Category: International

  • ईरान को कड़ा संदेश देने निकला अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल, कई देशों में सुरक्षा सहयोग पर जोर

    ईरान को कड़ा संदेश देने निकला अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल, कई देशों में सुरक्षा सहयोग पर जोर

    नई दिल्ली । वैश्विक सुरक्षा चुनौतियों और बदलते भू-राजनीतिक समीकरणों के बीच अमेरिकी कांग्रेस के एक प्रतिनिधिमंडल ने हाल ही में संयुक्त अरब अमीरात, थाईलैंड और फिलीपींस का दौरा कर क्षेत्रीय सहयोग को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल की है। इस प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व अमेरिकी सांसद जोश गॉटहाइमर ने किया। यात्रा का उद्देश्य सहयोगी देशों के साथ सुरक्षा, प्रौद्योगिकी, ऊर्जा और क्षेत्रीय स्थिरता से जुड़े मुद्दों पर समन्वय बढ़ाना था। इस दौरान विभिन्न देशों के शीर्ष नेताओं और अधिकारियों के साथ कई दौर की बैठकें आयोजित की गईं।

    संयुक्त अरब अमीरात की राजधानी अबू धाबी में प्रतिनिधिमंडल ने राष्ट्रीय सुरक्षा और विदेश नीति से जुड़े वरिष्ठ नेताओं के साथ विस्तृत बातचीत की। चर्चाओं में क्षेत्रीय सुरक्षा, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, ऊर्जा सहयोग और मध्य पूर्व की मौजूदा चुनौतियों पर विशेष ध्यान दिया गया। अमेरिकी पक्ष ने इस बात पर जोर दिया कि क्षेत्र में स्थिरता बनाए रखने के लिए सहयोगी देशों के बीच मजबूत साझेदारी आवश्यक है। बातचीत के दौरान ईरान की गतिविधियों और उसके पड़ोसी देशों पर पड़ने वाले प्रभाव का मुद्दा भी प्रमुखता से उठा। अमेरिकी प्रतिनिधियों ने क्षेत्रीय सुरक्षा के लिए सामूहिक प्रयासों की आवश्यकता पर बल दिया।

    अमेरिकी सांसद जोश गॉटहाइमर ने संयुक्त अरब अमीरात की भूमिका की सराहना करते हुए कहा कि दोनों देशों के बीच संबंध लगातार मजबूत हुए हैं। उन्होंने क्षेत्रीय तनावों के बीच यूएई की स्थिरता और सुरक्षा के प्रति प्रतिबद्धता को महत्वपूर्ण बताया। साथ ही उन्होंने इजरायल और यूएई के बीच विकसित हो रहे संबंधों को क्षेत्रीय सहयोग का सकारात्मक उदाहरण बताया। उनका कहना था कि सुरक्षा और आर्थिक विकास के लिए साझेदारी का विस्तार समय की आवश्यकता है। इसी क्रम में ऊर्जा और उभरती तकनीकों के क्षेत्र में भी दोनों देशों के बीच बढ़ते सहयोग पर चर्चा हुई।

    यात्रा के दूसरे चरण में अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल थाईलैंड और फिलीपींस पहुंचा, जहां हिंद-प्रशांत क्षेत्र की सुरक्षा स्थिति पर विचार-विमर्श किया गया। बैठकों में समुद्री सुरक्षा, क्षेत्रीय स्थिरता और विभिन्न सुरक्षा चुनौतियों से निपटने के लिए साझा रणनीति पर चर्चा हुई। अमेरिकी पक्ष ने इस क्षेत्र में सहयोगी देशों के साथ रक्षा और खुफिया समन्वय को और मजबूत करने की आवश्यकता बताई। साथ ही नई तकनीकों, साइबर सुरक्षा और रणनीतिक साझेदारी को भी बातचीत का महत्वपूर्ण हिस्सा बनाया गया। अमेरिका का मानना है कि हिंद-प्रशांत क्षेत्र में स्थिरता वैश्विक आर्थिक और सुरक्षा व्यवस्था के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।

    इस यात्रा ने यह संकेत दिया है कि अमेरिका एक साथ कई क्षेत्रों में अपने रणनीतिक संबंधों को मजबूत करने की नीति पर आगे बढ़ रहा है। मध्य पूर्व और हिंद-प्रशांत दोनों क्षेत्रों में सहयोगी देशों के साथ सुरक्षा, ऊर्जा और तकनीकी सहयोग को बढ़ावा देना उसकी प्राथमिकताओं में शामिल है। बदलते अंतरराष्ट्रीय परिदृश्य में अमेरिका अपने साझेदार देशों के साथ मिलकर क्षेत्रीय चुनौतियों का सामना करने और दीर्घकालिक स्थिरता सुनिश्चित करने की दिशा में सक्रिय भूमिका निभा रहा है।

    यह दौरा भविष्य में अमेरिका और उसके सहयोगी देशों के बीच सुरक्षा तथा रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत कर सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे प्रयास क्षेत्रीय संतुलन बनाए रखने और उभरती वैश्विक चुनौतियों का सामूहिक समाधान खोजने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।

  • भारत-जर्मनी तकनीकी साझेदारी को नई उड़ान, क्वांटम और डीप-टेक सहयोग पर बड़ा फोकस

    भारत-जर्मनी तकनीकी साझेदारी को नई उड़ान, क्वांटम और डीप-टेक सहयोग पर बड़ा फोकस

    नई दिल्ली । भारत और जर्मनी के बीच विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी क्षेत्र में सहयोग को नई दिशा देने की पहल तेज हो गई है। केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. जितेंद्र सिंह और जर्मनी के थुरिंगिया राज्य के मंत्री-प्रेसिडेंट मारियो वोग्ट के बीच हुई महत्वपूर्ण बैठक में भविष्य की उन्नत तकनीकों को लेकर व्यापक चर्चा हुई। इस बैठक में क्वांटम कम्युनिकेशन, फोटोनिक्स, अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी, डीप-टेक नवाचार और उद्योग आधारित अनुसंधान को मजबूत बनाने पर विशेष जोर दिया गया। दोनों देशों के वैज्ञानिक, शोध संस्थान, उद्योग जगत और सरकारी प्रतिनिधियों ने भी इस संवाद में भाग लिया, जिससे सहयोग के नए आयामों की संभावनाएं और मजबूत हुईं।

    बैठक के दौरान डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि भारत और जर्मनी के बीच विज्ञान, प्रौद्योगिकी और नवाचार के क्षेत्र में दशकों पुरानी साझेदारी रही है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि दोनों देशों ने वर्षों से अनुसंधान और तकनीकी विकास के क्षेत्र में एक-दूसरे के साथ मिलकर महत्वपूर्ण उपलब्धियां हासिल की हैं। वर्ष 2024 में विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी सहयोग के 50 वर्ष पूरे होने का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि यह संबंध आज रणनीतिक साझेदारी का महत्वपूर्ण आधार बन चुका है। तेजी से बदलती वैश्विक तकनीकी आवश्यकताओं के बीच दोनों देशों के बीच सहयोग को और विस्तार देने की आवश्यकता महसूस की जा रही है।

    चर्चा में जर्मनी के थुरिंगिया क्षेत्र की विशेष भूमिका भी सामने आई, जिसे यूरोप में फोटोनिक्स, ऑप्टिक्स, क्वांटम टेक्नोलॉजी और एडवांस्ड मैन्युफैक्चरिंग का प्रमुख केंद्र माना जाता है। दोनों पक्षों ने इस बात पर सहमति जताई कि भारत की नवाचार क्षमता और जर्मनी की तकनीकी विशेषज्ञता एक-दूसरे की पूरक हैं। इसी आधार पर क्वांटम कम्युनिकेशन नेटवर्क, क्वांटम सैटेलाइट संचार, ऑप्टिकल ग्राउंड स्टेशन और उन्नत फोटोनिक्स तकनीकों के विकास में संयुक्त प्रयासों की संभावनाओं पर विस्तार से विचार किया गया। जर्मनी ने यूरोप में चल रही क्वांटम संचार परियोजनाओं और ऑप्टिकल नेटवर्क से जुड़े अनुभव भी साझा किए।

    डॉ. सिंह ने बैठक में भारत के राष्ट्रीय क्वांटम मिशन के तहत हुई प्रगति की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि देश सुरक्षित और अत्याधुनिक क्वांटम संचार प्रणाली विकसित करने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। इसके साथ ही क्वांटम कंप्यूटिंग, मानक निर्माण, तकनीकी साझेदारी और विशेषज्ञों के आदान-प्रदान को लेकर भी चर्चा हुई। केंद्रीय मंत्री ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में अनुसंधान और नवाचार को प्रोत्साहित करने के लिए शुरू की गई विभिन्न पहलों का उल्लेख करते हुए कहा कि भारत आज दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा स्टार्टअप इकोसिस्टम बन चुका है और यहां वैश्विक तकनीकी निवेश के लिए व्यापक अवसर मौजूद हैं।

    बैठक में अंतरिक्ष क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने पर भी विशेष ध्यान दिया गया। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन और जर्मन एयरोस्पेस सेंटर के बीच लंबे समय से चल रहे सहयोग को आगे बढ़ाने पर चर्चा हुई। दोनों देशों ने सैटेलाइट संचार, ऑप्टिकल कम्युनिकेशन, मानव अंतरिक्ष मिशन, माइक्रोग्रैविटी रिसर्च, पृथ्वी अवलोकन और ड्रोन तकनीक जैसे क्षेत्रों में नए सहयोग की संभावनाओं पर विचार किया। साथ ही शोधकर्ताओं, वैज्ञानिकों और स्टार्टअप उद्यमियों के आदान-प्रदान को बढ़ावा देने तथा संयुक्त शैक्षणिक कार्यक्रम विकसित करने पर भी सकारात्मक रुख दिखाया गया।

    भारत और जर्मनी के बीच बढ़ता तकनीकी सहयोग आने वाले वर्षों में नवाचार और अनुसंधान को नई गति दे सकता है। क्वांटम तकनीक, अंतरिक्ष विज्ञान और डीप-टेक जैसे क्षेत्रों में साझेदारी न केवल दोनों देशों के लिए बल्कि वैश्विक तकनीकी विकास के लिए भी महत्वपूर्ण साबित हो सकती है।

  • वैश्विक विकास में भारत की भूमिका अहम, फिनलैंड के महावाणिज्यदूत ने सराहा सहयोग

    वैश्विक विकास में भारत की भूमिका अहम, फिनलैंड के महावाणिज्यदूत ने सराहा सहयोग

    नई दिल्ली । भारत और फिनलैंड के बीच आर्थिक, तकनीकी और सतत विकास से जुड़े सहयोग को लेकर सकारात्मक संकेत सामने आए हैं। फिनलैंड के महावाणिज्यदूत एरिक अफ हॉलस्ट्रॉम ने भारत को दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण देशों में से एक बताते हुए कहा कि वैश्विक विकास और आर्थिक प्रगति में भारत की भूमिका लगातार मजबूत होती जा रही है। उन्होंने माना कि बदलती वैश्विक परिस्थितियों के बीच भारत न केवल एक बड़ी अर्थव्यवस्था के रूप में उभरा है, बल्कि टिकाऊ विकास और नवाचार के क्षेत्र में भी महत्वपूर्ण योगदान दे रहा है।

    मुंबई में बातचीत के दौरान हॉलस्ट्रॉम ने कहा कि सर्कुलर इकोनॉमी यानी संसाधनों के पुनः उपयोग और टिकाऊ उत्पादन की अवधारणा आने वाले वर्षों में दुनिया की प्रमुख जरूरत बनने जा रही है। उनके अनुसार भारत और फिनलैंड दोनों ऐसे देश हैं जो पर्यावरण संरक्षण, हरित विकास और संसाधनों के बेहतर उपयोग को प्राथमिकता दे रहे हैं। यही कारण है कि दोनों देशों के बीच इस क्षेत्र में सहयोग की व्यापक संभावनाएं मौजूद हैं। उन्होंने कहा कि जलवायु परिवर्तन और संसाधनों की सीमित उपलब्धता जैसी चुनौतियों का सामना करने के लिए अंतरराष्ट्रीय साझेदारी बेहद आवश्यक है।

    भारत और यूरोपीय संघ के बीच प्रस्तावित मुक्त व्यापार समझौते पर बोलते हुए उन्होंने इसे दोनों पक्षों के लिए एक महत्वपूर्ण अवसर बताया। उनका कहना था कि समझौते से जुड़ी बातचीत पूरी हो चुकी है और अब इसके क्रियान्वयन की प्रक्रियाएं आगे बढ़ रही हैं। उन्होंने उम्मीद जताई कि समझौता लागू होने के बाद भारत और यूरोपीय देशों के बीच व्यापारिक गतिविधियों में तेज वृद्धि होगी। विशेष रूप से फिनलैंड और भारत के बीच व्यापारिक संबंधों को इससे नई ऊर्जा मिलेगी और द्विपक्षीय व्यापार वर्तमान स्तर से दोगुना तक पहुंच सकता है। इससे निवेश, तकनीक हस्तांतरण और रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे।

    महाराष्ट्र की आर्थिक भूमिका पर चर्चा करते हुए हॉलस्ट्रॉम ने कहा कि यह राज्य भारत की अर्थव्यवस्था का प्रमुख केंद्र है और देश के औद्योगिक तथा निवेश परिदृश्य में इसकी विशेष पहचान है। उन्होंने बताया कि फिनलैंड और महाराष्ट्र के बीच कई परियोजनाओं पर सहयोग जारी है। मुंबई के ससून डॉक के विकास से संबंधित परियोजना में फिनिश कंपनियां सक्रिय भूमिका निभा रही हैं। उनका मानना है कि ऐसे संयुक्त प्रयास दोनों देशों के बीच व्यावसायिक संबंधों को और मजबूत बनाने में सहायक साबित होंगे।

    उन्होंने यह भी बताया कि महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और फिनलैंड के विदेश व्यापार मंत्री विले टावियो के बीच अंतरराष्ट्रीय मंचों पर कई बार मुलाकात हो चुकी है। इन बैठकों में हरित अर्थव्यवस्था, सतत विकास और सर्कुलर इकोनॉमी को बढ़ावा देने के लिए सहयोग बढ़ाने पर सहमति बनी है। इसके अलावा विज्ञान, तकनीक और नवाचार जैसे क्षेत्रों में भी दोनों पक्ष नए अवसर तलाश रहे हैं। हाल ही में फिनलैंड के राष्ट्रपति अलेक्जेंडर स्टब की भारत यात्रा के दौरान दोनों देशों ने अपने संबंधों को रणनीतिक साझेदारी के स्तर तक पहुंचाने का निर्णय लिया था, जिसे भविष्य के सहयोग के लिए महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

    भारत और फिनलैंड के बीच बढ़ता सहयोग आने वाले समय में व्यापार, तकनीक और हरित विकास के क्षेत्रों में नए अवसर पैदा कर सकता है। भारत-ईयू मुक्त व्यापार समझौते के लागू होने के बाद दोनों देशों के आर्थिक संबंधों को और मजबूती मिलने की संभावना है, जिससे निवेश और कारोबार का दायरा भी व्यापक होगा।

  • ईरान-US के बीच अगले सप्ताह तक हो सकती है डील, ट्रंप ने दिए होर्मुज खुलने के संकेत

    ईरान-US के बीच अगले सप्ताह तक हो सकती है डील, ट्रंप ने दिए होर्मुज खुलने के संकेत


    वॉशिंगटन।
    ईरान (Iran) के साथ बहुप्रतीक्षित समझौते को लेकर डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) ने सकारात्मक संकेत दिए हैं। डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) ने कहा कि संभव है कि अगले सप्ताह समझौता हो जाए और इसके बाद होर्मुज (Hormuz) भी खुल जाएगा। डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि छोटी सी एक समस्या सामने आ रही है लेकिन अगले सप्ताह तक उसे सुलझा लिया जाएगा। उनका मतलब लेबनान पर इजरायली हमले से था जिसको लेकर ईरान काफी नाराज है।


    युद्ध में जीत से बड़ा होगा समझौता

    डोनाल्ड ट्रंप ने कहा, मैंने हिजबुल्लाह से बात की और कहा कि अब कोई गोलीबारी नहीं होनी चाहिए। इसके बाद इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू (Israeli Prime Minister Benjamin Netanyahu) से बात की और गोलीबारी, बमबारी रोकने को कहा। इसके बाद दोनों तरफ से हमले बंद हो गए हैं। ट्रंप ने कहा कि ईरान के साथ साथ समझौता किसी सैन्य विजय से ज्यादा अच्छा हो सकता है। उन्होंने कहा कि हम एक बड़े देश के हित में काम कर रहे हैं इसलिए काम भी उसी हिसाब से करना होगा।


    लेबनान पर इजरायली हमला आ रहा आड़े

    इजरायली सेना ने लेबनान में अपने जमीनी अभियान का विस्तार कर दिया है और नयी सैन्य कार्रवाई के लिए अमेरिका की मंजूरी भी मांगी है। यह घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है जब ट्रंप प्रशासन ईरान के साथ व्यापक शांति समझौते की दिशा में क्षेत्रीय तनाव कम करने का प्रयास कर रहा है। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, लेबनान में युद्धविराम भी अमेरिका-ईरान वार्ता के व्यापक ढांचे का हिस्सा है।

    एक रिपोर्ट के अनुसार, पिछले 48 घंटों में अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने लेबनान के राष्ट्रपति जोसेफ आउन और इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू से अलग-अलग बातचीत कर युद्धविराम बहाल करने की कोशिश की। प्रस्ताव के तहत हिज्बुल्ला को इजरायल पर मिसाइल और ड्रोन हमले रोकने थे, जबकि इजरायल को लेबनान में आगे सैन्य कार्रवाई से बचना था।

    रिपोर्ट में अमेरिकी अधिकारियों के हवाले से कहा गया कि राष्ट्रपति आउन इस पहल के पक्ष में थे और उन्होंने संसद अध्यक्ष नबीह बेरी से हिज्बुल्ला पर दबाव बनाने को कहा। शअरी बेरी की प्रतिक्रिया संतोषजनक नहीं रही और उन्होंने पहले इजरायल से हमले रोकने की बात कही।

    इस बीच, इजरायली और लेबनानी सैन्य अधिकारियों ने शुक्रवार को पेंटागन में संभावित युद्धविराम, इजरायली सैनिकों की वापसी, दक्षिणी लेबनान में लेबनानी सेना की तैनाती और हिज्बुल्ला के निरस्त्रीकरण जैसे मुद्दों पर चर्चा की। दोनों देशों के राजनयिकों के बीच इस सप्ताह एक और बैठक होने की संभावना है।

    डोनाल्ड ट्रंप ने सोमवार को कहा कि ईरान के साथ बातचीत तीव्र गति से जारी है। तेहरान द्वारा नए सिरे से हमले किए जाने से संघर्षविराम कमजोर पड़ता दिखाई दे रहा है। ईरान और अमेरिका के बीच नाममात्र का संघर्षविराम ऐसे जवाबी हमलों और पलटवारों से बार-बार परखा जा रहा है जबकि दोनों देशों के अधिकारी युद्ध को समाप्त करने के लिए बातचीत के जरिए समाधान निकालने की कोशिश कर रहे हैं।

  • US में थम नहीं रही गोलीबारी की घटनाएं, आयोवा राज्य के मुस्काटीन शहर में फायरिंग में 7 लोगों की मौत

    US में थम नहीं रही गोलीबारी की घटनाएं, आयोवा राज्य के मुस्काटीन शहर में फायरिंग में 7 लोगों की मौत


    वाशिंगटन।
    अमेरिका (America) का आयोवा राज्य (Iowa State) सोमवार (स्थानीय समयानुसार) को गोलियों की आवाज से दहल उठा। यहां के एक शहर में कई जगहों पर हुई गोलीबारी की घटनाओं में कम से कम 7 लोगों की मौत होने की खबर सामने आई है। जानकारी के मुताबिक संदिग्ध आरोपी ने पहले 6 लोगों की गोली मारकर हत्या की और फिर पुलिस के सामने खुद को गोली मारकर आत्महत्या कर ली। पुलिस ने कहा है कि शुरुआती जांच से यह मामला पारिवारिक विवाद (Family dispute) का लगता है।

    रिपोर्ट के मुताबिक दिल दहला देने वाली यह घटना आयोवा के मुस्काटीन शहर (Muscatine City) में हुई। यहां हमलावर ने दो घरों और एक दुकान में घुसकर ताबड़तोड़ फायरिंग शुरू कर दी। मुस्काटीन पुलिस प्रमुख एंथनी कीस ने बताया कि दोपहर करीब 12 बजे पुलिस को गोलीबारी की सूचना मिली। हालांकि जब तक पुलिस वहां पहुंची तब तक लोगों की मौत हो चुकी थी। घटनास्थल से चार लोगों के शव बरामद हुए।

    वहीं पुलिस के पहुंचने से पहले ही आरोपी घटनास्थल से फरार हो चुका था। पुलिस के मुताबिक संदिग्ध की पहचान 52 वर्षीय रयान विलिस मैकफारलैंड के रूप में हुई है। पुलिस ने तलाशी अभियान शुरू कर उसे खोज निकाला। हालांकि जैसे ही अधिकारी उसे पकड़ने वाले थे, उसने खुद को गोली मार ली। पुलिस प्रमुख कीस ने बताया, “अधिकारियों और डॉक्टर्स की टीम ने उसे बचाने की कोशिश की, लेकिन मौके पर ही उसकी मौत हो गई।”

    वहीं जांच के दौरान पुलिस को कुछ और जगहों पर भी गोलीबारी की सूचना मिली। इसके बाद एक अन्य घर और पास के एक दुकान से दो और लोगों के शव बरामद किए गए। सबकी मौत गोली लगने की वजह से ही हुई। मुस्काटीन पुलिस ने एक प्रेस विज्ञप्ति में कहा, “प्रारंभिक जांच से संकेत मिलता है कि यह गोलीबारी घरेलू विवाद का नतीजा थी। सभी पीड़ितों के आरोपी के परिवार का सदस्य होने की आशंका है।”

  • Bangladesh: इस्लामी बैंक में नए चेयरमैन की नियुक्ति का विवाद हुआ हिंसक… प्रदर्शन के बीच पुलिस के साथ झड़प

    Bangladesh: इस्लामी बैंक में नए चेयरमैन की नियुक्ति का विवाद हुआ हिंसक… प्रदर्शन के बीच पुलिस के साथ झड़प


    ढाका।
    बांग्लादेश (Bangladesh) की राजधानी ढाका (Dhaka) में इस्लामी बैंक पीएलसी (Islami Bank PLC) के नए चेयरमैन (New chairman) की नियुक्ति को लेकर उत्पन्न विवाद अब हिंसक रूप ले लिया है। बैंक मुख्यालय के सामने ग्राहकों और कर्मचारियों के प्रदर्शन के दौरान पुलिस के साथ जोरदार झड़प हुई। पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को तितर-बितर करने के लिए लाठीचार्ज, आंसू गैस, साउंड ग्रेनेड और पानी की बौछारों का इस्तेमाल किया। इस कार्रवाई में दर्जनों लोग घायल हो गए।

    बताया जा रहा है कि प्रदर्शनकारी ‘सचेत ग्राहक मंच’ के बैनर तले बैंक के मुख्य द्वार पर बैठे थे। पुलिस ने पहले चेतावनी दी, लेकिन प्रदर्शनकारियों के हटने से इनकार करने पर आक्रामक कार्रवाई की गई। आंसू गैस के धुएं से पूरा इलाका भर गया और पानी की तेज धार से कई महिलाएं व बुजुर्ग घायल हो गए। बताया जा रहा है कि घायलों को नजदीकी अस्पतालों में भर्ती कराया गया है। हालांकि, घायलों की सटीक संख्या की अभी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।


    क्या है पूरा मामला?

    बांग्लादेश सरकार ने कुछ दिन पहले बांग्लादेश बैंक के पूर्व डिप्टी गवर्नर खुर्शीद आलम को इस्लामी बैंक पीएलसी का नया चेयरमैन नियुक्त किया था। इस फैसले का बैंक के कर्मचारियों, अधिकारियों और ग्राहकों ने जमकर विरोध किया। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि शेख हसीना के शासनकाल में खुर्शीद आलम डिप्टी गवर्नर रहते हुए बड़े पैमाने पर मनी लॉन्ड्रिंग और भ्रष्टाचार में संलिप्त थे। उन्होंने देश के प्रमुख व्यापारी एस. आलम के साथ मिलीभगत कर बैंकों से हजारों करोड़ रुपये के गबन में मदद की थी।

    कर्मचारी यूनियन और ग्राहक संगठनों का कहना है कि खुर्शीद आलम का राजनीतिक और आर्थिक प्रभाव इतना ज्यादा है कि उनकी नियुक्ति बैंक की विश्वसनीयता और शरिया अनुपालन को गंभीर खतरे में डाल देगी। एक प्रदर्शनकारी ने कहा कि यह नियुक्ति न सिर्फ इस्लामी बैंक बल्कि पूरे इस्लामी बैंकिंग सिस्टम के लिए खतरा है। हम किसी भी कीमत पर इसे स्वीकार नहीं करेंगे।

    बता दें कि इस्लामी बैंक पीएलसी बांग्लादेश का सबसे बड़ा निजी शरिया-आधारित बैंक है, जो पूरे देश में सैकड़ों शाखाओं के जरिए लाखों ग्राहकों को सेवाएं देता है। इस बैंक पर लंबे समय से विपक्षी दल जमात-ए-इस्लामी का प्रभाव माना जाता रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि वर्तमान प्रदर्शन के पीछे जमात-ए-इस्लामी का प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष समर्थन हो सकता है। शेख हसीना सरकार के पतन के बाद इस्लामी बैंकिंग क्षेत्र में सत्ता परिवर्तन की कोशिशें तेज हुई हैं। कुछ लोग खुर्शीद आलम की नियुक्ति को अवामी लीग के बचे-खुचे प्रभाव को खत्म करने की कवायद मान रहे हैं, जबकि विरोधी इसे राजनीतिक प्रतिशोध बता रहे हैं।


    अभी क्या हैं हालात?

    ढाका ट्रिब्यून समेत स्थानीय मीडिया के अनुसार, प्रदर्शनकारियों ने बैंक परिसर के बाहर बड़े बैनर और पोस्टर लगाए थे, जिन पर लिखा था कि खुर्शीद आलम इस्तीफा दो… मनी लॉन्ड्रर को चेयरमैन मत बनाओ… इस्लामी बैंक बचाओ। बताया जा रहा है कि विरोध-प्रदर्शन के कारण अभी भी बैंक मुख्यालय और आसपास के इलाके में भारी पुलिस बल तैनात है। सड़कें बंद हैं और यातायात पूरी तरह प्रभावित है।

    दूसरी ओर प्रदर्शनकारी तितर-बितर होकर आसपास की गलियों में खड़े हैं और नारेबाजी जारी रखे हुए हैं। बैंक के अंदर कामकाज ठप पड़ा हुआ है। स्थिति बेहद तनावपूर्ण बनी हुई है और आगे बड़े प्रदर्शन की आशंका जताई जा रही है।

  • ईरान पर जरूरत पड़ी तो फिर होगी सैन्य कार्रवाई: इजरायली राजदूत का बड़ा बयान, वेस्ट एशिया तनाव फिर बढ़ा

    ईरान पर जरूरत पड़ी तो फिर होगी सैन्य कार्रवाई: इजरायली राजदूत का बड़ा बयान, वेस्ट एशिया तनाव फिर बढ़ा

    नई दिल्ली। वेस्ट एशिया में तनाव और कूटनीतिक हलचल के बीच इजरायल ने एक बार फिर कड़ा रुख अपनाया है। नई दिल्ली स्थित इजरायली दूतावास के राजदूत रियूवेन अजार ने साफ कहा है कि यदि परिस्थितियां बिगड़ती हैं तो इजरायल ईरान के खिलाफ दोबारा सैन्य कार्रवाई करने से पीछे नहीं हटेगा।

    यह बयान ऐसे समय आया है जब अमेरिका और ईरान के बीच संभावित समझौते को लेकर चर्चाएं तेज हैं और पश्चिम एशिया में तनाव को कम करने की कोशिशें जारी हैं। हालांकि, इजरायल ने संकेत दिया है कि वह सुरक्षा से जुड़े किसी भी खतरे को लेकर समझौता नहीं करेगा।

    इजरायली राजदूत ने कहा कि ईरानी सत्ता पिछले दो दशकों से क्षेत्रीय सुरक्षा के लिए चुनौती बनी हुई है। उनका आरोप है कि ईरान अंतरराष्ट्रीय नियमों और परमाणु अप्रसार संधि (NPT) तथा अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) के दिशा-निर्देशों का पालन ठीक से नहीं कर रहा है। उन्होंने कहा कि IAEA की रिपोर्टों में भी ईरान की अनुपालन स्थिति पर सवाल उठाए गए हैं।

    राजदूत के अनुसार, यदि कोई देश कानूनी अधिकारों का दावा करता है, तो उसे अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था का पालन भी करना होगा। उन्होंने यह भी कहा कि इजरायल क्षेत्र में सुरक्षा बनाए रखने के लिए पूरी तरह सतर्क है और जरूरत पड़ने पर निर्णायक कदम उठाएगा।

    इसी बीच लेबनान को लेकर भी इजरायल ने अपना रुख स्पष्ट किया है। प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के आदेश पर बेरूत के दक्षिणी उपनगरों में हिज्बुल्लाह के ठिकानों पर हमले किए गए। इजरायल का कहना है कि यह कार्रवाई उसके उत्तरी क्षेत्रों में रहने वाले नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए जरूरी थी।

    राजदूत अजार ने दावा किया कि संघर्षविराम के बावजूद इजरायल पर 1000 से अधिक रॉकेट और ड्रोन हमले हुए हैं, जिनमें कई नागरिकों की जान भी गई है। उन्होंने कहा कि जब तक हिज्बुल्लाह स्थायी संघर्षविराम और हमले रोकने की गारंटी नहीं देता, तब तक जवाबी कार्रवाई जारी रहेगी।

    इजरायल ने यह भी संकेत दिया कि वह केवल सैन्य ही नहीं बल्कि क्षेत्रीय आर्थिक स्थिरता के लिए भी योगदान देने को तैयार है, बशर्ते सुरक्षा स्थिति नियंत्रण में रहे। राजदूत ने कहा कि पश्चिम एशिया में स्थिरता तभी संभव है जब सभी पक्ष जिम्मेदारी के साथ व्यवहार करें और आतंकवादी गतिविधियों पर रोक लगे।

    इस बयान के बाद एक बार फिर पश्चिम एशिया में तनाव बढ़ने की आशंका जताई जा रही है, खासकर ऐसे समय में जब कूटनीतिक प्रयासों से शांति की उम्मीदें भी बनी हुई हैं।

  • ईरान पर अमेरिकी हमले के बाद भड़का तनाव, जवाबी कार्रवाई से मध्य पूर्व में फिर से संघर्ष की आशंका गहराई

    ईरान पर अमेरिकी हमले के बाद भड़का तनाव, जवाबी कार्रवाई से मध्य पूर्व में फिर से संघर्ष की आशंका गहराई

    नई दिल्ली ।  अमेरिका और ईरान के बीच लंबे समय से चल रहा तनाव एक बार फिर गंभीर मोड़ पर पहुंच गया है, जिससे मिडिल ईस्ट में बड़े सैन्य संघर्ष की आशंका तेज हो गई है। हालिया घटनाक्रम में दोनों देशों के बीच सीमित सैन्य हमलों और जवाबी कार्रवाइयों ने क्षेत्रीय स्थिरता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। रिपोर्टों के अनुसार, अमेरिका ने ईरान के कुछ रणनीतिक ठिकानों पर कार्रवाई की है, जिसे उसने अपने ड्रोन और सैन्य संपत्तियों की सुरक्षा से जुड़ी प्रतिक्रिया बताया है। इन हमलों में ईरान के तटीय और द्वीपीय क्षेत्रों में स्थित रडार और ड्रोन नियंत्रण प्रणाली को निशाना बनाए जाने की बात सामने आई है।

    इसके बाद स्थिति और अधिक तनावपूर्ण हो गई जब ईरान की ओर से भी जवाबी कार्रवाई की गई। ईरानी सैन्य इकाइयों ने कथित तौर पर उन ठिकानों को निशाना बनाया, जहां से अमेरिकी सैन्य अभियान संचालित किए जा रहे थे। इस घटनाक्रम ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय की चिंता बढ़ा दी है क्योंकि दोनों देशों के बीच पहले से जारी असहमति अब खुले सैन्य टकराव की दिशा में बढ़ती दिखाई दे रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि स्थिति को जल्द नियंत्रित नहीं किया गया तो यह संघर्ष व्यापक क्षेत्रीय युद्ध का रूप ले सकता है।

    होर्मुज जलडमरूमध्य, जो वैश्विक तेल आपूर्ति का एक महत्वपूर्ण मार्ग माना जाता है, इस पूरे विवाद का केंद्र बना हुआ है। इस रणनीतिक क्षेत्र में किसी भी प्रकार की सैन्य गतिविधि का सीधा असर अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार पर पड़ सकता है। यही कारण है कि कई वैश्विक शक्तियां दोनों देशों से संयम बरतने और कूटनीतिक समाधान अपनाने की अपील कर रही हैं।

    हालांकि दोनों पक्षों की ओर से अभी तक औपचारिक रूप से पूर्ण युद्ध की घोषणा नहीं की गई है, लेकिन सीमित हमलों और जवाबी कार्रवाइयों की श्रृंखला ने हालात को बेहद संवेदनशील बना दिया है। क्षेत्रीय देशों में भी इस स्थिति को लेकर चिंता का माहौल है और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सतर्कता बढ़ा दी गई है।

    विश्लेषकों का यह भी मानना है कि यह टकराव केवल सैन्य स्तर तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इसके आर्थिक और राजनीतिक प्रभाव भी वैश्विक स्तर पर देखने को मिल सकते हैं। खासकर तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव और अंतरराष्ट्रीय व्यापार मार्गों पर असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है।

    वर्तमान हालात को देखते हुए यह स्पष्ट है कि यदि दोनों देशों के बीच बातचीत और कूटनीति के रास्ते को मजबूत नहीं किया गया, तो मिडिल ईस्ट एक बार फिर बड़े संकट की ओर बढ़ सकता है। अंतरराष्ट्रीय समुदाय अब इस पूरे घटनाक्रम पर करीबी नजर बनाए हुए है और स्थिति को नियंत्रण में लाने के प्रयास तेज हो गए हैं।

  • ईरान-डील विवाद के बीच ट्रंप का सख्त रुख: डेमोक्रेट्स पर निशाना, कहा- बातचीत में बाधा डालना बंद करें

    ईरान-डील विवाद के बीच ट्रंप का सख्त रुख: डेमोक्रेट्स पर निशाना, कहा- बातचीत में बाधा डालना बंद करें

    नई दिल्ली । अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के हालिया बयान ने ईरान के साथ चल रही कूटनीतिक बातचीत के बीच एक बार फिर राजनीतिक हलचल तेज कर दी है। मध्य पूर्व में पहले से ही तनावपूर्ण हालात के बीच ट्रंप ने दावा किया है कि ईरान समझौता करना चाहता है और ऐसा समझौता अमेरिका और उसके सहयोगियों के लिए लाभकारी साबित हो सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि इस पूरी प्रक्रिया में अनावश्यक राजनीतिक टिप्पणियां बातचीत को प्रभावित कर रही हैं और इससे कूटनीतिक प्रयासों में कठिनाई पैदा हो रही है। ट्रंप ने अपने बयान में विपक्षी डेमोक्रेट्स और कुछ रिपब्लिकन नेताओं पर भी निशाना साधते हुए कहा कि लगातार नकारात्मक बयानबाजी से स्थिति और जटिल हो जाती है। उनके अनुसार जब राजनीतिक वर्ग बार-बार यह कहता है कि तेज कार्रवाई होनी चाहिए या फिर रुक जाना चाहिए, तो इससे वास्तविक वार्ता प्रक्रिया प्रभावित होती है और निर्णय लेने में बाधाएं उत्पन्न होती हैं। उन्होंने लोगों से धैर्य रखने की अपील करते हुए कहा कि अंततः परिणाम सकारात्मक होंगे और स्थिति नियंत्रण में रहेगी।

    इसी बीच अमेरिकी सेंट्रल कमांड की ओर से जारी बयान में कहा गया कि उसने ईरान के गोरुक शहर और केश्म द्वीप के पास आत्मरक्षा में कुछ सैन्य कार्रवाई की है। इस कार्रवाई को ईरान की कथित आक्रामक गतिविधियों के जवाब के रूप में बताया गया है। सेंट्रल कमांड के अनुसार ईरान द्वारा एक ड्रोन को अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में गिराए जाने के बाद यह कदम उठाया गया। इसके जवाब में अमेरिकी सेना ने एयर डिफेंस सिस्टम, एक ग्राउंड कंट्रोल स्टेशन और कई ड्रोन को निष्क्रिय करने का दावा किया है, जिन्हें क्षेत्रीय समुद्री मार्गों के लिए खतरा बताया गया था।

    दूसरी ओर ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स ने भी जवाबी कार्रवाई का दावा करते हुए कहा है कि उसने अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया है। हालांकि ईरान ने इन ठिकानों के स्थान को स्पष्ट नहीं किया है। दोनों देशों की ओर से ऐसे दावे सामने आने के बाद क्षेत्र में तनाव और बढ़ गया है और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी स्थिति पर नजर रखी जा रही है।

    विश्लेषकों का मानना है कि इस तरह के बयान और जवाबी कार्रवाइयों से कूटनीतिक प्रयासों पर दबाव बढ़ सकता है। ईरान और अमेरिका के बीच पहले से चले आ रहे मतभेदों के बीच यह ताजा घटनाक्रम स्थिति को और जटिल बना रहा है। राजनीतिक और सैन्य दोनों स्तरों पर जारी यह तनाव आने वाले दिनों में वैश्विक कूटनीति के लिए महत्वपूर्ण चुनौती बन सकता है। फिलहाल सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि बातचीत की प्रक्रिया किस दिशा में आगे बढ़ती है और क्या दोनों पक्ष किसी साझा समझौते की ओर बढ़ पाते हैं या नहीं।

  • चीन के डॉक्टरों ने पहली बार इंसान के शरीर में एकसाथ ट्रांसप्लांट किए सुअर के लिवर और दोनों किडनी

    चीन के डॉक्टरों ने पहली बार इंसान के शरीर में एकसाथ ट्रांसप्लांट किए सुअर के लिवर और दोनों किडनी

    नई दिल्ली। दुनिया भर में अंग प्रत्यारोपण के क्षेत्र में लंबे समय से चली आ रही मानव अंगों की भारी कमी को दूर करने की दिशा में वैज्ञानिकों और डॉक्टरों ने एक ऐतिहासिक सफलता हासिल की है। चिकित्सा विज्ञान के इतिहास में पहली बार शोधकर्ताओं की एक विशेष टीम ने एक इंसान के शरीर में जेनेटिक रूप से संशोधित यानी जेनेटिकली मॉडिफाइड सुअर का पूरा लिवर और उसकी दोनों किडनियां एक साथ सफलतापूर्वक प्रत्यारोपित करने का कारनामा कर दिखाया है।
    इस बेहद जटिल और अत्याधुनिक सर्जरी को अंग प्रत्यारोपण की दुनिया में एक बड़ी संभावित क्रांति के रूप में देखा जा रहा है। अब तक सुअर के अंगों को इंसानों में लगाने के जितने भी प्रयास किए गए थे, वे केवल किसी एक अंग तक ही सीमित थे। यह पहला मौका है जब डॉक्टरों ने तकनीकी बाधाओं को पार करते हुए एक साथ कई अंगों का बहु-अंग प्रत्यारोपण करने में सफलता पाई है।

    इस अभूतपूर्व चिकित्सा परीक्षण को अंजाम देने के लिए डॉक्टरों ने एक ऐसे ५३ वर्षीय व्यक्ति को चुना जो पहले से ही पूरी तरह ब्रेन-डेड घोषित हो चुका था। मरीज के परिजनों ने चिकित्सा अनुसंधान के महत्व को समझते हुए इस ऐतिहासिक प्रयोग के लिए अपनी स्वैच्छिक सहमति प्रदान की थी। जेनेटिक इंजीनियरिंग की मदद से विशेष रूप से तैयार किए गए सुअर के इन अंगों को जब मरीज के शरीर में प्रत्यारोपित किया गया, तो उन्होंने लगभग पांच दिनों तक बिना किसी बड़ी रुकावट के बेहद प्रभावी तरीके से काम किया।

    इस पूरी प्रक्रिया के दौरान डॉक्टरों को रियल टाइम में यह देखने और समझने का दुर्लभ अवसर मिला कि जानवरों के अंग किसी मानव शरीर के भीतर किस तरह की जैविक प्रतिक्रियाएं देते हैं। विज्ञान की भाषा में इस तरह के प्रत्यारोपण को जेनोट्रांसप्लांटेशन कहा जाता है, जिसका सीधा मतलब एक प्रजाति से दूसरी प्रजाति में पूरे अंग, कोशिकाएं या टिशू ट्रांसप्लांट करना होता है।

    इस बेहद जटिल सर्जरी के बाद जो परिणाम सामने आए, उन्होंने दुनिया भर के विशेषज्ञों को हैरत में डाल दिया है। वर्षों से वैज्ञानिक इस बात पर शोध कर रहे थे कि क्या सुअर के अंग इंसानों की जरूरतों को पूरा कर सकते हैं, और अब सुअर के डीएनए को एडिट करने की तकनीक ने इसे एक ठोस हकीकत में बदल दिया है।

    ट्रांसप्लांटेशन के शुरुआती चौबीस घंटों के भीतर मरीज के शरीर में इन बाहरी अंगों को अस्वीकार करने या रिजेक्ट करने के कोई भी लक्षण या संकेत नहीं देखे गए। विशेषज्ञों का मानना है कि एक ही समय में कई अंगों का प्रत्यारोपण करना तकनीकी रूप से अत्यंत चुनौतीपूर्ण होता है और इसमें मरीज की जान जाने का जोखिम भी कई गुना बढ़ जाता है, लेकिन इसके बावजूद अंगों का सुचारू रूप से काम करना बहु-अंग प्रत्यारोपण के क्षेत्र में एक बहुत बड़ी कामयाबी है।

    डॉक्टरों और शोधकर्ताओं के अनुसार, प्रत्यारोपण संपन्न होने के महज उन्नीस घंटों के भीतर ही सुअर के लिवर ने मानव शरीर के अनुकूल काम करते हुए पित्त का निर्माण और रिसाव शुरू कर दिया था, जो इसके सामान्य रूप से सक्रिय होने का सबसे बड़ा प्रमाण माना जाता है। इसके अलावा, गंभीर बीमारी के कारण मरीज के शरीर में क्रिएटिनिन और यूरिया का जो स्तर खतरनाक रूप से बढ़ा हुआ था, वह सुअर की दोनों किडनियां लगते ही तेजी से गिरकर बिल्कुल सामान्य स्तर पर लौट आया। इस सकारात्मक बदलाव ने स्पष्ट संकेत दिया कि प्रत्यारोपित की गई दोनों किडनियां मानव शरीर के भीतर अपने महत्वपूर्ण जैविक कार्यों को पूरी तरह से निभाने में सक्षम थीं।

    इस चमत्कारिक सफलता के बाद भी वैज्ञानिक अभी पूरी तरह से सतर्क हैं और उनका कहना है कि इस तकनीक को जीवित मरीजों पर आजमाने से पहले अभी कई और कड़े परीक्षणों की आवश्यकता होगी। भविष्य में इस दिशा में आगे बढ़ने के लिए अभी ब्रेन-डेड व्यक्तियों और जीवित बंदरों पर और अधिक गहन अध्ययन किए जाएंगे। वैज्ञानिकों के लिए सबसे बड़ी चुनौती यह सुनिश्चित करना है कि सुअर के अंगों के माध्यम से किसी भी प्रकार के अज्ञात या खतरनाक वायरस और बैक्टीरिया इंसानों के भीतर प्रवेश न कर पाएं। बहरहाल, दुनिया भर में लाखों लोग हर साल किडनी, लिवर और हार्ट जैसे अंगों की प्रतीक्षा में दम तोड़ देते हैं, ऐसे में इस नई तकनीक ने चिकित्सा जगत में चिकित्सा अनुसंधान के एक नए स्वर्णिम युग की शुरुआत कर दी है।