Category: Madhya Pradesh

  • नर्मदापुरम में सनसनीखेज हत्या, खाने को लेकर विवाद में गई जान; पुलिस पर भी हमला

    नर्मदापुरम में सनसनीखेज हत्या, खाने को लेकर विवाद में गई जान; पुलिस पर भी हमला


    नई दिल्ली। नर्मदापुरम जिले के शिवपुर थाना क्षेत्र के ग्राम नाहरकोला में रविवार रात एक शादी समारोह में मामूली बात ने खूनी रूप ले लिया। जानकारी के मुताबिक, शादी में आए एक युवक को खाना खाने के लिए कहने पर विवाद इतना बढ़ा कि चाकूबाजी हो गई। इस घटना में एक व्यक्ति की मौत हो गई, जबकि 6 लोग घायल हुए हैं। हालात उस वक्त और बिगड़ गए जब आरोपियों को पकड़ने पहुंची पुलिस टीम पर भी हमला कर दिया गया।

    शराब के नशे में पहुंचे आरोपी, फिर लौटकर किया हमला

    पुलिस के अनुसार, गांव में रामनारायण के भतीजे की शादी चल रही थी। इसी दौरान अमर सिंह कीर शराब के नशे में वहां पहुंचा। रामनारायण ने उसे खाना खाने के लिए कहा, जिस पर वह भड़क गया और विवाद करने लगा। भीड़ ज्यादा होने के कारण उसे समझाकर घर भेज दिया गया, लेकिन कुछ देर बाद वह अपने बेटे लोकेश कीर के साथ डंडा और चाकू लेकर वापस लौटा और झगड़ा शुरू कर दिया।

    बीच-बचाव करने आए लोगों पर चाकू से वार, एक की मौत

    विवाद बढ़ने पर दूल्हे के चाचा हरिनारायण बीच-बचाव के लिए आगे आए, लेकिन लोकेश ने उन पर चाकू से हमला कर दिया। इसके बाद दौलत कीर, रामनारायण, जयनारायण और क्षमा कीर सहित अन्य लोग भी बीच में आए, जिन पर आरोपियों ने हमला कर दिया। इस हमले में दौलत कीर की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि अन्य लोग गंभीर रूप से घायल हो गए। घायलों को जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया है।

    पुलिस टीम पर हमला, आरक्षक को 9 जगह चाकू लगे

    घटना की सूचना मिलने पर रात करीब 1 बजे पुलिस टीम आरोपियों को पकड़ने पहुंची, लेकिन यहां भी हमला हो गया। आरोपियों ने आरक्षक ओम जाट पर चाकू से ताबड़तोड़ वार किए, जिससे उन्हें पेट, हाथ और पैर में 9 गंभीर चोटें आईं। उन्हें तुरंत अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उनकी हालत फिलहाल स्थिर बताई जा रही है।

    दो केस दर्ज, आरोपियों की तलाश जारी

    मामले की गंभीरता को देखते हुए एसपी ने मौके पर पहुंचकर स्थिति का जायजा लिया। पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ हत्या और हत्या के प्रयास के दो अलग-अलग केस दर्ज किए हैं। फिलहाल आरोपियों की तलाश के लिए पुलिस टीमों का गठन किया गया है और उनकी गिरफ्तारी के प्रयास जारी हैं।

    शादी की खुशियां मातम में बदलीं

    परिवार के मुताबिक, अगले दिन बारात निकलनी थी, लेकिन इस घटना ने पूरे घर की खुशियों को मातम में बदल दिया। बताया जा रहा है कि आरोपी परिवार के ही सदस्य हैं और उनके बीच पिछले कई सालों से विवाद चल रहा था।

  • भीषण गर्मी के बीच स्कूल टाइम बदला, सिवनी में पारा 41 डिग्री पार

    भीषण गर्मी के बीच स्कूल टाइम बदला, सिवनी में पारा 41 डिग्री पार


    नई दिल्ली। सिवनी जिले में गर्मी ने अप्रैल में ही मई-जून जैसे तेवर दिखाने शुरू कर दिए हैं। रविवार को अधिकतम तापमान 41.2 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जो इस सीजन में पहली बार 40 के पार पहुंचा। तेज धूप और उमस भरी गर्मी के चलते आमजन को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। बाजारों में ठंडे पेय और रसीले फलों की मांग बढ़ गई है, वहीं अस्पतालों में हीट-वेव से प्रभावित मरीजों की संख्या भी बढ़ने लगी है। डॉक्टरों ने लोगों को दोपहर के समय बाहर निकलने से बचने और पर्याप्त पानी पीने की सलाह दी है।

    लू का अलर्ट, आने वाले दिनों में और बढ़ेगी तपिश

    मौसम विभाग के अनुसार आने वाले दिनों में लू चलने की संभावना है, जिससे तापमान में और वृद्धि हो सकती है। 19 अप्रैल को अधिकतम तापमान 41.2°C और न्यूनतम 20.6°C दर्ज किया गया। सुबह से ही तेज धूप लोगों को परेशान कर रही है, हालांकि रात के समय तापमान में थोड़ी गिरावट से कुछ राहत मिल रही है। पिछले कुछ दिनों में भी तापमान लगातार 40 डिग्री के आसपास बना हुआ है, जिससे यह संकेत मिल रहा है कि गर्मी का असर अभी और बढ़ेगा।

    स्कूलों के समय में बदलाव, बच्चों को राहत

    भीषण गर्मी को देखते हुए कलेक्टर नेहा मीना ने स्कूली बच्चों के स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए बड़ा फैसला लिया है। नए आदेश के तहत नर्सरी (प्ले ग्रुप) से लेकर कक्षा 12वीं तक के सभी शासकीय, अशासकीय, नवोदय, सीबीएसई और आईसीएसई बोर्ड के स्कूल अब सुबह 8 बजे से दोपहर 1 बजे तक संचालित होंगे। हालांकि परीक्षाएं पहले से तय समय के अनुसार ही होंगी। इस निर्णय से बच्चों को तेज धूप और लू के असर से काफी राहत मिलेगी।

    लगातार बढ़ रहा तापमान, सतर्क रहने की जरूरत

    पिछले पांच दिनों के आंकड़ों पर नजर डालें तो तापमान लगातार बढ़ रहा है 15 अप्रैल को 39.6°C, 16 और 17 अप्रैल को 40.4°C, 18 अप्रैल को 40.0°C और 19 अप्रैल को 41.2°C दर्ज किया गया। इससे साफ है कि जिले में गर्मी का प्रकोप लगातार बढ़ रहा है। प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग लोगों से सतर्क रहने और जरूरी एहतियात बरतने की अपील कर रहे हैं।

  • वैश्विक तनाव बेअसर भारतीय दवाओं की बढ़ी मांग ,इंदौर के पीथमपुर एसईजेड ने बनाया रिकॉर्ड

    वैश्विक तनाव बेअसर भारतीय दवाओं की बढ़ी मांग ,इंदौर के पीथमपुर एसईजेड ने बनाया रिकॉर्ड


    इंदौर । वैश्विक तनाव और मिडिल ईस्ट संकट के बावजूद भारत की फार्मा इंडस्ट्री ने अपनी मजबूती एक बार फिर साबित कर दी है। मध्यप्रदेश के पीथमपुर स्थित स्पेशल इकोनॉमिक जोन की फार्मा कंपनियों ने शानदार प्रदर्शन करते हुए जेनेरिक दवाओं के निर्यात में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की है। यह बढ़ोतरी ऐसे समय में हुई है जब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मिडिल ईस्ट संकट और व्यापारिक नीतियों में बदलाव जैसी चुनौतियां सामने हैं।

    वाणिज्यिक और उद्योग विभाग के अंतर्गत आने वाले मध्यप्रदेश औद्योगिक विकास निगम की रिपोर्ट के अनुसार अप्रैल 2025 से मार्च 2026 के बीच पीथमपुर एसईजेड से कुल 14302 करोड़ रुपए से अधिक का निर्यात हुआ है। यह पिछले वर्ष की तुलना में करीब 10.46 प्रतिशत अधिक है जो इस क्षेत्र की लगातार बढ़ती क्षमता को दर्शाता है। खास बात यह है कि इस एसईजेड में लगभग 70 से 80 प्रतिशत कंपनियां फार्मा सेक्टर से जुड़ी हुई हैं।

    यहां निर्मित जेनेरिक दवाओं की आपूर्ति दुनिया के कई बड़े बाजारों में की जा रही है जिनमें अमेरिका जर्मनी ऑस्ट्रेलिया यूनाइटेड किंगडम और खाड़ी देश शामिल हैं। इन दवाओं की बढ़ती मांग का सबसे बड़ा कारण इनकी किफायती कीमत और विश्वसनीय गुणवत्ता है। भारत में बनी जेनेरिक दवाएं ब्रांडेड दवाओं के मुकाबले 30 से 40 प्रतिशत तक सस्ती होती हैं जिससे वैश्विक बाजार में इनकी प्रतिस्पर्धा क्षमता काफी मजबूत हो जाती है।

    भारत को लंबे समय से फार्मेसी ऑफ द वर्ल्ड कहा जाता रहा है और इसका कारण यही है कि यहां कम लागत में उच्च गुणवत्ता वाली दवाएं उपलब्ध कराई जाती हैं। अब वैश्विक स्तर पर स्वास्थ्य सेवाओं की बढ़ती लागत और बीमा कंपनियों के दबाव के चलते कई देश सस्ती दवाओं की ओर रुख कर रहे हैं। यही वजह है कि भारतीय फार्मा कंपनियों को बड़े पैमाने पर ऑर्डर मिल रहे हैं।

    दिलचस्प बात यह भी है कि कई बहुराष्ट्रीय कंपनियां अब भारत में कॉन्ट्रैक्ट मैन्युफैक्चरिंग के जरिए दवाएं बनवा रही हैं और उन्हें अपने ब्रांड नाम से अंतरराष्ट्रीय बाजार में बेच रही हैं। इससे न केवल भारतीय कंपनियों को फायदा हो रहा है बल्कि देश की निर्यात क्षमता भी लगातार बढ़ रही है।

    हालांकि इस सकारात्मक स्थिति के बीच कुछ चुनौतियां भी सामने आई हैं। मिडिल ईस्ट में चल रहे तनाव और समुद्री मार्गों पर असर के कारण शिपमेंट में देरी हो रही है। कंटेनर समय पर रवाना नहीं हो पा रहे हैं जिससे सप्लाई चेन प्रभावित हो रही है। उद्योग से जुड़े विशेषज्ञों का कहना है कि युद्ध जैसी परिस्थितियों का असर लॉजिस्टिक्स पर पड़ता है लेकिन मांग बनी रहने के कारण निर्यात में गिरावट नहीं आई है।

    विशेषज्ञों के अनुसार आने वाले समय में यदि वैश्विक हालात सामान्य होते हैं तो भारतीय जेनेरिक दवाओं का निर्यात और तेजी से बढ़ सकता है। कुल मिलाकर यह स्पष्ट है कि चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों के बावजूद मेड इन इंडिया फार्मा सेक्टर वैश्विक बाजार में अपनी मजबूत पकड़ बनाए हुए है और आगे भी इसके विस्तार की पूरी संभावनाएं हैं।

  • छिंदवाड़ा में नरवाई जलाने पर सख्ती, 60 एफआईआर दर्ज; प्रशासन सख्त

    छिंदवाड़ा में नरवाई जलाने पर सख्ती, 60 एफआईआर दर्ज; प्रशासन सख्त


    नई दिल्ली। छिंदवाड़ा जिले में नरवाई (फसल अवशेष) जलाने के मामलों को लेकर प्रशासन ने सख्त रुख अपनाया है। अब तक जिले में कुल 60 एफआईआर दर्ज की जा चुकी हैं। अलग-अलग तहसीलों में हुई कार्रवाई के तहत चौरई में 15, अमरवाड़ा और बिछुआ में 10-10, उमरेठ में 8, तमिया में 6, चांद और हर्रई में 4-4, परासिया में 2 तथा छिंदवाड़ा तहसील में 1 मामला सामने आया है। इसके अलावा कई किसानों पर जुर्माना भी लगाया गया है।

    कलेक्टर के निर्देश तुरंत कार्रवाई और सख्त निगरानी

    जिले के कलेक्टर हरेन्द्र नारायण ने इन घटनाओं को गंभीरता से लेते हुए अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि नरवाई जलाने की सूचना मिलते ही तत्काल मौके पर पहुंचकर जांच करें और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित करें। उन्होंने कहा कि इस तरह की गतिविधियां पर्यावरण और मिट्टी की गुणवत्ता के लिए बेहद नुकसानदायक हैं, इसलिए किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

    संयुक्त टीमें करेंगी निगरानी, किसानों को दी जाएगी समझाइश

    कलेक्टर ने कृषि और राजस्व विभाग की संयुक्त टीमों को लगातार फील्ड में निगरानी रखने के निर्देश दिए हैं। साथ ही अधिकारियों को यह भी कहा गया है कि किसानों को जागरूक किया जाए और उन्हें नरवाई जलाने के नुकसान तथा इसके वैकल्पिक उपायों की जानकारी दी जाए। प्रशासन का उद्देश्य केवल कार्रवाई करना ही नहीं, बल्कि किसानों को सही दिशा में मार्गदर्शन देना भी है।

    आगे भी जारी रहेगी सख्ती

    प्रशासन ने स्पष्ट कर दिया है कि नरवाई जलाने के मामलों में आगे भी इसी तरह सख्त कार्रवाई जारी रहेगी। नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ एफआईआर और जुर्माने की कार्रवाई लगातार की जाएगी, ताकि इस पर पूरी तरह नियंत्रण पाया जा सके।

  • बालाघाट में सर्पदंश से बुजुर्ग की मौत, खुले में शौच के दौरान हुआ हादसा

    बालाघाट में सर्पदंश से बुजुर्ग की मौत, खुले में शौच के दौरान हुआ हादसा


    नई दिल्ली। बालाघाट जिले के चंद्रपुरी गांव में रविवार शाम एक दर्दनाक घटना सामने आई, जहां सर्पदंश से 71 वर्षीय बुजुर्ग की मौत हो गई। मृतक रमेश गोस्वामी खेत की ओर शौच के लिए गए थे, तभी एक जहरीले सांप ने उन्हें काट लिया। घर लौटकर उन्होंने परिजनों को घटना की जानकारी दी, जिसके बाद उन्हें तुरंत जिला अस्पताल ले जाया गया, लेकिन इलाज के दौरान देर रात उन्होंने दम तोड़ दिया।

    खेत में शौच के दौरान डसा सांप, जहर फैलने से मौत

    जानकारी के मुताबिक, रमेश गोस्वामी खेती-मजदूरी कर अपना जीवनयापन करते थे। रविवार शाम खुले में शौच के दौरान सांप ने उनके पैर में डस लिया। परिजन उन्हें आनन-फानन में अस्पताल लेकर पहुंचे, जहां डॉक्टरों ने तत्काल उपचार शुरू किया, लेकिन जहर तेजी से फैल चुका था। रात करीब 12 बजे उनकी मौत हो गई, जिससे परिवार में शोक की लहर दौड़ गई।

    पुलिस ने किया पोस्टमार्टम, जांच जारी

    सोमवार सुबह अस्पताल चौकी पुलिस ने डॉक्टर की सूचना पर शव को कब्जे में लेकर पंचनामा तैयार किया और पोस्टमार्टम कराया। इसके बाद शव परिजनों को सौंप दिया गया। पुलिस के अनुसार, प्राथमिक जांच में मामला सर्पदंश का ही प्रतीत हो रहा है। मर्ग डायरी संबंधित थाने भेजकर आगे की जांच की जा रही है।

    खुले में शौच के दावों पर उठे सवाल

    इस घटना ने ग्रामीण क्षेत्रों में खुले में शौच मुक्त (ODF) दावों की वास्तविकता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि गांव में शौचालय की सुविधा या उसका उपयोग सही तरीके से नहीं हो पा रहा है, जिसके चलते लोगों को खुले में जाना पड़ता है। यही लापरवाही इस दुखद घटना का कारण बनी।

    ग्रामीणों ने की सुविधाएं बढ़ाने की मांग

    घटना के बाद ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि गांवों में शौचालय व्यवस्था को मजबूत किया जाए और लोगों को जागरूक किया जाए, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं से बचा जा सके।

  • मेहनत और जज्बे को सलाम, 12वीं में सफल द्रोपदी से मंत्री ने किया संवाद

    मेहनत और जज्बे को सलाम, 12वीं में सफल द्रोपदी से मंत्री ने किया संवाद


    नई दिल्ली। मंडला जिले की दिव्यांग छात्रा द्रोपदी धुर्वे ने 12वीं बोर्ड परीक्षा में 65% अंक हासिल कर न सिर्फ अपने परिवार, बल्कि पूरे प्रदेश को गर्व का मौका दिया है। पैरों से लिखकर परीक्षा देने वाली द्रोपदी की इस प्रेरणादायक कहानी ने सभी का ध्यान खींचा, जिसके बाद शिवराज सिंह चौहान ने उन्हें फोन कर बधाई दी और उनके जज्बे की सराहना की। यह बातचीत उनकी सफलता की खबर सामने आने के बाद संभव हो सकी।

    “आपका साहस प्रेरणादायक है” केंद्रीय मंत्री ने दिया भरोसा

    द्रोपदी से यह बातचीत भाजपा नेता डॉ. विजय आनंद मरावी के माध्यम से कराई गई, जो उनके गांव पहुंचकर उनसे मिले। इस दौरान शिवराज सिंह चौहान ने फोन पर छात्रा से बात करते हुए कहा कि उनका संघर्ष और मेहनत समाज के लिए प्रेरणा है। उन्होंने द्रोपदी को हर संभव मदद का आश्वासन दिया और भविष्य में उनसे मिलने की इच्छा भी जताई।

    शारीरिक चुनौतियों के बावजूद हासिल की बड़ी सफलता

    करौंदा टोला निवासी द्रोपदी धुर्वे जन्म से दिव्यांग हैं। उनका एक हाथ नहीं है और दूसरा पूरी तरह विकसित नहीं हो पाया है। इन कठिन परिस्थितियों के बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी और पैरों से लिखना सीखकर अपनी पढ़ाई जारी रखी। इसी लगन और मेहनत के दम पर उन्होंने 12वीं बोर्ड परीक्षा में 65% अंक हासिल किए। इससे पहले भी वे 10वीं में अच्छा प्रदर्शन कर चुकी हैं।

    प्रदेश के लिए बनी प्रेरणा, हर किसी को दे रही संदेश

    द्रोपदी की यह उपलब्धि उन्हें पूरे जिले और प्रदेश में प्रेरणा का प्रतीक बना रही है। उनकी कहानी यह संदेश देती है कि कठिन परिस्थितियां भी मजबूत इरादों के सामने छोटी पड़ जाती हैं। अब हर कोई उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना कर रहा है और उनकी मेहनत को सलाम कर रहा है।

  • पीथमपुर में महिला श्रमिकों का उग्र प्रदर्शन ,न्यूनतम मजदूरी और सुविधाओं को लेकर कंपनी के खिलाफ मोर्चा

    पीथमपुर में महिला श्रमिकों का उग्र प्रदर्शन ,न्यूनतम मजदूरी और सुविधाओं को लेकर कंपनी के खिलाफ मोर्चा

    पीथमपुर । धार जिले के औद्योगिक नगर पीथमपुर में स्थित औद्योगिक क्षेत्र में उस समय तनाव की स्थिति बन गई जब सैकड़ों महिला श्रमिक अचानक सड़क पर उतर आईं और कंपनी प्रबंधन के खिलाफ जोरदार विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया। मामला सेक्टर एक में स्थित दवा निर्माण कंपनी सिन्काम फार्मूलेशन से जुड़ा है जहां काम करने वाली महिलाओं ने कम मजदूरी और बुनियादी सुविधाओं के अभाव को लेकर गंभीर आरोप लगाए हैं।

    प्रदर्शन कर रही महिला श्रमिकों का कहना है कि उन्हें मध्यप्रदेश सरकार द्वारा निर्धारित न्यूनतम मजदूरी के अनुसार भुगतान नहीं किया जा रहा है। वर्तमान में उन्हें 8 घंटे की शिफ्ट के लिए मात्र 225 रुपए दिए जा रहे हैं जो उनके अनुसार बेहद कम है और जीवन यापन के लिए पर्याप्त नहीं है। इतना ही नहीं ओवरटाइम के नाम पर भी केवल 25 रुपए प्रति घंटा दिया जा रहा है जिसे लेकर महिलाओं में भारी नाराजगी है।

    महिला श्रमिकों ने आरोप लगाया कि कंपनी में ठेकेदारों के माध्यम से काम कराया जा रहा है और यही ठेकेदार उनका शोषण कर रहे हैं। उनका कहना है कि काम के दौरान उन्हें मूलभूत सुविधाएं तक उपलब्ध नहीं कराई जातीं। कई महिलाओं ने यह भी बताया कि उन्हें ना तो भविष्य निधि यानी पीएफ का लाभ मिल रहा है और ना ही कर्मचारी राज्य बीमा यानी ईएसआईसी जैसी जरूरी सुविधाएं दी जा रही हैं। ऐसे में उनका सामाजिक और आर्थिक सुरक्षा तंत्र पूरी तरह कमजोर बना हुआ है।

    प्रदर्शन के दौरान महिलाओं ने स्पष्ट कहा कि उन्हें सरकार द्वारा तय किए गए न्यूनतम वेतनमान के अनुसार भुगतान मिलना चाहिए। उनका कहना है कि वे लगातार मेहनत कर रही हैं लेकिन इसके बावजूद उन्हें उनके हक का पैसा नहीं मिल रहा है। इस स्थिति को लेकर अब उनका आक्रोश खुलकर सामने आ गया है।

    स्थिति को देखते हुए मौके पर बड़ी संख्या में पुलिस बल तैनात किया गया ताकि किसी भी अप्रिय घटना को रोका जा सके। हालांकि प्रदर्शन शांतिपूर्ण रहा लेकिन महिलाओं ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों पर जल्द ध्यान नहीं दिया गया तो वे उग्र आंदोलन करने को मजबूर होंगी।

    यह मामला केवल एक कंपनी तक सीमित नहीं है बल्कि यह पूरे औद्योगिक क्षेत्र में काम कर रही महिला श्रमिकों की स्थिति को उजागर करता है। कम मजदूरी असुरक्षित कार्य वातावरण और सामाजिक सुरक्षा की कमी जैसे मुद्दे लंबे समय से उठते रहे हैं लेकिन अब महिलाएं खुलकर अपने अधिकारों के लिए आवाज उठा रही हैं।

    यदि समय रहते इस मामले का समाधान नहीं किया गया तो यह विवाद और बड़ा रूप ले सकता है। फिलहाल सभी की नजर इस बात पर टिकी है कि प्रशासन और कंपनी प्रबंधन इस मुद्दे को किस तरह से सुलझाते हैं और क्या महिला श्रमिकों को उनका अधिकार मिल पाता है या नहीं।

  • सांप के हमले से बाल-बाल बचा युवक, ग्रामीणों ने उठाई प्रशिक्षण की मांग

    सांप के हमले से बाल-बाल बचा युवक, ग्रामीणों ने उठाई प्रशिक्षण की मांग


    नई दिल्ली। कटनी जिले के ढीमरखेड़ा क्षेत्र में रविवार रात एक चौंकाने वाली घटना सामने आई, जहां एक युवक को सोते समय जहरीले काले नाग ने तीन बार डस लिया। पीड़ित अरविंद पटेल (36) अपने छोटे बच्चे के साथ सो रहे थे, तभी यह घटना हुई। पहली बार डसने पर उन्हें लगा कि बच्चे का नाखून लगा है, लेकिन जब सांप ने लगातार दो बार और काटा, तो वे घबराकर उठ बैठे। शोर सुनकर परिवार के लोग जागे और घर के कोने में एक बड़ा काला सांप दिखाई दिया, जिससे पूरे घर में अफरा-तफरी मच गई।

    समय पर इलाज से टली बड़ी अनहोनी

    घटना के तुरंत बाद परिजन अरविंद को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र उमरियापान ले गए, जहां समय रहते इलाज मिलने से उनकी जान बच गई। डॉक्टरों के अनुसार, समय पर चिकित्सा मिलने के कारण उनकी स्थिति अब खतरे से बाहर है। इस दौरान ग्रामीणों ने बरेली निवासी सोनू गौर को बुलाया, जिन्होंने काफी मशक्कत के बाद सांप को सुरक्षित पकड़कर जंगल में छोड़ दिया।

    सर्प मित्रों की कमी से बढ़ी चिंता

    इस घटना ने क्षेत्र में सर्प मित्रों की कमी और वन विभाग की निष्क्रियता को उजागर कर दिया है। जनपद सदस्य श्रीकांत पटेल ने कहा कि ढीमरखेड़ा इलाका जंगलों और खेतों से घिरा है, जहां गर्मी के मौसम में सांपों का रिहायशी इलाकों में आना आम हो जाता है। इसके बावजूद स्थानीय स्तर पर कोई प्रशिक्षित टीम मौजूद नहीं है।

    ग्रामीणों की मांग स्थानीय युवाओं को मिले प्रशिक्षण

    ग्रामीणों का कहना है कि पिछले कई वर्षों से वन विभाग केवल आश्वासन दे रहा है कि युवाओं को सर्प पकड़ने का प्रशिक्षण दिया जाएगा, लेकिन अब तक इस दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। फिलहाल सांप निकलने पर दूसरी जगहों से सपेरों को बुलाना पड़ता है, जिससे समय और पैसे दोनों की बर्बादी होती है। ग्रामीणों ने कलेक्टर आशीष तिवारी से मांग की है कि स्थानीय युवाओं को प्रशिक्षित कर आपात स्थिति में त्वरित मदद की व्यवस्था की जाए।

    प्रशासन से जल्द समाधान की उम्मीद

    मामले को गंभीरता से लेते हुए जिला वन मंडल अधिकारी (DFO) अजय मिश्रा से चर्चा की बात कही गई है। उम्मीद जताई जा रही है कि जल्द ही स्थानीय स्तर पर प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू कर एक प्रभावी व्यवस्था बनाई जाएगी, जिससे भविष्य में ऐसी घटनाओं से बेहतर तरीके से निपटा जा सके।

  • एमपी-छत्तीसगढ़ सीमा का पुल खस्ताहाल, भारी वाहनों से बढ़ा दबाव

    एमपी-छत्तीसगढ़ सीमा का पुल खस्ताहाल, भारी वाहनों से बढ़ा दबाव


    नई दिल्ली। अनूपपुर जिले की सीमा पर ग्राम वेंकटनगर के पास तिपान नदी पर बना पुल अब खतरनाक स्थिति में पहुंच चुका है। मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ को जोड़ने वाला यह अहम पुल 40 साल से ज्यादा पुराना हो चुका है और लगातार भारी वाहनों के दबाव से इसकी हालत बदतर हो गई है। अनूपपुर-बिलासपुर मुख्य मार्ग पर स्थित होने के कारण यहां रोजाना बड़ी संख्या में मालवाहक वाहन गुजरते हैं, जिससे किसी भी समय बड़े हादसे की आशंका बनी हुई है।

    दो राज्यों की आर्थिक जीवनरेखा पर संकट

    यह पुल केवल आम लोगों के आवागमन के लिए ही नहीं, बल्कि औद्योगिक गतिविधियों के लिए भी बेहद महत्वपूर्ण है। कोयला खदानों से लेकर जैतहरी स्थित मोजरबेयर पावर प्लांट तक कच्चे माल की आपूर्ति इसी मार्ग से होती है। बिलासपुर और भिलाई से आने वाला लौह अयस्क और कोयला इसी पुल के जरिए मध्यप्रदेश के अंदरूनी हिस्सों तक पहुंचता है। ऐसे में इस पुल की खराब स्थिति से दो राज्यों की आर्थिक गतिविधियों पर भी असर पड़ सकता है।

    सतह उखड़ी, सरिए बाहर खतरे की घंटी

    पुल की हालत इतनी खराब हो चुकी है कि इसकी ऊपरी सतह पूरी तरह उखड़ गई है और कंक्रीट के अंदर से लोहे के सरिए बाहर दिखाई दे रहे हैं। रेलिंग और साइड वॉल कई जगह से टूट चुकी हैं, जिससे वाहन चालकों के लिए जोखिम और बढ़ गया है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि लोक निर्माण विभाग केवल औपचारिक मरम्मत करता है, जो भारी ट्रैफिक के चलते कुछ ही दिनों में फिर खराब हो जाती है।

    1980 में रखी गई थी नींव, अब तक नहीं हुआ ठोस जीर्णोद्धार

    इस पुल की आधारशिला 1980 में तत्कालीन मुख्यमंत्री अर्जुन सिंह ने रखी थी और 1982 में इसका लोकार्पण हुआ था। चार दशक बीत जाने के बाद भी इसका स्थायी समाधान नहीं किया गया है। स्थानीय नागरिक अब केवल मरम्मत नहीं, बल्कि नए और मजबूत पुल के निर्माण की मांग कर रहे हैं।

    अधिकारियों का आश्वासन जल्द शुरू होगा काम

    मामले की गंभीरता को देखते हुए पीडब्ल्यूडी के अधिकारियों ने सेतु निगम को पुल की स्थिति का निरीक्षण करने के निर्देश दिए हैं। विभाग का कहना है कि एक-दो दिनों में मरम्मत कार्य शुरू कर दिया जाएगा। हालांकि, लोगों का कहना है कि अस्थायी मरम्मत के बजाय स्थायी समाधान जरूरी है, ताकि भविष्य में किसी बड़ी जनहानि से बचा जा सके।

  • उमरिया में दर्दनाक हादसा, ट्रेन से कटकर युवक की मौत; घर में था शादी का माहौल

    उमरिया में दर्दनाक हादसा, ट्रेन से कटकर युवक की मौत; घर में था शादी का माहौल


    नई दिल्ली। उमरिया जिले में रविवार रात एक दर्दनाक हादसे ने पूरे इलाके को झकझोर कर रख दिया। चंदिया रोड रेलवे स्टेशन के पास एक युवक की ट्रेन से कटकर मौत हो गई। घटना रेलवे क्रॉसिंग के नजदीक हुई, जहां युवक का शव ट्रैक पर दो हिस्सों में मिला। सूचना मिलते ही चंदिया पुलिस मौके पर पहुंची और जांच शुरू की। इस हादसे के बाद क्षेत्र में हड़कंप मच गया।

    ट्रैक पर मिला शव, पहचान के बाद परिजनों को दी सूचना

    मृतक की पहचान वार्ड क्रमांक 13 चंदिया निवासी सत्येंद्र सिंह (पिता सूर्यभान सिंह) के रूप में हुई है। पुलिस ने मौके पर पहुंचकर आसपास के लोगों से पूछताछ की और शव की शिनाख्त कर परिजनों को सूचना दी। शव की हालत बेहद गंभीर थी, जिससे घटना की भयावहता का अंदाजा लगाया जा सकता है।

    घर में शादी से पहले टूटी खुशियां

    इस हादसे का सबसे दुखद पहलू यह रहा कि जिस दिन यह घटना हुई, उसके अगले ही दिन सत्येंद्र सिंह के घर में शादी का कार्यक्रम होना था। परिवार में खुशियों का माहौल था, लेकिन अचानक आई इस खबर ने सब कुछ मातम में बदल दिया। मृतक अपने पीछे पत्नी और दो छोटे बच्चों को छोड़ गया है, जिससे परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है।

    मामले की जांच जारी

    चंदिया पुलिस ने मामले में मर्ग कायम कर लिया है और हादसे के कारणों की जांच की जा रही है। फिलहाल यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि यह हादसा था या किसी अन्य कारण से युवक ट्रेन की चपेट में आया। पुलिस हर पहलू से जांच कर रही है।