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  • तेहरान में अनूठा विरोध… ट्रंप को पिंजरे में कैद कर ईरानी जता रहे अपना गुस्सा…

    तेहरान में अनूठा विरोध… ट्रंप को पिंजरे में कैद कर ईरानी जता रहे अपना गुस्सा…


    तेहरान।
    ईरान और अमेरिका (Iran and America) के बीच बढ़ता तनाव अब केवल कूटनीतिक बयानों और सैन्य सीमाओं तक सीमित नहीं रहा, बल्कि तेहरान की सड़कों पर एक अनोखे विरोध के रूप में सामने आया है। ईरान की राजधानी के सबसे व्यस्त इलाकों में शुमार तज्रीश स्क्वायर पर एक विशाल इलेक्ट्रॉनिक बिलबोर्ड (Electronic billboard) से लोहे का पिंजरा लटकाया गया है, जिसमें अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (American President Donald Trump) का हमशक्ल बंद है।

    ईरान सरकार के तेहरान ब्यूटिफिकेशन ऑर्गनाइजेशन की तरफ से शुरू किए गए 15 दिवसीय इस अभियान का मकसद अमेरिकी हमले की ओर दुनिया का ध्यान खींचना है। विश्लेषकों का मानना है कि अमेरिकी हमलों और ईरान को पाषाण युग में धकेलने जैसे बयानों ने आम ईरानी नागरिकों के गुस्से को भड़का दिया है। अमेरिकी सैन्य ताकत के खिलाफ उपजी एकजुटता को हवा देने के लिए ऐसे प्रदर्शनों को एक नया मनोवैज्ञानिक हथियार माना जा रहा है।

    मास्क और विग पहने कलाकार दिन-रात पिंजरे में रहता है, जहां उसके रहने के लिए बिस्तर, टॉयलेट और सिंक की व्यवस्था की गई है। यह कभी सलाखों को झकझोरता है, तो कभी पॉप म्यूजिक पर डांस करता है।


    यह संदेश न देखना अपराध…

    इस नाटकीय प्रदर्शन के पीछे एक गंभीर राजनीतिक संदेश छिपा है। पिंजरे के पीछे बिलबोर्ड पर लगातार उन तस्वीरों का प्रसारण हो रहा है, जो पिछले महीने ईरान के कुहस्तक कस्बे में एक शादी समारोह पर अमेरिकी बमबारी के भीषण दृश्यों को दिखाती हैं। तस्वीरों के साथ एक पीले रंग की क्राइम सीन टेप पर । लिखा गया है-इस दृश्य को न देखना एक अपराध है।

    चौराहे पर कई जगह पर ऐसे होर्डिंग भी लगाए गए हैं जिसमें ट्रंप के अलावा इस्राइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू को निशाना बनाया गया है।


    हार्न बजाकर जता रहे समर्थन

    लाइव प्रदर्शन को देखने के लिए राहगीरों और वाहन चालकों की भारी भीड़ जुट रही है। लोग गाड़ियां रोककर वीडियो बना रहे हैं और हॉर्न बजाकर अपना समर्थन जता रहे हैं। अमूमन तेहरान में ऐसे प्रदर्शनों के लिए इंकलाब स्क्वायर का इस्तेमाल होता रहा है, लेकिन इस बार व्यापारिक और व्यस्त इलाके तज्जीश स्क्वायर को चुना गया है।

  • दुनिया का सबसे प्रदूषित शहर रहा पाकिस्तान का लाहौर…. खतरनाक स्तर पर पहुंची वायु गुणवत्ता

    दुनिया का सबसे प्रदूषित शहर रहा पाकिस्तान का लाहौर…. खतरनाक स्तर पर पहुंची वायु गुणवत्ता


    लाहौर।
    पाकिस्तान (Pakistan) का लाहौर (Lahore) शुक्रवार को दुनिया का सर्वाधिक प्रदूषित शहर (Most Polluted City) रहा। एक वायु गुणवत्ता निगरानी मंच के अनुसार, शहर में वायु गुणवत्ता खतरनाक स्तर पर पहुंच गई और वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) लेवल 410 दर्ज किया गया। एक्यूआई वायु प्रदूषण मापने का संख्यात्मक पैमाना है। इसका स्तर जितना अधिक होता है, हवा की गुणवत्ता उतनी ही खराब होती है और स्वास्थ्य संबंधी जोखिम बढ़ जाते हैं।

    स्विट्जरलैंड के निगरानी मंच आईक्यूएयर के पैमाने के अनुसार, 300 से अधिक एक्यूआई को ‘खतरनाक’ श्रेणी में रखा जाता है। आईक्यूएयर की रिपोर्ट के अनुसार, लाहौर में पीएम2.5 प्रदूषकों की सांद्रता विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के वार्षिक दिशानिर्देश मूल्य से 45.2 गुना अधिक थी।

    पीएम2.5 का मतलब 2.5 माइक्रोमीटर या उससे कम व्यास वाले बारीक कणों से है। ये कण फेफड़ों में गहराई तक पहुंच सकते हैं और रक्तप्रवाह में प्रवेश कर सकते हैं। इनके लंबे समय तक संपर्क में रहने से स्वास्थ्य संबंधी गंभीर समस्याएं हो सकती हैं।

    पंजाब प्रांत की सरकार के अनुसार, पाकिस्तान के पंजाब प्रांत के लाहौर और अन्य हिस्सों में हर साल अक्टूबर से फरवरी के बीच धुंध छाने की समस्या रहती है। हाल के वर्षों में वायु प्रदूषण का बढ़ता स्तर इस प्रांत में सार्वजनिक स्वास्थ्य और पर्यावरण के लिए बड़ी चिंता बनकर उभरा है।

  • तिब्बत में फिर महसूस किए भूकंप के झटके…. कुछ घंटों में तीन बार कांपी धरती

    तिब्बत में फिर महसूस किए भूकंप के झटके…. कुछ घंटों में तीन बार कांपी धरती


    ल्हासा।
    तिब्बत (Tibet) में शनिवार, 24 अक्तूबर 2026 को कुछ ही घंटों के भीतर तीन बार भूकंप (Earthquakes) दर्ज किए गए। राष्ट्रीय भूकंप विज्ञान केंद्र (एनसीएस) National Center for Seismology – NCS) की ओर से जारी जानकारी के अनुसार, इन भूकंपों की तीव्रता (Earthquakes Intensity) 4.0, 4.6 और 4.5 रही। इनमें सबसे तेज झटका 4.6 तीव्रता का था, जिसका केंद्र जमीन से 10 किलोमीटर की गहराई पर दर्ज किया गया। एनसीएस के आंकड़ों के मुताबिक, तीनों भूकंप भारतीय समयानुसार रात 1 बजे से सुबह 6 बजे के बीच दर्ज हुए।


    कुछ घंटों में तीन बार दर्ज हुए भूकंप

    नेशनल सेंटर फॉर सीस्मोलॉजी के अनुसार, तिब्बत में भूकंपीय गतिविधियों का ब्योरा इस प्रकार है:
    – पहला भूकंप: रात 1 बजकर 8 मिनट पर 4.0 तीव्रता का झटका दर्ज किया गया। इसकी गहराई 15 किलोमीटर रही।
    – दूसरा भूकंप: रात 2 बजकर 7 मिनट पर 4.6 तीव्रता का भूकंप आया। इसका केंद्र 10 किलोमीटर की गहराई पर दर्ज हुआ।
    – तीसरा भूकंप: सुबह 5 बजकर 38 मिनट पर 4.5 तीव्रता का झटका दर्ज किया गया। इसकी गहराई भी 10 किलोमीटर रही।


    कल भी तिब्बत में आया था भूकंप, 16 की गई थी जान

    इससे पहले गुरुवार शाम आए 7 तीव्रता के शक्तिशाली भूकंप ने भारी तबाही मचाई थी। इस प्राकृतिक आपदा में कम से कम 16 लोगों की मौत हो गई, जबकि 76 लोग घायल हुए हैं। चीन की सरकारी मीडिया के अनुसार, उत्तरी तिब्बत के नागचू शहर में भूकंप के झटकों से सैकड़ों मकान ढह गए।

    नागचू के अधिकारियों के मुताबिक, भूकंप के कारण 339 घर और पशुओं को रखने के 20 बाड़े गिर गए। घटना के बाद प्रभावित इलाकों में राहत और बचाव अभियान शुरू कर दिया गया। इस काम में 1,600 से अधिक बचावकर्मियों को लगाया गया है। प्रभावित लोगों की मदद के लिए राहत सामग्री भी भेजी गई है। इसमें करीब 3,000 तंबू, 1,000 तैयार आवासीय इकाइयां, फोल्डिंग बेड, टॉर्च और सर्दियों में काम आने वाले कपड़े शामिल हैं।


    चीन में भी 4.6 तीव्रता का भूकंप

    इसके अलावा चीन में भी भारतीय समयानुसार सुबह 4 बजकर 9 मिनट पर 4.6 तीव्रता का भूकंप दर्ज किया गया। भूकंप का केंद्र जमीन से 10 किलोमीटर की गहराई पर था। इसका केंद्र 32.920 डिग्री उत्तरी अक्षांश और 93.761 डिग्री पूर्वी देशांतर पर स्थित था।


    क्यों आते हैं भूकंप?

    पृथ्वी की बाहरी परत कई बड़ी और छोटी टेक्टोनिक प्लेटों में बंटी हुई है। ये प्लेटें लगातार गति करती रहती हैं। जब इनके बीच दबाव बढ़ता है और चट्टानों में जमा ऊर्जा अचानक निकलती है, तो भूकंपीय तरंगें पैदा होती हैं। इन्हीं तरंगों से धरती की सतह पर कंपन महसूस होता है।

    भूकंप का असर उसके केंद्र से दूरी, गहराई, तीव्रता और स्थानीय जमीन की प्रकृति पर निर्भर करता है। अधिक तीव्रता वाले भूकंप के झटके दूर तक महसूस किए जा सकते हैं, लेकिन नुकसान की मात्रा केवल तीव्रता से तय नहीं होती।


    भूकंप की तीव्रता कैसे मापी जाती है?

    भूकंप की तीव्रता और उससे निकलने वाली ऊर्जा का आकलन आधुनिक भूकंपमापी उपकरणों और वैज्ञानिक माप-पद्धतियों से किया जाता है। समाचारों में अक्सर भूकंप का परिमाण बताया जाता है, जिसे कई बार सामान्य बोलचाल में रिक्टर स्केल की तीव्रता कहा जाता है। वैज्ञानिक रिपोर्टों में इसकी गणना के लिए अलग-अलग पैमानों का इस्तेमाल हो सकता है।

  • फ्रांस में आज बड़े विरोध-प्रदर्शन की तैयारी…., सुरक्षा के कड़े इंतजाम…. 70 हजार पुलिस जवान तैनात

    फ्रांस में आज बड़े विरोध-प्रदर्शन की तैयारी…., सुरक्षा के कड़े इंतजाम…. 70 हजार पुलिस जवान तैनात


    पेरिस।
    फ्रांस (France) में आज शनिवार को एक बार फिर बड़े विरोध प्रदर्शन (Protest) होने जा रहे हैं. पिछले सप्ताह देश में हुई हिंसा और लूटपाट को देखते हुए प्रशासन ने सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी है. सरकार की कोशिश है कि इस बार प्रदर्शन के दौरान हिंसा और दंगों जैसी स्थिति दोबारा न बने. इसके लिए देशभर में करीब 70 हजार पुलिसकर्मियों (70,000 Police Personnel) को तैनात किया गया है.

    फ्रांस के गृह मंत्रालय के मुताबिक, शनिवार को होने वाले प्रदर्शनों के दौरान विशेष पुलिस बल, हेलीकॉप्टर, बख्तरबंद वाहन, पुलिस डॉग स्क्वॉड (Police Dog Squad) और पानी की बौछार करने वाली गाड़ियां भी तैनात रहेंगी. प्रशासन ने किसी भी तरह की हिंसा और तोड़फोड़ से सख्ती से निपटने की तैयारी की है।

    गृह मंत्री लॉरेंट नुनेज (Home Minister Laurent Nuñez) ने शुक्रवार को प्रदर्शनकारियों को चेतावनी देते हुए कहा कि सरकार तोड़फोड़ करने वालों के खिलाफ किसी तरह की नरमी नहीं बरतेगी. उन्होंने कहा कि हिंसा और नुकसान पहुंचाने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।


    आज पेरिस में होगा बड़ा प्रदर्शन

    शनिवार दोपहर पेरिस में बड़े प्रदर्शन का आह्वान किया गया है. फ्रांस की मुख्य छात्र यूनियन UNEF ने इसका आयोजन किया है. देश की बड़ी ट्रेड यूनियन CGT ने भी इसमें शामिल होने का ऐलान किया है. किसानों, जलवायु कार्यकर्ताओं और येलो वेस्ट आंदोलन से जुड़े लोगों के भी प्रदर्शन में शामिल होने की उम्मीद है।

    पेरिस में होने वाले इस प्रदर्शन को प्रशासन ने मंजूरी दी है. हालांकि, राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने शनिवार को ट्रेड यूनियनों से जुड़े प्रदर्शनों के अलावा दूसरे विरोध प्रदर्शनों पर रोक लगा दी है. सरकार का कहना है कि इसका मकसद देश में बढ़ रही अशांति को नियंत्रित करना है।


    पिछले सप्ताह हुई थी हिंसा और लूटपाट

    फ्रांस में पिछले कुछ हफ्तों से शिक्षा व्यवस्था, रोजगार के खराब अवसर और बढ़ती महंगाई को लेकर विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं. शुरुआत में ये प्रदर्शन शांतिपूर्ण थे और इनमें बड़ी संख्या में छात्र शामिल थे. लेकिन बाद में कई जगहों पर हालात बिगड़ गए और हिंसा शुरू हो गई. पिछले सप्ताह हुए प्रदर्शनों के दौरान देश के कई हिस्सों में हिंसा और लूटपाट की घटनाएं सामने आई थीं. इसे हाल के वर्षों में देश में हुई सबसे गंभीर और व्यापक हिंसा में से एक माना गया।


    70 हजार पुलिसकर्मियों की तैनाती

    रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, शनिवार को होने वाले प्रदर्शनों के लिए फ्रांस में करीब 70 हजार पुलिसकर्मियों को तैनात किया गया है. पुलिस के साथ विशेष सुरक्षा इकाइयों और भारी हथियारों से लैस मोबाइल दस्तों को भी तैनात किया गया है.अधिकारियों को आशंका है कि कट्टरपंथी समूह और कुछ युवा हिंसा और लूटपाट का फायदा उठाकर स्थिति बिगाड़ने की कोशिश कर सकते हैं. इसी वजह से सुरक्षा बलों की बड़े स्तर पर तैनाती की गई है।


    प्रवासियों और कट्टरपंथी इस्लाम पर आरोप

    फ्रांस में जारी हिंसा को लेकर कुछ दक्षिणपंथी नेताओं ने प्रवासियों और कट्टरपंथी इस्लाम को जिम्मेदार ठहराया है. हालांकि, राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने इन आरोपों को खारिज किया है. सरकार का पूरा फोकस अब शनिवार को होने वाले प्रदर्शनों के दौरान कानून-व्यवस्था बनाए रखने पर है. पुलिस के अलावा हेलीकॉप्टर, बख्तरबंद वाहन और पानी की बौछार करने वाली गाड़ियों को भी तैयार रखा गया है।


    पेरिस में सुरक्षा बढ़ाई गई

    प्रदर्शनों के बीच पेरिस में सुरक्षा व्यवस्था और बढ़ा दी गई है. शुक्रवार को शहर के कई हिस्सों में पुलिस की तैनाती देखी गई. फ्रांस की आतंकवाद रोधी व्यवस्था के तहत पेरिस में आम तौर पर गश्त करने वाले सेना के जवानों की संख्या भी बढ़ाई जा रही है. इसका मकसद पुलिस को स्थायी सुरक्षा ड्यूटी से मुक्त करना है, ताकि उन्हें प्रदर्शन वाले इलाकों में तैनात किया जा सके. प्रशासन अब शनिवार को होने वाले प्रदर्शनों के दौरान किसी भी तरह की हिंसा और लूटपाट को रोकने के लिए पूरी तरह तैयार है।

  • ईरान के बाद क्यूबा पर ट्रंप का बड़ा दांव! बोले समझौता कराने भेजेंगे मार्को रुबियो CIA के साथ मिलकर बदलाव लाने की अपील

    ईरान के बाद क्यूबा पर ट्रंप का बड़ा दांव! बोले समझौता कराने भेजेंगे मार्को रुबियो CIA के साथ मिलकर बदलाव लाने की अपील


    नई दिल्ली । अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के बाद क्यूबा को लेकर अपनी रणनीति के संकेत देकर अंतरराष्ट्रीय राजनीति में नई हलचल पैदा कर दी है। ट्रंप ने कहा है कि ईरान से निपटने के बाद अमेरिका क्यूबा के मामले पर ध्यान देगा। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि क्यूबा के साथ समझौते को आगे बढ़ाने के लिए अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो को जिम्मेदारी सौंपी जा सकती है। इस बयान के बाद सवाल उठने लगे हैं कि क्या अमेरिका अब क्यूबा की कम्युनिस्ट सरकार पर दबाव बढ़ाने की तैयारी में है या दोनों देशों के बीच किसी नए समझौते का रास्ता खुलने वाला है।

    फ्लोरिडा में एक रैली को संबोधित करते हुए ट्रंप ने कहा कि ईरान से लौटते समय वे क्यूबा के मामले को देखेंगे। उनके इस बयान को क्यूबा के साथ संभावित समझौते की दिशा में एक महत्वपूर्ण संकेत माना जा रहा है। ट्रंप पहले भी क्यूबा के साथ समझौता होने की संभावना जता चुके हैं। उन्होंने दावा किया था कि दोनों देशों के बीच जल्द समझौता हो सकता है और इसके लिए सैन्य कार्रवाई की जरूरत नहीं पड़ेगी। हालांकि अभी तक किसी औपचारिक समझौते की घोषणा नहीं हुई है। इसलिए यह स्पष्ट नहीं है कि अमेरिका किन शर्तों पर क्यूबा के साथ बातचीत आगे बढ़ाना चाहता है।

    इस पूरे घटनाक्रम में अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो की भूमिका भी महत्वपूर्ण हो गई है। रुबियो ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर क्यूबा के लोगों को संबोधित करते हुए बदलाव की अपील की। उन्होंने कहा कि जो लोग क्यूबा में बदलाव चाहते हैं उनके लिए यह सही समय है। रुबियो ने क्यूबा की व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए टूटे वादों भ्रष्टाचार और कुछ चुनिंदा लोगों की सुख सुविधाओं का जिक्र किया। उनके बयान से संकेत मिलता है कि अमेरिकी प्रशासन क्यूबा की मौजूदा राजनीतिक व्यवस्था में बदलाव के लिए दबाव बनाने की रणनीति पर विचार कर रहा है।

    रुबियो के बयान में CIA के साथ गुप्त साझेदारी का जिक्र भी चर्चा का विषय बना है। रिपोर्ट के मुताबिक उन्होंने क्यूबा में बदलाव चाहने वाले लोगों से अमेरिकी खुफिया एजेंसी के साथ सहयोग करने की अपील की। इस बयान को लेकर कई सवाल खड़े हो सकते हैं क्योंकि किसी दूसरे देश के आंतरिक राजनीतिक मामलों में बाहरी हस्तक्षेप का मुद्दा संवेदनशील माना जाता है। हालांकि उपलब्ध जानकारी के आधार पर यह स्पष्ट नहीं है कि इस कथित सहयोग का स्वरूप क्या होगा और क्या इसके तहत कोई औपचारिक पहल की जा रही है।

    क्यूबा और अमेरिका के बीच लंबे समय से तनावपूर्ण संबंध रहे हैं। अमेरिका छह दशक से अधिक समय से क्यूबा पर विभिन्न प्रतिबंध लगाता रहा है। इस साल की शुरुआत में लगाए गए तेल प्रतिबंधों के बाद क्यूबा की आर्थिक मुश्किलें और बढ़ने की बात सामने आई है। वहां ईंधन की कमी और कमजोर बुनियादी ढांचे के कारण बिजली कटौती जैसी समस्याएं भी बनी हुई हैं। इन परिस्थितियों में अमेरिकी दबाव क्यूबा की अर्थव्यवस्था और आम नागरिकों की जिंदगी पर असर डाल सकता है।

    क्यूबा पर अमेरिकी दबाव बढ़ने की एक अन्य वजह वेनेजुएला से जुड़े घटनाक्रम को भी माना जा रहा है। खबर के मुताबिक वेनेजुएला के तत्कालीन राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को अमेरिकी सेना द्वारा पकड़े जाने के बाद क्यूबा को लेकर ट्रंप प्रशासन का रुख और सख्त हुआ है। हालांकि अमेरिका की आगे की कार्रवाई को लेकर अभी कोई स्पष्ट समयसीमा सामने नहीं आई है।

    दूसरी ओर क्यूबा के विदेश मंत्री पहले ही संयुक्त राष्ट्र महासभा में कह चुके हैं कि उनका देश अमेरिका के साथ बातचीत के लिए तैयार है। ऐसे में आने वाले दिनों में दोनों देशों के बीच कूटनीतिक बातचीत की संभावनाओं पर नजर रहेगी। फिलहाल ट्रंप के बयान और रुबियो की अपील ने क्यूबा को अमेरिकी विदेश नीति के केंद्र में ला दिया है। अब देखना होगा कि ईरान के मुद्दे के बाद अमेरिका वास्तव में बातचीत का रास्ता अपनाता है या क्यूबा पर प्रतिबंधों और राजनीतिक दबाव को और तेज करता है।

  • ट्रंप की ईरान पर फिर हमले की धमकी, तेहरान की चेतावनी- समुद्र के नीचे इंटरनेट केबल काट देंगे

    ट्रंप की ईरान पर फिर हमले की धमकी, तेहरान की चेतावनी- समुद्र के नीचे इंटरनेट केबल काट देंगे


    नई दिल्ली। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के ईरान के खिलाफ दोबारा सैन्य कार्रवाई के संकेत के बाद पश्चिम एशिया में तनाव बढ़ने की आशंका है। ट्रंप ने कहा है कि अमेरिका ईरान पर फिर हमला कर सकता है। इसके जवाब में ईरानी सुरक्षा अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि अगर अमेरिका और इजराइल ने दोबारा हमला किया, तो ईरान खाड़ी में समुद्र के नीचे बिछी संचार केबल को निशाना बना सकता है। इससे क्षेत्र में इंटरनेट कनेक्टिविटी और वैश्विक कारोबार प्रभावित होने का खतरा है।

    रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, दो वरिष्ठ ईरानी सुरक्षा अधिकारियों ने समुद्र के नीचे बिछी संचार केबल को निशाना बनाने की योजना की जानकारी दी है। एक अधिकारी ने कहा कि ईरान पर हमला होने की स्थिति में समुद्र के नीचे की केबल और सैन्य ठिकानों समेत कोई भी जगह सुरक्षित नहीं रहेगी। अधिकारी ने दावा किया कि ईरान की इन केबल तक पहुंच है और वह उन्हें नष्ट कर सकता है।

    ट्रंप बोले- एक और ‘लिटिल एपिक फ्यूरी’ कर सकते हैं

    ट्रंप ने शुक्रवार को फ्लोरिडा में एक रैली के दौरान कहा कि अमेरिका एक और ‘लिटिल एपिक फ्यूरी’ कर सकता है। यह नाम 28 फरवरी को शुरू हुए ईरान के खिलाफ अमेरिकी सैन्य अभियान के लिए इस्तेमाल किया गया था। हालांकि, ट्रंप ने यह स्पष्ट नहीं किया कि नई कार्रवाई कब और किस तरह की हो सकती है।

    इससे पहले भी ट्रंप ने कहा था कि अमेरिका युद्ध को बहुत जल्दी खत्म कर सकता है। हालांकि, उन्होंने यह सवाल भी उठाया कि क्या युद्ध को तत्काल समाप्त किया जाना चाहिए या फिर इसे धीरे-धीरे कमजोर पड़ने देना चाहिए। ट्रंप के मुताबिक, अमेरिका के पास संघर्ष खत्म करने की क्षमता है, लेकिन यह फैसला करना बाकी है कि ऐसा कब किया जाए।

    उन्होंने यह भी दावा किया कि होर्मुज जलडमरूमध्य से तेल की आवाजाही जारी है और अमेरिका को वह सब मिल रहा है, जिसकी उसे जरूरत है।

    ट्रंप पहले भी युद्ध के उद्देश्यों और उसकी समयसीमा को लेकर अलग-अलग बयान दे चुके हैं। इसी महीने उन्होंने कहा था कि अगले महीने होने वाले अमेरिकी मध्यावधि चुनाव से पहले अमेरिका ईरान पर हमला नहीं करेगा। इन चुनावों में अमेरिकी संसद पर नियंत्रण को लेकर फैसला होना है।

    तुर्की और फ्रांस ने नई सैन्य कार्रवाई से किया आगाह

    ईरान पर दोबारा हमले की आशंका के बीच कई देशों ने तनाव कम करने की अपील की है। शुक्रवार को इस्तांबुल में ब्रिटेन, फ्रांस, जर्मनी, तुर्की, मिस्र, पाकिस्तान, सऊदी अरब और इटली के प्रतिनिधियों की बैठक हुई।

    तुर्की के विदेश मंत्री हाकान फिदान ने कहा कि ईरान पर नया हमला तनाव बढ़ा सकता है और युद्ध पूरे क्षेत्र में फैलने का खतरा है। उन्होंने संघर्ष खत्म करने के लिए बातचीत और कूटनीति को जरूरी बताया।

    फ्रांस के विदेश मंत्री जीन-नोएल बारो ने भी नई सैन्य कार्रवाई से बचने की चेतावनी दी। उन्होंने कहा कि ईरान और अमेरिका के बीच तनाव बढ़ने से किसी को फायदा नहीं होगा और इसका तेल की कीमतों पर गंभीर असर पड़ सकता है।

    वहीं, जर्मनी के विदेश मंत्री योहान वाडेफुल ने कहा कि जर्मनी, फ्रांस और ब्रिटेन ईरान के साथ बातचीत के लिए तैयार हैं, ताकि वह परमाणु हथियार हासिल न करे।

    होर्मुज के नीचे मौजूद 7 इंटरनेट केबल निशाने पर

    ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड्स के राजनीतिक मामलों के उप प्रमुख यदोल्लाह जावानी ने भी चेतावनी दी है कि अगर ईरान के बुनियादी ढांचे पर हमला हुआ, तो ईरान होर्मुज जलडमरूमध्य के नीचे मौजूद सात प्रमुख इंटरनेट केबल को निशाना बना सकता है।

    समुद्र के नीचे बिछी केबल वैश्विक इंटरनेट व्यवस्था की रीढ़ हैं। इनके जरिए दुनिया के करीब 99 प्रतिशत इंटरनेट ट्रैफिक का संचार होता है। हालांकि, होर्मुज जलडमरूमध्य से अंतरराष्ट्रीय बैंडविड्थ का एक प्रतिशत से भी कम हिस्सा गुजरता है। इसके बावजूद इस क्षेत्र में कई केबल कटने से इंटरनेट सेवाओं और संचार व्यवस्था पर असर पड़ सकता है।

    केबल क्षतिग्रस्त होने पर इंटरनेट की रफ्तार धीमी हो सकती है। इसके अलावा वित्तीय लेनदेन, ऑनलाइन कारोबार और क्लाउड सेवाओं में भी बाधा आने की आशंका है। असर कितना व्यापक होगा, यह इस बात पर निर्भर करेगा कि इंटरनेट ट्रैफिक को वैकल्पिक नेटवर्क पर कितनी जल्दी भेजा जा सकता है और उन नेटवर्क में कितनी अतिरिक्त क्षमता उपलब्ध है।

    युद्ध की स्थिति में केबल की मरम्मत भी मुश्किल हो सकती है। समुद्री क्षेत्र में सुरक्षा जोखिम, बीमा लागत में बढ़ोतरी और मरम्मत के लिए अनुमति मिलने में देरी से बहाली का काम प्रभावित हो सकता है।

    खाड़ी देशों के टेक्नोलॉजी निवेश पर भी खतरा

    खाड़ी के देश तेल पर अपनी निर्भरता कम करने और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के बड़े केंद्र बनने के लिए तकनीकी बुनियादी ढांचे में भारी निवेश कर रहे हैं। अमेरिकी टेक्नोलॉजी कंपनियों के साथ उनकी साझेदारी भी बढ़ी है।

    रिपोर्ट के मुताबिक, मार्च में ईरान के हमलों के दौरान संयुक्त अरब अमीरात में अमेजन वेब सर्विसेज की दो सुविधाओं को नुकसान पहुंचने की बात कही गई थी। बहरीन में भी उसकी एक सुविधा के पास बुनियादी ढांचे को नुकसान हुआ था।

    हालांकि, इंटरनेट ट्रैफिक के लिए जमीन के रास्ते वैकल्पिक नेटवर्क मौजूद हैं। खाड़ी देशों की सरकारें और अमेरिकी टेक्नोलॉजी कंपनियां कनेक्टिविटी को मजबूत करने के लिए नए बुनियादी ढांचे में निवेश कर रही हैं। माइक्रोसॉफ्ट ने 2030 तक मध्य पूर्व में समुद्र के नीचे और जमीन के रास्ते कनेक्टिविटी पर 40 करोड़ डॉलर से अधिक निवेश करने की योजना बनाई है।

    फिलहाल, अमेरिका की ओर से संभावित नई सैन्य कार्रवाई और ईरान की चेतावनी ने क्षेत्रीय सुरक्षा के साथ-साथ वैश्विक इंटरनेट और कारोबारी नेटवर्क पर पड़ने वाले असर को लेकर चिंता बढ़ा दी है।

  • सिंगापुर के पर्यटन मंच पर छाया मध्यप्रदेश, टाइगर स्टेट से मोगली लैंड और लजीज व्यंजनों तक दुनिया को न्योता

    सिंगापुर के पर्यटन मंच पर छाया मध्यप्रदेश, टाइगर स्टेट से मोगली लैंड और लजीज व्यंजनों तक दुनिया को न्योता

    नई दिल्ली । मध्यप्रदेश ने सिंगापुर में आयोजित अंतरराष्ट्रीय पर्यटन व्यापार प्रदर्शनी आईटीबी एशिया में अपनी प्राकृतिक सुंदरता, वन्यजीव संपदा, सांस्कृतिक विविधता, ऐतिहासिक धरोहरों और पारंपरिक व्यंजनों को वैश्विक मंच पर प्रस्तुत किया। सैंड्स एक्सपो एंड कन्वेंशन सेंटर में आयोजित राष्ट्रीय पर्यटन संगठनों के विशेष सत्र में मध्यप्रदेश पर्यटन बोर्ड के प्रबंध संचालक डॉ. इलैयाराजा टी ने अंतरराष्ट्रीय पर्यटकों और टूर ऑपरेटरों को राज्य की यात्रा करने के लिए आमंत्रित किया। उन्होंने कहा कि जो पर्यटक स्थापित और भीड़भाड़ वाले पर्यटन स्थलों से अलग हटकर वास्तविक, प्राकृतिक और स्थानीय जीवन से जुड़े अनुभव चाहते हैं, उनके लिए मध्यप्रदेश एक आकर्षक विकल्प है।

    डॉ. इलैयाराजा टी ने मध्यप्रदेश को भारत का दिल बताते हुए कहा कि राज्य की पहचान केवल उसकी भौगोलिक स्थिति तक सीमित नहीं है। यहां की सांस्कृतिक विविधता, स्थानीय परंपराएं और लोगों का आत्मीय व्यवहार पर्यटकों को अलग अनुभव प्रदान करते हैं। उनके अनुसार, बदलते वैश्विक पर्यटन परिदृश्य में यात्रियों की रुचि नए स्थानों और स्थानीय जीवनशैली को करीब से जानने में बढ़ रही है। ऐसे में मध्यप्रदेश अपनी विविध पर्यटन संभावनाओं के जरिए अंतरराष्ट्रीय यात्रियों को आकर्षित कर सकता है।

    उन्होंने अत्यधिक पर्यटन दबाव की समस्या का उल्लेख करते हुए कहा कि दुनिया के कई प्रमुख पर्यटन स्थलों पर सीमित स्थानों और खास समय के दौरान पर्यटकों की भीड़ बढ़ जाती है। इस समस्या का दीर्घकालिक समाधान पर्यटन गतिविधियों को नए क्षेत्रों तक पहुंचाना और कम चर्चित स्थलों की खोज को प्रोत्साहित करना है। उनके मुताबिक, नए गंतव्यों को पर्यटन मानचित्र पर लाने से यात्रियों को अलग अनुभव मिल सकते हैं और लोकप्रिय स्थानों पर भीड़ का दबाव कम करने में मदद मिल सकती है।

    मध्यप्रदेश की प्राकृतिक संपदा को प्रस्तुत करते हुए उन्होंने बताया कि राज्य के 25 प्रतिशत से अधिक क्षेत्र में जंगल हैं। वन्यजीवों के मामले में मध्यप्रदेश को टाइगर स्टेट के रूप में विशेष पहचान मिली हुई है। इसके अलावा राज्य चीता, तेंदुआ, गिद्ध और घड़ियाल जैसे वन्यजीवों के लिए भी जाना जाता है। यहां के राष्ट्रीय उद्यान, वन क्षेत्र और प्राकृतिक रास्ते वन्यजीव प्रेमियों तथा प्रकृति के बीच समय बिताने के इच्छुक पर्यटकों के लिए खास आकर्षण हैं।

    पेंच राष्ट्रीय उद्यान को मोगली और जंगल बुक की कहानियों से जोड़कर प्रस्तुत किया गया। यहां की प्रकृति भ्रमण गतिविधियां पर्यटकों को जंगल और वन्यजीवों के वातावरण को करीब से समझने का अवसर देती हैं। ऐतिहासिक ओरछा में बेतवा नदी पर रिवर राफ्टिंग भी पर्यटन के प्रमुख आकर्षणों में शामिल है। राज्य की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत में सांची स्तूप, खजुराहो के मंदिर और भीमबेटका के शैलचित्रों का विशेष स्थान है। प्रस्तुति में मध्यप्रदेश के 22 यूनेस्को धरोहर स्थलों का भी उल्लेख किया गया।

    राज्य की पहचान उसके पारंपरिक हस्तशिल्प और जनजातीय संस्कृति से भी जुड़ी है। मध्यप्रदेश में सात प्रमुख जनजातियों और 45 उप-जनजातियों की सांस्कृतिक परंपराएं मौजूद हैं। चंदेरी और महेश्वरी वस्त्र, गोंड चित्रकला तथा भोपाल की जरी-जरदोजी कला स्थानीय शिल्प की विशिष्ट पहचान हैं। इन परंपराओं के माध्यम से पर्यटक राज्य की सांस्कृतिक विरासत और कारीगरों के कौशल को समझ सकते हैं।

    पर्यटन के नए अवसर विकसित करने के लिए राज्य में हेली पर्यटन सेवा का विस्तार किया जा रहा है, ताकि कम पहुंच वाले पर्यटन स्थलों तक पहुंच आसान हो सके। मध्यप्रदेश ने स्पेनिश फिल्म आयोग के साथ समझौता कर अंतरराष्ट्रीय फिल्म पर्यटन को बढ़ावा देने की पहल भी की है। महिला सफारी चालकों और महिलाओं द्वारा संचालित होटलों को सुरक्षित तथा जिम्मेदार पर्यटन के प्रयासों के रूप में प्रस्तुत किया गया।

    डॉ. इलैयाराजा टी ने ग्रामीण पर्यटन को बढ़ावा देने पर जोर देते हुए कहा कि किसी स्थान की असली सुंदरता केवल उसकी इमारतों और ऐतिहासिक स्थलों में नहीं, बल्कि वहां के लोगों के व्यवहार और आतिथ्य में भी दिखाई देती है। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय पर्यटकों को स्थानीय जीवन, संस्कृति और परंपराओं का अनुभव लेने के लिए आमंत्रित किया।

    मध्यप्रदेश के खानपान को भी प्रस्तुति का महत्वपूर्ण हिस्सा बनाया गया। मालवा का पोहा-जलेबी, रतलामी सेव, पारंपरिक दाल-बाफला, मुरैना और ग्वालियर की गजक तथा नवाबी और बुंदेली शैली की मटन करी का उल्लेख किया गया। उन्होंने विश्वास जताया कि हेलीकॉप्टर संपर्क, सालभर आयोजित होने वाले सांस्कृतिक उत्सव और सुरक्षित पर्यटन वातावरण राज्य की यात्रा को यादगार बनाने में मदद करेंगे।

  • आसिम मुनीर के तेहरान दौरे के बाद भी नहीं खुली सीमा, पाकिस्तान-ईरान बॉर्डर पर ट्रकों में लगाई आग

    आसिम मुनीर के तेहरान दौरे के बाद भी नहीं खुली सीमा, पाकिस्तान-ईरान बॉर्डर पर ट्रकों में लगाई आग


    इस्लामाबाद/तेहरान।
    पाकिस्तान और ईरान के बीच सीमा पर व्यापारिक आवाजाही बाधित होने से तनाव बढ़ता जा रहा है। सैकड़ों ट्रकों के फंसे होने के बीच रिमदान सीमा क्षेत्र में ट्रेड गेट-250 के पास हथियारबंद लोगों ने कई ट्रकों और व्यावसायिक ढांचों को निशाना बनाया। ताजे फलों से लदे कई भारी वाहनों में आग लगा दी गई। इस घटना से स्थानीय व्यापारियों और निर्यात कारोबार से जुड़े लोगों को भारी आर्थिक नुकसान होने की आशंका है। इससे पहले ईरान के एक सांसद ने चेतावनी दी थी कि यदि पाकिस्तान ने ईरान से आने वाले ट्रकों की आवाजाही पर रोक जारी रखी, तो तेहरान भी अपनी ओर से सीमा बंद कर सकता है।

    रिपोर्ट के मुताबिक, हमले के बाद सुरक्षा बलों और हथियारबंद हमलावरों के बीच गोलीबारी हुई। इलाके में दहशत फैलने के बाद आपातकालीन टीमों को मौके पर भेजा गया। पाकिस्तानी सुरक्षा बलों ने हमलावरों की तलाश और सीमा क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने के लिए तलाशी अभियान शुरू किया है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगा रही हैं कि हमले का संबंध प्रांत में सक्रिय अन्य उग्रवादी गतिविधियों से तो नहीं है।

    आसिम मुनीर के दौरे के बाद भी विवाद बरकरार

    पाकिस्तान के सेना प्रमुख फील्ड मार्शल आसिम मुनीर के हालिया तेहरान दौरे के बावजूद दोनों देशों के बीच सीमा पर ट्रकों की आवाजाही का विवाद नहीं सुलझ सका है। रिपोर्टों के अनुसार, मुनीर की यात्रा के दौरान सीमा खोलने का मुद्दा भी उठा था।

    ईरान-पाकिस्तान संसदीय मैत्री समूह के प्रमुख फदाहोसैन मलिकी ने ईरानी समाचार एजेंसी आईएलएनए (ILNA) से कहा कि मुनीर ने तेहरान से ही सीमा खोलने के आदेश दिए थे। हालांकि, उनके मुताबिक पाकिस्तान की ओर से ईरान जाने वाले ट्रकों की आवाजाही शुरू होने के बावजूद ईरान से पाकिस्तान आने वाले वाहनों पर रोक जारी है।

    मलिकी ने चेतावनी दी कि यदि स्थिति में बदलाव नहीं हुआ, तो ईरान भी अपनी तरफ से सीमा बंद कर सकता है। उन्होंने पाकिस्तान के राजदूत को संसद में बुलाने की मांग की। मलिकी ने इस घटनाक्रम को ईरान पर अमेरिकी राजनीतिक दबाव से भी जोड़ा, हालांकि यह उनका दावा है।

    20 अक्टूबर से बाधित है व्यावसायिक आवाजाही

    गबद-रिमदान और ताफ्तान सीमा चौकियों पर 20 अक्टूबर से व्यापारिक आवाजाही बाधित होने की खबर है। पाकिस्तान ने सुरक्षा मजबूत करने और तस्करी रोकने के लिए इसे अस्थायी कदम बताया है। वहीं, ईरान ने तकनीकी दिक्कतों और एहतियाती उपायों का हवाला दिया है। दोनों देशों के बीच समस्या के समाधान के लिए बातचीत जारी है।

    फंसे ट्रक चालकों के सामने बुनियादी सुविधाओं का संकट

    सीमा पर सैकड़ों ट्रकों के फंसे होने से चालकों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। समाचार एजेंसी एएफपी की रिपोर्ट के मुताबिक, कई ट्रक चालकों को पीने के पानी और भोजन जैसी बुनियादी सुविधाओं की कमी का सामना करना पड़ रहा है। ट्रक चालक अब्दुल गनी ने बताया कि चालकों को बेहद कठिन परिस्थितियों से गुजरना पड़ रहा है।

    सीमा पर व्यापारिक गतिविधियां ठप होने और ताजा फलों से लदे ट्रकों पर हमले ने दोनों देशों के बीच पहले से जारी तनाव को और बढ़ा दिया है। यदि जल्द समाधान नहीं निकला, तो सीमा पार व्यापार और स्थानीय कारोबार पर इसका असर और गहरा सकता है।

  • F-35 लड़ाकू विमान हर देश को नहीं देता अमेरिका, सर्जियो गोर ने भारत को बताया भरोसेमंद साझेदार, रक्षा सहयोग पर कही अहम बात

    F-35 लड़ाकू विमान हर देश को नहीं देता अमेरिका, सर्जियो गोर ने भारत को बताया भरोसेमंद साझेदार, रक्षा सहयोग पर कही अहम बात

    नई दिल्ली । भारत और अमेरिका के बीच रक्षा सहयोग को लेकर अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने महत्वपूर्ण बयान दिया है। उन्होंने कहा कि अमेरिका अपना अत्याधुनिक एफ-35 लड़ाकू विमान हर देश को नहीं देता, बल्कि इसे केवल उन्हीं साझेदारों को उपलब्ध कराता है जिन पर उसे भरोसा होता है। गोर ने भारत को अमेरिका का भरोसेमंद साझेदार बताते हुए क्वॉड समूह में उसकी भूमिका को भी महत्वपूर्ण बताया। उनका यह बयान ऐसे समय आया है, जब दोनों देशों के बीच रक्षा संबंधों, सैन्य अभ्यासों और संभावित लड़ाकू विमान सौदों को लेकर चर्चा जारी है।

    सर्जियो गोर ने भारत में हाल के संयुक्त सैन्य अभ्यासों का उल्लेख करते हुए कहा कि पिछले एक महीने के दौरान करीब 500 अमेरिकी सैनिक भारत में आयोजित युद्धाभ्यास में शामिल हुए। इसके अलावा, तरंग शक्ति अभ्यास के दौरान अमेरिकी एफ-35 लड़ाकू विमान भी भारत पहुंचे और भारतीय वायुसेना के साथ अभ्यास किया। इन गतिविधियों को दोनों देशों के बीच बढ़ते सैन्य सहयोग के संदर्भ में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

    एफ-35 अमेरिका के आधुनिक लड़ाकू विमानों में शामिल है। इसमें स्टील्थ तकनीक का इस्तेमाल किया गया है, जिसका उद्देश्य विमान को दुश्मन के रडार की पकड़ में आने से बचने में मदद करना है। इस तरह के विमान और उनसे जुड़ी तकनीक का इस्तेमाल तथा हस्तांतरण संवेदनशील रक्षा मामलों में गिना जाता है। गोर के बयान के मुताबिक, अमेरिका ऐसे विमानों के मामले में भरोसेमंद साझेदारों को प्राथमिकता देता है। हालांकि, भारत के लिए एफ-35 की खरीद को लेकर किसी अंतिम समझौते की घोषणा इस बयान में नहीं की गई।

    गोर ने भारत को क्वॉड समूह का मूल्यवान साझेदार भी बताया। क्वॉड में भारत, अमेरिका, जापान और ऑस्ट्रेलिया शामिल हैं। यह समूह हिंद-प्रशांत क्षेत्र में सुरक्षा, स्थिरता और सहयोग से जुड़े मुद्दों पर काम करता है। चारों देशों के बीच संवाद और गतिविधियों का उद्देश्य क्षेत्रीय चुनौतियों पर सहयोग बढ़ाना है। ऐसे में भारत के साथ अमेरिकी सैन्य अभ्यास और एफ-35 विमानों की भागीदारी दोनों देशों के रक्षा संबंधों की अहमियत को रेखांकित करती है।

    भारत और अमेरिका के बीच रक्षा सहयोग केवल सैन्य अभ्यासों तक सीमित नहीं है। दोनों देश सैन्य क्षमताओं के समन्वय, संयुक्त प्रशिक्षण और क्षेत्रीय सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर भी सहयोग करते हैं। संयुक्त अभ्यासों के दौरान सेनाओं को एक-दूसरे की कार्यप्रणाली, संचालन प्रक्रियाओं और क्षमताओं को समझने का अवसर मिलता है। इससे भविष्य में साथ काम करने की क्षमता विकसित करने में मदद मिल सकती है। हालांकि, किसी खास अभ्यास से तकनीक हस्तांतरण या विमान खरीद का समझौता अपने आप तय नहीं हो जाता।

    एफ-35 को लेकर गोर की टिप्पणी ऐसे समय में आई है, जब भारत अपनी वायुसेना की क्षमताओं को मजबूत करने और विभिन्न देशों के साथ रक्षा संबंधों को आगे बढ़ाने पर काम कर रहा है। आधुनिक लड़ाकू विमानों की खरीद से जुड़े फैसलों में लागत, तकनीकी जरूरतें, रखरखाव, परिचालन आवश्यकताएं और रणनीतिक प्राथमिकताएं जैसे कई पहलू महत्वपूर्ण होते हैं। इसलिए अमेरिकी राजदूत का बयान दोनों देशों के बीच भरोसे और सैन्य संपर्कों को तो दर्शाता है, लेकिन इसे किसी निश्चित विमान सौदे की पुष्टि नहीं माना जा सकता।

    कुल मिलाकर, सर्जियो गोर ने अपने बयान में भारत को अमेरिका का महत्वपूर्ण और भरोसेमंद साझेदार बताया है। हाल के सैन्य अभ्यासों और तरंग शक्ति में एफ-35 की भागीदारी को उन्होंने दोनों देशों के मजबूत होते रक्षा संबंधों के संदर्भ में रखा। फिलहाल, भारत को एफ-35 की बिक्री को लेकर किसी अंतिम समझौते की पुष्टि नहीं हुई है। आने वाले समय में दोनों देशों के रक्षा सहयोग की दिशा और संभावित समझौतों पर होने वाली बातचीत महत्वपूर्ण रहेगी।

  • दुनिया के लिए नजीर बना ताइवान… आरक्षण ने बदली संसद की तस्वीर…. 42% सीटों पर महिलाएं काबिज

    दुनिया के लिए नजीर बना ताइवान… आरक्षण ने बदली संसद की तस्वीर…. 42% सीटों पर महिलाएं काबिज


    ली युआन।
    भारत (India) में संसद से लेकर विधानसभाओं तक महिलाओं के उचित प्रतिनिधित्व के लिए चल रही सियासत के बीच ताइवान (Taiwan) दुनियाभर के लिए नजीर बनकर सामने आया है। जिस ताइवान (Taiwan) को दुनिया अत्याधुनिक सेमीकंडक्टर चिप (State-art Semiconductor Chip) के सबसे बड़े निर्माता के नजरिये से देखती है, उसी 2.3 करोड़ की आबादी वाले द्वीप ने लोकतंत्र में महिलाओं की भागीदारी के लिए और लैंगिक भेदभाव खत्म करने के लिए दुनिया का सबसे लंबा अभियान चलाया है।

    करीब 80 साल पहले शुरू की गई आरक्षण व्यवस्था का नतीजा यह निकला कि आज ताइवान की संसद में 42% सीटों पर महिलाएं काबिज हैं। यह पूरे एशिया में सबसे अधिक है और यूरोपीय देशों के बराबर है। यही नहीं, ताइवान 2016 में त्साइ इंग-वेन के रूप में अपनी पहली महिला राष्ट्रपति चुन चुका है और दो बार महिलाओं को उप-राष्ट्रपति भी बना चुका है। इस उपाय ने ऐसा रास्ता तैयार किया कि आज बड़ी संख्या में महिलाएं सामान्य चुनावी मुकाबलों में भी अपनी जगह बना रही हैं।

    खास बात यह है कि ताइवान ने 2008 में एकल-सदस्यीय निर्वाचन क्षेत्रों में लैंगिक कोटा समाप्त कर दिया। इसके बाद भी संसद में महिलाओं का प्रतिनिधित्व बढ़ता रहा। ताइवान का यह प्रयोग साबित करता है कि जब महिलाओं को कानूनी सुरक्षा (कोटा) के जरिए शुरुआती मंच दिया जाता है, तो समय के साथ वे अपनी काबिलियत के दम पर उस बैसाखी को बेअसर कर देती हैं और बराबरी के मैदान में अपनी योग्यता का परचम लहराती हैं।


    1946 से बदलाव की नींव, 5-10% आरक्षण से शुरू हुआ सफर

    ताइवान ने महिलाओं के राजनीतिक प्रतिनिधित्व को बढ़ाने के लिए आरक्षित सीटों और चुनावी कोटा का इस्तेमाल दूसरे कई देशों से पहले शुरू किया था। जरूरत पड़ने पर समय-समय पर इसमें बदलाव भी करता रहा।

    चीन गणराज्य ने 1946 के संविधान में महिलाओं के लिए सीटें आरक्षित की थीं। 1949 में जब नेशनलिस्ट सरकार ताइवान स्थानांतरित हुई, तो तानाशाही दौर के बावजूद स्थानीय चुनावों में 5 से 10% कोटा लागू रखा गया।


    2002 का क्रांतिकारी नियम :

    यदि किसी जिला परिषद सीट से 4 या उससे अधिक सदस्य चुने जाते हैं, तो कम से कम 1 सीट महिला उम्मीदवार को मिलेगी। इससे राजनीतिक दलों में महिला उम्मीदवारों को टिकट देने की होड़ मच गई। ताइवान की 113 सदस्यीय संसद में 47 महिलाएं हैं। वर्ष 1992 के आसपास संसद में महिलाओं की हिस्सेदारी करीब 10 फीसदी थी। इसके बाद इसमें लगातार वृद्धि हुई।


    जीत के लिए आरक्षित सीटों की जरूरत खत्म

    नेशनल ताइवान यूनिवर्सिटी की प्रो. चांग-लिंग हुआंग कहती हैं, लोग तर्क देते हैं कि चुनाव का मकसद केवल सबसे बेहतर और सबसे सक्षम व्यक्ति को चुनना होना चाहिए। ताइवान का अनुभव बताता है कि लैंगिक आरक्षण ही वह माध्यम है, जो किसी समाज को वास्तव में सबसे बेहतर और सबसे सक्षम लोगों को चुनने का मौका देता है। 2002 में 31 जिलों में कोटे का इस्तेमाल करना पड़ा था, वहीं 2022 में केवल 4 जिलों में ही इसकी जरूरत पड़ी, यानी महिलाएं आसानी से पुरुषों को हरा रही हैं।