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  • ऑकलैंड में भारतीय समुदाय को संबोधित करते हुए बोले पीएम मोदी, न्यूजीलैंड की उपलब्धियों की खुलकर सराहना, कहा- ‘हमने आपसे बहुत कुछ सीखा’

    ऑकलैंड में भारतीय समुदाय को संबोधित करते हुए बोले पीएम मोदी, न्यूजीलैंड की उपलब्धियों की खुलकर सराहना, कहा- ‘हमने आपसे बहुत कुछ सीखा’


    नई दिल्ली ।
    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने न्यूजीलैंड के ऑकलैंड में आयोजित भारतीय समुदाय के विशेष कार्यक्रम में दोनों देशों के ऐतिहासिक संबंधों, साझा लोकतांत्रिक मूल्यों और भविष्य की साझेदारी पर विस्तार से अपने विचार रखे। उन्होंने कहा कि भारत और न्यूजीलैंड का रिश्ता केवल कूटनीतिक सहयोग तक सीमित नहीं है, बल्कि यह विश्वास, मित्रता और साझा मूल्यों की मजबूत नींव पर आधारित है। अपने संबोधन में प्रधानमंत्री ने न्यूजीलैंड की कई उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए कहा कि भारत ने इस देश से बहुत कुछ सीखा है और आज भी सीखने की यह प्रक्रिया लगातार जारी है।

    प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत हजारों वर्षों पुरानी सभ्यता होने के बावजूद समय के साथ स्वयं को निरंतर बदलता और आधुनिक बनाता रहा है। उन्होंने कहा कि भारत की सबसे बड़ी ताकत उसकी सीखने की क्षमता है। यही कारण है कि देश दुनिया के विभिन्न अनुभवों को अपनाते हुए अपनी विकास यात्रा को आगे बढ़ा रहा है। उन्होंने कहा कि किसी भी राष्ट्र की वास्तविक प्रगति उसके आकार से नहीं, बल्कि जनकल्याण की भावना और समाज के विकास के प्रति उसकी प्रतिबद्धता से तय होती है।

    अपने संबोधन में प्रधानमंत्री ने न्यूजीलैंड की लोकतांत्रिक परंपराओं और सामाजिक विकास की विशेष रूप से प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि यह वही देश है जिसने दुनिया में सबसे पहले महिलाओं को मतदान का अधिकार देकर समानता और लोकतांत्रिक अधिकारों की नई मिसाल पेश की। आज न्यूजीलैंड के विकास में महिलाओं की सक्रिय भागीदारी उसकी सबसे बड़ी ताकतों में शामिल है। प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत भी महिला सशक्तिकरण को विकास का प्रमुख आधार मानते हुए शिक्षा, उद्यमिता, नेतृत्व और आर्थिक भागीदारी के नए अवसर लगातार बढ़ा रहा है।

    प्रधानमंत्री मोदी ने ग्रामीण अर्थव्यवस्था के क्षेत्र में न्यूजीलैंड की उपलब्धियों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि इस देश ने कृषि और उससे जुड़े मजबूत पारिस्थितिकी तंत्र के माध्यम से यह साबित किया है कि ग्रामीण क्षेत्र किसी भी राष्ट्र की आर्थिक ताकत बन सकते हैं। उन्होंने कहा कि छोटे किसानों पर आधारित कृषि व्यवस्था को आधुनिक तकनीक, बेहतर प्रबंधन और वैश्विक बाजार से जोड़कर न्यूजीलैंड ने उल्लेखनीय सफलता हासिल की है। भारत जैसे विशाल कृषि प्रधान देश के लिए यह अनुभव प्रेरणादायक है और इससे कई उपयोगी सीख प्राप्त की जा सकती है।

    उन्होंने कहा कि न्यूजीलैंड ने यह भी सिद्ध किया है कि सीमित घरेलू बाजार होने के बावजूद गुणवत्तापूर्ण उत्पादों और नवाचार के बल पर वैश्विक स्तर पर मजबूत पहचान बनाई जा सकती है। भारत भी स्थानीय उत्पादों को वैश्विक बाजार तक पहुंचाने और कृषि आधारित उद्योगों को नई ऊंचाइयों तक ले जाने के लिए निरंतर प्रयास कर रहा है। इस दिशा में दोनों देशों के बीच सहयोग की व्यापक संभावनाएं मौजूद हैं।

    प्रधानमंत्री ने भारत और न्यूजीलैंड के संबंधों को भविष्य की साझा यात्रा बताते हुए कहा कि दोनों देशों के बीच विश्वास, लोकतांत्रिक मूल्यों और पारस्परिक सम्मान की भावना लगातार मजबूत हो रही है। उन्होंने भारतीय समुदाय की भूमिका की भी सराहना करते हुए कहा कि प्रवासी भारतीय दोनों देशों के बीच सांस्कृतिक और आर्थिक संबंधों को मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण योगदान दे रहे हैं। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि आने वाले वर्षों में भारत और न्यूजीलैंड शिक्षा, कृषि, व्यापार, नवाचार और लोगों के बीच संपर्क जैसे क्षेत्रों में सहयोग को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाएंगे, जिससे दोनों देशों की साझेदारी और अधिक व्यापक तथा मजबूत बनेगी।

  • ईरान के परमाणु ठिकानों पर फिर बढ़ी हलचल, नई सैटेलाइट तस्वीरों ने बढ़ाई वैश्विक चिंता, अमेरिका-ईरान समझौते के पालन पर उठे गंभीर सवाल

    ईरान के परमाणु ठिकानों पर फिर बढ़ी हलचल, नई सैटेलाइट तस्वीरों ने बढ़ाई वैश्विक चिंता, अमेरिका-ईरान समझौते के पालन पर उठे गंभीर सवाल

    नई दिल्ली । अमेरिका और ईरान के बीच हालिया तनाव और युद्धविराम के बाद सामने आई नई सैटेलाइट तस्वीरों ने एक बार फिर ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा तेज कर दी है। संवेदनशील परमाणु परिसरों में निर्माण और मरम्मत संबंधी गतिविधियों के संकेत मिलने के बाद यह सवाल उठने लगे हैं कि क्या ईरान हाल में हुए समझौते की शर्तों का पूरी तरह पालन कर रहा है। इन घटनाक्रमों ने वैश्विक सुरक्षा एजेंसियों और कई देशों की चिंताओं को फिर बढ़ा दिया है।

    हालिया तस्वीरों के विश्लेषण में ईरान के पारचिन परमाणु परिसर में सबसे अधिक गतिविधियां दर्ज होने की बात सामने आई है। यह वही स्थान है, जिसे लंबे समय से परमाणु हथियारों से जुड़े संभावित परीक्षणों के संदर्भ में संवेदनशील माना जाता रहा है। तस्वीरों में क्षतिग्रस्त हिस्सों की मरम्मत, निर्माण कार्य और सुरक्षा संरचनाओं को दोबारा मजबूत किए जाने जैसे संकेत दिखाई दिए हैं। इससे यह अनुमान लगाया जा रहा है कि संबंधित परिसरों को फिर से सक्रिय स्थिति में लाने की प्रक्रिया चल रही हो सकती है।

    इसी तरह पिकऐक्स माउंटेन क्षेत्र में भी सुरंगों के आसपास वाहनों की आवाजाही और अन्य गतिविधियों के संकेत मिलने की जानकारी सामने आई है। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे स्थानों पर किसी भी प्रकार की असामान्य हलचल अंतरराष्ट्रीय समुदाय का ध्यान आकर्षित करती है, क्योंकि इन परिसरों को ईरान के रणनीतिक परमाणु कार्यक्रम से जोड़कर देखा जाता रहा है। हालांकि इन गतिविधियों का वास्तविक उद्देश्य क्या है, इसे लेकर अभी कोई आधिकारिक पुष्टि सामने नहीं आई है।

    दूसरी ओर इस्फहान, फोरडो और नतांज जैसे प्रमुख परमाणु केंद्रों में फिलहाल बड़े स्तर पर नई गतिविधियों के स्पष्ट संकेत नहीं मिले हैं। इसके बावजूद कुछ मिसाइल भंडारण केंद्रों पर मरम्मत और बुनियादी ढांचे को दुरुस्त करने का काम दिखाई देने से सुरक्षा विश्लेषकों की चिंता बढ़ी है। उनका कहना है कि यदि सैन्य और परमाणु ढांचे से जुड़े परिसरों में एक साथ गतिविधियां बढ़ती हैं तो क्षेत्रीय सुरक्षा समीकरण प्रभावित हो सकते हैं।

    पिछले महीने हुए 14 सूत्रीय समझौते में ईरान ने दोहराया था कि वह परमाणु हथियार विकसित या प्राप्त नहीं करेगा तथा संवर्धित यूरेनियम से जुड़े मुद्दों के समाधान में अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी की निगरानी का सहयोग करेगा। इस समझौते को दोनों देशों के बीच तनाव कम करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना गया था। हालांकि अब सामने आए घटनाक्रमों ने समझौते के प्रभावी क्रियान्वयन को लेकर नई बहस शुरू कर दी है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि केवल सैटेलाइट तस्वीरों के आधार पर किसी अंतिम निष्कर्ष पर पहुंचना उचित नहीं होगा। निर्माण गतिविधियां नियमित मरम्मत, सुरक्षा सुधार या अन्य प्रशासनिक कारणों से भी हो सकती हैं। ऐसे में किसी भी दावे की पुष्टि के लिए स्वतंत्र निरीक्षण, तकनीकी विश्लेषण और अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों की जांच को महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

    फिलहाल ईरान की इन गतिविधियों पर दुनिया की निगाहें टिकी हुई हैं। आने वाले दिनों में यदि अंतरराष्ट्रीय निरीक्षण एजेंसियां अतिरिक्त जानकारी साझा करती हैं या संबंधित पक्षों की ओर से आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने आती है, तो यह स्पष्ट हो सकेगा कि हालिया गतिविधियां सामान्य रखरखाव का हिस्सा हैं या फिर वास्तव में परमाणु कार्यक्रम से जुड़े किसी बड़े घटनाक्रम का संकेत देती हैं।

  • 'आज मोदी हमारा फोन भी नहीं उठाते', शहबाज शरीफ के सलाहकार का बड़ा बयान, भारत से रिश्तों पर पाकिस्तान की पुरानी नीति को ठहराया जिम्मेदार

    'आज मोदी हमारा फोन भी नहीं उठाते', शहबाज शरीफ के सलाहकार का बड़ा बयान, भारत से रिश्तों पर पाकिस्तान की पुरानी नीति को ठहराया जिम्मेदार


    नई दिल्ली । पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ के विशेष सलाहकार राणा सनाउल्लाह खान के हालिया बयान ने भारत-पाकिस्तान संबंधों को लेकर नई चर्चा छेड़ दी है। एक टेलीविजन कार्यक्रम के दौरान उन्होंने कहा कि भारत के साथ बेहतर संबंध स्थापित करने का महत्वपूर्ण अवसर पाकिस्तान के पास था, लेकिन उस समय लिए गए राजनीतिक फैसलों और लगातार विरोध की नीति के कारण वह मौका हाथ से निकल गया। उन्होंने यह भी कहा कि आज यदि भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पाकिस्तान के नेताओं से संवाद के प्रति उत्सुक नहीं दिखाई देते हैं तो इसके लिए पाकिस्तान को आत्ममंथन करना चाहिए।

    राणा सनाउल्लाह ने बातचीत के दौरान वर्ष 2015 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की लाहौर यात्रा का अप्रत्यक्ष रूप से उल्लेख करते हुए कहा कि उस समय दोनों देशों के बीच संबंधों में सुधार की संभावना बनी थी। उनके अनुसार यदि उस दौर में सकारात्मक माहौल को आगे बढ़ाया जाता तो दक्षिण एशिया में स्थायी शांति और सहयोग की दिशा में महत्वपूर्ण प्रगति हो सकती थी। उन्होंने संकेत दिया कि उस अवसर का सही उपयोग नहीं किया गया और बाद की घटनाओं ने दोनों देशों के रिश्तों को और अधिक जटिल बना दिया।

    कार्यक्रम के दौरान जब उनसे भारत के साथ संपर्क और बैकडोर कूटनीति को लेकर सवाल पूछा गया तो उन्होंने स्वीकार किया कि दोनों देशों के बीच पर्दे के पीछे संवाद की प्रक्रिया पूरी तरह कभी समाप्त नहीं हुई। उन्होंने कहा कि संवेदनशील मुद्दों पर प्रत्यक्ष बातचीत भले सीमित रही हो, लेकिन कूटनीतिक स्तर पर संपर्क बनाए रखने की कोशिशें समय-समय पर होती रही हैं। उनके अनुसार ऐसे संवाद क्षेत्रीय स्थिरता बनाए रखने के लिए आवश्यक होते हैं।

    राणा सनाउल्लाह ने यह भी कहा कि पाकिस्तान को अपने अतीत से सीख लेनी चाहिए। उन्होंने टिप्पणी करते हुए कहा कि यदि उस समय संबंध सुधारने की दिशा में गंभीर प्रयास किए गए होते तो आज हालात अलग हो सकते थे। उनके मुताबिक राजनीतिक मतभेदों के कारण अवसरों को खोना दोनों देशों के हित में नहीं रहा। उन्होंने यह भी कहा कि क्षेत्रीय सहयोग मजबूत होने से आर्थिक चुनौतियों का सामना करना अपेक्षाकृत आसान हो सकता था और पाकिस्तान की आर्थिक स्थिति पर भी इसका सकारात्मक प्रभाव पड़ सकता था।

    बयान के दौरान उन्होंने यह भी कहा कि भारत के साथ टकराव की राजनीति ने पाकिस्तान को अपेक्षित लाभ नहीं पहुंचाया। उनका मानना है कि पड़ोसी देशों के बीच संवाद और विश्वास बहाली का माहौल दोनों देशों के नागरिकों के हित में होता है। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि भविष्य में यदि अनुकूल परिस्थितियां बनती हैं तो वार्ता और सहयोग के रास्ते फिर से तलाशे जा सकते हैं।

    राणा सनाउल्लाह के इस बयान को पाकिस्तान की आंतरिक राजनीतिक बहस के संदर्भ में भी देखा जा रहा है। उनके वक्तव्य ने यह संकेत दिया कि पाकिस्तान के भीतर भी भारत के साथ संबंधों को लेकर अलग-अलग दृष्टिकोण मौजूद हैं। हालांकि दोनों देशों के संबंध सुरक्षा, सीमा, आतंकवाद और कूटनीतिक मुद्दों सहित कई जटिल विषयों से जुड़े रहे हैं, लेकिन समय-समय पर संवाद बहाल करने की कोशिशें भी होती रही हैं। ऐसे में उनका यह बयान दक्षिण एशिया की क्षेत्रीय राजनीति और भविष्य की संभावित कूटनीतिक दिशा को लेकर नई बहस को जन्म दे रहा है।

  • ट्रंप की ईरान को दोटूक चेतावनी, हत्या की साजिश पर 'अभूतपूर्व सैन्य जवाब' का दावा, बातचीत की सहमति के बीच फिर बढ़ा मध्य-पूर्व का तनाव

    ट्रंप की ईरान को दोटूक चेतावनी, हत्या की साजिश पर 'अभूतपूर्व सैन्य जवाब' का दावा, बातचीत की सहमति के बीच फिर बढ़ा मध्य-पूर्व का तनाव


    नई दिल्ली ।
    अमेरिका और ईरान के बीच लंबे समय से जारी तनाव एक बार फिर तेज होता दिखाई दे रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को लेकर बेहद सख्त बयान देते हुए स्पष्ट किया है कि यदि उनके खिलाफ किसी भी प्रकार की हत्या की साजिश सफल होती है तो अमेरिका ऐसा सैन्य जवाब देगा जिसकी कल्पना भी नहीं की जा सकती। ट्रंप का यह बयान ऐसे समय सामने आया है जब दोनों देशों के बीच हाल के दिनों में सैन्य गतिविधियां और कूटनीतिक बयानबाजी लगातार बढ़ रही है।

    ट्रंप ने कहा कि ईरान से जुड़ा खतरा कोई नया विषय नहीं है, बल्कि कई वर्षों से इस प्रकार की आशंकाएं सामने आती रही हैं। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि फिलहाल ऐसी कोई नई खुफिया जानकारी उपलब्ध नहीं है जो उनकी हत्या की किसी ताजा साजिश की पुष्टि करती हो, लेकिन संभावित खतरे को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। उनका कहना था कि राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े मामलों में किसी भी प्रकार की लापरवाही की गुंजाइश नहीं होती और अमेरिका हर परिस्थिति के लिए तैयार है।

    अमेरिकी राष्ट्रपति ने यह भी दावा किया कि ईरान ने अमेरिका के साथ बातचीत आगे बढ़ाने की इच्छा जताई है और इस पर सहमति भी बनी है। हालांकि उन्होंने साफ कहा कि पहले जैसा युद्धविराम अब प्रभावी नहीं माना जा सकता। उनके अनुसार हालात बदल चुके हैं और आगे की बातचीत पूरी तरह परिस्थितियों तथा ईरान के व्यवहार पर निर्भर करेगी। इस बयान ने संकेत दिया है कि कूटनीतिक संवाद और सैन्य तैयारी दोनों समानांतर रूप से आगे बढ़ सकते हैं।

    हालिया घटनाओं ने दोनों देशों के बीच अविश्वास को और गहरा कर दिया है। क्षेत्र में समुद्री सुरक्षा, ऊर्जा आपूर्ति और सामरिक गतिविधियों को लेकर बढ़ती चिंताओं के बीच तनाव लगातार बढ़ रहा है। महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों के आसपास हुई घटनाओं के बाद अमेरिका ने ईरान से जुड़े कई रणनीतिक ठिकानों पर कार्रवाई की, जिसके बाद क्षेत्रीय स्थिति और अधिक संवेदनशील हो गई। इसके जवाब में ईरान की ओर से भी अमेरिकी हितों को निशाना बनाने के आरोप लगाए गए, जिससे पूरे मध्य-पूर्व में अस्थिरता की आशंकाएं बढ़ गई हैं।

    अमेरिकी प्रशासन का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्गों की सुरक्षा से किसी भी प्रकार का समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा। उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने भी ईरान पर समुद्री गतिविधियों को प्रभावित करने और हालिया समझौतों का उल्लंघन करने का आरोप लगाया। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि भविष्य में अंतरराष्ट्रीय व्यापारिक जहाजों या समुद्री यातायात को बाधित करने का प्रयास किया गया तो अमेरिका पहले से अधिक कठोर कदम उठाने से पीछे नहीं हटेगा।

    विशेषज्ञों का मानना है कि ट्रंप का यह बयान केवल राजनीतिक संदेश नहीं बल्कि रणनीतिक संकेत भी है। इससे यह स्पष्ट होता है कि अमेरिका अपनी सुरक्षा और क्षेत्रीय हितों को लेकर किसी भी स्तर तक जाने की नीति पर कायम है। दूसरी ओर ईरान के साथ संभावित वार्ता की संभावना यह भी दर्शाती है कि दोनों पक्ष तनाव कम करने के लिए कूटनीतिक रास्ता पूरी तरह बंद नहीं करना चाहते। आने वाले दिनों में दोनों देशों की गतिविधियां केवल मध्य-पूर्व ही नहीं बल्कि वैश्विक ऊर्जा बाजार, अंतरराष्ट्रीय व्यापार और विश्व राजनीति की दिशा को भी प्रभावित कर सकती हैं। ऐसे में दुनिया की निगाहें अमेरिका और ईरान के अगले कदम पर टिकी रहेंगी।

  • ट्रंप के सख्त रुख के बाद ईरान का बड़ा संदेश, समझौता टूटा तो पूरी ताकत से होगा जवाब, युद्ध की तैयारी का दावा

    ट्रंप के सख्त रुख के बाद ईरान का बड़ा संदेश, समझौता टूटा तो पूरी ताकत से होगा जवाब, युद्ध की तैयारी का दावा


    नई दिल्ली ।
    अमेरिका और ईरान के बीच हालिया कूटनीतिक प्रयासों के बावजूद दोनों देशों के संबंध एक बार फिर तनावपूर्ण दौर में पहुंचते दिखाई दे रहे हैं। ईरान की संसद के अध्यक्ष मोहम्मद बाघेर गालिबाफ ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि उनके देश को अमेरिका पर बिल्कुल भरोसा नहीं है और यदि किसी भी समझौते का उल्लंघन किया गया या दबाव बनाने की कोशिश हुई तो ईरान अपनी सुरक्षा और संप्रभुता की रक्षा के लिए पूरी तरह तैयार है। उनके इस बयान ने पश्चिम एशिया की बदलती रणनीतिक परिस्थितियों को लेकर नई चर्चाओं को जन्म दे दिया है।

    गालिबाफ ने कहा कि ईरान ने अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा और रक्षा तैयारियों में कभी ढील नहीं दी है। उनका कहना था कि किसी भी देश के साथ वार्ता तभी प्रभावी हो सकती है, जब वह अपनी सुरक्षा के प्रति पूरी तरह सक्षम और आत्मनिर्भर हो। उन्होंने संकेत दिया कि यदि अमेरिका भविष्य में किसी समझौते से पीछे हटता है या अपने वादों का पालन नहीं करता है, तो ईरान मजबूती के साथ उसका जवाब देने की क्षमता रखता है। उनके अनुसार, देश की सुरक्षा और जनता के अधिकारों की रक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है।

    ईरानी संसद अध्यक्ष ने यह भी बताया कि हालिया वार्ता के दौरान उन्होंने अमेरिकी नेतृत्व के सामने अपनी बात स्पष्ट रूप से रखी थी। उन्होंने कहा कि ईरान का अनुभव बताता है कि केवल आश्वासनों के आधार पर भरोसा नहीं किया जा सकता और किसी भी बातचीत के साथ रक्षा तैयारियों को समान महत्व देना आवश्यक है। उनका मानना है कि कूटनीति तभी सफल हो सकती है जब राष्ट्रीय हितों से कोई समझौता न किया जाए।

    दूसरी ओर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी ईरान को लेकर अपना रुख सख्त बनाए रखा है। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच पहले लागू युद्धविराम की स्थिति अब प्रभावी नहीं रही है। हालांकि उन्होंने यह भी संकेत दिया कि बातचीत के लिए रास्ता पूरी तरह बंद नहीं है, लेकिन किसी भी आगे की प्रक्रिया में अमेरिका अपने हितों और सुरक्षा संबंधी प्राथमिकताओं को सर्वोपरि रखेगा। इस बयान के बाद दोनों देशों के बीच भविष्य की वार्ताओं को लेकर अनिश्चितता और बढ़ गई है।

    इसी बीच क्षेत्रीय स्तर पर तनाव कम करने की कोशिशें भी जारी हैं। कतर की ओर से मध्यस्थता के प्रयास तेज किए गए हैं और दोनों देशों के बीच संवाद बहाल कराने के लिए कूटनीतिक संपर्क बनाए जा रहे हैं। माना जा रहा है कि यदि यह पहल सफल होती है तो पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव को कम करने की दिशा में सकारात्मक परिणाम सामने आ सकते हैं। हालांकि फिलहाल दोनों पक्ष अपने-अपने रुख पर कायम दिखाई दे रहे हैं।

    विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ता अविश्वास केवल द्विपक्षीय संबंधों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका असर पूरे पश्चिम एशिया की सुरक्षा, ऊर्जा बाजार और अंतरराष्ट्रीय कूटनीति पर भी पड़ सकता है। ऐसे में आने वाले दिनों में होने वाली वार्ताएं और दोनों देशों के राजनीतिक संकेत वैश्विक समुदाय की नजर में महत्वपूर्ण रहेंगे। यदि संवाद की प्रक्रिया आगे बढ़ती है तो तनाव कम होने की संभावना बनेगी, लेकिन आक्रामक बयानबाजी जारी रहने पर क्षेत्रीय अस्थिरता और बढ़ सकती है।

  • 40 साल बाद भारतीय प्रधानमंत्री का ऐतिहासिक न्यूजीलैंड दौरा, पीएम मोदी और क्रिस्टोफर लक्सन की मुलाकात से द्विपक्षीय संबंधों को मिली नई रफ्तार

    40 साल बाद भारतीय प्रधानमंत्री का ऐतिहासिक न्यूजीलैंड दौरा, पीएम मोदी और क्रिस्टोफर लक्सन की मुलाकात से द्विपक्षीय संबंधों को मिली नई रफ्तार


    नई दिल्ली ।
    चार दशक से अधिक समय बाद किसी भारतीय प्रधानमंत्री की न्यूजीलैंड यात्रा ने दोनों देशों के संबंधों को नई ऊर्जा देने का अवसर प्रदान किया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी दो दिवसीय राजकीय दौरे पर न्यूजीलैंड पहुंचे, जहां उनका प्रधानमंत्री क्रिस्टोफर लक्सन ने गर्मजोशी से स्वागत किया। यह यात्रा केवल औपचारिक कूटनीतिक कार्यक्रम तक सीमित नहीं मानी जा रही, बल्कि इसे भारत और न्यूजीलैंड के बीच राजनीतिक, आर्थिक और रणनीतिक साझेदारी को नए स्तर पर ले जाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

    ऑकलैंड पहुंचने पर दोनों नेताओं की मुलाकात की तस्वीरें और वीडियो व्यापक रूप से चर्चा में रहे। स्वागत के दौरान दोनों नेताओं ने आत्मीयता के साथ एक-दूसरे का अभिवादन किया, जिससे दोनों देशों के मजबूत होते संबंधों का स्पष्ट संदेश भी गया। इस अवसर पर न्यूजीलैंड के शीर्ष नेतृत्व ने भारत के साथ दीर्घकालिक सहयोग को और मजबूत बनाने की प्रतिबद्धता भी दोहराई।

    प्रधानमंत्री क्रिस्टोफर लक्सन द्वारा सोशल मीडिया पर साझा किए गए स्वागत संदेश पर दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति ली जे-म्युंग ने भी भारत और न्यूजीलैंड की मित्रता तथा प्रगति के लिए शुभकामनाएं व्यक्त कीं। राष्ट्रपति के इस संदेश का प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी जवाब दिया और कहा कि मित्र देशों की ओर से मिलने वाले ऐसे विचारपूर्ण संदेश हमेशा विशेष महत्व रखते हैं। इस संवाद को क्षेत्रीय सहयोग और आपसी विश्वास का सकारात्मक संकेत माना जा रहा है।

    प्रधानमंत्री मोदी की यह यात्रा ऐसे समय हो रही है जब भारत इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में अपने सहयोगी देशों के साथ संबंधों को लगातार मजबूत करने पर विशेष ध्यान दे रहा है। भारत की एक्ट ईस्ट नीति और समुद्री क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने की रणनीति के तहत न्यूजीलैंड का महत्व लगातार बढ़ा है। दोनों देशों के बीच व्यापार, निवेश, शिक्षा, कृषि, विज्ञान, प्रौद्योगिकी और रक्षा सहयोग जैसे क्षेत्रों में साझेदारी का दायरा बढ़ाने पर भी विशेष जोर दिया जाएगा।

    दौरे के दौरान दोनों देशों के बीच आर्थिक सहयोग को नई गति देने के लिए विभिन्न संभावनाओं पर विचार होने की उम्मीद है। निवेश बढ़ाने, आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत करने, नवाचार, डिजिटल अर्थव्यवस्था और स्वच्छ ऊर्जा जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर भी चर्चा प्रस्तावित है। इसके अलावा क्षेत्रीय सुरक्षा, समुद्री सहयोग और मुक्त तथा समावेशी इंडो-पैसिफिक क्षेत्र के साझा दृष्टिकोण पर भी दोनों नेताओं के बीच विस्तृत बातचीत होने की संभावना है।

    प्रधानमंत्री मोदी अपने प्रवास के दौरान न्यूजीलैंड के उद्योग जगत, व्यापारिक समुदाय और खेल क्षेत्र के प्रमुख प्रतिनिधियों से भी मुलाकात करेंगे। साथ ही वहां रहने वाले भारतीय समुदाय को संबोधित कर भारत और प्रवासी भारतीयों के बीच संबंधों को और मजबूत करने का संदेश देंगे। न्यूजीलैंड में भारतीय मूल के लोगों की बढ़ती भागीदारी दोनों देशों के सामाजिक और आर्थिक रिश्तों का महत्वपूर्ण आधार मानी जाती है।

    न्यूजीलैंड प्रधानमंत्री मोदी की तीन देशों की विदेश यात्रा का अंतिम पड़ाव है। इससे पहले वह इंडोनेशिया और ऑस्ट्रेलिया का दौरा कर चुके हैं। लगातार तीन महत्वपूर्ण देशों की इस यात्रा को भारत की सक्रिय विदेश नीति और इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में बढ़ती भूमिका के रूप में देखा जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस ऐतिहासिक यात्रा से भारत और न्यूजीलैंड के बीच सहयोग के नए अवसर खुलेंगे तथा दोनों देशों की रणनीतिक साझेदारी आने वाले वर्षों में और अधिक मजबूत होगी।

  • ग्रीस से जर्मनी जा रही फ्लाइट में बड़ा हादसा: उड़ते विमान की खिड़की टूटने से बाहर की ओर खिंचा पर्यटक, आपातकालीन लैंडिंग सफल

    ग्रीस से जर्मनी जा रही फ्लाइट में बड़ा हादसा: उड़ते विमान की खिड़की टूटने से बाहर की ओर खिंचा पर्यटक, आपातकालीन लैंडिंग सफल


    नई दिल्ली ।
    अंतरराष्ट्रीय विमानन क्षेत्र से एक बेहद चौंकाने वाली और रोंगटे खड़े कर देने वाली घटना सामने आई है, जहां ग्रीस से जर्मनी जा रहे एक यात्री विमान में उड़ान के दौरान अचानक बड़ा तकनीकी हादसा हो गया। सफर के दौरान विमान की एक खिड़की टूटकर पूरी तरह बाहर गिर गई, जिसके कारण वहां बैठे एक यात्री का आधा शरीर आसमान में बाहर की तरफ लटक गया। इस भयावह स्थिति के बाद भी यात्री की जान बेहद चमत्कारिक ढंग से बच गई, जिसने विमानन सुरक्षा और आपातकालीन तैयारियों को लेकर एक बार फिर नई बहस छेड़ दी है।

    यह सनसनीखेज वाकया ग्रीस के थेसालॉनिकी शहर से जर्मनी के मेम्मिनजेन जा रही रेयानएयरलाइंस की एक नियमित उड़ान के दौरान पेश आया। उड़ान भरने के कुछ समय बाद जब विमान हवा में था, तभी अचानक एक तेज धमाके जैसी आवाज हुई। ग्रीक मीडिया और तकनीकी रिपोर्टों के अनुसार, विमान के इंजन का एक हिस्सा अचानक टूट गया और हवा के भारी दबाव के कारण वह सीधे जाकर पैसेंजर केबिन की एक खिड़की से टकरा गया। टक्कर इतनी जोरदार थी कि विमान की मजबूत खिड़की उखड़कर हवा में विलीन हो गई।

    खिड़की के टूटते ही विमान के भीतर हवा का दबाव तेजी से कम होने लगा, जिसके कारण वहां बैठे सर्बियाई मूल के एक पर्यटक का सिर और कंधा खिड़की से बाहर की तरफ खिंच गए। इस बेहद गंभीर और जानलेवा स्थिति में यात्री के लिए सबसे बड़ा जीवनरक्षक उसकी सीट बेल्ट साबित हुई। यात्री ने अपनी सुरक्षा बेल्ट को कसकर बांध रखा था, जिसके कारण वह विमान से पूरी तरह बाहर गिरने से बच गया। चीख-पुकार के बीच आसपास बैठे अन्य सहयात्रियों ने तुरंत तत्परता दिखाई और सूझबूझ का परिचय देते हुए उस यात्री को पूरी ताकत से अंदर की तरफ खींच लिया।

    विमान में सवार चश्मदीद यात्रियों ने इस खौफनाक मंजर का अनुभव साझा करते हुए बताया कि घटना के वक्त अधिकांश लोग गहरी नींद में थे। अचानक टायर फटने जैसी एक भीषण आवाज सुनाई दी और केबिन के भीतर तेज बदबू फैल गई। एक महिला यात्री के अनुसार, शुरुआत में ऐसा प्रतीत हुआ जैसे किसी ने विमान का आपातकालीन द्वार खोल दिया हो, लेकिन जब उन्होंने बगल की सीट पर देखा तो वहां एक यात्री हवा में आधा बाहर लटका हुआ था। इस अप्रत्याशित घटना से पूरे विमान में चीख-पुकार मच गई और यात्री बुरी तरह सहम गए।

    हादसे के शिकार हुए सर्बियाई पर्यटक को तुरंत प्राथमिक उपचार दिया गया। विमान के भीतर हवा के घर्षण और मलबे के कारण वह मामूली रूप से झुलस गया है, हालांकि उसकी स्थिति पूरी तरह स्थिर और खतरे से बाहर बताई गई है। घटना की गंभीरता को देखते हुए विमान के पायलटों ने तुरंत नियंत्रण संभाला और आपातकालीन प्रक्रियाओं का पालन करते हुए विमान को वापस ग्रीस के थेसालॉनिकी हवाई अड्डे की तरफ मोड़ दिया, जहां सुरक्षित परिस्थितियों में विमान की इमरजेंसी लैंडिंग कराई गई।

    विमानन कंपनी रेयानएयर ने इस पूरे मामले पर आधिकारिक बयान जारी करते हुए स्थिति को स्पष्ट किया है। कंपनी के प्रवक्ता के मुताबिक, सुरक्षित लैंडिंग के तुरंत बाद सभी यात्रियों को विमान से उतारकर सुरक्षित टर्मिनल में वापस लाया गया। यात्रियों को उनके गंतव्य तक पहुंचाने के लिए एयरलाइंस द्वारा अविलंब एक वैकल्पिक विमान का प्रबंध किया गया, जिसके माध्यम से सभी मुसाफिरों को जर्मनी के लिए रवाना किया गया।

    इस गंभीर घटना के बाद अंतरराष्ट्रीय विमानन सुरक्षा एजेंसियों और संबंधित तकनीकी टीमों ने मामले को अपने हाथ में ले लिया है। प्रारंभिक जांच का मुख्य बिंदु इस बात पर केंद्रित है कि आखिर उड़ान के दौरान इंजन का वह हिस्सा किस तकनीकी खराबी या धातु की थकावट के कारण टूटा, जिसने इतनी बड़ी दुर्घटना का रूप ले लिया। फिलहाल पूरे मामले की विस्तृत और गहन जांच जारी है।

  • होर्मुज को लेकर फिर बढ़ा तनाव….. ईरान ने दूसरा रास्ता बनाया, ट्रंप ने दिया 24 घंटे का अल्टिमेटम

    होर्मुज को लेकर फिर बढ़ा तनाव….. ईरान ने दूसरा रास्ता बनाया, ट्रंप ने दिया 24 घंटे का अल्टिमेटम


    वाशिंगटन।
    होर्मुज (Hormuz) को लेकर अमेरिका और ईरान (America and Iran) में एक बार फिर तनाव बढ़ गया है। पिछले चार दिनों से दक्षिणी तटीय इलाकों में धमाके हो रहे हैं। वहीं ईरान ने भी अमेरिका के सहयोगी खाड़ी देशों में मिसाइल और ड्रोन हमले किए हैं। रिपोर्ट के मुताबिक बंदर अब्बास, केश्म, मूसा और चाबहार जैसी पोर्ट सिटी में भी धमाके की आवाजें सुनी जा रही हैं। दो सप्ताह पहले किया गया समझौता और सीजफायर एक तरह से खटाई में पड़ गया है।

    इस बार लड़ाई होर्मुज को लेकर है। ईरान ने होर्मुज के अंदर एक अलग रास्ता बना दिया है और उसका कहना है कि इसी रास्ते से जहाजों को उसके नियंत्रण में गुजरना है। जबकि अमेरिका एक अलग कॉरिडोर चलाने के प्रयास में है। ऐसे में लड़ाई होर्मुज के अंदर अलग-अलगर रास्तों को लेकर है।

    अमेरिका ने दिया 24 घंटे का अल्टिमेटम
    अमेरिका के सुझाए रास्ते से जब जहाज गुजरते हैं तो ईरान उनपर हमला कर देता है। डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) ने ईरान को धमकी देते हुए कहा है कि होर्मुज को सार्वजनिक तौर पर खुला हुआ डिक्लेयर कर दिया जाए। अगर 24 घंटे के अंदर ऐसा नहीं किया गया तो बहुत बुरा होने वाला है। बता दें कि होर्मुज के रास्ते से ही दुनियाभर के तेल का पांचवां हिस्सा सप्लाई होता है। 28 फरवरी को शुरू हुए युद्ध के बाद समझौता होने तक इस रास्ते में हजारों जहाज फंसे रहे और पूरी दुनिया में ऊर्जा संकट पैदा हो गया।

    अमेरिका ने कहा कि ईरान को यह संदेश क्षेत्रीय मध्यस्थों के जरिए भेज दिया गया है। ऐक्सियस की रिपोर्ट के मुताबिक डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन चाहता है कि ईरान सार्वजनिक तौर पर ऐलान करे कि होर्मुज सबके लिए खुला है। इसके अलावा ईरान कसम खा ले कि वह किसी भी कमर्शियल शिप को निशाना नहीं बनाएगा। अमेरिका अधिकारियों ने कहा, ट्रंप यही चाहते हैं कि होर्मुज के सारे शिपिंग चैनल बिना किसी शुल्क के खोल दिए जाएं।

    अमेरिका ने कहा कि ईरान पिछले सप्ताह हुए समझौते का उल्लंघन कर रहा है। शनिवार को ओमान और ईरान के अधिकारी मस्कट में मुलाकात कर सकते हैं। अमेरिका के अधिकारी भी बैठक में शामिल हो सकते हैं। एक दिन पहले डोनाल्ड ट्रंप ने यह भी कहा कि ईरान ने उनसे बात करने का अनुरोध किया था और वह बात करने के लिए सहमत हो गए हैं।

    ट्रंप का यह बयान अमेरिकी वायुसेना के ईरान के प्रमुख ठिकानों पर कुछ दिन पहले की गई भीषण बमबारी के बाद आया है। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, अमेरिकी लड़ाकू विमानों और मिसाइलों ने ईरान के पश्चिमी हिस्से में स्थित महत्वपूर्ण बिजली उपकरण निर्माण संयंत्रों, बड़े बिजली घरों और खारे पानी को मीठा बनाने वाले तटीय बुनियादी ढांचे को निशाना बनाया। तब अमेरिकी रक्षा मंत्रालय ने दावा किया था कि इस कार्रवाई का उद्देश्य ईरान की उस आर्थिक और तकनीकी क्षमता को पंगु बनाना है जिसका उपयोग सैन्य गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए किया जा सकता है।

  • न्यूयॉर्क में AC पर 'बैन' का खतरा मंडराया, मेयर Mamdani ने दी चेतावनी, मचा हड़कंप

    न्यूयॉर्क में AC पर 'बैन' का खतरा मंडराया, मेयर Mamdani ने दी चेतावनी, मचा हड़कंप


    नई दिल्‍ली । New York इस समय इतिहास की सबसे भीषण गर्मी से जूझ रहा है. तापमान 100 डिग्री और हीट इंडेक्स 112 डिग्री तक पहुंचने का अनुमान है. इस बीच, शहर के नए मेयर ज़ोहरान मम्दानी (Zohran Mamdani) ने न्यू यॉर्कर्स के लिए एक बेहद जरूरी और कड़ा संदेश जारी किया है. यूरोप में हाल ही में आए AC नियमों के बाद अब न्यू यॉर्क का पावर ग्रिड भी खतरे में है. मेयर ने साफ कहा है कि अगर ग्रिड को बचाना है और लोगों की जान सुरक्षित रखनी है, तो AC चलाने के तरीकों में तुरंत बदलाव करना होगा.

    Europe का AC नियम और New York का संकट
    यूरोपियन कमीशन ने हाल ही में एक नया प्रस्ताव पेश किया है, जिसके तहत AC इंस्टॉल करने वालों को ग्राहकों को एनर्जी एफिशिएंसी की पूरी जानकारी देनी होगी. फ्रांस और स्पेन जैसे देशों में रिकॉर्ड गर्मी के कारण AC की बिक्री अचानक बहुत बढ़ गई है. अब ठीक वैसा ही संकट न्यू यॉर्क के सामने खड़ा हो गया है. न्यू यॉर्क का पावर ग्रिड इस समय शहर को ठंडा रखने के लिए अपनी क्षमता से ज्यादा काम कर रहा है.

    Mayor Mamdani का ’78 डिग्री रूल’
    मेयर ज़ोहरान मम्दानी ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक पोस्ट के जरिए लोगों से अपील की है. उन्होंने लिखा कि न्यू यॉर्क में बाहर बहुत गर्मी है और हमारा पावर ग्रिड ओवरटाइम काम कर रहा है. मेयर ने सभी नागरिकों से अपने AC को 78 डिग्री पर सेट करने की अपील की है. इसके साथ ही उन्होंने इस्तेमाल में न आने वाली लाइटों और इलेक्ट्रॉनिक्स को बंद करने और प्लग निकालने के लिए कहा है. मेयर का मानना है कि ग्रिड स्थिर रहेगा तो AC चलता रहेगा और लोगों की जान बचाई जा सकेगी.

    सरकार खुद कर रही है नियमों का पालन
    इस संकट से निपटने के लिए सिर्फ आम जनता ही नहीं, बल्कि खुद न्यू यॉर्क प्रशासन भी कड़े कदम उठा रहा है. मेयर ने बताया कि सभी सरकारी इमारतों में भी 78 डिग्री का नियम लागू कर दिया गया है. पीक ऑवर्स के दौरान सरकारी दफ्तरों की लाइटें डिम या पूरी तरह बंद की जा रही हैं. गैर-जरूरी उपकरणों को पावर डाउन किया जा रहा है. प्रशासन ने न्यू यॉर्क की प्राइवेट कंपनियों से भी अपील की है कि वे इस संकट में शहर का साथ दें और बिजली की खपत कम करें.

    112 डिग्री का टॉर्चर और हीट इमरजेंसी
    नेशनल वेदर सर्विस ने न्यू यॉर्क सिटी के लिए ‘एक्सट्रीम हीट वॉर्निंग’ जारी की है. मौसम वैज्ञानिकों के मुताबिक, यह पिछले एक दशक की सबसे खतरनाक हीटवेव हो सकती है. गर्मी का अहसास (Heat Index) 112 डिग्री तक जा सकता है. इसके लिए शहर में ‘हीट इमरजेंसी प्लान’ एक्टिव कर दिया गया है. प्रशासन ने उन लोगों के लिए कूलिंग सेंटर्स खोले हैं, जिनके घरों में AC की सुविधा नहीं है. बुजुर्गों, बच्चों और सांस के मरीजों को घरों के अंदर ही रहने की सलाह दी गई है.

    मेयर की कार्यशैली पर खड़े हुए सवाल
    एक तरफ जहां मेयर मम्दानी शहर को गर्मी से बचाने में जुटे हैं, वहीं दूसरी तरफ न्यू यॉर्क का बिजनेस माहौल गरमा गया है. दुनिया के सबसे अमीर कारोबारियों में शामिल जेफ बेजोस (Jeff Bezos) ने न्यू यॉर्क के स्कूल सिस्टम पर सवाल उठाए हैं, जिसके बाद मेयर के साथ उनकी बहस छिड़ गई है. शार्क टैंक के केविन ओ’लेरी ने भी बेजोस का समर्थन करते हुए न्यू यॉर्क को ‘कम्पलीट डिजास्टर’ करार दिया है. ब्लैकरॉक के लैरी फिंक ने भी चेतावनी दी है कि भारी टैक्स और खराब माहौल के कारण अमीर लोग न्यू यॉर्क छोड़ सकते हैं, जिससे शहर को बड़ा आर्थिक नुकसान होगा.

  • 'भारत आकर लगा जैसे अपने घर में हूं, हमारा डीएनए एक जैसा है', अफगान मंत्री ने की भारत की तारीफ

    'भारत आकर लगा जैसे अपने घर में हूं, हमारा डीएनए एक जैसा है', अफगान मंत्री ने की भारत की तारीफ


    नई दिल्ली। भारत दौरे पर आए अफगानिस्तान के कृषि, सिंचाई एवं पशुपालन मंत्री मौलवी अताउल्लाह ओमारी ने नई दिल्ली में आयोजित एक व्यापारिक कार्यक्रम के दौरान भारत के आतिथ्य और दोनों देशों के ऐतिहासिक संबंधों की खुलकर सराहना की। उन्होंने कहा कि भारत पहुंचने के बाद उन्हें ऐसा महसूस हुआ जैसे वह अपने ही देश और अपने लोगों के बीच हों। साथ ही उन्होंने दोनों देशों के बीच गहरे सांस्कृतिक संबंधों का उल्लेख करते हुए कहा कि “हमारा डीएनए एक है।”

    मौलवी अताउल्लाह ओमारी पहली बार भारत की यात्रा पर आए हैं। विदेश मंत्रालय के सहयोग से PHDCCI द्वारा आयोजित भारत-अफगानिस्तान व्यापार अवसर उद्योग इंटरैक्टिव सेशन में उन्होंने कहा कि भारत सरकार, विदेश मंत्री और यहां के लोगों ने उनका बेहद गर्मजोशी से स्वागत किया। उनके अनुसार यह सम्मान केवल उनका नहीं, बल्कि पूरे अफगानिस्तान के लोगों के लिए सकारात्मक संदेश है।

    भारत-अफगानिस्तान संबंधों पर दिया जोर
    अपने संबोधन में ओमारी ने कहा कि भारत और अफगानिस्तान के बीच सदियों पुराने सांस्कृतिक और ऐतिहासिक संबंध हैं। उन्होंने कहा कि भारत में उन्हें अपनापन महसूस हुआ और दोनों देशों के लोगों के बीच गहरा जुड़ाव दिखाई देता है। उनके अनुसार यह रिश्ते भविष्य में भी सहयोग को नई मजबूती दे सकते हैं।

    कृषि क्षेत्र में भारत से मांगा सहयोग
    अफगान मंत्री ने कहा कि उनके देश की लगभग 80 प्रतिशत आबादी कृषि, पशुपालन और सिंचाई पर निर्भर है। उन्होंने बताया कि अफगानिस्तान अपने कृषि क्षेत्र को आधुनिक तकनीक से जोड़ना चाहता है और इस दिशा में भारत की विशेषज्ञता महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। उन्होंने कृषि क्षेत्र के आधुनिकीकरण और तकनीकी सहयोग की आवश्यकता पर बल दिया।

    संयुक्त समिति की बैठक के बाद आया बयान
    ओमारी का यह बयान भारत और अफगानिस्तान के बीच संयुक्त समिति की चौथी बैठक के अगले दिन सामने आया। नई दिल्ली में आयोजित इस बैठक की सह-अध्यक्षता भारत की ओर से विदेश मंत्रालय के संयुक्त सचिव एम. आनंद प्रकाश और अफगानिस्तान की ओर से विदेश मंत्रालय के महानिदेशक शुएब बयारलाई ने की।

    कई अहम क्षेत्रों में सहयोग पर चर्चा
    विदेश मंत्रालय के अनुसार, बैठक में मानवीय सहायता, विकास साझेदारी, खाद्य सुरक्षा, स्वास्थ्य सेवाएं, शिक्षा, खेल, व्यापार, वीजा सुविधा और क्षेत्रीय संपर्क जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तार से चर्चा हुई। भारत ने दोहराया कि वह अफगानिस्तान के विकास और वहां के लोगों के कल्याण के लिए सहयोग जारी रखने के लिए प्रतिबद्ध है।