Category: International

  • बलूचिस्तान में फिर दहला पाकिस्तान, फौजियों से भरी ट्रेन पर आत्मघाती हमला; BLA ने ली जिम्मेदारी

    बलूचिस्तान में फिर दहला पाकिस्तान, फौजियों से भरी ट्रेन पर आत्मघाती हमला; BLA ने ली जिम्मेदारी



    नई दिल्ली। पाकिस्तान के बलूचिस्तान प्रांत में एक बार फिर बड़ा आतंकी हमला हुआ है। क्वेटा के चमन फाटक इलाके के पास सैन्य कर्मियों को लेकर जा रही ट्रेन को आत्मघाती हमलावर ने निशाना बनाया। धमाका इतना भीषण था कि ट्रेन के कई डिब्बे पटरी से उतर गए और मौके पर आग लग गई। शुरुआती रिपोर्ट्स के मुताबिक हमले में 23 से ज्यादा सुरक्षाकर्मियों की मौत हुई है, जबकि करीब 47 लोग घायल बताए जा रहे हैं।

    बताया जा रहा है कि हमला उस समय हुआ जब पाकिस्तान के सेना प्रमुख असीम मुनीर ईरान दौरे से लौटे थे। इसी वजह से इस घटना को पाकिस्तान की सुरक्षा व्यवस्था पर बड़ा सवाल माना जा रहा है। स्थानीय मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार ट्रेन क्वेटा कैंट की ओर जा रही थी और उसमें पाकिस्तान की सुरक्षा एजेंसियों के जवान सवार थे।

    धमाके के बाद इलाके में अफरा-तफरी मच गई। चश्मदीदों के मुताबिक विस्फोट के तुरंत बाद फायरिंग की आवाजें भी सुनाई दीं। सुरक्षा बलों ने पूरे इलाके को घेर लिया है और जांच एजेंसियां हमले की पड़ताल में जुट गई हैं।

    इस हमले की जिम्मेदारी बलोच लिबरेशन आर्मी (BLA) ने ली है। संगठन के प्रवक्ता जीयंद बलोच ने बयान जारी कर कहा कि BLA की फिदायीन यूनिट ‘मजीद ब्रिगेड’ ने इस ऑपरेशन को अंजाम दिया। संगठन का दावा है कि ट्रेन में पाकिस्तानी सेना और सुरक्षा एजेंसियों के जवान सफर कर रहे थे, जिन्हें निशाना बनाया गया।

    विशेषज्ञ इस हमले को ‘जाफर एक्सप्रेस 2.0’ बता रहे हैं। दरअसल मार्च 2025 में भी बलोचिस्तान में जाफर एक्सप्रेस को IED ब्लास्ट कर हाईजैक किया गया था, जिसमें बड़ी संख्या में पाकिस्तानी सैनिक फंसे थे। उस घटना ने पाकिस्तान की सुरक्षा व्यवस्था की पोल खोल दी थी।

    हाल के दिनों में पाकिस्तानी सेना बलोचिस्तान में BLA के खिलाफ लगातार ऑपरेशन चला रही थी। माना जा रहा है कि यह हमला उसी कार्रवाई का बदला हो सकता है। घटना के बाद पूरे इलाके में हाई अलर्ट घोषित कर दिया गया है और रेलवे रूट पर सुरक्षा बढ़ा दी गई है।

  • ट्रंप का बड़ा दावा: ईरान से डील लगभग तय, खुल सकता है होर्मुज़ स्ट्रेट; मिडिल ईस्ट में शांति की उम्मीद बढ़ी

    ट्रंप का बड़ा दावा: ईरान से डील लगभग तय, खुल सकता है होर्मुज़ स्ट्रेट; मिडिल ईस्ट में शांति की उम्मीद बढ़ी

    नई दिल्ली। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के साथ संभावित शांति समझौते को लेकर बड़ा दावा करते हुए कहा है कि दोनों देशों के बीच डील “काफी हद तक तय” हो चुकी है और जल्द ही इसे अंतिम रूप दिया जा सकता है। ट्रंप ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर कहा कि अमेरिका, ईरान और मध्य-पूर्व के कई सहयोगी देशों के बीच शांति को लेकर महत्वपूर्ण बातचीत हुई है। उन्होंने बताया कि इस प्रस्तावित समझौते में होर्मुज़ स्ट्रेट को दोबारा पूरी तरह खोलने का मुद्दा भी शामिल है, जिससे वैश्विक तेल और गैस सप्लाई पर पड़ा दबाव कम हो सकता है। ट्रंप ने यह भी कहा कि उनकी इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू  से फोन पर सकारात्मक बातचीत हुई है।
    हालांकि ट्रंप ने समझौते की पूरी डिटेल साझा नहीं की, लेकिन साफ कहा कि किसी भी डील के तहत ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने से पूरी तरह रोका जाएगा। दूसरी ओर ईरान ने संकेत दिए हैं कि बातचीत में कुछ नरमी जरूर आई है, लेकिन अभी मुख्य मुद्दों पर सहमति नहीं बनी है। ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता Esmail Baghaei ने कहा कि अमेरिका और ईरान के बीच 14 बिंदुओं वाले एक ढांचे पर चर्चा चल रही है, जिसे अगले 30 से 60 दिनों में अंतिम समझौते की दिशा में आगे बढ़ाया जाएगा। उन्होंने अमेरिका पर विरोधाभासी बयान देने का आरोप भी लगाया।
    गौरतलब है कि 28 फरवरी को अमेरिका और इजराइल द्वारा ईरान पर बड़े हमलों के बाद पूरे मिडिल ईस्ट में तनाव बढ़ गया था, जिसके जवाब में ईरान ने इजराइल और अमेरिकी सहयोगी देशों को निशाना बनाया था। अप्रैल की शुरुआत में युद्धविराम के बाद से दोनों देशों के बीच बैकडोर बातचीत जारी है और अब ट्रंप के ताजा बयान ने संभावित डील और होर्मुज़ स्ट्रेट खुलने की अटकलों को और तेज कर दिया है।
  • ईरान ने अमेरिका को दिखाए तेवर, बोला- ‘एनरिच्ड यूरेनियम नहीं देंगे’; ट्रम्प के दावे पर बढ़ा नया विवाद

    ईरान ने अमेरिका को दिखाए तेवर, बोला- ‘एनरिच्ड यूरेनियम नहीं देंगे’; ट्रम्प के दावे पर बढ़ा नया विवाद



    नई दिल्ली। अमेरिका और ईरान के बीच संभावित शांति समझौते की चर्चाओं के बीच नया विवाद खड़ा हो गया है। ईरान ने साफ कर दिया है कि वह अपना हाईली एनरिच्ड यूरेनियम अमेरिका को नहीं सौंपेगा। एक वरिष्ठ ईरानी अधिकारी ने कहा कि मौजूदा शुरुआती डील में परमाणु कार्यक्रम शामिल ही नहीं है और इस मुद्दे पर अंतिम बातचीत बाद में होगी। इससे पहले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने दावा किया था कि ईरान को संवर्धित यूरेनियम रखने नहीं दिया जाएगा और अमेरिका इसे अपने नियंत्रण में लेगा। ट्रम्प के बयान के बाद अमेरिकी मीडिया में खबरें आई थीं कि तेहरान यूरेनियम भंडार छोड़ने पर राजी हो गया है, लेकिन अब ईरान ने इन दावों को खारिज कर दिया है।

    एक रिपोर्ट के मुताबिक ईरानी सूत्रों ने कहा कि अभी जो समझौते की रूपरेखा तैयार हो रही है, उसका मुख्य फोकस युद्धविराम, क्षेत्रीय तनाव कम करना और होर्मुज जलडमरूमध्य में सामान्य आवाजाही बहाल करना है। परमाणु कार्यक्रम पर कोई अंतिम फैसला नहीं लिया गया है। ईरान का कहना है कि उसका परमाणु अधिकार राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा मुद्दा है और उस पर किसी दबाव में समझौता नहीं किया जाएगा।

    इस बीच ईरानी न्यूज एजेंसियों ने दावा किया है कि संभावित समझौते में अमेरिका और इजराइल की ओर से ईरान या उसके समर्थक संगठनों पर हमला नहीं करने की शर्त शामिल हो सकती है। बदले में ईरान भी पहले हमला नहीं करने का भरोसा देगा। वहीं इजराइल और हिजबुल्लाह के बीच जारी तनाव को कम करने की कोशिशें भी समझौते का हिस्सा बताई जा रही हैं।

    अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो ने संकेत दिए हैं कि अगले कुछ घंटों में ईरान को लेकर बड़ा ऐलान हो सकता है। नई दिल्ली में विदेश मंत्री एस जयशंकर के साथ प्रेस कॉन्फ्रेंस में रूबियो ने कहा कि अमेरिका की प्राथमिकता यह सुनिश्चित करना है कि ईरान कभी परमाणु हथियार हासिल न कर सके। उन्होंने होर्मुज स्ट्रेट में जहाजों को निशाना बनाने की ईरानी धमकियों को अंतरराष्ट्रीय कानून के खिलाफ बताया।

    उधर ईरान के राष्ट्रपति मसूद पजशकियान ने स्पष्ट कर दिया कि देश की सुरक्षा और परमाणु नीति से जुड़े बड़े फैसले सुप्रीम लीडर की मंजूरी के बिना नहीं लिए जाएंगे। वहीं रूस ने भी अमेरिका पर वार्ता को बढ़ा-चढ़ाकर पेश करने का आरोप लगाया है। रूसी अधिकारी मिखाइल उल्यानोव ने कहा कि बातचीत की असली स्थिति उतनी सकारात्मक नहीं है, जितनी दिखाई जा रही है।

    मिडिल ईस्ट में जारी तनाव का असर दुनियाभर की अर्थव्यवस्था पर भी दिखाई देने लगा है। कच्चे तेल की कीमतों में उछाल के चलते भारत में पेट्रोल-डीजल फिर महंगे हो गए हैं। वहीं होर्मुज स्ट्रेट में जहाजों की आवाजाही सामान्य होने की उम्मीद के बीच दुनिया की नजर अब अमेरिका-ईरान वार्ता पर टिकी हुई है

  • होर्मुज स्ट्रेट खुलने के संकेत, दुनिया को मिल सकती है राहत; 30 दिन में सामान्य हो सकती है जहाजों की आवाजाही

    होर्मुज स्ट्रेट खुलने के संकेत, दुनिया को मिल सकती है राहत; 30 दिन में सामान्य हो सकती है जहाजों की आवाजाही




    नई दिल्ली। मध्य पूर्व में जारी तनाव के बीच दुनिया के लिए राहत भरी खबर सामने आई है। ईरान ने
    संकेत दिए हैं कि रणनीतिक रूप से बेहद अहम होर्मुज जलडमरूमध्य जल्द फिर से सामान्य रूप से खुल सकता है। ईरानी मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, अगले 30 दिनों के भीतर होर्मुज स्ट्रेट से जहाजों की आवाजाही युद्ध से पहले के स्तर पर लौट सकती है। इससे वैश्विक तेल और गैस संकट कम होने की उम्मीद बढ़ गई है।

    ईरान की समाचार एजेंसी तस्नीम ने वरिष्ठ अधिकारियों के हवाले से बताया कि अमेरिका और ईरान के बीच चल रही वार्ताओं में सकारात्मक प्रगति हुई है। यदि बातचीत सफल रहती है तो होर्मुज जलडमरूमध्य से तेल टैंकर और कारोबारी जहाज पहले की तरह गुजरने लगेंगे। यही समुद्री मार्ग दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण ऊर्जा रूट्स में से एक माना जाता है, जहां से खाड़ी देशों का बड़ा हिस्सा तेल और गैस दुनिया तक पहुंचाता है।

    28 फरवरी को ईरान पर इजरायल और अमेरिका के हमलों के बाद इस क्षेत्र में तनाव बढ़ गया था। इसके बाद ईरान ने होर्मुज स्ट्रेट से जहाजों की आवाजाही पर कड़ी निगरानी और कई स्तरों पर रोक लगा दी थी। अमेरिकी नौसेना की गतिविधियों और क्षेत्रीय सैन्य तनाव के कारण इस समुद्री रूट पर ट्रैफिक लगभग ठप हो गया था। युद्ध से पहले यहां से रोजाना 125 से 140 जहाज गुजरते थे, लेकिन संघर्ष के बाद संख्या में भारी गिरावट आ गई।

    इसका असर दुनिया के कई देशों, खासकर भारत और एशियाई देशों पर पड़ा, जो खाड़ी देशों से तेल और गैस आयात पर निर्भर हैं। ऊर्जा आपूर्ति प्रभावित होने से अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में उछाल देखने को मिला और कई देशों में ईंधन संकट की आशंका बढ़ गई।

    भारत दौरे पर आए अमेरिकी विदेश मंत्री Marco Rubio ने भी संकेत दिए कि ईरान के साथ बातचीत में बड़ी सफलता मिल सकती है। वहीं अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने दावा किया कि अमेरिका और ईरान समझौते के बेहद करीब हैं। उनके मुताबिक, यदि यह डील फाइनल होती है तो युद्ध खत्म होने के साथ होर्मुज स्ट्रेट भी पूरी तरह खुल जाएगा।

    रिपोर्ट्स के अनुसार, पाकिस्तान इस पूरे समझौते में मध्यस्थ की भूमिका निभा रहा है। हाल के दिनों में पाकिस्तान के सैन्य और राजनीतिक प्रतिनिधिमंडल लगातार ईरान के दौरे कर रहे हैं। पाकिस्तानी सेना प्रमुख असीम मुनीर की तेहरान यात्रा के बाद पाकिस्तान ने कहा कि वार्ता में “उत्साहजनक प्रगति” हुई है और अंतिम सहमति की दिशा में तेजी से काम चल रहा है।

    हालांकि ईरान ने अभी तक अपने परमाणु कार्यक्रम पर किसी भी तरह की रियायत देने की पुष्टि नहीं की है। लेकिन संकेत मिल रहे हैं कि संभावित समझौते में युद्धविराम, समुद्री व्यापार की बहाली और ईरानी तेल पर लगे प्रतिबंधों में राहत जैसे मुद्दे शामिल हो सकते हैं। अगर ऐसा होता है तो इसका सीधा असर वैश्विक ऊर्जा बाजार पर पड़ेगा और दुनिया को लंबे समय से चले आ रहे तेल-गैस संकट से बड़ी राहत मिल सकती है।

  • रूस-यूक्रेन युद्ध: ओरेश्निक हाइपरसोनिक मिसाइल समेत बड़े हमले में 4 की मौत, कीव में भारी तबाही; जेलेंस्की बोले- रूस पागल हो चुका है



    नई दिल्ली। रूस-यूक्रेन युद्ध के बीच रविवार को एक बार फिर बड़ा सैन्य तनाव देखने को मिला जब रूस ने यूक्रेन पर मिसाइलों और ड्रोनों से भीषण हमला किया। इस हमले में कम से कम 4 लोगों की मौत हो गई, जबकि कई दर्जन लोग घायल हुए हैं। हमलों का मुख्य निशाना राजधानी कीव और उसके आसपास के इलाके रहे।

    रूसी रक्षा मंत्रालय के अनुसार यह हमला यूक्रेन की ओर से किए गए हमलों के जवाब में किया गया है। इस दौरान रूस ने ओरेश्निक हाइपरसोनिक मिसाइल का भी इस्तेमाल किया, जिसे परमाणु हथियार ले जाने में सक्षम बताया जाता है। यह मिसाइल अपनी तेज गति और आधुनिक तकनीक के कारण मौजूदा एयर डिफेंस सिस्टम के लिए बेहद चुनौतीपूर्ण मानी जाती है।

    यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की ने रूस पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि हमलों में जानबूझकर नागरिक इलाकों को निशाना बनाया गया है। उन्होंने बताया कि पानी आपूर्ति की एक सुविधा, एक बाजार, कई घर और स्कूल इस हमले में क्षतिग्रस्त हुए हैं। जेलेंस्की ने टेलीग्राम पर कहा कि रूसी मिसाइल बिला त्सेरक्वा शहर के पास गिरी और रूस “पागल हो चुका है।”

    यूक्रेन के विदेश मंत्री आंद्री सिबिहा ने दावा किया कि ओरेश्निक मिसाइल में डमी वारहेड लगाया गया था। उन्होंने कहा कि रूस द्वारा यह मिसाइल सिर्फ डर पैदा करने और शक्ति प्रदर्शन के लिए इस्तेमाल की जा रही है।

    यूक्रेनी वायुसेना के मुताबिक रूस ने रातभर में लगभग 600 ड्रोन और 90 मिसाइलें दागीं, जिनमें से 604 को एयर डिफेंस सिस्टम ने मार गिराया। अधिकारियों ने इसे राजधानी पर हुए सबसे बड़े हमलों में से एक बताया है।

    इस बीच रूस ने आरोप लगाया कि यूक्रेन की ओर से उसके नियंत्रण वाले क्षेत्रों पर हमले किए गए थे, जिनके जवाब में यह कार्रवाई की गई। रूसी रक्षा मंत्रालय ने कहा कि यूक्रेन के “आतंकी हमलों” के जवाब में ओरेश्निक और अन्य बैलिस्टिक मिसाइलों का इस्तेमाल किया गया।

    अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया भी सामने आई है। यूरोपीय संघ की विदेश नीति प्रमुख काजा कैलस ने ओरेश्निक मिसाइल के इस्तेमाल को बेहद खतरनाक परमाणु शक्ति प्रदर्शन बताया। फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों और जर्मनी के चांसलर फ्रीडरिष मर्ज ने भी इस हमले की निंदा करते हुए इसे युद्ध में गंभीर बढ़ोतरी बताया है।

    यह हमला ऐसे समय में हुआ है जब रूस और यूक्रेन के बीच युद्ध पहले से ही चरम पर है और दोनों देश लगातार एक-दूसरे पर हमले कर रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की कार्रवाइयां संघर्ष को और अधिक खतरनाक दिशा में ले जा सकती हैं।

  • अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो बोले- नस्लीय टिप्पणियां अमेरिका की पहचान नहीं, भारतीय समुदाय की जमकर की तारीफ

    अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो बोले- नस्लीय टिप्पणियां अमेरिका की पहचान नहीं, भारतीय समुदाय की जमकर की तारीफ


    नई दिल्ली। नई दिल्ली दौरे पर पहुंचे अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो ने अमेरिका में भारतीयों के खिलाफ हो रही नस्लीय टिप्पणियों और भेदभाव की घटनाओं पर निराशा जताई है। विदेश मंत्री एस जयशंकर के साथ संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस में रूबियो ने साफ कहा कि कुछ लोगों की आपत्तिजनक टिप्पणियों को पूरे अमेरिका की सोच नहीं माना जा सकता। उन्होंने कहा कि “हर देश में कुछ बेवकूफ लोग होते हैं, जो ऑनलाइन या सार्वजनिक तौर पर गलत बातें करते हैं, लेकिन वे पूरे देश का प्रतिनिधित्व नहीं करते।”

    रूबियो ने अमेरिका को दुनिया के सबसे स्वागत करने वाले देशों में से एक बताते हुए कहा कि भारतीय मूल के लोगों ने अमेरिका की तरक्की में बड़ी भूमिका निभाई है। उन्होंने भारतीय समुदाय की जमकर सराहना करते हुए कहा कि टेक्नोलॉजी, हेल्थकेयर, बिजनेस और पब्लिक सर्विस जैसे कई अहम क्षेत्रों में भारतीय-अमेरिकियों का योगदान बेहद महत्वपूर्ण रहा है। उनके मुताबिक भारतीय समुदाय ने अमेरिकी अर्थव्यवस्था में 20 अरब डॉलर से ज्यादा का योगदान दिया है और अमेरिका चाहता है कि यह साझेदारी आगे और मजबूत हो।

    प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान जब रूबियो से अमेरिका में भारतीयों के खिलाफ नस्लवाद को लेकर सवाल पूछा गया, तब विदेश मंत्री एस जयशंकर हल्की मुस्कान के साथ नजर आए। हालांकि भारतीय प्रतिनिधिमंडल की ओर से इस मुद्दे पर अलग से कोई बयान नहीं दिया गया।

    रूबियो ने भारत-अमेरिका रिश्तों को दुनिया की सबसे महत्वपूर्ण रणनीतिक साझेदारियों में से एक बताते हुए कहा कि दोनों देश सिर्फ सहयोगी नहीं, बल्कि वैश्विक स्तर पर मजबूत साझेदार हैं। उन्होंने कहा कि भारत और अमेरिका दुनिया के दो सबसे बड़े लोकतंत्र हैं और दोनों देशों के बीच रक्षा, व्यापार, ऊर्जा, रणनीतिक तकनीक और क्षेत्रीय सुरक्षा जैसे मुद्दों पर गहरा सहयोग लगातार बढ़ रहा है।

    वहीं विदेश मंत्री एस जयशंकर ने भी भारत-अमेरिका संबंधों को व्यापक वैश्विक रणनीतिक साझेदारी करार दिया। उन्होंने कहा कि कई अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर दोनों देशों के हित एक-दूसरे से मेल खाते हैं और भविष्य में यह संबंध और मजबूत होंगे।

    मार्को रूबियो इस समय भारत के बहु-दिवसीय दौरे पर हैं। अपने दौरे के दौरान वह क्वाड देशों की विदेश मंत्रियों की बैठक में भी हिस्सा लेंगे। इस समूह में भारत, अमेरिका, जापान और ऑस्ट्रेलिया शामिल हैं। माना जा रहा है कि इस बैठक में इंडो-पैसिफिक क्षेत्र की सुरक्षा, चीन की गतिविधियों और वैश्विक रणनीतिक सहयोग जैसे अहम मुद्दों पर चर्चा होगी।

  • अल-बद्र आतंकी हमजा बुरहान के जनाजे में दिखे मोस्ट वॉन्टेड चेहरे, तस्वीरों ने पाकिस्तान की पोल खोली

    अल-बद्र आतंकी हमजा बुरहान के जनाजे में दिखे मोस्ट वॉन्टेड चेहरे, तस्वीरों ने पाकिस्तान की पोल खोली




    नई दिल्ली। पाकिस्तान एक बार फिर आतंकियों को पनाह देने के आरोपों के घेरे में आ गया है। अल-बद्र कमांडर हमजा बुरहान के जनाजे से सामने आई तस्वीरों ने इस्लामाबाद के उन दावों की पोल खोल दी, जिनमें वह अपनी जमीन पर आतंकियों की मौजूदगी से इनकार करता रहा है। पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में मारे गए हमजा बुरहान के अंतिम संस्कार में कई मोस्ट वॉन्टेड आतंकी खुलेआम नजर आए, जबकि पूरे इलाके में भारी सुरक्षा व्यवस्था तैनात थी।

    जानकारी के मुताबिक, पुलवामा आतंकी हमले के मुख्य साजिशकर्ताओं में शामिल हमजा बुरहान की शुक्रवार को पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर के मुजफ्फराबाद में अज्ञात बंदूकधारियों ने गोली मारकर हत्या कर दी थी। बताया जा रहा है कि हमजा एक शैक्षणिक संस्थान के बाहर मौजूद था, जहां हमलावरों ने उस पर ताबड़तोड़ गोलियां चला दीं। सिर में कई गोलियां लगने के बाद उसे अस्पताल ले जाया गया, लेकिन इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई।

    हमजा बुरहान, जिसे “डॉक्टर” कोडनेम से भी जाना जाता था, मूल रूप से जम्मू-कश्मीर के पुलवामा जिले का रहने वाला था। कई साल पहले वह सीमा पार पाकिस्तान चला गया था और बाद में प्रतिबंधित आतंकी संगठन अल-बद्र का बड़ा चेहरा बन गया। भारत सरकार ने वर्ष 2022 में उसे यूएपीए के तहत आतंकवादी घोषित किया था। जांच एजेंसियों के मुताबिक वह कश्मीरी युवाओं की भर्ती, आतंकियों को लॉजिस्टिक सपोर्ट और सीमा पार आतंकी नेटवर्क को मजबूत करने में सक्रिय भूमिका निभा रहा था।

    हमजा के जनाजे की तस्वीरें सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रही हैं। इनमें हिज्बुल मुजाहिदीन का सरगना सैयद सलाहुद्दीन और अल-बद्र चीफ बख्त जमीन खान साफ तौर पर नजर आ रहे हैं। तस्वीरों में भारी हथियारों से लैस सुरक्षाकर्मी भी दिखाई दे रहे हैं, जिससे यह सवाल खड़े हो रहे हैं कि अगर पाकिस्तान आतंकियों के खिलाफ कार्रवाई का दावा करता है, तो आखिर इन मोस्ट वॉन्टेड आतंकियों को इतनी सुरक्षा और खुली मौजूदगी कैसे मिली।

    सूत्रों के अनुसार, अंतिम संस्कार में पाकिस्तान की खुफिया एजेंसियों से जुड़े लोगों की मौजूदगी की भी चर्चा है। यही वजह है कि भारत समेत कई देश लंबे समय से पाकिस्तान पर आतंकियों को संरक्षण देने का आरोप लगाते रहे हैं। हमजा बुरहान का नाम 2019 के पुलवामा हमले से भी जुड़ा रहा है, जिसमें सीआरपीएफ के 40 जवान शहीद हुए थे।

    हमजा की मौत और उसके जनाजे में आतंकियों की मौजूदगी ने एक बार फिर पाकिस्तान की आतंकवाद को लेकर दोहरी नीति को दुनिया के सामने उजागर कर दिया है।

  • Iran-US Deal में नया पेंच: ‘संवर्धित यूरेनियम नहीं सौंपेंगे’, तेहरान ने परमाणु मुद्दे पर झुकने से किया इनकार

    Iran-US Deal में नया पेंच: ‘संवर्धित यूरेनियम नहीं सौंपेंगे’, तेहरान ने परमाणु मुद्दे पर झुकने से किया इनकार



    नई दिल्ली। अमेरिका और ईरान के बीच संभावित शांति समझौते को लेकर चल रही चर्चाओं के बीच नया विवाद सामने आ गया है। ईरान ने साफ कर दिया है कि वह अपने अत्यधिक संवर्धित यूरेनियम (Highly Enriched Uranium) के भंडार को किसी भी देश को नहीं सौंपेगा। तेहरान का कहना है कि उसका परमाणु कार्यक्रम मौजूदा प्रारंभिक समझौते का हिस्सा नहीं है।

    एक  रिपोर्ट के मुताबिक एक वरिष्ठ ईरानी सूत्र ने कहा कि अमेरिका के साथ अभी जो बातचीत चल रही है, उसका मुख्य उद्देश्य क्षेत्रीय तनाव और युद्ध जैसी स्थिति को खत्म करना है, न कि ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर अंतिम फैसला लेना। सूत्र ने कहा कि परमाणु मुद्दे पर चर्चा आगे होने वाली औपचारिक वार्ताओं में की जाएगी।

    इससे कुछ घंटे पहले अमेरिकी मीडिया, खासकर न्यूयॉर्क टाइम्स में दावा किया गया था कि ईरान अपने उच्च संवर्धित यूरेनियम भंडार को छोड़ने के लिए सैद्धांतिक रूप से तैयार हो गया है। रिपोर्ट में दो अमेरिकी अधिकारियों के हवाले से कहा गया था कि दोनों देशों के बीच समझौते का ढांचा लगभग तैयार है और अब तकनीकी प्रक्रियाओं पर बातचीत होनी बाकी है।

    हालांकि ईरान ने इन रिपोर्टों को पूरी तरह सही मानने से इनकार कर दिया। ईरानी मीडिया और सरकारी सूत्रों का कहना है कि फिलहाल बातचीत का फोकस होर्मुज जलडमरूमध्य में सामान्य जहाजरानी बहाल करना और आर्थिक प्रतिबंधों में राहत हासिल करना है।

    ईरान की अर्ध-सरकारी समाचार एजेंसी तसनीम के अनुसार संभावित समझौते में यह प्रस्ताव शामिल है कि 30 दिनों के भीतर होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने वाले जहाजों की आवाजाही युद्ध-पूर्व स्तर पर वापस लाई जाएगी। इसके बदले अमेरिका ईरानी तेल पर लगाए गए कुछ प्रतिबंधों में राहत दे सकता है।

    इस बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया है कि अमेरिका और ईरान के बीच समझौते का “फ्रेमवर्क” तैयार हो चुका है। ट्रंप के मुताबिक इस डील का मकसद दोनों देशों के बीच तनाव कम करना और क्षेत्र में स्थिरता बहाल करना है।

    फिलहाल दोनों देशों के बयानों में अंतर साफ दिखाई दे रहा है। जहां अमेरिका इसे परमाणु समझौते की दिशा में बड़ी प्रगति बता रहा है, वहीं ईरान लगातार यह संकेत दे रहा है कि वह अपने परमाणु कार्यक्रम पर किसी भी दबाव में झुकने वाला नहीं है।

  • नॉर्वे में मोदी के ‘सपेरे वाले कार्टून’ पर विवाद, भारतीय मूल के सांसद हिमांशु गुलाटी बोले- ‘पश्चिमी मीडिया में समझ की कमी’

    नॉर्वे में मोदी के ‘सपेरे वाले कार्टून’ पर विवाद, भारतीय मूल के सांसद हिमांशु गुलाटी बोले- ‘पश्चिमी मीडिया में समझ की कमी’



    नई दिल्ली। नॉर्वे में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लेकर प्रकाशित एक कार्टून को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। देश के प्रमुख अखबार ‘आफ़्टेनपोस्टेन’ द्वारा प्रकाशित इस कार्टून में पीएम मोदी को पारंपरिक “सपेरे” की छवि में दिखाया गया, जिसे लेकर भारतीय समुदाय और सोशल मीडिया पर तीखी प्रतिक्रिया देखने को मिली।

    इस विवाद के बीच नॉर्वे की संसद (स्टोर्टिंग) में Akershus क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करने वाले भारतीय मूल के सांसद हिमांशु गुलाटी ने इस मुद्दे पर अपनी प्रतिक्रिया दी है। गुलाटी नॉर्डिक क्षेत्र में भारतीय मूल के एकमात्र मौजूदा सांसदों में से एक हैं और राजनीति में लंबे समय से सक्रिय हैं।

    गुलाटी ने कहा कि नॉर्वे के मीडिया में राजनीतिक कार्टून छापना एक सामान्य परंपरा है, जिसमें वैश्विक नेताओं का व्यंग्यात्मक चित्रण किया जाता है। हालांकि उन्होंने यह भी माना कि इस बार का चित्रण औपनिवेशिक काल की पुरानी रूढ़ियों की याद दिलाता है, जो कई लोगों के लिए संवेदनशील हो सकता है।

    उन्होंने कहा कि यह जरूरी नहीं कि कार्टूनिस्ट की मंशा अपमानजनक रही हो, लेकिन यह जरूर दर्शाता है कि कुछ पश्चिमी मीडिया संस्थानों में भारत और उसकी ऐतिहासिक-सांस्कृतिक संवेदनशीलताओं को लेकर समझ की कमी है।

    सांसद ने यह भी जोर दिया कि किसी एक कार्टून या संपादकीय टिप्पणी के आधार पर भारत और नॉर्वे के रिश्तों को नहीं देखा जाना चाहिए। उनके अनुसार दोनों देशों के बीच मजबूत कूटनीतिक और संस्थागत संबंध हैं, जो हाल के वर्षों में और बेहतर हुए हैं।

    उन्होंने पीएम मोदी को दिए गए नॉर्वे के सम्मान “रॉयल नॉर्वेजियन ऑर्डर ऑफ मेरिट” का भी उल्लेख किया और कहा कि यह दोनों देशों के बीच मजबूत साझेदारी और आपसी सम्मान को दर्शाता है।

    फिलहाल यह मामला नॉर्वे और भारत के बीच सोशल मीडिया पर बहस का विषय बना हुआ है, जहां एक तरफ इसे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता से जोड़ा जा रहा है, वहीं दूसरी तरफ इसे औपनिवेशिक मानसिकता का उदाहरण बताया जा रहा है।

  • ईरान-अमेरिका डील पर ट्रंप का बड़ा दावा: ‘समझौता लगभग तय’, होर्मुज खुलने की बात; तेहरान ने किया खंडन

    ईरान-अमेरिका डील पर ट्रंप का बड़ा दावा: ‘समझौता लगभग तय’, होर्मुज खुलने की बात; तेहरान ने किया खंडन

    नई दिल्ली। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया है कि ईरान के साथ एक बड़ा शांति समझौता “काफी हद तक तय” हो चुका है और बस अंतिम औपचारिकताओं पर काम चल रहा है। ट्रंप ने कहा कि यह समझौता अमेरिका, ईरान और कुछ अन्य देशों के बीच बातचीत के बाद आगे बढ़ा है।

    ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर पोस्ट करते हुए कहा कि उन्होंने इस मुद्दे पर इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू से भी बातचीत की है, जो “सकारात्मक” रही। उनके मुताबिक समझौते के तहत होर्मुज स्ट्रेट को दोबारा खोले जाने की दिशा में भी चर्चा हुई है।

    हालांकि ईरान ने ट्रंप के इन दावों को सिरे से खारिज कर दिया है। ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बगाई ने कहा कि फिलहाल प्राथमिकता युद्ध को समाप्त करने की है और किसी भी तरह का अंतिम समझौता अभी नहीं हुआ है। उन्होंने यह भी साफ किया कि होर्मुज स्ट्रेट पर ईरान का नियंत्रण बना रहेगा।

    रिपोर्टों के मुताबिक, ईरान केवल युद्ध-पूर्व स्तर पर जहाजों की आवाजाही बहाल करने पर सहमत हो सकता है, लेकिन इसे पूरी तरह “फ्री नेविगेशन” नहीं माना जाएगा।

    इस बीच न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट में दावा किया गया है कि ईरान सैद्धांतिक रूप से अपने अत्यधिक समृद्ध यूरेनियम भंडार को सौंपने पर सहमत हो सकता है। हालांकि इसकी प्रक्रिया और शर्तों पर आगे औपचारिक बातचीत होनी बाकी है।

    यह मुद्दा अमेरिका की प्रमुख मांगों में से एक रहा है, क्योंकि इसे ईरान के परमाणु कार्यक्रम को सीमित करने की दिशा में अहम कदम माना जाता है। फिलहाल दोनों पक्षों के अलग-अलग बयानों ने इस संभावित समझौते को लेकर असमंजस और बढ़ा दिया है।