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  • ऋषि सुनक ने ब्रिटिश पहचान पर उठाए सवाल, बोले- त्वचा का रंग नहीं तय करता कौन कितना ब्रिटिश है

    ऋषि सुनक ने ब्रिटिश पहचान पर उठाए सवाल, बोले- त्वचा का रंग नहीं तय करता कौन कितना ब्रिटिश है


    नई दिल्ली । 
    ब्रिटेन के पूर्व प्रधानमंत्री ऋषि सुनक ने राष्ट्रीय पहचान और नस्ल से जुड़े मुद्दों पर अपनी चिंता व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि किसी व्यक्ति की राष्ट्रीयता या ब्रिटिश पहचान को उसकी त्वचा के रंग से तय नहीं किया जाना चाहिए। सुनक ने अपनी पहचान का उल्लेख करते हुए कहा कि वह अंग्रेज और हिंदू दोनों हैं।

    सुनक ने ब्रिटिश समाज की पहचान और वहां रहने वाले अलग-अलग समुदायों के बीच संबंधों को लेकर भी अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि त्वचा के रंग को ब्रिटिश या अंग्रेज होने की पहचान से जोड़ना उचित नहीं है। उनके अनुसार राष्ट्रीयता को केवल किसी व्यक्ति की बाहरी पहचान के आधार पर परिभाषित नहीं किया जाना चाहिए।

    उन्होंने ब्रिटेन में राष्ट्रीय पहचान को लेकर पहले से चली आ रही बहस का भी उल्लेख किया। इस संदर्भ में उन्होंने ‘टेबिट टेस्ट’ का जिक्र किया, जिसे अप्रैल 1990 में तत्कालीन टोरी सांसद नॉर्मन टेबिट ने सामने रखा था।

    टेबिट टेस्ट के तहत यह सवाल उठाया गया था कि अगर ब्रिटेन में रहने वाले प्रवासी इंग्लैंड की क्रिकेट टीम के बजाय अपने मूल देश की टीम का समर्थन करते हैं, तो क्या इसे ब्रिटिश समाज में पूरी तरह घुलने-मिलने की कमी माना जाना चाहिए। सुनक ने इस पुराने विचार को मौजूदा राष्ट्रीय पहचान की बहस से जोड़कर अपनी चिंता सामने रखी।

    सुनक के मुताबिक ब्रिटेन ने समय के साथ एक बहु-धार्मिक और बहु-जातीय लोकतंत्र का निर्माण किया है। उनका कहना है कि यह उपलब्धि अब कई तरह के दबावों का सामना कर रही है। उन्होंने राष्ट्रीय पहचान को नस्ल और त्वचा के रंग से जोड़ने की बढ़ती प्रवृत्ति को भी इसी संदर्भ में महत्वपूर्ण बताया।

    उन्होंने आव्रजन और एकीकरण से जुड़ी चुनौतियों का भी उल्लेख किया। सुनक ने कहा कि ब्रिटेन को हाल के वर्षों में आव्रजन को प्रभावी ढंग से नियंत्रित नहीं कर पाने से पैदा हुई चुनौतियों का सामना करना होगा। उनके अनुसार आव्रजन से जुड़े मुद्दों पर चर्चा करते समय राष्ट्रीय पहचान और सामाजिक एकीकरण के सवाल भी सामने आते हैं।

    सुनक ने यह चिंता भी व्यक्त की कि हाल में ब्रिटेन आए लोगों को केवल इस आधार पर उन लोगों से कम ब्रिटिश नहीं माना जाना चाहिए, जिनके परिवार लंबे समय से देश में रह रहे हैं। उन्होंने ब्रिटिश पहचान की ऐसी परिभाषा पर सवाल उठाया, जिसमें किसी व्यक्ति के रंग, मूल या पारिवारिक इतिहास को उसकी राष्ट्रीयता से जोड़कर देखा जाए।

    पूर्व प्रधानमंत्री ने अपनी व्यक्तिगत पहचान का उदाहरण देते हुए कहा कि एक व्यक्ति एक साथ ब्रिटिश और हिंदू दोनों हो सकता है। उनके बयान का केंद्र यही था कि धार्मिक पहचान और राष्ट्रीय पहचान एक-दूसरे के विरोध में जरूरी नहीं हैं।

    ब्रिटेन में आव्रजन, एकीकरण और राष्ट्रीय पहचान को लेकर लंबे समय से राजनीतिक और सामाजिक बहस होती रही है। सुनक की टिप्पणी इसी व्यापक चर्चा के बीच आई है, जिसमें यह सवाल उठता रहा है कि आधुनिक ब्रिटिश पहचान को किन आधारों पर समझा जाए।

    उनकी बातों में राष्ट्रीयता के लिए त्वचा के रंग को आधार बनाने के विचार पर स्पष्ट असहमति दिखाई दी। साथ ही उन्होंने ब्रिटेन की बहु-धार्मिक और बहु-जातीय संरचना को बनाए रखने तथा आव्रजन और एकीकरण से जुड़ी चुनौतियों पर गंभीर चर्चा की जरूरत बताई।

  • मीडिया विवाद के बीच व्हाइट हाउस का बड़ा कदम, शुरू हुआ 24 घंटे का ‘ट्रंप टीवी’, जानिए क्या होगा प्रसारण

    मीडिया विवाद के बीच व्हाइट हाउस का बड़ा कदम, शुरू हुआ 24 घंटे का ‘ट्रंप टीवी’, जानिए क्या होगा प्रसारण

    नई दिल्ली ।अमेरिका में व्हाइट हाउस और प्रमुख मीडिया संस्थानों के बीच बढ़े विवाद के बीच राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन ने 24 घंटे चलने वाली अपनी टीवी सेवा शुरू कर दी है। इस सेवा का नाम ‘ट्रंप टीवी’ रखा गया है। इसके जरिए राष्ट्रपति के भाषण, प्रशासन की घोषणाएं और सरकार से जुड़े प्रमुख फैसलों की जानकारी लोगों तक पहुंचाने की तैयारी की गई है।

    यह कदम उस समय सामने आया है, जब कई प्रमुख टीवी चैनलों के पत्रकारों की व्हाइट हाउस में प्रवेश संबंधी अनुमति को लेकर विवाद अदालत तक पहुंच गया। संबंधित मीडिया संस्थानों ने संयुक्त रूप से प्रशासन के खिलाफ मुकदमा दायर किया है। उनका कहना है कि केवल खबरों की सामग्री पसंद नहीं आने के आधार पर पत्रकारों की पहुंच रोकना संवैधानिक अधिकारों से जुड़ा गंभीर सवाल है।

    विवाद की शुरुआत पत्रकारों के प्रवेश बैज निष्क्रिय किए जाने के बाद हुई। इसके बाद संबंधित संस्थानों के संवाददाताओं को व्हाइट हाउस परिसर में प्रवेश से रोक दिया गया। मीडिया संस्थानों का आरोप है कि प्रशासन ने बिना उचित सूचना और प्रक्रिया के उनके पत्रकारों की पहुंच सीमित की।

    मीडिया संस्थानों की ओर से दायर याचिका में कहा गया है कि राष्ट्रपति या किसी सरकारी अधिकारी को केवल खबरों की सामग्री से असहमति के कारण प्रेस के संवैधानिक अधिकारों और स्वतंत्रता से जुड़े हितों को खत्म करने का अधिकार नहीं है। उन्होंने पत्रकारों की व्हाइट हाउस तक पहुंच से जुड़े प्रतिबंधों को चुनौती दी है।

    इसी बीच प्रमुख टीवी नेटवर्कों के बीच राष्ट्रपति के कार्यक्रमों की साझा कवरेज को लेकर भी बदलाव देखने को मिला। सोमवार को सीएनएन को उस प्रेस पूल व्यवस्था से हटा दिया गया, जिसके तहत प्रमुख समाचार नेटवर्क व्हाइट हाउस की महत्वपूर्ण गतिविधियों की कवरेज आपस में साझा करते हैं।

    विवाद के बीच व्हाइट हाउस ने अपना 24 घंटे चलने वाला टीवी प्लेटफॉर्म शुरू किया। इसका उद्देश्य प्रशासन की महत्वपूर्ण सूचनाओं, घोषणाओं और फैसलों को सीधे दर्शकों तक पहुंचाना बताया गया है। इस सेवा पर राष्ट्रपति ट्रंप के भाषण और प्रशासन से संबंधित वीडियो सामग्री दिखाई जाएगी।

    व्हाइट हाउस की ओर से कहा गया कि इस माध्यम से ऐसी महत्वपूर्ण जानकारियां और घोषणाएं लोगों तक पहुंचेंगी, जो पहले उनकी नजर से छूट जाती थीं। सेवा को प्रशासन की गतिविधियों और राष्ट्रपति के कार्यक्रमों की जानकारी सीधे उपलब्ध कराने वाले मंच के रूप में पेश किया गया है।

    दूसरी ओर, प्रतिबंधित मीडिया संस्थानों का कहना है कि सरकारी परिसर में पत्रकारों की पहुंच को केवल खबरों की सामग्री के आधार पर सीमित नहीं किया जा सकता। उनका तर्क है कि प्रेस की स्वतंत्रता से जुड़े संवैधानिक अधिकारों की रक्षा जरूरी है और किसी भी प्रतिबंध के लिए उचित कानूनी प्रक्रिया का पालन किया जाना चाहिए।

    राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस कार्रवाई का बचाव करते हुए कहा है कि व्हाइट हाउस स्वतंत्र प्रेस को निशाना नहीं बना रहा, बल्कि उनके अनुसार गलत खबरों के खिलाफ कार्रवाई कर रहा है। उन्होंने ऐसी खबरों को अमेरिका की राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा बताया और कहा कि इसे रोका जाना चाहिए।

    व्हाइट हाउस का तर्क है कि संविधान में मीडिया के अधिकारों का सम्मान किया गया है, लेकिन इसका अर्थ यह नहीं है कि हर मीडिया संस्थान को व्हाइट हाउस, ब्रीफिंग रूम या राष्ट्रपति के प्रेस पूल तक स्वतः पहुंच का अधिकार मिल जाता है।

    अब इस पूरे विवाद में अदालत की सुनवाई महत्वपूर्ण होगी। एक तरफ मीडिया संस्थान पत्रकारों की पहुंच और प्रेस स्वतंत्रता से जुड़े अधिकारों का सवाल उठा रहे हैं, वहीं प्रशासन अपने फैसले को उचित बता रहा है। इसी बीच ‘ट्रंप टीवी’ की शुरुआत ने व्हाइट हाउस और अमेरिकी मीडिया के बीच चल रहे विवाद को एक नया रूप दे दिया है।

  • इमरान खान की तीनों बहनें हिरासत में, PTI के इस्लामाबाद मार्च से पहले पाकिस्तान में बढ़ा सियासी तनाव

    इमरान खान की तीनों बहनें हिरासत में, PTI के इस्लामाबाद मार्च से पहले पाकिस्तान में बढ़ा सियासी तनाव


    इस्लामाबाद।
    पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान की तीनों बहनों को हिरासत में लिए जाने के बाद देश में राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। उज्मा खान और नूरीन नियाजी को सोमवार को हिरासत में लिया गया, जबकि इससे एक दिन पहले उनकी तीसरी बहन अलीमा खान को 30 दिन की हिरासत में लिया गया था। स्थानीय मीडिया के अनुसार, यह कार्रवाई लाहौर के डिप्टी कमिश्नर के आदेश पर की गई है।

    यह कार्रवाई ऐसे समय हुई है, जब इमरान खान की पार्टी पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (PTI) ने 27 सितंबर को इस्लामाबाद की ओर मार्च और प्रदर्शन का कार्यक्रम घोषित किया है।

    सार्वजनिक व्यवस्था के लिए खतरा बताकर कार्रवाई

    रिपोर्ट के मुताबिक, उज्मा खान और नूरीन नियाजी के खिलाफ पंजाब मेंटेनेंस ऑफ पब्लिक ऑर्डर ऑर्डिनेंस, 1960 के तहत कार्रवाई की गई है। आदेश में उनकी गतिविधियों को सार्वजनिक सुरक्षा और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिहाज से नुकसानदेह बताया गया है।

    दोनों को कोट लखपत सेंट्रल जेल के अधीक्षक की निगरानी में रखे जाने की बात कही गई है। इससे पहले रविवार को PTI के अध्यक्ष गोहर अली खान ने अलीमा खान को हिरासत में लिए जाने पर आपत्ति जताई थी। उन्होंने इसे हालात बिगाड़ने की दिशा में उठाया गया कदम बताते हुए उनकी तत्काल रिहाई की मांग की थी।

    बेटे ने कहा- सभी मामलों में जमानत मिली हुई है

    अलीमा खान को हिरासत में लिए जाने के बाद उनके बेटे शाहरेज खान ने आरोप लगाया कि रविवार सुबह घर से निकलने के बाद उनकी मां को हिरासत में ले लिया गया। शाहरेज के मुताबिक, लाहौर में अलीमा खान के खिलाफ चल रहे सभी मामलों में उन्हें जमानत मिली हुई है।

    उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर अधिकारियों से अलीमा खान की लोकेशन सार्वजनिक करने और उनकी सुरक्षित रिहाई सुनिश्चित करने की मांग की।

    पाकिस्तान के अखबार एक्सप्रेस ट्रिब्यून के मुताबिक, लाहौर के डिप्टी कमिश्नर ने अलीमा खान के ड्राइवर मुहम्मद आमिर को भी 30 दिनों के लिए हिरासत में लेने का आदेश दिया था।

    इमरान के बेटे कासिम ने भी लगाए आरोप

    इमरान खान के बेटे कासिम खान ने भी दावा किया कि पुलिस ने उनकी बुआ अलीमा खान को लाहौर में हिरासत में लिया है। उन्होंने अधिकारियों से अलीमा खान के परिवार और वकीलों को उनसे मिलने की अनुमति देने तथा उनकी तत्काल रिहाई की मांग की।

    कासिम ने एक्स पर आरोप लगाया कि परिवार को यह जानकारी नहीं दी गई कि अलीमा खान को कहां रखा गया है और परिवार तथा वकील उनसे संपर्क नहीं कर पा रहे हैं। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि पहले उनके पिता को जेल भेजा गया और अब उनके परिवार को निशाना बनाया जा रहा है।

    तीनों बहनों की हिरासत और PTI के प्रस्तावित 27 सितंबर के इस्लामाबाद मार्च से पहले हुई कार्रवाई ने पाकिस्तान के राजनीतिक माहौल को और गरमा दिया है।

  • ऑस्ट्रेलिया से अमेरिका जा रहे F-35 के संवेदनशील पुर्जे हॉन्गकॉन्ग कैसे पहुंचे? चीन तक पहुंचने की आशंका से बढ़ी चिंता

    ऑस्ट्रेलिया से अमेरिका जा रहे F-35 के संवेदनशील पुर्जे हॉन्गकॉन्ग कैसे पहुंचे? चीन तक पहुंचने की आशंका से बढ़ी चिंता


    सिडनी।
    पांचवीं पीढ़ी के अमेरिकी स्टील्थ लड़ाकू विमान F-35 लाइटनिंग II के बेहद संवेदनशील स्पेयर पार्ट्स की एक खेप ऑस्ट्रेलिया से मरम्मत के लिए अमेरिका भेजे जाने के दौरान रहस्यमय तरीके से हॉन्गकॉन्ग की ओर डायवर्ट हो गई। घटना सामने आने के बाद अमेरिकी रक्षा मंत्रालय पेंटागन और अमेरिकी संसद कांग्रेस के राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े हलकों में चिंता बढ़ गई है। पेंटागन ने पुष्टि की है कि इस शिपमेंट में शामिल F-35 के कुछ संवेदनशील पुर्जों का पता नहीं चल पाया है।

    क्या गायब हुआ और क्यों अहम है?

    मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, गायब खेप में F-35 का कॉकपिट कैनोपी भी शामिल था। F-35 का कैनोपी सामान्य कांच या प्लास्टिक का कवर नहीं है। यह विशेष ऐक्रेलिक सामग्री से तैयार किया जाता है और इसकी सतह पर रडार-अब्जॉर्बेंट मटेरियल (RAM) की बेहद पतली पारदर्शी परत होती है।

    यह तकनीक विमान की स्टील्थ क्षमता का हिस्सा है। इसका उद्देश्य रडार तरंगों के परावर्तन को कम करना है, जिससे विमान को दुश्मन के रडार पर पकड़ना कठिन हो जाता है।

    रक्षा विशेषज्ञों ने आशंका जताई है कि यदि ऐसा कोई वास्तविक पुर्जा किसी प्रतिद्वंद्वी देश के हाथ लग जाए तो उसकी तकनीकी जांच से संबंधित सामग्री और तकनीक के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी हासिल करने का प्रयास किया जा सकता है। हालांकि, उपलब्ध जानकारी के मुताबिक इस बात का प्रत्यक्ष प्रमाण सामने नहीं आया है कि गायब पुर्जे चीन की सेना के हाथ लगे हैं।

    ऑस्ट्रेलिया से अमेरिका भेजे जा रहे थे पुर्जे

    अमेरिका के अलावा ऑस्ट्रेलिया, ब्रिटेन, नॉर्वे, पोलैंड और नीदरलैंड समेत कई सहयोगी देश F-35 लड़ाकू विमानों का संचालन करते हैं। ऑस्ट्रेलिया में F-35 के रखरखाव की सुविधाएं मौजूद हैं, लेकिन कैनोपी की विशेष मरम्मत सुविधा उपलब्ध नहीं होने के कारण इसे अमेरिका भेजा जा रहा था।

    रिपोर्टों के मुताबिक, लॉकहीड मार्टिन के एक ठेकेदार या कमर्शियल शिपिंग प्रदाता के माध्यम से भेजे जा रहे कंटेनर को रास्ते में हॉन्गकॉन्ग की ओर डायवर्ट कर दिया गया। इसी कारण यह सवाल उठ रहा है कि संवेदनशील रक्षा सामग्री वाली खेप को इस मार्ग पर कैसे भेजा गया और बाद में उसके कुछ पुर्जों का पता क्यों नहीं चल सका।

    हॉन्गकॉन्ग पहुंचने से बढ़ी चिंता

    हॉन्गकॉन्ग में चीन का प्रशासनिक और सुरक्षा नियंत्रण होने के कारण अमेरिकी पक्ष के लिए यह मामला संवेदनशील माना जा रहा है। आशंका जताई जा रही है कि हॉन्गकॉन्ग में पहुंचने के बाद खेप की सुरक्षा से समझौता हुआ हो सकता है। हालांकि, अभी तक यह साबित नहीं हुआ है कि किसी चीनी एजेंसी ने F-35 के पुर्जों को जब्त या स्कैन किया है।

    अमेरिकी रक्षा मंत्रालय के F-35 जॉइंट प्रोग्राम ऑफिस (JPO) ने कहा है कि वह गायब पुर्जों की स्थिति का पता लगाने और उन्हें वापस हासिल करने के लिए अमेरिकी एजेंसियों के साथ मिलकर काम कर रहा है। मामले की जांच भी जारी है।

    F-35 स्पेयर पार्ट्स की ट्रैकिंग पर पहले भी उठे सवाल

    F-35 के स्पेयर पार्ट्स की निगरानी को लेकर पहले भी सवाल उठ चुके हैं। 2023 की अमेरिकी सरकारी जवाबदेही कार्यालय (GAO) की रिपोर्ट में बताया गया था कि लॉकहीड मार्टिन और पेंटागन की व्यवस्था में खामियों के कारण पिछले पांच वर्षों में F-35 के करीब 8.5 करोड़ डॉलर मूल्य के 10 लाख से अधिक छोटे-बड़े स्पेयर पार्ट्स की ट्रैकिंग खो गई थी।

    2025 में भारत में भी कई सप्ताह खड़ा रहा था F-35B

    F-35 को लेकर इससे पहले भी संवेदनशीलता का मामला सामने आया था। 14 जून 2025 को ब्रिटेन का F-35B स्टील्थ लड़ाकू विमान केरल के तिरुवनंतपुरम अंतरराष्ट्रीय हवाईअड्डे पर आपात लैंडिंग के बाद करीब पांच सप्ताह तक वहां खड़ा रहा था। विमान 22 जुलाई 2025 तक भारत में रहा।

    विमान अरब सागर में नियमित उड़ान पर था। खराब मौसम के कारण वह अपने मूल बेस और रॉयल नेवी के विमानवाहक पोत HMS Prince of Wales पर वापस नहीं लौट सका। ईंधन कम होने के कारण उसने तिरुवनंतपुरम को आपातकालीन रिकवरी एयरफील्ड के तौर पर चुना था।

    विमान की संवेदनशील तकनीक को देखते हुए ब्रिटेन ने भारत की ओर से उपलब्ध कराई गई हैंगर सुविधा और तकनीकी सहायता का इस्तेमाल नहीं किया था। उस समय F-35 की स्टील्थ कोटिंग और एडवांस्ड सेंसर फ्यूजन सिस्टम जैसी तकनीकों की सुरक्षा को लेकर चिंताएं सामने आई थीं। विमान को हवाईअड्डे पर खुले में रखा गया था और उसकी सुरक्षा CISF के जिम्मे थी।

    F-35 के पुर्जों की मौजूदा घटना ने एक बार फिर इस अत्याधुनिक लड़ाकू विमान की सप्लाई चेन, स्पेयर पार्ट्स की निगरानी और संवेदनशील तकनीकी सामग्री की सुरक्षा को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं।

  • मीडिया जगत की सबसे बड़ी डील का रास्ता साफ…. पैरामाउंट-वार्नर मर्जर को चुनौती देने वाले राज्यों से हुआ समझौता

    मीडिया जगत की सबसे बड़ी डील का रास्ता साफ…. पैरामाउंट-वार्नर मर्जर को चुनौती देने वाले राज्यों से हुआ समझौता


    शिकागो।
    स्काइडांस (Skydance) के स्वामित्व वाली पैरामाउंट (Paramount) ने वार्नर ब्रदर्स डिस्कवरी (Warner Bros. Discovery) को खरीदने की डील के खिलाफ मुकदमा करने वाले अमेरिकी राज्यों के साथ समझौता कर लिया है। इससे 81 अरब डॉलर की इस बड़ी मीडिया डील के आगे बढ़ने का रास्ता साफ हो गया है। मामले की जानकारी रखने वाले एक व्यक्ति ने एसोसिएटेड प्रेस को यह जानकारी दी। उस व्यक्ति को सार्वजनिक रूप से बोलने की अनुमति नहीं थी, इसलिए उसने नाम न बताने की शर्त पर जानकारी दी।


    किन राज्यों ने इस डील को अदालत में चुनौती दी थी?

    कैलिफोर्निया और न्यूयॉर्क जैसे बड़े मनोरंजन बाजार वाले राज्यों समेत कई राज्यों ने जुलाई में इस विलय को रोकने के लिए मुकदमा दायर किया था। उनका आरोप था कि पैरामाउंट और वार्नर का एक साथ आना प्रतिस्पर्धा को खत्म कर सकता है और अमेरिकी उपभोक्ताओं के पास विकल्प कम हो सकते हैं। खास चिंता सिनेमाघरों में फिल्म देखने वालों और केबल टीवी ग्राहकों को लेकर जताई गई थी।

    पैरामाउंट और वार्नर ब्रदर्स डिस्कवरी की प्रस्तावित डील की इक्विटी वैल्यू 81 अरब डॉलर बताई गई थी। राज्यों के गठबंधन ने जुलाई में इस डील को रोकने के लिए मुकदमा किया था। राज्यों का आरोप था कि विलय से मनोरंजन क्षेत्र में प्रतिस्पर्धा घट सकती है। मुकदमे की सुनवाई अगले साल मार्च में पूरी एंटीट्रस्ट ट्रायल के रूप में शुरू होने वाली थी। पैरामाउंट ने आरोपों को निराधार बताया था और डील को अगले साल तक टालने पर सहमति दी थी।

    पैरामाउंट का कहना था कि दुनिया भर में जरूरी नियामकीय मंजूरियां मिल चुकी हैं और राज्यों का मुकदमा अंतिम बड़ी बाधा है। बाद के समझौते में घरेलू फिल्म निर्माण बढ़ाने और समाचार संचालन की संपादकीय स्वतंत्रता की निगरानी जैसी शर्तें शामिल की गई हैं।


    यह डील इतनी बड़ी क्यों मानी जा रही है?

    पैरामाउंट और वार्नर ब्रदर्स डिस्कवरी के जुड़ने से हॉलीवुड की दो बड़ी मीडिया कंपनियों के फिल्म, टेलीविजन और स्ट्रीमिंग कारोबार एक साथ आ जाएंगे। इसी वजह से राज्यों ने प्रतिस्पर्धा पर असर को लेकर चिंता जताई थी। पैरामाउंट का कहना था कि उसने दुनिया भर में जरूरी नियामकीय मंजूरियां हासिल कर ली हैं और राज्यों का मुकदमा डील पूरी करने की दिशा में आखिरी बड़ी रुकावट था।


    क्या मुकदमा यहीं खत्म हो गया और डील को मंजूरी मिल गई?

    समझौते से डील के रास्ते की बड़ी कानूनी अड़चन दूर हुई है, लेकिन समझौते को अंतिम रूप देने के लिए अदालत की मंजूरी अभी जरूरी है। कैलिफोर्निया के अटॉर्नी जनरल रॉब बोंटा ने भी साफ कहा कि समझौता इस विलय के समर्थन का वोट नहीं है। समझौते में पैरामाउंट की ओर से अमेरिकी फिल्म निर्माण बढ़ाने और समाचार संस्थानों की संपादकीय स्वतंत्रता की निगरानी जैसे प्रावधान शामिल हैं।


    विरोध करने वालों की सबसे बड़ी चिंता क्या?

    डील की आलोचना करने वालों ने मीडिया और मनोरंजन उद्योग में और ज्यादा एकीकरण को लेकर चिंता जताई है। एसोसिएटेड प्रेस की मूल रिपोर्ट में अमेरिकन इकोनॉमिक लिबर्टीज प्रोजेक्ट के वरिष्ठ सलाहकार और पूर्व एफटीसी आयुक्त अल्वारो बेदोया ने कहा कि इस तरह के एकीकरण के बाद छंटनी और छोटे कारोबारों के अनुबंध खोने का खतरा हो सकता है। उन्होंने यह भी आशंका जताई कि उपभोक्ताओं के केबल बिल और सिनेमाघर टिकट महंगे हो सकते हैं। ये उनकी आलोचनात्मक टिप्पणियां हैं, न कि इस रिपोर्ट में स्थापित तथ्य।

  • H-1B पर ट्रंप की सख्ती…. US छोड़ अब जर्मनी-ब्रिटेन जैसे देशों का रुख कर रहे भारतीय पेशेवर

    H-1B पर ट्रंप की सख्ती…. US छोड़ अब जर्मनी-ब्रिटेन जैसे देशों का रुख कर रहे भारतीय पेशेवर


    नई दिल्ली।
    अमेरिका (America) में एच-1बी वीजा (H-1B Visa) पर सख्ती और लगातार बदलते नियमों ने भारतीय पेशेवरों (Indian Professionals) और शोधकर्ताओं के कॅरिअर विकल्पों को बुरी तरह प्रभावित किया है। बीते एक साल में वीजा शुल्क और प्रक्रिया को लेकर अनिश्चितता बढ़ने के बीच भारतीय पेशेवर जर्मनी व ब्रिटेन (Germany and Britain) जैसे देशों का रुख कर रहे हैं। कुछ पेशेवर भारत लौटने का मन भी बना चुके हैं।

    अमेरिकन इंस्टीट्यूट ऑफ फिजिक्स के ताजा आंकड़े इसके स्पष्ट संकेत दे रहे हैं। भौतिकी में पीएचडी करने वाले विदेशी स्कॉलर्स के अमेरिका छोड़ने की दर 2023-24 के 16% से बढ़कर 2024-25 में 29% हो गई। यह तीन दशक में एक साल की सबसे बड़ी बढ़ोतरी है। वहीं, 60% अमेरिकी विवि में विदेशी छात्रों के आवेदन में कमी आई है। चालू वित्त वर्ष के तो शुरुआती नौ महीने में वीजा आवेदन में 10% की बड़ी गिरावट आई है।


    पलायन के दर्द तक पहुंची सपनों की जिंदगी

    अमेरिकी मीडिया कंपनी बिजनेस इनसाइडर की पड़ताल में सामने आया कि अमेरिका में सपनों की जिंदगी से पलायन का दर्द कई भारतीयों की कहानी बन चुका है। शिकागो में काम कर रहीं वैज्ञानिक अनन्या जोशी को कंपनी ने एच-1बी स्पॉन्सरशिप से इन्कार दिया तो उन्हें जर्मनी शिफ्ट होना पड़ा। कोलंबिया यूनिवर्सिटी से इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग में मास्टर्स सुंजना रमना एच-1बी हासिल करने के लिए तीन बार प्रयास कर चुकी थीं। बाद में ब्रिटेन का हाई-पोटेंशियल वीजा हासिल कर लंदन में फिनटेक कंपनी में नौकरी हासिल की। वह कहती हैं, सपने को किसी एक देश से नहीं, बल्कि अपनी क्षमताओं और लक्ष्यों से जोड़ना चाहिए।


    60% अमेरिकी विवि में विदेशी छात्रों के आवेदन में आई कमी

    एच1-बी: भारतीय बड़े लाभार्थी
    भारत -69.9% (2,83,772)
    चीन-12.1% (49,161)
    अन्य देश- 18.0%

    विदेशी पेशेवर…नेशनल साइंस फाउंडेशन के मुताबिक अमेरिका के साइंस व इंजीनियरिंग कार्यबल में 22% विदेशी मूल के हैं। मास्टर डिग्री धारकों में 39% और पीएचडी धारकों में 46% वैज्ञानिक विदेशी मूल के हैं। एच-1बी के आवेदनों में 44.5% प्रोफेशनल-तकनीकी सेवाओं से, मैन्युफैक्चरिंग से 12.1%, आईटी से 9.9%, फाइनेंस से 9.0% जुड़े हैं।


    एक लाख डॉलर शुल्क से मची अफरातफरी

    ट्रंप प्रशासन ने पिछले साल 20 सितंबर को एच-1बी वीजा की फीस बढ़ाकर एक लाख डॉलर कर दी थी। इस घोषणा के बाद एच-1बी कर्मचारियों और कंपनियों के बीच यात्रा और नौकरी को लेकर असमंजस पैदा हुआ। बाद की कानूनी प्रक्रिया में इस शुल्क के अमल पर रोक लगी, लेकिन सितंबर, 2026 में ट्रंप प्रशासन ने इस नीति को एक साल और बढ़ा दिया है।


    लौटेगी प्रतिभा तो भारत को मिलेगा फायदा

    अमेरिका में अवसरों की अनिश्चितता बढ़ने पर भारतीय पेशेवरों के लिए स्वदेश में कॅरिअर और उद्यमिता के विकल्प आकर्षक हो सकते हैं। भारतीय मूल के वैज्ञानिकों, इंजीनियरों और तकनीकी विशेषज्ञों की बड़ी संख्या पहले से ही देश में स्टार्टअप, आईटी, एआई और अनुसंधान क्षेत्रों से जुड़ी है। ऐसे में अवसर बढ़े हैं।

  • UNGA से पहले ट्रंप-ममदानी की ग्रेसी मैन्शन में मुलाकात, एक घंटे चली बैठक, जाने क्‍या हुई चर्चा ?

    UNGA से पहले ट्रंप-ममदानी की ग्रेसी मैन्शन में मुलाकात, एक घंटे चली बैठक, जाने क्‍या हुई चर्चा ?


    नई दिल्ली। संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) में हिस्सा लेने न्यूयॉर्क पहुंचे अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोमवार को मेयर जोहरान ममदानी से मुलाकात की। दोनों की बैठक ममदानी के आधिकारिक आवास ग्रेसी मैन्शन में करीब एक घंटे चली। मुलाकात के बाद दोनों नेताओं ने मीडिया से बातचीत की और न्यूयॉर्क में आवास तथा शहर को कामकाजी वर्ग के लिए अधिक किफायती बनाने से जुड़े मुद्दों पर चर्चा की जानकारी दी।

    ट्रंप ने ग्रेसी मैन्शन पहुंचने के बाद न्यूयॉर्क के मेयर के आधिकारिक आवास से जुड़ी अपनी पुरानी यादें भी साझा कीं। उन्होंने कहा कि इस इमारत में उन्होंने पहले भी कई मेयरों के साथ समय बिताया है और यहां कई महत्वपूर्ण काम हुए हैं। UNGA के लिए दुनिया के कई नेता इस समय न्यूयॉर्क में मौजूद हैं और ट्रंप मंगलवार को संयुक्त राष्ट्र महासभा को संबोधित करने वाले हैं।

    क्वींस में 12 हजार घर और 30 हजार नौकरियों पर चर्चा

    बैठक में न्यूयॉर्क के क्वींस इलाके में Sunnyside Yards के संभावित पुनर्विकास पर विशेष चर्चा हुई। ममदानी के मुताबिक इस परियोजना से करीब 12 हजार घर और 30 हजार नौकरियां पैदा हो सकती हैं। दोनों पक्षों ने इस योजना को आगे बढ़ाने के लिए न्यूयॉर्क सिटी हॉल और व्हाइट हाउस की हाउसिंग तथा ऑपरेशंस टीमों के बीच समन्वय बढ़ाने पर सहमति जताई।

    ट्रंप ने कहा कि Sunnyside Yards का विकास लंबे समय से चर्चा में है। परियोजना को आगे बढ़ाने के लिए संघीय स्तर पर मंजूरी और फंडिंग की जरूरत पड़ सकती है। उन्होंने यह भी कहा कि प्रस्तावित विकास में कम और मध्यम आय वाले लोगों के लिए पर्याप्त आवास शामिल होना चाहिए।

    महंगाई और शहर को किफायती बनाने पर भी बात

    मुलाकात के दौरान न्यूयॉर्क में बढ़ती जीवन-यापन लागत और कामकाजी वर्ग के लिए शहर को अधिक किफायती बनाने के तरीकों पर भी चर्चा हुई। ममदानी ने कहा कि उनका फोकस न्यूयॉर्कवासियों के लिए रहने का खर्च कम करने और ज्यादा आवास उपलब्ध कराने पर है।

    ममदानी ने मुलाकात के बाद कहा कि ट्रंप के साथ उनके राजनीतिक मतभेद हैं, लेकिन वह शहर के लोगों को राहत दिलाने की दिशा में काम करने वाले सभी पक्षों के साथ बातचीत जारी रखेंगे। उन्होंने बैठक को उपयोगी बताया और कहा कि दोनों पक्षों के बीच आवास से जुड़े मुद्दों पर आगे भी बातचीत होगी।

    ट्रंप और ममदानी की तीसरी आमने-सामने मुलाकात

    ग्रेसी मैन्शन में हुई यह मुलाकात ट्रंप और ममदानी की तीसरी आमने-सामने बैठक थी और पहली बार दोनों न्यूयॉर्क में मिले। इससे पहले नवंबर 2025 में ममदानी ने व्हाइट हाउस में ट्रंप से मुलाकात की थी। इसके बाद फरवरी में भी ममदानी ने वॉशिंगटन जाकर ट्रंप के साथ न्यूयॉर्क में आवास विकास से जुड़े मुद्दों पर चर्चा की थी।

    इस बार की बैठक में दोनों नेताओं ने अपने मतभेदों के बावजूद न्यूयॉर्क से जुड़े व्यावहारिक मुद्दों पर बातचीत जारी रखने पर जोर दिया। ट्रंप ने ममदानी के साथ मीडिया के सामने सकारात्मक लहजे में बात की और न्यूयॉर्क के लिए उनके काम करने की उम्मीद जताई।

  • UNGA से पहले अमेरिका में एयर ट्रैफिक सिस्टम फेल, सैकड़ों उड़ानें रद्द, न्यूयॉर्क पहुंच रहे वर्ल्ड लीडर्स

    UNGA से पहले अमेरिका में एयर ट्रैफिक सिस्टम फेल, सैकड़ों उड़ानें रद्द, न्यूयॉर्क पहुंच रहे वर्ल्ड लीडर्स


    नई दिल्ली। संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) के लिए दुनिया भर से नेता न्यूयॉर्क पहुंच रहे हैं और इसी दौरान अमेरिका के नॉर्थईस्ट इलाके में एयर ट्रैफिक कंट्रोल सिस्टम में बड़ी तकनीकी खराबी सामने आई। सोमवार को सैकड़ों उड़ानें रद्द करनी पड़ीं, जबकि हजारों फ्लाइट्स देरी से चलीं। न्यूयॉर्क के जॉन एफ. कैनेडी, लागार्डिया और नेवार्क एयरपोर्ट के साथ फिलाडेल्फिया की उड़ानें भी प्रभावित हुईं।

    तकनीकी समस्या के बावजूद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की वॉशिंगटन डीसी से न्यूयॉर्क की उड़ान तय समय पर रवाना हुई। अमेरिकी फेडरल एविएशन एडमिनिस्ट्रेशन (FAA) के मुताबिक, समस्या की शुरुआत सोमवार सुबह फिलाडेल्फिया के एयर ट्रैफिक कंट्रोल सेंटर में एक जरूरी सर्किट फेल होने से हुई।

    बैकअप लाइन भी निर्माण कार्य में कटी

    FAA की जांच में सामने आया कि मुख्य सर्किट के फेल होने के बाद इस्तेमाल की जाने वाली बैकअप फाइबर ऑप्टिक लाइन भी काम नहीं कर रही थी। यह लाइन न्यू जर्सी में निर्माण कार्य के दौरान कट गई थी। बैकअप लाइन न्यू ब्रंसविक और नेवार्क के बीच बिछी हुई थी।

    FAA के एडमिनिस्ट्रेटर ब्रायन बेडफोर्ड ने बताया कि मुख्य लाइन में नया सर्किट लगाने और बैकअप फाइबर लाइन की मरम्मत का काम जारी है। उनके अनुसार फाइबर लाइन की मरम्मत पूरी करने में करीब 13 घंटे लग सकते हैं।

    दोपहर तक लागार्डिया और फिलाडेल्फिया एयरपोर्ट से कुछ उड़ानों का संचालन फिर शुरू कर दिया गया था। हालांकि, अधिकारियों ने पूरे दिन बड़े पैमाने पर उड़ानों में देरी की आशंका जताई।

    2025 में भी नेवार्क पर पड़ा था असर

    जिस फिलाडेल्फिया FAA सेंटर में यह तकनीकी समस्या सामने आई है, वहां इससे पहले भी दिक्कतें सामने आ चुकी हैं। 2025 में इसी सेंटर से जुड़ी तकनीकी समस्याओं के कारण नेवार्क एयरपोर्ट पर कई बार उड़ान संचालन प्रभावित हुआ था।

    मौजूदा संकट के बीच कुछ एयरलाइंस ने यात्रियों को बिना अतिरिक्त शुल्क के अपनी उड़ान बदलने की सुविधा भी उपलब्ध कराई।

    AI से उड़ानों की निगरानी का नया सिस्टम

    FAA इस बीच एयर ट्रैफिक व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए एक नए कंप्यूटर सिस्टम की टेस्टिंग भी कर रहा है। यह सिस्टम आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की मदद से उड़ानों के शेड्यूल में संभावित टकराव और मौसम से जुड़ी समस्याओं का अनुमान लगाने में मदद करेगा।

    फिलहाल इस सिस्टम का परीक्षण केवल वॉशिंगटन डीसी इलाके में किया जा रहा है। FAA के मुताबिक, इसका मौजूदा एयर ट्रैफिक तकनीकी संकट से कोई संबंध नहीं है।

    UNGA के लिए दुनिया के कई देशों के नेता न्यूयॉर्क पहुंच रहे हैं, ऐसे समय में एयर ट्रैफिक कंट्रोल में आई इस तकनीकी समस्या ने नॉर्थईस्ट अमेरिका के प्रमुख एयरपोर्ट्स पर उड़ान संचालन को प्रभावित किया है। अधिकारियों की नजर अब सिस्टम की मरम्मत और उड़ान सेवाओं को सामान्य करने पर है।

  • रूस के संसदीय चुनाव में पुतिन की पार्टी की बड़ी जीत, यूनाइटेड रशिया ने 450 में से 355 सीटों पर दर्ज किया कब्जा

    रूस के संसदीय चुनाव में पुतिन की पार्टी की बड़ी जीत, यूनाइटेड रशिया ने 450 में से 355 सीटों पर दर्ज किया कब्जा

    नई दिल्ली । रूस में 2026 के संसदीय चुनाव के शुरुआती नतीजों में राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के समर्थन वाली यूनाइटेड रशिया पार्टी ने बड़ी बढ़त हासिल की है। 450 सदस्यीय स्टेट ड्यूमा में पार्टी ने 355 सीटों पर जीत दर्ज की है। इस परिणाम के साथ यूनाइटेड रशिया ने संसद में अपना मजबूत बहुमत बरकरार रखा है।

    यह चुनाव फरवरी 2022 में यूक्रेन के साथ शुरू हुए संघर्ष के बाद पहला संसदीय चुनाव था। ऐसे समय में हुए इस चुनाव पर पूरी दुनिया की नजर रही। चुनाव के दौरान यूक्रेन में लड़ रहे रूसी सैनिकों के समर्थन का मुद्दा भी प्रमुखता से सामने आया। यूनाइटेड रशिया ने पिछले चुनाव की तुलना में इस बार अधिक सीटें हासिल की हैं।

    रूस की 450 सदस्यीय संसद में 225 सीटों के लिए पार्टी-लिस्ट प्रणाली के तहत मतदान होता है, जबकि बाकी 225 सीटों पर सीधे उम्मीदवारों के बीच मुकाबला होता है। उपलब्ध नतीजों के अनुसार यूनाइटेड रशिया के उम्मीदवार सिंगल-मेंबर सीटों में से 208 पर आगे रहे। पार्टी को पार्टी-लिस्ट मतदान में भी 58 प्रतिशत के आसपास वोट मिले हैं।

    2021 में हुए पिछले संसदीय चुनाव में यूनाइटेड रशिया ने स्टेट ड्यूमा की 450 में से 324 सीटों पर जीत दर्ज की थी। इस बार 355 सीटों का आंकड़ा पिछले चुनाव के मुकाबले काफी अधिक है। इससे संसद में पार्टी की स्थिति और मजबूत हुई है।

    चुनाव में मतदान प्रतिशत भी चर्चा में रहा। रूस में कुल मतदान करीब 57 प्रतिशत से अधिक दर्ज किया गया। मॉस्को में भी मतदान को लेकर लोगों की भागीदारी महत्वपूर्ण रही। चुनाव के दौरान कई क्षेत्रों में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी रखी गई थी।

    इस बार युद्ध-विरोधी याब्लोको पार्टी को राष्ट्रीय स्तर पर पार्टी-लिस्ट चुनाव लड़ने की अनुमति नहीं मिली। हालांकि उसके कुछ नेताओं को अलग-अलग निर्वाचन क्षेत्रों से चुनाव लड़ने का अवसर मिला। इसके अलावा कई सरकार विरोधी नेताओं और उम्मीदवारों के चुनाव में हिस्सा लेने पर भी रोक रही।

    रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन यूनाइटेड रशिया पार्टी के औपचारिक सदस्य नहीं हैं। हालांकि वह वर्ष 2008 से 2012 तक पार्टी के अध्यक्ष रह चुके हैं। उस समय भी पार्टी का अध्यक्ष बनने के लिए औपचारिक सदस्यता जरूरी नहीं थी। वर्ष 2012 में पुतिन ने पार्टी अध्यक्ष का पद छोड़ दिया था। इसके बाद दिमित्री मेदवेदेव ने पार्टी की कमान संभाली।

    चुनाव के अंतिम चरण में रूस और यूक्रेन के बीच जारी संघर्ष का असर भी दिखाई दिया। मतदान के आखिरी दिन मॉस्को और आसपास के इलाकों में बड़े पैमाने पर ड्रोन हमलों की जानकारी सामने आई। मॉस्को को निशाना बनाकर सैकड़ों ड्रोन भेजे जाने का दावा किया गया, जबकि राजधानी और आसपास के क्षेत्रों में ड्रोन की कुल संख्या 1,600 से अधिक बताई गई।

    युद्ध के बीच हुए इस संसदीय चुनाव के नतीजों में यूनाइटेड रशिया की 355 सीटों की जीत ने रूस की मौजूदा राजनीतिक व्यवस्था में पार्टी की मजबूत स्थिति को फिर सामने ला दिया है।

  • पाकिस्तान ने अफगानिस्तान के कुनार में की एयरस्ट्राइक, तीन की मौत और कई घायल; तालिबान ने दी जवाबी कार्रवाई की चेतावनी

    पाकिस्तान ने अफगानिस्तान के कुनार में की एयरस्ट्राइक, तीन की मौत और कई घायल; तालिबान ने दी जवाबी कार्रवाई की चेतावनी

    नई दिल्ली ।पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच सीमा पर जारी तनाव एक बार फिर बढ़ गया है। पाकिस्तान ने अफगानिस्तान के उत्तर-पूर्वी कुनार प्रांत में एयरस्ट्राइक की है। इस हमले में तीन लोगों की मौत और कई अन्य के घायल होने की जानकारी सामने आई है। हमले के बाद तालिबान ने कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए जवाबी कार्रवाई की चेतावनी दी है।

    बताया गया है कि पाकिस्तान की ओर से यह कार्रवाई साझा सीमा पर बढ़ती चरमपंथी गतिविधियों और दोनों देशों के बीच लगातार बने मतभेदों के बीच की गई। पाकिस्तान लंबे समय से आरोप लगाता रहा है कि तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान यानी टीटीपी के सदस्य अफगानिस्तान की जमीन से उसके खिलाफ गतिविधियां संचालित कर रहे हैं।

    अफगानिस्तान में तालिबान इन आरोपों को खारिज करता रहा है। उसका कहना है कि पाकिस्तान को अपनी आंतरिक सुरक्षा से जुड़े मामलों पर ध्यान देना चाहिए। इसी आरोप-प्रत्यारोप के कारण दोनों पड़ोसी देशों के संबंध लंबे समय से तनावपूर्ण बने हुए हैं।

    कुनार में हुई एयरस्ट्राइक के बाद तालिबान की ओर से पाकिस्तान को कड़ी चेतावनी दी गई है। तालिबान ने कहा है कि अफगानिस्तान की जमीन पर इस तरह के हमले स्वीकार नहीं किए जाएंगे और कार्रवाई का जवाब दिया जाएगा। इससे दोनों देशों के बीच सैन्य तनाव बढ़ने की आशंका पैदा हो गई है।

    पाकिस्तान की यह कार्रवाई ऐसे समय हुई है जब उसके उत्तर-पश्चिमी हिस्से में सुरक्षा बलों और चरमपंथियों के बीच हिंसक घटनाएं बढ़ी हैं। हाल ही में एक पुलिस स्टेशन परिसर में आत्मघाती बम धमाके और उसके बाद हुई हिंसा ने स्थिति को और गंभीर किया था। पाकिस्तान इन घटनाओं के लिए अफगानिस्तान से सक्रिय होने वाले चरमपंथी समूहों को जिम्मेदार ठहराता रहा है।

    पाकिस्तान का आरोप है कि टीटीपी से जुड़े तत्व अफगानिस्तान में सुरक्षित ठिकानों का इस्तेमाल करते हैं और वहां से पाकिस्तान में हमलों की योजना बनाते हैं। दूसरी ओर तालिबान इन आरोपों को स्वीकार नहीं करता और पाकिस्तान के आरोपों को खारिज करता रहा है।

    दोनों देशों के बीच सीमा विवाद और चरमपंथी गतिविधियों को लेकर पहले भी सैन्य टकराव की स्थिति बन चुकी है। तालिबान ने पहले भी चेतावनी दी है कि अफगानिस्तान के भीतर किसी तरह का हमला उसकी संप्रभुता का उल्लंघन माना जाएगा। उसका कहना है कि यदि अफगानिस्तान की जमीन पर हमला किया गया तो वह सैन्य जवाब देने से पीछे नहीं हटेगा।

    ताजा एयरस्ट्राइक के बाद दोनों देशों के बीच तनाव और बढ़ने की स्थिति बन गई है। आने वाले दिनों में पाकिस्तान और तालिबान की ओर से उठाए जाने वाले कदम इस पूरे घटनाक्रम की दिशा तय कर सकते हैं।

    इस बीच दोनों देशों के बीच मतभेदों को बातचीत के जरिए सुलझाने की संभावना भी चर्चा में है। सऊदी अरब के दोनों देशों के साथ संबंधों को देखते हुए मध्यस्थता की भूमिका निभाने की संभावना का भी उल्लेख किया गया है। हालांकि, फिलहाल तत्काल प्राथमिकता सीमा पर तनाव कम करने और आगे किसी सैन्य टकराव को रोकने की है।

    कुनार में हुई एयरस्ट्राइक और उसके बाद तालिबान की चेतावनी ने पाकिस्तान-अफगानिस्तान संबंधों को एक बार फिर संवेदनशील स्थिति में ला दिया है। दोनों पक्षों के बीच आरोप-प्रत्यारोप जारी रहने के साथ अब निगाह इस बात पर है कि आगे कोई जवाबी सैन्य कार्रवाई होती है या तनाव को बातचीत के जरिए नियंत्रित करने की कोशिश की जाती है।