Category: International

  • यरुशलम में भारतीय प्रवासी की हत्या से सनसनी, इजराइली संदिग्ध गिरफ्तार; दुनिया भर में कई अहम घटनाक्रमों पर नजर

    यरुशलम में भारतीय प्रवासी की हत्या से सनसनी, इजराइली संदिग्ध गिरफ्तार; दुनिया भर में कई अहम घटनाक्रमों पर नजर

    नई दिल्ली । इजराइल के यरुशलम शहर में एक भारतीय प्रवासी की हत्या का मामला सामने आने के बाद स्थानीय पुलिस ने एक इजराइली नागरिक को गिरफ्तार किया है। शुरुआती जांच में घटना को आपराधिक प्रकृति का माना जा रहा है। इस बीच यूरोप और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी कई महत्वपूर्ण घटनाक्रम सामने आए हैं, जिनमें सऊदी शाही परिवार से जुड़ा मामला, ऑस्ट्रिया में ऐतिहासिक इमारत का नया उपयोग, स्विट्जरलैंड में एक वरिष्ठ नेता पर गंभीर आरोप और अंतरराष्ट्रीय अपराध न्यायालय से जुड़ा अहम फैसला शामिल है।

    यरुशलम के कटामोन इलाके में गुरुवार को 40 वर्षीय भारतीय प्रवासी कामगार का शव एक मकान के भीतर मिला। पुलिस के अनुसार शव फर्श पर पड़ा था और घटनास्थल पर बड़ी मात्रा में खून मिला। मामले की सूचना मिलने के बाद जांच एजेंसियां तुरंत मौके पर पहुंचीं और साक्ष्य जुटाने का काम शुरू किया गया। पुलिस ने हत्या के संदेह में 31 वर्षीय एक इजराइली नागरिक को हिरासत में लिया है। फिलहाल मृतक और आरोपी की पहचान सार्वजनिक नहीं की गई है। वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों ने घटनास्थल का निरीक्षण कर विस्तृत जांच के निर्देश दिए हैं।

    उधर ब्रिटेन की राजधानी लंदन में सऊदी शाही परिवार के 29 वर्षीय राजकुमार अब्दुल्ला बिन फहद बिन अब्दुल्ला बिन अब्दुलअजीज बिन जलावी अल सऊद की मौत की जांच पूरी हो गई है। अदालत में पेश रिपोर्ट के अनुसार उनकी मृत्यु अत्यधिक शराब, पार्टी ड्रग और प्रिस्क्रिप्शन दवाओं के संयुक्त प्रभाव से कार्डियक अरेस्ट होने के कारण हुई। जांच में इस घटना को ‘मिसएडवेंचर’ यानी अनजाने में हुई घातक दुर्घटना माना गया और आत्महत्या के कोई प्रमाण नहीं मिले। टॉक्सिकोलॉजी रिपोर्ट में शरीर में अल्कोहल की मात्रा सामान्य कानूनी सीमा से कई गुना अधिक पाई गई।

    ऑस्ट्रिया में एडॉल्फ हिटलर के जन्मस्थान के रूप में पहचानी जाने वाली ऐतिहासिक इमारत को अब पुलिस स्टेशन में बदल दिया गया है। सरकार का उद्देश्य इस स्थान को नव-नाजी समर्थकों के लिए आकर्षण का केंद्र बनने से रोकना है। वर्षों तक विवादों में रहने वाली इस इमारत को सरकार ने अपने नियंत्रण में लेकर इसका नया उपयोग तय किया। अधिकारियों का कहना है कि यह कदम इतिहास के नकारात्मक प्रतीकों को महिमामंडित होने से रोकने की दिशा में उठाया गया है।

    स्विट्जरलैंड में बाल सुरक्षा कानूनों के समर्थक रहे पूर्व दक्षिणपंथी नेता पैट्रिक फ्राई गंभीर कानूनी संकट में घिर गए हैं। उन पर नाबालिग से दुष्कर्म, महिलाओं को नशीली दवा देकर यौन शोषण करने और हत्या के प्रयास जैसे कई गंभीर आरोप लगाए गए हैं। अभियोजन पक्ष ने अदालत से उनके लिए उम्रकैद की मांग की है। जांच एजेंसियों का दावा है कि मामले से जुड़े कई डिजिटल और अन्य साक्ष्य बरामद किए गए हैं। आरोपी वर्ष 2023 से हिरासत में है और मामले की न्यायिक प्रक्रिया जारी है।

    वहीं अंतरराष्ट्रीय अपराध न्यायालय के मुख्य अभियोजक करीम खान को पद से हटाने के प्रस्ताव पर सदस्य देशों के बीच मतदान होना है। उन पर लगाए गए यौन दुराचार के आरोपों के बाद यह प्रक्रिया शुरू हुई है, हालांकि उन्होंने सभी आरोपों से इनकार किया है। सदस्य देशों के मतदान के बाद उनके भविष्य पर अंतिम फैसला लिया जाएगा। इस मुद्दे पर कई प्रमुख देशों ने उन्हें पद से हटाने के समर्थन का संकेत दिया है।

  • अमेरिका ने भारत से आयात पर 10% नया टैरिफ लागू किया, फोर्स्ड लेबर नियमों के बीच कई निर्यात क्षेत्रों पर बढ़ेगा दबाव

    अमेरिका ने भारत से आयात पर 10% नया टैरिफ लागू किया, फोर्स्ड लेबर नियमों के बीच कई निर्यात क्षेत्रों पर बढ़ेगा दबाव

    नई दिल्ली । अमेरिका ने भारत से आयात होने वाले उत्पादों पर 10 प्रतिशत अतिरिक्त टैरिफ लागू कर दिया है। यह निर्णय अमेरिकी ट्रेड एक्ट-1974 की धारा 301 के तहत लिया गया है, जिसके माध्यम से उन देशों के खिलाफ व्यापारिक कार्रवाई की जाती है जिनकी सप्लाई चेन में जबरन मजदूरी या श्रम मानकों से जुड़े गंभीर सवाल उठते हैं। यह नया टैरिफ ऐसे समय लागू हुआ है जब पहले से लागू 15 प्रतिशत अस्थायी वैश्विक टैरिफ की अवधि समाप्त हो गई। इसके साथ ही भारत के लिए नई शुल्क व्यवस्था प्रभावी हो गई है, जिससे कई निर्यात क्षेत्रों पर सीधा असर पड़ने की संभावना है।

    अमेरिका ने इस नई व्यवस्था के तहत कुल 60 देशों पर 10 से 12.5 प्रतिशत तक अतिरिक्त टैरिफ लगाया है। इनमें भारत सहित कुछ देशों को 10 प्रतिशत वाले समूह में रखा गया है, जबकि अन्य देशों पर 12.5 प्रतिशत अतिरिक्त शुल्क लागू किया गया है। अमेरिकी प्रशासन का कहना है कि जिन देशों ने फोर्स्ड लेबर से जुड़े उत्पादों पर रोक लगाने या श्रम मानकों में सुधार के लिए कदम उठाए हैं, उन्हें अपेक्षाकृत कम टैरिफ श्रेणी में रखा गया है।

    भारत के लिए राहत की बात यह रही कि प्रारंभिक प्रस्ताव में 12.5 प्रतिशत अतिरिक्त टैरिफ की बात कही गई थी, लेकिन बाद में इसे घटाकर 10 प्रतिशत कर दिया गया। अमेरिकी पक्ष का मानना है कि भारत ने श्रम मानकों, सप्लाई चेन की निगरानी और विदेशी व्यापार नीति में कुछ महत्वपूर्ण सुधार किए हैं। इन कदमों के आधार पर प्रस्तावित अतिरिक्त शुल्क में 2.5 प्रतिशत की कमी की गई। हालांकि यह स्पष्ट किया गया है कि अमेरिका भविष्य में भी इन सुधारों की निगरानी जारी रखेगा।

    अमेरिका भारत का सबसे बड़ा निर्यात बाजार माना जाता है। ऐसे में नया टैरिफ उन उद्योगों के लिए चुनौती बन सकता है जिनकी अमेरिकी बाजार पर निर्भरता अधिक है। टेक्सटाइल और गारमेंट्स, रत्न एवं आभूषण, चमड़ा उद्योग, कृषि एवं खाद्य उत्पाद, इंजीनियरिंग सामान, रसायन और विभिन्न विनिर्माण उत्पादों पर इसका सबसे अधिक प्रभाव पड़ने की आशंका जताई जा रही है। अतिरिक्त शुल्क लागू होने से भारतीय उत्पाद अमेरिकी बाजार में महंगे हो सकते हैं, जिससे प्रतिस्पर्धा बढ़ने और निर्यातकों पर कीमत कम करने का दबाव बनने की संभावना है।

    फोर्स्ड लेबर का अर्थ ऐसी मजदूरी से है जिसमें किसी व्यक्ति से उसकी इच्छा के विरुद्ध काम कराया जाता है। इसमें धमकी देना, वेतन रोकना, कर्ज के बदले काम कराने की मजबूरी, पहचान संबंधी दस्तावेज जब्त करना या नौकरी छोड़ने की स्वतंत्रता न देना जैसी स्थितियां शामिल होती हैं। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इसे मानवाधिकारों का गंभीर उल्लंघन माना जाता है और कई देश इस प्रकार के उत्पादों के आयात पर कड़ी निगरानी रखते हैं।

    अमेरिकी कानून के सेक्शन 301 के तहत सरकार को यह अधिकार प्राप्त है कि यदि किसी देश की व्यापारिक नीतियां या उत्पादन प्रणाली अमेरिकी उद्योगों के लिए अनुचित या नुकसानदायक मानी जाती हैं, तो उसके खिलाफ अतिरिक्त टैरिफ, आयात प्रतिबंध या अन्य व्यापारिक कदम उठाए जा सकते हैं। इस प्रक्रिया में जांच के बाद संबंधित देश से बातचीत भी की जाती है और उसके बाद अंतिम निर्णय लागू होता है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि भारत के लिए यह स्थिति चुनौती और अवसर दोनों लेकर आई है। यदि भारतीय उद्योग अंतरराष्ट्रीय श्रम मानकों, पारदर्शी सप्लाई चेन और गुणवत्ता मानकों को और मजबूत करते हैं, तो भविष्य में शुल्क संबंधी दबाव कम करने के साथ वैश्विक बाजारों में अपनी प्रतिस्पर्धात्मक स्थिति भी बेहतर बना सकते हैं।

  • सऊदी परमाणु समझौते पर 24 घंटे में बदला अमेरिकी रुख, ट्रम्प ने इजराइल से रिश्तों की नई शर्त जोड़कर बढ़ाई अड़चन

    सऊदी परमाणु समझौते पर 24 घंटे में बदला अमेरिकी रुख, ट्रम्प ने इजराइल से रिश्तों की नई शर्त जोड़कर बढ़ाई अड़चन

    नई दिल्ली । अमेरिका और सऊदी अरब के बीच लंबे समय से प्रस्तावित असैन्य परमाणु सहयोग समझौता एक बार फिर अनिश्चितता में घिर गया है। समझौते पर हस्ताक्षर होने के महज 24 घंटे के भीतर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने इसके लिए नई शर्त जोड़ दी। ट्रम्प ने स्पष्ट किया कि यह समझौता तभी आगे बढ़ेगा, जब सऊदी अरब अब्राहम अकॉर्ड्स में शामिल होकर इजराइल के साथ अपने राजनयिक संबंध सामान्य करेगा। इसके साथ ही उन्होंने यह भी साफ कर दिया कि सऊदी अरब को अपनी जमीन पर यूरेनियम संवर्धन की अनुमति नहीं दी जाएगी।

    यह घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है, जब दोनों देशों के बीच लगभग दो दशक से परमाणु ऊर्जा सहयोग को लेकर बातचीत चल रही थी। हाल ही में हुए हस्ताक्षर समारोह के बाद माना जा रहा था कि समझौते का रास्ता साफ हो गया है, लेकिन ट्रम्प के नए बयान ने पूरी प्रक्रिया को फिर से जटिल बना दिया। अमेरिकी प्रशासन के भीतर भी इस मुद्दे पर अलग-अलग संकेत सामने आए हैं, जिससे समझौते की दिशा को लेकर सवाल उठने लगे हैं।

    रिपोर्टों के अनुसार, वॉशिंगटन में आयोजित हस्ताक्षर समारोह में अमेरिकी ऊर्जा मंत्री की मौजूदगी में समझौते की घोषणा की गई थी। बाद में यह जानकारी सामने आई कि व्हाइट हाउस इस घोषणा के समय और प्रक्रिया से पूरी तरह संतुष्ट नहीं था। इसके बाद राष्ट्रपति ट्रम्प ने सार्वजनिक रूप से अपनी नई शर्तों का उल्लेख करते हुए स्पष्ट किया कि उनकी नीति के अनुसार क्षेत्रीय रणनीतिक सहयोग और इजराइल के साथ संबंध सामान्य करना इस समझौते का अहम हिस्सा रहेगा।

    ट्रम्प की नई घोषणा ने सऊदी अरब को भी असमंजस में डाल दिया है। पहले तैयार किए गए मसौदे में कुछ सुरक्षा शर्तों के साथ सीमित परमाणु गतिविधियों की संभावना पर चर्चा हुई थी, लेकिन अब यूरेनियम संवर्धन की अनुमति को पूरी तरह खारिज कर दिया गया है। अमेरिका का मानना है कि संवर्धित यूरेनियम का उपयोग केवल बिजली उत्पादन तक सीमित नहीं रहता और भविष्य में इसका इस्तेमाल परमाणु हथियार कार्यक्रम के लिए भी किया जा सकता है। इसी कारण वॉशिंगटन इस तकनीक को लेकर बेहद सतर्क रुख अपनाता है।

    इस पूरे विवाद का दूसरा महत्वपूर्ण पक्ष अब्राहम अकॉर्ड्स है। वर्ष 2020 में अमेरिका की पहल पर शुरू हुए इस समझौते के तहत कई अरब देशों ने पहली बार इजराइल के साथ औपचारिक संबंध स्थापित किए थे। अब अमेरिका चाहता है कि सऊदी अरब भी इस प्रक्रिया में शामिल हो। हालांकि सऊदी नेतृत्व लगातार यह कहता रहा है कि फिलिस्तीन मुद्दे पर ठोस प्रगति और स्वतंत्र फिलिस्तीनी राज्य के रास्ते के बिना वह इजराइल के साथ पूर्ण राजनयिक संबंध स्थापित नहीं करेगा। यही मतभेद अब परमाणु समझौते की सबसे बड़ी बाधा बनकर सामने आया है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि सऊदी अरब अपनी अर्थव्यवस्था को केवल तेल आधारित मॉडल से बाहर निकालने की रणनीति पर काम कर रहा है। बढ़ती ऊर्जा मांग, बिजली उत्पादन में विविधता और भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए वह परमाणु ऊर्जा, सौर ऊर्जा और पवन ऊर्जा के क्षेत्र में निवेश बढ़ाना चाहता है। ऐसे में अमेरिका के साथ असैन्य परमाणु सहयोग उसके दीर्घकालिक विकास कार्यक्रम का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जा रहा है। हालांकि ट्रम्प की नई शर्तों के बाद यह स्पष्ट हो गया है कि समझौते का भविष्य अब केवल तकनीकी नहीं, बल्कि क्षेत्रीय कूटनीति और पश्चिम एशिया की बदलती राजनीतिक परिस्थितियों पर भी निर्भर करेगा।

  • फ्रांस में भीषण गर्मी का कहर…. मात्र 16 दिन में ही 21 हजार से ज्यादा लोगों की मौत

    फ्रांस में भीषण गर्मी का कहर…. मात्र 16 दिन में ही 21 हजार से ज्यादा लोगों की मौत


    नई दिल्ली।
    फ्रांस (France) में 2026 की भीषण गर्मी (Scorching Heat) ने लोगों की चिंता बढ़ा दी है. जून के आखिरी दिनों और जुलाई की शुरुआत के बीच देश में 21 हजार से ज्यादा लोगों की मौत हुई. फ्रांस की पब्लिक हेल्थ एजेंसी (Public Health Agency) के मुताबिक, 17 जून से 2 जुलाई के बीच 21674 लोगों की मौत हुई, जबकि इस समय में आमतौर पर करीब 15910 मौतें होती हैं. यानी इस बार सामान्य से 5764 ज्यादा मौतें हुईं।

    इन आंकड़ों से पता चलता है कि तेज गर्मी अब सिर्फ मौसम की परेशानी नहीं रह गई है, बल्कि यह लोगों की सेहत के लिए बड़ा खतरा बन रही है. अधिकारियों का कहना है कि सभी मौतें सीधे गर्मी की वजह से नहीं हुईं. ज्यादा तापमान ने कई लोगों की पहले से मौजूद बीमारियों को और गंभीर कर दिया, जिससे मौतों की संख्या बढ़ गई।

    फ्रांस में सामने आए नए आंकड़ों ने 2026 की हीटवेव के असर की गंभीर तस्वीर दिखाई है. शुरुआत में मौतों का अनुमान कम था, लेकिन बाद में मिले आंकड़ों से पता चला कि गर्मी का असर पहले से ज्यादा बड़ा था. इस दौरान अस्पतालों और देखभाल केंद्रों पर भी लोगों का दबाव बढ़ गया।

    किसी भी आपदा या घटना का असर समझने के लिए स्वास्थ्य एजेंसियां अतिरिक्त मौतों का आंकड़ा देखती हैं. इसमें किसी खास समय में हुई मौतों की तुलना सामान्य समय में होने वाली मौतों से की जाती है. फ्रांस में 17 जून से 2 जुलाई के बीच सामान्य से करीब 36 प्रतिशत ज्यादा मौतें दर्ज हुईं. हालांकि, इनमें से हर मौत की वजह सिर्फ गर्मी नहीं थी. लेकिन तेज तापमान ने बुजुर्गों और पहले से बीमार लोगों की परेशानी बढ़ा दी।

    अतिरिक्त मौतों में करीब दो-तिहाई लोग 75 साल या उससे ज्यादा उम्र के थे. ज्यादा उम्र के लोगों के लिए तेज गर्मी ज्यादा खतरनाक होती है, क्योंकि उनका शरीर तापमान को आसानी से नियंत्रित नहीं कर पाता. इस दौरान करीब आधी मौतें अस्पतालों में हुईं. कई मौतें नर्सिंग होम और लोगों के घरों में भी दर्ज की गईं. पेरिस और आसपास के इलाकों में इसका असर सबसे ज्यादा देखने को मिला, जहां करीब 2000 अतिरिक्त मौतें हुईं।

    बहुत ज्यादा गर्मी शरीर पर दबाव बढ़ा देती है. इससे शरीर में पानी की कमी हो सकती है और दिल, फेफड़ों और किडनी पर असर पड़ सकता है. जिन लोगों को पहले से कोई बीमारी होती है, उनके लिए तेज गर्मी और ज्यादा खतरनाक हो सकती है. इसी वजह से हीटवेव में सिर्फ तापमान बढ़ना ही चिंता की बात नहीं होती, बल्कि इसका असर लोगों की सेहत और मौतों के आंकड़ों में भी दिखाई देता है।

    वैज्ञानिकों का कहना है कि क्लाइमेट चेंज की वजह से यूरोप में हीटवेव ज्यादा बार आने लगी हैं और ज्यादा लंबे समय तक रह रही हैं. साल 2003 में यूरोप में आई भीषण गर्मी में 70 हजार से ज्यादा लोगों की मौत का अनुमान लगाया गया था.

    फ्रांस की 2026 की हीटवेव एक बार फिर दिखाती है कि बढ़ती गर्मी अब सिर्फ मौसम की घटना नहीं है. यह लोगों की सेहत से जुड़ी बड़ी चुनौती बन चुकी है. आने वाले समय में गर्मी से बचाव के लिए बेहतर तैयारी, समय पर अलर्ट और लोगों को जागरूक करना जरूरी होगा।

  • ग्लासगो के आसमान में उड़ता दिखा 'ड्रैगन', लोग रह गए हैरान; बाद में सामने आई वायरल वीडियो की असली कहानी

    ग्लासगो के आसमान में उड़ता दिखा 'ड्रैगन', लोग रह गए हैरान; बाद में सामने आई वायरल वीडियो की असली कहानी


    नई दिल्ली। स्कॉटलैंड के ग्लासगो शहर में सुबह का एक सामान्य दिन अचानक चर्चा का विषय बन गया, जब लोगों ने नदी के ऊपर एक विशाल पंखों वाले ड्रैगन जैसी आकृति को उड़ते देखा। कुछ देर के लिए लोगों को अपनी आंखों पर भरोसा नहीं हुआ। कई लोगों ने इसे किसी फिल्म की शूटिंग समझा, तो कुछ ने किसी हाई-टेक ड्रोन शो का हिस्सा माना। देखते ही देखते इस रहस्यमयी उड़ान का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया।
    रेडियो प्रेजेंटर ने सबसे पहले रिकॉर्ड किया वीडियो

    बताया जा रहा है कि इस अनोखे दृश्य को सबसे पहले एसटीवी रेडियो के प्रेजेंटर इवेन कैमरून ने अपने कैमरे में कैद किया। वह सुबह करीब 5:45 बजे काम पर जा रहे थे, तभी रिवर क्लाइड और OVO हाइड्रो एरीना के पास उन्होंने आसमान में उड़ती विशाल आकृति देखी।

    उन्होंने वीडियो सोशल मीडिया पर साझा किया, जिसके बाद कुछ ही घंटों में लाखों लोग इसे देख चुके थे। वीडियो वायरल होते ही लोगों ने तरह-तरह के कयास लगाने शुरू कर दिए।

    सोशल मीडिया पर छिड़ी बहस

    वीडियो सामने आने के बाद इंटरनेट पर प्रतिक्रियाओं की बाढ़ आ गई। किसी ने मजाक में लिखा कि “ड्रैगन आखिरकार धरती पर लौट आए हैं”, तो कुछ लोगों ने इसे लोकप्रिय फिल्मों और गेम्स से जोड़कर देखा। कई यूजर्स ने माना कि पहली नजर में यह आकृति बिल्कुल किसी असली उड़ने वाले जीव जैसी दिखाई दे रही थी।

    क्या था इस उड़ते ड्रैगन का सच?

    बाद में खुलासा हुआ कि यह कोई असली ड्रैगन नहीं, बल्कि लोकप्रिय टीवी सीरीज ‘हाउस ऑफ द ड्रैगन’ के मशहूर ड्रैगन सायरैक्स (Syrax) का उड़ने वाला मॉडल था। इसे सीरीज के प्रचार अभियान के तहत तैयार किया गया था।

    इस मॉडल की डिजाइन इतनी वास्तविक बनाई गई कि दूर से देखने पर यह किसी जीवित ड्रैगन जैसा नजर आता है।

    जर्मन कंपनी ने तैयार किया हाई-टेक मॉडल

    इस विशेष मॉडल को जर्मनी की AirStage कंपनी ने विकसित किया है। इसे कार्बन फाइबर, हल्के फोम और छोटे इलेक्ट्रिक इंजनों की मदद से तैयार किया गया है। करीब 13 किलोग्राम वजनी इस मॉडल में 23 मूविंग पार्ट्स लगाए गए हैं, जो उड़ान के दौरान पंख, पूंछ और शरीर को वास्तविक जीव की तरह हिलने-डुलने में सक्षम बनाते हैं।

    उड़ान के दौरान दिखती है असली जैसी हरकत

    ड्रैगन के पंख लगातार फड़फड़ाते हैं, जबकि उसकी पूंछ संतुलन बनाए रखती है। शरीर के अलग-अलग हिस्सों की समन्वित गतिविधि इसे बेहद प्राकृतिक रूप देती है।

    इसके छोटे इंजन इस तरह छिपाए गए हैं कि दूर से देखने पर उनका पता नहीं चलता, जिससे भ्रम और भी बढ़ जाता है।

    पायलट ने बताया चुनौतीपूर्ण अनुभव

    इस मॉडल को उड़ाने वाले पायलट डेनिस गुटोव्स्की के अनुसार, इसे नियंत्रित करना सामान्य रिमोट कंट्रोल विमान उड़ाने से कहीं अधिक कठिन है। उन्होंने बताया कि मॉडल के कई हिस्से एक साथ चलते हैं, इसलिए संतुलन बनाए रखने के लिए विशेष प्रशिक्षण और अभ्यास की जरूरत होती है।

    पहले भी हो चुका है प्रदर्शन

    यह पहली बार नहीं है जब इस ड्रैगन मॉडल ने लोगों को चौंकाया हो। इससे पहले भी इसे लंदन में ‘हाउस ऑफ द ड्रैगन’ के प्रमोशनल अभियान के दौरान उड़ाया गया था। हर बार इसकी वास्तविक जैसी उड़ान लोगों के आकर्षण का केंद्र बनती है।

    महीनों की रिसर्च के बाद तैयार हुई तकनीक

    कंपनी के अनुसार, इस मॉडल को तैयार करने में कई महीने लगे।

    डिजाइन टीम ने पक्षियों और चमगादड़ों की उड़ान का अध्ययन किया, फिर कंप्यूटर मॉडल विकसित कर कई चरणों में परीक्षण किए। लंबे प्रयोगों के बाद ऐसा मॉडल तैयार किया गया, जो हवा में बेहद वास्तविक दिखाई देता है।

    ग्लासगो में वायरल हुआ यह वीडियो अब दुनिया भर में चर्चा का विषय बना हुआ है। कई लोग इसे आधुनिक इंजीनियरिंग, एनीमेशन और रचनात्मक तकनीक का बेहतरीन उदाहरण बता रहे हैं।

  • सऊदी टैंकरों पर हमले के बाद पाकिस्तान की सिर्फ बयानबाजी, रक्षा समझौते के बावजूद किया किनारा

    सऊदी टैंकरों पर हमले के बाद पाकिस्तान की सिर्फ बयानबाजी, रक्षा समझौते के बावजूद किया किनारा


    नई दिल्‍ली । पाकिस्तान (Pakistan) के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ (PM Shehbaz Sharif) के सामने जब सऊदी अरब (Saudi Arabia) को दिया वादा निभाने की जिम्मेदारी आई तो उन्होंने अपना असली रंग दिखा दिया. लाल सागर में जब हूती विद्रोहियों ने सऊदी अरब के तेल टैंकर पर हमला किया तो पाकिस्तान ने जी भरकर इसकी आलोचना की. शहबाज शरीफ ने सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस (Crown Prince) को फोन लगाकर उनके साथ सॉलिडरिटी जताई, सऊदी को बिरादर मुल्क बताया, हूतियों की निंदा की. लेकिन असल एक्शन के नाम पर पाकिस्तान के पास जुबानी जमा खर्च करने के अलावा कुछ नहीं था.

    सवाल है कि शहबाज शरीफ ने सऊदी अरब के साथ कौन सा कमिटमेंट किया है. बताना चाहेंगे कि सऊदी अरब और पाकिस्तान ने डिफेंस डील किया है. इसके तहत दोनों देशों ने कहा है कि एक के ऊपर हमला दूसरे पर भी अटैक माना जाएगा और दोनों देश मिलकर इस हमले का जवाब देंगे.

    यमन के ईरान-समर्थित हूती विद्रोहियों ने गुरुवार तड़के लाल सागर में सऊदी अरब के दो तेल टैंकरों पर हमला किया. सऊदी अरब और पाकिस्तान के बीच हुए समझौते के मुताबिक पाकिस्तान को ऐसे किसी सिचुएशन में सऊदी अरब की तरफ से हूती विद्रोहियों को जवाब देकर अपना सिक्योरिटी कमिटमेंट पूरा करना चाहिए था.

    कहां गया सऊदी-पाकिस्तान का डिफेंस डील
    लेकिन इस दौरान पाकिस्तान खामोश रहा. यहां अहम यह है कि पाकिस्तान ईरान का भी हितैषी होने का गेम खेल रहा है. ईरान के गृह मंत्री ने हाल ही में पाकिस्तान का दौरा खत्म किया है. इस दौरान ईरान-पाकिस्तान ने दोस्ती को नई ऊंचाई पर ले जाने का वादा किया.

    पाकिस्तान के सामने समस्या यह है कि हूती विद्रोही ईरान के इशारे पर ही चलते हैं. अगर पाकिस्तान हूतियों के खिलाफ कुछ करता है तो वह ईरान की दुश्मनी मोल लेगा. जिसके साथ उसकी लंबी सीमा है. लेकिन अगर पाकिस्तान लाल सागर में सऊदी अरब के टैंकरों पर हमला कर रहे हूती विद्रोहियों पर कोई एक्शन नहीं लेता है तो इससे सऊदी अरब को उसकी असलियत समझ आ जाएगी.

    ऐसी हरकतें मंज़ूर नहीं
    फिलहाल इस बार जब हूती विद्रोहियों ने लाल सागर में सऊदी अरब के दो टैंकरों को ब्लास्ट कर आग के हवाले कर दिया तो पाकिस्तान ने क्राउन प्रिंस सलमान को फोन कर एक बार फिर से बड़े बड़े वादे किए.

    पाकिस्तान के पीएम शहबाज शरीफ ने एक्स पर एक पोस्ट में कहा कि उन्होंने लाल सागर में सऊदी टैंकरों पर हूतियों के हमले की निंदा की है और उन्हें चेतावनी दी है. शहबाज ने एक्स पर लिखा, “आज सुबह मैंने सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस और प्रधानमंत्री, महामहिम प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान बिन अब्दुलअज़ीज़ अल सऊद से टेलीफ़ोन पर बातचीत की. मैंने लाल सागर में सऊदी तेल टैंकरों पर हूतियों के हमलों की कड़े से कड़े शब्दों में निंदा की. ऐसी हरकतें मंज़ूर नहीं हैं; ये अंतरराष्ट्रीय क़ानून का उल्लंघन करती हैं, समुद्री आवाजाही की आज़ादी के लिए खतरा हैं और क्षेत्रीय शांति व सुरक्षा को कमज़ोर करती हैं.”

    पाक विदेश मंत्रालय की चेतावनी
    बाद में पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने हूती विद्रोहियों को चेतावनी देकर जरूर भड़ास निकाली. हालांकि पाकिस्तान की ये चेतावनी उसके जहाजों पर हमलों की आशंका को लेकर थी. पाकिस्तान ने कहा कि लाल सागर में उसके झंडे वाले जहाजों या समुद्री हितों के खिलाफ किसी भी हमले का तुरंत जवाब दिया जाएगा. उसने चेतावनी दी कि ऐसी हरकतों को उसकी राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए “गंभीर खतरा” माना जाएगा.

    विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ताहिर अंद्राबी ने कहा कि पाकिस्तानी झंडे वाले जहाजों या उसके कमर्शियल जहाजों पर किसी भी हमले को “पाकिस्तान पर हमला माना जाएगा और उसका तुरंत जवाब दिया जाएगा.”

    हूती विद्रोहियों ने सऊदी अरब के खिलाफ समुद्री नाकेबंदी की घोषणा की है. उन्होंने कहा था कि वे बाब अल-मंदेब स्ट्रेट में सऊदी जहाजों को रोकेंगे. यह कदम उन्होंने यमन में बंदरगाहों और हवाई अड्डों की रियाद द्वारा की गई नाकेबंदी के जवाब में उठाया है.

  • CJP आंदोलन पर पाकिस्तान की पहली प्रतिक्रिया, बोला- यह भारत का आंतरिक मामला, टिप्पणी से किया इनकार

    CJP आंदोलन पर पाकिस्तान की पहली प्रतिक्रिया, बोला- यह भारत का आंतरिक मामला, टिप्पणी से किया इनकार


    नई दिल्ली। दिल्ली के जंतर-मंतर पर जारी कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के आंदोलन पर पहली बार पाकिस्तान की आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने आई है। पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने इस मुद्दे को भारत का आंतरिक मामला बताते हुए किसी भी प्रकार की टिप्पणी करने से इनकार कर दिया।

    साप्ताहिक प्रेस ब्रीफिंग के दौरान विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ताहिर अंद्राबी से CJP आंदोलन और उससे जुड़े घटनाक्रम पर सवाल किया गया। इस पर उन्होंने स्पष्ट कहा कि यह भारत का घरेलू विषय है और पाकिस्तान ऐसे मामलों पर कोई टिप्पणी नहीं करता।

    पांचवें सप्ताह में पहुंचा आंदोलन
    CJP का प्रदर्शन अब पांचवें सप्ताह में प्रवेश कर चुका है। प्रदर्शनकारी NEET-UG पेपर लीक मामले में केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे, शिक्षा व्यवस्था में सुधार और कथित अनियमितताओं के लिए जवाबदेही तय करने की मांग कर रहे हैं।

    ‘संसद चलो’ मार्च के बाद बढ़ा तनाव
    20 जुलाई को आयोजित ‘संसद चलो’ मार्च के दौरान प्रदर्शनकारियों और दिल्ली पुलिस के बीच झड़प हुई थी। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि उन्हें हटाने के लिए पुलिस ने लाठीचार्ज और आंसू गैस का इस्तेमाल किया, जबकि दिल्ली पुलिस का कहना है कि बैरिकेड तोड़ने की कोशिश के बाद कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए आवश्यक बल प्रयोग किया गया।

    पेपर लीक मामलों पर सरकार का सख्त रुख
    इस बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सार्वजनिक परीक्षाओं में पेपर लीक से जुड़े मामलों की त्वरित सुनवाई के लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट स्थापित करने की घोषणा की है। उन्होंने कहा कि छात्रों के भविष्य की सुरक्षा सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है और दोषियों के खिलाफ शीघ्र कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।

    सरकार ने फिर दिया बातचीत का प्रस्ताव
    केंद्र सरकार ने आंदोलनकारियों से संवाद की पहल भी दोहराई है। केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह के अनुसार सरकार चार बार CJP को बातचीत का प्रस्ताव दे चुकी है और स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा के साथ वार्ता के लिए तैयार है। हालांकि, CJP ने नड्डा के आवास या कार्यालय में बैठक करने से इनकार करते हुए किसी तटस्थ स्थान पर बातचीत की मांग रखी है।

    सोनम वांगचुक ने समाप्त किया अनशन
    इसी बीच सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने 25 दिन से जारी अपना अनशन समाप्त कर दिया है। सरकार और आंदोलनकारियों के बीच बातचीत की संभावना को लेकर भी राजनीतिक हलकों में चर्चा तेज हो गई है।

  • तिमाही नतीजों के बाद इंडसइंड बैंक के शेयरों में बड़ी गिरावट, मजबूत मुनाफे के बावजूद निवेशकों ने दिखाई सतर्कता

    तिमाही नतीजों के बाद इंडसइंड बैंक के शेयरों में बड़ी गिरावट, मजबूत मुनाफे के बावजूद निवेशकों ने दिखाई सतर्कता

    नई दिल्ली । पहली तिमाही के वित्तीय नतीजों के बाद निजी क्षेत्र के इंडसइंड बैंक के शेयरों में गुरुवार को शुरुआती कारोबार के दौरान छह प्रतिशत से अधिक की गिरावट दर्ज की गई। बैंक ने मुनाफे और परिसंपत्ति गुणवत्ता में सुधार के आंकड़े पेश किए, लेकिन इसके बावजूद बाजार की प्रतिक्रिया नकारात्मक रही। निवेशकों ने बैंक से जुड़े व्यापक जोखिमों और भविष्य की संभावनाओं को ध्यान में रखते हुए सतर्क रुख अपनाया, जिसका असर शेयर की कीमत पर साफ दिखाई दिया।

    कारोबार के दौरान बैंक का शेयर तेज दबाव में आ गया और छह प्रतिशत से अधिक गिरकर दिन के निचले स्तर तक पहुंच गया। शुरुआती सत्र में ही स्टॉक में लगातार बिकवाली देखी गई, जिससे यह प्रमुख गिरावट वाले शेयरों में शामिल हो गया। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि केवल वित्तीय नतीजे ही नहीं, बल्कि निवेशकों की धारणा और बैंक से जुड़े अन्य मुद्दों ने भी इस गिरावट में भूमिका निभाई।

    वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में बैंक का समेकित शुद्ध लाभ पिछले वर्ष की समान अवधि की तुलना में उल्लेखनीय रूप से बढ़ा। प्रावधान और आकस्मिक खर्चों में कमी आने से बैंक के मुनाफे को मजबूती मिली। इसके साथ ही बैंक की नेट इंटरेस्ट इनकम में भी मामूली वृद्धि दर्ज की गई, जो मुख्य बैंकिंग कारोबार की स्थिरता का संकेत देती है।

    परिसंपत्ति गुणवत्ता के मोर्चे पर भी बैंक ने सुधार दिखाया। सकल गैर-निष्पादित परिसंपत्ति अनुपात में कमी दर्ज की गई, जबकि नए फंसे हुए ऋणों की मात्रा भी पिछले वर्ष की तुलना में घटी। आम तौर पर ऐसे संकेत बैंक की वित्तीय स्थिति को बेहतर मानने के लिए सकारात्मक माने जाते हैं, लेकिन इस बार निवेशकों ने इन आंकड़ों के बावजूद सतर्कता बनाए रखी।

    बाजार विश्लेषकों का कहना है कि हाल के महीनों में बैंक से जुड़ी कुछ घटनाओं ने निवेशकों के भरोसे को प्रभावित किया है। जून में बैंक को लेकर विभिन्न स्तरों पर कथित कॉरपोरेट गवर्नेंस संबंधी शिकायतों की खबरें सामने आई थीं। इन रिपोर्टों में इनसाइडर ट्रेडिंग, वित्तीय रिकॉर्ड में कथित अनियमितताओं, ऑडिट प्रक्रियाओं और प्रबंधन से जुड़े कुछ आरोपों का उल्लेख किया गया था। हालांकि इन आरोपों पर अंतिम निष्कर्ष सामने नहीं आया है, लेकिन ऐसी खबरों का असर निवेशकों की धारणा पर पड़ता है।

    इसी कारण बेहतर वित्तीय प्रदर्शन के बावजूद बाजार ने अपेक्षित सकारात्मक प्रतिक्रिया नहीं दी। निवेशक केवल तिमाही लाभ पर नहीं, बल्कि बैंक की दीर्घकालिक विश्वसनीयता, प्रबंधन की पारदर्शिता और नियामकीय स्थिति पर भी नजर बनाए हुए हैं। आने वाले समय में इन पहलुओं पर स्पष्टता मिलने के बाद ही बाजार का रुख अधिक स्थिर हो सकता है।

    शेयर बाजार में किसी भी बैंक के मूल्यांकन पर वित्तीय नतीजों के साथ-साथ निवेशकों का भरोसा, जोखिम प्रबंधन और कॉरपोरेट गवर्नेंस का भी बड़ा प्रभाव होता है। इंडसइंड बैंक के मामले में पहली तिमाही के नतीजों ने परिचालन प्रदर्शन में सुधार का संकेत जरूर दिया है, लेकिन बाजार फिलहाल व्यापक तस्वीर को देखते हुए सावधानी बरत रहा है। अब निवेशकों की निगाह बैंक के आगामी तिमाही प्रदर्शन, नियामकीय घटनाक्रम और प्रबंधन की ओर से उठाए जाने वाले कदमों पर रहेगी, जो आगे शेयर की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।

  • देशभर में चंद्रशेखर आजाद को श्रद्धांजलि, पीएम मोदी समेत कई नेताओं ने याद किया अमर बलिदान और राष्ट्रसेवा

    देशभर में चंद्रशेखर आजाद को श्रद्धांजलि, पीएम मोदी समेत कई नेताओं ने याद किया अमर बलिदान और राष्ट्रसेवा

    नई दिल्ली । महान क्रांतिकारी और भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के अमर सेनानी चंद्रशेखर आजाद की जयंती पर गुरुवार को पूरे देश में उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की गई। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सहित केंद्र सरकार के वरिष्ठ मंत्रियों और विभिन्न राज्यों के मुख्यमंत्रियों ने उनके साहस, त्याग और राष्ट्रभक्ति को याद करते हुए उन्हें नमन किया। नेताओं ने कहा कि चंद्रशेखर आजाद का जीवन आज भी देशवासियों, विशेषकर युवाओं के लिए राष्ट्रसेवा, स्वाभिमान और समर्पण का प्रेरणास्रोत बना हुआ है।

    नई दिल्ली से जारी अपने संदेश में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि भारत के स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास में चंद्रशेखर आजाद के निडर साहस और अटूट देशभक्ति का गौरवपूर्ण स्थान है। उन्होंने कहा कि आजाद ने अनगिनत युवा भारतीयों को देश के लिए समर्पित होकर कार्य करने की प्रेरणा दी और उनका संकल्प आने वाली पीढ़ियों का मार्गदर्शन करता रहेगा। प्रधानमंत्री ने कहा कि स्वतंत्रता के लिए उनका संघर्ष और राष्ट्र के प्रति समर्पण सदैव स्मरणीय रहेगा।

    रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने भी चंद्रशेखर आजाद को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि उन्होंने ब्रिटिश शासन के विरुद्ध आजीवन संघर्ष किया और भारतीयों के मन में स्वाभिमान, आत्मविश्वास तथा राष्ट्रचेतना का संचार किया। उन्होंने कहा कि आजाद ने अपने अदम्य साहस, अटूट संकल्प और सर्वोच्च बलिदान से स्वतंत्रता आंदोलन को नई ऊर्जा प्रदान की तथा युवाओं के हृदय में मातृभूमि के प्रति समर्पण की भावना जगाई। उनका बलिदानी जीवन देशवासियों के लिए सदैव प्रेरणादायी रहेगा।

    केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने भी चंद्रशेखर आजाद को श्रद्धासुमन अर्पित किए। उन्होंने कहा कि मातृभूमि की स्वतंत्रता के लिए आजाद ने त्याग, संघर्ष और बलिदान की जो अमर गाथा लिखी, वह आने वाली पीढ़ियों को राष्ट्रसेवा के लिए प्रेरित करती रहेगी। उन्होंने उन्हें भारत माता का अनन्य उपासक और महान क्रांतिकारी बताते हुए उनके योगदान को अविस्मरणीय बताया।

    देश के विभिन्न राज्यों के मुख्यमंत्रियों ने भी अपने संदेशों में चंद्रशेखर आजाद के जीवन और योगदान को याद किया। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने उनके प्रसिद्ध उद्घोष का उल्लेख करते हुए कहा कि उनका जीवन राष्ट्रहित में कर्तव्यपथ पर आगे बढ़ने की प्रेरणा देता रहेगा। दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने उनके साहस, स्वाभिमान और सर्वोच्च बलिदान को प्रत्येक भारतीय के लिए प्रेरणा का स्रोत बताया।

    मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने चंद्रशेखर आजाद को प्रदेश की माटी का गौरव बताते हुए कहा कि उन्होंने अपने अदम्य साहस और मातृभूमि के प्रति समर्पण से स्वतंत्रता आंदोलन को नई दिशा और ऊर्जा दी। वहीं राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने कहा कि उनका त्याग, पराक्रम और राष्ट्रभक्ति देशवासियों को हमेशा राष्ट्रहित को सर्वोपरि रखने की प्रेरणा देते रहेंगे। बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी और हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने भी उनके बलिदान और क्रांतिकारी जीवन को नमन करते हुए कहा कि उनका संघर्ष और राष्ट्रप्रेम आने वाली पीढ़ियों को सदैव प्रेरित करता रहेगा।

    चंद्रशेखर आजाद भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन के उन महान सेनानियों में शामिल हैं जिन्होंने अपने अदम्य साहस, अटूट संकल्प और सर्वोच्च बलिदान से देश की आजादी की लड़ाई को नई गति दी। उनका जीवन केवल इतिहास का गौरवशाली अध्याय नहीं, बल्कि राष्ट्रभक्ति, स्वाभिमान और देश के प्रति समर्पण का ऐसा संदेश है, जो आज भी देश के युवाओं को अपने कर्तव्यों के प्रति सजग रहने और राष्ट्र निर्माण में सक्रिय भूमिका निभाने की प्रेरणा देता है।

  • मनीला में जयशंकर की कूटनीतिक सक्रियता, श्रीलंका-बांग्लादेश समेत कई देशों के नेताओं से अहम मुलाकातें

    मनीला में जयशंकर की कूटनीतिक सक्रियता, श्रीलंका-बांग्लादेश समेत कई देशों के नेताओं से अहम मुलाकातें

    नई दिल्ली । विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने फिलीपींस की राजधानी मनीला में आयोजित आसियान से जुड़ी उच्चस्तरीय बैठकों के दौरान कई देशों के विदेश मंत्रियों और प्रमुख अंतरराष्ट्रीय साझेदारों के साथ व्यापक कूटनीतिक संवाद किया। इस दौरान उन्होंने श्रीलंका के विदेश मंत्री विजिथा हेराथ, बांग्लादेश के विदेश मंत्री खलीलुर रहमान तथा यूरोपीय संघ की वरिष्ठ प्रतिनिधि काजा कैलास से अलग-अलग मुलाकात कर द्विपक्षीय संबंधों और क्षेत्रीय सहयोग से जुड़े विभिन्न विषयों पर चर्चा की। इन बैठकों को भारत की सक्रिय विदेश नीति और हिंद-प्रशांत क्षेत्र में बढ़ती रणनीतिक भागीदारी के महत्वपूर्ण संकेत के रूप में देखा जा रहा है।

    दो दिवसीय मनीला दौरे के दौरान विदेश मंत्री ने आसियान-इंडिया, ईस्ट एशिया समिट और आसियान रीजनल फोरम की विदेश मंत्री स्तरीय बैठकों में हिस्सा लिया। इन बैठकों का उद्देश्य क्षेत्रीय सहयोग को मजबूत करना, सुरक्षा चुनौतियों पर साझा दृष्टिकोण विकसित करना तथा आर्थिक और समुद्री साझेदारी को नई दिशा देना रहा। भारत ने इन मंचों पर अपने सहयोगी देशों के साथ बहुपक्षीय सहयोग को आगे बढ़ाने की प्रतिबद्धता दोहराई।

    श्रीलंका और बांग्लादेश के विदेश मंत्रियों के साथ मुलाकात के दौरान आपसी संबंधों, क्षेत्रीय विकास और सहयोग के विभिन्न आयामों पर चर्चा हुई। भारत ने अपने पड़ोसी देशों के साथ पारस्परिक विश्वास और सहयोग को आगे बढ़ाने की नीति पर जोर दिया। इसके साथ ही यूरोपीय संघ की वरिष्ठ प्रतिनिधि काजा कैलास के साथ हुई बैठक में भारत और यूरोपीय संघ के बीच रणनीतिक साझेदारी, वैश्विक चुनौतियों तथा साझा हितों से जुड़े विषयों पर विचार-विमर्श किया गया।

    मनीला प्रवास के दौरान विदेश मंत्री जयशंकर ने कई अन्य प्रमुख देशों के विदेश मंत्रियों से भी द्विपक्षीय मुलाकातें कीं। इनमें फिलीपींस, ऑस्ट्रेलिया, चीन, अमेरिका, रूस, सिंगापुर, कनाडा, थाईलैंड और न्यूजीलैंड के विदेश मंत्री शामिल रहे। इसके अलावा उन्होंने आसियान के महासचिव से भी मुलाकात कर क्षेत्रीय सहयोग को और मजबूत बनाने के उपायों पर चर्चा की। इन बैठकों का उद्देश्य विभिन्न देशों के साथ भारत के रणनीतिक, आर्थिक और सुरक्षा संबंधों को नई गति देना था।

    विदेश मंत्री ने क्वाड देशों के विदेश मंत्रियों की बैठक में भी भाग लिया। इस दौरान हिंद-प्रशांत क्षेत्र की वर्तमान स्थिति, क्षेत्रीय सुरक्षा, समुद्री सहयोग और हालिया भू-राजनीतिक घटनाक्रम पर विस्तार से चर्चा हुई। बैठक में नई दिल्ली में पहले हुई क्वाड वार्ता के निर्णयों की समीक्षा की गई और स्वतंत्र, समावेशी तथा नियम-आधारित हिंद-प्रशांत क्षेत्र के प्रति साझा प्रतिबद्धता दोहराई गई। साथ ही आसियान की केंद्रीय भूमिका को भी महत्वपूर्ण बताया गया।

    भारत सरकार का मानना है कि यह दौरा एक्ट ईस्ट नीति के तहत आसियान देशों के साथ बढ़ते सहयोग का महत्वपूर्ण उदाहरण है। भारत और आसियान के बीच व्यापक रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत बनाने के उद्देश्य से दोनों पक्ष व्यापार, संपर्क, समुद्री सुरक्षा, डिजिटल सहयोग और क्षेत्रीय स्थिरता जैसे क्षेत्रों में साझेदारी को लगातार विस्तार दे रहे हैं। वर्ष 2026 को आसियान-भारत समुद्री सहयोग वर्ष के रूप में मनाया जा रहा है, जिससे समुद्री संपर्क, ब्लू इकोनॉमी और क्षेत्रीय सुरक्षा के क्षेत्र में दोनों पक्षों के बीच सहयोग को नई मजबूती मिलने की उम्मीद है। मनीला में हुई ये बैठकें भारत की सक्रिय कूटनीति और बहुपक्षीय मंचों पर उसकी बढ़ती भूमिका को भी स्पष्ट रूप से रेखांकित करती हैं।