Category: International

  • मैरीलैंड के बेलकैंप में उपकरण चालू होने से फैला धुआं, पड़ोसियों ने दो बेजुबानों को सुरक्षित निकाला बाहर

    मैरीलैंड के बेलकैंप में उपकरण चालू होने से फैला धुआं, पड़ोसियों ने दो बेजुबानों को सुरक्षित निकाला बाहर

    नई दिल्ली । पालतू पशुओं की अनजानी और मासूम हरकतें कभी-कभी कितने बड़े और विनाशकारी हादसों का रूप ले सकती हैं, इसका एक अत्यंत हृदयविदारक उदाहरण अमेरिका से सामने आया है। मैरीलैंड राज्य के बेलकैंप इलाके में एक घर के भीतर उस समय भारी तबाही मच गई, जब परिवार की अनुपस्थिति में एक पालतू कुत्ते ने गलती से किचन में रखा टोस्टर ऑन कर दिया। देखते ही देखते इस छोटे से उपकरण से निकली चिंगारी ने विकराल आग का रूप ले लिया और पूरा मकान धुएं के गुबार से घिर गया। इस दर्दनाक हादसे में परिवार के तीन बेहद प्रिय पालतू जानवरों की दम घुटने से मौत हो गई, जबकि पड़ोसियों की तत्परता और अदम्य साहस के कारण दो अन्य कुत्तों को सुरक्षित बचा लिया गया। यह पूरी रोंगटे खड़े कर देने वाली घटना घर के भीतर स्थापित सुरक्षा कैमरे में कैद हो गई है।

    स्थानीय जांच और सुरक्षा एजेंसियों द्वारा जारी आधिकारिक विवरण के अनुसार, यह भीषण हादसा उस समय घटित हुआ जब मकान के मालिक किसी घरेलू कार्य से बाहर गए हुए थे और घर में केवल उनके पालतू पशु ही मौजूद थे। सुरक्षा कैमरों की फुटेज का विश्लेषण करने पर अधिकारियों ने पाया कि आग लगने का कारण कोई तकनीकी शॉर्ट-सर्किट नहीं था। वीडियो साक्ष्यों में साफ दिखाई दे रहा है कि परिवार का एक पालतू कुत्ता खेलते-खेलते अचानक रसोईघर के काउंटर पर चढ़ जाता है। इसी दौरान उसका पैर या शरीर का कोई हिस्सा वहां रखे इलेक्ट्रॉनिक टोस्टर से छू जाता है, जिससे वह उपकरण चालू हो जाता है। टोस्टर के अत्यधिक गर्म होने के कारण उसके अत्यंत निकट रखा अन्य घरेलू सामान सुलगने लगा और कुछ ही मिनटों में लपटें पूरी रसोई को अपनी चपेट में लेते हुए घर के अन्य हिस्सों में फैल गईं।

    आग की विभीषणता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि देखते ही देखते पूरे इलाके में हड़कंप मच गया। आसपास रहने वाले नागरिकों ने जब बंद मकान की खिड़कियों और छतों से काला धुआं निकलते देखा, तो उन्होंने बिना एक पल गंवाए राहत और बचाव कार्य शुरू कर दिया। पड़ोसियों ने अत्यंत विषम परिस्थितियों के बीच घर का दरवाजा तोड़कर भीतर प्रवेश किया और दो कुत्तों को सुरक्षित बाहर निकालने में सफलता हासिल की। हालांकि, अत्यधिक धुआं भर जाने के कारण एक अन्य कुत्ता और परिवार की दो बिल्लियां घर के भीतर ही फंसे रह गए, जिन्हें बचाया नहीं जा सका।

    घटना की आपातकालीन सूचना मिलते ही दमकल विभाग की गाड़ियां और लगभग तीस दमकलकर्मी तुरंत मौके पर पहुंचे। बचाव दल ने करीब बीस मिनट की कड़ी मशक्कत और भारी जद्दोजहद के बाद आग पर पूरी तरह काबू पाया। प्रशासनिक अधिकारियों के प्रारंभिक आकलन के अनुसार, इस अग्निकांड में मकान के ढांचे और भीतर रखी मूल्यवान संपत्तियों को भारी नुकसान पहुंचा है, जिसका कुल मूल्य लगभग दो लाख डॉलर आंका गया है।

    अग्निशमन विशेषज्ञों और राष्ट्रीय सुरक्षा संघों का कहना है कि पालतू जानवरों की वजह से घरेलू उपकरणों के चालू होने और आग लगने की घटनाएं दुर्लभ नहीं हैं। आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, अकेले अमेरिका में ही प्रतिवर्ष लगभग एक हजार घरों में बेजुबान जानवरों की अनजानी हरकतों के कारण आग लगने के मामले दर्ज किए जाते हैं, जिससे लाखों पालतू जीव प्रभावित होते हैं। पूर्व में भी अन्य राज्यों से ऐसे मामले सामने आ चुके हैं, जहां स्मार्ट उपकरणों की समय पर चेतावनी न मिलने के कारण परिवारों को भारी जान-माल का नुकसान उठाना पड़ा है।

  • मैरीलैंड के बेल्ट्सविले में अनोखा अपराध, बिल्ली को हथियार की तरह इस्तेमाल कर कर्मचारी को थमाया धमकी भरा नोट

    मैरीलैंड के बेल्ट्सविले में अनोखा अपराध, बिल्ली को हथियार की तरह इस्तेमाल कर कर्मचारी को थमाया धमकी भरा नोट

    नई दिल्ली । अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपराध जगत से जुड़ी एक ऐसी अजीबोगरीब और हैरतअंगेज घटना सामने आई है, जिसने न केवल पुलिस प्रशासन बल्कि सोशल मीडिया जगत को भी पूरी तरह चकित कर दिया है। अमेरिका के मैरीलैंड राज्य में एक व्यक्ति ने बैंक डकैती की वारदात को अंजाम देने के लिए किसी पारंपरिक हथियार, पिस्तौल या बारूद का इस्तेमाल करने के बजाय एक मासूम जानवर का सहारा लिया। आमतौर पर बैंक लूट की घटनाओं में भारी सुरक्षा चूक और खौफनाक मंजर देखने को मिलता है, लेकिन इस विशिष्ट मामले में एक बेहद छोटी और मासूम बिल्ली अनजाने में इस अजीब अपराध का मुख्य हिस्सा बन गई। आरोपी ने बैंक के भीतर घुसकर जिस तरह की हरकत की, उसने सुरक्षा अधिकारियों को भी कुछ समय के लिए हैरत में डाल दिया।

    इस अनोखे और सुनियोजित घटनाक्रम की शुरुआत तब हुई जब आरोपी शख्स मैरीलैंड के बेल्ट्सविले इलाके में स्थित एक प्रसिद्ध पेट सप्लाई स्टोर के एडॉप्शन सेंटर में दाखिल हुआ। वहां उसने पिछले काफी दिनों से रखी गई लगभग साढ़े तीन महीने की एक खास नस्ल की टक्सीडो बिल्ली पर अपनी नजरें टिका रखी थीं। सुरक्षा कैमरों की फुटेज से यह साफ हुआ है कि आरोपी पिछले दो हफ्तों से लगातार उस स्टोर के चक्कर काट रहा था और बिल्ली की गतिविधियों पर नजर रख रहा था। घटना वाले दिन उसने बेहद चालाकी से बिल्ली के पिंजरे को खोला और उसे चुपचाप उठाकर स्टोर से बाहर भाग निकला। यह पूरी घटना स्टोर के सीसीटीवी कैमरे में रिकॉर्ड हो गई, जिसमें आरोपी हल्के रंग की पोशाक में बिल्ली को दबाकर भागता नजर आया।

    पशु संरक्षण केंद्र से बिल्ली की चोरी करने के ठीक बाद आरोपी का अगला कदम और भी ज्यादा चौंकाने वाला रहा। वह उस नन्हीं बिल्ली को अपने साथ लेकर कुछ ही दूरी पर स्थित पीएनबी बैंक की एक स्थानीय शाखा में सीधे प्रवेश कर गया। बैंक के भीतर काउंटर पर पहुंचकर उसने सबसे पहले वहां तैनात बैंक कर्मचारी यानी टेलर के हाथों में उस छोटी बिल्ली को थमा दिया। इससे पहले कि बैंक कर्मचारी कुछ समझ पाता, आरोपी ने जेब से एक लिखित नोट निकाला और कर्मचारी के सामने बढ़ा दिया। इस नोट में बेहद सख्त लहजे में बैंक में रखे कैश को तुरंत उसके हवाले करने की मांग की गई थी। बैंक के भीतर मौजूद अन्य ग्राहकों और कर्मचारियों के लिए यह दृश्य बेहद काल्पनिक और असाधारण था।

    इस अजीबोगरीब रंगदारी और लूट के प्रयास की सूचना तुरंत स्थानीय पुलिस नियंत्रण कक्ष को दी गई। सूचना मिलते ही प्रिंस जॉर्ज काउंटी पुलिस की एक भारी टीम ने त्वरित कार्रवाई करते हुए बैंक की घेराबंदी कर दी और आरोपी को मौके पर ही धर-दबोचा। इस दौरान पुलिस अधिकारियों ने तत्परता दिखाते हुए बैंक मैनेजर के केबिन से उस मासूम बिल्ली को पूरी तरह सुरक्षित और सकुशल बरामद कर लिया। बिल्ली रेस्क्यू संस्था के अधिकारी भी शुरुआत में इतनी बड़ी पुलिसिया कार्रवाई देखकर हैरान थे, लेकिन जब उन्हें बैंक के भीतर बिल्ली के होने की पुख्ता जानकारी मिली, तो पूरा मामला साफ हो गया।

    इस अनोखी घटना की खबर जैसे ही अंतरराष्ट्रीय मीडिया और इंटरनेट पर प्रसारित हुई, सोशल मीडिया यूजर्स ने इस पर बेहद मजेदार और दिलचस्प प्रतिक्रियाएं देना शुरू कर दिया। पशु कल्याण संस्था ने आधिकारिक बयान जारी कर मजाकिया लहजे में कहा कि इस नन्हीं बिल्ली का आपराधिक जीवन अब पूरी तरह समाप्त हो चुका है और वह वापस अपनी सामान्य दुनिया में लौट आई है। हालांकि आरोपी को उसकी इस गंभीर करतूत के लिए सलाखों के पीछे भेज दिया गया है, लेकिन मैग्नोलिया नाम की यह बिल्ली अब लोगों के बीच बेहद लोकप्रिय हो चुकी है और संस्था अब उसके लिए एक सुरक्षित और संवेदनशील आशियाने की तलाश कर रही है।

  • ईरान का पलटवार…बहरीन में अमेरिकी मिलेट्री बेस पर अब तक का सबसे बड़ा हमला

    ईरान का पलटवार…बहरीन में अमेरिकी मिलेट्री बेस पर अब तक का सबसे बड़ा हमला


    वाशिंगटन।
    अमेरिका (America) द्वारा बुधवार को किए गए बैक-टू-बैक दो बड़े हवाई हमलों (Major Air Strikes) के जवाब में ईरान (Iran) ने अब तक का सबसे बड़ा पलटवार किया है. तेहरान ने दावा किया है कि गुरुवार को ईरान (Iran) ने बहरीन (Bahrain) में स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकानों (US military bases) पर अब तक का सबसे बड़ा और भीषण हमला बोल दिया है, जिसने पूरे मध्य-पूर्व को दहला दिया है।

    ईरानी सैन्य कमांडरों और आधिकारिक मीडिया ‘प्रेस टीवी’ के जरिए जो बयान सामने आए हैं, वे साफ संकेत दे रहे हैं कि यह जंग अब किसी भी हद तक जा सकती है. ईरान के सबसे शक्तिशाली सैन्य संगठन ‘इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स’ (IRGC) के प्रवक्ता ब्रिगेडियर जनरल मोहेबी ने अमेरिका को खुली चेतावनी देते हुए कहा है।

    IRGC ने कहा, “दुश्मन (अमेरिका) यह समझने की भूल कतई न करे कि वह इस संघर्ष को अपनी मर्जी से खींच सकता है और इसे एक ‘वॉर ऑफ एट्रिशन’ (थका देने वाले लंबे युद्ध) में बदल सकता है. ईरान के मौजूदा सैन्य ऑपरेशन पूरी तरह से खाड़ी क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी आक्रामक सैन्य बुनियादी ढांचे और ठिकानों को नेस्तनाबूद करने पर केंद्रित हैं. यह काम पूरा होते ही हमारा अगला विनाशकारी चरण शुरू होगा।

    होर्मुज जलसंधि पर ईरान की ‘तालाबंदी’, रखीं कड़ी शर्तें
    दूसरी ओर, ईरान की थल सेना के प्रवक्ता ब्रिगेडियर जनरल अकरमी निया ने वैश्विक व्यापार के सबसे महत्वपूर्ण मार्ग ‘होर्मुज’ को लेकर बेहद सख्त रुख अपनाया है. उन्होंने साफ कर दिया है कि जब तक अमेरिका ईरान की तीन प्रमुख शर्तों को नहीं मानता, तब तक यह अंतरराष्ट्रीय जलमार्ग पूरी तरह बंद रहेगा। इन शर्तों के तहत होर्मुज को दोबारा खोलने के लिए अमेरिका को ईरान के साथ हुए समझौते (MoU) की शर्तों का पालन करना होगा, शत्रुतापूर्ण गतिविधियां बंद करनी होंगी और ईरानी कानूनों को लागू करना होगा।

    MoU का पालन और शत्रुता का अंत
    ईरान का कहना है कि अमेरिका को दोनों देशों के बीच हुए समझौता ज्ञापन (MoU) के नियमों का पालन करना होगा, अपनी शत्रुतापूर्ण कार्रवाई रोकनी होगी और ईरानी कानूनों को लागू करना होगा. इन शर्तों के बिना जलमार्ग से किसी भी जहाज को गुजरने नहीं दिया जाएगा. बहरीन में हुए इस बड़े हमले और ईरान की इस सख्त घेराबंदी के बाद अमेरिका और उसके सहयोगी देशों में हड़कंप मच गया है, और वैश्विक तेल बाजार पूरी तरह क्रैश होने की कगार पर पहुंच गया है।

  • इजरायल को फंडिंग करने पर अमेरिका में बवाल… सांसदों ने की कटौती की मांग

    इजरायल को फंडिंग करने पर अमेरिका में बवाल… सांसदों ने की कटौती की मांग


    वाशिंगटन।
    इजरायल (Israel) की मदद करना अमेरिकी सरकार (American Government) को भारी पड़ता दिख रहा है. इस मुद्दे को लेकर अमेरिका (America) की राजनीति में हंगामा शुरू हो गया है. हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स (House of Representatives) के आधे से ज्यादा डेमोक्रेटिक सांसदों (Democratic lawmakers) ने इजरायल को दी जाने वाली 3.3 अरब डॉलर की सहायता राशि में कटौती करने के पक्ष में मतदान किया है।

    बुधवार को सदन में इस संशोधन प्रस्ताव पर मतदान हुआ. प्रस्ताव के पक्ष में 104 और विरोध में 314 वोट पड़े. हालांकि, ये राष्ट्रीय सुरक्षा खर्च विधेयक में इस संशोधन को जोड़ने के लिए काफी नहीं था। इस मतदान से ये साफ हो गया है कि इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू (Prime Minister Benjamin Netanyahu) की युद्ध रणनीति को लेकर अमेरिकी संसद और डेमोक्रेटिक पार्टी में गहरी दरार है।


    चुनाव से ठीक पहले पार्टी में मतभेद

    ये मतदान अमेरिक में होने वाले मिड-टर्म चुनावों से ठीक पहले हुआ है, जो ये तय करेंगे कि अमेरिकी कांग्रेस पर किसका कंट्रोल होगा. इस वोटिंग में डेमोक्रेटिक पार्टी के नेतृत्व के बीच भी मतभेद खुलकर सामने आए. 100 से ज्यादा डेमोक्रेट्स ने विदेशी सैन्य सहायता राशि को पूरी तरह खत्म करने वाले इस संशोधन के पक्ष में वोट दिया, जबकि लगभग इतने ही डेमोक्रेट्स ने इसके खिलाफ मतदान किया।

    वहीं, जबकि रिपब्लिकन सांसदों ने इजरायल को दी जाने वाली सहायता को बनाए रखने के पक्ष में वोट डाला. सदन में डेमोक्रेटिक नेता हकीम जेफ्रीस ने इस प्रस्ताव का विरोध किया. हालांकि, उन्होंने अपने सहयोगियों को लिखे पत्र में इस बात पर जोर दिया कि इजरायल और फिलिस्तीनी लोगों की भलाई के लिए मिडिल-ईस्ट में अमेरिकी नीति को बदलना होगा। जेफ्रीस ने कहा कि नेतन्याहू सरकार के रवैये में जरूरी बदलाव लाने के लिए और भी सही तरीके मौजूद हैं।


    पार्टी में बढ़ता आंतरिक दबाव

    इजरायल को लेकर बढ़ती विरोध डेमोक्रेटिक पार्टी के लिए मुश्किलें खड़ी कर सकती है. पार्टी को अपने ही भीतर लेफ्ट विंग के बढ़ते दबाव का सामना करना पड़ रहा है. हालांकि, रिपब्लिकन पार्टी इस फूट का फायदा उठाकर डेमोक्रेट्स को ‘कट्टर वामपंथी’ साबित करने की कोशिश कर रही है।

    इस बीच, डेमोक्रेटिक व्हिप और मैसाचुसेट्स की प्रतिनिधि कैथरीन क्लार्क ने फंड रोकने का समर्थन किया. एक हालिया AP-NORC पोल के मुताबिक, लगभग एक-तिहाई अमेरिकी एडल्ट- जिनमें करीब आधे डेमोक्रेट शामिल हैं, उनका मानना है कि इजरायल ने गाजा में फिलिस्तीनियों के खिलाफ नरसंहार किया है. हालांकि, इजरायल और अमेरिकी सरकार इन आरोपों को पूरी तरह खारिज करते रहे हैं।

  • ब्रिटेन द्वारा IRGC को 'सुरक्षा के लिए खतरा' बताने पर भड़का ईरान, राजदूत को किया तलब

    ब्रिटेन द्वारा IRGC को 'सुरक्षा के लिए खतरा' बताने पर भड़का ईरान, राजदूत को किया तलब


    लंदन।
    ईरान-अमेरिका (Iran-America) के बीच जंग नए मोड़ पर पहुंच चुकी है. दोनों देशों के बीच तनाव लगातार बढ़ता जा रहा है. इस बीच, ईरान (Iran) ने तेहरान में ब्रिटेन (Britain) के राजदूत को तलब किया. यह कदम लंदन द्वारा यूके के ‘काउंटरिंग स्टेट थ्रेट्स एक्ट’ (‘Countering State Threats Act’) के तहत इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (Islamic Revolutionary Guard Corps- IRGC) को नामित करने के बाद उठाया गया. एक रिपोर्ट के अनुसार, ईरानी विदेश मंत्रालय ने चेतावनी दी कि इस कदम का जवाब दिया जाएगा।

    यह घटनाक्रम ब्रिटेन द्वारा लंदन में ईरान के चार्ज डी’अफेयर्स अली नसीमफार को तलब किए जाने के एक दिन बाद हुआ. ब्रिटेन सरकार का आरोप था कि हाल के महीनों में पूरे यूरोप में हमले करने के लिए प्रॉक्सी समूहों को निर्देशित करने में ईरान की भूमिका रही है।

    बता दें, ब्रिटेन ने सोमवार को IRGC और उससे जुड़े एक समूह को सुरक्षा के लिए खतरा घोषित किया. यह कदम उन नए अधिकारों के तहत उठाया गया जिनका मकसद विदेशी देशों को निगरानी और तोड़फोड़ जैसी गतिविधियों के लिए प्रॉक्सी का इस्तेमाल करने से रोकना है।


    होर्मुज को लेकर बढ़ी चिंताएं

    ईरान-अमेरिका के बीच तनाव बढ़ने से स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को लेकर चिंताएं फिर बढ़ गई हैं. रॉयटर्स के मुताबिक, समुद्री सुरक्षा और शिपिंग इंडस्ट्री से जुड़े सूत्रों ने बताया कि जहाजों पर ईरानी हमलों के सिलसिले के बाद सुरक्षा को लेकर चिंताएं बढ़ गई हैं, जिसके चलते शिपिंग कंपनियां स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से गुजरने के लिए अमेरिकी सेना की निगरानी वाली योजना का इस्तेमाल करने से बच रही हैं।

    28 फरवरी को ईरान युद्ध शुरू होने के बाद से ईरानी सेना ने इस इलाके में माइंस बिछा दी हैं, जिससे जहाजों को ईरान या ओमान के तट के करीब बने दो वैकल्पिक रास्तों में से किसी एक का इस्तेमाल करने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है।

  • रूस का यूक्रेन पर बड़ा हमला…. राजधानी कीव पर दांगी बैलिस्टिक मिसाइलें

    रूस का यूक्रेन पर बड़ा हमला…. राजधानी कीव पर दांगी बैलिस्टिक मिसाइलें


    कीव।
    रूस (Russia) ने गुरुवार तड़के एक बार फिर यूक्रेन (Ukraine) की राजधानी कीव (Kyiv) को निशाना बनाते हुए बैलिस्टिक मिसाइलों (Ballistic Missiles) से बड़ा हमला किया. यूक्रेनी अधिकारियों के मुताबिक, हमले के दौरान कई धमाकों की आवाजें सुनी गईं, जबकि एयर डिफेंस सिस्टम (Air Defense System) लगातार मिसाइलों को रोकने में जुटे रहे. यूक्रेनी वायुसेना ने चेतावनी दी है कि राजधानी पर और मिसाइल हमले हो सकते हैं, इसलिए लोगों से सुरक्षित बंकरों में रहने की अपील की गई है।

    कीव के मेयर विताली क्लिट्स्को ने बताया कि शहर के पश्चिमी बाहरी इलाके में एक गोदाम मिसाइल हमले की चपेट में आ गया. वहीं, इंटरसेप्ट की गई मिसाइलों का मलबा ड्नीप्रो नदी के पूर्वी किनारे स्थित इलाके में गिरा. शुरुआती जानकारी के मुताबिक, कम से कम आठ बैलिस्टिक मिसाइलें कीव की ओर दागी गई थीं।

    यूक्रेन की वायुसेना ने टेलीग्राम पर जारी संदेश में कहा कि बैलिस्टिक मिसाइलों के अलावा रूस ने शाहेद ड्रोन भी कई शहरों की ओर भेजे हैं. उत्तर-पूर्वी शहर खारकीव में भी ड्रोन हमलों के बाद कई विस्फोटों की खबरें सामने आई हैं. इसके अलावा विनित्सिया समेत कई अन्य क्षेत्रों में भी एयर रेड अलर्ट जारी किया गया.


    यूक्रेन के रक्षा मंत्री को पद से हटाने के बाद हमला

    यह हमला ऐसे समय हुआ है जब यूक्रेन में रक्षा मंत्री मायखाइलो फेदोरोव को पद से हटाए जाने को लेकर राजनीतिक हलचल बनी हुई है. उनके हटने के कुछ ही समय बाद रूस ने राजधानी पर नया हमला कर दिया।


    यूक्रेन पर रूस लगातार कर रहा घातक हमले

    जुलाई में रूस की तरफ से कीव पर यह सातवां बड़ा हमला बताया जा रहा है. इससे पहले 14 जुलाई की रात रूस ने मिसाइलों और ड्रोन के जरिए बड़े पैमाने पर हमला किया था, जिसमें कम से कम सात लोगों की मौत हुई थी और 78 लोग घायल हुए थे. उस हमले में राजधानी के 16 स्थानों को नुकसान पहुंचा था, जिनमें एक स्कूल और एक नागरिक औद्योगिक प्रतिष्ठान भी शामिल था।

    इससे पहले 2 जुलाई को हुए हमले में 30 से अधिक लोगों की मौत और 100 से ज्यादा लोग घायल हुए थे. वहीं, 6 जुलाई के हमले में कम से कम 26 लोगों की जान गई थी. लगातार हो रहे इन हमलों ने कीव में आम लोगों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं।

  • PAK की अर्थव्यवस्था पर बड़ा संकट .. बलूचिस्तान ने किया आजादी का ऐलान, संसाधनों की आपूर्ति भी रोकी

    PAK की अर्थव्यवस्था पर बड़ा संकट .. बलूचिस्तान ने किया आजादी का ऐलान, संसाधनों की आपूर्ति भी रोकी


    इस्लामाबाद।
    बलूचिस्तान (Balochistan) की प्राकृतिक गैस, कोयला, खनिज और रेयर अर्थ पर निर्भर पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था (Pakistan Economy) इस वक्त अस्तित्व के संकट से जूझ रही है। जिस इलाके को पाकिस्तान लंबे समय से अपना आर्थिक इंजन मानता रहा, उसी बलूचिस्तान ने अब न सिर्फ आजादी का ऐलान (Declaration of Independence) कर दिया है, बल्कि अपनी संसाधनों की आपूर्ति भी पूरी तरह रोक दी है। दरअसल, बलूचिस्तान प्रांत में मंगलवार को स्वतंत्रता की घोषणा के साथ ही पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था की लाइफलाइन कट गई है। क्षेत्र में लगे पूर्ण शटडाउन और ट्रांसपोर्ट ब्लॉकेड ने पंजाब की औद्योगिक इकाइयों को घुटनों पर ला दिया है। अगर यही हालात रहे तो संभव है कि पाकिस्तान कटोरा लेकर घूमने के लायक भी नहीं बचेगा।

    पंजाब के प्रमुख बिजनेस लीडर्स ने चेतावनी दी है कि अगर यह संकट लंबा खिंचा तो इसका असर किसी सक्रिय युद्ध से भी कहीं ज्यादा विनाशकारी साबित हो सकता है। पंजाब चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री और अन्य प्रमुख बिजनेस संगठनों के प्रतिनिधियों ने लाहौर में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित की। इसमें उन्होंने बलूचिस्तान पर निर्भरता को लेकर गंभीर चिंता जताई। बिजनेस लीडर्स के अनुसार, पाकिस्तान की अधिकांश भारी उद्योगों की ऊर्जा आपूर्ति, कच्चा माल और खनिज बलूचिस्तान के रास्ते ही आते हैं। शटडाउन के कारण यह पूरी सप्लाई चेन थम गई है।


    LNG और कोयला आपूर्ति पूरी तरह बंद

    प्रेस कॉन्फ्रेंस में उद्योगपतियों ने विस्तार से बताया कि लिक्विफाइड नेचुरल गैस (LNG) और कोयला मुख्य रूप से बलूचिस्तान के बंदरगाहों और खदानों से पंजाब भेजा जाता है। अब दोनों क्षेत्रों के बीच सभी तरह के एक्सपोर्ट और ट्रांसपोर्ट रुक गए हैं। एक प्रमुख इंडस्ट्री लीडर ने कहा कि हमारी फैक्टरियां अब ईंधन के बिना चल नहीं सकतीं। कई प्लांट्स पहले ही बंद हो चुके हैं या उत्पादन आधा कर दिया गया है। अगर यह स्थिति 10-15 दिन और चली तो पूरे पंजाब में बड़े पैमाने पर छंटनी शुरू हो जाएगी। उन्होंने शहबाज शरीफ सरकार को सख्त चेतावनी देते हुए कहा कि लंबे समय तक रुकावट बनी रही तो न सिर्फ औद्योगिक उत्पादन ठप होगा, बल्कि बेरोजगारी बढ़ने से सामाजिक अस्थिरता भी पैदा हो सकती है।


    खनिज और कच्चे माल की कमी

    बिजनेस प्रतिनिधियों ने बताया कि डुकी, चागई और अन्य खनिज क्षेत्रों से कोयला, क्रोमाइट, कॉपर और अन्य जरूरी इंडस्ट्रियल इनपुट्स की आपूर्ति रोक दी गई है। ट्रांसपोटर्स हड़ताल पर हैं क्योंकि राज्य उच्च मार्गों पर उनकी सुरक्षा की कोई गारंटी नहीं दी जा रही। नतीजतन, फैक्टरियों तक कच्चा माल नहीं पहुंच पा रहा। टेक्सटाइल, सीमेंट, फर्टिलाइजर, स्टील और पावर सेक्टर सबसे ज्यादा प्रभावित हो रहे हैं। प्रेस कॉन्फ्रेंस में दावा किया गया कि कई यूनिट्स में उत्पादन 40-60 प्रतिशत तक कम हो गया है।


    बलूचिस्तान पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था की रीढ़

    बलूच नेता मीर यार बलूच द्वारा शेयर किए गए वीडियो और उनके बयानों में कहा गया है कि बलूचिस्तान सोना, प्राकृतिक गैस, तांबा, क्रोमाइट और रेयर अर्थ का विशाल भंडार है। अगर बलूचिस्तान इन संसाधनों पर अपना पूर्ण नियंत्रण वापस ले लेता है तो पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था को भारी झटका लगेगा। मीर यार बलूच ने कहा कि हम जिसे ‘रिपब्लिक ऑफ बलूचिस्तान’ कह रहे हैं, वहां स्थिति धीरे-धीरे बलूच मुक्ति सेनाओं के नियंत्रण में आ रही है। हम अपने प्राकृतिक संसाधनों का फायदा अपने लोगों को देना चाहते हैं, न कि पाकिस्तान की केंद्रीय सरकार को।

    दूसरी ओर एक आर्थिक विशेषज्ञ ने कहा कि बलूचिस्तान पाकिस्तान की जीडीपी में सीधे-सीधे योगदान नहीं देता दिखता, लेकिन उसकी सप्लाई चेन पूरे देश की रीढ़ है। इन संसाधनों के बिना पाकिस्तानी सरकार दिवालिया होकर टूट जाएगी। यही कारण है कि पंजाब के बिजनेसमैनों ने सरकार से तुरंत बातचीत शुरू करने और बलूचिस्तान में शांति बहाल करने की मांग की है। उन्होंने कहा है कि यह अब सिर्फ सुरक्षा मुद्दा नहीं, बल्कि राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था का संकट बन चुका है।

  • भारत के पड़ोसी देश में माता-पिता की इजाजत के बगैर बच्चे नहीं चला पाएंगे सोशल मीडिया, प्रस्ताव पेश

    भारत के पड़ोसी देश में माता-पिता की इजाजत के बगैर बच्चे नहीं चला पाएंगे सोशल मीडिया, प्रस्ताव पेश


    नई दिल्ली। पाकिस्तान के पंजाब प्रांत में बच्चों के सोशल मीडिया इस्तेमाल को लेकर एक बड़ा प्रस्ताव पेश किया गया है। इसमें मांग की गई है कि 16 वर्ष से कम उम्र के बच्चों को माता-पिता या कानूनी संरक्षक की अनुमति के बिना सोशल मीडिया अकाउंट बनाने और चलाने की इजाजत नहीं दी जाए।

    सत्तारूढ़ गठबंधन की सहयोगी इस्तेहकाम-ए-पाकिस्तान पार्टी (IPP) की विधायक सारा अहमद ने मंगलवार को पंजाब विधानसभा में यह प्रस्ताव पेश किया। उन्होंने साइबर उत्पीड़न, ऑनलाइन यौन शोषण और बच्चों में बढ़ती डिजिटल निर्भरता को देखते हुए सोशल मीडिया इस्तेमाल को नियंत्रित करने की मांग उठाई।

    बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा के लिए कानून बनाने की मांग
    सारा अहमद पंजाब बाल संरक्षण ब्यूरो की अध्यक्ष भी हैं। उनके द्वारा पेश किया गया यह प्रस्ताव पाकिस्तान की किसी प्रांतीय या संघीय विधायिका में अपनी तरह का पहला प्रस्ताव बताया जा रहा है।

    प्रस्ताव में संघीय सरकार से बच्चों की सोशल मीडिया तक पहुंच को नियंत्रित करने और ऑनलाइन सुरक्षा को मजबूत करने के लिए व्यापक कानून बनाने की सिफारिश की गई है।

    प्रस्ताव में कहा गया है कि बच्चों के शारीरिक, मानसिक, मनोवैज्ञानिक और नैतिक विकास की सुरक्षा करना राज्य की संवैधानिक और नैतिक जिम्मेदारी है। सोशल मीडिया के अनियंत्रित इस्तेमाल से बच्चे साइबर बुलिंग, ऑनलाइन शोषण, अनुचित सामग्री, मानसिक तनाव और डिजिटल लत जैसी समस्याओं का सामना कर सकते हैं।

    सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर ऐज वेरिफिकेशन की मांग
    प्रस्ताव में पाकिस्तान दूरसंचार प्राधिकरण (PTA) से देश में संचालित सभी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर प्रभावी उम्र सत्यापन प्रणाली (Age Verification System) लागू करने की मांग भी की गई है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि 16 वर्ष से कम उम्र के बच्चों के लिए प्रस्तावित नियमों का सही तरीके से पालन हो सके।

    दुनिया के कई देश भी बना रहे हैं सख्त नियम
    यह प्रस्ताव ऐसे समय आया है जब दुनिया के कई देश बच्चों के सोशल मीडिया इस्तेमाल को लेकर नए नियमों पर विचार कर रहे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि अत्यधिक ऑनलाइन गतिविधियों, मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं, साइबर उत्पीड़न और हानिकारक कंटेंट के संपर्क के बीच संबंधों को देखते हुए सरकारें नियमन बढ़ा रही हैं।

    कई देशों में लागू हो चुके हैं आयु आधारित नियम
    ऑस्ट्रेलिया और यूरोपीय संघ के कई सदस्य देशों समेत दुनिया के कई देशों ने बच्चों की सोशल मीडिया पहुंच को सीमित करने के लिए आयु आधारित प्रतिबंध लागू किए हैं। वहीं कुछ देश अधिक सख्त आयु सत्यापन व्यवस्था और ऑनलाइन बाल सुरक्षा कानूनों पर काम कर रहे हैं।

  • भारत के बाद अब नेपाल भी इथेनॉल मिश्रित ईंधन की राह पर, E10 पेट्रोल लागू करने की तैयारी तेज, उत्पादन से लेकर गुणवत्ता और कीमत तक बने सख्त नियम

    भारत के बाद अब नेपाल भी इथेनॉल मिश्रित ईंधन की राह पर, E10 पेट्रोल लागू करने की तैयारी तेज, उत्पादन से लेकर गुणवत्ता और कीमत तक बने सख्त नियम

    नई दिल्ली । भारत में इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल को बढ़ावा दिए जाने के बाद अब पड़ोसी देश नेपाल भी इसी दिशा में महत्वपूर्ण कदम बढ़ा रहा है। नेपाल सरकार ने पेट्रोल में 10 प्रतिशत इथेनॉल मिश्रण यानी E10 पेट्रोल लागू करने की तैयारी शुरू कर दी है। इसके लिए संबंधित मानकों का विस्तृत मसौदा जारी किया गया है, जिसमें इथेनॉल के उत्पादन, गुणवत्ता, भंडारण, परिवहन, लेबलिंग और मूल्य निर्धारण तक के लिए स्पष्ट दिशा-निर्देश तय किए गए हैं। सरकार का उद्देश्य वैकल्पिक ईंधन को बढ़ावा देने के साथ-साथ आयातित पेट्रोल पर निर्भरता कम करना और घरेलू संसाधनों का बेहतर उपयोग सुनिश्चित करना है।

    प्रस्तावित मानकों के अनुसार नेपाल ऑयल कॉर्पोरेशन को पेट्रोल में अधिकतम 10 प्रतिशत तक इथेनॉल मिलाने की व्यवस्था करनी होगी। हालांकि सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि भविष्य में आवश्यकता और परिस्थितियों के अनुसार कैबिनेट के निर्णय से इथेनॉल मिश्रण का अनुपात बदला जा सकेगा। इससे ऊर्जा नीति को समय-समय पर बदलती जरूरतों के अनुरूप लचीला बनाए रखने की कोशिश की गई है।

    मसौदे में इथेनॉल उत्पादन के स्रोतों और तकनीकों को अलग-अलग श्रेणियों में विभाजित किया गया है। साथ ही इसके सुरक्षित भंडारण और गुणवत्ता नियंत्रण पर विशेष जोर दिया गया है। चूंकि इथेनॉल अत्यधिक ज्वलनशील होता है, इसलिए इसे केवल सुरक्षित, सूखे और पूरी तरह लीक-प्रूफ टैंक या ड्रम में रखने का प्रावधान किया गया है। परिवहन और भंडारण के दौरान सुरक्षा मानकों का पालन अनिवार्य होगा ताकि किसी प्रकार की दुर्घटना या पर्यावरणीय जोखिम से बचा जा सके।

    सरकार ने उत्पाद की पारदर्शिता और ट्रेसबिलिटी सुनिश्चित करने के लिए प्रत्येक कंटेनर पर विस्तृत जानकारी देना भी अनिवार्य किया है। इसमें निर्माता का नाम, बैच नंबर, उत्पादन की मात्रा और उत्पादन तकनीक का उल्लेख करना होगा। इसके अलावा इथेनॉल पूरी तरह स्वच्छ और पारदर्शी होना चाहिए तथा उसमें किसी प्रकार के ठोस कण नहीं होने चाहिए। मसौदे में यह भी स्पष्ट किया गया है कि पेट्रोल में मिलाए जाने वाले इथेनॉल की शुद्धता कम से कम 99.5 प्रतिशत होनी आवश्यक होगी।

    प्रस्तावित नियमों में वाहन सुरक्षा और पर्यावरण संरक्षण को भी प्राथमिकता दी गई है। इसी कारण मेथनॉल, तारपीन, कीटोन और टार जैसे ऐसे पदार्थों के उपयोग पर रोक लगाने का प्रस्ताव रखा गया है, जो इंजन, रबर पाइप और ईंधन प्रणाली को नुकसान पहुंचा सकते हैं। सरकार का मानना है कि उच्च गुणवत्ता वाले इथेनॉल के उपयोग से वाहनों की कार्यक्षमता बेहतर बनी रहेगी और ईंधन प्रणाली पर नकारात्मक प्रभाव कम होगा।

    नेपाल सरकार की इस पहल का मुख्य उद्देश्य घरेलू स्तर पर इथेनॉल उत्पादन को बढ़ावा देना, नए रोजगार के अवसर सृजित करना और पेट्रोल आयात पर निर्भरता को धीरे-धीरे कम करना है। साथ ही सरकार इस बात को लेकर भी सतर्क है कि इथेनॉल उत्पादन के कारण खाद्यान्न की उपलब्धता प्रभावित न हो। इसी वजह से खाद्य उपयोग वाले अनाज को कच्चे माल के रूप में इस्तेमाल करने पर रोक लगाने का प्रस्ताव किया गया है।

    इसके स्थान पर चीनी उद्योग से निकलने वाले शीरे, नेपियर घास, कृषि एवं वन अपशिष्ट, धान के पुआल, मक्के के डंठल, गेहूं की भूसी, खराब एवं अनुपयोगी अनाज, कसावा तथा अन्य जैविक स्रोतों का उपयोग करने पर जोर दिया गया है। सरकार ने पर्यावरण अनुकूल उत्पादन प्रक्रिया अपनाने की भी शर्त रखी है। तैयार इथेनॉल केवल नेपाल ऑयल कॉर्पोरेशन को बेचा जा सकेगा, जबकि इसकी कीमत हर वित्तीय वर्ष की शुरुआत से पहले सरकार की सिफारिश समिति तय करेगी। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह नीति प्रभावी ढंग से लागू होती है तो नेपाल की ऊर्जा सुरक्षा, जैव ईंधन उत्पादन और हरित अर्थव्यवस्था को दीर्घकालिक मजबूती मिल सकती है।

  • रोमिंग डेटा से अमेरिकी ठिकानों तक पहुंचने का दावा, ईरान की कथित साइबर रणनीति ने बढ़ाई वैश्विक सुरक्षा एजेंसियों की चिंता

    रोमिंग डेटा से अमेरिकी ठिकानों तक पहुंचने का दावा, ईरान की कथित साइबर रणनीति ने बढ़ाई वैश्विक सुरक्षा एजेंसियों की चिंता

    नई दिल्ली । मध्य पूर्व में अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के बीच मोबाइल नेटवर्क सुरक्षा को लेकर एक नया विवाद सामने आया है। हालिया रिपोर्टों में दावा किया गया है कि ईरान या उससे जुड़े तत्वों ने क्षेत्र के पुराने दूरसंचार नेटवर्क की तकनीकी कमजोरियों का उपयोग कर अमेरिकी सैनिकों, सरकारी कर्मचारियों और रक्षा ठेकेदारों के मोबाइल फोन की लोकेशन का पता लगाने की कोशिश की। हालांकि इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और अमेरिकी अधिकारियों ने यह स्पष्ट किया है कि हमलों में लोकेशन डेटा की निर्णायक भूमिका साबित नहीं हुई है। इसके बावजूद इस घटनाक्रम ने वैश्विक स्तर पर साइबर सुरक्षा और मोबाइल संचार की विश्वसनीयता पर नई चर्चा शुरू कर दी है।

    बताया जा रहा है कि मोबाइल सर्विलांस पर काम करने वाले एक स्वतंत्र शोध समूह ने मध्य पूर्व के कई दूरसंचार नेटवर्क पर असामान्य गतिविधियां दर्ज कीं। शोधकर्ताओं के अनुसार बड़ी संख्या में ऐसी तकनीकी रिक्वेस्ट भेजी गईं जिनका उद्देश्य रोमिंग पर मौजूद विशेष मोबाइल फोनों की स्थिति और नेटवर्क की जानकारी प्राप्त करना था। विशेषज्ञों का कहना है कि इस प्रकार की गतिविधियां सामान्य उपभोक्ता सेवाओं से अलग होती हैं और किसी विशेष लक्ष्य की पहचान करने के उद्देश्य से इस्तेमाल की जा सकती हैं।

    साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों के अनुसार इस पूरे मामले में सबसे अधिक चर्चा एसएस7 प्रोटोकॉल को लेकर हो रही है। यह दूरसंचार नेटवर्क का एक पुराना सिग्नलिंग सिस्टम है, जिसका उपयोग विभिन्न देशों के मोबाइल नेटवर्क के बीच कॉल, संदेश और रोमिंग सेवाओं के समन्वय के लिए किया जाता है। वर्षों से सुरक्षा विशेषज्ञ इस प्रणाली की कमजोरियों की ओर ध्यान दिलाते रहे हैं। यदि किसी नेटवर्क तक अनुचित पहुंच मिल जाए तो कुछ परिस्थितियों में इसका दुरुपयोग कर किसी मोबाइल डिवाइस की स्थिति संबंधी सीमित जानकारी जुटाने की कोशिश की जा सकती है। हालांकि विशेषज्ञ यह भी स्पष्ट करते हैं कि किसी व्यक्ति की लगातार और सटीक वास्तविक समय की निगरानी केवल इसी तकनीक के आधार पर हमेशा संभव नहीं होती।

    रिपोर्टों के अनुसार बहरीन सहित खाड़ी क्षेत्र के कुछ दूरसंचार नेटवर्क पर ऐसे एसएस7 अनुरोधों में अचानक वृद्धि देखी गई। इसी आधार पर कुछ विश्लेषकों ने आशंका जताई कि अमेरिकी सैन्य कर्मियों या ठेकेदारों से जुड़े मोबाइल नंबरों की पहचान करने का प्रयास किया गया हो सकता है। हालांकि इस संबंध में किसी सरकारी एजेंसी ने सार्वजनिक रूप से ठोस तकनीकी प्रमाण जारी नहीं किए हैं।

    दूसरी ओर अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने स्वीकार किया है कि युद्ध क्षेत्रों में वाणिज्यिक लोकेशन डेटा और डिजिटल ट्रैकिंग से जुड़े संभावित खतरों को गंभीरता से लिया जा रहा है। सेना का कहना है कि कर्मियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए अतिरिक्त एहतियाती उपाय लागू किए गए हैं, लेकिन सुरक्षा कारणों से उनकी विस्तृत जानकारी सार्वजनिक नहीं की जा सकती। वहीं अमेरिकी अधिकारियों ने यह भी कहा है कि हालिया हमलों में लोकेशन डेटा की अहम भूमिका होने के दावों का समर्थन उपलब्ध तथ्यों से नहीं होता।

    साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यह मामला आधुनिक युद्ध में डिजिटल तकनीकों की बढ़ती भूमिका को दर्शाता है। आज मोबाइल फोन केवल संचार का साधन नहीं रह गए हैं, बल्कि वे संवेदनशील सूचनाओं का स्रोत भी बन सकते हैं। इसलिए सैन्य, सरकारी और रणनीतिक संस्थानों के साथ-साथ आम उपयोगकर्ताओं के लिए भी सुरक्षित नेटवर्क, अद्यतन सुरक्षा उपाय और डिजिटल सतर्कता पहले से कहीं अधिक महत्वपूर्ण हो गई है। यही कारण है कि दूरसंचार नेटवर्क की सुरक्षा और पुराने प्रोटोकॉल के आधुनिकीकरण पर अब वैश्विक स्तर पर तेजी से ध्यान दिया जा रहा है।