Category: International

  • बलूचिस्तान में बड़ा हमला: सेना के जवानों और नागरिकों को ले जा रही ट्रेन बनी निशाना

    बलूचिस्तान में बड़ा हमला: सेना के जवानों और नागरिकों को ले जा रही ट्रेन बनी निशाना



    नई दिल्ली। पाकिस्तान के अशांत प्रांत बलूचिस्तान की राजधानी क्वेटा में रविवार को एक भीषण बम धमाके से हड़कंप मच गया। यह धमाका उस समय हुआ जब सेना के जवानों और उनके परिवारों को लेकर जा रही एक ट्रेन चमन फाटक के पास से गुजर रही थी। शुरुआती रिपोर्ट के अनुसार इस हमले में कम से कम 24 लोगों की मौत हो गई है, जबकि 50 से अधिक लोग घायल बताए जा रहे हैं।

    पाकिस्तानी पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों के मुताबिक मरने वालों में सेना के जवान और आम नागरिक दोनों शामिल हैं। धमाका इतना शक्तिशाली था कि ट्रेन के दो डिब्बे पटरी से उतरकर बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गए और उनमें आग लग गई।

    प्रत्यक्षदर्शियों और सोशल मीडिया पर सामने आए वीडियो में घटनास्थल से घना काला धुआं उठता देखा गया, जबकि राहत और बचाव दल मलबे में फंसे लोगों को निकालने में जुटे रहे। कई घायल यात्रियों को स्ट्रेचर के जरिए अस्पताल पहुंचाया गया, जिनमें से कुछ की हालत गंभीर बताई जा रही है।

    अधिकारियों के अनुसार यह ट्रेन क्वेटा से पेशावर की ओर जा रही थी और उसमें जवान अपने परिवारों के साथ ईद की छुट्टियां मनाने के लिए यात्रा कर रहे थे। धमाके के बाद पूरे इलाके को सुरक्षा बलों ने घेर लिया और जांच शुरू कर दी गई है।

    फिलहाल किसी संगठन ने हमले की जिम्मेदारी नहीं ली है, लेकिन बलूचिस्तान में लंबे समय से सक्रिय अलगाववादी और उग्रवादी गुटों की गतिविधियों को देखते हुए सुरक्षा एजेंसियां सभी संभावनाओं की जांच कर रही हैं।

    बलूचिस्तान पाकिस्तान का सबसे बड़ा लेकिन सबसे पिछड़ा प्रांत माना जाता है, जहां लंबे समय से अलगाववादी आंदोलन और सुरक्षा बलों के बीच तनाव की स्थिति बनी रहती है। इस घटना ने एक बार फिर क्षेत्र की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

  • AI Pet Translator: जानवरों की ‘भाषा’ समझने का दावा, चीन के डिवाइस पर 95% सटीकता को लेकर सवाल

    AI Pet Translator: जानवरों की ‘भाषा’ समझने का दावा, चीन के डिवाइस पर 95% सटीकता को लेकर सवाल



    नई दिल्ली। चीन के एक स्टार्टअप “Meng Xiaoyi” ने ऐसा AI आधारित डिवाइस विकसित करने का दावा किया है, जो पालतू जानवरों की आवाज और उनके व्यवहार को समझकर इंसानी भाषा में उसका अर्थ बता सकेगा। कंपनी के मुताबिक यह डिवाइस जानवरों के भौंकने, म्याऊं करने और उनकी बॉडी लैंग्वेज को ट्रैक कर उनकी भावनाओं जैसे खुशी, गुस्सा या बेचैनी को डिकोड कर सकता है।

    यह डिवाइस एक स्मार्ट कॉलर के रूप में काम करता है, जिसे कुत्तों और बिल्लियों के गले में लगाया जाएगा। इसमें सेंसर और AI सिस्टम मौजूद है, जो जानवर की आवाज और गतिविधियों को रिकॉर्ड कर रियल टाइम में विश्लेषण करता है और उसे यूजर के लिए समझने योग्य भाषा में बदलने का दावा करता है।

    रिपोर्ट्स के अनुसार यह तकनीक अलीबाबा क्लाउड के “Qwen” लार्ज लैंग्वेज मॉडल पर आधारित है। कंपनी का कहना है कि इसके पास जानवरों की आवाजों का बड़ा डेटाबेस है, जिससे सिस्टम पैटर्न पहचानकर भावनाओं का अनुमान लगाता है।

    इस डिवाइस की कीमत करीब 799 युआन (लगभग 11,300 रुपये) बताई जा रही है। कंपनी का दावा है कि इसे अब तक 10,000 से ज्यादा प्री-ऑर्डर मिल चुके हैं, जिससे इसकी शुरुआती लोकप्रियता का अंदाजा लगाया जा सकता है।

    हालांकि, सबसे बड़ा सवाल इसकी 95% सटीकता के दावे को लेकर उठ रहा है। विशेषज्ञों के अनुसार अभी तक यह स्पष्ट नहीं है कि इस सटीकता को किस तरह टेस्ट किया गया है और कितने वास्तविक परिस्थितियों में इसका परीक्षण हुआ है। कोई भी स्वतंत्र या पीयर-रिव्यू रिसर्च रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं की गई है, जिससे इसके दावे पर संदेह बना हुआ है।

    तकनीकी विशेषज्ञों का मानना है कि नियंत्रित माहौल में यह सिस्टम कुछ हद तक काम कर सकता है, लेकिन वास्तविक दुनिया में जानवरों के व्यवहार की जटिलता के कारण इसकी सटीकता अलग हो सकती है।

    फिलहाल यह डिवाइस चर्चा में है और इसे लेकर टेक दुनिया में उत्साह के साथ-साथ सवाल भी उठ रहे हैं कि क्या वाकई AI जानवरों की “भाषा” को इंसानों की तरह अनुवाद कर सकता है या यह सिर्फ एक एडवांस प्रिडिक्शन सिस्टम है।

  • स्टील्थ जेट, S-400 और किल चेन: भारत-पाक एयर वॉर में कौन किस पर भारी?

    स्टील्थ जेट, S-400 और किल चेन: भारत-पाक एयर वॉर में कौन किस पर भारी?




    नई दिल्ली(New Delhi)।
    पाकिस्तान की ओर से चीन से पांचवीं पीढ़ी के स्टील्थ फाइटर जेट J-35A खरीदने की खबरों ने दक्षिण एशिया की सुरक्षा समीकरणों को फिर से चर्चा में ला दिया है। सैन्य विशेषज्ञों के मुताबिक, अगर यह सौदा पूरा होता है तो पाकिस्तान की वायुसेना एक नए “स्टैंड-ऑफ और किल चेन” आधारित युद्ध मॉडल की ओर बढ़ सकती है, जिसमें लंबी दूरी से लक्ष्य पर हमला करने की क्षमता प्रमुख होगी।

    जानकारों का कहना है कि पाकिस्तान अपनी सीमित भौगोलिक गहराई के कारण पारंपरिक रक्षा रणनीति से हटकर अब “दूर से वार और अंदर ही अंदर सुरक्षा” की रणनीति पर काम कर रहा है। इसी रणनीति के तहत J-35A स्टील्थ जेट और चीन की PL-17 जैसी लंबी दूरी की हवा से हवा में मार करने वाली मिसाइलों को गेम-चेंजर माना जा रहा है।

    रिपोर्ट्स के अनुसार, J-35A को इस तरह इस्तेमाल किया जाएगा कि वह पाकिस्तान के हवाई क्षेत्र के भीतर रहते हुए ही भारतीय विमानों को ट्रैक और टारगेट कर सके। इसमें स्टील्थ तकनीक के कारण रडार पर कम दिखाई देने की क्षमता इसे और खतरनाक बनाती है। वहीं PL-17 मिसाइल की मारक क्षमता 300 से 400 किलोमीटर तक बताई जा रही है, जिससे यह सीमा से काफी दूर स्थित लक्ष्यों को भी निशाना बना सकती है।

    इसके साथ ही चीन का सैटेलाइट आधारित नेटवर्क पाकिस्तान को एक “किल चेन सिस्टम” बनाने में मदद कर सकता है, जिसमें रडार, सैटेलाइट और डेटा लिंक के जरिए लक्ष्य की पहचान कर तुरंत हमला किया जा सकेगा। इस मॉडल में अपने मुख्य रडार बंद रखकर भी दुश्मन की गतिविधियों पर नजर रखी जा सकती है, जिससे जवाबी कार्रवाई से बचने की कोशिश की जाती है।

    भारत की ओर देखें तो विशेषज्ञ मानते हैं कि भारतीय वायुसेना पहले से ही मल्टी-लेयर एयर डिफेंस सिस्टम पर काम कर रही है, जिसमें S-400 Triumf, स्वदेशी AESA रडार, इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर सिस्टम और नेटवर्क-सेंट्रिक ऑपरेशंस शामिल हैं। S-400 को लंबी दूरी से आने वाले हवाई खतरों को ट्रैक और नष्ट करने में सक्षम माना जाता है, लेकिन स्टील्थ विमानों को पहचानना अब भी एक बड़ी चुनौती है।

    विशेषज्ञों के अनुसार, भारत का फोकस अब “काउंटर-स्टील्थ रडार नेटवर्क” विकसित करने पर है, जो कम फ्रीक्वेंसी और एडवांस सेंसर तकनीक के जरिए स्टील्थ विमानों को भी ट्रैक कर सके। साथ ही इसे मिसाइल सिस्टम और एयर डिफेंस ग्रिड से जोड़ने की दिशा में काम चल रहा है।

    रूसी Su-57 और मानव रहित ड्रोन सिस्टम को लेकर भी चर्चा है कि भविष्य में भारत “मैन-ड्रोन टीमिंग” मॉडल अपना सकता है, जिसमें फाइटर जेट के साथ AI-संचालित ड्रोन दुश्मन के रडार और डिफेंस सिस्टम को पहले ही जाम या नष्ट कर दें।

    रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि भविष्य का युद्ध अब पारंपरिक डॉगफाइट नहीं बल्कि “डेटा-ड्रिवन नेटवर्क वॉर” होगा, जिसमें सेंसर, सैटेलाइट, AI और मिसाइल सिस्टम एक साथ काम करेंगे।

    कुल मिलाकर पाकिस्तान की रणनीति भारत को उसकी सीमाओं से दूर रोकने और पहले ही हमले की क्षमता विकसित करने की है, जबकि भारत का जवाब एक इंटीग्रेटेड एयर डिफेंस और ऑफेंसिव नेटवर्क बनाने पर केंद्रित है, जो किसी भी “किल चेन” को तोड़ने में सक्षम हो सके।

  • कीव पर रूस का बड़ा हमला: ओरेशनिक हाइपरसोनिक मिसाइल से दहला यूक्रेन, 4 की मौत, 80 से ज्यादा घायल

    कीव पर रूस का बड़ा हमला: ओरेशनिक हाइपरसोनिक मिसाइल से दहला यूक्रेन, 4 की मौत, 80 से ज्यादा घायल

    नई दिल्ली(New Delhi)।
    यूक्रेन की राजधानी कीव एक बार फिर रूस के भीषण मिसाइल और ड्रोन हमलों से दहल उठी। शनिवार और रविवार की दरमियानी रात हुए इस हमले में कम से कम 4 लोगों की मौत हो गई, जबकि 80 से अधिक लोग घायल बताए जा रहे हैं। लगातार सायरन बजते रहे और पूरे शहर में धुएं का गुबार देखा गया, जिससे हालात बेहद तनावपूर्ण हो गए।

    यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की ने दावा किया है कि रूस ने इस हमले में ओरेशनिक हाइपरसोनिक बैलिस्टिक मिसाइल का इस्तेमाल किया है। यह वही मिसाइल है जो परमाणु और पारंपरिक दोनों तरह के हथियार ले जाने में सक्षम मानी जाती है। जेलेंस्की के अनुसार, यह हमला कीव क्षेत्र के बिला त्सेर्कवा जिले में किया गया, हालांकि लक्ष्य को लेकर स्पष्ट जानकारी सामने नहीं आई है।

    यह तीसरी बार है जब रूस ने इस अत्याधुनिक ओरेशनिक मिसाइल का इस्तेमाल यूक्रेन युद्ध में किया है। इससे पहले नवंबर 2024 में निप्रो शहर और जनवरी में लवीव क्षेत्र पर इसी तरह के हमले किए जा चुके हैं।

    रूसी हमले के जवाब में यूक्रेन पर मिसाइलों और ड्रोन की बौछार की गई, जिससे कीव के कई सरकारी दफ्तर, आवासीय इमारतें, स्कूल और गोदाम क्षतिग्रस्त हो गए। कीव के सैन्य प्रशासन प्रमुख के अनुसार, शहर के कम से कम नौ जिलों में नुकसान दर्ज किया गया है।

    मेयर विटाली क्लिट्स्को ने बताया कि शेवचेंको जिले में एक स्कूल भवन पर भी हमला हुआ, जहां लोग शरण लिए हुए थे। वहीं कई सुपरमार्केट और औद्योगिक गोदाम भी इस हमले की चपेट में आ गए।

    विशेषज्ञों के अनुसार, ओरेशनिक मिसाइल रूस की सबसे खतरनाक हाइपरसोनिक बैलिस्टिक मिसाइलों में से एक है, जो मैक 10 यानी ध्वनि की गति से लगभग 10 गुना तेज गति से लक्ष्य पर हमला कर सकती है। इसकी क्षमता इतनी अधिक है कि यह जमीन के नीचे कई मंजिल गहराई में बने बंकरों को भी नष्ट करने में सक्षम मानी जाती है। इसकी मारक क्षमता करीब 5500 किलोमीटर तक बताई जाती है, जिससे यह परमाणु हमले के लिहाज से भी बेहद खतरनाक हथियार बन जाती है।

    कीव पर हुए इस हमले के बाद एक बार फिर रूस-यूक्रेन युद्ध में तनाव चरम पर पहुंच गया है और आगे और बड़े हमलों की आशंका जताई जा रही है।

  • व्हाइट हाउस के बाहर फायरिंग से दहशत: 21 वर्षीय नासीर बेस्ट ढेर, खुद को ‘जीसस क्राइस्ट’ बताने का दावा

    व्हाइट हाउस के बाहर फायरिंग से दहशत: 21 वर्षीय नासीर बेस्ट ढेर, खुद को ‘जीसस क्राइस्ट’ बताने का दावा

    नई दिल्ली। अमेरिका की राजधानी वॉशिंगटन डीसी में स्थित व्हाइट हाउस के बाहर शनिवार शाम उस समय दहशत फैल गई जब एक युवक ने सुरक्षा चेकपॉइंट के पास अचानक फायरिंग शुरू कर दी। अमेरिकी सीक्रेट सर्विस ने तुरंत जवाबी कार्रवाई करते हुए हमलावर को मार गिराया। इस घटना में एक राहगीर भी घायल हुआ है, जबकि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप सुरक्षित रहे।

    सीक्रेट सर्विस के अनुसार, यह घटना 17वीं स्ट्रीट और पेंसिल्वेनिया एवेन्यू के पास हुई, जहां 21 वर्षीय नासीर बेस्ट नामक युवक ने अपने बैग से हथियार निकालकर गोलीबारी शुरू कर दी। सुरक्षा बलों ने तत्काल प्रतिक्रिया देते हुए उसे रोकने की कोशिश की, लेकिन उसने फायरिंग जारी रखी, जिसके बाद उसे जवाबी कार्रवाई में गोली लगी और अस्पताल ले जाते समय उसकी मौत हो गई।

    अधिकारियों ने बताया कि घटना के दौरान कोई भी सुरक्षा एजेंट घायल नहीं हुआ। हालांकि, एक राहगीर को गोली लगी है, जिसकी स्थिति को लेकर अभी स्पष्ट जानकारी नहीं दी गई है। मामले की जांच जारी है और अतिरिक्त विवरण जुटाए जा रहे हैं।

    रिपोर्ट्स के अनुसार, मारा गया युवक मैरीलैंड का रहने वाला था और उसका नाम नासीर बेस्ट था। वह पहले भी सुरक्षा एजेंसियों की नजर में था और कई बार व्हाइट हाउस के आसपास संदिग्ध गतिविधियों में शामिल पाया गया था। कोर्ट रिकॉर्ड्स के मुताबिक, उसे पहले भी हिरासत में लिया गया था जब उसने वाहनों की एंट्री में बाधा डाली थी और प्रतिबंधित क्षेत्र में प्रवेश किया था।

    जानकारी के अनुसार, 26 जून 2025 को उसे व्हाइट हाउस के पास ट्रैफिक में बाधा डालने के आरोप में पकड़ा गया था, जबकि 10 जुलाई को वह चेतावनी के बावजूद प्रतिबंधित इलाके में घुस गया था। पूछताछ के दौरान उसने खुद को “जीसस क्राइस्ट” बताया और कथित तौर पर गिरफ्तारी की इच्छा जताई थी।

    सीक्रेट सर्विस का कहना है कि वह व्यक्ति मानसिक रूप से अस्थिर प्रतीत हो रहा था और लंबे समय से व्हाइट हाउस के आसपास संदिग्ध गतिविधियों में शामिल था। फिलहाल सुरक्षा एजेंसियां यह जांच कर रही हैं कि वह हथियार लेकर इतने संवेदनशील क्षेत्र तक कैसे पहुंचा।

    इस घटना ने व्हाइट हाउस की सुरक्षा व्यवस्था पर एक बार फिर सवाल खड़े कर दिए हैं, हालांकि अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि राष्ट्रपति की सुरक्षा में कोई चूक नहीं हुई और स्थिति को तुरंत नियंत्रित कर लिया गया।

  • पश्चिम की गलतफहमी: मोदी को एर्दोगन जैसा मानने की भूल क्यों?

    पश्चिम की गलतफहमी: मोदी को एर्दोगन जैसा मानने की भूल क्यों?



    नई दिल्ली(New Delhi)।
    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भारतीय लोकतंत्र को लेकर पश्चिमी देशों में लंबे समय से एक बहस चल रही है, जिसमें कई विश्लेषक भारत की राजनीतिक व्यवस्था की तुलना तुर्की के राष्ट्रपति रेचेप तैयप एर्दोगन और हंगरी के विक्टर ओर्बन जैसे नेताओं से करते हैं। हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि यह तुलना भारत की जटिल राजनीतिक संरचना को समझने में एक बड़ी भूल है।

    हाल ही में पीएम मोदी के नॉर्वे दौरे के दौरान एक पत्रकार की टिप्पणी और उसके बाद सोशल मीडिया पर उठा विवाद भी इसी बहस को और तेज करता है। पश्चिमी मीडिया के कुछ वर्गों पर आरोप लगते हैं कि वे भारत और मोदी सरकार को लेकर एक नकारात्मक नैरेटिव गढ़ते हैं, जबकि दूसरी ओर भारत एक विशाल और बहुस्तरीय लोकतंत्र के रूप में काम करता है।

    विशेषज्ञ चितिग्य बाजपेयी सहित कई विश्लेषकों का कहना है कि पश्चिमी देश अक्सर भारत के लोकतंत्र को एक सरल और एकतरफा नजरिए से देखते हैं। जबकि भारत का राजनीतिक ढांचा राज्यों, क्षेत्रीय दलों और सामाजिक विविधता के कारण बेहद जटिल और बहु-स्तरीय है। यह स्थिति तुर्की या हंगरी जैसे देशों से पूरी तरह अलग है, जहां सत्ता संरचना अपेक्षाकृत केंद्रीकृत मानी जाती है।

    विश्लेषकों के मुताबिक, भाजपा की चुनावी सफलता के पीछे केवल राजनीतिक रणनीति नहीं बल्कि कई सामाजिक और आर्थिक कारण भी हैं। इसमें विपक्ष की कमजोरी, संगठनात्मक ढांचे में असंतुलन और राष्ट्रीय स्तर पर मजबूत वैकल्पिक नेतृत्व का अभाव शामिल है। लंबे समय से कांग्रेस जैसे बड़े दल संगठनात्मक संकट से गुजर रहे हैं, जबकि क्षेत्रीय दल भी अपने-अपने राज्यों तक सीमित हो गए हैं।

    इसके साथ ही भाजपा ने “विकास, राष्ट्रवाद और कल्याणकारी योजनाओं” के मिश्रण के जरिए व्यापक जनाधार तैयार किया है, जिसने शहरी, ग्रामीण और गरीब वर्गों तक पार्टी की पहुंच बढ़ाई है।

    विशेषज्ञों का यह भी कहना है कि पश्चिमी मीडिया भारत को अक्सर एक एकल राजनीतिक ब्लॉक की तरह देखता है, जबकि वास्तविकता यह है कि देश में राजनीतिक विविधता बेहद व्यापक है। तमिलनाडु, पश्चिम बंगाल और अन्य राज्यों के चुनाव परिणाम यह दिखाते हैं कि भारत में राजनीतिक रुझान लगातार बदलते रहते हैं और किसी एक विचारधारा का पूर्ण प्रभुत्व नहीं है।

    हालांकि, यह भी स्वीकार किया जाता है कि भारत में मीडिया स्वतंत्रता, संस्थागत संतुलन और लोकतांत्रिक ढांचे को लेकर आंतरिक बहस मौजूद है, लेकिन कुल मिलाकर देश का लोकतांत्रिक सिस्टम अब भी प्रतिस्पर्धी और सक्रिय है।

    इसी वजह से विशेषज्ञ मानते हैं कि पश्चिमी देशों द्वारा भारत की तुलना तुर्की या हंगरी जैसे देशों से करना एक अधूरी और सतही समझ को दर्शाता है, जो भारत की जमीनी राजनीतिक वास्तविकता को सही तरह से नहीं पकड़ पाता।

  • कीव पर पुतिन का ‘ब्रह्मास्त्र’ हमला: रूस की ओरेशनिक हाइपरसोनिक मिसाइल से दहला यूक्रेन, दर्जनों हताहत

    कीव पर पुतिन का ‘ब्रह्मास्त्र’ हमला: रूस की ओरेशनिक हाइपरसोनिक मिसाइल से दहला यूक्रेन, दर्जनों हताहत




    नई दिल्ली(New Delhi)।
    रूस और यूक्रेन के बीच जारी युद्ध में एक बार फिर भारी तनाव देखने को मिला है, जब शनिवार और रविवार की दरमियानी रात रूस ने यूक्रेन की राजधानी कीव पर मिसाइलों और ड्रोन से बड़ा हमला किया। इस हमले में कम से कम 4 लोगों की मौत और 80 से अधिक लोगों के घायल होने की पुष्टि की गई है। पूरे शहर में रातभर हवाई हमले के सायरन गूंजते रहे और कई इलाकों में धुएं का गुबार देखा गया।

    यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की ने दावा किया है कि इस हमले में रूस ने ओरेशनिक हाइपरसोनिक बैलिस्टिक मिसाइल का इस्तेमाल किया। उनके अनुसार, यह हमला कीव क्षेत्र के बिला त्सेर्कवा इलाके में किया गया, हालांकि लक्ष्य को लेकर स्पष्ट जानकारी नहीं दी गई है। यह इस मिसाइल का युद्ध में तीसरा उपयोग बताया जा रहा है।

    स्थानीय प्रशासन के मुताबिक, कीव के कम से कम नौ जिलों में आवासीय भवनों, स्कूलों, सुपरमार्केट और गोदामों को नुकसान पहुंचा है। मेयर विटाली क्लिट्स्को ने बताया कि एक स्कूल इमारत भी प्रभावित हुई, जहां लोग शरण लिए हुए थे। कई जगहों पर रिहायशी इलाकों में भारी तबाही की खबर है।

    रूस ने यह हमला यूक्रेन के ड्रोन हमलों के जवाब में किया है। हमले के दौरान राजधानी कीव के मध्य इलाकों सहित कई हिस्सों में लगातार मिसाइल और ड्रोन हमले जारी रहे, जिससे जनजीवन पूरी तरह प्रभावित हुआ।

    ओरेशनिक मिसाइल रूस की अत्याधुनिक हाइपरसोनिक बैलिस्टिक मिसाइल मानी जाती है, जो मैक 10 यानी ध्वनि की गति से लगभग 10 गुना तेज गति से उड़ान भरने में सक्षम है। यह मिसाइल परमाणु और पारंपरिक दोनों तरह के हथियार ले जाने में सक्षम है और इसे गहरे बंकरों और मजबूत सैन्य ढांचों को नष्ट करने के लिए डिजाइन किया गया बताया जाता है। इसकी मारक क्षमता लगभग 5500 किलोमीटर तक बताई जाती है।

    जानकारों के मुताबिक, इस तरह की मिसाइलों का इस्तेमाल युद्ध की दिशा और तीव्रता दोनों को और ज्यादा खतरनाक बना देता है। इससे रूस-यूक्रेन युद्ध में तनाव एक नए और गंभीर स्तर पर पहुंच गया है।

  • भारत-अमेरिका रणनीतिक साझेदारी को नई रफ्तार: दिल्ली में रूबियो-जयशंकर वार्ता, क्वाड बैठक से पहले बड़ा कूटनीतिक संदेश

    भारत-अमेरिका रणनीतिक साझेदारी को नई रफ्तार: दिल्ली में रूबियो-जयशंकर वार्ता, क्वाड बैठक से पहले बड़ा कूटनीतिक संदेश



    नई दिल्ली(New Delhi)।
    अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो इन दिनों चार दिवसीय भारत दौरे पर हैं, जहां उनकी यात्रा को भारत-अमेरिका संबंधों को नई दिशा देने वाला महत्वपूर्ण कूटनीतिक कदम माना जा रहा है। इस दौरे के दौरान उन्होंने शनिवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से नई दिल्ली में मुलाकात की, जिसके बाद रविवार को विदेश मंत्री एस. जयशंकर के साथ द्विपक्षीय वार्ता की गई।

    बैठक के बाद दोनों नेताओं ने संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस की, जिसमें दोनों देशों के बीच रणनीतिक साझेदारी, वैश्विक सहयोग और आपसी हितों पर विस्तार से चर्चा हुई। मार्को रूबियो ने भारत को अमेरिका का एक अत्यंत महत्वपूर्ण रणनीतिक साझेदार बताया और कहा कि दोनों देश दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र हैं, जिनके हित कई वैश्विक मुद्दों पर एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं।

    रूबियो ने कहा कि भारत और अमेरिका केवल पारंपरिक साझेदार नहीं हैं, बल्कि एक व्यापक रणनीतिक सहयोग में जुड़े हुए देश हैं, जो वैश्विक चुनौतियों का मिलकर समाधान करने की क्षमता रखते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि दोनों देशों के नेतृत्व के बीच नियमित संवाद इस साझेदारी को और मजबूत बनाता है।

    वहीं विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने कहा कि भारत और अमेरिका के बीच लगातार संपर्क और संवाद ने द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत किया है। उन्होंने बताया कि दोनों देशों के बीच रक्षा, व्यापार, तकनीक और वैश्विक सुरक्षा जैसे क्षेत्रों में सहयोग तेजी से बढ़ रहा है।

    रूबियो ने अपने बयान में यह भी कहा कि यह उनका भारत का पहला आधिकारिक दौरा है और वे इस संबंध को और गहराई से समझना चाहते हैं। उन्होंने भारत-अमेरिका साझेदारी को वैश्विक स्तर पर सहयोग का एक मजबूत उदाहरण बताया, जो किसी एक क्षेत्र तक सीमित नहीं है बल्कि पूरी दुनिया में प्रभाव डालता है।

    इसके बाद दोनों देशों के बीच औपचारिक द्विपक्षीय वार्ता शुरू हुई, जिसमें विभिन्न रणनीतिक और आर्थिक मुद्दों पर चर्चा जारी रही। रूबियो सोमवार को आगरा और जयपुर का दौरा करेंगे, जबकि मंगलवार को वे नई दिल्ली में होने वाली क्वाड देशों की विदेश मंत्रियों की बैठक में शामिल होंगे, जिसमें भारत, अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया और जापान भाग लेंगे।

    यह दौरा भारत-अमेरिका संबंधों को नई मजबूती देने और वैश्विक कूटनीति में दोनों देशों की भूमिका को और प्रभावशाली बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

  • ढाका में US डिफेंस डील पर मंथन, ACSA और GSOMIA समझौते फिर सुर्खियों में

    ढाका में US डिफेंस डील पर मंथन, ACSA और GSOMIA समझौते फिर सुर्खियों में




    नई दिल्ली(New Delhi)।
    बांग्लादेश में अमेरिका के साथ दो अहम रक्षा समझौतों को लेकर राजनीतिक और रणनीतिक हलकों में बड़ी चर्चा तेज हो गई है। ये दोनों समझौते ACSA (Acquisition and Cross-Servicing Agreement) और GSOMIA (General Security of Military Information Agreement) कई वर्षों से लंबित हैं, जिन्हें लेकर अब एक बार फिर ढाका में गंभीर मंथन शुरू हो गया है।

    रिपोर्ट्स के अनुसार, पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना की सरकार ने अमेरिका के साथ इन डिफेंस डील्स को आगे बढ़ाने से परहेज किया था। माना जाता है कि उस समय सरकार ने भारत और चीन के साथ संतुलन बनाए रखने की नीति अपनाई थी, जिसके चलते इन समझौतों पर अंतिम सहमति नहीं बन सकी। हालांकि, अब राजनीतिक बदलाव और नई परिस्थितियों के बीच इन समझौतों के फिर से सक्रिय होने की संभावना जताई जा रही है।

    ACSA समझौता के तहत अमेरिका और बांग्लादेश के बीच सैन्य लॉजिस्टिक्स सहयोग को मजबूत किया जाता है, जिसमें ईंधन आपूर्ति, उपकरणों की मरम्मत और सैन्य सहायता जैसी सुविधाएं शामिल होती हैं। वहीं GSOMIA के तहत दोनों देशों के बीच संवेदनशील सैन्य सूचनाओं के सुरक्षित आदान-प्रदान की व्यवस्था बनाई जाती है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि यदि ये दोनों समझौते लागू होते हैं, तो इससे अमेरिका की बांग्लादेश में सैन्य और रणनीतिक पहुंच और मजबूत हो सकती है। यह कदम बंगाल की खाड़ी क्षेत्र में अमेरिकी उपस्थिति को बढ़ाने के रूप में भी देखा जा रहा है, जिससे पूरे इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में शक्ति संतुलन पर असर पड़ सकता है।

    हालांकि, यह स्पष्ट किया जा रहा है कि इन समझौतों का अर्थ किसी सैन्य बेस की स्थापना नहीं है, बल्कि यह मुख्य रूप से सहयोग, लॉजिस्टिक्स और सूचना साझाकरण तक सीमित ढांचा है। फिर भी, इस पहल को लेकर क्षेत्रीय भू-राजनीति में नई हलचल देखी जा रही है।

  • नेपाल का बड़ा दांव: भारतीय इन्फ्लुएंसर्स को बुलाकर टूरिज्म बढ़ाने की तैयारी, मोदी की अपील के बाद तेज हुई हलचल

    नेपाल का बड़ा दांव: भारतीय इन्फ्लुएंसर्स को बुलाकर टूरिज्म बढ़ाने की तैयारी, मोदी की अपील के बाद तेज हुई हलचल

    नई दिल्ली(New Delhi)।
    नेपाल की बालेन शाह सरकार ने देश के पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए एक नई और आक्रामक रणनीति शुरू की है, जिसमें भारतीय सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स को सीधे नेपाल आने का न्योता दिया गया है। यह कदम ऐसे समय पर सामने आया है जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हाल ही में भारतीय नागरिकों से गैर-जरूरी विदेश यात्राओं से बचने की अपील की थी। इस अपील के बाद क्षेत्रीय पर्यटन और यात्रा उद्योग में हलचल देखी जा रही है।

    नेपाल सरकार की इस नई पब्लिक डिप्लोमेसी रणनीति के तहत भारतीय यूट्यूबर्स, व्लॉगर्स, पॉडकास्ट क्रिएटर्स और डिजिटल कंटेंट निर्माताओं को नेपाल यात्रा के लिए आमंत्रित किया गया है। नेपाली दूतावास (नई दिल्ली) की ओर से 30 मई तक आवेदन मांगे गए हैं और इस पहल को भारतीय क्रिएटर्स से तेजी से प्रतिक्रिया मिल रही है।

    रिपोर्ट के अनुसार, यह पहली बार है जब नेपाल सरकार ने इस तरह सीधे भारतीय सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स को पर्यटन प्रचार के लिए शामिल किया है। काठमांडू पोस्ट की रिपोर्ट के मुताबिक, सिर्फ कुछ ही दिनों में 200 से अधिक आवेदन प्राप्त हो चुके हैं और यह संख्या लगातार बढ़ रही है। अनुमान है कि अंतिम तिथि तक यह आंकड़ा 1000 से ज्यादा पहुंच सकता है।

    नेपाल एयरलाइंस और होटल इंडस्ट्री ने भी इस अभियान को समर्थन दिया है। काठमांडू के कई फाइव स्टार होटलों ने चयनित इन्फ्लुएंसर्स के लिए विशेष पैकेज तैयार किए हैं। योजना के तहत चुने गए पांच इन्फ्लुएंसर्स को नेपाल के प्रमुख पर्यटन स्थलों जैसे काठमांडू, पोखरा और चितवन का दौरा कराया जाएगा, जहां वे देश की प्राकृतिक सुंदरता और सांस्कृतिक धरोहर का अनुभव करेंगे।

    नेपाल पर्यटन बोर्ड के अनुसार, इस पहल का उद्देश्य डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश की पर्यटन छवि को मजबूत करना है और भारतीय युवाओं तक सीधा संदेश पहुंचाना है।