Category: International

  • अमेरिका के 50 प्रतिशत नए टैरिफ से बढ़ा व्यापारिक तनाव, कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने बातचीत की पेशकश कर समाधान पर दिया जोर

    अमेरिका के 50 प्रतिशत नए टैरिफ से बढ़ा व्यापारिक तनाव, कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने बातचीत की पेशकश कर समाधान पर दिया जोर

    नई दिल्ली । अमेरिका और कनाडा के बीच व्यापारिक संबंध एक बार फिर तनावपूर्ण दौर में पहुंच गए हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा कनाडा से आयात होने वाले कई उत्पादों पर 50 प्रतिशत अतिरिक्त टैरिफ लगाने की घोषणा के बाद कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा है कि उनका देश इस विवाद का समाधान बातचीत के माध्यम से निकालना चाहता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि कनाडा अपने नागरिकों और उद्योगों के हितों की रक्षा करते हुए अमेरिका के साथ रचनात्मक वार्ता के लिए पूरी तरह तैयार है।

    मार्क कार्नी ने कहा कि अमेरिका की ओर से प्रस्तावित नया शुल्क हाल के वर्षों में अपनाई गई एकतरफा व्यापारिक नीतियों की श्रृंखला का हिस्सा है। उनका कहना है कि यह कदम कनाडा-अमेरिका-मेक्सिको व्यापार समझौते की भावना के विपरीत है। उन्होंने आरोप लगाया कि कनाडा के ऑटोमोबाइल क्षेत्र सहित कई उद्योगों पर लगाए गए शुल्क मुक्त व्यापार व्यवस्था को प्रभावित करते हैं और दोनों देशों के आर्थिक संबंधों पर नकारात्मक असर डाल सकते हैं।

    कनाडाई प्रधानमंत्री ने कहा कि उनकी सरकार ने अब तक हर कदम अंतरराष्ट्रीय व्यापार नियमों और अपने अधिकारों के अनुरूप उठाया है। उन्होंने कहा कि देश के विभिन्न प्रांत, उद्योग, किसान, कारोबारी और श्रमिक इस चुनौती के समय एकजुट होकर अपनी अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए काम कर रहे हैं। सरकार का उद्देश्य घरेलू उद्योगों की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता बनाए रखना और रोजगार पर किसी भी संभावित असर को कम करना है।

    कार्नी ने यह भी कहा कि कनाडा लंबे समय से अमेरिका के साथ व्यापारिक विवादों को सुलझाने के लिए व्यापक प्रस्ताव देता रहा है। उनका मानना है कि बदलते वैश्विक आर्थिक माहौल में दोनों देशों के बीच व्यापार समझौते को आधुनिक जरूरतों के अनुरूप आगे बढ़ाने की आवश्यकता है। उन्होंने उम्मीद जताई कि आने वाले सप्ताहों में दोनों पक्षों के बीच वार्ता तेज होगी और ऐसा समाधान निकलेगा जिससे दोनों देशों को समान लाभ मिल सके।

    उन्होंने दोहराया कि कनाडा मुक्त और निष्पक्ष व्यापार का समर्थक है। इसी सोच के तहत देश ने हाल के समय में कई नई आर्थिक और सुरक्षा साझेदारियां विकसित की हैं। कार्नी के अनुसार, व्यापारिक विवादों का सबसे अधिक असर आम उपभोक्ताओं, कारोबारियों और उद्योगों पर पड़ता है। उनका कहना है कि बढ़े हुए शुल्क से वस्तुओं की कीमतों में वृद्धि हो सकती है, जिससे दोनों देशों के नागरिकों पर आर्थिक बोझ बढ़ने की आशंका है।

    अमेरिका ने अपने फैसले के पीछे यह तर्क दिया है कि कनाडा कुछ अमेरिकी उत्पादों, विशेष रूप से ऑटोमोबाइल, मादक पेय और डेयरी वस्तुओं के साथ भेदभावपूर्ण व्यवहार करता है। इसी आधार पर अमेरिकी प्रशासन ने विशेष कानूनी प्रावधानों का उपयोग करते हुए सैकड़ों कनाडाई उत्पादों पर अतिरिक्त आयात शुल्क लगाने का निर्णय लिया है। हालांकि ऊर्जा, पोटाश, महत्वपूर्ण खनिज, मछली और पहले से अलग शुल्क व्यवस्था के तहत आने वाले कुछ उत्पादों को इस फैसले से बाहर रखा गया है।

    नई शुल्क व्यवस्था के लागू होने के बाद दोनों देशों के बीच व्यापारिक गतिविधियों, आपूर्ति श्रृंखला और विभिन्न उद्योगों पर असर पड़ने की संभावना जताई जा रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि दोनों पक्ष जल्द किसी सहमति पर नहीं पहुंचते हैं तो उत्तरी अमेरिका के व्यापारिक वातावरण में अनिश्चितता बढ़ सकती है। ऐसे समय में कनाडा की ओर से बातचीत की पेशकश इस बात का संकेत है कि वह टकराव के बजाय संवाद के माध्यम से समाधान तलाशने की रणनीति पर आगे बढ़ना चाहता है, जबकि अमेरिका के अगले कदम पर पूरी दुनिया की नजर बनी हुई है।

  • मध्य पूर्व में बढ़ा युद्ध का खतरा, अमेरिका ने फिर किए हवाई हमले, हॉर्मुज से गुजरने वाले जहाजों की सुरक्षा पर दिया बड़ा बयान

    मध्य पूर्व में बढ़ा युद्ध का खतरा, अमेरिका ने फिर किए हवाई हमले, हॉर्मुज से गुजरने वाले जहाजों की सुरक्षा पर दिया बड़ा बयान


    नई दिल्ली ।
    अमेरिका और ईरान के बीच जारी सैन्य तनाव लगातार गहराता जा रहा है। अमेरिका ने लगातार 10वीं रात ईरान के विभिन्न सैन्य ठिकानों पर हवाई हमले किए, जिससे दोनों देशों के बीच टकराव और तेज होने की आशंका बढ़ गई है। अमेरिकी सैन्य अधिकारियों के अनुसार इन अभियानों का उद्देश्य ईरान की उन सैन्य क्षमताओं को कमजोर करना है, जिनका उपयोग क्षेत्र में व्यापारिक जहाजों और अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्गों के लिए खतरा पैदा करने में किया जा सकता है। इस घटनाक्रम ने पूरे मध्य पूर्व की सुरक्षा स्थिति को एक बार फिर वैश्विक चिंता का विषय बना दिया है।

    अमेरिकी सैन्य कमान का कहना है कि हालिया अभियान के दौरान ईरान के सैन्य कमांड सेंटर, मिसाइल और ड्रोन लॉन्च साइट्स, समुद्री ठिकानों तथा वायु रक्षा प्रणालियों को निशाना बनाया गया। अमेरिका का दावा है कि इन हमलों का मकसद स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज से गुजरने वाले अंतरराष्ट्रीय व्यापारिक जहाजों की सुरक्षा सुनिश्चित करना और समुद्री मार्गों पर किसी भी संभावित खतरे को कम करना है। हॉर्मुज जलडमरूमध्य वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिहाज से दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों में शामिल माना जाता है।

    अमेरिका ने यह भी दावा किया कि उसकी सैन्य गतिविधियों के कारण हॉर्मुज से व्यापारिक जहाजों की आवाजाही प्रभावित नहीं हुई है। अधिकारियों के अनुसार पिछले कुछ समय में अमेरिकी बलों ने सैकड़ों वाणिज्यिक जहाजों को सुरक्षित रूप से इस रणनीतिक समुद्री मार्ग से गुजरने में सहायता प्रदान की है। इसके साथ ही करोड़ों बैरल कच्चे तेल की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करने का भी दावा किया गया है। ऊर्जा बाजारों और वैश्विक व्यापार के लिए यह समुद्री मार्ग अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है, इसलिए यहां किसी भी प्रकार का सैन्य तनाव अंतरराष्ट्रीय अर्थव्यवस्था पर व्यापक प्रभाव डाल सकता है।

    इस बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को लेकर कड़ा रुख दोहराया है। उन्होंने कहा कि यदि किसी भी अमेरिकी सैनिक को नुकसान पहुंचाया गया तो उसका जवाब बेहद सख्त और कई गुना अधिक होगा। ट्रंप ने स्पष्ट किया कि अमेरिकी सेना को आवश्यक निर्देश दिए जा चुके हैं और किसी भी हमले का जवाब पूरी ताकत के साथ दिया जाएगा। उनके इस बयान को क्षेत्र में बढ़ते तनाव के बीच एक स्पष्ट रणनीतिक संदेश के रूप में देखा जा रहा है।

    दूसरी ओर ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर ने दावा किया है कि उसने बहरीन और कुवैत में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाते हुए मिसाइल और ड्रोन हमले किए हैं। ईरानी पक्ष का कहना है कि यह कार्रवाई उसके सैन्य अभियान के तहत की गई, हालांकि इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है। दोनों देशों की ओर से लगातार सामने आ रहे सैन्य दावों और जवाबी कार्रवाइयों ने पूरे क्षेत्र में अस्थिरता की आशंका को और बढ़ा दिया है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि यदि दोनों देशों के बीच सैन्य कार्रवाई इसी तरह जारी रही तो इसका असर केवल मध्य पूर्व तक सीमित नहीं रहेगा। वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति, अंतरराष्ट्रीय व्यापार, समुद्री परिवहन और कच्चे तेल की कीमतों पर भी इसका व्यापक प्रभाव पड़ सकता है। ऐसे समय में दुनिया की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि क्या कूटनीतिक प्रयास इस बढ़ते संघर्ष को रोकने में सफल होंगे या फिर क्षेत्र में तनाव और अधिक गंभीर रूप लेगा।

  • रूस-यूक्रेन संघर्ष के बीच भारतीयों की मौत से बढ़ी चिंता, विदेश मंत्रालय ने नागरिकों की सुरक्षा को लेकर कड़ा संदेश दिया

    रूस-यूक्रेन संघर्ष के बीच भारतीयों की मौत से बढ़ी चिंता, विदेश मंत्रालय ने नागरिकों की सुरक्षा को लेकर कड़ा संदेश दिया


    नई दिल्ली ।
    यूक्रेन के ओडेसा बंदरगाह से रवाना हुए एक वाणिज्यिक जहाज पर हुए मिसाइल हमले में चार भारतीय नागरिकों की मौत ने भारत समेत अंतरराष्ट्रीय समुदाय की चिंता बढ़ा दी है। इस घटना में जहाज पर सवार एक अन्य भारतीय गंभीर रूप से घायल हुआ है और उसका अस्पताल में उपचार चल रहा है। हादसे के बाद भारत सरकार ने गहरा शोक व्यक्त करते हुए वाणिज्यिक जहाजों और निर्दोष चालक दल के सदस्यों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की आवश्यकता पर जोर दिया है।

    विदेश मंत्रालय के अनुसार, 19 जुलाई की शाम एमवी गोल्डन लियो नामक व्यापारिक जहाज ओडेसा बंदरगाह से रवाना हुआ था। उस समय जहाज पर कुल 17 चालक दल के सदस्य मौजूद थे, जिनमें पांच भारतीय नागरिक भी शामिल थे। उपलब्ध जानकारी के आधार पर चार भारतीयों की मृत्यु की पुष्टि की गई है, जबकि एक भारतीय गंभीर रूप से घायल है। मंत्रालय ने मृतकों के परिजनों के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त की है और घायल नागरिक के शीघ्र स्वस्थ होने की कामना की है।

    घटना के बाद भारत ने स्पष्ट रूप से कहा कि वाणिज्यिक जहाजों को निशाना बनाना, निर्दोष नागरिक चालक दल के सदस्यों की जान जोखिम में डालना और समुद्री व्यापार की स्वतंत्रता को प्रभावित करना पूरी तरह निंदनीय है। विदेश मंत्रालय ने दोहराया कि अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्गों की सुरक्षा सुनिश्चित करना सभी पक्षों की जिम्मेदारी है और ऐसे हमलों से बचा जाना चाहिए। हालांकि भारत ने अपने आधिकारिक बयान में किसी देश का प्रत्यक्ष रूप से नाम नहीं लिया, लेकिन नागरिक जहाजों की सुरक्षा को लेकर अपना रुख स्पष्ट रखा।

    यूक्रेन की ओर से दावा किया गया है कि गिनी-बिसाऊ के ध्वज वाले इस जहाज पर क्रूज मिसाइल से हमला किया गया। जहाज अंतरराष्ट्रीय समुद्री गलियारे से होकर आगे बढ़ रहा था और इसमें विभिन्न देशों के नागरिक चालक दल के सदस्य मौजूद थे। इस घटना में कुल मृतकों की संख्या बढ़कर 10 बताए जाने की जानकारी भी सामने आई है, जिससे इस हमले की गंभीरता और अधिक बढ़ गई है।

    विदेश मंत्रालय ने बताया कि यूक्रेन स्थित भारतीय दूतावास लगातार स्थानीय प्रशासन और संबंधित अधिकारियों के संपर्क में है। प्रभावित भारतीय नागरिकों तथा उनके परिवारों को हरसंभव सहायता उपलब्ध कराने के प्रयास किए जा रहे हैं। साथ ही आवश्यक कांसुलर सहायता और अन्य औपचारिक प्रक्रियाओं पर भी लगातार काम किया जा रहा है ताकि प्रभावित परिवारों को समय पर सहयोग मिल सके।

    यह घटना रूस और यूक्रेन के बीच जारी संघर्ष के दौरान भारतीय नागरिकों की सुरक्षा को लेकर नई चिंता लेकर आई है। समुद्री व्यापारिक मार्गों पर बढ़ते खतरे का असर केवल क्षेत्रीय सुरक्षा तक सीमित नहीं है, बल्कि वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला, खाद्यान्न परिवहन और अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर भी पड़ सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि नागरिक जहाजों की सुरक्षा सुनिश्चित करना अंतरराष्ट्रीय कानून और समुद्री व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा है।

    भारत ने एक बार फिर सभी पक्षों से संयम बरतने, अंतरराष्ट्रीय मानवीय सिद्धांतों का सम्मान करने और ऐसे कदमों से बचने की अपील की है जिनसे निर्दोष नागरिकों की जान खतरे में पड़े। सरकार ने संकेत दिया है कि भारतीय नागरिकों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है और विदेश मंत्रालय स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए है। आने वाले दिनों में इस घटना से जुड़े तथ्यों और जांच के आधार पर आगे की कूटनीतिक गतिविधियों पर भी सभी की नजर रहेगी।

  • सह-राष्ट्रपति पत्नी के साथ मिलकर ओर्टेगा ने खत्म की चुनावी प्रक्रिया, अंतरराष्ट्रीय समुदाय में भारी चिंता..

    सह-राष्ट्रपति पत्नी के साथ मिलकर ओर्टेगा ने खत्म की चुनावी प्रक्रिया, अंतरराष्ट्रीय समुदाय में भारी चिंता..

    नई दिल्ली। मध्य अमेरिकी देश निकारागुआ के राजनीतिक घटनाक्रम ने वैश्विक स्तर पर हलचल मचा दी है। वर्ष 2007 से लगातार सत्ता पर काबिज राष्ट्रपति डैनियल ओर्टेगा ने देश में भविष्य में किसी भी प्रकार के चुनाव न कराने का एकतरफा ऐलान कर दिया है। इस अप्रत्याशित घोषणा के बाद देश में अगले वर्ष कार्यकाल समाप्त होने पर होने वाली चुनावी प्रक्रिया और किसी भी तरह की राजनीतिक चुनौती की संभावना पूरी तरह समाप्त हो गई है। इस निर्णय से ओर्टेगा और उनकी पत्नी सह-राष्ट्रपति रोसारियो मुरिलो का शासन पर एकछत्र नियंत्रण और अधिक मजबूत हो गया है, जिससे अंतरराष्ट्रीय समुदाय और मानवाधिकार संगठनों में भारी चिंता व्याप्त है।

    सैंडिनिस्टा क्रांति की वर्षगांठ के अवसर पर आयोजित एक समारोह के दौरान दो महीने बाद पहली बार सार्वजनिक रूप से सामने आते हुए ओर्टेगा ने अपने फैसले को स्पष्ट किया। उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि अब देश में सरकार या सत्ता पर कब्जा करने के उद्देश्य से कोई चुनाव आयोजित नहीं किए जाएंगे। उन्होंने विदेशी ताकतों और विपक्षी दलों पर निशाना साधते हुए कहा कि पुरानी व्यवस्था के समर्थक दलों के सत्ता में लौटने के दरवाजे अब पूरी तरह से बंद हो चुके हैं। इस ऐलान के साथ ही ओर्टेगा ने देश के विपक्षी राजनीतिक दलों के अस्तित्व और लोकतांत्रिक प्रक्रिया को लगभग समाप्त कर दिया है।

    निकारागुआ का राजनीतिक परिदृश्य पिछले कई वर्षों से लगातार विवादों और मानवाधिकार उल्लंघनों के घेरे में रहा है। वर्ष 2021 में हुए पिछले राष्ट्रपति चुनाव के दौरान भी ओर्टेगा प्रशासन पर प्रमुख विपक्षी नेताओं, उद्योगपतियों और आलोचकों को हिरासत में लेने के गंभीर आरोप लगे थे। इसके बाद हाल के वर्षों में किए गए संवैधानिक संशोधनों के जरिए राष्ट्रपति का कार्यकाल बढ़ाने के साथ-साथ ओर्टेगा की पत्नी को सह-राष्ट्रपति का आधिकारिक पद प्रदान किया गया था। वर्तमान में यह दंपति देश के सशस्त्र बलों, न्यायपालिका और संपूर्ण प्रशासनिक व्यवस्था पर पूर्ण नियंत्रण रखता है।

    संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद सहित कई अंतरराष्ट्रीय निकायों ने निकारागुआ सरकार की कार्यशैली पर कड़ा ऐतराज जताया है। वैश्विक संगठनों का मानना है कि देश को पूर्णतः एक दमनकारी शासन तंत्र में बदल दिया गया है, जहां नागरिक स्वतंत्रताओं और मानवाधिकारों का लगातार उल्लंघन हो रहा है। वर्ष 2018 के भीषण सरकार-विरोधी प्रदर्शनों के बाद से ही निकारागुआ में राजनीतिक अस्थिरता बनी हुई है। चुनाव रद्द करने के इस ताजा ऐलान ने देश के लोकतांत्रिक ढांचे को पूरी तरह से ध्वस्त कर दिया है, जिसकी चौतरफा आलोचना की जा रही है।

  • दुनिया में एयर एंबुलेंस के दौर में पाकिस्तान की पुरानी योजना पर छिड़ी नई बहस..

    दुनिया में एयर एंबुलेंस के दौर में पाकिस्तान की पुरानी योजना पर छिड़ी नई बहस..


    नई दिल्ली।
    सोशल मीडिया के विभिन्न डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर इन दिनों पाकिस्तान के कराची शहर से जुड़ा एक वीडियो तेजी से प्रसारित हो रहा है। इस वीडियो में बुनियादी मेडिकल किट से लैस साइकिल एंबुलेंस व्यवस्था को दिखाया गया है, जिसे लेकर इंटरनेट पर विविध प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं। आधुनिक दौर में जहां विश्व स्तर पर एयर एंबुलेंस और ड्रोन आधारित आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाओं का विस्तार हो रहा है, वहीं इस तरह की पहल को लेकर कई यूजर्स पाकिस्तान की वर्तमान स्वास्थ्य प्रणाली और बुनियादी ढांचे पर सवाल उठा रहे हैं। हालांकि, इस वायरल वीडियो के पीछे का वास्तविक संदर्भ और उद्देश्य काफी अलग है।

    यह वायरल सामग्री कोई नई नीति या हालिया लॉन्च नहीं है, बल्कि मई 2025 में पाकिस्तान की आपातकालीन सेवा ‘रेस्क्यू 1122’ द्वारा शुरू की गई एक पुरानी प्रायोगिक परियोजना का हिस्सा है। कराची जैसे घने और अत्यधिक आबादी वाले महानगर में कई ऐसे क्षेत्र हैं जहां अत्यंत संकरी गलियां हैं और अक्सर भारी ट्रैफिक जाम की स्थिति बनी रहती है। ऐसे इलाकों में आपात स्थिति के दौरान पारंपरिक बड़े एंबुलेंस वाहनों का समय पर पहुंचना बेहद चुनौतीपूर्ण हो जाता है। इसी भौगोलिक और यातायात संबंधी बाधा को दूर करने के लिए इस वैकल्पिक त्वरित प्रतिक्रिया मॉडल को तैयार किया गया था।

    तकनीकी रूप से यह साइकिल केवल एक सामान्य सवारी साधन नहीं है, बल्कि इसे आपातकालीन प्राथमिक उपचार के अनुकूल विशेष रूप से तैयार किया गया है। इसमें ऑक्सीजन मास्क, नेबुलाइजर, ब्लड शुगर जांचने के उपकरण, प्राथमिक चिकित्सा किट और अन्य जरूरी जीवनरक्षक दवाएं रखी जाती हैं। प्रशिक्षित स्वयंसेवक, जिनमें विशेष रूप से प्रशिक्षित महिला कार्यकर्ता भी शामिल हैं, भीड़भाड़ वाले मार्गों से आसानी से निकलकर मरीज तक त्वरित पहुंच बनाते हैं। इनका मुख्य कार्य मुख्य एंबुलेंस के आगमन तक मरीज को शुरुआती महत्वपूर्ण मिनटों में प्राथमिक चिकित्सा प्रदान कर स्थिति को स्थिर बनाए रखना है।

    वैश्विक स्तर पर भी देखें तो कई विकसित और विकासशील देशों के पुराने शहरों तथा सघन शहरी क्षेत्रों में साइकिल या मोटरसाइकिल आधारित प्रथम प्रतिक्रिया टीमों का उपयोग एक स्थापित मानक प्रक्रिया के रूप में किया जाता है। कराची की यह व्यवस्था सामान्य एंबुलेंस सेवा का विकल्प न होकर, केवल एक सहायक आपातकालीन प्रणाली है। सोशल मीडिया पर बिना पूरे संदर्भ के शुरू हुई इस बहस के बाद अब कई विश्लेषकों का मानना है कि शहरी यातायात की जटिलताओं को देखते हुए स्थानीय स्तर पर जान बचाने के लिए उठाए गए व्यावहारिक कदमों को केवल व्यंग्य के दृष्टिकोण से देखना उचित नहीं है।

  • ब्रिटेन के 59वें प्रधानमंत्री बने एंडी बर्नहैम… किंग चार्ल्स III ने दिया सरकार बनाने का न्यौता

    ब्रिटेन के 59वें प्रधानमंत्री बने एंडी बर्नहैम… किंग चार्ल्स III ने दिया सरकार बनाने का न्यौता


    लंदन।
    लेबर पार्टी (Labour Party) के सांसद एंडी बर्नहैम (Andy Burnham) सोमवार को आधिकारिक तौर पर ब्रिटेन के 59वें प्रधानमंत्री (Britain’s 59th Prime Minister) बन गए हैं। बकिंघम पैलेस (Buckingham Palace) में किंग चार्ल्स तृतीय (King Charles III) के साथ एक निजी मुलाकात के दौरान उन्हें सरकार बनाने का न्यौता दिया गया। इससे पहले सर कीर स्टार्मर ने प्रधानमंत्री पद से अपना इस्तीफा सम्राट को सौंप दिया, जिसे उन्होंने स्वीकार कर लिया।

    बकिंघम पैलेस द्वारा जारी एक बयान में कहा गया कि सर कीर स्टार्मर ने आज सुबह सम्राट से मुलाकात की और प्रधानमंत्री के पद से अपना इस्तीफा सौंप दिया, जिसे महामहिम ने सहर्ष स्वीकार कर लिया। बर्नहैम पिछले एक दशक में ब्रिटेन के सातवें प्रधानमंत्री बने हैं। सबसे खास बात है एंडी बर्नहैम का अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ रिश्ता। बर्नहैम, ट्रंप के मुखर आलोचक रहे हैं। अब प्रधानमंत्री बनने के बाद वह ट्रंप के साथ कैसे निभाते हैं, यह देखने वाली बात होगी।


    चुनौती होंगे ट्रंप के साथ संबंध

    बर्नहैम के सामने शुरुआती विदेश नीति की चुनौतियों में से एक अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ संबंधों को संभालना होगा। बर्नहैम के पद संभालने से पहले ट्रंप ने उन्हें बेहद उदारवादी बताया था। बर्नहैम अमेरिकी राष्ट्रपति के मुखर आलोचक रहे हैं। उन्होंने अमेरिका की अत्यधिक ध्रुवीकृत राजनीति को ब्रिटेन में लाने के खिलाफ चेतावनी दी है। हालांकि उनकी इस आलोचना से अमेरिका के साथ ब्रिटेन के पुराने और मजबूत संबंधों पर असर पड़ने की संभावना कम है।


    हर तरफ से दबाव

    घरेलू मोर्चे पर, बर्नहैम को एक ऐसी सरकार विरासत में मिली है जिसे हर तरफ से राजनैतिक दबाव का सामना करना पड़ रहा है। उनका आगमन वर्षों की राजनैतिक अस्थिरता के बीच हुआ है, जिस दौरान बोरिस जॉनसन, लिज़ ट्रस, ऋषि सुनक और कीर स्टार्मर एक के बाद एक सत्ता में आए। ऐसे में श्री बर्नहैम के सामने न केवल अपने एजेंडे को पूरा करने की चुनौती है, बल्कि मतदाताओं को यह विश्वास दिलाने की भी ज़िम्मेदारी है कि उनकी सरकार वह स्थिरता प्रदान करेगी जो उनके कई पूर्ववर्तियों के समय नहीं दिख सकी।


    ब्रिटेन को बड़े बदलाव की जरूरत

    ग्रेटर मैनचेस्टर के पूर्व मेयर रहे बर्नहैम को ‘किंग ऑफ द नॉर्थ’ (उत्तर का राजा) के रूप में जाना जाता है। वह पहले भी लेबर पार्टी की सरकारों में काम कर चुके हैं। बर्नहैम लंबे समय से लंदन से बाहर के क्षेत्रों में अधिक निवेश और प्रशासनिक शक्तियां देने की वकालत करते रहे हैं। उम्मीद है कि बर्नहैम प्रधानमंत्री के रूप में अपने पहले संबोधन में इस बात पर जोर देंगे कि ब्रिटेन को एक बड़े बदलाव की जरूरत है, जिसमें आर्थिक विकास को पुनर्जीवित करने, संघर्ष कर रहे सार्वजनिक क्षेत्रों में सुधार करने और ‘ब्रिटेन को फिर से सुदृढ़ करने’ की योजनाएं शामिल हैं।

    यह भी एक रिकॉर्ड
    स्टार्मर के इस्तीफे के साथ ही ब्रिटेन में जीवित पूर्व प्रधानमंत्रियों की संख्या रिकॉर्ड नौ हो गई है। इनमें जॉन मेजर, टोनी ब्लेयर, गॉर्डन ब्राउन, डेविड कैमरन, थेरेसा मे, बोरिस जॉनसन, लिज़ ट्रस, ऋषि सुनक और कीर स्टार्मर शामिल हैं। उम्मीद है कि ये सभी नेता इस साल लंदन के सेनोटैफ में आयोजित होने वाली ‘रिमेंब्रेंस संडे’ सेवा में एक साथ नजर आएंगे।

  • US में फिर ट्रेड वॉर…. ट्रंप ने किया कनाड़ा से आयातित सामान पर 50% टैरिफ लगाने का ऐलान

    US में फिर ट्रेड वॉर…. ट्रंप ने किया कनाड़ा से आयातित सामान पर 50% टैरिफ लगाने का ऐलान


    वाशिंगटन।
    अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (American President Donald Trump) ने एक बार फिर ट्रेड वॉर (Trade War) शुरू कर दिया है। ट्रंप ने सोमवार को पड़ोसी देश कनाडा (Canada) से आयातित अधिकांश सामानों पर 50 फीसदी टैरिफ (50 Percent Tariff) लगाने का ऐलान किया है। अमेरिकी प्रशासन का आरोप है कि कनाडा अमेरिकी ऑटोमोबाइल, शराब और डेयरी उत्पादों के साथ भेदभावपूर्ण व्यवहार कर रहा है। अब ट्रंप के इस कदम से दोनों पड़ोसी देशों के बीच तनाव बढ़ने की आशंका जताई जा रही है।

    रिपोर्ट्स के मुताबिक डोनाल्ड ट्रंप ने टैरिफ बढ़ाने से जुड़े तीन फैसलों को मंजूरी दी है। अमेरिका के ट्रेड एक्ट ऑफ 1930 की धारा 338 के तहत फैसला तत्काल प्रभाव से ही लागू कर दिया गया है। ट्रंप प्रशासन से जुड़े एक अधिकारी ने फैसले के पीछे की वजह बताते हुए कहा कि चीन के अलावा कनाडा ही उन चुनिंदा देशों में शामिल था, जिसने ट्रंप द्वारा पहले लगाए गए टैरिफ का जवाब जवाबी शुल्क से दिया था। प्रशासन का कहना है कि इस तरह के रवैये के लिए कनाडा की जवाबदेही तय की जानी जरूरी थी।

    बता दें कि ट्रेड एक्ट की धारा 338 को लागू कर ट्रंप पहले भी कई देशों पर इस तरह के शुल्क लगा चुके हैं। इसके बाद बीते साल डेमोक्रेटिक सांसदों ने इस सेक्शन को खत्म करने का प्रस्ताव रखा था। सांसदों ने चेतावनी दी थी कि ट्रंप इस कानून का इस्तेमाल एकतरफा टैरिफ लगाने के लिए कर सकते हैं। इससे अमेरिकी अर्थव्यवस्था अस्थिर हो सकती है।


    किन चीजों पर पड़ेगा असर?

    ट्रंप के नए आदेश के तहत कनाडा के कुछ अहम सेक्टरों को बढ़े हुए टैरिफ से राहत दी गई है। ऊर्जा उत्पाद, पोटाश, मछली और दुर्लभ खनिजों को 50 फीसदी टैरिफ के दायरे से बाहर रखा गया है। हालांकि यह 50 फीसदी टैरिफ उन कई उत्पादों पर भी लागू होगा जिन्हें पहले ‘यूनाइटेड स्टेट्स-मेक्सिको-कनाडा एग्रीमेंट’ (USMCA) के तहत सीमा शुल्क से सुरक्षा मिली हुई थी। 2020 में लागू हुआ यह व्यापार समझौता हाल ही में खत्म हुआ था। फिलहाल इसे दोबारा लागू करने के लिए बातचीत जारी है।


    बढ़ सकती है महंगाई, रिश्तों में खटास

    अमेरिका और कनाडा की अर्थव्यवस्थाएं एक-दूसरे से गहराई से जुड़ी हुई हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि इस कदम से दोनों देशों के बीच अनिश्चितता बढ़ेगी। अमेरिका में महंगाई बढ़ने का खतरा मंडराने लगा है। वहीं दोनों देशों के बीच कूटनीतिक संबंधों में भी दरार आ सकती है। यही नहीं ट्रंप आने वाले दिनों में टैरिफ और बढ़ाने की योजना बना रहे हैं। मामले की जानकारी देने वाले अधिकारी ने बताया कि राष्ट्रपति ट्रंप ने अपने सहयोगियों को कनाडा पर अतिरिक्त शुल्क लगाने की संभावना तलाशने का निर्देश दिया है।

  • यूक्रेन में ओडेशा पोर्ट के पास जहाज पर मिसाइल अटैक, 4 भारतीय क्रू मेंबर्स की मौत

    यूक्रेन में ओडेशा पोर्ट के पास जहाज पर मिसाइल अटैक, 4 भारतीय क्रू मेंबर्स की मौत

    कीव। समंदर (Ocean) में एक जहाज (Ship) पर हुए हमले (Attack) में 4 भारतीय क्रू मेंबर्स (Four Indian crew members) की मौत हो गई है. जबकि एक भारतीय गंभीर रूप से घायल हो गया है. भारत के विदेश मंत्रालय ने इस घटना की जानकारी दी है. ये हमला MV गोल्डन लियो (MV Golden Leo) नाम के जहाज पर हुआ है. ये जहाज यूक्रेन के ओडेशा बंदरगाह (Odesha Port) से निकल रहा था. तभी इस पर हमला हुआ।

    भारत के विदेश मंत्रालय के अनुसार 19 जुलाई 2026 को यूक्रेन के ओडेसा बंदरगाह से निकलते समय MV GOLDEN LEO नाम के एक जहाज पर हमला हुआ. यूक्रेन का दावा है कि ये हमला रूस ने मिसाइलों से किया है. घटना के समय जहाज़ पर 17 क्रू सदस्य मौजूद थे, जिनमें 5 भारतीय नागरिक भी शामिल थे. इनमें से 4 भारतीयों की मौत हो गई है. जबकि एक भारतीय गंभीर हालत में अस्पताल में भर्ती है।

    विदेश मंत्रालय ने कहा कि यूक्रेन में हमारा मिशन स्थिति पर बारीकी से नज़र रख रहा है और प्रभावित लोगों को हर संभव मदद पहुंचाने की पूरी कोशिश कर रहा है. विदेश मंत्रालय हम मारे गए भारतीय नागरिकों के परिवारों के प्रति अपनी गहरी संवेदना व्यक्त करते हैं और घायल भारतीय नागरिक के जल्द और पूरी तरह ठीक होने की कामना करते हैं।

    विदेश मंत्रालय ने कहा कि भारत ऐसे हमलों की निंदा करता है और दोहराता है कि कमर्शियल शिपिंग को निशाना बनाना, निर्दोष आम नागरिकों (क्रू सदस्यों) की जान जोखिम में डालना या नेविगेशन और व्यापार की आज़ादी में बाधा डालना निंदनीय है और ऐसा नहीं किया जाना चाहिए।

    ये जहाज यूक्रेन के ओडेसा बंदरगाह से अनाज लेकर निकल रहा था. तभी इसे निशाना बनाया गया. विदेश मंत्रालय ने बताया कि ये जहाज पश्चिम अफ्रीकी देश गिनी-बिसाऊ के झंडे के तहत समुद्र में चल रहा था।


    मरने वालों में एक शख्स केरल का

    भारतीयों में मरने वालों में एक शख्स केरल का था. 26 साल के इस शख्स का नाम अखिल जोयन है. जो कासरगोड ज़िले के वेल्लारिक्कुंडु के रहने वाले जोयन और सैली का इकलौता बेटा था।

    बलाल ग्राम पंचायत के वेल्लारिक्कुंडु वार्ड के सदस्य शोबी जोसेफ ने बताया कि परिवार को सोमवार शाम शिपिंग कंपनी से अखिल की मौत के बारे में एक ईमेल मिला।


    जहाज पर मिसाइलों से हुआ हमला

    यूक्रेन के अधिकारियों के मुताबिक रविवार को ओडेसा से निकलने के कुछ ही देर बाद मक्का ले जा रहे कार्गो जहाज़ ‘गोल्डन लियो’ पर रूस की तीन क्रूज़ मिसाइलें गिरीं। यूक्रेन की नौसेना ने बताया कि हमले के बाद जहाज़ में आग लग गई. समाचार एजेंसी रॉयटर्स के अनुसार तट के पास एक जहाज़ से घना धुआं उठता देखा गया, जिसकी पहचान बाद में ‘गोल्डन लियो’ के तौर पर हुई. इसके क्रू में भारत और सीरिया के सदस्य शामिल थे।

    यूक्रेन के समुद्री बंदरगाह प्राधिकरण ने बताया कि रात भर खोज और बचाव अभियान चलता रहा. इस हमले में नौ क्रू सदस्य और एक समुद्री पायलट की मौत हो गई, जबकि 17 क्रू सदस्यों में से आठ को बचा लिया गया.

    LSEG के शिपिंग डेटा के अनुसार, ‘गोल्डन लियो’ मुंबई स्थित ‘ओशन ग्रेस शिपिंग लिमिटेड’ का है. इस जहाज़ का प्रबंधन ‘फ्रेंड्स शिपिंग कंपनी SA’ करती है।


    काला सागर फिर से लड़ाई का मुख्य केंद्र बना

    यह हमला ऐसे समय में हुआ है जब रूस और यूक्रेन काला सागर और आज़ोव सागर में सैन्य गतिविधियां तेज़ कर रहे हैं, जिससे कमर्शियल शिपिंग और अनाज के निर्यात पर लगातार खतरा बढ़ रहा है।

    2022 में रूस के यूक्रेन पर बड़े पैमाने पर हमले के बाद काला सागर इस संघर्ष के सबसे ज़्यादा विवादित इलाकों में से एक बन गया. हालांकि अंतरराष्ट्रीय समझौतों से कुछ समय के लिए अनाज के निर्यात को फिर से शुरू करने और ग्लोबल फ़ूड मार्केट पर दबाव कम करने में मदद मिली थी, लेकिन फिर से शुरू हुई लड़ाई ने दुनिया के सबसे व्यस्त एग्रीकल्चरल शिपिंग रूट में से एक को फिर से बाधित कर दिया है।

    यूक्रेन ने रूस के एनर्जी इंफ़्रास्ट्रक्चर और तेल टैंकरों को लगातार निशाना बनाया है, जबकि रूस ने यूक्रेन के बंदरगाहों, फ़्यूल फ़ैसिलिटीज़ और कार्गो जहाज़ों पर मिसाइल और ड्रोन हमले तेज़ कर दिए हैं।

  • ईरान पर अमेरिका के हमले जारी…. बंदर अब्बास समेत कई शहरों में हुए धमाके

    ईरान पर अमेरिका के हमले जारी…. बंदर अब्बास समेत कई शहरों में हुए धमाके


    नई दिल्ली।
    अमेरिका (America) ने ईरान (Iran) पर फिर एक बार हमले शुरू कर दिए हैं, जिससे पहले से ही तनावपूर्ण हालातों के बीच मिडिल ईस्ट (Middle East) में अस्थिरता और बढ़ गई है. सेंटकॉम (यू.एस. सेंट्रल कमांड) ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर जारी बयान में कहा कि यह ऑपरेशन कमांडर-इन-चीफ (Operation Commander-in-Chief) के निर्देश पर किया गया।

    इन हमलों का उद्देश्य ईरान की उन सैन्य क्षमताओं को कमजोर करना बताया गया है, जिनका इस्तेमाल कथित तौर पर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में कमर्शियल जहाजों को धमकाने और उन पर हमला करने के लिए किया जाता रहा है. बता दें, स्ट्रेट ऑफ होर्मुज दुनिया के सबसे अहम ऊर्जा परिवहन मार्गों में से एक माना जाता है।

    वहीं, ऑपरेशन शुरू होने के कुछ ही समय बाद, ईरान के स्टेट टेलीविजन ने दक्षिणी बंदरगाह शहर बंदर अब्बास में धमाके की सूचना दी. इसके अलावा, ईरान की मेहर न्यूज एजेंसी ने बताया कि देश के दक्षिणी तट पर बुशहर न्यूक्लियर पावर प्लांट के पास एयर डिफेंस सिस्टम एक्टिवेट कर दिए गए थे, जो हमलों के दौरान सेना के हाई अलर्ट पर होने का संकेत देते हैं.

    ईरानी मीडिया ने दक्षिण-पूर्वी शहरों चाबहार और कोनारक में भी कई धमाकों की खबर दी है. अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते टकराव के बीच यह तनाव बढ़ने की ताजा घटना बताई जा रही है।

    इस बीच, ईरान के स्टेट ब्रॉडकास्टर आईआरआईबी ने एक्स पर एक पोस्ट शेयर की है, जिसमें स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज में हुई एक घटना के लिए सीधे तौर पर अमेरिका को जिम्मेदार ठहराया गया है. एक जलते हुए जहाज की तस्वीर शेयर करते हुए आईआरआईबी ने लिखा, ‘अमेरिका पर भरोसा करने का अंजाम, कुछ घंटे पहले स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज का नजारा.’

  • हर्मुज जलडमरूमध्य से परमाणु ठिकानों तक बढ़ा युद्ध का दायरा, अमेरिकी हमलों और ईरानी जवाबी कार्रवाई ने क्षेत्रीय सुरक्षा पर गहरा संकट खड़ा किया

    हर्मुज जलडमरूमध्य से परमाणु ठिकानों तक बढ़ा युद्ध का दायरा, अमेरिकी हमलों और ईरानी जवाबी कार्रवाई ने क्षेत्रीय सुरक्षा पर गहरा संकट खड़ा किया

    नई दिल्ली । अमेरिका और ईरान के बीच जारी सैन्य संघर्ष अब ऐसे दौर में पहुंच गया है, जहां इसका असर केवल दोनों देशों तक सीमित नहीं रह गया है। पश्चिम एशिया के कई देशों में बढ़ती सैन्य गतिविधियों, समुद्री मार्गों पर सुरक्षा चुनौतियों और लगातार हो रहे हमलों ने पूरे क्षेत्र की स्थिरता को लेकर नई चिंताएं पैदा कर दी हैं। सोमवार को ओमान के तट के पास स्थित रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण हर्मुज जलडमरूमध्य के निकट एक व्यावसायिक जहाज में आग लगने की घटना ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ऊर्जा आपूर्ति और समुद्री व्यापार को लेकर आशंकाओं को और बढ़ा दिया।

    हर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्गों में गिना जाता है, जहां से बड़ी मात्रा में कच्चे तेल और गैस की आपूर्ति होती है। ऐसे संवेदनशील क्षेत्र में जहाज में आग लगने की घटना के बाद विभिन्न देशों ने हालात पर नजर तेज कर दी है। फिलहाल आग लगने के कारणों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन क्षेत्र में पहले से जारी सैन्य तनाव के बीच इस घटना को गंभीर सुरक्षा चुनौती के रूप में देखा जा रहा है।

    इसी दौरान अमेरिका ने ईरान के भीतर अपने सैन्य अभियान को और तेज कर दिया है। अमेरिकी कार्रवाई लगातार कई दिनों से जारी है और इसमें केवल सैन्य ठिकानों ही नहीं बल्कि रणनीतिक महत्व वाले ढांचों को भी निशाना बनाए जाने की जानकारी सामने आई है। अमेरिकी पक्ष का कहना है कि इन अभियानों का उद्देश्य उन क्षमताओं को कमजोर करना है जिनका उपयोग क्षेत्र में व्यावसायिक जहाजों, सैन्य प्रतिष्ठानों और नागरिक हितों के खिलाफ किया जा सकता है।

    संघर्ष के बीच ईरान के परमाणु कार्यक्रम से जुड़ी एक निर्माणाधीन परियोजना भी हमलों की चपेट में आ गई। ईरान के परमाणु ऊर्जा संगठन ने दावा किया कि दक्षिण-पश्चिम क्षेत्र में स्थित दारखोविन परमाणु ऊर्जा परियोजना की निर्माण साइट पर हवाई हमला किया गया। हालांकि संबंधित अंतरराष्ट्रीय परमाणु एजेंसी ने स्पष्ट किया कि यह परियोजना अभी शुरुआती चरण में थी और वहां किसी प्रकार की परमाणु सामग्री मौजूद नहीं थी। इसके बावजूद इस घटना ने परमाणु सुरक्षा और क्षेत्रीय तनाव को लेकर नई बहस छेड़ दी है।

    सैन्य टकराव का असर अमेरिकी सैनिकों पर भी लगातार दिखाई दे रहा है। हालिया घटनाओं में एक अमेरिकी सैनिक की मौत की पुष्टि हुई है। बताया गया कि यह घटना इराक में एक ड्रोन अभियान के दौरान नियंत्रित विस्फोट के समय हुई। इससे पहले भी संघर्ष के दौरान कई अमेरिकी सैनिकों के हताहत होने की खबरें सामने आ चुकी हैं, जिससे अभियान की गंभीरता और जोखिम दोनों बढ़ गए हैं।

    अमेरिकी हमलों के जवाब में ईरान ने भी अपनी सैन्य प्रतिक्रिया तेज कर दी है। जॉर्डन, कुवैत और आसपास के क्षेत्रों की ओर मिसाइलों तथा ड्रोन से हमले किए जाने की जानकारी सामने आई है। जॉर्डन ने दावा किया कि उसकी वायु रक्षा प्रणाली ने कई मिसाइलों को बीच रास्ते में ही नष्ट कर दिया। वहीं कुवैत में ऊर्जा और जल आपूर्ति से जुड़े एक महत्वपूर्ण संयंत्र पर लगातार दूसरे दिन हमला होने से वहां आवश्यक सेवाओं को लेकर चिंता बढ़ गई है।

    इन घटनाओं के बाद खाड़ी क्षेत्र के देशों ने भी कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। गल्फ कोऑपरेशन काउंसिल ने नागरिक बुनियादी ढांचे पर हमलों की निंदा करते हुए क्षेत्र में बढ़ते तनाव पर गंभीर चिंता जताई है। संगठन का कहना है कि बिजली, पानी और अन्य नागरिक सुविधाओं को निशाना बनाए जाने से मानवीय संकट गहरा सकता है। लगातार बढ़ती सैन्य कार्रवाई, समुद्री सुरक्षा पर मंडराता खतरा और क्षेत्रीय देशों की सक्रिय भागीदारी यह संकेत दे रही है कि यदि हालात जल्द नहीं संभले तो पश्चिम एशिया का यह संघर्ष व्यापक अंतरराष्ट्रीय चुनौती का रूप ले सकता है।