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  • BJP युवा चेहरों पर दांव खेलने की तैयारी में…. 60 साल से कम उम्र के होंगे भावी सरकारों के मुखिया… !

    BJP युवा चेहरों पर दांव खेलने की तैयारी में…. 60 साल से कम उम्र के होंगे भावी सरकारों के मुखिया… !


    नई दिल्ली।
    भाजपा (BJP) नेतृत्व देश की नई पीढ़ी (New Generation) खासकर युवाओं की आकांक्षाओं को प्राथमिकता पर रखते हुए अपनी आगे बनने वाली सरकारों (Governments) का नेतृत्व युवाओं (Youth) को सौंपे जाने की तैयारी में है। पार्टी ने संकेत दिए हैं कि उसकी भावी सरकारों के मुखिया साठ साल से कम उम्र के होंगे।

    हालांकि, सरकार में वरिष्ठ नेताओं को भी शामिल किया जाएगा। अगले साल भाजपा को सात राज्यों के चुनाव में जाना है, जिनमें पांच राज्यों में अभी उसके मुख्यमंत्री है। वहां पर यह बदलाव साफ दिखाई देगा। भाजपा के देशभर में अभी 17 मुख्यमंत्री हैं। इनमें पांच की ही उम्र साठ साल से अधिक है। सबसे कम उम्र के मुख्यमंत्री अरुणाचल प्रदेश के पेमा खांडू हैं, जिनकी उम्र 47 वर्ष है। सबसे ज्यादा उम्र के त्रिपुरा के मुख्यमंत्री माणिक साहा (73 वर्ष) हैं। छत्तीसगढ़ के सीएम विष्णुदेव साय, गुजरात के भूपेंद्र पटेल, मणिपुर के वाय खेमचंद सिंह साठ साल के ज्यादा के हैं।

    भाजपा नेतृत्व ने संगठन में नितिन नवीन को राष्ट्रीय अध्यक्ष की कमान सौंपकर साफ कर दिया था, कि अब वह नई पीढ़ी को आगे लाने जा रही है। जेन जी के आंदोलन के बने माहौल में भाजपा अब अपने इस फैसले को राज्यों में भी लागू करेगी। हालांकि, राजनीतिक समीकरणों को देखते हुए कुछ अपवाद रखे जा सकते हैं।


    गुजरात में हर्ष सांघवी नया चेहरा

    भाजपा की इस कवायद में आने वाले चुनाव वाले राज्यों में गुजरात में पार्टी के उप मुख्यमंत्री हर्ष सांघवी भावी नेता के रूप में उभर रहे हैं। मणिपुर की स्थिति अलग है। वहां पर अलग तरह से फैसला लिया जाएगा। हिमाचल प्रदेश और पंजाब जहां भाजपा की सरकारें नहीं हैं, वहां पार्टी अघोषित रूप से युवा चेहरे को सामने रखेगी।


    पीएमम मोदी के जन्मदिन पर सेवा संकल्प अभियान
    भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के जन्मदिन के अवसर पर 17 सितंबर से 17 अक्टूबर तक “सेवा संकल्प अभियान” के तहत पूरे उत्तर प्रदेश में सेवा और जनकल्याणकारी कार्यक्रम आयोजित करेगी। प्रदेश भाजपा मुख्यालय से सोमवार को जारी बयान में यह जानकारी दी गई।

    मोदी के गुजरात के मुख्यमंत्री से प्रधानमंत्री तक के 25 वर्षों के सार्वजनिक जीवन को समर्पित इस अभियान का उद्देश्य उनके सेवा, सुशासन, गरीब कल्याण और विकसित भारत के संकल्प को जन-जन तक पहुंचाना है।

    अभियान को लेकर प्रदेश स्तरीय कार्यशाला सोमवार को यहां इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में आयोजित की गई। कार्यशाला में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, भाजपा की राष्ट्रीय महासचिव स्मृति ईरानी, प्रदेश भाजपा अध्यक्ष एवं केंद्रीय वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी, उपमुख्यमंत्री द्वय केशव प्रसाद मौर्य और ब्रजेश पाठक तथा प्रदेश महामंत्री (संगठन) धर्मपाल सिंह शामिल हुए।

  • हिमालय में बार-बार क्यों आती है तबाही? बाढ़, भूस्खलन और भूकंप का कनेक्शन समझिए

    हिमालय में बार-बार क्यों आती है तबाही? बाढ़, भूस्खलन और भूकंप का कनेक्शन समझिए


    काठमांडू।
    नेपाल में बाढ़ और भूस्खलन ने एक बार फिर हिमालयी क्षेत्रों की संवेदनशीलता को सामने ला दिया है। खूबसूरत पहाड़ों और घाटियों के लिए पहचाना जाने वाला हिमालय दरअसल प्राकृतिक आपदाओं के लिहाज से दुनिया के सबसे संवेदनशील क्षेत्रों में शामिल है। यहां बाढ़, भूस्खलन, बादल फटना, भूकंप और ग्लेशियर से जुड़ी घटनाएं समय-समय पर बड़े संकट में बदल जाती हैं।

    लेकिन आखिर हिमालय से सटे इलाकों में आपदाओं का खतरा इतना ज्यादा क्यों है? इसके पीछे भूगर्भीय बनावट, पहाड़ों की ढलान, भारी बारिश और तेजी से बदलती जलवायु जैसे कई कारण एक साथ काम करते हैं।

    भारतीय और यूरेशियन प्लेटों की टक्कर है बड़ी वजह

    हिमालय दुनिया की सबसे युवा प्रमुख पर्वत श्रृंखलाओं में से एक है। इसका निर्माण भारतीय और यूरेशियन टेक्टोनिक प्लेटों की लगातार टक्कर से हुआ है। खास बात यह है कि दोनों प्लेटों की गति आज भी जारी है।

    इन प्लेटों की लगातार हलचल पृथ्वी के भीतर भूगर्भीय तनाव पैदा करती है। इसी कारण हिमालयी क्षेत्र तकनीकी रूप से बेहद सक्रिय है और यहां भूकंप का खतरा लगातार बना रहता है।

    हिमालय से जुड़े भारत के कई हिस्से भी उच्च भूकंपीय जोखिम वाले क्षेत्रों में आते हैं, खासकर भूकंपीय क्षेत्र IV और V में शामिल इलाके।

    पहाड़ों की युवा संरचना क्यों बढ़ाती है खतरा?

    हिमालय की अपेक्षाकृत युवा भूगर्भीय संरचना का एक परिणाम यह भी है कि यहां कई जगह मिट्टी, चट्टान और तलछट अपेक्षाकृत अस्थिर हैं। तेज बारिश होने पर यही सामग्री ढलानों से नीचे खिसकने लगती है।

    इससे भूस्खलन की घटनाएं होती हैं। जब बड़ी मात्रा में मिट्टी, पत्थर और मलबा अचानक नीचे आता है तो सड़कें, पुल और बस्तियां इसकी चपेट में आ सकती हैं।

    खड़ी ढलानें पानी को बना देती हैं खतरनाक

    हिमालय का भूभाग बेहद खड़ा है। यहां गहरी घाटियां और तीखी ढलानें हैं। भारी बारिश के दौरान पानी पहाड़ों पर ज्यादा देर ठहरने के बजाय तेजी से नीचे की ओर बहता है और संकरी नदी घाटियों में पहुंच जाता है।

    तेज बहाव अपने साथ चट्टान, मिट्टी, पेड़ और दूसरे मलबे को भी बहाकर ले जा सकता है। यही प्रक्रिया अचानक आने वाली बाढ़ को और ज्यादा विनाशकारी बना देती है।

    संकरी घाटियों में पानी का वेग बहुत तेजी से बढ़ सकता है। इसका सीधा असर नदी किनारे बने घरों, सड़कों, पुलों और अन्य बुनियादी ढांचे पर पड़ता है।

    जलवायु परिवर्तन ने बढ़ाई मुश्किल

    हिमालय की प्राकृतिक संवेदनशीलता के ऊपर अब जलवायु परिवर्तन का अतिरिक्त दबाव भी पड़ रहा है। हिमालय को कई बार ‘तीसरा ध्रुव’ कहा जाता है क्योंकि ध्रुवीय क्षेत्रों के बाहर यहां बड़ी मात्रा में बर्फ और ग्लेशियर मौजूद हैं।

    बढ़ते तापमान के कारण कई ग्लेशियर पीछे हट रहे हैं। इसके साथ ही जमी हुई जमीन और पहाड़ी ढलानों की स्थिरता पर भी असर पड़ सकता है।

    ग्लेशियर की झील फटी तो तबाही और तेज

    ग्लेशियरों के पिघलने से उनके आसपास बनी झीलों का आकार बढ़ सकता है। इन झीलों को रोकने वाली प्राकृतिक बर्फ, चट्टान या मलबे की दीवार अगर पानी के दबाव, भूस्खलन या किसी अन्य वजह से टूट जाए तो अचानक बड़ी मात्रा में पानी नीचे की ओर बह सकता है।

    इसे ग्लेशियल लेक आउटबर्स्ट फ्लड (GLOF) कहा जाता है।

    ऐसी बाढ़ कुछ ही समय में निचली घाटियों में बड़े पैमाने पर तबाही मचा सकती है। खासकर उन इलाकों में खतरा ज्यादा होता है जहां बस्तियां और बुनियादी ढांचा नदियों के बेहद करीब बना हुआ है।

    बादल फटने से कुछ मिनटों में बदल सकते हैं हालात

    हिमालयी इलाकों में बादल फटना भी अचानक बड़ी आपदा का कारण बन सकता है। इसमें बेहद कम समय में एक छोटे क्षेत्र में बहुत ज्यादा बारिश होती है।

    पहाड़ी इलाकों में इसका प्रभाव कई गुना बढ़ जाता है। अचानक हुई मूसलाधार बारिश एक साथ भूस्खलन, मलबा प्रवाह और फ्लैश फ्लड जैसी घटनाओं को जन्म दे सकती है।

    नदियों का जलस्तर तेजी से बढ़ सकता है और अतिरिक्त पानी का भार पहले से कमजोर पहाड़ी ढलानों को अस्थिर कर सकता है।

    हिमालय में आपदाएं अलग-अलग नहीं, एक-दूसरे से जुड़ी होती हैं

    हिमालयी क्षेत्रों की सबसे बड़ी चुनौती यह है कि यहां एक प्राकृतिक घटना दूसरी आपदा को जन्म दे सकती है। भारी बारिश से ढलान कमजोर होता है, भूस्खलन नदी का रास्ता रोक सकता है और बाद में जमा पानी अचानक निकलकर बाढ़ ला सकता है। वहीं ग्लेशियरों के पिघलने से बनी झीलों के टूटने पर भी निचले इलाकों में अचानक जलप्रलय आ सकता है।

    यानी हिमालय में भूगर्भीय सक्रियता, खड़ी ढलान, अस्थिर चट्टानें, भारी बारिश, ग्लेशियरों में बदलाव और जलवायु परिवर्तन मिलकर आपदा का जोखिम बढ़ाते हैं।

    इसीलिए नेपाल, भारत, भूटान और हिमालय से जुड़े दूसरे क्षेत्रों में आपदा प्रबंधन, शुरुआती चेतावनी प्रणाली, नदी घाटियों में सुरक्षित निर्माण और संवेदनशील इलाकों की लगातार निगरानी बेहद महत्वपूर्ण हो जाती है।

  • सोनिया गांधी की किताब पर पेंगुइन का खुलासा: बोला- कोई बाहरी दबाव नहीं, एक मुद्दे पर नहीं बनी सहमति

    सोनिया गांधी की किताब पर पेंगुइन का खुलासा: बोला- कोई बाहरी दबाव नहीं, एक मुद्दे पर नहीं बनी सहमति


    नई दिल्ली। कांग्रेस संसदीय दल की प्रमुख सोनिया गांधी की बहुप्रतीक्षित आत्मकथा ‘बिलॉन्गिंग: ए जर्नी ऑफ लव’ को भारत में प्रकाशित नहीं करने के फैसले पर पेंगुइन रैंडम हाउस इंडिया ने सफाई दी है। प्रकाशक ने कहा कि किताब न छापने के पीछे किसी तरह का बाहरी दबाव नहीं था, बल्कि संपादकीय चर्चा के दौरान एक खास मुद्दे पर लेखक की टीम और प्रकाशक के बीच सहमति नहीं बन सकी।

    पेंगुइन रैंडम हाउस इंडिया (PRHI) के मुताबिक, पांडुलिपि पर सामान्य संपादकीय प्रक्रिया के तहत चर्चा हुई थी। कई मुद्दों पर लेखक की टीम ने बदलाव स्वीकार किए, जबकि कुछ मामलों में प्रकाशक ने लेखक के रुख को मान लिया। हालांकि, एक विशेष मुद्दे पर दोनों पक्षों के बीच सहमति नहीं बन पाई। इसके बाद सोनिया गांधी की टीम ने प्रकाशन प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ाने का फैसला किया।

    10 नवंबर को दुनियाभर में आएगी किताब

    सोनिया गांधी की आत्मकथा ‘बिलॉन्गिंग: ए जर्नी ऑफ लव’ का दुनियाभर में प्रकाशन 10 नवंबर को प्रस्तावित है। अमेरिका स्थित प्रकाशक अल्फ्रेड ए. नॉफ, जो पेंगुइन रैंडम हाउस का ही एक प्रकाशन संस्थान है, ने इसके वैश्विक प्रकाशन की घोषणा की है। विवाद भारत में इसके प्रकाशन को लेकर सामने आया है।

    कांग्रेस ने उठाए थे दबाव को लेकर सवाल

    पेंगुइन के फैसले के बाद कांग्रेस के कई नेताओं ने सरकार के दबाव और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को लेकर सवाल उठाए थे। राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने आरोप लगाया था कि पेंगुइन इंडिया पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, आरएसएस और मोदी सरकार के दौरान चीन द्वारा भारतीय क्षेत्र पर किए गए कब्जे से जुड़े अंश हटाने का दबाव था।

    हालांकि, पेंगुइन रैंडम हाउस इंडिया ने इन अटकलों को स्पष्ट रूप से खारिज कर दिया है। प्रकाशक का कहना है कि किताब प्रकाशित नहीं करने का फैसला किसी बाहरी हस्तक्षेप की वजह से नहीं लिया गया।

    पेंगुइन ने क्या कहा?

    PRHI की प्रवक्ता पल्लवी नारायण ने पीटीआई-भाषा से बातचीत में कहा कि प्रकाशक इस किताब को प्रकाशित करने के लिए काफी उत्सुक था और इसके अधिकार हासिल करने के लिए काफी प्रयास किए गए थे। उन्होंने कहा कि किताब की विषय-वस्तु गोपनीय है और प्रकाशन से पहले उस पर प्रतिबंध (एम्बार्गो) है, इसलिए किसी बाहरी दबाव की बात सही नहीं है।

    प्रकाशक के मुताबिक, पांडुलिपि की समीक्षा के दौरान कई बिंदु उठाए गए और सोनिया गांधी के प्रतिनिधियों के साथ उन पर चर्चा की गई। कुछ बदलावों पर सहमति बनी, जबकि कुछ मामलों में लेखक के मूल रुख को स्वीकार किया गया।

    आखिर किस मुद्दे पर अटकी बात?

    पेंगुइन ने यह बताने से इनकार कर दिया कि आखिर वह कौन-सा मुद्दा था जिस पर सहमति नहीं बन सकी। प्रकाशक ने कहा कि वह एक समझौते से बंधा है और लेखक की गोपनीयता उसके लिए सर्वोच्च प्राथमिकता है। इसलिए गतिरोध के कारणों का विवरण सार्वजनिक नहीं किया जा सकता।

    पेंगुइन इंडिया ने यह भी कहा कि किसी भी पांडुलिपि का आलोचनात्मक मूल्यांकन करना, सवाल उठाना, सुझाव देना और स्वतंत्र संपादकीय निर्णय लेना प्रकाशक की जिम्मेदारी है। कंपनी के अनुसार, ‘बिलॉन्गिंग’ के मामले में भी इसी सामान्य संपादकीय प्रक्रिया का पालन किया गया।

  • दिल्ली नाबालिग गैंगरेप केस: आरोपी ड्राइवर की मां ने बेटे को बताया निर्दोष, कहा- झूठा फंसाया जा रहा

    दिल्ली नाबालिग गैंगरेप केस: आरोपी ड्राइवर की मां ने बेटे को बताया निर्दोष, कहा- झूठा फंसाया जा रहा


    नई दिल्ली। दिल्ली-एनसीआर में चलती स्लीपर बस में 16 वर्षीय नाबालिग से गैंगरेप के मामले में गिरफ्तार बस चालक कुलदीप की मां ने अपने बेटे को निर्दोष बताया है। रोते हुए उन्होंने दावा किया कि उनके बेटे को साजिश के तहत फंसाया जा रहा है। उन्होंने सरकार से मामले की निष्पक्ष जांच की अपील करते हुए कहा कि उनका परिवार बेहद गरीब है और उनके छोटे बच्चे हैं।

    कुलदीप की मां ने कहा कि करीब दो महीने पहले उनके पति की हत्या कर दी गई थी। उन्हें शक है कि पति की हत्या में शामिल लोगों ने ही उनके बेटे को इस मामले में फंसाया है। उन्होंने सरकार से हाथ जोड़कर अपील करते हुए कहा कि उनके बेटे को निर्दोष घोषित किया जाए।

    मां बोली- ‘मेरा बच्चा पूरी तरह निर्दोष’

    कुलदीप की मां के मुताबिक, “मेरा बच्चा पूरी तरह निर्दोष है। उसे झूठा फंसाया जा रहा है।” उन्होंने कहा कि उनके परिवार में बहुत छोटे बच्चे हैं और उनके पास दिल्ली जाकर अपनी बात रखने के लिए पर्याप्त साधन भी नहीं हैं। उन्होंने सरकार से मामले में सच्चाई सामने लाने की मांग की है।

    चलती बस में वारदात का आरोप

    पुलिस के मुताबिक, 4 अगस्त की रात दिल्ली-एनसीआर में 16 वर्षीय नाबालिग के साथ चलती स्लीपर बस में ड्राइवर और कंडक्टर ने कथित तौर पर दुष्कर्म किया। घटना उस समय हुई जब भारी बारिश के बीच लड़की नोएडा जाने के लिए रास्ते में थी। पुलिस ने मामले में बस चालक कुलदीप और कंडक्टर संदीप को गिरफ्तार किया है।

    बस ग्रेटर नोएडा के परी चौक से पुरानी दिल्ली के कश्मीरी गेट जा रही थी। करीब 47 किलोमीटर की यात्रा के दौरान कथित तौर पर वारदात को अंजाम दिया गया। पुलिस ने बस को जब्त कर फॉरेंसिक जांच के लिए भेज दिया है।

    बारिश में परी चौक पहुंची थी नाबालिग

    पुलिस सूत्रों के अनुसार, लड़की 11वीं कक्षा की छात्रा है और मैनपुरी की रहने वाली है। वह परिवार को बताए बिना नोएडा में अपने कजिन से मिलने निकली थी। भारी बारिश और अंधेरे के बीच वह रास्ता भटककर ग्रेटर नोएडा के परी चौक पहुंच गई।

    इसी दौरान वहां से गुजर रही एक खाली स्लीपर बस लड़की के इशारा करने पर रुकी। ड्राइवर और कंडक्टर ने उसे नोएडा सेक्टर-63 की तरफ जाने की बात बताकर वहां छोड़ने की पेशकश की।

    पुलिस के मुताबिक दोनों आरोपी गिरफ्तार

    लड़की के बयान के आधार पर पुलिस ने आरोप लगाया है कि बस चलने के कुछ देर बाद कंडक्टर ने उसके साथ अश्लील हरकतें शुरू कीं। इसके बाद ड्राइवर और कंडक्टर ने कथित तौर पर उसके साथ दुष्कर्म किया। विरोध करने पर उसे जान से मारने की धमकी देने का भी आरोप है।

    DCP नॉर्थ निहारिका भट्ट ने सोमवार को मामले की पुष्टि करते हुए दोनों आरोपियों की गिरफ्तारी की जानकारी दी। पुलिस के मुताबिक, 29 वर्षीय आरोपी संदीप का कोई आपराधिक रिकॉर्ड नहीं मिला है।

    अब पुलिस मामले से जुड़े सभी साक्ष्यों, पीड़िता के बयान और फॉरेंसिक रिपोर्ट के आधार पर आगे की जांच कर रही है। कुलदीप की मां के लगाए गए साजिश के आरोपों की भी जांच में स्थिति स्पष्ट होने की उम्मीद है।

  • कांग्रेस के गढ़ में BJP का बड़ा दांव, जयपुर निगम चुनाव में उतारे 8 मुस्लिम उम्मीदवार, 51 महिलाओं को टिकट

    कांग्रेस के गढ़ में BJP का बड़ा दांव, जयपुर निगम चुनाव में उतारे 8 मुस्लिम उम्मीदवार, 51 महिलाओं को टिकट


    जयपुर। जयपुर नगर निगम चुनाव में भारतीय जनता पार्टी ने सामाजिक और महिला समीकरण साधते हुए 8 मुस्लिम उम्मीदवारों को टिकट दिया है। पार्टी ने 150 वार्डों में 51 सीटों पर महिलाओं को प्रत्याशी बनाया है। वहीं, कांग्रेस ने टिकट वितरण में संगठन से जुड़े नेताओं और मौजूदा पार्षदों पर भरोसा जताया है। ऐसे में दोनों दलों की रणनीति ने चुनावी मुकाबले को रोचक बना दिया है।

    भाजपा ने 51 महिलाओं को दिया टिकट

    भाजपा की सूची में महिला और सामाजिक समीकरण पर खास फोकस दिखाई दे रहा है। पार्टी ने 33% महिला आरक्षण के सिद्धांत से आगे बढ़ते हुए करीब 35% टिकट महिलाओं को दिए हैं। इनमें महिला मोर्चा से जुड़ी कार्यकर्ताओं के साथ लंबे समय से संगठन में सक्रिय महिला चेहरों को भी मौका दिया गया है।

    वार्ड 47 से दीपा नाथावत, वार्ड 56 से रेखा सैनी, वार्ड 107 से अनुराधा माहेश्वरी और वार्ड 123 से पूनम मेहता को प्रत्याशी बनाया गया है।

    सबसे चर्चित नाम कांग्रेस की पूर्व महापौर ज्योति खंडेलवाल का है। भाजपा ने उन्हें वार्ड 110 से मैदान में उतारा है। ज्योति खंडेलवाल जयपुर नगर निगम की महापौर रह चुकी हैं और लंबे समय तक कांग्रेस की राजनीति में सक्रिय रही हैं। अब भाजपा के टिकट पर चुनाव लड़ने से वार्ड 110 का मुकाबला खास हो गया है।

    8 मुस्लिम चेहरों पर भाजपा का भरोसा

    भाजपा ने मुस्लिम बहुल और कांग्रेस के प्रभाव वाले इलाकों में भी अपने उम्मीदवार उतारे हैं। पार्टी ने कुल 8 मुस्लिम नेताओं को पार्षद का टिकट दिया है।

    वार्ड 19 से शहनवाज अंसारी, वार्ड 109 से जाकिर खान कायमखानी, वार्ड 113 से फरीदुद्दीन ‘जैकी’, वार्ड 117 से शब्बो जहां, वार्ड 128 से माजिद पठान, वार्ड 136 से मिजाना मिर्जा, वार्ड 137 से रहीस मंसूरी और वार्ड 146 से अफसाना को प्रत्याशी बनाया गया है।

    इनमें वार्ड 19 का टिकट सबसे ज्यादा चर्चा में है। सामान्य सीट होने के बावजूद भाजपा ने यहां मुस्लिम उम्मीदवार को मैदान में उतारा है। इसे पार्टी की वार्डवार सामाजिक समीकरण साधने की रणनीति के तौर पर देखा जा रहा है।

    कांग्रेस ने संगठन के चेहरों पर जताया भरोसा

    कांग्रेस ने टिकट वितरण में अपने संगठन को प्राथमिकता दी है। पार्टी ने 4 ब्लॉक कांग्रेस अध्यक्षों, 2 पीसीसी प्रकोष्ठ प्रमुखों और एक पीसीसी सचिव को चुनाव मैदान में उतारा है।

    इसके अलावा कई मौजूदा पार्षदों को भी दोबारा टिकट दिया गया है। पार्टी ने अपने मौजूदा जनप्रतिनिधियों के स्थानीय जनाधार और वार्ड में सक्रियता को टिकट का आधार बनाया है।

    कांग्रेस की रणनीति संगठन के पुराने नेटवर्क और मौजूदा पार्षदों के स्थानीय प्रभाव के सहारे भाजपा को चुनौती देने की है। हालांकि टिकट वितरण के बाद दोनों दलों के सामने बागियों को संभालने की चुनौती भी रहेगी।

    2500 से ज्यादा दावेदारों में से चुने 150 चेहरे

    जयपुर निगम चुनाव के लिए भाजपा में कई दिनों तक टिकट को लेकर मंथन चला। 150 वार्डों के लिए करीब 2500 से ज्यादा दावेदारों ने टिकट की दावेदारी की थी। पार्टी के सामने जिताऊ उम्मीदवार चुनने के साथ पुराने कार्यकर्ताओं, जातीय समीकरण और स्थानीय प्रभाव के बीच संतुलन बनाने की चुनौती थी।

    भाजपा की सूची में महिला, युवा, सामाजिक और संगठन से जुड़े चेहरों का मिश्रण दिखाई दे रहा है। पार्टी ने वार्डवार समीकरण को ध्यान में रखते हुए उम्मीदवारों का चयन किया है।

    बागियों पर रहेगी दोनों दलों की नजर

    टिकट वितरण के बाद अब भाजपा और कांग्रेस के सामने नाराज दावेदारों को मनाने की चुनौती है। टिकट नहीं मिलने पर कुछ दावेदार निर्दलीय मैदान में उतर सकते हैं या दूसरे दलों का रुख कर सकते हैं। ऐसे में कई वार्डों में मुकाबला त्रिकोणीय या बहुकोणीय होने की संभावना है।

    भाजपा का 8 मुस्लिम उम्मीदवारों और 51 महिलाओं को टिकट देने का फैसला तथा कांग्रेस का संगठन के मजबूत चेहरों पर दांव अब चुनावी नतीजों पर कितना असर डालता है, यह चुनाव के दौरान देखने वाली बात होगी।

  • मुंबई में महंगाई का डबल झटका, CNG-PNG के साथ ऑटो-टैक्सी किराया भी बढ़ा

    मुंबई में महंगाई का डबल झटका, CNG-PNG के साथ ऑटो-टैक्सी किराया भी बढ़ा


    नई दिल्ली। मुंबई में एक सितंबर से आम लोगों की जेब पर महंगाई का दोहरा असर पड़ा है। महानगर गैस लिमिटेड (MGL) ने सीएनजी और घरेलू पीएनजी के दाम बढ़ा दिए हैं। वहीं, मुंबई महानगर क्षेत्र में ऑटो रिक्शा और काली-पीली टैक्सी का न्यूनतम किराया भी बढ़ गया है। दोनों बढ़ोतरी एक सितंबर से लागू हो गई हैं।

    CNG 2 रुपये और PNG 1 रुपये महंगी

    MGL के मुताबिक, मुंबई और आसपास के इलाकों में सीएनजी की कीमत 2 रुपये प्रति किलो बढ़कर 88 रुपये प्रति किलो हो गई है। घरेलू पाइप्ड नेचुरल गैस (PNG) के दाम में भी 1 रुपये प्रति एससीएम की बढ़ोतरी की गई है।

    कंपनी ने कीमत बढ़ाने के पीछे पश्चिम एशिया में जारी तनाव को वजह बताया है। MGL के अनुसार, इसके चलते अंतरराष्ट्रीय बाजार में गैस की कीमतें बढ़ी हैं। सीएनजी की बढ़ती मांग को पूरा करने के लिए महंगे दाम पर आयातित स्पॉट RLNG का इस्तेमाल करना पड़ रहा है।

    इस बढ़ोतरी का असर मुंबई, ठाणे, रायगढ़, रत्नागिरी, लातूर और धाराशिव के अलावा कर्नाटक के चित्रदुर्ग और दावणगेरे में MGL के नेटवर्क से सीएनजी लेने वाले करीब 13 लाख वाहन मालिकों पर पड़ेगा। वहीं, करीब 30 लाख घरेलू PNG उपभोक्ताओं को भी अब ज्यादा भुगतान करना होगा।

    ऑटो-टैक्सी का सफर भी हुआ महंगा

    मुंबई महानगर क्षेत्र में ऑटो और टैक्सी से सफर करने वालों के लिए भी किराया बढ़ गया है। मुंबई महानगर क्षेत्र परिवहन प्राधिकरण (MMRTA) ने ऑटो रिक्शा का न्यूनतम किराया 27 रुपये और काली-पीली टैक्सी का न्यूनतम किराया 33 रुपये कर दिया है।

    ऑटो के किराए में 1 रुपये और टैक्सी के किराए में 2 रुपये की बढ़ोतरी हुई है। अब टैक्सी का किराया 20.66 रुपये से बढ़कर 21.90 रुपये प्रति किलोमीटर हो गया है, जबकि ऑटो का किराया 17.14 रुपये से बढ़कर 18.22 रुपये प्रति किलोमीटर हो गया है।

    टैक्सी में पहले 1.5 किलोमीटर के लिए 31 रुपये देने पड़ते थे, अब इसके लिए 33 रुपये चुकाने होंगे।

    ड्राइवरों को मीटर अपडेट कराने के लिए नवंबर तक का समय

    आरटीओ अधिकारियों के मुताबिक, ड्राइवर अपने इलेक्ट्रॉनिक मीटर को नई दरों के अनुसार कैलिब्रेट करा सकते हैं। इसके अलावा आरटीओ से मंजूर किराया तालिका भी वाहन में प्रदर्शित की जा सकती है। मीटर को दोबारा कैलिब्रेट कराने के लिए ड्राइवरों को नवंबर के अंत तक का समय दिया गया है। तय अवधि में मीटर अपडेट नहीं कराने पर जुर्माना लगाया जा सकता है।

    ज्यादातर ऑटो-टैक्सी CNG पर निर्भर

    मुंबई महानगर क्षेत्र में 4.5 लाख से ज्यादा ऑटो रिक्शा और 50 हजार से अधिक काली-पीली टैक्सियां संचालित होती हैं। इनमें से अधिकांश वाहन सीएनजी से चलते हैं। ऐसे में ईंधन और किराया दोनों बढ़ने से यात्रियों के साथ-साथ ऑटो-टैक्सी चालकों पर भी खर्च का असर पड़ना तय है।

    मुंबई में इससे पहले ऑटो और टैक्सी का किराया फरवरी 2025 में बढ़ाया गया था। करीब 18 महीने बाद एक बार फिर किराए में बढ़ोतरी की गई है।

  • ट्रेड डील से पहले निर्यातकों का फीडबैक लेगा भारत, अमेरिका में शुल्क और रूस से तेल खरीद के असर पर बनेगी रणनीति

    ट्रेड डील से पहले निर्यातकों का फीडबैक लेगा भारत, अमेरिका में शुल्क और रूस से तेल खरीद के असर पर बनेगी रणनीति


    नई दिल्ली। भारत और अमेरिका के बीच प्रस्तावित द्विपक्षीय व्यापार समझौते को लेकर बातचीत लगातार आगे बढ़ रही है। इसी बीच भारत सरकार ने उद्योग जगत की चिंताओं और सुझावों को समझने के लिए अहम कदम उठाया है। वाणिज्य मंत्रालय मंगलवार को प्रमुख उद्योग संगठनों और निर्यात संवर्धन परिषदों के साथ बैठक करेगा। इस बैठक का मुख्य उद्देश्य भारत अमेरिका व्यापार संबंधों की मौजूदा स्थिति की समीक्षा करना और अमेरिकी बाजार में भारतीय निर्यातकों के सामने आ रही चुनौतियों को समझना होगा। बैठक की अध्यक्षता वाणिज्य मंत्रालय के अतिरिक्त सचिव दर्पण जैन करेंगे जो भारत अमेरिका द्विपक्षीय व्यापार समझौते के लिए भारत के मुख्य वार्ताकार भी हैं। बैठक में अलग अलग क्षेत्रों के निर्यात प्रदर्शन और हाल के व्यापारिक रुझानों पर विस्तार से चर्चा होने की संभावना है।

    इस महत्वपूर्ण बैठक में फार्मास्युटिकल्स इंजीनियरिंग वस्त्र कृषि रसायन समुद्री उत्पाद चमड़ा ऑटोमोबाइल ऑटो कंपोनेंट्स हस्तशिल्प और प्लास्टिक जैसे प्रमुख क्षेत्रों के प्रतिनिधियों के शामिल होने की उम्मीद है। इसके अलावा सीआईआई फिक्की एसोचैम और फियो जैसे प्रमुख उद्योग संगठनों के प्रतिनिधि भी अपने सुझाव रख सकते हैं। सरकार यह समझना चाहती है कि मौजूदा शुल्क व्यवस्था और अमेरिकी बाजार से जुड़ी व्यापारिक बाधाओं का भारतीय कारोबार और निर्यात पर कितना असर पड़ रहा है। उद्योग जगत से मिलने वाला फीडबैक आगे की बातचीत में भारत की रणनीति को मजबूत करने में अहम भूमिका निभा सकता है।

    यह बैठक ऐसे समय हो रही है जब वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल सितंबर के अंत में अमेरिका की यात्रा पर जाने वाले हैं। वह 30 सितंबर से मिल्वौकी में होने वाली जी20 व्यापार मंत्रिस्तरीय बैठक में हिस्सा लेंगे। इस दौरान अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि जैमीसन ग्रीर के साथ द्विपक्षीय बातचीत भी प्रस्तावित है। ऐसे में उससे पहले भारतीय उद्योगों की स्थिति और उनकी प्राथमिकताओं को समझना सरकार के लिए काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

    पीयूष गोयल पहले ही स्पष्ट कर चुके हैं कि भारत अमेरिका व्यापार समझौते का पहला चरण तभी लागू होगा जब भारतीय निर्यातकों को प्रतिस्पर्धी देशों की तुलना में बेहतर या कम से कम तुलनात्मक लाभ हासिल हो। यही वजह है कि सरकार अलग अलग सेक्टर से सीधे जानकारी जुटा रही है। वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल भी कह चुके हैं कि दोनों देश फरवरी में तय किए गए ढांचे के आधार पर समझौते को अंतिम रूप देने के लिए प्रतिबद्ध हैं और बातचीत सकारात्मक दिशा में आगे बढ़ रही है।

    हालांकि व्यापार समझौते के रास्ते में कुछ चुनौतियां भी मौजूद हैं। भारतीय निर्यात फिलहाल अमेरिका में सेक्शन 301 जांच के तहत लगाए गए अतिरिक्त 10 प्रतिशत शुल्क से प्रभावित हो रहा है। इसके अलावा रूस से भारत की कच्चे तेल की खरीद भी अमेरिका के साथ व्यापारिक बातचीत में एक महत्वपूर्ण मुद्दा बन सकती है। अमेरिकी सीनेट से जुड़े हालिया घटनाक्रम में रूस से तेल खरीदने वाले प्रमुख देशों के निर्यात पर भारी शुल्क लगाने की संभावना ने अनिश्चितता बढ़ाई है। भारत बड़ी मात्रा में रूसी कच्चा तेल खरीदता है और जुलाई में देश के कुल कच्चे तेल आयात में रूसी तेल की हिस्सेदारी 50 प्रतिशत से अधिक रही थी।

    इन परिस्थितियों के बीच भारत सरकार फिलहाल बातचीत को रचनात्मक बनाए रखने पर जोर दे रही है। उद्योग जगत के साथ होने वाली बैठक से सरकार को यह समझने में मदद मिलेगी कि अमेरिकी बाजार में किन क्षेत्रों को सबसे ज्यादा राहत की जरूरत है और प्रस्तावित व्यापार समझौते में किन मुद्दों को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। माना जा रहा है कि आने वाले समय में भारत अमेरिका ट्रेड डील को लेकर होने वाली बातचीत में इन सुझावों का असर साफ दिखाई दे सकता है।

  • नेपाल की बाढ़ ने छीनी हजारों की जिंदगी और रोजी-रोटी, 10 मिनट में खाली हुआ देवीघाट; मलबे में दबे घरों के बीच अपनों की तलाश

    नेपाल की बाढ़ ने छीनी हजारों की जिंदगी और रोजी-रोटी, 10 मिनट में खाली हुआ देवीघाट; मलबे में दबे घरों के बीच अपनों की तलाश


    नई दिल्ली। नेपाल में 26 अगस्त को आई भीषण बाढ़ ने देवीघाट कस्बे की तस्वीर ही बदल दी है। कभी लोगों की आवाजाही और कारोबार से गुलजार रहने वाला यह इलाका अब मलबे के ढेर में तब्दील हो चुका है। नुवाकोट जिले में त्रिशूली और ताड़ी नदी के संगम पर बसे देवीघाट में बाढ़ का पानी इतनी तेजी से बढ़ा कि लोगों को संभलने तक का मौका नहीं मिला। देखते ही देखते घर दुकानें सड़कें और दूसरी सुविधाएं पानी और मलबे की चपेट में आ गईं। स्थानीय लोगों के मुताबिक बाढ़ का मंजर इतना भयावह था कि उस वक्त किसी को अपना सामान बचाने की चिंता नहीं थी। हर किसी के सामने सिर्फ अपनी जान बचाने की चुनौती थी।

    30 अगस्त को जब लोग तबाही के चार दिन बाद अपने घरों और दुकानों के मलबे में जरूरी सामान तलाशने के लिए लौटे तो उन्हें एक बार फिर भागना पड़ा। अचानक बाढ़ का अलर्ट जारी हुआ और पूरे इलाके में अफरा तफरी मच गई। लोग सुरक्षित जगह की तलाश में ऊंचाई की ओर दौड़ने लगे। कुछ ही समय में पूरा कस्बा फिर से खाली हो गया। जिन लोगों ने अपने घरों में बचा हुआ सामान निकालने की उम्मीद में वापसी की थी उन्हें दोबारा अपनी जान बचाकर वहां से निकलना पड़ा। इस घटना ने लोगों के डर को और गहरा कर दिया है।

    देवीघाट में करीब 20 हजार लोगों की आबादी बताई जाती है लेकिन बाढ़ के बाद यहां हजारों लोगों के सामने अपना भविष्य बचाने का संकट खड़ा हो गया है। स्थानीय लोगों का कहना है कि करीब 7 हजार लोगों की अब तक कोई पुख्ता जानकारी नहीं मिल सकी है। बाढ़ के तेज बहाव में कई परिवार बिछड़ गए हैं और लोग अपनों की तलाश में भटक रहे हैं। कई घर पूरी तरह मलबे में दब चुके हैं जबकि कई मकानों की सिर्फ दीवारें बची हैं। दुकानों में रखा सामान कीचड़ और पानी में खराब हो चुका है।

    स्थानीय निवासी पवन नेगी बताते हैं कि इलाके में पहले भी बाढ़ आती रही है लेकिन इस बार जैसी तबाही उन्होंने कभी नहीं देखी। लोगों को उम्मीद थी कि पानी कुछ समय बाद उतर जाएगा और हालात सामान्य हो जाएंगे लेकिन इस बार बाढ़ ने घरों के साथ खेत और कारोबार भी तबाह कर दिए। अब प्रभावित परिवारों के सामने दोबारा जिंदगी शुरू करने की बड़ी चुनौती है। स्थानीय लोगों का मानना है कि इलाके को फिर से बसाने में कई साल लग सकते हैं।

    बाढ़ ने केवल लोगों के घर ही नहीं छीने बल्कि उनकी रोजी रोटी का साधन भी खत्म कर दिया है। कई लोगों की दुकानें बह गईं और पशुधन तक बाढ़ की भेंट चढ़ गया। बच्चों की पढ़ाई और परिवार के भविष्य को लेकर भी चिंता बढ़ गई है। मेडिकल स्टूडेंट राधिका थापा भी अपने परिवार के साथ मलबे में कपड़े और जरूरी सामान तलाशती नजर आईं। उनका घर और दुकान दोनों बाढ़ की चपेट में आ चुके हैं।

    देवीघाट की नंदा थापा के मुताबिक अचानक लोगों की चीख सुनाई दी कि बाढ़ आ गई है। इसके बाद किसी ने पीछे मुड़कर नहीं देखा और हर कोई जान बचाने के लिए सुरक्षित जगह की ओर भागने लगा। अब वही लोग मलबे के बीच अपनी जिंदगी के बचे हुए निशान तलाश रहे हैं। नेपाल की इस त्रासदी ने साफ कर दिया है कि प्राकृतिक आपदा के कुछ मिनट भी इंसान की पूरी जिंदगी बदल सकते हैं। देवीघाट में अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि जिन लोगों ने अपना सब कुछ खो दिया है वे दोबारा अपनी जिंदगी कैसे शुरू करेंगे।

  • नेपाल में कुदरत का कहर और 10 सेकेंड की जिंदगी की जंग! सैकड़ों मौतों के बीच लापता लोगों की तलाश जारी

    नेपाल में कुदरत का कहर और 10 सेकेंड की जिंदगी की जंग! सैकड़ों मौतों के बीच लापता लोगों की तलाश जारी


    नई दिल्ली। नेपाल में आई भीषण बाढ़ ने पूरे देश को गहरे संकट में डाल दिया है। 26 अगस्त को आई अचानक बाढ़ ने कई इलाकों में भारी तबाही मचाई और बड़ी संख्या में लोगों की जान चली गई। इस आपदा के बीच कुछ सेकेंड की सतर्कता कई लोगों के लिए जिंदगी और मौत के बीच का अंतर साबित हुई। रसुवा कस्टम ऑफिस के अधिकारी करबीर गैरे ने जब भोटेकोशी नदी में तेजी से बढ़ता बाढ़ का पानी देखा तो उन्होंने आसपास मौजूद लोगों को तुरंत ऊंचाई की तरफ भागने की चेतावनी दी। बताया गया कि चेतावनी के करीब 10 सेकेंड बाद ही तेज बहाव ने आसपास के ढांचों को अपनी चपेट में ले लिया। समय रहते लोगों को सुरक्षित स्थान की ओर भेजने से कई जानें बच सकीं।

    नेपाल के फ्लड फोरकास्टिंग डिविजन के अनुसार सुबह करीब 9 बजे तिब्बत की तरफ से भोटेकोशी में बाढ़ की सूचना मिली थी। इसके कुछ ही मिनट बाद रसुवा नुवाकोट धादिंग और चितवन समेत प्रभावित क्षेत्रों में करीब 6 लाख एसएमएस अलर्ट भेजे गए। आपदा के दौरान समय पर चेतावनी और लोगों की सतर्कता ने राहत और बचाव के प्रयासों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इसके बावजूद बाढ़ की भयावहता इतनी ज्यादा थी कि बड़ी संख्या में लोग इसकी चपेट में आ गए।

    अब तक नेपाल और तिब्बत में बाढ़ से 919 लोगों की मौत की जानकारी सामने आई है। इनमें अकेले नेपाल में 903 लोगों की जान गई है जबकि तिब्बत में 16 मौतें दर्ज की गई हैं। इसके अलावा 4200 से ज्यादा लोग अब भी लापता बताए जा रहे हैं। लापता लोगों की तलाश के साथ उनकी पहचान सुनिश्चित करने की चुनौती भी प्रशासन के सामने है। नेपाल पुलिस ने लापता लोगों के परिजनों से डीएनए सैंपल देने की अपील की है। माता पिता और बच्चों से डीएनए प्रोफाइलिंग के लिए नमूने मांगे जा रहे हैं ताकि बरामद शवों की पहचान लापता लोगों के परिवारों से मिलान करके की जा सके।

    बाढ़ का असर नेपाल की सीमाओं से बाहर भी दिखाई दिया है। उत्तर प्रदेश के महाराजगंज जिले में नारायणी गंडक नदी से चार अज्ञात शव बरामद किए गए जिन्हें नेपाल प्रशासन को सौंप दिया गया। इनमें तीन महिलाएं और एक पुरुष शामिल हैं। पहचान सुनिश्चित करने के लिए पोस्टमॉर्टम के दौरान डीएनए सैंपल लिए गए हैं जिन्हें नेपाल प्रशासन के साथ साझा किया जाएगा।

    इस बीच हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट्स की सुरंगों में फंसे लोगों को निकालने के लिए रेस्क्यू अभियान लगातार जारी है। त्रिशूली-3A समेत कई परियोजनाओं की सुरंगों के मुहानों पर जमा मलबा और कीचड़ हटाकर अंदर पहुंचने की कोशिश की जा रही है। नेपाल के सुरक्षा बलों के साथ भारत और चीन के विशेषज्ञ भी बचाव अभियान में सहयोग कर रहे हैं। भारी मशीनों और विशेष उपकरणों की मदद से सुरंगों के रास्ते खोलने का प्रयास किया जा रहा है।

    नेपाल की इस भीषण आपदा के बाद कई देशों ने मदद का हाथ बढ़ाया है। भारत ने मानवीय सहायता के साथ मेडिकल और टनल रेस्क्यू टीम भेजी है। ब्रिटेन यूरोपीय संघ कनाडा अमेरिका और चीन की ओर से भी आर्थिक और मानवीय सहायता की घोषणा की गई है। ऐसे समय में राहत और बचाव अभियान के साथ लापता लोगों की तलाश सबसे बड़ी प्राथमिकता बनी हुई है। नेपाल अब इस त्रासदी से उबरने की कठिन चुनौती के बीच प्रभावित परिवारों को राहत पहुंचाने और बाढ़ से तबाह हुए क्षेत्रों को दोबारा खड़ा करने की कोशिश में जुटा है।

  • नेपाल त्रासदी में अपनों का इंतजार, बीमार माता-पिता से छिपाया बेटा-बहू के लापता होने का दर्द, टीवी-अखबार कराया बंद

    नेपाल त्रासदी में अपनों का इंतजार, बीमार माता-पिता से छिपाया बेटा-बहू के लापता होने का दर्द, टीवी-अखबार कराया बंद

    कानपुर। नेपाल में आई भीषण त्रासदी के बाद कानपुर के एक परिवार की उम्मीदें अब भी अपनों की वापसी पर टिकी हैं। श्यामनगर निवासी और अमेरिकी नागरिक पंकज मिश्रा, उनकी पत्नी रागिनी मिश्रा और छोटे भाई की पत्नी पूनम मिश्रा का 25 अगस्त के बाद से कोई पता नहीं चल सका है। परिवार को अब भी उनके सुरक्षित मिलने की उम्मीद है। वहीं, बेटे और बहू के लापता होने की खबर बुजुर्ग माता-पिता से इसलिए छिपाई जा रही है, क्योंकि दोनों हृदय रोगी हैं। उन्हें जानकारी न मिले, इसके लिए घर में आने वाला अखबार बंद करा दिया गया है और टीवी का कनेक्शन भी कटवा दिया गया है।

    श्यामनगर के ई-ब्लॉक निवासी राजेंद्र मिश्रा सेवानिवृत्त एयरफोर्स कर्मी हैं। परिवार में पत्नी सुमन मिश्रा और तीन बेटे पंकज, धीरज और अनुज हैं। पंकज पत्नी रागिनी और बेटे अरमान के साथ अमेरिका में रहते हैं। उनके छोटे भाई धीरज भी पत्नी पूनम, बेटे ध्रुव और बेटी मानसी के साथ अमेरिका में रहते हैं। पंकज, धीरज और पूनम सॉफ्टवेयर इंजीनियर हैं, जबकि रागिनी सरकारी शिक्षिका हैं। परिवार के सभी सदस्य अमेरिका के नागरिक हैं।

    कैलाश मानसरोवर यात्रा के लिए काठमांडू गए थे
    परिवार के मुताबिक, 20 अगस्त को सभी लोग अमेरिका से फ्लाइट से दिल्ली पहुंचे थे। इसके बाद दिल्ली से कैलाश मानसरोवर यात्रा के लिए काठमांडू रवाना हुए। इससे पहले उन्होंने नेपाल में पशुपतिनाथ मंदिर के दर्शन भी किए थे। उनके साथ कुल 31 लोग थे, जिनमें 26 पर्यटक और पांच गाइड शामिल थे।

    श्यामनगर में रहने वाले सबसे छोटे भाई डॉ. अनुज मिश्रा ने बताया कि आखिरी बार 25 अगस्त को उनकी भाई पंकज से बात हुई थी। इसके बाद से पंकज, रागिनी और पूनम से संपर्क नहीं हो सका है। परिवार लगातार फोन मिलाने की कोशिश कर रहा है, लेकिन कोई जवाब नहीं मिल रहा। नेपाल में आई त्रासदी के बाद से परिजनों की चिंता लगातार बढ़ती जा रही है। परिवार नेपाल के पीएमओ से भी संपर्क करने की कोशिश कर रहा है।

    माता-पिता को बताया- फोन पर संपर्क नहीं हो पा रहा
    अनुज ने बताया कि उनके पिता राजेंद्र और मां सुमन दोनों हृदय रोगी हैं। ऐसे में परिवार ने उन्हें नेपाल में अपनों के लापता होने की जानकारी नहीं दी है। माता-पिता बार-बार बेटे और बहू से बात कराने के लिए कह रहे हैं तो परिजन उन्हें फोन पर संपर्क नहीं हो पाने की बात बताकर टाल रहे हैं।

    बुजुर्ग माता-पिता को किसी तरह खबर न मिल जाए, इसके लिए घर में आने वाला अखबार बंद करा दिया गया है। टीवी का कनेक्शन भी कटवा दिया गया है। परिवार इस समय एक तरफ अपनों के सुरक्षित लौटने की प्रार्थना कर रहा है, वहीं दूसरी ओर माता-पिता से सच्चाई छिपाने की मजबूरी से जूझ रहा है।

    ‘बहन राखी भेजती थी, इस बार मन बेचैन है’
    पीरोड में रहने वाले रागिनी मिश्रा के भाई प्रवीण द्विवेदी ने बताया कि रक्षाबंधन पर उनकी बहन हर साल राखी भेजती थीं। इस बार भी उन्होंने राखी भेजी थी, लेकिन अब बहन, बहनोई और उनकी देवरानी के लापता होने की खबर ने पूरे परिवार को बेचैन कर दिया है। प्रवीण ने कहा कि परिवार लगातार उनके सुरक्षित मिलने की उम्मीद लगाए बैठा है। हर फोन कॉल और हर नई सूचना के साथ परिजनों की उम्मीदें जुड़ी हुई हैं।