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  • राष्ट्रीय सुरक्षा पर अमेरिका सख्त विदेशी हस्तक्षेप और सीमापार दमन रोकने के लिए नया कानून लाने की पहल

    राष्ट्रीय सुरक्षा पर अमेरिका सख्त विदेशी हस्तक्षेप और सीमापार दमन रोकने के लिए नया कानून लाने की पहल


    अमेरिका  अमेरिका में राष्ट्रीय सुरक्षा और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की रक्षा को लेकर एक महत्वपूर्ण पहल सामने आई है। अमेरिकी सीनेट में रिपब्लिकन और डेमोक्रेट दोनों दलों के सांसदों ने मिलकर एक नया विधेयक पेश किया है जिसका उद्देश्य विदेशी सरकारों या उनके एजेंटों द्वारा अमेरिकी धरती पर कथित सीमापार दमन की घटनाओं पर सख्त कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित करना है। स्टॉप ट्रांसनेशनल रिप्रेशन एक्ट नामक यह प्रस्ताव पहली बार ऐसे मामलों की स्पष्ट संघीय कानूनी परिभाषा तय करने और दोषियों के खिलाफ कठोर दंड का प्रावधान करने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।

    यह विधेयक कैलिफोर्निया के डेमोक्रेट सीनेटर एडम शिफ और यूटा के रिपब्लिकन सीनेटर जॉन कर्टिस ने संयुक्त रूप से पेश किया है। दोनों सांसदों का कहना है कि हाल के वर्षों में कई ऐसे मामले सामने आए हैं जिनमें विदेशी सरकारों पर अमेरिका में रह रहे असंतुष्टों मानवाधिकार कार्यकर्ताओं पत्रकारों और अन्य लोगों को डराने धमकाने उनकी निगरानी करने या उन पर हमले की साजिश रचने के आरोप लगे हैं। उनका मानना है कि मौजूदा कानूनी ढांचे को और मजबूत बनाने की आवश्यकता है ताकि ऐसी गतिविधियों पर प्रभावी रोक लगाई जा सके।

    प्रस्तावित कानून के तहत यदि किसी व्यक्ति को सीमापार दमन से जुड़े संघीय अपराध में दोषी पाया जाता है तो उसे अधिकतम 10 वर्ष की अतिरिक्त कैद और 100000 अमेरिकी डॉलर तक के अतिरिक्त जुर्माने का सामना करना पड़ सकता है। इसके साथ ही पहली बार ट्रांसनेशनल रिप्रेशन को संघीय आपराधिक कानून में स्पष्ट रूप से परिभाषित करने का प्रस्ताव रखा गया है ताकि जांच और अभियोजन की प्रक्रिया अधिक प्रभावी और एकरूप हो सके।

    विधेयक के अनुसार ऐसे मामलों में अभियोजन की निगरानी अमेरिकी न्याय विभाग के राष्ट्रीय सुरक्षा प्रभाग के अधीन होगी जबकि आपराधिक जांच की जिम्मेदारी एफबीआई को सौंपी जाएगी। इसके अलावा कांग्रेस को हर वर्ष सीमापार दमन से जुड़े मामलों पर विस्तृत रिपोर्ट और ब्रीफिंग देना अनिवार्य होगा। संघीय एजेंसियों को यह भी निर्देश दिया जाएगा कि वे मौजूदा कानूनी अधिकारों की समीक्षा करें और कृत्रिम बुद्धिमत्ता के माध्यम से होने वाले संभावित सीमापार दमन से निपटने के लिए व्यापक रणनीति तैयार करें।

    सीनेटर एडम शिफ ने कहा कि अमेरिका की धरती पर किसी भी विदेशी सरकार द्वारा असंतुष्टों या आलोचकों को डराने धमकाने या चुप कराने की कोशिश स्वीकार नहीं की जा सकती। उनके अनुसार यह केवल व्यक्तिगत सुरक्षा का मामला नहीं बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा और लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा का भी प्रश्न है। वहीं सीनेटर जॉन कर्टिस ने कहा कि चाहे कोई भी विदेशी सरकार हो उसे अमेरिका की संप्रभुता और नागरिकों की स्वतंत्रता को चुनौती देने की अनुमति नहीं दी जाएगी। उन्होंने इस विधेयक को राष्ट्रीय हित और कानून के शासन को मजबूत करने वाला महत्वपूर्ण कदम बताया।

    प्रस्तावित कानून में सीमापार दमन की परिभाषा के अंतर्गत किसी विदेशी सरकार उसके एजेंट या उसके सहयोगियों द्वारा अमेरिका या अमेरिकी नागरिकों के खिलाफ की जाने वाली धमकी उत्पीड़न प्रतिशोध शारीरिक नुकसान अपहरण या हत्या जैसी गतिविधियों को शामिल किया गया है। साथ ही ऐसे प्रयास भी इस दायरे में आएंगे जिनका उद्देश्य किसी व्यक्ति को अमेरिकी संविधान द्वारा प्रदत्त अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता जैसे मौलिक अधिकारों का उपयोग करने से रोकना हो।

    हाल के वर्षों में इस तरह के मामलों को लेकर अमेरिका में चिंता बढ़ी है और कानून प्रवर्तन एजेंसियां कई कथित मामलों की जांच कर चुकी हैं। इसी पृष्ठभूमि में लाया गया यह विधेयक राष्ट्रीय सुरक्षा को मजबूत करने और अमेरिका में रहने वाले लोगों के अधिकारों की रक्षा के उद्देश्य से एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है।

  • भारत रोमानिया संबंधों को नई मजबूती राष्ट्रपति मुर्मु ने बुखारेस्ट में भारतीय समुदाय की सराहना की विकसित भारत 2047 में योगदान का किया आह्वान

    भारत रोमानिया संबंधों को नई मजबूती राष्ट्रपति मुर्मु ने बुखारेस्ट में भारतीय समुदाय की सराहना की विकसित भारत 2047 में योगदान का किया आह्वान


    नई दिल्ली। भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु अपने तीन देशों के विदेश दौरे के अंतिम चरण में रोमानिया की राजधानी बुखारेस्ट पहुंचीं जहां उन्होंने भारतीय समुदाय को संबोधित करते हुए भारत और रोमानिया के संबंधों को नई ऊर्जा देने वाला संदेश दिया। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के रिश्तों की सबसे मजबूत नींव सरकारों के बीच सहयोग से अधिक लोगों के बीच आत्मीय संबंध हैं। राष्ट्रपति ने प्रवासी भारतीयों की सराहना करते हुए कहा कि वे अपनी मेहनत प्रतिभा और समर्पण से न केवल रोमानिया के विकास में महत्वपूर्ण योगदान दे रहे हैं बल्कि भारत की संस्कृति और मूल्यों को भी पूरे सम्मान के साथ आगे बढ़ा रहे हैं।

    राष्ट्रपति मुर्मु ने अपने संबोधन में कहा कि बुखारेस्ट पहुंचने पर जिस तरह भारतीय संस्कृति की झलक देखने को मिली उससे ऐसा महसूस हुआ मानो वह किसी विदेशी देश में नहीं बल्कि भारत के ही किसी सांस्कृतिक कार्यक्रम में मौजूद हों। उन्होंने विशेष रूप से उन बच्चों और युवाओं की प्रशंसा की जिन्होंने भारतीय पारंपरिक परिधान और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के माध्यम से अपनी जड़ों से जुड़े रहने का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि यह भारतीय समुदाय की एकजुटता और सांस्कृतिक चेतना का जीवंत उदाहरण है।

    उन्होंने कहा कि आज भारतीय आईटी इंजीनियर वैज्ञानिक शोधकर्ता स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़े विशेषज्ञ और विद्यार्थी बड़ी संख्या में रोमानिया में अपनी पहचान बना रहे हैं। उनका ज्ञान अनुभव और पेशेवर योगदान रोमानिया की अर्थव्यवस्था और समाज को नई दिशा देने में मदद कर रहा है। साथ ही उनकी उपलब्धियां भारत की सकारात्मक छवि को भी वैश्विक स्तर पर मजबूत कर रही हैं। राष्ट्रपति ने कहा कि विदेशों में रहने वाले भारतीय वास्तव में भारत के सांस्कृतिक और सामाजिक राजदूत हैं जो दोनों देशों के बीच विश्वास और सहयोग को और मजबूत बनाते हैं।

    राष्ट्रपति मुर्मु ने विकसित भारत 2047 के राष्ट्रीय संकल्प का उल्लेख करते हुए कहा कि भारत एक समृद्ध आधुनिक आत्मनिर्भर और समावेशी राष्ट्र बनने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। उन्होंने प्रवासी भारतीयों से इस अभियान में सक्रिय भागीदारी बनाए रखने की अपील की। उन्होंने कहा कि चाहे भारतीय दुनिया के किसी भी हिस्से में रहते हों उनका अनुभव नवाचार और उपलब्धियां भारत की प्रगति को नई गति देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। उन्होंने विश्वास जताया कि भारतीय समुदाय भविष्य में भी भारत और रोमानिया के संबंधों को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने में अहम योगदान देगा।

    इस अवसर पर राष्ट्रपति ने रोमानिया की सरकार और वहां की जनता का भी आभार व्यक्त किया जिन्होंने भारतीय समुदाय का खुले दिल से स्वागत किया और उन्हें सुरक्षित तथा सम्मानजनक वातावरण उपलब्ध कराया। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच बढ़ता सहयोग आने वाले वर्षों में व्यापार शिक्षा विज्ञान प्रौद्योगिकी स्वास्थ्य और सांस्कृतिक आदान प्रदान जैसे अनेक क्षेत्रों में नए अवसर पैदा करेगा।

    इससे पहले बुखारेस्ट यूनिवर्सिटी ऑफ इकोनॉमिक स्टडीज ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु को मानद डॉक्टरेट की उपाधि से सम्मानित किया। इस अवसर पर उन्होंने भारत और रोमानिया के शैक्षणिक संस्थानों के बीच संयुक्त शोध छात्र और शिक्षक आदान प्रदान तथा नवाचार के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि आज जब दुनिया कृत्रिम बुद्धिमत्ता डिजिटल तकनीक और विज्ञान के नए युग में प्रवेश कर रही है तब शिक्षा संस्थानों की जिम्मेदारी केवल ज्ञान देना नहीं बल्कि नैतिकता संवेदनशीलता और मानवीय मूल्यों को भी आगे बढ़ाना है। उनके अनुसार शिक्षा ही एक न्यायपूर्ण समावेशी और प्रगतिशील समाज की सबसे मजबूत आधारशिला है।

  • परमाणु शक्ति में अमेरिका की बड़ी छलांग ट्रंप बोले दुनिया को अगली पीढ़ी की न्यूक्लियर तकनीक में करेंगे लीड

    परमाणु शक्ति में अमेरिका की बड़ी छलांग ट्रंप बोले दुनिया को अगली पीढ़ी की न्यूक्लियर तकनीक में करेंगे लीड


    नई दिल्ली। अमेरिका ने परमाणु ऊर्जा के क्षेत्र में एक नई और महत्वाकांक्षी शुरुआत का ऐलान किया है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने घोषणा की कि निजी निवेश से विकसित चार एडवांस्ड न्यूक्लियर रिएक्टर सरकार के सहयोग से संचालित कार्यक्रम के तहत महत्वपूर्ण तकनीकी उपलब्धि हासिल कर चुके हैं। ट्रंप ने इसे केवल वैज्ञानिक सफलता नहीं बल्कि अमेरिकी परमाणु उद्योग के पुनर्जागरण की शुरुआत बताया और दावा किया कि देश अब अगली पीढ़ी की न्यूक्लियर तकनीक में पूरी दुनिया का नेतृत्व करने के लिए तैयार है।

    व्हाइट हाउस में आयोजित विशेष कार्यक्रम में वरिष्ठ अधिकारियों और न्यूक्लियर टेक्नोलॉजी कंपनियों के प्रतिनिधियों की मौजूदगी में ट्रंप ने कहा कि कई दशकों की धीमी प्रगति के बाद अमेरिका अब फिर से परमाणु ऊर्जा के क्षेत्र में तेजी से आगे बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि अमेरिका केवल अपने उद्योग का पुनर्निर्माण नहीं कर रहा बल्कि भविष्य की ऊर्जा व्यवस्था की दिशा भी तय कर रहा है। उनके अनुसार देश में इनोवेशन और तकनीकी विकास की नई लहर शुरू हो चुकी है।

    राष्ट्रपति ट्रंप ने बताया कि पिछले वर्ष जारी किए गए चार कार्यकारी आदेशों का उद्देश्य नागरिक परमाणु क्षेत्र को नई गति देना था और सरकार ने तय लक्ष्य से भी आगे बढ़कर उपलब्धियां हासिल की हैं। उन्होंने ऊर्जा सचिव क्रिस राइट को एडवांस्ड रिएक्टरों के लिए विशेष पायलट कार्यक्रम शुरू करने और आधुनिक तकनीक वाले रिएक्टरों को सुरक्षित रूप से संचालित करने का निर्देश दिया था। ट्रंप ने कहा कि इतनी कम अवधि में जो परिणाम मिले हैं उन्हें किसी चमत्कार से कम नहीं कहा जा सकता।

    उन्होंने यह भी बताया कि अमेरिका में चार दशक से अधिक समय बाद पहली बार निजी निवेश से विकसित एडवांस्ड न्यूक्लियर रिएक्टर इस स्तर तक पहुंचे हैं। ट्रंप ने पुरानी नियामक प्रक्रिया की आलोचना करते हुए कहा कि पहले किसी रिएक्टर डिजाइन को मंजूरी मिलने में कई वर्ष लग जाते थे जिससे परियोजनाएं वर्षों तक अटकी रहती थीं। उनका कहना था कि नई नीति के कारण यह प्रक्रिया पहले की तुलना में कहीं अधिक तेज और प्रभावी हुई है।

    ऑफिस ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी पॉलिसी के निदेशक माइकल क्रैट्सियोस ने कहा कि अमेरिका ने केवल पुराना रिकॉर्ड नहीं तोड़ा बल्कि एक साथ चार परियोजनाओं को आगे बढ़ाकर नया इतिहास रच दिया है। उन्होंने बताया कि निजी निवेश से विकसित किसी नए रिएक्टर डिजाइन ने अंतिम बार 1974 में नियंत्रित परमाणु श्रृंखला अभिक्रिया हासिल की थी और अब 50 वर्ष से अधिक समय बाद अमेरिका ने इस उपलब्धि को नई ऊंचाई पर पहुंचाया है। उनके अनुसार यह संकेत है कि अमेरिका एक बार फिर पारंपरिक और अत्याधुनिक दोनों तरह की परमाणु तकनीक में वैश्विक नेतृत्व की ओर लौट रहा है।

    कार्यक्रम में मौजूद न्यूक्लियर कंपनियों के अधिकारियों ने भी ट्रंप प्रशासन की नीतियों की सराहना की। एंटारेस न्यूक्लियर के प्रतिनिधि ने बताया कि उनकी कंपनी के रिएक्टर भविष्य में अमेरिकी सैन्य ठिकानों अंतरिक्ष अभियानों और उन्नत रक्षा प्रणालियों को विश्वसनीय ऊर्जा उपलब्ध कराने में सक्षम होंगे। कंपनी ने 2028 से पहले सैन्य ठिकानों पर अपने रिएक्टर तैनात करने की योजना भी साझा की।

    एक अन्य कंपनी के अधिकारी ने कहा कि अमेरिका अब केवल योजनाओं और प्रस्तुतियों तक सीमित नहीं है बल्कि वास्तविक निर्माण और उत्पादन पर तेजी से काम कर रहा है। एक तीसरे अधिकारी ने इसे परमाणु ऊर्जा के इतिहास का निर्णायक मोड़ बताते हुए कहा कि आने वाले वर्षों में यही समय नई ऊर्जा क्रांति की शुरुआत के रूप में याद किया जाएगा। उन्होंने बताया कि उनकी कंपनी का रिएक्टर 4 जुलाई की रात पहली बार नियंत्रित परमाणु श्रृंखला अभिक्रिया तक पहुंचा और अब कंपनी डेटा सेंटरों के लिए अत्याधुनिक न्यूक्लियर ऊर्जा समाधान विकसित करने पर काम कर रही है। इसके लिए इस वर्ष एक बिलियन डॉलर का निवेश जुटाने और विशाल विनिर्माण इकाई स्थापित करने की योजना बनाई गई है।

    ऊर्जा सचिव क्रिस राइट ने कहा कि सरकार की नई ऊर्जा रणनीति के कारण अमेरिका आज सुरक्षित और प्रतिस्पर्धी ऊर्जा व्यवस्था की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। वहीं आंतरिक मामलों के सचिव डग बर्गम ने कहा कि सरकारी सब्सिडी के बजाय निजी निवेश और नवाचार पर आधारित मॉडल ही भविष्य की ऊर्जा अर्थव्यवस्था की सबसे बड़ी ताकत बनेगा। उनका कहना था कि नियमों को सरल बनाकर और उद्यमियों को अवसर देकर अमेरिका एक बार फिर दुनिया की अग्रणी ऊर्जा शक्ति बनने की दिशा में बढ़ रहा है।

  • व्हाइट हाउस डिनर में प्रेस की आजादी पर जोर ट्रंप से कहा लोकतंत्र बचाना है तो सवालों से नहीं भागिए

    व्हाइट हाउस डिनर में प्रेस की आजादी पर जोर ट्रंप से कहा लोकतंत्र बचाना है तो सवालों से नहीं भागिए


    नई दिल्ली। व्हाइट हाउस कॉरेस्पोंडेंट्स एसोसिएशन के वार्षिक डिनर में इस बार सबसे प्रमुख मुद्दा प्रेस की स्वतंत्रता और लोकतंत्र की मजबूती रहा। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की मौजूदगी में एसोसिएशन के नेताओं ने स्पष्ट संदेश दिया कि लोकतंत्र तभी मजबूत रह सकता है जब मीडिया बिना किसी डर और दबाव के अपना काम करता रहे। कार्यक्रम के दौरान कहा गया कि पत्रकारों से असहमति या उनकी आलोचना लोकतांत्रिक व्यवस्था का सामान्य हिस्सा है लेकिन स्वतंत्र प्रेस को कमजोर करने का कोई भी प्रयास संविधान की भावना और लोकतांत्रिक व्यवस्था दोनों के लिए गंभीर चुनौती बन सकता है।

    एसोसिएशन की निवर्तमान अध्यक्ष वेइजिया जियांग ने अपने संबोधन में कहा कि अमेरिकी इतिहास में राष्ट्रपति और पत्रकारों के रिश्ते हमेशा आसान नहीं रहे हैं। कई बार तीखी बहस और असहमति देखने को मिली है लेकिन इन सबके बावजूद दोनों की जिम्मेदारी जनता के हित में काम करना है। उन्होंने कहा कि पत्रकार सवाल पूछते हैं और सरकार जवाब देती है। इसी संवाद से लोकतंत्र मजबूत होता है और जनता तक सही जानकारी पहुंचती है। उन्होंने राष्ट्रपति ट्रंप को संबोधित करते हुए कहा कि सवाल पूछना और जवाब देना लोकतांत्रिक प्रक्रिया का अनिवार्य हिस्सा है तथा इसे किसी टकराव के रूप में नहीं बल्कि जवाबदेही के रूप में देखा जाना चाहिए।

    जियांग ने राष्ट्रपति ट्रंप के कारोबारी अनुभव का उल्लेख करते हुए कहा कि यदि सौदे की भाषा में बात की जाए तो फर्स्ट अमेंडमेंट कोई ऐसा विषय नहीं है जिस पर समझौता किया जा सके। यह अमेरिकी लोकतंत्र की स्थायी और संवैधानिक व्यवस्था है जिसे किसी भी परिस्थिति में कमजोर नहीं किया जा सकता। उन्होंने कहा कि प्रेस की आलोचना और प्रेस को कमजोर करने की कोशिश के बीच बहुत बड़ा अंतर है। आलोचना व्यवस्था को बेहतर बनाती है जबकि स्वतंत्र मीडिया को कमजोर करने की कोशिश लोकतंत्र की बुनियाद पर चोट करती है।

    इस वर्ष का समारोह विशेष महत्व रखता था क्योंकि निर्धारित समय पर आयोजित होने वाला यह कार्यक्रम अप्रैल में राष्ट्रपति ट्रंप पर हुए हमले के बाद स्थगित कर दिया गया था। अपने संबोधन में जियांग ने उस घटना को याद करते हुए कहा कि हिंसा ने पत्रकारों का मनोबल तोड़ने के बजाय उनकी जिम्मेदारी और संकल्प को और मजबूत किया। उन्होंने बताया कि संकट की उस घड़ी में भी रिपोर्टर फोटोग्राफर और टीवी क्रू लगातार घटनास्थल से तथ्य जुटाने और लोगों तक सही जानकारी पहुंचाने में लगे रहे। उनका कहना था कि यही स्वतंत्र पत्रकारिता की असली पहचान है।

    उन्होंने उस कठिन समय के अनुभव साझा करते हुए बताया कि राष्ट्रपति ट्रंप और उनकी टीम लगातार हालात की समीक्षा कर रही थी और जनता तक सही सूचना पहुंचाने के सर्वोत्तम तरीके पर चर्चा कर रही थी। जियांग ने कहा कि यही जिम्मेदारी पत्रकारों की भी होती है और यही कारण है कि सरकार और मीडिया दोनों का अंतिम उद्देश्य नागरिकों तक विश्वसनीय और सटीक जानकारी पहुंचाना होना चाहिए।

    कार्यक्रम में एसोसिएशन की नवनिर्वाचित अध्यक्ष जैकी हेनरिक ने भी स्वतंत्र और निष्पक्ष पत्रकारिता के प्रति संगठन की प्रतिबद्धता दोहराई। उन्होंने कहा कि संस्था बिना किसी डर और पक्षपात के तथ्यों की खोज और सत्य को सामने लाने का कार्य जारी रखेगी। उन्होंने कार्यक्रम में शामिल होने के लिए राष्ट्रपति ट्रंप का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यह परंपरा लोकतंत्र में स्वतंत्र मीडिया की महत्वपूर्ण भूमिका को सम्मान देने का अवसर है।

    समारोह के दौरान अप्रैल में हुए हमले में बहादुरी दिखाने वाले सीक्रेट सर्विस अधिकारी विक्टर गोंजालेज को सम्मानित किया गया। इसके साथ ही उत्कृष्ट रिपोर्टिंग करने वाले पत्रकारों फोटोग्राफरों और मीडिया संस्थानों को भी सम्मान प्रदान किया गया। पूरे कार्यक्रम का केंद्रीय संदेश यही रहा कि लोकतंत्र की मजबूती के लिए स्वतंत्र प्रेस केवल एक अधिकार नहीं बल्कि लोकतांत्रिक व्यवस्था की सबसे महत्वपूर्ण आधारशिला है।

  • गोलीबारी के बाद पहली बार कॉरेस्पोंडेंट्स डिनर में पहुंचे ट्रंप, बोले- राजनीतिक हिंसा के आगे कभी नहीं झुकेंगे

    गोलीबारी के बाद पहली बार कॉरेस्पोंडेंट्स डिनर में पहुंचे ट्रंप, बोले- राजनीतिक हिंसा के आगे कभी नहीं झुकेंगे


    वाशिंगटन। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने व्हाइट हाउस कॉरेस्पोंडेंट्स डिनर में पहली पूर्ण उपस्थिति दर्ज कराते हुए राजनीतिक हिंसा के खिलाफ कड़ा संदेश दिया। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र की सबसे बड़ी ताकत संवाद और बहस है, न कि हिंसा। ट्रंप ने स्पष्ट किया कि वह अगले वर्ष भी इस प्रतिष्ठित कार्यक्रम में शामिल होंगे और किसी भी प्रकार की राजनीतिक हिंसा उन्हें या लोकतांत्रिक संस्थाओं को डरा नहीं सकती।

    ट्रंप का यह संबोधन ऐसे समय आया, जब इसी वर्ष अप्रैल में आयोजित होने वाले व्हाइट हाउस कॉरेस्पोंडेंट्स एसोसिएशन (WHCA) डिनर के दौरान गोलीबारी की घटना हुई थी। हमले के बाद कार्यक्रम को स्थगित करना पड़ा था। राष्ट्रपति ने उस घटना को याद करते हुए कहा कि यह केवल किसी व्यक्ति पर नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक व्यवस्था और स्वतंत्र प्रेस पर हमला था।

    उन्होंने समारोह में मौजूद सैकड़ों पत्रकारों, प्रशासनिक अधिकारियों और अतिथियों से कहा कि राजनीतिक मतभेदों का समाधान कभी भी गोलियों से नहीं हो सकता। उनके शब्दों में, “हम राजनीतिक हिंसा के सामने झुकने वाले नहीं हैं। हम अपने मतभेदों को खुली और मजबूत बहस के जरिए सुलझाते हैं।” उनके इस बयान पर सभागार तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा।

    ट्रंप ने हमले के दौरान घायल हुए सीक्रेट सर्विस अधिकारी विक्टर गोंजालेज की विशेष रूप से सराहना की। उन्होंने बताया कि घायल होने के बावजूद गोंजालेज अस्पताल जाने की बजाय अपनी जिम्मेदारी निभाने पर अड़े रहे। राष्ट्रपति ने सीक्रेट सर्विस, मेट्रोपॉलिटन पुलिस और सभी सुरक्षा एजेंसियों का धन्यवाद करते हुए कहा कि उनकी सतर्कता की वजह से बड़ा हादसा टल गया। समारोह में मौजूद लोगों ने भी सुरक्षा अधिकारियों के सम्मान में खड़े होकर तालियां बजाईं।

    अपने भाषण में ट्रंप ने हल्के-फुल्के अंदाज में यह भी स्वीकार किया कि गोलीबारी के बाद उन्हें अपना पहले से तैयार किया गया “ज्यादा आक्रामक” भाषण बदलना पड़ा। उन्होंने मुस्कुराते हुए कहा कि वह भाषण शायद अब कभी नहीं दिया जाएगा, हालांकि उन्होंने कार्यक्रम के दौरान राजनीतिक विरोधियों और मीडिया पर हल्के-फुल्के व्यंग्य भी किए।

    राष्ट्रपति ने व्हाइट हाउस प्रेस कोर की भूमिका की सराहना करते हुए कहा कि अधिकांश पत्रकार अपना काम पूरी निष्ठा से करते हैं। उन्होंने व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव कैरोलिन लेविट के बारे में मजाक करते हुए कहा कि उनके पास सबसे कठिन जिम्मेदारियों में से एक है, क्योंकि उन्हें हर दिन पत्रकारों के कठिन सवालों का सामना करना पड़ता है।

    ट्रंप ने व्हाइट हाउस कॉरेस्पोंडेंट्स एसोसिएशन की मौजूदा अध्यक्ष वेइजिया जियांग की भी प्रशंसा की और कहा कि कठिन परिस्थितियों में साथ काम करने से दोनों के बीच आपसी सम्मान बढ़ा है। साथ ही उन्होंने नई अध्यक्ष जैकी हेनरिक को शुभकामनाएं देते हुए उन्हें एक बेहद सख्त लेकिन सक्षम पत्रकार बताया।

    कार्यक्रम के दौरान ट्रंप ने भविष्य में व्हाइट हाउस परिसर में बन रहे नए बॉलरूम में कॉरेस्पोंडेंट्स डिनर आयोजित करने का सुझाव भी दिया। उन्होंने कहा कि निर्माण कार्य तय समय से पहले और बजट के भीतर पूरा हो रहा है। अपने संबोधन के अंत में ट्रंप ने अमेरिका के भविष्य को लेकर भरोसा जताते हुए कहा कि देश एक बड़े परिवर्तन के दौर में प्रवेश कर रहा है और यह “अमेरिका का स्वर्ण युग” साबित होगा।

  • एआई और रोबोटिक्स में चीन की बढ़त रोकने का अमेरिकी प्लान, सांसद बोले- चीनी रोबोट बन सकते हैं जासूसी का हथियार

    एआई और रोबोटिक्स में चीन की बढ़त रोकने का अमेरिकी प्लान, सांसद बोले- चीनी रोबोट बन सकते हैं जासूसी का हथियार


    नई दिल्ली। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और रोबोटिक्स के क्षेत्र में चीन की तेजी से बढ़ती ताकत अब अमेरिका के लिए नई सुरक्षा चुनौती बनती जा रही है। इसी खतरे को देखते हुए अमेरिकी संसद में रिपब्लिकन और डेमोक्रेट सांसदों ने एक ऐसे विधेयक को आगे बढ़ाया है जिसका उद्देश्य चीन में निर्मित ह्यूमनॉइड और चार पैरों वाले रोबोट को अमेरिका के महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे से दूर रखना है। अमेरिकी सांसदों का मानना है कि यदि समय रहते कदम नहीं उठाए गए तो भविष्य में यही रोबोट राष्ट्रीय सुरक्षा और संवेदनशील संस्थानों के लिए बड़ा खतरा बन सकते हैं।

    अमेरिकी प्रतिनिधि सभा की एनर्जी एंड कॉमर्स कमेटी की कम्युनिकेशंस एंड टेक्नोलॉजी सब कमेटी में गार्ड एक्ट पर सुनवाई के दौरान सांसदों ने कहा कि चीन पहले ड्रोन उद्योग में जिस रणनीति से वैश्विक बाजार पर कब्जा करने में सफल रहा था अब वही मॉडल रोबोटिक्स और एआई सेक्टर में अपनाया जा रहा है। उनका कहना है कि इंटरनेट से जुड़े ये रोबोट केवल मशीन नहीं बल्कि डेटा संग्रह और निगरानी का माध्यम भी बन सकते हैं।

    समिति के अध्यक्ष ब्रेट गुथरी ने कहा कि अमेरिका पहले ही चीनी दूरसंचार उपकरणों और ड्रोन के खिलाफ कड़े कदम उठा चुका है। अब रोबोटिक्स क्षेत्र में भी उसी सतर्कता की जरूरत है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय सुरक्षा और अमेरिकी नागरिकों के डेटा की रक्षा सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है और किसी भी संभावित खतरे को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।

    सुनवाई के दौरान एसोसिएशन फॉर अनक्रूड व्हीकल सिस्टम्स इंटरनेशनल के अध्यक्ष और मुख्य कार्यकारी अधिकारी माइकल रॉबिंस ने चेतावनी दी कि चीन बेहद कम कीमत पर सरकारी सब्सिडी वाले रोबोट दुनिया भर में उपलब्ध करा रहा है। उन्होंने दावा किया कि वैश्विक स्तर पर ह्यूमनॉइड रोबोट की लगभग 90 प्रतिशत आपूर्ति पर चीनी कंपनियों का कब्जा हो चुका है और अमेरिकी अनुसंधान संस्थान भी सस्ते विकल्पों की वजह से इन पर निर्भर होते जा रहे हैं।

    रॉबिंस ने कहा कि एक सामान्य लैपटॉप केवल डेटा चुरा सकता है लेकिन इंटरनेट से जुड़ा रोबोट किसी फैक्ट्री अस्पताल बिजली संयंत्र या सैन्य ठिकाने के भीतर घूमकर निगरानी कर सकता है डेटा इकट्ठा कर सकता है और भौतिक गतिविधियां भी अंजाम दे सकता है। उनके अनुसार यदि ऐसे सिस्टम से छेड़छाड़ की जाए या रिमोट एक्सेस हासिल कर लिया जाए तो यह राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा बन सकता है। उन्होंने इसे ट्रोजन हॉर्स जैसी स्थिति बताया और कहा कि कार्रवाई में जितनी देरी होगी भविष्य में चीनी तकनीक पर निर्भरता उतनी ही बढ़ती जाएगी।

    व्हाइट हाउस की पूर्व प्रौद्योगिकी सलाहकार लिंडसे गोरमन ने भी सांसदों को चेतावनी देते हुए कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस ने साइबर सुरक्षा की चुनौतियों को पूरी तरह बदल दिया है। उनके मुताबिक एआई साइबर हमलों को पहले से कहीं अधिक प्रभावी बना रहा है और इससे हमलावरों को बढ़त मिलने का खतरा बढ़ गया है। उन्होंने सुझाव दिया कि अमेरिका को कम लागत वाले भरोसेमंद एआई मॉडल विकसित करने चाहिए ताकि दुनिया के अन्य देशों को चीनी विकल्पों पर निर्भर न रहना पड़े।

    विशेषज्ञों का मानना है कि भविष्य की वैश्विक प्रतिस्पर्धा केवल सैन्य ताकत या अर्थव्यवस्था तक सीमित नहीं रहेगी बल्कि एआई और रोबोटिक्स में तकनीकी बढ़त भी देशों की रणनीतिक स्थिति तय करेगी। यही वजह है कि अमेरिका अब जापान दक्षिण कोरिया ताइवान इजरायल ऑस्ट्रेलिया और यूरोपीय सहयोगियों के साथ मिलकर सुरक्षित और भरोसेमंद तकनीकी सप्लाई चेन तैयार करने की दिशा में तेजी से काम कर रहा है। आने वाले समय में यह प्रतिस्पर्धा वैश्विक तकनीकी और भू-राजनीतिक समीकरणों को नई दिशा दे सकती है।

  • टैरिफ को लेकर ट्रंप का पलटवार, सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद बदली चाल, 19.2 ट्रिलियन डॉलर निवेश का दावा

    टैरिफ को लेकर ट्रंप का पलटवार, सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद बदली चाल, 19.2 ट्रिलियन डॉलर निवेश का दावा


    नई दिल्ली। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर अपनी टैरिफ नीति का जोरदार बचाव करते हुए दावा किया है कि उनकी सरकार की व्यापारिक रणनीति के कारण अमेरिका में 19.2 ट्रिलियन डॉलर का रिकॉर्ड निवेश आया है। व्हाइट हाउस में आयोजित एक कार्यक्रम के बाद मीडिया से बातचीत के दौरान ट्रंप ने कहा कि हालिया कानूनी चुनौतियों के बावजूद उनकी सरकार टैरिफ नीति को जारी रखेगी और इसके लिए आवश्यक कानूनी बदलाव भी कर चुकी है। उन्होंने स्पष्ट किया कि सुप्रीम कोर्ट के हालिया फैसले के बाद प्रशासन ने अपनी रणनीति बदली है लेकिन आर्थिक एजेंडा पहले की तरह ही मजबूत बना हुआ है।

    ट्रंप ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद उनकी सरकार ने टैरिफ लागू करने के लिए दूसरी कानूनी व्यवस्थाओं का सहारा लिया है जिनका इस्तेमाल पहले भी विभिन्न अमेरिकी प्रशासन कर चुके हैं। उनके मुताबिक अदालत ने केवल प्रक्रिया बदलने की बात कही थी और सरकार ने उसी दिशा में कदम उठाया। उन्होंने विश्वास जताया कि नई कानूनी व्यवस्था के तहत लागू किए गए टैरिफ न्यायिक जांच में भी टिकेंगे।

    राष्ट्रपति ने दावा किया कि टैरिफ नीति का सबसे बड़ा फायदा यह हुआ है कि दुनिया भर की कंपनियां अब अमेरिका में निवेश और उत्पादन बढ़ाने के लिए आगे आ रही हैं। उनके अनुसार देश में 19.2 ट्रिलियन डॉलर का निवेश प्रस्तावित या शुरू हो चुका है जो अमेरिकी इतिहास में अब तक का सबसे बड़ा निवेश है। उन्होंने पूर्व राष्ट्रपति जो बाइडेन के कार्यकाल पर निशाना साधते हुए कहा कि चार वर्षों में निवेश एक ट्रिलियन डॉलर से भी कम रहा जबकि उनकी सरकार ने केवल एक वर्ष में रिकॉर्ड निवेश आकर्षित किया है।

    ट्रंप ने कहा कि यदि टैरिफ लागू नहीं किए गए होते तो अमेरिकी उद्योगों को भारी नुकसान उठाना पड़ता। उनका मानना है कि आयात शुल्क ने विदेशी कंपनियों को अमेरिका में फैक्ट्री लगाने और स्थानीय स्तर पर उत्पादन बढ़ाने के लिए प्रेरित किया है। इससे न केवल रोजगार के अवसर बढ़े हैं बल्कि संघीय राजस्व में भी उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।

    मीडिया से बातचीत के दौरान ट्रंप से हाल में शुरू की गई एक व्यापारिक जांच में बाल मजदूरी को आधार बनाए जाने पर भी सवाल पूछा गया। इस पर उन्होंने कहा कि अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधियों ने दुनिया के कई देशों की समीक्षा की और बाल मजदूरी भी उन कारणों में शामिल थी जिनके आधार पर कुछ व्यापारिक फैसले लिए गए। हालांकि उन्होंने इस विषय पर अधिक विस्तार से टिप्पणी नहीं की।

    राष्ट्रपति ने अपनी आर्थिक नीति को ऊर्जा उत्पादन घरेलू विनिर्माण और औद्योगिक विकास से जोड़ते हुए कहा कि टैरिफ केवल व्यापारिक हथियार नहीं बल्कि अमेरिका को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने का माध्यम हैं। उन्होंने दोहराया कि उनकी सरकार का लक्ष्य उत्पादन को अमेरिका वापस लाना और देश की औद्योगिक क्षमता को मजबूत करना है।

    इस बीच ट्रंप की टैरिफ नीति पर दुनिया की बड़ी अर्थव्यवस्थाओं की नजर बनी हुई है। यूरोपीय संघ चीन और कई एशियाई व्यापारिक साझेदार अमेरिकी व्यापारिक कदमों और उनसे जुड़े कानूनी विवादों पर लगातार नजर रख रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में इन टैरिफ नीतियों का असर वैश्विक व्यापार सप्लाई चेन और महंगाई पर भी दिखाई दे सकता है। ऐसे में ट्रंप की बदली हुई कानूनी रणनीति और उनके बड़े आर्थिक दावों पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी चर्चा तेज हो गई है।

  • ट्रंप का मास्टरप्लान! सऊदी परमाणु समझौते के बदले इजरायल से दोस्ती की शर्त, मध्य पूर्व की राजनीति में हलचल

    ट्रंप का मास्टरप्लान! सऊदी परमाणु समझौते के बदले इजरायल से दोस्ती की शर्त, मध्य पूर्व की राजनीति में हलचल


    नई दिल्ली। अमेरिका ने एक बार फिर साफ कर दिया है कि सऊदी अरब के साथ प्रस्तावित नागरिक परमाणु समझौता केवल ऊर्जा सहयोग तक सीमित नहीं रहेगा बल्कि इसके साथ इजरायल के साथ रिश्तों को सामान्य बनाने की बड़ी कूटनीतिक शर्त भी जुड़ी हुई है। व्हाइट हाउस ने संकेत दिए हैं कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की मध्य पूर्व नीति का सबसे अहम उद्देश्य सऊदी अरब को अब्राहम अकॉर्ड्स में शामिल कराना और इजरायल के साथ उसके संबंधों को औपचारिक रूप से सामान्य बनाना है। इस बयान ने एक बार फिर पश्चिम एशिया की बदलती भू-राजनीतिक तस्वीर को लेकर नई चर्चा शुरू कर दी है।

    व्हाइट हाउस के डिप्टी चीफ ऑफ स्टाफ स्टीफन मिलर ने कहा कि राष्ट्रपति ट्रंप ने सऊदी नेतृत्व के सामने पहले ही स्पष्ट कर दिया है कि इजरायल के साथ संबंध सामान्य करना उनकी प्राथमिक अपेक्षाओं में शामिल है। उन्होंने कहा कि यह केवल वर्तमान कार्यकाल की नीति नहीं बल्कि लंबे समय से ट्रंप प्रशासन की रणनीतिक सोच का हिस्सा रही है। हालांकि उन्होंने यह स्पष्ट नहीं किया कि परमाणु समझौता पहले होगा या इजरायल से रिश्तों का सामान्यीकरण लेकिन इतना जरूर कहा कि दोनों मुद्दे एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं।

    मिलर ने ट्रंप की सऊदी अरब के साथ वर्षों पुरानी कूटनीतिक भागीदारी का जिक्र करते हुए कहा कि 2017 में रियाद में दिए गए ऐतिहासिक भाषण के बाद से ही अमेरिका ने सऊदी अरब को क्षेत्रीय स्थिरता का मजबूत साझेदार बनाने की दिशा में लगातार काम किया है। उनके अनुसार राष्ट्रपति ट्रंप सऊदी नेतृत्व की रणनीतिक सोच और भविष्य की योजनाओं को अच्छी तरह समझते हैं और उन्हें भरोसा है कि आने वाले समय में यह साझेदारी मध्य पूर्व में ऐतिहासिक बदलाव का कारण बनेगी।

    व्हाइट हाउस का मानना है कि यदि सऊदी अरब इजरायल के साथ औपचारिक संबंध स्थापित करता है तो इससे पूरे क्षेत्र में स्थिरता बढ़ेगी और अब्राहम अकॉर्ड्स को नई मजबूती मिलेगी। ट्रंप के पहले कार्यकाल में संयुक्त अरब अमीरात बहरीन मोरक्को और सूडान ने इजरायल के साथ संबंध सामान्य किए थे। अब अमेरिकी प्रशासन चाहता है कि सऊदी अरब भी इस पहल का हिस्सा बने क्योंकि उसे क्षेत्र का सबसे प्रभावशाली अरब देश माना जाता है।

    इस दौरान स्टीफन मिलर ने निकारागुआ की राजनीति पर भी तीखी टिप्पणी की। उन्होंने आरोप लगाया कि वहां की सरकार लोकतांत्रिक संस्थाओं को कमजोर कर रही है और समाजवादी शासन चुनावी प्रक्रिया का उपयोग सत्ता हासिल करने के बाद राजनीतिक स्वतंत्रताओं को सीमित करने के लिए करता है। उन्होंने कहा कि विदेश मंत्री मार्को रुबियो पहले ही इस मुद्दे पर अमेरिकी नीति स्पष्ट कर चुके हैं।

    मिलर ने यह भी दावा किया कि ट्रंप प्रशासन की व्यापक रणनीति पश्चिमी गोलार्ध में अमेरिका के प्रभाव को मजबूत करने और सहयोगी देशों के साथ रिश्तों को नई दिशा देने पर केंद्रित है। उनके अनुसार कई देशों की सरकारें अमेरिका की सुरक्षा और समृद्धि आधारित नीति के साथ खड़ी हैं।

    विशेषज्ञों का मानना है कि सऊदी अरब के साथ नागरिक परमाणु समझौते और इजरायल से संबंध सामान्य करने की अमेरिकी कोशिशें आने वाले समय में मध्य पूर्व की राजनीति को नई दिशा दे सकती हैं। यदि यह पहल सफल होती है तो क्षेत्रीय कूटनीति में एक और बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है।

  • 7200 वोल्ट की लाइन पर फंसा भालू, मदद पहुंचने से पहले चली गई जान; वायरल वीडियो ने उठाए कई सवाल

    7200 वोल्ट की लाइन पर फंसा भालू, मदद पहुंचने से पहले चली गई जान; वायरल वीडियो ने उठाए कई सवाल


    नई दिल्ली।
    अमेरिका के न्यू मैक्सिको राज्य में एक दर्दनाक घटना ने वन्यजीव बचाव व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। यहां एक जंगली भालू बिजली के ऊंचे खंभे पर चढ़ गया और हाई वोल्टेज तारों के बीच फंस गया। राहगीरों ने तुरंत इसकी सूचना इमरजेंसी सेवाओं को दी, लेकिन समय पर राहत टीम नहीं पहुंच सकी। आखिरकार 7200 वोल्ट की बिजली लाइन के संपर्क में आने से भालू की मौके पर ही मौत हो गई। इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है।

    राहगीरों ने सबसे पहले देखा संकट में फंसा भालू

    घटना के दौरान शैनन मुलेंस अपने परिवार के साथ हाईवे से गुजर रही थीं। उन्होंने सबसे पहले बिजली के खंभे पर फंसे भालू को देखा। उनके मंगेतर ने तुरंत 911 पर कॉल कर अधिकारियों को इसकी जानकारी दी।

    कुछ देर बाद वहां से गुजर रहे रॉबिन डॉसन भी रुक गए। उन्होंने भी इमरजेंसी सेवाओं को फोन कर बताया कि भालू खंभे पर फंसा हुआ है और लगातार संघर्ष कर रहा है। डॉसन के मुताबिक, दूर खड़े होने के बावजूद भालू की तेज सांसें साफ सुनाई दे रही थीं, जिससे उसकी परेशानी का अंदाजा लगाया जा सकता था।

    करीब आधे घंटे तक नहीं पहुंची रेस्क्यू टीम

    रॉबिन डॉसन लगभग 30 मिनट तक मौके पर मौजूद रहे। उन्हें उम्मीद थी कि वन विभाग या बिजली विभाग की टीम जल्द पहुंचकर भालू को सुरक्षित नीचे उतार लेगी। लेकिन काफी देर तक कोई नहीं आया।

    इसके बाद उन्होंने दोबारा 911 पर संपर्क किया। उनका कहना है कि उन्हें बताया गया कि फिलहाल कोई टीम नहीं भेजी जाएगी और संभव है कि भालू खुद ही नीचे उतर आए। इस जवाब से वहां मौजूद लोग हैरान रह गए, क्योंकि हाई वोल्टेज तारों के बीच फंसे जानवर के लिए खुद सुरक्षित उतरना बेहद मुश्किल था।

    वीडियो बनाने के लिए जुटती रही भीड़

    घटना की जानकारी फैलते ही कई लोग सड़क किनारे रुकने लगे। कुछ लोग केवल भालू को देखने पहुंचे, जबकि कई लोगों ने मोबाइल फोन से वीडियो और तस्वीरें रिकॉर्ड करनी शुरू कर दीं।

    बाद में न्यू मैक्सिको डिपार्टमेंट ऑफ वाइल्डलाइफ ने बताया कि लोगों से बार-बार अपील की गई थी कि वे वहां न रुकें और भालू को अकेला छोड़ दें, ताकि वह खुद नीचे उतरने की कोशिश कर सके। विभाग का मानना है कि लगातार लोगों की मौजूदगी से भालू और अधिक तनाव में आ गया।

    7200 वोल्ट का करंट बना मौत की वजह

    जब तक बिजली विभाग और स्थानीय शेरिफ की टीम मौके पर पहुंची, तब तक बहुत देर हो चुकी थी। अधिकारियों के अनुसार, खंभे पर मौजूद लाइन में लगभग 7200 वोल्ट का करंट प्रवाहित हो रहा था। किसी समय भालू का संपर्क हाई वोल्टेज तार से हो गया, जिससे उसे तेज करंट लगा और उसकी मौके पर ही मौत हो गई।

    स्थानीय शेरिफ कर्टिस स्कैग्स ने पुष्टि की कि जब अधिकारी पहुंचे, तब तक भालू की जान जा चुकी थी और उसका शव खंभे के नीचे मिला।

    वन विभाग ने शुरू की जांच

    न्यू मैक्सिको डिपार्टमेंट ऑफ वाइल्डलाइफ ने घटना पर दुख जताते हुए कहा कि मामले की जांच की जा रही है। विभाग यह पता लगाएगा कि रेस्क्यू टीम के पहुंचने में देरी क्यों हुई और भविष्य में ऐसी घटनाओं से बचने के लिए क्या सुधार किए जा सकते हैं।

    सोशल मीडिया पर उठे कई सवाल

    घटना का वीडियो सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर लोगों ने प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए। कई लोगों ने पूछा कि जब समय रहते सूचना मिल गई थी तो बचाव अभियान तुरंत क्यों शुरू नहीं किया गया। कुछ यूजर्स का कहना था कि यदि कुछ समय के लिए बिजली आपूर्ति रोक दी जाती तो शायद भालू की जान बचाई जा सकती थी।

    वहीं, कई लोगों ने यह भी कहा कि ऐसी घटनाओं के दौरान लोगों को वीडियो बनाने के बजाय सुरक्षित दूरी बनाए रखनी चाहिए, ताकि रेस्क्यू टीम बिना बाधा के अपना काम कर सके।

    बढ़ रहा इंसानों और वन्यजीवों का सामना

    विशेषज्ञों के अनुसार, अमेरिका के कई इलाकों में जंगलों के सिकुड़ने और आबादी बढ़ने के कारण भालू जैसे वन्यजीव अक्सर रिहायशी क्षेत्रों या बिजली के ढांचों तक पहुंच जाते हैं। इससे न केवल जानवरों की जान खतरे में पड़ती है, बल्कि लोगों की सुरक्षा भी प्रभावित हो सकती है।

    यह घटना एक बार फिर याद दिलाती है कि वन्यजीवों से जुड़ी आपात स्थिति में समय पर रेस्क्यू, एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय और आम लोगों का जिम्मेदार व्यवहार किसी भी जीवन को बचाने में अहम भूमिका निभा सकता है।

  • मध्य पूर्व में बढ़ा तनाव ट्रंप का बड़ा दावा ईरान के पास समझौते के अलावा कोई विकल्प नहीं अमेरिका पूरी तरह तैयार

    मध्य पूर्व में बढ़ा तनाव ट्रंप का बड़ा दावा ईरान के पास समझौते के अलावा कोई विकल्प नहीं अमेरिका पूरी तरह तैयार


    नई दिल्ली। अमेरिका और ईरान के बीच एक बार फिर तनाव गहराता दिखाई दे रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने साफ शब्दों में कहा है कि ईरान के पास समझौते के अलावा अब कोई दूसरा विकल्प नहीं बचा है। उन्होंने दावा किया कि अमेरिका किसी भी संभावित सैन्य कार्रवाई के लिए पूरी तरह तैयार है लेकिन उनकी पहली प्राथमिकता अब भी कूटनीतिक समाधान और बातचीत ही है। ट्रंप के इस बयान ने एक बार फिर मध्य पूर्व की सुरक्षा और वैश्विक राजनीति को लेकर नई चर्चाओं को जन्म दे दिया है।

    व्हाइट हाउस में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान ट्रंप ने कहा कि अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत जारी है और वाशिंगटन हर परिस्थिति के लिए तैयार है। उन्होंने कहा कि यदि जरूरत पड़ी तो मौजूदा सैन्य अभियान को और तेज किया जा सकता है लेकिन अगर ईरान अपने परमाणु कार्यक्रम को छोड़ने पर सहमत हो जाता है तो बातचीत के जरिए समाधान निकालना सबसे बेहतर रास्ता होगा। उनके मुताबिक अमेरिका की नीति स्पष्ट है कि ईरान को किसी भी कीमत पर परमाणु हथियार हासिल नहीं करने दिए जाएंगे।

    ट्रंप ने कहा कि फिलहाल दो रास्ते खुले हैं। पहला रास्ता सैन्य कार्रवाई का है जिसमें अमेरिका अपनी ताकत का इस्तेमाल कर सकता है जबकि दूसरा रास्ता बातचीत और समझौते का है। उन्होंने दावा किया कि ईरान पहले की तुलना में अब ज्यादा गंभीरता से वार्ता कर रहा है हालांकि उन्होंने यह भी माना कि किसी अंतिम समझौते की अभी कोई गारंटी नहीं है। उनके अनुसार हालात लगातार बदल रहे हैं और आने वाले समय में तस्वीर और साफ होगी।

    अमेरिकी राष्ट्रपति ने यह भी कहा कि यदि ईरान ने परमाणु हथियार विकसित करने की दिशा में कोई कदम बढ़ाया तो अमेरिका पहले से कहीं अधिक कड़ी कार्रवाई करेगा। उन्होंने इसे अमेरिका की राष्ट्रीय सुरक्षा और उसके सहयोगी देशों की सुरक्षा से जुड़ा महत्वपूर्ण मुद्दा बताया। ट्रंप का कहना था कि अमेरिका इस मामले में किसी भी तरह का जोखिम उठाने के लिए तैयार नहीं है।

    उन्होंने जानकारी दी कि उपराष्ट्रपति जेडी वेंस विदेश मंत्री मार्को रुबियो और प्रशासन के कई वरिष्ठ अधिकारी ईरानी प्रतिनिधियों के साथ लगातार संपर्क में हैं। ट्रंप के मुताबिक कूटनीतिक प्रयास जारी हैं और अमेरिका बातचीत के सभी विकल्प खुले रखना चाहता है। हालांकि उन्होंने यह भी दोहराया कि यदि वार्ता विफल होती है तो सैन्य विकल्प पूरी तरह तैयार रहेगा।

    अपने संबोधन में ट्रंप ने दावा किया कि अमेरिका की पिछली सैन्य कार्रवाइयों से ईरान की सैन्य क्षमता को बड़ा नुकसान पहुंचा है। उन्होंने कहा कि ईरान के कई अहम सैन्य और रणनीतिक ठिकानों को निशाना बनाया गया जिससे उसकी ताकत काफी कमजोर हुई है। ट्रंप ने यह भी कहा कि अमेरिका के दबाव अभियान ने पूरे क्षेत्र का रणनीतिक संतुलन बदल दिया है और अब ईरान पहले जैसी स्थिति में नहीं है।

    रूस और चीन की संभावित भूमिका पर पूछे गए सवाल के जवाब में ट्रंप ने कहा कि दोनों देशों ने फिलहाल किसी बड़े स्तर पर ईरान के समर्थन में हस्तक्षेप नहीं किया है। उन्होंने दावा किया कि चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने उन्हें भरोसा दिलाया है कि वे इस विवाद में सीधे तौर पर शामिल नहीं होंगे। हालांकि उन्होंने स्वीकार किया कि ईरान के इन दोनों देशों के साथ लंबे समय से संबंध रहे हैं।

    ट्रंप ने अपने पिछले सैन्य अभियानों का बचाव करते हुए कहा कि इन्हीं कदमों की वजह से ईरान परमाणु हथियार हासिल करने में सफल नहीं हो पाया। उन्होंने यह भी दावा किया कि यदि अमेरिका ने समय रहते कार्रवाई नहीं की होती तो क्षेत्र की सुरक्षा स्थिति कहीं अधिक गंभीर हो सकती थी। उनके अनुसार अमेरिका का उद्देश्य युद्ध नहीं बल्कि स्थायी शांति और क्षेत्रीय स्थिरता सुनिश्चित करना है।

    दूसरी ओर ईरान लगातार यह कहता रहा है कि उसका परमाणु कार्यक्रम पूरी तरह शांतिपूर्ण उद्देश्यों के लिए है और उसका मकसद परमाणु हथियार बनाना नहीं है। इसके बावजूद अमेरिका और कई पश्चिमी देश लंबे समय से ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर चिंता जताते रहे हैं। ऐसे में आने वाले दिनों में दोनों देशों के बीच जारी बातचीत और संभावित समझौता पूरी दुनिया की नजरों का केंद्र बना रहेगा।