Category: Madhya Pradesh

  • DA की मांग पर सड़क पर उतरे BSNL कर्मचारी, सरकार से जल्द फैसले की मांग

    DA की मांग पर सड़क पर उतरे BSNL कर्मचारी, सरकार से जल्द फैसले की मांग


    नई दिल्ली। उज्जैन में मंगलवार को Bharat Sanchar Nigam Limited (बीएसएनएल) के अधिकारी और कर्मचारियों ने महंगाई भत्ते (आईडीए) को लेकर जोरदार प्रदर्शन किया। All Unions and Associations of BSNL (एयूएबी) के बैनर तले देवासगेट स्थित बीएसएनएल कार्यालय के सामने भोजनावकाश के दौरान नारेबाजी कर विरोध दर्ज कराया गया।
    5.2 प्रतिशत आईडीए बढ़ोतरी, फिर भी आदेश लंबित
    एयूएबी के स्थानीय संयोजक मनोज शर्मा ने बताया कि सार्वजनिक उपक्रमों के कर्मचारियों के लिए जनवरी 2026 से 3.5% और अप्रैल 2026 से 1.7% औद्योगिक महंगाई भत्ता (IDA) बढ़ाया गया है। इस तरह कुल 5.2% की बढ़ोतरी बनती है, लेकिन तीन महीने बीत जाने के बाद भी सरकार की ओर से इसके आधिकारिक आदेश जारी नहीं किए गए हैं।
    कर्मचारियों में बढ़ रही नाराजगी
    प्रदर्शन कर रहे कर्मचारियों का कहना है कि महंगाई लगातार बढ़ रही है, ऐसे में भत्ते का समय पर भुगतान न होना कर्मचारियों के साथ अन्याय है। उन्होंने सरकार से जल्द से जल्द आदेश जारी करने की मांग की, ताकि उन्हें बढ़े हुए महंगाई भत्ते का लाभ मिल सके।
    बड़ी संख्या में शामिल हुए कर्मचारी
    प्रदर्शन में मनोज शर्मा के अलावा नवीन कारपेंटर, गिरीश राठौर, मदन जुनेजा, हितेश अखंड, आरएस कुशवाह सहित 50 से अधिक अधिकारी और कर्मचारी शामिल हुए। सभी ने एकजुट होकर अपनी मांगों को लेकर आवाज उठाई।
    आगे भी जारी रहेगा आंदोलन
    कर्मचारियों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही महंगाई भत्ते के आदेश जारी नहीं किए गए, तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा। एयूएबी ने स्पष्ट किया कि कर्मचारियों के हितों के लिए वे हर स्तर पर संघर्ष जारी रखेंगे।

  • Ujjain हाईवे पर हादसा: कार्मेल स्कूल बस से टकराई बाइक, 3 लोग गंभीर घायल

    Ujjain हाईवे पर हादसा: कार्मेल स्कूल बस से टकराई बाइक, 3 लोग गंभीर घायल


    नई दिल्ली। उज्जैन जिले के घट्टिया क्षेत्र में मंगलवार सुबह एक दर्दनाक सड़क हादसा हो गया। National Highway पर स्थित जगोटी फंटा के पास कार्मेल स्कूल बस और एक बाइक की आमने-सामने टक्कर हो गई। इस हादसे में बाइक सवार तीन लोग गंभीर रूप से घायल हो गए, जबकि बस में मौजूद सभी स्कूली बच्चे सुरक्षित हैं।
    आगर जा रहे थे बाइक सवार
    प्राप्त जानकारी के अनुसार, उज्जैन के मोहननगर निवासी कैलाश सिंह अपनी पत्नी सीमा बाई और छोटे भाई मांगीलाल के साथ बाइक से आगर की ओर जा रहे थे। जैसे ही वे जगोटी फंटा के पास पहुंचे, सामने से आ रही स्कूल बस से उनकी जोरदार भिड़ंत हो गई। टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि बाइक बस के नीचे जा फंसी और तीनों सवार गंभीर रूप से घायल हो गए।
    पुलिसकर्मी ने दिखाई तत्परता
    घटना के समय मौके पर मौजूद पुलिसकर्मी दीपक यादव ने तुरंत स्थिति संभाली और रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया। उन्होंने बस के नीचे फंसे घायलों को बाहर निकाला और तत्काल एम्बुलेंस बुलाकर अस्पताल भिजवाया। समय पर मिली मदद से घायलों की जान बचाई जा सकी।
    बच्चों को नहीं आई कोई चोट
    हादसे के दौरान बस में कई स्कूली बच्चे सवार थे, लेकिन राहत की बात यह रही कि किसी भी बच्चे को चोट नहीं आई। सभी बच्चे पूरी तरह सुरक्षित हैं, जिससे एक बड़ा हादसा टल गया।
    जिला अस्पताल रेफर, जांच जारी
    घायलों को पहले घट्टिया के शासकीय अस्पताल ले जाया गया, जहां प्राथमिक उपचार के बाद उनकी गंभीर स्थिति को देखते हुए जिला चिकित्सालय उज्जैन रेफर किया गया। फिलहाल पुलिस पूरे मामले की जांच कर रही है और हादसे के कारणों का पता लगाया जा रहा है।

  • निगम की सख्ती: सिंहस्थ इलाके में अवैध कब्जों पर बुलडोजर, तीन मकानों को खाली करने की मोहलत

    निगम की सख्ती: सिंहस्थ इलाके में अवैध कब्जों पर बुलडोजर, तीन मकानों को खाली करने की मोहलत


    नई दिल्ली। उज्जैन में आगामी सिंहस्थ 2028 को लेकर प्रशासन ने सख्ती दिखाना शुरू कर दिया है। नगर निगम ने सिंहस्थ क्षेत्र में किए गए अवैध निर्माणों के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए मंगलवार को चार निर्माणाधीन मकानों को तोड़ दिया। वहीं, तीन मकान मालिकों को स्वयं निर्माण हटाने के लिए दो दिन का समय दिया गया है।
    उन्हेल नाके के पास अवैध निर्माण पर कार्रवाई
    नगर निगम के जोन क्रमांक-1 के अंतर्गत सिंहस्थ क्षेत्र में, खासकर उन्हेल नाके के आसपास, कई लोगों द्वारा बिना अनुमति मकान बनाए जा रहे थे। कुछ जगहों पर निर्माण कार्य जारी था, जिसे निगम ने नियमों का उल्लंघन मानते हुए तत्काल कार्रवाई के दायरे में लिया।
    जेसीबी से ढहाए गए निर्माण
    निगम की रिमूवल गैंग पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंची और जेसीबी मशीनों की मदद से अवैध निर्माणों को ध्वस्त किया गया। जिन मकानों में अभी छत नहीं डाली गई थी, ऐसे चार निर्माणों को पूरी तरह गिरा दिया गया। कार्रवाई के दौरान क्षेत्र में सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम भी किए गए थे, ताकि किसी प्रकार की अप्रिय स्थिति न बने।
    20 अवैध निर्माण चिन्हित, कार्रवाई जारी
    नगर निगम अधिकारियों के मुताबिक, सिंहस्थ क्षेत्र में कुल 20 अवैध निर्माण चिन्हित किए गए हैं। इन सभी पर चरणबद्ध तरीके से कार्रवाई की जा रही है। प्रशासन का कहना है कि मेले की तैयारियों को ध्यान में रखते हुए इस क्षेत्र को पूरी तरह अतिक्रमण मुक्त रखना आवश्यक है।
    तीन मकान मालिकों को दो दिन की मोहलत
    कार्रवाई के दौरान तीन मकानों में रह रहे लोगों ने घर खाली करने के लिए समय मांगा। मानवीय दृष्टिकोण अपनाते हुए निगम ने उन्हें दो दिन का समय दिया है। यदि तय समय में निर्माण नहीं हटाया गया, तो प्रशासन स्वयं कार्रवाई करेगा।
    प्रशासन की अपील
    नगर निगम के अधिकारियों ने साफ कहा है कि सिंहस्थ जैसे बड़े धार्मिक आयोजन के लिए क्षेत्र का सुव्यवस्थित और सुरक्षित होना बेहद जरूरी है। नागरिकों से अपील की गई है कि वे बिना अनुमति किसी भी प्रकार का निर्माण न करें, अन्यथा सख्त कार्रवाई की जाएगी।

  • ‘इनकंप्लीट रजिस्ट्रेशन’ वॉटरमार्क हटाने के लिए VC से हुई रजिस्ट्री, Indore में सामने आई बड़ी गड़बड़ी

    ‘इनकंप्लीट रजिस्ट्रेशन’ वॉटरमार्क हटाने के लिए VC से हुई रजिस्ट्री, Indore में सामने आई बड़ी गड़बड़ी

    नई दिल्ली। इंदौर में Sampada 2.0 के जरिए रजिस्टर्ड एक सेल डीड में कथित गड़बड़ी सामने आने के बाद प्रशासनिक हलकों में हलचल मच गई है। मामला सिर्फ एक दस्तावेज तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे पूरे रजिस्ट्रेशन सिस्टम की पारदर्शिता और विश्वसनीयता पर सवाल उठने लगे हैं। आरोप है कि पहले से पूर्ण रजिस्टर्ड दस्तावेज को ‘इनकंप्लीट’ दिखाकर दोबारा रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया से गुजारा गया, जो नियमों के विपरीत हो सकता है।
    क्या है पूरा मामला?
    जानकारी के मुताबिक, 12 दिसंबर 2025 को एक सेल डीड का पंजीयन संपदा 2.0 के माध्यम से विधिवत किया गया था। इस दस्तावेज में खरीदार इंदौर निवासी महिला और विक्रेता दुबई में रहने वाले पक्षकार थे। रजिस्ट्रेशन के दौरान सभी जरूरी औपचारिकताएं स्टाम्प ड्यूटी, फीस भुगतान, पहचान सत्यापन और दस्तावेज परीक्षण पूरी कर ली गई थीं। इसके बाद दस्तावेज को वैध रूप से रजिस्टर्ड मानते हुए रजिस्ट्रेशन नंबर और इंडेक्स भी जारी कर दिया गया।
    लेकिन जब इसकी प्रमाणित कॉपी निकाली गई, तो हर पेज पर “INCOMPLETE REGISTRATION” का वॉटरमार्क दर्ज मिला। यहीं से विवाद शुरू हुआ और शिकायत विभाग तक पहुंची।
    विभाग की सलाह और दूसरी रजिस्ट्री
    शिकायत के बाद संबंधित अधिकारियों ने वॉटरमार्क हटाने में असमर्थता जताते हुए दोबारा रजिस्ट्रेशन कराने का सुझाव दिया। चूंकि विक्रेता दुबई में थे, इसलिए यह प्रक्रिया आसान नहीं थी। इसके बावजूद मामला उच्च अधिकारियों तक पहुंचा और आरोप है कि संपदा सिस्टम के जरिए दस्तावेज को दोबारा प्रोसेस में डालकर नया स्लॉट बुक किया गया। इस बार खरीदार ने स्थानीय स्तर पर उपस्थिति दर्ज कराई, जबकि विक्रेता ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए प्रक्रिया पूरी की। बताया जा रहा है कि पहले से पूरी हो चुकी सभी औपचारिकताएं दोबारा कराई गईं सिर्फ वॉटरमार्क हटाने के उद्देश्य से।
    तारीखों के अंतर ने बढ़ाए संदेह
    सबसे बड़ा सवाल दस्तावेज की तारीखों को लेकर उठ रहा है। रजिस्ट्री पर मूल तारीख 12 दिसंबर 2025 अंकित है, जबकि प्रक्रिया 26 फरवरी 2026 की बताई जा रही है। ऐसे में यह स्पष्ट नहीं है कि पहले से पूर्ण दस्तावेज को दोबारा प्रक्रिया में कैसे शामिल किया गया।
    कानूनी जानकारों के अनुसार, Registration Act 1908 के तहत किसी भी रजिस्टर्ड दस्तावेज को बिना अदालत के आदेश के निरस्त या संशोधित नहीं किया जा सकता। ऐसे में यह मामला नियमों के उल्लंघन की आशंका को जन्म देता है।
    शासन तक पहुंचा मामला
    इस पूरे घटनाक्रम को लेकर वरिष्ठ अधिकारियों मुख्य सचिव, वाणिज्यिक कर विभाग और रजिस्ट्रार कार्यालय को नोटिस भेजा गया है। नोटिस में मांग की गई है कि भविष्य में रजिस्टर्ड दस्तावेज सीधे उच्च स्तर से जारी किए जाएं, ताकि जवाबदेही तय हो सके और किसी भी प्रकार की छेड़छाड़ की संभावना कम हो।
    विभाग का पक्ष: तकनीकी गड़बड़ी
    वहीं, विभाग की ओर से इसे तकनीकी समस्या बताया जा रहा है। अधिकारियों का कहना है कि सॉफ्टवेयर अपग्रेडेशन के दौरान दस्तावेज की स्थिति ‘इनकंप्लीट’ दिखने लगी थी। बाद में दोनों पक्षों की सहमति से नियमानुसार दोबारा प्रक्रिया पूरी कराई गई। उनका दावा है कि पूरी कार्यवाही विधिसम्मत रही और इसमें किसी तरह की अनियमितता नहीं हुई।
    सिस्टम पर उठे बड़े सवाल
    हालांकि, इस पूरे मामले ने डिजिटल रजिस्ट्रेशन सिस्टम की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। यदि तकनीकी कारणों से एक वैध दस्तावेज ‘अपूर्ण’ दिख सकता है, तो इससे आम नागरिकों की संपत्ति संबंधी सुरक्षा पर भी खतरा पैदा हो सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के मामलों की निष्पक्ष जांच और सिस्टम में पारदर्शिता बढ़ाने के लिए ठोस कदम उठाना जरूरी है।

  • ओले-बारिश का असर: मौसम के बदलते मिजाज से ‘कंफ्यूज’ हुए पेड़-पौधे, समय से पहले निकल रहीं पत्तियां

    ओले-बारिश का असर: मौसम के बदलते मिजाज से ‘कंफ्यूज’ हुए पेड़-पौधे, समय से पहले निकल रहीं पत्तियां


    नई दिल्ली। Climate Change का असर अब सिर्फ तापमान या मौसम तक सीमित नहीं रहा, बल्कि प्रकृति के मूल चक्र को भी प्रभावित करने लगा है। भोपाल और आसपास के इलाकों में हालिया ओलावृष्टि और बेमौसम बारिश ने पेड़-पौधों को ‘कंफ्यूज’ कर दिया है। स्थिति यह है कि जिन पेड़ों को इस समय पतझड़ में होना चाहिए था, उनमें नई पत्तियां और कलियां निकलने लगी हैं। विशेषज्ञ इसे प्राकृतिक चक्र के साथ ‘धोखा’ मान रहे हैं, जिसका सीधा असर भविष्य की खाद्य सुरक्षा पर पड़ सकता है।

    समय से पहले पत्तियां, बिगड़ा प्राकृतिक चक्र

    पर्यावरण विशेषज्ञों के अनुसार, जंगलों में पाए जाने वाले सागौन जैसे पेड़ गर्मियों में अपने पत्ते गिरा देते हैं। लेकिन इस बार अप्रैल में हुई असामान्य बारिश के कारण उन्हें मानसून जैसा भ्रम हो गया। नतीजतन, पतझड़ के बाद भी उनमें नई पत्तियां निकल आईं। यह बदलाव सामान्य नहीं है और आने वाले समय में पौधों की वृद्धि और उत्पादन पर नकारात्मक असर डाल सकता है।

    खाद्यान्न उत्पादन पर मंडराया संकट

    विशेषज्ञ चेतावनी दे रहे हैं कि अगर यही स्थिति जारी रही, तो सबसे बड़ा खतरा Food Security पर होगा। मौसम के असंतुलन से फसलों का चक्र प्रभावित हो रहा है। फरवरी में अचानक बढ़ी गर्मी के कारण गेहूं समय से पहले पक गया, जिससे दाने पूरी तरह विकसित नहीं हो पाए। वहीं, बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि ने सब्जियों की फसल को भारी नुकसान पहुंचाया, जिससे बाजार में कीमतें भी बढ़ने लगी हैं।

    ‘सडन क्लाइमेट चेंज’ से बढ़ी अनिश्चितता

    मौसम में अचानक बदलाव गर्मी में बारिश और सर्दी में गर्मी अब आम होता जा रहा है। वैज्ञानिक इसे ‘सडन क्लाइमेट चेंज’ का परिणाम मानते हैं। इसके पीछे El Niño और La Niña जैसे वैश्विक कारक भी जिम्मेदार माने जाते हैं, जो समुद्री तापमान और हवाओं के जरिए पूरी दुनिया के मौसम को प्रभावित करते हैं। हालांकि, इनके ट्रिगर होने के कारणों पर अभी भी शोध जारी है।

    ग्लोबल वार्मिंग बना सबसे बड़ा खतरा

    Global Warming इस पूरे बदलाव की सबसे बड़ी वजह मानी जा रही है। इसके चलते आर्कटिक और अंटार्कटिक क्षेत्रों की बर्फ तेजी से पिघल रही है, जिससे समुद्र का जलस्तर बढ़ रहा है। विशेषज्ञों का अनुमान है कि 2050 तक कई तटीय शहरों पर डूबने का खतरा मंडरा सकता है। इसका असर भारत के तटीय क्षेत्रों पर भी पड़ेगा, जहां बड़े पैमाने पर पलायन की स्थिति बन सकती है।

    स्वास्थ्य और आयुर्वेद पर भी असर

    मौसम के इस असंतुलन का असर अब स्वास्थ्य पर भी दिखने लगा है। आयुर्वेद विशेषज्ञों के अनुसार, हर ऋतु के अनुसार तय उपचार पद्धतियां अब प्रभावित हो रही हैं। मार्च-अप्रैल का ‘संधिकाल’ पहले से ही संवेदनशील माना जाता था, लेकिन अब बदलते मौसम के कारण मरीजों को अतिरिक्त सावधानी बरतनी पड़ रही है। इम्युनिटी बढ़ाने और शरीर को अनुकूल बनाने के लिए नई उपचार पद्धतियों पर जोर दिया जा रहा है।

    प्रकृति से छेड़छाड़ का परिणाम

    विशेषज्ञ मानते हैं कि बढ़ता प्रदूषण, वनों की कटाई और अनियंत्रित मानवीय गतिविधियां इस असंतुलन की मुख्य वजह हैं। “जो बाहर है, वही अंदर है”—इस सिद्धांत के अनुसार प्रकृति में हो रहे बदलाव सीधे मानव जीवन और स्वास्थ्य को प्रभावित कर रहे हैं।

    बेमौसम बारिश और तापमान बदलाव से पेड़-पौधों का चक्र गड़बड़ा गया है, जिससे फसल उत्पादन और फूड सिक्योरिटी पर बड़ा खतरा पैदा हो रहा है।

  • तिलक विवाद गरमाया: Bhopal में Lenskart स्टाफ को तिलक लगाकर जताया विरोध, बोले-‘अपमान नहीं सहेंगे’

    तिलक विवाद गरमाया: Bhopal में Lenskart स्टाफ को तिलक लगाकर जताया विरोध, बोले-‘अपमान नहीं सहेंगे’


    नई दिल्ली। मध्यप्रदेश की राजधानी Bhopal के न्यू मार्केट रोशनपुरा इलाके में Lenskart के शोरूम के बाहर जमकर विरोध प्रदर्शन हुआ। हिंदू उत्सव समिति के कार्यकर्ताओं ने कथित ड्रेस कोड विवाद को लेकर शोरूम का घेराव किया और कर्मचारियों को तिलक लगाकर तथा मंत्रोच्चार के साथ कलावा बांधकर अपना विरोध दर्ज कराया।

     “सनातन प्रतीकों का अपमान नहीं सहेंगे”
    हिंदू उत्सव समिति के अध्यक्ष चंद्रशेखर तिवारी ने प्रदर्शन के दौरान कहा कि देश में तिलक, कलावा और बिंदी जैसे धार्मिक प्रतीकों का सम्मान होना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि यदि किसी कंपनी ने इन पर रोक लगाने की कोशिश की, तो उसका विरोध किया जाएगा। उन्होंने यहां तक कहा कि संगठन Lenskart के बहिष्कार की अपील कर रहा है और जरूरत पड़ी तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा।

     कर्मचारियों का दावा- “कोई रोक नहीं”
    प्रदर्शन के बीच शोरूम कर्मचारियों ने इन आरोपों को खारिज किया। एक कर्मचारी ने बताया कि उन्हें कभी भी तिलक या कलावा पहनने से नहीं रोका गया। उनका कहना है कि नवरात्रि जैसे अवसरों पर वे खुद इन धार्मिक प्रतीकों के साथ काम पर आते रहे हैं। कर्मचारियों के मुताबिक, सोशल मीडिया पर चल रही बातें उनकी व्यक्तिगत अनुभव से मेल नहीं खातीं और उन्हें कंपनी की ओर से कोई दबाव महसूस नहीं हुआ।

    सोशल मीडिया से शुरू हुआ पूरा विवाद
    दरअसल, इस पूरे मामले की शुरुआत सोशल मीडिया पर वायरल एक कथित पॉलिसी डॉक्यूमेंट से हुई। इसमें दावा किया गया कि कर्मचारियों को बिंदी, तिलक और कलावा पहनने से रोका गया है, जबकि हिजाब और पगड़ी को कुछ शर्तों के साथ अनुमति दी गई है। इसी मुद्दे को लेकर सोशल मीडिया पर बहस तेज हो गई और कई लोगों ने इसे भेदभावपूर्ण बताया।

     ‘ग्रूमिंग गाइड’ पर भी उठे सवाल
    सोशल मीडिया पर एक कथित ‘ग्रूमिंग गाइड’ भी वायरल हुई, जिसमें महिला कर्मचारियों के लिए बिंदी और क्लचर पर पाबंदी की बात कही गई थी। साथ ही कलावा या रिस्ट बैंड पर भी रोक का दावा किया गया।
    हालांकि, इन दस्तावेजों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हो पाई है, लेकिन इससे विवाद और गहरा गया।

    कंपनी की सफाई
    विवाद बढ़ने के बाद Peyush Bansal ने सफाई देते हुए कहा कि कंपनी सभी धर्मों और उनकी मान्यताओं का सम्मान करती है। कर्मचारियों को अपने धार्मिक प्रतीक पहनने की पूरी स्वतंत्रता है।
    इसके बावजूद प्रदर्शन कर रहे संगठन कंपनी के जवाब से संतुष्ट नजर नहीं आए और उन्होंने विरोध जारी रखने की बात कही है।

  • MP में पहली बार ‘वॉर्म नाइट’ का अलर्ट, रातें भी होंगी गर्म, कई शहरों में दिन का पारा 42 डिग्री के पार

    MP में पहली बार ‘वॉर्म नाइट’ का अलर्ट, रातें भी होंगी गर्म, कई शहरों में दिन का पारा 42 डिग्री के पार

    भोपाल। मध्य प्रदेश में इस सीजन पहली बार ‘वॉर्म नाइट’ की स्थिति बनने जा रही है। मौसम विभाग (IMD) के अनुसार, मंगलवार रात भोपाल सहित 9 शहरों में रात के समय भी गर्मी का असर बना रहेगा। वहीं, डिंडौरी जिले में लू चलने की चेतावनी जारी की गई है। इंदौर, ग्वालियर, उज्जैन और जबलपुर समेत प्रदेश के अधिकतर हिस्सों में दिन का तापमान 42 डिग्री सेल्सियस से ऊपर बना हुआ है।

    इन शहरों में रात भी देगी गर्मी का एहसास

    मंगलवार रात जिन शहरों में ‘वॉर्म नाइट’ का अलर्ट जारी किया गया है, उनमें भोपाल, सीहोर, रायसेन, नर्मदापुरम, छिंदवाड़ा, पांढुर्णा, सिवनी, मंडला और बालाघाट शामिल हैं। इससे पहले रविवार और सोमवार की रात भी भोपाल, छिंदवाड़ा, मंडला और नर्मदापुरम में गर्म रात दर्ज की गई थी।

    क्या होती है ‘वॉर्म नाइट’ की स्थिति?
    मौसम विभाग के अनुसार, ‘वॉर्म नाइट’ तब मानी जाती है जब रात का न्यूनतम तापमान सामान्य से काफी अधिक हो। यदि यह तापमान सामान्य से 4.5 से 6.4 डिग्री सेल्सियस ज्यादा हो और दिन का तापमान 40 डिग्री या उससे ऊपर रहे, तो ऐसी स्थिति बनती है। यदि रात का तापमान सामान्य से 6.4 डिग्री से ज्यादा बढ़ जाए, तो उसे ‘सीवियर वॉर्म नाइट’ कहा जाता है। फिलहाल प्रदेश में ऐसी स्थिति नहीं बनी है।

    खजुराहो सबसे ज्यादा गर्म, 43°C पहुंचा पारा
    सोमवार को भी प्रदेश के कई इलाकों में भीषण गर्मी रही। छतरपुर के खजुराहो में सबसे अधिक 43 डिग्री सेल्सियस तापमान दर्ज हुआ। दतिया में 42.3 डिग्री, रतलाम और सीधी में 42.2 डिग्री तापमान रहा। इसके अलावा रीवा और श्योपुर में 42 डिग्री, रायसेन में 41.6 डिग्री, नौगांव में 41.5 डिग्री और नरसिंहपुर में 41.4 डिग्री तापमान रिकॉर्ड किया गया। प्रदेश के प्रमुख शहरों में ग्वालियर सबसे गर्म रहा, जहां पारा 42.5 डिग्री तक पहुंचा। भोपाल में 39.8 डिग्री, इंदौर और उज्जैन में 39.5 डिग्री तथा जबलपुर में 38.5 डिग्री तापमान दर्ज किया गया।

    दिन में बादल, कहीं बारिश और गरज-चमक

    रविवार और सोमवार को प्रदेश के कई जिलों में मौसम बदला हुआ नजर आया। खरगोन, इंदौर, सीहोर, सागर, अशोकनगर, आगर-मालवा, नर्मदापुरम, गुना, सतना, मुरैना, हरदा, खंडवा, बड़वानी, उज्जैन और बैतूल में बारिश के साथ गरज-चमक देखने को मिली। भोपाल में सुबह देर से धूप निकली।

    मौसम में बदलाव की वजह क्या है?

    पिछले तीन दिनों से प्रदेश के पूर्वी हिस्से में साइक्लोनिक सर्कुलेशन और ट्रफ लाइन सक्रिय है, जिसके कारण बादल छाए रहे और कुछ हिस्सों में आंधी-बारिश भी हुई। मौसम विभाग के अनुसार, 23 अप्रैल को पश्चिमी हिमालयी क्षेत्र में एक नया वेस्टर्न डिस्टरबेंस सक्रिय हो सकता है, हालांकि इसका असर मध्य प्रदेश में सीमित रहने की संभावना है।

  • मप्र के मुख्यमंत्री आज तमिलनाडु के चुनावी दौरे पर, भाजपा उम्मीदवारों के समर्थन में करेंगे प्रचार

    मप्र के मुख्यमंत्री आज तमिलनाडु के चुनावी दौरे पर, भाजपा उम्मीदवारों के समर्थन में करेंगे प्रचार


    भोपाल।
    मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव आज मंगलवार को तमिलनाडु के एक दिवसीय चुनावी दौरे पर रहेंगे। वे तमिलनाडु विधानसभा चुनाव 2026 के लिए भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के उम्मीदवारों के समर्थन में प्रचार करेंगे।

    निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार, डॉ. मोहन यादव दोपहर 1:00 बजे भोपाल से कोयंबटूर के लिए रवाना होंगे और वहां से रासिपुरम विधानसभा क्षेत्र पहुंचकर पार्टी की बैठक लेंगे और स्थानीय प्रत्याशी के समर्थन में कार्यकर्ताओं को संबोधित करेंगे। इसके बाद वे सायं 4:30 बजे अविनाशी विधानसभा क्षेत्र में भाजपा प्रत्याशी डॉ. एल. मुरूगन के समर्थन में चुनाव प्रचार करेंगे। वे यहां जनसभा को संबोधित कर पार्टी कार्यकर्ताओं और स्थानीय लोगों से वोट की अपील करेंगे। इसके बाद मुख्यमंत्री डॉ. यादव सायं 6:15 बजे कोयंबटूर से भोपाल के लिए वापस रवाना होंगे।

  • मप्रः ग्वालियर के शक्ति दीदी नवाचार को मुख्यमंत्री उत्कृष्टता पुरस्कार

    मप्रः ग्वालियर के शक्ति दीदी नवाचार को मुख्यमंत्री उत्कृष्टता पुरस्कार


    ग्वालियर।
    मध्य प्रदेश के ग्वालियर जिले में महिला सशक्तिकरण की नई इबारत लिखने वाले “शक्ति दीदी” नवाचार को अब प्रदेश स्तर पर बड़ी पहचान मिलने जा रही है। राज्य शासन ने इस अनूठी पहल को “मुख्यमंत्री उत्कृष्टता पुरस्कार” के लिए चयनित किया है।

    आज मंगलवार को भोपाल स्थित आरसीवीपी नरोन्हा प्रशासनिक अकादमी में आयोजित भव्य समारोह में ग्वालियर कलेक्टर रुचिका चौहान को इस प्रतिष्ठित पुरस्कार से सम्मानित किया जाएगा। मुख्यमंत्री उत्कृष्टता पुरस्कार के तहत कलेक्टर रुचिका चौहान, सहायक आपूर्ति अधिकारी सौरभ जैन और सहायक संचालक (महिला एवं बाल विकास) राहुल पाठक को संयुक्त रूप से एक लाख रुपये की नकद राशि एवं प्रशस्ति पत्र प्रदान किए जाएंगे।

    जनसम्पर्क अधिकारी हितेन्द्र सिंह भदौरिया ने जानकारी देते हुए बताया कि ग्वालियर जिले को यह पुरस्कार “सामाजिक समावेश एवं सशक्तिकरण” कैटेगरी में दिया जा रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की मंशानुसार, समाज की अंतिम पंक्ति की महिलाओं को मुख्यधारा से जोड़ने के लिए कलेक्टर रुचिका चौहान ने 2 जनवरी 2025 को इस नवाचार का आगाज़ किया था।

    पेट्रोल पंपों पर कमान संभाल रहीं ‘शक्ति दीदियाँ’

    उन्होंने बताया कि “शक्ति दीदी” नवाचार के तहत जिले की ऐसी महिलाओं को चुना गया जो आर्थिक रूप से बेहद कमजोर थीं, अपनों द्वारा उपेक्षित थीं या विधवा थीं। जिला प्रशासन ने इन महिलाओं को पेट्रोल पंपों पर ‘फ्यूल डिलीवरी वर्कर’ के रूप में सम्मानजनक रोजगार दिलाया। पिछले साल 2 जनवरी 2025 को महज पांच महिलाओं से शुरू हुआ यह कारवां मौजूदा अप्रैल माह तक 112 “शक्ति दीदियों” तक पहुँच गया है। शुरुआत में झिझक रहे पेट्रोल पंप संचालक अब इन महिलाओं की मेहनत और ईमानदारी देखकर स्वयं प्रशासन से “शक्ति दीदी” की मांग कर रहे हैं।

    शक्ति दीदियों की सुरक्षा व सुविधा का पूरा ध्यान

    जनसम्पर्क अधिकारी के अनुसार, “शक्ति दीदी” नवाचार के तहत जिला प्रशासन द्वारा जरूरतमंद महिलाओं को पेट्रोल पंपों पर केवल सम्मानजनक रोजगार ही नहीं दिलाया गया है बल्कि उनकी सुरक्षा व सुविधा का भी पूरा ध्यान रखा गया है। कलेक्टर रुचिका चौहान ने शक्ति दीदी नवाचार के लिये एक वॉट्सएप ग्रुप तैयार कराया है, जिस पर जिला प्रशासन, पुलिस, पेट्रो पंप के संचालक एवं शक्ति दीदी जुड़ी हैं। जिस पर शक्ति दीदी अपनी समस्याएं बता सकती हैं। साथ ही प्रशासनिक अधिकारी व संबंधित पुलिस थाने की पुलिस भी पेट्रोल पंपों पर लगातार गश्त कर शक्ति दीदियों को भरोसा दिलाती हैं कि आप सब बेखौफ होकर अपना काम करें। हम सब आपकी सुरक्षा के लिये 24 घंटे सजग हैं। पेट्रोल पंप पर महिला फ्यूल डिलेवरी वर्कर की ड्यूटी का समय प्रात: 9 बजे से सायंकाल 5 बजे तक रखा गया है।

    शक्ति दीदियों का कहना है – हमें सम्मान के साथ मिला रोजगार

    “शक्ति दीदी” बनी महिलाओं का कहना है कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने जिले को महिला कलेक्टर देकर उनके दु:ख-दर्द को समझने वाला सहारा प्रदान किया है। महिलाएं कहती हैं कि इस नवाचार ने न केवल उन्हें आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाया है, बल्कि समाज में हमारा मान-सम्मान भी बढ़ाया है।

  • आस्था पर शराब का साया, नर्मदा तट पर अवैध कारोबार से उठे बड़े सवाल

    आस्था पर शराब का साया, नर्मदा तट पर अवैध कारोबार से उठे बड़े सवाल


    मंडला । मध्य प्रदेश के मंडला में बहने वाली नर्मदा नदी के किनारे आज एक चिंताजनक तस्वीर सामने आ रही है जो आस्था और व्यवस्था दोनों पर सवाल खड़े करती है। यह वही पवित्र धरा है जहां हर दिन श्रद्धालु पूजा अर्चना और शांति की तलाश में पहुंचते हैं लेकिन अब इसी आस्था के केंद्र के आसपास अवैध शराब का कारोबार खुलेआम फलता फूलता नजर आ रहा है।

    कभी इस क्षेत्र की पवित्रता को बनाए रखने के लिए पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने स्पष्ट घोषणा की थी कि नर्मदा तट से पांच किलोमीटर के दायरे में शराब की बिक्री पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगी। इस फैसले का उद्देश्य था कि आस्था और धार्मिक मर्यादाओं की रक्षा हो सके और नर्मदा किनारे का वातावरण स्वच्छ और पवित्र बना रहे। लेकिन आज यह घोषणा सिर्फ कागजों तक सीमित नजर आती है।

    जमीनी हकीकत इससे बिल्कुल अलग है। नगर के पान ठेले छोटे दुकानों होटल और ढाबों पर खुलेआम शराब बेची जा रही है। न केवल बिक्री बल्कि लोगों को बैठाकर वहीं शराब पिलाई जा रही है। यह सब इतनी बेखौफी से हो रहा है जैसे नियम कानून का कोई अस्तित्व ही न हो।

    सबसे बड़ा सवाल यह उठता है कि क्या प्रशासन को यह सब दिखाई नहीं दे रहा या फिर जानबूझकर नजरअंदाज किया जा रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यह अवैध कारोबार लंबे समय से चल रहा है और कार्रवाई के नाम पर सिर्फ औपचारिकताएं ही की जाती हैं। कभी कभार छापेमारी होती है कुछ बोतलें जब्त होती हैं और फिर सब कुछ पहले जैसा शुरू हो जाता है।

    यह मामला सिर्फ कानून के उल्लंघन तक सीमित नहीं है बल्कि आस्था के साथ भी सीधा खिलवाड़ है। मंडला की पहचान ही नर्मदा तट की पवित्रता से जुड़ी हुई है। लोग यहां दूर दूर से आते हैं मोक्ष और शांति की कामना लेकर लेकिन जब इसी पवित्र स्थान पर शराब का कारोबार खुलेआम हो तो यह श्रद्धा को ठेस पहुंचाने वाला है।

    स्थिति यह दर्शाती है कि कहीं न कहीं सिस्टम कमजोर पड़ रहा है या फिर अवैध कारोबार करने वालों के हौसले इतने बुलंद हो चुके हैं कि उन्हें किसी का डर नहीं रह गया है। यह भी सवाल उठता है कि जिम्मेदारी किसकी है प्रशासन की स्थानीय पुलिस की या फिर समाज की जो सब कुछ देखकर भी चुप है।

    आज जरूरत सिर्फ खबर दिखाने की नहीं बल्कि ठोस कार्रवाई की है। उन वादों को जमीन पर उतारने की है जो कभी जनता से किए गए थे। अगर समय रहते इस पर सख्ती नहीं की गई तो वह दिन दूर नहीं जब आस्था की यह नगरी अपनी पहचान खोने लगेगी।

    यह मामला केवल एक अवैध कारोबार का नहीं बल्कि आस्था कानून और व्यवस्था तीनों की परीक्षा है। अब देखना यह होगा कि जिम्मेदार तंत्र इस चुनौती का सामना कैसे करता है और क्या नर्मदा तट की पवित्रता को फिर से स्थापित किया जा सकेगा या नहीं।