Category: National

  • Delhi में मटियाला गांव के मछली बाजार में लगी भीषण आग… 400 झुग्गियां जलीं

    Delhi में मटियाला गांव के मछली बाजार में लगी भीषण आग… 400 झुग्गियां जलीं


    नई दिल्ली।
    दिल्ली (Delhi) के मटियाला गांव (Matiala Village) के मछली बाजार (Fish market) में बुधवार देर रात को भीषण आग (Massive Fire) लग गई। इस आगजनी में लगभग 300 से 400 झुग्गियां जलकर खाक हो गईं। आग लगने का कारण अभी स्पष्ट नहीं हो पाया है। दमकल विभाग को रात करीब 11:50 बजे आग लगने की सूचना मिली। करीब 23 दमकल गाड़ियां मौके पर पहुंचीं। घंटों की मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया गया। फिलहाल किसी के हताहत होने की कोई खबर नहीं है।

    पुलिस हेड कांस्टेबल रामरतन ने बताया कि आग बहुत करीब आ गई थी, मात्र दो-तीन फीट की दूरी तक। उस समय हमें पता चला कि उस तरफ एक कार खड़ी थी और आग उसके बहुत करीब पहुंच गई थी। मैं वहां गया और कुछ अन्य लोग मेरे साथ आए। उन्होंने पत्थर से कार का शीशा तोड़ दिया और शीशा तोड़ने के बाद कार को सुरक्षित स्थान पर ले जाया गया।


    नोएडा के कंपनी में भीषण आग, कुछ लोग जख्मी

    उधर, नोएडा के थाना फेस 1 के अंतर्गत बी 40 सेक्टर 4 नोएडा स्थित कैपिटल पावर सिस्टम लिमिटेड कंपनी में भीषण आग लग गई। इस कंपनी में बिजली का मीटर बनाए जाने का काम होता है। वीरवार सुबह अचानक लगी आग के कारणों का पता नहीं चला है। सूचना मिलने पर तत्काल स्थानीय पुलिस बल और फायर बिग्रेड की मदद से आग बुझाने का कार्य किया जा रहा है। कुछ व्यक्ति घायल हुए हैं जो अस्पताल में उपचाराधीन है। पुलिस उच्चाधिकारी और सीएफओ गौतमबुद्धनगर मौके पर मौजूद है। आग बुझाने का प्रयास किया जा रहा है।

  • ISRO ने की अगले चंद्र मिशन की तैयारी…. चंद्रयान 4 और 5 को लेकर आई बड़ी खुशखबरी

    ISRO ने की अगले चंद्र मिशन की तैयारी…. चंद्रयान 4 और 5 को लेकर आई बड़ी खुशखबरी


    नई दिल्ली।
    देश के अगले चंद्र मिशन (Lunar Mission) को लेकर दोहरी खुशखबरी सामने आई है। भारत चंद्रयान-4 (Chandrayaan 4) के तहत चांद से सैंपल इकट्ठा करके उन्हें धरती पर वापस लाने की योजना बना रहा है, जबकि चंद्रयान-5 (Chandrayaan 5) में ज्यादा वजन वाला लैंडर होगा, जिसकी मिशन लाइफ ज्यादा। यह जानकारी इसरो चेयरमैन वी नारायणन (ISRO Chairman V Narayanan) ने बुधवार को दी। उन्होंने ISRO के भविष्य के मिशनों के बारे में भी बात की, जिसमें वीनस की स्टडी और दूसरा मार्स लैंडिंग मिशन शामिल है। इसरो के स्पेस साइंस एंड टेक्नोलॉजी अवेयरनेस ट्रेनिंग (START 2026) प्रोग्राम के चौथे एडिशन के उद्घाटन समारोह में उन्होंने कहा, “अब हम चंद्रयान प्रोग्राम को जारी रखने पर काम कर रहे हैं। चंद्रयान-4 में, हम सैंपल इकट्ठा करके उन्हें वापस लाने की योजना बना रहे हैं। चंद्रयान-5 में ज्यादा वजन वाला लैंडर होगा, जिसकी मिशन लाइफ ज्यादा होगी।”

    उन्होंने याद दिलाया कि चंद्रयान-3 में लैंडर की मिशन लाइफ सिर्फ 14 दिन थी। नारायणन ने कहा, “आने वाले मिशन में, हम लगभग 100 दिनों की लाइफ की बात कर रहे हैं। रोवर भी भारी होगा। चंद्रयान-3 में लगभग 25 किलो का रोवर था, जबकि आने वाले मिशन में लगभग 350 किलो का रोवर होगा।” वीनस ऑर्बिटर मिशन जैसे इसरो के आने वाले प्रोग्राम का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा, “हमने मार्स ऑर्बिटर मिशन पहले ही पूरा कर लिया है, और अब हम मार्स लैंडिंग मिशन पर काम कर रहे हैं।”

    उन्होंने आगे कहा, “ये कुछ ऐसे प्रोजेक्ट हैं जिन पर सरकार की मंजूरी के लिए बात हो रही है। इसलिए साइंस एरिया में बहुत दिलचस्पी है।” उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के तहत, स्पेस प्रोग्राम के विजन को बढ़ाया गया है और कहा, “हम अभी गगनयान प्रोग्राम पर काम कर रहे हैं और अपने एस्ट्रोनॉट्स को स्पेस में भेजने और उन्हें सुरक्षित वापस लाने की प्लानिंग कर रहे हैं, शायद अगले दो सालों में।” उन्होंने आगे कहा, “हम 2035 तक अपना स्पेस स्टेशन बनाने की भी प्लानिंग कर रहे हैं। इसके अलावा, हम भारतीयों को चांद पर उतारने और 2040 तक उन्हें सुरक्षित वापस लाने पर काम कर रहे हैं। ब्रेनस्टॉर्मिंग एक्टिविटीज पहले ही शुरू हो चुकी हैं। इसलिए स्पेस सेक्टर में कई एक्टिविटीज हो रही हैं। नागरिकों के लिए फ़ूड सिक्योरिटी, वॉटर सिक्योरिटी, कम्युनिकेशन और सेफ्टी पक्का करने वाली एप्लीकेशन से जुड़ी एक्टिविटीज के अलावा, साइंस एरिया में भी कई इनिशिएटिव प्लान किए गए हैं।”

    नारायणन ने बताया कि भारत के स्पेस प्रोग्राम ने अब तक 10 साइंटिफिक मिशन पूरे किए हैं, जिसमें एस्ट्रोसैट भी शामिल है, जिसने हाल ही में ऑर्बिट में एक दशक पूरा किया है और अभी भी बहुत अच्छी तरह से काम कर रहा है। उन्होंने भारत के अलग-अलग लूनर एक्सप्लोरेशन मिशन – चंद्रयान-1, चंद्रयान-2, और चंद्रयान-3- के बारे में भी बताया और कहा कि इनसे कई साइंटिफिक खोजें हुईं। उन्होंने आगे कहा, “हम बहुत आगे बढ़ रहे हैं।” साल 2023 में चंद्रयान-3 मिशन की सफलता के बारे में बताते हुए, इसरो चेयरमैन ने कहा कि भारत चांद के साउथ पोल के पास सॉफ्ट लैंडिंग करने वाला पहला देश बन गया है।

  • फारूक अब्दुल्ला पर जानलेवा हमले की कोशिश, आरोपी ने तानी पिस्तौल, बोला- 20 साल से मारने की थी योजना

    फारूक अब्दुल्ला पर जानलेवा हमले की कोशिश, आरोपी ने तानी पिस्तौल, बोला- 20 साल से मारने की थी योजना



    नई दिल्ली। जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री फारूक अब्दुल्ला पर बुधवार देर रात एक शादी समारोह के दौरान जानलेवा हमला करने की कोशिश की गई। हालांकि सुरक्षा कर्मियों की सतर्कता के कारण यह हमला नाकाम हो गया और फारूक अब्दुल्ला सुरक्षित बच गए। पुलिस ने हमलावर को तुरंत पकड़कर हिरासत में ले लिया है।

    जानकारी के अनुसार जम्मू के ग्रेटर कैलाश स्थित एक विवाह समारोह में यह घटना हुई। समारोह में फारूक अब्दुल्ला के साथ उपमुख्यमंत्री सुरिंदर चौधरी भी मौजूद थे। इसी दौरान एक व्यक्ति अचानक उनके करीब पहुंचा और पिस्तौल तानकर गोली चलाने की कोशिश की। सुरक्षा कर्मियों ने तुरंत कार्रवाई करते हुए हमले को विफल कर दिया और आरोपी को पकड़ लिया। पुलिस ने उसके पास से पिस्तौल भी जब्त कर ली है। घटना का एक वीडियो भी सामने आया है, जिसमें हमलावर को घेरकर कुछ लोग उसे पकड़ते और मारते-पीटते दिखाई दे रहे हैं।

    कौन है हमलावर?
    पुलिस के अनुसार हमलावर का नाम कमल सिंह जामवाल है, जो जम्मू के पुरानी मंडी क्षेत्र का रहने वाला है। बताया जा रहा है कि उसका जन्म वर्ष 1963 में हुआ था। जम्मू के पुराने शहर इलाके में उसकी कई दुकानें हैं और वह उन्हीं दुकानों से मिलने वाले किराए से अपना गुजारा करता है। पुलिस पूछताछ में आरोपी ने दावा किया है कि वह पिछले 20 वर्षों से फारूक अब्दुल्ला को मारना चाहता था। उसने कहा कि यह उसका व्यक्तिगत उद्देश्य था। जिस पिस्तौल से गोली चलाई गई, वह भी उसी की बताई जा रही है।

    प्रत्यक्षदर्शियों ने क्या बताया?
    समारोह में मौजूद राकेश सिंह ने बताया कि यह कार्यक्रम एक राजनीतिक दल के विधि प्रकोष्ठ के अध्यक्ष की बेटी की शादी का था। उन्होंने कहा कि सभी लोग बैठे हुए थे। तभी डॉ. साहब (फारूक अब्दुल्ला) ने कहा कि अब चलना चाहिए। जैसे ही वे उठे, तभी एक व्यक्ति उनके पीछे आया और पिस्तौल तान दी। तभी किसी ने उसे हटाया और गोली ऊपर की ओर चल गई।

    सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल
    घटना के बाद जम्मू-कश्मीर के मंत्री सतीश शर्मा ने कहा कि पुलिस पूरे मामले की जांच कर रही है और सभी लोग सुरक्षित हैं। उन्होंने इसे सुरक्षा में बड़ी चूक बताया और कहा कि जिन नेताओं ने देश के लिए बड़ी कुर्बानियां दी हैं, उन्हें पूरी सुरक्षा मिलनी चाहिए।

    उमर अब्दुल्ला ने कही यह बात
    अपने पिता पर हमले के बाद मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने कहा कि ईश्वर की कृपा से उनके पिता एक बड़े खतरे से बच गए। उन्होंने कहा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल लेकर उनके बेहद करीब तक पहुंच गया और उसने नजदीक से गोली चला दी। उन्होंने यह भी कहा कि सबसे बड़ा सवाल यह है कि इतनी कड़ी सुरक्षा के बावजूद एक पूर्व मुख्यमंत्री के इतने करीब कोई व्यक्ति हथियार लेकर कैसे पहुंच गया। पुलिस इस पूरे मामले की जांच कर रही है।

  • हरीश राणा को SC ने इच्छा मृत्यु की इजाजत दी, देश में पहली बार हुआ ऐसा फैसला

    हरीश राणा को SC ने इच्छा मृत्यु की इजाजत दी, देश में पहली बार हुआ ऐसा फैसला


    नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को ऐसा फैसला सुनाया जो आज तक कभी भी किसी मामले में नहीं सुनाया गया। दरअसल, जस्टिस पारदीवाला की बेंच एक मामलें में इच्छा मृत्यु की मांग पर सुनावाई कर रही थी। फैसला सुनाते हुए कोर्ट ने हरीश राणा को इच्छा मृत्यु की इजाजत दे दी है। हरीश बीते 13 साल से 100 प्रतिशत दिव्यांगता से जूझ रहे हैं और अचेत अवस्था में बिस्तर पर पड़े हुए हैं। कोर्ट ने जोर देकर कहा कि इस पूरी प्रक्रिया को पूरी डिग्निटी के साथ पूरा किया जाना चाहिए।

    सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुनाते हुए दुख जताया
    सुप्रीम कोर्ट ने गाजियाबाद के रहने वाले हरीश राणा को इच्छा मृत्यु की इजाजात दे दी है। कोर्ट ने पिछली सुनवाई के दौरान हरीश के घरवालों से भी बात की थी जिसके बाद जस्टिस पारदीवाला ने कहा कि ये बेहद दुखद मामला है। लेकिन लड़के की तकलीफ को देखते हुए हमें किसी भी अंतिम फैसले पर पहुंचना होगा जिसके बाद उन्हें इच्छा मृत्यु की इजाजत दे दी गई। कोर्ट ने कहा है कि हरीश राणा को AIIMS के पैलिएटिव केयर में भर्ती किया जाएगा ताकि मेडिकल ट्रीटमेंट वापस लिया जा सके। बता दें कि भारत में ये पैसिव यूथेनेसिया का पहला मामला है।

    100 प्रतिशत दिव्यांग हैं हरीश राणा
    साल 2013 में हरीश चंडीगढ़ में रहकर अपनी पढाई कर रहे थे जिस दौरान वह अपने हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिर गए थे। इसके बाद जब उन्हें अस्पताल ले जाया गया तो उनके सिर में गंभीर चोट आई थी। उसके बाद से वह कभी अपने पैर पर नहीं खड़े हो सके। AIIMS के मुताबिक वह 100 प्रतिशत दिव्य़ांग हो गए हैं जिसका इलाज लगभग असंभव है। लगातार बिस्तर पर लेटे रहने के कारण उनके शरीर पर घाव बन गए है। माता-पिता से जब यह तकलीफ नहीं देखी गई तो उन्होंने इच्छा मृत्यु की मांग की जिसे सुप्रीम कोर्ट ने स्वीकृति दे दी।

  • दिल्ली-NCR में अचानक क्यों छाई धुंध? तेज गर्मी के बीच बदला मौसम का मिजाज, जानिए वजह

    दिल्ली-NCR में अचानक क्यों छाई धुंध? तेज गर्मी के बीच बदला मौसम का मिजाज, जानिए वजह


    नई दिल्ली। Delhi और आसपास के एनसीआर इलाकों में मार्च की शुरुआत के साथ ही गर्मी ने अपना असर दिखाना शुरू कर दिया है। मौसम विभाग के मुताबिक 11 मार्च के आसपास राजधानी का अधिकतम तापमान 35 से 37 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच सकता है। हालांकि आसमान में हल्के बादल दिखाई दे रहे हैं, लेकिन फिलहाल बारिश या ठंडी हवाओं से राहत मिलने की संभावना कम बताई जा रही है। सुबह से ही तेज धूप महसूस हो रही है, जिससे दोपहर के समय गर्मी ज्यादा लग रही है।

    सामान्य से पहले बढ़ा तापमान
    मौसम विभाग के अनुसार इस साल दिल्ली-एनसीआर में गर्मी ने सामान्य समय से पहले दस्तक दे दी है। आमतौर पर मार्च के आखिरी हफ्ते में तापमान 35 डिग्री के आसपास पहुंचता है, लेकिन इस बार महीने के पहले ही सप्ताह में यह स्तर पार हो चुका है। पिछले चार दिनों से राजधानी में अधिकतम तापमान लगातार 35 डिग्री सेल्सियस से ऊपर दर्ज किया जा रहा है, जिससे लोगों को मार्च में ही मई-जून जैसी गर्मी महसूस होने लगी है।

    धुंध और धूल की वजह क्या है?
    10 मार्च की सुबह से देश के कई हिस्सों में धुंध जैसी स्थिति देखने को मिली। कई जगहों पर दिन तक आसमान में सफेद चादर जैसी परत नजर आई। सोशल मीडिया पर कुछ लोग इसे Tehran में हुए तेल डिपो ब्लास्ट से जोड़कर देख रहे थे, लेकिन मौसम विशेषज्ञों ने इस दावे को गलत बताया है। मौसम विशेषज्ञों के अनुसार यह स्थिति मुख्य रूप से उत्तर-पश्चिम भारत में उठ रही धूल और हवाओं की वजह से बनी है। इसके पीछे प्रमुख कारण Western Disturbance को माना जा रहा है, जिसकी वजह से हवा का रुख बदल रहा है और धूल के कण वातावरण में फैल रहे हैं।

    11 मार्च के बाद मौसम में बदलाव की उम्मीद
    मौसम विभाग का अनुमान है कि 11 मार्च के बाद मौसम में हल्के बदलाव देखने को मिल सकते हैं। 12 से 16 मार्च के बीच Delhi NCR के कई इलाकों जैसे Ghaziabad, Noida, Gurugram और Faridabad में आंशिक बादल छाए रहने की संभावना है। हालांकि तापमान में बड़ी गिरावट की उम्मीद नहीं है। 12 से 14 मार्च के बीच अधिकतम तापमान 34 से 36 डिग्री सेल्सियस के आसपास रहने का अनुमान है।

    15 मार्च के बाद मिल सकती है थोड़ी राहत
    मौसम विभाग के अनुसार 15 मार्च के बाद तापमान में 2 से 3 डिग्री सेल्सियस तक हल्की गिरावट आ सकती है। इसके साथ ही कुछ इलाकों में फिर से धुंध जैसी स्थिति और तेज हवाएं देखने को मिल सकती हैं। फिलहाल किसी भी जिले के लिए कोई गंभीर अलर्ट जारी नहीं किया गया है, लेकिन विशेषज्ञों ने लोगों को बढ़ती गर्मी के बीच सावधानी बरतने और धूप से बचाव करने की सलाह दी है।

  • सुप्रीम कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला: 13 साल से कोमा में युवक को इच्छामृत्यु की अनुमति

    सुप्रीम कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला: 13 साल से कोमा में युवक को इच्छामृत्यु की अनुमति

    नई दिल्ली। भारत में इच्छामृत्यु से जुड़े एक बेहद संवेदनशील मामले में Supreme Court of India ने ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए 13 साल से कोमा में पड़े युवक को पैसिव यूथेनेशिया की अनुमति दे दी है। अदालत ने गाजियाबाद के 31 वर्षीय Harish Rana के लाइफ सपोर्ट सिस्टम को चरणबद्ध तरीके से हटाने का निर्देश दिया है।

    यह फैसला जस्टिस J. B. Pardiwala और जस्टिस K. V. Viswanathan की पीठ ने सुनाया। कोर्ट ने निर्देश दिया कि दिल्ली के All India Institute of Medical Sciences (AIIMS) में मेडिकल प्रक्रिया इस तरह पूरी की जाए कि मरीज की गरिमा और मानवीय सम्मान बना रहे।

    दरअसल हरीश राणा 2013 में चंडीगढ़ स्थित Panjab University में बीटेक की पढ़ाई के दौरान हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिर गए थे। गंभीर चोटों के कारण वे कोमा में चले गए और डॉक्टरों ने उन्हें Quadriplegia से पीड़ित बताया। इस स्थिति में मरीज शरीर के लगभग सभी अंगों को नियंत्रित नहीं कर पाता और पूरी तरह वेंटिलेटर व फीडिंग ट्यूब पर निर्भर रहता है।

    करीब 13 साल से बिस्तर पर पड़े रहने के कारण उनकी हालत लगातार बिगड़ती गई और शरीर पर गहरे बेडसोर्स भी बन गए। परिवार लंबे समय से मानसिक और आर्थिक संकट से गुजर रहा था। इसी वजह से हरीश के माता-पिता निर्मला राणा और अशोक राणा ने अदालत से पैसिव इच्छामृत्यु की अनुमति देने की गुहार लगाई थी।

    फैसला सुनाते समय अदालत ने कहा कि जब किसी मरीज के ठीक होने की कोई संभावना नहीं रह जाती और इलाज केवल जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखता है, तो ऐसे मामलों में मानवीय गरिमा को ध्यान में रखते हुए लाइफ सपोर्ट हटाने पर विचार किया जा सकता है। जस्टिस पारदीवाला ने अपने फैसले में साहित्यकार William Shakespeare के प्रसिद्ध कथन “To be or not to be” का भी उल्लेख किया।

    सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से पैसिव यूथेनेशिया से जुड़े स्पष्ट कानून बनाने पर भी विचार करने को कहा है। फिलहाल भारत में यह प्रक्रिया अदालत द्वारा तय दिशानिर्देशों और मेडिकल बोर्ड की मंजूरी के आधार पर ही संभव है।

    गौरतलब है कि 2018 में Supreme Court of India ने ‘सम्मान के साथ मृत्यु के अधिकार’ को संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत मान्यता दी थी। हालांकि एक्टिव यूथेनेशिया यानी किसी दवा या इंजेक्शन से मौत देना भारत में अब भी गैरकानूनी है।

    इस फैसले को देश में इच्छामृत्यु से जुड़े कानून और मानवीय अधिकारों की बहस में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर माना जा रहा है।

  • संसद में तीखी टक्कर: राहुल गांधी का पीएम पर ‘कॉम्प्रोमाइज्ड’ आरोप, भाजपा ने किया जोरदार पलटवार

    संसद में तीखी टक्कर: राहुल गांधी का पीएम पर ‘कॉम्प्रोमाइज्ड’ आरोप, भाजपा ने किया जोरदार पलटवार


    नई दिल्ली। संसद के बजट सत्र के दौरान लोकसभा में उस समय तीखी बहस देखने को मिली जब स्पीकर Om Birla के खिलाफ लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा के बीच विपक्ष और सत्तापक्ष आमने-सामने आ गए। बहस के दौरान कांग्रेस नेता Rahul Gandhi ने आरोप लगाया कि उन्हें सदन में बोलने से बार-बार रोका जाता है और उन्होंने प्रधानमंत्री Narendra Modi पर “कॉम्प्रोमाइज्ड” होने का आरोप लगाया।

    राहुल गांधी ने कहा कि यह चर्चा केवल स्पीकर के पद तक सीमित नहीं है बल्कि यह लोकतंत्र और संसद की भूमिका से जुड़ा मुद्दा है। उन्होंने दावा किया कि कई मौकों पर उनका नाम लिया गया, लेकिन जब भी वह अपनी बात रखने के लिए खड़े हुए तो उन्हें रोक दिया गया। राहुल ने कहा कि नेता प्रतिपक्ष को बोलने का पूरा अवसर मिलना चाहिए, लेकिन उन्हें लगातार टोकने की कोशिश की जाती है।

    राहुल के बयान पर भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad ने तुरंत पलटवार किया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी का भारत कभी “कॉम्प्रोमाइज्ड” नहीं हो सकता। प्रसाद ने विपक्ष पर आरोप लगाया कि वह सदन में अनावश्यक विवाद खड़ा कर लोकतांत्रिक प्रक्रिया को बाधित करना चाहता है।

    दरअसल लोकसभा में स्पीकर ओम बिरला को पद से हटाने के लिए विपक्ष द्वारा लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर मंगलवार से चर्चा चल रही है। विपक्ष का आरोप है कि स्पीकर सदन की कार्यवाही में निष्पक्ष नहीं हैं और सरकार के दबाव में काम कर रहे हैं। कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने बहस की शुरुआत करते हुए कहा कि बजट सत्र के दौरान राहुल गांधी को करीब 20 बार बोलने से रोका गया।

    वहीं संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि ओम बिरला पूरी निष्पक्षता के साथ सदन का संचालन करते हैं। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि विपक्ष के कुछ सांसद पहले स्पीकर के चैंबर में घुस गए थे और यदि जरूरत पड़ी तो इस घटना का सीसीटीवी फुटेज भी सार्वजनिक किया जा सकता है।

    बहस के दौरान कांग्रेस नेता K. C. Venugopal ने भी सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि सरकार देश की संस्थाओं का गलत इस्तेमाल कर रही है। उन्होंने सवाल उठाया कि प्रधानमंत्री इस महत्वपूर्ण बहस के दौरान सदन में मौजूद क्यों नहीं हैं।

    स्पीकर के खिलाफ लाए गए इस अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में लंबी बहस जारी है और माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में यह मुद्दा और अधिक राजनीतिक गर्मी पैदा कर सकता है।

    कीवर्ड: राहुल गांधी, ओम बिरला, लोकसभा अविश्वास प्रस्ताव, रविशंकर प्रसाद, संसद बहस, नरेंद्र मोदी

  • ऑयल संकट: पहाड़ की गुफाओं से बना टैंकर, बुरे से बुरे वक्त के लिए है तैयारी, जानें भारत ने कहां छिपाया तेल भंडार?

    ऑयल संकट: पहाड़ की गुफाओं से बना टैंकर, बुरे से बुरे वक्त के लिए है तैयारी, जानें भारत ने कहां छिपाया तेल भंडार?


    नई दिल्‍ली। मिडिल ईस्ट में ईरान युद्ध और स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज जैसे अहम समुद्री रास्तों पर खतरे की खबरों के बीच पूरी दुनिया की नजर तेल सप्लाई पर टिक गई है. ऐसे में भारत को लेकर भी एक बड़ा सवाल उठ रहा है कि अगर वैश्विक सप्लाई अचानक रुक जाए तो देश कितने दिनों तक अपने भंडार के भरोसे चल सकता है. बहुत कम लोगों को पता है कि भारत ने इस तरह की आपात स्थिति के लिए बेहद खास इंतजाम कर रखे हैं.
    देश ने पहाड़ों की मजबूत चट्टानों के भीतर विशाल गुफाओं जैसी संरचनाओं में कच्चे तेल का भंडार छिपाकर रखा है. ये गुफाएं दरअसल भारत के स्ट्रैटेजिक पेट्रोलियम रिजर्व हैं. इन्हें युद्ध, आपदा या वैश्विक सप्लाई रुकने जैसी स्थिति में इस्तेमाल करने के लिए बनाया गया है.
    दरअसल इस पूरी योजना की शुरुआत अचानक नहीं हुई थी. इसकी कहानी 1991 के उस आर्थिक संकट से जुड़ी है जब गल्फ वॉर के दौरान भारत के सामने गंभीर ऊर्जा संकट खड़ा हो गया था. उस समय ऐसी खबरें सामने आई थीं कि देश के पास तेल का स्टॉक बेहद सीमित रह गया था. कुछ रिपोर्टों में कहा गया कि भारत के पास सिर्फ तीन दिनों का तेल बचा था, जबकि कुछ में इसे एक सप्ताह या दस दिन बताया गया. असल समस्या यह थी कि तेल खरीदने के लिए विदेशी मुद्रा भंडार तेजी से खत्म हो रहा था. उस संकट ने भारत को यह सोचने पर मजबूर कर दिया कि भविष्य में ऐसी स्थिति से बचने के लिए ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करना जरूरी है.
    1991 के समय भारत के पास जो तेल स्टॉक था वह असल में तेल कंपनियों का कमर्शियल भंडार था. यानी वह रोजमर्रा की सप्लाई के लिए रखा जाता था. सरकार के पास अलग से ऐसा कोई रणनीतिक भंडार नहीं था जिसे सिर्फ आपात स्थिति में इस्तेमाल किया जा सके. हालांकि उस समय भी तेल कंपनियां सरकारी नियंत्रण में ही थीं, लेकिन फिर भी संकट के समय अलग से सुरक्षित रिजर्व होना जरूरी समझा गया.
    दुनिया के कई बड़े देशों ने पहले से ही अपने स्ट्रैटेजिक पेट्रोलियम रिजर्व (SPR) बना रखे थे. इनका मकसद यही होता है कि अगर युद्ध, वैश्विक संकट या प्राकृतिक आपदा की वजह से तेल सप्लाई रुक जाए तो देश कुछ समय तक अपने भंडार के सहारे चल सके. इसे ऐसे समझा जा सकता है जैसे पुराने स्कूटरों में पेट्रोल टैंक में एक रिजर्व सिस्टम होता था. जब टैंक का पेट्रोल खत्म हो जाता था तो रिजर्व खोलकर नजदीकी पेट्रोल पंप तक पहुंचा जा सकता था. उसी तरह यह सरकारी रिजर्व होता है जिसे सिर्फ संकट की स्थिति में ही खोला जाता है.
    तेल कंपनियों के कमर्शियल भंडार आम तौर पर बड़े-बड़े तेल टैंकों या डिपो में रखे जाते हैं. लेकिन रणनीतिक भंडार के लिए ऐसी जगह चाहिए होती है जहां युद्ध या हमले का असर कम से कम हो.
    अगर कोई दुश्मन देश तेल डिपो को निशाना बना दे या किसी आपदा में डिपो नष्ट हो जाए तो संकट और बढ़ सकता है. इसलिए तय किया गया कि रणनीतिक भंडार जमीन के ऊपर नहीं बल्कि चट्टानों के भीतर बनाए जाएं.
    इसके लिए कई भौगोलिक मानकों पर विचार किया गया. पहली शर्त थी कि वहां मजबूत चट्टानें हों, जिनमें बड़ी गुफाएं बनाई जा सकें. दूसरी शर्त यह थी कि उन चट्टानों से तेल रिसना नहीं चाहिए. तीसरी शर्त थी कि उस इलाके में भूकंप का खतरा कम हो. चौथी शर्त यह थी कि समुद्री बंदरगाह पास हो, ताकि जहाजों से तेल आसानी से लाया जा सके. और पांचवीं शर्त यह थी कि रिफाइनरी भी ज्यादा दूर न हो, ताकि पाइपलाइन से तेल पहुंचाया जा सके
  • ईरान की जेल से रिहा हुए गाजियाबाद के मर्चेंट नेवी इंजीनियर केतन मेहता

    ईरान की जेल से रिहा हुए गाजियाबाद के मर्चेंट नेवी इंजीनियर केतन मेहता

    तेहरान। मर्चेंट नेवी इंजीनियर केतन मेहता को 57 दिन बाद ईरान की जेल से रिहा किया गया। फिलहाल वह भारतीय दूतावास की निगरानी में हैं और हालात सामान्य होने पर भारत लौटेंगे।
    मर्चेंट नेवी केतन मेहता खबर
    गाजियाबाद: ईरान और अमेरिका-इजराइल के बीच बढ़ते तनाव के बीच शहर के लिए खुशखबरी आई है। डीएलएफ कॉलोनी में रहने वाले मर्चेंट नेवी इंजीनियर केतन मेहता को 57 दिन बाद ईरान की जेल से रिहा कर दिया गया।

    केतन फिलहाल ईरान में ही भारतीय दूतावास की निगरानी में एक होटल में रह रहे हैं। स्थिति सामान्य होने पर उन्हें भारत लाया जाएगा।

    उनके घर पर परिवार में जश्न का माहौल है।
    गिरफ्तारी का सिलसिला
    केतन मेहता को 6 जनवरी 2026 को ईरान के बंदर अब्बास पोर्ट पर ईरानी कोस्ट गार्ड ने गिरफ्तार कर लिया था। तब से वह तेहरान की जेल में बंद थे। उनके पिता मुकेश मेहता ने विदेश मंत्रालय और प्रधानमंत्री से उनके सुरक्षित भारत लाने की मदद की गुहार लगाई थी।

    केतन दुबई की तेल कंपनी में थर्ड इंजीनियर के पद पर कार्यरत हैं। उन्होंने जून 2025 में मरीन इंजीनियर के रूप में कंपनी जॉइन की थी। इस कंपनी के जहाज ईरान से तेल लाने का कार्य करते हैं।

    परिवार से संपर्क और राहत की खबर
    भारतीय दूतावास के सहयोग से केतन मेहता को जेल से ही अपने परिवार से बात करने की अनुमति मिली थी।

    इस प्रक्रिया के जरिए मुकेश मेहता अक्सर अपने बेटे से संपर्क बनाए रखते थे।

    मुकेश मेहता ने बताया कि 31 दिसंबर को आखिरी बार फोन पर बात हुई थी। केतन ने कहा था कि तीन-चार दिन में वह दुबई लौटेंगे, लेकिन उसके बाद उसका फोन नहीं लगा। 16 जनवरी को पता चला कि उनके बेटे को ईरान कोस्ट गार्ड्स ने गिरफ्तार कर लिया है।

    होली पर मिली खुशी
    अब 4 मार्च, यानी होली वाले दिन फोन की घंटी बजी और बेटे की आवाज आई, पापा मैं छूट गया हूं। इस खबर ने परिवार को बहुत भावुक कर दिया। भारत सरकार की एंबेसी ने कोर्ट में पैरवी कर उन्हें रिहा कराया। केतन को फिलहाल एक होटल में दूतावास की निगरानी में रखा गया है। भारत लौटने के लिए सभी पेपर्स तैयार किए जा रहे हैं और जैसे ही फ्लाइट्स शुरू होंगी, केतन अपने देश लौट जाएंगे।

  • गोरखपुर में कपड़े की दुकान में भीषण आग, कार और दो बाइक भी जली

    गोरखपुर में कपड़े की दुकान में भीषण आग, कार और दो बाइक भी जली

    गोरखपुर। शहर के रायगंज गोरखपुर इलाके में मंगलवार शाम एक कपड़े की दुकान में भीषण आग लगने से अफरा-तफरी मच गई। आग इतनी तेजी से फैली कि दुकान के साथ-साथ गोदाम और पास में खड़ी एक कार व दो बाइक भी उसकी चपेट में आ गईं। करीब तीन घंटे की मशक्कत के बाद दमकल टीम ने आग पर काबू पाया।
    राहत की बात यह रही कि इस हादसे में कोई जनहानि नहीं हुई।

    शॉर्ट सर्किट से आग लगने की आशंका

    घटना Kotwali Police Station, Gorakhpur क्षेत्र के घनी आबादी वाले रायगंज इलाके की है। यहां अमित गुप्ता की निष्ठा ट्रेडर्स नाम से कपड़े की दुकान है, जहां चुनरी, चादर और कपड़ों का थोक कारोबार होता है। बताया जा रहा है कि शाम करीब सात बजे दुकान में अचानक शॉर्ट सर्किट हुआ और आग लग गई।

    कुछ ही देर में आग दुकान से सटे गोदाम तक फैल गई। लपटें बढ़ने से गलियारे में खड़ी एक कार और दो मोटरसाइकिल भी जलने लगीं।

    परिवार को सुरक्षित बाहर निकाला गया

    दुकान के ऊपर परिवार रहता था। आग लगते ही लोगों ने तुरंत परिवार के सदस्यों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया। देखते ही देखते आसपास के लोग मौके पर जुट गए और इलाके में अफरा-तफरी मच गई।

    दमकल की 10 गाड़ियों ने पाया काबू

    सूचना मिलते ही फायर ब्रिगेड की टीम मौके पर पहुंची। करीब 10 दमकल गाड़ियों की मदद से आग बुझाने का अभियान शुरू किया गया। मकान में सीढ़ियों और छत पर भी कपड़ा रखा होने की वजह से आग तेजी से फैलती चली गई।

    करीब तीन घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद रात करीब 10 बजे आग पर काबू पा लिया गया।

    अधिकारी भी पहुंचे मौके पर

    घटना की सूचना मिलते ही Deepak Meena (डीएम) और Dr. Kaustubh (एसएसपी) भी मौके पर पहुंचे और हालात का जायजा लिया।

    मुख्य अग्निशमन अधिकारी Santosh Rai ने बताया कि सूचना मिलते ही दमकल की गाड़ियां तुरंत भेजी गई थीं। आग अंदर तक फैल चुकी थी, लेकिन टीम ने कड़ी मशक्कत के बाद उस पर काबू पा लिया।

    प्रारंभिक जांच में आग लगने की वजह शॉर्ट सर्किट मानी जा रही है। नुकसान का आकलन किया जा रहा है।