Category: Lifestyle

  • Kitchen Tips: रोज की कुकिंग आसान बनाएंगे ये 10 आसान तरीके, तेल गर्म करने से लेकर दाल-सब्जी का स्वाद बढ़ाने तक काम आएंगे

    Kitchen Tips: रोज की कुकिंग आसान बनाएंगे ये 10 आसान तरीके, तेल गर्म करने से लेकर दाल-सब्जी का स्वाद बढ़ाने तक काम आएंगे

    नई दिल्ली:  रोज खाना बनाते समय कई छोटे-छोटे काम ऐसे होते हैं, जिनमें जरूरत से ज्यादा समय और मेहनत लग जाती है। कभी तेल सही तापमान पर गर्म हुआ या नहीं, यह समझना मुश्किल होता है तो कभी फ्रिज से निकला मक्खन तुरंत इस्तेमाल करने लायक नहीं होता। इसी तरह पत्तेदार सब्जियों के मुरझाने, शहद के जमने या चिपचिपी सामग्री के चम्मच से न निकलने जैसी परेशानियां भी सामने आती हैं। कुछ आसान किचन ट्रिक्स इन रोजमर्रा की दिक्कतों को काफी हद तक कम कर सकती हैं और बिना किसी महंगे गैजेट के खाना बनाने का काम आसान बनाया जा सकता है।

    तेल गर्म हुआ है या नहीं, यह जानने के लिए कड़ाही में तेल डालने के बाद लकड़ी के चम्मच का सिरा उसमें हल्का-सा डुबो सकते हैं। अगर चम्मच के आसपास छोटे बुलबुले बनने लगें तो तेल गर्म हो चुका है और खाना पकाने के लिए तैयार हो सकता है। फ्रिज से निकले सख्त मक्खन को जल्दी नरम करने के लिए उसे छोटे-छोटे टुकड़ों में काटकर प्लेट में फैला दें। कमरे के तापमान के संपर्क में ज्यादा हिस्सा आने से मक्खन जल्दी नरम हो सकता है। वहीं लेट्यूस या अन्य कुछ पत्तेदार सब्जियां अगर मुरझा गई हों तो उन्हें कुछ मिनट बर्फ मिले ठंडे पानी में रखा जा सकता है। इसके बाद पानी अच्छी तरह निकालने पर पत्तियों की कुरकुराहट वापस लाने में मदद मिल सकती है।

    बादाम, काजू और किशमिश जैसे सूखे मेवों को किसी डिश में डालने से पहले हल्का भूनने से उनका स्वाद और खुशबू उभर सकती है। बादाम और काजू को बिना ज्यादा तेल के धीमी से मध्यम आंच पर कुछ मिनट रोस्ट किया जा सकता है। इन्हें जलने से बचाने के लिए लगातार ध्यान रखना जरूरी है। इसी तरह उबले आलू को जल्दी ठंडा करने के लिए उन्हें उबालने के बाद थोड़ी देर ठंडे पानी में रखा जा सकता है। इससे आलू जल्दी ठंडे हो सकते हैं और उनका छिलका उतारना भी आसान हो सकता है। शहद में क्रिस्टल बनने के कारण अगर वह गाढ़ा या जमा हुआ दिखाई दे तो बोतल को कुछ मिनट गुनगुने पानी में रखा जा सकता है। इससे शहद फिर से पतला हो सकता है। इस दौरान पानी बहुत ज्यादा गर्म नहीं होना चाहिए और बोतल पूरी तरह बंद रखनी चाहिए।

    शहद, सिरप या किसी अन्य चिपचिपी सामग्री को चम्मच से निकालने में परेशानी हो तो चम्मच पर बहुत हल्की-सी तेल की परत लगाई जा सकती है। इससे सामग्री चम्मच से आसानी से निकल सकती है। भुट्टे के दाने निकालते समय उन्हें एक गहरे कटोरे के बीच सीधा खड़ा करके ऊपर से नीचे की ओर चाकू चलाने से दाने सीधे कटोरे में गिर सकते हैं और रसोई में कम बिखरेंगे। तड़का लगाते समय भी तापमान का ध्यान रखना जरूरी है। तेल या घी को जरूरत से ज्यादा गर्म न करें। पहले साबुत मसाले डालें और उनके चटकने के बाद आंच को जरूरत के मुताबिक कम करें। हल्दी, लाल मिर्च और हींग जैसे पिसे मसाले तेज गर्मी में जल्दी जल सकते हैं, इसलिए इन्हें सही समय पर डालना जरूरी है।

    दाल या सब्जी तैयार होने के बाद ऊपर से थोड़ा ताजा घी या सही मसालों का तड़का डालने से उसकी खुशबू और स्वाद बढ़ सकता है। तड़का तैयार करते समय मसालों को जलने से बचाना जरूरी है और तैयार तड़का तुरंत डिश में डालना चाहिए। इस तरह रसोई के रोजमर्रा के कई काम कुछ छोटी और आसान तरकीबों से ज्यादा सुविधाजनक बनाए जा सकते हैं। सही समय, तापमान और खाना तैयार करने के तरीके पर ध्यान देकर कुकिंग में लगने वाली मेहनत को कम किया जा सकता है और बिना महंगे उपकरणों के भी रोज की रसोई को आसान बनाया जा सकता है।

  • Skin Care Tips: चावल का पानी चेहरे पर लगाने से मिल सकती है त्वचा को ताजगी जानिए Rice Water के इस्तेमाल का आसान तरीका

    Skin Care Tips: चावल का पानी चेहरे पर लगाने से मिल सकती है त्वचा को ताजगी जानिए Rice Water के इस्तेमाल का आसान तरीका


    नई दिल्ली। चावल का पानी यानी Rice Water लंबे समय से घरेलू सौंदर्य देखभाल का हिस्सा रहा है। कई लोग इसे त्वचा को साफ और तरोताजा रखने के लिए इस्तेमाल करते हैं। चावल को भिगोने या उबालने के बाद बचने वाले पानी में स्टार्च और कुछ अन्य यौगिक मौजूद होते हैं जिन्हें पारंपरिक रूप से त्वचा की देखभाल से जोड़ा जाता है। हालांकि चावल के पानी को किसी त्वचा रोग का इलाज नहीं माना जाना चाहिए। सामान्य स्किन केयर रूटीन में इसे शामिल करने से पहले अपनी त्वचा के प्रकार और संवेदनशीलता को समझना जरूरी है।

    Rice Water तैयार करने का सबसे आसान तरीका चावल को पानी में भिगोना है। इसके लिए थोड़ी मात्रा में चावल लेकर उसे साफ पानी से धो लें और फिर पर्याप्त पानी में कुछ समय के लिए भिगोकर रखें। इसके बाद पानी को छानकर साफ बोतल में रखा जा सकता है। इसे चेहरे पर इस्तेमाल करने से पहले यह सुनिश्चित करें कि पानी साफ हो और लंबे समय तक कमरे के तापमान पर रखा हुआ न हो। ताजा तैयार किया गया पानी इस्तेमाल करना अधिक उचित है क्योंकि घरेलू तरीके से तैयार किए गए मिश्रण में दूषित होने की संभावना हो सकती है।

    चेहरे पर Rice Water इस्तेमाल करने के लिए सबसे पहले त्वचा को हल्के फेस वॉश से साफ करें। इसके बाद कॉटन पैड या साफ हाथों की मदद से थोड़ी मात्रा में चावल का पानी चेहरे पर लगाया जा सकता है। इसे कुछ समय त्वचा पर रहने देने के बाद सामान्य पानी से चेहरा धो सकते हैं। यदि त्वचा पर किसी तरह की जलन या असहजता महसूस हो तो तुरंत इस्तेमाल बंद कर देना चाहिए। इसके बाद त्वचा की जरूरत के अनुसार मॉइस्चराइजर लगाया जा सकता है।

    Rice Water को लेकर सोशल मीडिया पर त्वचा की रंगत निखारने और दाग धब्बे कम करने जैसे कई दावे किए जाते हैं लेकिन इन दावों के लिए मजबूत वैज्ञानिक प्रमाण सीमित हैं। इसलिए इसे तुरंत गोरा करने या पिगमेंटेशन पूरी तरह खत्म करने वाले उपाय के रूप में देखना सही नहीं होगा। त्वचा की देखभाल के लिए रोजाना सनस्क्रीन लगाना पर्याप्त मॉइस्चराइजिंग करना और त्वचा को साफ रखना ज्यादा महत्वपूर्ण है।

    अगर आपकी त्वचा संवेदनशील है तो चेहरे पर Rice Water लगाने से पहले पैच टेस्ट करना बेहतर रहेगा। हाथ या कान के पीछे थोड़ी मात्रा लगाकर देखें और कुछ समय तक त्वचा की प्रतिक्रिया पर ध्यान दें। लालिमा खुजली जलन या सूजन दिखाई दे तो इसका इस्तेमाल न करें। सक्रिय मुहांसे घाव या किसी त्वचा संक्रमण की स्थिति में घरेलू नुस्खे आजमाने के बजाय त्वचा विशेषज्ञ से सलाह लेना बेहतर है।

    Rice Water को स्किन केयर रूटीन में शामिल करते समय स्वच्छता का भी ध्यान रखना चाहिए। इसे लंबे समय तक स्टोर करके रखने से बचें और गंध या रंग में बदलाव आने पर इस्तेमाल न करें। किसी भी घरेलू नुस्खे की तरह इसका असर हर व्यक्ति की त्वचा पर अलग हो सकता है। नियमित और संतुलित स्किन केयर के साथ पर्याप्त नींद पानी का सेवन पौष्टिक भोजन और धूप से बचाव भी त्वचा को स्वस्थ रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

    इस तरह Rice Water को त्वचा की सामान्य देखभाल के लिए एक आसान घरेलू विकल्प के तौर पर आजमाया जा सकता है लेकिन इसे किसी चमत्कारी ब्यूटी ट्रीटमेंट की तरह नहीं देखना चाहिए। सही तरीके से इस्तेमाल और सावधानी के साथ यह आपकी स्किन केयर रूटीन का एक छोटा हिस्सा बन सकता है।

  • गुल्की जोशी ने बताया फिटनेस और खूबसूरती का राज, डाइट-वर्कआउट के साथ मी टाइम को भी दिया महत्व

    गुल्की जोशी ने बताया फिटनेस और खूबसूरती का राज, डाइट-वर्कआउट के साथ मी टाइम को भी दिया महत्व

    नई दिल्ली । अभिनेत्री गुल्की जोशी इन दिनों एक शो में डॉ. सृष्टि अग्रवाल का किरदार निभा रही हैं। अपने फिट और आकर्षक लुक को बनाए रखने के लिए वह केवल एक्सरसाइज पर निर्भर नहीं रहतीं, बल्कि खान-पान, नींद, हाइड्रेशन और मानसिक सुकून को भी अपनी दिनचर्या का अहम हिस्सा मानती हैं। उनके मुताबिक फिटनेस और खूबसूरती के लिए किसी बेहद सख्त रूटीन की बजाय ऐसा संतुलित तरीका अपनाना जरूरी है, जिसे लंबे समय तक आसानी से जारी रखा जा सके।

    गुल्की जोशी सख्त डाइट के बजाय बैलेंस्ड और सस्टेनेबल डाइट को प्राथमिकता देती हैं। वह अपने खाने में पर्याप्त प्रोटीन, सब्जियां और फल शामिल करने की कोशिश करती हैं। घर का बना भोजन उनकी डाइट का महत्वपूर्ण हिस्सा है। शूटिंग के व्यस्त शेड्यूल के कारण कभी-कभी खाने का समय प्रभावित हो जाता है, लेकिन वह अपनी दिनचर्या को संतुलित रखने की कोशिश करती हैं।

    हाइड्रेशन पर भी वह खास ध्यान देती हैं। उनका मानना है कि किसी भी तरह के भोजन को पूरी तरह छोड़ने के बजाय संतुलन बनाए रखना बेहतर है। जंक और बहुत ज्यादा प्रोसेस्ड फूड को सीमित मात्रा में लेना उनकी प्राथमिकता है। उनके अनुसार डाइट ऐसी होनी चाहिए, जिसे बिना परेशानी और दबाव के लंबे समय तक फॉलो किया जा सके।

    वर्कआउट की बात करें तो गुल्की नियमित रूप से एक्सरसाइज करने की कोशिश करती हैं। हालांकि शूटिंग शेड्यूल के कारण उनके वर्कआउट रूटीन में बदलाव आता रहता है। वह ऐसे व्यायाम पसंद करती हैं, जिनमें स्ट्रेंथ, मोबिलिटी और कार्डियो का संतुलन बना रहे।

    गुल्की के लिए वॉकिंग भी फिटनेस रूटीन का महत्वपूर्ण हिस्सा है। अगर किसी दिन जिम जाना संभव नहीं हो पाता, तो वह पूरे दिन खुद को शारीरिक रूप से सक्रिय रखने की कोशिश करती हैं। उनके मुताबिक फिटनेस में सबसे महत्वपूर्ण चीज निरंतरता है। यानी किसी एक दिन बहुत ज्यादा एक्सरसाइज करने के बजाय नियमित रूप से एक्टिव रहना ज्यादा जरूरी है।

    मानसिक स्वास्थ्य और सुकून के लिए वह अपने लिए मी टाइम निकालना भी जरूरी मानती हैं। कभी कुछ समय शांत बैठना, फोन से दूरी बनाना या पसंदीदा लोगों के साथ वक्त बिताना उन्हें मानसिक रूप से बेहतर महसूस कराता है। वह कोशिश करती हैं कि तनाव को खुद पर हावी न होने दें और उन चीजों को लेकर ज्यादा परेशान न हों, जो उनके नियंत्रण में नहीं हैं।

    गुल्की के अनुसार सकारात्मक सोच एक दिन में विकसित होने वाली आदत नहीं है। इसके लिए रोज खुद को समझने और बेहतर महसूस करने की कोशिश करनी पड़ती है। उनके लिए मानसिक शांति भी फिटनेस और अच्छी लाइफस्टाइल का महत्वपूर्ण हिस्सा है।

    नींद को वह अपनी फिटनेस और ब्यूटी रूटीन का सबसे जरूरी हिस्सा मानती हैं। उनके मुताबिक पर्याप्त और अच्छी नींद का असर चेहरे की खूबसूरती पर भी दिखाई देता है। इसके साथ वह शरीर में पानी की पर्याप्त मात्रा बनाए रखने और बेसिक स्किन केयर में नियमितता पर ध्यान देती हैं।

    शूटिंग के दौरान लगातार मेकअप करना पड़ता है, इसलिए मेकअप को अच्छी तरह हटाना और त्वचा को साफ व मॉयश्चराइज रखना उनकी स्किन केयर रूटीन का हिस्सा है। वह जरूरत से ज्यादा नए प्रोडक्ट्स आजमाने के बजाय अपनी त्वचा के अनुकूल बेसिक प्रोडक्ट्स का इस्तेमाल करना पसंद करती हैं। उनका मानना है कि जब व्यक्ति अंदर से स्वस्थ और खुश महसूस करता है, तो उसका सकारात्मक असर चेहरे पर भी नजर आता है।

  • चेहरे पर ताजा एलोवेरा जेल लगाने से पहले जानें जरूरी सावधानियां, वरना हो सकती है जलन और रैशेज की समस्या

    चेहरे पर ताजा एलोवेरा जेल लगाने से पहले जानें जरूरी सावधानियां, वरना हो सकती है जलन और रैशेज की समस्या

    नई दिल्ली । एलोवेरा जेल को त्वचा की देखभाल के लिए लंबे समय से इस्तेमाल किया जाता है। घर में लगे पौधे से ताजा जेल निकालकर चेहरे या बालों पर लगाने का चलन भी काफी आम है। लेकिन प्राकृतिक होने का मतलब यह नहीं है कि इसे बिना किसी सावधानी के सीधे त्वचा पर लगाया जाए। एलोवेरा की ताजी पत्ती काटने पर उससे निकलने वाला पीला पदार्थ त्वचा के लिए परेशानी पैदा कर सकता है।

    एलोवेरा की पत्ती के बाहरी हिस्से के पास पीले रंग का लेटेक्स पाया जाता है। इसमें एलोइन नामक घटक मौजूद होता है, जो कुछ लोगों की त्वचा में जलन, खुजली, लालिमा या चकत्ते जैसी समस्या पैदा कर सकता है। इसलिए पत्ती से जेल निकालने के बाद इसे तुरंत चेहरे पर लगाने के बजाय पहले पीले पदार्थ को पूरी तरह बाहर निकालना जरूरी है।

    इसके लिए ताजी पत्ती को पौधे से काटने के बाद करीब 20 से 30 मिनट तक किसी बर्तन में सीधा खड़ा करके रखा जा सकता है। इस दौरान पत्ती से निकलने वाला पीला पदार्थ बाहर निकल जाता है। इसके बाद पत्ती को साफ बहते पानी से अच्छी तरह धोना चाहिए। पत्ती के किनारों पर मौजूद कांटेदार हिस्से को भी सावधानी से हटा दें। इसके बाद अंदर मौजूद पारदर्शी जेल को निकाला जा सकता है।

    ताजा एलोवेरा जेल चेहरे पर लगाने से पहले पैच टेस्ट करना भी जरूरी है। इसके लिए जेल की थोड़ी मात्रा सीधे चेहरे पर लगाने के बजाय कोहनी या कान के पीछे त्वचा के छोटे हिस्से पर लगाएं। करीब 15 मिनट तक देखने के बाद त्वचा की प्रतिक्रिया पर ध्यान दें। अगर वहां जलन, लालिमा, खुजली या किसी तरह की परेशानी महसूस हो तो चेहरे पर इसका इस्तेमाल करने से बचना बेहतर है।

    एलोवेरा जेल को लंबे समय तक निकालकर रखने से भी बचना चाहिए। ताजा जेल में आमतौर पर किसी तरह का प्रिजर्वेटिव नहीं होता। हवा और बैक्टीरिया के संपर्क में आने के कारण इसे लंबे समय तक रखने पर इसके खराब होने की आशंका बढ़ सकती है। इसलिए जरूरत के मुताबिक ही जेल निकालना बेहतर है।

    पुराने या खराब हो चुके जेल को त्वचा पर लगाने से जलन, रैशेज या अन्य त्वचा संबंधी परेशानी हो सकती है। इसी तरह चेहरे पर जरूरत से ज्यादा एलोवेरा जेल लगाने से भी बचना चाहिए। बार-बार या अत्यधिक इस्तेमाल से कुछ लोगों की त्वचा रूखी या संवेदनशील हो सकती है।

    अगर चेहरे पर पहले से कट, घाव या सक्रिय मुंहासे हैं, तो ऐसे हिस्सों पर ताजा एलोवेरा जेल लगाने से सावधानी बरतनी चाहिए। संवेदनशील त्वचा वाले लोगों को विशेष रूप से पैच टेस्ट को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।

    एलोवेरा का इस्तेमाल करते समय साफ-सफाई, सही मात्रा और उचित प्रक्रिया का ध्यान रखना जरूरी है। प्राकृतिक उत्पाद होने के बावजूद हर व्यक्ति की त्वचा पर इसका असर एक जैसा नहीं होता। किसी भी तरह की जलन या एलर्जी दिखाई देने पर इस्तेमाल रोक देना चाहिए।

  • PCOS से बिगड़ सकती है नींद, तेज खर्राटे और सुबह की थकान जैसे संकेतों को बिल्कुल नजरअंदाज न करें

    PCOS से बिगड़ सकती है नींद, तेज खर्राटे और सुबह की थकान जैसे संकेतों को बिल्कुल नजरअंदाज न करें

    नई दिल्ली ।पॉलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम यानी पीसीओएस को आमतौर पर अनियमित पीरियड्स, वजन बढ़ने और हार्मोनल असंतुलन जैसी समस्याओं से जोड़कर देखा जाता है। हालांकि, इसका संबंध नींद से जुड़ी परेशानियों से भी हो सकता है। पीसीओएस से जूझ रही महिलाओं में अगर तेज खर्राटे, रात में बार-बार नींद खुलना, सोते समय सांस लेने में परेशानी या पर्याप्त नींद के बावजूद सुबह थकान बनी रहती है, तो इन संकेतों को सामान्य थकान मानकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।

    इन लक्षणों का संबंध स्लीप एपनिया जैसी समस्या से हो सकता है। पीसीओएस से पीड़ित महिलाओं में ऑब्सट्रक्टिव स्लीप एपनिया का जोखिम सामान्य महिलाओं की तुलना में अधिक बताया गया है। इस स्थिति में सोते समय सांस की नली कुछ समय के लिए संकरी या बंद हो सकती है। इससे सांस लेने में रुकावट आती है और शरीर में ऑक्सीजन का स्तर प्रभावित हो सकता है।

    जब नींद के दौरान सांस लेने में रुकावट आती है, तो शरीर सामान्य सांस बहाल करने के लिए बार-बार जागने की स्थिति में पहुंच सकता है। इसका असर पूरी नींद की गुणवत्ता पर पड़ता है। कई बार व्यक्ति को यह महसूस भी नहीं होता कि रात में उसकी नींद बार-बार टूट रही है।

    पीसीओएस और अनिद्रा के बीच भी संबंध देखा जाता है। पीसीओएस में इंसुलिन रेजिस्टेंस, वजन बढ़ना और हार्मोनल असंतुलन जैसी समस्याएं आम हो सकती हैं। दूसरी ओर, लंबे समय तक नींद की कमी या स्लीप एपनिया जैसी स्थिति शरीर में तनाव हार्मोन और इंसुलिन रेजिस्टेंस को प्रभावित कर सकती है। इस तरह दोनों स्थितियां एक-दूसरे पर असर डाल सकती हैं।

    नींद लगातार पूरी न होने या बार-बार बाधित होने से थकान, चिड़चिड़ापन, ध्यान केंद्रित करने में परेशानी और मूड में बदलाव जैसी समस्याएं भी हो सकती हैं। जिन महिलाओं को पहले से अनियमित पीरियड्स, वजन बढ़ने या इंसुलिन रेजिस्टेंस जैसी पीसीओएस से जुड़ी परेशानियां हैं, उनके लिए खराब नींद इन समस्याओं को और चुनौतीपूर्ण बना सकती है।

    हालांकि, केवल खर्राटे आने का मतलब स्लीप एपनिया होना नहीं है। लेकिन अगर खर्राटे बहुत तेज और नियमित हैं, सोते समय सांस रुकने जैसा महसूस होता है, रात में घुटन होती है या सांस लेने की गति बढ़ जाती है, तो इन संकेतों पर ध्यान देना चाहिए। सुबह उठने के बाद सिरदर्द रहना या पर्याप्त नींद के बावजूद दिनभर नींद और थकान महसूस होना भी डॉक्टर से सलाह लेने का कारण हो सकता है।

    पीसीओएस को मैनेज करने के लिए केवल पीरियड्स को नियमित करने या वजन कम करने पर ध्यान देना पर्याप्त नहीं माना जाता। संतुलित आहार, नियमित शारीरिक गतिविधि, पर्याप्त नींद और तनाव को बेहतर तरीके से संभालना भी महत्वपूर्ण है।

    अगर किसी महिला में स्लीप एपनिया से जुड़े लक्षण दिखाई देते हैं, तो डॉक्टर स्थिति के अनुसार आगे की जांच और उपचार की सलाह दे सकते हैं। नींद शरीर के हार्मोनल, मेटाबॉलिक और समग्र स्वास्थ्य से जुड़ी महत्वपूर्ण प्रक्रिया है, इसलिए लगातार होने वाली नींद की समस्या को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।

    पीसीओएस लंबे समय तक बनी रहने वाली स्थिति हो सकती है, लेकिन सही जीवनशैली और चिकित्सकीय देखभाल के जरिए इसके प्रभावों को नियंत्रित करने में मदद मिल सकती है। इसलिए शरीर में होने वाले बदलावों और नींद से जुड़े लगातार बने रहने वाले संकेतों पर ध्यान देना जरूरी है।

  • Skin Care With Curd: चेहरे पर दही लगाने से मिल सकते हैं ये फायदे निखरी त्वचा के लिए ऐसे करें इस्तेमाल

    Skin Care With Curd: चेहरे पर दही लगाने से मिल सकते हैं ये फायदे निखरी त्वचा के लिए ऐसे करें इस्तेमाल


    नई दिल्ली। दही सिर्फ खाने के स्वाद को बढ़ाने वाला खाद्य पदार्थ नहीं है बल्कि इसका इस्तेमाल त्वचा की देखभाल के लिए भी किया जाता है। दही में लैक्टिक एसिड पाया जाता है जो त्वचा की ऊपरी सतह पर जमा मृत कोशिकाओं को हटाने में मदद कर सकता है। इसके अलावा दही में मौजूद प्रोटीन और अन्य पोषक तत्व त्वचा को मुलायम बनाए रखने में मदद कर सकते हैं। यही वजह है कि घरेलू स्किन केयर में दही का इस्तेमाल लंबे समय से किया जाता रहा है। हालांकि हर व्यक्ति की त्वचा अलग होती है इसलिए चेहरे पर कोई भी घरेलू नुस्खा लगाने से पहले सावधानी रखना जरूरी है।

    अगर त्वचा रूखी और बेजान नजर आती है तो सादा दही चेहरे पर लगाने का आसान तरीका हो सकता है। इसके लिए ताजा और बिना स्वाद वाला दही लें और उसे साफ चेहरे पर हल्की परत में लगाएं। कुछ देर बाद सामान्य पानी से चेहरा धो लें। दही त्वचा को नमी देने में मदद कर सकता है और त्वचा को मुलायम महसूस करा सकता है। इसे चेहरे पर जोर से रगड़ने से बचना चाहिए क्योंकि ज्यादा रगड़ने से संवेदनशील त्वचा में जलन हो सकती है।

    दही को शहद के साथ मिलाकर भी फेस पैक की तरह इस्तेमाल किया जाता है। शहद त्वचा को मॉइस्चराइज करने में मदद कर सकता है जबकि दही त्वचा को मुलायम रखने में सहायक हो सकता है। दोनों को मिलाकर चेहरे पर लगाने से त्वचा अधिक हाइड्रेटेड महसूस हो सकती है। इस तरह के घरेलू फेस पैक को आंखों के आसपास की त्वचा पर लगाने से बचना चाहिए।

    अगर त्वचा सामान्य है और हल्की डल नजर आ रही है तो दही में बेसन मिलाकर फेस पैक बनाया जा सकता है। बेसन त्वचा से अतिरिक्त तेल और गंदगी हटाने में मदद कर सकता है जबकि दही त्वचा को मुलायम बनाए रखने में सहायक हो सकता है। इस मिश्रण को चेहरे पर लगाकर सूखने के लिए बहुत देर तक न छोड़ें। हल्के हाथों से पानी की मदद से इसे साफ करना बेहतर रहेगा।

    दही का इस्तेमाल करते समय कुछ जरूरी सावधानियां भी रखनी चाहिए। सबसे पहले चेहरे पर लगाने से पहले पैच टेस्ट करना बेहतर है। इसके लिए मिश्रण की थोड़ी मात्रा त्वचा के छोटे हिस्से पर लगाकर देखें। अगर लालिमा खुजली जलन या किसी तरह की परेशानी महसूस हो तो इसे चेहरे पर इस्तेमाल न करें। बहुत संवेदनशील त्वचा वाले लोगों को विशेष सावधानी बरतनी चाहिए।

    अगर चेहरे पर सक्रिय मुंहासे घाव एलर्जी या त्वचा संबंधी कोई समस्या है तो घरेलू नुस्खों के बजाय त्वचा विशेषज्ञ की सलाह लेना बेहतर है। दही को चेहरे पर लगाने से तुरंत कोई चमत्कारी बदलाव होने की उम्मीद नहीं करनी चाहिए। अच्छी त्वचा के लिए पर्याप्त पानी पीना संतुलित आहार लेना पर्याप्त नींद लेना और नियमित रूप से त्वचा की सफाई करना भी जरूरी है।

    कुल मिलाकर दही को घरेलू स्किन केयर रूटीन में शामिल किया जा सकता है। इसके इस्तेमाल से त्वचा को मुलायम और नमीयुक्त महसूस कराने में मदद मिल सकती है। लेकिन हर त्वचा पर इसका असर एक जैसा हो यह जरूरी नहीं है। इसलिए अपनी त्वचा की प्रकृति को ध्यान में रखते हुए इसका इस्तेमाल करें और किसी भी तरह की जलन या एलर्जी होने पर तुरंत उपयोग बंद कर दें।

  • बारिश में बार बार पड़ रहे बीमार तो बदलें अपनी दिनचर्या खानपान से सफाई तक इन बातों का रखें ध्यान

    बारिश में बार बार पड़ रहे बीमार तो बदलें अपनी दिनचर्या खानपान से सफाई तक इन बातों का रखें ध्यान


    नई दिल्ली। बारिश का मौसम गर्मी से राहत जरूर देता है लेकिन इस दौरान नमी बढ़ने के कारण कई तरह के संक्रमण और मौसमी बीमारियों का खतरा भी बढ़ सकता है। जगह जगह पानी जमा होने से मच्छरों की संख्या बढ़ सकती है और दूषित पानी या अस्वच्छ भोजन से पेट संबंधी परेशानी हो सकती है। ऐसे में बरसात के मौसम में सेहत का ध्यान रखने के लिए रोजमर्रा की कुछ जरूरी आदतों पर विशेष ध्यान देना चाहिए। थोड़ी सी सावधानी अपनाकर मौसम से जुड़ी कई परेशानियों से बचने में मदद मिल सकती है।

    बारिश के मौसम में सबसे पहले साफ पानी पीने का ध्यान रखें। कोशिश करें कि पीने के लिए साफ और सुरक्षित पानी का ही इस्तेमाल किया जाए। बाहर से आने के बाद हाथों को साबुन से अच्छी तरह धोना भी जरूरी है। खाना खाने से पहले और शौचालय के इस्तेमाल के बाद हाथों की सफाई संक्रमण से बचाव में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। बच्चों को भी हाथ धोने की सही आदत जरूर सिखाएं।

    बरसात में खानपान पर विशेष ध्यान देना चाहिए। कटे हुए फल और खुले में रखे खाद्य पदार्थों से बचना बेहतर होता है क्योंकि इनमें गंदगी और कीटाणुओं का खतरा बढ़ सकता है। भोजन को अच्छी तरह पकाकर खाना चाहिए और कोशिश करनी चाहिए कि ताजा खाना ही खाया जाए। बहुत ज्यादा तला भुना और मसालेदार भोजन करने से कुछ लोगों को पाचन संबंधी परेशानी हो सकती है इसलिए संतुलित भोजन को प्राथमिकता दें।

    मच्छरों से बचाव भी बरसात में बेहद जरूरी है। घर के आसपास पानी जमा न होने दें। कूलर गमले बाल्टी और अन्य जगहों पर जमा पानी को नियमित रूप से साफ करें। सोते समय मच्छरदानी का इस्तेमाल किया जा सकता है। जरूरत के अनुसार घर में मच्छर भगाने वाले उपाय अपनाएं। अगर किसी क्षेत्र में डेंगू या मलेरिया का प्रकोप हो तो स्थानीय स्वास्थ्य विभाग की सलाह का पालन करना भी जरूरी है।

    बारिश में भीगे कपड़ों को लंबे समय तक शरीर पर न रखें। बाहर से घर लौटने के बाद गीले कपड़े बदलकर शरीर को अच्छी तरह सुखा लें। पैरों को भी साफ और सूखा रखना जरूरी है क्योंकि लंबे समय तक नमी रहने से त्वचा संबंधी परेशानी हो सकती है। बारिश में बाहर निकलते समय मौसम के अनुसार छाता या रेनकोट साथ रखना उपयोगी हो सकता है।

    इस मौसम में घर की सफाई पर भी ध्यान दें। रसोई और बाथरूम जैसी जगहों पर नमी और गंदगी जमा न होने दें। घर में पर्याप्त हवा और रोशनी आने दें। फफूंद दिखाई देने पर उसकी सफाई करें क्योंकि कुछ लोगों में इससे एलर्जी या सांस संबंधी परेशानी बढ़ सकती है।

    बरसात में पर्याप्त नींद और नियमित शारीरिक गतिविधि भी जरूरी है। मौसम खराब होने पर घर के अंदर हल्की एक्सरसाइज या योग किया जा सकता है। शरीर को पर्याप्त आराम मिलने से रोजमर्रा के काम करने में ऊर्जा बनी रहती है। हालांकि किसी भी व्यक्ति को बुखार लगातार खांसी सांस लेने में परेशानी उल्टी दस्त या शरीर में असामान्य कमजोरी जैसे लक्षण दिखाई दें तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। ऐसी स्थिति में डॉक्टर से सलाह लेना बेहतर है।

    कुल मिलाकर बरसात में स्वस्थ रहने के लिए साफ पानी सुरक्षित भोजन व्यक्तिगत स्वच्छता मच्छरों से बचाव और घर की साफ सफाई पर ध्यान देना जरूरी है। मौसम का आनंद लेते हुए अगर इन छोटी छोटी बातों को अपनी दिनचर्या का हिस्सा बना लिया जाए तो संक्रमण और मौसमी परेशानियों से बचाव में काफी मदद मिल सकती है।

  • उदयपुर घूमने का बना रहे हैं प्लान तो ये जगहें जरूर देखें झीलों महलों और इतिहास से सजा है शहर

    उदयपुर घूमने का बना रहे हैं प्लान तो ये जगहें जरूर देखें झीलों महलों और इतिहास से सजा है शहर


    नई दिल्ली। राजस्थान का उदयपुर अपनी खूबसूरत झीलों राजसी महलों और ऐतिहासिक विरासत के कारण देशभर के पर्यटकों के बीच खास पहचान रखता है। अरावली की पहाड़ियों से घिरा यह शहर अपनी प्राकृतिक खूबसूरती और शाही वास्तुकला के लिए जाना जाता है। अगर आप किसी ऐसी जगह घूमने का प्लान बना रहे हैं जहां इतिहास संस्कृति प्रकृति और सुकून एक साथ देखने को मिले तो उदयपुर एक अच्छा विकल्प हो सकता है। यहां परिवार दोस्तों या पार्टनर के साथ अलग अलग तरह की यात्रा का अनुभव लिया जा सकता है।

    उदयपुर की यात्रा में सबसे पहले सिटी पैलेस को शामिल किया जा सकता है। पिछोला झील के किनारे स्थित यह विशाल परिसर राजस्थानी वास्तुकला की झलक दिखाता है। महल के अलग अलग हिस्सों में खूबसूरत नक्काशी पुराने भवन और राजसी सजावट देखने को मिलती है। यहां से पिछोला झील और आसपास के क्षेत्र का खूबसूरत नजारा भी दिखाई देता है। इतिहास और वास्तुकला में रुचि रखने वाले लोगों के लिए यह जगह खास आकर्षण हो सकती है।

    पिछोला झील उदयपुर की पहचान से जुड़ी प्रमुख जगहों में शामिल है। झील में नाव की सवारी करते हुए आसपास के महलों और पहाड़ियों का दृश्य देखा जा सकता है। शाम के समय यहां का वातावरण बेहद खूबसूरत नजर आता है। नाव की सवारी के लिए मौसम और स्थानीय नियमों के अनुसार उपलब्ध सेवाओं की जानकारी पहले लेना बेहतर रहता है।

    उदयपुर में फतेहसागर झील भी पर्यटकों को आकर्षित करती है। झील के आसपास का क्षेत्र घूमने और कुछ समय शांत वातावरण में बिताने के लिए पसंद किया जाता है। यहां आसपास की हरियाली और अरावली की पहाड़ियों का दृश्य यात्रा को खास बना सकता है। सुबह या शाम के समय यहां घूमना कई लोगों को पसंद आता है।

    सज्जनगढ़ पैलेस जिसे मानसून पैलेस के नाम से भी जाना जाता है उदयपुर की एक और प्रमुख जगह है। ऊंचाई पर स्थित होने के कारण यहां से शहर और आसपास की झीलों का विस्तृत दृश्य देखा जा सकता है। सूर्यास्त के समय इस क्षेत्र का नजारा खास आकर्षण बन सकता है। हालांकि यहां जाने से पहले प्रवेश समय और स्थानीय परिवहन की जानकारी जांच लेना जरूरी है।

    अगर आप प्रकृति और वन्यजीवों में रुचि रखते हैं तो सज्जनगढ़ वन्यजीव अभयारण्य भी यात्रा में शामिल किया जा सकता है। इसके अलावा सहेलियों की बाड़ी अपनी हरियाली फव्वारों और ऐतिहासिक वातावरण के लिए प्रसिद्ध है। यह जगह शांत समय बिताने और तस्वीरें लेने के लिए लोकप्रिय है।

    उदयपुर की यात्रा केवल पर्यटन स्थलों तक सीमित नहीं है। शहर के स्थानीय बाजारों में राजस्थानी हस्तशिल्प कपड़े आभूषण सजावटी सामान और पारंपरिक वस्तुएं भी देखी जा सकती हैं। राजस्थान के पारंपरिक भोजन का स्वाद लेना भी यात्रा का हिस्सा बन सकता है। दाल बाटी चूरमा और अन्य स्थानीय व्यंजनों का आनंद कई पर्यटक लेते हैं।

    उदयपुर घूमने का सही समय चुनना भी जरूरी है। मौसम अपेक्षाकृत सुहावना हो तो शहर के प्रमुख पर्यटन स्थलों को आराम से देखा जा सकता है। यात्रा से पहले होटल परिवहन प्रवेश शुल्क और पर्यटन स्थलों के खुलने के समय की जानकारी जांच लेना बेहतर रहेगा। इस तरह थोड़ी सी योजना के साथ उदयपुर की यात्रा को आरामदायक और यादगार बनाया जा सकता है। झीलों महलों पहाड़ियों और राजस्थानी संस्कृति का मेल इस शहर को खास पर्यटन अनुभव देता है।

  • किचन के कपड़े से बदबू नहीं जा रही तो अपनाएं ये आसान उपाय, नमी और तेल की गंध होगी कम

    किचन के कपड़े से बदबू नहीं जा रही तो अपनाएं ये आसान उपाय, नमी और तेल की गंध होगी कम

    नई दिल्ली ।रसोई में बर्तन पोंछने, गैस के आसपास गिरे पानी या तेल को साफ करने और किचन की अलग-अलग सतहों को पोंछने के लिए कपड़े का इस्तेमाल रोज किया जाता है। लगातार इस्तेमाल के कारण कई बार कपड़े में ऐसी बदबू आने लगती है, जो बार-बार धोने के बाद भी पूरी तरह खत्म नहीं होती। कपड़ा देखने में साफ हो सकता है, लेकिन उसमें बासी या तेल जैसी गंध बनी रह सकती है।

    इस समस्या की एक वजह कपड़े को इस्तेमाल करने और धोने का तरीका भी हो सकता है। केवल ज्यादा डिटर्जेंट डालने या तेज खुशबू वाले प्रोडक्ट का इस्तेमाल करने से बदबू की असली वजह खत्म नहीं होती। कुछ आसान आदतों में बदलाव करके किचन के कपड़े को साफ और गंधमुक्त रखने में मदद मिल सकती है।

    इस्तेमाल के बाद गीले कपड़े को तुरंत बंद जगह में रखने से बचना चाहिए। अगर कपड़े को बिना सुखाए टोकरी, बैग या किसी बंद स्थान में डाल दिया जाए, तो उसमें नमी बनी रहती है। ऐसी स्थिति बदबू पैदा करने वाले सूक्ष्मजीवों के बढ़ने के लिए अनुकूल हो सकती है।

    इसलिए इस्तेमाल के बाद कपड़े को अच्छी तरह फैलाकर सुखाना जरूरी है। इसे रसोई में किसी हवादार जगह पर लटकाया जा सकता है। ओवन के हैंडल या छोटे ड्राइंग रैक जैसी जगह का भी इस्तेमाल किया जा सकता है, बशर्ते कपड़ा वहां अच्छी तरह सूख सके। गीले कपड़े को पूरी तरह सूखने से पहले बंद स्थान पर रखने से बचना चाहिए।

    एक ही किचन कपड़े को लगातार कई दिनों तक इस्तेमाल करने से भी समस्या बढ़ सकती है। खाना बनाने के दौरान कपड़े में तेल, खाने के छोटे कण और नमी जमा होती रहती है। समय के साथ इन्हें पूरी तरह साफ करना मुश्किल हो सकता है। इसलिए किचन के कपड़े नियमित रूप से बदलना बेहतर तरीका है। रोज इस्तेमाल होने वाले कपड़े को रोज बदलने की आदत रखी जा सकती है।

    इसके लिए घर में कई किचन कपड़े रखना उपयोगी हो सकता है। इस्तेमाल किया हुआ कपड़ा धोने के लिए अलग रखा जा सकता है और उसकी जगह साफ कपड़ा इस्तेमाल किया जा सकता है। इससे एक ही कपड़े पर लगातार गंदगी और नमी जमा होने की स्थिति कम होगी।

    बदबू आने पर कपड़े को सिर्फ पानी से धोना पर्याप्त नहीं हो सकता। किचन में इस्तेमाल होने वाले कपड़ों की नियमित और अच्छी तरह धुलाई जरूरी है। कपड़ों की सफाई के लिए डिटर्जेंट का इस्तेमाल करते समय भी उसकी जरूरत से ज्यादा मात्रा नहीं डालनी चाहिए। ज्यादा डिटर्जेंट का मतलब हमेशा ज्यादा सफाई नहीं होता। एंजाइम वाले डिटर्जेंट गंदगी और दाग को हटाने में मदद कर सकते हैं।

    बदबू को केवल तेज खुशबू वाले उत्पाद से ढकने के बजाय उसकी वजह दूर करना जरूरी है। जरूरत पड़ने पर धोने के दौरान बेकिंग सोडा का इस्तेमाल किया जा सकता है या कपड़े को सिरके में कम से कम 30 मिनट तक भिगोया जा सकता है। हालांकि, ऐसे किसी भी घरेलू उपाय को अपनाने से पहले कपड़े के फैब्रिक और केयर लेबल की जानकारी जरूर देखनी चाहिए।

    किचन के कपड़ों को दूसरे घरेलू कपड़ों से अलग रखना भी बेहतर है। इनमें तेल, खाने के अवशेष और अन्य गंदगी हो सकती है। इसलिए इन्हें निजी कपड़ों के साथ एक ही टोकरी में रखने से बचना चाहिए। अलग टोकरी या बैग रखने से किचन के गंदे कपड़ों को अलग रखना और समय पर धोना आसान हो जाता है।

  • यात्रा पर निकलने से पहले भूलकर भी न छोड़ें ये जरूरी तैयारी इन आसान टिप्स से सफर बनेगा आरामदायक

    यात्रा पर निकलने से पहले भूलकर भी न छोड़ें ये जरूरी तैयारी इन आसान टिप्स से सफर बनेगा आरामदायक


    नई दिल्ली। यात्रा पर निकलना हर किसी के लिए उत्साह से भरा होता है लेकिन सफर को यादगार और आरामदायक बनाने के लिए सिर्फ टिकट और होटल की बुकिंग कर लेना ही पर्याप्त नहीं है। घर से निकलने से पहले कुछ जरूरी तैयारियां कर लेना बेहद काम आता है। चाहे यात्रा कुछ दिनों की हो या लंबी ट्रिप की हो यदि पहले से सही प्लानिंग की जाए तो रास्ते में आने वाली कई परेशानियों से बचा जा सकता है। सबसे पहले यात्रा से जुड़े जरूरी दस्तावेजों की जांच करनी चाहिए। टिकट होटल की बुकिंग पहचान पत्र और जरूरत पड़ने पर पासपोर्ट वीजा जैसे दस्तावेज सुरक्षित रखने चाहिए। डिजिटल कॉपी फोन या ईमेल में रखना भी उपयोगी हो सकता है।

    यात्रा शुरू करने से पहले जिस जगह जाना है वहां के मौसम और स्थानीय परिस्थितियों की जानकारी लेना भी जरूरी है। मौसम के अनुसार कपड़े और जरूरी सामान पैक करने से सफर आसान हो जाता है। ठंडे स्थान पर जा रहे हैं तो गर्म कपड़े और जरूरी दवाएं साथ रखें जबकि गर्म या बारिश वाले इलाके के लिए उसी हिसाब से सामान तैयार करें। अचानक मौसम बदलने की स्थिति में काम आने वाली चीजों को भी बैग में जगह देनी चाहिए।

    सामान पैक करते समय जरूरत और वजन दोनों का ध्यान रखें। बहुत ज्यादा सामान लेकर चलने से यात्रा के दौरान परेशानी बढ़ सकती है। कपड़ों के साथ चार्जर पावर बैंक जरूरी दवाएं टूथब्रश और व्यक्तिगत इस्तेमाल की चीजें अलग से व्यवस्थित करना बेहतर रहता है। जरूरी सामान ऐसी जगह रखें जहां जरूरत पड़ने पर उसे तुरंत निकाला जा सके। यदि यात्रा हवाई जहाज या ट्रेन से है तो टिकट और पहचान संबंधी दस्तावेज आसानी से उपलब्ध रखें।

    पैसों को लेकर भी पहले से तैयारी कर लेना समझदारी है। यात्रा के लिए अनुमानित बजट तैयार करें और उसमें यात्रा होटल भोजन स्थानीय परिवहन और घूमने फिरने का खर्च शामिल करें। पूरी रकम एक ही जगह रखने के बजाय जरूरी धन को अलग अलग सुरक्षित स्थानों पर रखना बेहतर हो सकता है। डिजिटल पेमेंट की सुविधा उपयोगी है लेकिन नेटवर्क या तकनीकी समस्या की स्थिति के लिए कुछ वैकल्पिक व्यवस्था रखना भी काम आ सकता है।

    मोबाइल फोन को यात्रा से पहले पूरी तरह चार्ज कर लें और जरूरी नंबर सेव कर लें। होटल या यात्रा से जुड़े संपर्क नंबर के साथ परिवार के किसी सदस्य या करीबी व्यक्ति को अपनी यात्रा की जानकारी देना भी उपयोगी है। भारत सरकार के पर्यटन पोर्टल पर पर्यटकों के लिए आपातकालीन स्थिति में 112 राष्ट्रीय आपातकालीन नंबर और 1363 पर्यटन हेल्पलाइन नंबर दिए गए हैं।

    स्वास्थ्य से जुड़ी तैयारियों को भी नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। यदि कोई व्यक्ति नियमित दवा लेता है तो पर्याप्त दवा साथ रखनी चाहिए। लंबी यात्रा में पानी पीते रहना और जरूरत के अनुसार आराम करना जरूरी है। खाने पीने के मामले में भी सफाई का ध्यान रखना चाहिए। यात्रा के दौरान स्थानीय भोजन का आनंद लेते समय अपनी सहनशीलता और स्वास्थ्य का ध्यान रखना बेहतर है।

    यात्रा से पहले घर की सुरक्षा की तैयारी करना भी जरूरी है। बिजली के गैर जरूरी उपकरण बंद कर दें गैस की जांच कर लें और घर को लंबे समय के लिए खाली छोड़ रहे हैं तो किसी भरोसेमंद व्यक्ति को इसकी जानकारी दें। यात्रा की योजना और जरूरी दस्तावेजों की जानकारी परिवार के सदस्य के पास भी होनी चाहिए।

    इसके अलावा यात्रा के दौरान स्थानीय नियमों और पर्यावरण का ध्यान रखना भी जरूरी है। डिजिटल टिकट और दस्तावेजों का इस्तेमाल करने से कागज की जरूरत कम हो सकती है। पर्यटन स्थलों पर कचरा न फैलाना और सिंगल यूज प्लास्टिक से बचना जिम्मेदार यात्री की पहचान है।

    इस तरह यात्रा से पहले थोड़ी सी तैयारी सफर को काफी आसान बना सकती है। टिकट और दस्तावेजों की जांच से लेकर मौसम के अनुसार पैकिंग बजट स्वास्थ्य और सुरक्षा तक हर छोटी बात पर ध्यान देना चाहिए। जब तैयारी पहले से पूरी होती है तो सफर के दौरान अनावश्यक तनाव कम रहता है और यात्री अपने सफर का बेहतर तरीके से आनंद ले सकता है।