Category: Madhya Pradesh

  • MP: स्टेट हाईवे पर बना नया पुल पहली ही बारिश में धंसा…., MPRDC के घटिया निर्माण की खुली पोल!

    MP: स्टेट हाईवे पर बना नया पुल पहली ही बारिश में धंसा…., MPRDC के घटिया निर्माण की खुली पोल!


    रायसेन।
    मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) के रायसेन जिले (Raisen district) में मध्य प्रदेश रोड डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन (MPRDC) द्वारा कराए जा रहे निर्माण कार्यों के घटिया स्तर का एक और शर्मनाक मामला सामने आया है. स्टेट हाईवे 19 बरेली-पिपरिया मार्ग (State Highway 19: Bareilly-Pipariya Road) पर स्थित नयागांव के नए पुल की एप्रोच रोड पहली ही मूसलाधार बारिश में धंस गई हैं।

    निर्माण कार्य में भर्राशाही और लापरवाही का आलम यह है कि नए पुल से आवागमन बाधित होने के बाद नीचे बनाया गया डायवर्जन भी नाले के उफान में पूरी तरह डूब चुका है. इसके बावजूद मौके पर न तो सुरक्षा के कोई इंतजाम हैं और न ही प्रशासन ने रूट डायवर्ट कर वाहनों की आवाजाही को रोका है।


    जवान की मौत के बाद बना था नया पुल

    बता दें कि इसी नयागांव पुल पर 1 दिसंबर 2025 को मरम्मत कार्य के दौरान 50 साल पुराना जर्जर पुल अचानक ढह गया था. उस दर्दनाक हादसे में बाइक सवार सेना के एक जवान की असमय मौत हो गई थी।

    इस मुद्दे को मीडिया ने प्रमुखता से उठाया था, जिसके बाद MPRDC ने आनन-फानन में यहां नए पुल का निर्माण कराया था.लेकिन पहली ही बारिश ने पुल कंस्ट्रक्शन क्वालिटी, तकनीकी मजबूती और दावों की हवा निकाल दी है।

    उफनते नाले के बीच से वाहन निकालने को मजबूर लोग
    नया पुल धंसने और एप्रोच रोड कट जाने के कारण पुल पर वाहनों की आवाजाही बंद है. वहीं, नीचे बना कच्चा डायवर्जन मार्ग पानी में डूब चुका है. इसके बावजूद यात्री, बसें और बाइक सवार अपनी जान हथेली पर रखकर नाले के तेज बहाव के बीच से वाहन निकालने को मजबूर हैं।

    स्थानीय निवासियों का कहना है कि MPRDC के कराए जा रहे सभी कार्य बेहद निचले स्तर के साबित हो रहे हैं. अगर समय रहते प्रशासन ने कोई ठोस कदम नहीं उठाया या आवागमन को पूरी तरह सुरक्षित नहीं किया, तो यहां एक बार फिर 1 दिसंबर 2025 जैसी बड़ी त्रासदी दोहराई जा सकती है।

  • बारिश और बादलों का डबल अटैक शुक्रवार को कई राज्यों में भारी वर्षा की चेतावनी मौसम विभाग ने जारी किया अलर्ट

    बारिश और बादलों का डबल अटैक शुक्रवार को कई राज्यों में भारी वर्षा की चेतावनी मौसम विभाग ने जारी किया अलर्ट


    मध्यप्रदेश । देशभर में मानसून अब पूरी तरह सक्रिय हो चुका है और शुक्रवार को भी मौसम का मिजाज बदला हुआ रहने की संभावना है। भारतीय मौसम विभाग के अनुसार उत्तर मध्य पूर्व और पश्चिम भारत के कई हिस्सों में अच्छी बारिश देखने को मिल सकती है जबकि कुछ इलाकों में भारी से अति भारी वर्षा का अलर्ट जारी किया गया है। लगातार हो रही बारिश से नदियों और बांधों का जलस्तर बढ़ रहा है वहीं कई शहरों में जलभराव और यातायात प्रभावित होने की आशंका भी जताई गई है।

    मौसम विभाग के अनुसार मध्य प्रदेश राजस्थान उत्तर प्रदेश छत्तीसगढ़ बिहार झारखंड पश्चिम बंगाल ओडिशा और पूर्वोत्तर के कई राज्यों में शुक्रवार को तेज बारिश होने की संभावना है। कई स्थानों पर गरज चमक के साथ बिजली गिरने और तेज हवाएं चलने की भी आशंका है। ऐसे में लोगों को खुले स्थानों पर जाने से बचने और मौसम संबंधी सलाह का पालन करने की अपील की गई है।

    मध्य प्रदेश में लगातार सक्रिय मानसूनी सिस्टम के कारण कई जिलों में अच्छी बारिश का दौर जारी रह सकता है। भोपाल इंदौर उज्जैन जबलपुर सिवनी मंडला छिंदवाड़ा रायसेन नर्मदापुरम और आसपास के क्षेत्रों में कहीं कहीं भारी बारिश होने की संभावना है। लगातार वर्षा के चलते निचले इलाकों में जलभराव और ग्रामीण क्षेत्रों में संपर्क मार्ग प्रभावित हो सकते हैं। प्रशासन ने भी सतर्कता बरतने के निर्देश दिए हैं।

    उत्तर भारत में दिल्ली एनसीआर के साथ पश्चिमी उत्तर प्रदेश और हरियाणा में बादल छाए रहने के साथ हल्की से मध्यम बारिश हो सकती है। पंजाब और हिमाचल प्रदेश के कई इलाकों में भी बारिश की संभावना बनी हुई है। पहाड़ी राज्यों उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश में भूस्खलन और पहाड़ी रास्तों पर फिसलन का खतरा बना रह सकता है इसलिए यात्रियों को अतिरिक्त सावधानी बरतने की सलाह दी गई है।

    पूर्वी और पूर्वोत्तर भारत में भी मानसून सक्रिय रहेगा। बिहार झारखंड पश्चिम बंगाल असम मेघालय और अरुणाचल प्रदेश के कई हिस्सों में तेज बारिश का दौर जारी रह सकता है। वहीं दक्षिण भारत के केरल कर्नाटक तमिलनाडु और तेलंगाना के कुछ क्षेत्रों में भी गरज चमक के साथ वर्षा होने की संभावना है।

    मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि बंगाल की खाड़ी और अरब सागर से लगातार नमी मिलने के कारण अगले कुछ दिनों तक मानसून की गतिविधियां मजबूत बनी रहेंगी। इसके चलते कई राज्यों में सामान्य से अधिक बारिश दर्ज की जा सकती है। किसानों के लिए यह बारिश खरीफ फसलों के लिहाज से लाभदायक मानी जा रही है लेकिन अत्यधिक वर्षा वाले इलाकों में फसलों को नुकसान पहुंचने की आशंका भी बनी हुई है।

    विशेषज्ञों ने लोगों से अपील की है कि भारी बारिश के दौरान अनावश्यक यात्रा से बचें जलभराव वाले रास्तों पर वाहन चलाते समय सावधानी रखें और बिजली चमकने के दौरान खुले मैदानों तथा पेड़ों के नीचे खड़े न हों। स्थानीय प्रशासन और मौसम विभाग द्वारा जारी ताजा अपडेट पर नजर रखना भी जरूरी है ताकि किसी भी संभावित खतरे से समय रहते बचाव किया जा सके।

  • क्रिमिनल केस के बावजूद मिला भोपाल का वीआईपी थाना, टीआई के निलंबन के बाद पोस्टिंग सिस्टम पर उठे बड़े सवाल

    क्रिमिनल केस के बावजूद मिला भोपाल का वीआईपी थाना, टीआई के निलंबन के बाद पोस्टिंग सिस्टम पर उठे बड़े सवाल


    भोपाल । भोपाल के चर्चित अरेरा हिल्स थाना प्रभारी सुनील शर्मा के निलंबन के बाद अब केवल उनके खिलाफ लगे आरोप ही चर्चा का विषय नहीं हैं, बल्कि पुलिस विभाग की पोस्टिंग व्यवस्था भी सवालों के घेरे में आ गई है। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि सुनील शर्मा के खिलाफ पहले से एक आपराधिक मामला न्यायालय में लंबित है। इसके बावजूद उन्हें राजधानी भोपाल के सबसे महत्वपूर्ण और संवेदनशील थानों में गिने जाने वाले अरेरा हिल्स थाने का प्रभारी बनाया गया। इस खुलासे के बाद पुलिस मुख्यालय के दिशा-निर्देशों के पालन पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं।

    पूरा मामला तब सामने आया जब एक युवक ने पुलिस आयुक्त से शिकायत कर आरोप लगाया कि अरेरा हिल्स थाना प्रभारी सुनील शर्मा के उसकी पत्नी से अनैतिक संबंध हैं। शिकायत में यह भी कहा गया कि थाने में पदस्थ आरक्षक नंदकिशोर इस पूरे मामले में टीआई का सहयोग कर रहा था और महिला पर दबाव बनाने में उसकी भूमिका थी। शिकायत की प्रारंभिक जांच के बाद दोनों की भूमिका संदिग्ध पाए जाने पर पुलिस आयुक्त ने तत्काल प्रभाव से टीआई सुनील शर्मा और आरक्षक नंदकिशोर को निलंबित कर दिया।

    मामले की जांच के दौरान यह तथ्य भी सामने आया कि सुनील शर्मा के खिलाफ गुना कोतवाली में पहले से एक आपराधिक प्रकरण दर्ज है और यह मामला अभी न्यायालय में विचाराधीन है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार इस मामले की अगली सुनवाई 19 अगस्त 2026 को निर्धारित है। इसके बावजूद उन्हें भोपाल जैसे संवेदनशील जिले के वीआईपी थाने का प्रभार सौंपा गया, जिसने विभागीय प्रक्रिया और नियमों पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं।

    पुलिस मुख्यालय ने वर्षों पहले ही ऐसे मामलों को लेकर स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी किए थे। 15 अक्टूबर 2014 को जारी आदेश में कहा गया था कि जिन अधिकारियों या कर्मचारियों के खिलाफ आपराधिक मामले, विभागीय जांच, भ्रष्टाचार अथवा लोकायुक्त संबंधी प्रकरण लंबित हों, उन्हें थानों या अन्य संवेदनशील पदों पर पदस्थ नहीं किया जाएगा। इसके बाद 17 जून 2025 को भी पुलिस मुख्यालय ने सभी पुलिस आयुक्तों और जिला पुलिस अधीक्षकों को दोबारा निर्देश जारी कर कहा था कि जिन पुलिसकर्मियों के खिलाफ आपराधिक प्रकरण, नैतिक अधःपतन या अवैध निरोध जैसे गंभीर आरोप लंबित हों, उन्हें थानों, क्राइम ब्रांच या किसी महत्वपूर्ण कार्यालय में पदस्थ नहीं किया जाए।

    इन स्पष्ट निर्देशों के बावजूद सुनील शर्मा की नियुक्ति ने कई गंभीर प्रश्न खड़े कर दिए हैं। सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या पोस्टिंग से पहले उनके सेवा रिकॉर्ड और लंबित मामलों की जांच की गई थी। यदि जांच हुई थी तो नियमों के बावजूद उन्हें संवेदनशील जिम्मेदारी क्यों सौंपी गई। वहीं यदि जांच नहीं हुई तो यह प्रशासनिक प्रक्रिया में बड़ी चूक मानी जा सकती है।

    इस पूरे घटनाक्रम के बाद पुलिस विभाग की जवाबदेही पर भी बहस तेज हो गई है। अब यह सवाल उठ रहा है कि यदि पोस्टिंग नियमों के विपरीत हुई है तो क्या केवल संबंधित अधिकारी पर कार्रवाई होगी या फिर ऐसे अधिकारियों की जिम्मेदारी भी तय की जाएगी जिन्होंने नियमों के बावजूद यह पदस्थापना की।

    डीसीपी जोन-3 विकास सेहवाल ने बताया कि महिला के पति की शिकायत मिलने के बाद मामले की प्रारंभिक जांच कराई गई। जांच में भूमिका संदिग्ध पाए जाने पर पुलिस आयुक्त के निर्देश पर टीआई सुनील शर्मा और आरक्षक नंदकिशोर को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। मामले की विस्तृत जांच जारी है और जांच के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

    फिलहाल यह मामला केवल एक थाना प्रभारी के निलंबन तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि पुलिस विभाग की पारदर्शिता, पोस्टिंग प्रक्रिया और नियमों के पालन को लेकर भी गंभीर बहस का विषय बन चुका है।

  • MP कांग्रेस अध्यक्ष की दतिया में अधिकारियों को धमकी, कहा- 'जीतू पटवारी कहते हैं, गड़बड़ी हुई तो देख लूंगा'

    MP कांग्रेस अध्यक्ष की दतिया में अधिकारियों को धमकी, कहा- 'जीतू पटवारी कहते हैं, गड़बड़ी हुई तो देख लूंगा'


    दतिया । मध्य प्रदेश की दतिया विधानसभा सीट पर हो रहे उपचुनाव का प्रचार चरम पर पहुंचने के साथ ही राजनीतिक बयानबाजी तीखी होती जा रही है. बसई इलाके के ठकुरपुरा गांव में कांग्रेस प्रत्याशी कुंवर घनश्याम सिंह के समर्थन में आयोजित एक नुक्कड़ सभा में पहुंचे मध्य प्रदेश कांग्रेस कमेटी (MPCC) के प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी के एक बयान ने सियासी गलियारों में हलचल मचा दी है.

    सभा को संबोधित करते हुए जीतू पटवारी ने चुनाव प्रक्रिया की निष्पक्षता पर जोर दिया और पुलिस व प्रशासनिक अमले को आड़े हाथों लिया. मंच से बोलते हुए उनके बोल काफी कड़े नजर आए.

    प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष ने अधिकारियों को सीधी चेतावनी देते हुए कहा, ”मुझे जीतू पटवारी कहते हैं, अगर चुनाव में किसी भी तरह की गड़बड़ी या पक्षपात हुआ तो समझ लेना, चुनाव के बाद में देखूंगा.”

    उन्होंने आगे कहा कि लोकतंत्र में सरकारें आती-जाती रहती हैं, लेकिन अधिकारियों और कर्मचारियों को किसी राजनीतिक दबाव में आए बिना निष्पक्ष रहकर अपनी जिम्मेदारी निभानी चाहिए. अगर किसी भी कर्मचारी या अधिकारी ने एकतरफा कार्रवाई की, तो चुनाव के बाद उनसे हिसाब लिया जाएगा.

    बढ़ते अपराधों और स्थानीय मुद्दों पर घेरा
    अधिकारियों पर निशाना साधने के साथ-साथ जीतू पटवारी ने दतिया क्षेत्र में बिगड़ती कानून-व्यवस्था को लेकर भी शिवराज या मोहन सरकार और स्थानीय सत्ता तंत्र पर जमकर हमला बोला.

    उन्होंने क्षेत्र में लगातार बढ़ रहे अपराध, हत्या, आत्महत्या और जमीन विवाद से जुड़े मामलों का जिक्र करते हुए जनता के प्रति संवेदना जताई.उन्होंने भरोसा दिलाया कि कांग्रेस पार्टी हर सुख-दुख में दतिया की जनता के साथ मजबूती से खड़ी है.

    फिलहाल कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष के इस तीखे बयान पर जिला प्रशासन या पुलिस विभाग की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है, लेकिन इस बयान के बाद दतिया में चुनावी मुकाबला और ज्यादा दिलचस्प हो गया है.

  • एमपी के रतलाम-मंदसौर समेत 5 जिलों में आज भारी बारिश की चेतावनी, जाने मौसम के ताजा हाल

    एमपी के रतलाम-मंदसौर समेत 5 जिलों में आज भारी बारिश की चेतावनी, जाने मौसम के ताजा हाल


    भोपाल। मध्य प्रदेश में मानसून ने एक बार फिर रफ्तार पकड़ ली है। मौसम विभाग ने शुक्रवार के लिए श्योपुर, मंदसौर, रतलाम, आलीराजपुर और पन्ना जिलों में भारी बारिश का अलर्ट जारी किया है। इन क्षेत्रों में अगले 24 घंटे के दौरान चार इंच तक वर्षा होने की संभावना जताई गई है। इसके अलावा भोपाल, इंदौर, उज्जैन, ग्वालियर, जबलपुर समेत प्रदेश के अधिकांश हिस्सों में हल्की से मध्यम बारिश होने का अनुमान है।

    एक महीने में 12.8 इंच बारिश, फिर भी सामान्य से कम
    प्रदेश में मानसून ने 24 जून को दस्तक दी थी। तब से अब तक मध्य प्रदेश में औसतन 12.8 इंच (325.1 मिमी) बारिश रिकॉर्ड की गई है। यह सामान्य से करीब 10 प्रतिशत कम है। मौसम विभाग के अनुसार, इस अवधि तक प्रदेश में 14.1 इंच (359.6 मिमी) वर्षा हो जानी चाहिए थी।

    हालांकि बीते कुछ दिनों में बारिश की स्थिति में सुधार देखने को मिला है। 20 जुलाई तक जहां प्रदेश में वर्षा की कमी 17 प्रतिशत थी, वहीं अब यह घटकर 10 प्रतिशत रह गई है। पूर्वी मध्य प्रदेश में अब भी 13 प्रतिशत और पश्चिमी हिस्से में 6 प्रतिशत कम बारिश दर्ज की गई है।

    इन जिलों में भी होगी बारिश
    भारी बारिश के अलर्ट वाले पांच जिलों के अलावा भोपाल, रायसेन, सीहोर, राजगढ़, विदिशा, इंदौर, धार, झाबुआ, बड़वानी, खरगोन, खंडवा, उज्जैन, देवास, आगर-मालवा, शाजापुर, नर्मदापुरम, हरदा, बैतूल, ग्वालियर, मुरैना, भिंड, दतिया, शिवपुरी, गुना, अशोकनगर, जबलपुर, कटनी, नरसिंहपुर, छिंदवाड़ा, सिवनी, बालाघाट, मंडला, डिंडौरी, रीवा, सतना, सीधी, सिंगरौली, शहडोल, उमरिया, सागर, दमोह, छतरपुर, टीकमगढ़ और निवाड़ी समेत 50 से अधिक जिलों में हल्की से मध्यम बारिश होने की संभावना है।

    जुलाई के अंतिम सप्ताह तक रहेगा बारिश का दौर
    मौसम विभाग का अनुमान है कि जुलाई के आखिरी सप्ताह में भी प्रदेश में तेज बारिश का सिलसिला जारी रहेगा, जिससे कई इलाकों में अच्छी वर्षा होने की संभावना है।

    14 जिलों में सामान्य से अधिक बारिश
    प्रदेश में फिलहाल 15 जिलों में बारिश का आंकड़ा सामान्य से ऊपर है, जबकि 41 जिलों में अब भी वर्षा सामान्य से कम दर्ज की गई है। पूर्वी मध्य प्रदेश में निवाड़ी एकमात्र ऐसा जिला है, जहां औसत से अधिक बारिश हुई है। वहीं प्रदेश के 14 जिलों में सामान्य से ज्यादा वर्षा रिकॉर्ड की गई है, जबकि बाकी 41 जिले अब भी बारिश की कमी का सामना कर रहे हैं।

  • इंदौर दूषित जल कांड की रिपोर्ट में बड़ा खुलासा, भूजल तक पहुंचा था मलमूत्र का जानलेवा बैक्टीरिया

    इंदौर दूषित जल कांड की रिपोर्ट में बड़ा खुलासा, भूजल तक पहुंचा था मलमूत्र का जानलेवा बैक्टीरिया


    भोपाल।
    मध्य प्रदेश के इंदौर शहर के भागीरथपुरा मोहल्ले में पिछले वर्ष दूषित जल से 36 लोगों की मौत होने के बाद जांच के लिए गठित स्वास्थ्य विभाग और राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की समिति ने गुरुवार को अपनी रिपोर्ट राष्ट्रीय हरित न्यायाधिकरण (एनजीटी) को सौंप दी है।

    रिपोर्ट में कहा गया है कि भागीरथपुरा के भूमिगत जल तक मलमूत्र में पाया जाने वाला खतरनाक ई-कोलाई बैक्टीरिया पहुंच गया है। इससे पहले उच्च न्यायालय में पेश एक रिपोर्ट में बताया जा चुका है कि भागीरथपुरा से लिए गए पेयजल के 52 नमूनों में से 50 में ई-कोलाई बैक्टीरिया मिले।

    बीमारी का जलापूर्ति लाइन में सीवर के पानी का मिल
    स्वास्थ्य विभाग की रिपोर्ट में कहा गया कि बीमारी फैलने का सबसे बड़ा कारण नगर निगम की जलापूर्ति लाइन में सीवर के पानी का मिलना था। प्रभावित लोगों ने पानी के स्वाद और गंध में बदलाव की शिकायत की थी, लेकिन समय रहते नगर निगम के अधिकारियों ने कोई कार्यवाही नहीं की।

    भूमिगत जल तक खतरनाक बैक्टीरिया पहुंचा

    पेश रिपोर्ट में बताया गया कि विशेषज्ञ समिति ने घटना के तीन महीने बाद अलग-अलग स्रोतों के 43 नमूने लिए थे। उनमें से 10 नमूने नर्मदा पाइपलाइन के थे। इसमें ई-कोलाई नहीं मिला। यही पानी भागीरथपुरा में आपूर्ति किया जाता है। पास की कान्ह नदी के तीन नमूनों में ई-कोलाई की भारी मौजूदगी मिली। वहीं एक बोरवेल में भी ई-कोलाई की हानिकारक मात्रा पाई गई। इससे साफ हुआ कि भूमिगत जल तक खतरनाक बैक्टीरिया पहुंच चुका है।

    इधर, भागीरथपुरा जल प्रदूषण मामले की रिपोर्ट आने के बाद प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों में जल आपूर्ति एवं जल प्रदूषण से संबंधित याचिकाओं पर सुनवाई के दौरान भोपाल स्थित राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी की क्षेत्रीय पीठ के न्यायिक सदस्य जस्टिस शेओ कुमार सिंह और विशेषज्ञ सदस्य सुधीर कुमार चतुर्वेदी ने अहम टिप्पणी की।

    एनजीटी ने कहा है कि इंदौर में पेयजल आपूर्ति और जल प्रदूषण से जुड़े मुद्दों पर मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय पहले से सुनवाई कर रहा है। ऐसे में उच्च न्यायालय द्वारा गठित न्यायिक जांच आयोग पूरे मामले की जांच कर रहा है और सुरक्षित पेयजल व्यवस्था सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक दिशा-निर्देश भी जारी किए जा चुके हैं।

    सुनवाई के दौरान एनजीटी ने कहा कि इंदौर में जल प्रदूषण और पेयजल आपूर्ति से जुड़े मुद्दे पहले से ही मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय की इंदौर खंडपीठ में विभिन्न याचिकाओं के माध्यम से विचाराधीन हैं। विशेष रूप से भागीरथपुरा जल प्रदूषण प्रकरण में हाई कोर्ट ने प्रथम दृष्टया जिम्मेदार अधिकारियों और कर्मचारियों की भूमिका तय करने के लिए न्यायिक जांच आयोग का गठन किया है।

    नजीटी ने स्पष्ट किया कि इन सभी बिंदुओं की जांच उच्च न्यायालय द्वारा गठित न्यायिक जांच आयोग कर रहा है। चूंकि पूरा मामला हाईकोर्ट के विचाराधीन है, इसलिए आयोग की रिपोर्ट और कोर्ट के निर्देशों के अनुरूप आगे की कार्रवाई होगी।

    सुनवाई के दौरान मध्य प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की ओर से बताया गया कि मामले में अपनी रिपोर्ट दाखिल की जा चुकी है। इस पर एनजीटी ने निर्देश दिया कि रिपोर्ट की प्रति ई-मेल के माध्यम से सभी संबंधित पक्षों को उपलब्ध कराई जाए, ताकि वे तीन सप्ताह के भीतर अपनी आपत्तियां या जवाब प्रस्तुत कर सकें।

    न्यायाधिकरण के सदस्य न्यायमूर्ति श्यो कुमार सिंह और विशेषज्ञ सदस्य सुधीर कुमार चतुर्वेदी ने इंदौर के दूषित जलकांड को लेकर कहा कि जलापूर्ति व्यवस्था में हुई लापरवाही की कीमत आम लोगों ने अपनी जान देकर चुकाई है, इसलिए अब जिम्मेदारी तय किए बिना मामला नहीं छोड़ा जा सकता। एनजीटी ने मामले की अगली सुनवाई 16 सितंबर 2026 को निर्धारित की है। तब तक संबंधित पक्षों से जवाब और रिपोर्ट पर प्रतिक्रियाएं प्राप्त होने की उम्मीद है।

    गौरतलब है कि भागीरथपुरा कांड के बाद एनजीटी की केंद्रीय जोन पीठ के सामने रशीद नूर खान और कमल कुमार राठी ने जनवरी में अलग-अलग याचिकाएं दायर की थीं। उसके बाद पीठ ने विशेषज्ञ समिति बनाकर जांच कराने का निर्देश दिया था।

  • मप्र के सिवनी जिले के सीताफल को मिला जीआई टैग, अब राष्ट्रीय ब्रांड बनाने की तैयारी

    मप्र के सिवनी जिले के सीताफल को मिला जीआई टैग, अब राष्ट्रीय ब्रांड बनाने की तैयारी


    सिवनी।
    मध्य प्रदेश के सिवनी जिले के प्रसिद्ध सीताफल को जीआई (भौगोलिक संकेतक) टैग मिलने के बाद अब इसे राष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान दिलाने की कवायद तेज हो गई है। इसी क्रम में गुरुवार को कलेक्टर नेहा मीना ने छपारा विकासखंड के बकौड़ासिवनी और भूतबंधानी गांव का दौरा किया।

    कलेक्टर नेहा मीना ने सीताफल उत्पादक किसानों एवं कृषक उत्पादक संगठन के सदस्यों से आत्मीय संवाद कर जिले के सीताफल को जीआई टैग मिलने पर उन्हें बधाई दी तथा इस उपलब्धि का पूरा श्रेय किसानों की मेहनत और वर्षों से विकसित पारंपरिक उत्पादन पद्धति को दिया। इस दौरान उन्होंने एफपीओ की गतिविधियों, किसानों के अनुभवों तथा सीताफल उत्पादन की वर्तमान स्थिति की विस्तार से जानकारी ली।

    उन्होंने कहा कि जीआई टैग केवल सम्मान नहीं, बल्कि सिवनी के सीताफल को देशभर में विशिष्ट पहचान दिलाने का अवसर है। इस अवसर का लाभ उठाते हुए उत्पादन बढ़ाने, गुणवत्ता बनाए रखने, वैज्ञानिक खेती अपनाने तथा संगठित विपणन व्यवस्था विकसित करने की आवश्यकता है।

    बैठक में सीताफल की ब्रांडिंग, पैकेजिंग, मार्केटिंग तथा देश के विभिन्न महानगरों तक इसकी त्वरित आपूर्ति सुनिश्चित करने की कार्ययोजना पर विस्तार से चर्चा की गई। एफपीओ सदस्यों, उत्पादक किसानों एवं प्रसंस्करण कार्य से जुड़ी महिला समूहों ने अपने अनुभव साझा करते हुए विपणन, भंडारण और प्रसंस्करण से संबंधित आवश्यकताओं से कलेक्टर को अवगत कराया।

    किसानों द्वारा सिंचाई संसाधनों की आवश्यकता बताए जाने पर कलेक्टर ने ग्राम पंचायत को अधिक से अधिक खेत तालाब बनाने एवं अमृत सरोवर निर्माण के प्रस्ताव प्रस्तुत के करने निर्देश दिए, ताकि वर्षाजल का बेहतर संरक्षण हो सके और सीताफल उत्पादन का रकबा लगातार बढ़ाया जा सके।

    उन्होंने सीताफल का उचित मूल्य सुनिश्चित करने के लिए शीघ्र ही बायर-सेलर मीट आयोजित करने के निर्देश दिए, जिससे किसानों का सीधा संपर्क बड़े खरीदारों और विपणन संस्थाओं से स्थापित हो सके। कलेक्टर ने सीताफल आधारित प्रसंस्करण गतिविधियों को बढ़ावा देने पर भी विशेष जोर दिया। उन्होंने पल्प निर्माण सहित अन्य प्रसंस्करण इकाइयों की स्थापना को प्रोत्साहित करने, कोल्ड स्टोरेज जैसी आधारभूत सुविधाएं विकसित करने तथा मूल्य संवर्धन के माध्यम से किसानों की आय बढ़ाने की आवश्यकता बताई। साथ ही जिले में उत्पादित समस्त जीआई टैग प्राप्त सीताफल का एक समान ब्रांड एवं साझा ब्रांडिंग बैनर के माध्यम से विपणन किए जाने पर भी सहमति बनी, जिससे बाजार में सिवनी सीताफल की विशिष्ट पहचान और अधिक सशक्त हो सके।

    दौरे के दौरान कलेक्टर नेहा मीना भूतबंधानी ग्राम भी पहुंचीं। यहां उन्होंने प्राकृतिक रूप से उपलब्ध सीताफल के पौधों के साथ-साथ विभाग द्वारा कराए गए पौधरोपण कार्य का अवलोकन किया तथा किसानों से चर्चा कर उन्हें अधिकाधिक सीताफल पौधरोपण के लिए प्रोत्साहित किया। उन्होंने कृषक राजकुमार भलावी के खेत में किए जा रहे पौधरोपण का निरीक्षण किया तथा स्वयं भी सीताफल का पौधा लगाकर पर्यावरण संरक्षण एवं बागवानी विस्तार का संदेश दिया।

    कलेक्टर ने कहा कि प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण, पौधरोपण और वैज्ञानिक बागवानी को बढ़ावा देकर सिवनी जिले को देश में सीताफल उत्पादन का अग्रणी केंद्र बनाया जा सकता है। इस अवसर पर जनपद अध्यक्ष सदम सिंह वरकड़े, सीईओ अंजली शाह, सहायक संचालक उद्यानिकी विभाग आशा उपवंशी सहित अन्य क्षेत्रीय जनप्रतिनिधियों और कृषकों की उपस्थिति रही।

  • जनजातीय संस्कृति, परंपराओं और लोक कलाओं के संरक्षण के लिए किए जाएंगे विशेष प्रयास : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

    जनजातीय संस्कृति, परंपराओं और लोक कलाओं के संरक्षण के लिए किए जाएंगे विशेष प्रयास : मुख्यमंत्री डॉ. यादव


    भोपाल।
    मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि राज्य सरकार जनजातीय संस्कृति, परंपराओं और लोक कलाओं के संरक्षण एवं संवर्धन के लिए निरंतर कार्य कर रही है तथा स्थानीय कला और संस्कृति को राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने के लिए विशेष प्रयास किए जाएंगे।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव गुरुवार को अमर शहीद चंद्रशेखर आजाद की 120वीं जयंती पर अलीराजपुर जिले के चंद्रशेखर आजाद नगर में आयोजित बलराम कृषि महोत्सव के अंतर्गत आयोजित सोशल मीडिया इन्फ्लूएंसर्स संवाद कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि अमर शहीद महान क्रांतिकारी चंद्रशेखर आजाद की जन्मस्थली ने मध्य प्रदेश ही नहीं, बल्कि पूरे देश को गौरवान्वित किया है। उनकी 120वीं जयंती पर चंद्रशेखर आजाद नगर आना गौरव और सौभाग्य का विषय है।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि आलीराजपुर अपनी समृद्ध जनजातीय संस्कृति, लोक परंपराओं, भाषा-बोली, कला, प्राकृतिक खेती व संपदा और वनोपज के कारण विशिष्ट पहचान रखता है। उन्होंने कहा कि आलीराजपुर जिले को हर क्षेत्र में नंबर वन बनाया जाएगा।

    कार्यक्रम में मुख्यमंत्री डॉ. यादव आलीराजपुर, बड़वानी, धार, झाबुआ, रतलाम सहित विभिन्न जिलों से आए कृषि, जनजातीय संस्कृति, ग्रामीण विकास और सामाजिक विषयों पर कार्य कर रहे युवा सोशल मीडिया इन्फ्लूएंसर्स से आत्मीय संवाद किया। उन्होंने कहा कि आज सोशल मीडिया केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं, बल्कि समाज को जागरूक करने, सकारात्मक बदलाव लाने और जनकल्याणकारी योजनाओं को अंतिम व्यक्ति तक पहुँचाने का सशक्त माध्यम बन चुका है।

    उन्होंने इन्फ्लूएंसर्स से कृषि, प्राकृतिक खेती, जनजातीय संस्कृति, पर्यटन, स्थानीय उत्पादों और ग्रामीण नवाचार जैसे विषयों पर प्रभावी डिजिटल सामग्री तैयार करने को कहा। मुख्यमंत्री ने कहा कि सोशल मीडिया के माध्यम से प्रदेश की सकारात्मक छवि, किसानों की सफलता की कहानियां, जनजातीय समाज की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत तथा स्थानीय उत्पादों को देश-दुनिया तक प्रभावी ढंग से पहुँचाया जा सकता है।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव से संवाद में इन्फ्लूएंसर चंद्रभान सिंह भदौरिया ने वनोपज की बेहतर विपणन व्यवस्था करने की बात कही। कादुसिंह सिंह ने उड़द फसल को जीआई टैग दिलाने का अनुरोध किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि उड़द प्रदेश की प्रमुख फसलों में शामिल है और इसकी गुणवत्ता को बढ़ावा देने के लिए राज्य सरकार किसानों को प्रति क्विंटल 600 रुपये की प्रोत्साहन राशि प्रदान कर रही है। उन्होंने आश्वस्त किया कि उड़द को जीआई टैग दिलाने के लिए आवश्यक प्रयास किए जाएंगे।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि जनजातीय समाज का पारंपरिक भगोरिया उत्सव मध्यप्रदेश की सांस्कृतिक धरोहर है। राज्य सरकार इसे राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विशेष पहचान दिलाने के लिए गंभीरता से कार्य कर रही है ताकि जनजातीय संस्कृति का गौरव पूरे विश्व तक पहुँचे। उन्होंने कहा कि जनजातीय समाज की संस्कृति, परंपराएं और लोक कलाएं हमारी अमूल्य धरोहर हैं तथा इनके संरक्षण और संवर्धन के लिए राज्य सरकार पूरी प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रही है।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने महिला सशक्तिकरण से जुड़े प्रश्न पर प्रियंका तोमर से कहा कि प्रदेश सरकार महिलाओं के सर्वांगीण विकास के लिए लाड़ली बहना योजना और लाड़ली लक्ष्मी योजना जैसी अनेक योजनाएँ संचालित कर रही है। उन्होंने कहा कि भारत की संस्कृति नारी सम्मान की संस्कृति है। हमारा देश “भारत माता की जय” का उद्घोष करने वाला विश्व का अनूठा राष्ट्र है। माँ सीता, माता पार्वती, देवी लक्ष्मी, देवी सरस्वती और माँ जगदंबा हमारी संस्कृति की प्रेरणा हैं। प्रदेश सरकार भी महिलाओं के सम्मान और सशक्तिकरण को सर्वोच्च प्राथमिकता देती है तथा प्रत्येक माह लाड़ली बहनों को सम्मानपूर्वक आर्थिक सहायता प्रदान कर उनके सशक्तिकरण का कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि अभी हाल ही में कैबिनेट में यूसीसी को मंजूरी दी गई है। समान नागरिक संहिता (यूसीसी) भी महिलाओं पर समर्पित है।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने तुषार पालीवाल के जनजातीय क्षेत्रों में कैबिनेट आयोजित करने संबंधी प्रश्न पर कहा कि प्रदेश में जनजाति सहित सभी क्षेत्रों में कैबिनेट आयोजित की जाएगी और स्थानीय उत्पादों को प्रोत्साहित करने सहित स्थानीय स्तर के महत्वपूर्ण निर्णय लिए जाएंगे। उन्होंने कहा कि सरकार का उद्देश्य विकास की मुख्य धारा में प्रत्येक क्षेत्र और प्रत्येक वर्ग की समान भागीदारी सुनिश्चित करना है।

    संवाद कार्यक्रम में राजेंद्र बासुनिया ने जनजातीय संस्कृति पर आधारित गीत प्रस्तुत किया, जिसकी मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मुक्त कंठ से सराहना की। उन्होंने कहा कि जनजातीय युवाओं की प्रतिभा, लोककलाओं और सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण एवं संवर्धन के लिए विशेष योजनाएँ तैयार की जाएंगी।

    सोशल मीडिया इन्फ्लूएंसर आशीष पांडे ने मुख्यमंत्री डॉ. यादव का आकर्षक पोर्ट्रेट तथा साक्षी भयड़िया ने पिथौरा कला पर आधारित सुंदर पेंटिंग भेंट की। मुख्यमंत्री डॉने इन उपहारों की सराहना करते हुए स्थानीय कला के संरक्षण की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि पिथौरा जैसी पारंपरिक जनजातीय कला को राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने के लिए भी विशेष प्रयास किए जाएंगे।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कार्यक्रम में उत्कृष्ट कार्य करने वाले सोशल मीडिया इन्फ्लूएंसर्स राजेंद्र बासुनिया, प्रियंका तोमर, साक्षी भयड़िया, भरत सस्तिया एवं रितेश राठौड़ को सम्मानित एवं पुरस्कृत किया।

    कार्यक्रम संवाद में मुख्यमंत्री ने सभी सोशल मीडिया इन्फ्लूएंसर्स के साथ समूह छायाचित्र भी खिंचवाया और उनसे आह्वान किया कि वे राज्य शासन की जनकल्याणकारी एवं किसान हितैषी योजनाओं पर आधारित प्रभावी रील्स, वीडियो और डिजिटल सामग्री तैयार करें ताकि अधिक से अधिक किसानों, युवाओं और आम नागरिकों तक योजनाओं की जानकारी पहुँचे और वे उनका अधिकतम लाभ प्राप्त कर सकें। उन्होंने कहा कि युवा इन्फ्लूएंसर्स समाज में सकारात्मक परिवर्तन के प्रभावी वाहक बन सकते हैं और विकसित मध्यप्रदेश के निर्माण में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रहेगी।

  • मध्य प्रदेश का संपूर्ण जनजातीय अंचल हमारे लिए तीर्थ समान : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

    मध्य प्रदेश का संपूर्ण जनजातीय अंचल हमारे लिए तीर्थ समान : मुख्यमंत्री डॉ. यादव


    भोपाल।
    मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में प्रदेश के आलीराजपुर सहित पूरे जनजातीय क्षेत्र में सकारात्मक बदलाव नजर आ रहा है। झाबुआ, अलीराजपुर, मंडला, डिंडोरी, बालाघाट सहित प्रदेश का संपूर्ण जनजातीय अंचल हमारे लिए एक तीर्थ के समान है।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव गुरुवार को आलीराजपुर जिले के चंद्रशेखर आजाद नगर में आयोजित बलराम कृषि महोत्सव और चंद्रशेखर आजाद की जयंती कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने चंद्रशेखर आजाद नगर में अमर शहीद चंद्रशेखर आजाद की 120वी जयंती पर नमन किया।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि इस धरती के एक जोशीले युवा ने नायक बनकर आजादी के आंदोलन में अंग्रेजों के खिलाफ लड़ते हुए अपने जन्म को सार्थक बनाया। आलीराजपुर के वीर योद्धा छीतू किराड़, राजा आलिया भील, क्रांति सूर्य टंट्या मामा जैसे अनेक जनजातीय क्रांतिकारियों ने भी स्वतंत्रता आंदोलन में अतुलनीय योगदान दिया। राज्य सरकार इन शहीदों के बलिदान का स्मरण करते हुए आदरांजलि अर्पित करती है। कार्यक्रम में बताया गया कि डही नर्मदा पाइप लाइन परियोजना सिंचाई परियोजना पूर्ण हो गई है, जिसका शीघ्र ही लोकार्पण होगा। जोबट तक भी शीघ्र नर्मदा जल पहुंच जाएगा।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि इंदौर, धार, झाबुआ और बड़वानी के बाद आलीराजपुर जिले में बलराम कृषि महोत्सव हो रहा है। महोत्सव में उन्नत एवं प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने वाले किसानों का सम्मान किया गया, जिससे अन्य किसान भी आधुनिक एवं प्राकृतिक कृषि पद्धतियों को अपनाने के लिए प्रेरित हों। आलीराजपुर के किसानों ने इस बार कम वर्षा के बाद भी हौसला दिखाया है।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने जिले में हुए अधोसंरचनात्मक विकास का उल्लेख करते हुए कहा कि स्वामित्व योजना के तहत 10 हजार 136 हितग्राहियों को लाभ मिला है और 331 हितग्राहियों को भूखंड प्रदान किए गए हैं। प्रधानमंत्री आवास योजना के अंतर्गत 90 हजार 124 पक्के आवास स्वीकृत किए गए हैं। जिले के 5 लाख 70 हजार 179 हितग्राहियों को निःशुल्क राशन उपलब्ध कराया जा रहा है। इसके साथ ही पात्र हितग्राहियों को किसान सम्मान निधि, लाड़ली बहना योजना तथा प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना का लाभ भी मिल रहा है। राज्य सरकार लाड़ली बहनों और युवाओं के कल्याण के लिए संकल्पित है। लाड़ली बहनों को हर माह 1500 रुपये की सौगात मिलती है।

    सीमा पर जवान और खेतों में किसान का योगदान महत्वपूर्ण

    मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारे लिए सीमा पर जवान और खेतों में किसान दोनों का परिश्रम बराबर है। दोनों का महत्वपूर्ण योगदान है। कृषक कल्याण वर्ष 2026 में किसानों की बेहतरी के लिए हर संभव प्रयास किए जा रहे हैं। प्रधानमंत्री मोदी ने देशभर के किसानों को पीएम किसान सम्मान निधि की सौगात दी है। आलीराजपुर के 47 हजार 852 किसानों को अब तक फसल बीमा का लाभ मिल चुका है। खेती के लिए पर्याप्त जल उपलब्ध करवाने के लिए नई परियोजनाओं पर काम जारी है।

    डेयरी क्षेत्र में आदर्श राज्य गुजरात की तर्ज पर मप्र में प्रयास

    मुख्यमंत्री ने कहा कि किसानों की समृद्धि और उनकी आय बढ़ाने के लिए पशुपालन और दूध के उत्पादन को प्रोत्साहित किया जा रहा है। जिस प्रकार अमूल के माध्यम से डेयरी क्षेत्र में आदर्श राज्य गुजरात में दूध उत्पादन हो रहा है। उसी दिशा में आगे बढ़ते हुए राज्य शासन ने गोपालन को बढ़ावा देने के लिए नई योजना की शुरुआत की है, जिसमें उन्नत नस्ल की 25 गोमाताओं के साथ डेयरी शुरू करने पर 10 लाख रुपये तक के अनुदान का प्रावधान किया गया है। मध्यप्रदेश किसान भाइयों की सभी प्रकार से चिंता करने वाला अग्रणी राज्य है। उन्होंने आह्वान किया कि किसान भाई प्राकृतिक खेती अपनाएं।

    लोकार्पण, भूमि-पूजन और प्रमुख घोषणाएं: रानी काजल माता लोक बनाया जायेगा

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि आलीराजपुर को लगभग 357 करोड़ रुपये लागत के 271 विकास कार्यों की सौगात मिली है। इसमें भाभरा विकासखंड में 120 करोड़ लागत की 64 सड़कें और कड़वानिया में 22 करोड़ के सांदीपनि विद्यालय शामिल है। कोंडवा सिंचाई परियोजना से किसानों को सिंचाई सुविधा मिलेगी। उन्होंने कहा कि भाभरा में अमर शहीद चंद्रशेखर आजाद को समर्पित विशाल पार्क बनेगा। रानी काजल माता लोक बनाया जाएगा। कन्या छात्रावासों में आवास सुविधाएं बढ़ाई जाएंगी।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि आलीराजपुर जिले में सिंचाई का रकबा बढ़ाने के उद्देश्य से डही उद्वहन सिंचाई योजना के अंतर्गत लगभग 11 हजार करोड़ रुपये की लागत से निर्मित नर्मदा पाइपलाइन परियोजना का लोकार्पण इसी वर्ष दीपावली तक किया जाएगा,जिससे किसानों को व्यापक लाभ मिलेगा।उन्होंने बताया कि सोंडवा माइक्रो उद्वहन सिंचाई परियोजना के माध्यम से लगभग 70 हजार किसानों के 55 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई सुविधा उपलब्ध होगी और परियोजना का लगभग 50 प्रतिशत कार्य पूर्ण हो चुका है।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार सदैव किसानों के हित में कार्य कर रही है। युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर उपलब्ध कराए जा रहे हैं। प्रदेश में 85 प्रतिशत से अधिक अंक प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों की मेडिकल कॉलेज की फीस का वहन राज्य सरकार द्वारा किया जाता है। साथ ही शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए सांदीपनि विद्यालयों की स्थापना, विद्यार्थियों को निःशुल्क साइकिल, गणवेश एवं पाठ्यपुस्तकों का वितरण भी किया जा रहा है।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बलराम कृषि महोत्सव के अवसर पर सोशल मीडिया के माध्यम से जनजागरूकता, सकारात्मक संदेशों के प्रसार एवं जनकल्याणकारी योजनाओं को नागरिकों तक प्रभावी ढंग से पहुंचाने में उल्लेखनीय योगदान देने वाले जिले के सोशल मीडिया इंफ्लूएंसर्स का सम्मान किया।

    यूसीसी विधेयक सभी के हित में

    मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार ने सभी नागरिकों के हित में समान नागरिक संहिता (यूसीसी) विधेयक पारित करवाया है। हमारे लिए सभी धर्मों के नागरिक समान हैं। जनजातीय परंपराओं का सम्मान करते हुए जनजातीय वर्ग को यूसीसी के दायरे से बाहर रखा गया है।

    प्रदर्शनी का अवलोकन
    मुख्यमंत्री ने कार्यक्रम स्थल पर विभिन्न विभागों द्वारा लगाई गई प्रदर्शनी का अवलोकन किया। इस दौरान उन्होंने मत्स्य विभाग की सीप कल्टीवेशन संबंधी प्रदर्शनी को विशेष रुचि से देखा, जो आकर्षण का केंद्र रही। इसके साथ ही कृषि विभाग, आयुष विभाग, राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन और महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा मोटे अनाज (श्रीअन्न) से तैयार पौष्टिक एवं पारंपरिक व्यंजनों की आकर्षक प्रदर्शनी का भी अवलोकन किया। मुख्यमंत्री ने विभागों के नवाचारों एवं प्रदर्शित गतिविधियों की सराहना करते हुए संबंधित अधिकारियों और हितग्राहियों का उत्साहवर्धन किया।

    कार्यक्रम को अनुसूचित जाति कल्याण मंत्री नागर सिंह चौहान ने भी संबोधित किया। कार्यक्रम में सांसद अनीता चौहान सहित अनेक जनप्रतिनिधि और बड़ी संख्या में स्थानीय नागरिक उपस्थित थे।

  • चंबल में अवैध खनन पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा आदेश, बोले उदाहरण पेश करें, खनन माफिया पर करें कड़ी कार्रवाई

    चंबल में अवैध खनन पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा आदेश, बोले उदाहरण पेश करें, खनन माफिया पर करें कड़ी कार्रवाई


    मध्यप्रदेश । राष्ट्रीय चंबल अभयारण्य में अवैध रेत खनन को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने मध्य प्रदेश राजस्थान और उत्तर प्रदेश सरकारों के रवैये पर सख्त नाराजगी जताई है। शीर्ष अदालत ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि अवैध खनन को बढ़ावा देने वाले लोगों के खिलाफ केवल सामान्य कार्रवाई पर्याप्त नहीं है बल्कि ऐसे मामलों में एहतियाती हिरासत जैसे कड़े कदम उठाकर प्रभावी संदेश दिया जाना चाहिए ताकि भविष्य में इस तरह की गतिविधियों पर रोक लग सके।

    जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की पीठ राष्ट्रीय चंबल अभयारण्य में अवैध रेत खनन तथा उससे संकटग्रस्त जलीय वन्यजीवों और पर्यावरण पर पड़ रहे प्रभाव से जुड़े स्वतः संज्ञान मामले की सुनवाई कर रही थी। सुनवाई के दौरान अदालत को बताया गया कि मध्य प्रदेश के मुरैना जिले में अवैध रेत खनन में सहयोग करने वाले 551 लोगों की पहचान की जा चुकी है।

    इस जानकारी पर सुप्रीम कोर्ट ने तीखी टिप्पणी करते हुए पूछा कि जब संबंधित लोगों की पहचान हो चुकी है तो अब तक उन्हें हिरासत में क्यों नहीं लिया गया। अदालत ने कहा कि ऐसे मामलों में एहतियाती हिरासत का उपयोग किया जाना चाहिए ताकि अवैध गतिविधियों में शामिल लोगों के खिलाफ सख्त संदेश जाए और अन्य लोग भी इस तरह के अपराध करने से बचें। अदालत ने यह भी कहा कि कुछ मामलों में कड़ी कार्रवाई उदाहरण बन सकती है।

    सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण पर भी जोर दिया। अदालत ने कहा कि चंबल नदी और उसकी सहायक नदियों का प्राकृतिक प्रवाह बनाए रखना बेहद जरूरी है। यदि प्रकृति के साथ अनावश्यक हस्तक्षेप नहीं किया जाए तो वह स्वयं अपना संतुलन बनाए रख सकती है। लेकिन जो लोग अवैध खनन के जरिए पर्यावरण और वन्यजीवों को नुकसान पहुंचा रहे हैं उनके प्रति किसी भी प्रकार की नरमी नहीं बरती जानी चाहिए।

    कोर्ट ने कहा कि राष्ट्रीय चंबल अभयारण्य केवल एक संरक्षित क्षेत्र नहीं बल्कि कई दुर्लभ और संकटग्रस्त जलीय जीवों का महत्वपूर्ण आवास भी है। ऐसे में अवैध रेत खनन से नदी का स्वरूप बदलता है और जैव विविधता पर गंभीर प्रभाव पड़ता है। इसलिए पर्यावरण संरक्षण के लिए सख्त और प्रभावी कार्रवाई आवश्यक है।

    सुनवाई के दौरान मध्य प्रदेश राजस्थान और उत्तर प्रदेश सरकारों ने अदालत के समक्ष अवैध खनन रोकने के लिए दर्ज एफआईआर जब्ती की कार्रवाई और अन्य कदमों का ब्यौरा प्रस्तुत किया। हालांकि अदालत इन प्रयासों से पूरी तरह संतुष्ट नजर नहीं आई और स्पष्ट किया कि केवल आंकड़े पेश करने से समस्या का समाधान नहीं होगा बल्कि जमीन पर प्रभावी कार्रवाई दिखाई देनी चाहिए।

    सुप्रीम कोर्ट ने तीनों राज्यों को अवैध रेत खनन रोकने के लिए और अधिक कठोर कदम उठाने के निर्देश दिए हैं। साथ ही यह भी कहा कि कानून का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ त्वरित और प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित की जाए ताकि चंबल क्षेत्र के पर्यावरण और वन्यजीवों की सुरक्षा हो सके।

    मामले की अगली सुनवाई 4 अगस्त को होगी। इस दौरान अदालत तीनों राज्य सरकारों से अब तक की गई कार्रवाई और आगे की रणनीति पर विस्तृत रिपोर्ट भी देखेगी।