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  • बांग्लादेश में इस बार जन्माष्टमी पर नहीं दिखेगी पहले जैसी रौनक…. सरकार ने रद्द किया अवकाश

    बांग्लादेश में इस बार जन्माष्टमी पर नहीं दिखेगी पहले जैसी रौनक…. सरकार ने रद्द किया अवकाश


    ढाका।
    जैसे-जैसे जन्माष्टमी (Janmashtami) के साथ अन्य हिंदू त्योहारों (Hindu Festivals Holidays) की समय नजदीक आ रहा है, बांग्लादेश (Bangladesh) में सरकार के प्रति हिंदुओं में रोष बढ़ता ही जा रहा है। इसकी प्रमुख वजह यह है कि बांग्लादेश सरकार (Bangladesh Government) ने जन्माष्टमी को मिलने वाला सरकारी अवकाश रद्द कर दिया है। ढाकेश्वरी मंदिर, चट्टग्राम, सिलहट समेत कई मंदिरों में जन्माष्टमी मनाई जानी है, लेकिन इस बार यहां जन्माष्टमी को आधिकारिक छुट्टी नहीं रहेगी।

    खबरों के मुताबिक, इस वर्ष 2 जनवरी को ही बांग्लादेश में सरस्वती पूजा, जन्माष्टमी, दुर्गाष्टमी और बुद्ध पूर्णिमा की सरकारी छुट्टियां रद्द कर दी गईं। हिंदू जागृति समिति व इसकी अगुवाई में हिंदुओं ने इसका भारी विरोध किया है। हसीना के अपदस्थ होने के बाद बांग्लादेश में हिंदुओं की हिंसा के चलते ढाका, सिलहट, खुलना, कुमिला, जेसोर और मीरपुर में बड़े-बड़े जुलूस नहीं निकाले जा रहे हैं इस बार भी यहां उत्साह फीका रहेगा। देश के अखबार प्रोथोम आलो के मुताबिक, इस बार मंदिरों में जन्माष्टमी समारोह तो होंगे लेकिन दस दिन पूर्व से बाजारों में जो उत्साह देखा जाता था वह इस बार नहीं है। बांग्लादेश में एक समय रहा है जब हिंदू पर्वों के लिए मंदिरों में उत्साह होता था और बड़े बड़े उत्सव तथा जुलूस निकाले जाते थे, लेकिन अब देश में पूर्व पीएम शेख हसीना के कार्यकाल जैसी उमंग नहीं दिख रही।


    सरकार का दावा, मंदिरों में विशेष सुरक्षा प्रबंध

    बांग्लादेश के गृह मंत्री सलाहुद्दीन अहमद ने सियासी उथल-पुथल के समय अल्पसंख्यक सुरक्षा के बाद कहा है कि पुलिस और स्थानीय प्रशासन की तरफ से मंदिरों के लिए विशेष सुरक्षा बल तैनात किए जाएंगे। हालांकि बांग्लादेश हिंदू जागरण मंच के प्रवक्ता निहार हलदर ने कहा, अभी समुदाय में डर है। कुछ मंदिरों में जनमाष्टमी पर शोभायात्राएं निकाली जाएंगी लेकिन ज्यादातर जगहों पर पहले जैसी रंगत नहीं रहेगी।

  • हिजाब पहनकर कार्यक्रम में पहुंचीं न्यूयॉर्क की गवर्नर कैथी होचुल

    हिजाब पहनकर कार्यक्रम में पहुंचीं न्यूयॉर्क की गवर्नर कैथी होचुल

    न्यूयॉर्क। न्यूयॉर्क की गवर्नर कैथी होचुल के एक इस्लामिक कल्चरल सेंटर के कार्यक्रम में हिजाब पहनकर शामिल होने के बाद अमेरिका में राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है। दक्षिणपंथी नेताओं और सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स ने गवर्नर के इस कदम की आलोचना करते हुए उन पर मुस्लिम समुदाय के सामने झुकने और ‘थर्ड वर्ल्ड’ के आगे समर्पण करने जैसे आरोप लगाए हैं।

    यह विवाद ऐसे समय सामने आया है जब 11 सितंबर 2001 के आतंकी हमलों की 25वीं बरसी नजदीक है। आलोचकों ने इसी संदर्भ को लेकर होचुल के हिजाब पहनने पर सवाल उठाए हैं।

    इस्लामिक कल्चरल सेंटर के कार्यक्रम में पहुंची थीं होचुल

    मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, कैथी होचुल हाल ही में न्यूयॉर्क के इस्लामिक कल्चरल सेंटर में आयोजित एक कार्यक्रम में शामिल हुईं। इस दौरान वह हिजाब पहने नजर आईं। कार्यक्रम में उन्होंने केंद्र के पदाधिकारियों और इमाम का आभार जताया।

    सोशल मीडिया पर सामने आए वीडियो में होचुल एक व्यक्ति को धन्यवाद देते हुए उन्हें परिवार का हिस्सा महसूस कराने की बात कहती दिखाई देती हैं।

    इसके बाद दक्षिणपंथी सोशल मीडिया अकाउंट्स और कुछ राजनीतिक हस्तियों ने उनके पहनावे को लेकर सवाल खड़े किए।

    ‘न्यूयॉर्क भूल गया’ लिखकर शेयर की 9/11 की तस्वीर

    राइट-विंग इन्फ्लुएंसर मैट वैन स्वोल ने होचुल की आलोचना करते हुए 9/11 हमले की तस्वीर के साथ पोस्ट किया और लिखा, ‘न्यूयॉर्क भूल गया।’

    कंजर्वेटिव कमेंटेटर ग्राहम एलन ने भी वीडियो शेयर करते हुए 9/11 की 25वीं बरसी का जिक्र किया और गवर्नर की आलोचना की।

    वहीं फॉक्स न्यूज की होस्ट राइली गेन्स ने सवाल उठाया कि खुद को फेमिनिस्ट बताने वाली महिला द्वारा मुस्लिम पुरुषों को नाराज न करने के लिए हिजाब पहनना कथित तौर पर किस तरह की विडंबना है।

    न्यूयॉर्क यंग रिपब्लिकन क्लब ने भी साधा निशाना

    न्यूयॉर्क यंग रिपब्लिकन क्लब ने भी गवर्नर पर निशाना साधा। संगठन ने आरोप लगाया कि होचुल न्यूयॉर्क के इस्लामिक कल्चरल सेंटर में ‘थर्ड वर्ल्ड’ के आगे झुक रही हैं।

    संगठन ने यह दावा भी किया कि जिस मस्जिद में गवर्नर ने भाषण दिया, उसे लगभग पूरी तरह कुवैत से फंडिंग मिलती है। संगठन ने विदेशी देशों के अमेरिकी मामलों में कथित हस्तक्षेप को लेकर भी सवाल उठाए।

    हालांकि, ये आरोप संबंधित राजनीतिक समूहों और आलोचकों की ओर से लगाए गए हैं। इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि इस रिपोर्ट में नहीं हुई है।

    पहले भी हिजाब को लेकर विवाद में घिर चुकी हैं होचुल

    कैथी होचुल को हिजाब पहनने को लेकर पहली बार आलोचना का सामना नहीं करना पड़ा है। हफपोस्ट के मुताबिक, पिछले साल भी एक मुस्लिम पुलिस अधिकारी के अंतिम संस्कार में हेडस्कार्फ पहनने पर उनकी आलोचना हुई थी।

    उस समय सीनेटर टेड क्रूज ने उनके पहनावे का मजाक उड़ाया था। इसके जवाब में होचुल ने कहा था कि वह दुखी परिवार की आस्था का सम्मान कर रही थीं और ऐसा करना किसी नेता तथा सभ्य व्यक्ति की जिम्मेदारी है।

    कांग्रेस तक पहुंचा विवाद

    गवर्नर के ताजा कार्यक्रम को लेकर शुरू हुई बहस अमेरिकी कांग्रेस तक भी पहुंच गई। टेक्सास के रिपब्लिकन सांसद ब्रैंडन गिल ने भी इस मुद्दे पर प्रतिक्रिया दी और होचुल के रुख पर सवाल उठाया।

    इसके अलावा पूर्व रियलिटी टीवी स्टार स्पेंसर प्रैट ने भी सोशल मीडिया पर व्यंग्यात्मक अंदाज में गवर्नर की आलोचना की।

    गवर्नर कार्यालय ने तत्काल प्रतिक्रिया नहीं दी

    होचुल के खिलाफ सोशल मीडिया और राजनीतिक हलकों में चल रही आलोचनाओं को लेकर हफपोस्ट ने उनके कार्यालय से प्रतिक्रिया मांगी थी, लेकिन रिपोर्ट के मुताबिक तत्काल कोई जवाब नहीं मिला।

    पूरे विवाद का केंद्र यह सवाल है कि किसी धार्मिक कार्यक्रम में मेजबान समुदाय की धार्मिक संवेदनाओं का सम्मान करने के लिए किसी निर्वाचित नेता द्वारा पारंपरिक पोशाक पहनना सांस्कृतिक सम्मान है या राजनीतिक संदेश। समर्थक इसे धार्मिक सम्मान और सामुदायिक संवाद का हिस्सा मान सकते हैं, जबकि आलोचक इसे राजनीतिक तुष्टिकरण के तौर पर देख रहे हैं।

  • नेपाल में जलप्रलय के बाद अब महामारी का खतरा, 962 मौतें; 4 हजार से ज्यादा लोग अब भी लापता

    नेपाल में जलप्रलय के बाद अब महामारी का खतरा, 962 मौतें; 4 हजार से ज्यादा लोग अब भी लापता


    काठमांडू।
    नेपाल और तिब्बत में आई विनाशकारी बाढ़ और भूस्खलन के बाद तबाही का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। राहत और बचाव अभियान दूसरे सप्ताह में पहुंच चुका है, लेकिन अब प्रशासन के सामने एक नई और गंभीर चुनौती खड़ी हो गई है। बाढ़ में अब तक 960 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि हजारों लोग अभी भी लापता हैं।

    आपदा के बाद कई इलाकों में शवों के सड़ने और दुर्गंध फैलने की खबरों ने महामारी फैलने का खतरा बढ़ा दिया है। मलबे और दलदल में दबे शवों को निकालना भी राहत टीमों के लिए बड़ी चुनौती बना हुआ है। ऐसे में रेस्क्यू ऑपरेशन के साथ अब प्रभावित क्षेत्रों में स्वच्छता और संक्रमण रोकने पर भी जोर दिया जा रहा है।

    ग्लेशियर टूटने से शुरू हुई तबाही

    यह प्राकृतिक आपदा पिछले बुधवार को चीन-नेपाल सीमा के पास ग्लेशियर का बड़ा हिस्सा टूटने के बाद शुरू हुई। अचानक बड़ी मात्रा में पानी चट्टानों और मलबे के साथ पहाड़ों से नीचे आया और रास्ते में पड़ने वाले गांवों और कस्बों को अपनी चपेट में ले लिया।

    तेज बहाव में कई इलाकों में घर और सड़कें बह गईं। बड़ी संख्या में लोग मलबे में दब गए या बाढ़ के पानी में बह गए। भारत में भी बाढ़ के पानी के साथ बहकर आई कम से कम 17 लाशें बरामद की जा चुकी हैं।

    शवों के सड़ने से बढ़ी चिंता

    आपदा के करीब एक सप्ताह बाद कई प्रभावित इलाकों में शवों के सड़ने से दुर्गंध फैलने लगी है। मलबे और कीचड़ में फंसे शवों को निकालने में लग रहा समय स्वास्थ्य व्यवस्था के लिए नई चुनौती बन रहा है।

    प्रशासन के सामने अब दोहरी जिम्मेदारी है—एक तरफ मलबे में फंसे लोगों की तलाश और दूसरी तरफ प्रभावित इलाकों में सैनिटेशन व्यवस्था बनाए रखना और संभावित संक्रमण को फैलने से रोकना।

    सुरंगों में फंसे करीब 100 कर्मचारियों की तलाश

    नेपाल के रसुवा जिले में करीब 100 जलविद्युत परियोजना कर्मियों के कई सुरंगों के भीतर फंसे होने की आशंका है। बचाव दल मोटी मिट्टी और मलबे को हटाकर सुरंगों तक पहुंचने की कोशिश कर रहे हैं।

    अब तक दो सुरंगों से तीन शव बरामद किए जा चुके हैं। एक भारतीय सेना अधिकारी के मुताबिक, बचाव टीमें लगातार भारी कीचड़ और मलबा हटाकर आगे बढ़ रही हैं। परिस्थितियां बेहद चुनौतीपूर्ण हैं, लेकिन राहतकर्मियों को अब भी कुछ लोगों के जिंदा मिलने की उम्मीद है।

    नेपाल ने राहत और बचाव अभियान में करीब 20,600 सुरक्षाकर्मियों और कर्मचारियों को लगाया है। अब तक 3,100 से ज्यादा लोगों को प्रभावित इलाकों से सुरक्षित निकाला जा चुका है।

    शवगृहों में जगह कम, अज्ञात शवों को दफनाया जा रहा

    बड़ी संख्या में शव मिलने के कारण नेपाल में शवगृहों की क्षमता भी कम पड़ने लगी है। अज्ञात शवों के डीएनए सैंपल लेने के बाद उन्हें दफनाया जा रहा है, ताकि भविष्य में पहचान होने पर उन्हें उनके परिवारों को सौंपा जा सके।

    लापता लोगों के परिजन सामुदायिक केंद्रों में पहुंचकर बरामद शवों की तस्वीरें देख रहे हैं। कई परिवार अब भी अपने रिश्तेदारों के मिलने की उम्मीद लगाए बैठे हैं।

    1000 से ज्यादा फ्रीजर यूनिट की जरूरत

    नेपाल सरकार ने शवों को सुरक्षित रखने के लिए अंतरराष्ट्रीय मदद की अपील की है। अधिकारियों के मुताबिक, शवों को संरक्षित रखने के लिए 1,000 से ज्यादा फ्रीजर यूनिट की जरूरत है।

    वहीं, लापता लोगों में 592 विदेशी नागरिक भी शामिल बताए जा रहे हैं। इससे बचाव और पहचान की प्रक्रिया और जटिल हो गई है।

    रेस्क्यू के साथ अब स्वास्थ्य संकट से निपटने की चुनौती

    नेपाल में राहत अभियान जैसे-जैसे आगे बढ़ रहा है, वैसे-वैसे आपदा का दूसरा पहलू सामने आ रहा है। हजारों लोगों की तलाश अभी बाकी है, सुरंगों में फंसे लोगों तक पहुंचने की कोशिश जारी है और दूसरी ओर शवों के सड़ने से स्वास्थ्य संबंधी जोखिम बढ़ रहा है।

    ऐसे में आने वाले दिनों में नेपाल के लिए सिर्फ लापता लोगों को ढूंढना ही चुनौती नहीं होगी, बल्कि स्वच्छता, शवों के सुरक्षित निस्तारण और संभावित महामारी को रोकना भी उतना ही महत्वपूर्ण होगा।

  • पाकिस्तान में नई तकनीक का खतरनाक टेस्ट! रिमोट से चल रही कार हुई बेकाबू, व्यस्त सड़क पर होता हादसा तो जा सकती थीं जानें

    पाकिस्तान में नई तकनीक का खतरनाक टेस्ट! रिमोट से चल रही कार हुई बेकाबू, व्यस्त सड़क पर होता हादसा तो जा सकती थीं जानें


    नई दिल्ली । पाकिस्तान में नई तकनीक का प्रदर्शन उस समय चर्चा का विषय बन गया जब ड्राइवरलेस कार का लाइव टेस्ट अचानक हादसे में बदल गया। इस्लामाबाद के डी-चौक इलाके में रिमोट और इंटरनेट के जरिए संचालित की जा रही कार का कंट्रोल बिगड़ गया और वह सड़क किनारे खड़ी पुलिस वैन से जा टकराई। पूरी घटना कैमरे में कैद हो गई और इसका वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल होने लगा। घटना ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया कि ऑटोमेटेड और रिमोट कंट्रोल तकनीक को सार्वजनिक सड़कों पर इस्तेमाल करने से पहले सुरक्षा के कितने मजबूत इंतजाम जरूरी हैं।

    जानकारी के अनुसार कार को ड्राइवरलेस या ऑटो मोड में चलाने का लाइव टेस्ट किया जा रहा था। कार को सीधे उसमें बैठा कोई ड्राइवर नियंत्रित नहीं कर रहा था बल्कि इंटरनेट और सैटेलाइट कनेक्शन के जरिए दूर से ऑपरेट किया जा रहा था। पत्रकार मुहम्मद अलीजा कार की आगे वाली पैसेंजर सीट पर बैठे हुए थे और टेस्ट के दौरान कार की तकनीक तथा उसके फीचर्स के बारे में जानकारी दे रहे थे। शुरुआत में सब कुछ सामान्य नजर आया और कार आगे बढ़ती रही लेकिन कुछ ही देर बाद स्थिति अचानक बदल गई।

    टेस्ट के दौरान रिमोट से नियंत्रित स्टीयरिंग का कंट्रोल बिगड़ने लगा। कार सड़क पर आगे बढ़ते हुए सीधे किनारे खड़ी पुलिस वैन की दिशा में जाने लगी। कार के अंदर मौजूद पत्रकार ने स्थिति को संभालने की कोशिश की और वीडियो में वह कार को रोकने के लिए हैंडब्रेक खींचते हुए भी दिखाई देते हैं। इसके बावजूद कार को समय रहते रोका नहीं जा सका और वह पुलिस वैन से जा टकराई। यह पूरी घटना कुछ ही पलों में हुई और लाइव टेस्ट देखते ही देखते तकनीकी खराबी का उदाहरण बन गया।

    पत्रकार मुहम्मद अलीजा के अनुसार शुरुआत में कार का सिस्टम ठीक तरीके से काम कर रहा था लेकिन इंटरनेट कनेक्शन में समस्या आने के बाद तकनीकी खराबी पैदा हुई। उनका कहना था कि कार को इंटरनेट के जरिए रिमोट से नियंत्रित किया जा रहा था और कनेक्शन में रुकावट आने के बाद उसका नियंत्रण प्रभावित हो गया। यह टेस्ट एबटाबाद के टेक्नोलॉजी उत्साही एहसान जफर से जुड़े ऑटोमेटेड ड्राइविंग तकनीक के प्रयोग की रिपोर्टिंग के दौरान किया जा रहा था।

    घटना के बाद वायरल वीडियो पर सोशल मीडिया में कई तरह की प्रतिक्रियाएं सामने आईं। कुछ यूजर्स ने ड्राइवरलेस कार के इस प्रयोग को लेकर मजेदार टिप्पणियां कीं तो कई लोगों ने इसे नई तकनीक के परीक्षण में सुरक्षा की कमी का उदाहरण बताया। हालांकि पत्रकार अलीजा ने बाद में स्पष्ट किया कि उनका उद्देश्य किसी युवा टेक इनोवेटर को बदनाम करना नहीं था। उनके मुताबिक ऐसी तकनीक पर काम करने वाले लोगों के प्रयासों को समझना जरूरी है लेकिन किसी भी नए प्रयोग में सुरक्षा को सबसे पहली प्राथमिकता दी जानी चाहिए।

    उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि अगर इसी तरह कार का कंट्रोल किसी व्यस्त सड़क पर बिगड़ जाता तो परिणाम कहीं अधिक गंभीर हो सकते थे। सड़क पर चल रहे अन्य वाहन और पैदल यात्री भी खतरे में आ सकते थे। यह घटना इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि ड्राइवरलेस और ऑटोमेटेड वाहनों की तकनीक को भविष्य के परिवहन के रूप में देखा जा रहा है लेकिन इसके साथ विश्वसनीय इंटरनेट कनेक्शन और मजबूत सुरक्षा प्रणाली की आवश्यकता भी उतनी ही महत्वपूर्ण है।

    फिलहाल इस्लामाबाद का यह वीडियो सोशल मीडिया पर चर्चा में है और ड्राइवरलेस तकनीक की सुरक्षा को लेकर बहस भी तेज हो गई है। लाइव टेस्ट में पुलिस वैन से हुई टक्कर ने साफ कर दिया कि नई तकनीक के प्रयोग में केवल आधुनिक सिस्टम होना काफी नहीं बल्कि उसके फेल होने की स्थिति में मजबूत सुरक्षा व्यवस्था और भरोसेमंद बैकअप सिस्टम भी बेहद जरूरी है।

  • नेपाल में फिर मंडरा रहा बाढ़ का खतरा…. भोटेकोशी नदी का जलस्तर बढ़ने के बाद अलर्ट जारी

    नेपाल में फिर मंडरा रहा बाढ़ का खतरा…. भोटेकोशी नदी का जलस्तर बढ़ने के बाद अलर्ट जारी


    काठमांडू।
    नेपाल (Nepal) में 26 अगस्त को आई त्रासदी के बाद रविवार को भोटेकोशी नदी (Bhote Koshi River) का जलस्तर फिर बढ़ गया। इससे बाढ़ की नई चेतावनी जारी की गई है। अधिकारियों ने बाढ़ प्रभावित जिलों में रहने वाले लोगों और बचावकर्मियों को सतर्क रहने की सलाह दी है। बाढ़ में मरने वाले लोगों की संख्या बढ़कर 780 हो गई है, जबकि 2,202 लोग अभी लापता हैं।

    राष्ट्रीय आपदा जोखिम न्यूनीकरण एवं प्रबंधन प्राधिकरण ने रविवार को कहा कि भोटेकोशी नदी (Bhote Koshi River) का जलस्तर फिर बढ़ने से लोगों से सतर्क रहने की अपील की गई है। उधर, बाढ़ प्रभावित इलाकों से लगातार शव बरामद किए जा रहे हैं। 20 हजार से ज्यादा बचावकर्मियों ने आपदा के पांचवें दिन रविवार को भी लापता लोगों की तलाश और फंसे हुए लोगों को निकालने के लिए युद्धस्तर पर अभियान चलाया।

    नेपाल के विदेश मंत्री शिशिर खनाल (Foreign Minister Shishir Khanal) ने बताया कि अब तक 9500 लोगों को बचाया जा चुका है। शिक्षा मंत्रालय के अनुसार, बाढ़ प्रभावित तीन जिलों के विभिन्न स्कूलों के 238 छात्र और 18 शिक्षक अभी लापता हैं।


    चीन की ओर बनी झील से खतरा

    माना जा रहा है कि नेपाल-तिब्बत सीमा पर पराडिगखड पशुतांगखेड़ा में भूस्खलन के कारण यह बाढ़ आई थी। भोटेकोशी में पानी बढ़ने से घर, सड़कें और पुल बह गए। नेपाल में नए सिरे से बाढ़ की आशंका तब बढ़ी जब ढहने के बाद चीन की ओर झील बन गई। हालांकि, चीनी मीडिया के अनुसार, शनिवार को झील का आकार घटने लगा, जिससे खतरा घटा है।

    भारतीय टीम मदद में जुटी: बाढ़ के कारण एक दर्जन जलविद्युत प्रोजेक्ट में फंसे होने की आशंका है। इन्हें बचाने में भारत की 11 सदस्यीय टीम मदद कर रही है। त्रिशूली जलविद्युत परियोजना में सुरक्षाबल भारतीय सुरंग विशेषज्ञों की मदद से लोगों को निकालने में जुटे हैं। बारिश के बावजूद अभियान जारी है।


    गंडक-कोसी भी उफनाई
    पटना। नेपाल में तीन दिनों से हो रही भारी बारिश के कारण गंडक और कोसी नदी में एक बार फिर उफान आ गया है। पिछले 24 घंटे में दोनों नदियों के जलस्तर में तेजी से बढ़ोतरी हुई है। ऐसी आशंका है कि सोमवार दोपहर तक पश्चिमी एवं पूर्वी चंपारण, सारण और गोपालगंज से यह पानी गुजरेगा।


    149 भारतीयों को बचाया

    नेपाल में बाढ़ के बाद 149 भारतीयों को बचाया गया है। विदेश मंत्रालय ने रविवार को इन लोगों की सूची जारी की। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने बताया कि नेपाल में तैनात भारतीय फोरेंसिक टीम से भारत के राजदूत नवीन श्रीवास्तव ने मुलाकात की। टीम मृतकों के डीएनए नमूनों की जांच करेगी।

  • बिलावल भुट्टो की शादी यूरोप की राजकुमारी से होने वाली है…इस दावे की PPP ने निकाली हवा, जानें क्या है सच?

    बिलावल भुट्टो की शादी यूरोप की राजकुमारी से होने वाली है…इस दावे की PPP ने निकाली हवा, जानें क्या है सच?


    इस्लामाबाद।
    क्या बिलावल भुट्टो (Bilawal Bhutto) यूरोपियन राजकुमारी (European Princess) से शादी करने वाले हैं? पाकिस्तान (Pakistan) में सोशल मीडिया पर इसको लेकर खूब दावे किए जा रहे हैं। हालांकि पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी (Pakistan People’s Party) ने इन दावों की हवा निकाल दी है। कराची के मेयर और पीपीपी के नेता मुर्तजा वहाब ने बिलावल की शादी से जुड़ी सभी अफवाहों को खारिज कर दिया है। उन्होंने कहाकि पीपीपी के चेयरमैन की सगाई और शादी को लेकर जितने भी दावे किए जा रहे हैं, वह पूरी तरह से गलत और बेबुनियाद हैं।

    वहाब ने क्या लिखा

    वहाब ने अपना स्पष्टीकरण शनिवार देर रात एक्स पर पोस्ट किया। उनका यह बयान सोशल मीडिया पर चल रहे उन दावों के बाद आया है, जिनमें कहा जा रहा था कि पाकिस्तानी राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी के बेटे, बिलावल भुट्टो की शादी की तैयारियां चल रही हैं। यहां तक कहा जा रहा है कि 38 साल के बिलावल की शादी यूरोपियन परिवार में होने वाली है। दावों के मुताबिक पाकिस्तानी राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी अपने बेटे की शादी के बारे में चर्चा करने और तारीख तय करने के लिए लिक्टेंस्टीन गए थे। यह स्विट्जरलैंड और ऑस्ट्रिया के बीच स्थित एक छोटा संप्रभु देश है।


    ऑस्ट्रिया की राजकुमारी का दावा

    कुछ अन्य रिपोर्ट्स में यह भी दावा किया गया था, बिलावल भुट्टो की शादी 26 साल की पूर्व ऑस्ट्रियन आर्कडचेस ग्लोरिया वॉन हाब्सबर्ग (Archduchess Gloria von Habsburg) से होने वाली है। वह ऑस्ट्रिया के आर्कड्यूक कार्ल और फ्रांसेसका वॉन थिसेन-बोर्नेमिस्ज़ा की बेटी हैं। साथ ही और हाब्सबर्ग-लॉरेन हाउस की सदस्य हैं। वह ऑस्ट्रिया के अंतिम शासक सम्राट और हंगरी के राजा कार्ल I की परनाती हैं। इतना ही नहीं, पाकिस्तान के उर्दू दैनिक अखबार डेली आउसाफ ने भी रिपोर्ट दी थी कि शादी की तैयारियां चल रही हैं। हालांकि इस रिपोर्ट में किसी सोर्स का हवाला नहीं दिया गया था। अखबार की रिपोर्ट में भी जरदारी के इस मामले को लेकर यूरोप जाने की बात कही गई थी। हालांकि बाद में यह रिपोर्ट बाद में हटा दी गई।


    प्रेसीडेंसी ने क्या लिखा

    27 अगस्त को, प्रेसीडेंसी ने एक्स पर पोस्ट करके पुष्टि की कि जरदारी निजी यात्रा पर विदेश गए हैं। लेकिन यात्रा के उद्देश्य के बारे में कोई और विवरण नहीं दिया गया। बता दें कि अब तक, बिलावल या उनके परिवार की तरफ से इस मामले पर कोई टिप्पणी नहीं आई है। बता दें कि बिलावल भुट्टो जरदारी पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी के अध्यक्ष हैं। वह पाकिस्तान की पूर्व प्रधानमंत्री बेनजीर भुट्टो और पूर्व राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी के बेटे हैं। बिलावल पाकिस्तान की राजनीति में एक प्रभावशाली चेहरा बनकर उभरे हैं और विदेश मंत्री के रूप में भी अपनी जिम्मेदारी निभा चुके हैं।

  • ब्रह्मांड का व्यापक सर्वे करेगी NASA की अंतरिक्ष दूरबीन…. 16 लाख Km लंबे सफर पर रवाना

    ब्रह्मांड का व्यापक सर्वे करेगी NASA की अंतरिक्ष दूरबीन…. 16 लाख Km लंबे सफर पर रवाना


    वाशिंगटन।
    नासा (NASA) की सबसे नई और अत्याधुनिक अंतरिक्ष दूरबीन (Space telescope) रविवार को अंतरिक्ष के लिए रवाना हो गई। इसका उद्देश्य दूसरे तारों के आसपास मौजूद ग्रहों की खोज करना, रहस्यमयी ‘डार्क एनर्जी’ (Mysterious ‘Dark Energy’) का अध्ययन करना और ब्रह्मांड का अब तक का सबसे व्यापक सर्वेक्षण करना है।

    नेशनल एरोनॉटिक्स एंड स्पेस एडमिनिस्ट्रेशन (NASA) में विज्ञान मिशन निदेशक निक्की फॉक्स ने कहा कि यह दूरबीन हजारों सुपरनोवा, दसियों हजार ग्रहों, अरबों आकाशगंगाओं और खरबों तारों की खोज करने में सक्षम होगी। अपने विशाल दृश्य क्षेत्र के कारण यह ऐसे काम कर पाएगी, जो हम पहले कभी नहीं कर सके।

    स्पेसएक्स ने केनेडी स्पेस सेंटर से सुबह 4.3 अरब डॉलर की लागत वाले ‘रोमन स्पेस टेलीस्कोप’ (रोमन अंतरिक्ष दूरबीन) को अत्यधिक शक्तिशाली फाल्कन हेवी रॉकेट के जरिए प्रक्षेपित किया। यह दूरबीन 16 लाख किलोमीटर दूर उस स्थान के लिए रवाना हुई जहां नासा की एक अन्य प्रमुख अंतरिक्ष दूरबीन ‘जेम्स वेब स्पेस टेलीस्कोप’ पहले से मौजूद है। बस के आकार वाली इस दूरबीन का नाम नासा की पहली मुख्य खगोलशास्त्री दिवंगत नैंसी ग्रेस रोमन के नाम पर रखा गया है।

    इसे अपने गंतव्य तक पहुंचने में तीन महीने से अधिक का समय लगेगा। वहां पहुंचने के बाद यह अंतरिक्ष के छिपे हुए हिस्सों की अब तक की सबसे व्यापक तस्वीर पेश करेगी और ब्रह्मांड के अनजाने रहस्यों का पता लगाएगी। ‘रोमन स्पेस टेलीस्कोप’ का दृश्य क्षेत्र नासा की ‘हबल स्पेस टेलीस्कोप’ की तुलना में 100 गुना से भी अधिक बड़ा है। हबल 36 वर्षों से कक्षा में रहते हुए अंतरिक्ष की शानदार तस्वीरें भेज रही है। वहीं, जेम्स वेब दूरबीन ने कुछ वर्षों पहले इस अभियान में शामिल होकर ब्रह्मांड की शुरुआत से जुड़े बेहद पुराने खगोलीय पिंडों का अध्ययन शुरू किया था।

    ये तीनों अंतरिक्ष दूरबीनें यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी के यूक्लिड अंतरिक्ष यान और चिली स्थित वेरा सी. रुबिन वेधशाला के साथ मिलकर ब्रह्मांड के कई बड़े रहस्यों को उजागर करने में मदद करेंगी। रोमन परियोजना की वरिष्ठ वैज्ञानिक जूली मैकएनेरी ने कहा कि रोमन की विशाल पहुंच हमें अजीब, दुर्लभ और असामान्य चीजों को खोजने में मदद करेगी। यह भूसे के ढेर में सुई खोजने की हमारी परिभाषा को बदल देगी।

    वैज्ञानिकों को उम्मीद है कि रोमन दूरबीन ब्रह्मांड के अधिकांश हिस्से को बनाने वाले ‘डार्क मैटर’ और ‘डार्क एनर्जी’ के बारे में भी नई जानकारी देगी। ये दोनों अब तक वैज्ञानिकों के लिए रहस्य बने हुए हैं। रोमन द्वारा तैयार आकाशगंगाओं की सूची से वैज्ञानिक को यह समझने में मदद मिलेगी कि इन अदृश्य शक्तियों के कारण ब्रह्मांड कितनी तेजी से फैल रहा है।

    रोमन की सबसे बड़ी खासियत उसकी गति होगी। मैकएनेरी के अनुसार, रोमन जितने मिल्की वे (आकाशगंगा) के अवलोकन एक महीने में कर लेगी, उन्हें पूरा करने में हबल को करीब एक सदी लग सकती है। उन्होंने कहा कि रोमन हमारी आकाशगंगा के केंद्र में मौजूद हिस्से का अब तक का सबसे गहरा अध्ययन कर सकेगी।

    इस दूरबीन में एक अत्याधुनिक इन्फ्रारेड कैमरा लगाया गया है, जिसकी संवेदनशीलता हबल जैसी है, लेकिन यह हबल से करीब 1000 गुना तेजी से काम करेगा। इसके अलावा इसमें ऐसा उपकरण भी है, जो तारों की रोशनी को रोक सकेगा। इससे रोमन उन बेहद हल्के ग्रहों की सीधी तस्वीर लेने में सक्षम हो सकती है, जो किसी तारे की परिक्रमा कर रहे हों।

    इस दूरबीन को भविष्य में ईंधन भरने के लिए भी डिजाइन किया गया है। यदि आने वाले दशक में कोई रोबोटिक ईंधन टैंकर उपलब्ध होता है, तो इससे रोमन का कार्यकाल बढ़ाया जा सकता है।

  • ISI ने बदला जासूसी पैटर्न…. लाइव फीड के लिए लगवाए सोलर चलित CCTV कैमरे

    ISI ने बदला जासूसी पैटर्न…. लाइव फीड के लिए लगवाए सोलर चलित CCTV कैमरे


    नई दिल्ली।
    ऑपरेशन सिंदूर (Operation Sindoor) के बाद देश की सुरक्षा एजेंसियों के सामने जासूसी का एक नया और चिंताजनक पैटर्न (Spying Pattern) सामने आया है। पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई (Pakistan’s Intelligence Agency ISI) से जुड़े हैंडलर्स सामरिक रूप से संवेदनशील सैन्य इलाकों के बाहर इंटरनेट और सोलर चालित सीसीटीवी कैमरे लगवा रहे हैं। इनकी लाइव फीड सीधे पाकिस्तान पहुंचाई जा रही है।

    सबसे ताजा उदाहरण 29 अगस्त को लुधियाना में सामने आया। यहां रिछपाल सिंह ने बद्दोवाल छावनी के पास अपनी दुकान के बाहर ऐसे सीसीटीवी कैमरे लगवाए थे, जिनका रुख सैन्य वाहनों के मूवमेंट वाले रास्ते की तरफ था। पुलिस के मुताबिक आरोपी ने कैमरों का यूजर आईडी-पासवर्ड अपने पाकिस्तानी हैंडलर्स को दे रखा था, जिससे वे मोबाइल एप के जरिये कैमरों की लाइव फीड देख रहे थे। दुकान के किराये के लिए 40 हजार रुपये प्रतिमाह दिए जा रहे थे। आरोपी को अलग-अलग किश्तों में लगभग 3 लाख भी मिले थे।

    जासूसी के इन मामलों का यह दौर मुख्य रूप से ऑपरेशन सिंदूर के बाद तेजी से उभरा है। इसमें सामरिक ठिकानों के आसपास ऐसे कैमरे लगाए जाते हैं, जिन्हें बिजली या पारंपरिक वायरिंग की जरूरत नहीं होती।


    सिलसिलेवार एक जैसा तरीका

    – मार्च 2026 : एनआईए की जांच में सोनीपत और दिल्ली छावनी रेलवे स्टेशनों के पास सोलर-चालित कैमरे लगाने का खुलासा, 21 गिरफ्तार
    – अप्रैल 2026 : दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने पंजाब, हरियाणा, राजस्थान और जम्मू-कश्मीर के सैन्य क्षेत्रों के पास ऐसे 9 कैमरों का पता लगाया। इसी महीने कपूरथला और जालंधर में भी सिम-आधारित कैमरों के जरिए सैन्य गतिविधियों की लाइव फीड पाकिस्तान भेजने के सबूत मिले।
    – मई 2026 : पठानकोट राष्ट्रीय राजमार्ग पर दुकान में कैमरा लगाकर सेना के मूवमेंट पर नजर रखने वाले आरोपी दबोचे गए।
    – जून 2026 : बठिंडा में राजमार्ग पर पुलिस और सुरक्षा बलों की गतिविधियों पर नजर रखने के लिए खंभे पर लगाया गया सोलर कैमरा बरामद।
    – अगस्त 2026 : केंद्रीय एजेंसियों ने पाकिस्तानी गैंगस्टर शहजाद भट्टी नेटवर्क के खिलाफ 14 राज्यों में चलाया अभियान, 253 लोग हिरासत में, 200 से ज्यादा गिरफ्तार, आईईडी और हथियारों के साथ बड़ी संख्या में कैमरे भी बरामद।


    एडल्ट साइट पर कर रहे खुफिया बातचीत

    रक्षा एजेंसियों ने जम्मू-कश्मीर में आतंकियों के नए और खतरनाक हथकंडे का खुलासा किया है। खुफिया निगरानी से बचने के लिए आतंकी पारंपरिक सोशल मीडिया की जगह डेटिंग और चैट के नाम पर चलने वाली एडल्ट वेबसाइट्स और विशेष एनक्रिप्टड एप्स पर सीक्रेट चैट का इस्तेमाल कर रहे हैं। पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई और आतंकी हैंडलर घाटी में सक्रिय आतंकियों और मददगारों को निर्देश भेजने के लिए इन्हीं का उपयोग कर रहे हैं।

    खुफिया रिपोर्ट के अनुसार, पाकिस्तान में बैठे हैंडलर और आतंकी कोटेक्स व कोनियन जैसे टोर नेटवर्क आधारित मैसेजिंग एप्स का इस्तेमाल कर रहे हैं। यह डाटा कई देशों के एन्क्रिप्टेड नोड्स से गुजरता है, जिससे पहचान छिपाना आसान हो जाता है। भारत में कोनियन की एपीके फाइल पर रोक है, पर उपयोग जारी है।

    भारत में कई एडल्ट एप्स पर पाबंदी है, लेकिन वीपीएन के जरिये गैरकानूनी रूप से डाउनलोड कर रहे हैं। आतंकी अब व्हाट्सएप, फेसबुक मैसेंजर और सिग्नल जैसे सामान्य प्लेटफॉर्म्स से दूरी बना रहे हैं। नए तंत्र में आरएसए-2048 जैसे आधुनिक एन्क्रिप्शन एल्गोरिदम, सेल्फ-डस्ट्रक्ट मैसेज व बिना नंबर या ईमेल के रजिस्ट्रेशन जैसी सुविधाएं हैं। आतंकी फ्रांस, चीन व वियतनाम के ऐसे एप का इस्तेमाल कर रहे हैं, जिनमें सिम कार्ड या फोन नंबर की जरूरत नहीं होती।

  • होर्मुज में बारूद, जहाजों पर खतरा, अमेरिका ने ईरान के लारक आईलैंड पर क्यों गिराए बम?

    होर्मुज में बारूद, जहाजों पर खतरा, अमेरिका ने ईरान के लारक आईलैंड पर क्यों गिराए बम?


    नई दिल्ली। होर्मुज स्ट्रेट में बढ़ते तनाव के बीच अमेरिका ने ईरान के लारक आईलैंड पर एयर स्ट्राइक की है। अमेरिकी कार्रवाई के बाद ईरान ने भी जवाबी हमला किया और जॉर्डन व कतर में अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाने के लिए मिसाइलें दागने का दावा किया। इस पूरे घटनाक्रम के केंद्र में है होर्मुज स्ट्रेट, जहां से दुनिया के तेल कारोबार का बड़ा हिस्सा गुजरता है।

    अमेरिकी सेना ने बताया है कि लारक आईलैंड पर हमला किसी बड़े सैन्य अभियान का हिस्सा नहीं था, बल्कि एक संभावित तत्काल खतरे को खत्म करने के लिए सीमित और सटीक कार्रवाई की गई।

    अमेरिका के मुताबिक क्या था खतरा?

    अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) के मुताबिक, ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) की माइन बिछाने वाली यूनिट समुद्र में माइंस तैनात करने की तैयारी कर रही थी। इसके लिए दो रॉकेट लॉन्चरों का इस्तेमाल किए जाने की आशंका थी।

    अमेरिका का दावा है कि अगर ये समुद्री माइंस होर्मुज स्ट्रेट के शिपिंग रूट में बिछा दी जातीं तो तेल टैंकरों और दूसरे व्यावसायिक जहाजों के लिए गंभीर खतरा पैदा हो सकता था। इसी वजह से अमेरिकी सेना ने इसे ‘इमिनेंट थ्रेट’ यानी तत्काल खतरा माना और दोनों लॉन्चरों को निशाना बनाया।

    लारक आईलैंड ही क्यों बना निशाना?

    लारक आईलैंड ईरान के दक्षिणी तट के पास फारस की खाड़ी में स्थित है और होर्मुज स्ट्रेट के बेहद करीब है। इसकी भौगोलिक स्थिति इसे रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण बनाती है।

    होर्मुज स्ट्रेट दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल शिपिंग रूट्स में से एक है। यहां किसी भी तरह की सैन्य गतिविधि या जहाजों की आवाजाही में रुकावट का असर अंतरराष्ट्रीय शिपिंग के साथ-साथ कच्चे तेल की कीमतों पर भी पड़ सकता है।

    इसी रणनीतिक स्थिति के कारण अमेरिका का दावा है कि लारक आईलैंड पर मौजूद सैन्य गतिविधियों पर नजर रखना और किसी संभावित खतरे को रोकना जरूरी था।

    पहले माइंस हटाईं, फिर हमला क्यों किया?

    अमेरिकी सेना के मुताबिक, उसने हाल ही में होर्मुज स्ट्रेट के अंतरराष्ट्रीय शिपिंग रूट से पहले बिछाई गई समुद्री माइंस को हटाने का अभियान पूरा किया था।

    इसके बाद अमेरिकी निगरानी में IRGC की गतिविधियां सामने आईं। अमेरिका का दावा है कि ईरान दो लॉन्चरों के जरिए नई समुद्री माइंस तैनात करने की तैयारी कर रहा था।

    वॉशिंगटन के मुताबिक, माइंस शिपिंग लेन में पहुंच जातीं तो तेल टैंकरों और दूसरे कमर्शियल जहाजों की आवाजाही प्रभावित हो सकती थी। इसलिए अमेरिका ने संभावित खतरे के बढ़ने का इंतजार करने के बजाय लॉन्चरों को निशाना बनाया।

    ईरान ने कैसे दिया जवाब?

    ईरान ने अमेरिकी कार्रवाई को आक्रामक हमला बताया है। IRGC ने दावा किया कि लारक आईलैंड पर अमेरिकी हमले में उसके कई जवान और अन्य लोग मारे गए या घायल हुए।

    इसके बाद ईरान ने जवाबी कार्रवाई करते हुए जॉर्डन में अमेरिकी सैनिकों की मेजबानी करने वाले दो ठिकानों की ओर मिसाइल और ड्रोन हमले किए। जॉर्डन ने अपने एयरस्पेस में आठ मिसाइलों को इंटरसेप्ट करने का दावा किया है।

    होर्मुज में अब क्या स्थिति?

    अमेरिकी हमले और ईरान की जवाबी कार्रवाई के बाद होर्मुज स्ट्रेट में तनाव और बढ़ गया है। ईरान ने स्ट्रेट में एक शिप-टू-शिप ऑयल ट्रांसफर भी रुकवाया है। वहीं, अमेरिकी एयर स्ट्राइक की खबर के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतों में 2 फीसदी से ज्यादा की तेजी देखी गई।

    ईरान और ओमान के बीच होर्मुज को लेकर आपसी सहमति बनी हुई है, लेकिन इसके बावजूद स्ट्रेट में जहाजों की आवाजाही पहले ही कम हुई है।

    क्या बड़ा सैन्य टकराव हो सकता है?

    फिलहाल अमेरिका का कहना है कि लारक आईलैंड पर कार्रवाई का उद्देश्य ईरान के सैन्य ढांचे को बड़े पैमाने पर तबाह करना नहीं, बल्कि होर्मुज स्ट्रेट में जहाजों के लिए पैदा हो रहे तत्काल खतरे को खत्म करना था।

    दूसरी ओर, ईरान इसे अपनी संप्रभुता पर हमला मान रहा है और जवाबी कार्रवाई भी कर चुका है। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या लारक आईलैंड पर अमेरिकी हमला और ईरान का पलटवार दोनों देशों को एक बड़े सैन्य टकराव की ओर ले जाएगा?

  • लारक द्वीप पर अमेरिकी हमले के बाद ईरान का पलटवार, जॉर्डन में US सैन्य ठिकानों पर मिसाइलें दागी

    लारक द्वीप पर अमेरिकी हमले के बाद ईरान का पलटवार, जॉर्डन में US सैन्य ठिकानों पर मिसाइलें दागी


    नई दिल्ली। होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर अमेरिका और ईरान के बीच तनाव एक बार फिर बढ़ गया है। अमेरिका ने ईरान के लारक द्वीप पर दो सैन्य लॉन्चरों को निशाना बनाया। इसके बाद ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने जॉर्डन में अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर बैलिस्टिक मिसाइलों से हमला करने का दावा किया है। ईरानी मीडिया के मुताबिक, अमेरिकी हमले में कई ईरानी सैन्यकर्मी और नागरिक मारे गए तथा घायल हुए हैं।

    अमेरिका ने लारक द्वीप पर दो लॉन्चरों को बनाया निशाना

    अमेरिकी सेना ने रविवार को लारक द्वीप पर दो ईरानी लॉन्चरों पर हमला किया। अमेरिकी अधिकारियों के मुताबिक, IRGC के जवान होर्मुज जलडमरूमध्य में समुद्री खदानें बिछाने के लिए रॉकेट लॉन्च करने की तैयारी कर रहे थे।

    यह जुलाई के अंत के बाद ईरान के भीतर अमेरिका का पहला ज्ञात हमला बताया जा रहा है। उस समय राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने होर्मुज जलडमरूमध्य से जुड़े दो सप्ताह के अमेरिकी सैन्य अभियान को रोक दिया था।

    एक अमेरिकी अधिकारी ने एक्सियोस और बाद में रॉयटर्स को बताया कि अमेरिकी सेना ने दो ईरानी लॉन्चरों को निशाना बनाया। अधिकारी के मुताबिक, अमेरिकी सेना इलाके पर करीबी नजर रख रही है और जलडमरूमध्य से होकर व्यापार के मुक्त प्रवाह की सुरक्षा के लिए तैयार है।

    समुद्री खदानों को लेकर अमेरिका की जीरो टॉलरेंस नीति

    अमेरिकी कार्रवाई ऐसे समय में हुई है, जब अमेरिकी सेना ने हाल ही में होर्मुज जलडमरूमध्य के मुख्य शिपिंग रूट से समुद्री खदानें हटाने का अभियान पूरा किया था।

    इसके बाद ट्रंप ने ईरान को चेतावनी दी थी कि समुद्री खदानें बिछाने में शामिल किसी भी जहाज या नाव को तुरंत और व्यवस्थित तरीके से नष्ट कर दिया जाएगा। उन्होंने साफ कहा था कि समुद्री खदानें बिछाने को लेकर अमेरिका की ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति है।

    ईरान ने जॉर्डन में अमेरिकी ठिकानों पर हमले का दावा किया

    लारक द्वीप पर अमेरिकी हमले के जवाब में IRGC ने सोमवार को दावा किया कि उसने जॉर्डन में किंग हुसैन और अल-अज्रक स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर बैलिस्टिक मिसाइलों से हमला किया है। ईरानी मीडिया ने इसकी जानकारी दी।

    इससे पहले IRGC ने कहा था कि अमेरिकी हमले का जवाब ईरान के लोग देंगे और हमलावर को इसकी कीमत चुकानी होगी। ईरानी सरकारी मीडिया के मुताबिक, अमेरिकी हमले में कई ईरानी सैन्यकर्मी और नागरिक मारे गए तथा घायल हुए हैं।

    IRGC के एक प्रवक्ता ने कहा कि लारक द्वीप पर हमले की कीमत अमेरिका को आर्थिक और सैन्य, दोनों मोर्चों पर चुकानी होगी।

    ड्रोन हमले में दो लोगों की मौत का भी दावा

    IRGC से जुड़े तस्नीम न्यूज एजेंसी ने अलग से दावा किया कि हमले में ड्रोन का इस्तेमाल किया गया। एजेंसी के मुताबिक, इसमें दो लोगों की मौत हुई और दो अन्य घायल हुए हैं।

    ईरान की ताजा जवाबी कार्रवाई के बाद क्षेत्र में सैन्य टकराव और बढ़ने की आशंका है। अमेरिका अब सीधे बमबारी अभियान के साथ-साथ ईरान पर आर्थिक दबाव बढ़ाने की दिशा में भी आगे बढ़ रहा है। यह संघर्ष अब सातवें महीने में प्रवेश कर चुका है।