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  • रक्षा बंधन से दिया एकता और भाईचारे का संदेश! न्यूयॉर्क में धर्मगुरु बोले- नफरत नहीं, इंसानियत जरूरी

    रक्षा बंधन से दिया एकता और भाईचारे का संदेश! न्यूयॉर्क में धर्मगुरु बोले- नफरत नहीं, इंसानियत जरूरी


    नई दिल्ली। दुनियाभर में बढ़ती नफरत पूर्वाग्रह हिंसा और सामाजिक विभाजन के बीच न्यूयॉर्क के मैडिसन स्क्वायर गार्डन में आयोजित यूनिवर्सल वननेस कार्यक्रम ने इंसानियत और आपसी एकता का मजबूत संदेश दिया। कार्यक्रम में यहूदी ईसाई और मुस्लिम धर्मगुरुओं सहित विभिन्न देशों के धार्मिक प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया और लोगों से धार्मिक तथा सांस्कृतिक सीमाओं से ऊपर उठकर संवाद करुणा और सम्मान को बढ़ावा देने की अपील की। इस आयोजन में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रमुख मोहन भागवत और कई देशों के धार्मिक प्रतिनिधि भी शामिल हुए। कार्यक्रम का मुख्य संदेश यही रहा कि अलग-अलग आस्थाओं के बावजूद मानवता सभी को जोड़ने वाली सबसे बड़ी कड़ी है।

    वर्ल्ड काउंसिल ऑफ रिलीजियस लीडर्स के संस्थापक महासचिव बाबा जैन ने 30 देशों के प्रमुख धर्मों से जुड़े 200 से अधिक प्रतिनिधियों के साथ बातचीत के बाद तैयार किया गया कॉल टू एक्शन पेश किया। उन्होंने कहा कि धर्म के भीतर लोगों को जोड़ने और उपचार तथा मेल-मिलाप की ताकत मौजूद है लेकिन इतिहास में कई बार धर्म का इस्तेमाल लोगों को बांटने और हिंसा को उचित ठहराने के लिए भी किया गया है। उन्होंने धार्मिक नेताओं से अपने समुदायों के शब्दों शिक्षाओं संस्थाओं और परंपराओं की समीक्षा करने का आह्वान किया ताकि किसी भी प्रकार की नफरत या हिंसा को धार्मिक आधार न मिल सके।

    बाबा जैन ने कहा कि धार्मिक समुदायों को नफरत अपमान अमानवीय व्यवहार और हिंसा को सही ठहराने के लिए धर्म के इस्तेमाल को स्पष्ट रूप से अस्वीकार करना चाहिए। साथ ही उन्होंने कहा कि गहरी धार्मिक आस्था और दूसरे विश्वासों के प्रति सम्मान एक साथ कायम रह सकते हैं। उन्होंने धार्मिक नेताओं से संकट आने का इंतजार करने के बजाय पहले से ही अलग समुदायों के बीच मजबूत रिश्ते बनाने की अपील की। युवाओं को भी धार्मिक और सांस्कृतिक सीमाओं से बाहर एक दूसरे से जोड़ने पर जोर दिया गया। उनका मानना था कि जब लोग एक दूसरे को व्यक्तिगत रूप से जानने लगते हैं तो नफरत के लिए जगह कम होती जाती है।

    इमाम शरीफ ने कहा कि ऐसे कार्यक्रम की वास्तविक सफलता इस बात से तय होगी कि इसमें शामिल लोग यहां से लौटने के बाद अपने व्यवहार और समाज में क्या बदलाव लाते हैं। उन्होंने एकता को एकरूपता से अलग बताते हुए कहा कि लोगों को एक दूसरे से जुड़े रहने के लिए एक जैसा बनने की जरूरत नहीं है। अलग-अलग धार्मिक विश्वासों के बावजूद सम्मान और संवाद कायम रखा जा सकता है। उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि तकनीकी प्रगति के बावजूद इंसान के भीतर मौजूद नफरत पूर्वाग्रह अहंकार और समूहों में बंटने की प्रवृत्ति समाप्त नहीं हुई है।

    उन्होंने कहा कि आज नफरत सीमाओं के पार और हमारी स्क्रीन के माध्यम से पहले से कहीं ज्यादा तेजी से फैल रही है। ऐसे समय में तकनीक के बढ़ते प्रभाव के साथ इंसानियत के सामने मौजूद चुनौतियों को समझना जरूरी है। रेवरेंड थॉर्न ने भी लोगों से डर और नफरत के बजाय एक दूसरे को सुनने समझने और साथ आने का रास्ता चुनने की अपील की। उन्होंने कहा कि पद धर्म राजनीति और देशों की सीमाओं से पहले सभी लोग इंसान हैं।

    रब्बी ब्लुमेंथल ने यहूदी शिक्षाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि हर इंसान में ईश्वरीय अंश मौजूद है और प्रत्येक व्यक्ति सम्मान तथा प्रेम का हकदार है। उन्होंने समाज में बढ़ते अकेलेपन को भी कई समस्याओं की एक बड़ी वजह बताया और लोगों से जुड़ाव प्रेम तथा सम्मान के रिश्ते मजबूत करने की अपील की।

    कार्यक्रम में रक्षा बंधन और राखी बांधने की परंपरा को विशेष रूप से देखभाल सुरक्षा और आपसी जिम्मेदारी के प्रतीक के रूप में प्रस्तुत किया गया। लोगों को संदेश दिया गया कि भाई बहन के रिश्ते तक सीमित इस भावना को पड़ोसियों अजनबियों और अलग-अलग धार्मिक समुदायों तक भी बढ़ाया जा सकता है। इस तरह राखी को एक ऐसे मानवीय बंधन के रूप में पेश किया गया जो सुरक्षा और जिम्मेदारी की भावना के जरिए समाज में विश्वास और एकता को मजबूत कर सकता है।

  • Saudi Arabia Umrah Visa Rules में बड़ा बदलाव! हर उमराह यात्रा से पहले नया पैकेज और परमिट लेना होगा अनिवार्य

    Saudi Arabia Umrah Visa Rules में बड़ा बदलाव! हर उमराह यात्रा से पहले नया पैकेज और परमिट लेना होगा अनिवार्य


    नई दिल्ली । उमराह के लिए सऊदी अरब जाने की तैयारी कर रहे श्रद्धालुओं के लिए एक अहम खबर सामने आई हैनई दिल्ली । अगर आप साल में एक से ज्यादा बार उमराह करने की योजना बना रहे हैं तो सऊदी अरब के नए नियमों को समझना आपके लिए बेहद जरूरी है। सऊदी अरब ने मल्टीपल एंट्री उमराह वीजा से जुड़े नियमों को लेकर नई व्यवस्था स्पष्ट की है। अब केवल एक साल की वैधता वाला उमराह वीजा होना दोबारा सऊदी अरब जाकर उमराह करने के लिए पर्याप्त नहीं होगा। हर नई उमराह यात्रा से पहले श्रद्धालुओं को निर्धारित प्रक्रिया पूरी करनी होगी और नया उमराह परमिट हासिल करना अनिवार्य होगा।

    नई व्यवस्था के तहत हर उमराह यात्रा से पहले श्रद्धालुओं को Nusuk प्लेटफॉर्म पर पंजीकृत और अधिकृत सर्विस प्रोवाइडर से उमराह पैकेज बुक करना होगा। यह पैकेज यात्रा की निर्धारित तारीखों के मुताबिक होना चाहिए। इसके बाद Nusuk ऐप के माध्यम से नया उमराह परमिट प्राप्त करना जरूरी होगा। परमिट की तारीखें बुक किए गए सर्विस पैकेज की तारीखों से मेल खानी चाहिए। इसका मतलब साफ है कि अगर किसी यात्री के पास मल्टीपल एंट्री उमराह वीजा है और वह दोबारा उमराह के लिए सऊदी अरब जाना चाहता है तो उसे पिछली यात्रा के दस्तावेजों के आधार पर सीधे प्रवेश नहीं मिलेगा। नई यात्रा के लिए दोबारा जरूरी प्रक्रिया पूरी करनी होगी।

    यह मल्टीपल एंट्री उमराह वीजा जुलाई में शुरू किया गया था और जारी होने की तारीख से 365 दिनों तक वैध रहेगा। इसकी खासियत यह है कि वीजा की वैधता अवधि के दौरान यात्री एक से ज्यादा बार सऊदी अरब की यात्रा कर सकते हैं। हालांकि हर यात्रा के लिए उमराह पैकेज और परमिट की प्रक्रिया दोहरानी होगी। इसके साथ ही सऊदी अरब में रहने की अवधि को लेकर भी महत्वपूर्ण शर्त लागू है। वीजा एक साल तक वैध होने के बावजूद यात्री सभी यात्राओं को मिलाकर कुल 90 दिनों से ज्यादा समय तक सऊदी अरब में नहीं रह सकते।

    पहली बार उमराह वीजा के लिए आवेदन करने वाले यात्रियों को भी निर्धारित प्रक्रिया का पालन करना होगा। सबसे पहले Nusuk प्लेटफॉर्म के माध्यम से अधिकृत सर्विस प्रोवाइडर से जरूरी उमराह पैकेज लेना होगा। इसके बाद वीजा आवेदन की प्रक्रिया पूरी की जाएगी। यात्रियों को आवश्यक दस्तावेजों और जांच से जुड़ी औपचारिकताएं पूरी करने के साथ सऊदी अरब के सभी प्रवेश और यात्रा नियमों का पालन करना होगा।

    सऊदी अरब के हज और उमराह मंत्रालय के मुताबिक नई व्यवस्था का उद्देश्य उमराह यात्रियों के लिए ठहरने यात्रा और अन्य संबंधित सेवाओं का बेहतर प्रबंधन सुनिश्चित करना है। इससे यात्रियों की यात्रा को व्यवस्थित करने और सेवाओं को निर्धारित तारीखों के अनुसार संचालित करने में मदद मिलेगी। ऐसे में अगर आप आने वाले समय में उमराह के लिए सऊदी अरब जाने वाले हैं या साल में कई बार उमराह करने की योजना बना रहे हैं तो यात्रा से पहले Nusuk पर अधिकृत सर्विस पैकेज बुक करने और नया उमराह परमिट लेने की प्रक्रिया जरूर पूरी करें। केवल वैध मल्टीपल एंट्री वीजा के भरोसे यात्रा करना पर्याप्त नहीं होगा।

  • युद्धों ने 44 बार मिटाने की कोशिश की लेकिन हर बार लौट आया ये शहर, 115 जंग झेल चुका है बेलग्रेड का हैरान करने वाला इतिहास

    युद्धों ने 44 बार मिटाने की कोशिश की लेकिन हर बार लौट आया ये शहर, 115 जंग झेल चुका है बेलग्रेड का हैरान करने वाला इतिहास


    नई दिल्ली । दुनिया के इतिहास में कई ऐसे शहर हैं जिन्होंने युद्धों की आग में अपना सबकुछ खोया लेकिन कुछ शहर ऐसे भी हैं जिन्होंने बार बार तबाह होने के बाद भी खुद को फिर से खड़ा किया। यूरोप का बेलग्रेड ऐसा ही एक शहर है जिसकी कहानी युद्ध तबाही और पुनर्निर्माण के अद्भुत संघर्ष से भरी हुई है। मौजूदा दौर में जब गाजा यूक्रेन और दुनिया के दूसरे हिस्सों में युद्ध की तस्वीरें सामने आ रही हैं तब बेलग्रेड का इतिहास यह याद दिलाता है कि युद्ध किसी शहर की इमारतों को तो गिरा सकता है लेकिन उसकी जिजीविषा को खत्म करना आसान नहीं होता। बेलग्रेड अपने इतिहास में 115 युद्धों का सामना कर चुका है और करीब 44 बार तबाह होने के बावजूद आज भी मजबूती से खड़ा है।

    बेलग्रेड की रणनीतिक स्थिति ही उसकी सबसे बड़ी ताकत और सबसे बड़ी कमजोरी रही है। यह शहर डेन्यूब और सावा नदियों के संगम पर स्थित है और प्राचीन समय से ही सैन्य और राजनीतिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण रहा है। इसी वजह से अलग अलग साम्राज्यों और सेनाओं की नजर इस शहर पर रही। रोमनों से लेकर सर्बों हंगेरियनों ऑटोमन और ऑस्ट्रियाई ताकतों तक ने इस इलाके के लिए संघर्ष किया। शहर का पुराना किला आज भी उन सदियों की लड़ाइयों का गवाह है। किले की दीवारों के आसपास इतिहास की कई परतें दफन हैं और यहां मौजूद सैन्य संग्रहालय में हजारों पुराने हथियार और युद्ध उपकरण इस रक्तरंजित अतीत की कहानी बताते हैं।

    बेलग्रेड का इतिहास सिर्फ एक या दो बड़े युद्धों तक सीमित नहीं रहा। अलग अलग दौर में सत्ता बदलती रही और शहर का स्वरूप भी बदलता रहा। इतिहास में इस शहर के कई नाम रहे जिनमें सिंगिदुनम भी शामिल है। रोमन दौर में यह सिंगिदुनम के नाम से जाना गया और बाद के समय में अलग अलग शक्तियों के अधीन आता जाता रहा। 15वीं सदी में ऑटोमन साम्राज्य के विस्तार के दौरान भी बेलग्रेड बड़े संघर्ष का केंद्र बना। शहर पर कब्जे के लिए कई बार लड़ाइयां हुईं और इसका किला लंबे समय तक रणनीतिक महत्व का केंद्र बना रहा।

    आधुनिक इतिहास में भी बेलग्रेड को युद्धों से राहत नहीं मिली। प्रथम विश्व युद्ध के दौरान शहर को भारी बमबारी झेलनी पड़ी। द्वितीय विश्व युद्ध में नाजी जर्मनी के हमलों ने इसे बुरी तरह प्रभावित किया। युद्ध के बाद शहर ने खुद को दोबारा खड़ा किया और युगोस्लाविया की राजधानी के रूप में विकसित हुआ। लेकिन संघर्ष की कहानी यहीं खत्म नहीं हुई। 1990 के दशक में युगोस्लाविया के विघटन के दौर में बेलग्रेड फिर राजनीतिक उथल पुथल का केंद्र बना और 1999 में NATO की बमबारी ने शहर को एक बार फिर युद्ध का दर्द दिया।

    बार बार होने वाली तबाही और पुनर्निर्माण ने बेलग्रेड की पहचान को ही बदल दिया। इसी वजह से इसे White Phoenix यानी सफेद फीनिक्स जैसे उपनाम से भी जोड़ा जाता है। फीनिक्स उस मिथकीय पक्षी को कहा जाता है जो राख से दोबारा जन्म लेता है और बेलग्रेड की कहानी भी कुछ ऐसी ही दिखाई देती है। युद्धों ने इसकी इमारतें गिराईं सीमाएं बदलीं और सत्ता बदलती रही लेकिन शहर हर बार नए रूप में सामने आया।

    आज बेलग्रेड आधुनिक यूरोप का एक महत्वपूर्ण शहर है। उसकी सड़कों पर जिंदगी सामान्य दिखाई देती है लेकिन पुराने किले दीवारें और युद्ध संग्रहालय उसके अतीत की गवाही देते हैं। 115 युद्धों और 44 बार की तबाही के बावजूद इसका कायम रहना इस बात का प्रतीक है कि इतिहास में विनाश के साथ पुनर्निर्माण की कहानी भी लिखी जाती है। बेलग्रेड की दास्तान इसी जिद और जिजीविषा की कहानी है।

  • ईरान युद्ध के बीच मिली धमकी से डरे डोनाल्ड ट्रंप के छोटे बेटे बैरन, घर से निकलना छोड़ा

    ईरान युद्ध के बीच मिली धमकी से डरे डोनाल्ड ट्रंप के छोटे बेटे बैरन, घर से निकलना छोड़ा


    वाशिंगटन।
    अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (American President Donald Trump) इन दिनों ईरान (Iran) के साथ युद्ध में उलझे हुए हैं। इस युद्ध की वजह से उनके परिवार पर भी खतरा मंडरा रहा है। पिछले दो सालों में ट्रंप के ऊपर भी तीन जानलेवा हमले हो चुके हैं। वहीं, हाल ही में उनके छोटे बेटे बैरन ट्रंप (Younger son Barron Trump) को लेकर भी ईरान की तरफ से धमकी दी गई थी। अब ऐसी खबरें सामने आ रही हैं कि दुनिया में सबसे शक्तिशाली माने जाने वाले अमेरिकी राष्ट्रपति के बेटे ने डर के मारे घर से निकलना छोड़ दिया है।

    एक रिपोर्ट के मुताबिक, ईरान की तरफ से धमकी आने के बाद बैरन की सुरक्षा को बढ़ा दिया गया है। हालांकि, इसके बाद भी सुरक्षा दृष्टि से 20 साल के बैरन ने ज्यादातर समय अपने घर पर रहना ही शुरू कर दिया है। पिछली गर्मियां उन्होंने अपने पिता के न्यूजर्सी स्थित गोल्फ क्लब में ही गुजारी हैं। रिपोर्ट के मुताबिक ट्रंप के करीबी एक शख्स ने की बैरन पिछले काफी समय से बहुत कम ही घर से बाहर जाते हैं। सूत्रों ने कहा, “वह बाहर नहीं जाते हैं। उन्हें एकांत पसंद है। वह ज्यादा किसी से मिलना-जुलना भी पसंद नहीं करते हैं।”


    चार्ली क्रिक की हत्या के बाद परेशान बैरन ट्रंप?

    सूत्रों के मुताबिक, बैरन अमेरिकी इन्फ्लुएंसर और ट्रंप के कट्टर समर्थक माने जाने वाले चार्ली क्रिक की हत्या के बाद से ही बाहर जाना कम कर चुके थे। लेकिन हाल ही में ईरान से आई धमकी ने उन्हें और भी ज्यादा एकांत प्रिय बना दिया है। खबर के मुताबिक क्रिक की हत्या की जानकारी मिलने के बाद बैरन ने अपने पिता डोनाल्ड ट्रंप को फोन किया और कहा, “यही होता है, जब आप अपने घर से बाहर जाते हैं।”


    ईरान ने दी थी बैरन की हत्या की धमकी

    ईरान के साथ युद्ध में उलझे डोनाल्ड ट्रंप के परिवार को कई बार हत्या की धमकी मिल चुकी हैं। हाल ही में डोनाल्ड ट्रंप के बेटे को भी इसी तरह की धमकी मिली थीं। ईरान के सरकारी मीडिया चैनल से इस बात का ऐलान किया गया था कि जो कोई भी बैरन तक पहुंचेगा उसे 10 मिलियन डॉलर का इनाम दिया जाएगा। इसके बाद आईआरजीसी की तरफ से भी एक वीडियो पोस्ट किया गया था, जिसका शीर्षक था ‘व्हेयर टू किल बैरन ट्रंप’ इसमें कहा गया था कि ईरान के पास इस बात की पूरी जानकारी है कि बैरन ट्रंप कब, कहां और क्या करते हैं।


    ट्रंप पर भी हो चुके हैं हमले

    अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को भी कई बार निशाना बनाया जा चुका है। सबसे पहले चुनावी प्रचार के दौरान उनके ऊपर हमला किया गया था। इसमें गोली सीधा उनके कान को छूती हुई निकल गई थी। इस हमले के बाद ट्रंप की पॉपुलैरिटी भी तेजी के साथ बढ़ी थी। इस हमले के कुछ समय के बाद ही ट्रंप के गोल्फ कोर्स के बाहर गोलीबारी हुई थी। इसमें संदिग्ध की गिरफ्तारी हुई थी। इसके बाद एक होटल के कार्यक्रम के दौरान भी एक संदिग्ध ने घुसने की कोशिश की थी। इसमें भी ट्रंप बाल-बाल बचे थे।

  • आपदा के बीच नेपाल को राहत: चीन बॉर्डर के पास बनी ग्लेशियर झील का खतरा टला, पानी का स्‍तर घटा

    आपदा के बीच नेपाल को राहत: चीन बॉर्डर के पास बनी ग्लेशियर झील का खतरा टला, पानी का स्‍तर घटा


    बीजिंग। चीन-नेपाल सीमा के पास ग्लेशियर टूटने से बनी झील के अचानक फटने का खतरा फिलहाल कम हो गया है। चीनी अधिकारियों के मुताबिक झील का पानी धीरे-धीरे प्राकृतिक रूप से बाहर निकल रहा है और इसका आकार लगातार घट रहा है। इससे नीचे के इलाकों में अचानक बाढ़ आने की आशंका पहले के मुकाबले कम हुई है। हालांकि, अधिकारी अभी भी झील की 24 घंटे निगरानी कर रहे हैं।

    यह झील उसी इलाके में बनी है, जहां बुधवार को ग्लेशियर टूटने के बाद अचानक आई बाढ़ ने भारी तबाही मचाई थी। आपदा में बड़ी संख्या में लोगों की मौत हुई है, जबकि हजारों लोग अब भी लापता बताए जा रहे हैं।

    तीन दिन में 21 हजार वर्ग मीटर घटा झील का क्षेत्र

    चीन के जल संसाधन मंत्रालय के अनुसार गुरुवार से शनिवार सुबह तक लिए गए सैटेलाइट चित्रों में झील के पानी में लगातार कमी दर्ज की गई है। यह झील तिब्बत क्षेत्र में चीन-नेपाल सीमा के पास दो नदियों के संगम वाले इलाके में बनी है। शनिवार दोपहर तक इसके कुछ हिस्सों में जमीन भी दिखाई देने लगी थी।

    शनिवार सुबह झील का सतही क्षेत्र करीब 99 हजार वर्ग मीटर रह गया था। यह लगभग 14 फुटबॉल मैदानों के बराबर है। गुरुवार की तुलना में झील का क्षेत्रफल करीब 21 हजार वर्ग मीटर घट चुका है। पानी के प्राकृतिक बहाव से झील का आकार कम होने के कारण अधिकारियों ने फिलहाल इसके अचानक फटने के खतरे को कम माना है।

    बाढ़ के बाद मंडरा रहा था दूसरी आपदा का खतरा

    बुधवार को ग्लेशियर का बड़ा हिस्सा टूटने के बाद चट्टान, बर्फ, कीचड़ और मलबे के साथ पानी तेजी से नीचे की ओर बहा था। इससे हिमालयी नदी तंत्र में भारी तबाही हुई। चीन और नेपाल को जोड़ने वाला एक सीमा बंदरगाह परिसर भी बाढ़ की चपेट में आ गया था।

    इसके बाद ग्लेशियर के मलबे से बनी झील में पानी बढ़ने पर इसके अचानक फटने की आशंका जताई गई थी। विशेषज्ञों को डर था कि अगर झील फटती है तो नीचे के इलाकों में दूसरी बार अचानक बाढ़ आ सकती है। इससे राहत और बचाव अभियान भी खतरे में पड़ सकता था।

    विशेषज्ञों का कहना है कि अगर अगले दो-तीन दिनों में झील का जलस्तर और तेजी से घटता है तो निचले इलाकों में राहत एवं बचाव कार्य अपेक्षाकृत सुरक्षित तरीके से जारी रखा जा सकेगा।

    30 मिनट पहले दी जाएगी खतरे की चेतावनी

    अधिकारियों के मुताबिक झील में किसी भी असामान्य बदलाव की स्थिति में बचाव दलों को तत्काल सूचना दी जाएगी। जरूरत पड़ने पर उन्हें सुरक्षित स्थानों पर हटाया जा सकता है। प्रशासन ने ऐसी व्यवस्था भी की है कि संभावित खतरे की स्थिति में 30 मिनट से अधिक पहले चेतावनी जारी की जा सके।

    रडार और ड्रोन से 24 घंटे निगरानी

    चीन की सरकारी इंजीनियरिंग और बचाव कंपनी चाइना एनेंग ने गुरुवार से झील की निगरानी शुरू कर दी है। इलाके में रडार और ड्रोन तैनात किए गए हैं, जिनकी मदद से झील और आसपास के क्षेत्र पर लगातार नजर रखी जा रही है।

    शुक्रवार को झील से पानी के शुरुआती बहाव के कारण कुछ समय के लिए बचाव अभियान रोकना पड़ा था। स्थिति का आकलन करने के बाद जोखिम को फिलहाल नियंत्रण में माना गया और अभियान फिर शुरू करने की अनुमति दी गई।

    नीचे एक और बड़ी झील मिली, 1.20 लाख वर्ग मीटर से ज्यादा क्षेत्र

    अधिकारियों ने ग्लेशियर टूटने वाली जगह के नीचे एक और बड़ी झील की पहचान की है। एक इंजीनियर के मुताबिक इसका क्षेत्रफल 1.20 लाख वर्ग मीटर से ज्यादा है। यह मौजूदा झील से भी बड़ी है। इसलिए इस झील की भी लगातार निगरानी की जा रही है।

    चीन में 7 मौतें, 554 लोग अब भी लापता

    इस बीच चीन में आपदा से मरने वालों की संख्या बढ़कर 7 हो गई है। सरकारी समाचार एजेंसी शिन्हुआ के मुताबिक 554 लोग अब भी लापता हैं। अधिकारियों का कहना है कि फिलहाल सबसे बड़ी प्राथमिकता निचले इलाकों में राहत और बचाव अभियान को सुरक्षित रखना है।

  • अमेरिकी सेना की मदद करने वाले अफगान परिवार को भी नहीं बख्शा, ट्रंप प्रशासन ने दर्जनों प्रवासियों को अफ्रीका भेजा

    अमेरिकी सेना की मदद करने वाले अफगान परिवार को भी नहीं बख्शा, ट्रंप प्रशासन ने दर्जनों प्रवासियों को अफ्रीका भेजा


    नई दिल्ली। अमेरिकी सेना के साथ काम करने वाले परिवार से ताल्लुक रखने वाले एक अफगान नागरिक समेत दर्जनों प्रवासियों को ट्रंप प्रशासन ने अमेरिका से निकालकर अफ्रीकी देश सेंट्रल अफ्रीकी गणराज्य भेज दिया। शनिवार (29 अगस्त) को हुई इस निर्वासन उड़ान में 12 अफगान और 8 ईरानी नागरिकों के अलावा नेपाल और निकारागुआ के कई नागरिक भी शामिल थे। अफगान नागरिक के वकील और मानवाधिकार संगठनों ने इसकी जानकारी दी है।

    रिपोर्ट के मुताबिक, निर्वासित किए गए अफगान नागरिक की उम्र करीब 20 साल है। उसके वकील अल्मा डेविड के अनुसार, अमेरिकी अदालत ने उसे अफगानिस्तान भेजे जाने से सुरक्षा दी थी, क्योंकि वहां उसे तालिबान से खतरा था। अदालत में पेश दस्तावेजों के मुताबिक, अमेरिकी सेना के समर्थन में उसके भाइयों द्वारा किए गए काम की वजह से अफगानिस्तान में उसके परिवार को तालिबान की धमकियां मिली थीं।

    एक भाई अमेरिकी सेना के साथ काम कर चुका, दूसरे की तालिबान ने की हत्या

    अल्मा डेविड के मुताबिक, अफगान नागरिक का एक भाई अमेरिका में रहता है और अफगान नेशनल आर्मी में काम कर चुका है। यह सेना 2021 में तालिबान के सत्ता में आने से पहले अमेरिकी सेना के साथ मिलकर काम करती थी। उसके एक अन्य भाई ने अमेरिकी प्रशिक्षण लेकर पायलट के तौर पर काम किया था, लेकिन तालिबान ने उसकी हत्या कर दी थी।

    इसके बावजूद अफगान नागरिक को अमेरिका में रहने की अनुमति नहीं मिली और उसे निर्वासन की कार्रवाई का सामना करना पड़ा।

    12 अफगान और 8 ईरानी नागरिकों को भेजा गया

    शनिवार को सेंट्रल अफ्रीकी गणराज्य की राजधानी बांगुई पहुंची निर्वासन उड़ान में 12 अफगान और 8 ईरानी नागरिक शामिल थे। इसके अलावा नेपाल और निकारागुआ के कई नागरिकों को भी इसी उड़ान से भेजा गया। ह्यूमन राइट्स फर्स्ट की नीति, शरणार्थी और अप्रवासी अधिकार निदेशक सावी अरवे ने इसकी जानकारी दी।

    मानवाधिकार संगठनों के मुताबिक, ट्रंप प्रशासन ने कई गुप्त समझौतों के तहत हजारों प्रवासियों को करीब दो दर्जन ऐसे देशों में भेजा है, जो उनके अपने देश नहीं हैं। इसे प्रशासन की व्यापक इमिग्रेशन कार्रवाई का हिस्सा माना जा रहा है।

    जून के बाद सेंट्रल अफ्रीकी गणराज्य के लिए दूसरी उड़ान

    इमिग्रेशन वकीलों का कहना है कि इस प्रक्रिया के जरिए कुछ शरण मांगने वालों को कानूनी रास्ते से अप्रत्यक्ष रूप से उन देशों में वापस भेजा जा रहा है, जहां से वे भागे थे।

    शनिवार की उड़ान जून के बाद सेंट्रल अफ्रीकी गणराज्य के लिए ऐसी दूसरी निर्वासन उड़ान थी। जून में भेजी गई उड़ान में करीब दो दर्जन प्रवासी शामिल थे। इनमें एक ईरानी महिला भी थी, जिसने अपने देश में उत्पीड़न का सामना करने की बात कही थी।

    मानवाधिकार संगठनों ने ट्रंप प्रशासन की इस नीति को लेकर चिंता जताई है और सवाल उठाया है कि ऐसे लोगों को उन देशों में भेजना कितना सुरक्षित है, जहां उन्हें उत्पीड़न या खतरे का सामना करना पड़ सकता है।

  • युगांडा के राजा ओयो न्यिम्बा कबांबा इगुरु रुकिदी चतुर्थ का 34 वर्ष की उम्र में निधन

    युगांडा के राजा ओयो न्यिम्बा कबांबा इगुरु रुकिदी चतुर्थ का 34 वर्ष की उम्र में निधन


    कंपाला।
    युगांडा के पारंपरिक राज्य टूरो के राजा ओयो न्यिम्बा कबांबा इगुरु रुकिदी चतुर्थ का 34 वर्ष की उम्र में निधन हो गया। वह 1995 में महज तीन वर्ष की उम्र में राजगद्दी पर बैठे थे और उस समय दुनिया के सबसे कम उम्र के शासक बने थे। उनके निधन की घोषणा टूरो के प्रधानमंत्री केल्विन आर्मस्ट्रांग वोमीरे अकीकी ने की।

    प्रधानमंत्री ने गुरुवार देर रात सोशल मीडिया मंच एक्स पर राजा के निधन की जानकारी देते हुए इसे अपूरणीय क्षति बताया। उन्होंने कहा कि राजा का निधन स्थानीय समयानुसार गुरुवार रात करीब 10 बजे हुआ। हालांकि, उनकी मृत्यु के कारण का खुलासा नहीं किया गया है।

    पिता की मौत के बाद तीन साल की उम्र में संभाली गद्दी

    ओयो न्यिम्बा कबांबा इगुरु रुकिदी चतुर्थ को 12 सितंबर 1995 को टूरो का राजा बनाया गया था। उनके पिता रुकिराबासाइजा पैट्रिक डेविड मैथ्यू कबोयो ओलिमी तृतीय के निधन के बाद उन्हें उत्तराधिकारी बनाया गया।

    महज तीन साल की उम्र में राजा बनने के कारण उनका नाम दुनिया के सबसे कम उम्र के शासकों में दर्ज हुआ। इतने कम उम्र में राजगद्दी संभालने के बावजूद उन्होंने आगे चलकर टूरो के सामाजिक और सांस्कृतिक जीवन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

    युगांडा गणतंत्र, फिर भी मौजूद हैं पारंपरिक राजा

    युगांडा एक गणतांत्रिक देश है, जहां राष्ट्रपति का चुनाव होता है और राजनीतिक सत्ता निर्वाचित सरकार के पास रहती है। इसके बावजूद देश में कई पारंपरिक राजशाहियां आज भी मौजूद हैं।

    ये राजशाहियां औपनिवेशिक काल से पहले अस्तित्व में रहे पारंपरिक राज्यों की निरंतरता हैं। आधुनिक युगांडा में इन राजाओं के पास औपचारिक राजनीतिक अधिकार सीमित हैं, लेकिन सामाजिक और सांस्कृतिक स्तर पर उनका प्रभाव काफी महत्वपूर्ण माना जाता है।

    राजा ओयो न्यिम्बा कबांबा इगुरु रुकिदी चतुर्थ पश्चिमी युगांडा में स्थित टूरो राज्य के प्रमुख थे। टूरो क्षेत्र डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो की सीमा के नजदीक है।

    अमेरिका में चल रहा था इलाज

    राष्ट्रपति योवेरी मुसेवेनी की सरकार में मंत्री बालम बारुगहारा ने राजा के निधन की आधिकारिक घोषणा से कुछ समय पहले बताया था कि उनका अमेरिका में इलाज चल रहा था। हालांकि, प्रधानमंत्री ने उनके निधन की वजह नहीं बताई।

    प्रधानमंत्री अकीकी ने कहा कि राजा अविवाहित थे, लेकिन उन्होंने एक उत्तराधिकारी छोड़ा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि राजगद्दी की निरंतरता सुनिश्चित है।

    युगांडा में शोक की लहर

    राजा के निधन की खबर सामने आने के बाद युगांडा में शोक की लहर दौड़ गई। सोशल मीडिया से लेकर राष्ट्रीय मीडिया तक उनके निधन की व्यापक चर्चा हुई।

    युगांडा के चर्चित पॉप स्टार और बाद में राजनेता बने विपक्षी नेता बॉबी वाइन ने भी सोशल मीडिया पर शोक जताया। उन्होंने राजा की आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की।

    युवावस्था को बताया था ताकत

    इसी वर्ष अप्रैल में राजा के जन्मदिन के अवसर पर टूरो के प्रधानमंत्री ने उनके नेतृत्व की प्रशंसा की थी। उन्होंने कहा था कि राजा अपनी जनता की वास्तविकताओं से दूर नहीं हैं और इसी पीढ़ी का हिस्सा हैं।

    प्रधानमंत्री ने उनके युवा होने को कमजोरी के बजाय ताकत बताया था। उनके अनुसार, राजा की युवावस्था टूरो के लिए ऊर्जा, नया दृष्टिकोण और भविष्य की नई कल्पना लेकर आई थी।

    राजा ओयो के निधन के बाद अब टूरो की पारंपरिक राजशाही में उत्तराधिकार की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी। हालांकि उनकी राजनीतिक भूमिका प्रतीकात्मक रही, लेकिन टूरो के सामाजिक और सांस्कृतिक जीवन में उनका स्थान महत्वपूर्ण था।

  • नेपाल त्रासदी पर चीन की चुप्पी पर सवाल: सिर्फ 5 मौतों की जानकारी, तिब्बत में पीड़ितों से बात करने पर भी पाबंदी

    नेपाल त्रासदी पर चीन की चुप्पी पर सवाल: सिर्फ 5 मौतों की जानकारी, तिब्बत में पीड़ितों से बात करने पर भी पाबंदी


    नई दिल्ली। नेपाल में बुधवार को आई भीषण बाढ़ ने बड़े पैमाने पर तबाही मचाई है। इस आपदा में मृतकों की संख्या बढ़कर 579 हो गई है, जबकि करीब 2 हजार लोग अब भी लापता हैं। भारत के भी सैकड़ों नागरिकों से संपर्क नहीं हो पा रहा है। आपदा का असर चीन के तिब्बत क्षेत्र से भी जुड़ा है, लेकिन चीन की ओर से अब तक सिर्फ 5 लोगों की मौत की जानकारी दी गई है। इससे चीन की ओर से वास्तविक नुकसान और जनहानि की जानकारी छिपाए जाने को लेकर सवाल उठ रहे हैं।

    चीन में तबाही, लेकिन जानकारी बेहद सीमित

    द गार्जियन की रिपोर्ट के मुताबिक, चीन का सरकारी मीडिया भी इस आपदा को लेकर व्यापक रिपोर्टिंग नहीं कर रहा है। कुछ पत्रकार प्रभावित इलाकों में पहुंचते हैं, लेकिन वहां पीड़ितों और स्थानीय लोगों से बातचीत करने के बजाय रिपोर्टिंग मुख्य रूप से सरकारी राहत एवं बचाव प्रयासों तक सीमित रहती है। रिपोर्टों में चीन की ओर से किए जा रहे राहत कार्यों को प्रमुखता दी जाती है, जबकि आम लोगों की स्थिति सामने नहीं आ रही है।

    नेपाल में बाढ़ के प्रभाव को देखते हुए आशंका जताई जा रही है कि चीन के प्रभावित हिस्सों में भी नुकसान व्यापक हो सकता है। इसके बावजूद चीन की ओर से जनहानि और तबाही का विस्तृत आंकड़ा सार्वजनिक नहीं किया गया है।

    तिब्बत में पत्रकारों और स्थानीय लोगों पर पाबंदियों का आरोप

    चीन तिब्बत पर अपना दावा करता है, जबकि तिब्बत की स्वायत्तता और स्वतंत्रता की मांग लंबे समय से उठती रही है। रिपोर्ट के अनुसार, तिब्बत में अंतरराष्ट्रीय पत्रकारों की पहुंच पर कड़े प्रतिबंध हैं। स्थानीय लोगों के पत्रकारों से बातचीत करने पर भी कार्रवाई का खतरा रहता है।

    तिब्बत में भाषा और संस्कृति से जुड़े मुद्दों को लेकर भी चीन की नीतियों की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आलोचना होती रही है। ऐसे में मौजूदा आपदा के दौरान भी स्थानीय लोगों की आवाज और जमीनी हालात के सामने न आने पर सवाल उठ रहे हैं।

    चीन ने भेजी राहत टीम, शी जिनपिंग ने की बैठक

    जानकारी के मुताबिक, चीन ने प्रभावित क्षेत्र में राहत और बचाव दल भेजे हैं। हालांकि, इन टीमों ने मौके पर किस स्तर पर और क्या काम किया, इसकी विस्तृत जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई है।

    चीनी मीडिया ने बताया कि राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने राहत एवं बचाव कार्यों को लेकर एक उच्चस्तरीय बैठक की। वहीं, प्रीमियर ली कियांग ने प्रभावित क्षेत्र का दौरा भी किया।

    दो और ग्लेशियरों पर नजर

    नेपाल के मौसम विभाग के अधिकारियों ने अब दो और ग्लेशियरों पर निगरानी बढ़ाने की कोशिश शुरू की है। ये दोनों ग्लेशियर उस ग्लेशियर के आसपास स्थित हैं, जिसके टूटने के बाद बुधवार को विनाशकारी बाढ़ आई थी। इससे प्रभावित क्षेत्रों में आगे किसी और आपदा की आशंका को लेकर निगरानी महत्वपूर्ण हो गई है।

    4 हजार लोगों को सुरक्षित निकाला गया

    नेशनल डिजास्टर रिस्क रिडक्शन एंड मैनेजमेंट अथॉरिटी के ताजा अपडेट के मुताबिक, राहत और बचाव अभियान के दौरान अब तक करीब 4,000 लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया जा चुका है। हालांकि लापता लोगों की संख्या अभी भी बढ़ रही है और ताजा आंकड़े के अनुसार 1,924 लोग लापता हैं।

    बचाव अभियान को तेज करने के लिए नेपाल सेना, नेपाल पुलिस और सशस्त्र पुलिस बल के 15,000 से ज्यादा जवानों को प्रभावित इलाकों में तैनात किया गया है।

    लापता विदेशियों के आंकड़े अलग-अलग

    लापता विदेशी नागरिकों की संख्या को लेकर अलग-अलग सरकारी आंकड़े सामने आए हैं। एक सरकारी रिपोर्ट में 517 विदेशी नागरिकों और जलविद्युत परियोजनाओं में काम करने वाले कर्मचारियों के लापता होने की बात कही गई है।

    वहीं, नेपाल पुलिस के पहले जारी आंकड़ों में लापता विदेशी नागरिकों की संख्या 575 बताई गई थी। इनमें 36 देशों के नागरिक शामिल हैं। पुलिस के आंकड़ों के मुताबिक लापता विदेशियों में 65 अमेरिकी, 62 यूक्रेनी और 33 ब्रिटिश नागरिक भी हैं।

    इसके अलावा प्रभावित इलाकों से 149 नेपाली पर्यटक और 1,407 स्थानीय नागरिक भी लापता बताए गए हैं। प्रशासन और सुरक्षा बल प्रभावित क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर खोज, राहत और बचाव अभियान चला रहे हैं।

  • बाढ़ के बाद नेपाल पर मंडराया नया संकट, काठमांडो में खाने-पीने से ईंधन तक की सप्लाई पर असर

    बाढ़ के बाद नेपाल पर मंडराया नया संकट, काठमांडो में खाने-पीने से ईंधन तक की सप्लाई पर असर


    काठमांडो। नेपाल में बुधवार को भोटेकोशी नदी तंत्र में आई अचानक बाढ़ ने भारी तबाही मचाने के बाद अब राजधानी काठमांडो की आपूर्ति व्यवस्था के सामने नई चुनौती खड़ी कर दी है। देश के प्रमुख सप्लाई रूट पृथ्वी हाईवे के बंद होने से काठमांडो घाटी में खाद्य सामग्री, ईंधन और अन्य जरूरी सामान की आवाजाही प्रभावित हुई है। हाईवे को पूरी तरह कब तक खोला जा सकेगा, इसकी अभी कोई निश्चित समयसीमा नहीं बताई गई है। ऐसे में सरकार के सामने सबसे बड़ी चुनौती राजधानी में जरूरी वस्तुओं की नियमित आपूर्ति बनाए रखना है।

    पृथ्वी हाईवे बंद होने से काठमांडो की सप्लाई क्यों प्रभावित?

    काठमांडो के लिए नागढुंगा से भरतपुर तक पृथ्वी हाईवे का करीब 180 किलोमीटर हिस्सा बेहद महत्वपूर्ण है। इसी मार्ग के जरिए राजधानी में बड़ी मात्रा में खाद्य पदार्थ, पेट्रोलियम उत्पाद और रोजमर्रा की जरूरी वस्तुएं पहुंचती हैं।

    बुधवार की बाढ़ में कम से कम 19 पुल क्षतिग्रस्त हुए हैं। वहीं त्रिशूली कॉरिडोर और आसपास के राजमार्गों पर करीब 40 किलोमीटर सड़क बह गई। काठमांडो घाटी ट्रैफिक पुलिस कार्यालय के प्रवक्ता पुलिस अधीक्षक नरेश राज सुबेदी ने बताया कि अधिकारी रास्ता बहाल करने के लिए पूरी क्षमता से काम कर रहे हैं, लेकिन शुक्रवार तक हाईवे खुलने की गारंटी नहीं दी जा सकती।

    वैकल्पिक रास्तों से पहुंच रहा सामान

    सड़क विभाग के इंजीनियर राजीव मानंधर के मुताबिक शुक्रवार शाम तक गल्छी वाले हिस्से में बारी-बारी से एकतरफा यातायात शुरू कर दिया गया था। वहीं गलौंडी-घाटबेसी-जारेखेत हिस्से में दोनों दिशाओं से वाहनों की आवाजाही शुरू हो गई थी।

    हालांकि बारिश होने पर इन रास्तों को दोबारा बंद करना पड़ सकता है। भूस्खलन के बाद सड़कों पर जमा मलबा हटाने का काम लगातार चल रहा है और शाम पांच बजे तक अर्थमूवर मशीनों की मदद ली जा रही है। इसके अलावा कुछ वैकल्पिक मार्गों के जरिए भी काठमांडो में जरूरी सामान पहुंचाया जा रहा है।

    कालिमाटी बाजार में सब्जियों की आवक घटी

    पृथ्वी हाईवे बंद होने का असर काठमांडो के प्रमुख कालिमाटी फल एवं सब्जी बाजार में भी दिखाई दिया है। मंगलवार को यहां 775 टन सब्जियां, फल और मछली पहुंची थी। बुधवार को आवक 771 टन रही, लेकिन गुरुवार को यह घटकर सिर्फ 477 टन रह गई।

    बाजार विकास बोर्ड के सूचना अधिकारी बिनय श्रेष्ठ के अनुसार पृथ्वी हाईवे से आने वाला सामान रास्ते में फंसा हुआ है। इस मार्ग से सब्जियों की आपूर्ति पूरी तरह रुक गई है, हालांकि अन्य रास्तों से कुछ सामान बाजार तक पहुंच रहा है।

    चार-पांच दिन का ईंधन स्टॉक

    हाईवे बंद होने के कारण पेट्रोल और अन्य पेट्रोलियम उत्पादों की आपूर्ति को लेकर भी चिंता बढ़ी है। हालांकि नेपाल ऑयल कॉरपोरेशन ने फिलहाल लोगों को राहत दी है। निगम के मुताबिक थानकोट डिपो में मौजूद पेट्रोलियम उत्पाद चार से पांच दिन तक चलने के लिए पर्याप्त हैं।

    निगम के उप निदेशक मनोज कुमार ठाकुर ने कहा कि इस अवधि के भीतर पृथ्वी हाईवे के खुलने की उम्मीद है। इसलिए लोगों को ईंधन की उपलब्धता को लेकर घबराने की जरूरत नहीं है। सरकार भी जरूरी वस्तुओं और पेट्रोलियम उत्पादों की स्थिति पर नजर बनाए हुए है।

    कालाबाजारी पर सरकार की नजर

    आपदा के बीच सरकार को इस बात की भी चिंता है कि कहीं कारोबारी कृत्रिम कमी पैदा कर सामान महंगा न कर दें। वाणिज्य, आपूर्ति और उपभोक्ता संरक्षण विभाग ने लोगों से बाजार में कालाबाजारी या कृत्रिम कमी से जुड़ी शिकायतें दर्ज कराने की अपील की है।

    विभाग और स्थानीय प्रशासन बाजारों की निगरानी कर रहे हैं। वहीं उद्योग, वाणिज्य और आपूर्ति मंत्रालय ने त्योहारों के मौसम तथा आपदा प्रबंधन की स्थिति पर नजर रखने के लिए एक समन्वय इकाई बनाई है। संबंधित सरकारी एजेंसियों को भी इसी तरह की इकाइयां गठित करने के निर्देश दिए गए हैं।

    रसुवा से धादिंग तक भारी तबाही

    बुधवार सुबह भोटेकोशी नदी तंत्र में अचानक आई बाढ़ ने रसुवा, नुवाकोट और धादिंग जिलों में भारी नुकसान पहुंचाया। बड़ी संख्या में लोगों की मौत हुई है, जबकि सैकड़ों लोग अभी भी लापता बताए जा रहे हैं। लापता और प्रभावित लोगों में सुरक्षा बलों के जवानों के साथ विदेशी पर्यटक भी शामिल हैं।

    बाढ़ से सरकारी और निजी संपत्तियों को भी भारी नुकसान हुआ है। इसे हाल के वर्षों की बड़ी प्राकृतिक आपदाओं में से एक माना जा रहा है। सड़कों और पुलों के क्षतिग्रस्त होने से राहत अभियान के साथ-साथ राजधानी की आपूर्ति व्यवस्था भी प्रभावित हुई है।

    उपभोक्ता संगठनों ने मांगी सख्ती

    उपभोक्ता अधिकार कार्यकर्ताओं ने सरकार से वैकल्पिक मार्गों के जरिए जरूरी सामान की आपूर्ति बनाए रखने और संकट का फायदा उठाकर मुनाफाखोरी करने वालों पर कार्रवाई की मांग की है।

    उपभोक्ता अधिकार संरक्षण-नेपाल मंच के महासचिव विष्णु प्रसाद तिमिल्सिना ने कहा कि कालाबाजारी, कृत्रिम कमी और मनमाने तरीके से कीमत बढ़ाने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए। उनका कहना है कि संकट के समय लोगों को यह भरोसा मिलना जरूरी है कि सरकार उनके साथ है और जरूरी वस्तुओं की कमी नहीं होने दी जाएगी

  • वेनेजुएला के 65 अरब बैरल तेल पर अमेरिका की नजर, ट्रंप बोले- यह दुनिया की सबसे बड़ी ऑयल डील

    वेनेजुएला के 65 अरब बैरल तेल पर अमेरिका की नजर, ट्रंप बोले- यह दुनिया की सबसे बड़ी ऑयल डील


    नई दिल्ली। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शनिवार को बड़ा दावा करते हुए कहा कि अमेरिका ने वेनेजुएला के साथ एक ऐसा समझौता किया है, जिसके तहत करीब 65 अरब बैरल तेल भंडार पर अमेरिका का नियंत्रण होगा। ट्रंप ने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए इस समझौते की जानकारी दी और इसे दुनिया की सबसे बड़ी तेल डील बताया।

    ट्रंप के अनुसार, यह समझौता अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो, रक्षा मंत्री हेगसेथ और वेनेजुएला की अंतरिम राष्ट्रपति डेल्सी रोड्रिग्ज के बीच हुई बातचीत के बाद हुआ। उन्होंने अपने पोस्ट में लिखा, “संयुक्त राज्य अमेरिका ने अभी-अभी वेनेजुएला देश के साथ एक समझौता किया है- जो दुनिया के इतिहास की सबसे बड़ी तेल डील है!”

    मादुरो की गिरफ्तारी के बीच हुआ ऐलान

    अमेरिकी राष्ट्रपति का यह बयान ऐसे समय आया है, जब ट्रंप के आदेश पर अमेरिकी सेना ने वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को गिरफ्तार कर अमेरिका लाने का ऑपरेशन चलाया था। इसके बाद मादुरो पर नार्को-टेररिज्म और ड्रग तस्करी से जुड़े संघीय आरोप लगाए जाने की बात कही गई थी।

    इस बीच अमेरिका में गैस की बढ़ती कीमतों को लेकर ट्रंप प्रशासन पर दबाव भी बढ़ रहा है। ईरान में करीब छह महीने से युद्ध जारी है और फिलहाल इसके खत्म होने के संकेत नहीं हैं। ऐसे हालात में अमेरिका ने अपने रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार का इस्तेमाल किया है। अगस्त की शुरुआत तक इस भंडार में 30 करोड़ बैरल से भी कम तेल बचा था।

    मादुरो को हटाने के बाद वेनेजुएला पर बढ़ा फोकस

    जनवरी में निकोलस मादुरो को सत्ता से हटाने के बाद ट्रंप ने अमेरिकी तेल कंपनियों को दोबारा वेनेजुएला भेजने और वहां मौजूद तेल भंडार का इस्तेमाल करने की बात कही थी।

    ट्रंप का आरोप रहा है कि वेनेजुएला ने अमेरिका का तेल चुराया था। उनका तर्क था कि वेनेजुएला के पूर्व राष्ट्रपति ह्यूगो शावेज ने दशकों पहले सैकड़ों विदेशी संपत्तियों का राष्ट्रीयकरण किया था, जिनमें अमेरिकी तेल कंपनियों की संपत्तियां भी शामिल थीं।

    303 अरब बैरल का भंडार, फिर भी उत्पादन सिर्फ 1%

    वेनेजुएला के पास दुनिया के सबसे बड़े तेल भंडारों में से एक है। अनुमान के मुताबिक देश की जमीन के नीचे करीब 303 अरब बैरल कच्चे तेल का भंडार मौजूद है। अमेरिकी ऊर्जा सूचना प्रशासन के मुताबिक यह दुनिया के कुल तेल भंडार का करीब 17% है।

    विशेषज्ञों के मुताबिक, दुनिया के कई हिस्सों में बिना इस्तेमाल हुए तेल की खोज अभी भी जारी रहती है, जबकि वेनेजुएला के भूमिगत तेल भंडार का बड़ा हिस्सा पहले ही चिन्हित किया जा चुका है और उसके बारे में जानकारी उपलब्ध है।

    हालांकि, कमजोर बुनियादी ढांचे और अन्य समस्याओं के कारण इतना बड़ा भंडार होने के बावजूद वेनेजुएला दुनिया के कुल तेल उत्पादन का सिर्फ 1% ही उत्पादन कर पाता है।