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  • ओस्लो से पीएम मोदी का बड़ा ऐलान: भारत में आएगा 100 अरब डॉलर का निवेश, 10 लाख युवाओं को मिलेगा रोजगार

    ओस्लो से पीएम मोदी का बड़ा ऐलान: भारत में आएगा 100 अरब डॉलर का निवेश, 10 लाख युवाओं को मिलेगा रोजगार




    नई दिल्ली। प्रधानमंत्री Narendra Modi ने नॉर्वे की राजधानी Oslo से भारत के लिए बड़ा आर्थिक संदेश दिया है। उन्होंने कहा कि यूरोपियन फ्री ट्रेड एसोसिएशन (EFTA) देशों के साथ हुए ऐतिहासिक समझौते के तहत अगले 15 वर्षों में भारत में 100 अरब डॉलर का निवेश आएगा और करीब 10 लाख नई नौकरियां पैदा होंगी। पीएम मोदी ने इसे भारत और यूरोप के रिश्तों का “गोल्डन एरा” बताते हुए कहा कि दुनिया में बढ़ती अस्थिरता के बीच भारत वैश्विक निवेश और भरोसे का सबसे मजबूत केंद्र बनकर उभर रहा है।

    नॉर्वे के प्रधानमंत्री Jonas Gahr Støre के साथ संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस में मोदी ने कहा कि भारत और यूरोप के बीच आर्थिक साझेदारी अब नई ऊंचाइयों की ओर बढ़ रही है। उन्होंने कहा कि भारत आज दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं में शामिल है और आने वाले वर्षों में वैश्विक विकास का बड़ा इंजन बनने जा रहा है।

    प्रधानमंत्री ने कहा कि EFTA समझौते से भारत में मैन्युफैक्चरिंग, ग्रीन एनर्जी, टेक्नोलॉजी, इंफ्रास्ट्रक्चर और स्टार्टअप सेक्टर को जबरदस्त फायदा मिलेगा। इससे युवाओं के लिए बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर तैयार होंगे। मोदी ने साफ कहा कि भारत केवल बाजार नहीं, बल्कि दुनिया के लिए भरोसेमंद विकास साझेदार बन चुका है।

    पीएम मोदी ने अपनी नॉर्वे यात्रा का जिक्र करते हुए कहा कि उनका यह दौरा पिछले साल तय था, लेकिन पहलगाम आतंकी हमले के कारण इसे टालना पड़ा था। उन्होंने कहा कि उस कठिन समय में नॉर्वे ने आतंकवाद के खिलाफ भारत का खुलकर समर्थन किया, जो दोनों देशों की गहरी मित्रता को दर्शाता है।

    भारत-नॉर्डिक समिट पर दुनिया की नजर
    ओस्लो में 19 मई को होने वाली तीसरी भारत-नॉर्डिक समिट को लेकर भी काफी उत्साह है। इस सम्मेलन में नॉर्वे, स्वीडन, डेनमार्क, फिनलैंड और आइसलैंड के नेता शामिल होंगे। बैठक में ग्रीन एनर्जी, क्लाइमेट चेंज, डिजिटल टेक्नोलॉजी, रक्षा सहयोग और आर्कटिक क्षेत्र से जुड़े मुद्दों पर मंथन होगा।

    यह समिट पहली बार 2018 में स्टॉकहोम और दूसरी बार 2022 में कोपेनहेगन में आयोजित हुई थी। इस बार माना जा रहा है कि भारत और नॉर्डिक देशों के बीच रणनीतिक और आर्थिक संबंधों को नई मजबूती मिलेगी।

    नॉर्वे ने कहा- भारत भरोसेमंद लोकतांत्रिक साझेदार
    नॉर्वे के प्रधानमंत्री योनास गार स्टोरे ने कहा कि दुनिया इस समय संघर्ष और अनिश्चितता के दौर से गुजर रही है। ऐसे समय में भारत जैसे लोकतांत्रिक और भरोसेमंद देशों के साथ साझेदारी बेहद जरूरी है। उन्होंने कहा कि भारत और नॉर्वे कई नए समझौतों की दिशा में काम कर रहे हैं, जिससे दोनों देशों के बीच व्यापार और सहयोग और मजबूत होगा।

    प्रधानमंत्री मोदी ने ओस्लो में नॉर्वे के प्रधानमंत्री के साथ द्विपक्षीय बैठक भी की। इस दौरान व्यापार, निवेश, समुद्री सहयोग, हरित ऊर्जा और वैश्विक सुरक्षा जैसे मुद्दों पर विस्तार से चर्चा हुई। मोदी की यह यात्रा उनके पांच देशों के दौरे का चौथा चरण है। इससे पहले वे UAE, नीदरलैंड और स्वीडन का दौरा कर चुके हैं, जबकि इसके बाद वे इटली जाएंगे।

  • हॉर्मुज संकट से दुनिया पर तेल संकट का खतरा, तेजी से खाली हो रहे ऑयल रिजर्व ने बढ़ाई चिंता

    हॉर्मुज संकट से दुनिया पर तेल संकट का खतरा, तेजी से खाली हो रहे ऑयल रिजर्व ने बढ़ाई चिंता



    नई दिल्ली। ईरान और अमेरिका-इजरायल के बीच बढ़ते तनाव के चलते दुनिया एक बड़े ऊर्जा संकट की ओर बढ़ती दिखाई दे रही है। हॉर्मुज स्ट्रेट में जारी बाधाओं और तेल आपूर्ति में भारी गिरावट के कारण वैश्विक ऑयल रिजर्व तेजी से घट रहे हैं। विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि अगर हालात जल्द नहीं सुधरे, तो दुनिया को महंगे ईंधन, आर्थिक दबाव और सप्लाई संकट का सामना करना पड़ सकता है।

    दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल मार्गों में शामिल हॉर्मुज स्ट्रेट से वैश्विक कच्चे तेल की बड़ी मात्रा गुजरती है। लेकिन मौजूदा संघर्ष और समुद्री तनाव के कारण इस रास्ते से तेल आपूर्ति बुरी तरह प्रभावित हुई है। कई रिपोर्टों के अनुसार, मध्य पूर्व से तेल निर्यात में भारी गिरावट दर्ज की गई है, जिससे अंतरराष्ट्रीय बाजारों में चिंता बढ़ गई है।

    ऊर्जा विश्लेषकों के मुताबिक, फरवरी के अंत से अब तक वैश्विक बाजार से करोड़ों बैरल तेल कम हो चुका है। सऊदी अरब, इराक, ईरान और कुवैत जैसे प्रमुख तेल उत्पादक देशों के उत्पादन में भारी गिरावट देखी गई है। इससे दुनिया अब पहले से जमा तेल भंडार और रणनीतिक रिजर्व पर निर्भर होती जा रही है।

    अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (IEA) ने भी चेतावनी दी है कि अगर स्थिति लंबे समय तक बनी रही, तो तेल की मांग सप्लाई से कहीं ज्यादा हो जाएगी। एजेंसी के अनुसार, दुनिया भर के व्यावसायिक तेल भंडार रिकॉर्ड गति से खाली हो रहे हैं और कई देशों के पास केवल कुछ हफ्तों का स्टॉक बचा है।

    विशेषज्ञों का कहना है कि संकट केवल पेट्रोल-डीजल की कीमतों तक सीमित नहीं रहेगा। तेल की कमी से परिवहन, बिजली उत्पादन, विमानन, खाद उद्योग और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर पर भी बड़ा असर पड़ सकता है। अगर हॉर्मुज स्ट्रेट जल्द पूरी तरह नहीं खुला, तो वैश्विक बाजार में ईंधन संकट और महंगाई तेजी से बढ़ सकती है।

    सऊदी अरामको के CEO अमीन नासिर और जेपी मॉर्गन के विश्लेषकों ने भी कहा है कि दुनिया का “सुरक्षा कवच” यानी तेल भंडार तेजी से कमजोर हो रहा है। फिलहाल देशों द्वारा रणनीतिक रिजर्व का इस्तेमाल किया जा रहा है, लेकिन यह लंबे समय तक पर्याप्त नहीं रहेगा।

    भारत समेत कई एशियाई देश इस संकट से सबसे ज्यादा प्रभावित हो सकते हैं, क्योंकि उनकी बड़ी तेल जरूरतें मध्य पूर्व से पूरी होती हैं। ऐसे में आने वाले दिनों में पेट्रोल-डीजल की कीमतों, परिवहन लागत और महंगाई पर असर बढ़ने की आशंका जताई जा रही है।

  • अफगानिस्तान में तालिबान का नया फैमिली लॉ, लड़की की चुप्पी को माना जाएगा शादी की सहमति, विवाद बढ़ा

    अफगानिस्तान में तालिबान का नया फैमिली लॉ, लड़की की चुप्पी को माना जाएगा शादी की सहमति, विवाद बढ़ा



    नई दिल्‍ली । अफगानिस्तान की तालिबान सरकार ने एक नया ‘फैमिली लॉ’ लागू किया है, जिसे लेकर विवाद हो रहा है। नए कानून में शादी, तलाक और बाल विवाह से जुड़े कई नियम तय किए गए हैं। दुनिया भर के मानवाधिकार कार्यकर्ता और अंतरराष्ट्रीय विश्लेषक इन नए नियमों की आलोचना कर रहे हैं।

    अफगान मीडिया आउटलेट ‘अमू टीवी’ की एक रिपोर्ट के मुताबिक, नए कानून का नाम ‘पति-पत्नी के बीच अलगाव के सिद्धांत’ रखा गया है। 31 अनुच्छेदों (आर्टिकल्स) वाले इस पूरे मसौदे को तालिबान के सुप्रीम लीडर हिबतुल्लाह अखुंदजादा ने अपनी मंजूरी दी है।

    हाल ही में सरकार के आधिकारिक गजट में भी नए कानून को प्रकाशित किया गया था। इस नए रेगुलेशन में बाल विवाह, लापता पति, अडल्ट्री के आरोप, धर्म परिवर्तन (इस्लाम छोड़ना) और जबरन अलगाव जैसे मामलों को शामिल किया गया है।

    चुप्पी को माना जाएगा शादी की सहमति
    इस कानून एक नियम की सबसे ज्यादा आलोचना हो रही है। दरअसल नए प्रावधान के मुताबिक, अगर कोई ‘कुंवारी लड़की’ बालिग (प्यूबर्टी) होने के बाद अपनी शादी पर चुप रहती है, तो उसकी इस चुप्पी को शादी के लिए उसकी रजामंदी माना जाएगा। खास बात ये है कि कानून में ये भी साफ किया गया है कि किसी लड़के या पहले से शादीशुदा महिला की चुप्पी को उनकी सहमति के तौर पर नहीं देखा जाएगा।

    बाल विवाह पर पिता-दादा को बड़े अधिकार
    इस कानून में ‘खियार अल-बुलूग’ का भी जिक्र है। इसके तहत बचपन में ब्याहे गए लोगों को बालिग होने पर शादी रद्द करने की मांग करने का हक मिलता है। कानून के अनुच्छेद 5 के मुताबिक, अगर पिता या दादा के अलावा किसी दूसरे रिश्तेदार ने नाबालिग की शादी तय की है, तो भी वो शादी तब तक मान्य रहेगी जब तक कि जीवनसाथी सामाजिक रूप से योग्य हो। हालांकि, किसी भी शादी को खत्म करने के लिए तालिबान की अदालत से मंजूरी लेना जरूरी होगा।

    नए नियमों के तहत पिता और दादा को बाल विवाह के मामलों में कई अधिकार दिए गए हैं। हालांकि, अगर गार्जियन हिंसक या अनैतिक पाए जाते हैं, तो ऐसी शादियों को अमान्य किया जा सकता है। इसके अलावा, एडल्ट्री के आरोपों, धर्म परिवर्तन और लंबे समय से लापता पतियों से जुड़े मामलों में फैसला लेने के लिए तालिबान के जजों को खुली छूट दी गई है।

    चौतरफा घिरी तालिबान सरकार
    इस नए कानून ने मानवाधिकार कार्यकर्ताओं को और नाराज कर दिया है। राजनीतिक विश्लेषक फहीमा मोहम्मद ने इस पर तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि बाल विवाह में कभी भी सहमति शामिल नहीं हो सकती। लड़की की चुप्पी को उसकी मंजूरी मान लेना असल में लड़कियों की आवाज और उनकी आजादी को पूरी तरह से छीनने जैसा है।

    बता दें कि साल 2021 में सत्ता में लौटने के बाद से ही तालिबान अफगान महिलाओं और लड़कियों पर लगातार पाबंदियां लगा रहा है। महिलाओं की हाई एजुकेशन पर रोक, नौकरियों पर पाबंदी और सार्वजनिक जीवन में उनकी हिस्सेदारी को खत्म करने को लेकर तालिबान पहले से ही आलोचना झेल रहा है।

  • ईरान-US वार्ता में नया तनाव, शांति प्रस्ताव के जवाब में अमेरिका ने रखी ये 5 कड़ी शर्तें

    ईरान-US वार्ता में नया तनाव, शांति प्रस्ताव के जवाब में अमेरिका ने रखी ये 5 कड़ी शर्तें



    नई दिल्ली । ईरान और अमेरिका के बीच जारी तनाव और शांति वार्ता के प्रयासों के बीच एक नया मोड़ सामने आया है। ईरान की अर्ध-सरकारी समाचार एजेंसी फार्स के अनुसार, अमेरिका ने ईरान के हालिया शांति प्रस्ताव के जवाब में पांच कड़ी शर्तें रखी हैं। इन शर्तों के बाद दोनों देशों के बीच कूटनीतिक हलचल एक बार फिर तेज हो गई है।

    हालांकि, अब तक न तो वॉशिंगटन और न ही तेहरान की ओर से इन शर्तों पर कोई आधिकारिक बयान आया है, लेकिन माना जा रहा है कि इससे दोनों देशों के बीच सुलह की संभावनाओं को झटका लगा है।

    अमेरिका की 5 शर्तें

    ईरानी मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, अमेरिका ने ईरान के प्रस्ताव के जवाब में ये प्रमुख शर्तें रखी हैं:-

    मुआवजे से इनकार: अमेरिका ने किसी भी प्रकार के युद्ध हर्जाने या मुआवजे देने से साफ इनकार कर दिया है।
    यूरेनियम ट्रांसफर की शर्त: ईरान को अपने पास मौजूद 400 किलोग्राम समृद्ध यूरेनियम अमेरिका को सौंपना होगा।
    परमाणु गतिविधियों पर सीमा: ईरान में केवल एक परमाणु संयंत्र को संचालन की अनुमति दी जाएगी।
    फ्रीज संपत्तियों पर रोक: विदेशों में जब्त ईरानी संपत्तियों और फंड्स को जारी करने से अमेरिका ने इनकार किया है।
    सीजफायर की शर्त: युद्धविराम तभी आगे बढ़ेगा जब दोनों पक्षों के बीच औपचारिक वार्ता शुरू होगी।

    ईरान की प्रतिक्रिया
    ईरानी विश्लेषकों का कहना है कि अमेरिका का यह रुख समाधान की बजाय राजनीतिक दबाव बनाने का प्रयास है। उनका आरोप है कि वॉशिंगटन बातचीत की आड़ में ऐसे लक्ष्य हासिल करना चाहता है जो वह सैन्य रूप से हासिल नहीं कर सका।

    ईरान की ओर से भी प्रस्ताव
    इससे पहले ईरान ने भी अमेरिका के सामने पांच शर्तें रखी थीं, जिनमें सभी मोर्चों पर दुश्मनी खत्म करना, प्रतिबंध हटाना, फ्रीज संपत्तियों को जारी करना, युद्ध हर्जाना देना और होर्मुज जलडमरूमध्य पर ईरान की संप्रभुता स्वीकार करना शामिल था।

    रिपोर्ट्स के मुताबिक, 28 फरवरी को हुए हमलों के बाद क्षेत्र में तनाव बढ़ा था और करीब 40 दिनों तक संघर्ष की स्थिति रही। इसके बाद 8 अप्रैल को दोनों पक्षों के बीच युद्धविराम पर सहमति बनी। 11 और 12 अप्रैल को इस्लामाबाद में हुई शुरुआती वार्ता भी बिना नतीजे के खत्म हो गई थी। इसके बाद से पाकिस्तान के माध्यम से दोनों देशों के बीच ड्राफ्ट प्रस्तावों का आदान-प्रदान जारी है, लेकिन नई अमेरिकी शर्तों के बाद बातचीत और अधिक जटिल हो गई है।

  • मॉस्को पर यूक्रेन का सबसे बड़ा ड्रोन हमला, 500+ ड्रोन से रूस दहला, तीन की मौत, एयर डिफेंस ने 556 ड्रोन गिराने का दावा

    मॉस्को पर यूक्रेन का सबसे बड़ा ड्रोन हमला, 500+ ड्रोन से रूस दहला, तीन की मौत, एयर डिफेंस ने 556 ड्रोन गिराने का दावा


    नई दिल्ली। रूस-यूक्रेन युद्ध में तनाव एक बार फिर चरम पर पहुंच गया है। यूक्रेन ने रूस की राजधानी मॉस्को और आसपास के इलाकों पर एक साथ 500 से ज्यादा ड्रोन से बड़ा और संगठित हमला किया, जिसे अब तक का सबसे बड़ा ड्रोन अटैक माना जा रहा है।

    रूस के रक्षा मंत्रालय ने दावा किया है कि उसकी एयर डिफेंस सिस्टम ने रातभर में कुल 556 यूक्रेनी ड्रोन को इंटरसेप्ट और नष्ट किया। वहीं मॉस्को के मेयर सर्गेई सोबयानिन के मुताबिक, शहर और आसपास के क्षेत्रों में 120 से ज्यादा ड्रोन को मार गिराया गया।

    इस हमले में मॉस्को के पास खिमकी और मितिशची इलाकों में ड्रोन गिरने से कम से कम 3 लोगों की मौत हो गई, जबकि 12 से ज्यादा लोग घायल हुए हैं। एक महिला की मौत घर पर ड्रोन गिरने से हुई, जबकि दो लोगों की जान निर्माणाधीन इमारत पर मलबा गिरने से गई।

    हमले के दौरान कई रिहायशी इमारतें क्षतिग्रस्त हुईं, कुछ जगहों पर आग लगने की घटनाएं भी सामने आईं। रूस के सबसे व्यस्त शेरेमेत्येवो एयरपोर्ट के पास भी ड्रोन के टुकड़े गिरे, हालांकि किसी बड़े नुकसान की पुष्टि नहीं हुई है।

    रूसी मीडिया TASS के अनुसार, यह हमला पिछले एक साल में मॉस्को पर सबसे बड़ा ड्रोन हमला माना जा रहा है। कई जगहों से आग और धुएं की तस्वीरें सामने आई हैं, जिससे राजधानी में दहशत का माहौल बन गया।

    उधर, यूक्रेनी वायुसेना ने दावा किया कि रूस ने भी जवाबी कार्रवाई में 287 ड्रोन दागे, जिनमें से अधिकांश को मार गिराया गया। इस हमले में यूक्रेन के Dnipropetrovsk और Zaporizhzhia क्षेत्रों में 9 लोग घायल हुए हैं।

    विशेषज्ञों का मानना है कि यह हमला रूस की राजधानी तक युद्ध के दायरे के और गहराने का संकेत है और आने वाले दिनों में तनाव और बढ़ सकता है।

  • मोदी की नीदरलैंड यात्रा में ऐतिहासिक समझौता: 1000 साल पुराने चोल तमिल दस्तावेज भारत लौटेंगे, टाटा-ASML डील से सेमीकंडक्टर सहयोग को बढ़ावा

    मोदी की नीदरलैंड यात्रा में ऐतिहासिक समझौता: 1000 साल पुराने चोल तमिल दस्तावेज भारत लौटेंगे, टाटा-ASML डील से सेमीकंडक्टर सहयोग को बढ़ावा



    नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की नीदरलैंड यात्रा के दौरान भारत के इतिहास और तकनीकी क्षेत्र दोनों के लिए बड़े समझौते हुए। इस यात्रा में 11वीं सदी के चोल काल के तमिल ताम्र पट्टिकाओं को भारत वापस लाने पर सहमति बनी, वहीं टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स और डच कंपनी ASML के बीच सेमीकंडक्टर क्षेत्र में महत्वपूर्ण साझेदारी भी हुई।

    1000 साल पुराने चोल दस्तावेज भारत लौटेंगे
    भारत और नीदरलैंड के बीच हुए समझौते के तहत 11वीं सदी की चोल ताम्र पट्टिकाएं जल्द भारत लाई जाएंगी। यह संग्रह 21 बड़ी और 3 छोटी तांबे की प्लेटों का है, जिन पर अधिकतर लेख तमिल भाषा में लिखे गए हैं।

    प्रधानमंत्री मोदी ने बताया कि इन ऐतिहासिक दस्तावेजों में चोल साम्राज्य के महान शासक राजा राजेंद्र चोल प्रथम और उनके पिता राजा राजराजा चोल प्रथम से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियाँ दर्ज हैं। ये पट्टिकाएं 19वीं सदी में यूरोपीय व्यापार और शोध के दौरान भारत से बाहर ले जाई गई थीं।

    टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स और ASML के बीच बड़ा समझौता
    नीदरलैंड के द हेग में आयोजित कार्यक्रम के दौरान टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स और डच कंपनी ASML के बीच सेमीकंडक्टर और चिप तकनीक के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने का समझौता हुआ।

    ASML दुनिया की अग्रणी चिप मशीन निर्माता कंपनी है, जबकि टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स भारत में सेमीकंडक्टर निर्माण में तेजी से निवेश कर रही है। यह डील भारत को चिप निर्माण क्षेत्र में मजबूत स्थिति दिलाने की दिशा में अहम मानी जा रही है।

    नीदरलैंड के राजा-रानी से मुलाकात
    पीएम मोदी ने नीदरलैंड के राजा विलेम-अलेक्जेंडर और रानी मैक्सिमा से शाही महल ‘पैलेस हाउस टेन बॉश’ में मुलाकात की। इस दौरान दोनों देशों के बीच शिक्षा, तकनीक, डिजिटल नवाचार, ग्रीन एनर्जी और वाटर मैनेजमेंट जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर चर्चा हुई।

    नीदरलैंड के राजा-रानी ने प्रधानमंत्री मोदी के सम्मान में रात्रिभोज का भी आयोजन किया। मोदी ने 2019 की उनकी भारत यात्रा को याद करते हुए दोनों देशों के संबंधों को और मजबूत बताया।

    भारत में निवेश का सुनहरा मौका: पीएम मोदी
    CEO राउंड टेबल बैठक में प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत में निवेश और कारोबार का यह सबसे उपयुक्त समय है। उन्होंने बताया कि टैक्स और लेबर सुधारों के कारण भारत में मैन्युफैक्चरिंग अब अधिक आसान और सस्ती हो गई है।

    उन्होंने यह भी कहा कि भारत अब इलेक्ट्रॉनिक्स का बड़ा निर्यातक बन चुका है और ग्रीन हाइड्रोजन, टेक्नोलॉजी और इनोवेशन जैसे क्षेत्रों में तेजी से आगे बढ़ रहा है।

    300 से अधिक डच कंपनियां भारत में सक्रिय
    प्रधानमंत्री ने बताया कि पहले से ही 300 से अधिक डच कंपनियां भारत में काम कर रही हैं। भारत-यूरोपीय संघ फ्री ट्रेड एग्रीमेंट से दोनों देशों के बीच व्यापार और निवेश के नए अवसर खुलेंगे।

    स्वीडन के लिए रवाना हुए पीएम मोदी
    नीदरलैंड दौरे के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अब स्वीडन के गोथेनबर्ग शहर के लिए रवाना हो गए हैं, जहां वे 17 और 18 मई को द्विपक्षीय वार्ता और सहयोग को लेकर चर्चा करेंगे।
    मोदी की नीदरलैंड यात्रा न केवल भारत की ऐतिहासिक धरोहर को वापस लाने में सफल रही, बल्कि सेमीकंडक्टर और तकनीकी सहयोग के नए रास्ते भी खोल गई। यह दौरा भारत-नीदरलैंड संबंधों को एक नई ऊंचाई पर ले जाने वाला माना जा रहा है।

  • कभी अंटार्कटिका का हिस्सा था भारत! लाखों साल पुरानी चट्टानों ने खोला पृथ्वी के इतिहास का बड़ा राज

    कभी अंटार्कटिका का हिस्सा था भारत! लाखों साल पुरानी चट्टानों ने खोला पृथ्वी के इतिहास का बड़ा राज



    नई दिल्ली। वैज्ञानिकों ने एक नई रिसर्च में बड़ा खुलासा किया है कि आज का भारत कभी अंटार्कटिका से जुड़ा हुआ था। लाखों नहीं बल्कि करोड़ों साल पहले दोनों भूभाग एक विशाल पर्वत श्रृंखला और साझा भूवैज्ञानिक संरचना का हिस्सा थे। अब आंध्र प्रदेश की प्राचीन चट्टानों और पूर्वी अंटार्कटिका की चट्टानों के अध्ययन से इस रहस्य पर नई रोशनी पड़ी है।

    रिसर्च के मुताबिक आंध्र प्रदेश के विजयनगरम और सालूर इलाके में मिली चट्टानों की संरचना, उम्र और रासायनिक गुण पूर्वी अंटार्कटिका की चट्टानों से काफी मिलते-जुलते पाए गए हैं। वैज्ञानिकों का कहना है कि ये दोनों क्षेत्र कभी “रेनर-ईस्टर्न घाट ओरोजेन” नाम की एक ही भूवैज्ञानिक प्रणाली का हिस्सा थे।

    यह अध्ययन भारत, ऑस्ट्रेलिया और दक्षिण कोरिया के वैज्ञानिकों की संयुक्त टीम ने किया है। रिसर्च में खास तौर पर ग्रैनुलाइट नाम की मेटामॉर्फिक चट्टानों का अध्ययन किया गया, जो पृथ्वी के भीतर अत्यधिक गर्मी और दबाव में बनती हैं और अरबों साल पुराने भूवैज्ञानिक बदलावों की जानकारी अपने अंदर सुरक्षित रखती हैं।

    वैज्ञानिकों ने जिरकॉन, गार्नेट और मोनाजाइट जैसे खनिजों का आधुनिक तकनीक से परीक्षण किया। इनमें जिरकॉन को सबसे अहम माना गया क्योंकि यह अत्यधिक तापमान और दबाव में भी सुरक्षित रहता है। वैज्ञानिकों ने जिरकॉन के भीतर मौजूद रेडियोधर्मी तत्वों के अध्ययन से करोड़ों साल पुराने भूवैज्ञानिक घटनाक्रमों का पता लगाया।

    रिसर्च में सामने आया कि भारत और अंटार्कटिका दोनों क्षेत्रों में भूवैज्ञानिक विकास के तीन बड़े चरण एक जैसे रहे। पहला चरण करीब 1000 से 990 मिलियन वर्ष पहले हुआ, जब विशाल महाद्वीपीय टकराव से बड़ी पर्वत श्रृंखलाएं बनीं। दूसरा चरण 950 से 890 मिलियन वर्ष पहले का था, जिसमें चट्टानों में गहरे संरचनात्मक बदलाव आए। तीसरा चरण 570 से 540 मिलियन वर्ष पहले हुआ, जब खनिजों से भरपूर तरल पदार्थ चट्टानों की दरारों से गुजरे और खास रासायनिक निशान छोड़ गए।

    वैज्ञानिकों के अनुसार, बाद में सुपरकॉन्टिनेंट Gondwana टूटने लगा और करीब 130 से 150 मिलियन वर्ष पहले भारत और अंटार्कटिका अलग हो गए। भारतीय प्लेट उत्तर दिशा में एशिया की ओर बढ़ गई, जबकि अंटार्कटिका दक्षिण की ओर खिसक गया।

    आज दोनों भूभाग हजारों किलोमीटर दूर हैं, लेकिन करोड़ों साल पुरानी चट्टानें अब भी उनके साझा इतिहास की कहानी बयां कर रही हैं।

  • FBI डायरेक्टर काश पटेल पर लग्जरी ट्रिप का आरोप, गर्लफ्रेंड संग कंसर्ट के लिए इस्तेमाल किया सरकारी जेट!

    FBI डायरेक्टर काश पटेल पर लग्जरी ट्रिप का आरोप, गर्लफ्रेंड संग कंसर्ट के लिए इस्तेमाल किया सरकारी जेट!


    नई दिल्ली। अमेरिका की प्रमुख जांच एजेंसी Federal Bureau of Investigation के डायरेक्टर काश पटेल एक बार फिर विवादों में घिर गए हैं। उन पर आरोप लगा है कि उन्होंने सरकारी संसाधनों का इस्तेमाल अपनी गर्लफ्रेंड को लग्जरी ट्रीटमेंट देने के लिए किया। रिपोर्ट्स के मुताबिक काश पटेल ने अपनी निजी यात्रा के दौरान FBI के जेट विमान का इस्तेमाल किया और हजारों डॉलर के आलीशान सुइट में म्यूजिक कंसर्ट का आनंद लिया।

    रिपोर्ट के अनुसार, 10 मई 2025 को काश पटेल अपनी 27 वर्षीय गर्लफ्रेंड एलेक्सिस विलकिंस के साथ FBI के गल्फस्ट्रीम V जेट से वॉशिंगटन से फिलाडेल्फिया पहुंचे थे। वहां दोनों ने मशहूर कंट्री सिंगर्स George Strait और Chris Stapleton का लाइव म्यूजिक कंसर्ट देखा।

    बताया जा रहा है कि इस कार्यक्रम के लिए दोनों ने करीब 35 हजार से 50 हजार डॉलर कीमत वाले प्राइवेट लग्जरी सुइट का इस्तेमाल किया। इतना ही नहीं, FBI फ्लाइट क्रू और सुरक्षा कर्मियों को देर रात तक ड्यूटी पर इंतजार करना पड़ा, जिसके लिए उन्हें ओवरटाइम भुगतान भी किया गया।

    मामले ने तब और तूल पकड़ लिया जब यह सवाल उठने लगे कि क्या सरकारी संसाधनों का निजी इस्तेमाल नियमों के खिलाफ था। हालांकि काश पटेल ने इन आरोपों पर सार्वजनिक रूप से कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है।

    यह पहला मौका नहीं है जब काश पटेल विवादों में आए हों। इससे पहले भी उनकी यात्राओं और आधिकारिक कार्यक्रमों में निजी लोगों की मौजूदगी को लेकर सवाल उठ चुके हैं। हाल ही में पर्ल हार्बर मेमोरियल के पास वीआईपी टूर को लेकर भी उनकी आलोचना हुई थी।

    हालांकि FBI के प्रवक्ता बेन विलियमसन ने इन आरोपों का बचाव करते हुए कहा कि यात्रा को गलत तरीके से पेश किया जा रहा है और यह एक आधिकारिक दौरा था। बावजूद इसके, अमेरिकी मीडिया और राजनीतिक गलियारों में इस पूरे मामले को लेकर बहस तेज हो गई है।

  • WHO का बड़ा अलर्ट! अफ्रीका में फिर फैला खतरनाक ईबोला वायरस, नई महामारी को लेकर बढ़ी चिंता

    WHO का बड़ा अलर्ट! अफ्रीका में फिर फैला खतरनाक ईबोला वायरस, नई महामारी को लेकर बढ़ी चिंता



    नई दिल्ली। विश्व स्वास्थ्य संगठन World Health Organization ने अफ्रीकी देशों डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो और युगांडा में तेजी से फैल रहे ईबोला वायरस को लेकर वैश्विक स्वास्थ्य चेतावनी जारी की है। WHO ने इसे अंतरराष्ट्रीय सार्वजनिक स्वास्थ्य आपात स्थिति घोषित करते हुए कहा है कि इस बार फैल रहा बुंडीबुग्यो स्ट्रेन पहले के मुकाबले अलग और बेहद चिंताजनक है।

    स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक यह वायरस ईबोला के बुंडीबुग्यो स्ट्रेन के कारण फैल रहा है, जो इंसानों के लिए बेहद खतरनाक माना जाता है। सबसे बड़ी चिंता की बात यह है कि इस स्ट्रेन के लिए अभी तक कोई विशेष वैक्सीन या प्रभावी दवा उपलब्ध नहीं है।

    रिपोर्ट्स के अनुसार, कांगो के इटुरी प्रांत में ईबोला का यह 17वां बड़ा प्रकोप है। हालांकि इस बार वायरस का प्रकार अलग होने से स्वास्थ्य एजेंसियों की चिंता और बढ़ गई है। बुंडीबुग्यो स्ट्रेन पहली बार साल 2007-08 में युगांडा के बुंडीबुग्यो जिले में सामने आया था, जहां सैकड़ों लोग संक्रमित हुए थे और बड़ी संख्या में मौतें दर्ज की गई थीं।

    विशेषज्ञ बताते हैं कि ईबोला वायरस के कई प्रकार होते हैं, लेकिन ज़ैरे, सूडान और बुंडीबुग्यो स्ट्रेन इंसानों में सबसे ज्यादा संक्रमण फैलाते हैं। ज़ैरे स्ट्रेन सबसे घातक माना जाता है, जबकि बुंडीबुग्यो स्ट्रेन में भी मौत का खतरा 40 प्रतिशत तक पहुंच सकता है।

    वैज्ञानिकों का मानना है कि यह वायरस अफ्रीका के घने जंगलों में मौजूद जंगली जानवरों, खासकर चमगादड़ों से फैलता है। संक्रमित व्यक्ति के खून, शरीर के तरल पदार्थ या संपर्क में आने से यह तेजी से दूसरे लोगों तक पहुंच सकता है।

    ईबोला के शुरुआती लक्षण सामान्य फ्लू जैसे दिखाई देते हैं। मरीज को तेज बुखार, सिरदर्द, कमजोरी, मांसपेशियों और जोड़ों में दर्द महसूस होता है। बाद में उल्टी, दस्त, पेट दर्द और गले में संक्रमण जैसी समस्याएं बढ़ने लगती हैं। गंभीर स्थिति में शरीर के अलग-अलग हिस्सों से खून बहना शुरू हो सकता है और कई बार मरीज के अंग काम करना बंद कर देते हैं।

    WHO और स्वास्थ्य एजेंसियां प्रभावित इलाकों में निगरानी बढ़ाने, संक्रमित मरीजों को अलग रखने और लोगों को सतर्क रहने की सलाह दे रही हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि समय रहते नियंत्रण नहीं हुआ तो यह संक्रमण कई देशों के लिए बड़ा खतरा बन सकता है।

  • ट्रंप की एक पोस्ट से फिर गरमाया पश्चिम एशिया! ईरान पर नए हमले की अटकलों से दुनिया में हलचल

    ट्रंप की एक पोस्ट से फिर गरमाया पश्चिम एशिया! ईरान पर नए हमले की अटकलों से दुनिया में हलचल


    नई दिल्ली। अमेरिका और ईरान के बीच तनाव एक बार फिर खतरनाक मोड़ पर पहुंचता दिखाई दे रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की सोशल मीडिया पोस्ट ने नए सैन्य टकराव की आशंकाओं को हवा दे दी है। ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर एक तस्वीर साझा की, जिसमें वह युद्धपोत पर सैन्य अधिकारियों के साथ खड़े नजर आए। तस्वीर के साथ उन्होंने लिखा— “तूफान से पहले की शांति।” इस एक लाइन ने अंतरराष्ट्रीय राजनीति में हलचल मचा दी है और माना जा रहा है कि अमेरिका ईरान के खिलाफ फिर बड़ा कदम उठा सकता है।

    तस्वीर में ट्रंप समुद्र के बीच युद्धपोत पर खड़े दिखाई दे रहे हैं। पीछे ईरान का झंडा लगे जहाज और तूफानी मौसम जैसे दृश्य नजर आ रहे हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह पोस्ट केवल प्रतीकात्मक नहीं बल्कि ईरान को सीधी चेतावनी भी हो सकती है। खास बात यह है कि हाल के दिनों में ट्रंप कई बार सार्वजनिक रूप से कह चुके हैं कि अगर ईरान के साथ समझौता नहीं हुआ तो उसे “गंभीर परिणाम” भुगतने पड़ सकते हैं।

    इसी बीच अमेरिकी मीडिया रिपोर्ट्स ने तनाव और बढ़ा दिया है। द न्यूयॉर्क टाइम्स की एक रिपोर्ट में दावा किया गया है कि अमेरिकी रक्षा विभाग ने ईरान के खिलाफ संभावित सैन्य कार्रवाई के लिए “ऑपरेशन एपिक फ्यूरी 2.0” नाम की योजना तैयार की है। रिपोर्ट के मुताबिक इस योजना में ईरान के सैन्य ठिकानों और अहम बुनियादी ढांचे पर बड़े पैमाने पर हवाई हमले शामिल हो सकते हैं। इसके अलावा विशेष सैन्य अभियान और रणनीतिक इलाकों पर कब्जे जैसे विकल्पों पर भी चर्चा चल रही है।

    अमेरिकी रक्षा सचिव पीट हेगसेथ ने भी संकेत दिए हैं कि जरूरत पड़ने पर अमेरिका सैन्य कार्रवाई तेज कर सकता है। हालांकि उन्होंने यह साफ नहीं किया कि हमला कब और किस स्तर पर हो सकता है। रिपोर्ट्स के मुताबिक अमेरिकी सेना के पास कई विकल्प तैयार हैं, लेकिन अंतिम फैसला अब भी राष्ट्रपति ट्रंप के हाथ में है।

    दूसरी तरफ ईरान ने भी कड़ा रुख अपना लिया है। ईरानी संसद के स्पीकर मोहम्मद बाघेर गालिबाफ ने अमेरिका को चेतावनी देते हुए कहा कि ईरान किसी भी हमले का जवाब देने के लिए पूरी तरह तैयार है। उन्होंने कहा कि अगर अमेरिका ने गलत कदम उठाया तो उसका जवाब भी उसी भाषा में मिलेगा। ईरान ने साफ कर दिया है कि वह बातचीत के लिए तैयार है, लेकिन युद्ध की स्थिति में पीछे हटने वाला नहीं है।

    गौरतलब है कि अमेरिका और इजरायल ने 28 फरवरी को ईरान से जुड़े ठिकानों पर संयुक्त कार्रवाई की थी। इसके बाद 8 अप्रैल को अस्थायी सीजफायर जरूर हुआ, लेकिन दोनों पक्षों के बीच तनाव खत्म नहीं हुआ। अब ट्रंप की नई पोस्ट और अमेरिकी सैन्य तैयारियों की खबरों ने पश्चिम एशिया में फिर बड़े संघर्ष की आशंका बढ़ा दी है। दुनिया की नजरें अब वॉशिंगटन और तेहरान पर टिकी हैं, क्योंकि एक गलत फैसला पूरे क्षेत्र को युद्ध की आग में झोंक सकता है।