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  • उत्तराखंड समेत पूर्वोत्तर के राज्यों में आज भारी बारिश की चेतावनी…. अन्य हिस्सों में कमजोर पड़ा मॉनसून

    उत्तराखंड समेत पूर्वोत्तर के राज्यों में आज भारी बारिश की चेतावनी…. अन्य हिस्सों में कमजोर पड़ा मॉनसून


    नई दिल्ली।
    देश के कई हिस्सों में मॉनसून (Monsoon) की गतिविधियां अभी कमजोर हैं, लेकिन उत्तराखंड, हिमाचल, पश्चिम बंगाल, ओडिशा और पूर्वोत्तर राज्यों में भारी बारिश (Heavy rain) की चेतावनी है. वहीं, राजस्थान में धूल भरी तेज आंधी चलने की संभावना है. भारतीय मौसम विभाग (IMD) के अनुसार, उत्तराखंड (Uttarakhand) में भारी से बहुत भारी बारिश का रेड अलर्ट जारी है।

    भारतीय मौसम विभाग (IMD) के मुताबिक, अगले 2-3 दिनों में पूर्वोत्तर भारत, पश्चिम बंगाल और बिहार में कहीं-कहीं भारी से बहुत भारी बारिश हो सकती है. जबकि पूर्वी उत्तर प्रदेश में 4-5 दिन बाद बारिश होने की संभावना है. हालांकि, अगले 5-6 दिनों में उत्तर-पश्चिम, पश्चिम मध्य और दक्षिण प्रायद्वीपीय भारत में कमजोर मॉनसून और कम बारिश का अनुमान है।


    उत्तराखंड में बारिश का रेड अलर्ट

    उत्तराखंड में IMD ने भारी से बहुत भारी बारिश के लिए रेड अलर्ट जारी किया है. राज्य में बीते दिन भी बारिश के कारण कई जगहों पर भूस्खलन हुआ है. उत्तराखंड में भारी बारिश और भूस्खलन की वजह से 126 सड़कें बंद हैं, जिसमें दो नेशनल हाईवे भी शामिल हैं. यमुनोत्री राजमार्ग पर भी यातायात प्रभावित है. स्याना चट्टी में भूस्खलन के कारण ऋषिकेश-यमुनोत्री नेशनल हाईवे पर यातायात ठप हुआ है।


    राजस्थान में धूल भरी हवाएं

    मौसम विभाग (IMD) के अपने पूर्वानुमान ने बताया कि अगले 5-6 दिनों में पूर्वी राजस्थान में सूखा रहेगा. हालांकि, 13 से 15 जुलाई के बीच शेखावाटी, जयपुर और भरतपुर संभाग में हल्की बारिश हो सकती है. जबकि पश्चिमी राजस्थान में 30-40 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से धूल भरी तेज हवाएं चलने और धूल भरी आंधी आने की चेतावनी है.


    पश्चिम बंगाल में भारी बारिश

    पश्चिम बंगाल में बीते दिन अच्छी बारिश दर्ज की गई है. कोचबिहार जिले के पुंडिबारी में सबसे ज्यादा 89 मिमी बारिश हुई. IMD ने 14 जुलाई तक राज्य के कई जिलों में भारी बारिश का अलर्ट जारी किया है. उप-हिमालयी इलाकों और दक्षिणी जिलों (बांकुरा, बर्दवान, नदिया, मुर्शिदाबाद आदि) में भारी बारिश की संभावना है।


    ओडिशा में चार दिन बारिश का अलर्ट

    ओडिशा में अगले चार दिन तक कई जिलों में गरज-चमक के साथ बारिश होने की संभावना है. सोमवार को बालासोर, भद्रक, केंद्रापड़ा, सुंदरगढ़, झारसुगुड़ा, बरगढ़, संबलपुर, केवझर, मयूरभंज, कालाहांडी, कंधमाल और रायगड़ा जिलों में भारी बारिश हो सकती है. IMD ने इन जिलों के लिए येलो अलर्ट जारी किया है. IMD के मुताबिक, इस मॉनसून सीजन में ओडिशा में अब तक 348.1 मिमी बारिश हो चुकी है, जो सामान्य से 8% ज्यादा है।


    दिल्ली और यूपी के मौसम की जानकारी

    राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में अधिकतम तापमान सामान्य से थोड़ा ऊपर दर्ज किया जा रहा है. मौसम विभाग (IMD) ने अगले 7 दिनों में तापमान में कोई बड़ा बदलाव नहीं होने का अनुमान लगाया है. दिल्ली में अधिकतम तापमान 35-36 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान 26-28 डिग्री सेल्सियस रह सकता है।

    वहीं, उत्तर प्रदेश में अगले 3-4 दिन बारिश की संभावना नहीं है.लखनऊ में आंशिक रूप से बादल छाए रहने के साथ साफ मौसम रहने की संभावना है. मौसम विभाग के मुताबिक, उत्तर प्रदेश में इस सीजन में अब तक मॉनसून सामान्य से 17% कम रहा है. 1 जून से 12 जुलाई तक 158.8 मिमी बारिश हुई, जबकि सामान्य 190.9 मिमी है।


    हिमाचल में भी हल्की से मध्यम बारिश

    हिमाचल प्रदेश में भी लगातार हल्की से मध्यम बारिश हो रही है. पिछले 24 घंटों में मंडी जिले के जोगिंदरनगर में सबसे ज्यादा 60 मिमी बारिश दर्ज की गई. वहीं, मनाली में 45 मिमी, सराहन में 38.5 मिमी, रोहड़ू में 25 मिमी और शिमला में 19 मिमी बारिश हुई है।

  • देश में हेल्थ रिसर्च पर बड़े निवेश की तैयारी… गंभीर बीमारियों पर फोकस, 6 गुना बढ़ेगा खर्च

    देश में हेल्थ रिसर्च पर बड़े निवेश की तैयारी… गंभीर बीमारियों पर फोकस, 6 गुना बढ़ेगा खर्च


    नई दिल्ली।
    कैंसर, टीबी, मधुमेह, दिल की बीमारियों और मानसिक स्वास्थ्य जैसी गंभीर चुनौतियों से निपटने के लिए केंद्र सरकार (Central government) स्वास्थ्य अनुसंधान (Health Research) पर बड़ा निवेश करने की तैयारी कर रही है। राष्ट्रीय स्वास्थ्य अनुसंधान नीति-2026 (National Health Research Policy-2026) (ड्राफ्ट) में 2047 तक स्वास्थ्य अनुसंधान पर खर्च को मौजूदा स्तर से करीब 6.25 गुना बढ़ाने का लक्ष्य रखा गया है। अभी देश स्वास्थ्य अनुसंधान पर सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) का 0.024 फीसदी खर्च करता है, जिसे 2037 तक बढ़ाकर 0.072 फीसदी और 2047 तक 0.15 फीसदी करने की योजना है।

    नई नीति में सरकार ने कहा है कि अब सिर्फ शोध पत्र प्रकाशित करना उद्देश्य नहीं, बल्कि ऐसी रिसर्च को बढ़ावा देना है, जिससे नई दवाएं, वैक्सीन, जांच तकनीक और इलाज आम लोगों तक तेजी से पहुंच सके। ड्राफ्ट नीति के अनुसार, आने वाले कुछ वर्षों में स्वास्थ्य अनुसंधान का पूरा फोकस उन बीमारियों पर रहेगा, जिनका देश में सबसे ज्यादा बोझ है। इनमें कैंसर, टीबी, मधुमेह, हृदय रोग, मानसिक स्वास्थ्य, मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य, कुपोषण, एंटीमाइक्रोबियल रेजिस्टेंस, संक्रामक रोग और बुजुर्गों की बीमारियां शामिल हैं। सरकार समय-समय पर राष्ट्रीय स्वास्थ्य अनुसंधान एजेंडा तैयार करेगी, ताकि जरूरत के मुताबिक प्राथमिकताएं तय की जा सकें।


    मेडिकल कॉलेज बनेंगे रिसर्च हब

    नीति के तहत देशभर के मेडिकल कॉलेजों में मल्टीडिसिप्लिनरी रिसर्च यूनिट (एमआरयू) का विस्तार किया जाएगा। साथ ही, अभी तक वायरस की जांच और रिसर्च करने वाली वायरल रिसर्च एंड डायग्नोस्टिक लैब (वीआरडीएल) को अपग्रेड कर इन्फेक्शियस डिजीज रिसर्च एंड डायग्नोस्टिक लैब (आईआरडीएल) बनाया जाएगा। इससे बैक्टीरिया, फंगस और परजीवी जनित बीमारियों पर भी व्यापक रिसर्च हो सकेगी। ड्राफ्ट नीति में भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) के संस्थानों को देश के स्वास्थ्य अनुसंधान की रीढ़ बनाने की बात कही गई है। इसके लिए अत्याधुनिक लैब, नई तकनीक और राज्यों के साथ बेहतर समन्वय विकसित किया जाएगा, ताकि देशभर में एक मजबूत रिसर्च नेटवर्क तैयार हो सके।


    देश में बनेंगी नई दवाएं और वैक्सीन

    सरकार ने नीति में स्टार्टअप, उद्योग, मेडिकल कॉलेज और रिसर्च संस्थानों के सहयोग से स्वदेशी दवाओं, वैक्सीन, मेडिकल डिवाइस, डायग्नोस्टिक किट के विकास पर जोर दिया है। नई नीति में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई), जीनोमिक्स, डिजिटल हेल्थ डाटा और राष्ट्रीय रोग रजिस्ट्रियों का उपयोग बढ़ाने का प्रस्ताव है।

    नई नीति का एक बड़ा बदलाव यह है कि अब शोध का मूल्यांकन केवल प्रकाशित शोध पत्रों के आधार पर नहीं होगा। यह भी देखा जाएगा कि रिसर्च से नई दवा या तकनीक विकसित हुई या नहीं, सरकारी नीतियों में बदलाव आया या नहीं और मरीजों तक उसका वास्तविक लाभ पहुंचा या नहीं। इसके लिए आईसीएमआर-आईआरआईएस नाम का नया मूल्यांकन ढांचा तैयार किया जाएगा। नीति में राज्यों से भी स्वास्थ्य अनुसंधान के लिए अलग फंड बनाने और निवेश बढ़ाने की अपील की गई है। केंद्र और राज्यों के कुल निवेश की नियमित समीक्षा की जाएगी, ताकि तय लक्ष्यों को समय पर हासिल किया जा सके।

  • जातिगत जनगणना की बाधाएं दूर करने के लिए तैयार हो रही प्रश्नावली, आंकड़ों की शुद्धता पर जोर

    जातिगत जनगणना की बाधाएं दूर करने के लिए तैयार हो रही प्रश्नावली, आंकड़ों की शुद्धता पर जोर


    नई दिल्ली।
    जनगणना (Census) का अगला चरण (Second-phase) जाति आधारित गिनती (Caste Census) के लिहाज से खासा चुनौतीपूर्ण होने जा रहा है। जाति जनगणना के लिए ऐसी प्रश्नावली (Questionnaire) तैयार की जा रही है ताकि नतीजे ज्यादा सटीक और तार्किक आ सकें। जनगणनाकर्मियों के सामने जाति संबंधी सूचना की प्रामाणिकता को सत्यापित करने का साधन भी तलाशा जा रहा है।

    लद्दाख, जम्मू-कश्मीर, उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश के हिमाच्छादित क्षेत्रों में जातिगत जनगणना इसी साल सितंबर में होनी है, ऐसे में जनगणना के दूसरे चरण से जुड़े सवाल अगस्त महीने में जारी कर दिए जाएंगे। जनगणना का पहला चरण अब पूरा होने को है। अगले चरण के लिए एक मार्च, 2027 के दिन को मानक मानकर लोगों की गिनती व उनकी जाति की गणना के लिए प्रश्नावली का फ्रेमवर्क बन रहा है। इसमें हर नागरिक से जनसांख्यिकीय, सामाजिक-आर्थिक, शिक्षा, प्रवास, प्रजनन आदि से संबंधित जानकारी मांगी जाएगी।

    दूसरे चरण का काम शुरू करने से भारत के महारजिस्ट्रार और जनगणना आयुक्त कार्यालय की ओर से पहले जनगणना प्रगणकों का एक पूर्वाभ्यास कराया जा रहा है। इसमें जाति पता करने में कई तरह की भ्रामक या आधी अधूरी सूचनाएं मिल रही हैं। अब समस्या है कि जातियों व उपजातियों का वर्गीकरण कैसे किया जाए। अगर किसी से केवल उसकी जाति पूछी जाए, तो एक जाति वर्ग में आने वाले लोग अलग-अलग जगह पर अलग-अलग नाम ले रहे हैं। इसीलिए जातिगत आंकड़ों की सटीकता व शुद्धता पर ज्यादा जोर है।


    अंग्रेजों के वक्त 4,147 जातियां थी, जबकि 2011 में 46 लाख जातियां

    जब 1931 में आखिरी जातिगत जनगणना हुई, तो 4,147 जातियों के नाम सामने आए। जब 2011 की जनगणना के साथ-साथ सामाजिक-आर्थिक और जाति जनगणना हुई, तो 46 लाख जातियां निकल आईं। जातियों की संख्या इसलिए बढ़ गई क्योंकि प्रश्नावली में सीधा सवाल पूछा गया कि आपकी जाति क्या है। जवाब में जातियों, उप-जातियों, गोत्र व कुल के नाम भी लोगों ने दर्ज कराए। इसीलिए केंद्र सरकार ने 2021 में सुप्रीम कोर्ट में कहा कि 2011 में जाति गणना त्रुटियों से भरी हुई है।

    शायद इसी वजह से इस कवायद का निर्रथक माना गया और इसके नतीजे सार्वजनिक नहीं हुए। अब उन्हीं व्यावहारिक कठिनाइयों को दूर करने का काम किया जा रहा है। मसलन अनाथ और बेसहारा बच्चों की सही जाति जानने का काम खासा मुश्किल होगा, वे संभवत इसे बताने की स्थिति में न हों। अब जनगणना अधिकारियों को बताया गया है कि वे जाति की वर्तनी सही तरीके से दर्ज करें। एक जैसी ध्वनि वाली जातियों को अलग-अलग जातियों में दर्ज करने से पहले उसमें अंतर की पुष्टि होनी भी जरूरी है।

  • शिवसेना यूबीटी के पूर्व सांसद विवादों में बहू ने लगाए काला जादू और मानसिक प्रताड़ना जैसे गंभीर आरोप

    शिवसेना यूबीटी के पूर्व सांसद विवादों में बहू ने लगाए काला जादू और मानसिक प्रताड़ना जैसे गंभीर आरोप


    नई दिल्ली । महाराष्ट्र की राजनीति से जुड़ा एक मामला इन दिनों सुर्खियों में है जहां शिवसेना यूबीटी के पूर्व सांसद विनायक राउत और उनके परिवार के खिलाफ उनकी बहू ने गंभीर आरोप लगाते हुए पुलिस में शिकायत दर्ज कराई है। शिकायत में शारीरिक मानसिक और आर्थिक प्रताड़ना के साथ काला जादू कराने तथा अंधविश्वास से जुड़ी कथित गतिविधियों का भी उल्लेख किया गया है। पुलिस ने शिकायत के आधार पर मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है जबकि पूर्व सांसद ने सभी आरोपों को निराधार बताते हुए उन्हें परिवार पर दबाव बनाने की कोशिश करार दिया है।

    पुलिस के अनुसार शिकायतकर्ता महिला ने आरोप लगाया है कि वर्ष 2017 में उसकी शादी विनायक राउत के बेटे जितेश से कराई गई जबकि परिवार को पहले से यह जानकारी थी कि वह वैवाहिक संबंध निभाने में सक्षम नहीं है। महिला का दावा है कि जब उसने इस विषय पर सवाल उठाए तो उसकी समस्याओं का समाधान करने के बजाय उसे मानसिक और शारीरिक प्रताड़ना का सामना करना पड़ा। उसने आरोप लगाया कि उसे यह कहकर बहलाया गया कि उसके वैवाहिक जीवन में किसी बाहरी बाधा का असर है और उसे दूर करने के लिए कथित धार्मिक अनुष्ठानों का सहारा लिया गया।

    महिला का यह भी आरोप है कि इन कथित अनुष्ठानों के दौरान कुछ लोगों ने उसके साथ अशोभनीय और आपत्तिजनक व्यवहार किया। शिकायत में यह भी कहा गया है कि उसे विभिन्न देशों की यात्राओं के दौरान भी मानसिक दबाव और दुर्व्यवहार झेलना पड़ा। इसके अलावा उसने अपनी सास पर आरोप लगाया कि उसे मासिक धर्म रोकने वाली दवाएं लेने के लिए मजबूर किया गया जिससे उसकी सेहत पर प्रतिकूल असर पड़ा। महिला का यह भी कहना है कि उचित चिकित्सकीय उपचार उपलब्ध कराने के बजाय वैकल्पिक तरीकों से गर्भधारण कराने की सलाह दी गई।

    पुलिस ने इस मामले में भारतीय न्याय संहिता की विभिन्न धाराओं के साथ महाराष्ट्र मानव बलि और अन्य अमानवीय बुरी एवं अघोरी प्रथाओं तथा काला जादू निवारण कानून के तहत भी प्रकरण दर्ज किया है। अधिकारियों का कहना है कि मामले की हर पहलू से जांच की जा रही है और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

    दूसरी ओर पूर्व सांसद विनायक राउत ने सभी आरोपों को पूरी तरह खारिज किया है। उनका कहना है कि उनके बेटे और शिकायतकर्ता के बीच तलाक की प्रक्रिया पहले से चल रही है। उन्होंने दावा किया कि समझौते के दौरान महिला की ओर से करोड़ों रुपये की आर्थिक मांग की गई थी जिसे स्वीकार नहीं किया गया। राउत का आरोप है कि इसके बाद परिवार पर दबाव बनाने के उद्देश्य से यह शिकायत दर्ज कराई गई। उन्होंने स्पष्ट कहा कि उनका परिवार तंत्र मंत्र या काले जादू जैसी किसी भी गतिविधि में विश्वास नहीं करता और लगाए गए सभी आरोप पूरी तरह झूठे हैं।

    यह मामला अब कानूनी प्रक्रिया के अधीन है और पुलिस जांच के बाद ही आरोपों की सच्चाई स्पष्ट हो सकेगी। फिलहाल दोनों पक्ष अपने अपने दावे कर रहे हैं लेकिन अंतिम निष्कर्ष जांच और न्यायिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही सामने आएगा।

  • भारतीय रेलवे के इतिहास का नया अध्याय अगले साल से शुरू होगी बुलेट ट्रेन जानिए किस रूट पर पहले मिलेगी सौगात

    भारतीय रेलवे के इतिहास का नया अध्याय अगले साल से शुरू होगी बुलेट ट्रेन जानिए किस रूट पर पहले मिलेगी सौगात


    नई दिल्ली । भारत का बहुप्रतीक्षित बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट अब अपने अंतिम चरण की ओर बढ़ रहा है और देश को अगले वर्ष एक ऐतिहासिक सौगात मिलने जा रही है। केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने घोषणा की है कि 15 अगस्त 2027 से भारत की पहली बुलेट ट्रेन का संचालन शुरू कर दिया जाएगा। शुरुआत मुंबई अहमदाबाद हाई स्पीड रेल कॉरिडोर के पहले चरण सूरत से बिलिमोरा के बीच होगी। इसके बाद परियोजना को चरणबद्ध तरीके से आगे बढ़ाते हुए वापी अहमदाबाद ठाणे और अंत में पूरे मुंबई अहमदाबाद मार्ग तक विस्तार दिया जाएगा।

    यह परियोजना केवल एक नई ट्रेन की शुरुआत नहीं बल्कि भारत के परिवहन इतिहास में तकनीकी बदलाव का सबसे बड़ा कदम मानी जा रही है। पूरी तरह तैयार होने के बाद यह बुलेट ट्रेन 320 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से दौड़ेगी। इससे यात्रियों का सफर पहले की तुलना में कई गुना तेज और अधिक सुविधाजनक हो जाएगा। रेल मंत्रालय के अनुसार परियोजना का लगभग 80 प्रतिशत निर्माण कार्य पूरा हो चुका है और शेष कार्य तेजी से आगे बढ़ रहा है।

    मुंबई अहमदाबाद हाई स्पीड रेल कॉरिडोर की कुल लंबाई 508 किलोमीटर है। इस परियोजना में आधुनिक तकनीक अत्याधुनिक सुरक्षा प्रणाली और विश्वस्तरीय इंफ्रास्ट्रक्चर का उपयोग किया जा रहा है। बुलेट ट्रेन के शुरू होने से दोनों महानगरों के बीच यात्रा का समय काफी कम हो जाएगा जिससे व्यापार उद्योग पर्यटन और निवेश को भी नई गति मिलेगी। विशेषज्ञों का मानना है कि यह परियोजना भारत की आर्थिक गतिविधियों को मजबूत करने में अहम भूमिका निभाएगी।

    रेल मंत्री ने रेलवे स्टेशनों के पुनर्विकास कार्यों की भी जानकारी दी। उन्होंने बताया कि देशभर में 261 रेलवे स्टेशनों का कायाकल्प तेजी से किया जा रहा है। सिकंदराबाद रेलवे स्टेशन का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि ट्रेन संचालन को बिना रोके आधुनिक सुविधाओं से लैस स्टेशन तैयार करना बड़ी चुनौती है लेकिन भारतीय रेलवे इसे सफलतापूर्वक पूरा कर रही है। नए स्टेशन एयरपोर्ट जैसी सुविधाओं और आधुनिक यात्री सेवाओं से लैस होंगे।

    रेल मंत्री ने यह भी बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हैदराबाद क्षेत्र के लिए तीन हाई स्पीड रेल कॉरिडोर की मंजूरी दी है। इनमें पुणे से हैदराबाद हैदराबाद से चेन्नई और हैदराबाद से बेंगलुरु तक हाई स्पीड रेल परियोजनाएं शामिल हैं। इन परियोजनाओं के पूरा होने के बाद दक्षिण भारत में तेज रफ्तार रेल नेटवर्क विकसित होगा जिससे उद्योग व्यापार और रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे। हैदराबाद को भविष्य का प्रमुख हाई स्पीड रेल हब बनाने की दिशा में यह एक बड़ा कदम माना जा रहा है।

    भारत में बुलेट ट्रेन परियोजना केवल तेज यात्रा का माध्यम नहीं बल्कि आधुनिक भारत की नई पहचान बनने जा रही है। इससे रेलवे तकनीक में आत्मनिर्भरता बढ़ेगी निर्माण क्षेत्र को नई ऊर्जा मिलेगी और हजारों लोगों को प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रोजगार मिलेगा। आने वाले वर्षों में यदि अन्य हाई स्पीड रेल कॉरिडोर भी इसी गति से विकसित होते हैं तो भारत दुनिया के उन चुनिंदा देशों में शामिल हो जाएगा जहां अत्याधुनिक बुलेट ट्रेन नेटवर्क उपलब्ध होगा। यह परियोजना देश के बुनियादी ढांचे को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने के साथ विकास और प्रगति की नई रफ्तार भी तय करेगी।

  • आंध्र प्रदेश के नागप्पा परिवार में हैं 83 सदस्य और 6 पीढ़ियां, लेकिन रसोई एक, बना संयुक्त परिवार की मिसाल

    आंध्र प्रदेश के नागप्पा परिवार में हैं 83 सदस्य और 6 पीढ़ियां, लेकिन रसोई एक, बना संयुक्त परिवार की मिसाल


    नई दिल्‍ली । आजकल संयुक्त परिवार धीरे-धीरे कम होते जा रहे हैं. लोग अब न्यूक्लियर फैमिली की तरफ बढ़ रहे हैं. नौकरी, पढ़ाई और बेहतर सुविधाओं की तलाश में लोग अलग-अलग शहरों में बस जाते हैं. ऐसे समय में आंध्र प्रदेश के अनंतपुर जिले के कुरलपल्ली गांव का नागप्पा परिवार लोगों के लिए एक मिसाल बनकर सामने आया है.

    इस परिवार में कुल 83 सदस्य रहते हैं. खास बात यह है कि परिवार छह पीढ़ियों तक फैला हुआ है और आज भी सभी लोग मिल-जुलकर एक परिवार की तरह रहते हैं. भले ही वे चार अलग-अलग मकानों में रहते हों, लेकिन उनकी जिंदगी पूरी तरह एक ही परिवार की तरह चलती है.

    परिवार में कौन-कौन हैं?
    इस बड़े परिवार की अगुवाई हनुमंतरायुडु और मुथ्यालप्पा करते हैं. परिवार में छह सास, 14 बहुएं, 20 बच्चे, दादा-दादी, नाना-नानी और कई बुजुर्ग सदस्य शामिल हैं. इतने बड़े परिवार को संभालना आसान नहीं होता, लेकिन यहां हर सदस्य की अपनी जिम्मेदारी तय है. घर के छोटे-बड़े सभी लोग एक-दूसरे का सहयोग करते हैं. यही वजह है कि इतने सारे लोगों के साथ रहने के बावजूद परिवार में अनुशासन और तालमेल बना रहता है.

    हर सुबह होती है परिवार की मीटिंग
    इस परिवार की सबसे खास बात इसकी हर रोज की दिनचर्या है. हर सुबह घर के बड़े सदस्य एक साथ बैठकर चाय या कॉफी पीते हैं और पूरे दिन की योजना बनाते हैं. इसी बैठक में तय होता है कि कौन खेत में जाएगा, कौन घर के काम संभालेगा और उस दिन खाने में क्या बनेगा. सभी जिम्मेदारियां पहले ही बांट दी जाती हैं, जिससे किसी पर जरूरत से ज्यादा बोझ नहीं पड़ता. परिवार के लोग मानते हैं कि दिन की शुरुआत अगर मिलकर की जाए तो बाकी काम भी आसानी से पूरे हो जाते हैं.

    चार घर, लेकिन रसोई सिर्फ एक
    आज के समय में हर घर की अपनी अलग रसोई होती है, लेकिन नागप्पा परिवार में ऐसा नहीं है. यहां चार मकानों में रहने के बावजूद पूरे परिवार का खाना एक ही रसोई में तैयार होता है. राशन खरीदने से लेकर सब्जियां लाने तक की जिम्मेदारी बड़े सदस्य निभाते हैं. वहीं परिवार की बहुएं मिलकर पूरे परिवार के लिए खाना बनाती हैं. एक साथ बैठकर खाना खाना इस परिवार की पुरानी परंपरा है. उनका मानना है कि साथ बैठकर खाना खाने से रिश्तों में अपनापन बना रहता है.

    खेती के साथ बसों का भी कारोबार
    इस परिवार की कमाई का जरिया सिर्फ खेती नहीं है. खेती के अलावा परिवार मिलकर ट्रांसपोर्ट का कारोबार भी करता है. परिवार के पास चार बसें हैं, जो कल्याणदुर्गम से कर्नाटक के कई इलाकों के बीच चलती हैं. खेती और बसों से होने वाली पूरी कमाई एक ही जगह जमा होती है. इसके बाद जरूरत के हिसाब से खर्च किया जाता है. इसका मतलब यहां कोई अपनी अलग कमाई नहीं रखता. परिवार की आर्थिक व्यवस्था पूरी तरह सामूहिक है.

    इतने बड़े परिवार में कैसे नहीं होते झगड़े?
    83 लोगों के साथ रहने पर मतभेद होना स्वाभाविक है. परिवार के सदस्य भी मानते हैं कि कभी-कभी अलग-अलग राय सामने आती हैं. हालांकि, उनका नियम साफ है कि कोई भी विवाद अगले दिन तक नहीं जाना चाहिए. अगर किसी बात पर बहस होती है तो उसी दिन बैठकर उसका समाधान निकाल लिया जाता है. बुजुर्गों का कहना है कि आपसी सम्मान, धैर्य और बातचीत ही इतने बड़े परिवार को एक साथ जोड़े रखने का सबसे बड़ा कारण है.

    बच्चों को भी मिलती है परिवार की सीख
    इस संयुक्त परिवार में बड़े-बुजुर्ग सिर्फ फैसले नहीं लेते, बल्कि बच्चों को परिवार की परंपराएं और संस्कार भी सिखाते हैं. बच्चे अपने दादा-दादी और अन्य बुजुर्गों के साथ समय बिताते हैं. उन्हें बचपन से ही मिलकर रहने, जिम्मेदारियां निभाने और बड़ों का सम्मान करने की सीख दी जाती है. परिवार के लोगों का मानना है कि यही वजह है कि नई पीढ़ी भी संयुक्त परिवार की अहमियत समझ रही है.

    सोशल मीडिया पर लोग कर रहे तारीफ
    इस परिवार की कहानी सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर लोग इसकी जमकर तारीफ कर रहे हैं. कई यूजर्स ने लिखा कि आज के समय में जहां छोटी-छोटी बातों पर परिवार टूट जाते हैं, वहां 83 लोगों का एक साथ रहना किसी मिसाल से कम नहीं है. कुछ लोगों ने कहा कि यह परिवार बताता है कि अगर आपसी भरोसा और सहयोग हो तो बड़ा परिवार भी खुशी-खुशी रह सकता है.

    बदलते दौर में भी कायम है परंपरा
    संयुक्त परिवारों की संख्या लगातार घट रही है. ऐसे समय में नागप्पा परिवार यह साबित करता है कि अगर रिश्तों को महत्व दिया जाए तो पीढ़ियां भी एक साथ रह सकती हैं. यह परिवार सिर्फ एक घर नहीं, बल्कि सहयोग, अनुशासन और भरोसे की ऐसी मिसाल है, जो आज के दौर में बहुत कम देखने को मिलती है. 83 लोगों का यह परिवार दिखाता है कि खुशहाल जिंदगी सिर्फ बड़े घर से नहीं, बल्कि बड़े दिल और मजबूत रिश्तों से बनती है.

  • PM मोदी ने विदेशी नेताओं को दिए भारतीय विरासत से जुड़े उपहार, झलकी अनोखी ‘कल्चरल डिप्लोमेसी’

    PM मोदी ने विदेशी नेताओं को दिए भारतीय विरासत से जुड़े उपहार, झलकी अनोखी ‘कल्चरल डिप्लोमेसी’


    नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की कूटनीति में भारतीय संस्कृति और पारंपरिक शिल्प को विशेष स्थान मिलता रहा है। विदेश दौरों के दौरान विभिन्न देशों के राष्ट्राध्यक्षों और नेताओं को दिए गए उनके उपहार न केवल भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत का परिचय कराते हैं, बल्कि देश के हस्तशिल्प, लोक कलाओं और पारंपरिक कारीगरी को वैश्विक मंच पर भी पहचान दिलाते हैं।

    इंडोनेशियाई संसद की स्पीकर पुआन महारानी को प्रधानमंत्री मोदी ने ओडिशा की प्रसिद्ध इकट (बंधा) कला से तैयार रेशमी वस्त्र भेंट किया। संबलपुर, नुआपटना और बरगढ़ के बुनकरों द्वारा तैयार यह हैंडलूम कला अपनी जटिल टाई-एंड-डाई तकनीक, आकर्षक डिजाइनों और जीवंत रंगों के लिए प्रसिद्ध है और ओडिशा की सांस्कृतिक पहचान का प्रतीक मानी जाती है।

    ऑस्ट्रेलिया दौरे के दौरान प्रधानमंत्री ने वहां के गवर्नर-जनरल को बिहार के मिथिला क्षेत्र की प्रसिद्ध मधुबनी पेंटिंग भेंट की। प्राकृतिक रंगों से तैयार इस लोक कला में मोर, वृक्ष और प्रकृति के विविध रूपों का चित्रण है, जो समृद्धि, पर्यावरण संरक्षण और भारतीय सांस्कृतिक मूल्यों का संदेश देता है।

    ऑस्ट्रेलियाई प्रधानमंत्री एंथनी अल्बनीज की पत्नी को कश्मीर की पारंपरिक कढ़ाई से सजी शुद्ध ऊन की स्टोल भेंट की गई। घाटी की प्राकृतिक सुंदरता से प्रेरित महीन फूलों की कढ़ाई वाली यह स्टोल कश्मीर की सदियों पुरानी वस्त्र एवं हस्तशिल्प परंपरा का उत्कृष्ट उदाहरण है।

    प्रधानमंत्री मोदी ने एंथनी अल्बनीज को दो विशेष उपहार भी दिए। पहला, जनजातीय ढोकरा कला से निर्मित धातु की नाव, जिसे प्राचीन ‘लॉस्ट वैक्स कास्टिंग’ तकनीक से तैयार किया गया है। आदिवासी जीवन को दर्शाने वाली यह कलाकृति एकता, सहयोग और सामूहिक प्रगति का संदेश देती है।

    दूसरे उपहार के रूप में उन्हें इंडियन प्रीमियम कॉफी बॉक्स भेंट किया गया, जिसमें भारत के प्रमुख कॉफी उत्पादक क्षेत्रों की चुनिंदा प्रीमियम कॉफी शामिल है। यह भारतीय कॉफी उद्योग की गुणवत्ता और वैश्विक स्तर पर उसकी बढ़ती पहचान को दर्शाता है।

    ऑस्ट्रेलिया के विपक्ष के नेता को प्रधानमंत्री ने राजस्थान की पारंपरिक लकड़ी नक्काशी कला से तैयार हस्तनिर्मित जालीदार हाथी भेंट किया। एक ही लकड़ी के टुकड़े से बनाई गई यह कलाकृति भारतीय शिल्पकारों की बारीक कारीगरी का बेहतरीन उदाहरण है। भारतीय संस्कृति में हाथी बुद्धिमत्ता, समृद्धि और शक्ति का प्रतीक माना जाता है।

    ऑस्ट्रेलिया के गवर्नर-जनरल को प्रधानमंत्री मोदी ने संगमरमर पर अर्ध-कीमती पत्थरों की जड़ाई से तैयार मार्बल इनले वर्क बॉक्स भेंट किया। यह भारत की प्रसिद्ध पीएत्रा ड्यूरा (Pietra Dura) कला का उत्कृष्ट नमूना है, जो भारतीय कारीगरों की सूक्ष्म शिल्पकला को प्रदर्शित करता है।

    न्यूजीलैंड के प्रधानमंत्री क्रिस्टोफर लक्सन को प्रधानमंत्री मोदी ने दो खास उपहार दिए। पहला, हिमालयी संस्कृति और सम्मान का प्रतीक पारंपरिक उत्तराखंडी (पहाड़ी) टोपी, जबकि दूसरा भारतीय महिला हॉकी टीम के सभी खिलाड़ियों के हस्ताक्षर वाली हॉकी स्टिक, जिसे न्यूजीलैंड में आयोजित एफआईएच हॉकी महिला नेशंस कप में भारत की ऐतिहासिक जीत की स्मृति में भेंट किया गया।

    इसके अलावा, प्रधानमंत्री ने उन्हें छत्तीसगढ़ के बस्तर क्षेत्र की प्रसिद्ध ढोकरा ‘ट्री ऑफ लाइफ’ (जीवन वृक्ष) मूर्ति भी भेंट की। ‘लॉस्ट-वैक्स कास्टिंग’ तकनीक से तैयार यह कलाकृति भारत की प्राचीन धातु शिल्प परंपरा का उत्कृष्ट उदाहरण मानी जाती है।

    न्यूजीलैंड के विपक्ष के नेता क्रिस हिपकिंस को उत्तर प्रदेश के लखनऊ की प्रसिद्ध जरी-जरदोजी वॉल हैंगिंग भेंट की गई। धातु के तारों, मोतियों, सीक्विन और अन्य सजावटी तत्वों से सजी यह कलाकृति भारतीय कढ़ाई कला की समृद्ध विरासत, रचनात्मकता और उत्कृष्ट शिल्प कौशल को दर्शाती है।

    प्रधानमंत्री मोदी द्वारा विदेशी नेताओं को दिए गए ये उपहार केवल औपचारिक स्मृति चिह्न नहीं हैं, बल्कि भारत की विविध सांस्कृतिक विरासत, पारंपरिक शिल्प, लोक कलाओं और देश के कारीगरों की प्रतिभा को दुनिया के सामने प्रस्तुत करने का प्रभावी माध्यम भी हैं।

  • पूर्व CEC कुरैशी ने किताब में साझा किया मनमोहन सिंह से जुड़ा प्रसंग, कहा था- 'तो मैं आत्महत्या कर लूंगा…'

    पूर्व CEC कुरैशी ने किताब में साझा किया मनमोहन सिंह से जुड़ा प्रसंग, कहा था- 'तो मैं आत्महत्या कर लूंगा…'


    नई दिल्‍ली । पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) एस.वाई. कुरैशी ने अपनी आगामी किताब ‘इंडिया एंड आई: ए हंड्रेड मेमोरीज, नॉट ए मेमॉयर’ में पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह से जुड़ा एक भावुक प्रसंग साझा किया है. यह किताब जल्द ही प्रकाशित होने वाली है, जिसमें उन्होंने भारतीय प्रशासनिक सेवा के अपने लंबे करियर से जुड़े 100 महत्वपूर्ण अनुभवों और घटनाओं का जिक्र किया है.

    एस.वाई कुरैशी ने अपनी किताब में लिखा है कि साल 2012 में चुनाव आयोग के कामकाज को लेकर कुछ केंद्रीय मंत्रियों की टिप्पणियों से नाराज होकर वह तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के पास पहुंचे थे और उनसे शिकायत की थी. उनकी बात सुनने के बाद मनमोहन सिंह ने कहा था, ‘अगर आपको ऐसा लगता है, तो मैं आत्महत्या कर लूंगा.’ एस.वाई. कुरैशी के मुताबिक, यह घटना 2012 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव दौरान हुई थी.

    उस समय तत्कालीन कानून मंत्री सलमान खुर्शीद ने चुनावी रैली में वादा किया था कि अगर उनकी पार्टी सत्ता में आई तो मुसलमानों के लिए सरकारी नौकरियों में 4.5 प्रतिशत आरक्षण बढ़ाकर 9 प्रतिशत कर दिया जाएगा. इस बयान पर भाजपा ने चुनाव आयोग से शिकायत करते हुए इसे आदर्श आचार संहिता (MCC) का उल्लंघन बताया था. कुरैशी अपनी किताब में लिखते हैं कि चुनाव आयोग ने इस मामले में चार दिनों तक सुनवाई की.

    सलमान खुर्शीद के खिलाफ EC पहुंची थी बीजेपी
    कांग्रेस की ओर से अभिषेक मनु सिंघवी और भाजपा की ओर से अरुण जेटली ने पक्ष रखा. सुनवाई के बाद चुनाव आयोग ने सलमान खुर्शीद की निंदा (Censure) की, जो आचार संहिता के तहत उपलब्ध सबसे कड़ी कार्रवाई थी. इसके बाद कांग्रेस के कुछ नेताओं ने चुनाव आयोग पर ‘अहंकारी’ और ‘मनमाना’ होने के आरोप लगाए. एस.वाई. कुरैशी के अनुसार, आलोचना से उन्हें कोई दिक्कत नहीं थी, लेकिन ऐसी टिप्पणियां चुनाव आयोग जैसी संवैधानिक संस्था की साख को नुकसान पहुंचा रही थीं.

    भारत के पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त एस.वाई. कुरैशी ने अपनी किताब में लिखा है कि उसी दौरान ईद के अवसर पर आयोजित समारोह में उन्होंने तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के प्रेस सचिव हरीश खरे से अपनी नाराजगी जाहिर की. हरीश खरे ने पूछा कि क्या वह यह बात प्रधानमंत्री तक पहुंचा दें, जिस पर कुरैशी ने हामी भर दी. किताब के मुताबिक, अगले ही दिन प्रधानमंत्री कार्यालय से उन्हें फोन आया और शाम को प्रधानमंत्री आवास पर मनमोहन सिंह के साथ उनकी मुलाकात तय हुई.

    मनमोहन सिंह खुद दरवाजे पर कर रहे थे इंतजार
    एस.वाई. कुरैशी लिखते हैं कि जब वह पहुंचे तो मनमोहन सिंह स्वयं दरवाजे पर उनका इंतजार कर रहे थे. बैठते ही उन्होंने भावुक होकर कहा, ‘हरीश ने मुझे बताया कि आपने क्या कहा. अगर आपको ऐसा लगता है, तो मैं आत्महत्या कर लूंगा.’ कुरैशी के अनुसार, वह यह सुनकर स्तब्ध रह गए. उन्होंने स्पष्ट किया कि उनकी शिकायत प्रधानमंत्री से नहीं, बल्कि कुछ मंत्रियों के बयानों को लेकर थी. इस पर मनमोहन सिंह ने कहा कि अगर उन्हें इस बारे में पहले जानकारी होती तो वह संबंधित मंत्रियों को कड़ी फटकार लगाते. उन्होंने यह भी कहा कि भविष्य में ऐसी कोई बात हो तो वह सीधे उन्हें फोन करें.

    अपनी किताब में एस.वाई. कुरैशी ने लिखा है कि मनमोहन सिंह ने उनसे कहा, ‘चुनाव आयोग सिर्फ भारत का गौरव नहीं है, बल्कि हमारे लोकतंत्र की आत्मा है. अगर हमने इसे खो दिया, तो हम सब कुछ खो देंगे.’ पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त ने लिखा कि इस मुलाकात ने उन्हें गहराई से प्रभावित किया. उनके मुताबिक, यह किसी राजनेता से मुलाकात नहीं, बल्कि ऐसे नेता से सामना था, जिसके लिए संवैधानिक मर्यादा केवल भाषण का विषय नहीं, बल्कि जीवन का सिद्धांत थी. उन्होंने बताया कि इस मुलाकात के बाद चुनाव आयोग को लेकर की जा रही बयानबाजी भी थम गई.

  • आंध्र प्रदेश में कोविड-19 से दो मौतों के बाद स्वास्थ्य विभाग अलर्ट, कडप्पा में बढ़े मामलों के बीच सरकार ने मास्क और निगरानी व्यवस्था की सख्ती बढ़ाई

    आंध्र प्रदेश में कोविड-19 से दो मौतों के बाद स्वास्थ्य विभाग अलर्ट, कडप्पा में बढ़े मामलों के बीच सरकार ने मास्क और निगरानी व्यवस्था की सख्ती बढ़ाई

    नई दिल्ली । आंध्र प्रदेश के कडप्पा जिले में कोविड-19 संक्रमण से दो मरीजों की मौत और आठ सक्रिय मामलों की पुष्टि के बाद राज्य सरकार ने पूरे प्रदेश में स्वास्थ्य सतर्कता बढ़ा दी है। प्रशासन ने संक्रमण की स्थिति पर लगातार निगरानी रखने, अस्पतालों को तैयार रखने और सार्वजनिक स्थानों पर एहतियाती उपायों को सख्ती से लागू करने के निर्देश जारी किए हैं। स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि फिलहाल स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है और संक्रमण को नियंत्रित करने के लिए आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं।

    स्वास्थ्य अधिकारियों के अनुसार हाल के दिनों में कडप्पा जिले में सामने आए मामलों ने प्रशासन की चिंता बढ़ाई है। अधिकारियों ने बताया कि एक 52 वर्षीय व्यक्ति को तेज बुखार और खांसी की शिकायत के बाद कोविड-19 संक्रमित पाया गया था। इलाज के दौरान उनकी मृत्यु हो गई। वहीं 43 वर्षीय एक अन्य मरीज, जो पहले से अन्य स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रहे थे, कोविड संक्रमण की पुष्टि के बाद अस्पताल में उपचार के दौरान नहीं बच सके। अधिकारियों के अनुसार दोनों मामलों की विस्तृत चिकित्सीय समीक्षा भी की जा रही है।

    संक्रमण का असर स्वास्थ्य क्षेत्र से जुड़े लोगों तक भी पहुंचा है। कडप्पा मेडिकल कॉलेज के एक मेडिकल छात्र के संक्रमित मिलने के बाद उसे होम आइसोलेशन में रखा गया है। स्वास्थ्य विभाग ने कहा है कि ऐसे मामलों की लगातार निगरानी की जा रही है और निर्धारित स्वास्थ्य प्रोटोकॉल का पालन कराया जा रहा है ताकि संक्रमण के प्रसार को सीमित रखा जा सके।

    मामलों में वृद्धि के बाद प्रभावित क्षेत्रों में विशेष रैपिड रिस्पॉन्स टीमों को तैनात किया गया है। संक्रमित व्यक्तियों के संपर्क में आए लोगों की पहचान कर उनके नमूने जांच के लिए लिए जा रहे हैं। कई लोगों की रिपोर्ट निगेटिव आ चुकी है, जबकि शेष नमूनों की जांच जारी है। प्रशासन का कहना है कि संपर्क में आए सभी लोगों पर नजर रखी जा रही है और आवश्यकता पड़ने पर उन्हें आइसोलेशन में रखा जाएगा।

    संक्रमण के स्वरूप की जानकारी प्राप्त करने के लिए मरीजों के नमूने जीनोम सीक्वेंसिंग हेतु राष्ट्रीय प्रयोगशाला, पुणे भेजे गए हैं। स्वास्थ्य विभाग का उद्देश्य यह पता लगाना है कि संक्रमण किस वेरिएंट से जुड़ा है और उसकी प्रकृति क्या है। विशेषज्ञों का मानना है कि जीनोम सीक्वेंसिंग के परिणाम आगे की रणनीति तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।

    स्थिति को देखते हुए राज्य सरकार ने अस्पतालों, बस स्टैंडों और भीड़-भाड़ वाले सार्वजनिक स्थानों पर मास्क पहनने की अनिवार्यता लागू करने के निर्देश दिए हैं। इसके साथ ही बुखार, खांसी और सांस लेने में कठिनाई जैसे लक्षण वाले लोगों की शीघ्र पहचान, आवश्यक होने पर आइसोलेशन, संक्रमितों के संपर्क में आए लोगों की जांच तथा प्रभावित क्षेत्रों में सफाई और सैनिटाइजेशन अभियान तेज करने को कहा गया है। सरकारी और निजी अस्पतालों को पर्याप्त बेड, आइसोलेशन वार्ड, ऑक्सीजन, दवाओं और अन्य आवश्यक संसाधनों की उपलब्धता सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए गए हैं।

    स्वास्थ्य विभाग ने लोगों से अपील की है कि वे घबराने के बजाय सतर्क रहें और कोविड से बचाव के सामान्य उपायों का पालन करें। विशेषज्ञों ने सलाह दी है कि भीड़-भाड़ वाले स्थानों पर सावधानी बरती जाए, हाथों की स्वच्छता बनाए रखी जाए और यदि बुखार, खांसी या सांस लेने में परेशानी जैसे लक्षण दिखाई दें तो बिना देरी किए चिकित्सकीय परामर्श लिया जाए। अधिकारियों का कहना है कि समय पर जांच, निगरानी और एहतियाती उपाय संक्रमण की रोकथाम में सबसे प्रभावी साधन हैं।

  • 13 जुलाई को उत्तर भारत में गर्मी और उमस का डबल अटैक, दिल्ली-एनसीआर समेत कई राज्यों में तेज धूप के आसार, पूर्वी क्षेत्रों में भारी बारिश की चेतावनी

    13 जुलाई को उत्तर भारत में गर्मी और उमस का डबल अटैक, दिल्ली-एनसीआर समेत कई राज्यों में तेज धूप के आसार, पूर्वी क्षेत्रों में भारी बारिश की चेतावनी

    नई दिल्ली । 13 जुलाई को देश के मौसम में क्षेत्रवार बड़ा अंतर देखने को मिल सकता है। उत्तर-पश्चिम भारत के कई हिस्सों में मानसूनी गतिविधियां अपेक्षाकृत कमजोर रहने के कारण लोगों को तेज धूप, बढ़ते तापमान और उमस का सामना करना पड़ सकता है। वहीं पूर्वी भारत के कुछ राज्यों में मानसून सक्रिय रहने से भारी बारिश की संभावना बनी हुई है। मौसम विभाग के पूर्वानुमान के अनुसार अगले कुछ दिनों तक देश के अलग-अलग हिस्सों में मौसम का स्वरूप अलग-अलग रहेगा।

    दिल्ली-एनसीआर, हरियाणा, पंजाब और राजस्थान के अधिकांश मैदानी क्षेत्रों में सोमवार को तेज धूप निकलने की संभावना है। हवा की गति कम रहने और वातावरण में नमी अधिक होने से उमस का असर काफी बढ़ सकता है। दोपहर के समय तापमान सामान्य से अधिक महसूस होगा और लोगों को लंबे समय तक खुले में रहने से बचने की सलाह दी गई है। नोएडा, गाजियाबाद, गुरुग्राम, फरीदाबाद, चंडीगढ़ और जयपुर जैसे शहरों में भी गर्म और उमस भरा मौसम बने रहने का अनुमान है।

    उत्तर प्रदेश में मौसम दो अलग-अलग तस्वीरें पेश कर सकता है। पश्चिमी उत्तर प्रदेश में धूप और उमस का प्रभाव अधिक रहेगा, जबकि पूर्वी जिलों में गरज-चमक के साथ हल्की से मध्यम बारिश और कुछ स्थानों पर भारी वर्षा होने की संभावना है। लखनऊ और नोएडा में दिनभर गर्मी और उमस बनी रह सकती है, जबकि गोरखपुर और आसपास के क्षेत्रों में बारिश से तापमान में कुछ राहत मिलने की उम्मीद है।

    बिहार में मानसून पूरी तरह सक्रिय बना हुआ है। राज्य के कई जिलों में भारी से बहुत भारी बारिश की संभावना जताई गई है। पटना, भागलपुर, पूर्णिया और आसपास के क्षेत्रों में तेज बारिश के साथ जलभराव जैसी परिस्थितियां बन सकती हैं। लोगों को आवश्यक होने पर ही घर से बाहर निकलने और मौसम से जुड़ी स्थानीय चेतावनियों का पालन करने की सलाह दी गई है।

    पश्चिम बंगाल के उप-हिमालयी क्षेत्रों, विशेषकर दार्जिलिंग और सिलीगुड़ी में भारी वर्षा का अनुमान है। वहीं कोलकाता और दक्षिणी जिलों में हल्की बारिश के साथ उमस बनी रह सकती है। लगातार नमी के कारण लोगों को गर्मी का अधिक अहसास होगा, जबकि पहाड़ी क्षेत्रों में भूस्खलन और जलभराव जैसी स्थितियों पर भी प्रशासन नजर रख सकता है।

    मध्य प्रदेश में मौसम मिला-जुला रहने की संभावना है। भोपाल और इंदौर में दिन के समय उमस अधिक रह सकती है, जबकि शाम के समय कुछ स्थानों पर हल्की बारिश या बूंदाबांदी से राहत मिल सकती है। ग्वालियर में तेज धूप और बढ़ते तापमान का असर देखने को मिल सकता है, जबकि जबलपुर के आसपास हल्की वर्षा की संभावना बनी हुई है।

    उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश के मैदानी इलाकों में भी उमस का असर बना रह सकता है, हालांकि ऊंचाई वाले क्षेत्रों में मौसम अपेक्षाकृत सुहावना रहेगा। देहरादून और हरिद्वार में हल्की बारिश के बावजूद उमस महसूस हो सकती है, जबकि शिमला, मनाली और मसूरी जैसे पर्वतीय क्षेत्रों में ठंडी हवाओं और हल्के बादलों के कारण मौसम आरामदायक रहने का अनुमान है।

    कुल मिलाकर 13 जुलाई को देश में मौसम का प्रभाव क्षेत्र के अनुसार अलग-अलग रहेगा। जहां उत्तर-पश्चिम भारत के कई हिस्सों में लोगों को तेज धूप और उमस का सामना करना पड़ सकता है, वहीं पूर्वी राज्यों में भारी बारिश जनजीवन को प्रभावित कर सकती है। ऐसे में मौसम के बदलते हालात को देखते हुए लोगों को स्थानीय प्रशासन और मौसम विभाग की सलाह के अनुसार आवश्यक सावधानी बरतने की आवश्यकता होगी।