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  • होर्मुज स्ट्रेट में भारतीय नाविक की मौत पर भारत का कड़ा रुख, ईरानी दूतावास तलब, समुद्री सुरक्षा को लेकर जताई गंभीर चिंता

    होर्मुज स्ट्रेट में भारतीय नाविक की मौत पर भारत का कड़ा रुख, ईरानी दूतावास तलब, समुद्री सुरक्षा को लेकर जताई गंभीर चिंता


    नई दिल्ली ।
    होर्मुज स्ट्रेट क्षेत्र में एक व्यापारी जहाज पर हुए हमले में भारतीय नाविक की मौत के बाद भारत सरकार ने कड़ा रुख अपनाया है। इस घटना के बाद विदेश मंत्रालय ने नई दिल्ली स्थित ईरानी दूतावास के वरिष्ठ अधिकारियों को तलब कर अपनी चिंता और आपत्ति दर्ज कराई। सरकार ने विशेष रूप से समुद्री मार्गों पर कार्यरत भारतीय नागरिकों की सुरक्षा का मुद्दा उठाते हुए कहा कि इस संवेदनशील क्षेत्र में काम करने वाले भारतीय नाविकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना अत्यंत आवश्यक है।

    विदेश मंत्रालय में हुई बैठक के दौरान भारतीय अधिकारियों ने ईरानी पक्ष के समक्ष समुद्री सुरक्षा से जुड़े गंभीर मुद्दों को उठाया। इस दौरान ईरानी दूतावास के वरिष्ठ राजनयिक, जिनमें उप मिशन प्रमुख भी शामिल थे, विदेश मंत्रालय पहुंचे। भारत ने स्पष्ट किया कि पश्चिम एशिया के समुद्री मार्गों पर बड़ी संख्या में भारतीय नागरिक व्यापारी जहाजों पर कार्यरत हैं और किसी भी प्रकार का सैन्य तनाव उनके जीवन और सुरक्षा पर सीधा प्रभाव डाल सकता है।

    घटना ऐसे समय सामने आई है जब अमेरिका और ईरान के बीच सैन्य तनाव एक बार फिर बढ़ गया है। हाल के दिनों में दोनों देशों के बीच लगातार सैन्य कार्रवाई और जवाबी हमलों की खबरें सामने आई हैं। इसी क्रम में होर्मुज स्ट्रेट के निकट संयुक्त अरब अमीरात से जुड़े दो वाणिज्यिक जहाजों पर हमला हुआ, जिसमें एक भारतीय नाविक की जान चली गई। इस हमले में कई अन्य चालक दल के सदस्य भी घायल हुए, जिनमें भारतीय नागरिक शामिल बताए गए हैं। कुछ घायलों की स्थिति गंभीर बताई जा रही है।

    हमले के बाद दोनों जहाजों में आग लग गई थी, जिस पर बाद में काबू पा लिया गया। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, प्रभावित जहाजों पर मौजूद चालक दल को सुरक्षित निकालने के लिए राहत एवं बचाव अभियान भी चलाया गया। घटना के बाद क्षेत्र में समुद्री गतिविधियों और वाणिज्यिक जहाजों की सुरक्षा को लेकर चिंता और बढ़ गई है।

    संयुक्त अरब अमीरात ने भी इस हमले की कड़ी निंदा की है। यूएई ने इसे अंतरराष्ट्रीय कानून के विरुद्ध बताया और कहा कि वाणिज्यिक जहाजों को निशाना बनाना क्षेत्रीय स्थिरता और वैश्विक समुद्री व्यापार के लिए गंभीर खतरा है। साथ ही यह भी कहा गया कि ऐसी घटनाओं का उचित जवाब देने का अधिकार सुरक्षित है। इस बयान के बाद पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी चिंता व्यक्त की जा रही है।

    होर्मुज स्ट्रेट दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापारिक मार्गों में से एक माना जाता है। वैश्विक स्तर पर बड़ी मात्रा में कच्चा तेल और प्राकृतिक गैस इसी समुद्री मार्ग से विभिन्न देशों तक पहुंचती है। ऐसे में इस क्षेत्र में किसी भी प्रकार का सैन्य टकराव न केवल क्षेत्रीय सुरक्षा बल्कि अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा आपूर्ति और वैश्विक व्यापार पर भी व्यापक असर डाल सकता है।

    भारत सरकार लगातार इस पूरे घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए है। विदेश मंत्रालय संबंधित देशों के संपर्क में रहकर भारतीय नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के प्रयास कर रहा है। सरकार का कहना है कि विदेशों में कार्यरत भारतीयों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है और आवश्यकता पड़ने पर हर आवश्यक राजनयिक कदम उठाया जाएगा। मौजूदा घटनाक्रम ने एक बार फिर यह स्पष्ट कर दिया है कि पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव का प्रभाव केवल क्षेत्रीय राजनीति तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका असर अंतरराष्ट्रीय समुद्री सुरक्षा और भारतीय नागरिकों पर भी सीधे तौर पर पड़ सकता है।

  • ऑस्ट्रेलिया में ‘मेलबर्न मीट्स मोदी’ कार्यक्रम पर विवाद गहराया, आयोजकों ने कांग्रेस के आरोप खारिज किए, बयान वापस लेने की उठाई मांग

    ऑस्ट्रेलिया में ‘मेलबर्न मीट्स मोदी’ कार्यक्रम पर विवाद गहराया, आयोजकों ने कांग्रेस के आरोप खारिज किए, बयान वापस लेने की उठाई मांग

    नई दिल्ली । ऑस्ट्रेलिया के मेलबर्न में आयोजित प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सार्वजनिक कार्यक्रम को लेकर राजनीतिक विवाद तेज हो गया है। कार्यक्रम में शामिल लोगों को पैसे देकर बुलाए जाने के कांग्रेस के आरोपों पर आयोजकों ने कड़ा विरोध जताया है। उन्होंने इन दावों को पूरी तरह निराधार बताते हुए कहा है कि कार्यक्रम में शामिल होने वाले भारतीय मूल के लोगों को किसी प्रकार का भुगतान नहीं किया गया था। आयोजकों का कहना है कि यह आयोजन भारतीय-ऑस्ट्रेलियाई समुदाय की स्वैच्छिक भागीदारी का परिणाम था और इसे लेकर लगाए गए आरोप समुदाय की छवि को नुकसान पहुंचाने वाले हैं।

    यह विवाद उस समय शुरू हुआ जब कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पवन खेड़ा ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो साझा करते हुए दावा किया कि 9 जुलाई को आयोजित कार्यक्रम में बड़ी संख्या में लोगों को पैसे देकर और चार्टर्ड विमानों के माध्यम से लाया गया था। इसके बाद कांग्रेस के अन्य नेताओं ने भी इसी तरह के आरोप दोहराते हुए कहा कि प्रधानमंत्री के स्वागत के लिए बड़ी संख्या में लोगों को आर्थिक प्रोत्साहन देकर कार्यक्रम में शामिल कराया गया।

    इन आरोपों के बाद कार्यक्रम के आयोजकों ने विस्तृत प्रतिक्रिया जारी करते हुए कहा कि कार्यक्रम में भाग लेने वाले लोगों ने अपनी इच्छा से उपस्थिति दर्ज कराई थी। आयोजकों के अनुसार, इस आयोजन के लिए किसी भी व्यक्ति को भुगतान नहीं किया गया और न ही भीड़ जुटाने के लिए किसी प्रकार की वित्तीय व्यवस्था की गई। उनका कहना है कि भारतीय समुदाय ने स्वयं इस कार्यक्रम में उत्साहपूर्वक भाग लिया और इसे राजनीतिक विवाद का विषय बनाना उचित नहीं है।

    आयोजकों ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी और कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे को पत्र लिखकर सार्वजनिक रूप से माफी मांगने और संबंधित बयान वापस लेने की मांग भी की है। उनका कहना है कि इस तरह के आरोप केवल कार्यक्रम तक सीमित नहीं हैं, बल्कि ऑस्ट्रेलिया में रहने वाले भारतीय मूल के हजारों लोगों की गरिमा और योगदान पर भी सवाल खड़े करते हैं। आयोजकों का दावा है कि कार्यक्रम का खर्च न तो भारतीय जनता पार्टी ने उठाया, न भारत सरकार ने और न ही ऑस्ट्रेलिया सरकार ने।

    बताया गया है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 9 और 10 जुलाई को ऑस्ट्रेलिया के दौरे पर थे। इसी दौरान मेलबर्न में आयोजित ‘मेलबर्न मीट्स मोदी’ कार्यक्रम में बड़ी संख्या में भारतीय मूल के लोगों ने भाग लिया। आयोजकों के अनुसार, कार्यक्रम में लगभग 30 हजार लोगों की उपस्थिति दर्ज की गई थी, जिसे भारतीय समुदाय के बड़े आयोजनों में से एक माना गया।

    दूसरी ओर, कांग्रेस अपने आरोपों पर कायम है और सोशल मीडिया पर साझा किए गए वीडियो तथा अन्य दावों का हवाला देते हुए कार्यक्रम की व्यवस्थाओं पर सवाल उठा रही है। हालांकि आयोजकों ने इन दावों को तथ्यों से परे बताते हुए स्पष्ट किया है कि अब तक ऐसे आरोपों के समर्थन में कोई प्रमाण सार्वजनिक नहीं किया गया है। उन्होंने कहा कि बिना ठोस साक्ष्यों के लगाए गए आरोपों से समुदाय की प्रतिष्ठा प्रभावित होती है।

    इस पूरे घटनाक्रम के बाद यह मुद्दा राजनीतिक बहस का विषय बन गया है। एक ओर कांग्रेस कार्यक्रम की पारदर्शिता पर सवाल उठा रही है, वहीं दूसरी ओर आयोजक आरोपों को असत्य बताते हुए सार्वजनिक माफी की मांग कर रहे हैं। ऐसे में अब इस विवाद को लेकर राजनीतिक प्रतिक्रियाओं और आगे की स्थिति पर सभी की नजर बनी हुई है।

  • ईरान-अमेरिका तनाव के बीच भारत का कड़ा संदेश, भारतीय नाविक की मौत पर ईरान के डिप्टी राजदूत तलब, होर्मुज में बढ़ा सैन्य और समुद्री संकट

    ईरान-अमेरिका तनाव के बीच भारत का कड़ा संदेश, भारतीय नाविक की मौत पर ईरान के डिप्टी राजदूत तलब, होर्मुज में बढ़ा सैन्य और समुद्री संकट

    नई दिल्ली । पश्चिम एशिया में ईरान और अमेरिका के बीच लगातार बढ़ रहे सैन्य तनाव के बीच भारत ने अपने एक नागरिक की मौत के मामले में कड़ा राजनयिक कदम उठाया है। होर्मुज जलडमरूमध्य के निकट हुए हमले में एक भारतीय नाविक की मृत्यु के बाद भारत सरकार ने ईरान के डिप्टी राजदूत को तलब कर अपनी गंभीर आपत्ति दर्ज कराई। विदेश मंत्रालय ने इस घटना पर चिंता व्यक्त करते हुए भारतीय नागरिकों और समुद्री जहाजों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की आवश्यकता पर जोर दिया।

    हाल के दिनों में होर्मुज जलडमरूमध्य और आसपास के समुद्री क्षेत्र में लगातार सैन्य गतिविधियां तेज हुई हैं। तेल टैंकरों और व्यापारिक जहाजों पर हमलों की घटनाओं ने वैश्विक समुद्री परिवहन को प्रभावित किया है। इसी दौरान एक हमले में भारतीय चालक दल का सदस्य जान गंवा बैठा, जबकि कई अन्य लोग घायल हुए। इस घटना के बाद भारत ने राजनयिक माध्यमों से अपना विरोध दर्ज कराया और पूरे मामले पर विस्तृत जानकारी मांगी है।

    भारत ने स्पष्ट किया कि किसी भी संघर्ष की स्थिति में अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्गों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए। भारतीय नागरिकों और व्यापारिक जहाजों की सुरक्षा सुनिश्चित करना सरकार की जिम्मेदारी है। इसी उद्देश्य से ईरान के प्रतिनिधि को तलब कर घटना पर आधिकारिक स्पष्टीकरण मांगा गया। इससे पहले भी क्षेत्र में भारतीय जहाजों से जुड़ी घटनाओं पर भारत संबंधित देशों के समक्ष अपनी चिंता दर्ज करा चुका है।

    दूसरी ओर, पश्चिम एशिया में सैन्य गतिविधियां लगातार तेज बनी हुई हैं। विभिन्न क्षेत्रों में मिसाइल और ड्रोन हमलों की खबरें सामने आई हैं। कई देशों ने समुद्री सुरक्षा को लेकर अपने जहाजों और नागरिकों के लिए अतिरिक्त सतर्कता बरतने की सलाह जारी की है। क्षेत्र में बढ़ते तनाव के कारण वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति और समुद्री व्यापार पर भी दबाव बढ़ने की आशंका जताई जा रही है।

    रणनीतिक दृष्टि से होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों में गिना जाता है। वैश्विक कच्चे तेल और गैस की बड़ी मात्रा इसी रास्ते से गुजरती है। ऐसे में यहां किसी भी प्रकार का सैन्य संघर्ष केवल क्षेत्रीय सुरक्षा तक सीमित नहीं रहता, बल्कि अंतरराष्ट्रीय व्यापार, ऊर्जा बाजार और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर भी उसका व्यापक प्रभाव पड़ सकता है।

    भारत लगातार यह रुख दोहराता रहा है कि सभी पक्ष संयम बरतें और विवादों का समाधान संवाद तथा कूटनीतिक माध्यमों से किया जाए। सरकार का मानना है कि समुद्री मार्गों की सुरक्षा और अंतरराष्ट्रीय कानूनों का पालन वैश्विक स्थिरता के लिए आवश्यक है। इसी कारण भारत क्षेत्र की स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए है और जरूरत पड़ने पर अपने नागरिकों तथा समुद्री हितों की सुरक्षा के लिए आवश्यक कदम उठा रहा है।

    भारतीय नाविक की मौत के बाद उठाया गया यह राजनयिक कदम दर्शाता है कि विदेशों में भारतीय नागरिकों की सुरक्षा को लेकर भारत किसी भी प्रकार की लापरवाही स्वीकार करने के पक्ष में नहीं है। आने वाले दिनों में क्षेत्र की परिस्थितियों और संबंधित देशों की प्रतिक्रिया के आधार पर आगे की कूटनीतिक और सुरक्षा संबंधी रणनीति तय की जा सकती है। फिलहाल पश्चिम एशिया में जारी तनाव ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय की चिंता और बढ़ा दी है।

  • भारत-अमेरिका ट्रेड डील पर विवाद की खबरों को सर्जियो गोर ने बताया गलत, बोले- बातचीत सकारात्मक दिशा में जारी

    भारत-अमेरिका ट्रेड डील पर विवाद की खबरों को सर्जियो गोर ने बताया गलत, बोले- बातचीत सकारात्मक दिशा में जारी


    नई दिल्ली। भारत और अमेरिका के बीच प्रस्तावित ट्रेड डील को लेकर चल रही अटकलों पर अब अमेरिकी पक्ष की ओर से सफाई सामने आई है। भारत में अमेरिका के राजदूत सर्जियो गोर ने उन खबरों को खारिज कर दिया है, जिनमें दावा किया जा रहा था कि दोनों देशों के बीच व्यापार समझौता अटक गया है या किसी पक्ष ने इसे अस्वीकार कर दिया है।

    सर्जियो गोर ने सोमवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करते हुए कहा कि ऐसी खबरें गलत हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत और अमेरिका दोनों ही व्यापार समझौते को अंतिम रूप देने के लिए प्रतिबद्ध हैं और हाल की बातचीत सकारात्मक रही है।

    सर्जियो गोर ने कहा- किसी पक्ष ने डील रिजेक्ट नहीं की
    अमेरिकी राजदूत ने एक्स पर लिखा, “फेक न्यूज अलर्ट! किसी ने कुछ भी रिजेक्ट नहीं किया है।” उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच बातचीत सकारात्मक माहौल में आगे बढ़ रही है और ट्रेड डील को पूरा करने के लिए दोनों पक्ष सक्रिय रूप से काम कर रहे हैं। उन्होंने एक मीडिया रिपोर्ट पर टिप्पणी करते हुए यह भी कहा कि संबंधित पक्षों को इससे बेहतर काम करना चाहिए।

    भारत सरकार ने भी रिपोर्टों को बताया भ्रामक
    भारत सरकार ने भी उन दावों को खारिज किया है, जिनमें कहा गया था कि नई दिल्ली व्यापार समझौते में देरी कर रही है या पीछे हट गई है। वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने इन दावों को झूठा, आधारहीन और भ्रामक बताया। उन्होंने कहा कि भारत और अमेरिका के बीच व्यापार वार्ता लगातार जारी है और समझौते की दिशा में काफी प्रगति हुई है।

    गोयल ने यह भी कहा कि भारत ने अमेरिका के साथ ट्रेड डील से दूरी नहीं बनाई है और न ही जानबूझकर इसमें देरी की जा रही है। उन्होंने रॉयटर्स की रिपोर्ट में किए गए दावों को पूरी तरह गलत बताया।

    क्या थी रिपोर्ट में कही गई बात?
    इससे पहले समाचार एजेंसी की एक रिपोर्ट में दावा किया गया था कि भारत और अमेरिका बेहतर शर्तों की तलाश में व्यापार समझौते को लेकर सहमति तक नहीं पहुंच सके हैं।

    रिपोर्ट में कहा गया था कि भारत अपने आर्थिक हितों को ध्यान में रखते हुए किसी ऐसे समझौते में जल्दबाजी नहीं करना चाहता, जिससे घरेलू स्तर पर नुकसान हो। इसमें यह भी दावा किया गया था कि दोनों देश अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि जेसन ग्रीयर की भारत यात्रा के दौरान अंतरिम समझौते की शर्तों को अंतिम रूप देने में सफल नहीं हो पाए।

    रिपोर्ट के अनुसार, एक भारतीय अधिकारी ने दावा किया था कि अमेरिका की ओर से कुछ महत्वपूर्ण मुद्दों पर स्पष्ट आश्वासन नहीं मिला है। इनमें चीन जैसे प्रतिस्पर्धी देशों को लेकर टैरिफ लाभ और समझौते के बाद नए अमेरिकी शुल्कों से सुरक्षा जैसे मुद्दे शामिल बताए गए थे।

    संवेदनशील क्षेत्रों पर भारत का रुख
    रिपोर्ट में यह भी कहा गया था कि भारत कृषि जैसे संवेदनशील क्षेत्रों में जल्दबाजी में कोई समझौता नहीं करना चाहता। भारत का जोर ऐसे व्यापार समझौते पर है, जो दोनों देशों के हितों के अनुरूप हो। फिलहाल भारत और अमेरिका दोनों की ओर से यही संकेत दिए गए हैं कि बातचीत जारी है और ट्रेड डील को अंतिम रूप देने की प्रक्रिया आगे बढ़ रही है।

  • यूरोप के साथ मजबूत होगी भारत की आर्थिक साझेदारी, स्पेन में व्यापार निवेश और ग्रीन टेक्नोलॉजी पर बनी रणनीति

    यूरोप के साथ मजबूत होगी भारत की आर्थिक साझेदारी, स्पेन में व्यापार निवेश और ग्रीन टेक्नोलॉजी पर बनी रणनीति


    नई दिल्ली । वैश्विक आर्थिक परिदृश्य में बदलते समीकरणों के बीच भारत और स्पेन ने अपने द्विपक्षीय आर्थिक संबंधों को नई मजबूती देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बढ़ाया है। केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने स्पेन की राजधानी मैड्रिड में वहां के अर्थव्यवस्था मंत्री कार्लोस कुएर्पो के साथ उच्चस्तरीय बैठक कर व्यापार निवेश और प्रौद्योगिकी सहयोग को विस्तार देने पर व्यापक चर्चा की। इस बैठक में दोनों देशों ने भविष्य की आर्थिक साझेदारी को नई गति देने के साथ भारत और यूरोपीय संघ के बीच लंबे समय से लंबित मुक्त व्यापार समझौते को जल्द अंतिम रूप देने की आवश्यकता पर भी जोर दिया। माना जा रहा है कि यह पहल आने वाले वर्षों में भारत और यूरोप के बीच व्यापारिक संबंधों को नई दिशा देने में अहम भूमिका निभाएगी।

    तीन देशों के आधिकारिक दौरे के तहत स्पेन पहुंचे पीयूष गोयल ने कहा कि दोनों देशों के बीच हुई बातचीत बेहद सकारात्मक और परिणामोन्मुख रही। उन्होंने बताया कि भारत और स्पेन ने नवीकरणीय ऊर्जा ग्रीन हाइड्रोजन उन्नत विनिर्माण डिजिटल प्रौद्योगिकी बुनियादी ढांचा नवाचार और सतत विकास जैसे भविष्य के प्रमुख क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर विशेष सहमति बनाई है। इन क्षेत्रों में साझेदारी न केवल दोनों देशों की अर्थव्यवस्था को नई मजबूती देगी बल्कि वैश्विक स्तर पर टिकाऊ विकास के लक्ष्यों को भी आगे बढ़ाने में मदद करेगी।

    बैठक के दौरान भारत और यूरोपीय संघ के बीच प्रस्तावित मुक्त व्यापार समझौते पर भी गंभीर चर्चा हुई। दोनों पक्षों ने इस समझौते को जल्द अंतिम रूप देने के लिए सकारात्मक माहौल तैयार करने पर जोर दिया। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह समझौता जल्द लागू होता है तो भारतीय उद्योगों को यूरोपीय बाजारों में अधिक अवसर मिलेंगे जबकि यूरोपीय निवेशकों के लिए भी भारत में निवेश के नए रास्ते खुलेंगे। इससे व्यापारिक गतिविधियों के साथ रोजगार सृजन और तकनीकी सहयोग को भी बढ़ावा मिलेगा।

    पीयूष गोयल की यह यात्रा केवल स्पेन तक सीमित नहीं है। 13 से 17 जुलाई तक चलने वाले पांच दिवसीय यूरोप दौरे के दौरान वह बेल्जियम और फिनलैंड भी जाएंगे जहां व्यापार निवेश तकनीक नवाचार और सतत विकास से जुड़े मुद्दों पर उच्चस्तरीय बैठकें होंगी। इस दौरे का उद्देश्य यूरोपीय देशों के साथ भारत की आर्थिक भागीदारी को और मजबूत बनाना तथा वैश्विक निवेशकों को भारत की विकास यात्रा से जोड़ना है।

    स्पेन प्रवास के दौरान पीयूष गोयल की मुलाकात उद्योग एवं पर्यटन मंत्री जोर्डी हेरेउ बोहेर और विदेश यूरोपीय संघ एवं सहयोग मंत्री जोस मैनुअल अल्बारेस बुएनो से भी प्रस्तावित है। इसके अलावा वह भारत स्पेन बिजनेस राउंडटेबल की अध्यक्षता करेंगे जिसमें स्पेन की प्रमुख कंपनियों और उद्योग संगठनों के प्रतिनिधि भाग लेंगे। इस बैठक में भारत में उपलब्ध निवेश अवसरों को प्रस्तुत किया जाएगा तथा दोनों देशों के उद्योग जगत के बीच प्रत्यक्ष कारोबारी साझेदारी को बढ़ावा देने पर विशेष ध्यान रहेगा।

    भारत और स्पेन के संबंध पिछले कुछ वर्षों में लगातार मजबूत हुए हैं। इसी वर्ष फरवरी में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और स्पेन के प्रधानमंत्री पेड्रो सांचेज़ के बीच हुई द्विपक्षीय बैठक में भी व्यापार अर्थव्यवस्था स्वास्थ्य डिजिटल प्रौद्योगिकी शिक्षा नवाचार और जलवायु परिवर्तन जैसे विषयों पर सहयोग बढ़ाने की सहमति बनी थी। उस दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने भारत और यूरोपीय संघ के संबंधों को मजबूत बनाने में स्पेन के सहयोग की सराहना भी की थी।

    विशेषज्ञों का मानना है कि भारत की तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था और यूरोप की उन्नत तकनीकी क्षमता दोनों देशों के लिए परस्पर लाभकारी अवसर पैदा कर रही हैं। यदि व्यापारिक समझौतों को समय पर अंतिम रूप दिया जाता है और निवेश प्रक्रियाओं को सरल बनाया जाता है तो भारत और स्पेन के आर्थिक संबंध नई ऊंचाइयों तक पहुंच सकते हैं। यह पहल भारत को वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में और अधिक मजबूत स्थान दिलाने के साथ यूरोप के साथ उसकी रणनीतिक आर्थिक साझेदारी को भी नई मजबूती प्रदान करेगी।

  • होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर ईरान में बढ़े मतभेद, सैन्य नेतृत्व और सरकार के अलग-अलग रुख से पश्चिम एशिया में तनाव गहराने के संकेत

    होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर ईरान में बढ़े मतभेद, सैन्य नेतृत्व और सरकार के अलग-अलग रुख से पश्चिम एशिया में तनाव गहराने के संकेत

    नई दिल्ली । पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर ईरान के भीतर नीतिगत मतभेदों की चर्चाओं ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय का ध्यान अपनी ओर खींचा है। विश्लेषकों का मानना है कि एक ओर ईरान के सैन्य प्रतिष्ठान का रुख अधिक सख्त दिखाई दे रहा है, जबकि दूसरी ओर राजनीतिक नेतृत्व कूटनीतिक प्रयासों के जरिए तनाव कम करने की दिशा में आगे बढ़ने की वकालत कर रहा है। इन अलग-अलग संकेतों के कारण क्षेत्र की सुरक्षा स्थिति और वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति को लेकर चिंताएं बढ़ गई हैं।

    होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापारिक मार्गों में गिना जाता है। खाड़ी क्षेत्र से निकलने वाले कच्चे तेल और प्राकृतिक गैस का बड़ा हिस्सा इसी मार्ग से होकर अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुंचता है। ऐसे में इस जलमार्ग से जुड़ी किसी भी संभावित बाधा का प्रभाव केवल क्षेत्रीय देशों तक सीमित नहीं रहता, बल्कि एशिया, यूरोप और अन्य प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं पर भी पड़ सकता है।

    राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार ईरान के भीतर सुरक्षा और विदेश नीति को लेकर अलग-अलग दृष्टिकोण देखने को मिल रहे हैं। एक पक्ष का मानना है कि होर्मुज जलडमरूमध्य पर रणनीतिक नियंत्रण बनाए रखना देश की सुरक्षा और क्षेत्रीय प्रभाव के लिए महत्वपूर्ण है। वहीं दूसरा पक्ष क्षेत्रीय तनाव को कम करने, संवाद को प्राथमिकता देने और कूटनीतिक समाधान तलाशने की आवश्यकता पर जोर देता है ताकि व्यापक संघर्ष की आशंका को टाला जा सके।

    विशेषज्ञों का कहना है कि यदि क्षेत्र में तनाव और बढ़ता है तथा समुद्री व्यापार प्रभावित होता है, तो वैश्विक ऊर्जा बाजार में अस्थिरता बढ़ सकती है। कच्चे तेल की आपूर्ति बाधित होने की स्थिति में अंतरराष्ट्रीय कीमतों में तेजी आने की संभावना रहती है। इसका असर ऊर्जा आयात पर निर्भर देशों की अर्थव्यवस्था, परिवहन लागत और महंगाई पर भी पड़ सकता है।

    अमेरिका पहले भी स्पष्ट कर चुका है कि होर्मुज जलडमरूमध्य वैश्विक समुद्री व्यापार के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण मार्ग है और इसके निर्बाध संचालन को बनाए रखना आवश्यक माना जाता है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी अधिकांश देश इस समुद्री मार्ग में किसी प्रकार की बाधा से बचने और क्षेत्र में स्थिरता बनाए रखने की आवश्यकता पर बल देते रहे हैं।

    भारत जैसे देशों के लिए भी यह जलमार्ग विशेष महत्व रखता है क्योंकि देश अपनी ऊर्जा आवश्यकताओं का बड़ा हिस्सा आयात के माध्यम से पूरा करता है। पश्चिम एशिया से आने वाला पर्याप्त मात्रा में कच्चा तेल और गैस इसी समुद्री मार्ग से भारत सहित अन्य एशियाई देशों तक पहुंचता है। ऐसे में यदि किसी कारण से आपूर्ति प्रभावित होती है तो इसका असर घरेलू ईंधन कीमतों, उद्योगों और आर्थिक गतिविधियों पर भी देखने को मिल सकता है।

    अंतरराष्ट्रीय मामलों के जानकारों का मानना है कि मौजूदा परिस्थितियों में सभी पक्षों के लिए संवाद और कूटनीतिक प्रयास सबसे प्रभावी विकल्प हो सकते हैं। यदि बातचीत के जरिए तनाव कम करने की दिशा में प्रगति होती है तो क्षेत्रीय स्थिरता बनाए रखने में मदद मिल सकती है। वहीं किसी भी प्रकार का सैन्य टकराव या समुद्री मार्ग में व्यवधान वैश्विक व्यापार और ऊर्जा सुरक्षा के लिए नई चुनौतियां खड़ी कर सकता है।

  • ओमान तट पर जहाज हमले से बढ़ी वैश्विक चिंता, भारत ने वाणिज्यिक पोतों पर हमले तत्काल रोकने की मांग की, लापता भारतीय की तलाश जारी

    ओमान तट पर जहाज हमले से बढ़ी वैश्विक चिंता, भारत ने वाणिज्यिक पोतों पर हमले तत्काल रोकने की मांग की, लापता भारतीय की तलाश जारी

    नई दिल्ली । ओमान तट के निकट वाणिज्यिक जहाज GFS Galaxy पर हुए हमले के बाद भारत ने समुद्री सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंता व्यक्त की है। विदेश मंत्रालय ने स्पष्ट कहा है कि नागरिक बुनियादी ढांचे और वाणिज्यिक जहाजों को निशाना बनाने की घटनाएं किसी भी परिस्थिति में स्वीकार्य नहीं हैं और इन्हें तत्काल रोका जाना चाहिए। मंत्रालय ने यह भी बताया कि जहाज पर मौजूद 11 भारतीय नागरिकों में से 10 को सुरक्षित निकाल लिया गया है, जबकि एक भारतीय नागरिक अभी भी लापता है, जिसकी तलाश लगातार जारी है।

    विदेश मंत्रालय के अनुसार, ओमान स्थित भारतीय दूतावास स्थानीय प्रशासन और बचाव एजेंसियों के साथ लगातार संपर्क में है। लापता भारतीय नागरिक की खोज के लिए चल रहे अभियान पर भारत लगातार नजर बनाए हुए है। सरकार ने कहा है कि प्रभावित भारतीयों की सुरक्षा और आवश्यक सहायता सुनिश्चित करने के लिए सभी आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं।

    भारत ने इस घटना को केवल एक मानवीय संकट ही नहीं बल्कि अंतरराष्ट्रीय समुद्री सुरक्षा के लिए भी गंभीर चुनौती बताया है। मंत्रालय का कहना है कि हाल के समय में वाणिज्यिक जहाजों पर बढ़ते हमले वैश्विक व्यापार और समुद्री परिवहन के लिए चिंता का विषय बनते जा रहे हैं। ऐसे हमलों से अंतरराष्ट्रीय व्यापार मार्गों की सुरक्षा प्रभावित होती है और दुनिया भर की आपूर्ति श्रृंखला पर भी इसका सीधा असर पड़ सकता है।

    भारत ने एक बार फिर सभी पक्षों से संयम बरतने और तनाव कम करने के लिए संवाद का रास्ता अपनाने की अपील की है। विदेश मंत्रालय ने दोहराया कि किसी भी विवाद का समाधान सैन्य कार्रवाई के बजाय बातचीत और कूटनीतिक प्रयासों के माध्यम से किया जाना चाहिए। भारत का मानना है कि समुद्री मार्गों की सुरक्षा सुनिश्चित करना वैश्विक समुदाय की साझा जिम्मेदारी है।

    घटना के बाद क्षेत्रीय तनाव भी बढ़ गया है। अमेरिका ने इस हमले के लिए ईरान को जिम्मेदार ठहराया है, जबकि ईरान की ओर से अलग पक्ष रखा गया है। इन आरोप-प्रत्यारोपों के बीच पश्चिम एशिया में तनाव और गहरा गया है। इस घटनाक्रम के कारण रणनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण स्ट्रेट ऑफ होर्मुज एक बार फिर वैश्विक चर्चा का केंद्र बन गया है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इस क्षेत्र में अस्थिरता लंबे समय तक बनी रहती है तो इसका असर केवल समुद्री परिवहन तक सीमित नहीं रहेगा। कच्चे तेल की आपूर्ति, माल ढुलाई की लागत और वैश्विक व्यापार पर भी इसका व्यापक प्रभाव पड़ सकता है। भारत जैसे ऊर्जा आयात पर निर्भर देशों के लिए ऐसी स्थिति महंगाई और आर्थिक दबाव बढ़ाने वाली साबित हो सकती है।

    विदेश मंत्रालय ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से भी अपील की है कि वाणिज्यिक जहाजों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करने के लिए प्रभावी कदम उठाए जाएं। भारत का कहना है कि वैश्विक व्यापार की निरंतरता के लिए अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्गों का सुरक्षित और निर्बाध रहना अत्यंत आवश्यक है। फिलहाल सरकार की प्राथमिकता लापता भारतीय नागरिक का पता लगाना, सभी प्रभावित भारतीयों की सुरक्षा सुनिश्चित करना और क्षेत्र में विकसित हो रही स्थिति पर लगातार नजर बनाए रखना है।

  • रूस से कच्चे तेल की खरीद में भारत ने बढ़ाई रफ्तार, जून में 34 प्रतिशत उछाल के साथ ऊर्जा आयात रणनीति हुई और मजबूत

    रूस से कच्चे तेल की खरीद में भारत ने बढ़ाई रफ्तार, जून में 34 प्रतिशत उछाल के साथ ऊर्जा आयात रणनीति हुई और मजबूत

    नई दिल्ली । भारत ने जून 2026 में रूस से कच्चे तेल की खरीद में उल्लेखनीय बढ़ोतरी दर्ज करते हुए अपनी ऊर्जा आयात रणनीति को और मजबूत किया है। वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में नरमी के बीच भारत ने रूस से 4.5 अरब यूरो मूल्य का कच्चा तेल आयात किया, जो मई के मुकाबले 34 प्रतिशत अधिक है। इस बढ़ोतरी के साथ भारत चीन के बाद रूस के हाइड्रोकार्बन का दूसरा सबसे बड़ा खरीदार बना हुआ है। विशेषज्ञों का मानना है कि प्रतिस्पर्धी कीमतों पर उपलब्ध रूसी तेल भारत की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने और आयात लागत को नियंत्रित रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।

    ऊर्जा और स्वच्छ वायु पर शोध करने वाली संस्था की रिपोर्ट के अनुसार जून महीने में भारत के कुल रूसी जीवाश्म ईंधन आयात का सबसे बड़ा हिस्सा कच्चे तेल का रहा। कुल 5.5 अरब यूरो के रूसी हाइड्रोकार्बन आयात में 83 प्रतिशत हिस्सेदारी केवल कच्चे तेल की रही, जिसकी कीमत 4.5 अरब यूरो आंकी गई। इससे स्पष्ट है कि भारत की ऊर्जा जरूरतों में रूसी कच्चे तेल का महत्व लगातार बना हुआ है।

    रिपोर्ट के अनुसार भारत के कुल कच्चे तेल आयात में भी मासिक आधार पर 5.4 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। इस दौरान देश की कई प्रमुख रिफाइनरियों ने रूस से तेल खरीद में उल्लेखनीय बढ़ोतरी की। इससे संकेत मिलता है कि भारतीय रिफाइनिंग कंपनियां लागत और उपलब्धता को ध्यान में रखते हुए रूसी आपूर्ति का अधिक उपयोग कर रही हैं।

    देश की सबसे बड़ी रिफाइनिंग इकाइयों में इस दौरान रूसी तेल की आपूर्ति में तेज वृद्धि देखने को मिली। जामनगर रिफाइनरी में रूस से आने वाले कच्चे तेल का आयात पिछले महीने की तुलना में 150 प्रतिशत बढ़ गया। वहीं पारादीप रिफाइनरी में यह वृद्धि 126 प्रतिशत रही। कोच्चि रिफाइनरी ने भी अपनी खरीद में 83 प्रतिशत का इजाफा किया, जबकि वाडिनार रिफाइनरी में रूसी तेल की आपूर्ति 45 प्रतिशत बढ़ी। इन आंकड़ों से स्पष्ट होता है कि प्रमुख रिफाइनरियां रूसी कच्चे तेल पर पहले से अधिक भरोसा जता रही हैं।

    भारत की बढ़ी हुई मांग का असर रूस के कुल कच्चे तेल निर्यात पर भी दिखाई दिया। जून के दौरान रूस के कच्चे तेल के निर्यात की मात्रा में 14 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। हालांकि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें अपेक्षाकृत कम रहने के कारण रूस की निर्यात आय में अपेक्षित बढ़ोतरी नहीं हो सकी। कच्चे तेल के निर्यात से होने वाली दैनिक आय घटकर 348 मिलियन यूरो रह गई, जिससे यह स्पष्ट हुआ कि अधिक मात्रा में निर्यात होने के बावजूद कम कीमतों ने राजस्व पर दबाव बनाए रखा।

    रूस के कुल जीवाश्म ईंधन निर्यात से होने वाली आय में भी हल्की गिरावट दर्ज की गई। रिपोर्ट के अनुसार निर्यात की मात्रा बढ़ने के बावजूद कुल दैनिक आय एक प्रतिशत घटकर 734 मिलियन यूरो रह गई। यह स्थिति वैश्विक ऊर्जा बाजार में कीमतों के उतार-चढ़ाव और मांग के संतुलन को दर्शाती है।

    रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि कच्चे तेल के अलावा भारत ने रूस से 488 मिलियन यूरो मूल्य के तेल उत्पाद और 444 मिलियन यूरो का कोयला भी आयात किया। इससे स्पष्ट होता है कि दोनों देशों के बीच ऊर्जा क्षेत्र में व्यापार लगातार मजबूत बना हुआ है। ऊर्जा विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले महीनों में यदि वैश्विक बाजार में कीमतें अनुकूल रहती हैं और आपूर्ति सामान्य बनी रहती है, तो भारत अपनी ऊर्जा सुरक्षा और लागत प्रबंधन को ध्यान में रखते हुए रूस से कच्चे तेल की खरीद को प्राथमिकता देता रह सकता है।

  • UFO पर फिर गरमाई दुनिया पेंटागन ने खोले 40 नए रिकॉर्ड लेकिन एलियन के सबूत पर क्या बोला अमेरिका

    UFO पर फिर गरमाई दुनिया पेंटागन ने खोले 40 नए रिकॉर्ड लेकिन एलियन के सबूत पर क्या बोला अमेरिका

    नई दिल्ली । क्या ब्रह्मांड में इंसानों के अलावा भी कोई बुद्धिमान जीवन मौजूद है यह सवाल दशकों से वैज्ञानिकों और आम लोगों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है। इसी बहस को एक बार फिर नई हवा तब मिली जब अमेरिकी रक्षा विभाग पेंटागन ने रहस्यमयी उड़ने वाली वस्तुओं यानी यूएफओ से जुड़े 40 नए सरकारी रिकॉर्ड सार्वजनिक कर दिए। इन दस्तावेजों में वीडियो तस्वीरें ऑडियो रिकॉर्डिंग और जांच रिपोर्ट शामिल हैं जिन्हें अमेरिका की कई प्रमुख सरकारी एजेंसियों ने वर्षों के दौरान तैयार किया था। इन रिकॉर्ड के सामने आने के बाद सोशल मीडिया से लेकर वैज्ञानिक समुदाय तक फिर से यह सवाल गूंजने लगा कि क्या सच में एलियन मौजूद हैं या इन घटनाओं के पीछे कोई और रहस्य छिपा है।

    पेंटागन की ओर से जारी रिकॉर्ड में कुल 14 दस्तावेज 19 वीडियो 4 ऑडियो रिकॉर्डिंग और तीन तस्वीरें शामिल हैं। यह सामग्री रक्षा विभाग नासा सीआईए एफबीआई और ऊर्जा विभाग जैसी एजेंसियों के पास सुरक्षित थी। इन्हें सार्वजनिक करने का फैसला सरकारी पारदर्शिता बढ़ाने की नीति के तहत लिया गया। अधिकांश रिकॉर्ड वर्ष 2010 के बाद के हैं और इनमें पश्चिमी प्रशांत महासागर अटलांटिक महासागर तथा मध्य पूर्व के ऊपर सैन्य विमानों द्वारा रिकॉर्ड की गई कई रहस्यमयी घटनाओं का उल्लेख किया गया है।

    हालांकि इन दस्तावेजों के सार्वजनिक होने के साथ सबसे महत्वपूर्ण बात यह रही कि पेंटागन ने साफ तौर पर कहा है कि अब तक किसी भी रिकॉर्ड में एलियन या पृथ्वी से बाहर मौजूद किसी सभ्यता का प्रत्यक्ष प्रमाण नहीं मिला है। विभाग के अनुसार कई घटनाएं अब भी जांच के दायरे में हैं लेकिन उपलब्ध जानकारी के आधार पर उन्हें एलियन गतिविधि नहीं कहा जा सकता।

    सबसे ज्यादा चर्चा वर्ष 2019 की एक घटना की हो रही है। एक अनुभवी अमेरिकी सैन्य पायलट ने उड़ान के दौरान एक बेहद तेज गति से चलने वाली रहस्यमयी वस्तु देखने का दावा किया। पायलट के अनुसार उसने अपने लगभग तीन दशक लंबे सैन्य करियर में कभी भी इतनी असामान्य उड़ान क्षमता वाली वस्तु नहीं देखी थी। उसने लगभग 10 से 15 सेकंड तक उस वस्तु का पीछा किया और वीडियो भी रिकॉर्ड किया लेकिन जैसे ही कैमरे का जूम बढ़ाया गया वह वस्तु इतनी तेजी से आगे निकल गई कि कैमरे की सीमा से बाहर हो गई। बाद में वीडियो की समीक्षा करने पर वह आयताकार आकार की दिखाई दी और विमान में मौजूद अन्य अनुभवी अधिकारियों ने भी उसकी पहचान नहीं कर पाई।

    दूसरी चर्चित घटना वर्ष 2015 की है जब टेक्सास स्थित पैनटेक्स परमाणु हथियार संयंत्र के ऊपर एक अज्ञात उड़ती वस्तु देखे जाने का दावा किया गया। सुरक्षा कर्मियों ने तुरंत पूरे परिसर को हाई अलर्ट पर डाल दिया और उस वस्तु पर लगातार नजर रखी। रिपोर्ट के अनुसार वह बिना किसी आवाज के हवा में मौजूद थी और उसमें किसी इंजन या सामान्य उड़ान प्रणाली के संकेत भी दिखाई नहीं दिए। इस कारण यह मामला राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ी संवेदनशील घटनाओं में शामिल किया गया था।

    विशेषज्ञों का मानना है कि यूएफओ का अर्थ हमेशा एलियन नहीं होता। कई बार अत्याधुनिक सैन्य तकनीक मौसम संबंधी दुर्लभ घटनाएं कैमरे की तकनीकी सीमाएं या प्राकृतिक प्रकाश प्रभाव भी ऐसी रहस्यमयी तस्वीरों और वीडियो की वजह बन सकते हैं। इसलिए किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले वैज्ञानिक जांच और ठोस प्रमाण बेहद जरूरी हैं।

    पेंटागन के नए दस्तावेजों ने दुनिया भर में जिज्ञासा जरूर बढ़ा दी है लेकिन फिलहाल यह कहना जल्दबाजी होगी कि इंसानों के अलावा किसी और सभ्यता के अस्तित्व का प्रमाण मिल गया है। फिलहाल रहस्य बरकरार है और विज्ञान इस सवाल का जवाब खोजने की दिशा में लगातार आगे बढ़ रहा है।

  • अंतरराष्ट्रीय कूटनीति में हड़कंप: फिलिस्तीन दौरे पर गए भारतीय मूल के अमेरिकी सांसद रो खन्ना को इजरायली क्षेत्र में 90 मिनट तक रोका

    अंतरराष्ट्रीय कूटनीति में हड़कंप: फिलिस्तीन दौरे पर गए भारतीय मूल के अमेरिकी सांसद रो खन्ना को इजरायली क्षेत्र में 90 मिनट तक रोका

    नई दिल्ली । फिलिस्तीन और इजरायल के बीच जारी तनावपूर्ण माहौल के बीच एक बेहद गंभीर अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रम सामने आया है। भारतीय मूल के प्रमुख अमेरिकी सांसद रो खन्ना ने खुलासा किया है कि फिलिस्तीन की आधिकारिक यात्रा के दौरान उन्हें और उनके साथ मौजूद अन्य अमेरिकी नागरिकों को इजरायली बस्ती के हथियारबंद तत्वों द्वारा बंदूक की नोक पर करीब 90 मिनट तक बंधक बनाकर रखा गया। कैलिफोर्निया से डेमोक्रेटिक पार्टी के दिग्गज नेता खन्ना बुधवार को दक्षिणी वेस्ट बैंक के ऐतिहासिक गांव खिरबेट जनुता के खंडहरों का निरीक्षण करने पहुंचे थे, तभी इस अप्रत्याशित संकटपूर्ण स्थिति का जन्म हुआ।

    सांसद रो खन्ना ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर इस घटना की पुष्टि करते हुए बताया कि जब वे खंडहरों का दौरा कर रहे थे, तभी अमेरिकी निर्मित एम4एस राइफलों से लैस इजरायली बस्ती के कुछ लोगों ने उन्हें और उनके पूरे प्रतिनिधिमंडल को जबरन हिरासत में ले लिया। खन्ना का आरोप है कि घटना की सूचना मिलने के बाद जब इजरायली रक्षा बल (आईडीएफ) के जवान मौके पर पहुंचे, तो उन्होंने हथियारबंद हमलावरों को रोकने के बजाय उल्टा उनका ही साथ दिया और अमेरिकी नागरिकों को आगे बढ़ने से रोके रखा। अमेरिकी डेलिगेशन के साथ मौजूद सुरक्षा अधिकारियों और इजरायली बलों के बीच इस दौरान तीखी बहस भी हुई।

    इस पूरे घटनाक्रम के दौरान ‘द न्यूयॉर्क टाइम्स’ के एक अमेरिकी फोटोग्राफर भी सांसद खन्ना के साथ मौजूद थे, जिन्होंने इस तनावपूर्ण स्थिति को करीब से देखा। अमेरिकी मीडिया से बातचीत करते हुए रो खन्ना ने अपना दर्द बयां किया और कहा कि उस असाधारण परिस्थिति में उन्होंने खुद को पूरी तरह से असहाय महसूस किया। उन्होंने कहा कि उनके पास जीवन के तमाम विशेषाधिकार और उच्च सुरक्षा कवच होने के बावजूद उन्हें इस खौफनाक दौर से गुजरना पड़ा, जिससे वहां के सामान्य नागरिकों की दैनिक सुरक्षा व्यवस्था और जमीनी हकीकत का सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है।

    घटना के तुरंत बाद अमेरिकी राजनयिकों को इसकी जानकारी दी गई, जिसके बाद वॉशिंगटन से लेकर यरूशलेम तक कूटनीतिक गलियारों में हड़कंप मच गया। अमेरिकी दूतावास और इजरायली पुलिस के उच्च अधिकारियों के बीच हुए कड़े कूटनीतिक हस्तक्षेप और लंबी बातचीत के बाद आखिरकार लगभग डेढ़ घंटे के बाद रो खन्ना और उनके सहयोगियों को सुरक्षित वहां से जाने की अनुमति दी गई। अमेरिकी विदेश मंत्रालय ने इस घटना को बेहद गंभीरता से लिया है और इसे अमेरिकी जनप्रतिनिधि के साथ एक अक्षम्य दुर्व्यवहार माना जा रहा है।

    इस घटना के बाद वैश्विक स्तर पर इजरायली बस्तियों में सक्रिय हथियारबंद गुटों की भूमिका और वहां की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े होने लगे हैं। रो खन्ना ने अपने बयान में जोर देते हुए कहा कि यदि अमेरिकी संसद के किसी शक्तिशाली सदस्य को इस प्रकार 90 मिनट तक बंधक बनाकर बेबस किया जा सकता है, तो कब्जे के साये में रह रहे आम फिलिस्तीनी नागरिकों को हर दिन न जाने किस स्तर के उत्पीड़न और असुरक्षा का सामना करना पड़ता होगा। इस घटना ने पश्चिम एशिया के इस संवेदनशील क्षेत्र में सुरक्षा और मानवाधिकारों की स्थिति को एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय बहस के केंद्र में ला खड़ा किया है।