक 23 वर्षीय युवक और दो महिलाएं शामिल हैं, जिन्हें तत्काल अस्पताल पहुंचाया गया। इसके अलावा करीब 40 वर्षीय एक महिला को मामूली चोटें आईं, जिनका प्राथमिक उपचार मौके पर ही किया गया और उन्होंने अस्पताल जाने से इनकार कर दिया।

    अस्पताल प्रशासन के अनुसार भर्ती किए गए मरीजों में एक महिला की हालत गंभीर बनी हुई है और उसका ऑपरेशन किया गया है। अन्य मरीजों की स्थिति फिलहाल स्थिर बताई जा रही है। चिकित्सकों की टीम लगातार सभी घायलों की निगरानी कर रही है ताकि उन्हें आवश्यक उपचार समय पर मिल सके।

    घटना के तुरंत बाद पुलिस ने पूरे क्षेत्र को खाली कराया और लोगों से जांच पूरी होने तक सिएटल सेंटर से दूर रहने की अपील की। यह परिसर शहर का प्रमुख सांस्कृतिक और मनोरंजन केंद्र माना जाता है, जहां वर्षभर बड़ी संख्या में सार्वजनिक कार्यक्रम आयोजित होते हैं। घटना के समय भी फूड फेस्टिवल में हजारों लोगों की मौजूदगी बताई जा रही है।

    प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि उन्होंने कार्यक्रम स्थल के भीतर लगातार कई गोलियों की आवाज सुनी। गोलीबारी के बाद लोग अपने परिवार और बच्चों को सुरक्षित स्थान पर ले जाने की कोशिश करने लगे। कई लोग बिना सामान उठाए ही घटनास्थल से बाहर निकल गए। सुरक्षा एजेंसियों ने मौके से साक्ष्य एकत्र कर आसपास के क्षेत्र की जांच शुरू कर दी है।

    पुलिस ने फिलहाल किसी संदिग्ध की गिरफ्तारी या गोलीबारी के संभावित कारणों के संबंध में आधिकारिक जानकारी साझा नहीं की है। अधिकारियों का कहना है कि मामले के सभी पहलुओं की जांच की जा रही है और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। आसपास लगे निगरानी कैमरों की फुटेज भी खंगाली जा रही है।

    यह घटना ऐसे समय सामने आई है जब हाल के दिनों में अमेरिका के विभिन्न शहरों में सार्वजनिक स्थानों पर गोलीबारी की कई घटनाएं दर्ज की गई हैं। इससे पहले एरिजोना के टक्सन शहर में भी गोलीबारी की एक गंभीर घटना हुई थी, जिसमें कई लोग घायल हुए थे। लगातार सामने आ रही ऐसी घटनाओं ने सार्वजनिक आयोजनों की सुरक्षा और हथियारों से जुड़ी चुनौतियों को लेकर नई बहस छेड़ दी है। फिलहाल सिएटल पुलिस मामले की विस्तृत जांच कर रही है और लोगों से किसी भी महत्वपूर्ण जानकारी को साझा करने की अपील की गई है।

  • त्रिभुवन यूनिवर्सिटी पेपर लीक विवाद ने बढ़ाया सरकार पर दबाव, विरोध प्रदर्शन तेज; पुलिस ने शुरू की व्यापक जांच

    त्रिभुवन यूनिवर्सिटी पेपर लीक विवाद ने बढ़ाया सरकार पर दबाव, विरोध प्रदर्शन तेज; पुलिस ने शुरू की व्यापक जांच


    नई दिल्ली । 
    नेपाल में मास्टर ऑफ बिजनेस स्टडीज (एमबीएस) प्रथम सेमेस्टर की परीक्षा का प्रश्नपत्र लीक होने के बाद छात्रों का विरोध प्रदर्शन तेज हो गया है। राजधानी काठमांडू सहित कई स्थानों पर युवाओं ने परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता और जवाबदेही की मांग को लेकर प्रदर्शन किया। इस घटनाक्रम ने देश की शिक्षा व्यवस्था और परीक्षा सुरक्षा तंत्र पर नए सिरे से सवाल खड़े कर दिए हैं। प्रदर्शनकारी छात्रों का कहना है कि परीक्षा प्रक्रिया की विश्वसनीयता बनाए रखने के लिए दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई और भविष्य में ऐसी घटनाओं की रोकथाम के लिए प्रभावी व्यवस्था जरूरी है।

    पेपर लीक का मामला सामने आने के बाद नेपाल पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए एक व्यक्ति को गिरफ्तार किया है। जांच एजेंसियों के अनुसार, आरोपी पर परीक्षा शुरू होने के कुछ ही मिनट बाद प्रश्नपत्र ऑनलाइन साझा करने का आरोप है। पुलिस का कहना है कि पूरे मामले की तकनीकी और डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर जांच की जा रही है तथा यह पता लगाया जा रहा है कि प्रश्नपत्र परीक्षा से पहले किस तरह बाहर पहुंचा और इसमें किन-किन लोगों की भूमिका रही।

    प्रारंभिक जांच के अनुसार, त्रिभुवन यूनिवर्सिटी के एमबीएस प्रथम सेमेस्टर की परीक्षा का प्रश्नपत्र परीक्षा शुरू होने के लगभग पांच मिनट बाद एक व्हाट्सएप समूह में साझा किया गया। इसके बाद उसी समूह में प्रश्नों के उत्तर भी उपलब्ध कराए जाने की बात सामने आई। सोशल मीडिया पर बातचीत के स्क्रीनशॉट सामने आने के बाद मामला तेजी से सार्वजनिक हुआ और शिक्षा विभाग के साथ पुलिस ने भी जांच शुरू कर दी।

    जांच में गिरफ्तार किए गए व्यक्ति की पहचान संदीप सिंह के रूप में हुई है, जो विभिन्न शिक्षण संस्थानों से जुड़े बताए जा रहे हैं। पूछताछ के दौरान उन्होंने दावा किया कि उन्हें प्रश्नपत्र किसी अन्य व्यक्ति से प्राप्त हुआ था और उन्होंने केवल उसे आगे साझा किया। हालांकि जांच एजेंसियां इस दावे की पुष्टि करने के लिए डिजिटल रिकॉर्ड, मोबाइल डेटा और अन्य तकनीकी साक्ष्यों की पड़ताल कर रही हैं। अब तक जांच में आर्थिक लाभ मिलने का कोई स्पष्ट प्रमाण सामने नहीं आया है, लेकिन पुलिस पूरे नेटवर्क की जांच कर रही है।

    नेपाल के शिक्षा मंत्रालय ने मामले को गंभीर बताते हुए गृह मंत्रालय और पुलिस अधिकारियों के साथ समन्वय स्थापित किया है। मंत्रालय का कहना है कि परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता बनाए रखने के लिए दोषियों के खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई की जाएगी। शुरुआती जांच में यह संकेत भी मिले हैं कि प्रश्नपत्र लीक की घटना में किसी शिक्षक की भूमिका हो सकती है, हालांकि अंतिम निष्कर्ष विस्तृत जांच पूरी होने के बाद ही सामने आएगा।

    पेपर लीक विवाद के बाद विश्वविद्यालय की परीक्षा सुरक्षा प्रणाली और गोपनीयता व्यवस्था पर व्यापक बहस शुरू हो गई है। छात्र संगठनों ने परीक्षा प्रक्रिया को अधिक सुरक्षित बनाने, डिजिटल निगरानी बढ़ाने और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है। उनका कहना है कि बार-बार होने वाली ऐसी घटनाएं मेहनत करने वाले विद्यार्थियों के भविष्य को प्रभावित करती हैं और शिक्षा व्यवस्था पर लोगों का भरोसा कमजोर करती हैं।

    यह विरोध ऐसे समय सामने आया है जब नेपाल में युवाओं के बीच भ्रष्टाचार, बेरोजगारी और प्रशासनिक जवाबदेही जैसे मुद्दों को लेकर पहले से असंतोष बना हुआ है। अब पेपर लीक की इस घटना ने शिक्षा व्यवस्था को भी सार्वजनिक बहस के केंद्र में ला दिया है। सरकार ने निष्पक्ष जांच और आवश्यक सुधारों का भरोसा दिया है, जबकि छात्र संगठनों ने स्पष्ट किया है कि दोषियों पर प्रभावी कार्रवाई और परीक्षा व्यवस्था में सुधार होने तक वे इस मुद्दे को उठाते रहेंगे।

  • दुनिया का सबसे बड़ा एयरपोर्ट, जिसका रकबा मुंबई से भी ज्यादा; कई छोटे देशों से है विशाल

    दुनिया का सबसे बड़ा एयरपोर्ट, जिसका रकबा मुंबई से भी ज्यादा; कई छोटे देशों से है विशाल


    नई दिल्ली। दुनिया के सबसे बड़े एयरपोर्ट की बात आते ही ज्यादातर लोग सबसे व्यस्त या सबसे ज्यादा यात्रियों वाले हवाई अड्डे के बारे में सोचते हैं। लेकिन यदि पैमाना जमीन का क्षेत्रफल हो, तो यह रिकॉर्ड सऊदी अरब के नाम दर्ज है। यहां स्थित किंग फहद इंटरनेशनल एयरपोर्ट (King Fahd International Airport) अपने विशाल क्षेत्रफल के कारण दुनिया का सबसे बड़ा एयरपोर्ट माना जाता है।

    776 वर्ग किलोमीटर में फैला है एयरपोर्ट

    सऊदी अरब के दम्माम शहर के पास स्थित किंग फहद इंटरनेशनल एयरपोर्ट लगभग 776 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में फैला हुआ है। यह क्षेत्रफल कई देशों और बड़े शहरों से भी अधिक है। हालांकि, इस पूरे इलाके का उपयोग वर्तमान में एयरपोर्ट संचालन के लिए नहीं किया जाता। इसका बड़ा हिस्सा भविष्य में विस्तार (एक्सपेंशन) की योजनाओं के लिए सुरक्षित रखा गया है।

    कई छोटे देशों से भी बड़ा

    इस एयरपोर्ट का कुल क्षेत्रफल दुनिया के कई छोटे देशों से अधिक है। उदाहरण के लिए:

    सिंगापुर का क्षेत्रफल लगभग 735 वर्ग किलोमीटर है।
    बहरीन का क्षेत्रफल करीब 786 वर्ग किलोमीटर है, यानी एयरपोर्ट उसके लगभग बराबर है।
    वेटिकन सिटी और मालदीव जैसे देशों की तुलना में भी यह कई गुना बड़ा है।
    भारत की आर्थिक राजधानी मुंबई का क्षेत्रफल करीब 603 वर्ग किलोमीटर है, जो इस एयरपोर्ट से काफी छोटा है।
    आकार के लिए मशहूर, भीड़ के लिए नहीं

    किंग फहद इंटरनेशनल एयरपोर्ट दुनिया के सबसे व्यस्त एयरपोर्ट्स में शामिल नहीं है। इसकी पहचान मुख्य रूप से इसके विशाल भूमि क्षेत्र के कारण है। एयरपोर्ट का बड़ा हिस्सा भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए आरक्षित रखा गया है, जिससे आने वाले वर्षों में इसका विस्तार आसानी से किया जा सके।

    दम्माम क्षेत्र का प्रमुख एविएशन हब

    यह एयरपोर्ट सऊदी अरब के पूर्वी प्रांत में स्थित दम्माम और आसपास के औद्योगिक क्षेत्रों के लिए महत्वपूर्ण हवाई केंद्र है। यहां से घरेलू और अंतरराष्ट्रीय दोनों तरह की उड़ानों का संचालन होता है और यह देश के प्रमुख रणनीतिक एयरपोर्ट्स में गिना जाता है।

    दुनिया के सबसे बड़े एयरपोर्ट का खिताब यात्रियों की संख्या से नहीं, बल्कि उसके विशाल भू-भाग से तय होता है और इस मामले में किंग फहद इंटरनेशनल एयरपोर्ट आज भी शीर्ष पर कायम है।

  • वेनेजुएला में आए दो शक्तिशाली भूकंपों से 2 फीट तक खिसकी धरती… NISAR सैटेलाइट ने किया खुलासा

    वेनेजुएला में आए दो शक्तिशाली भूकंपों से 2 फीट तक खिसकी धरती… NISAR सैटेलाइट ने किया खुलासा


    कराकस ।
    वेनेजुएला (Venezuela) में पिछले महीने आए दो शक्तिशाली भूकंपों (Earthquakes) को लेकर इसरो (ISRO) और नासा (NASA) के संयुक्त मिशन NISAR सैटेलाइट ने बड़ा खुलासा किया है. सैटेलाइट डेटा के विश्लेषण से पता चला है कि इस भीषण भूकंप के कारण कई जगहों पर जमीन लगभग 60 सेंटीमीटर यानी 2 फीट तक खिसक गई, जिसके कारण राजधानी कराकस (Caracas) और ला गुएरा (La Guaira) में भीषण तबाही मची।

    वैज्ञानिकों ने 24 जून को आए भूकंप से पहले और बाद में NISAR सैटेलाइट से ली गई पृथ्वी की तस्वीरों का अध्ययन किया. इसके लिए 13 और 18 जून की तस्वीरों की तुलना 25 और 30 जून को लिए गए डेटा से की गई, ताकि भूकंप के बाद जमीन की सतह में हुए बदलाव का पता लगाया जा सके।

    बता दें कि 24 जून को उत्तरी वेनेजुएला में 7.2 तीव्रता का भूकंप आया था. इसके 39 सेकंड बाद 7.5 तीव्रता का एक और शक्तिशाली भूकंप आया. इन भूकंपों में 5,000 से अधिक लोगों की मौत और करीब 16,700 लोगों के घायल होने की जानकारी सामने आई थी. कराकस और ला गुएरा के अलावा त्रुजिलो, याराकुय, काराबोबो, अरागुआ और मिरांडा राज्य भी प्रभावित हुए थे।

    वैज्ञानिकों ने जमीन की सतह में हुए मामूली बदलावों का पता लगाने के लिए ‘इंटरफेरोमेट्रिक सिंथेटिक अपर्चर रडार’ (InSAR) तकनीक का इस्तेमाल किया. इसमें सैटेलाइट के बार-बार गुजरने के दौरान जुटाए गए डेटा की तुलना करके सैटेलाइट और जमीन के बीच की दूरी में हुए बदलावों का पता लगाया जाता है.

    यह पहली बार था जब किसी बड़े भूकंप के कारण जमीन की सतह में हुए बदलाव को मैप करने के लिए NISAR के ‘अर्जेंट रिस्पॉन्स सिस्टम’ का इस्तेमाल किया गया। नासा की जेट प्रोपल्शन लैबोरेटरी के भू-भौतिकीविद एरिक फील्डिंग के अनुसार, भूकंप की फॉल्ट लाइन समुद्र से होते हुए पूर्व की ओर बढ़ी और कराकस के उत्तर में स्थित इंटरनेशनल एयरपोर्ट के पास वापस तट पर आई. इस हिस्से के ठीक दक्षिण में जमीन का खिसकाव सबसे ज़्यादा लगभग 60 सेमी (2 फीट) रहा, यही वजह है कि कराकस और ला गुएरा में इतनी व्यापक तबाही देखने को मिली।

    एरिक के मुताबिक, InSAR तकनीक से वैज्ञानिकों को यह समझने में काफी मदद मिली कि भूकंप के दौरान वास्तव में क्या हुआ था. NISAR सैटेलाइट पृथ्वी की सतह को सीधे ऊपर से नहीं, बल्कि करीब 40 डिग्री के कोण से देखता है. इससे वह जमीन के क्षैतिज और ऊर्ध्वाधर, दोनों तरह के विस्थापन को रिकॉर्ड कर सकता है।

  • रोमानिया ने हवा में ही मार गिराया संदिग्ध रूसी ड्रोन…. 3 दिन में तीसरी बार घुसपैठ की कोशिश

    रोमानिया ने हवा में ही मार गिराया संदिग्ध रूसी ड्रोन…. 3 दिन में तीसरी बार घुसपैठ की कोशिश


    कीव।
    रोमानिया (Romania) ने रविवार को अपने हवाई क्षेत्र में घुसे एक संदिग्ध रूसी ड्रोन (Russian Drone) को मार गिराया। यह लगातार तीन दिनों में तीसरी ऐसी घटना है, जब यूरोपीय संघ (EU) और नाटो (NATO) सदस्य देश रोमानिया (Romania) के हवाई क्षेत्र में ड्रोन घुसपैठ हुई। देश के राष्ट्रपति ने इसकी पुष्टि करते हुए कहा कि राष्ट्रीय सुरक्षा से किसी भी तरह का समझौता नहीं किया जाएगा।

    ड्रोन को कैसे मार गिराया गया?
    नाटो के परिचालन नियंत्रण के तहत फेटेस्टी एयरबेस से रोमानियाई वायुसेना के दो F-16 लड़ाकू विमान तत्काल उड़ान भरकर पहुंचे और काला सागर (Black Sea) के ऊपर उस ड्रोन को मार गिराया।


    राष्ट्रपति ने क्या कहा?

    रोमानिया के राष्ट्रपति निकुशोर दान ने कहा कि आज सुबह 10:13 बजे रोमानियाई वायुसेना के एक F-16 विमान ने सुलीना-चिलिया क्षेत्र में रोमानिया के क्षेत्रीय जलक्षेत्र के ऊपर एक नए ड्रोन को मार गिराया। राष्ट्रपति ने बताया कि पहले रोके गए ड्रोन में से एक की जांच में पता चला है कि वह संभवतः शाहेद प्रकार का ड्रोन था, जिसका इस्तेमाल रूस यूक्रेन के खिलाफ अपने युद्ध में कर रहा है।


    यह हाल के दिनों में कितनी बड़ी कार्रवाई है?

    नाटो के सुप्रीम हेडक्वार्टर्स एलाइड पावर्स यूरोप के प्रवक्ता कर्नल मार्टिन ओ’डॉनेल ने कहा कि नाटो के समन्वय से रोमानिया द्वारा नाटो हवाई क्षेत्र का उल्लंघन करने वाले ड्रोन को मार गिराने की यह हाल के समय की चौथी कार्रवाई है।


    क्या इससे पहले भी रोमानिया ने ड्रोन गिराया था?

    उन्होंने बताया कि हाल की तीन घटनाओं से पहले मई में रोमानियाई लड़ाकू विमानों ने एस्टोनिया के ऊपर उड़ रहे एक ड्रोन को भी मार गिराया था। रोमानियाई पायलट और विमान फिलहाल लिथुआनिया में तैनात हैं, जहां से वे नाटो की पूर्वी सुरक्षा व्यवस्था के तहत व्यापक अभियान चलाने में सक्षम हैं।


    नाटो ने क्या संदेश दिया?

    कर्नल ओ डॉनेल ने कहा कि हम लगातार साबित कर रहे हैं कि नाटो हर समय सतर्क है और किसी भी खतरे से अपनी सुरक्षा करने के लिए पूरी तरह तैयार है।


    रोमानिया ने ड्रोन से निपटने के लिए क्या तैयारी की है?

    रोमानिया ने MEROPS काउंटर-ड्रोन सिस्टम खरीदा है। यह अपेक्षाकृत कम लागत वाले लगभग तीन फीट लंबे ड्रोन दागकर शाहेद और अन्य प्रकार के दुश्मन ड्रोन को नष्ट करता है। यह प्रणाली नाटो की पूर्वी सीमा पर ड्रोन खतरों से सुरक्षा मजबूत करने की व्यापक रणनीति का हिस्सा है।


    क्या इससे पहले भी रूसी ड्रोन रोमानिया में नुकसान पहुंचा चुके हैं?

    मई में यूक्रेन पर रूसी हमले के दौरान एक रूसी ड्रोन रास्ता भटककर पूर्वी रोमानिया की एक अपार्टमेंट इमारत से टकरा गया था। इस घटना में दो लोग घायल हुए थे और इससे आशंका बढ़ गई थी कि युद्ध नाटो क्षेत्र तक फैल सकता है।


    राष्ट्रपति ने रूस को क्या चेतावनी दी?

    राष्ट्रपति निकुशोर दान ने कहा, ‘रूस द्वारा लगातार रोमानिया के हवाई क्षेत्र का उल्लंघन करना अस्वीकार्य और असहनीय है। यह न केवल रोमानिया बल्कि नाटो और यूरोपीय संघ के हवाई क्षेत्र का भी उल्लंघन है। ऐसे कदम बिल्कुल स्वीकार्य नहीं हैं और हम अपने सहयोगियों के साथ मिलकर इन्हें पूरी गंभीरता से ले रहे हैं।’


    बेल्जियम ने इस घटना पर क्या प्रतिक्रिया दी?

    नाटो और यूरोपीय संघ के सदस्य बेल्जियम ने रविवार की इस घुसपैठ को यूरोपीय सुरक्षा के लिए रूस के युद्ध से पैदा हो रहे खतरे की गंभीर याद दिलाने वाली घटना बताया। बेल्जियम के विदेश मंत्री मैक्सिम प्रेवो ने कहा कि पिछले कुछ दिनों में रोमानिया के ऊपर कई ड्रोन मार गिराए गए हैं। जांच में पहले ही पुष्टि हो चुकी है कि उनमें से एक रूसी शाहेद ड्रोन था। बेल्जियम इस कठिन समय में रोमानिया के साथ मजबूती से खड़ा है। उन्होंने यह भी बताया कि नाटो की पूर्वी सुरक्षा व्यवस्था के तहत बेल्जियम के 300 सैनिक रोमानिया में तैनात हैं।


    क्या नाटो देशों में ड्रोन घुसपैठ की घटनाएं बढ़ रही हैं?

    फरवरी 2022 में रूस द्वारा यूक्रेन पर पूर्ण पैमाने पर हमला शुरू करने के बाद से रूस और यूक्रेन के ड्रोन कई बार रोमानिया सहित अन्य नाटो सदस्य देशों के हवाई क्षेत्र में पहुंच चुके हैं। इन घटनाओं ने पूरे यूरोप की सुरक्षा चिंताओं को और बढ़ा दिया है।