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  • ट्रंप प्रशासन के वीजा नियम पर कोर्ट की रोक, विदेशी छात्रों और पत्रकारों को मिली राहत

    ट्रंप प्रशासन के वीजा नियम पर कोर्ट की रोक, विदेशी छात्रों और पत्रकारों को मिली राहत


    वॉशिंगटन। अमेरिका में ट्रंप प्रशासन को संघीय अदालत से झटका लगा है। बोस्टन के एक फेडरल जज ने विदेशी छात्रों, एक्सचेंज विजिटर्स और पत्रकारों के अमेरिका में रहने की अवधि सीमित करने वाले नए नियम पर रोक लगा दी है। अमेरिकी जिला जज एफ. डेनिस सेलॉर ने यूनियनों और उच्च शिक्षा की वकालत करने वाले संगठनों के गठबंधन के पक्ष में फैसला सुनाया। यह आदेश नए नियम के लागू होने से ठीक एक दिन पहले आया।

    जज बोले- पांच दशक पुरानी व्यवस्था बदलने का तर्क कमजोर
    जज सेलॉर ने कहा कि डिपार्टमेंट ऑफ होमलैंड सिक्योरिटी (DHS) ने नियम में बदलाव के लिए पर्याप्त मजबूत तर्क नहीं दिए। विभाग ने वीजा व्यवस्था में धोखाधड़ी रोकने और राष्ट्रीय सुरक्षा का हवाला दिया था, लेकिन अदालत के मुताबिक DHS ने नियम बदलने से जुड़ी समस्याओं का पर्याप्त अध्ययन नहीं किया और आसान विकल्पों पर भी विचार नहीं किया।

    पूर्व रिपब्लिकन राष्ट्रपति जॉर्ज डब्ल्यू. बुश द्वारा नियुक्त जज ने कहा कि प्रस्तावित नियम अमेरिका में करीब पांच दशक से चली आ रही व्यवस्था को बदल देता। मौजूदा व्यवस्था के तहत विदेशी छात्र अपने कोर्स की अवधि पूरी होने तक अमेरिका में रह और काम कर सकते हैं। अदालत ने इस व्यवस्था के योगदान को भी रेखांकित किया। जज के मुताबिक, इससे करोड़ों छात्रों और शोधकर्ताओं को विज्ञान, मेडिकल और टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में आगे बढ़ने का अवसर मिला और अमेरिकी अर्थव्यवस्था को भी बड़ा फायदा हुआ।

    क्या बदलाव करना चाहता था ट्रंप प्रशासन?
    DHS ने जुलाई में नया नियम प्रस्तावित किया था, जिसमें अमेरिका में विदेशी नागरिकों के रहने की अवधि के लिए निश्चित समयसीमा तय करने का प्रावधान था। इसके तहत विदेशी छात्रों के F वीजा और सांस्कृतिक एक्सचेंज विजिटर्स के J वीजा की अवधि अधिकतम चार साल तक सीमित की जानी थी। इसके अलावा विदेशी पत्रकारों को दिए जाने वाले I वीजा, जो कई वर्षों तक वैध रहते हैं, उनकी अवधि घटाकर केवल 240 दिन करने का प्रस्ताव था। नियम का मकसद वीजा व्यवस्था में धोखाधड़ी रोकना और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े जोखिमों को नियंत्रित करना बताया गया था।

    21 लाख से ज्यादा वीजा धारकों पर पड़ सकता था असर
    उपलब्ध जानकारी के मुताबिक अमेरिका में फिलहाल करीब 16 लाख F वीजा और 5 लाख J वीजा धारक हैं। ऐसे में प्रस्तावित बदलाव का असर बड़ी संख्या में विदेशी छात्रों और एक्सचेंज विजिटर्स पर पड़ सकता था। जज सेलॉर ने उच्च शिक्षा संस्थानों पर पड़ने वाले संभावित असर को लेकर भी चिंता जताई। उनके मुताबिक, नई नीति लागू होने पर बड़े विश्वविद्यालयों में विदेशी छात्रों के दाखिले कम हो सकते हैं और संस्थानों को करोड़ों डॉलर का नुकसान उठाना पड़ सकता है।

    MIT-हार्वर्ड जैसे विश्वविद्यालयों पर असर की आशंका
    फैसले में अमेरिका के प्रमुख रिसर्च विश्वविद्यालयों का भी उल्लेख किया गया। जज ने कहा कि MIT और हार्वर्ड जैसे संस्थानों में स्नातक स्तर पर बड़ी संख्या में विदेशी छात्र अध्ययन करते हैं। अदालत के मुताबिक, विदेशी छात्रों की संख्या में बड़ी गिरावट का असर सिर्फ विश्वविद्यालयों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि अमेरिकी उच्च शिक्षा व्यवस्था और अर्थव्यवस्था को भी नुकसान हो सकता है। जज ने इसे संभावित रूप से विनाशकारी बताया।

    इस तरह अदालत की रोक ने फिलहाल विदेशी छात्रों, एक्सचेंज विजिटर्स और पत्रकारों के लिए प्रस्तावित नई समयसीमा को लागू होने से रोक दिया है। मामले में अदालत की आगे की कार्रवाई और प्रशासन की अगली रणनीति पर अब नजर रहेगी।

  • मदीना की धरती में छिपा खजाना! सऊदी का दावा- 11 करोड़ टन अयस्क में यूरेनियम और हेवी रेयर अर्थ की मौजूदगी

    मदीना की धरती में छिपा खजाना! सऊदी का दावा- 11 करोड़ टन अयस्क में यूरेनियम और हेवी रेयर अर्थ की मौजूदगी


    नई दिल्ली। सऊदी अरब ने मदीना के पास खनिज संसाधनों की बड़ी खोज का दावा किया है। ऊर्जा मंत्री प्रिंस अब्दुलअजीज बिन सलमान के मुताबिक, जबल सैयद प्रोजेक्ट में किए गए भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण और खोज के दौरान करीब 11 करोड़ टन यानी 110 मिलियन टन अयस्क संसाधन का अनुमान सामने आया है। इस अयस्क में हेवी रेयर अर्थ एलिमेंट्स की उच्च सांद्रता के साथ यूरेनियम की भी उत्साहजनक संभावनाएं मिली हैं।

    हालांकि, इस दावे को लेकर सबसे अहम बात यह है कि 11 करोड़ टन शुद्ध यूरेनियम मिलने की बात नहीं कही गई है। 110 मिलियन टन अनुमानित कुल अयस्क संसाधन है, जिसमें यूरेनियम और रेयर अर्थ तत्वों की सांद्रता मौजूद होने का दावा किया गया है।

    जबल सैयद में सर्वे से सामने आया अनुमान

    ‘अरब न्यूज’ के मुताबिक, सऊदी ऊर्जा मंत्री ने जबल सैयद परियोजना में हुई खोज और भूवैज्ञानिक अध्ययनों के आधार पर करीब 110 मिलियन टन अयस्क संसाधन का अनुमान बताया है। इसमें खास तौर पर हेवी रेयर अर्थ एलिमेंट्स की अधिक सांद्रता मिलने की बात कही गई है।

    इसके साथ ही सर्वेक्षण में यूरेनियम की भी उत्साहजनक सांद्रता का संकेत मिला है। अब इन संसाधनों की वास्तविक मात्रा, गुणवत्ता और व्यावसायिक उपयोगिता को निर्धारित करने के लिए आगे की जांच और मूल्यांकन महत्वपूर्ण होगा।

    मदीना की वजह से भी खास है यह खोज

    मदीना इस्लाम के सबसे पवित्र शहरों में शामिल है। 622 ईस्वी में पैगंबर मोहम्मद ने मक्का से मदीना की ओर हिजरत की थी, जिसके बाद यह शुरुआती इस्लामी समुदाय का प्रमुख केंद्र बना। ऐसे में इस ऐतिहासिक और धार्मिक क्षेत्र के आसपास रणनीतिक महत्व वाले खनिज संसाधनों की खोज ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी ध्यान खींचा है।

    यह घोषणा ऐसे समय हुई है, जब मध्य पूर्व में सुरक्षा और परमाणु कार्यक्रमों को लेकर तनाव लगातार अंतरराष्ट्रीय राजनीति का अहम मुद्दा बना हुआ है। क्षेत्रीय शक्ति संतुलन में सऊदी अरब की महत्वपूर्ण भूमिका है, जबकि ईरान का परमाणु कार्यक्रम लंबे समय से अमेरिका और इजरायल की चिंता का विषय रहा है। ईरान लगातार अपने परमाणु कार्यक्रम को शांतिपूर्ण और नागरिक उद्देश्यों के लिए बताता रहा है।

    तेल से आगे अर्थव्यवस्था ले जाने की कोशिश

    खनिज संसाधनों की यह खोज सऊदी अरब की Vision 2030 रणनीति के लिहाज से भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है। दुनिया के प्रमुख तेल उत्पादक देशों में शामिल सऊदी अरब अर्थव्यवस्था को तेल पर निर्भरता से आगे ले जाने की कोशिश कर रहा है।

    इसी रणनीति के तहत देश में खनन, अक्षय ऊर्जा और नागरिक परमाणु ऊर्जा जैसे क्षेत्रों में निवेश बढ़ाया जा रहा है। सऊदी अरब घरेलू स्तर पर यूरेनियम संसाधनों की खोज और भविष्य में इनके इस्तेमाल की संभावनाओं पर भी काम कर रहा है।

    यूरेनियम मिला तो सीधे परमाणु ईंधन नहीं बनेगा

    मदीना क्षेत्र में यूरेनियम की संभावनाओं का दावा इसलिए भी अहम है क्योंकि सऊदी अरब नागरिक परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम विकसित करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। अमेरिका और सऊदी अरब के बीच भी इस क्षेत्र में सहयोग को लेकर बातचीत और समझौते हुए हैं।

    यूरेनियम परमाणु ऊर्जा उत्पादन के लिए महत्वपूर्ण कच्चा माल है, लेकिन प्राकृतिक अयस्क मिलने का अर्थ यह नहीं है कि उससे सीधे परमाणु ईंधन तैयार किया जा सकता है। इसके लिए पहले खनन, प्रोसेसिंग और कन्वर्जन जैसी कई प्रक्रियाओं से गुजरना पड़ता है। जरूरत के मुताबिक इसके बाद संवर्धन यानी enrichment की प्रक्रिया भी होती है।

    इसलिए फिलहाल मदीना में सामने आया दावा एक बड़े अयस्क संसाधन और उसमें मौजूद यूरेनियम की संभावित सांद्रता से जुड़ा है, न कि 11 करोड़ टन शुद्ध यूरेनियम भंडार से।

    रेयर अर्थ की मौजूदगी भी बढ़ाती है रणनीतिक महत्व

    इस खोज का दूसरा बड़ा पहलू रेयर अर्थ एलिमेंट्स हैं। आधुनिक तकनीक आधारित अर्थव्यवस्था में इन खनिजों की अहम भूमिका है। इनका इस्तेमाल इलेक्ट्रॉनिक्स, इलेक्ट्रिक वाहन, पवन ऊर्जा, रक्षा उपकरण और दूसरी हाई-टेक इंडस्ट्री में किया जाता है।

    यदि आगे की जांच में जबल सैयद क्षेत्र के संसाधन व्यावसायिक रूप से निकालने योग्य साबित होते हैं, तो इसका असर केवल सऊदी अरब की ऊर्जा रणनीति तक सीमित नहीं रहेगा। इससे देश की खनन क्षमता, औद्योगिक आधार और रणनीतिक खनिज आपूर्ति को भी मजबूती मिल सकती है।

    फिलहाल इन संसाधनों की वास्तविक क्षमता और आर्थिक उपयोगिता का आकलन आगे की भूवैज्ञानिक जांच पर निर्भर करेगा। लेकिन यूरेनियम की संभावनाओं और हेवी रेयर अर्थ एलिमेंट्स की उच्च सांद्रता के दावे ने सऊदी अरब की बदलती ऊर्जा और खनिज रणनीति को चर्चा के केंद्र में ला दिया है।

  • प्रदर्शन से पहले इमरान की PTI को झटका, CM अफरीदी समेत 25 नेताओं के पासपोर्ट ब्लॉक

    प्रदर्शन से पहले इमरान की PTI को झटका, CM अफरीदी समेत 25 नेताओं के पासपोर्ट ब्लॉक


    इस्लामाबाद। पाकिस्तान में पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान की पार्टी पाकिस्तान तेहरीक-ए-इंसाफ (PTI) के खिलाफ कानूनी शिकंजा और कस गया है। इस्लामाबाद की आतंकवाद विरोधी अदालत ने खैबर पख्तूनख्वा के मुख्यमंत्री मोहम्मद सोहेल अफरीदी समेत 25 PTI नेताओं के पासपोर्ट अगले आदेश तक ब्लॉक रखने का आदेश दिया है। यह कार्रवाई राजधानी के एक पुलिस थाने में दर्ज मामले से जुड़ी है। फैसला ऐसे समय आया है, जब PTI ने 27 सितंबर को देशव्यापी विरोध-प्रदर्शन का ऐलान किया है।

    FIA को पासपोर्ट ब्लॉक रखने के निर्देश

    जज अबुल हसनात मुहम्मद जुल्करनैन ने पुलिस की अर्जी स्वीकार करते हुए फेडरल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी (FIA) को सभी 25 नेताओं के पासपोर्ट अगले आदेश तक ब्लॉक रखने का निर्देश दिया। अदालत ने कहा कि उपलब्ध रिकॉर्ड से स्पष्ट है कि इन सभी को मामले में आरोपी बनाया गया है।

    जांच अधिकारी ने अदालत में आशंका जताई कि आरोपी कानूनी कार्रवाई से बचने के लिए देश छोड़कर फरार हो सकते हैं। पुलिस ने नेताओं पर सरकारी संस्थानों पर हमले और आतंकवाद को बढ़ावा देने जैसे गंभीर आरोप होने की बात कही।

    पुलिस की दलीलों पर अदालत ने यह भी गौर किया कि आरोपी अदालत में पेश नहीं हुए हैं। जिन नेताओं को अंतरिम जमानत मिली थी, उनके बारे में भी पुलिस ने बताया कि वे अभी तक जांच में शामिल नहीं हुए हैं। इसके बाद अदालत ने पासपोर्ट ब्लॉक करने की मांग मंजूर कर ली।

    असद कैसर समेत कई बड़े नाम सूची में

    अदालत के आदेश के दायरे में वरिष्ठ PTI नेता और नेशनल असेंबली के पूर्व स्पीकर असद कैसर भी शामिल हैं। इनके अलावा सांसद शहराम खान तरकई, शाह अहमद, शेर अली अरबाब, मुहम्मद इकबाल अफरीदी, डॉ. अमजद अली, जुनैद अकबर, शाहिद खट्टक, जुबैर वजीर, अरशद उमरज़ई, जर आलम, मियां उमर और अख्तर खान के नाम भी सूची में हैं।

    इन सभी के खिलाफ राजधानी के एक पुलिस थाने में दर्ज मामले के सिलसिले में कार्रवाई की गई है। पुलिस की ओर से पेश जांच के आधार पर अदालत ने माना कि आरोपियों की गैरहाजिरी और जांच में सहयोग नहीं करने की स्थिति में उनके देश छोड़ने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।

    27 सितंबर के प्रदर्शन के लिए समर्थन जुटा रहे थे अफरीदी

    पासपोर्ट ब्लॉक करने का आदेश उस वक्त आया, जब मुख्यमंत्री मोहम्मद सोहेल अफरीदी 27 सितंबर के देशव्यापी प्रदर्शन के लिए समर्थन जुटाने पंजाब के दौरे पर थे। इसी दौरान उन्होंने पंजाब पुलिस पर गंभीर आरोप लगाए।

    अफरीदी का आरोप है कि पंजाब पुलिस ने उनका अपहरण करने की कोशिश की। उन्होंने दावा किया कि उनके साथ मारपीट और दुर्व्यवहार किया गया और बाद में उन्हें सड़क किनारे छोड़ दिया गया। मुख्यमंत्री ने कहा कि पंजाब पुलिस को इस हरकत का जवाब देना होगा और यह कोई मजाक नहीं है।

    पंजाब सरकार से स्पष्टीकरण मांगा

    अफरीदी ने एक प्रांत के मुख्यमंत्री के साथ दूसरे प्रांत की पुलिस के इस कथित व्यवहार को पूरी तरह अस्वीकार्य बताया। उन्होंने पंजाब सरकार से स्पष्टीकरण मांगते हुए सवाल किया कि उनके साथ दुर्व्यवहार क्यों किया गया और उन्हें सड़क किनारे क्यों छोड़ा गया।

    उनके इन आरोपों के बीच PTI की ओर से 27 सितंबर के विरोध-प्रदर्शन की तैयारियां भी जारी हैं। पार्टी के नेताओं और समर्थकों के खिलाफ पहले से ही विरोध-प्रदर्शनों तथा सरकारी संस्थानों के खिलाफ कथित हिंसा से जुड़े कई मामले चल रहे हैं।

    प्रदर्शन से पहले बढ़ा राजनीतिक तनाव

    एक तरफ अदालत ने PTI के 25 नेताओं के पासपोर्ट ब्लॉक करने का आदेश दिया है, वहीं दूसरी तरफ पार्टी के प्रमुख नेताओं में शामिल मुख्यमंत्री अफरीदी ने पंजाब पुलिस पर गंभीर आरोप लगाए हैं। ऐसे में 27 सितंबर के प्रस्तावित देशव्यापी प्रदर्शन से पहले पाकिस्तान में राजनीतिक टकराव और तेज होने के संकेत मिल रहे हैं।

  • कराची में लश्कर-ए-तैयबा से जुड़े आतंकी की गोली मारकर हत्या, चार अज्ञात हमलावरों की तलाश में सुरक्षा एजेंसियां जुटीं

    कराची में लश्कर-ए-तैयबा से जुड़े आतंकी की गोली मारकर हत्या, चार अज्ञात हमलावरों की तलाश में सुरक्षा एजेंसियां जुटीं

    नई दिल्ली ।पाकिस्तान के कराची में लश्कर-ए-तैयबा से जुड़े एक आतंकी की गोली मारकर हत्या किए जाने का मामला सामने आया है। जानकारी के अनुसार चार अज्ञात हमलावरों ने इस वारदात को अंजाम दिया और गोलीबारी के बाद मौके से फरार हो गए। मारे गए व्यक्ति को लश्कर-ए-तैयबा प्रमुख हाफिज सईद का करीबी बताया जा रहा है।

    घटना के बाद इलाके में हड़कंप मच गया। जानकारी मिलने पर पाकिस्तान की सुरक्षा एजेंसियां मौके पर पहुंचीं और मामले की जांच शुरू की। एजेंसियों ने हमलावरों की तलाश के साथ-साथ हत्या के पीछे की वजह का पता लगाने के लिए भी जांच शुरू कर दी है।

    अभी तक मारे गए आतंकी की पहचान को लेकर आधिकारिक तौर पर विस्तृत जानकारी सामने नहीं आई है। इसी तरह लश्कर-ए-तैयबा में उसकी वास्तविक भूमिका क्या थी, इस बारे में भी कोई स्पष्ट आधिकारिक जानकारी उपलब्ध नहीं है। फिलहाल जांच एजेंसियां वारदात से जुड़े तथ्यों को जुटाने में लगी हैं।

    बताया गया है कि हमलावर बाइक पर सवार थे और उनकी संख्या चार थी। उन्होंने लश्कर से जुड़े व्यक्ति को निशाना बनाया और वारदात को अंजाम देने के बाद वहां से निकल गए। हमले के पीछे कौन लोग थे, इस बारे में फिलहाल स्थिति स्पष्ट नहीं है।

    जांच का एक अहम पहलू यह भी है कि इस हत्या के पीछे किसी प्रतिद्वंद्वी आतंकी गुट का हाथ था या इसके पीछे कोई अन्य कारण रहा। सुरक्षा एजेंसियां इसी दिशा में भी जानकारी जुटा रही हैं। अभी किसी संभावित गुट या व्यक्ति की भूमिका की पुष्टि नहीं की गई है।

    कराची में हुई इस घटना को पाकिस्तान में आतंकी संगठनों से जुड़े लोगों को निशाना बनाए जाने की घटनाओं से जोड़कर भी देखा जा रहा है। हालांकि, मौजूदा मामले में हत्या की वास्तविक वजह और हमलावरों के उद्देश्य के बारे में जांच पूरी होने से पहले कोई निष्कर्ष सामने नहीं आया है।

    इस घटना के बाद पाकिस्तान में आतंकी संगठनों से जुड़े लोगों की गतिविधियों और उनकी सुरक्षा को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। चार अज्ञात हमलावरों द्वारा संगठन से जुड़े व्यक्ति को निशाना बनाए जाने के बाद सुरक्षा एजेंसियों के सामने हमले की पूरी कड़ी का पता लगाने की चुनौती है।

    फिलहाल जांच एजेंसियां हमलावरों की पहचान और उनकी तलाश पर काम कर रही हैं। साथ ही यह पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है कि हत्या की योजना किस तरह बनाई गई और इसके पीछे क्या मकसद था। मारे गए व्यक्ति की पहचान तथा लश्कर-ए-तैयबा में उसकी भूमिका से जुड़ी जानकारी भी जांच के दौरान स्पष्ट होने की उम्मीद है।

    मामले में अभी तक आधिकारिक स्तर पर सीमित जानकारी ही सामने आई है। इसलिए हत्या के पीछे किसी विशेष संगठन, व्यक्ति या वजह की पुष्टि नहीं हुई है। सुरक्षा एजेंसियों की जांच आगे बढ़ने के साथ ही वारदात से जुड़े अन्य तथ्य सामने आने की संभावना है।

  • ट्रंप ने एआई को बताया भविष्य की ताकत, चीन की जासूसी, शी जिनपिंग और कनाडा के नेताओं पर भी खुलकर बोले

    ट्रंप ने एआई को बताया भविष्य की ताकत, चीन की जासूसी, शी जिनपिंग और कनाडा के नेताओं पर भी खुलकर बोले

    नई दिल्ली ।अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने आयरलैंड से अमेरिका लौटते समय एयर फोर्स वन में पत्रकारों से बातचीत की। इस दौरान उन्होंने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, चीन, कनाडा और व्यापार से जुड़े कई मुद्दों पर अपनी प्रतिक्रिया दी। ट्रंप ने एआई को लेकर अमेरिका की स्थिति को मजबूत बताया, वहीं चीन और कनाडा के साथ संबंधों पर भी अपनी बात रखी।

    चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग को लेकर ट्रंप ने कहा कि उनका रवैया अब तक ठीक रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिका ने चीन के साथ सही व्यवहार किया है। चीन की ओर से अमेरिका की जासूसी किए जाने से जुड़े सवाल पर ट्रंप ने कहा कि चीन अमेरिका पर नजर रखता है, लेकिन अमेरिका भी चीन की जानकारी लेता है।

    ट्रंप ने अमेरिकी बाजार में चीनी कारों की स्थिति का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि अभी तक उन्होंने चीनी कारों को अमेरिका में आने की अनुमति नहीं दी है। इसके पीछे उन्होंने चीन के सामान पर लगाए गए भारी टैक्स को प्रमुख कारण बताया। ट्रंप के अनुसार, इन उत्पादों पर टैक्स 100 से 150 प्रतिशत तक रहा है।

    उन्होंने यूरोप का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां विदेशी कारों की वजह से परेशानी बढ़ रही है। इसके विपरीत अमेरिका में अभी ऐसी स्थिति नहीं बनी है। ट्रंप ने इस संदर्भ में अमेरिकी बाजार में चीनी वाहनों के प्रवेश को लेकर अपनी नीति का संकेत दिया।

    बोइंग के विमानों से जुड़े सौदे के बारे में पूछे जाने पर ट्रंप ने कहा कि वह इसे पूरा करेंगे। उन्होंने अपनी बातचीत और कारोबारी शैली का जिक्र करते हुए कहा कि वह हर डील पूरी कर लेते हैं। इस दौरान उन्होंने व्यापार से जुड़े अपने रुख को भी स्पष्ट किया।

    कनाडा के साथ संबंधों को लेकर ट्रंप ने कहा कि वहां की सरकार के साथ काम करना उनके लिए मुश्किल है। हालांकि उन्होंने कनाडा के आम लोगों और वहां के नेताओं के बीच अंतर करते हुए कहा कि उन्हें कनाडा के लोगों से कोई परेशानी नहीं है। उनके मुताबिक, कनाडा के लोग अच्छे हैं, लेकिन वहां के नेताओं के साथ काम करना आसान नहीं है।

    ट्रंप ने दावा किया कि कनाडा अब अमेरिका के साथ समझौता करना चाहता है। उन्होंने आरोप लगाया कि कनाडा ने लंबे समय तक अमेरिका से फायदा उठाया, लेकिन अब स्थिति बदल गई है और ऐसा नहीं हो रहा है।

    आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को लेकर ट्रंप ने इसे भविष्य की महत्वपूर्ण ताकत के तौर पर पेश किया। उन्होंने कहा कि जिस देश का एआई सबसे आगे होगा, वही आगे रहेगा। ट्रंप ने दावा किया कि इस क्षेत्र में अमेरिका काफी आगे है।

    जब ट्रंप से पूछा गया कि क्या वह खुद एआई का इस्तेमाल करते हैं, तो उन्होंने इसका जवाब हां में दिया। हालांकि, उन्होंने यह बताने से इनकार कर दिया कि वह एआई का इस्तेमाल किस काम के लिए करते हैं।

    ट्रंप की इस बातचीत में एआई के साथ-साथ चीन और कनाडा के साथ अमेरिका के संबंधों को लेकर उनका मौजूदा रुख भी सामने आया। चीन के साथ जासूसी और व्यापार, कनाडा के साथ बातचीत तथा एआई में अमेरिकी बढ़त जैसे मुद्दों पर उन्होंने पत्रकारों के सवालों का जवाब दिया।

  • मसूद अजहर पर पाकिस्तान ने बढ़ाया इनाम, FIA की नई सूची में 70 लाख रुपये का इनाम और गिरफ्तारी वारंट जारी

    मसूद अजहर पर पाकिस्तान ने बढ़ाया इनाम, FIA की नई सूची में 70 लाख रुपये का इनाम और गिरफ्तारी वारंट जारी


    नई दिल्ली ।
    पाकिस्तान ने जैश-ए-मोहम्मद प्रमुख मसूद अजहर के खिलाफ कार्रवाई का दावा करते हुए उसे गिरफ्तार करने के लिए वारंट जारी किया है। पाकिस्तान की जांच एजेंसी फेडरल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी यानी FIA की नई मोस्ट वांटेड सूची में मसूद अजहर पर 70 लाख रुपये का इनाम घोषित किया गया है। यह घोषणा ऐसे समय हुई है जब अक्टूबर में एफएटीएफ की बैठक प्रस्तावित है।

    FIA की नई सूची में मसूद अजहर को वांछित बताया गया है। पाकिस्तान का कहना है कि वह देश से गायब है और अफगानिस्तान में छिपा हुआ है। वहीं, भारतीय खुफिया एजेंसियों से जुड़ी जानकारी में उसके पाकिस्तान में छिपे होने की संभावना जताई गई है। पिछले कुछ महीनों में ऐसी जानकारी सामने आने का दावा किया गया है कि वह पाकिस्तान के सिंध प्रांत के नवाबशाह इलाके में हो सकता है।

    मसूद अजहर पर इससे पहले भी पाकिस्तान की ओर से इनाम घोषित किया जा चुका है। वर्ष 2021 में FIA ने उस पर 50 लाख रुपये का इनाम रखा था। अब पांच साल बाद इस रकम में 20 लाख रुपये की बढ़ोतरी की गई है, जिससे कुल इनाम 70 लाख रुपये हो गया है।

    FIA की नई मोस्ट वांटेड सूची में 26/11 मुंबई हमले से जुड़े 19 लोगों के नाम भी शामिल किए गए हैं। इन लोगों पर हमले में अलग-अलग तरह से मदद करने के आरोप लगाए गए हैं। कुछ पर हमलावरों को समुद्र के रास्ते मुंबई पहुंचाने में सहायता करने का आरोप है, जबकि कुछ पर हमले के लिए आर्थिक मदद उपलब्ध कराने की बात कही गई है।

    नई सूची में 17 लोगों की तस्वीरें और उनके काम से जुड़ी जानकारी दी गई है। वहीं दो लोगों के नाम सूची में मौजूद होने के बावजूद उनकी तस्वीर और संगठन से संबंधित विवरण हटा दिए गए हैं। तुर्बत के मोहम्मद खान पर हमलावरों को मुंबई पहुंचाने वाली नाव उपलब्ध कराने का आरोप लगाया गया था। नई सूची में उसके नाम के साथ तस्वीर और अन्य जानकारी नहीं दी गई है।

    बहावलनगर के अब्दुल रहमान का नाम भी सूची में मौजूद है, लेकिन उसकी तस्वीर और लश्कर-ए-तैयबा से जुड़ी जानकारी हटा दी गई है। वर्ष 2021 की पुरानी सूची में दोनों के बारे में अधिक विवरण मौजूद था।

    नई सूची में 11 ऐसे लोगों के नाम भी हैं, जिन पर हमलावरों को दो नावों के जरिए समुद्र पार कराने में मदद करने का आरोप लगाया गया है। इनमें मुहम्मद अमजद खान, शाहिद गफूर, मुहम्मद उस्मान, अतीक उर रहमान, रियाज अहमद, मुहम्मद मुश्ताक, मुहम्मद नईम, अब्दुल शकूर, मुहम्मद साबिर सल्फी, मुहम्मद उस्मान और शकील अहमद शामिल हैं।

    इसके अलावा छह लोगों पर हमले के लिए आर्थिक मदद देने का आरोप लगाया गया है। मुहम्मद इफ्तिखार अली पर VOIP कनेक्शन के लिए करीब 70 हजार पाकिस्तानी रुपये खर्च करने का आरोप है। मोहम्मद जिया पर 80 हजार रुपये, मोहम्मद अब्बास नासिर पर 2.53 लाख रुपये, जावेद इकबाल पर 1.86 लाख रुपये और मुख्तार अहमद पर करीब 2.98 लाख रुपये देने का आरोप है। अहमद सईद पर करीब 21 लाख रुपये देने का आरोप लगाया गया है।

    FIA के मुताबिक 26/11 हमले से जुड़े ये लोग करीब 18 साल से फरार हैं। वहीं भारतीय खुफिया सूत्रों का दावा है कि इनमें से कई पाकिस्तान में ही मौजूद हैं। भारत का कहना है कि केवल नाम मोस्ट वांटेड सूची में शामिल करना पर्याप्त कार्रवाई नहीं है। पाकिस्तान की 2021 की सूची में 1,330 मोस्ट वांटेड आतंकियों के नाम थे, जबकि नई सूची में यह संख्या बढ़कर 1,804 हो गई है।

  • चीन के स्कूल के अजीब नियम पर बवाल, तीसरी बार टॉयलेट जाने पर कार्रवाई !

    चीन के स्कूल के अजीब नियम पर बवाल, तीसरी बार टॉयलेट जाने पर कार्रवाई !

    नई दिल्ली। चीन के गुआंगडोंग प्रांत के एक स्कूल का कथित फरमान इन दिनों चर्चा में है। रूयुआन काउंटी हाई स्कूल में छात्रों के लिए ऐसा नियम बनाए जाने की बात सामने आई है, जिसके तहत छह महीने के सेमेस्टर में क्लास के दौरान छात्र सिर्फ एक बार टॉयलेट जा सकते हैं। दूसरी बार टॉयलेट जाने पर अभिभावकों को स्कूल बुलाने और तीसरी बार ऐसा करने पर अनुशासनात्मक कार्रवाई का प्रावधान बताया गया है।

    मामला सामने आने के बाद चीन के सोशल मीडिया पर स्कूल प्रशासन की आलोचना शुरू हो गई। स्थानीय शिक्षा विभाग ने भी अभिभावकों और आम लोगों से मिली शिकायतों के बाद मामले की जांच शुरू कर दी है।

    शिक्षक ने लीक की PPT की तस्वीर

    इस नियम का खुलासा स्कूल की एक स्टाफ मीटिंग में इस्तेमाल की गई पावरपॉइंट प्रेजेंटेशन की तस्वीर इंटरनेट पर सामने आने के बाद हुआ। बताया गया कि स्कूल के एक शिक्षक ने यह तस्वीर ऑनलाइन साझा की थी।

    PPT में क्लासरूम मैनेजमेंट से जुड़े कई सख्त नियम बताए गए थे। इनमें टॉयलेट जाने से संबंधित नियम सबसे ज्यादा चर्चा में आया।

    बताया गया कि पहली बार भी छात्र को तभी क्लास से बाहर जाकर टॉयलेट जाने की अनुमति मिलेगी, जब स्थिति गंभीर या आपातकालीन हो। दूसरी बार ऐसा करने पर उसके माता-पिता को स्कूल बुलाया जाएगा और छात्र के आचरण तथा अनुशासन को लेकर बातचीत होगी। तीसरी बार टॉयलेट जाने पर छात्र के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की बात कही गई है।

    शिक्षकों की नौकरी पर भी नियमों का असर

    रिपोर्ट के मुताबिक, PPT में शिक्षकों के मूल्यांकन को भी छात्रों के अनुशासन से जोड़ने की बात कही गई थी। बताया गया कि शिक्षक की कक्षा के छात्र नियमों का कितना पालन करते हैं, इसे उनके प्रदर्शन के आकलन का आधार बनाया जाएगा।

    इसी आधार पर शिक्षकों के प्रमोशन, वार्षिक वेतन वृद्धि और पुरस्कारों पर भी असर पड़ने की बात सामने आई है। इससे इस कथित नियम को लेकर विवाद और बढ़ गया।

    सोशल मीडिया पर लोगों ने जताई नाराजगी

    मामला सार्वजनिक होने के बाद चीनी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर लोगों ने स्कूल के नियमों पर सवाल उठाए। कुछ यूजर्स ने इसे छात्रों की बुनियादी शारीरिक जरूरतों को अनुशासन से जोड़ने वाला कदम बताया।

    एक यूजर ने सवाल किया कि आखिर यह स्कूल है या जेल। वहीं, कुछ लोगों ने शिक्षा विभाग से नियम को तत्काल रद्द कराने और स्कूल प्रशासन के खिलाफ कार्रवाई की मांग की।

    एक अन्य यूजर ने अपने स्कूल के अनुभव को साझा करते हुए बताया कि वहां क्लास के दौरान टॉयलेट जाने के लिए शिक्षक से हस्ताक्षर वाला पास लेना पड़ता था।

    पहले स्कूल ने बताया गलतफहमी, अब जांच शुरू

    विवाद बढ़ने के बाद स्थानीय मीडिया ने स्कूल प्रशासन से इस संबंध में जवाब मांगा। शुरुआत में एक स्टाफ सदस्य ने इसे महज गलतफहमी बताया। बाद में स्कूल की ओर से इसे विरोधी तत्वों की ओर से फैलाई गई अफवाह करार दिया गया।

    हालांकि, स्थानीय शिक्षा ब्यूरो ने कहा कि उसे अभिभावकों और आम लोगों से इस मामले में बड़ी संख्या में शिकायतें मिली हैं। इसके बाद शिक्षा विभाग ने स्कूल में औपचारिक जांच शुरू कर दी है। जांच के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि वायरल PPT में बताए गए नियम वास्तव में स्कूल की आधिकारिक नीति का हिस्सा थे या नहीं।

  • ट्रंप का आयरिश व्हिस्की पर बड़ा ऐलान: 10% टैरिफ हटाने की घोषणा, बोले- सब मेरे पीछे पड़े थे

    ट्रंप का आयरिश व्हिस्की पर बड़ा ऐलान: 10% टैरिफ हटाने की घोषणा, बोले- सब मेरे पीछे पड़े थे


    नई दिल्ली। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने आयरिश व्हिस्की के कारोबार से जुड़े लोगों को बड़ी राहत देने का ऐलान किया है। आयरलैंड में आयरिश ओपन गोल्फ टूर्नामेंट के समापन समारोह के दौरान ट्रंप ने कहा कि अमेरिका आयरिश व्हिस्की पर लगाया गया 10% टैरिफ हटाने जा रहा है। उन्होंने हल्के-फुल्के अंदाज में कहा कि इस शुल्क को हटाने के लिए प्रधानमंत्री से लेकर गोल्फ खिलाड़ियों तक कई लोग उनके पीछे पड़े हुए थे।

    ट्रंप ने रविवार को यह घोषणा की। उन्होंने बताया कि आयरिश प्रधानमंत्री माइकल मार्टिन के अलावा गोल्फ से जुड़े लोगों ने भी उनके सामने यह मुद्दा उठाया था। आयरिश ओपन के विजेता शेन लोरी भी टैरिफ हटाने की मांग करने वालों में शामिल थे। ट्रंप ने इसी संदर्भ में कहा, “सब इसके लिए मेरे पीछे पड़े थे।”

    अभी 10% शुल्क दे रहे हैं आयरिश व्हिस्की कारोबारी

    फिलहाल अमेरिका में आयरिश व्हिस्की पर 10% टैरिफ लागू है। यह शुल्क यूरोपीय संघ से आने वाले ज्यादातर सामान पर लगाया गया है। जुलाई में अमेरिकी प्रशासन ने इसे 15% से घटाकर 10% किया था। अब ट्रंप के नए ऐलान से आयरिश व्हिस्की को इस शुल्क से पूरी तरह बाहर किए जाने की उम्मीद है।

    हालांकि, ट्रंप की घोषणा के बावजूद यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि टैरिफ हटाने का फैसला किस तारीख से प्रभावी होगा। नई व्यवस्था लागू होने की आधिकारिक समयसीमा का इंतजार है।

    ब्रिटिश व्हिस्की को पहले ही मिल चुकी है राहत

    आयरिश व्हिस्की पर टैरिफ हटाने के फैसले का एक संबंध ब्रिटेन की व्हिस्की को मिली हालिया राहत से भी जोड़ा जा रहा है। ट्रंप ने अप्रैल में ब्रिटेन की कुछ व्हिस्की पर लगे टैरिफ हटाने की घोषणा की थी। इसमें स्कॉच के साथ उत्तरी आयरलैंड में बनने वाली शराब भी शामिल थी।

    इसके बाद आयरलैंड की व्हिस्की पर 10% शुल्क जारी रहने से दोनों देशों के उत्पादों के बीच अलग स्थिति बन गई थी। अब ट्रंप के ताजा ऐलान के बाद आयरिश व्हिस्की को भी ब्रिटिश उत्पादों के समान राहत मिलने की संभावना बढ़ गई है।

    घोषणा पर दर्शकों ने बजाईं तालियां

    ट्रंप की घोषणा के तुरंत बाद समारोह में मौजूद दर्शकों ने तालियों और सीटियों के साथ प्रतिक्रिया दी। हालांकि, राहत की वास्तविक शुरुआत कब होगी, इस बारे में अभी कोई आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है।

    अमेरिका के डिस्टिल्ड स्पिरिट्स काउंसिल के प्रमुख क्रिस स्वॉन्गर ने इस फैसले का स्वागत किया। रिपोर्ट्स के मुताबिक उन्होंने इसे शराब कारोबार में व्यापारिक बाधाएं कम करने की दिशा में सकारात्मक कदम बताया। उनका कहना है कि इससे अमेरिकी दुकानदारों, रेस्टोरेंट, ग्राहकों और अर्थव्यवस्था को फायदा मिल सकता है, खासकर छुट्टियों के सीजन में।

    कई महीनों से टैरिफ हटाने की मांग

    आयरिश व्हिस्की एसोसिएशन भी लंबे समय से अमेरिकी बाजार में लागू इस शुल्क को हटाने की मांग कर रहा था। संगठन ने मई में कहा था कि टैरिफ हटने से आयरिश उत्पाद बेचने वाली कई अमेरिकी कंपनियों को फायदा होगा। इसके साथ ही उपभोक्ताओं के लिए कीमतों को लेकर बनी अनिश्चितता भी कम हो सकती है।

    ब्रिटेन की व्हिस्की को शुल्क से राहत देने के फैसले का जिक्र करते हुए ट्रंप ने अप्रैल में कहा था कि किंग चार्ल्स तृतीय और क्वीन कैमिला की व्हाइट हाउस यात्रा के बाद उन्होंने यह निर्णय लिया था। वहीं, 24 जुलाई को स्कॉच व्हिस्की एसोसिएशन ने बताया था कि ब्रिटेन की व्हिस्की पर शून्य टैरिफ की नीति लागू हो गई है।

    अब सबकी नजर इस बात पर है कि ट्रंप द्वारा आयरिश व्हिस्की पर 10% टैरिफ हटाने की घोषणा को अमेरिकी प्रशासन कब से औपचारिक रूप से लागू करता है।

  • मरीब की ओर बढ़े बनी हशीश के हथियारबंद लड़ाके, हूतियों की ताकत बढ़ने से सऊदी की बढ़ी चिंता

    मरीब की ओर बढ़े बनी हशीश के हथियारबंद लड़ाके, हूतियों की ताकत बढ़ने से सऊदी की बढ़ी चिंता


    नई दिल्ली। यमन में कबीलाई ताकत और आधुनिक हथियारों का गठजोड़ एक बार फिर क्षेत्रीय तनाव बढ़ाने वाला है। राजधानी सना के पूर्वी पहाड़ी इलाकों से बनी हशीश कबीले के हथियारबंद लड़ाकों की बड़ी लामबंदी मरीब की दिशा में हुई है। लड़ाकों के हाथों में AK-47, रॉकेट प्रोपेल्ड ग्रेनेड और अन्य आधुनिक हथियार दिखाई दे रहे हैं। इस काफिले में युवा और अधेड़ लड़ाकों के साथ 8-10 साल के बच्चे भी नजर आ रहे हैं। हूतियों के समर्थन में हुई यह लामबंदी सऊदी अरब के लिए इसलिए अहम है, क्योंकि मरीब लंबे समय से हूती विरोधी ताकतों का प्रमुख गढ़ रहा है।

    सदियों पुरानी कबीलाई ताकत का नया चेहरा

    यमन के पहाड़ी इलाकों से निकल रहे इस काफिले में परंपरागत पोशाक और जाम्बिया पहने लड़ाके भी दिखाई दे रहे हैं। फर्क इतना है कि पुराने दौर के घोड़ों और तलवारों की जगह अब पिकअप ट्रक, मशीनगन और रॉकेट लॉन्चर हैं।

    बनी हशीश कबीले का क्षेत्र सना के पूर्व में पहाड़ों में फैला है। राजधानी के बेहद करीब होने के कारण इसका रणनीतिक महत्व काफी बड़ा है। यहां प्रभाव रखने वाली ताकतें सना के पूर्वी रास्तों और आसपास के इलाकों पर असर डाल सकती हैं।

    यमन में जनजातियां केवल सामाजिक इकाइयां नहीं रही हैं। दशकों से उनका राजनीतिक और सैन्य प्रभाव भी रहा है। बनी हशीश इसी कबीलाई शक्ति का उदाहरण है।

    कभी हूतियों से हुई थी खूनी लड़ाई

    हूतियों और बनी हशीश के रिश्ते हमेशा से एक जैसे नहीं रहे। 2000 के दशक में हुसैन बद्र अल-दीन अल-हूती के नेतृत्व में आंदोलन उभरने और 2004 के बाद हूती विद्रोह शुरू होने के दौरान उत्तरी यमन की कई जनजातियां बदलते सत्ता समीकरणों में उलझी थीं।

    2008-09 के आसपास बनी हशीश के कुछ हिस्सों और हूती लड़ाकों के बीच गंभीर संघर्ष हुआ था। उस समय दोनों पक्ष एक-दूसरे के विरोध में खड़े थे।

    हालात 2014 में बदले, जब हूतियों ने सना पर कब्जा कर लिया। इसके बाद राजधानी और उसके आसपास के इलाकों में उनका सैन्य प्रभाव तेजी से बढ़ा। कई स्थानीय जनजातियां या तो हूतियों के साथ आ गईं या उनके नियंत्रण में चली गईं। बनी हशीश भी इसी बदलाव का हिस्सा बना।

    आज कबीले के कई प्रभावशाली लोग और लड़ाके हूती नेटवर्क से जुड़े बताए जाते हैं। इसलिए बनी हशीश की लामबंदी हूती नेतृत्व के लिए स्थानीय समर्थन के साथ-साथ सैन्य क्षमता बढ़ाने का जरिया भी मानी जाती है।

    मरीब ही क्यों बना निशाना?

    मरीब सना से करीब 175 किलोमीटर पूर्व में उत्तर-मध्य यमन में स्थित है। इसके पश्चिम में सना, उत्तर में अल-जौफ, दक्षिण में अल-बैदा और शबवा तथा पूर्व में हद्रमौत है। भौगोलिक स्थिति के कारण यह राजधानी और यमन के पूर्वी रेगिस्तानी इलाकों के बीच महत्वपूर्ण संपर्क क्षेत्र है।

    मरीब की अहमियत केवल उसके स्थान तक सीमित नहीं है। यह यमन के प्रमुख तेल और गैस क्षेत्रों में शामिल है। 1980 के दशक में यहां बड़े व्यावसायिक तेल भंडार मिले थे। तेल और गैस के अलावा यहां देश का एक महत्वपूर्ण बिजली संयंत्र भी है। मरीब, शबवा और हद्रमौत को मिलाकर यमन का प्रमुख तेल-गैस बेल्ट बनता है।

    यही वजह है कि मरीब पर नियंत्रण की लड़ाई में सत्ता के साथ ऊर्जा संसाधनों का सवाल भी जुड़ा हुआ है।

    हूतियों के लिए मरीब पर कब्जा क्यों अहम

    मरीब लंबे समय से हूती विरोधी यमनी सरकार और स्थानीय कबीलों का मजबूत गढ़ रहा है। ऐसे में यहां अपनी पकड़ बनाना हूतियों के लिए कई मोर्चों पर फायदा दे सकता है।

    मरीब पर दबाव बढ़ने से सना के पूर्व में हूतियों की स्थिति मजबूत होगी। साथ ही उन्हें यमन के ऊर्जा संसाधनों के करीब पहुंच और पूर्वी इलाकों की ओर रणनीतिक रास्तों पर प्रभाव हासिल करने का मौका मिल सकता है।

    2021 में भी हूती सेना ने मरीब पर कब्जे के लिए बड़ा अभियान चलाया था। हालांकि स्थानीय कबीलों और सरकार समर्थक बलों ने उनका मुकाबला किया और हूतियों को सफलता नहीं मिली।

    अब 2026 में फिर बदलते क्षेत्रीय समीकरणों के बीच मरीब महत्वपूर्ण हो गया है। पश्चिमी यमन में हूतियों ने बड़े इलाकों और रणनीतिक बंदरगाहों पर बढ़त बनाई है, जबकि दूसरी ओर सऊदी समर्थित यमनी बल उनके खिलाफ दबाव बनाने की कोशिश कर रहे हैं।

    सऊदी अरब की चिंता सिर्फ मरीब तक सीमित नहीं

    बनी हशीश की यह लामबंदी सीधे सऊदी अरब की सुरक्षा चिंता से भी जुड़ती है। मरीब फिलहाल सऊदी समर्थित यमनी सरकारी सेना के नियंत्रण में है और यह इलाका सना से सऊदी सीमा की ओर जाने वाले रणनीतिक क्षेत्र का हिस्सा है।

    यदि हूती मरीब पर कब्जा करने में सफल होते हैं तो सना के पूर्व में उनकी पकड़ मजबूत हो सकती है। इसके साथ ही तेल-गैस संसाधनों और रणनीतिक मार्गों तक उनकी पहुंच बढ़ने की आशंका है।

    सऊदी अरब के लिए सबसे बड़ी चिंता यह होगी कि मरीब में हूतियों की स्थिति मजबूत होने पर उन्हें सऊदी सीमा की दिशा में रणनीतिक दबाव बढ़ाने के लिए बेहतर भौगोलिक स्थिति मिल सकती है। इससे मिसाइल और ड्रोन हमलों के लिए उनका ऑपरेशनल स्पेस और संसाधन भी बढ़ सकता है।

    यानी बनी हशीश की पहाड़ों से हुई यह लामबंदी सिर्फ एक कबीले के लड़ाकों की आवाजाही नहीं है। इसके पीछे मरीब की सत्ता, यमन के तेल-गैस संसाधन और सऊदी अरब की सुरक्षा—तीनों के समीकरण जुड़े हुए हैं।

  • सऊदी अरब ने बढ़ाई ने टेंशन… ड्रोन हमले के बाद तेल पाइपलाइन को किया अस्थायी रूप से बंद

    सऊदी अरब ने बढ़ाई ने टेंशन… ड्रोन हमले के बाद तेल पाइपलाइन को किया अस्थायी रूप से बंद


    रियाद।
    सऊदी अरब (Saudi Arabia) ने शुक्रवार को ड्रोन हमले के बाद अपनी महत्वपूर्ण पूर्वी-पश्चिमी तेल पाइपलाइन (East-West Oil Pipeline) को अस्थायी रूप से बंद कर दिया। इस दौरान, ईरान (Iran) समर्थित यमन के हूती लड़ाकों ने लाल सागर के दक्षिणी प्रवेश द्वार पर स्थित एक रणनीतिक द्वीप पर कब्जा कर लिया है। इससे पहले से ही चल रहे क्षेत्रीय युद्ध में एक और मोर्चा खुल गया है। इस्लामी मिलिशिया ने बाब अल-मंदेब के नौवहन मार्ग के आसपास वर्षों में अपनी सबसे बड़ी क्षेत्रीय बढ़त हासिल कर ली है। हूतियों की यह बढ़त वैश्विक तेल और गैस की कीमतों को और बढ़ाने के ईरान के प्रयासों को मजबूत कर सकती है। इससे अमेरिका पर युद्ध समाप्त करने के लिए दबाव बढ़ाने की उसकी कोशिशों को बल मिल सकता है।


    1,200 किलोमीटर लंबी पाइपलाइन

    सऊदी अरब ने कहा कि उसने पिछले दिन हुए ड्रोन हमले के बाद अरब प्रायद्वीप के आर-पार फैली 1,200 किलोमीटर लंबी पूर्वी-पश्चिमी पाइपलाइन को बंद कर दिया है। सऊदी अरब ने इस फैसले को एहतियाती कदम बताया है। सऊदी विदेश मंत्रालय ने इस हमले के लिए इराक से उड़ाए गए कई ड्रोन को जिम्मेदार ठहराया और कहा कि हमले में लोग घायल हुए हैं। सरकारी सऊदी प्रेस एजेंसी में जारी बयान में सऊदी अरब ने कहा कि वह तत्काल जवाबी कार्रवाई नहीं करेगा, ताकि इराकी सरकार को आवश्यक कदम उठाने का अवसर दिया जा सके। सऊदी अरब ने हालांकि कहा कि वह अपनी संप्रभुता, सुरक्षा, प्रतिष्ठानों और नागरिकों की रक्षा के लिए सभी आवश्यक कदम उठाने का अधिकार सुरक्षित रखता है।


    इराक सरकार ने की निंदा

    इराक सरकार ने हूतियों के हमले की निंदा की है। प्रधानमंत्री कार्यालय की ओर से जारी आधिकारिक बयान में कहा गया कि जांच में यह पुष्टि होने के बाद कि हमले में इस्तेमाल किये गये ड्रोन वास्तव में इराक के थे, एक सैन्य कमांडर को औपचारिक रूप से पद से हटा दिया गया है। बाद में इराक के सूत्रों ने बताया कि ईराक ने एहतियाती कदम के तौर पर ईरान के साथ शलमचेह सीमा चौकी को बंद करने का आदेश दिया है और हमले के लिए जिम्मेदार लोगों की तलाश के लिए व्यापक अभियान शुरू किया है। सऊदी अरब और अमेरिका ने जुलाई में इराक में ईरान समर्थित मिलिशिया के ठिकानों पर संयुक्त रूप से बमबारी की थी। दोनों देशों ने इन मिलिशिया पर सऊदी तेल प्रतिष्ठानों पर ड्रोन हमले करने का आरोप लगाया था, जिनकी जिम्मेदारी हूतियों ने ली थी।


    बेहद महत्वपूर्ण है यह पाइपलाइन

    गौरतलब है कि 1980 के दशक में निर्मित पूर्वी-पश्चिमी पाइपलाइन सऊदी अरब के तेल निर्यात के लिए बेहद महत्वपूर्ण रही है। यह पाइपलाइन उस समय से सऊदी तेल निर्यात के लिए महत्वपूर्ण बनी हुई है, जब युद्ध के दौरान ईरान ने होर्मुज के रास्ते होने वाले तेल परिवहन को बाधित कर दिया था। अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (आईईए) के अनुसार, जून की शुरुआत तक सऊदी अरब ने कथित तौर पर पाइपलाइन के पश्चिमी छोर पर स्थित लाल सागर के बंदरगाह के जरिए कच्चे तेल का निर्यात दोगुने से अधिक बढ़ाकर प्रतिदिन 50 लाख बैरल से अधिक कर दिया था। बाब अल-मंदेब में स्थित छोटे और बंजर ज्वालामुखीय द्वीप मायून, जिसे पेरिम के नाम से भी जाना जाता है, लेकिन हूतियों के कब्जे की पुष्टि यमन की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त सरकार के एक वरिष्ठ सैन्य अधिकारी और एक हूती अधिकारी ने की है।


    लाल सागर पर निर्भर है सऊदी अरब

    दुनिया का सबसे बड़ा तेल निर्यातक सऊदी अरब, ईरान द्वारा होर्मुज में जहाजों को निशाना बनाये जाने के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक कच्चा तेल पहुंचाने के लिए लाल सागर पर अधिक निर्भर हो गया है। करीब 28 किलोमीटर चौड़े बाब अल-मंदेब को बंद करने के हूतियों के प्रयासों ने इस वैकल्पिक मार्ग का इस्तेमाल करना भी लगातार मुश्किल बना दिया है। हूती सशस्त्र बलों ने शुक्रवार को जारी एक बयान में तटीय क्षेत्र में अपनी और बढ़त का दावा किया, हालांकि इसमें मायून, बंदरगाह शहर मोखा या बाब अल-मंदेब का विशेष रूप से उल्लेख नहीं किया गया। समूह ने सऊदी अरब के खिलाफ जैसी बढ़ोतरी, वैसी बढ़ोतरी की नीति अपनाने का संकल्प जताया और कहा कि सऊदी जहाजों को छोड़कर सभी कंपनियों के लिए समुद्री नौवहन सुरक्षित है।


    तेल बाजार में चिंता

    इन घटनाक्रमों से तेल बाजारों में चिंता बढ़ गई है। इस सप्ताह कच्चे तेल की कीमत फिर 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर पहुंच गयी, जिससे भविष्य में वाशिंगटन के साथ किसी भी बातचीत में तेहरान को अधिक दबाव बनाने का मौका मिल सकता है। जुलाई में नाकाबंदी की घोषणा करने के बाद से हूती लाल सागर में सऊदी जहाजों पर हमले कर रहे हैं और सऊदी अरब के भीतर तेल प्रतिष्ठानों को भी निशाना बना रहे हैं। समूह का कहना है कि उसके हमले यमन में हूतियों के नियंत्रण वाले क्षेत्रों की सऊदी अरब की लंबे समय से जारी नाकाबंदी के जवाब में हैं। एक हूती प्रसारक के अनुसार, गुरुवार को हूतियों द्वारा बंदरगाह शहर मोखा पर कब्जा किये जाने के बाद सऊदी अरब ने मोखा हवाई अड्डे पर हवाई हमला किया। तत्काल किसी के हताहत होने या बड़े नुकसान की रिपोर्टें नहीं है।