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  • भारत-ऑस्ट्रेलिया रिश्तों को नई ऊर्जा, प्रधानमंत्री मोदी की यात्रा में यूरेनियम निर्यात समझौते पर बनी सहमति, रणनीतिक साझेदारी हुई और मजबूत

    भारत-ऑस्ट्रेलिया रिश्तों को नई ऊर्जा, प्रधानमंत्री मोदी की यात्रा में यूरेनियम निर्यात समझौते पर बनी सहमति, रणनीतिक साझेदारी हुई और मजबूत

    नई दिल्ली । प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ऑस्ट्रेलिया यात्रा के दौरान भारत और ऑस्ट्रेलिया के संबंधों को नई मजबूती देने वाले कई महत्वपूर्ण फैसलों पर सहमति बनी। दोनों देशों ने आर्थिक सहयोग, स्वच्छ ऊर्जा, निवेश, व्यापार और रणनीतिक साझेदारी को आगे बढ़ाने की प्रतिबद्धता दोहराई। इस दौरान शांतिपूर्ण परमाणु कार्यक्रम के लिए भारत को ऑस्ट्रेलिया से यूरेनियम निर्यात की व्यवस्था की पुष्टि भी की गई, जिसे दोनों देशों के रिश्तों में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

    ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री एंथनी अल्बनीज ने प्रधानमंत्री मोदी का औपचारिक स्वागत किया और दोनों नेताओं के बीच उच्चस्तरीय वार्ता हुई। बैठक में ऊर्जा सुरक्षा, महत्वपूर्ण खनिज, स्वच्छ ऊर्जा, बुनियादी ढांचा, निवेश और व्यापारिक सहयोग जैसे कई विषयों पर विस्तार से चर्चा की गई। दोनों नेताओं ने इस बात पर जोर दिया कि भारत और ऑस्ट्रेलिया की साझेदारी केवल द्विपक्षीय हितों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका व्यापक प्रभाव हिंद-प्रशांत क्षेत्र की स्थिरता और वैश्विक आर्थिक सहयोग पर भी पड़ेगा।

    संयुक्त बयान में दोनों देशों ने वर्ष 2015 के परमाणु सहयोग समझौते के तहत भारत को शांतिपूर्ण उद्देश्यों के लिए यूरेनियम निर्यात की व्यवस्था को आगे बढ़ाने की पुष्टि की। इस निर्णय को भारत की दीर्घकालिक ऊर्जा आवश्यकताओं और स्वच्छ ऊर्जा क्षमता बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। साथ ही दोनों देशों ने स्वच्छ ऊर्जा, नवीकरणीय ऊर्जा और भविष्य की ऊर्जा तकनीकों में संयुक्त सहयोग बढ़ाने पर भी सहमति व्यक्त की।

    दोनों प्रधानमंत्रियों ने आतंकवाद के खिलाफ साझा रुख दोहराते हुए हर प्रकार के आतंकवाद और हिंसक चरमपंथ की कड़ी निंदा की। उन्होंने वैश्विक स्तर पर प्रतिबंधित आतंकवादी संगठनों, उनके समर्थकों, वित्तपोषकों और सहयोगियों के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई की आवश्यकता पर जोर दिया। दोनों देशों ने आतंकवाद से जुड़े खतरों, ऑनलाइन कट्टरपंथ, नई तकनीकों के दुरुपयोग, आतंकी वित्तपोषण और समुद्री सुरक्षा जैसे विषयों पर सहयोग बढ़ाने का संकल्प भी व्यक्त किया।

    हिंद-प्रशांत क्षेत्र को लेकर दोनों नेताओं ने नियम-आधारित व्यवस्था और अंतरराष्ट्रीय कानून के सम्मान की आवश्यकता दोहराई। उन्होंने समुद्री मार्गों की स्वतंत्रता, हवाई आवाजाही और विवादों के शांतिपूर्ण समाधान के महत्व पर बल देते हुए क्षेत्रीय स्थिरता बनाए रखने के लिए साझा प्रयास जारी रखने की बात कही।

    यात्रा के दौरान आयोजित भारत-ऑस्ट्रेलिया सीईओ फोरम में दोनों देशों के उद्योगपतियों और निवेशकों ने भी भाग लिया। प्रधानमंत्री मोदी ने भारत की ऊर्जा, विनिर्माण, बुनियादी ढांचा और निवेश से जुड़ी योजनाओं को साझा करते हुए ऑस्ट्रेलियाई कंपनियों को भारत में निवेश के लिए आमंत्रित किया। वहीं ऑस्ट्रेलियाई नेतृत्व ने भी व्यापारिक सहयोग बढ़ाने और निजी क्षेत्र की भागीदारी मजबूत करने की प्रतिबद्धता दोहराई।

    विशेषज्ञों का मानना है कि यूरेनियम आपूर्ति, स्वच्छ ऊर्जा सहयोग, निवेश और व्यापारिक साझेदारी से दोनों देशों के आर्थिक संबंधों को नई गति मिलेगी। साथ ही रक्षा, समुद्री सुरक्षा और रणनीतिक सहयोग के क्षेत्र में भी दोनों देशों के बीच विश्वास और समन्वय पहले की तुलना में अधिक मजबूत होने की संभावना है। यह यात्रा भारत-ऑस्ट्रेलिया संबंधों को व्यापक और दीर्घकालिक साझेदारी की दिशा में आगे बढ़ाने वाला महत्वपूर्ण पड़ाव मानी जा रही है।

  • स्कूल बस के सामने नहीं चल सकती कोई गाड़ी, अमेरिका का सुरक्षा नियम बना मिसाल, उल्लंघन पर भारी जुर्माना और लाइसेंस तक रद्द

    स्कूल बस के सामने नहीं चल सकती कोई गाड़ी, अमेरिका का सुरक्षा नियम बना मिसाल, उल्लंघन पर भारी जुर्माना और लाइसेंस तक रद्द


    नई दिल्ली । अमेरिका में स्कूली बच्चों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए सड़क परिवहन से जुड़े ऐसे सख्त नियम लागू किए गए हैं, जिन्हें दुनिया के सबसे प्रभावी सुरक्षा उपायों में गिना जाता है। इन्हीं नियमों में एक महत्वपूर्ण व्यवस्था यह है कि जैसे ही किसी स्कूल बस में बच्चों को चढ़ाने या उतारने के लिए बस रुकती है, सड़क पर दोनों दिशाओं का ट्रैफिक पूरी तरह रोक दिया जाता है। इस दौरान किसी भी वाहन को बस के पास से आगे बढ़ने की अनुमति नहीं होती और नियम का उल्लंघन करने वालों पर भारी आर्थिक दंड के साथ अन्य कानूनी कार्रवाई भी की जा सकती है।

    इस व्यवस्था का उद्देश्य बच्चों को सड़क पार करते समय अधिकतम सुरक्षा उपलब्ध कराना है। स्कूल बस के रुकने से पहले उस पर लगी पीली चेतावनी लाइटें जलने लगती हैं, जिससे आसपास के वाहन चालकों को गति कम करने का संकेत मिलता है। बस के पूरी तरह रुकते ही लाल चेतावनी लाइटें सक्रिय हो जाती हैं और बस के किनारे लगा ‘स्टॉप-आर्म’ बाहर निकल आता है। यह संकेत मिलते ही पीछे से आने वाले सभी वाहनों को तुरंत रुकना अनिवार्य होता है। यदि सड़क के बीच में डिवाइडर नहीं है तो सामने से आने वाले वाहनों को भी वहीं रुकना पड़ता है, जब तक सभी बच्चे सुरक्षित रूप से सड़क पार नहीं कर लेते।

    अमेरिका में यह नियम लंबे समय से लागू है और इसके पीछे दशकों के सड़क हादसों का अनुभव जुड़ा हुआ है। विभिन्न अध्ययन और सरकारी आंकड़ों में सामने आया कि स्कूल बसों में चढ़ते और उतरते समय कई बच्चों ने सड़क दुर्घटनाओं में अपनी जान गंवाई। इनमें बड़ी संख्या कम उम्र के बच्चों की थी। इन्हीं घटनाओं के बाद बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए नियमों को और अधिक सख्त बनाया गया तथा निगरानी व्यवस्था को आधुनिक तकनीक से जोड़ा गया।

    हालांकि नियम स्पष्ट होने के बावजूद हर वर्ष बड़ी संख्या में वाहन चालक इसका उल्लंघन करते हैं। कई मामलों में चालक जल्दबाजी, लापरवाही या नियमों की जानकारी के अभाव में स्कूल बस को ओवरटेक करने की कोशिश करते हैं। इस तरह की घटनाओं को रोकने के लिए प्रशासन ने केवल पुलिस निगरानी पर निर्भर रहने के बजाय तकनीकी समाधान अपनाया है।

    अब अमेरिका के कई राज्यों में स्कूल बसों पर उच्च गुणवत्ता वाले ऑटोमेटेड कैमरे लगाए जा चुके हैं। जैसे ही कोई वाहन स्टॉप-आर्म की अनदेखी कर बस के पास से गुजरता है, कैमरा उसकी तस्वीर और नंबर प्लेट रिकॉर्ड कर लेता है। इसके आधार पर संबंधित वाहन मालिक के खिलाफ स्वतः चालान जारी किया जाता है। कई राज्यों में नियम तोड़ने वालों पर भारी जुर्माना लगाया जाता है और गंभीर मामलों में ड्राइविंग लाइसेंस निलंबित या रद्द करने जैसी कार्रवाई भी संभव है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि सड़क सुरक्षा केवल कानून बनाने से नहीं बल्कि उनके प्रभावी पालन और जनजागरूकता से सुनिश्चित होती है। अमेरिका का यह मॉडल दिखाता है कि बच्चों की सुरक्षा के लिए सख्त नियम, आधुनिक तकनीक और कड़ी निगरानी मिलकर सड़क दुर्घटनाओं को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। यही कारण है कि यह व्यवस्था दुनिया के कई देशों के लिए सड़क सुरक्षा के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उदाहरण मानी जाती है।

  • 60 करोड़ की वीरान हवेली में चोरी-छिपे दाखिल हुए यूट्यूबर, दिवंगत टीवी स्टार के घर का अंदरूनी वीडियो सोशल मीडिया पर चर्चा का केंद्र

    60 करोड़ की वीरान हवेली में चोरी-छिपे दाखिल हुए यूट्यूबर, दिवंगत टीवी स्टार के घर का अंदरूनी वीडियो सोशल मीडिया पर चर्चा का केंद्र

    नई दिल्ली । ब्रिटेन के प्रसिद्ध टेलीविजन कलाकार सर ब्रूस फोर्सिथ की वर्षों से बंद पड़ी आलीशान हवेली एक बार फिर चर्चा में है। इस बार वजह उनकी संपत्ति नहीं, बल्कि कुछ यूट्यूबर द्वारा सुरक्षा व्यवस्था को पार कर हवेली के भीतर प्रवेश करना और वहां का वीडियो सोशल मीडिया पर साझा करना है। वीडियो सामने आने के बाद इस घटना ने सुरक्षा व्यवस्था और निजी संपत्तियों में अवैध प्रवेश को लेकर नई बहस छेड़ दी है।

    बताया गया है कि यह घटना ब्रिटेन के सरे स्थित वेंटवर्थ एस्टेट इलाके की है, जहां सर ब्रूस फोर्सिथ की आलीशान हवेली स्थित है। कुछ युवा कंटेंट क्रिएटर दिन के समय मुख्य प्रवेश क्षेत्र की सुरक्षा को पार कर परिसर के भीतर पहुंच गए। उन्होंने हवेली की छत तक पहुंचने के बाद पूरे परिसर का वीडियो रिकॉर्ड किया और बाद में अंदर के कई हिस्सों को भी कैमरे में कैद किया।

    वीडियो में हवेली की जर्जर होती स्थिति साफ दिखाई देती है। लंबे समय से खाली पड़े भवन में कई कमरों की हालत खराब हो चुकी है। आंगन और खुले हिस्सों में झाड़ियां उग आई हैं, जबकि कई स्थानों पर रखरखाव के अभाव के स्पष्ट संकेत दिखाई देते हैं। युवकों ने हवेली के ड्राइंग रूम, रसोई, बार एरिया, सीढ़ियों और अन्य हिस्सों की रिकॉर्डिंग भी की।

    वीडियो के दौरान उन्होंने उस कमरे का भी उल्लेख किया, जहां सर ब्रूस फोर्सिथ ने अपने जीवन के अंतिम दिन बिताए थे। हालांकि यह दावा वीडियो में मौजूद लोगों द्वारा किया गया, लेकिन इसकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं की गई है। रिकॉर्डिंग के दौरान हवेली के भीतर लगे एक सुरक्षा सेंसर के सक्रिय होने के बाद सभी लोग वहां से तुरंत बाहर निकल गए।

    सर ब्रूस फोर्सिथ ब्रिटेन के सबसे लोकप्रिय टेलीविजन प्रस्तोताओं में गिने जाते थे। उन्होंने कई दशकों तक मनोरंजन जगत में अपनी अलग पहचान बनाई और अनेक सफल कार्यक्रमों की मेजबानी की। वर्ष 2017 में उनके निधन के बाद यह संपत्ति बाद में बेच दी गई थी, लेकिन लंबे समय से इसका नियमित उपयोग नहीं होने के कारण यह भवन काफी हद तक सुनसान पड़ा हुआ है।

    यह घटना केवल सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो तक सीमित नहीं है, बल्कि इसने निजी संपत्तियों की सुरक्षा और अवैध प्रवेश जैसे गंभीर मुद्दों पर भी ध्यान आकर्षित किया है। किसी भी निजी परिसर में बिना अनुमति प्रवेश करना कानून का उल्लंघन माना जाता है और इससे सुरक्षा संबंधी जोखिम भी बढ़ सकते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि लोकप्रिय और चर्चित स्थानों पर इस तरह की गतिविधियों को रोकने के लिए प्रभावी सुरक्षा व्यवस्था आवश्यक है।

    सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो को लाखों लोग देख चुके हैं। कुछ लोगों ने हवेली की बदहाल स्थिति पर आश्चर्य व्यक्त किया, जबकि कई लोगों ने बिना अनुमति निजी संपत्ति में प्रवेश कर वीडियो बनाने की प्रवृत्ति पर सवाल उठाए। इस घटना ने एक बार फिर यह स्पष्ट किया है कि लोकप्रियता हासिल करने की होड़ में कानून और सुरक्षा नियमों की अनदेखी गंभीर परिणाम पैदा कर सकती है।

  • वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच भारत की अर्थव्यवस्था मजबूत, IMF ने अमेरिका-चीन से बेहतर विकास गति का जताया भरोसा

    वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच भारत की अर्थव्यवस्था मजबूत, IMF ने अमेरिका-चीन से बेहतर विकास गति का जताया भरोसा

    नई दिल्ली । वैश्विक आर्थिक चुनौतियों, भू-राजनीतिक तनाव और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में बनी अनिश्चितताओं के बावजूद भारत की अर्थव्यवस्था मजबूत गति से आगे बढ़ रही है। अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) ने अपने नवीनतम वर्ल्ड इकोनॉमिक आउटलुक अपडेट में भारत को वर्ष 2026 के दौरान दुनिया की सबसे तेज़ी से बढ़ने वाली प्रमुख अर्थव्यवस्था बताया है। रिपोर्ट में भारत की आर्थिक वृद्धि दर 7 प्रतिशत रहने का अनुमान व्यक्त किया गया है, जो वैश्विक औसत से दोगुने से भी अधिक है।

    आईएमएफ के अनुसार इस वर्ष वैश्विक अर्थव्यवस्था की विकास दर लगभग 3 प्रतिशत रहने का अनुमान है, जबकि भारत इससे काफी बेहतर प्रदर्शन कर सकता है। रिपोर्ट में कहा गया है कि देश की मजबूत घरेलू मांग, निजी उपभोग में निरंतर बढ़ोतरी और सेवा क्षेत्र की सुदृढ़ गतिविधियां आर्थिक विकास की सबसे बड़ी ताकत बनी हुई हैं। यही कारण है कि वैश्विक स्तर पर अनिश्चित माहौल के बावजूद भारतीय अर्थव्यवस्था अपेक्षाकृत अधिक स्थिर और मजबूत दिखाई दे रही है।

    रिपोर्ट में वित्त वर्ष और कैलेंडर वर्ष दोनों आधारों पर भारत की विकास दर का आकलन किया गया है। वित्त वर्ष 2026-27 के लिए आईएमएफ ने भारत की जीडीपी वृद्धि दर 6.4 प्रतिशत रहने का अनुमान लगाया है, जबकि अगले वित्त वर्ष में इसके बढ़कर 6.7 प्रतिशत तक पहुंचने की संभावना जताई गई है। वहीं कैलेंडर वर्ष 2026 के लिए 7 प्रतिशत की वृद्धि दर का अनुमान भारत को दुनिया की प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में सबसे आगे रखता है।

    आईएमएफ ने यह भी कहा है कि पश्चिम एशिया में जारी तनाव का वैश्विक अर्थव्यवस्था पर अपेक्षाकृत सीमित प्रभाव देखने को मिला है। कमोडिटी कीमतों, महंगाई की अपेक्षाओं और वित्तीय परिस्थितियों पर इसका असर नियंत्रित रहा है। साथ ही आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और नई तकनीकों के बढ़ते उपयोग ने वैश्विक तकनीकी क्षेत्र में मांग को मजबूती दी है, जिससे आर्थिक गतिविधियों को अतिरिक्त समर्थन मिला है।

    रिपोर्ट के अनुसार चीन की अर्थव्यवस्था वर्ष 2026 में लगभग 4.6 प्रतिशत की दर से बढ़ सकती है, जबकि अगले वर्ष इसमें और कमी आने का अनुमान है। वहीं अमेरिका की आर्थिक वृद्धि दर 2 प्रतिशत से कुछ अधिक रहने की संभावना जताई गई है। यूरोपीय संघ की अर्थव्यवस्था भी अपेक्षाकृत धीमी गति से आगे बढ़ने का अनुमान है। इन अनुमानों के बीच भारत की विकास दर प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में सबसे अधिक बनी हुई है।

    भारत की आर्थिक संभावनाओं को लेकर अन्य वैश्विक संस्थानों ने भी सकारात्मक अनुमान व्यक्त किए हैं। विश्व बैंक ने चालू वित्त वर्ष में भारत की विकास दर 6.6 प्रतिशत और अगले वित्त वर्ष में 7.2 प्रतिशत रहने की संभावना जताई है। संयुक्त राष्ट्र ने भी भारत की अर्थव्यवस्था को मजबूत बताते हुए 6.4 प्रतिशत की वृद्धि का अनुमान दिया है। भारतीय रिजर्व बैंक ने भी चालू वित्त वर्ष के लिए 6.6 प्रतिशत की विकास दर का अनुमान बरकरार रखा है, जबकि कई वैश्विक वित्तीय संस्थानों ने भी अपने पूर्वानुमानों में सुधार किया है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि मजबूत घरेलू मांग, सार्वजनिक निवेश, सेवा क्षेत्र का विस्तार, डिजिटल अर्थव्यवस्था का तेज़ विकास और बुनियादी ढांचे पर लगातार हो रहा निवेश भारत की आर्थिक वृद्धि को आगे भी गति दे सकता है। यदि वैश्विक परिस्थितियां अनुकूल बनी रहती हैं तो भारत आने वाले वर्षों में दुनिया की अग्रणी अर्थव्यवस्थाओं के बीच अपनी स्थिति और मजबूत कर सकता है। आईएमएफ की ताजा रिपोर्ट इसी विश्वास को मजबूत करती है कि वैश्विक चुनौतियों के बावजूद भारतीय अर्थव्यवस्था निरंतर विकास के मार्ग पर आगे बढ़ रही है।

  • अमेरिका में भारतीय इंजीनियर पर पत्नी की हत्या का आरोप, कथित तौर पर सबूत छिपाने की कोशिश के बाद हुआ गिरफ्तार

    अमेरिका में भारतीय इंजीनियर पर पत्नी की हत्या का आरोप, कथित तौर पर सबूत छिपाने की कोशिश के बाद हुआ गिरफ्तार

    नई दिल्ली । अमेरिका के वाशिंगटन राज्य के बेलेव्यू शहर में भारतीय मूल के एक सॉफ्टवेयर इंजीनियर को अपनी पत्नी की हत्या के आरोप में गिरफ्तार किए जाने का मामला सामने आया है। पुलिस के अनुसार, कई महीनों तक चली जांच के बाद एकत्र किए गए फोरेंसिक और डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर आरोपी के खिलाफ प्रथम श्रेणी हत्या का मामला दर्ज किया गया है। मामले ने भारतीय समुदाय सहित स्थानीय स्तर पर भी व्यापक चर्चा पैदा कर दी है।

    पुलिस के अनुसार यह घटना 27 अक्टूबर 2025 की है, जब आरोपी ने आपातकालीन सेवा को सूचना दी कि उसकी पत्नी बाथरूम में बंद है और दरवाजा नहीं खोल रही है। सूचना मिलने पर पुलिस मौके पर पहुंची और दरवाजा तोड़कर महिला को बाहर निकाला, लेकिन तब तक उसकी मौत हो चुकी थी। प्रारंभिक जांच के बाद शव का पोस्टमार्टम कराया गया, जिसमें मृत्यु का कारण गला घोंटने से दम घुटना बताया गया। इसके बाद मामले की जांच हत्या के एंगल से आगे बढ़ाई गई।

    जांच अधिकारियों का कहना है कि घटनास्थल की परिस्थितियों और उपलब्ध साक्ष्यों से यह संकेत मिला कि अपराध के बाद घटनास्थल की स्थिति बदलने की कोशिश की गई थी। पुलिस को ऐसा कोई प्रमाण नहीं मिला जिससे यह साबित हो कि घटना के दौरान कोई बाहरी व्यक्ति अपार्टमेंट में दाखिल हुआ था। इसी आधार पर जांच का दायरा आरोपी की गतिविधियों और उसके बयानों पर केंद्रित किया गया।

    जांच के दौरान अधिकारियों ने आरोपी के मोबाइल फोन, कॉल रिकॉर्ड और अन्य डिजिटल साक्ष्यों की भी जांच की। पुलिस के अनुसार, घटना वाले दिन आरोपी ने एक महिला से कई बार संपर्क किया था, जिसके साथ उसके कथित रूप से लंबे समय से व्यक्तिगत संबंध थे। जांच एजेंसियों का दावा है कि डिजिटल साक्ष्यों में कुछ ऐसे तथ्य भी सामने आए हैं, जिन्हें अभियोजन पक्ष महत्वपूर्ण मान रहा है। हालांकि इन सभी साक्ष्यों की अंतिम वैधानिक पुष्टि न्यायिक प्रक्रिया के दौरान होगी।

    जांच में यह भी सामने आया कि मृतका ने घटना से पहले अपने पति को भेजे गए कुछ संदेशों में पेय पदार्थ के असामान्य स्वाद की शिकायत की थी। पुलिस इन संदेशों सहित सभी डिजिटल रिकॉर्ड और फोरेंसिक रिपोर्ट का विश्लेषण कर रही है ताकि घटनाक्रम की पूरी तस्वीर स्पष्ट हो सके। अधिकारियों का कहना है कि प्रत्येक साक्ष्य का वैज्ञानिक परीक्षण किया जा रहा है और जांच कानूनी प्रक्रिया के अनुरूप आगे बढ़ रही है।

    मामले में आरोपी के खिलाफ प्रथम श्रेणी हत्या का आरोप लगाया गया है। अदालत में पेशी के बाद उसे न्यायिक हिरासत में भेजा गया है और उसके लिए उच्च जमानत राशि निर्धारित की गई है। यदि अदालत में आरोप सिद्ध होते हैं तो उसे कठोर दंड का सामना करना पड़ सकता है। हालांकि अमेरिकी न्याय व्यवस्था के अनुसार अंतिम निर्णय न्यायालय द्वारा सभी साक्ष्यों और दोनों पक्षों की दलीलों पर विचार करने के बाद ही दिया जाएगा।

    यह मामला एक बार फिर दर्शाता है कि आधुनिक आपराधिक जांच में डिजिटल साक्ष्य, फोरेंसिक विश्लेषण और इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड की भूमिका लगातार महत्वपूर्ण होती जा रही है। फिलहाल पुलिस मामले की विस्तृत जांच जारी रखे हुए है और अदालत में प्रस्तुत किए जाने वाले सभी साक्ष्यों को व्यवस्थित रूप से संकलित किया जा रहा है। न्यायिक प्रक्रिया पूरी होने तक आरोपी को कानून के अनुसार दोषी सिद्ध नहीं माना जाएगा।

  • ऑस्ट्रेलिया का गुजरात पर बड़ा भरोसा, निवेश और शिक्षा साझेदारी के नए अध्याय के साथ पीएम मोदी ने CEO फोरम से दिए आर्थिक सहयोग के संकेत

    ऑस्ट्रेलिया का गुजरात पर बड़ा भरोसा, निवेश और शिक्षा साझेदारी के नए अध्याय के साथ पीएम मोदी ने CEO फोरम से दिए आर्थिक सहयोग के संकेत

    नई दिल्ली । भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच आर्थिक तथा रणनीतिक साझेदारी को नई मजबूती देने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ऑस्ट्रेलिया के मेलबर्न में आयोजित CEO फोरम को संबोधित किया। इस दौरान दोनों देशों के उद्योग जगत के प्रतिनिधियों ने निवेश, व्यापार, स्वच्छ ऊर्जा, शिक्षा और बुनियादी ढांचे जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर चर्चा की। सम्मेलन के दौरान ऑस्ट्रेलिया की ओर से गुजरात में बड़े निवेश और वहां दो प्रमुख विश्वविद्यालयों के परिसर स्थापित करने की घोषणा भी की गई, जिसे दोनों देशों के संबंधों में एक अहम कदम माना जा रहा है।

    प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि वैश्विक स्तर पर आपूर्ति श्रृंखला की चुनौतियों, ऊर्जा सुरक्षा और आर्थिक अनिश्चितताओं के बीच भारत और ऑस्ट्रेलिया विश्वसनीय साझेदार के रूप में उभर रहे हैं। उन्होंने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में दोनों देशों ने आपसी विश्वास और साझा हितों के आधार पर सहयोग का मजबूत ढांचा तैयार किया है, जिसका लाभ अब व्यापार और निवेश के रूप में दिखाई देने लगा है।

    प्रधानमंत्री ने आर्थिक सहयोग और व्यापार समझौते का उल्लेख करते हुए कहा कि इसके लागू होने के बाद दोनों देशों के बीच व्यापारिक संबंधों में उल्लेखनीय विस्तार हुआ है। भारतीय उत्पादों को ऑस्ट्रेलियाई बाजार में बेहतर पहुंच मिली है, जबकि दोनों देशों के उद्योगों के लिए नए अवसर भी तैयार हुए हैं। सरकार का लक्ष्य इस आर्थिक सहयोग को और व्यापक बनाकर निवेश तथा औद्योगिक साझेदारी को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाना है।

    सम्मेलन के दौरान ऑस्ट्रेलियाई नेतृत्व ने गुजरात में निवेश बढ़ाने की प्रतिबद्धता दोहराई। इसके साथ ही ऑस्ट्रेलिया का एक उच्चस्तरीय व्यापारिक प्रतिनिधिमंडल वर्ष के अंत में भारत का दौरा करेगा, जहां निवेश की नई संभावनाओं पर विस्तार से चर्चा होगी। दोनों देशों ने इस बात पर सहमति जताई कि राज्यों के स्तर पर भी प्रत्यक्ष सहयोग को बढ़ावा दिया जाएगा ताकि क्षेत्रीय विकास और उद्योगों को नई गति मिल सके।

    प्रधानमंत्री ने स्वच्छ ऊर्जा क्षेत्र को भविष्य की साझेदारी का प्रमुख आधार बताते हुए कहा कि भारत हरित हाइड्रोजन, सौर ऊर्जा, पवन ऊर्जा और अन्य स्वच्छ ऊर्जा परियोजनाओं में तेजी से निवेश कर रहा है। उन्होंने कहा कि भारत ने नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता बढ़ाने और दीर्घकालिक कार्बन उत्सर्जन लक्ष्यों को हासिल करने के लिए महत्वाकांक्षी योजनाएं बनाई हैं। उन्होंने यह भी कहा कि ऑस्ट्रेलिया की तकनीक, पूंजी और प्राकृतिक संसाधन इस परिवर्तन को गति देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। साथ ही परमाणु ऊर्जा क्षमता के विस्तार में भी दोनों देशों के बीच सहयोग की व्यापक संभावनाएं मौजूद हैं।

    शिक्षा क्षेत्र में भी दोनों देशों के संबंधों को नई दिशा मिली है। ऑस्ट्रेलिया की दो प्रमुख विश्वविद्यालयों ने गुजरात में अपने परिसर स्थापित करने की घोषणा की है। प्रधानमंत्री ने इसे केवल शैक्षणिक सहयोग नहीं बल्कि प्रतिभा विकास और कौशल निर्माण की दिशा में दीर्घकालिक साझेदारी की शुरुआत बताया। उन्होंने कहा कि दोनों देशों को छात्र आदान-प्रदान से आगे बढ़कर वैश्विक स्तर की प्रतिभा तैयार करने पर मिलकर काम करना चाहिए।

    प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि भारत और ऑस्ट्रेलिया की साझेदारी केवल राष्ट्रीय स्तर तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि राज्यों, विश्वविद्यालयों, उद्योगों और स्थानीय संस्थानों के बीच भी सहयोग को बढ़ावा दिया जाना चाहिए। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि दोनों देशों के उद्योग जगत के बीच बढ़ता संवाद निवेश, नवाचार और रोजगार के नए अवसर पैदा करेगा तथा आने वाले वर्षों में भारत-ऑस्ट्रेलिया संबंध आर्थिक सहयोग के एक नए दौर में प्रवेश करेंगे।

  • अमेरिका-ईरान तनाव फिर चरम पर, सीजफायर टूटने के बाद बढ़ी सैन्य कार्रवाई, पाकिस्तान ने संयम और बातचीत की अपील की

    अमेरिका-ईरान तनाव फिर चरम पर, सीजफायर टूटने के बाद बढ़ी सैन्य कार्रवाई, पाकिस्तान ने संयम और बातचीत की अपील की


    नई दिल्ली ।
    पश्चिम एशिया में एक बार फिर तनाव तेजी से बढ़ गया है। अमेरिका और ईरान के बीच हालिया सैन्य कार्रवाई के बाद दोनों देशों के बीच हुआ अंतरिम युद्धविराम प्रभावी नहीं रह गया है। इससे पूरे क्षेत्र में सुरक्षा और स्थिरता को लेकर नई चिंताएं पैदा हो गई हैं। ताजा घटनाक्रम के बीच पाकिस्तान ने दोनों पक्षों से संयम बरतने और कूटनीतिक माध्यमों से समाधान तलाशने की अपील की है।

    अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने स्पष्ट संकेत दिया है कि दोनों देशों के बीच लागू अंतरिम युद्धविराम अब प्रभावी नहीं है। उनके इस बयान के बाद क्षेत्र में सैन्य तनाव और बढ़ने की आशंका जताई जा रही है। हाल के दिनों में अमेरिका और ईरान के बीच सैन्य गतिविधियां तेज हुई हैं, जिससे पूरे पश्चिम एशिया की सुरक्षा स्थिति पर व्यापक असर पड़ सकता है। हालांकि ट्रंप ने यह भी कहा है कि बातचीत के रास्ते पूरी तरह बंद नहीं हुए हैं और संवाद की संभावना अभी भी बनी हुई है।

    संघर्ष के बीच पाकिस्तान ने आधिकारिक प्रतिक्रिया देते हुए क्षेत्र में बढ़ते तनाव पर चिंता व्यक्त की है। पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने सभी पक्षों से संयम बरतने, किसी भी प्रकार की उकसाने वाली कार्रवाई से बचने और विवाद का समाधान बातचीत तथा कूटनीति के माध्यम से निकालने का आग्रह किया है। पाकिस्तान ने यह भी कहा कि क्षेत्र में स्थायी शांति के लिए संवाद ही सबसे प्रभावी माध्यम है और यदि आवश्यकता हुई तो वह मध्यस्थता के प्रयासों में सहयोग देने के लिए तैयार है।

    क्षेत्रीय सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यदि सैन्य टकराव लंबा खिंचता है तो इसका प्रभाव केवल संबंधित देशों तक सीमित नहीं रहेगा। पश्चिम एशिया वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति का महत्वपूर्ण केंद्र है और किसी भी बड़े संघर्ष का असर अंतरराष्ट्रीय तेल और गैस बाजार पर पड़ सकता है। यही कारण है कि वैश्विक निवेशक और विभिन्न देश इस घटनाक्रम पर लगातार नजर बनाए हुए हैं।

    तनाव बढ़ने के साथ ऊर्जा बाजार में भी अस्थिरता देखने को मिली है। निवेशकों के बीच यह आशंका बनी हुई है कि यदि संघर्ष और व्यापक हुआ तो समुद्री व्यापार मार्गों तथा ऊर्जा आपूर्ति श्रृंखला पर दबाव बढ़ सकता है। इससे अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव की संभावना बनी रहेगी, जिसका असर कई देशों की अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है।

    ईरान की ओर से भी हालिया घटनाक्रम पर कड़ा रुख अपनाया गया है। वहां के वरिष्ठ नेताओं ने कहा है कि किसी भी सैन्य कार्रवाई का जवाब दिया जाएगा और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर समझौता नहीं किया जाएगा। दूसरी ओर अमेरिका ने भी अपनी सुरक्षा और रणनीतिक हितों को सर्वोच्च प्राथमिकता देने की बात दोहराई है। दोनों पक्षों के सख्त बयानों ने तनाव कम होने की उम्मीदों को फिलहाल कमजोर किया है।

    अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कई देश और संगठन लगातार संयम बरतने तथा संवाद के माध्यम से समाधान निकालने की अपील कर रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि मौजूदा परिस्थितियों में किसी भी प्रकार की अतिरिक्त सैन्य कार्रवाई पूरे क्षेत्र को व्यापक अस्थिरता की ओर ले जा सकती है। ऐसे में आने वाले दिनों में कूटनीतिक प्रयासों की सफलता और दोनों देशों की अगली रणनीति पर दुनिया की नजर बनी रहेगी।

  • सीजफायर टूटते ही फिर भड़की जंग, अमेरिकी हमलों के बाद ईरान का पलटवार, बहरीन और कुवैत में सैन्य ठिकाने बने निशाना

    सीजफायर टूटते ही फिर भड़की जंग, अमेरिकी हमलों के बाद ईरान का पलटवार, बहरीन और कुवैत में सैन्य ठिकाने बने निशाना

    नई दिल्ली । अमेरिका और ईरान के बीच संघर्ष एक बार फिर तेज हो गया है। हालिया संघर्षविराम समाप्त होने के बाद दोनों देशों ने लगातार दूसरे दिन एक-दूसरे के खिलाफ सैन्य कार्रवाई की है। अमेरिकी सेना द्वारा ईरान के रणनीतिक ठिकानों पर हमले किए जाने के बाद ईरान ने जवाबी कार्रवाई करते हुए बहरीन और कुवैत में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों को मिसाइलों और ड्रोन के जरिए निशाना बनाने का दावा किया है। इस घटनाक्रम ने पूरे खाड़ी क्षेत्र में सुरक्षा चिंताएं बढ़ा दी हैं।

    अमेरिकी सैन्य अधिकारियों के अनुसार, हालिया अभियान का उद्देश्य होर्मुज जलडमरूमध्य में समुद्री मार्गों की सुरक्षा सुनिश्चित करना और वहां जहाजों पर हो रहे कथित हमलों को रोकना था। इसी रणनीति के तहत उत्तरी ईरान के एक महत्वपूर्ण रेलवे पुल और कुछ अन्य सैन्य प्रतिष्ठानों को निशाना बनाया गया। अमेरिकी पक्ष का कहना है कि इन ठिकानों का उपयोग सैन्य रसद और मिसाइल संचालन के लिए किया जा रहा था।

    अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी हालिया घटनाक्रम पर कड़ा रुख अपनाया है। उन्होंने स्पष्ट संकेत दिया कि यदि समुद्री मार्गों या अमेरिकी हितों पर हमले जारी रहे तो सैन्य कार्रवाई और तेज की जा सकती है। अमेरिकी प्रशासन का कहना है कि उसकी कार्रवाई क्षेत्रीय सुरक्षा और अंतरराष्ट्रीय समुद्री व्यापार की रक्षा के उद्देश्य से की जा रही है।

    दूसरी ओर, ईरान ने अमेरिकी हमलों के जवाब में खाड़ी क्षेत्र में स्थित अमेरिकी सैन्य अड्डों को निशाना बनाया। कुवैत की सेना ने पुष्टि की कि उसके वायु रक्षा तंत्र ने मिसाइलों और ड्रोन से जुड़े हमलों को रोकने की कार्रवाई की। सैन्य अधिकारियों के अनुसार, कई धमाकों की आवाजें वायु रक्षा प्रणाली द्वारा किए गए अवरोधन अभियान के दौरान सुनाई दीं। हालांकि अधिकारियों ने हमलों की उत्पत्ति या संभावित नुकसान के बारे में विस्तृत जानकारी साझा नहीं की है।

    बहरीन में भी स्थिति तनावपूर्ण रही। वहां के गृह मंत्रालय ने हवाई हमले की चेतावनी देने वाले सायरन बजने की पुष्टि की और नागरिकों से सुरक्षित स्थानों पर जाने की अपील की। सुरक्षा एजेंसियां पूरे घटनाक्रम पर लगातार नजर बनाए हुए हैं। स्थानीय स्तर पर सुरक्षा व्यवस्था को और सख्त कर दिया गया है ताकि किसी भी संभावित खतरे से प्रभावी ढंग से निपटा जा सके।

    लगातार दूसरे दिन हुई इस सैन्य कार्रवाई ने पूरे पश्चिम एशिया में अस्थिरता की आशंका बढ़ा दी है। विशेष रूप से होर्मुज जलडमरूमध्य वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। ऐसे में इस क्षेत्र में बढ़ते तनाव का असर अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार, समुद्री व्यापार और क्षेत्रीय सुरक्षा पर भी पड़ सकता है। कई देशों ने स्थिति पर नजर बनाए रखी है और संयम बरतने की अपील की है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि यदि दोनों पक्षों के बीच सैन्य कार्रवाई इसी तरह जारी रहती है तो क्षेत्रीय तनाव और गहरा सकता है। हालांकि कूटनीतिक स्तर पर तनाव कम करने की संभावनाएं भी पूरी तरह समाप्त नहीं हुई हैं। फिलहाल दुनिया की नजर अमेरिका और ईरान के अगले कदम पर टिकी हुई है, क्योंकि इन घटनाओं का प्रभाव केवल दोनों देशों तक सीमित नहीं बल्कि पूरे पश्चिम एशिया और वैश्विक सुरक्षा व्यवस्था पर पड़ सकता है।

  • US की H-1B वीजा फर्जीवाड़े पर बड़ी कार्रवाई….. भारतीय दिग्गज IT समेत कई बड़ी कंपनियां रडार पर

    US की H-1B वीजा फर्जीवाड़े पर बड़ी कार्रवाई….. भारतीय दिग्गज IT समेत कई बड़ी कंपनियां रडार पर


    वाशिंगटन।
    अमेरिका (America) ने H-1B और पर्म (PERM) वर्क वीजा में चल रही कथित धोखाधड़ी के खिलाफ एक बड़ा जांच अभियान छेड़ दिया है। अमेरिकी श्रम विभाग के एक शीर्ष अधिकारी ने बताया कि इस बड़े फर्जीवाड़े की जांच के रडार पर दिग्गज भारतीय आईटी कंपनी ‘कॉग्निजेंट’ (Leading Indian IT company ‘Cognizant’) समेत कई बड़ी कंपनियां शामिल हैं।


    उपराष्ट्रपति जेडी वेंस के नेतृत्व में हुआ एक्शन

    वीजा से जुड़े इस बड़े गोरखधंधे के खिलाफ यह सख्त कदम अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस (US Vice President JD Vance) के नेतृत्व वाली ‘टास्क फोर्स टू एलिमिनेट फ्रॉड’ के तहत उठाया गया है।


    कैसे खुला फर्जीवाड़े का राज?

    श्रम विभाग के तहत काम करने वाले ‘ऑफिस ऑफ द इंस्पेक्टर जनरल’ (OIG) ने बड़े स्तर पर चल रहे इस फर्जीवाड़े का पर्दाफाश किया है। OIG के आधिकारिक बयान में जांच से जुड़ी कई अहम बातें सामने आई हैं।

    कई नियोक्ताओं और लेबर ब्रोकर्स ने मिलकर वीजा के लिए फर्जी आवेदन जमा किए। विदेशी कामगारों का शोषण किया गया, उनसे जबरन कम वेतन पर काम कराया गया और उनके पैसों में अवैध कटौती की गई। कम मजदूरी वाले विदेशी कर्मचारियों से बाजार को भर दिया गया, जिसका सीधा नुकसान अमेरिकी कामगारों को हुआ और उनकी नौकरियां छिन गईं।


    ‘दर्जनों कंपनियों को जारी किए गए समन’

    बुधवार को फॉक्स बिजनेस से बातचीत के दौरान श्रम विभाग के इंस्पेक्टर जनरल एंथोनी डी एस्पोसिटो ने इस कार्रवाई को लेकर खुलकर बात की। उन्होंने कहा, “हमने इस मामले में पहले ही दर्जनों समन जारी कर दिए हैं। हम यह सुनिश्चित करेंगे कि हम जांच में मिले हर एक सुराग की तह तक जाएं।”

    आईटी दिग्गज कॉग्निजेंट का जिक्र करते हुए उन्होंने बताया, “हमारे पास ऐसे व्हिसलब्लोअर्स मौजूद हैं जो ‘कॉग्निजेंट’ जैसी कुछ सबसे बड़ी कंपनियों के बारे में जानकारी दे रहे हैं। ये कंपनियां पर्म और H-1B वीजा से जुड़े मुद्दों में पहले से ही काफी चर्चा में रही हैं।”


    अमेरिकी नागरिकों की नौकरियों से समझौता नहीं

    OIG ने अपने बयान में स्पष्ट किया है कि ऐसे जालसाज उन श्रम कार्यक्रमों की साख को नुकसान पहुंचाते हैं, जिन्हें देश में श्रमिकों की वास्तविक कमी को दूर करने के लिए बनाया गया है। इन कार्यक्रमों का मकसद अमेरिकी नागरिकों की नौकरियों की कीमत पर भ्रष्ट लोगों की जेब भरना बिल्कुल नहीं है।

    जांच एजेंसी ने कहा कि वह विदेशी गेस्ट वर्कर वीजा सिस्टम का गलत इस्तेमाल करने वाले मानव तस्करी और जबरन मजदूरी कराने वाले पूरे नेटवर्क को ध्वस्त करने के लिए प्रतिबद्ध है। संस्था का साफ कहना है कि वह उन सभी साजिशों को जड़ से खत्म करेगी जो मजबूर मजदूरों का शोषण करते हैं और अमेरिकी नागरिकों के हक की नौकरियां छीनते हैं।

  • ट्रंप ने खुद को बताया ईरान का 'नंबर वन टारगेट'…. बोले- उनकी हत्या की रच रहा साजिश!

    ट्रंप ने खुद को बताया ईरान का 'नंबर वन टारगेट'…. बोले- उनकी हत्या की रच रहा साजिश!


    अंकारा।
    अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (American President Donald Trump) ने बुधवार को खुलकर कहा कि वे ईरान (Iran) के नंबर वन टारगेट हैं और तेहरान उनकी हत्या की साजिश रच रहा है। ट्रंप ने NATO समिट के दौरान यह बयान देते हुए कहा कि ईरानी लीडरशिप (Iranian Leadership) उनसे बदला लेने पर तुली हुई है। उन्होंने साफ शब्दों में चेतावनी दी कि ईरान के साथ कोई समझौता अब संभव नहीं है। उनके इस बयान के बाद सवाल उठ रहे हैं कि क्या इसी डर के चलते उन्होंने ईरान के साथ चल रही डील को पूरी तरह खत्म कर दिया?


    ट्रंप ने क्या कहा?

    ट्रंप ने आरोप लगाया कि ईरान उनकी हत्या की साजिश रच रहा है। इस दौरान उन्होंने खुद को ईरान का ‘नंबर वन टारगेट’ बताया। तुर्की की राजधानी अंकारा में NATO शिखर सम्मेलन के दौरान ट्रंप ने कहा कि उनके कुछ लीडर थे जो अब नहीं रहे। उनके पास कुछ और लीडर थे जो शायद अब नहीं रहे। मैं भी शायद जाऊं, क्योंकि मैं उनका नंबर वन टारगेट हूं। वे घटिया लोग हैं। उन्होंने 47 साल से ऐसा ही किया है।

    इस दौरान ट्रंप ने ईरान की पिछली नेतृत्व व्यवस्था को दुश्मन करार दिया, लेकिन कहा कि मौजूदा लीडरशिप थोड़ी ज्यादा समझदारी से काम कर रही दिख रही है। उन्होंने साफ कहा कि वे तनाव बढ़ाने के बजाय ईरान मुद्दे को हमेशा के लिए खत्म करना चाहते हैं। बता दें कि यह बयान दोनों देशों के बीच हालिया सैन्य टकराव के बाद वॉशिंगटन और तेहरान के बढ़ते तनाव के बीच आया है।


    समझौता का प्रयास खत्म

    गौरतलब है कि ट्रंप ने कुछ घंटे पहले ही घोषणा की कि ईरान के साथ चल रही बातचीत और समझौते की कोशिशें पूरी तरह खत्म हो गई हैं। उन्होंने कहा कि उनके साथ डील करना बस समय की बर्बादी है। NATO समिट में ट्रंप ने आगे कहा कि हम आज रात उन्हें कड़ी टक्कर देंगे। वे हर दिन समझौते का उल्लंघन करते हैं। जब उनसे पूछा गया कि क्या युद्धविराम अभी भी लागू है, तो उन्होंने जवाब दिया कि जहां तक मेरा सवाल है, यह खत्म हो चुका है।


    ईरान का जवाबी हमला

    इस बीच, ईरान ने ताजा अमेरिकी हमलों के जवाब में बुधवार को फारस की खाड़ी क्षेत्र में मिसाइलों और ड्रोन से जवाबी हमला किया। ईरानी सशस्त्र बलों ने कहा कि उन्होंने बहरीन और कुवैत में अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया, जिसके बाद दोनों देशों में हवाई हमले के सायरन बजाये गये। अमेरिकी केंद्रीय कमान (सेंटकॉम) ने इस पर तत्काल कोई टिप्पणी नहीं की। उधर, कतर की मंत्रिपरिषद ने ओमान तट के निकट उसके तरलीकृत प्राकृतिक गैस (एलएनजी) वाहक जहाज पर हुए हमले के बाद ईरान से होर्मुज में खतरनाक गतिविधियां बंद करने की मांग की है।

    कतर सरकार ने बयान में कहा कि देश अपने हितों की रक्षा के लिए आवश्यक सभी कदम उठाने का अधिकार सुरक्षित रखता है। कतर अमेरिका और ईरान के बीच वार्ता में मध्यस्थ की भूमिका निभा रहा है। अंतरराष्ट्रीय समुद्री संगठन (आईएमओ) के महासचिव आर्सेनियो डोमिंगुएज ने भी जहाज परिचालकों से फिलहाल होर्मुज से जहाज नहीं भेजने की अपील की है। उन्होंने कहा कि इससे फारस की खाड़ी में फंसे लगभग 6000 नाविकों की सुरक्षा को अनावश्यक खतरा हो सकता है।