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  • सऊदी अरब का बड़ा फैसला… बदला तेल निर्यात का रास्ता, बढ़ सकती है यूरोप की परेशानी

    सऊदी अरब का बड़ा फैसला… बदला तेल निर्यात का रास्ता, बढ़ सकती है यूरोप की परेशानी


    दुबई।
    सऊदी अरब (Saudi Arabia) ने तेल निर्यात (Oil Export) को लेकर बड़ा फैसला किया है। इसका बहुत बड़ा असर यूरोप (Europe) पर पड़ने वाला है। जानकारी के मुताबिक सऊदी ने रास्ता बदलते हुए करीब 60 मिलियन बैरल क्रूड ऑयल अपने गल्फ पोर्ट रास तयनूरा (Ras Tanura Port) से ओमान के सोहार पोर्ट भेज दिया है। इसे जहाज के जरिए ट्रांसफर किया जाएगा। यह फैसला इस महीने और अगले महीने के लिए किया गया है। लाल सागर (Red Sea) में सऊदी अरब के रास्ते में रुकावटें आने के बाद उसने यह फैसला लिया है। अब उसे नए रास्तों की तलाश करके अपने अंतर्राष्ट्रीय खरीदारों तक तेल पहुंचाना पड़ रहा है।

    इसके साथ ही सऊदी आरामको ने कम से कम दो यूरोपियन रिफाइनिंग ग्राहकों को बोल दिया है कि उन्हें अगले महीने सऊदी से कच्चा तेल (Crude Oil) नहीं मिलेगा। इसकी वजह, लाल सागर में उस पाइपलाइन पर हमला है, जिससे सऊदी तेल निर्यात करता है। रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, खाड़ी से सऊदी के एक्सपोर्ट में आंशिक सुधार ने भी वैश्विक तेल की कीमतों को थोड़ा कम करने में मदद की है। अब व्यापारी यह आकलन कर रहे हैं कि क्या अतिरिक्त मात्रा यानबु में मंदी के कारण प्रभावित कुछ क्रूड की भरपाई कर सकती है। चीनी और दक्षिण कोरियाई रिफाइनरी प्रमुख खरीदारों में हैं जो ओमान के जरिए स्पॉट कार्गो ले जा रही हैं, जबकि कुछ सप्लाई भारत और जापान की ओर जाने की उम्मीद है।

    गौरतलब है कि सऊदी अरब की एक महत्वपूर्ण तेल पाइपलाइन को निशाना बनाकर किए गए ड्रोन हमले के बाद क्षतिग्रस्त हिस्से की मरम्मत को लेकर यह पाइपलाइन कई हफ्तों तक लगभग बंद रहेगी। क्षेत्र के दो अधिकारियों ने सोमवार को यह जानकारी दी। यह घटनाक्रम ऐसे समय हुआ है जब यमन के हूती विद्रोहियों ने लाल सागर के समुद्री मार्गों के पास और द्वीपों पर कब्जा कर लिया है, जिससे सऊदी अरब के तेल निर्यात को एक और झटका लगा है। दुनिया भर में पेट्रोलियम की आपूर्ति और नयी घटनाओं के कारण उपजे अंतरराष्ट्रीय तेल संकट को लेकर बढ़ती चिंताओं के बीच तेल की कीमतों में दो प्रतिशत से अधिक की बढ़ोतरी हुई।

    इस बीच ईरान के साथ तनाव के कारण सऊदी अरब ने अपना निर्यात फारस की खाड़ी से हटाकर दूसरी तरफ कर दिया है क्योंकि ईरान के हमलों के कारण खाड़ी से बाहर निकलने वाले एकमात्र मार्ग होर्मुज जलडमरूमध्य से समुद्री आवाजाही प्रभावित हुई है। सऊदी अरब देश में 1,200 किलोमीटर तक फैली अपनी ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन के माध्यम से ही तेल की आपूर्ति कर रहा था। यह पाइपलाइन खाड़ी के बंदरगाहों से उसके कच्चे तेल को लाल सागर स्थित यानबू बंदरगाह तक पहुंचाती है। लेकिन बृहस्पतिवार के हमले के बाद अधिकारियों को पाइपलाइन बंद करनी पड़ी। सऊदी अरब ने इस हमले के लिए इरान समर्थित इराकी मिलिशिया के ड्रोन को जिम्मेदार ठहराया है।

    मामले से अवगत अधिकारियों ने नाम नहीं जाहिर करने की शर्त पर ‘द एसोसिएटेड प्रेस’ (एपी) को बताया कि एक प्रमुख पंपिंग केंद्र समेत पाइपलाइन को हुए नुकसान की मरम्मत में तीन से पांच सप्ताह लग सकते हैं। एक अधिकारी ने कहा कि मरम्मत के दौरान पाइपलाइन आंशिक रूप से काम कर सकती है, लेकिन वे यह नहीं बता सके कि इसके जरिए कितना तेल भेजा जा सकेगा।

    नॉर्वे की शोध फर्म ‘रिस्टैड एनर्जी’ के सोमवार को जारी विश्लेषण के अनुसार, अगस्त के अंत से पाइपलाइन के जरिए प्रतिदिन औसतन 26 लाख से 40 लाख बैरल तेल भेजा जा रहा था। यदि पाइपलाइन से तेल की आपूर्ति पूरी तरह रुक जाती है तो इतनी मात्रा में तेल बाजार में नहीं पहुंच पाएगा।

    कंपनी ने कहा कि ब्रेंट क्रूड ऑयल (कच्चे तेल) की कीमत बढ़कर 109 अमेरिकी डॉलर प्रति बैरल पहुंचना इस बात का स्पष्ट संकेत है कि बाजार में आपूर्ति में बड़ी कमी की आशंका बढ़ रही है। पाइपलाइन का संचालन करने वाली सऊदी अरब की तेल कंपनी ‘अरामको’ ने टिप्पणी के अनुरोध पर तुरंत कोई जवाब नहीं दिया।

  • ट्रंप बोले- चीन अमेरिका की जासूसी करता है तो हम भी करते हैं, जिनपिंग की यात्रा से पहले बड़ा बयान

    ट्रंप बोले- चीन अमेरिका की जासूसी करता है तो हम भी करते हैं, जिनपिंग की यात्रा से पहले बड़ा बयान


    नई दिल्ली। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग की अगले सप्ताह होने वाली अमेरिका यात्रा से पहले दोनों देशों के रिश्तों और जासूसी को लेकर बड़ा बयान दिया है। ट्रंप ने कहा कि चीन अमेरिका की जासूसी करता है तो संभव है कि अमेरिका भी चीन की जासूसी करता हो। उन्होंने कहा कि शी जिनपिंग के साथ उनके अच्छे संबंध हैं और उनकी आगामी मुलाकात अच्छी रहने की उम्मीद है।

    ट्रंप ने कहा कि उन्हें उम्मीद है कि शी जिनपिंग अगले सप्ताह अमेरिका आएंगे। उन्होंने चीन के साथ अमेरिका के संबंधों को भी अच्छा बताया। ट्रंप के मुताबिक, जिनपिंग के साथ उनकी अच्छी रिलेशनशिप है और उनकी यात्रा के दौरान दोनों देशों के बीच कई अलग-अलग समझौते होने की संभावना है।

    टैरिफ से चीन को हो रहा नुकसान

    अमेरिकी राष्ट्रपति ने चीन से जुड़े व्यापारिक मुद्दों पर भी बात की। उन्होंने कहा कि चीन अमेरिका को काफी टैरिफ दे रहा है। ट्रंप के अनुसार, इन टैरिफ की वजह से चीन को काफी नुकसान हो रहा था और वह ऐसा नहीं करना चाहते थे।

    चीन की कथित जासूसी को लेकर सवाल पूछे जाने पर ट्रंप ने कहा कि किसी ने उनसे कहा था कि चीन अमेरिका की जासूसी करता है। इस पर उन्होंने कहा कि शायद चीन ऐसा करता हो, लेकिन अमेरिका भी चीन की जासूसी करता है।

    एयरपोर्ट पर जिनपिंग का स्वागत कर सकते हैं ट्रंप

    रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, एक वरिष्ठ अमेरिकी अधिकारी ने शुक्रवार को बताया कि ट्रंप अगले सप्ताह वॉशिंगटन डीसी के बाहर जॉइंट बेस एंड्रयूज पहुंचने पर शी जिनपिंग का एयरपोर्ट पर स्वागत करने की योजना बना रहे हैं। अधिकारी ने कहा कि किसी विदेशी नेता का अमेरिकी राष्ट्रपति द्वारा एयरपोर्ट पर स्वागत किया जाना दुर्लभ है।

    अधिकारियों के मुताबिक, शी जिनपिंग की अमेरिका यात्रा के दौरान व्हाइट हाउस में स्वागत समारोह आयोजित किया जाएगा। इसके बाद रोज गार्डन में सैन्य समीक्षा और शाम को स्टेट डिनर का कार्यक्रम भी शामिल होगा।

    डिनर में टेक कंपनियों के CEO भी होंगे शामिल

    अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार, स्टेट डिनर में कई बड़ी टेक कंपनियों के CEO के शामिल होने की संभावना है। इनमें Amazon के जेफ बेजोस, Alphabet के सुंदर पिचाई, OpenAI के सैम ऑल्टमैन, Apple के टिम कुक, Tesla के एलन मस्क, Nvidia के जेनसन हुआंग और Dell Technologies के माइकल डेल शामिल हैं।

    अधिकारियों ने बताया कि जिनपिंग की यात्रा के दौरान अमेरिका और चीन के बीच व्यापार के साथ वैश्विक अर्थव्यवस्था में रेयर अर्थ की आपूर्ति और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा होने की उम्मीद है। यात्रा को दोनों देशों के बीच व्यापार और रणनीतिक संबंधों के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

  • जयशंकर और भूटान के राजा की खास मुलाकात ताशिचो द्जोंग में जलाया आशीर्वाद का दीया 54 मेड इन इंडिया ईवी भी सौंपे

    जयशंकर और भूटान के राजा की खास मुलाकात ताशिचो द्जोंग में जलाया आशीर्वाद का दीया 54 मेड इन इंडिया ईवी भी सौंपे


    नई दिल्ली। विदेश मंत्री डॉ. एस जयशंकर ने गुरुवार को भूटान के राजा जिग्मे खेसर नामग्याल वांगचुक के साथ थिम्पू स्थित प्रसिद्ध ताशिचो द्जोंग में आशीर्वाद का दीया जलाया। इस अवसर पर भारत और भूटान के बीच लंबे समय से चले आ रहे संबंधों की झलक देखने को मिली। कार्यक्रम में भूटान के प्रधानमंत्री शेरिंग तोबगे और विदेश मंत्री डीएन धुंग्येल समेत भारत के मित्रों और भारतीय समुदाय के लोगों ने भी हिस्सा लिया।

    जयशंकर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर कार्यक्रम की जानकारी साझा करते हुए बताया कि ताशिचो द्जोंग में राजा वांगचुक की उपस्थिति में आशीर्वाद का दीया जलाया गया। उनके अनुसार इस अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की 25 साल की जनसेवा को सम्मान दिया गया। जयशंकर ने कहा कि इस दौरान ऐसे योगदान को याद किया गया जिसका प्रभाव दुनिया के अलग अलग हिस्सों में लोगों के जीवन पर पड़ा है।

    इससे पहले विदेश मंत्री जयशंकर ने भूटान के प्रधानमंत्री शेरिंग तोबगे के साथ मुलाकात की। बैठक के दौरान दोनों पक्षों के बीच भारत और भूटान के संबंधों से जुड़े मुद्दों पर चर्चा हुई। जयशंकर ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से भूटानी प्रधानमंत्री को शुभकामनाएं दीं। उन्होंने भारत की ओर से भूटान की प्रगति और समृद्धि के प्रति प्रतिबद्धता भी दोहराई।

    बैठक के बाद जयशंकर ने कहा कि भारत और भूटान के बीच दोस्ती और सहयोग के संबंध विशेष महत्व रखते हैं। दोनों देशों के बीच विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग लंबे समय से जारी है और इसी क्रम में परिवहन तथा स्वास्थ्य क्षेत्र से जुड़े कार्यक्रम भी सामने आए हैं।

    यात्रा के दौरान जयशंकर ने भूटान को 54 मेड इन इंडिया इलेक्ट्रिक वाहन भी सौंपे। इस मौके पर उन्होंने कहा कि भारत ई मोबिलिटी और सतत परिवहन की दिशा में भूटान की प्रगति का समर्थन कर रहा है। इलेक्ट्रिक वाहनों की यह सौगात दोनों देशों के बीच तकनीकी और परिवहन सहयोग से भी जुड़ी है। इससे भूटान में पर्यावरण अनुकूल परिवहन व्यवस्था को बढ़ावा देने के प्रयासों को समर्थन मिलने की उम्मीद है।

    भारत और भूटान के सहयोग का एक अन्य उदाहरण स्वास्थ्य क्षेत्र में भी देखने को मिला। इससे एक दिन पहले बुधवार को जयशंकर और भूटान के विदेश मंत्री ल्योनपो डी एन धुंग्येल ने मोंगर में 65 बेड वाले ग्याल्तसुएन जेत्सुन पेमा मदर एंड चाइल्ड हॉस्पिटल का उद्घाटन किया।

    जयशंकर ने कहा कि यह स्वास्थ्य सुविधा पूर्वी भूटान में गुणवत्तापूर्ण और विशेष मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच को मजबूत करने में मदद करेगी। अस्पताल का उद्घाटन दोनों देशों के बीच स्वास्थ्य क्षेत्र में सहयोग को दर्शाता है।

    थिम्पू में हुए कार्यक्रमों में धार्मिक परंपरा से जुड़े आयोजन से लेकर इलेक्ट्रिक वाहनों और स्वास्थ्य सुविधा तक कई पहल सामने आईं। इन गतिविधियों के जरिए भारत और भूटान के बीच सहयोग के अलग अलग आयाम दिखाई दिए। दोनों देशों के बीच कूटनीतिक संबंधों के साथ विकास और जनहित से जुड़े क्षेत्रों में सहयोग भी लगातार चर्चा में रहा है।

  • भारत-न्यूजीलैंड FTA को संसद की मंजूरी अब लागू होने का इंतजार व्यापार और निवेश को मिल सकता है बड़ा बढ़ावा

    भारत-न्यूजीलैंड FTA को संसद की मंजूरी अब लागू होने का इंतजार व्यापार और निवेश को मिल सकता है बड़ा बढ़ावा


    नई दिल्ली। भारत और न्यूजीलैंड के बीच मुक्त व्यापार समझौता यानी FTA जल्द लागू होने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। न्यूजीलैंड के व्यापार और निवेश मंत्री टॉड मैक्ले ने शुक्रवार को कहा कि दोनों देशों के बीच हुआ यह समझौता अगले एक महीने के भीतर लागू हो सकता है। उनका यह बयान न्यूजीलैंड की संसद की ओर से समझौते को मंजूरी दिए जाने के बाद आया है। अब समझौते को कानून का हिस्सा बनाने और भारत के साथ जरूरी राजनयिक प्रक्रिया पूरी करने का चरण बाकी है।

    आईएएनएस के साथ बातचीत में मैक्ले ने बताया कि न्यूजीलैंड की संसद में FTA को दोनों प्रमुख राजनीतिक दलों का समर्थन मिला। समझौते के पक्ष में 93 सांसदों ने मतदान किया जबकि 26 सांसदों ने इसके खिलाफ वोट दिया। मंत्री के मुताबिक अगला कदम समझौते को कानून का हिस्सा बनाना और भारत के साथ राजनयिक नोट्स का आदान प्रदान करना है। इसके बाद समझौते को लागू करने की प्रक्रिया शुरू होगी। उन्होंने उम्मीद जताई कि यह प्रक्रिया अगले एक महीने के भीतर पूरी हो सकती है।

    मैक्ले ने इस समझौते को भारत और न्यूजीलैंड के बीच व्यापारिक संबंधों के लिए महत्वपूर्ण बताया। उनके अनुसार FTA से दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार को बढ़ावा मिल सकता है। न्यूजीलैंड के प्रधानमंत्री क्रिस्टोफर लक्सन और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पहले ही 2030 तक दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार को दोगुना करने की प्रतिबद्धता जता चुके हैं। मैक्ले ने कहा कि मौजूदा परिस्थितियों में इस लक्ष्य को हासिल करना संभव है।

    समझौते के लागू होने के बाद कई क्षेत्रों में व्यापार के अवसर बढ़ने की उम्मीद जताई जा रही है। न्यूजीलैंड के लिए भारत में उच्च गुणवत्ता वाले खाद्य उत्पादों के निर्यात का अवसर महत्वपूर्ण माना जा रहा है। बागवानी उत्पाद मांस और अन्य खाद्य वस्तुओं को भारतीय बाजार में बढ़ती मांग से लाभ मिलने की उम्मीद है। दूसरी ओर भारतीय कंपनियों के लिए न्यूजीलैंड के बाजार में निर्मित वस्तुओं फार्मास्यूटिकल्स और मशीनरी की पहुंच बेहतर होने की संभावना बताई गई है।

    मैक्ले के अनुसार भारत से न्यूजीलैंड निर्यात होने वाली वस्तुओं के लिए पहले ही दिन हर टैरिफ दर शून्य हो जाएगी। इससे भारतीय निर्यातकों को व्यापार में लागत और बाजार पहुंच से जुड़ी कुछ सुविधाएं मिल सकती हैं। इसके अलावा पर्यटन और आईटी सेवाओं सहित सेवा क्षेत्र को भी इस समझौते से लाभ मिलने की उम्मीद जताई गई है। मंत्री के अनुसार दोनों देशों के सेवा क्षेत्र में विस्तार से रोजगार के अवसर भी बढ़ सकते हैं।

    मंत्री ने यह भी कहा कि वैश्विक स्तर पर टैरिफ नीतियों में बदलाव के बीच FTA कारोबारियों और निर्यातकों को अधिक निश्चितता दे सकता है। उनका कहना है कि कंपनियों के लिए स्थिर व्यापारिक व्यवस्था महत्वपूर्ण होती है ताकि वे लंबे समय की कारोबारी योजनाएं बना सकें।

    इस समझौते को लेकर दोनों देशों की कंपनियों के स्तर पर भी गतिविधियां बढ़ी हैं। न्यूजीलैंड की कंपनियां भारत में कारोबारी अवसर तलाश रही हैं जबकि भारतीय कारोबारी प्रतिनिधिमंडल न्यूजीलैंड में संभावित साझेदारियों पर काम कर रहे हैं। मैक्ले ने भारत यात्रा की योजना पर कहा कि न्यूजीलैंड में होने वाला आगामी चुनाव फिलहाल उनकी प्राथमिकता है। उन्होंने उम्मीद जताई कि चुनाव के बाद वह इस साल के अंत से पहले भारत की यात्रा कर सकेंगे।

  • मस्जिद के पास धमाके से दहला पाकिस्तान नमाज के दौरान हुआ विस्फोट मलबे में तब्दील हुआ बाहरी हिस्सा

    मस्जिद के पास धमाके से दहला पाकिस्तान नमाज के दौरान हुआ विस्फोट मलबे में तब्दील हुआ बाहरी हिस्सा


    नई दिल्ली। पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा प्रांत में शुक्रवार को एक बड़ा विस्फोट हुआ। कोहाट जिले के पुलिस लाइंस क्षेत्र में मस्जिद के पास हुए इस धमाके में कम से कम 15 लोगों की मौत हो गई जबकि 50 से अधिक लोग घायल बताए जा रहे हैं। विस्फोट जुमे की नमाज के दौरान हुआ जिसके बाद इलाके में अफरा तफरी मच गई। धमाके की आवाज सुनते ही आसपास मौजूद लोग सुरक्षित स्थानों की ओर भागने लगे और कुछ ही देर में घटनास्थल पर राहत और बचाव दल पहुंच गए।

    स्थानीय मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक घायलों में कई पुलिसकर्मी भी शामिल हैं। जिला मुख्यालय अस्पताल के मेडिकल सुपरिटेंडेंट ताहिर अली शाह ने बताया कि अस्पताल में 15 शव और 50 से अधिक घायल लोगों को लाया गया है। घायलों का इलाज किया जा रहा है। घटना के बाद अस्पताल में भी सुरक्षा व्यवस्था बढ़ाई गई है।

    पुलिस के अनुसार धमाका मस्जिद के नजदीक हुआ। विस्फोट इतना शक्तिशाली था कि घटनास्थल पर जमीन में बड़ा गड्ढा बन गया। धमाके के कारण मस्जिद का बाहरी हिस्सा बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया और उसकी एक दीवार भी ढह गई। आसपास मौजूद लोगों में भी घटना के बाद डर का माहौल देखा गया।

    विस्फोट के तुरंत बाद पुलिस लाइंस इलाके में अतिरिक्त सुरक्षा बलों को तैनात किया गया। सुरक्षा एजेंसियों ने घटनास्थल को घेर लिया और आसपास के क्षेत्र की जांच शुरू की। राहत और बचाव दल मलबा हटाने के साथ घायलों को अस्पताल पहुंचाने में जुटे रहे। अधिकारियों के अनुसार बचाव अभियान जारी है और विस्फोट की परिस्थितियों की जांच की जा रही है।

    यह घटना ऐसे समय में हुई है जब पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा और बलूचिस्तान जैसे प्रांतों में सुरक्षा से जुड़ी चुनौतियां बनी हुई हैं। हाल के समय में इन इलाकों में पुलिस और सुरक्षा बलों को निशाना बनाकर कई हमले सामने आए हैं। 10 सितंबर को बलूचिस्तान के मस्तुंग जिले के कंक क्षेत्र में एक पुलिस चौकी पर भी हमला हुआ था। इस घटना में एक पुलिस कांस्टेबल की मौत हो गई थी जबकि एक अन्य पुलिसकर्मी गंभीर रूप से घायल हुआ था। इसके बाद सुरक्षा बलों ने इलाके की घेराबंदी कर तलाशी अभियान चलाया था।

    पाकिस्तान इंस्टीट्यूट फॉर कॉन्फ्लिक्ट एंड सिक्योरिटी स्टडीज की मासिक सुरक्षा रिपोर्ट के अनुसार अगस्त में पाकिस्तान में 199 आतंकी हमले दर्ज किए गए। जुलाई में ऐसे हमलों की संख्या 144 बताई गई थी। रिपोर्ट के अनुसार अगस्त में हुए हमलों में 158 लोगों की मौत हुई जबकि 181 लोग घायल हुए। आंकड़े पाकिस्तान में सुरक्षा संबंधी घटनाओं के बढ़ते दबाव की ओर संकेत करते हैं।

    कोहाट में हुए ताजा विस्फोट के बाद सुरक्षा एजेंसियां घटनास्थल की जांच में जुटी हैं। फिलहाल विस्फोट के पीछे की वजह और जिम्मेदार लोगों को लेकर आधिकारिक तौर पर विस्तृत जानकारी सामने नहीं आई है। जांच पूरी होने के बाद ही घटना से जुड़े अन्य पहलुओं की स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

  • WhatsApp पर किसान को सरकारी योजना की जानकारी देगा AI सत्य नडेला ने समझाया भारत में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का भविष्य

    WhatsApp पर किसान को सरकारी योजना की जानकारी देगा AI सत्य नडेला ने समझाया भारत में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का भविष्य


    नई दिल्ली। माइक्रोसॉफ्ट के चेयरमैन और सीईओ सत्य नडेला ने भारत में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI के बढ़ते अवसरों को लेकर अहम बात कही है। उन्होंने तकनीकी क्षेत्र से जुड़े लोगों से यह सुनिश्चित करने का आग्रह किया कि AI का फायदा केवल बड़ी कंपनियों या तकनीकी विशेषज्ञों तक सीमित न रहे बल्कि इसका लाभ भारत के किसानों कारोबारियों और अलग अलग समुदायों तक भी पहुंचे। नडेला के मुताबिक किसी भी सामान्य उपयोग वाली तकनीक की वास्तविक क्षमता इस बात से तय होती है कि उसका इस्तेमाल कितने व्यापक स्तर पर लोग कर सकते हैं और उसके विकास में कितने लोग योगदान दे सकते हैं।

    सिएटल में आयोजित आईडियाज4इंडिया फोरम में बोलते हुए नडेला ने AI के विकास के साथ राष्ट्रीय संप्रभुता ज्ञान पर नियंत्रण और मानव निगरानी जैसे विषयों पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि दुनिया के अलग अलग हिस्सों को इस तकनीक से लाभ मिलना चाहिए और उन्हें इसके विकास में योगदान देने का अवसर भी मिलना चाहिए। उनके मुताबिक AI को व्यापक स्तर पर उपयोगी बनाने के लिए तकनीक की पहुंच के साथ भरोसे और नियंत्रण से जुड़े पहलुओं पर भी ध्यान देना जरूरी है।

    इस कार्यक्रम का आयोजन भारत के महावाणिज्य दूतावास की ओर से इंडियन अमेरिकन टेक CEO फोरम के तहत किया गया था। इसमें भारतीय मूल के 40 से अधिक CEO और CTO शामिल हुए। AI के अलावा क्वांटम कंप्यूटिंग सेमीकंडक्टर एयरोस्पेस क्लाउड इंफ्रास्ट्रक्चर और एंटरप्राइज सॉफ्टवेयर जैसे क्षेत्रों से जुड़े प्रतिनिधियों ने भी इसमें हिस्सा लिया।

    नडेला ने AI की उपयोगिता समझाने के लिए दिल्ली में देखे गए एक प्रदर्शन का उदाहरण भी दिया। इसमें एक भारतीय डेवलपर ने GPT मॉडल को भाषा सेवाओं के साथ जोड़कर ऐसी व्यवस्था तैयार की थी जिसके जरिए ग्रामीण किसान WhatsApp पर स्थानीय भाषा में सरकारी योजना से जुड़ी जानकारी हासिल कर सकता था। यह व्यवस्था किसान को सब्सिडी प्राप्त करने की प्रक्रिया समझाने और जरूरी कागजी कार्रवाई में मदद करने के लिए तैयार की गई थी।

    नडेला के मुताबिक इस उदाहरण की खासियत यह थी कि AI को केवल तकनीकी प्रयोग के तौर पर नहीं बल्कि आम व्यक्ति की जरूरत से जोड़कर देखा गया। यदि ऐसी तकनीक स्थानीय भाषा में उपलब्ध हो और सरकारी योजनाओं तथा सेवाओं की जानकारी समझने में मदद करे तो इससे उन लोगों तक डिजिटल सेवाएं पहुंचाने का रास्ता खुल सकता है जो तकनीकी संसाधनों या भाषा की वजह से कई बार पीछे रह जाते हैं।

    उन्होंने AI से जुड़े व्यापक इकोसिस्टम पर भी विचार करने की जरूरत बताई। उनके अनुसार आने वाले समय में AI का असर इस बात पर निर्भर करेगा कि यह अलग अलग आकार के कारोबारों और अर्थव्यवस्था के विभिन्न क्षेत्रों तक कितनी व्यापकता से पहुंचता है। भारत के लिए यह अवसर केवल AI का इस्तेमाल करने तक सीमित नहीं है बल्कि ऐसे उत्पाद और सेवाएं विकसित करने से भी जुड़ा है जिन्हें दुनिया के दूसरे बाजारों में इस्तेमाल किया जा सके।

    नडेला ने देशों और कंपनियों के लिए अपने ज्ञान पर नियंत्रण बनाए रखने की जरूरत भी बताई। उनका कहना था कि AI के क्षेत्र में भागीदारी ऐसी होनी चाहिए जिससे देश और कारोबार सुरक्षित महसूस करें और किसी दूसरी इकाई की तकनीकी क्षमता पर पूरी तरह निर्भर न हों। साथ ही उन्होंने पेशेवरों से अपनी क्षमताओं पर दोबारा विचार करने की अपील की क्योंकि AI काम करने के तरीकों को तेजी से बदल रहा है।

  • पाकिस्तान का अमेरिकी ड्रोन कंपनी से समझौता, ट्रंप के बेटों से भी जुड़ा है कंपनी का कनेक्शन

    पाकिस्तान का अमेरिकी ड्रोन कंपनी से समझौता, ट्रंप के बेटों से भी जुड़ा है कंपनी का कनेक्शन

    इस्लामाबाद। ऑपरेशन सिंदूर के बाद पाकिस्तान अपनी ड्रोन युद्ध क्षमता को मजबूत करने की दिशा में आगे बढ़ता नजर आ रहा है। रिपोर्ट्स के मुताबिक पाकिस्तानी सेना ने अमेरिकी ड्रोन निर्माता कंपनी ‘पावरस’ के साथ एक समझौता किया है। इस समझौते के तहत फिलहाल ड्रोन की खरीद शामिल है, जबकि आगे चलकर तकनीक हस्तांतरण और संयुक्त रूप से ड्रोन निर्माण की संभावनाओं पर भी काम किया जा सकता है। इस कंपनी का एक महत्वपूर्ण कारोबारी कनेक्शन अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बेटों डोनाल्ड ट्रंप जूनियर और एरिक ट्रंप से भी बताया जा रहा है।

    ड्रोन आयात के साथ घरेलू निर्माण पर जोर

    न्यूज18 की रिपोर्ट के अनुसार, ऑपरेशन सिंदूर के अनुभवों के बाद पाकिस्तानी सेना ड्रोन युद्धक क्षमता बढ़ाने पर जोर दे रही है। उसकी रणनीति केवल विदेशों से ड्रोन खरीदने तक सीमित रहने के बजाय भविष्य में घरेलू स्तर पर इनके निर्माण की क्षमता विकसित करने की बताई जा रही है।

    रिपोर्ट के मुताबिक इस समझौते में दोनों देशों की सरकारों की भी भूमिका हो सकती है। अमेरिका के लिए यह समझौता पाकिस्तान में बढ़ती चीनी रक्षा तकनीक के प्रभाव को संतुलित करने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। वहीं पाकिस्तान भी रक्षा जरूरतों के लिए किसी एक देश पर निर्भरता कम करने की कोशिश कर रहा है। अमेरिकी सहयोग बढ़ने से चीन और तुर्किए पर उसकी रक्षा संबंधी निर्भरता कम करने की संभावना जताई गई है।

    ट्रंप के बेटों से क्या है कंपनी का संबंध?

    पाकिस्तानी सेना ने जिस ड्रोन निर्माता कंपनी पावरस के साथ समझौते की बात सामने आई है, उसका जल्द ही ऑरियस ग्रीनवे होल्डिंग्स के साथ सार्वजनिक विलय होने की जानकारी दी गई है। ऑरियस ग्रीनवे को डोनाल्ड ट्रंप जूनियर और एरिक ट्रंप का समर्थन हासिल है और दोनों ने इस कंपनी में निवेश किया है।

    रिपोर्ट के अनुसार अक्टूबर में प्रस्तावित विलय पूरा होने के बाद ट्रंप के दोनों बेटों की हिस्सेदारी अप्रत्यक्ष रूप से पावरस में भी हो सकती है। इसी वजह से पाकिस्तान के साथ हुए इस संभावित रक्षा समझौते को अमेरिकी राष्ट्रपति के परिवार से जुड़े कारोबारी हितों के संदर्भ में भी देखा जा रहा है।

    पाकिस्तानी सेना ने एमओयू पर नहीं दी जानकारी

    पाकिस्तानी सेना ने ड्रोन कंपनी के साथ किसी एमओयू पर हस्ताक्षर किए जाने की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है। हालांकि, बुधवार को जारी बयान में सेना ने कहा कि पावरस कंपनी के एक प्रतिनिधिमंडल ने फील्ड मार्शल आसिम मुनीर से मुलाकात की है।

    सेना के मुताबिक बैठक में रक्षा, उत्पादन और दीर्घकालिक साझेदारी विकसित करने से जुड़े मुद्दों पर चर्चा हुई। हालांकि, आधिकारिक बयान में समझौते पर हस्ताक्षर किए जाने का उल्लेख नहीं किया गया है।

    ऑपरेशन सिंदूर के बाद बदली रणनीति का दावा

    रिपोर्ट्स के मुताबिक भारतीय खुफिया एजेंसियां पाकिस्तान की युद्ध रणनीति में आए बदलाव को ऑपरेशन सिंदूर के अनुभव से जोड़कर देख रही हैं। भारत और पाकिस्तान के बीच हुए संघर्ष के दौरान भारतीय सुरक्षा बलों ने पाकिस्तान के नूर खान, मुरीदके और बहावलपुर स्थित एयरफील्ड्स को निशाना बनाया था। रिपोर्ट में दावा किया गया है कि पाकिस्तान का एयर डिफेंस इन हमलों को रोकने में प्रभावी नहीं रहा।

    इसी पृष्ठभूमि में पाकिस्तान अपनी ड्रोन क्षमता बढ़ाने के साथ-साथ तकनीकी और उत्पादन क्षमता विकसित करने की दिशा में आगे बढ़ने की कोशिश कर रहा है।

    अमेरिका-पाकिस्तान संबंधों में भी बढ़ी सक्रियता

    इस संभावित समझौते को अमेरिका और पाकिस्तान के बीच रक्षा एवं आर्थिक संबंधों में बढ़ती सक्रियता के संदर्भ में भी देखा जा रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप सार्वजनिक रूप से पाकिस्तान के सेना प्रमुख आसिम मुनीर की प्रशंसा कर चुके हैं। दूसरी ओर पाकिस्तान की ओर से भी अमेरिका के साथ आर्थिक और रक्षा सहयोग बढ़ाने की बात लगातार कही जाती रही है।

    भारत के साथ पाकिस्तान के संबंधों में तनाव के बीच अमेरिका और पाकिस्तान के बीच बढ़ता संपर्क क्षेत्रीय रणनीतिक समीकरणों के लिहाज से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। हालांकि, पावरस के साथ एमओयू की आधिकारिक पुष्टि अभी पाकिस्तानी सेना की ओर से नहीं की गई है।

  • रूस पर 100% टैरिफ की तैयारी, फिर भी यूरेनियम खरीद का रास्ता खुला रखेगा अमेरिका

    रूस पर 100% टैरिफ की तैयारी, फिर भी यूरेनियम खरीद का रास्ता खुला रखेगा अमेरिका

    वाशिंगटन। रूस से तेल और प्राकृतिक गैस खरीदने वाले देशों पर 100 फीसदी तक टैरिफ लगाने की तैयारी कर रहा अमेरिका अपने परमाणु ईंधन हितों को लेकर रूस के साथ कुछ लेनदेन का रास्ता खुला रख रहा है। प्रस्तावित प्रावधानों के तहत भारत और चीन जैसे रूस से बड़े पैमाने पर ऊर्जा खरीदने वाले देश अमेरिकी टैरिफ के दायरे में आ सकते हैं। वहीं रूस से जुड़े कुछ नागरिक परमाणु सहयोग और यूरेनियम आयात को प्रतिबंधों से बाहर रखने का प्रावधान किया गया है।

    यह स्थिति अमेरिका की रूस नीति में ऊर्जा और परमाणु क्षेत्र को लेकर अलग-अलग रुख को सामने लाती है। एक ओर रूस की तेल-गैस आय से जुड़े देशों पर आर्थिक दबाव बढ़ाने की तैयारी है, तो दूसरी ओर अमेरिकी परमाणु ईंधन की जरूरतों को देखते हुए कुछ रूसी परमाणु आपूर्ति के लिए अपवाद रखा गया है।

    100 फीसदी तक टैरिफ लगाने का अधिकार

    अमेरिकी प्रतिनिधि सभा ने बुधवार को ‘लिंडसे ओ. ग्राहम रूस और ईरान पर प्रतिबंध लगाने वाला अधिनियम 2026’ पारित किया। इसके तहत राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को रूस से कच्चा तेल या प्राकृतिक गैस खरीदने वाले देशों पर 100 फीसदी तक टैरिफ लगाने का अधिकार मिलेगा।

    यह विधेयक रूस और ईरान के खिलाफ व्यापक प्रतिबंध पैकेज का हिस्सा है। इसका उद्देश्य रूस से जुड़ी आर्थिक गतिविधियों पर दबाव बढ़ाना है। हालांकि, इसी कानून में परमाणु क्षेत्र से जुड़ी कुछ गतिविधियों के लिए अपवाद भी शामिल किए गए हैं।

    रूस से यूरेनियम पर पूरी तरह प्रतिबंध नहीं

    कानून के सेक्शन 111 में राष्ट्रपति को रूस से यूरेनियम आयात को नियंत्रित करने वाले मौजूदा अमेरिकी कानून की आवश्यकताओं को लागू करने का निर्देश दिया गया है। इसमें विशेष रूप से रूस की सरकारी परमाणु कंपनी रोसाटॉम और उसकी सहायक या उत्तराधिकारी इकाइयों से आने वाले यूरेनियम का उल्लेख है।

    हालांकि, कानून के सेक्शन 114 में कुछ गतिविधियों को प्रतिबंधों से बाहर रखा गया है। इसका मतलब है कि रूस से जुड़े सभी परमाणु ईंधन लेनदेन पर एक साथ और पूरी तरह रोक लगाने का प्रावधान नहीं है।

    सेक्शन 114 में दो अहम अपवाद

    कानून के सेक्शन 114 में दो प्रमुख अपवाद बताए गए हैं। पहला, अमेरिका और रूस के बीच नागरिक परमाणु सहयोग समझौतों के तहत होने वाली गतिविधियों पर संबंधित प्रतिबंध लागू नहीं होंगे। ये समझौते अमेरिकी परमाणु ऊर्जा अधिनियम की धारा 123 के तहत किए जाते हैं।

    दूसरा अपवाद कुछ कम-संवर्धित यूरेनियम (LEU) के आयात से जुड़ा है। ऐसे यूरेनियम का इस्तेमाल परमाणु रिएक्टरों में ईंधन के तौर पर किया जाता है और कुछ आयात मौजूदा अमेरिकी कानून के दायरे में आते हैं। इसके अलावा कुछ मेडिकल आइसोटोप के आयात को भी छूट दी गई है, यदि उनके लिए पहले से अनुमति या छूट जारी की गई हो।

    परमाणु ईंधन में रूस पर अमेरिका की निर्भरता

    रूस से जुड़े परमाणु ईंधन के लिए अपवाद का एक प्रमुख कारण अमेरिका की अपनी ऊर्जा जरूरतें हैं। रूस लंबे समय से यूरेनियम संवर्धन के क्षेत्र में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता रहा है। अमेरिका ने व्यापक आर्थिक क्षेत्रों में रूस पर अपनी निर्भरता कम करने की कोशिश की है, लेकिन परमाणु ईंधन के क्षेत्र में बदलाव अपेक्षाकृत जटिल रहा है।

    उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक अमेरिकी नागरिक परमाणु संयंत्रों ने 2025 में कुल 12.71 मिलियन सेपरेटिव वर्क यूनिट्स (SWU) की एनरिचमेंट सर्विसेज हासिल कीं। इनमें रूस की हिस्सेदारी 3.284 मिलियन SWU रही, जो कुल का करीब 26 फीसदी है।

    अमेरिका के साथ फ्रांस, ब्रिटेन और नीदरलैंड्स भी आपूर्तिकर्ता

    अमेरिका में घरेलू स्तर पर होने वाली यूरेनियम एनरिचमेंट की हिस्सेदारी करीब 23 फीसदी रही। इसके अलावा फ्रांस, ब्रिटेन और नीदरलैंड्स भी अमेरिकी परमाणु उद्योग को एनरिचमेंट सर्विसेज उपलब्ध कराते हैं।

    इन आंकड़ों से स्पष्ट होता है कि परमाणु ईंधन आपूर्ति श्रृंखला में अमेरिका के लिए रूस की भूमिका अब भी महत्वपूर्ण है। ऐसे में रूस पर व्यापक आर्थिक दबाव बढ़ाने के बावजूद अमेरिकी कानून में परमाणु क्षेत्र से जुड़ी कुछ गतिविधियों के लिए अपवाद रखे जाने को उसकी घरेलू परमाणु ईंधन जरूरतों के संदर्भ में देखा जा रहा है।

  • ईरान को ट्रंप का सख्त संदेश…., बोले- अमेरिका की उम्मीदों के मुताबिक होगा समझौता…!

    ईरान को ट्रंप का सख्त संदेश…., बोले- अमेरिका की उम्मीदों के मुताबिक होगा समझौता…!


    वाशिंगटन।
    अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (American President Donald Trump) ने कहा कि ईरान (Iran) वाशिंगटन (Washington) के साथ समझौता करना चाहता है। लेकिन उनकी राय में ईरान अभी इसके लिए तैयार नहीं है। ट्रंप ने संकेत दिया कि कोई भी समझौता अमेरिका की उम्मीदों के मुताबिक होना चाहिए। यह बयान ऐसे समय आया है, जब अगले हफ्ते न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र महासभा के दौरान ट्रंप की खाड़ी सहयोग परिषद यानी जीसीसी (Gulf Cooperation Council- GCC) के सदस्य देशों के नेताओं और विदेश मंत्रियों से मुलाकात होने की उम्मीद है।


    राष्ट्रपति ट्रंप ने क्या कहा?

    ट्रंप ने ‘एबीसी 11’ से बातचीत में कहा, ईरान समझौता करना चाहता है। मेरी राय में, वे तैयार नहीं हैं। हम या तो ऐसा समझौता करेंगे जो अच्छा हो या फिर कोई समझौता नहीं करेंगे। ट्रंप का यह बयान ऐसे समय आया है, जब उनका प्रशासन ईरान के साथ जारी संघर्ष के अगले चरण का आकलन कर रहा है। प्रशासन युद्ध के बाद की रणनीति भी तैयार कर रहा है।

    एक्सिओस ने तीन सूत्रों के हवाले से बताा कि ट्रंप की छह जीसीसी देशों के प्रतिनिधियों से मुलाकात होने की उम्मीद है। इन छह देशों में सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात (यूएई), कतर, बहरीन, कुवैत और ओमान शामिल हैं। प्रस्तावित बैठक में युद्ध के बाद की रणनीति को लेकर वाशिंगटन के विचारों पर चर्चा हो सकती है। संघर्ष में अगले कदमों पर भी बात हो सकती है।

    अमेरिकी विदेश मंत्रालय ने बुधवार को शुरुआती निमंत्रण भेजे थे। इस बैठक में दूसरे अरब और इस्लामी देशों के नेताओं को भी शामिल किया जा सकता है। ट्रंप ने बुधवार को कहा था कि उन्हें उम्मीद है कि वाशिंगटन ‘युद्ध के अंत की ओर’ बढ़ रहा है। उन्होंने यह भी दावा किया था कि अमेरिका को ईरान की ओर से सीधे संदेश मिला है कि तेहरान समझौता करना चाहता है।

    खाड़ी देशों में अमेरिका के कई सैन्य अड्डे हैं। संघर्ष के दौरान इन देशों पर ईरान की ओर से हमले हुए हैं। तेल और प्राकृतिक गैस के निर्यात में रुकावटों का असर क्षेत्र की अर्थव्यवस्थाओं पर भी पड़ा है।


    ट्रंप ने किन सरकारी आदेशों पर हस्ताक्षर किए?

    ट्रंप ने गुरुवार शाम (स्थानीय समय) व्हाइट हाउस में 100 से ज्यादा शिकार करने वालों, मछली पकड़ने वालों और बाहरी गतिविधियों से जुड़े उद्योग (आउटडोर) के प्रतिनिधियों की मेजबानी की। इस दौरान उन्होंने कार्यकारी आदेशों पर हस्ताक्षर किए। इन आदेशों का मकसद शिकार और मछली पकड़ने के अवसरों को बढ़ाना है। कुछ संघीय नियमों में बदलाव करना भी इसका हिस्सा है।

    मछली पकड़ने के नियमों पर बात करते हुए ट्रंप ने राष्ट्रपति के अधिकारों के दायरे का जिक्र किया। ट्रंप ने कहा, इस पद की ताकत बहुत ज्यादा है। मैं मछली पकड़ने पर प्रतिबंध लगा सकता था और जॉनी का कारोबार पूरी तरह बंद कर सकता था। मुझे लगता है कि मैं ऐसा सिर्फ एक या दो दिन के लिए करने जा रहा हूं। जब तक वह मुझे फोन करके नहीं कहता- राष्ट्रपति जी, आप मेरा कारोबार बंद कर रहे हैं।

    ट्रंप ने यह भी कहा कि उन्होंने एक कार्यकारी आदेश पर हस्ताक्षर किया है। इसके तहत लाखों एकड़ संघीय जमीन शिकारियों और मछली पकड़ने वालों के लिए खोली जाएगी। उन्होंने एक और आदेश पर भी हस्ताक्षर किए। इसका उद्देश्य समुद्री मछली पकड़ने वालों, नाव चलाने वालों, चार्टर कैप्टनों और तटीय समुदायों पर लागू संघीय नियमों को कम करना है।


    ट्रंप की शक्ति सीमित करने वाला प्रस्ताव

    इस बीच, अमेरिकी प्रतिनिधि सभा ने मंगलवार को एक प्रस्ताव पर मतदान किया। प्रस्ताव के पक्ष में 220 और विरोध में 204 वोट पड़े। इस प्रस्ताव का उद्देश्य ईरान के खिलाफ सैन्य अभियान जारी रखने के ट्रंप के अधिकार को सीमित करना है। यह प्रस्ताव डेमोक्रेटिक पार्टी के सांसद सेठ मौल्टन ने पेश किया था। इसमें प्रशासन से कहा गया है कि वह ईरान के साथ संघर्ष से अमेरिकी सैनिकों को वापस बुलाए। हालांकि, इसमें कुछ खास रक्षात्मक परिस्थितियों को अपवाद रखा गया है। प्रस्ताव के समर्थन में सात रिपब्लिकन सांसदों ने डेमोक्रेट सांसदों के साथ वोट किया।

    अलग से, प्रतिनिधि सभा ने 2026 का लिंडसे ओ. ग्राहम रूस और ईरान पर प्रतिबंध कानून भी पारित कर दिया। इस कानून के तहत राष्ट्रपति को कुछ शर्तों के आधार पर उन देशों पर 100 प्रतिशत तक टैरिफ लगाने का अधिकार मिल सकता है, जो रूस से तेल और गैस खरीदना जारी रखते हैं।

  • पाकिस्तान में ईंधन संकट… शादियों में सिंगल डिश, मार्केट रात 9 बजे बंद… विदेश यात्रा-सरकारी डिनर पर भी रोक

    पाकिस्तान में ईंधन संकट… शादियों में सिंगल डिश, मार्केट रात 9 बजे बंद… विदेश यात्रा-सरकारी डिनर पर भी रोक


    इस्लामाबाद।
    पाकिस्तान (Pakistan) ने पेट्रोल-डीजल (Petrol-Diesel) बचाने के लिए कई फैसले लागू किए हैं. पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद (Islamabad) में अब सभी दुकानें बाज़ार, किराना स्टोर, ग्रोसरी और जनरल स्टोर, शॉपिंग मॉल पूरे हफ़्ते रात 9 बजे बंद हो जाएंगे. शादी हॉल और मैरिज टेंट रात 10 बजे तक बंद हो जाने चाहिए. रेस्टोरेंट और खाने-पीने की जगहें रात 11 बजे तक बंद हो जानी चाहिए. यही नहीं शादी समारोहों (Wedding Ceremonies) में सिर्फ़ एक ही डिश परोसी जा सकेगी. पाकिस्तान सरकार (Pakistan Government) ने सरकारी डिनर पर भी रोक लगा दी है।

    पाकिस्तान ईरान जंग की वजह से भीषण ईंधन संकट से गुजर रहा है. किफ़ायत के ये नए उपाय फ़िलहाल इस्लामाबाद तक ही सीमित हैं, लेकिन पाकिस्तान की फेडरल सरकार ने राज्यों को कहा है कि वे भी इस उपाय को अपनाएं। यही नहीं पाकिस्तान में अपनाए गए नए उपायों में सरकारी गाड़ियां खरीदने पर पूरी तरह रोक, सरकारी गाड़ियों के लिए ईंधन आवंटन में 50% की कटौती शामिल है।

    खर्चा बचाने के लिए पाकिस्तान ने फ़ेडरल सरकार के कर्मचारियों के विदेश यात्रा करने पर तीन महीने की रोक लगा दी है. अगर मंत्री विदेश यात्रा पर जाएंगे तो उन्हें इकोनॉमी क्लास में ट्रेवल करने को कहा गया है. बता दें कि ईरान युद्ध, इकोनॉमी की खस्ताहालत और कर्जों ने पाकिस्तान को बुरा हाल कर रखा है. इसलिए पाकिस्तान सरकार को ये फैसले लेने पड़े हैं।

    पाकिस्तान ने मार्च में अमेरिका-ईरान युद्ध शुरू होने के बाद इसी तरह के खर्च में कटौती के उपाय लागू किए थे. उन उपायों के तहत इस्लामाबाद ने दो हफ़्ते के लिए स्कूल बंद कर दिए थे, सरकारी अधिकारियों के लिए ईंधन की खपत कम कर दी थी, और ईंधन बचाने व सरकारी खर्च घटाने के मकसद से ऑफ़िस कर्मचारियों को घर से काम करने के लिए कहा था. अब पाकिस्तान एक बार फिर से ऐसे ही उपायों को अपना रहा है।

    पाकिस्तान सरकार के कैबिनेट डिवीज़न ने गुरुवार को इस बारे में नोटिफ़िकेशन जारी किया और ये उपाय तुरंत लागू हो गए. ईंधन की खपत में कटौती और फ़ेडरल अधिकारियों के विदेश यात्रा पर प्रतिबंध समेत कुछ पाबंदियां कम से कम तीन महीने तक लागू रहेंगी।

    PAK के एक अखबार के अनुसार आम लोगों पर असर डालने वाले उपायों में पाकिस्तान सरकार ने निर्देश दिया है कि शादी से जुड़े सभी कार्यक्रमों और आयोजनों में सिर्फ़ एक ही डिश परोसी जाए. सरकार ने कहा है कि कमर्शियल जगहों के लिए जल्दी बंद होने का समय भी तय किया गया है. दुकानों, बाज़ारों, शॉपिंग मॉल, डिपार्टमेंटल और ग्रोसरी स्टोर को रात 9 बजे तक बंद करना होगा।

    शादी-ब्याह के हॉल, टेंट और दूसरे कमर्शियल वेन्यू जहां जश्न वाले कार्यक्रम होते हैं, उन्हें रात 10 बजे तक बंद करना होगा, जबकि रेस्टोरेंट, कैफ़े, खाने-पीने की जगहों और फ़ूड आउटलेट को रात 11 बजे तक बंद करना होगा. टेकअवे और होम-डिलीवरी सेवाओं को इस पाबंदी से छूट दी गई है।


    सरकारी खर्च में 5% की कटौती

    – पाकिस्तान ने कहा है कि चालू वित्त वर्ष के दौरान कर्मचारियों से जुड़े खर्चों को छोड़कर अन्य खर्चों (Non-ERE) में हर महीने 5% की कटौती की जाएगी.
    – यह नियम पाकिस्तान के विदेशी मिशनों और विदेशों में तैनात अधिकारियों पर भी लागू होगा. विकास परियोजनाओं को खर्च में कटौती के दायरे से बाहर रखा गया है.
    – सरकार ने तीन महीने के लिए विदेश दौरों और यात्राओं पर पूरी तरह रोक लगाने की भी घोषणा की है, जिसमें अनिवार्य दौरे भी शामिल हैं.
    – जिन मामलों में विदेश यात्रा ज़रूरी है वहां सरकारी प्रतिनिधियों और अधिकारियों को इकॉनमी क्लास में यात्रा करने का निर्देश दिया गया है.
    – एक रिपोर्ट के मुताबिक, ये पाबंदियां मंत्रियों, सलाहकारों, राज्य मंत्रियों, प्रधानमंत्री के विशेष सहायकों, सांसदों और सरकारी अधिकारियों पर लागू होती हैं.


    सरकारी डिनर और सेमिनार पर भी रोक

    – पाकिस्तान ने सरकारी डिनर पर भी रोक लगा दी है, लेकिन विदेशी प्रतिनिधिमंडलों से जुड़े कार्यक्रमों में इसमें छूट दी गई है. पाकिस्तान ने अपने सरकारी विभागों को निर्देश दिया गया है कि वे शहर के भीतर होने वाली बैठकों को छोड़कर, ज़्यादातर टेलीकॉन्फ़्रेंस के ज़रिए बैठकें करें. सरकार के फ़ंड से होने वाले सरकारी सेमिनार, ट्रेनिंग सेशन और कॉन्फ़्रेंस पर भी रोक लगा दी गई है. अगर ऐसे कार्यक्रम करना ज़रूरी हो, तो विभागों से कहा गया है कि वे बाहरी जगहों पर पैसे खर्च करने के बजाय सरकारी सुविधाओं, जैसे ऑडिटोरियम और कमिटी रूम का इस्तेमाल करें।