Category: International

  • एलन मस्क की बड़ी कामयाबी स्टारशिप की सफल उड़ान से नासा के चंद्र मिशन और मंगल अभियान को मिली नई रफ्तार

    एलन मस्क की बड़ी कामयाबी स्टारशिप की सफल उड़ान से नासा के चंद्र मिशन और मंगल अभियान को मिली नई रफ्तार


    नई दिल्ली। स्पेसएक्स ने एक बार फिर अंतरिक्ष विज्ञान की दुनिया में बड़ी उपलब्धि हासिल करते हुए दुनिया के सबसे बड़े और सबसे शक्तिशाली रॉकेट स्टारशिप की 13वीं परीक्षण उड़ान को सफलतापूर्वक पूरा कर लिया है। इस मिशन की सबसे खास बात यह रही कि पहली बार स्टारशिप के जरिए कंपनी ने अपने 20 सबसे उन्नत स्टारलिंक इंटरनेट उपग्रहों को अंतरिक्ष में सफलतापूर्वक तैनात किया। इस सफलता को केवल स्पेसएक्स ही नहीं बल्कि वैश्विक अंतरिक्ष उद्योग और नासा के भविष्य के चंद्र अभियानों के लिए भी बेहद अहम माना जा रहा है। अब यह मिशन इस बात का संकेत दे रहा है कि इंसानों को दोबारा चंद्रमा पर भेजने और भविष्य में मंगल ग्रह तक पहुंचाने का सपना तेजी से वास्तविकता के करीब पहुंच रहा है।

    करीब 407 फीट ऊंचे विशालकाय स्टारशिप रॉकेट ने टेक्सास स्थित स्पेसएक्स के स्टारबेस लॉन्च साइट से उड़ान भरी। इससे पहले इंजन में तकनीकी खराबी और खराब मौसम के कारण मिशन को दो बार स्थगित करना पड़ा था लेकिन इस बार मौसम और तकनीकी व्यवस्था दोनों ने साथ दिया और रॉकेट ने सफल उड़ान भरी। लॉन्च के शुरुआती चरण में सभी इंजन पूरी तरह सामान्य तरीके से संचालित हुए जिससे मिशन ने मजबूती के साथ अपनी शुरुआत की।

    हालांकि उड़ान के दौरान पहले चरण यानी बूस्टर की वापसी पूरी तरह योजना के मुताबिक नहीं हो सकी। वापसी के समय सभी इंजन दोबारा सक्रिय नहीं हो पाए जिसके कारण बूस्टर नियंत्रित लैंडिंग करने के बजाय मैक्सिको की खाड़ी में गिर गया। इसके बावजूद मिशन का मुख्य उद्देश्य पूरी तरह सफल रहा क्योंकि बूस्टर से अलग होने के बाद स्टारशिप निर्धारित ऊंचाई तक पहुंचा और लगभग 200 किलोमीटर की ऊंचाई पर एक के बाद एक सभी 20 अत्याधुनिक स्टारलिंक उपग्रहों को सफलतापूर्वक अंतरिक्ष में स्थापित कर दिया।

    करीब एक घंटे की उड़ान पूरी करने के बाद स्टारशिप भारतीय महासागर में सुरक्षित स्प्लैशडाउन करने में भी सफल रहा। खास बात यह रही कि पानी में उतरने के बाद अंतरिक्ष यान कुछ समय तक सतह पर तैरता रहा जिससे इंजीनियरों को कई महत्वपूर्ण तकनीकी जानकारियां जुटाने का अवसर मिला। इस सफलता के बाद स्पेसएक्स के वैज्ञानिकों और इंजीनियरों ने इसे कंपनी के लिए बड़ी तकनीकी उपलब्धि बताया।

    इस मिशन में भेजे गए नए स्टारलिंक उपग्रहों ने अंतरिक्ष में पहले से मौजूद उपग्रहों के साथ लेजर तकनीक के जरिए सफल संपर्क स्थापित किया। इससे भविष्य में इंटरनेट सेवा की गति और गुणवत्ता को और बेहतर बनाने में मदद मिलेगी। वर्तमान में स्पेसएक्स के दस हजार से अधिक स्टारलिंक उपग्रह दुनिया के कई देशों में हाई स्पीड इंटरनेट सेवा उपलब्ध करा रहे हैं और यह दुनिया का सबसे बड़ा सैटेलाइट नेटवर्क बन चुका है।

    मिशन के दौरान वैज्ञानिकों ने स्टारशिप की हीट शील्ड का भी महत्वपूर्ण परीक्षण किया। कुछ उपग्रहों पर लगाए गए कैमरों ने पृथ्वी के वायुमंडल में दोबारा प्रवेश के दौरान हीट शील्ड की तस्वीरें भेजीं जबकि सेंसरों के जरिए अत्यधिक तापमान और दबाव से जुड़े आंकड़े जुटाए गए। इन जानकारियों का उपयोग भविष्य के मानव मिशनों को और अधिक सुरक्षित बनाने में किया जाएगा।

    यह मिशन नासा के लिए भी बेहद महत्वपूर्ण है क्योंकि आने वाले आर्टेमिस तृतीय अभियान में इसी स्टारशिप का उपयोग अंतरिक्ष यात्रियों को चंद्रमा की सतह तक पहुंचाने के लिए किया जाना है। दूसरी ओर एलन मस्क का सबसे बड़ा सपना स्टारशिप के जरिए इंसानों को मंगल ग्रह तक पहुंचाना और वहां भविष्य में मानव बस्ती बसाना है। ऐसे में स्टारशिप की यह सफल परीक्षण उड़ान अंतरिक्ष अन्वेषण के नए युग की दिशा में एक और मजबूत कदम मानी जा रही है।

  • PAK: आतंकियों ने विस्फोटक से भरी गाड़ी सुरक्षा चौकी से टकराई, 12 सैनिकों समेत 15 की मौत

    PAK: आतंकियों ने विस्फोटक से भरी गाड़ी सुरक्षा चौकी से टकराई, 12 सैनिकों समेत 15 की मौत


    इस्लामाबाद ।
    पाकिस्तानी सेना (Pakistan Army) ने शुक्रवार (24 जुलाई) को बताया कि उत्तर-पश्चिमी पाकिस्तान (North-western Pakistan) में इस्लामी आतंकवादियों (Islamic Terrorists) ने विस्फोटकों से भरी एक गाड़ी को सुरक्षा चौकी से टकरा दिया. इस हमले में 12 सैनिकों समेत 15 लोगों की मौत हो गई. रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, सेना ने बताया कि जवाबी कार्रवाई में 12 आतंकवादी भी मारे गए।

    सेना और पुलिस की ओर से ज्वाइंट रूप से संचालित इस चौकी पर हमला गुरुवार और शुक्रवार की दरमियानी रात अफगानिस्तान की सीमा के पास टैंक जिले में हुआ. यह इलाका लंबे समय से इस्लामी आतंकवादियों का गढ़ रहा है।

    आतंकवाद के गढ़ के तौर पर जाने जाने वाले पाकिस्तान के उत्तर-पश्चिमी हिस्से में हाल के महीनों में आतंकी गतिविधियों के मामले काफी बढ़े हैं. सेना की ओर से जारी बयान में बताया गया कि सुरक्षाबलों ने आतंकवादियों का मुकाबला किया. जब आतंकवादी चौकी की सुरक्षा को भेदने में नाकाम रहे तो उन्होंने विस्फोटकों से भरी गाड़ी को चौकी की बाहरी दीवार से टकरा दिया।

    स्थानीय तालिबान आतंकवादियों यानी तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान ने हमले की जिम्मेदारी ली है. संगठन ने एक बयान जारी कर दावा किया कि हमले में चार आत्मघाती हमलावर शामिल थे. TTP लंबे समय से पाकिस्तानी सरकार के खिलाफ लड़ाई लड़ रहा है.

    अफगानिस्तान पर लगाता रहा है आरोप
    पाकिस्तान लंबे समय से आरोप लगाता रहा है कि आतंकवादी अफगानिस्तान में मौजूद सुरक्षित ठिकानों का इस्तेमाल ट्रेनिंग लेने और पाकिस्तान में हमलों की योजना बनाने के लिए करते हैं. दूसरी तरफ अफगानिस्तान इन आरोपों से इनकार करता रहा है. अफगानिस्तान का कहना है कि आतंकवाद पाकिस्तान की घरेलू समस्या है. तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान 2007 से पाकिस्तानी सरकार के खिलाफ विद्रोह कर रहा है. संगठन का उद्देश्य सरकार को उखाड़ फेंकना और इस्लामी कानून लागू करना है.

  • ट्रंप बोले- US के खिलाफ जंग में ईरान की मदद नहीं करेंगे चीन-रूस… चेतावनी भी दी

    ट्रंप बोले- US के खिलाफ जंग में ईरान की मदद नहीं करेंगे चीन-रूस… चेतावनी भी दी


    वाशिंगटन।
    अमेरिका और ईरान (America and Iran) के बीच संघर्ष जारी है. इस बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (American President Donald Trump) ने कहा कि उन्हें भरोसा है कि चीन और रूस इस संघर्ष में ईरान की मदद नहीं करेंगे. हालांकि, उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि अगर दोनों देश इसमें शामिल होते हैं, तो इसके गंभीर परिणाम होंगे।

    डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि बीजिंग में हाल ही में हुई मुलाकात के दौरान चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग (Chinese President Xi Jinping) ने उन्हें भरोसा दिलाया था कि चीन ईरान को हथियार नहीं देगा या बेचेगा, और न ही चीनी कंपनियों के जरिए ऐसा किया जाएगा. उन्होंने आगे कहा कि रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन (Russian President Vladimir Putin) ने भी उनसे कहा था कि रूस तेहरान को हथियार नहीं बेचेगा।

    व्हाइट हाउस में पत्रकारों से बात करते हुए ट्रंप ने कहा, ‘मुझे लगता है कि मैं उन पर भरोसा करता हूं.’ उन्होंने कहा कि उन्हें नहीं लगता कि दोनों में से कोई भी देश इस टकराव में ईरान की मदद कर रहा है।

    रॉयटर्स के अनुसार, ट्रंप की यह टिप्पणी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ के सांसदों को यह बताने के कुछ दिनों बाद आई है कि रूस और चीन ऐसे मामलों में शामिल थे, जो ईरान की कुछ गतिविधियों को बढ़ावा दे रहे थे. हालांकि उन्होंने इस बारे में कोई और जानकारी नहीं दी।

    बताया जा रहा है कि गल्फ में CIA के ठिकानों पर हुए ईरानी हमलों के बाद अमेरिकी खुफिया एजेंसियां इस बात की भी जांच कर रही हैं कि क्या रूस ने टारगेटिंग इंफॉर्मेशन या ड्रोन तकनीक के जरिए ईरान की मदद की है. हालांकि, क्रेमलिन ने इस रिपोर्ट पर कोई भी कमेंट करने से इनकार कर दिया है।

  • EU पर ट्रंप का बड़ा वार, व्यापारिक नीतियों की जांच के आदेश, बोले- 'अमेरिका यूरोप की गुल्लक नहीं'

    EU पर ट्रंप का बड़ा वार, व्यापारिक नीतियों की जांच के आदेश, बोले- 'अमेरिका यूरोप की गुल्लक नहीं'


    वॉशिंगटन। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने यूरोपीय संघ (EU) की व्यापारिक नीतियों की औपचारिक जांच शुरू करने का ऐलान किया है। ट्रंप का आरोप है कि यूरोपीय संघ ने गूगल, एप्पल, मेटा और अमेजन जैसी अमेरिकी टेक कंपनियों पर अरबों डॉलर के जुर्माने लगाकर उनके साथ भेदभावपूर्ण व्यवहार किया है।

    यह फैसला ऐसे समय आया है, जब एक दिन पहले ही यूरोपीय संघ ने डिजिटल प्रतिस्पर्धा (एंटीट्रस्ट) नियमों के उल्लंघन के मामले में गूगल पर 89 करोड़ यूरो (करीब एक अरब डॉलर) का जुर्माना लगाया था। ईयू का आरोप है कि गूगल ने अपने प्ले स्टोर और सर्च इंजन के जरिए अपनी सेवाओं और ऐप्स को प्राथमिकता देकर निष्पक्ष प्रतिस्पर्धा को प्रभावित किया।

    ‘अमेरिका किसी का गुल्लक नहीं’
    डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया पर जारी एक पोस्ट में कहा कि उन्होंने पहले भी यूरोपीय संघ को अमेरिकी कंपनियों पर भारी जुर्माना लगाने को लेकर चेतावनी दी थी। उन्होंने कहा, “अमेरिका यूरोप की गुल्लक नहीं है। हम अपनी कंपनियों को लूटने नहीं देंगे।”

    ट्रंप ने आरोप लगाया कि यूरोपीय संघ का रवैया “अवैध और अनैतिक” है और इसके लिए उसे बड़ी कीमत चुकानी पड़ेगी। उन्होंने यह भी दावा किया कि अमेरिकी कंपनियों से वसूले गए जुर्माने अंततः वापस लिए जाएंगे।

    टैरिफ बढ़ाने के भी दिए संकेत
    अमेरिकी राष्ट्रपति ने संकेत दिए कि उनकी सरकार जल्द ही यूरोपीय संघ से आयात होने वाले उत्पादों पर भारी टैरिफ लगाने की दिशा में भी कदम उठा सकती है। उनका कहना है कि अमेरिकी कारोबारों के हितों की रक्षा के लिए आवश्यक सभी विकल्पों पर विचार किया जाएगा।

    पहले भी बढ़ाए जा चुके हैं आयात शुल्क
    ट्रंप की यह घोषणा ऐसे समय हुई है, जब व्हाइट हाउस हाल ही में 60 से अधिक देशों से आने वाले आयातित उत्पादों पर दोहरे अंकों वाले नए टैरिफ लागू करने का ऐलान कर चुका है। अमेरिका का आरोप है कि कई देश जबरन श्रम (Forced Labour) से बने उत्पादों पर प्रतिबंधों को प्रभावी ढंग से लागू नहीं कर रहे हैं।

    ये नए शुल्क पहले से लागू अस्थायी 10 प्रतिशत वैश्विक टैरिफ की जगह लेंगे। ट्रंप प्रशासन इन कदमों को ट्रेड एक्ट 1974 की धारा 301 के तहत आगे बढ़ा रहा है, जो अमेरिका को किसी देश की कथित अनुचित या भेदभावपूर्ण व्यापारिक नीतियों के जवाब में आयात शुल्क और अन्य व्यापारिक प्रतिबंध लगाने का अधिकार देती है।

  • ईरान-सऊदी गुप्त समझौते में पाकिस्तान की भूमिका का दावा, असीम मुनीर पर तेल कारोबार से लाभ लेने के आरोप

    ईरान-सऊदी गुप्त समझौते में पाकिस्तान की भूमिका का दावा, असीम मुनीर पर तेल कारोबार से लाभ लेने के आरोप


    नई दिल्ली । पश्चिम एशिया में जारी तनाव और ईरान-अमेरिका संघर्ष के बीच पाकिस्तान के सेना प्रमुख फील्ड मार्शल असीम मुनीर को लेकर एक अंतरराष्ट्रीय मीडिया रिपोर्ट ने नई चर्चा छेड़ दी है। रिपोर्ट में दावा किया गया है कि युद्ध के दौरान पाकिस्तान ने ईरान और सऊदी अरब के बीच एक कथित गुप्त समझौते में मध्यस्थ की भूमिका निभाई। साथ ही यह भी आरोप लगाया गया कि इस प्रक्रिया के समानांतर ईरान से पाकिस्तान तक तेल पहुंचाने वाली एक संयुक्त व्यवस्था से जुड़े कुछ लोगों को आर्थिक लाभ हुआ। हालांकि इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और पाकिस्तान, सऊदी अरब तथा ईरान में से किसी भी देश ने इस संबंध में आधिकारिक टिप्पणी नहीं की है।

    रिपोर्ट के अनुसार, यह कथित समझौता उस समय हुआ जब ईरान और अमेरिका-इजराइल के बीच सैन्य तनाव अपने शुरुआती चरण में था। दावा किया गया है कि पाकिस्तान की पहल पर सऊदी अरब और ईरान के बीच ऐसा समझौता तैयार हुआ, जिसके बाद सऊदी अरब पर ईरान की ओर से होने वाले हमलों में कमी आई। रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि इस प्रक्रिया के दौरान ईरान से पाकिस्तान तक तेल पहुंचाने वाले एक संयुक्त तेल परिवहन नेटवर्क को जारी रखने पर सहमति बनी, जिससे जुड़े पक्षों को आर्थिक लाभ मिला।

    रिपोर्ट में यह आरोप भी लगाया गया कि इस कथित तेल परिवहन व्यवस्था का संचालन ऐसे समय में जारी रहा, जब ईरान पर अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंध और दबाव बढ़ा हुआ था। दावा किया गया कि यह नेटवर्क ईरान के तेल निर्यात को वैकल्पिक मार्ग उपलब्ध कराने में सहायक बना। हालांकि इन आरोपों के समर्थन में किसी आधिकारिक जांच या सार्वजनिक दस्तावेज का उल्लेख सामने नहीं आया है।

    रिपोर्ट के मुताबिक, कुछ क्षेत्रीय अधिकारियों और कूटनीतिक सूत्रों का कहना है कि समझौते के बाद सऊदी अरब पर हमलों में उल्लेखनीय कमी देखी गई। बाद में एक मिसाइल हमले के बाद पाकिस्तान की ओर से कथित तौर पर ईरानी पक्ष को चेतावनी दिए जाने का भी दावा किया गया है। हालांकि इन घटनाओं की भी स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध नहीं है और संबंधित देशों ने इस पर सार्वजनिक रूप से कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है।

    विश्लेषकों का मानना है कि पाकिस्तान और सऊदी अरब के बीच लंबे समय से रक्षा और सुरक्षा सहयोग मौजूद है। दोनों देशों के बीच रणनीतिक संबंध क्षेत्रीय सुरक्षा व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा माने जाते हैं। दूसरी ओर, पाकिस्तान ने हाल के वर्षों में ईरान के साथ भी संबंधों को संतुलित बनाए रखने की कोशिश की है। ऐसे में यदि किसी प्रकार की मध्यस्थता हुई भी हो, तो उसका उद्देश्य क्षेत्रीय तनाव कम करना बताया जा सकता है। हालांकि रिपोर्ट में लगाए गए आर्थिक लाभ और तेल कारोबार से जुड़े आरोपों पर अभी तक कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।

    कुछ कूटनीतिक विशेषज्ञों ने यह भी आशंका जताई है कि यदि इस तरह के अनौपचारिक समझौते वास्तव में हुए हों, तो वे क्षेत्रीय शक्ति संतुलन और ऊर्जा सुरक्षा पर दीर्घकालिक प्रभाव डाल सकते हैं। वहीं आलोचकों का कहना है कि ऐसे समझौते भविष्य में अन्य देशों के लिए भी जटिल कूटनीतिक परिस्थितियां पैदा कर सकते हैं।

    फिलहाल यह मामला मीडिया रिपोर्टों और कूटनीतिक चर्चाओं तक सीमित है। पाकिस्तान, ईरान और सऊदी अरब की ओर से आधिकारिक प्रतिक्रिया आने के बाद ही इन दावों की स्थिति अधिक स्पष्ट हो सकेगी। ऐसे में इस पूरे घटनाक्रम को लेकर किसी ठोस निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले आधिकारिक पुष्टि और स्वतंत्र जांच के निष्कर्षों का इंतजार करना आवश्यक माना जा रहा है।

  • लंदन के फाइव स्टार होटल में सऊदी राजकुमार की मौत का खुलासा, शराब-ड्रग्स और दवाओं के घातक मिश्रण ने ली जान

    लंदन के फाइव स्टार होटल में सऊदी राजकुमार की मौत का खुलासा, शराब-ड्रग्स और दवाओं के घातक मिश्रण ने ली जान


    नई दिल्ली ।
    लंदन के एक प्रतिष्ठित होटल में पिछले वर्ष मृत पाए गए 29 वर्षीय सऊदी राजकुमार की मौत को लेकर आठ महीने बाद हुई आधिकारिक जांच में महत्वपूर्ण तथ्य सामने आए हैं। जांच में निष्कर्ष निकाला गया कि अत्यधिक शराब, पार्टी में इस्तेमाल होने वाले नशीले पदार्थ और चिंता व अवसाद की दवाओं के संयुक्त प्रभाव के कारण उन्हें घातक हृदय संबंधी समस्या हुई, जिससे उनकी मृत्यु हो गई। इस खुलासे ने एक बार फिर नशीले पदार्थों और दवाओं के अनियंत्रित सेवन से जुड़े गंभीर स्वास्थ्य जोखिमों पर ध्यान केंद्रित कर दिया है।

    मृतक की पहचान अब्दुल्ला बिन फहद बिन अब्दुल्ला बिन अब्दुलअजीज बिन जलावी अल सऊद के रूप में हुई है। वह पिछले वर्ष 19 नवंबर को एक सप्ताह के लिए लंदन के केंसिंग्टन स्थित एक लग्जरी होटल में ठहरे थे। जांच के अनुसार, मौत से एक शाम पहले उन्हें होटल के बाहर धूम्रपान करते हुए सीसीटीवी कैमरों में देखा गया था। इसके बाद वह अपने कमरे में लौटे और फिर सार्वजनिक रूप से दिखाई नहीं दिए।

    कुछ समय बाद जब होटल के एक कर्मचारी ने कमरे की सफाई के लिए प्रवेश किया, तो राजकुमार बाथरूम के फर्श पर अचेत अवस्था में मिले। होटल प्रबंधन ने तुरंत सुरक्षा कर्मियों और आपातकालीन चिकित्सा सेवा को सूचना दी। चिकित्सकीय टीम ने उन्हें बचाने का प्रयास किया, लेकिन मौके पर ही उन्हें मृत घोषित कर दिया गया। इसके बाद मामले की विस्तृत फोरेंसिक और टॉक्सिकोलॉजी जांच शुरू की गई।

    आधिकारिक जांच में सामने आया कि राजकुमार के रक्त में शराब की मात्रा सामान्य कानूनी सीमा से कई गुना अधिक थी। रिपोर्ट के अनुसार, उनके शरीर में गामा-हाइड्रॉक्सीब्यूटायरेट (जीएचबी) नामक नशीले पदार्थ की भी खतरनाक मात्रा मौजूद थी, जिसे अक्सर पार्टी ड्रग के रूप में जाना जाता है। इसके अलावा शरीर में कैनबिस के अंश, अल्प्राजोलम सहित चिंता कम करने वाली दवाओं और अन्य चिकित्सीय दवाओं के तत्व भी पाए गए। विशेषज्ञों ने बताया कि इन सभी पदार्थों का संयुक्त प्रभाव हृदय और श्वसन प्रणाली पर गंभीर असर डाल सकता है।

    जांच अधिकारियों ने माना कि अलग-अलग पदार्थों का यह मिश्रण शरीर के लिए अत्यंत खतरनाक साबित हुआ। रिपोर्ट के अनुसार, शराब और केंद्रीय तंत्रिका तंत्र को प्रभावित करने वाली दवाओं तथा नशीले पदार्थों के एक साथ सेवन से शरीर की सामान्य कार्यप्रणाली बुरी तरह प्रभावित हो सकती है। इसी कारण राजकुमार को अचानक हृदय संबंधी गंभीर समस्या हुई, जिसने उनकी जान ले ली।

    ब्रिटेन में हुई न्यायिक जांच के दौरान उपलब्ध फोरेंसिक साक्ष्यों, चिकित्सकीय रिपोर्ट और घटनास्थल से जुटाए गए तथ्यों का विस्तार से परीक्षण किया गया। जांच में किसी अन्य व्यक्ति की संलिप्तता या आपराधिक गतिविधि के संकेत नहीं मिले। उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर निष्कर्ष निकाला गया कि यह मृत्यु नशीले पदार्थों, शराब और दवाओं के संयुक्त प्रभाव से हुई एक दुर्घटनात्मक घटना थी।

    यह मामला दुनियाभर में इसलिए भी चर्चा का विषय बना क्योंकि इसमें एक शाही परिवार के सदस्य की असामयिक मृत्यु शामिल थी। साथ ही यह घटना इस बात की भी गंभीर चेतावनी है कि चिकित्सकीय दवाओं का बिना उचित निगरानी के शराब या अन्य नशीले पदार्थों के साथ सेवन जानलेवा परिणाम पैदा कर सकता है। विशेषज्ञ लगातार आगाह करते रहे हैं कि ऐसी परिस्थितियों में शरीर की प्रतिक्रिया अप्रत्याशित और अत्यंत घातक हो सकती है, इसलिए दवाओं का उपयोग हमेशा चिकित्सकीय सलाह के अनुरूप ही किया जाना चाहिए।

  • नेपाल के पीएम बालेन शाह ने बदला रुख, भारत और चीन के राजदूतों से अलग-अलग मुलाकात कर कूटनीतिक संतुलन का दिया संकेत

    नेपाल के पीएम बालेन शाह ने बदला रुख, भारत और चीन के राजदूतों से अलग-अलग मुलाकात कर कूटनीतिक संतुलन का दिया संकेत

    नई दिल्ली । नेपाल के प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह, जिन्हें बालेन शाह के नाम से जाना जाता है, अपने कार्यकाल के शुरुआती महीनों में अपनाई गई एक महत्वपूर्ण कूटनीतिक नीति में बदलाव करने जा रहे हैं। प्रधानमंत्री बनने के बाद उन्होंने यह स्पष्ट किया था कि वह किसी भी विदेशी राजदूत से व्यक्तिगत रूप से मुलाकात नहीं करेंगे और सभी आधिकारिक संपर्क विदेश मंत्रालय की निर्धारित प्रक्रिया या समूह बैठकों के माध्यम से ही होंगे। अब पहली बार वह इस नीति से हटते हुए भारत और चीन के राजदूतों से अलग-अलग मुलाकात करने की तैयारी में हैं। इसे नेपाल की संतुलित विदेश नीति और बदलती कूटनीतिक आवश्यकताओं का संकेत माना जा रहा है।

    जानकारी के अनुसार, भारत के राजदूत नवीन श्रीवास्तव और चीन के राजदूत झांग माओमिंग से प्रधानमंत्री की अलग-अलग बैठकें एक ही दिन आयोजित की जाएंगी। दोनों बैठकों का उद्देश्य यह संदेश देना है कि नेपाल अपने दोनों प्रमुख पड़ोसी देशों के साथ समान महत्व और संतुलित संबंध बनाए रखना चाहता है। सरकार की ओर से इन बैठकों की पुष्टि की गई है, हालांकि उनकी अंतिम तिथि सार्वजनिक नहीं की गई है। विदेश मंत्रालय इन मुलाकातों की तैयारियों में जुटा हुआ है।

    प्रधानमंत्री बनने के बाद बालेन शाह ने पारंपरिक व्यवस्था में बदलाव करते हुए एक नया कूटनीतिक प्रोटोकॉल लागू किया था। इसके तहत उन्होंने तय किया कि वह केवल किसी देश के राष्ट्राध्यक्ष, प्रधानमंत्री या विदेश मंत्री स्तर के प्रतिनिधियों से ही व्यक्तिगत बैठक करेंगे। राजदूतों, उप-मंत्रियों या अन्य अधिकारियों से मुलाकात विदेश मंत्रालय की मौजूदगी में या समूह स्तर पर ही होगी। उनका मानना था कि विदेश नीति व्यक्तिगत संपर्कों के बजाय संस्थागत व्यवस्था के तहत संचालित होनी चाहिए और इससे पारदर्शिता भी बढ़ेगी।

    नेपाल में लंबे समय से यह परंपरा रही थी कि प्रभावशाली देशों के राजदूत सीधे प्रधानमंत्री से व्यक्तिगत मुलाकात करते थे। कई बार इन बैठकों का कोई औपचारिक रिकॉर्ड भी नहीं रखा जाता था। विशेषज्ञों का मानना था कि ऐसी व्यवस्था से विदेश नीति पर अनौपचारिक प्रभाव बढ़ सकता है और राष्ट्रीय हित प्रभावित हो सकते हैं। इसी सोच के आधार पर बालेन शाह ने नई व्यवस्था लागू की थी, जिसके चलते कई विदेशी प्रतिनिधियों के साथ प्रस्तावित व्यक्तिगत मुलाकातें नहीं हो सकीं।

    बताया जाता है कि उन्होंने भारत के विदेश सचिव विक्रम मिस्री, अमेरिका के वरिष्ठ अधिकारियों तथा चीन के कुछ उच्च प्रतिनिधियों से भी व्यक्तिगत मुलाकात नहीं की थी। हालांकि एशियाई विकास बैंक के अध्यक्ष मसातो कांडा के साथ उनकी एकल बैठक को विशेष परिस्थिति में अपवाद माना गया था। इन घटनाओं ने उनकी नई कार्यशैली को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी चर्चा पैदा की थी।

    अब प्रधानमंत्री के रूप में कुछ महीनों के अनुभव के बाद बालेन शाह का रुख अधिक व्यावहारिक दिखाई दे रहा है। नेपाल की भौगोलिक, आर्थिक और रणनीतिक स्थिति को देखते हुए भारत और चीन दोनों के साथ नियमित एवं प्रत्यक्ष संवाद बनाए रखना सरकार की प्राथमिकता बन गया है। ऐसे में व्यक्तिगत स्तर पर संवाद को पूरी तरह सीमित रखने की नीति व्यवहारिक चुनौतियां पैदा कर रही थी। यही कारण माना जा रहा है कि उन्होंने पहली बार अपने पुराने निर्णय में बदलाव करने का फैसला लिया है।

    नेपाल की विदेश नीति लंबे समय से भारत और चीन के बीच संतुलन बनाए रखने पर आधारित रही है। भारत नेपाल का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है और दोनों देशों के बीच खुली सीमा, सांस्कृतिक संबंध तथा लोगों के बीच गहरे सामाजिक जुड़ाव हैं। दूसरी ओर चीन ने हाल के वर्षों में नेपाल के बुनियादी ढांचे, ऊर्जा और परिवहन परियोजनाओं में बड़े निवेश किए हैं। ऐसे में दोनों देशों के साथ समान दूरी और समान निकटता बनाए रखना काठमांडू की कूटनीतिक रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है। बालेन शाह का यह नया कदम भी इसी संतुलन को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल के रूप में देखा जा रहा है।

  • यरुशलम में भारतीय प्रवासी की हत्या से सनसनी, इजराइली संदिग्ध गिरफ्तार; दुनिया भर में कई अहम घटनाक्रमों पर नजर

    यरुशलम में भारतीय प्रवासी की हत्या से सनसनी, इजराइली संदिग्ध गिरफ्तार; दुनिया भर में कई अहम घटनाक्रमों पर नजर

    नई दिल्ली । इजराइल के यरुशलम शहर में एक भारतीय प्रवासी की हत्या का मामला सामने आने के बाद स्थानीय पुलिस ने एक इजराइली नागरिक को गिरफ्तार किया है। शुरुआती जांच में घटना को आपराधिक प्रकृति का माना जा रहा है। इस बीच यूरोप और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी कई महत्वपूर्ण घटनाक्रम सामने आए हैं, जिनमें सऊदी शाही परिवार से जुड़ा मामला, ऑस्ट्रिया में ऐतिहासिक इमारत का नया उपयोग, स्विट्जरलैंड में एक वरिष्ठ नेता पर गंभीर आरोप और अंतरराष्ट्रीय अपराध न्यायालय से जुड़ा अहम फैसला शामिल है।

    यरुशलम के कटामोन इलाके में गुरुवार को 40 वर्षीय भारतीय प्रवासी कामगार का शव एक मकान के भीतर मिला। पुलिस के अनुसार शव फर्श पर पड़ा था और घटनास्थल पर बड़ी मात्रा में खून मिला। मामले की सूचना मिलने के बाद जांच एजेंसियां तुरंत मौके पर पहुंचीं और साक्ष्य जुटाने का काम शुरू किया गया। पुलिस ने हत्या के संदेह में 31 वर्षीय एक इजराइली नागरिक को हिरासत में लिया है। फिलहाल मृतक और आरोपी की पहचान सार्वजनिक नहीं की गई है। वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों ने घटनास्थल का निरीक्षण कर विस्तृत जांच के निर्देश दिए हैं।

    उधर ब्रिटेन की राजधानी लंदन में सऊदी शाही परिवार के 29 वर्षीय राजकुमार अब्दुल्ला बिन फहद बिन अब्दुल्ला बिन अब्दुलअजीज बिन जलावी अल सऊद की मौत की जांच पूरी हो गई है। अदालत में पेश रिपोर्ट के अनुसार उनकी मृत्यु अत्यधिक शराब, पार्टी ड्रग और प्रिस्क्रिप्शन दवाओं के संयुक्त प्रभाव से कार्डियक अरेस्ट होने के कारण हुई। जांच में इस घटना को ‘मिसएडवेंचर’ यानी अनजाने में हुई घातक दुर्घटना माना गया और आत्महत्या के कोई प्रमाण नहीं मिले। टॉक्सिकोलॉजी रिपोर्ट में शरीर में अल्कोहल की मात्रा सामान्य कानूनी सीमा से कई गुना अधिक पाई गई।

    ऑस्ट्रिया में एडॉल्फ हिटलर के जन्मस्थान के रूप में पहचानी जाने वाली ऐतिहासिक इमारत को अब पुलिस स्टेशन में बदल दिया गया है। सरकार का उद्देश्य इस स्थान को नव-नाजी समर्थकों के लिए आकर्षण का केंद्र बनने से रोकना है। वर्षों तक विवादों में रहने वाली इस इमारत को सरकार ने अपने नियंत्रण में लेकर इसका नया उपयोग तय किया। अधिकारियों का कहना है कि यह कदम इतिहास के नकारात्मक प्रतीकों को महिमामंडित होने से रोकने की दिशा में उठाया गया है।

    स्विट्जरलैंड में बाल सुरक्षा कानूनों के समर्थक रहे पूर्व दक्षिणपंथी नेता पैट्रिक फ्राई गंभीर कानूनी संकट में घिर गए हैं। उन पर नाबालिग से दुष्कर्म, महिलाओं को नशीली दवा देकर यौन शोषण करने और हत्या के प्रयास जैसे कई गंभीर आरोप लगाए गए हैं। अभियोजन पक्ष ने अदालत से उनके लिए उम्रकैद की मांग की है। जांच एजेंसियों का दावा है कि मामले से जुड़े कई डिजिटल और अन्य साक्ष्य बरामद किए गए हैं। आरोपी वर्ष 2023 से हिरासत में है और मामले की न्यायिक प्रक्रिया जारी है।

    वहीं अंतरराष्ट्रीय अपराध न्यायालय के मुख्य अभियोजक करीम खान को पद से हटाने के प्रस्ताव पर सदस्य देशों के बीच मतदान होना है। उन पर लगाए गए यौन दुराचार के आरोपों के बाद यह प्रक्रिया शुरू हुई है, हालांकि उन्होंने सभी आरोपों से इनकार किया है। सदस्य देशों के मतदान के बाद उनके भविष्य पर अंतिम फैसला लिया जाएगा। इस मुद्दे पर कई प्रमुख देशों ने उन्हें पद से हटाने के समर्थन का संकेत दिया है।

  • अमेरिका ने भारत से आयात पर 10% नया टैरिफ लागू किया, फोर्स्ड लेबर नियमों के बीच कई निर्यात क्षेत्रों पर बढ़ेगा दबाव

    अमेरिका ने भारत से आयात पर 10% नया टैरिफ लागू किया, फोर्स्ड लेबर नियमों के बीच कई निर्यात क्षेत्रों पर बढ़ेगा दबाव

    नई दिल्ली । अमेरिका ने भारत से आयात होने वाले उत्पादों पर 10 प्रतिशत अतिरिक्त टैरिफ लागू कर दिया है। यह निर्णय अमेरिकी ट्रेड एक्ट-1974 की धारा 301 के तहत लिया गया है, जिसके माध्यम से उन देशों के खिलाफ व्यापारिक कार्रवाई की जाती है जिनकी सप्लाई चेन में जबरन मजदूरी या श्रम मानकों से जुड़े गंभीर सवाल उठते हैं। यह नया टैरिफ ऐसे समय लागू हुआ है जब पहले से लागू 15 प्रतिशत अस्थायी वैश्विक टैरिफ की अवधि समाप्त हो गई। इसके साथ ही भारत के लिए नई शुल्क व्यवस्था प्रभावी हो गई है, जिससे कई निर्यात क्षेत्रों पर सीधा असर पड़ने की संभावना है।

    अमेरिका ने इस नई व्यवस्था के तहत कुल 60 देशों पर 10 से 12.5 प्रतिशत तक अतिरिक्त टैरिफ लगाया है। इनमें भारत सहित कुछ देशों को 10 प्रतिशत वाले समूह में रखा गया है, जबकि अन्य देशों पर 12.5 प्रतिशत अतिरिक्त शुल्क लागू किया गया है। अमेरिकी प्रशासन का कहना है कि जिन देशों ने फोर्स्ड लेबर से जुड़े उत्पादों पर रोक लगाने या श्रम मानकों में सुधार के लिए कदम उठाए हैं, उन्हें अपेक्षाकृत कम टैरिफ श्रेणी में रखा गया है।

    भारत के लिए राहत की बात यह रही कि प्रारंभिक प्रस्ताव में 12.5 प्रतिशत अतिरिक्त टैरिफ की बात कही गई थी, लेकिन बाद में इसे घटाकर 10 प्रतिशत कर दिया गया। अमेरिकी पक्ष का मानना है कि भारत ने श्रम मानकों, सप्लाई चेन की निगरानी और विदेशी व्यापार नीति में कुछ महत्वपूर्ण सुधार किए हैं। इन कदमों के आधार पर प्रस्तावित अतिरिक्त शुल्क में 2.5 प्रतिशत की कमी की गई। हालांकि यह स्पष्ट किया गया है कि अमेरिका भविष्य में भी इन सुधारों की निगरानी जारी रखेगा।

    अमेरिका भारत का सबसे बड़ा निर्यात बाजार माना जाता है। ऐसे में नया टैरिफ उन उद्योगों के लिए चुनौती बन सकता है जिनकी अमेरिकी बाजार पर निर्भरता अधिक है। टेक्सटाइल और गारमेंट्स, रत्न एवं आभूषण, चमड़ा उद्योग, कृषि एवं खाद्य उत्पाद, इंजीनियरिंग सामान, रसायन और विभिन्न विनिर्माण उत्पादों पर इसका सबसे अधिक प्रभाव पड़ने की आशंका जताई जा रही है। अतिरिक्त शुल्क लागू होने से भारतीय उत्पाद अमेरिकी बाजार में महंगे हो सकते हैं, जिससे प्रतिस्पर्धा बढ़ने और निर्यातकों पर कीमत कम करने का दबाव बनने की संभावना है।

    फोर्स्ड लेबर का अर्थ ऐसी मजदूरी से है जिसमें किसी व्यक्ति से उसकी इच्छा के विरुद्ध काम कराया जाता है। इसमें धमकी देना, वेतन रोकना, कर्ज के बदले काम कराने की मजबूरी, पहचान संबंधी दस्तावेज जब्त करना या नौकरी छोड़ने की स्वतंत्रता न देना जैसी स्थितियां शामिल होती हैं। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इसे मानवाधिकारों का गंभीर उल्लंघन माना जाता है और कई देश इस प्रकार के उत्पादों के आयात पर कड़ी निगरानी रखते हैं।

    अमेरिकी कानून के सेक्शन 301 के तहत सरकार को यह अधिकार प्राप्त है कि यदि किसी देश की व्यापारिक नीतियां या उत्पादन प्रणाली अमेरिकी उद्योगों के लिए अनुचित या नुकसानदायक मानी जाती हैं, तो उसके खिलाफ अतिरिक्त टैरिफ, आयात प्रतिबंध या अन्य व्यापारिक कदम उठाए जा सकते हैं। इस प्रक्रिया में जांच के बाद संबंधित देश से बातचीत भी की जाती है और उसके बाद अंतिम निर्णय लागू होता है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि भारत के लिए यह स्थिति चुनौती और अवसर दोनों लेकर आई है। यदि भारतीय उद्योग अंतरराष्ट्रीय श्रम मानकों, पारदर्शी सप्लाई चेन और गुणवत्ता मानकों को और मजबूत करते हैं, तो भविष्य में शुल्क संबंधी दबाव कम करने के साथ वैश्विक बाजारों में अपनी प्रतिस्पर्धात्मक स्थिति भी बेहतर बना सकते हैं।

  • सऊदी परमाणु समझौते पर 24 घंटे में बदला अमेरिकी रुख, ट्रम्प ने इजराइल से रिश्तों की नई शर्त जोड़कर बढ़ाई अड़चन

    सऊदी परमाणु समझौते पर 24 घंटे में बदला अमेरिकी रुख, ट्रम्प ने इजराइल से रिश्तों की नई शर्त जोड़कर बढ़ाई अड़चन

    नई दिल्ली । अमेरिका और सऊदी अरब के बीच लंबे समय से प्रस्तावित असैन्य परमाणु सहयोग समझौता एक बार फिर अनिश्चितता में घिर गया है। समझौते पर हस्ताक्षर होने के महज 24 घंटे के भीतर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने इसके लिए नई शर्त जोड़ दी। ट्रम्प ने स्पष्ट किया कि यह समझौता तभी आगे बढ़ेगा, जब सऊदी अरब अब्राहम अकॉर्ड्स में शामिल होकर इजराइल के साथ अपने राजनयिक संबंध सामान्य करेगा। इसके साथ ही उन्होंने यह भी साफ कर दिया कि सऊदी अरब को अपनी जमीन पर यूरेनियम संवर्धन की अनुमति नहीं दी जाएगी।

    यह घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है, जब दोनों देशों के बीच लगभग दो दशक से परमाणु ऊर्जा सहयोग को लेकर बातचीत चल रही थी। हाल ही में हुए हस्ताक्षर समारोह के बाद माना जा रहा था कि समझौते का रास्ता साफ हो गया है, लेकिन ट्रम्प के नए बयान ने पूरी प्रक्रिया को फिर से जटिल बना दिया। अमेरिकी प्रशासन के भीतर भी इस मुद्दे पर अलग-अलग संकेत सामने आए हैं, जिससे समझौते की दिशा को लेकर सवाल उठने लगे हैं।

    रिपोर्टों के अनुसार, वॉशिंगटन में आयोजित हस्ताक्षर समारोह में अमेरिकी ऊर्जा मंत्री की मौजूदगी में समझौते की घोषणा की गई थी। बाद में यह जानकारी सामने आई कि व्हाइट हाउस इस घोषणा के समय और प्रक्रिया से पूरी तरह संतुष्ट नहीं था। इसके बाद राष्ट्रपति ट्रम्प ने सार्वजनिक रूप से अपनी नई शर्तों का उल्लेख करते हुए स्पष्ट किया कि उनकी नीति के अनुसार क्षेत्रीय रणनीतिक सहयोग और इजराइल के साथ संबंध सामान्य करना इस समझौते का अहम हिस्सा रहेगा।

    ट्रम्प की नई घोषणा ने सऊदी अरब को भी असमंजस में डाल दिया है। पहले तैयार किए गए मसौदे में कुछ सुरक्षा शर्तों के साथ सीमित परमाणु गतिविधियों की संभावना पर चर्चा हुई थी, लेकिन अब यूरेनियम संवर्धन की अनुमति को पूरी तरह खारिज कर दिया गया है। अमेरिका का मानना है कि संवर्धित यूरेनियम का उपयोग केवल बिजली उत्पादन तक सीमित नहीं रहता और भविष्य में इसका इस्तेमाल परमाणु हथियार कार्यक्रम के लिए भी किया जा सकता है। इसी कारण वॉशिंगटन इस तकनीक को लेकर बेहद सतर्क रुख अपनाता है।

    इस पूरे विवाद का दूसरा महत्वपूर्ण पक्ष अब्राहम अकॉर्ड्स है। वर्ष 2020 में अमेरिका की पहल पर शुरू हुए इस समझौते के तहत कई अरब देशों ने पहली बार इजराइल के साथ औपचारिक संबंध स्थापित किए थे। अब अमेरिका चाहता है कि सऊदी अरब भी इस प्रक्रिया में शामिल हो। हालांकि सऊदी नेतृत्व लगातार यह कहता रहा है कि फिलिस्तीन मुद्दे पर ठोस प्रगति और स्वतंत्र फिलिस्तीनी राज्य के रास्ते के बिना वह इजराइल के साथ पूर्ण राजनयिक संबंध स्थापित नहीं करेगा। यही मतभेद अब परमाणु समझौते की सबसे बड़ी बाधा बनकर सामने आया है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि सऊदी अरब अपनी अर्थव्यवस्था को केवल तेल आधारित मॉडल से बाहर निकालने की रणनीति पर काम कर रहा है। बढ़ती ऊर्जा मांग, बिजली उत्पादन में विविधता और भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए वह परमाणु ऊर्जा, सौर ऊर्जा और पवन ऊर्जा के क्षेत्र में निवेश बढ़ाना चाहता है। ऐसे में अमेरिका के साथ असैन्य परमाणु सहयोग उसके दीर्घकालिक विकास कार्यक्रम का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जा रहा है। हालांकि ट्रम्प की नई शर्तों के बाद यह स्पष्ट हो गया है कि समझौते का भविष्य अब केवल तकनीकी नहीं, बल्कि क्षेत्रीय कूटनीति और पश्चिम एशिया की बदलती राजनीतिक परिस्थितियों पर भी निर्भर करेगा।