Category: International

  • ट्रंप का चीन दौरा रहा बेनतीजा! जिनपिंग के सामने ईरान, ताइवान और व्यापार पर नहीं बनी कोई सहमति

    ट्रंप का चीन दौरा रहा बेनतीजा! जिनपिंग के सामने ईरान, ताइवान और व्यापार पर नहीं बनी कोई सहमति


    नई दिल्ली।
    अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की बहुचर्चित चीन यात्रा इस बार किसी बड़े नतीजे के बिना खत्म हो गई। बीजिंग में चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ कई दौर की बातचीत के बावजूद ईरान, ताइवान और व्यापार जैसे अहम मुद्दों पर कोई ठोस समझौता सामने नहीं आया।

    दोनों नेताओं ने बातचीत को सकारात्मक बताया, लेकिन अंतरराष्ट्रीय विश्लेषकों के अनुसार इस दौरे से कोई बड़ा कूटनीतिक या आर्थिक ऐलान नहीं हुआ। ट्रंप लगभग 40 घंटे से ज्यादा बीजिंग में रहे और कई बैठकों में शामिल हुए, फिर भी दोनों देशों के बीच रणनीतिक मतभेद जस के तस बने रहे।

    सबसे बड़ा मुद्दा ईरान और होर्मुज जलडमरूमध्य रहा, जहां ऊर्जा आपूर्ति और सैन्य तनाव को लेकर अमेरिका और चीन की स्थिति अलग-अलग दिखाई दी। अमेरिकी पक्ष ने दावा किया कि दोनों देश ऊर्जा प्रवाह को लेकर सहमत हैं, लेकिन चीन की ओर से इस पर कोई स्पष्ट प्रतिबद्धता सामने नहीं आई।

    ताइवान को लेकर स्थिति और भी सख्त नजर आई, जहां शी जिनपिंग ने इसे चीन की “रेड लाइन” बताते हुए किसी भी बाहरी हस्तक्षेप को अस्वीकार्य करार दिया। इस बयान को अमेरिका के लिए एक स्पष्ट कूटनीतिक संदेश के रूप में देखा जा रहा है।

    व्यापार और आर्थिक सहयोग के मोर्चे पर भी कोई बड़ा समझौता नहीं हो सका। उम्मीद थी कि चीन बड़ी मात्रा में अमेरिकी कृषि और औद्योगिक उत्पादों की खरीद बढ़ाने का ऐलान करेगा, लेकिन ऐसा कोई महत्वपूर्ण निर्णय सामने नहीं आया।

    कुल मिलाकर इस दौरे को विशेषज्ञों ने “बिना ठोस नतीजे वाली कूटनीतिक मुलाकात” बताया है, जहां दोनों देशों ने रिश्तों में सुधार की बात जरूर कही, लेकिन जमीनी स्तर पर कोई बड़ा बदलाव नहीं दिखा।

  • ईरान-अमेरिका तनाव में भारत बन सकता है शांति का बड़ा चेहरा, रूस ने नई दिल्ली को बताया सबसे भरोसेमंद मध्यस्थ

    ईरान-अमेरिका तनाव में भारत बन सकता है शांति का बड़ा चेहरा, रूस ने नई दिल्ली को बताया सबसे भरोसेमंद मध्यस्थ



    नई दिल्ली। मिडिल ईस्ट में ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव के बीच रूस ने भारत की भूमिका को लेकर एक बड़ा कूटनीतिक बयान दिया है। रूसी विदेश मंत्री Sergey Lavrov ने कहा है कि मौजूदा वैश्विक परिस्थितियों में India ईरान, अमेरिका और पश्चिम एशियाई देशों के बीच संवाद स्थापित कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

    नई दिल्ली में आयोजित ब्रिक्स विदेश मंत्रियों की बैठक के दौरान लावरोव ने भारत की विदेश नीति की तारीफ करते हुए कहा कि भारत लंबे समय से संतुलित कूटनीति अपनाता रहा है और विभिन्न वैश्विक शक्तियों के साथ उसके मजबूत संबंध हैं। इसी वजह से भारत को एक “भरोसेमंद मध्यस्थ” के रूप में देखा जा सकता है, जो तनाव कम करने और बातचीत को आगे बढ़ाने में मदद कर सकता है।

    रूस का कहना है कि पश्चिम एशिया में हाल के वर्षों में तनाव काफी बढ़ा है, जिसमें ईरान-अमेरिका टकराव, ऊर्जा आपूर्ति की अनिश्चितता और क्षेत्रीय सुरक्षा से जुड़े मुद्दे प्रमुख हैं। ऐसे में किसी ऐसे देश की जरूरत है जो दोनों पक्षों के बीच विश्वास पैदा कर सके और बातचीत का रास्ता खोल सके। लावरोव के अनुसार, भारत इस भूमिका के लिए उपयुक्त है क्योंकि वह किसी एक खेमे का हिस्सा न होकर सभी प्रमुख देशों के साथ समान रूप से संबंध बनाए रखता है।

    लावरोव ने यह भी कहा कि भारत का कूटनीतिक अनुभव केवल द्विपक्षीय संबंधों तक सीमित नहीं है, बल्कि वह बहुपक्षीय मंचों जैसे ब्रिक्स, जी20 और शंघाई सहयोग संगठन में भी सक्रिय भूमिका निभाता रहा है। उन्होंने यह संकेत दिया कि भारत की यह वैश्विक स्वीकार्यता उसे मध्यस्थता की भूमिका के लिए और मजबूत बनाती है।

    रूस के अनुसार, ईरान और अमेरिका के बीच बातचीत केवल सुरक्षा या राजनीतिक मुद्दों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका सीधा असर वैश्विक ऊर्जा बाजार, तेल आपूर्ति और अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर भी पड़ता है। ऐसे में किसी स्थिर और भरोसेमंद मध्यस्थ की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण हो जाती है।

    लावरोव ने यह भी कहा कि कुछ पश्चिमी देशों की नीतियां इस क्षेत्र में तनाव को कम करने के बजाय बढ़ाने का काम कर रही हैं, जबकि समाधान केवल संवाद और कूटनीति के जरिए ही संभव है। उन्होंने आरोप लगाया कि ईरान और अरब देशों के बीच दूरी बढ़ाने की कोशिशें की जा रही हैं, जो वैश्विक स्थिरता के लिए सही नहीं है।

    भारत को लेकर रूस की यह टिप्पणी ऐसे समय आई है जब प्रधानमंत्री की हालिया कूटनीतिक गतिविधियों और खाड़ी देशों के साथ बढ़ते संबंधों ने भारत की भूमिका को और मजबूत किया है। ऊर्जा सुरक्षा, व्यापार और निवेश जैसे क्षेत्रों में भारत की बढ़ती भागीदारी ने उसे एक महत्वपूर्ण वैश्विक शक्ति के रूप में स्थापित किया है।

    हालांकि भारत सरकार की ओर से इस प्रस्ताव पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है, लेकिन अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों का मानना है कि यदि भारत इस दिशा में सक्रिय भूमिका निभाता है तो वह पश्चिम एशिया में शांति स्थापना के प्रयासों का एक प्रमुख केंद्र बन सकता है।

    कुल मिलाकर रूस का यह बयान भारत की बढ़ती वैश्विक कूटनीतिक ताकत को दर्शाता है, जहां वह अब केवल एक उभरती अर्थव्यवस्था नहीं बल्कि अंतरराष्ट्रीय शांति और स्थिरता में योगदान देने वाला अहम देश बनता जा रहा है।

  • शी जिनपिंग की सीट से उठते ही फाइलें देखने लगे ट्रंप! चीन समिट का VIDEO वायरल, सोशल मीडिया पर मचा बवाल

    शी जिनपिंग की सीट से उठते ही फाइलें देखने लगे ट्रंप! चीन समिट का VIDEO वायरल, सोशल मीडिया पर मचा बवाल



    नई दिल्ली। डोनाल्ड ट्रम्प एक बार फिर अपने व्यवहार को लेकर अंतरराष्ट्रीय चर्चा के केंद्र में आ गए हैं। चीन दौरे के दौरान उनका एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें वह कथित तौर पर Xi Jinping के सामने रखे दस्तावेजों और डायरी को देखने की कोशिश करते नजर आ रहे हैं। इस वीडियो के सामने आने के बाद इंटरनेट पर बहस छिड़ गई है और लोग ट्रंप के व्यवहार पर सवाल उठा रहे हैं।

    वायरल वीडियो में दिखाई देता है कि अमेरिका-चीन बैठक के दौरान शी जिनपिंग अपनी सीट से कुछ देर के लिए उठते हैं। इसी बीच ट्रंप सामने रखे दस्तावेजों की तरफ झुकते हैं और एक नोटबुक या डायरी जैसी चीज को देखने लगते हैं। वीडियो में मौजूद कुछ अमेरिकी अधिकारी भी इस दौरान असहज दिखाई देते हैं। हालांकि यह स्पष्ट नहीं है कि ट्रंप वास्तव में क्या पढ़ रहे थे और वह दस्तावेज निजी थे या बैठक से जुड़े आधिकारिक कागज।

    सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर इस वीडियो को लेकर तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं। कई यूजर्स ने इसे “डिप्लोमैटिक प्रोटोकॉल के खिलाफ” बताया, जबकि कुछ लोगों ने मजाकिया अंदाज में कहा कि ट्रंप “चीन के सीक्रेट” जानने की कोशिश कर रहे थे। कुछ पोस्ट्स में ट्रंप के व्यवहार को लेकर उनकी कार्यशैली और सार्वजनिक आचरण पर भी सवाल उठाए गए।

    बांग्लादेशी पत्रकार Salah Uddin Shoaib Choudhury ने भी इस वीडियो पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि इतने संवेदनशील अंतरराष्ट्रीय मंच पर ऐसा व्यवहार कई सवाल खड़े करता है। उन्होंने इसे कूटनीतिक माहौल के लिहाज से असामान्य बताया।

    हालांकि अब तक अमेरिका या चीन की ओर से इस वीडियो को लेकर कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है। यह भी साफ नहीं हो पाया है कि वीडियो किस संदर्भ में रिकॉर्ड हुआ और ट्रंप वास्तव में क्या देख रहे थे। बावजूद इसके, यह क्लिप सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रही है और दुनियाभर में चर्चा का विषय बनी हुई है।

  • दिल्ली BRICS समिट में ईरान पर फूटा मतभेद, बिना संयुक्त बयान खत्म हुई विदेश मंत्रियों की बैठक

    दिल्ली BRICS समिट में ईरान पर फूटा मतभेद, बिना संयुक्त बयान खत्म हुई विदेश मंत्रियों की बैठक

    नई दिल्ली। BRICS देशों के विदेश मंत्रियों की दिल्ली में हुई अहम बैठक ईरान मुद्दे पर गहरे मतभेदों के बीच बिना संयुक्त बयान के खत्म हो गई। समिट में ईरान और इजरायल के बीच बढ़ते तनाव, पश्चिम एशिया की स्थिति और होर्मुज जलडमरूमध्य से जहाजों की आवाजाही जैसे मुद्दों पर तीखी चर्चा हुई, लेकिन सदस्य देशों के बीच आम सहमति नहीं बन सकी।

    सूत्रों के मुताबिक, ईरान के विदेश मंत्री Abbas Araghchi ने BRICS देशों से मांग की कि संयुक्त बयान में ईरान पर हुए हमलों की स्पष्ट निंदा की जाए। उन्होंने अमेरिका और इजरायल पर अंतरराष्ट्रीय कानून तोड़ने का आरोप लगाया और BRICS से खुला समर्थन मांगा। हालांकि भारत समेत कई सदस्य देशों ने इस मुद्दे पर संतुलित रुख अपनाने की जरूरत बताई।

    बैठक में मौजूद देशों का मानना था कि पश्चिम एशिया के हालात बेहद संवेदनशील हैं और किसी एक पक्ष का खुलकर समर्थन करने से कूटनीतिक संतुलन बिगड़ सकता है। इसी कारण साझा बयान पर सहमति नहीं बन पाई और अंत में केवल एक “Outcome Statement” जारी किया गया।

    हालांकि ईरान के मुद्दे पर मतभेद सामने आए, लेकिन करीब 60 अहम एजेंडों पर सभी देशों ने एक जैसी राय रखी। इनमें ऊर्जा सहयोग, डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर, व्यापार, क्लाइमेट एक्शन, वित्तीय कनेक्टिविटी और वैश्विक आर्थिक सहयोग जैसे विषय शामिल रहे।

    समिट के दौरान S. Jaishankar ने अपने संबोधन में समुद्री व्यापार मार्गों की सुरक्षा पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि होर्मुज जलडमरूमध्य जैसे अंतरराष्ट्रीय समुद्री रास्तों को हर हाल में खुला रखा जाना चाहिए, क्योंकि इन मार्गों पर रुकावट का असर पूरी दुनिया की ऊर्जा आपूर्ति और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर पड़ता है।

    समिट से इतर जयशंकर और अराघची के बीच अलग से द्विपक्षीय बैठक भी हुई। दोनों नेताओं ने ईरान-इजरायल तनाव, क्षेत्रीय स्थिरता और समुद्री सुरक्षा जैसे मुद्दों पर चर्चा की। भारत ने साफ किया कि वह बातचीत और कूटनीति के जरिए तनाव कम करने के पक्ष में है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि BRICS मंच पर ईरान मुद्दे पर खुलकर मतभेद सामने आना इस बात का संकेत है कि संगठन के भीतर भी भू-राजनीतिक चुनौतियां बढ़ रही हैं। इसके बावजूद आर्थिक और रणनीतिक सहयोग के कई मुद्दों पर सदस्य देशों की एकजुटता कायम दिखाई दी।

  • X का बड़ा अपडेट! अब एक क्लिक में मिलेंगी पुरानी पोस्ट, वीडियो और आर्टिकल्स, Elon Musk ने लॉन्च किया History फीचर

    X का बड़ा अपडेट! अब एक क्लिक में मिलेंगी पुरानी पोस्ट, वीडियो और आर्टिकल्स, Elon Musk ने लॉन्च किया History फीचर



    नई दिल्ली। एलन मस्क की सोशल मीडिया कंपनी X लगातार यूजर्स के एक्सपीरियंस को बेहतर बनाने के लिए नए फीचर्स ला रही है। अब कंपनी ने एक नया और बेहद उपयोगी “History Feature” लॉन्च किया है, जिसकी मदद से यूजर्स पहले देखे गए पोस्ट, वीडियो और आर्टिकल्स को आसानी से दोबारा खोज सकेंगे। यह फीचर खासतौर पर उन लोगों के लिए राहत लेकर आया है, जो बाद में देखने या पढ़ने के लिए कंटेंट सेव करना भूल जाते थे।

    कंपनी के अनुसार नया History फीचर फिलहाल iOS यानी iPhone यूजर्स के लिए रोल आउट किया गया है। इस फीचर के जरिए यूजर्स अपनी पुरानी ऑनलाइन एक्टिविटी को व्यवस्थित तरीके से ट्रैक कर पाएंगे। एक्स  ने इस फीचर को चार अलग-अलग सेक्शन में बांटा है  बुकमार्क, लाइक, वीडियो और लेख।
    बुकमार्क और लाइक्स सेक्शन में वे पोस्ट दिखाई देंगी जिन्हें यूजर्स ने सेव या लाइक किया होगा, जबकि वीडियो और आर्टिकल सेक्शन में वह कंटेंट ऑटोमैटिकली दिखेगा जिसे यूजर पहले प्लेटफॉर्म पर देख चुका होगा। इससे किसी पुराने वीडियो, वायरल पोस्ट या जरूरी आर्टिकल को दोबारा

    ढूंढना बेहद आसान हो जाएगा।

    अब तक एक्स पर पुरानी पोस्ट या वीडियो दोबारा खोजना यूजर्स के लिए बड़ी परेशानी बन जाता था। कई बार लोग कोई जरूरी जानकारी या पसंदीदा वीडियो फिर से देखना चाहते थे, लेकिन उसे ढूंढना मुश्किल हो जाता था। नए History फीचर के आने के बाद यह दिक्कत काफी हद तक खत्म हो जाएगी।

    एक्स के प्रोडक्ट हेड निकिता बियर ने बताया कि यह फीचर खास तौर पर उन यूजर्स को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है, जो बाद में कंटेंट दोबारा पढ़ना या देखना पसंद करते हैं। कंपनी का मानना है कि इससे यूजर्स का प्लेटफॉर्म पर बिताया जाने वाला समय भी बढ़ेगा और कंटेंट एक्सपीरियंस पहले से ज्यादा स्मार्ट बनेगा।

    कंपनी ने यूजर्स की प्राइवेसी का भी खास ध्यान रखा है।एक्स  के मुताबिक हिस्ट्री सेक्शन पूरी तरह प्राइवेट रहेगा और इसमें दिखाई देने वाली एक्टिविटी केवल संबंधित यूजर को ही नजर आएगी। कोई दूसरा व्यक्ति आपकी हिस्ट्री नहीं देख पाएगा।

    टेक एक्सपर्ट्स का मानना है कि यह अपडेट सिर्फ एक साधारण हिस्ट्री फीचर नहीं है, बल्कि X के बदलते विजन का हिस्सा है। कंपनी अब खुद को सिर्फ माइक्रोब्लॉगिंग प्लेटफॉर्म तक सीमित नहीं रखना चाहती, बल्कि वीडियो, लंबे आर्टिकल्स और क्रिएटर कंटेंट पर ज्यादा फोकस कर रही है। यही वजह है कि नए फीचर को X के बड़े कंटेंट इकोसिस्टम की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है।

  • UAE में PM मोदी का मेगा मिशन सफल! भारत को मिला तेल, LPG, AI और रक्षा ताकत का बड़ा भरोसा

    UAE में PM मोदी का मेगा मिशन सफल! भारत को मिला तेल, LPG, AI और रक्षा ताकत का बड़ा भरोसा


    नई दिल्ली। नरेंद्र मोदी के संयुक्त अरब अमीरात दौरे ने भारत-UAE रिश्तों को नई मजबूती दी है। भले ही प्रधानमंत्री का यह दौरा सिर्फ चार घंटे का रहा, लेकिन इस दौरान हुए बड़े समझौते आने वाले वर्षों में भारत की ऊर्जा सुरक्षा, रक्षा क्षमता, इंफ्रास्ट्रक्चर और टेक्नोलॉजी सेक्टर पर गहरा असर डाल सकते हैं। अबूधाबी में प्रधानमंत्री मोदी और मोहम्मद बिन ज़ायेद अल नाहयान के बीच हुई बैठक में कई रणनीतिक समझौतों पर मुहर लगी।

    सबसे अहम समझौता रक्षा साझेदारी को लेकर हुआ। भारत और यूएई ने रणनीतिक रक्षा सहयोग के नए फ्रेमवर्क पर सहमति जताई है। इसके तहत दोनों देश रक्षा तकनीक, संयुक्त उत्पादन, खुफिया जानकारी साझा करने और आतंकवाद विरोधी अभियानों में साथ काम करेंगे। माना जा रहा है कि यह समझौता पश्चिम एशिया में बदलते सुरक्षा समीकरणों के बीच बेहद महत्वपूर्ण है।

    ऊर्जा सुरक्षा के मोर्चे पर भी भारत को बड़ी राहत मिली है। दोनों देशों ने रणनीतिक पेट्रोलियम रिजर्व और रसोई गैस सप्लाई को लेकर बड़े समझौते किए हैं। भारत की सरकारी कंपनी इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन और एडीएनओसी के बीच हुए समझौते के तहत यूएई भारत को दीर्घकालिक और प्राथमिकता के आधार पर LPG सप्लाई करेगा। इससे भारत में गैस और ईंधन की सप्लाई स्थिर रहने में मदद मिलेगी, खासकर ऐसे समय में जब होर्मुज जलडमरूमध्य और पश्चिम एशिया में तनाव के कारण वैश्विक ऊर्जा बाजार प्रभावित हैं।

    इसके अलावा रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार को लेकर हुए समझौते से भारत भविष्य की आपूर्ति बाधाओं से निपटने के लिए अपनी तैयारी और मजबूत कर सकेगा। ADNOC पहले से भारत के भूमिगत तेल भंडारों में निवेश कर रहा है और अब यह साझेदारी और गहरी होगी।

    समुद्री और लॉजिस्टिक्स सेक्टर में भी बड़ी पहल हुई है। गुजरात के वडिनार में जहाज मरम्मत और शिप रिपेयर क्लस्टर विकसित करने के लिए MoU साइन किया गया है। इससे भारत को क्षेत्रीय समुद्री हब बनाने में मदद मिलेगी और रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे।

    टेक्नोलॉजी सेक्टर में यूएई की कंपनी G42 ने भारत में 8 AI सुपर कंप्यूटर स्थापित करने का ऐलान किया है। यह प्रोजेक्ट भारत की आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस क्षमता को नई ऊंचाई देगा। प्रस्तावित सुपरकंप्यूटर भारत में रिसर्च, डेटा प्रोसेसिंग और AI मॉडल डेवलपमेंट को तेज करेंगे।

    इसके साथ ही UAE ने भारत में 5 अरब डॉलर निवेश का भी ऐलान किया है। यह निवेश इंफ्रास्ट्रक्चर, बैंकिंग और हाउसिंग फाइनेंस सेक्टर में किया जाएगा। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे भारत की अर्थव्यवस्था और निवेश माहौल को मजबूती मिलेगी।

    कुल मिलाकर पीएम मोदी का UAE दौरा सिर्फ कूटनीतिक मुलाकात नहीं रहा, बल्कि ऊर्जा, रक्षा, AI और निवेश जैसे क्षेत्रों में भारत के लिए बड़ी रणनीतिक सफलता साबित हुआ है।

  • शी जिनपिंग के ‘पतनशील अमेरिका’ वाले बयान पर ट्रंप की मुहर, बोले- बाइडेन ने देश को कमजोर कर दिया

    शी जिनपिंग के ‘पतनशील अमेरिका’ वाले बयान पर ट्रंप की मुहर, बोले- बाइडेन ने देश को कमजोर कर दिया



    नई दिल्ली। डोनाल्ड ट्रम्प  ने चीन दौरे के दौरान बड़ा बयान देते हुए कहा कि चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग
    द्वारा अमेरिका को “पतनशील राष्ट्र” कहे जाने पर वह कुछ हद तक सहमत हैं। हालांकि ट्रंप ने साफ किया कि यह टिप्पणी मौजूदा अमेरिकी स्थिति पर नहीं, बल्कि पूर्व राष्ट्रपति जो बाइडेन के कार्यकाल की नीतियों पर लागू होती है।

    नई दिल्ली में मीडिया से बातचीत के दौरान ट्रंप ने दावा किया कि उनकी बीजिंग यात्रा बेहद सफल रही और शी जिनपिंग ने कई मुद्दों पर उनकी सराहना भी की। ट्रंप के मुताबिक, चीन के राष्ट्रपति ने अमेरिका की स्थिति को लेकर जो टिप्पणी की, उसका इशारा बाइडेन प्रशासन की आर्थिक और विदेश नीति की ओर था।

    ट्रंप ने कहा कि बाइडेन सरकार के दौरान अमेरिका को आर्थिक कमजोरी, वैश्विक दबाव और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर नेतृत्व संकट का सामना करना पड़ा। उन्होंने आरोप लगाया कि गलत नीतियों की वजह से अमेरिका की वैश्विक छवि कमजोर हुई और चीन जैसे देशों को बढ़त मिली। ट्रंप ने दावा किया कि उनकी वापसी के बाद अमेरिका फिर से मजबूत स्थिति में आ रहा है।

    हालांकि यह साफ नहीं हो पाया कि ट्रंप ने शी जिनपिंग के किस बयान का जिक्र किया। माना जा रहा है कि वह चीन-अमेरिका संबंधों पर हुई बंद कमरे की बातचीत या “थ्यूसीडाइड्स ट्रैप” से जुड़े बयान की ओर इशारा कर रहे थे। अपनी मुलाकात के दौरान शी जिनपिंग ने कहा था कि दुनिया की स्थिरता और वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए अमेरिका और चीन के रिश्तों का संतुलित रहना बेहद जरूरी है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि ट्रंप का यह बयान अमेरिकी राजनीति में नया विवाद खड़ा कर सकता है, क्योंकि उन्होंने पहली बार सार्वजनिक रूप से चीन की आलोचनात्मक टिप्पणी को सही ठहराने जैसा संकेत दिया है। वहीं रिपब्लिकन खेमे में इसे बाइडेन प्रशासन पर सीधा हमला माना जा रहा है।

  • ईरान-यूएई तनाव और होर्मुज संकट के बीच अबू धाबी में पीएम मोदी की अहम कूटनीति, ऊर्जा-रक्षा साझेदारी पर बड़ा फोकस

    ईरान-यूएई तनाव और होर्मुज संकट के बीच अबू धाबी में पीएम मोदी की अहम कूटनीति, ऊर्जा-रक्षा साझेदारी पर बड़ा फोकस



    नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपने खाड़ी दौरे के पहले चरण में संयुक्त अरब अमीरात (UAE) पहुंचे, जहां अबू धाबी एयरपोर्ट पर राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान ने उनका गर्मजोशी से स्वागत किया। पीएम मोदी और यूएई राष्ट्रपति के बीच द्विपक्षीय वार्ता में ऊर्जा सुरक्षा, निवेश, व्यापार और रक्षा सहयोग को मजबूत करने पर विस्तृत चर्चा हुई।

    यह मुलाकात ऐसे समय में हुई है जब पश्चिम एशिया में ईरान-यूएई तनाव, समुद्री मार्गों में अनिश्चितता और होर्मुज स्ट्रेट से जुड़ी वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति की चिंता बढ़ी हुई है। भारत के लिए यह क्षेत्र रणनीतिक रूप से बेहद अहम है, क्योंकि उसकी बड़ी ऊर्जा जरूरतें खाड़ी देशों पर निर्भर हैं।

    दोनों देशों के बीच बातचीत में एलपीजी सप्लाई, रणनीतिक पेट्रोलियम भंडारण, शिपिंग और इंफ्रास्ट्रक्चर निवेश जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर सहमति बनी। साथ ही रक्षा और समुद्री सुरक्षा सहयोग को और मजबूत करने पर भी जोर दिया गया।

    सूत्रों के मुताबिक, यूएई की ओर से भारत में बड़े निवेश प्रस्तावों और ऊर्जा साझेदारी को विस्तार देने पर भी चर्चा हुई है, जिससे दोनों देशों के आर्थिक संबंध और गहरे होने की उम्मीद है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि यह दौरा सिर्फ द्विपक्षीय संबंधों तक सीमित नहीं है, बल्कि भारत की ‘वेस्ट एशिया स्ट्रैटेजी’ का अहम हिस्सा है। होर्मुज स्ट्रेट में बढ़ते तनाव के बीच भारत को ऊर्जा सुरक्षा और कूटनीतिक संतुलन दोनों को साथ लेकर चलना होगा।

    रक्षा और अंतरराष्ट्रीय मामलों के जानकारों के अनुसार, भारत के लिए चुनौती यह है कि वह UAE, ईरान और सऊदी अरब जैसे प्रमुख देशों के साथ अपने संबंधों को संतुलित रखे, क्योंकि यह पूरा क्षेत्र वैश्विक ऊर्जा और व्यापार का केंद्र है।

  • श्रीलंका ने तमिलनाडु सरकार से की अपील, मछुआरा विवाद खत्म करने के लिए बॉटम ट्रॉलिंग पर सख्त बैन की मांग

    श्रीलंका ने तमिलनाडु सरकार से की अपील, मछुआरा विवाद खत्म करने के लिए बॉटम ट्रॉलिंग पर सख्त बैन की मांग


    नई दिल्ली। श्रीलंका ने भारत के तमिलनाडु राज्य से बॉटम ट्रॉलिंग फिशिंग पर रोक लगाने की अपील की है, ताकि दोनों देशों के बीच लंबे समय से चला आ रहा मछुआरों का विवाद कम किया जा सके। श्रीलंका के मत्स्य मंत्री रामलिंगम चंद्रशेखर ने कहा कि यह तरीका समुद्री पर्यावरण और मछली संसाधनों को गंभीर नुकसान पहुंचाता है, इसलिए इसे नियंत्रित करना जरूरी है।

    बॉटम ट्रॉलिंग मछली पकड़ने की एक विवादित तकनीक है, जिसमें भारी जालों को समुद्र तल तक खींचकर मछलियां, झींगे और अन्य समुद्री जीव पकड़े जाते हैं। श्रीलंका ने इस तकनीक पर 2017 से ही प्रतिबंध लगाया हुआ है, लेकिन तमिलनाडु के कुछ मछुआरों द्वारा इस क्षेत्र में प्रवेश करने पर श्रीलंकाई नौसेना द्वारा गिरफ्तारियां की जाती हैं, जिससे कई बार तनाव की स्थिति बन जाती है।

    श्रीलंकाई मंत्री ने संकेत दिया कि वे जल्द ही तमिलनाडु का दौरा कर मुख्यमंत्री से इस मुद्दे पर चर्चा कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि समाधान केवल कूटनीतिक बातचीत से ही संभव है और दोनों पक्षों को नियमों का पालन सुनिश्चित करना होगा।

    उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि मछुआरों की गिरफ्तारी का कारण अवैध रूप से समुद्री सीमा पार करना और प्रतिबंधित मछली पकड़ने की तकनीक का उपयोग करना है। श्रीलंका का कहना है कि उसके उत्तरी और पूर्वी तटीय क्षेत्रों में बड़ी आबादी आजीविका के लिए मछली पालन पर निर्भर है, और ऐसे तरीकों से उनके संसाधनों पर असर पड़ता है।

    भारत की ओर से भी इस मुद्दे को लेकर लगातार कूटनीतिक स्तर पर बातचीत होती रही है, ताकि मछुआरों की सुरक्षा और आजीविका दोनों के बीच संतुलन बनाया जा सके।

  • भारत के चीनी निर्यात पर रोक से नेपाल में बढ़ी टेंशन, त्योहारों से पहले सप्लाई संकट का डर, बालेन शाह सरकार के सामने नई चुनौती

    भारत के चीनी निर्यात पर रोक से नेपाल में बढ़ी टेंशन, त्योहारों से पहले सप्लाई संकट का डर, बालेन शाह सरकार के सामने नई चुनौती



    नई दिल्ली। भारत के चीनी निर्यात पर अस्थायी रोक से नेपाल में चिंता बढ़ गई है। भारत सरकार ने घरेलू बाजार में कीमतों को नियंत्रित रखने के लिए कच्ची, सफेद और रिफाइंड चीनी के निर्यात पर 30 सितंबर तक रोक लगा दी है। इस फैसले का सीधा असर पड़ोसी देश नेपाल पर पड़ने की आशंका जताई जा रही है, खासकर त्योहारों के सीजन में जब चीनी की मांग सबसे ज्यादा रहती है।

    नेपाल में दशैन, तिहार और छठ जैसे बड़े त्योहारों के दौरान चीनी की खपत तेजी से बढ़ जाती है। ऐसे में भारत से सप्लाई बाधित होने पर बाजार में कमी और कीमतों में उछाल की स्थिति बन सकती है। विशेषज्ञों का मानना है कि पहले से ही मौसम और कृषि उत्पादन को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है, ऐसे में यह कदम नेपाल की खाद्य आपूर्ति व्यवस्था पर अतिरिक्त दबाव डाल सकता है।

    काठमांडू पोस्ट की रिपोर्ट के मुताबिक, भारत के इस फैसले से नेपाली बाजारों में अस्थिरता की स्थिति बन सकती है। नेपाल के अधिकारी भी मानते हैं कि भारत के व्यापारिक फैसलों का सीधा असर उनकी अर्थव्यवस्था पर पड़ता है, क्योंकि नेपाल कई जरूरी वस्तुओं के लिए भारत पर निर्भर है।

    नेपाल के उद्योग और वाणिज्य मंत्रालय के अधिकारियों ने कहा है कि वे स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं और जरूरत पड़ने पर वैकल्पिक सप्लाई स्रोत तलाशने की कोशिश करेंगे। साथ ही भारत से सरकारी स्तर पर बातचीत की संभावना भी जताई गई है, ताकि त्योहारों के समय आवश्यक आपूर्ति बाधित न हो।

    व्यापार विशेषज्ञों का कहना है कि नेपाल की सबसे बड़ी चुनौती लॉजिस्टिक्स और सीमित विकल्प हैं। भारत के अलावा अन्य देशों से आयात करना महंगा साबित होता है, जिससे विदेशी मुद्रा भंडार पर भी दबाव बढ़ता है। इसी वजह से नेपाल की खाद्य सुरक्षा नीति को मजबूत करने की जरूरत पर जोर दिया जा रहा है।

    विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि अगर समय रहते वैकल्पिक व्यवस्था नहीं की गई, तो आने वाले महीनों में नेपाल में चीनी की कमी और महंगाई दोनों बढ़ सकती हैं।