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  • US : FBI चीफ ने भर्ती नीति में बदलाव का किया बचाव…. बोले- पीड़ितो को भी मिलेगा मौका

    US : FBI चीफ ने भर्ती नीति में बदलाव का किया बचाव…. बोले- पीड़ितो को भी मिलेगा मौका


    वाशिंगटन।
    अमेरिका (America) के FBI चीफ काश पटेल (FBI Chief Kash Patel) ने भर्ती नीति में बदलाव (Recruitment Policy Changes) का बचाव किया है. उन्होंने मंगलवार को सीनेट की सुनवाई में इस मुद्दे पर सफाई दी. पटेल ने कहा कि FBI के मानक कमजोर नहीं किए गए हैं. बदलाव का मकसद पीड़ितों को मौका देना है।

    दरअसल, FBI ने हाल में भर्ती नियमों में बदलाव किया है. इसके तहत कुछ आवेदकों को प्रॉस्टिट्यूशन के पुराने मामलों के बावजूद नौकरी के लिए विचार किया जा सकता है. बचपन में बेस्टियलिटी का शिकार रहे लोगों को भी मौका दिया जा सकता है।


    ‘पीड़ितों को सजा नहीं देना चाहते’

    सुनवाई के दौरान FBI की भर्ती नीति को लेकर सवाल हुए. रिपब्लिकन सीनेटर जॉन कैनेडी ने बेस्टियलिटी से जुड़े नियम पर सवाल उठाया. उन्होंने पूछा कि इस नियम को बदलने की जरूरत क्यों पड़ी? कैनेडी ने कहा कि इस नियम की सिफारिश करने वाले व्यक्ति से पूछा जाना चाहिए कि वह आखिर ऐसा सुझाव कहां से लेकर आया है।

    इसका जवाब देते हुए पटेल ने कहा कि शुरुआत में उनका भी यही रिएक्शन था. लेकिन बाद में अधिकारियों ने उन्हें कुछ मामले दिखाए. इनमें कुछ लोग ऐसी घटनाओं के लिए मजबूर किए गए थे. इसके बाद पटेल को लगा कि ऐसे लोगों को नौकरी के लिए विचार करने का मौका मिलना चाहिए।

    मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले 10 साल में वेश्यावृत्ति में शामिल रहे कुछ लोगों को FBI में नौकरी नहीं मिल सकेगी। गौरतलब है, सीनेट की सुनवाई के दौरान माहौल काफी गर्म रहा. डेमोक्रेट सांसदों ने पटेल से कई सवाल किए. उन्होंने ट्रंप से जुड़े मामलों की जांच करने वाले FBI अधिकारियों की बर्खास्तगी का भी मुद्दा उठाया. सीनेटर कोरी बुकर ने पटेल पर तीखा हमला किया. उन्होंने पटेल को FBI के लिए अयोग्य तक बताया. पटेल ने भी पलटकर जवाब दिया. दोनों के बीच तीखी बहस हुई।


    चुनाव के दिन FBI की भूमिका पर भी सवाल

    नवंबर में अमेरिका में मिडटर्म चुनाव होने हैं. ऐसे में FBI की भूमिका पर भी सवाल उठे. चुनाव को लेकर भी पटेल से सवाल किया गया. डेमोक्रेट सीनेटर पीटर वेल्च ने पूछा कि क्या वह नवंबर में होने वाले चुनाव में लोगों के वोट के अधिकार में किसी तरह का दखल नहीं देंगे। इसका जवाब देते हुए FBI चीफ काश पटेल ने कहा कि वह किसी भी तरह के हस्तक्षेप में शामिल नहीं होंगे. हालांकि, जब उनसे पूछा गया कि क्या चुनाव के दिन FBI एजेंटों को मतदान केंद्रों पर भेजा जा सकता है, तो उन्होंने इससे साफ इनकार नहीं किया।

    पटेल ने कहा कि चुनाव की निगरानी की जिम्मेदारी होमलैंड सिक्योरिटी विभाग की है. FBI के 56 फील्ड ऑफिस में चुनाव से जुड़े अपराधों के लिए अधिकारी मौजूद रहेंगे. जरूरत पड़ने पर एजेंसी कार्रवाई कर सकती है।


    ट्रंप से जुड़े मामलों पर भी घिरे FBI चीफ

    डेमोक्रेट सीनेटर रिचर्ड ब्लूमेंथल ने FBI अधिकारियों की बर्खास्तगी पर सवाल किया. उन्होंने ईरान मामलों के विशेषज्ञ रहे अधिकारियों को हटाए जाने का मुद्दा उठाया. ब्लूमेंथल ने पूछा कि क्या ट्रंप के राजनीतिक विरोधियों को हटाना ज्यादा जरूरी था. या ईरान से जुड़े खतरों पर नजर रखने वाले अनुभवी अधिकारियों को बनाए रखना?

    पटेल ने जवाब दिया कि उनके लिए सबसे जरूरी FBI को राजनीतिक हथियार बनने से रोकना है. उन्होंने कहा कि वह ऐसे लोगों को एजेंसी में नहीं रखना चाहते जो FBI का गलत इस्तेमाल कर रहे हों. हालांकि, उन्होंने यह नहीं बताया कि ट्रंप से जुड़े मामले की जांच में शामिल होना किस तरह FBI को ‘राजनीतिक हथियार’ बनाता है.

  • ईरान-हूती तनाव के बीच जर्मनी में गुप्त सैन्य बैठक, अमेरिका-इजरायल के साथ 7 अरब देशों के चीफ जुटे

    ईरान-हूती तनाव के बीच जर्मनी में गुप्त सैन्य बैठक, अमेरिका-इजरायल के साथ 7 अरब देशों के चीफ जुटे


    नई दिल्ली। ईरान के साथ जारी संघर्ष और यमन के हूतियों के बढ़ते हमलों के बीच अमेरिका, इजरायल और सात अरब देशों के शीर्ष सैन्य अधिकारियों की जर्मनी में बंद कमरे में बैठक हुई। पिछले सप्ताह हुई इस बैठक में ईरान युद्ध, मध्य-पूर्व की बिगड़ती सुरक्षा स्थिति, स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज में समुद्री आवाजाही और हूती खतरे से निपटने को लेकर सैन्य सहयोग पर चर्चा हुई। बैठक में इजरायल के साथ सऊदी अरब, यूएई, बहरीन, कुवैत, कतर, जॉर्डन और मिस्र के सैन्य प्रमुख शामिल हुए।

    ब्रैड कूपर ने बुलाई बैठक, सार्वजनिक नहीं की गई जानकारी

    बैठक का आयोजन अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) के कमांडर एडमिरल ब्रैड कूपर ने किया था। यह मुलाकात पहले से सार्वजनिक नहीं की गई थी। बाद में CENTCOM ने इसकी पुष्टि करते हुए कहा कि जर्मनी में एक तय कॉन्फ्रेंस के दौरान आठ देशों के वरिष्ठ सैन्य अधिकारियों की मेजबानी की गई और मध्य-पूर्व में सुरक्षा सहयोग बढ़ाने के तरीकों पर चर्चा हुई।

    रिपोर्ट के मुताबिक, यह बैठक इसलिए भी अहम मानी जा रही है क्योंकि इसमें इजरायल और ऐसे अरब देशों के सैन्य अधिकारी एक साथ शामिल हुए, जिनमें से कुछ के इजरायल के साथ औपचारिक राजनयिक संबंध नहीं हैं। इजरायल और अमेरिका के ईरान के साथ युद्ध शुरू होने के बाद इस स्तर की यह पहली बैठक बताई गई है।

    अमेरिका ने कहा- मध्य-पूर्व से सेना हटाने की योजना नहीं

    बैठक में एडमिरल कूपर ने कथित तौर पर सहयोगी देशों को बताया कि ईरानी हमलों के बावजूद अमेरिका की मध्य-पूर्व से अपनी सैन्य मौजूदगी हटाने की योजना नहीं है। उन्होंने स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज में सुरक्षित समुद्री आवाजाही और जहाजों की संख्या बढ़ाने से जुड़ी अमेरिकी योजना की भी जानकारी दी।

    वहीं, इजरायली सेना के चीफ ऑफ स्टाफ लेफ्टिनेंट जनरल एयाल जमीर ने विभिन्न मोर्चों पर चल रहे इजरायली सैन्य अभियानों के बारे में बैठक में जानकारी दी। इससे बैठक में ईरान के साथ संघर्ष के साथ-साथ क्षेत्रीय सैन्य तैयारियों पर भी चर्चा का संकेत मिलता है।

    अब सऊदी अरब पर बढ़ते हूती हमले भी मुद्दा

    बैठक ऐसे समय हुई है जब हूतियों ने सऊदी अरब के खिलाफ हमले तेज किए हैं। रिपोर्टों के मुताबिक, सऊदी अरब और अमेरिका के बीच हूती खतरे को लेकर सैन्य सहयोग भी बढ़ा है। 14 सितंबर को सऊदी क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान और CENTCOM प्रमुख ब्रैड कूपर की जेद्दा में मुलाकात भी हुई, जिसमें क्षेत्रीय हालात और हूती हमलों पर चर्चा हुई।

    Axios की रिपोर्ट के अनुसार, इजरायल, सऊदी अरब और CENTCOM के बीच इस बात पर चर्चा चल रही है कि हूतियों के खिलाफ सऊदी अभियानों में इजरायल किस तरह सहायता कर सकता है। इसमें इंटेलिजेंस, सर्विलांस और रिकॉनिसेंस (ISR) सहयोग का विकल्प भी शामिल बताया गया है। हालांकि, इसे अभी किसी नए सैन्य गठबंधन या संयुक्त अभियान की घोषणा के तौर पर पेश नहीं किया गया है।

    अब्राहम अकॉर्ड के बाद बढ़ा सैन्य तालमेल

    अमेरिका-इजरायल और अरब देशों के बीच सैन्य समन्वय की पृष्ठभूमि 2020 के अब्राहम अकॉर्ड से भी जुड़ी है। इजरायल और यूएई-बहरीन के बीच समझौते के बाद क्षेत्रीय सुरक्षा मामलों में सहयोग के नए रास्ते खुले। इसके बाद इजरायल को अमेरिकी सेंट्रल कमांड के क्षेत्र में शामिल किया गया, जिससे अरब देशों के साथ एयर और मिसाइल डिफेंस सहित अन्य सुरक्षा मुद्दों पर सैन्य समन्वय बढ़ा।

    इजरायली अधिकारियों के अनुसार, मौजूदा संघर्ष के दौरान यूएई को आयरन डोम प्रणाली और उसके संचालन के लिए इजरायली कर्मियों की मदद भी दी गई। इसके अलावा इजरायल ने यूएई को रियल टाइम इंटेलिजेंस, सर्विलांस और रिकॉनिसेंस सहायता देने तथा क्षेत्रीय साझेदारों के साथ खुफिया जानकारी साझा करने की बात भी कही है।

    होर्मुज से लेकर लाल सागर तक बढ़ी चुनौती

    मध्य-पूर्व में इस समय सुरक्षा चिंता केवल ईरान तक सीमित नहीं है। स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज से होकर होने वाला तेल और व्यापारिक परिवहन, लाल सागर-बाब अल-मंदेब क्षेत्र में हूती गतिविधियां और सऊदी अरब की सुरक्षा—तीनों मुद्दे एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं। जुलाई में भी CENTCOM ने बहरीन में 12 देशों के वरिष्ठ सैन्य अधिकारियों के साथ क्षेत्रीय सुरक्षा संवाद किया था, जिसमें हॉर्मुज से वाणिज्यिक आवाजाही की स्वतंत्रता और रक्षा सहयोग पर चर्चा हुई थी।

    जर्मनी की बैठक ऐसे समय में हुई है जब क्षेत्रीय सैन्य सहयोग के साथ-साथ ईरान और खाड़ी देशों के बीच तनाव कम करने की कूटनीतिक कोशिशें भी चल रही हैं। इसलिए इस बैठक को मध्य-पूर्व में बढ़ते सैन्य समन्वय के एक महत्वपूर्ण संकेत के रूप में देखा जा रहा है, लेकिन इससे अपने आप किसी नई व्यापक जंग की शुरुआत तय नहीं होती।

  • मक्का तक पहुंचा हूती हमलों का खतरा, सऊदी के छह शहरों में बजे इमरजेंसी सायरन; 13 लोग घायल

    मक्का तक पहुंचा हूती हमलों का खतरा, सऊदी के छह शहरों में बजे इमरजेंसी सायरन; 13 लोग घायल

    रियाद। यमन के हूती विद्रोहियों की ओर से सऊदी अरब पर मिसाइल और ड्रोन हमलों के बाद मंगलवार को देश के छह प्रमुख शहरों में आपातकालीन चेतावनी जारी की गई। इनमें मक्का, जिद्दा और ताइफ जैसे महत्वपूर्ण शहर भी शामिल रहे। सऊदी अरब के लिए यह स्थिति इसलिए बेहद संवेदनशील मानी जा रही है क्योंकि पहली बार मक्का तक संभावित हमले का खतरा पहुंचा और वहां भी लोगों को सतर्क रहने की चेतावनी दी गई।

    सऊदी अरब के सिविल डिफेंस ने अपने नेशनल अर्ली वार्निंग प्लेटफॉर्म के माध्यम से जिद्दा, ताइफ, आभा, जाजान प्रांत, अल-उला और यान्बू सहित छह क्षेत्रों में अलर्ट जारी किया। चेतावनी मिलते ही प्रशासन ने लोगों से घबराने के बजाय घरों अथवा नजदीकी सुरक्षित स्थानों के भीतर रहने की अपील की। लोगों को खिड़की, दरवाजे, बालकनी और छत से दूर रहने तथा सार्वजनिक स्थानों पर भीड़ नहीं लगाने की सलाह दी गई। प्रशासन ने लोगों से केवल आधिकारिक सूचनाओं पर भरोसा करने को कहा।

    दक्षिणी सऊदी में हमले, 13 नागरिक घायल

    यह अलर्ट सोमवार को यमन की दिशा से हुए सिलसिलेवार मिसाइल और ड्रोन हमलों के बाद जारी किया गया। सऊदी अरब के नेतृत्व वाले सैन्य गठबंधन के प्रवक्ता मेजर जनरल तुर्की अल-मलिकी के मुताबिक, 14 सितंबर को हुए हमलों में आम नागरिकों और उनके रिहाइशी इलाकों को निशाना बनाया गया।

    अल-मलिकी ने बताया कि मिसाइल और ड्रोन मुख्य रूप से खमीस मुशैत, आभा और ताइफ शहरों में पहुंचे। हमलों में 13 लोग घायल हुए, जबकि कम से कम सात आवासीय मकानों और दो निजी वाहनों को नुकसान पहुंचा।

    हूतियों ने सऊदी एयरबेस को निशाना बनाने का किया दावा

    दूसरी ओर, हूती विद्रोहियों ने इन हमलों की जिम्मेदारी लेते हुए दावा किया कि उन्होंने सऊदी अरब के भीतर काफी अंदर तक सैन्य कार्रवाई की। हूतियों के अनुसार, उनका मुख्य निशाना खमीस मुशैत में स्थित सऊदी अरब का महत्वपूर्ण सैन्य एयरबेस था।

    हूती प्रवक्ताओं ने दावा किया कि यह हमला यमन में सऊदी नेतृत्व वाले गठबंधन की एयरस्ट्राइक के जवाब में किया गया। उनके मुताबिक, मिसाइल और ड्रोन से एयरबेस के लड़ाकू विमानों के हैंगर, रडार सिस्टम, रनवे और गोला-बारूद के भंडार को निशाना बनाया गया तथा वहां भारी नुकसान हुआ।

    2022 के सीजफायर के बाद फिर बढ़ा तनाव

    हूती हमलों के दावों के बीच सऊदी नेतृत्व वाले गठबंधन ने अपनी संप्रभुता और नागरिकों की सुरक्षा के लिए कड़ा जवाब देने की बात कही है। मेजर जनरल तुर्की अल-मलिकी ने कहा कि सऊदी अरब अपने नागरिकों और बुनियादी ढांचे की रक्षा करने में सक्षम है तथा भविष्य में ऐसे हमलों को रोकने के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएंगे।

    यह घटनाक्रम ऐसे समय हुआ है जब वर्ष 2022 में संयुक्त राष्ट्र की कोशिशों से हुआ सीजफायर प्रभावी नहीं रह गया है। दोनों पक्षों के बीच शांति प्रयासों में ठहराव के बीच क्षेत्र में एक बार फिर सैन्य गतिविधियां बढ़ती दिखाई दे रही हैं।

    तेल ढांचे पर भी मंडरा रहा खतरा

    सऊदी अरब की चिंता केवल मिसाइल और ड्रोन हमलों तक सीमित नहीं है। देश के महत्वपूर्ण ऊर्जा ढांचे पर भी हमलों का खतरा बढ़ रहा है। पिछले सप्ताह एक हवाई हमले के कारण सऊदी अरब की ईस्ट-वेस्ट तेल पाइपलाइन का संचालन प्रभावित हुआ था। हालांकि, उस हमले के लिए हूतियों को जिम्मेदार नहीं बताया गया, बल्कि इराक में सक्रिय ईरान समर्थित शिया गुटों पर संदेह जताया गया।

    सऊदी सिविल डिफेंस के अनुसार, छहों क्षेत्रों में जारी आपातकालीन चेतावनी बाद में हटा ली गई और खतरा टल गया। हालांकि, मक्का और जिद्दा जैसे महत्वपूर्ण शहरों तक सुरक्षा अलर्ट पहुंचना इस बात का संकेत है कि यमन से जुड़ा संघर्ष अब व्यापक क्षेत्रीय सुरक्षा और आर्थिक स्थिरता के लिए गंभीर चुनौती बनता जा रहा है।

  • BRICS में ईरानी पत्रकार ने पाकिस्तान पर उठाए सवाल, बोले- पीएम मोदी की कूटनीति के आगे आसिम मुनीर की भूमिका कमजोर

    BRICS में ईरानी पत्रकार ने पाकिस्तान पर उठाए सवाल, बोले- पीएम मोदी की कूटनीति के आगे आसिम मुनीर की भूमिका कमजोर

    नई दिल्ली ।भारत की मेजबानी में आयोजित BRICS शिखर सम्मेलन के दौरान पश्चिम एशिया के बदलते कूटनीतिक समीकरणों को लेकर भी चर्चा हुई। ईरान से आए पत्रकार बसीम लालेह ने पाकिस्तान की भूमिका पर सवाल उठाते हुए कहा कि पश्चिम एशिया के संकट के बीच भारत संवाद और कूटनीति के स्तर पर अधिक प्रभावी भूमिका निभा रहा है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत की कूटनीतिक सक्रियता की सराहना की और पाकिस्तान के सैन्य प्रमुख आसिम मुनीर पर भी टिप्पणी की।

    लालेह के मुताबिक, ईरान और अमेरिका के बीच तनाव के दौरान पाकिस्तान ने मध्यस्थता में अपनी भूमिका को प्रमुखता से पेश करने की कोशिश की, लेकिन वह इसमें सफल नहीं रहा। इसके विपरीत, भारत ने विभिन्न देशों के साथ सीधे संवाद के जरिए अपनी कूटनीतिक स्थिति मजबूत की है। उन्होंने कहा कि BRICS सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री मोदी की ईरान और यूएई के नेताओं के साथ बातचीत इसका उदाहरण है।

    ईरानी पत्रकार ने बताया कि भारत में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन के बीच बातचीत हुई। इसके साथ ही अबू धाबी के क्राउन प्रिंस के साथ भी प्रधानमंत्री की चर्चा हुई। उनके अनुसार, इसके बाद यूएई और ईरान के बीच बातचीत का रास्ता बनना पश्चिम एशिया में भारत की कूटनीतिक भूमिका को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि होर्मुज और खाड़ी क्षेत्र से जुड़े मुद्दों पर भी संवाद के जरिए आगे बढ़ने की संभावना बन सकती है।

    आसिम मुनीर को लेकर लालेह ने तीखी टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि मुनीर कई मोर्चों पर असफल रहे हैं और भारत की बढ़ती कूटनीतिक सक्रियता के बाद पश्चिम एशिया में पाकिस्तान की भूमिका कमजोर पड़ती दिखाई दे रही है। इसी संदर्भ में उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ने आसिम मुनीर की छुट्टी कर दी है। हालांकि, यह टिप्पणी राजनीतिक और कूटनीतिक प्रभाव के संदर्भ में की गई थी।

    लालेह ने BRICS सम्मेलन की मेजबानी और प्रधानमंत्री मोदी की कूटनीति की भी प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि भारत ने मतभेदों को पीछे छोड़कर बातचीत और सहयोग पर जोर दिया है। उनके मुताबिक, पश्चिम एशिया में जारी संकट के समाधान के लिए संवाद महत्वपूर्ण है और भारत इस दिशा में उपयोगी भूमिका निभा सकता है। उन्होंने उम्मीद जताई कि अगले दो महीनों में क्षेत्र में चल रहे संघर्ष को लेकर सकारात्मक बदलाव दिखाई दे सकते हैं।

    पाकिस्तान की विदेश नीति पर सवाल उठाते हुए लालेह ने कहा कि पाकिस्तान खुद कई मामलों में दूसरे देशों पर निर्भर है। उनके अनुसार, इसी वजह से पाकिस्तान के लिए स्वतंत्र तरीके से विदेश नीति तय करना मुश्किल है। उन्होंने पाकिस्तान की कूटनीति को कमजोर बताते हुए कहा कि वह क्षेत्रीय शांति को लेकर कोई प्रभावी उदाहरण स्थापित नहीं कर पाया है।

    ईरानी पत्रकार ने पाकिस्तान पर आतंकवाद के मुद्दे को लेकर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि जो देश आतंकवाद से जुड़े आरोपों का सामना करता रहा है, उसके लिए शांति की पहल का नेतृत्व करना मुश्किल होता है। उन्होंने पश्चिम एशिया में पाकिस्तान की भूमिका को लेकर भी सवाल उठाए और कहा कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत को लगातार अधिक महत्व मिल रहा है।

    लालेह ने सऊदी अरब की सुरक्षा से जुड़े घटनाक्रम का भी जिक्र किया। उनके मुताबिक, सऊदी अरब पर हमले करने वालों के खिलाफ पाकिस्तान अपेक्षित भूमिका नहीं निभा पाया है। उन्होंने सऊदी क्राउन प्रिंस के साथ पाकिस्तान और तुर्की से जुड़े मक्का जॉइंट डिफेंस एग्रीमेंट का भी उल्लेख किया और कहा कि इस मामले में पाकिस्तान की भूमिका को लेकर सवाल उठ रहे हैं।

    BRICS सम्मेलन के दौरान भारत की सक्रिय कूटनीति और पश्चिम एशिया में बदलते समीकरणों के बीच पाकिस्तान की भूमिका पर बहस तेज है। ईरानी पत्रकार बसीम लालेह की टिप्पणियों ने इस चर्चा को और बढ़ा दिया है। वहीं, भारत की ओर से विभिन्न देशों के साथ संवाद और सहयोग बढ़ाने की कोशिशों पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नजर बनी हुई है।

  • अफगानिस्तान यात्रा के दौरान मुसीबत में फंसी केरल की ट्रैवल व्लॉगर, गिरफ्तारी का दावा कर मदद की लगाई गुहार

    अफगानिस्तान यात्रा के दौरान मुसीबत में फंसी केरल की ट्रैवल व्लॉगर, गिरफ्तारी का दावा कर मदद की लगाई गुहार

    नई दिल्ली ।केरल की लोकप्रिय ट्रैवल व्लॉगर अरुणिमा ने अफगानिस्तान के बामियान शहर से मदद की गुहार लगाई है। उन्होंने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट के जरिए दावा किया कि उन्हें मुजाहिदीन ने गिरफ्तार कर लिया है। अरुणिमा कुछ समय से अफगानिस्तान की यात्रा पर हैं और वहां से लगातार वीडियो तथा तस्वीरें सोशल मीडिया पर साझा कर रही थीं। उन्होंने अपनी पोस्ट में भारतीय दूतावास से संपर्क करने में मदद मांगी है।

    अरुणिमा ने अपने सोशल मीडिया पेज पर एक कथित आधिकारिक संदेश का अनुवाद भी साझा किया। उनके अनुसार, इस संदेश में बताया गया है कि अफगानिस्तान में मुजाहिदीन ने उन्हें गिरफ्तार कर लिया है। पोस्ट में उन्होंने अपनी स्थिति को लेकर चिंता जताई और बताया कि वह बामियान में हैं। उन्होंने भारतीय दूतावास तक अपनी बात पहुंचाने के लिए लोगों से मदद मांगी।

    हालांकि, अरुणिमा की कथित गिरफ्तारी से जुड़ी जानकारी की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो सकी है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, इस मामले में विदेश मंत्रालय की ओर से तत्काल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई थी। ऐसे में सोशल मीडिया पोस्ट में किए गए दावे को लेकर स्थिति अभी स्पष्ट नहीं है।

    अरुणिमा की पोस्ट में उनकी कथित हिरासत की परिस्थितियों के बारे में विस्तृत जानकारी नहीं दी गई है। यह भी स्पष्ट नहीं है कि उन्हें किस स्थान पर और किन परिस्थितियों में हिरासत में लिया गया। उनके द्वारा साझा किए गए कथित आधिकारिक संदेश में गिरफ्तारी का उल्लेख होने की बात कही गई है, लेकिन घटना से जुड़ी अन्य जानकारी सामने नहीं आई है।

    अरुणिमा पिछले कुछ दिनों से अफगानिस्तान में यात्रा कर रही थीं। इस दौरान उन्होंने वहां के अलग-अलग स्थानों से कई वीडियो और तस्वीरें अपने सोशल मीडिया पेज पर साझा कीं। उनकी पोस्ट में अफगानिस्तान के स्थानीय माहौल और वहां के लोगों के साथ बिताए गए समय की झलक भी दिखाई देती रही है।

    अफगानिस्तान में अपनी यात्रा के दौरान अरुणिमा ने तालिबान शासन के तहत महिलाओं की स्थिति पर भी बात की थी। उन्होंने अपने वीडियो में अफगान महिलाओं की परिस्थितियों, स्थानीय लोगों के डर और वहां लागू पाबंदियों का जिक्र किया था। इसके अलावा उन्होंने स्थानीय लोगों के साथ मुलाकात और बातचीत से जुड़ी तस्वीरें भी साझा की थीं।

    बामियान अफगानिस्तान का एक प्रमुख क्षेत्र है, जहां अरुणिमा अपनी यात्रा के दौरान पहुंची थीं। सोशल मीडिया पर उनकी गतिविधियों से पता चलता है कि वह वहां के स्थानीय जीवन और परिस्थितियों को अपने दर्शकों तक पहुंचा रही थीं। इसी दौरान सामने आई उनकी कथित गिरफ्तारी की पोस्ट ने चिंता बढ़ा दी है।

    फिलहाल सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि अरुणिमा ने खुद को मुश्किल में होने की बात कहते हुए भारतीय दूतावास से संपर्क कराने की अपील की है। उनकी पोस्ट में कथित हिरासत का दावा किया गया है, लेकिन आधिकारिक स्तर पर इसकी पुष्टि नहीं हुई है। इसलिए घटना की वास्तविक स्थिति स्पष्ट होने के लिए आधिकारिक जानकारी का इंतजार करना होगा।

  • इमरान खान की पूर्व पत्नी जेमिमा गोल्डस्मिथ ने दूसरी शादी की, करोड़पति फाइनेंसर कैमरन ओ राइली बने जीवनसाथी

    इमरान खान की पूर्व पत्नी जेमिमा गोल्डस्मिथ ने दूसरी शादी की, करोड़पति फाइनेंसर कैमरन ओ राइली बने जीवनसाथी


    नई दिल्ली ।
    पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री और पूर्व क्रिकेट कप्तान इमरान खान की पूर्व पत्नी जेमिमा गोल्डस्मिथ ने दूसरी शादी कर ली है। जेमिमा ने आयरिश-ऑस्ट्रेलियाई कारोबारी और फाइनेंसर कैमरन ओ राइली के साथ विवाह किया है। गोल्डस्मिथ परिवार की ओर से इस शादी की पुष्टि की गई है। बताया जा रहा है कि दोनों ने सप्ताहांत में एक समारोह के दौरान शादी की।

    जेमिमा गोल्डस्मिथ पेशे से फिल्म निर्माता हैं और उनकी उम्र 52 वर्ष बताई गई है। इससे पहले उनकी शादी पाकिस्तान के क्रिकेटर से नेता बने इमरान खान से हुई थी। दोनों का विवाह करीब नौ साल तक चला। वर्ष 2004 में उनका तलाक हो गया। इमरान और जेमिमा के दो बेटे हैं, सुलेमान और कासिम।

    जेमिमा की दूसरी शादी की जानकारी उनके परिवार से जुड़ी सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए सामने आई। उनके भाई बेन की पत्नी जेमिमा जोन्स ने अपने पति के साथ एक तस्वीर साझा की और शादी के जश्न की जानकारी दी। पोस्ट में जेमिमा और कैमरन के साथ खुशी के इस अवसर का उल्लेख किया गया था।

    कैमरन ओ राइली 62 वर्षीय आयरिश-ऑस्ट्रेलियाई कारोबारी हैं। दोनों की नजदीकी फिल्मों और वृत्तचित्रों में समान रुचि के कारण बढ़ी। जेमिमा गोल्डस्मिथ फिल्म और टेलीविजन निर्माण से लंबे समय से जुड़ी रही हैं। उन्होंने इंस्टिंक्ट प्रोडक्शंस नाम की निर्माण कंपनी की स्थापना की थी और कई फिल्मों तथा कार्यक्रमों की कहानियों के लेखन और निर्माण से जुड़ी रही हैं।

    जेमिमा के काम से जुड़ी चर्चित फिल्मों में शेखर कपूर के निर्देशन में बनी रोमांटिक कॉमेडी फिल्म ‘व्हाट्स लव गॉट टू डू विद इट?’ भी शामिल है। फिल्म निर्माण और रचनात्मक कार्यों में उनकी सक्रियता के कारण उनका नाम लंबे समय से मनोरंजन जगत से जुड़ा रहा है।

    दूसरी ओर, इमरान खान लंबे समय से जेल में बंद हैं। पाकिस्तान को 1992 में क्रिकेट विश्व कप जिताने वाले इमरान खान वर्ष 2023 से भ्रष्टाचार के आरोपों में जेल में हैं। मौजूदा समय में वह रावलपिंडी की जेल में बंद हैं। उनके स्वास्थ्य को लेकर भी लगातार चिंता जताई जाती रही है।

    इमरान खान की तबीयत को लेकर कई पूर्व क्रिकेटरों ने चिंता व्यक्त की है और उनके लिए बेहतर चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराने की मांग की गई है। दुनिया की अलग-अलग टीमों के 21 पूर्व कप्तानों ने भी पाकिस्तानी अधिकारियों को पत्र लिखकर उनके स्वास्थ्य को लेकर चिंता जताई थी। इनमें इंग्लैंड के पूर्व कप्तान और कमेंटेटर माइकल एथरटन भी शामिल थे।

    इमरान के दोनों बेटों सुलेमान और कासिम ने भी अपने पिता की सुरक्षा को लेकर चिंता जताई थी। दोनों ने दावा किया था कि जेल में उनके पिता को नुकसान पहुंचाने के प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने यह भी बताया था कि वर्ष 2022 में इमरान पर हुए हत्या के प्रयास के बाद से वे उनसे आमने-सामने नहीं मिले हैं। दोनों के अनुसार, मार्च में उनकी अपने पिता से आखिरी बार फोन पर बातचीत हुई थी।

    जेमिमा और इमरान के तलाक के बाद दोनों की राहें अलग हो गई थीं। अब जेमिमा ने दूसरी शादी कर ली है, जबकि इमरान खान पाकिस्तान में जेल में बंद हैं। जेमिमा की शादी की खबर सामने आने के बाद उनके परिवार की ओर से खुशी जाहिर की गई है।

  • कार्नी की US से निवेश खींचने की तैयारी….. कनाड़ा इन्वेस्टमेंट समिट में जुटेंगे 300 दिग्गज सीईओ

    कार्नी की US से निवेश खींचने की तैयारी….. कनाड़ा इन्वेस्टमेंट समिट में जुटेंगे 300 दिग्गज सीईओ


    टोरंटो।
    अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (American President Donald Trump) चाहते हैं कि कारखाने और निवेश दक्षिण की ओर यानी अमेरिका (America) आएं। वहीं, कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी (Canadian Prime Minister Mark Carney) को उम्मीद है कि वे अरबों डॉलर का निवेश उत्तर की ओर यानी कनाडा ((Canada) की तरफ ला सकते हैं।

    इस हफ्ते कार्नी के ‘कनाडा इन्वेस्टमेंट समिट’ के लिए दुनिया की कुछ सबसे बड़ी इन्वेस्टमेंट कंपनियों के लगभग 300 सीईओ और सीनियर एग्जीक्यूटिव टोरंटो के यॉर्कविले इलाके में मौजूद ‘फोर सीजन्स’ होटल में इकट्ठा हो रहे हैं। ये निवेशक मिलकर 120 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर से ज्यादा की संपत्ति का प्रबंधन करते हैं। इससे उस पूंजी के बड़े पैमाने का पता चलता है जिसे कार्नी हासिल करना चाहते हैं, क्योंकि कनाडा अरबों डॉलर का नया निवेश आकर्षित करने और अमेरिका पर अपनी आर्थिक निर्भरता कम करने की कोशिश कर रहा है।


    पीएम कार्नी ने क्या कहा था?

    पिछले हफ्ते अल्बर्टा के बैनफ में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कार्नी ने कहा, ‘कनाडा की पहचान सिर्फ अमेरिका के पड़ोस में होने तक सीमित नहीं है। हमारे पास वह सब कुछ है जिसकी दुनिया को जरूरत है।’ कार्नी ने कनाडा के विशाल ऊर्जा और जरूरी खनिजों के संसाधनों, वहां के पढ़े-लिखे वर्कफोर्स और उन ट्रेड एग्रीमेंट्स की ओर इशारा किया, जिनकी वजह से कनाडा में मौजूद कंपनियों को दुनिया भर में लगभग 1.5 अरब ग्राहकों तक पहुंच मिलती है।

    कनाडा को भरोसा है कि वह ट्रंप का सामना कर सकता है और अपने निवेश के स्रोतों में विविधता ला सकता है। लेकिन यह शिखर सम्मेलन कनाडा के लिए एक नाजुक समय पर हो रहा है। व्यापार वार्ता 21 अगस्त को विफल हो गई, जिसके बाद ट्रंप ने लगभग 20 अरब अमेरिकी डॉलर के कनाडाई सामानों पर 50 प्रतिशत टैरिफ लगा दिया। कनाडा ने जवाबी कार्रवाई की। इसके बाद वाशिंगटन ने फिर से दबाव बढ़ाते हुए कुछ कनाडाई आयात पर प्रतिबंध लगाने की घोषणा की और बड़े, दीर्घकालिक अमेरिकी सरकारी अनुबंधों से कनाडाई उत्पादों को बाहर करने की दिशा में कदम उठाए।

    ट्रंप के टैरिफ और मैन्युफैक्चरिंग को बॉर्डर के दक्षिण में ले जाने की कोशिशें उस चीज को कमजोर कर रही हैं, जो लंबे समय से विदेशी निवेशकों के लिए देश के सबसे बड़े आकर्षणों में से एक थी। कॉन्टिनेंटल फ्री ट्रेड के तहत विशाल अमेरिकी बाजार तक भरोसेमंद पहुंच।


    वित्त मंत्री फ्रांस्वा-फिलिप शैम्पेन ने क्या कहा?

    जब पूछा गया कि क्या कनाडा ट्रंप के साथ ट्रेड डील के बिना लंबे समय तक टिक सकता है, तो वित्त मंत्री फ्रांस्वा-फिलिप शैम्पेन ने कहा कि ओटावा प्रभावित व्यवसायों और कर्मचारियों की मदद करने के लिए तैयार है। शैम्पेन ने ‘द एसोसिएटेड प्रेस’ को बताया, ‘हमारे पास अपने उद्योगों और कर्मचारियों की मदद करने के लिए जरूरी संसाधन हैं – चाहे कितना भी समय लगे या जो कुछ भी करना पड़े।’

    सरकार ने सोमवार को यह भी कहा कि वह 1 अरब अमेरिकी डॉलर या उससे अधिक के निवेश के लिए कर संबंधी निर्णयों को प्राथमिकता देगी, जिससे बड़े निवेशकों को पूंजी लगाने से पहले अधिक निश्चितता मिलेगी।


    कनाडा पर दांव लगाने पर कार्नी ने क्या कहा?

    कार्नी वैश्विक निवेशकों से व्यापार युद्ध को नजरअंदाज करते हुए कनाडा पर दांव लगाने का आग्रह कर रहे हैं। साथ ही ट्रंप के नेतृत्व में तेजी से अप्रत्याशित होते जा रहे संयुक्त राज्य अमेरिका के साथ कनाडा के कानून के शासन और विश्वसनीयता की तुलना स्पष्ट रूप से कर रहे हैं। कार्नी ने कहा, ‘निवेशकों को एक ऐसा देश मिलेगा जो कानून के शासन का सम्मान करता है और एक ऐसा देश जो भरोसेमंद है। दुनिया में ऐसा संयोजन बहुत कम देखने को मिलता है। यह एक आकर्षक संयोजन है।’

    इस शिखर सम्मेलन का उद्देश्य वैश्विक पूंजी को महत्वपूर्ण खनिजों, प्रौद्योगिकी, रक्षा, उन्नत विनिर्माण और ऊर्जा के क्षेत्र में प्रमुख परियोजनाओं के साथ जोड़ना है। सोमवार को एक बड़े निवेश की घोषणा की गई। बेल कनाडा ने कहा कि वह सस्केचेवान में पहले से निर्माणाधीन एआई डेटा-सेंटर परियोजना को चार गुना बढ़ाएगी, जिससे 1.2 गीगावाट की सुविधा का मार्ग प्रशस्त होगा और कुल अनुमानित पूंजी निवेश 50 अरब कनाडाई डॉलर (36 अरब अमेरिकी डॉलर) से अधिक हो जाएगा।

  • US: मध्यावधि चुनाव से पहले ट्रंप को बड़ा झटका…. SC ने मेल मतपत्र प्रतिबंधों को किया खारिज

    US: मध्यावधि चुनाव से पहले ट्रंप को बड़ा झटका…. SC ने मेल मतपत्र प्रतिबंधों को किया खारिज


    न्यूयॉर्क।
    सोमवार को सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (President Donald Trump) के मेल मतपत्र प्रतिबंधों को फिलहाल खारिज कर दिया। इस निर्णय से राज्यों को अपनी पुरानी मेल मतपत्र प्रक्रियाओं को जारी रखने की अनुमति मिल गई है। यह फैसला मध्यावधि चुनावों (Mid-term elections) में मतदान शुरू होने के बीच आया है। ट्रंप प्रशासन कांग्रेस पर नियंत्रण के लिए नवंबर के चुनावों से पहले इन प्रतिबंधों को लागू करना चाहता था।

    डाक मतपत्र के मामले में जजों की राय क्या?
    जस्टिस सैमुअल एलिटो और जस्टिस क्लेरेंस थॉमस ने इस संक्षिप्त आदेश का विरोध किया। जस्टिस ब्रेट कवानुघ ने प्रतिबंधों को मध्यावधि चुनावों के लिए लागू न करने पर सहमति जताई। हालांकि, उन्होंने बाद में ट्रंप प्रशासन के पक्ष में फैसला सुनाने का संकेत दिया। यह मामला महत्वपूर्ण है क्योंकि देश का लगभग एक तिहाई हिस्सा मेल द्वारा मतदान करता है।


    2020 में मिली हार का कारण डाक मतपत्र को मानते हैं ट्रंप

    चुनाव अधिकारियों ने कहा कि मध्यावधि चुनावों से पहले पूर्ण बदलाव करना संभव नहीं था। अलाबामा, उत्तरी कैरोलिना और विस्कॉन्सिन ने पिछले सप्ताह ही मतदाताओं को मेल मतपत्र भेजना शुरू कर दिया था। उस समय भी नई प्रणाली सक्रिय नहीं थी। ट्रंप ने लंबे समय से मेल मतदान का विरोध किया है। उन्होंने 2020 के चुनाव में जो बाइडेन से अपनी हार के लिए इसे गलत तरीके से दोषी ठहराया था। हालांकि, वह खुद अक्सर इसी तरीके से मतदान करते रहे हैं, जिसमें इस साल भी शामिल है।


    ट्रंप प्रशासन की क्या थी योजना?

    ट्रंप प्रशासन की योजना में राज्यों को एक समान लिफाफा शैली अपनानी थी। उन्हें योग्य मतदाताओं की सूची एक ऑनलाइन माध्यम पर जमा करनी होती। पोस्टल सर्विस उन राज्यों को मतपत्र देने से मना कर सकती थी जो नियमों का पालन नहीं करते। एक व्हिसलब्लोअर रिपोर्ट ने इस प्रणाली पर चिंता जताई थी। रिपोर्ट के अनुसार, ऑनलाइन माध्यम ठीक से नहीं बना था। एक बार कोड त्रुटि से लाखों मेल मतपत्रों का पूरा समूह रद्द हो सकता था।


    प्रतिबंधों को क्यों चुनौती दी गई?

    डेमोक्रेटिक राज्य अधिकारियों और मतदान अधिकार समूहों ने इन प्रतिबंधों को अदालत में चुनौती दी। उन्होंने तर्क दिया कि राष्ट्रपति के पास चुनाव नियम तय करने का सांविधानिक अधिकार नहीं है। उनके अनुसार, ये नियम एक बड़े चुनाव की पूर्व संध्या पर मेल मतदान को लगभग समाप्त कर देंगे। निचली अदालतों ने ट्रंप की योजना को अवरुद्ध कर दिया था। इसमें राष्ट्रपति द्वारा नामित एक न्यायाधीश द्वारा जारी किया गया प्रारंभिक निषेधाज्ञा भी शामिल था।


    सुप्रीम कोर्ट में क्या हुआ?

    ट्रंप प्रशासन ने निचली अदालतों के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी। प्रशासन ने तर्क दिया कि पोस्टल सर्विस पर संघीय नियंत्रण उन्हें मेल मतपत्रों के लिए नियम तय करने की अनुमति देता है। उन्होंने यह भी कहा कि नियमों का पालन करना संभव था। संघीय सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में एक प्रारंभिक प्रक्रियात्मक निर्णय जीता था। हालांकि, जस्टिस ने योजना की वैधता पर स्पष्ट रूप से कोई फैसला नहीं सुनाया था।

  • ट्रंप प्रशासन के वीजा नियम पर कोर्ट की रोक, विदेशी छात्रों और पत्रकारों को मिली राहत

    ट्रंप प्रशासन के वीजा नियम पर कोर्ट की रोक, विदेशी छात्रों और पत्रकारों को मिली राहत


    वॉशिंगटन। अमेरिका में ट्रंप प्रशासन को संघीय अदालत से झटका लगा है। बोस्टन के एक फेडरल जज ने विदेशी छात्रों, एक्सचेंज विजिटर्स और पत्रकारों के अमेरिका में रहने की अवधि सीमित करने वाले नए नियम पर रोक लगा दी है। अमेरिकी जिला जज एफ. डेनिस सेलॉर ने यूनियनों और उच्च शिक्षा की वकालत करने वाले संगठनों के गठबंधन के पक्ष में फैसला सुनाया। यह आदेश नए नियम के लागू होने से ठीक एक दिन पहले आया।

    जज बोले- पांच दशक पुरानी व्यवस्था बदलने का तर्क कमजोर
    जज सेलॉर ने कहा कि डिपार्टमेंट ऑफ होमलैंड सिक्योरिटी (DHS) ने नियम में बदलाव के लिए पर्याप्त मजबूत तर्क नहीं दिए। विभाग ने वीजा व्यवस्था में धोखाधड़ी रोकने और राष्ट्रीय सुरक्षा का हवाला दिया था, लेकिन अदालत के मुताबिक DHS ने नियम बदलने से जुड़ी समस्याओं का पर्याप्त अध्ययन नहीं किया और आसान विकल्पों पर भी विचार नहीं किया।

    पूर्व रिपब्लिकन राष्ट्रपति जॉर्ज डब्ल्यू. बुश द्वारा नियुक्त जज ने कहा कि प्रस्तावित नियम अमेरिका में करीब पांच दशक से चली आ रही व्यवस्था को बदल देता। मौजूदा व्यवस्था के तहत विदेशी छात्र अपने कोर्स की अवधि पूरी होने तक अमेरिका में रह और काम कर सकते हैं। अदालत ने इस व्यवस्था के योगदान को भी रेखांकित किया। जज के मुताबिक, इससे करोड़ों छात्रों और शोधकर्ताओं को विज्ञान, मेडिकल और टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में आगे बढ़ने का अवसर मिला और अमेरिकी अर्थव्यवस्था को भी बड़ा फायदा हुआ।

    क्या बदलाव करना चाहता था ट्रंप प्रशासन?
    DHS ने जुलाई में नया नियम प्रस्तावित किया था, जिसमें अमेरिका में विदेशी नागरिकों के रहने की अवधि के लिए निश्चित समयसीमा तय करने का प्रावधान था। इसके तहत विदेशी छात्रों के F वीजा और सांस्कृतिक एक्सचेंज विजिटर्स के J वीजा की अवधि अधिकतम चार साल तक सीमित की जानी थी। इसके अलावा विदेशी पत्रकारों को दिए जाने वाले I वीजा, जो कई वर्षों तक वैध रहते हैं, उनकी अवधि घटाकर केवल 240 दिन करने का प्रस्ताव था। नियम का मकसद वीजा व्यवस्था में धोखाधड़ी रोकना और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े जोखिमों को नियंत्रित करना बताया गया था।

    21 लाख से ज्यादा वीजा धारकों पर पड़ सकता था असर
    उपलब्ध जानकारी के मुताबिक अमेरिका में फिलहाल करीब 16 लाख F वीजा और 5 लाख J वीजा धारक हैं। ऐसे में प्रस्तावित बदलाव का असर बड़ी संख्या में विदेशी छात्रों और एक्सचेंज विजिटर्स पर पड़ सकता था। जज सेलॉर ने उच्च शिक्षा संस्थानों पर पड़ने वाले संभावित असर को लेकर भी चिंता जताई। उनके मुताबिक, नई नीति लागू होने पर बड़े विश्वविद्यालयों में विदेशी छात्रों के दाखिले कम हो सकते हैं और संस्थानों को करोड़ों डॉलर का नुकसान उठाना पड़ सकता है।

    MIT-हार्वर्ड जैसे विश्वविद्यालयों पर असर की आशंका
    फैसले में अमेरिका के प्रमुख रिसर्च विश्वविद्यालयों का भी उल्लेख किया गया। जज ने कहा कि MIT और हार्वर्ड जैसे संस्थानों में स्नातक स्तर पर बड़ी संख्या में विदेशी छात्र अध्ययन करते हैं। अदालत के मुताबिक, विदेशी छात्रों की संख्या में बड़ी गिरावट का असर सिर्फ विश्वविद्यालयों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि अमेरिकी उच्च शिक्षा व्यवस्था और अर्थव्यवस्था को भी नुकसान हो सकता है। जज ने इसे संभावित रूप से विनाशकारी बताया।

    इस तरह अदालत की रोक ने फिलहाल विदेशी छात्रों, एक्सचेंज विजिटर्स और पत्रकारों के लिए प्रस्तावित नई समयसीमा को लागू होने से रोक दिया है। मामले में अदालत की आगे की कार्रवाई और प्रशासन की अगली रणनीति पर अब नजर रहेगी।

  • मदीना की धरती में छिपा खजाना! सऊदी का दावा- 11 करोड़ टन अयस्क में यूरेनियम और हेवी रेयर अर्थ की मौजूदगी

    मदीना की धरती में छिपा खजाना! सऊदी का दावा- 11 करोड़ टन अयस्क में यूरेनियम और हेवी रेयर अर्थ की मौजूदगी


    नई दिल्ली। सऊदी अरब ने मदीना के पास खनिज संसाधनों की बड़ी खोज का दावा किया है। ऊर्जा मंत्री प्रिंस अब्दुलअजीज बिन सलमान के मुताबिक, जबल सैयद प्रोजेक्ट में किए गए भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण और खोज के दौरान करीब 11 करोड़ टन यानी 110 मिलियन टन अयस्क संसाधन का अनुमान सामने आया है। इस अयस्क में हेवी रेयर अर्थ एलिमेंट्स की उच्च सांद्रता के साथ यूरेनियम की भी उत्साहजनक संभावनाएं मिली हैं।

    हालांकि, इस दावे को लेकर सबसे अहम बात यह है कि 11 करोड़ टन शुद्ध यूरेनियम मिलने की बात नहीं कही गई है। 110 मिलियन टन अनुमानित कुल अयस्क संसाधन है, जिसमें यूरेनियम और रेयर अर्थ तत्वों की सांद्रता मौजूद होने का दावा किया गया है।

    जबल सैयद में सर्वे से सामने आया अनुमान

    ‘अरब न्यूज’ के मुताबिक, सऊदी ऊर्जा मंत्री ने जबल सैयद परियोजना में हुई खोज और भूवैज्ञानिक अध्ययनों के आधार पर करीब 110 मिलियन टन अयस्क संसाधन का अनुमान बताया है। इसमें खास तौर पर हेवी रेयर अर्थ एलिमेंट्स की अधिक सांद्रता मिलने की बात कही गई है।

    इसके साथ ही सर्वेक्षण में यूरेनियम की भी उत्साहजनक सांद्रता का संकेत मिला है। अब इन संसाधनों की वास्तविक मात्रा, गुणवत्ता और व्यावसायिक उपयोगिता को निर्धारित करने के लिए आगे की जांच और मूल्यांकन महत्वपूर्ण होगा।

    मदीना की वजह से भी खास है यह खोज

    मदीना इस्लाम के सबसे पवित्र शहरों में शामिल है। 622 ईस्वी में पैगंबर मोहम्मद ने मक्का से मदीना की ओर हिजरत की थी, जिसके बाद यह शुरुआती इस्लामी समुदाय का प्रमुख केंद्र बना। ऐसे में इस ऐतिहासिक और धार्मिक क्षेत्र के आसपास रणनीतिक महत्व वाले खनिज संसाधनों की खोज ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी ध्यान खींचा है।

    यह घोषणा ऐसे समय हुई है, जब मध्य पूर्व में सुरक्षा और परमाणु कार्यक्रमों को लेकर तनाव लगातार अंतरराष्ट्रीय राजनीति का अहम मुद्दा बना हुआ है। क्षेत्रीय शक्ति संतुलन में सऊदी अरब की महत्वपूर्ण भूमिका है, जबकि ईरान का परमाणु कार्यक्रम लंबे समय से अमेरिका और इजरायल की चिंता का विषय रहा है। ईरान लगातार अपने परमाणु कार्यक्रम को शांतिपूर्ण और नागरिक उद्देश्यों के लिए बताता रहा है।

    तेल से आगे अर्थव्यवस्था ले जाने की कोशिश

    खनिज संसाधनों की यह खोज सऊदी अरब की Vision 2030 रणनीति के लिहाज से भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है। दुनिया के प्रमुख तेल उत्पादक देशों में शामिल सऊदी अरब अर्थव्यवस्था को तेल पर निर्भरता से आगे ले जाने की कोशिश कर रहा है।

    इसी रणनीति के तहत देश में खनन, अक्षय ऊर्जा और नागरिक परमाणु ऊर्जा जैसे क्षेत्रों में निवेश बढ़ाया जा रहा है। सऊदी अरब घरेलू स्तर पर यूरेनियम संसाधनों की खोज और भविष्य में इनके इस्तेमाल की संभावनाओं पर भी काम कर रहा है।

    यूरेनियम मिला तो सीधे परमाणु ईंधन नहीं बनेगा

    मदीना क्षेत्र में यूरेनियम की संभावनाओं का दावा इसलिए भी अहम है क्योंकि सऊदी अरब नागरिक परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम विकसित करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। अमेरिका और सऊदी अरब के बीच भी इस क्षेत्र में सहयोग को लेकर बातचीत और समझौते हुए हैं।

    यूरेनियम परमाणु ऊर्जा उत्पादन के लिए महत्वपूर्ण कच्चा माल है, लेकिन प्राकृतिक अयस्क मिलने का अर्थ यह नहीं है कि उससे सीधे परमाणु ईंधन तैयार किया जा सकता है। इसके लिए पहले खनन, प्रोसेसिंग और कन्वर्जन जैसी कई प्रक्रियाओं से गुजरना पड़ता है। जरूरत के मुताबिक इसके बाद संवर्धन यानी enrichment की प्रक्रिया भी होती है।

    इसलिए फिलहाल मदीना में सामने आया दावा एक बड़े अयस्क संसाधन और उसमें मौजूद यूरेनियम की संभावित सांद्रता से जुड़ा है, न कि 11 करोड़ टन शुद्ध यूरेनियम भंडार से।

    रेयर अर्थ की मौजूदगी भी बढ़ाती है रणनीतिक महत्व

    इस खोज का दूसरा बड़ा पहलू रेयर अर्थ एलिमेंट्स हैं। आधुनिक तकनीक आधारित अर्थव्यवस्था में इन खनिजों की अहम भूमिका है। इनका इस्तेमाल इलेक्ट्रॉनिक्स, इलेक्ट्रिक वाहन, पवन ऊर्जा, रक्षा उपकरण और दूसरी हाई-टेक इंडस्ट्री में किया जाता है।

    यदि आगे की जांच में जबल सैयद क्षेत्र के संसाधन व्यावसायिक रूप से निकालने योग्य साबित होते हैं, तो इसका असर केवल सऊदी अरब की ऊर्जा रणनीति तक सीमित नहीं रहेगा। इससे देश की खनन क्षमता, औद्योगिक आधार और रणनीतिक खनिज आपूर्ति को भी मजबूती मिल सकती है।

    फिलहाल इन संसाधनों की वास्तविक क्षमता और आर्थिक उपयोगिता का आकलन आगे की भूवैज्ञानिक जांच पर निर्भर करेगा। लेकिन यूरेनियम की संभावनाओं और हेवी रेयर अर्थ एलिमेंट्स की उच्च सांद्रता के दावे ने सऊदी अरब की बदलती ऊर्जा और खनिज रणनीति को चर्चा के केंद्र में ला दिया है।