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  • 5 मिनट की गूगल मीट में अमेरिकी कंपनी ने 80 लोगों की पूरी भारतीय कस्टमर सर्विस टीम को नौकरी से हटाया

    5 मिनट की गूगल मीट में अमेरिकी कंपनी ने 80 लोगों की पूरी भारतीय कस्टमर सर्विस टीम को नौकरी से हटाया


    वॉशिंगटन।
    अमेरिकी फाइनेंशियल टेक्नोलॉजी कंपनी (American Financial Technology Company) ब्लू वाइन (BlueVine) ने महज पांच मिनट की गूगल मीट कॉल (Google Meet call) में 80 लोगों की अपनी पूरी भारतीय कस्टमर सर्विस टीम (Indian Customer Service Team) को ही निकाल बाहर किया है। आर/इंडिया वर्कप्लेस कम्युनिटी में एक प्रभावित कर्मचारी ने अपना दर्द साझा करते हुए घटना की पूरी जानकारी दी है। कर्मी ने बताया कि छंटनी वाले दिन मैनेजमेंट ने सभी 80 कर्मचारियों को ऑपरेशनल कारणों (कामकाजी वजहों) का हवाला देकर ऑफिस आने के बजाय घर से काम (वर्क फ्रॉम होम) करने के लिए कहा था।

    कर्मचारी अपनी शाम 6:30 बजे की सामान्य शिफ्ट कर रहे थे। शिफ्ट शुरू होने के ठीक 3 घंटे बाद, रात 9:30 बजे अचानक पूरी टीम को एक गूगल मीट लिंक के जरिये वर्चुअल मीटिंग में शामिल होने को कहा गया। मीटिंग शुरू होते ही सीनियर मैनेजमेंट ने बिना किसी पूर्व चेतावनी या नोटिस के सीधे तौर पर कह दिया कि पूरी भारतीय कस्टमर सर्विस टीम को तुरंत प्रभाव से बर्खास्त किया जा रहा है। यह पूरी बातचीत महज 5 मिनट में खत्म हो गई।

    प्रबंधन ने कथित तौर पर प्रदर्शन से जुड़ी समस्याओं (परफॉरमेंस इश्यू) और अपेक्षाओं के अनुरूप आउटपुट न मिलने का हवाला दिया है। प्रभावित कर्मचारियों ने इन आरोपों को नकारा है और सोशल मीडिया पर अपनी निराशा व्यक्त की है।


    डिजिटल बैंक और वित्तीय सेवा प्रदाता है कंपनी

    अमेरिकी कंपनी डिजिटल बैंक और वित्तीय सेवा प्रदाता है। यह अमेरिका में छोटे और मध्यम स्तर के व्यवसायों को बैंकिंग, लोन और पेमेंट जैसी वित्तीय सेवाएं देती है। इस कंपनी का मुख्यालय न्यू जर्सी में है। कंपनी में वैश्विक स्तर पर करीब 1,000 कर्मचारी है। भारत में काम कर रही इसकी पूरी कस्टमर सपोर्ट यूनिट में 80 कर्मचारी थे, जिन्हें एक साथ इस कॉल के जरिये निकाला गया।


    एक्सेस तुरंत ब्लॉक किया :

    जैसे ही 5 मिनट की गूगल मीट खत्म हुई, कर्मचारियों के ऑफिशियल ईमेल, स्लैक और कंपनी के अन्य सभी सिस्टम के एक्सेस तुरंत बंद कर दिए गए। उन्हें अपनी बात रखने का मौका भी नहीं मिला।


    एआई बना छंटनी की वजह :

    कंपनी ने हाल ही में कॉल और ईमेल सपोर्ट के लिए एआई टूल्स को लागू किया था, जिसके बाद इंसानी कॉल्स के वॉल्यूम में 30% तक की भारी गिरावट दर्ज की गई थी। बचे हुए काम को संभालने के लिए कंपनी ने किसी बाहरी थर्ड-पार्टी वेंडर को काम सौंप दिया है, जिससे उन्हें इन पक्के कर्मचारियों की जरूरत नहीं रही। प्रभावित कर्मचारी ने अपनी पोस्ट में लिखा, सभी 80 कर्मचारी। सब चले गए… सिर्फ एक 5 मिनट की कॉल से 80 परिवार प्रभावित हुए हैं। हम इन कॉरपोरेट्स के लिए दिन-रात इतनी मेहनत करते हैं जो हमें कभी भी उठाकर अपनी कंपनी से बाहर फेंक सकते हैं।


    नए भर्ती कर्मियों को कोई हर्जाना नहीं मिलेगा

    प्रभावित टीम में अलग-अलग समय से काम कर रहे लोग शामिल थे। कुछ पुराने अनुभवी कर्मचारी थे, जबकि कुछ नए लोग भी थे जिन्होंने हाल ही में कंपनी जॉइन की थी। रेडिट पोस्ट और रिपोर्ट्स के अनुसार, कंपनी के इस अचानक फैसले में नए भर्ती हुए कर्मचारियों को कोई भी हर्जाना नहीं दिया गया है, जिसने कर्मचारियों की मुश्किलों को और बढ़ा दिया है। जिन नए कर्मचारियों को हाल ही में भर्ती किया गया था, उन्हें बिना किसी नोटिस पीरियड और बिना किसी हर्जाने के तुरंत निकाल दिया गया है।

    कंपनी की पॉलिसी के अनुसार कुछ योग्य या पुराने कर्मचारियों को ही केवल उनके कॉन्ट्रैक्ट के मुताबिक नोटिस पीरियड का भुगतान मिलने की बात कही गई है, लेकिन किसी भी प्रकार के अतिरिक्त 15 दिन के वेतन या मुआवजे का कोई आधिकारिक ऐलान नहीं हुआ है।

    कर्मचारी की पोस्ट पर कई रेड्डिट यूजर्स की प्रतिक्रिया भी आई है। सभी लोग कंपनी की क्रूरता को लेकर प्रबंधन की आलोचना कर रहे हैं। कई लोग उन कर्मचारियों कों सांत्वना दे रहे हैं जिनकी ऐसे अचानक से नौकरी चली गई।

  • फिजी में तेजी से बढ़ रहे एचआईवी के मामले, नेशनल इमरजेंसी घोषित

    फिजी में तेजी से बढ़ रहे एचआईवी के मामले, नेशनल इमरजेंसी घोषित


    सुवा।
    दक्षिण प्रशांत महासागर (South Pacific Ocean) के मेलानेशिया देश फिजी (Fiji) में एचआईवी (HIV) के मामले बेकाबू होने के बाद राष्ट्रीय आपातकाल (National Emergency) घोषित कर दिया गया है। स्थिति यह है कि हर 60 में से एक वयस्क संक्रमित है, जबकि पांच साल पहले यह आंकड़ा 167 में एक था।

    देश में मुफ्त टेस्टिंग, इलाज और रोकथाम के उपाय युद्ध स्तर पर शुरू किए गए हैं। एचआईवी से जुड़ी अन्य स्वास्थ्य समस्याओं के कारण मरने वाले बच्चों की संख्या भी बढ़ रही है। स्वास्थ्य मंत्री एंटोनियो लालाबालावु ने कहा कि मैं औपचारिक रूप से फिजी में राष्ट्रीय एचआईवी आपातकाल की घोषणा कर रहा हूं। यह निर्णय इस महामारी की गंभीरता को देखते हुए लिया गया है। फिलहाल इसकी हमारे देश को सख्त आवश्यकता है।


    भारत कर रहा मदद

    संकट से निबटने के लिए फिजी को भारत, ऑस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड, द ग्लोबल फंड और संयुक्त राष्ट्र से सहायता मिल रही है। अभी करीब 9100 फिजीवासी एचआईवी के साथ जी रहे हैं। यूएनएड्स के अनुसार फिजी में नए संक्रमणों में दुनिया की सबसे तेज़ी से होने वाली बढ़ोतरी देखी जा रही है। देश की आबादी करीब 9 लाख है।


    इस क्षेत्र में ड्रग्स का जाल

    फिजी सहित प्रशांत द्वीप, लैटिन अमेरिका और एशिया से ऑस्ट्रेलिया तथा न्यूजीलैंड में भेजी जाने वाली नशीली दवाओं के लिए ट्रांजिट हब रहे हैं। कोविड-19 महामारी के दौरान आई कमी के बाद मेथमफेटामाइन और कोकीन जैसी लत लगाने वाले ड्रग्स की सप्लाई तेजी से बढ़ी है। यह ड्रग्स अब स्थानीय बाजारों में फैल रही है।


    सर्वाधिक प्रभावित देश

    इस्वातिनी, दक्षिण अफ्रीका, लोसेटो, बोत्सवाना, मोजांबिक, जिम्बावे दुनिया में एचआईवी से सबसे प्रभावित देश हैं।


    भारत में एचआईवी संक्रमण की स्थिति

    – देश में 26 लाख लोग एचआईवी से संक्रमित
    – देश में वयस्कों में एचआईवी का प्रसार 0.2 प्रतिशत है
    – 2010 से अब तक नये वार्षिक एचआईवी संक्रमणों में 44 प्रतिशत की कमी आई
    – भारत में सभी गर्भवती महिलाओं का एचआईवी परीक्षण कराया जाता है
    – प्रतिवर्ष तीन करोड़ निःशुल्क एचआईवी जांच होती है

  • नाइजीरिया में जहरीली शराब का कहर, 48 लोगों की मौत; 100 से ज्यादा अस्पताल में भर्ती, कई की हालत गंभीर

    नाइजीरिया में जहरीली शराब का कहर, 48 लोगों की मौत; 100 से ज्यादा अस्पताल में भर्ती, कई की हालत गंभीर

    नई दिल्ली ।नाइजीरिया के दक्षिणी राज्य ओंडो में जहरीली शराब पीने से 48 लोगों की मौत हो गई है, जबकि 100 से ज्यादा लोग गंभीर रूप से बीमार पड़ गए हैं। प्रभावित लोगों को अस्पतालों में भर्ती कराया गया है और कई मरीजों की हालत नाजुक बताई जा रही है। घटना के बाद इलाके में हड़कंप मच गया है। प्रशासन ने प्रभावित क्षेत्रों में अभियान शुरू कर दिया है और पुलिस मामले की जांच में जुटी है।

    अधिकारियों के मुताबिक, ओंडो राज्य के ओडिगबो और झरेले इलाकों में पिछले कुछ दिनों के दौरान यह घटना सामने आई। बताया गया कि शराब पीने के बाद कई लोगों की तबीयत अचानक बिगड़ने लगी। शुरुआती लक्षणों में आंखों के सामने अंधेरा छाना, उल्टी और सिरदर्द जैसी परेशानियां शामिल थीं। इसके बाद कई लोगों की हालत तेजी से गंभीर हो गई।

    राज्य के स्वास्थ्य आयुक्त बंजी अजाका के अनुसार, जहरीली शराब पीने के बाद 100 से ज्यादा लोगों को अस्पताल में भर्ती कराया गया है। इनमें कई मरीजों की स्थिति गंभीर बनी हुई है। मरीजों को बचाने के लिए डॉक्टरों और स्वास्थ्यकर्मियों की टीमें लगातार उपचार में जुटी हैं। प्रभावित इलाकों में विशेष मेडिकल टीमों की तैनाती भी की गई है, ताकि नए मामलों की पहचान जल्द की जा सके और मरीजों को समय पर इलाज मिल सके।

    घटना के बाद पुलिस ने भी जांच तेज कर दी है। पुलिस के मुताबिक, इस मामले में अब तक 15 लोगों को गिरफ्तार किया गया है। एक व्यक्ति पर जहरीली शराब तैयार करने का आरोप भी लगाया गया है। गिरफ्तार किए गए लोगों से पूछताछ की जा रही है, ताकि शराब तैयार करने और उसकी आपूर्ति से जुड़े पूरे नेटवर्क की जानकारी जुटाई जा सके।

    जांच में शराब में मेथनॉल मिलाए जाने की आशंका सामने आई है। मेथनॉल एक जहरीला रसायन है और इसके सेवन से गंभीर स्वास्थ्य समस्याएं हो सकती हैं। अधिकारियों की जांच इस बात पर भी केंद्रित है कि कथित तौर पर तैयार की गई जहरीली शराब किन-किन इलाकों में पहुंचाई गई और इसके सेवन से कितने लोग प्रभावित हुए हैं।

    स्वास्थ्य विभाग प्रभावित क्षेत्रों में स्थिति पर नजर बनाए हुए है। मेडिकल टीमों को संभावित नए मरीजों की पहचान करने और उन्हें उपचार उपलब्ध कराने के लिए लगाया गया है। वहीं, पुलिस शराब की आपूर्ति और इसे तैयार करने से जुड़े लोगों की भूमिका की जांच कर रही है।

    प्रशासन की ओर से घटना के कारणों और जहरीली शराब की आपूर्ति के दायरे का पता लगाने के लिए कार्रवाई जारी है। गिरफ्तार किए गए लोगों से पूछताछ के आधार पर जांच को आगे बढ़ाया जा रहा है। अधिकारियों का प्रयास है कि प्रभावित लोगों को जल्द से जल्द आवश्यक चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराई जाए और जहरीली शराब की आगे की आपूर्ति को रोका जा सके।

    ओंडो राज्य में हुई इस घटना ने शराब की गुणवत्ता और अवैध रूप से तैयार की जाने वाली शराब से जुड़े जोखिमों को लेकर चिंता बढ़ा दी है। फिलहाल पुलिस और स्वास्थ्य विभाग की टीमें मामले की जांच के साथ-साथ प्रभावित इलाकों में स्थिति को नियंत्रित करने में जुटी हुई हैं।

  • रूस से तेल खरीद पर 100 प्रतिशत तक टैरिफ का प्रावधान, भारत ने राष्ट्रीय हित और ऊर्जा सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी

    रूस से तेल खरीद पर 100 प्रतिशत तक टैरिफ का प्रावधान, भारत ने राष्ट्रीय हित और ऊर्जा सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी

    नई दिल्ली । अमेरिकी संसद में रूस और ईरान से जुड़े प्रतिबंधों वाले विधेयक के पारित होने के बाद भारत ने अपनी ऊर्जा नीति को लेकर स्पष्ट रुख सामने रखा है। भारत सरकार ने कहा है कि देश की ऊर्जा सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है और करीब 1.4 अरब लोगों की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए तेल और गैस की खरीद जारी रखी जाएगी। सरकार के मुताबिक ऊर्जा खरीद से जुड़े फैसले बदलती बाजार परिस्थितियों और उपलब्ध विकल्पों के आधार पर लिए जाएंगे।

    अमेरिकी प्रतिनिधि सभा ने 16 सितंबर को लिंडसे ओ. ग्राहम सैंक्शनिंग रशिया एंड ईरान एक्ट ऑफ 2026 को 262 के मुकाबले 159 वोट से पारित किया। इससे पहले यह विधेयक अमेरिकी सीनेट से भी पारित हो चुका था। अब इसे राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के पास अंतिम मंजूरी के लिए भेजा गया है। विधेयक राष्ट्रपति को रूस से तेल और प्राकृतिक गैस खरीदने वाले प्रमुख देशों पर 100 प्रतिशत तक टैरिफ लगाने का अधिकार देता है। हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि भारत पर 100 प्रतिशत शुल्क अपने आप लागू हो गया है। इसके लिए आगे राष्ट्रपति स्तर पर निर्णय और कानून में दिए गए प्रावधानों के तहत कार्रवाई जरूरी होगी।

    भारत ने कहा है कि वह अपनी ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए अलग-अलग स्रोतों से तेल और गैस खरीदता रहेगा। सरकार का जोर ऊर्जा आपूर्ति में विविधता बनाए रखने और बाजार की परिस्थितियों के अनुसार फैसले लेने पर है। इस रुख का उद्देश्य घरेलू जरूरतों के लिए पर्याप्त और किफायती ऊर्जा उपलब्धता बनाए रखना है।

    भारत सरकार ने यह भी कहा कि हाल के महीनों में इस मुद्दे पर अमेरिकी अधिकारियों के साथ उच्च स्तर पर बातचीत हुई है। भारत ने अपनी चिंताओं से अमेरिका को अवगत कराया है और कहा है कि प्रतिबंधों तथा संभावित टैरिफ का असर केवल द्विपक्षीय व्यापार संबंधों तक सीमित नहीं रह सकता, बल्कि अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार पर भी प्रभाव पड़ सकता है।

    विधेयक में रूस के ऊर्जा क्षेत्र के अलावा उससे जुड़े अन्य क्षेत्रों पर भी प्रतिबंधात्मक प्रावधान शामिल हैं। इसका एक प्रमुख हिस्सा उन देशों को निशाना बनाने से जुड़ा है जो रूस से बड़ी मात्रा में तेल और गैस खरीदते हैं। भारत और चीन ऐसे प्रमुख खरीदारों में शामिल हैं, इसलिए विधेयक के प्रावधानों को लेकर दोनों देशों पर विशेष ध्यान है।

    अमेरिकी प्रतिनिधि सभा में विधेयक पारित होने के बाद अब अगला महत्वपूर्ण चरण राष्ट्रपति की मंजूरी है। राष्ट्रपति की ओर से हस्ताक्षर किए जाने के बाद ही विधेयक कानून का रूप लेगा। इसके बाद इसमें दिए गए टैरिफ संबंधी अधिकारों के इस्तेमाल का रास्ता खुलेगा। कानून के तहत कुछ परिस्थितियों में छूट या अन्य प्रावधानों की भी गुंजाइश रखी गई है।

    भारत ने अपने रुख में यह भी स्पष्ट किया है कि वह अपने व्यापार और आर्थिक हितों की रक्षा के लिए जरूरी कदम उठाएगा। संभावित प्रभावों से निपटने के लिए सरकार व्यापार और उद्योग जगत के साथ मिलकर स्थिति पर नजर रखेगी। फिलहाल भारत का मुख्य जोर ऊर्जा आपूर्ति को सुरक्षित रखने और अलग-अलग स्रोतों से खरीद के विकल्प बनाए रखने पर है।

  • कनाडा और यूरोपीय संघ के बीच बढ़ी रणनीतिक साझेदारी, एसोसिएट सदस्यता प्रस्ताव से अमेरिका के साथ तनाव गहराया

    कनाडा और यूरोपीय संघ के बीच बढ़ी रणनीतिक साझेदारी, एसोसिएट सदस्यता प्रस्ताव से अमेरिका के साथ तनाव गहराया

    नई दिल्ली । कनाडा और यूरोपीय संघ के बीच संबंधों को और मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम सामने आया है। यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने कनाडा के साथ मौजूदा सहयोग को एक नई और अधिक व्यापक साझेदारी में बदलने का प्रस्ताव रखा है। इसी क्रम में कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने यूरोपीय संसद में यूरोप के साथ गहरे संबंधों का समर्थन किया। दोनों पक्षों के बीच चर्चा अब केवल व्यापार तक सीमित नहीं है, बल्कि रक्षा, महत्वपूर्ण खनिज, ऊर्जा, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, तकनीक, अंतरिक्ष और डिजिटल व्यापार जैसे रणनीतिक क्षेत्रों तक पहुंच रही है।

    कनाडा को यूरोपीय संघ का पहला एसोसिएट सदस्य बनाने की संभावना ने इस पूरी पहल को खास बना दिया है। यह पूर्ण सदस्यता से अलग व्यवस्था होगी। इसके तहत कनाडा यूरोपीय संघ के सदस्य देशों की तरह संगठन के सभी फैसलों में मतदान नहीं करेगा, लेकिन कई अहम क्षेत्रों में यूरोपीय देशों के साथ गहरा सहयोग कर सकेगा। मौजूदा समय में यूरोपीय संघ में 27 देश शामिल हैं। एसोसिएट सदस्यता की यह व्यवस्था अभी मौजूदा ढांचे में निर्धारित नहीं है, इसलिए इसे लागू करने के लिए आगे कानूनी और राजनीतिक प्रक्रिया की जरूरत होगी।

    मार्क कार्नी ने यूरोप के साथ संबंधों को आने वाले समय के लिए महत्वपूर्ण बताया है। उनका जोर इस बात पर है कि दोनों पक्ष अपनी रणनीतिक क्षमता और आत्मनिर्भरता को मजबूत करने के लिए साथ काम करें। कनाडा और यूरोपीय संघ के बीच पहले से व्यापारिक संबंध मौजूद हैं, लेकिन अब दोनों पक्ष इन्हें रक्षा और आर्थिक सुरक्षा जैसे क्षेत्रों तक विस्तार देने पर विचार कर रहे हैं। महत्वपूर्ण खनिज, ऊर्जा सुरक्षा, रक्षा औद्योगिक क्षमता, AI और उन्नत तकनीक को इस साझेदारी के प्रमुख क्षेत्र माना जा रहा है।

    कनाडा और यूरोपीय संघ के बीच मौजूदा व्यापारिक समझौता भी इस नई पहल की आधारभूमि है। दोनों पक्ष अब उस ढांचे से आगे बढ़कर अधिक व्यापक आर्थिक और रणनीतिक संबंध विकसित करने की बात कर रहे हैं। कनाडा यूरोपीय रक्षा खरीद व्यवस्था में शामिल होने वाला पहला गैर-यूरोपीय देश भी बन चुका है। इससे रक्षा क्षेत्र में दोनों पक्षों के बीच सहयोग का दायरा बढ़ा है।

    इस घटनाक्रम का असर अमेरिका के साथ कनाडा के संबंधों पर भी दिखाई दे रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कनाडा के संभावित एसोसिएट सदस्य बनने के प्रस्ताव पर कड़ी प्रतिक्रिया दी है। ट्रंप ने संकेत दिया है कि यदि यूरोपीय संघ के साथ यह व्यवस्था अमेरिका के लिए प्रतिकूल मानी गई, तो यूरोप पर भारी टैरिफ लगाए जा सकते हैं। उन्होंने इस प्रस्ताव को लेकर आपत्ति जताई है और इसे अमेरिका के लिए संभावित रूप से शत्रुतापूर्ण कदम बताया है।

    दूसरी ओर, कनाडा यूरोप के साथ अपने संबंधों को व्यापक रणनीतिक साझेदारी के रूप में आगे बढ़ाने पर जोर दे रहा है। कनाडा का फोकस भरोसेमंद साझेदारों के साथ सहयोग बढ़ाने, आर्थिक और सुरक्षा संबंधों को विविध बनाने तथा महत्वपूर्ण क्षेत्रों में अपनी रणनीतिक क्षमता मजबूत करने पर है। ऊर्जा, खनिज, रक्षा, तकनीक और वित्तीय सेवाओं से जुड़े सहयोग पर भी बातचीत आगे बढ़ रही है।

    कनाडा और अमेरिका के बीच टैरिफ तथा व्यापार को लेकर जारी मतभेदों के बीच यूरोप के साथ बढ़ती नजदीकी महत्वपूर्ण है। हालांकि, कनाडा और अमेरिका के पुराने संबंध भी बने हुए हैं। वहीं यूरोपीय संघ के साथ प्रस्तावित नई व्यवस्था का अंतिम स्वरूप अभी तय नहीं हुआ है। एसोसिएट सदस्यता की प्रकृति, अधिकार और जिम्मेदारियां आगे होने वाली बातचीत में निर्धारित होंगी। फिलहाल यह पहल कनाडा और यूरोप के बीच संबंधों को व्यापार से आगे रणनीतिक साझेदारी तक ले जाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम के रूप में सामने आई है।

  • अमेरिकी टैरिफ दबाव के बीच भारत का रुख स्पष्ट, ऊर्जा सुरक्षा से समझौता नहीं, जरूरत के मुताबिक तेल-गैस खरीद जारी

    अमेरिकी टैरिफ दबाव के बीच भारत का रुख स्पष्ट, ऊर्जा सुरक्षा से समझौता नहीं, जरूरत के मुताबिक तेल-गैस खरीद जारी

    नई दिल्ली ।अमेरिकी संसद में रूस और ईरान से जुड़े प्रतिबंधों वाले विधेयक के पारित होने के बाद भारत ने अपनी ऊर्जा नीति को लेकर स्पष्ट रुख सामने रखा है। भारत सरकार ने कहा है कि देश की ऊर्जा सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है और करीब 1.4 अरब लोगों की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए तेल और गैस की खरीद जारी रखी जाएगी। सरकार के मुताबिक ऊर्जा खरीद से जुड़े फैसले बदलती बाजार परिस्थितियों और उपलब्ध विकल्पों के आधार पर लिए जाएंगे।

    अमेरिकी प्रतिनिधि सभा ने 16 सितंबर को लिंडसे ओ. ग्राहम सैंक्शनिंग रशिया एंड ईरान एक्ट ऑफ 2026 को 262 के मुकाबले 159 वोट से पारित किया। इससे पहले यह विधेयक अमेरिकी सीनेट से भी पारित हो चुका था। अब इसे राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के पास अंतिम मंजूरी के लिए भेजा गया है। विधेयक राष्ट्रपति को रूस से तेल और प्राकृतिक गैस खरीदने वाले प्रमुख देशों पर 100 प्रतिशत तक टैरिफ लगाने का अधिकार देता है। हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि भारत पर 100 प्रतिशत शुल्क अपने आप लागू हो गया है। इसके लिए आगे राष्ट्रपति स्तर पर निर्णय और कानून में दिए गए प्रावधानों के तहत कार्रवाई जरूरी होगी।

    भारत ने कहा है कि वह अपनी ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए अलग-अलग स्रोतों से तेल और गैस खरीदता रहेगा। सरकार का जोर ऊर्जा आपूर्ति में विविधता बनाए रखने और बाजार की परिस्थितियों के अनुसार फैसले लेने पर है। इस रुख का उद्देश्य घरेलू जरूरतों के लिए पर्याप्त और किफायती ऊर्जा उपलब्धता बनाए रखना है।

    भारत सरकार ने यह भी कहा कि हाल के महीनों में इस मुद्दे पर अमेरिकी अधिकारियों के साथ उच्च स्तर पर बातचीत हुई है। भारत ने अपनी चिंताओं से अमेरिका को अवगत कराया है और कहा है कि प्रतिबंधों तथा संभावित टैरिफ का असर केवल द्विपक्षीय व्यापार संबंधों तक सीमित नहीं रह सकता, बल्कि अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार पर भी प्रभाव पड़ सकता है।

    विधेयक में रूस के ऊर्जा क्षेत्र के अलावा उससे जुड़े अन्य क्षेत्रों पर भी प्रतिबंधात्मक प्रावधान शामिल हैं। इसका एक प्रमुख हिस्सा उन देशों को निशाना बनाने से जुड़ा है जो रूस से बड़ी मात्रा में तेल और गैस खरीदते हैं। भारत और चीन ऐसे प्रमुख खरीदारों में शामिल हैं, इसलिए विधेयक के प्रावधानों को लेकर दोनों देशों पर विशेष ध्यान है।

    अमेरिकी प्रतिनिधि सभा में विधेयक पारित होने के बाद अब अगला महत्वपूर्ण चरण राष्ट्रपति की मंजूरी है। राष्ट्रपति की ओर से हस्ताक्षर किए जाने के बाद ही विधेयक कानून का रूप लेगा। इसके बाद इसमें दिए गए टैरिफ संबंधी अधिकारों के इस्तेमाल का रास्ता खुलेगा। कानून के तहत कुछ परिस्थितियों में छूट या अन्य प्रावधानों की भी गुंजाइश रखी गई है।

    भारत ने अपने रुख में यह भी स्पष्ट किया है कि वह अपने व्यापार और आर्थिक हितों की रक्षा के लिए जरूरी कदम उठाएगा। संभावित प्रभावों से निपटने के लिए सरकार व्यापार और उद्योग जगत के साथ मिलकर स्थिति पर नजर रखेगी। फिलहाल भारत का मुख्य जोर ऊर्जा आपूर्ति को सुरक्षित रखने और अलग-अलग स्रोतों से खरीद के विकल्प बनाए रखने पर है।

  • उधमपुर में सुरक्षाबलों का बड़ा ऑपरेशन, दो आतंकियों का एनकाउंटर, पाकिस्तानी होने और आतंकी संगठन से जुड़े होने की आशंका

    उधमपुर में सुरक्षाबलों का बड़ा ऑपरेशन, दो आतंकियों का एनकाउंटर, पाकिस्तानी होने और आतंकी संगठन से जुड़े होने की आशंका


    नई दिल्ली ।जम्मू-कश्मीर के उधमपुर जिले में सुरक्षाबलों को आतंकवाद विरोधी अभियान के दौरान बड़ी सफलता मिली है। जिले के ब्रत्तल इलाके में 16 और 17 सितंबर की दरम्यानी रात चलाए गए अभियान के दौरान दो आतंकियों को मुठभेड़ में मार गिराया गया। इलाके में आतंकियों की मौजूदगी की खुफिया सूचना मिलने के बाद सुरक्षाबलों ने लक्षित अभियान शुरू किया था। ऑपरेशन के दौरान दोनों पक्षों के बीच गोलीबारी हुई, जिसमें दोनों आतंकी मारे गए।

    यह कार्रवाई मजालता क्षेत्र में की गई। अभियान के दौरान सुरक्षाबलों को खराब मौसम, कम विजिबिलिटी और कठिन भौगोलिक परिस्थितियों का सामना करना पड़ा। रात के समय इलाके में तलाशी और अभियान चलाना चुनौतीपूर्ण था, लेकिन सुरक्षा बलों ने परिस्थितियों के बीच ऑपरेशन जारी रखा। मुठभेड़ के बाद इलाके में तलाशी अभियान भी चलाया गया, जिसमें हथियार और गोला-बारूद बरामद किए जाने की जानकारी सामने आई है।

    मारे गए दोनों आतंकियों की पहचान अभी पूरी तरह स्पष्ट नहीं हुई है। शुरुआती आशंका है कि दोनों पाकिस्तान के नागरिक हो सकते हैं। इसके साथ ही उनके कश्मीर टाइगर्स या जैश-ए-मोहम्मद से जुड़े होने की भी आशंका जताई गई है। हालांकि, उनकी पहचान और किसी आतंकी संगठन से उनके संबंध की आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है। सुरक्षा एजेंसियां बरामद हथियारों और अन्य सुरागों के आधार पर दोनों की पहचान तथा उनके नेटवर्क से जुड़े पहलुओं की जांच कर रही हैं।

    उधमपुर में हुई इस कार्रवाई के बाद आसपास के इलाकों में भी सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सतर्कता बढ़ाई गई है। सुरक्षाबलों की ओर से अभियान के दौरान सामने आए सभी पहलुओं की जांच की जा रही है। खासतौर पर यह पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है कि दोनों आतंकी इलाके में कब पहुंचे थे और क्या उनके साथ कोई अन्य सहयोगी या स्थानीय संपर्क भी मौजूद था।

    इससे पहले 15 सितंबर को राजौरी में भी सुरक्षाबलों ने आतंकी नेटवर्क से जुड़े लोगों के खिलाफ कार्रवाई की थी। पीर पंजाल क्षेत्र में लश्कर-ए-तैयबा से जुड़े ओवरग्राउंड वर्कर नेटवर्क का खुलासा करते हुए जाकिर हुसैन, मोहम्मद आजम और मोहम्मद मुश्ताक को गिरफ्तार किया गया था। इस कार्रवाई को क्षेत्र में सक्रिय आतंकी नेटवर्क और उसके सहयोगी तंत्र के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान का हिस्सा माना गया।

    जम्मू-कश्मीर में इस साल अब तक 15 आतंकी घटनाओं की जानकारी सामने आई है। इन घटनाओं में 15 आतंकियों के मारे जाने की बात सामने आई है, जबकि दो सुरक्षाकर्मी शहीद हुए हैं। इसके अलावा तीन नागरिकों की भी मौत हुई है। उधमपुर जिले में इस वर्ष सुरक्षाबलों और आतंकियों के बीच दो बार मुठभेड़ हो चुकी है। ताजा ऑपरेशन में दो आतंकियों के मारे जाने के बाद सुरक्षा एजेंसियों ने क्षेत्र में निगरानी और तलाशी गतिविधियां जारी रखी हैं।

  • सऊदी अरब जाने वाले अमेरिकी नागरिकों को अलर्ट, अमेरिका ने जारी की लेवल-3 ट्रैवल एडवाइजरी, यमन सीमा पर सबसे कड़ी चेतावनी

    सऊदी अरब जाने वाले अमेरिकी नागरिकों को अलर्ट, अमेरिका ने जारी की लेवल-3 ट्रैवल एडवाइजरी, यमन सीमा पर सबसे कड़ी चेतावनी


    नई दिल्ली ।पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और सुरक्षा संबंधी चिंताओं के बीच अमेरिका ने सऊदी अरब की यात्रा करने वाले अपने नागरिकों के लिए नई चेतावनी जारी की है। अमेरिकी प्रशासन ने सऊदी अरब के लिए लेवल-3 ट्रैवल एडवाइजरी जारी करते हुए नागरिकों से वहां की यात्रा पर पुनर्विचार करने को कहा है। इस चेतावनी में क्षेत्र में संभावित हमलों, आतंकवाद और सुरक्षा जोखिमों को प्रमुख कारण बताया गया है।

    सऊदी अरब के लिए जारी लेवल-3 चेतावनी का अर्थ है कि अमेरिकी नागरिकों को वहां जाने से पहले सुरक्षा परिस्थितियों पर गंभीरता से विचार करना चाहिए। पश्चिम एशिया में लगातार बने तनाव के बीच अमेरिकी हितों और नागरिकों को संभावित खतरे की आशंका भी जताई गई है। विशेष रूप से ईरानी ड्रोन और मिसाइल हमलों को सुरक्षा चिंता का प्रमुख कारण बताया गया है।

    यमन से लगे सऊदी अरब के कुछ सीमावर्ती इलाकों के लिए इससे भी सख्त लेवल-4 ट्रैवल एडवाइजरी जारी की गई है। इस स्तर की चेतावनी के तहत इन क्षेत्रों की यात्रा नहीं करने की सलाह दी गई है। यमन सीमा के आसपास सुरक्षा स्थिति को अधिक संवेदनशील माना गया है, जहां सशस्त्र समूहों की गतिविधियों और हमलों के कारण खतरा बढ़ने की बात कही गई है।

    चेतावनी में ड्रोन और मिसाइल हमलों के अलावा हवा में नष्ट किए गए हथियारों के मलबे से होने वाले नुकसान की आशंका का भी उल्लेख किया गया है। किसी हमले को रोकने के दौरान गिरने वाला मलबा भी लोगों और संपत्ति के लिए खतरा पैदा कर सकता है। ऐसे में यमन सीमा के आसपास रहने या यात्रा करने वाले अमेरिकी नागरिकों को विशेष सावधानी बरतने की जरूरत बताई गई है।

    सऊदी अरब में सैन्य ठिकानों और ऊर्जा से जुड़े बुनियादी ढांचे के आसपास के क्षेत्रों को भी संवेदनशील माना गया है। अमेरिकी नागरिकों के लिए इन इलाकों में सुरक्षा जोखिम अधिक होने की बात सामने आई है। क्षेत्रीय तनाव के चलते सऊदी अरब में अमेरिकी हितों को निशाना बनाए जाने की आशंका भी व्यक्त की गई है।

    यमन से लगी सीमा के अलावा उड़ानों पर पड़ने वाले असर को भी सुरक्षा स्थिति से जोड़ा गया है। क्षेत्र में तनाव बढ़ने के कारण हवाई सेवाओं में रुकावट की स्थिति पैदा हो सकती है। इसके साथ ही अमेरिकी कर्मचारियों की आवाजाही से संबंधित कुछ प्रतिबंध भी लागू किए गए हैं, जिससे वहां की सुरक्षा परिस्थितियों को लेकर चिंता का स्तर स्पष्ट होता है।

    अमेरिकी चेतावनी ऐसे समय में सामने आई है जब पश्चिम एशिया में तनाव लगातार बना हुआ है। सऊदी अरब को लेकर जारी सलाह में आम इलाकों और विशेष रूप से संवेदनशील सीमावर्ती क्षेत्रों के बीच अलग-अलग स्तर की चेतावनी दी गई है। जहां पूरे सऊदी अरब के लिए यात्रा पर पुनर्विचार करने को कहा गया है, वहीं यमन सीमा से लगे कुछ क्षेत्रों के लिए यात्रा नहीं करने की सलाह दी गई है।

    अमेरिकी नागरिकों को सऊदी अरब की यात्रा की योजना बनाने से पहले मौजूदा सुरक्षा परिस्थितियों पर ध्यान देने और संभावित जोखिमों को समझने की सलाह दी गई है। सैन्य गतिविधियों, ड्रोन और मिसाइल हमलों तथा क्षेत्रीय तनाव के बीच जारी यह चेतावनी सऊदी अरब जाने वाले अमेरिकी यात्रियों के लिए महत्वपूर्ण सुरक्षा संदेश के रूप में सामने आई है।

  • अमेरिका के बाल्टिमोर में रात करीब नौ बजे गोलीबारी, पांच लोगों को लगी गोली; पुलिस ने इलाके को घेरकर जांच शुरू की

    अमेरिका के बाल्टिमोर में रात करीब नौ बजे गोलीबारी, पांच लोगों को लगी गोली; पुलिस ने इलाके को घेरकर जांच शुरू की

    नई दिल्ली ।अमेरिका के मैरीलैंड राज्य के बाल्टिमोर शहर में बुधवार रात गोलीबारी की घटना सामने आई, जिसमें पांच लोगों को गोली लगने की जानकारी है। घटना पूर्वी बाल्टिमोर के 1400 ब्लॉक ईस्ट फायेट स्ट्रीट में हुई। सूचना मिलने के बाद बड़ी संख्या में पुलिस अधिकारी मौके पर पहुंचे और इलाके को घेरकर जांच शुरू कर दी। शुरुआती जानकारी में घायलों की उम्र, उनकी चोटों की गंभीरता और उन्हें किन अस्पतालों में भर्ती कराया गया है, इसकी विस्तृत जानकारी सामने नहीं आई है।

    पुलिस के मुताबिक अधिकारियों को रात करीब नौ बजे गोलीबारी की सूचना मिली थी। सूचना मिलते ही पुलिस टीम घटनास्थल पर पहुंची और आसपास के इलाके को सुरक्षित किया। अधिकारियों ने मौके पर मौजूद स्थिति का जायजा लेने के साथ गोलीबारी से जुड़े साक्ष्य जुटाने की प्रक्रिया शुरू की।

    बाल्टिमोर मेयर कार्यालय के एक प्रवक्ता के अनुसार इस घटना में पांच लोगों को गोली लगी है। हालांकि शुरुआती जानकारी में घायलों की स्थिति को लेकर कोई विस्तृत आधिकारिक जानकारी उपलब्ध नहीं कराई गई थी। पुलिस ने भी घटना में कई लोगों के घायल होने की पुष्टि की है, लेकिन शुरुआती रिपोर्टों में पीड़ितों की स्थिति से जुड़ी पूरी जानकारी सामने नहीं आई थी।

    गोलीबारी के बाद पुलिस ने ईस्ट फायेट स्ट्रीट और कैरोलिन स्ट्रीट को बंद कर दिया। इन सड़कों पर आवाजाही रोककर घटनास्थल को सुरक्षित किया गया। पुलिस अधिकारी इलाके में मौजूद रहे और घटना से जुड़े सबूत जुटाने के साथ पूरे मामले की परिस्थितियों की जांच करते रहे।

    जांच का एक प्रमुख हिस्सा यह पता लगाना है कि गोलीबारी किस वजह से हुई और घटना में कितने लोग शामिल थे। शुरुआती जानकारी के आधार पर किसी संदिग्ध की गिरफ्तारी की पुष्टि नहीं हुई थी। गोलीबारी के पीछे की वजह के बारे में भी पुलिस की ओर से तत्काल कोई विस्तृत जानकारी जारी नहीं की गई।

    घटना के बाद इलाके में पुलिस की मौजूदगी बढ़ गई। अधिकारियों ने घटनास्थल को सुरक्षित रखते हुए जांच की कार्रवाई आगे बढ़ाई। फिलहाल मामले से जुड़ी शुरुआती जानकारी ही सामने आई है और घायलों की स्थिति तथा घटना के अन्य पहलुओं से संबंधित जानकारी बाद में स्पष्ट होने की संभावना है।

    बाल्टिमोर में हुई इस गोलीबारी की घटना के संबंध में पुलिस की जांच जारी है। अधिकारियों की ओर से घटना की परिस्थितियों, संभावित संदिग्धों और गोलीबारी के कारण का पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है। फिलहाल उपलब्ध जानकारी के मुताबिक पांच लोगों को गोली लगी है, जबकि उनकी चोटों की गंभीरता और इलाज से संबंधित विस्तृत जानकारी सामने नहीं आई है।

    घटना के बाद पुलिस ने संबंधित सड़कों को बंद कर दिया और घटनास्थल को सुरक्षित कर जांच शुरू की। शुरुआती जानकारी में यह भी स्पष्ट नहीं हुआ है कि गोलीबारी में कितने लोग शामिल थे। पुलिस की जांच आगे बढ़ने के साथ मामले में घायलों की स्थिति और घटना से जुड़े अन्य तथ्यों की जानकारी सामने आने की उम्मीद है।

  • सर क्रीक-सिंध सीमा पर पाकिस्तान ने बढ़ाई युद्धक क्षमता, विशेष होवरक्राफ्ट किए तैनात

    सर क्रीक-सिंध सीमा पर पाकिस्तान ने बढ़ाई युद्धक क्षमता, विशेष होवरक्राफ्ट किए तैनात


    इस्लामाबाद।
    पाकिस्तान (Pakistan) गुजरात (Gujarat) से सटे सर क्रीक और सिंध (Sir Creek and Sindh) के तटीय इलाकों में अपनी सैन्य तैयारियों को चुपचाप धार दे रहा है। सूत्रों के मुताबिक हाल ही में इस इलाके में पाकिस्तान (Pakistan) ने अपनी एम्फीबियस (जल और थल) युद्धक क्षमताओं को तेजी से मजबूत किया है। दलदली पानी में चलने वाले विशेष होवरक्राफ्ट की तैनाती, नए ड्रोन प्रोजेक्ट और तीनों सेनाओं के बड़े युद्धाभ्यास यह बताते हैं कि पाकिस्तान इस जलीय और दुर्गम इलाके को भारत के खिलाफ एक नए मोर्चे के रूप में विकसित करने की जुगत में है।

    पाकिस्तान ने सर क्रीक के आसपास के बैकवाटर में कई तटीय सुरक्षा अभ्यास चलाए हैं। पिछले साल अगस्त में तुर्की की स्पेशल फोर्सेज और फरवरी में सऊदी अरब की नौसेना के साथ कराची/सिंध तट पर क्लोज-क्वार्टर कॉम्बैट अभियानों का अभ्यास किया गया। पिछले साल जून व अगस्त में पोर्ट कासिम और कराची बंदरगाहों पर गैर-पारंपरिक खतरों से निपटने के लिए पोर्ट सिक्योरिटी और हार्बर डिफेंस अभ्यास भी आयोजित किए।


    पाकिस्तान की हालिया तैयारियां

    पाकिस्तान नौसेना ने इसी महीने उत्तरी अरब सागर में सी-स्पार्क युद्धाभ्यास की शुरुआत की है। इस अभ्यास में युद्धपोत, पनडुब्बियां, विमान और मानव रहित (ड्रोन) प्रणालियां शामिल हैं। अभ्यास का मुख्य फोकस पारंपरिक नौसैनिक युद्ध के साथ-साथ हवाई, जमीनी और साइबर समेत मल्टी-डोमेन ऑपरेशन्स की क्षमता मजबूत करना है, जिसमें पाकिस्तानी सेना और वायुसेना भी भाग ले रही हैं।

    पिछले साल ऑपरेशन सिंदूर के बाद अक्तूबर में पाकिस्तान नौसेना प्रमुख एडमिरल नावेद अशरफ क्रीक के दौरे पर गए। इस दौरान तीन नए 2400 टीडी होवरक्राफ्ट मरीन बेड़े में शामिल किए गए। इस साल जुलाई में पाकिस्तानी नौसेना ने अबाबील नाम से एक एम्फीबियस और ड्रोन एकीकरण प्रशिक्षण चलाया। इसमें मरीन कमांडोज, यूएवी और समुद्र से तट पर उतरने वाले अभ्यासों को आपस में जोड़ा गया।


    पाकिस्तान की मंशा

    सर क्रीक इलाके में पाकिस्तान की इस बहुआयामी तैयारी के पीछे कई सामरिक कारण हैं। पारंपरिक रूप से भारत-पाकिस्तान संघर्ष का केंद्र कश्मीर और पंजाब सीमा रही है। पाकिस्तान गुजरात के कच्छ और सर क्रीक मोर्चे को एक वैकल्पिक या आक्रामक मोर्चे के रूप में विकसित कर रहा है, ताकि भारतीय सेना को कई दिशाओं में उलझाया जा सके। सर क्रीक का इलाका बेहद जटिल, दलदली और जलीय है। जहां भारी टैंक या सेना के पारंपरिक वाहन काम नहीं करते। पाकिस्तान इन भौगोलिक बाधाओं का लाभ उठाकर तेजी से घुसपैठ या हमले की क्षमता परख रहा है। गुजरात सीमा पर हमले के पीछे मनोवैज्ञानिक पहलू भी जुड़े हैं। पाकिस्तान का आकलन है कि इस क्षेत्र में किसी तरह की सफलता भारत के राष्ट्रीय मनोबल को कमजोर कर सकती है।


    भारत की जवाबी तैयारी

    पिछले साल मई में भारत-पाक सैन्य टकराव के दौरान गुजरात मोर्चे पर पाकिस्तानी ड्रोनों की गतिविधियों को भारत ने नाकाम किया था। इसके बाद जून में सेना, भारतीय नौसेना और तटरक्षक बल ने इस क्षेत्र में एक बड़ा संयुक्त अभ्यास किया, जिसमें दलदली क्षेत्र में स्पीड बोट्स, ड्रोन-विरोधी प्रणालियों और अंडरवाटर ऑपरेशन्स का परीक्षण किया गया।


    पाक का हवाई मार्ग भारत के लिए 24 अक्तूबर तक बंद

    पाकिस्तान ने बुधवार को भारतीय विमानों के लिए हवाई क्षेत्र पर लगी रोक को एक और महीने के लिए बढ़ा दिया। पाकिस्तान के विमानपत्तन प्राधिकरण (पीएए) के मुताबिक, अब यह पाबंदी 24 अक्तूबर तक बढ़ाई गई है। यह रोक बुधवार सुबह 10:45 बजे से लागू हुई और 24 अक्तूबर 2026 सुबह 04:59 बजे तक जारी रहेगी। रोक की पिछली समय-सीमा 24 सितंबर को खत्म हो रही है।