Category: Madhya Pradesh

  • मजदूरों की जिंदगी बदलेगी अब स्वास्थ्य रिकॉर्ड रहेगा ऑनलाइन सरकार देगी यूनिक हेल्थ पहचान

    मजदूरों की जिंदगी बदलेगी अब स्वास्थ्य रिकॉर्ड रहेगा ऑनलाइन सरकार देगी यूनिक हेल्थ पहचान


    भोपाल । मध्यप्रदेश में लाखों मजदूरों के जीवन को आसान बनाने की दिशा में सरकार ने एक अहम और दूरगामी कदम उठाया है। अब प्रदेश के श्रमिकों के लिए यूनिक हेल्थ आईडी तैयार की जाएगी जिसके जरिए उनका पूरा स्वास्थ्य रिकॉर्ड डिजिटल रूप में सुरक्षित रहेगा। इस पहल की जिम्मेदारी श्रम विभाग को सौंपी गई है और इसका उद्देश्य मजदूरों को सरकारी योजनाओं का लाभ आसानी से उपलब्ध कराना है।

    इस नई व्यवस्था के तहत प्रत्येक मजदूर को एक अलग पहचान संख्या दी जाएगी जो पूरी तरह यूनिक होगी। इस आईडी के माध्यम से मजदूरों की स्वास्थ्य से जुड़ी सभी जानकारी जैसे जांच रिपोर्ट इलाज का इतिहास और डॉक्टर की सलाह एक ही प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध रहेगी। सबसे खास बात यह है कि यह रिकॉर्ड कहीं भी और कभी भी देखा जा सकेगा जिससे मजदूरों को बार बार दस्तावेज साथ रखने की जरूरत नहीं पड़ेगी।

    सरकार भविष्य में एक ऐसा ऑनलाइन हेल्थ बैंक भी तैयार करने जा रही है जिसमें मजदूरों की सभी मेडिकल रिपोर्ट सुरक्षित रखी जाएंगी। इससे इलाज के दौरान डॉक्टरों को सही जानकारी तुरंत मिल सकेगी और उपचार में देरी नहीं होगी। यह पहल खासतौर पर उन मजदूरों के लिए राहत लेकर आएगी जो काम के सिलसिले में बार बार शहर बदलते रहते हैं और जिनका रिकॉर्ड अक्सर बिखर जाता है।

    दरअसल अब तक देखा गया है कि मजदूरों की असमय मृत्यु या दुर्घटना के मामलों में उनके परिवारों को सरकारी सहायता पाने के लिए काफी परेशानी उठानी पड़ती है। दस्तावेजों की कमी और पहचान के अभाव में उन्हें दफ्तरों के चक्कर लगाने पड़ते हैं। नई हेल्थ आईडी व्यवस्था इस समस्या को काफी हद तक खत्म कर सकती है क्योंकि सभी जरूरी जानकारी पहले से डिजिटल रूप में उपलब्ध रहेगी।

    प्रदेश में पहले से ही कई योजनाएं संचालित हैं जिनमें पंजीकृत मजदूरों को आर्थिक सहायता दी जाती है। सामान्य मृत्यु पर परिजनों को दो लाख रुपए और दुर्घटना में मृत्यु होने पर चार लाख रुपए तक की सहायता मिलती है। इसके अलावा महिला श्रमिकों को प्रसूति सहायता बच्चों को शिक्षा सहायता और विधवाओं को नियमित आर्थिक सहयोग जैसी सुविधाएं भी दी जाती हैं। लेकिन इन योजनाओं का लाभ लेने में रिकॉर्ड की कमी अक्सर बाधा बनती रही है।

    नई यूनिक हेल्थ आईडी को उसी मॉडल पर विकसित किया जा रहा है जिस पर देश में डिजिटल हेल्थ पहचान प्रणाली काम कर रही है लेकिन इसमें खास तौर पर मजदूरों की जरूरतों को ध्यान में रखा जाएगा। इसमें काम के दौरान होने वाली बीमारियों दुर्घटनाओं और नियमित स्वास्थ्य जांच का पूरा विवरण शामिल रहेगा जिससे उनकी सेहत पर बेहतर निगरानी रखी जा सकेगी।

    सरकार का मानना है कि इस पहल से मजदूरों को न सिर्फ बेहतर स्वास्थ्य सुविधा मिलेगी बल्कि उन्हें समय पर आर्थिक और सामाजिक सुरक्षा भी सुनिश्चित हो सकेगी। यदि इस योजना को सही तरीके से लागू किया गया तो यह मजदूर वर्ग के लिए एक बड़ा बदलाव साबित हो सकती है और उनके जीवन में वास्तविक राहत ला सकती है।

  • सिंगरौली डकैती में सुरक्षा में बड़ी चूक, बैंक में नहीं था गार्ड

    सिंगरौली डकैती में सुरक्षा में बड़ी चूक, बैंक में नहीं था गार्ड


    नई दिल्ली। सिंगरौली में बैंक ऑफ महाराष्ट्र की बैढ़न शाखा में हुई 15 करोड़ की सनसनीखेज डकैती के मामले में अब जांच के दौरान बड़ी लापरवाहियां सामने आई हैं। पांच हथियारबंद बदमाश दिनदहाड़े करीब 10 किलो सोना और 20 लाख रुपए नकद लूटकर फरार हो गए थे। पुलिस ने एक आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है, लेकिन चार अभी भी फरार हैं और लूटा गया पूरा माल भी बरामद नहीं हो सका है। दैनिक भास्कर की पड़ताल में इस पूरे मामले में तीन बड़ी चूक सामने आई हैं, जिसने बैंक और पुलिस दोनों की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

    पहली चूक बैंक में वर्षों से नहीं था सिक्योरिटी गार्ड

    जांच में सामने आया कि बैंक की इस शाखा में पिछले कई वर्षों से कोई सिक्योरिटी गार्ड तैनात ही नहीं था। 2018 में खुली इस ब्रांच में सुरक्षा के नाम पर सिर्फ सीसीटीवी कैमरे लगे थे। स्थानीय लोगों के मुताबिक, उन्होंने कभी यहां गार्ड नहीं देखा। बैंक के जोनल अधिकारी ओंकार प्रसाद ने भी स्वीकार किया कि खर्च कम करने के चलते गार्ड की नियुक्ति बंद कर दी गई थी। ऐसे में सवाल उठता है कि इतनी बड़ी रकम और सोने की सुरक्षा बिना गार्ड के कैसे छोड़ी गई।

    दूसरी चूक सूचना के बावजूद 20 मिनट देरी से पहुंची पुलिस

    डकैती की सूचना मिलने के बावजूद पुलिस को मौके पर पहुंचने में करीब 20 मिनट का समय लग गया, जबकि थाना मात्र डेढ़ किलोमीटर दूर था। अनुमान है कि सामान्य परिस्थितियों में यह दूरी 7-8 मिनट में तय की जा सकती थी। देरी के कारण बदमाशों को भागने का पर्याप्त समय मिल गया। हालांकि, पुलिस अधिकारियों का कहना है कि बदमाशों के हथियारबंद होने की जानकारी के चलते तैयारी में समय लगा।

    तीसरी चूक चेक पॉइंट पर नहीं रोके गए आरोपी

    घटना के बाद बदमाश बाइक से मस्जिद तिराहा, अंबेडकर चौक होते हुए शहर से बाहर निकल गए। इन रास्तों पर पुलिस के चेक पॉइंट मौजूद थे, लेकिन समय पर अलर्ट नहीं किया गया। आरोपी करीब 35 किलोमीटर का सफर तय कर छत्तीसगढ़ सीमा में प्रवेश कर गए। सवाल उठ रहा है कि वायरलेस सिस्टम के जरिए तत्काल सूचना क्यों नहीं दी गई, जिससे उन्हें रोका जा सकता था।

    अलार्म सिस्टम भी निकला बेअसर

    बैंक में लगा अलार्म सिस्टम भी महज औपचारिकता साबित हुआ। इसके स्विच मैनेजर, कैशियर और डिप्टी मैनेजर के पास थे, लेकिन इसे पुलिस कंट्रोल रूम से नहीं जोड़ा गया था। बैंक अधिकारियों का कहना है कि अलार्म बजाने पर भी तत्काल मदद नहीं मिलती, इसलिए इसका कोई खास उपयोग नहीं रहा।

    आरपीएफ की सतर्कता से पकड़ा गया एक आरोपी

    इस मामले में एक आरोपी कमलेश कुमार को रेलवे सुरक्षा बल की सतर्कता से पकड़ा गया। सिंगरौली-पटना ट्रेन में संदिग्ध गतिविधि के आधार पर उसे हिरासत में लिया गया। उसके पास से 15 लाख 20 हजार रुपए और 61 ग्राम सोना बरामद हुआ। पूछताछ में उसने पहले गुमराह करने की कोशिश की, लेकिन सख्ती के बाद डकैती में शामिल होने की बात कबूल कर ली। कोर्ट ने उसे 8 दिन की पुलिस रिमांड पर भेजा है।

    अब भी फरार चार आरोपी, पुलिस कर रही तलाश

    पुलिस के अनुसार, अन्य आरोपी छत्तीसगढ़ की ओर भागे हैं। उनके फोटो आसपास के राज्यों में सर्कुलेट कर दिए गए हैं और जल्द गिरफ्तारी का दावा किया जा रहा है।

  • लापरवाही या भ्रष्टाचार ,लोकायुक्त की कार्रवाई से हिला शिक्षा विभाग, DEO सहित कई पर मामला दर्ज

    लापरवाही या भ्रष्टाचार ,लोकायुक्त की कार्रवाई से हिला शिक्षा विभाग, DEO सहित कई पर मामला दर्ज


    सिंगरौली । सिंगरौली जिले के शिक्षा विभाग में सामने आए करोड़ों रुपए के कथित घोटाले ने प्रशासनिक व्यवस्था को झकझोर कर रख दिया है लंबे समय से चल रही अनियमितताओं की शिकायतों के बाद अब लोकायुक्त ने सख्त कदम उठाते हुए जिला शिक्षा अधिकारी समेत कई जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ भ्रष्टाचार का मामला दर्ज कर लिया है इस कार्रवाई को सरकारी तंत्र में जवाबदेही तय करने की दिशा में एक अहम पहल के रूप में देखा जा रहा है

    पूरा मामला शिक्षा विभाग में विभिन्न मदों में की गई भारी भरकम खरीदी से जुड़ा है शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया था कि अधिकारियों ने नियमों को दरकिनार करते हुए पद का दुरुपयोग किया और वित्तीय अनियमितताओं को अंजाम दिया जांच में सामने आया कि जिले की 558 शालाओं के लिए स्वच्छता और कीटाणुशोधन सामग्री की खरीदी की गई जिस पर करीब 97 लाख 67 हजार रुपए खर्च किए गए इसके अलावा 19 विद्यालयों के लिए वर्चुअल रियलिटी लैब स्थापित करने के नाम पर लगभग 4 करोड़ 68 लाख रुपए खर्च किए गए

    यही नहीं 61 विद्यालयों में विद्युत व्यवस्था उपकरण और सामान्य मरम्मत सामग्री की खरीदी पर भी करीब 3 करोड़ 5 लाख रुपए खर्च किए गए इन सभी खर्चों में टेंडर प्रक्रिया स्वीकृति और भुगतान को लेकर गंभीर सवाल उठे दस्तावेजों की प्रारंभिक जांच में यह संकेत मिले कि कई जगहों पर निर्धारित प्रक्रियाओं का पालन नहीं किया गया और वित्तीय लेनदेन में पारदर्शिता की कमी रही

    लोकायुक्त रीवा की टीम ने 15 अप्रैल 2026 को जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय सिंगरौली पहुंचकर कार्रवाई की और खरीदी से जुड़े महत्वपूर्ण दस्तावेज जब्त कर लिए इन दस्तावेजों में टेंडर प्रक्रिया से जुड़े कागजात स्वीकृति आदेश सप्लाई रिकॉर्ड बिल और भुगतान संबंधी फाइलें शामिल हैं इन सभी दस्तावेजों के आधार पर अब पूरे मामले की गहराई से जांच की जा रही है ताकि यह स्पष्ट हो सके कि किस स्तर पर और किस तरह से अनियमितताएं की गईं

    इस मामले में जिला शिक्षा अधिकारी सूर्यभान सिंह सहायक संचालक शिक्षा राजधर साकेत जिला परियोजना समन्वयक रामलखन शुक्ल और सहायक परियोजना समन्वयक वित्त छविलाल सिंह सहित अन्य अधिकारियों के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 1988 और भारतीय न्याय संहिता 2023 की विभिन्न धाराओं के तहत अपराध पंजीबद्ध किया गया है

    लोकायुक्त अधिकारियों का कहना है कि जांच के दौरान प्रारंभिक रूप से अनियमितताएं सामने आई हैं जिसके आधार पर FIR दर्ज की गई है अब जब्त किए गए दस्तावेजों और वित्तीय लेनदेन की परत दर परत जांच की जाएगी ताकि पूरे नेटवर्क और जिम्मेदार लोगों की पहचान की जा सके

    इस कार्रवाई के बाद शिक्षा विभाग में हड़कंप मच गया है और इसे एक सख्त संदेश के रूप में देखा जा रहा है कि सरकारी धन के दुरुपयोग को किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा यह मामला आने वाले समय में और बड़े खुलासों की ओर इशारा कर रहा है और पूरे प्रदेश की नजर अब इस जांच पर टिकी हुई है

  • लापरवाही पर कार्रवाई की चेतावनी, कलेक्टर ने योजनाओं की प्रगति जांची

    लापरवाही पर कार्रवाई की चेतावनी, कलेक्टर ने योजनाओं की प्रगति जांची


    नई दिल्ली। सीधी जिले के कुसमी जनपद पंचायत अंतर्गत वस्तुआ गांव में सोमवार को कलेक्टर विकास मिश्रा ने विभिन्न विकास कार्यों का औचक निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने खास तौर पर जल जीवन मिशन के तहत चल रही नल-जल योजना की प्रगति का जायजा लिया और अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए कि सभी कार्य तय समयसीमा में और गुणवत्ता के साथ पूरे किए जाएं। निरीक्षण के दौरान कलेक्टर ने साफ कहा कि इस योजना का उद्देश्य हर घर तक स्वच्छ पेयजल पहुंचाना है, इसलिए किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

    लापरवाही पर सख्त कार्रवाई की चेतावनी

    कलेक्टर ने अधिकारियों और ठेकेदारों को चेतावनी देते हुए कहा कि यदि कार्यों में देरी या गुणवत्ता में कमी पाई गई तो संबंधितों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने जल जीवन मिशन को सरकार की प्राथमिकता बताते हुए कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में पेयजल व्यवस्था मजबूत करना बेहद जरूरी है। इस दौरान अधिकारियों को नियमित मॉनिटरिंग करने और कार्यों की प्रगति पर नजर रखने के निर्देश भी दिए गए।

    नदी-नालों की सफाई पर जोर, जल संरक्षण पर ध्यान

    निरीक्षण के दौरान कलेक्टर ने गांव में बहने वाले नदियों और नालों की साफ-सफाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि जल स्रोत स्वच्छ रहेंगे तो ही ग्रामीणों को शुद्ध पानी मिल सकेगा। साथ ही उन्होंने जल संरक्षण और स्वच्छता को प्राथमिकता देने पर जोर दिया, ताकि लंबे समय तक जल संकट की स्थिति न बने।

    जुलाई तक कार्य पूर्ण करने का लक्ष्य, अधिकारी रहे मौजूद

    इस मौके पर एसडीएम शैलेश द्विवेदी और जनपद पंचायत सीईओ ज्ञानेंद्र मिश्रा सहित अन्य विभागीय अधिकारी मौजूद रहे। कलेक्टर ने सभी निर्माण कार्यों को जुलाई तक पूरा करने का लक्ष्य निर्धारित किया और अधिकारियों को क्षेत्र में सक्रिय रहकर निगरानी करने के निर्देश दिए।

    जनसमस्याओं के समाधान पर दिया जोर

    कलेक्टर विकास मिश्रा ने अधिकारियों को निर्देशित किया कि वे आम जनता की समस्याओं का समाधान स्थानीय स्तर पर ही सुनिश्चित करें। उन्होंने कहा कि ग्रामीणों को छोटी-छोटी समस्याओं के लिए जिला मुख्यालय तक न आना पड़े, इसके लिए जिम्मेदार अधिकारी अपने मुख्यालय पर ही समाधान करें।

  • स्कूल परिसर में आगजनी से नुकसान, प्रधानाध्यापक ने दर्ज कराई शिकायत

    स्कूल परिसर में आगजनी से नुकसान, प्रधानाध्यापक ने दर्ज कराई शिकायत


    नई दिल्ली। सतना शहर के महदेवा स्थित शासकीय पूर्व माध्यमिक विद्यालय की बगिया में आगजनी की गंभीर घटना सामने आई है। अज्ञात असामाजिक तत्वों ने स्कूल परिसर में आग लगा दी, जिससे सैकड़ों पेड़-पौधे जलकर नष्ट हो गए। इस घटना ने न सिर्फ पर्यावरण को नुकसान पहुंचाया, बल्कि स्कूल प्रशासन और स्थानीय लोगों को भी झकझोर दिया है। मामले में प्रधानाध्यापक आलोक त्रिपाठी ने सिविल लाइन थाने में शिकायत दर्ज कराई है।

    छुट्टी के बाद दिया गया घटना को अंजाम

    जानकारी के अनुसार, शनिवार शाम करीब 4:30 बजे स्कूल की छुट्टी होने के बाद स्टाफ परिसर से चला गया था। इसके बाद अज्ञात लोगों ने सुनसान का फायदा उठाकर बगिया में आग लगा दी। रविवार को अवकाश के दिन वार्ड पार्षद अच्छेलाल कोल ने परिसर में आग लगी देखी और तुरंत इसकी सूचना स्कूल के प्रधानाध्यापक को दी।

    मशक्कत के बाद बुझी आग, तब तक भारी नुकसान

    सूचना मिलते ही प्रधानाध्यापक और पार्षद मौके पर पहुंचे और काफी प्रयासों के बाद आग पर काबू पाया गया। हालांकि, तब तक करीब एक सैकड़ा पेड़-पौधे पूरी तरह झुलस चुके थे। घटना को जानबूझकर अंजाम दिए जाने की आशंका जताई जा रही है।

    पहले भी हो चुकी हैं ऐसी घटनाएं

    प्रधानाध्यापक आलोक त्रिपाठी के अनुसार, स्कूल परिसर में अब तक 2 हजार से अधिक पौधों का रोपण और संरक्षण किया गया है, जिनमें करीब 600 वृक्ष विकसित हो चुके हैं। उन्होंने बताया कि इस तरह की आगजनी की घटनाएं पहले भी कई बार हो चुकी हैं, जिससे लगातार पर्यावरण को नुकसान हो रहा है।

  • खुशियों का जश्न बना मातम ,नाहरकोला में शादी के बीच चाकू चले, पुलिस पर भी हमला

    खुशियों का जश्न बना मातम ,नाहरकोला में शादी के बीच चाकू चले, पुलिस पर भी हमला


    इटारसी/ नर्मदापुरम । नर्मदापुरम जिले के नाहरकोला गांव में शादी समारोह के दौरान डीजे विवाद ने हिंसक रूप ले लिया जिसमें एक व्यक्ति की मौत और आरक्षक समेत 6 लोग घायल हो गए  जिले के शिवपुर थाना क्षेत्र के ग्राम नाहरकोला में एक शादी समारोह उस वक्त भयावह हिंसा में बदल गया जब मामूली सा डीजे बजाने का विवाद अचानक खूनी संघर्ष में तब्दील हो गया खुशियों और जश्न का माहौल देखते ही देखते चीख पुकार और अफरा तफरी में बदल गया और कुछ ही देर में पूरा गांव दहशत के साए में आ गया

    बताया जा रहा है कि शादी समारोह में डीजे को लेकर दो पक्षों के बीच कहासुनी शुरू हुई थी शुरुआत में यह एक सामान्य बहस लग रही थी लेकिन देखते ही देखते मामला इतना बढ़ गया कि दोनों पक्ष आमने सामने आ गए और फिर चाकू निकल आए इस दौरान हुई ताबड़तोड़ चाकूबाजी में एक व्यक्ति की मौके पर ही मौत हो गई जबकि कई लोग गंभीर रूप से घायल हो गए

    घटना की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और हालात को काबू में करने की कोशिश की लेकिन हमलावर इतने उग्र थे कि उन्होंने पुलिस टीम पर ही हमला कर दिया इस दौरान आरक्षक ओम जाट बीच बचाव करने आगे आए तो आरोपियों ने उन पर ताबड़तोड़ चाकू से वार कर दिए उनके पेट हाथ और पैर पर कई गहरे घाव आए हैं बताया जा रहा है कि उन्हें कुल 9 गंभीर चोटें लगी हैं और उनकी हालत बेहद नाजुक बनी हुई है

    इस हिंसक झड़प में आरक्षक सहित कुल 6 लोग घायल हुए हैं सभी घायलों को तुरंत नर्मदापुरम के निजी अस्पतालों में भर्ती कराया गया है जहां उनका इलाज जारी है डॉक्टरों की टीम लगातार उनकी स्थिति पर नजर बनाए हुए है और गंभीर रूप से घायल लोगों को बचाने की हर संभव कोशिश की जा रही है

    घटना का एक वीडियो भी सामने आया है जिसमें मारपीट और चाकूबाजी का खौफनाक दृश्य देखा जा सकता है यह वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है और लोगों के बीच डर और आक्रोश दोनों बढ़ा रहा है गांव में इस घटना के बाद से भारी तनाव का माहौल है और लोग सहमे हुए हैं

    पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए तुरंत कार्रवाई शुरू कर दी है फरार आरोपियों की तलाश के लिए कई टीमों का गठन किया गया है और लगातार दबिश दी जा रही है पुलिस अधिकारियों का कहना है कि आरोपियों को जल्द ही गिरफ्तार कर लिया जाएगा और पूरे मामले में सख्त कार्रवाई की जाएगी

    यह घटना एक बार फिर यह सवाल खड़ा करती है कि छोटी छोटी बातों पर बढ़ती हिंसा किस तरह समाज के लिए खतरा बनती जा रही है एक मामूली विवाद ने एक परिवार की खुशियां छीन ली और कई लोगों को जिंदगी और मौत के बीच झूलने पर मजबूर कर दिया

  • रीवा में बनेगा प्रयागराज जैसा केबल ब्रिज, 165 करोड़ की लागत से बदलेगी तस्वीर

    रीवा में बनेगा प्रयागराज जैसा केबल ब्रिज, 165 करोड़ की लागत से बदलेगी तस्वीर


    नई दिल्ली। रीवा में ट्रैफिक जाम की पुरानी समस्या से राहत दिलाने के लिए एक बड़ी सौगात मिलने जा रही है। कमिश्नर बंगले से ढेकहा तिराहे तक 165 करोड़ रुपए की लागत से फ्लाईओवर निर्माण की योजना बनाई गई है। इस प्रोजेक्ट के तहत बीहर नदी पर प्रयागराज के यमुना पुल की तर्ज पर एक अत्याधुनिक केबल ब्रिज बनाया जाएगा। यह ब्रिज विंध्य क्षेत्र का पहला केबल ब्रिज होगा, जिससे शहर को नई पहचान मिलने की उम्मीद है।

    मजबूत केबल्स पर टिका होगा हाईटेक ब्रिज

    इस महत्वाकांक्षी परियोजना की जानकारी देते हुए राजेंद्र शुक्ल ने बताया कि यह केबल ब्रिज आधुनिक इंजीनियरिंग का शानदार उदाहरण होगा। पुल का पूरा ढांचा मजबूत धातु की केबल्स पर टिका रहेगा, जो इसे पारंपरिक पुलों से अलग और अधिक आकर्षक बनाएगा। यह तकनीक न केवल मजबूती देती है, बल्कि पुल की खूबसूरती को भी बढ़ाती है।

    जाम से मिलेगी राहत, सफर होगा आसान

    रीवा शहर में बढ़ते वाहनों के दबाव के चलते लंबे समय से फ्लाईओवर की मांग की जा रही थी। इस प्रोजेक्ट के पूरा होने के बाद शहर के प्रमुख मार्गों पर ट्रैफिक का दबाव कम होगा और लोगों को जाम से बड़ी राहत मिलेगी। साथ ही रेलवे स्टेशन और एयरपोर्ट तक पहुंचना भी पहले से ज्यादा आसान और तेज हो जाएगा।

    आधुनिक पहचान की ओर बढ़ेगा रीवा

    करीब 165 करोड़ रुपए की लागत से बनने वाला यह प्रोजेक्ट सिर्फ ट्रैफिक व्यवस्था को सुधारने तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि शहर के सौंदर्य और विकास में भी अहम भूमिका निभाएगा। केबल ब्रिज के निर्माण से रीवा को एक आधुनिक शहर के रूप में नई पहचान मिलेगी और यह प्रोजेक्ट आने वाले समय में विकास का प्रतीक बनेगा।

  • इंजेक्शन के बाद बिगड़ी हालत, 2 घंटे तड़पती रही महिला; अस्पताल में बवाल

    इंजेक्शन के बाद बिगड़ी हालत, 2 घंटे तड़पती रही महिला; अस्पताल में बवाल


    नई दिल्ली।
    सागर के बुंदेलखंड मेडिकल कॉलेज में सोमवार सुबह एक 30 वर्षीय प्रसूता की इलाज के दौरान मौत हो गई, जिसके बाद अस्पताल परिसर में जमकर हंगामा हो गया। मृतका की पहचान संध्या अहिरवार के रूप में हुई है, जिन्हें प्रसव पीड़ा के चलते भर्ती कराया गया था। घटना की जानकारी मिलते ही बड़ी संख्या में परिजन अस्पताल पहुंचे और डॉक्टरों व स्टाफ पर गंभीर लापरवाही के आरोप लगाए। स्थिति तनावपूर्ण होती देख पुलिस मौके पर पहुंची और परिजनों को समझाइश देकर मामला शांत कराया।

    “2 घंटे तड़पती रही, गलत इंजेक्शन से बिगड़ी हालत”

    परिजनों का आरोप है कि संध्या को समय पर इलाज नहीं मिला। उन्होंने बताया कि भर्ती के बाद वह करीब 2 घंटे तक दर्द से तड़पती रही, लेकिन किसी ने ध्यान नहीं दिया। रविवार रात उसकी तबीयत अचानक बिगड़ी, जिसके बाद अस्पताल स्टाफ ने एक इंजेक्शन लगाया। आरोप है कि इंजेक्शन लगने के बाद उसकी हालत और ज्यादा खराब हो गई और कुछ ही देर में उसकी मौत हो गई। इस घटनाक्रम ने परिवार को झकझोर कर रख दिया है और उन्होंने इसे गंभीर लापरवाही बताया है।

    मौत के बाद चेहरा तक नहीं देखने दिया, परिजनों का आरोप

    गुस्साए परिजनों ने यह भी आरोप लगाया कि मौत के बाद उन्हें संध्या का चेहरा तक देखने नहीं दिया गया। इस बात से आक्रोश और बढ़ गया और उन्होंने अस्पताल गेट पर विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया। परिजन निष्पक्ष जांच और दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। फिलहाल अस्पताल प्रबंधन की ओर से कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है।

    बंडा से रेफर होकर आई थी प्रसूता

    जानकारी के मुताबिक, संध्या अहिरवार को 17 अप्रैल को प्रसव पीड़ा होने पर बंडा अस्पताल से रेफर कर बुंदेलखंड मेडिकल कॉलेज लाया गया था। यहां उसका इलाज चल रहा था। रविवार रात दर्द बढ़ने पर उसे लेबर रूम में शिफ्ट किया गया, जहां इलाज के दौरान सोमवार सुबह उसकी मौत हो गई।

  • विधायक का बेटे के लिए खुला ऐलान ,SDPO को चुनौती करेरा किसी के बाप का नहीं सियासत गरमाई

    विधायक का बेटे के लिए खुला ऐलान ,SDPO को चुनौती करेरा किसी के बाप का नहीं सियासत गरमाई

    शिवपुरी । शिवपुरी जिले की सियासत उस वक्त गरमा गई जब पिछोर से बीजेपी विधायक प्रीतम लोधी का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया वीडियो में विधायक का आक्रामक अंदाज और पुलिस अधिकारी को दी गई खुली चुनौती चर्चा का केंद्र बन गई है इस पूरे मामले ने न सिर्फ प्रशासनिक हलकों में हलचल पैदा की है बल्कि राजनीतिक गलियारों में भी नई बहस छेड़ दी है

    वीडियो में विधायक प्रीतम लोधी करेरा के एसडीओपी आयुष जाखड़ को सीधे तौर पर चुनौती देते नजर आ रहे हैं उनका कहना है कि करेरा किसी के बाप का नहीं है और उनका बेटा दिनेश लोधी वहां जाएगा और चुनाव भी लड़ेगा विधायक के इस बयान ने यह साफ कर दिया कि वे अपने बेटे के पक्ष में खुलकर खड़े हैं और किसी भी तरह के दबाव को स्वीकार करने के मूड में नहीं हैं

    दरअसल पूरा मामला 16 अप्रैल को हुए एक सड़क हादसे से जुड़ा है जब विधायक के छोटे बेटे दिनेश लोधी ने अपनी थार गाड़ी से कथित रूप से पांच लोगों को टक्कर मार दी थी इस घटना के बाद इलाके में तनाव का माहौल बन गया था और पुलिस ने मामले को गंभीरता से लेते हुए कार्रवाई शुरू की थी शुरुआत में विधायक ने खुद सोशल मीडिया के जरिए यह कहा था कि उनके लिए जनता सबसे ऊपर है और कानून अपना काम करेगा लेकिन घटनाक्रम तेजी से बदलता नजर आया

    बताया जा रहा है कि हादसे के दो दिन बाद जब दिनेश लोधी को करेरा एसडीओपी के सामने पेश किया गया तब एसडीओपी आयुष जाखड़ ने सख्त लहजे में चेतावनी दी कि वह भविष्य में करेरा क्षेत्र में नजर न आएं इसी बात ने विवाद को और हवा दे दी और विधायक का रुख अचानक बदल गया

    वीडियो में विधायक का गुस्सा साफ झलकता है वे कहते हैं कि उनके बेटे के साथ हुए मामूली एक्सीडेंट को बेवजह बढ़ा चढ़ाकर पेश किया गया और पुलिस अनावश्यक रूप से सख्ती दिखा रही है उनका यह भी कहना है कि उनका बेटा न केवल करेरा जाएगा बल्कि वहां से चुनाव भी लड़ेगा यह बयान स्थानीय राजनीति में हलचल पैदा करने के लिए काफी है क्योंकि इसे सीधे तौर पर एक राजनीतिक संकेत के रूप में देखा जा रहा है

    इस पूरे घटनाक्रम ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं एक ओर जहां कानून व्यवस्था और पुलिस की भूमिका पर चर्चा हो रही है वहीं दूसरी ओर जनप्रतिनिधियों के आचरण और उनके बयानों को लेकर भी बहस तेज हो गई है विधायक का यह बयान क्या सिर्फ एक भावनात्मक प्रतिक्रिया है या इसके पीछे कोई राजनीतिक रणनीति छिपी है यह आने वाले समय में साफ होगा फिलहाल यह मामला सोशल मीडिया से लेकर राजनीतिक मंचों तक चर्चा का विषय बना हुआ है और लोग यह देख रहे हैं कि प्रशासन और सरकार इस पूरे विवाद पर क्या रुख अपनाती है

  • सीएम ने विजेता टीम को दिया 1 लाख का इनाम, क्षीर सागर मैदान बनेगा स्टेडियम

    सीएम ने विजेता टीम को दिया 1 लाख का इनाम, क्षीर सागर मैदान बनेगा स्टेडियम


    नई दिल्ली। उज्जैन में रविवार देर रात क्रिकेट का रोमांच अपने चरम पर नजर आया, जब डॉ. मोहन यादव अचानक क्षीर सागर मैदान में चल रहे फिरोजिया ट्रॉफी के फाइनल मुकाबले में पहुंच गए। रात करीब 12 बजे मुख्यमंत्री के मैदान में पहुंचते ही माहौल और भी उत्साहपूर्ण हो गया। बड़ी संख्या में मौजूद दर्शकों को देखकर उन्होंने कहा कि यह नजारा उज्जैन के खेल प्रेमियों के जुनून को साफ दर्शाता है। उन्होंने हल्के अंदाज में यह भी कहा कि मैच के दौरान भाषण देना ठीक नहीं लगता, क्योंकि लोग यहां सिर्फ खेल का आनंद लेने आते हैं।

    विजेता टीम को 1 लाख का इनाम, खिलाड़ियों का बढ़ाया हौसला

    मुख्यमंत्री ने फाइनल मुकाबले के बाद विजेता टीम को 1 लाख रुपए और उपविजेता टीम को 51 हजार रुपए का अतिरिक्त नकद पुरस्कार देने की घोषणा की। इस घोषणा से खिलाड़ियों और आयोजकों में खुशी की लहर दौड़ गई। उन्होंने कहा कि ऐसे आयोजन युवाओं को खेल के प्रति प्रेरित करते हैं और प्रदेश की प्रतिभाओं को आगे बढ़ने का मौका देते हैं। साथ ही उन्होंने जिले के अन्य खेल स्थलों के आधुनिकीकरण की दिशा में भी काम करने की बात कही।

    क्षीर सागर मैदान बनेगा आधुनिक स्टेडियम

    इस मौके पर मुख्यमंत्री ने एक बड़ी घोषणा करते हुए क्षीर सागर मैदान को आधुनिक स्टेडियम के रूप में विकसित करने की बात कही। उन्होंने कहा कि खेल अधोसंरचना मजबूत होने से स्थानीय खिलाड़ियों को बेहतर सुविधाएं मिलेंगी और वे राष्ट्रीय स्तर तक अपनी पहचान बना सकेंगे। यह घोषणा उज्जैन के खेल जगत के लिए एक बड़ा तोहफा मानी जा रही है।

    21 साल पुरानी परंपरा, फिरोजिया ट्रॉफी का खास महत्व

    फिरोजिया ट्रॉफी का आयोजन 12 अप्रैल से शुरू हुआ था, जिसका फाइनल मुकाबला रविवार को खेला गया। यह प्रतिष्ठित टूर्नामेंट पिछले 21 वर्षों से आयोजित किया जा रहा है। इसे उज्जैन-आलोट सांसद अनिल फिरोजिया के पिता भूरेलाल फिरोजिया की स्मृति में आयोजित किया जाता है। इस लंबे समय से चली आ रही परंपरा ने स्थानीय स्तर पर कई प्रतिभाशाली खिलाड़ियों को मंच देने का काम किया है।