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  • PoK में बड़े विरोध प्रदर्शन से पहले पाकिस्तान अलर्ट, 4000 जवान और रेंजर्स की 7 विंग तैनात करने की तैयारी

    PoK में बड़े विरोध प्रदर्शन से पहले पाकिस्तान अलर्ट, 4000 जवान और रेंजर्स की 7 विंग तैनात करने की तैयारी


    नई दिल्ली। पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) में 15 जुलाई को प्रस्तावित बड़े विरोध प्रदर्शन और लॉन्ग मार्च से पहले पाकिस्तान समर्थित स्थानीय प्रशासन की चिंता बढ़ गई है। संभावित अशांति को नियंत्रित करने के लिए प्रशासन ने केंद्र सरकार से अतिरिक्त सुरक्षा बलों की मांग की है।

    सीएनएन-न्यूज18 की रिपोर्ट के अनुसार, एक गोपनीय आधिकारिक दस्तावेज में PoK के गृह विभाग ने इस्लामाबाद से 4,000 अतिरिक्त जवानों और पाकिस्तान रेंजर्स की सात विंग्स की तत्काल तैनाती की मांग की है। यह मांग क्षेत्र में बढ़ते विरोध प्रदर्शनों और तनावपूर्ण हालात को देखते हुए की गई है।

    यह कदम संयुक्त अवामी एक्शन कमेटी (JAAC) के प्रमुख नेता शौकत नवाज मीर और सैकड़ों अन्य कार्यकर्ताओं की गिरफ्तारी के बाद बढ़े जन आक्रोश के बीच उठाया गया है।

    गोपनीय पत्र में सुरक्षा बलों की मांग
    रिपोर्ट के मुताबिक, PoK गृह विभाग की ओर से पाकिस्तान के गृह मंत्रालय के सचिव को 8 जुलाई को भेजे गए पत्र को ‘अति आवश्यक’ और ‘गोपनीय’ बताया गया है। इसमें कहा गया है कि JAAC की ओर से आयोजित लॉन्ग मार्च, विरोध प्रदर्शन और धरनों के कारण क्षेत्र में सुरक्षा स्थिति गंभीर हो गई है।

    प्रशासन का कहना है कि मौजूदा सुरक्षा व्यवस्था इस स्थिति से निपटने के लिए पर्याप्त नहीं है। अतिरिक्त बलों की तैनाती का उद्देश्य प्रदर्शनों के प्रभाव को नियंत्रित करना, प्रशासनिक व्यवस्था बनाए रखना और पहले से तैनात सुरक्षा कर्मियों पर दबाव कम करना बताया गया है।

    आधे जवान हथियारों से लैस, आधे को मिलेगा दंगा-रोधी उपकरण
    गोपनीय दस्तावेज के अनुसार, मांगी गई अतिरिक्त फोर्स PoK में पहले से मौजूद सुरक्षा बलों के अतिरिक्त होगी। प्रशासन ने मांग की है कि आने वाले सुरक्षा कर्मियों में 50 प्रतिशत जवान आधुनिक हथियारों और पर्याप्त गोला-बारूद से लैस हों, जबकि बाकी 50 प्रतिशत जवानों को दंगा-रोधी उपकरण उपलब्ध कराए जाएं।

    दस्तावेज में यह भी कहा गया है कि यदि दंगा नियंत्रण उपकरणों की कमी हो तो तैनाती से पहले पाकिस्तान के केंद्रीय स्टॉक से इसकी व्यवस्था की जाए।

    JAAC पर लगाए गए हिंसा के आरोप
    PoK प्रशासन ने मौजूदा तनाव के लिए संयुक्त अवामी एक्शन कमेटी को जिम्मेदार ठहराया है। प्रशासन का आरोप है कि पुंछ और रावलकोट में लगातार धरने और पड़ोसी जिलों में रैलियां आयोजित कर लोगों को उकसाया जा रहा है।

    प्रशासन ने यह दावा भी किया है कि प्रतिबंधित संगठनों से जुड़े सशस्त्र लोग मुजफ्फराबाद और मीरपुर डिवीजनों में माहौल बिगाड़ने की कोशिश कर रहे हैं। रिपोर्ट के अनुसार, प्रदर्शनकारियों पर सुरक्षा बलों और नागरिकों को निशाना बनाने तथा आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति करने वाले ट्रकों को नुकसान पहुंचाने के आरोप लगाए गए हैं।

    PoK प्रशासन का दावा है कि हिंसा में अब तक चार सुरक्षाकर्मियों की मौत हुई है और 174 अन्य घायल हुए हैं। हालांकि, इन दावों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो सकी है।

    15 जुलाई के मार्च से पहले बढ़ी चिंता
    15 जुलाई के प्रस्तावित बड़े मार्च से पहले इतनी बड़ी संख्या में सुरक्षा बलों की मांग को लेकर क्षेत्र में चिंता बढ़ गई है। मानवाधिकार कार्यकर्ताओं ने आशंका जताई है कि भारी सुरक्षा तैनाती के जरिए सरकार प्रदर्शनकारियों पर सख्त कार्रवाई कर सकती है।

    JAAC पिछले कुछ समय से PoK में जनता की मांगों और अधिकारों को लेकर सक्रिय संगठन के रूप में सामने आई है। समिति का आरोप है कि पाकिस्तान सरकार और स्थानीय प्रशासन बिजली की ऊंची कीमतों, आटे की कमी और बुनियादी अधिकारों से जुड़े मुद्दों का समाधान करने में विफल रहे हैं। संगठन का कहना है कि इन मांगों को लेकर शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे लोगों पर बल प्रयोग किया जा रहा है।

  • इजरायल के प्रधानमंत्री नेतन्याहू के बेटे ने बदला नाम, वजह को लेकर उठे सवाल

    इजरायल के प्रधानमंत्री नेतन्याहू के बेटे ने बदला नाम, वजह को लेकर उठे सवाल


    नई दिल्ली। इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के बड़े बेटे यायर नेतन्याहू को लेकर नया विवाद सामने आया है। रिपोर्ट्स के अनुसार, यायर नेतन्याहू ने अपना नाम बदलकर ‘योनातन हुन’ कर लिया है। लीक हुए डेटा के आधार पर दावा किया जा रहा है कि यह बदलाव पिछले दो वर्षों के दौरान किया गया।

    जानकारी के मुताबिक, 2024 में टैक्स फाइलिंग के दौरान उन्होंने अपने जन्म नाम यायर नेतन्याहू का ही इस्तेमाल किया था, जबकि 2026 में टैक्स संबंधी दस्तावेजों में उनका नाम ‘योनातन हुन’ दर्ज किया गया। हालांकि, नाम बदलने के पीछे की वास्तविक वजह को लेकर अभी तक कोई आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है।

    इजरायली मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, नेतन्याहू परिवार पहले से ही टैक्स और भ्रष्टाचार से जुड़े मामलों को लेकर चर्चा में रहा है। ऐसे में यायर नेतन्याहू के नाम परिवर्तन को लेकर भी कई तरह की अटकलें लगाई जा रही हैं। हालांकि, अभी यह स्पष्ट नहीं है कि उन्होंने यह बदलाव किस उद्देश्य से किया।

    रिपोर्ट्स के मुताबिक, नाम में यह परिवर्तन उनके मौजूदा नेशनल आइडेंटिफिकेशन नंबर के तहत किए गए रेगुलेटरी अपडेट का हिस्सा है। दस्तावेजों में उनका रेसिडेंशियल एड्रेस ‘बाल्फोर 0’ दर्ज किया गया है, जिसे इजरायल के प्रधानमंत्री आवास से जोड़कर देखा जा रहा है।

    नाम बदलने के उद्देश्य को लेकर बहस तेज
    इजरायल में प्रधानमंत्री के बेटे के नाम बदलने के फैसले को लेकर चर्चा शुरू हो गई है। कुछ लोग इसे टैक्स से जोड़कर देख रहे हैं, जबकि कुछ इसे सैन्य सेवा से संबंधित विवादों के संदर्भ में देख रहे हैं।

    दरअसल, 2023 से योनातन हुन के फ्लोरिडा में रहने को लेकर भी आलोचना होती रही है। युद्ध के दौरान जब इजरायल ने रिजर्व सैनिकों को बुलाया, तब विदेश में रहने को लेकर कई लोगों ने सवाल उठाए थे। कुछ आलोचकों का कहना है कि नाम बदलने का संबंध युद्ध से बचने की कोशिश से हो सकता है, जबकि कुछ इसे टैक्स संबंधी कारणों से जोड़ रहे हैं।

    ‘योनातन हुन’ नाम के पीछे ऐतिहासिक कनेक्शन
    इजरायली मीडिया के अनुसार, ‘योनातन’ नाम का संबंध नेतन्याहू परिवार के एक ऐतिहासिक व्यक्ति से है। यह नाम बेंजामिन नेतन्याहू के भाई योनी नेतन्याहू को श्रद्धांजलि के तौर पर देखा जा रहा है, जो 1976 में युगांडा में एक मिशन के दौरान मारे गए थे। उन्हें इजरायल में एक राष्ट्रीय नायक के रूप में देखा जाता है।

    वहीं, ‘हुन’ उपनाम को नेतन्याहू परिवार की पुरानी पारिवारिक जड़ों से जोड़कर देखा जा रहा है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, परिवार के बुजुर्ग बेन आर्टजी जब इजरायल आए थे, तब उनका नाम सैमुअल हुन था और बाद में उन्होंने अपना नाम बदला था। इसी पारिवारिक इतिहास से प्रेरित होकर यायर ने अपने नए नाम में ‘हुन’ शब्द शामिल किया है।

    हालांकि, इससे पहले भी यायर नेतन्याहू अपने एक पॉडकास्ट में ‘यायर हुन’ नाम का इस्तेमाल कर चुके हैं, लेकिन सरकारी दस्तावेजों में शामिल होने के बाद यह नाम आधिकारिक रूप से दर्ज हो गया है। फिलहाल प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू, उनके बेटे यायर नेतन्याहू या प्रधानमंत्री कार्यालय की ओर से नाम बदलने के कारणों को लेकर कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है।

  • कनाडा के टोरंटो में स्ट्रीट फेस्टिवल के दौरान फायरिंग, 2 की मौत, 3 घायल, हमलावर की तलाश जारी

    कनाडा के टोरंटो में स्ट्रीट फेस्टिवल के दौरान फायरिंग, 2 की मौत, 3 घायल, हमलावर की तलाश जारी


    नई दिल्ली। कनाडा के टोरंटो शहर में आयोजित वार्षिक स्ट्रीट फेस्टिवल के दौरान शनिवार शाम हुई अंधाधुंध गोलीबारी में दो लोगों की मौत हो गई, जबकि तीन अन्य गंभीर रूप से घायल हो गए। घटना के बाद पूरे इलाके में अफरा-तफरी मच गई और पुलिस ने बड़े पैमाने पर सर्च ऑपरेशन शुरू कर दिया है।

    टोरंटो पुलिस सर्विस के अनुसार, यह घटना शनिवार रात करीब 8 बजे मिडटाउन टोरंटो स्थित सेंट क्लेयर एवेन्यू वेस्ट और अर्लिंगटन एवेन्यू के पास हुई। उस समय वहां सालाना लैटिन सांस्कृतिक उत्सव ‘साल्सा ऑन सेंट क्लेयर’ आयोजित किया जा रहा था। गोलीबारी शुरू होते ही कार्यक्रम स्थल पर मौजूद लोगों में भगदड़ मच गई।

    सूचना मिलते ही पुलिस और आपातकालीन सेवाओं की टीमें मौके पर पहुंचीं। घटनास्थल पर पांच लोग गोली लगने से घायल मिले, जिनमें से दो को मृत घोषित कर दिया गया। बाकी तीन घायलों को तत्काल अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उनका उपचार जारी है।

    ‘एक्टिव शूटर’ अलर्ट जारी
    प्रारंभिक जांच के आधार पर टोरंटो पुलिस ने इस घटना को ‘एक्टिव शूटर’ मामला बताया है। सुरक्षा के मद्देनजर पूरे क्षेत्र की घेराबंदी कर दी गई है और संदिग्ध की तलाश के लिए व्यापक अभियान चलाया जा रहा है। पुलिस ने लोगों से अपील की है कि वे फिलहाल इस इलाके से दूर रहें।

    हमले की वजह अब भी स्पष्ट नहीं
    फिलहाल पुलिस ने गोलीबारी के पीछे की वजह या हमलावर के मकसद को लेकर कोई आधिकारिक जानकारी जारी नहीं की है। अब तक किसी संदिग्ध की गिरफ्तारी की पुष्टि भी नहीं हुई है। जांच टीम चश्मदीदों से पूछताछ कर रही है और आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगालकर हमलावर की पहचान करने का प्रयास कर रही है।

  • अमेरिका से लाइसेंस मिलना बड़ी उपलब्धि, लेकिन यूक्रेन के लिए पैट्रियट मिसाइल उत्पादन की राह अभी भी लंबी और चुनौतीपूर्ण

    अमेरिका से लाइसेंस मिलना बड़ी उपलब्धि, लेकिन यूक्रेन के लिए पैट्रियट मिसाइल उत्पादन की राह अभी भी लंबी और चुनौतीपूर्ण

    नई दिल्ली । रूस और यूक्रेन के बीच जारी युद्ध के दौरान अमेरिका द्वारा यूक्रेन को पैट्रियट एयर डिफेंस सिस्टम के उत्पादन का लाइसेंस देने की घोषणा को एक महत्वपूर्ण रणनीतिक कदम माना जा रहा है। इस फैसले से भविष्य में यूक्रेन की रक्षा उत्पादन क्षमता मजबूत होने की संभावना जताई जा रही है। हालांकि रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि लाइसेंस मिलना और वास्तविक रूप से अत्याधुनिक मिसाइल प्रणाली का निर्माण शुरू करना दो अलग-अलग चरण हैं। तकनीकी, औद्योगिक और सुरक्षा संबंधी कई जटिल चुनौतियों के कारण इस परियोजना को पूरी तरह लागू होने में वर्षों लग सकते हैं।

    पैट्रियट एयर डिफेंस सिस्टम दुनिया की सबसे उन्नत वायु रक्षा प्रणालियों में शामिल माना जाता है। इसमें केवल मिसाइल ही नहीं, बल्कि अत्याधुनिक रडार, कमांड एंड कंट्रोल सिस्टम, लॉन्चर और कई संवेदनशील इलेक्ट्रॉनिक उपकरण शामिल होते हैं। इसलिए किसी देश के लिए इसका संपूर्ण उत्पादन शुरू करना केवल लाइसेंस प्राप्त करने से संभव नहीं हो जाता। इसके लिए व्यापक तकनीकी ज्ञान, विशेष विनिर्माण सुविधाएं और उच्च स्तर की औद्योगिक क्षमता की आवश्यकता होती है।

    रक्षा विशेषज्ञों के अनुसार शुरुआती चरण में यूक्रेन को संभवतः मिसाइल के कुछ हिस्सों की असेंबली या बाहरी संरचना के निर्माण तक ही सीमित रखा जा सकता है। सबसे संवेदनशील तकनीक, जैसे एक्टिव रडार सीकर, गाइडेंस सिस्टम और कुछ विशेष इलेक्ट्रॉनिक मॉड्यूल, राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े होने के कारण पूरी तरह हस्तांतरित किए जाने की संभावना कम मानी जाती है। ऐसे में यूक्रेन को लंबे समय तक कई महत्वपूर्ण पुर्जों के लिए विदेशी आपूर्ति पर निर्भर रहना पड़ सकता है।

    उत्पादन क्षमता विकसित करना भी एक बड़ी चुनौती है। किसी अत्याधुनिक रक्षा प्रणाली के निर्माण के लिए विशेष मशीनें, प्रशिक्षित इंजीनियर, गुणवत्ता नियंत्रण प्रणाली और सैन्य मानकों के अनुरूप उत्पादन ढांचा तैयार करना पड़ता है। विशेषज्ञों का अनुमान है कि उत्पादन लाइन स्थापित करने, कर्मचारियों को प्रशिक्षण देने और परीक्षण प्रक्रिया पूरी करने में कम से कम डेढ़ से दो वर्ष या उससे अधिक समय लग सकता है। इसके बाद भी उत्पादन की गति धीरे-धीरे ही बढ़ेगी।

    यूक्रेन के सामने सबसे बड़ी चुनौती सुरक्षा की भी है। युद्ध के बीच यदि देश में किसी नई रक्षा उत्पादन इकाई की स्थापना होती है, तो उसके संभावित सैन्य लक्ष्य बनने की आशंका बनी रहेगी। इसलिए ऐसी फैक्ट्रियों को सुरक्षित क्षेत्रों, भूमिगत परिसरों या मजबूत सुरक्षा व्यवस्था वाले स्थानों पर स्थापित करना आवश्यक होगा। इससे परियोजना की लागत और समय दोनों बढ़ सकते हैं।

    दुनिया के कुछ अन्य देशों को भी पहले पैट्रियट प्रणाली के उत्पादन का लाइसेंस मिल चुका है, लेकिन वहां भी पूर्ण उत्पादन क्षमता विकसित करने में कई वर्ष लगे थे। इससे यह स्पष्ट होता है कि ऐसी उन्नत रक्षा तकनीक का स्थानीयकरण एक दीर्घकालिक प्रक्रिया है, जिसमें केवल तकनीकी सहयोग ही नहीं बल्कि औद्योगिक अनुभव, प्रशिक्षित मानव संसाधन और मजबूत आपूर्ति श्रृंखला भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

    विश्लेषकों का मानना है कि यह पहल यूक्रेन की तत्काल मिसाइल आवश्यकता को पूरा नहीं करेगी, लेकिन भविष्य में उसकी रक्षा आत्मनिर्भरता को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकती है। यदि यह परियोजना सफल रहती है, तो आने वाले वर्षों में यूक्रेन अपनी वायु रक्षा क्षमता बढ़ाने के साथ-साथ सहयोगी देशों पर निर्भरता भी कम कर सकेगा। हालांकि इस लक्ष्य तक पहुंचने के लिए उसे तकनीकी, औद्योगिक और सुरक्षा से जुड़ी अनेक चुनौतियों का चरणबद्ध तरीके से समाधान करना होगा।

  • प्रवासी भारतीयों को पीएम मोदी का भावनात्मक संदेश, 'जोड़ा साहिब' की 300 वर्ष पुरानी विरासत का किया उल्लेख, पटना साहिब दर्शन का दिया आग्रह

    प्रवासी भारतीयों को पीएम मोदी का भावनात्मक संदेश, 'जोड़ा साहिब' की 300 वर्ष पुरानी विरासत का किया उल्लेख, पटना साहिब दर्शन का दिया आग्रह


    नई दिल्ली ।
    न्यूजीलैंड के ऑकलैंड में भारतीय समुदाय को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारत की सांस्कृतिक विरासत, सिख परंपरा और आध्यात्मिक धरोहर का विशेष उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि भारत केवल आर्थिक विकास की दिशा में ही आगे नहीं बढ़ रहा, बल्कि अपनी ऐतिहासिक और धार्मिक विरासत के संरक्षण को भी समान महत्व दे रहा है। इसी क्रम में उन्होंने पवित्र ‘जोड़ा साहिब’ के इतिहास का उल्लेख करते हुए प्रवासी भारतीयों से आग्रह किया कि जब भी वे भारत आएं, श्री पटना साहिब जाकर उसके दर्शन अवश्य करें।

    प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में श्री गुरु ग्रंथ साहिब, चारों साहिबजादों और माता गुजरी के साहस, त्याग और बलिदान को श्रद्धापूर्वक याद किया। उन्होंने कहा कि सिख गुरुओं ने पूरी मानवता को सेवा, समानता, करुणा और साहस का संदेश दिया है। यही कारण है कि दुनिया के विभिन्न देशों में स्थित गुरुद्वारे आज भी मानव सेवा के प्रमुख केंद्र बने हुए हैं, जहां जरूरतमंदों को बिना किसी भेदभाव के भोजन, सहायता और सम्मान मिलता है।

    उन्होंने कहा कि संकट के समय भारत ने श्री गुरु ग्रंथ साहिब के पवित्र स्वरूपों को पूरे सम्मान के साथ सुरक्षित भारत लाने का कार्य किया। इसके अलावा जब श्री हरमंदिर साहिब में सेवा से जुड़े कुछ प्रशासनिक विषय सामने आए, तब सरकार ने उन्हें प्राथमिकता के आधार पर सुलझाने का प्रयास किया। उन्होंने इसे सरकार की सांस्कृतिक और धार्मिक विरासत के प्रति प्रतिबद्धता का उदाहरण बताया।

    प्रधानमंत्री ने श्री हेमकुंड साहिब का भी उल्लेख करते हुए कहा कि हिमालय की ऊंचाइयों पर स्थित इस पवित्र तीर्थ तक पहुंचना लंबे समय से श्रद्धालुओं के लिए चुनौतीपूर्ण रहा है। इसी को ध्यान में रखते हुए वहां तक रोपवे परियोजना विकसित की जा रही है, जिससे श्रद्धालुओं की यात्रा अधिक सुरक्षित और सुविधाजनक बन सके। उन्होंने कहा कि सरकार का उद्देश्य धार्मिक स्थलों तक बेहतर संपर्क और आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध कराना है।

    अपने संबोधन में प्रधानमंत्री ने ‘वीर बाल दिवस’ का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि चारों साहिबजादों और माता गुजरी के अद्वितीय बलिदान की स्मृति को सम्मान देने के लिए प्रत्येक वर्ष 26 दिसंबर को ‘वीर बाल दिवस’ मनाया जाता है। आज यह दिवस देशभर में नई पीढ़ी को साहस, राष्ट्रसेवा और मूल्यों के प्रति समर्पण की प्रेरणा दे रहा है। उन्होंने कहा कि अब देश के विभिन्न हिस्सों के बच्चे भी इस गौरवशाली इतिहास से परिचित हो रहे हैं।

    प्रधानमंत्री ने ‘जोड़ा साहिब’ से जुड़ा एक ऐतिहासिक प्रसंग साझा करते हुए बताया कि केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी के परिवार के पूर्वज श्री गुरु गोविंद सिंह जी के सेवादार थे और उनके परिवार ने लगभग 300 वर्षों तक गुरु गोविंद सिंह तथा माता साहिब कौर जी के पवित्र ‘जोड़ा साहिब’ को सुरक्षित रखा। विभाजन के समय भी इस धरोहर को सुरक्षित दिल्ली लाया गया। बाद में इसे अधिक से अधिक श्रद्धालुओं के दर्शन के लिए श्री गुरु गोविंद सिंह जी के जन्मस्थान श्री पटना साहिब में स्थापित करने का निर्णय लिया गया।

    प्रधानमंत्री ने कहा कि इस ऐतिहासिक अवसर का साक्षी बनना उनके लिए सौभाग्य की बात रही। उन्होंने प्रवासी भारतीयों से अपील की कि भारत यात्रा के दौरान वे श्री पटना साहिब अवश्य जाएं और इस पवित्र धरोहर के दर्शन कर भारतीय सांस्कृतिक विरासत से अपना जुड़ाव और मजबूत करें।

  • भूकंप से तबाह वेनेजुएला में मानवीय संकट गहराया, हजारों जानें गईं, अंतरराष्ट्रीय सहायता के सहारे पुनर्वास की चुनौती शुरू

    भूकंप से तबाह वेनेजुएला में मानवीय संकट गहराया, हजारों जानें गईं, अंतरराष्ट्रीय सहायता के सहारे पुनर्वास की चुनौती शुरू

    नई दिल्ली । वेनेजुएला में 24 जून को आए भीषण भूकंप के बाद हालात अब भी पूरी तरह सामान्य नहीं हो सके हैं। ताजा आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, इस प्राकृतिक आपदा में जान गंवाने वालों की संख्या बढ़कर 4,118 हो गई है। हजारों लोग अब भी प्रभावित हैं और सबसे ज्यादा नुकसान वाले इलाकों में राहत एवं बचाव अभियान लगातार जारी है। प्रशासन का कहना है कि प्रभावित क्षेत्रों में मलबा हटाने, लापता लोगों की तलाश और जरूरी सेवाओं को बहाल करने का कार्य प्राथमिकता के आधार पर किया जा रहा है।

    सरकारी जानकारी के अनुसार, इस आपदा में 16,740 लोग घायल हुए हैं, जबकि अब तक 6,462 लोगों को सुरक्षित बचाया जा चुका है। राहत एजेंसियां लगातार प्रभावित इलाकों में पहुंचकर लोगों को चिकित्सा सहायता, भोजन, स्वच्छ पेयजल और अन्य आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराने में जुटी हुई हैं। प्रशासन का कहना है कि दूरदराज के कई क्षेत्रों तक पहुंचने के लिए विशेष बचाव दलों की मदद ली जा रही है।

    भूकंप के कारण बड़ी संख्या में मकान क्षतिग्रस्त या पूरी तरह नष्ट हो गए हैं। इसके चलते 17,907 लोग बेघर हो चुके हैं, जबकि लगभग 86,794 परिवारों को विभिन्न प्रकार की राहत सहायता उपलब्ध कराई गई है। फिलहाल 17,266 लोग देशभर में बनाए गए 89 अस्थायी राहत शिविरों में रह रहे हैं, जहां उनके लिए भोजन, स्वास्थ्य सेवाओं और जरूरी सुविधाओं की व्यवस्था की गई है। सरकार का कहना है कि पुनर्वास की प्रक्रिया चरणबद्ध तरीके से आगे बढ़ाई जाएगी।

    राहत एवं बचाव कार्य को तेज करने के लिए पूरे देश में बड़े पैमाने पर संसाधन लगाए गए हैं। हजारों सरकारी कर्मचारी, स्वयंसेवक और अंतरराष्ट्रीय बचाव दल प्रभावित क्षेत्रों में लगातार काम कर रहे हैं। अधिकारियों के अनुसार, देशभर में 30,000 से अधिक कर्मियों, लगभग 29,843 स्वयंसेवकों और 3,454 अंतरराष्ट्रीय बचावकर्मियों की सहायता से अभियान संचालित किया जा रहा है। इसके साथ ही भूकंप के बाद अब तक 1,171 से अधिक झटके दर्ज किए जा चुके हैं, जिससे कई इलाकों में लोगों के बीच चिंता और सतर्कता बनी हुई है।

    इस बीच कार्यवाहक राष्ट्रपति डेल्सी रोड्रिगेज ने आपदा के बाद विभिन्न देशों से मिली मानवीय सहायता के लिए आभार व्यक्त किया है। उन्होंने राजधानी काराकास में राहत सामग्री संग्रह केंद्र का निरीक्षण किया, जहां दो हजार टन से अधिक अंतरराष्ट्रीय सहायता सामग्री को प्रभावित लोगों तक पहुंचाने के लिए व्यवस्थित किया जा रहा है। सरकार का कहना है कि सभी सहयोगी देशों की सहायता का पारदर्शी तरीके से उपयोग सुनिश्चित किया जाएगा ताकि जरूरतमंद लोगों तक समय पर राहत पहुंच सके।

    सरकार ने कहा है कि इस कठिन समय में अंतरराष्ट्रीय समुदाय के सहयोग ने राहत कार्यों को मजबूती प्रदान की है। प्रशासन का ध्यान अब केवल तत्काल राहत तक सीमित नहीं है, बल्कि प्रभावित क्षेत्रों के पुनर्निर्माण, बुनियादी ढांचे की बहाली और विस्थापित परिवारों के स्थायी पुनर्वास पर भी केंद्रित है। अधिकारियों का मानना है कि पुनर्निर्माण की प्रक्रिया लंबी होगी, लेकिन राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय सहयोग से प्रभावित क्षेत्रों को फिर से सामान्य स्थिति में लाने का प्रयास जारी रहेगा।

    भूकंप में जान गंवाने वाले लोगों की स्मृति में सरकार पहले ही सात दिन के राष्ट्रीय शोक की घोषणा कर चुकी है। प्रशासन ने पीड़ित परिवारों के प्रति संवेदना व्यक्त करते हुए भरोसा दिलाया है कि राहत, पुनर्वास और पुनर्निर्माण का कार्य पूरी गंभीरता के साथ जारी रहेगा, ताकि प्रभावित लोगों को जल्द से जल्द सामान्य जीवन की ओर लौटने में सहायता मिल सके।

  • न्यूजीलैंड में पीएम मोदी के स्वागत में उमड़ा भारतीय समुदाय, ऑकलैंड में हजारों प्रवासियों ने सांस्कृतिक उत्साह के साथ किया भव्य अभिनंदन

    न्यूजीलैंड में पीएम मोदी के स्वागत में उमड़ा भारतीय समुदाय, ऑकलैंड में हजारों प्रवासियों ने सांस्कृतिक उत्साह के साथ किया भव्य अभिनंदन


    नई दिल्ली । न्यूजीलैंड के ऑकलैंड में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के स्वागत के लिए भारतीय समुदाय का अभूतपूर्व उत्साह देखने को मिला। भारतीय मूल के हजारों लोग विशेष स्वागत कार्यक्रम में शामिल हुए और पारंपरिक परिधानों, सांस्कृतिक प्रस्तुतियों तथा देशभक्ति के नारों के साथ प्रधानमंत्री का गर्मजोशी से अभिनंदन किया। कार्यक्रम स्थल पर भारतीय तिरंगे और न्यूजीलैंड के राष्ट्रीय ध्वज एक साथ लहराते दिखाई दिए, जो दोनों देशों के बीच बढ़ते मैत्रीपूर्ण संबंधों और प्रवासी भारतीयों के गहरे भावनात्मक जुड़ाव का प्रतीक बने।

    कार्यक्रम में भारत के विभिन्न राज्यों का सांस्कृतिक रंग स्पष्ट रूप से दिखाई दिया। पंजाब, तमिलनाडु, कर्नाटक सहित कई राज्यों की लोक परंपराओं और वेशभूषा ने आयोजन को विशेष पहचान दी। शास्त्रीय संगीत, लोकनृत्य और ‘वंदे मातरम्’ की प्रस्तुति ने पूरे माहौल को उत्साह और देशभक्ति के रंग में रंग दिया। कार्यक्रम में मौजूद लोगों ने ‘मोदी-मोदी’ और ‘भारत माता की जय’ के नारों के साथ प्रधानमंत्री का स्वागत किया।

    भारतीय समुदाय के कई सदस्यों ने कहा कि वे लंबे समय से इस यात्रा का इंतजार कर रहे थे। उनके अनुसार किसी भारतीय प्रधानमंत्री का इस प्रकार समुदाय के बीच आना उनके लिए गर्व और सम्मान का विषय है। लोगों ने विश्वास जताया कि यह यात्रा दोनों देशों के बीच सहयोग को नई दिशा देने के साथ-साथ प्रवासी भारतीयों के संबंधों को भी और मजबूत करेगी।

    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी भारतीय समुदाय के आत्मीय स्वागत पर प्रसन्नता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि न्यूजीलैंड में बसे भारतीयों का उत्साह और अपनापन भारत के प्रति उनके गहरे जुड़ाव को दर्शाता है। उन्होंने प्रवासी भारतीयों की भूमिका की सराहना करते हुए कहा कि वे दोनों देशों के बीच सांस्कृतिक, सामाजिक और आर्थिक संबंधों को मजबूत करने में महत्वपूर्ण योगदान दे रहे हैं।

    ऑकलैंड पहुंचने के बाद प्रधानमंत्री का गवर्नमेंट हाउस में औपचारिक स्वागत किया गया। इस अवसर पर न्यूजीलैंड की स्वदेशी माओरी परंपरा के अनुसार पारंपरिक पोहिरी समारोह आयोजित किया गया। यह सम्मान न्यूजीलैंड की सांस्कृतिक विरासत का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है और विशेष अतिथियों के स्वागत के लिए आयोजित किया जाता है। इस समारोह ने दोनों देशों के बीच पारस्परिक सम्मान और सांस्कृतिक आदान-प्रदान की भावना को भी रेखांकित किया।

    प्रधानमंत्री की यह यात्रा कई दृष्टियों से महत्वपूर्ण मानी जा रही है। लगभग चार दशकों बाद किसी भारतीय प्रधानमंत्री की यह पहली आधिकारिक न्यूजीलैंड यात्रा है। इस दौरान व्यापार, निवेश, शिक्षा, रक्षा, प्रौद्योगिकी और लोगों के बीच संपर्क बढ़ाने जैसे विषयों पर विशेष ध्यान केंद्रित किया जा रहा है। दोनों देशों के बीच आर्थिक और रणनीतिक सहयोग को नई गति देने की भी उम्मीद जताई जा रही है।

    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तीन देशों की यात्रा के अंतिम चरण के रूप में आयोजित यह दौरा भारत और न्यूजीलैंड के संबंधों को नई ऊर्जा प्रदान करने वाला माना जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि प्रवासी भारतीयों की सक्रिय भागीदारी और दोनों देशों के नेतृत्व के बीच बढ़ता संवाद भविष्य में द्विपक्षीय सहयोग के नए अवसरों का मार्ग प्रशस्त कर सकता है। ऑकलैंड में दिखाई दिया उत्साह इस बात का संकेत है कि भारत और न्यूजीलैंड के संबंध केवल सरकारी स्तर तक सीमित नहीं हैं, बल्कि लोगों के बीच भी मजबूत विश्वास और आत्मीयता की नींव पर आगे बढ़ रहे हैं।

  • पीएम मोदी के न्यूजीलैंड दौरे से भारत-न्यूजीलैंड संबंधों को नई उड़ान, 2030 तक व्यापार दोगुना करने का लक्ष्य; रक्षा, आतंकवाद और हिंद-प्रशांत सहयोग पर ऐतिहासिक सहमति

    पीएम मोदी के न्यूजीलैंड दौरे से भारत-न्यूजीलैंड संबंधों को नई उड़ान, 2030 तक व्यापार दोगुना करने का लक्ष्य; रक्षा, आतंकवाद और हिंद-प्रशांत सहयोग पर ऐतिहासिक सहमति


    नई दिल्ली ।
    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के न्यूजीलैंड दौरे ने भारत और न्यूजीलैंड के द्विपक्षीय संबंधों को नई दिशा देने का काम किया है। पिछले चार दशकों में किसी भारतीय प्रधानमंत्री की पहली आधिकारिक न्यूजीलैंड यात्रा के दौरान दोनों देशों ने अपने संबंधों को ‘रणनीतिक साझेदारी’ के स्तर तक पहुंचाने का फैसला किया। प्रधानमंत्री मोदी और न्यूजीलैंड के प्रधानमंत्री क्रिस्टोफर लक्सन ने वर्ष 2030 तक दोनों देशों के बीच वस्तुओं और सेवाओं के व्यापार को दोगुना कर सात अरब न्यूजीलैंड डॉलर तक पहुंचाने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य तय किया। इसके साथ ही रक्षा, समुद्री सुरक्षा, आतंकवाद-रोधी सहयोग, शिक्षा, विज्ञान, कृषि और हिंद-प्रशांत क्षेत्र में साझेदारी को मजबूत करने के लिए व्यापक रोडमैप पर सहमति बनी।

    दोनों नेताओं ने ‘भारत-न्यूजीलैंड रणनीतिक साझेदारी : रोडमैप टू 2030’ का समर्थन करते हुए नियमित उच्चस्तरीय राजनीतिक संवाद, विदेश मंत्रियों की वार्ता और वरिष्ठ अधिकारियों की वार्षिक बैठकें आयोजित करने पर सहमति जताई। संसदीय सहयोग बढ़ाने और दोनों देशों के सांसदों के बीच संवाद को भी नई गति देने का निर्णय लिया गया। दोनों प्रधानमंत्रियों ने कहा कि साझा लोकतांत्रिक मूल्यों और लोगों के बीच मजबूत संबंध भविष्य की साझेदारी का आधार बनेंगे।

    रक्षा और सुरक्षा सहयोग के क्षेत्र में दोनों देशों ने सैन्य स्तर पर नियमित संपर्क बनाए रखने, नौसैनिक अभ्यासों को बढ़ाने और समुद्री सुरक्षा के लिए वार्षिक मैरीटाइम सिक्योरिटी डायलॉग शुरू करने का फैसला किया। समुद्री सहयोग, हाइड्रोग्राफी, लॉजिस्टिक सपोर्ट और सूचना साझाकरण को भी नई मजबूती देने पर सहमति बनी। साइबर सुरक्षा, आतंकवाद, मादक पदार्थों की तस्करी और संगठित अपराध के खिलाफ संयुक्त प्रयासों को तेज करने तथा संबंधित एजेंसियों के बीच समन्वय बढ़ाने का भी निर्णय लिया गया।

    आर्थिक सहयोग को नई ऊंचाई देने के लिए दोनों देशों ने मुक्त व्यापार समझौते के शीघ्र और प्रभावी क्रियान्वयन पर जोर दिया। पर्यटन, डेयरी, कृषि, पशुपालन, बागवानी और वानिकी जैसे क्षेत्रों में साझेदारी को विस्तार देने के साथ भारत और न्यूजीलैंड के बीच सीधी नॉन-स्टॉप उड़ानें शुरू करने के प्रयासों को भी प्रोत्साहित किया जाएगा। नाविकों के योग्यता प्रमाणपत्रों की पारस्परिक मान्यता तथा समुद्री क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने पर भी चर्चा हुई।

    शिक्षा, विज्ञान, अनुसंधान और नवाचार को दोनों देशों के संबंधों का प्रमुख स्तंभ बताते हुए छात्र आदान-प्रदान, संस्थागत साझेदारी और उभरती प्रौद्योगिकियों में सहयोग बढ़ाने का निर्णय लिया गया। आपदा प्रबंधन, जलवायु परिवर्तन, डिजिटल परिवर्तन और स्वच्छ ऊर्जा के क्षेत्र में भी सहयोग को मजबूत करने पर सहमति बनी। इस दौरान भारत की राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण और न्यूजीलैंड की राष्ट्रीय आपात प्रबंधन एजेंसी के बीच समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए गए। प्रधानमंत्री मोदी ने ग्लोबल बायोफ्यूल्स अलायंस में न्यूजीलैंड के शामिल होने का स्वागत किया।

    क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों पर दोनों देशों ने स्वतंत्र, खुले और नियम-आधारित हिंद-प्रशांत क्षेत्र के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में सुधार और भारत की स्थायी सदस्यता के लिए न्यूजीलैंड ने अपना समर्थन दोहराया। दोनों नेताओं ने सीमा पार आतंकवाद सहित सभी प्रकार के आतंकवाद की कड़ी निंदा करते हुए आतंकियों और उनके समर्थकों के खिलाफ ठोस कार्रवाई की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने बहुपक्षीय मंचों पर सहयोग बढ़ाने, वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत बनाने, ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने तथा यूक्रेन और पश्चिम एशिया की स्थिति पर शांतिपूर्ण समाधान की आवश्यकता पर भी बल दिया। दोनों प्रधानमंत्रियों ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि 2030 रोडमैप के तहत तय सभी पहलों को समयबद्ध तरीके से लागू किया जाए, ताकि भारत-न्यूजीलैंड रणनीतिक साझेदारी का पूरा लाभ दोनों देशों को मिल सके।

  • ऑकलैंड से पीएम मोदी का वैश्विक निवेशकों को संदेश, भारत को बताया दुनिया की विकास यात्रा का सबसे मजबूत लॉन्च पैड, रणनीतिक साझेदारी से खुलेंगे नए अवसर

    ऑकलैंड से पीएम मोदी का वैश्विक निवेशकों को संदेश, भारत को बताया दुनिया की विकास यात्रा का सबसे मजबूत लॉन्च पैड, रणनीतिक साझेदारी से खुलेंगे नए अवसर


    नई दिल्ली ।
    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने न्यूजीलैंड के ऑकलैंड में आयोजित एक विशेष कार्यक्रम के दौरान भारत को वैश्विक आर्थिक विकास का प्रमुख केंद्र बताते हुए अंतरराष्ट्रीय निवेशकों से भारत की विकास यात्रा में सहभागी बनने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि भारत केवल एक बड़ा उपभोक्ता बाजार नहीं है, बल्कि वैश्विक विकास के लिए एक मजबूत लॉन्च पैड बन चुका है। तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था, स्थिर नीतियां, आधुनिक बुनियादी ढांचा और डिजिटल परिवर्तन भारत को निवेश के लिए दुनिया के सबसे आकर्षक देशों में शामिल कर रहे हैं।

    प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि भारत और न्यूजीलैंड के संबंध एक नए दौर में प्रवेश कर चुके हैं। दोनों देशों के बीच रणनीतिक साझेदारी केवल कूटनीतिक उपलब्धि नहीं, बल्कि साझा विकास और दीर्घकालिक सहयोग का नया आधार है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि हाल के महीनों में हुए मुक्त व्यापार समझौते से व्यापार, निवेश, तकनीक, सेवाओं और प्रतिभा के आदान-प्रदान को नई गति मिलेगी। उनका कहना था कि यह समझौता दोनों देशों के उद्योगों और निवेशकों के लिए अनेक नए अवसर लेकर आएगा।

    उन्होंने बताया कि भारत और न्यूजीलैंड ने वर्ष 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार को दोगुना करने का लक्ष्य रखा है। साथ ही न्यूजीलैंड की ओर से भारत में दीर्घकालिक निवेश की प्रतिबद्धता दोनों देशों के बीच बढ़ते भरोसे का संकेत है। प्रधानमंत्री ने कहा कि यह केवल पूंजी निवेश नहीं, बल्कि भारत के विकास और नवाचार की यात्रा में साझेदारी का प्रतीक है।

    प्रधानमंत्री मोदी ने भारत की आर्थिक प्रगति का उल्लेख करते हुए कहा कि देश आज दुनिया की सबसे तेज़ी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में शामिल है। उन्होंने कहा कि बढ़ता मध्यम वर्ग, डिजिटल तकनीक का व्यापक उपयोग और लगातार विकसित हो रहा बुनियादी ढांचा भारत को वैश्विक निवेश का पसंदीदा गंतव्य बना रहे हैं। सरकार की सुधार आधारित नीतियों ने उद्योगों के लिए बेहतर वातावरण तैयार किया है और निवेशकों को दीर्घकालिक स्थिरता का भरोसा दिया है।

    उन्होंने उत्पादन आधारित प्रोत्साहन योजना का उल्लेख करते हुए कहा कि विनिर्माण क्षेत्र को मजबूत बनाने के लिए कई प्रमुख उद्योगों को प्रोत्साहन दिया जा रहा है। खाद्य प्रसंस्करण, वस्त्र, इलेक्ट्रॉनिक्स और अन्य क्षेत्रों में निवेश की व्यापक संभावनाएं मौजूद हैं। उन्होंने वैश्विक कंपनियों को भारत में उत्पादन बढ़ाने और आपूर्ति श्रृंखला का हिस्सा बनने का निमंत्रण दिया।

    प्रधानमंत्री ने विमानन, पर्यटन और लॉजिस्टिक्स क्षेत्र में सहयोग की संभावनाओं पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि भारत का घरेलू विमानन क्षेत्र तेजी से विस्तार कर रहा है और दोनों देश कार्गो कॉरिडोर, बेहतर हवाई संपर्क तथा संयुक्त पर्यटन पैकेज विकसित कर सकते हैं। कृषि और बागवानी क्षेत्र में भी सहयोग की अपार संभावनाएं हैं। उन्होंने कहा कि न्यूजीलैंड की विशेषज्ञता और भारत के विशाल उपभोक्ता बाजार का संयोजन वैश्विक निर्यात के नए अवसर तैयार कर सकता है।

    अपने संबोधन में प्रधानमंत्री ने डिजिटल भुगतान, फिनटेक, अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी और स्मार्ट शहरों जैसे क्षेत्रों को भविष्य की साझेदारी का आधार बताया। उन्होंने कहा कि भारत में निजी भागीदारी के लिए अंतरिक्ष क्षेत्र खोला जा चुका है और बड़ी संख्या में स्टार्टअप नवाचार को आगे बढ़ा रहे हैं। जल प्रबंधन, शहरी परिवहन, कचरा प्रबंधन और आधुनिक तकनीकों के क्षेत्र में भी दोनों देशों के बीच सहयोग को नई दिशा दी जा सकती है। प्रधानमंत्री ने विश्वास जताया कि मजबूत आर्थिक सहयोग, नवाचार और साझा निवेश के माध्यम से भारत और न्यूजीलैंड आने वाले वर्षों में वैश्विक विकास के महत्वपूर्ण साझेदार बनकर उभरेंगे।

  • पीएम मोदी और क्रिस्टोफर लक्सन की अहम बैठक, आतंकवाद पर जीरो टॉलरेंस, साइबर सुरक्षा और हिंद-प्रशांत सहयोग बढ़ाने का साझा संकल्प

    पीएम मोदी और क्रिस्टोफर लक्सन की अहम बैठक, आतंकवाद पर जीरो टॉलरेंस, साइबर सुरक्षा और हिंद-प्रशांत सहयोग बढ़ाने का साझा संकल्प


    नई दिल्ली ।
    भारत और न्यूजीलैंड ने द्विपक्षीय संबंधों को नई रणनीतिक दिशा देते हुए आतंकवाद, साइबर सुरक्षा और उभरती वैश्विक सुरक्षा चुनौतियों के खिलाफ सहयोग को और मजबूत बनाने का संकल्प दोहराया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और न्यूजीलैंड के प्रधानमंत्री क्रिस्टोफर लक्सन के बीच हुई उच्चस्तरीय वार्ता में दोनों देशों ने क्षेत्रीय और वैश्विक सुरक्षा से जुड़े कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर व्यापक चर्चा की। बैठक के बाद जारी संयुक्त बयान में दोनों देशों ने अंतरराष्ट्रीय शांति, स्थिरता और नियम आधारित वैश्विक व्यवस्था को मजबूत करने के लिए मिलकर कार्य करने की प्रतिबद्धता व्यक्त की।

    वार्ता के दौरान दोनों प्रधानमंत्रियों ने आतंकवाद के सभी स्वरूपों की स्पष्ट और कड़ी निंदा की। उन्होंने सीमा पार आतंकवाद सहित किसी भी प्रकार की हिंसक गतिविधियों को वैश्विक शांति के लिए गंभीर चुनौती बताते हुए ऐसे अपराधों के खिलाफ समन्वित कार्रवाई की आवश्यकता पर बल दिया। दोनों नेताओं ने हाल के आतंकी हमलों की निंदा करते हुए कहा कि ऐसे अपराधों के जिम्मेदार लोगों को कानून के दायरे में लाना और उन्हें शीघ्र दंड दिलाना अंतरराष्ट्रीय समुदाय की साझा जिम्मेदारी है।

    संयुक्त बयान में आतंकवाद के प्रति ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति को दोहराते हुए आतंकवादी संगठनों के वित्तीय नेटवर्क, सुरक्षित ठिकानों और ऑनलाइन गतिविधियों पर प्रभावी कार्रवाई की आवश्यकता पर जोर दिया गया। दोनों देशों ने इस बात पर सहमति जताई कि आतंकवाद और हिंसक कट्टरपंथ से प्रभावी ढंग से निपटने के लिए सूचना साझा करने, तकनीकी सहयोग बढ़ाने और संस्थागत समन्वय को मजबूत करना आवश्यक है। इसी दिशा में आतंकवाद निरोधक संयुक्त कार्य समूह के गठन के लिए हुए समझौते का भी स्वागत किया गया, जिससे दोनों देशों की एजेंसियों के बीच नियमित संवाद और सूचना आदान-प्रदान को नई गति मिलेगी।

    बैठक में साइबर सुरक्षा और डिजिटल क्षेत्र से जुड़ी चुनौतियां भी प्रमुख विषय रहीं। दोनों देशों ने साइबर अपराध, डिजिटल सुरक्षा, महत्वपूर्ण अवसंरचना की सुरक्षा और नई तकनीकों से उत्पन्न जोखिमों का संयुक्त रूप से सामना करने पर सहमति व्यक्त की। इसके साथ ही वित्तीय अपराध, मादक पदार्थों की तस्करी, मानव तस्करी तथा अन्य अंतरराष्ट्रीय संगठित अपराधों के विरुद्ध कानून प्रवर्तन एजेंसियों के बीच सहयोग बढ़ाने का निर्णय भी लिया गया। दोनों पक्षों ने नशीले पदार्थों की तस्करी रोकने और संबंधित एजेंसियों के बीच औपचारिक सहयोग व्यवस्था को शीघ्र अंतिम रूप देने की दिशा में कार्य करने पर सहमति जताई।

    प्रधानमंत्री मोदी और प्रधानमंत्री लक्सन ने हिंद-प्रशांत क्षेत्र की सुरक्षा, स्थिरता और समृद्धि को साझा प्राथमिकता बताते हुए स्वतंत्र, मुक्त और समावेशी क्षेत्रीय व्यवस्था के समर्थन को दोहराया। दोनों नेताओं ने कहा कि सभी देशों की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता का सम्मान किया जाना चाहिए तथा समुद्री मार्गों पर निर्बाध आवाजाही और अंतरराष्ट्रीय कानूनों का पालन वैश्विक व्यापार एवं सुरक्षा के लिए आवश्यक है। उन्होंने समुद्री विवादों का समाधान शांतिपूर्ण संवाद और अंतरराष्ट्रीय कानूनों के अनुरूप किए जाने पर भी बल दिया।

    दोनों देशों ने क्षेत्रीय सहयोग को आगे बढ़ाने के लिए बहुपक्षीय मंचों की भूमिका को भी महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने आसियान की केंद्रीय भूमिका का समर्थन करते हुए पूर्वी एशिया शिखर सम्मेलन, आसियान क्षेत्रीय मंच और अन्य क्षेत्रीय व्यवस्थाओं के माध्यम से सहयोग को और मजबूत बनाने की प्रतिबद्धता व्यक्त की। विशेषज्ञों का मानना है कि इस व्यापक सहमति से भारत और न्यूजीलैंड के बीच सुरक्षा, कानून प्रवर्तन, साइबर सहयोग और रणनीतिक साझेदारी को नई मजबूती मिलेगी तथा दोनों देश बदलती वैश्विक सुरक्षा चुनौतियों का अधिक प्रभावी ढंग से सामना कर सकेंगे।